Sunday, February 1, 2026

अपने बुज़ुर्गों को भुला देना ज़वाल है, उन्हें याद रखना दीन है — “मुल्तानी घराना” दीन-ए-इस्लाम की रौशनी में एक नेक क़दम

इस्लाम हमें यह तालीम देता है कि

“जिसने अपने अस्ल को पहचाना, उसने अपने रब को पहचाना।”

आज अफ़सोस के साथ कहना पड़ता है कि हम रोज़ आगे तो बढ़ रहे हैं,
मगर अपने पीछे छूटे बुज़ुर्गों को भूलते जा रहे हैं।
वो दादा, दादी, नाना, नानी…
जिनकी दुआओं से हमारी ज़िंदगियाँ आबाद हैं,
जिनकी मेहनत और कुर्बानियों से हमारी पहचान बाक़ी है।

इस्लाम सिर्फ़ नमाज़, रोज़ा और इबादत का नाम नहीं —
इस्लाम नसब की हिफ़ाज़त, रिश्तों को ज़िंदा रखने
और अपनी नस्लों को पहचान देने का नाम भी है।


इसी दीन की रौशनी में, इसी एहसास के साथ
पैदाइशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार–बढ़ई बिरादरी की
देश की सबसे बड़ी और ख़िदमतगुज़ार तंजीम
“मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट” (रजिस्टर्ड ऑल इंडिया)
एक ऐसा काम शुरू करने जा रही है
जो न सिर्फ़ क़ाबिले-फ़ख़्र है
बल्कि क़ाबिले-सवाब भी है।

SIR (Social Information Register) — “मुल्तानी घराना”

यह सिर्फ़ एक रिकॉर्ड नहीं,
यह हमारी नस्लों की अमानत है।

“मुल्तानी घराना” दरअसल हमारी बिरादरी का
मुकम्मल शिजरा-ए-नसब (Family Tree) है —
जिसके ज़रिए हम अपने पर-परदादा, पर-परदादी, परदादा, परदादी,
परनाना, परनानी
और तमाम बुज़ुर्गों को
फिर से ज़िंदा कर रहे हैं —
कम से कम यादों में, दुआओं में और इतिहास में।

इस्लाम क्या चाहता है हमसे ?

इस्लाम चाहता है कि:

  • हम अपने बुज़ुर्गों को भूलें नहीं
  • उनकी पहचान मिटने न दें
  • और आने वाली नस्लों को यह बता सकें
    कि तुम किस खानदान से हो, तुम्हारा अस्ल क्या है

आज अगर हमने अपने बुज़ुर्गों के फ़ोटो, नाम और रिश्ते
महफूज़ नहीं किए,
तो कल हमारी आने वाली नस्लें
सिर्फ़ नाम की मुसलमान होंगी —
नसब की पहचान से महरूम।

आपकी ज़िम्मेदारी — एक दीनि अमानत

आज आपसे गुज़ारिश है,
बल्कि दीन के वास्ते अपील है कि:

  • अपने तमाम बुज़ुर्गों के फ़ोटो
  • चाहे वे इस दुनिया में हों या अल्लाह को प्यारे हो चुके हों
  • अपनी पूरी फैमिली, कुनबा, खानदान और रिश्तेदारों
    के नाम और रिश्तों की मुकम्मल लिस्ट

आज ही तैयार कर लें।

क्योंकि बहुत जल्द
“मुल्तानी घराना” की टीम
आपके दरवाज़े पर दस्तक देने वाली है।

उस वक़्त अगर आपने तैयारी कर रखी होगी,
तो समझिए आपने:

  • अपने बुज़ुर्गों का हक़ अदा किया
  • अपनी नस्लों को पहचान दी
  • और एक नेक काम में शरीक होकर
    सवाब का ज़खीरा जमा किया।

यह काम एक इंसान का नहीं — पूरी उम्मत का है

यह सिर्फ़ ट्रस्ट का मिशन नहीं,
यह पूरी मुल्तानी बिरादरी की
दीनि और अख़लाक़ी ज़िम्मेदारी है।

और यक़ीन जानिए —
अल्लाह उस कौम को कभी ज़वाल नहीं देता
जो अपनी जड़ों से जुड़ी रहती है।

तो आइए,
दीन के नाम पर,
इस्लाम की तालीम के नाम पर,
अपने बुज़ुर्गों की याद और पहचान को
हमेशा के लिए महफूज़ कर लें।

“मुल्तानी घराना” — नस्लों की पहचान, दुआओं की अमानत


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित
पैदाइशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार–बढ़ई बिरादरी को समर्पित
देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए

ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट

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🕊️ बिरादरी में ग़म की लहर: एक नौजवान व बुज़ुर्ग की जुदाई, हर आंख नम 🕊️


निहायत ही दुःख और अफ़सोस के साथ तमाम बिरादराना हजरात को यह इत्तिला दी जाती है कि बीती रात दिन इतवार, बा-तारीख़ 01 फ़रवरी 2026 को तक़रीबन 11:45 बजे जनाब मोहम्मद सूफियान के लख़्त-ए-जिगर मोहम्मद जुनैद का क़ज़ा-ए-ईलाही से इंतिक़ाल हो गया। मरहूम की उम्र तक़रीबन 26 वर्ष थी।

यह दुखद खबर सुनते ही पूरे इलाके और बिरादरी में शोक की लहर दौड़ गई। कम उम्र में इस तरह की जुदाई ने हर दिल को ग़मज़दा कर दिया है।

मरहूम का पता:
गांव मलकपुर वाले, गुराना रोड, निकट डॉक्टर पाण्डेय, बड़ौत, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश।

अल्लाह तआला मरहूम को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फरमाए और तमाम अहल-ए-ख़ाना को इस सदमे को बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ और सब्र अता फरमाए। आमीन।

नोट: मय्यत से मुताल्लिक़ किसी भी प्रकार की अतिरिक्त जानकारी के लिए
सुभान मेडिकल स्टोर, मोहम्मद रिज़वान साहब
मोबाइल नंबर: 9457567860
पर राब्ता किया जा सकता है।


🕯️ इंतेकाल की दूसरी दुःखद ख़बर 🕯️

इसी सिलसिले में एक और बेहद रंजो-ग़म भरी खबर हमें मिली है कि जनाब अब्दुल ग़फ्फ़ार साहब, निवासी गांव ( शिकोहपुर/नांदनौर वाले ) गौरीपुर जिला बागपत उप्र  का आज बरोज पीर, बा-तारीख़ 02 फ़रवरी 2026, सुबह तक़रीबन 3:30 बजे,क़ज़ा-ए-ईलाही से इंतिक़ाल हो गया है। मरहूम की उम्र तक़रीबन 80 साल बताई जा रही है।

मरहूम को 
गौरीपुर निवाड़ा, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश में दफ़नाया जाएगा।
मय्यत को बाद नमाज़-ए-ज़ोहर सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम बिरादराना हजरात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर सवाब-ए-दारेन हासिल करें।
अल्लाह तआला मरहूम की मग़फिरत फरमाए और उनके घर वालों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।


📢 एक ज़रूरी ऐलान – इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर देखने में आता है कि इंतेकाल की खबर देर से या अधूरी जानकारी के साथ पहुंचती है, जिसकी वजह से बिरादरी के लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से दरख़्वास्त करती है कि जब भी किसी अज़ीज़ के इंतिक़ाल की खबर भेजें तो इन बातों का ख़ास तौर पर ख़याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता (स्थायी व वर्तमान निवास)।
3️⃣ दफ़ीन का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स के एक या दो मोबाइल नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतिक़ाल हुआ हो तो मरहूम की फोटो।
6️⃣ इंतिक़ाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ घर के बाक़ी अहल-ए-ख़ाना के नाम (माता-पिता, भाई-बहन, औलाद आदि)।

👉 इन तमाम जानकारियों से खबर मुकम्मल होती है और बिरादरी तक सही और वक़्त पर सूचना पहुंच पाती है।


📰 डिस्क्लेमर (Disclaimer)

पत्रिका में प्रकाशित किसी भी प्रकार का लेख, समाचार, विचार, टिप्पणी, विज्ञापन या अन्य सामग्री संबंधित लेखक, संवाददाता या विज्ञापनदाता के निजी विचार हैं।
इनसे पत्रिका के संपादक, प्रकाशक या प्रबंधन की सहमति आवश्यक रूप से अभिप्रेत नहीं है।

प्रकाशित सामग्री की सत्यता और दावों की ज़िम्मेदारी लेखक या विज्ञापनदाता की स्वयं की होगी।
किसी भी विवाद या न्यायिक कार्यवाही की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।


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ख़िदमत-ए-ख़ल्क की मिसाल: खतौली व सरधना में क़ुरआन-ए-मजीद और जानमाज़ तक़सीम का मुबारक प्रोग्राम

खतौली / सरधना (उत्तर प्रदेश)। 
निहायत अदब और एहतराम के साथ अहले-बिरादरान को इत्तिला दी जाती है कि कल बा-तारीख़ 2 फ़रवरी 2026, बरोज़ पीर, को कस्बा खतौली, ज़िला मुज़फ्फरनगर (उ.प्र.) में ख़िदमत-ए-ख़ल्क का एक ख़ैर-ओ-बरकत से भरपूर और नेक नियत पर आधारित प्रोग्राम मुनअक़िद किया जा रहा है।

इस मुबारक मुहिम के तहत, इंशाअल्लाह खतौली एवं सरधना, ज़िला मेरठ (उ.प्र.) में ज़रूरतमंद और मुस्तहिक़ अफ़राद के दरमियान क़ुरआन-ए-मजीद और जानमाज़ की तक़सीम अमल में लाई जाएगी। यह नेक क़दम समाज में दीनी बेदारी, आपसी मोहब्बत और इंसानियत की ख़िदमत का एक बेहतरीन नमूना है।

इस पाक और ख़ैराती काम में बिरादरी के कई जज़्बाती, हमदर्द और ख़ैर-ख़्वाह अफ़राद बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। इनमें
दिल्ली से हाजी सगीर साहब,
खतौली से हाजी नसीम साहब, मिर्ज़ा नौशाद साहब, जमीरउद्दीन साहब,
बुढ़ाना से यासमीन बाजी,
कुशवली से भाई मूसा अफ़ज़ल मिर्ज़ा व कामिल साहब,
सरधना से
शाहनवाज़ मिर्ज़ा,
और शामली से रेशमा ज़मीर (अहलिया ज़मीर आलम) — मुल्तानी घराना डॉट कॉम के फ़ाउंडर — अपनी क़ीमती ख़िदमात पेश कर रहे हैं।

कार्यक्रम के आयोजकों ने तमाम अहले-ख़ैर हज़रात से अपील की है कि जो भी इस नेक मुहिम में शरीक होकर सवाब-ए-दारेन हासिल करना चाहते हों, वे मिर्ज़ा नौशाद साहब (फलावदा वाले) या अफ़ज़ल मिर्ज़ा (कुशवली वाले), हाल बाशिंदे खतौली से राब्ता क़ायम फ़रमाएँ।

दुआ है कि अल्लाह तआला इस ख़िदमत-ए-ख़ल्क को अपने बारगाह में क़ुबूल फ़रमाए, इस नेक कोशिश को जारी रखने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए और इसे समाज के लिए रहनुमाई का ज़रिया बनाए—आमीन।


✍️ खास रिपोर्ट:
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देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित,
पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार–बढ़ई बिरादरी को समर्पित
देश की एकमात्र पत्रिका के लिए
खतौली / सरधना से:
शाहनवाज़ मिर्ज़ा एवं अफ़ज़ल मिर्ज़ा

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Saturday, January 31, 2026

🕊️ रूह कंपा देने वाली जुदाई — जनाब मोहसिन साहब का इंतकाल, एक पूरा दौर ख़ामोशी से विदा हो गया

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और गहरे अफ़सोस के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तला दी जाती है कि आज दिन इतवार, बा-तारीख़ 01 फ़रवरी 2026 को गांव ताना, जिला शामली (उत्तर प्रदेश) के बुज़ुर्ग, शरीफ़ और नेकदिल इंसान जनाब मोहसिन साहब (उम्र 87 वर्ष) वल्द जनाब नसीबुद्दीन साहब (मरहूम) का बीती रात तक़रीबन 2 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया।

इस दुखद ख़बर ने न सिर्फ़ उनके ख़ानदान बल्कि पूरे इलाके और बिरादरी को ग़मगीन कर दिया है।

मरहूम मोहसिन साहब एक सादा-मिज़ाज, सब्र-ओ-शुक्र वाले और ख़ानदानी रिवायतों को निभाने वाले बुज़ुर्ग थे। अल्लाह ने उन्हें लंबी उम्र अता फ़रमाई, मगर ज़िंदगी के इस सफ़र में उन्होंने एक-एक कर अपने क़रीबी अज़ीज़ों को खोने का ग़म भी झेला।
मरहूम के तीन भाई और एक बहन थे —
शरीफ़ अहमद (मरहूम), डॉक्टर अशरफ़ (मरहूम) और बहन कनीज़ बी मरहूमा (नानौता)
उनकी अहलिया का भी काफ़ी अरसा पहले इंतेकाल हो चुका था।

दर्दनाक पहलू यह भी है कि मरहूम के दोनों बेटे
मोहम्मद साजिद (मरहूम) और मोहम्मद राशिद (मरहूम) — पहले ही इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत हो चुके थे।
आज मरहूम अपने पीछे पोते-पोतियाँ, नाते-नातिनें, और एक भरा-पूरा कुनबा, ख़ानदान और तमाम अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को ग़म और यादों के साए में छोड़कर हमेशा-हमेशा के लिए विदा हो गए।

📿 दुआ है कि अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनके दर्जात बुलंद करे, क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए और तमाम पसमांदा अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।

🕯️ तदफ़ीन की इत्तला:
मरहूम की मय्यत को गांव बुन्दुगढ़ (नानौता), जिला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश में सपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।
तमाम हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएँ और सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

📞 नोट:
मय्यत के सिलसिले में किसी भी तरह की और ज़्यादा मालूमात के लिए मरहूम के भतीजे जनाब आफ़ताब साहब से इस नंबर पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है:
📱 8954654370


🛑 एक ज़रूरी ऐलान — इंतेकाल की ख़बर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर देखने में आता है कि इंतेकाल की ख़बर या तो देर से पहुँचती है या अधूरी जानकारी की वजह से लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस अहम कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से दरख़्वास्त करती है कि इंतेकाल की ख़बर भेजते वक़्त इन बातों का ख़ास ख़याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता — स्थायी निवास और मौजूदा ठिकाना।
3️⃣ तदफ़ीन का सही वक़्त और क़ब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स (एक या दो) के मोबाइल नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतेकाल हुआ हो तो मरहूम की फोटो (मुमकिन हो तो)।
6️⃣ इंतेकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब समझें)।
7️⃣ घर के बाक़ी अहल-ए-ख़ाना — भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वग़ैरह।

👉 इन तमाम जानकारियों से ख़बर मुकम्मल होती है और बिरादरी तक सही, साफ़ और वक़्त पर इत्तला पहुँचती है।


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🕊️ अल्लाह मरहूम को जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए। आमीन।

🌙 मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट, शामली जिला चेयरमैन की सास अम्मा का इंतिक़ाल झिंझाना से ग़मगीन ख़बर, बिरादरी में शोक की लहर

निहायत ही अफ़सोस और रंजो-ग़म के साथ आप सभी बिरादराना हज़रात को इत्तिला दी जाती है कि

आज दिन इतवार, बा-तारीख़ 01 फ़रवरी 2026 को क़स्बा झिंझाना, जिला शामली (उत्तर प्रदेश) में
हज्जन रईसा बी, अहलिया मरहूम हाजी यासीन साहब (ताने वाले), हाल बाशिंदा बस स्टैंड झिंझाना, का
बाद नमाज़-ए-फ़जर क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

मरहूमा के शौहर हाजी यासीन साहब का इंतिक़ाल कई वर्ष पूर्व हो चुका है।
मरहूमा एक नेकसीरत, सब्र-ओ-तहम्मुल और सादगी की मिसाल थीं।

👨‍👩‍👧‍👦 अहल-ए-ख़ाना

मरहूमा के तीन बेटे—

  • जनाब नूर मोहम्मद साहब (मरहूम)
  • जनाब अमीर अहमद साहब (मरहूम)
  • जनाब हुसैन अहमद साहब

तथा चार बेटियाँ—

  • परवीन बी, अहलिया हाजी शकील अहमद साहब (जिला चेयरमैन, मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट – शामली), नया गाँव
  • सितारा बी, अहलिया हाजी वकील अहमद साहब (नया गाँव)
  • सायना बी, अहलिया जनाब निसार साहब (थानाभवन)
  • रुक़साना बी, अहलिया जनाब अरशद अली (गढ़ी पुख़्ता)

मरहूमा अपने पीछे पोते-पोतियाँ, नाते-नातिनों सहित भरा-पूरा कुनबा, ख़ानदान, रिश्तेदार और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को छोड़कर इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत हो गईं।

🕋 जनाज़ा व दफन

मय्यत को ठीक 4 बजे शाम को घर से इमाम साहब वाली मस्जिद में ले जाया जाएगा बाद नमाज़-ए-असर इमाम साहब स्थित कब्रिस्तान में सपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। लिहाज़ा आप हजरात भी जनाजे में शरीक होकर सवाबे दारेन हासिल करें। 
तमाम अहबाब से दुआओं की ख़ास दरख़्वास्त है।

🤲 दुआ

अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फ़िरत फरमाए, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला से आला मुक़ाम अता फरमाए
और तमाम पसमांदगान, ख़ास तौर पर हाजी शकील अहमद साहब व उनके अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।


📌 ज़रूरी नोट

मरहूमा से मुतअल्लिक़ किसी भी क़िस्म की अतिरिक्त मालूमात के लिए
दामाद जनाब अरशद साहब से इस नंबर पर राब्ता किया जा सकता है:
📞 9719838341



दीन से जुड़ी पहचान, डिजिटल दौर की विरासत: ‘मुल्तानी घराना’ — हमारी नस्लों की ज़िंदा तारीख़

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम ! पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार–बढ़ई बिरादरी की पहचान, रिश्तों और नस्लों की हिफ़ाज़त के लिए देश की सबसे बड़ी और ऑल इंडिया काम करने वाली इकलौती तंजीम (रजिस्टर्ड ऑल इंडिया – MSCT) एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी क़दम के साथ सामने आई है—

“मुल्तानी घराना” फैमिली ट्री सॉफ्टवेयर

यह वज़ाहत बेहद ज़रूरी है कि हम किसी से कोई डेटा नहीं माँग रहे; बल्कि अपनी बिरादरी के तमाम बुज़ुर्गों, नौजवानों, माँओं, बहनों और बेटियों से मोहब्बत और एहतराम के साथ यह रिक्वेस्ट कर रहे हैं कि वे अपनी मर्ज़ी और सहमति से अपनी फैमिली की जानकारी “मुल्तानी घराना” पर अपलोड करें—ताकि हमारी बिरादरी का शजरा-ए-नसब एक मुकम्मल, सहेजा हुआ और ज़िंदा दस्तावेज़ बन सके।

क्यों ज़रूरी है ‘मुल्तानी घराना’—आज के नौजवानों के लिए, आने वाली नस्लों के लिए

डिजिटल दौर में पहचान वही टिकती है, जो सहेजी जाती है। फैमिली ट्री सिर्फ़ नामों की सूची नहीं, बल्कि हमारी विरासत, हुनर और रिश्तों की कहानी है—जो पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती है।

इसके बड़े फ़ायदे—जो भविष्य की दिशा तय करेंगे:

  • असल पहचान और नस्ल हमेशा के लिए महफूज़
  • बिछड़े रिश्तों की दोबारा पहचान और जोड़
  • बच्चों और नौजवानों को अपनी तारीख़, विरासत और हुनर से वाक़िफ़ी
  • देश–विदेश में फैली बिरादरी की मज़बूत डिजिटल मौजूदगी
  • तालीमी, समाजी और तरक़्क़ी योजनाओं के लिए ठोस आधार
  • आने वाली पीढ़ियों के लिए गौरव और आत्मसम्मान की सौग़ात

दीन की रोशनी में डिजिटल अमानत

दीन-ए-इस्लाम हमें रिश्ते जोड़ने, नसब की हिफ़ाज़त करने और अमानत निभाने की तालीम देता है। “मुल्तानी घराना” इसी सोच के साथ तैयार किया गया है। यह सॉफ्टवेयर अब पूरी तरह मुकम्मल हो चुका है और इस वक़्त ट्रायल मोड में चल रहा है। इंशाअल्लाह, बहुत जल्द इसे पूरी बिरादरी के लिए ओपन कर दिया जाएगा।

आज उठाया गया क़दम—कल हमारी पहचान बनेगा।
आज जो जानकारी सहेजी जाएगी—वही कल हमारी नस्लों का सहारा बनेगी।

आइए, मिलकर अपने रिश्तों को नाम दें,
अपने घरानों को पहचान दें,
और “मुल्तानी घराना” को सिर्फ़ एक सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि बिरादरी की ज़िंदा तारीख़ बना दें।

अल्लाह इस नेक मिशन को क़बूल फरमाए और पूरी बिरादरी को इससे फायदा पहुँचाए।
आमीन 🤲


ख़ास रिपोर्ट:
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मुल्तानी घराना: डिजिटल क्रांति के ज़रिये नस्ल, पहचान और विरासत को सहेजने की ऐतिहासिक पहल

आज के इस तेज़ रफ्तार डिजिटल दौर में, जहाँ हमारी नई पीढ़ी मोबाइल और सोशल मीडिया की दुनिया तक सिमटती जा रही है, वहीं दूसरी ओर हमारे खानदान, नस्ल और रिश्तों की असली पहचान धीरे-धीरे धुंधली होती जा रही है।

ऐसे समय में पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी की देश की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी तंजीम
“मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट (रजिस्टर्ड ऑल इंडिया)” — जिसे शॉर्ट में MSCT भी कहा जाता है —
ने बिरादरी के लिए एक ऐतिहासिक डिजिटल क्रांति की शुरुआत की है।

इसी दूरदर्शी सोच का परिणाम है —

“मुल्तानी घराना” फैमिली ट्री वेबसाइट

जो नस्ल, पहचान और विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने की एक मजबूत और अनोखी पहल है।


फैमिली ट्री आखिर है क्या?

फैमिली ट्री महज़ नामों की एक सूची नहीं, बल्कि
👉 हमारे बुज़ुर्गों की पहचान,
👉 रिश्तों की सही और प्रामाणिक कड़ियाँ,
👉 और आने वाली नस्लों के लिए नसब का अमिट रिकॉर्ड होता है।

जिस तरह किसी पेड़ की जड़ मज़बूत हो तो उसकी डालियाँ और पत्तियाँ हरी-भरी रहती हैं,
उसी तरह जब हमें अपनी जड़ों की सही जानकारी होती है,
तो हमारी सामाजिक और पारिवारिक पहचान भी मज़बूत बनती है।


🏠 मुल्तानी घराना क्यों ज़रूरी है?

जब आप मुल्तानी घराना डॉट कॉम पर अपनी फैमिली की जानकारी दर्ज करते हैं, तो आप:

  • अपनी नसब और खानदान को हमेशा के लिए सुरक्षित करते हैं
  • बिछड़े और दूर के रिश्तेदारों को फिर से जोड़ने में मदद करते हैं
  • नई पीढ़ी को यह एहसास दिलाते हैं कि हम कौन हैं और कहाँ से आए हैं
  • पूरी मुल्तानी बिरादरी को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एकजुट करते हैं

यह वेबसाइट सिर्फ आज के लिए नहीं, बल्कि
👉 आने वाली नस्लों के लिए एक अमानत है।


📲 क्या-क्या जानकारी देनी होती है?

इस प्रक्रिया को बेहद आसान और सरल रखा गया है।
घबराने की कोई ज़रूरत नहीं।

आपको केवल यह जानकारी देनी होती है:

  • परिवार के बुज़ुर्गों का नाम
  • उनके बेटे-बेटियाँ
  • शादियाँ और आगे की पीढ़ियाँ
  • मौजूदा शहर या गांव (यदि चाहें तो)

इतनी-सी जानकारी से आपका पूरा खानदानी पेड़ तैयार हो जाता है।


🤝 आपकी एक एंट्री, पूरी बिरादरी की ताक़त

सोचिए, अगर बिरादरी के हर घर से सिर्फ एक व्यक्ति भी
अपनी फैमिली डिटेल दर्ज कर दे,
तो मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी का
कितना विशाल, मजबूत और ऐतिहासिक रिकॉर्ड तैयार हो सकता है।

यह काम किसी एक व्यक्ति या संस्था का नहीं,
👉 पूरी बिरादरी की सामूहिक ज़िम्मेदारी है।


🕌 दीन और तहज़ीब से जुड़ी सोच

इस्लाम में नसब को जानना, रिश्तों को जोड़ना और
सिलह-ए-रहमी को कायम रखना बेहद अहम माना गया है।
मुल्तानी घराना उसी पाक सोच को
डिजिटल दौर में आगे बढ़ाने की एक ईमानदार कोशिश है—

रिश्तों को जोड़ना, विरासत को बचाना।


✍️ आज ही जुड़िए, कल की नस्लों के लिए

अगर आप चाहते हैं कि:

  • आपकी पहचान वक्त के साथ खो न जाए
  • आपकी आने वाली नस्ल अपने बुज़ुर्गों और खानदान को जाने
  • और मुल्तानी बिरादरी एक मजबूत डिजिटल ताक़त बनकर उभरे

तो आज ही अपनी फैमिली की जानकारी
👉 मुल्तानी घराना डॉट कॉम पर दर्ज कराइए।

आज की गई छोटी-सी कोशिश,
कल की पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ा तोहफ़ा बन सकती है।


✍️ सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित,
पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को समर्पित
देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए
ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट


📌 संपर्क विवरण
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