Thursday, February 5, 2026

बेइंतहा रंज व ग़म की खबर: मोहम्मद रफ़ीक़ साहब (सराये वाले) का इंतक़ालअल्लाह मरहूम को जन्नत-उल-फ़िरदौस अता फरमाए, आमीन 🤲

बेहद अफ़सोस और दिली सदमे के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि मोहम्मद रफ़ीक़ साहब क़स्बा सराये वाले, जो हाल मुक़ाम गुड़गांव में रह रहे थे, आज दिन जुमेरात, 05 फ़रवरी 2026 को कुछ ही देर पहले क़ज़ा-ए-ईलाही से इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत फरमा गए।

यह खबर सुनते ही अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और पूरी बिरादरी में शोक की लहर दौड़ गई।

मरहूम एक नेकदिल, शरीफ़ और सादगी पसंद इंसान थे। उनके अचानक इंतक़ाल से जो ख़ला पैदा हुआ है, उसे भर पाना मुश्किल है।
मरहूम हाजी क़य्यूम सराये वाले के बड़े भाई थे। अल्लाह तआला अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।

🕊️ जनाज़े की जानकारी

मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा
📅 दिन: जुमाआ, 06 फ़रवरी 2026
वक़्त: सुबह 10:30 बजे

नमाज़ के बाद मरहूम को
📍 कब्रिस्तान: अमीनगर सराये, ज़िला बागपत (उत्तर प्रदेश)
में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फरमा कर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें।


📢 एक ज़रूरी और अहम अपील (इंतक़ाल की खबर भेजने से पहले)

अक्सर देखा जाता है कि अधूरी या देर से पहुंची जानकारी की वजह से लोग जनाज़े तक नहीं पहुंच पाते। इस परेशानी को खत्म करने के लिए राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से अदब के साथ गुज़ारिश करती है कि इंतेकाल की खबर भेजते वक़्त नीचे दी गई जानकारियां ज़रूर शामिल करें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम
2️⃣ पूरा पता (मूल निवास और मौजूदा निवास)
3️⃣ दफ़ीने का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स के 1-2 फ़ोन नंबर
5️⃣ अगर मर्द का इंतेकाल हुआ हो तो मरहूम की फोटो
6️⃣ इंतेकाल की वजह (अगर मुनासिब हो)
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम (भाई, बहन, वालिदैन, औलाद आदि)

👉 इन मालूमात से खबर मुकम्मल होगी और बिरादरी को सही वक़्त पर सही जानकारी मिल सकेगी।


📰 डिस्क्लेमर

पत्रिका में प्रकाशित सभी लेख, समाचार, विचार, प्रेस विज्ञप्ति या विज्ञापन संबंधित लेखक, संवाददाता या विज्ञापनदाता के निजी विचार हैं।
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किसी भी विवाद की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) दिल्ली रहेगा।


🤲 दुआ

“ऐ अल्लाह! मरहूम मोहम्मद रफ़ीक़ साहब की मग़फ़िरत फरमा,
उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे,
और उनके अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमा।”

आमीन या रब्बुल आलमीन 🤲


✍️ ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट
📰 मुल्तानी समाज
📞 8010884848
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✉️ multanisamaj@gmail.com

📌 ज़्यादा जानकारी के लिए संपर्क करें:
हाजी क़य्यूम सराये वाले
📱 9810191408

😭🤲

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