बिना मांगे सलाह देने से पहले एक बार जरूर सोचें
ज़िंदगी में अक्सर हम दूसरों की परेशानियों को देखकर उनकी मदद करने के लिए आगे बढ़ जाते हैं। कई बार हमारी नीयत बिल्कुल साफ होती है, हम किसी का भला चाहते हैं, लेकिन हर अच्छे इरादे का नतीजा अच्छा ही निकले, यह जरूरी नहीं होता। यही हकीकत एक दिलचस्प कहानी के जरिए समझी जा सकती है।
एक व्यक्ति के पास एक घोड़ा और एक बकरा था। दोनों जानवर उसके लिए बेहद अज़ीज़ थे। वह उनकी खूब देखभाल करता था और उन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानता था।
एक दिन अचानक घोड़ा गंभीर रूप से बीमार पड़ गया। हालत इतनी खराब हो गई कि वह खड़ा तक नहीं हो पा रहा था। मालिक बहुत परेशान हुआ और उसने तुरंत एक डॉक्टर को बुलाया।
डॉक्टर ने घोड़े का अच्छी तरह मुआयना किया और फिर गंभीर लहजे में कहा,
"घोड़े को खतरनाक बीमारी है। मैं लगातार चार दिन तक इसका इलाज करूंगा। अगर चौथे दिन तक यह अपने पैरों पर खड़ा हो गया तो इसकी जान बच सकती है। लेकिन अगर यह खड़ा नहीं हुआ, तो मजबूरन इसे मारना पड़ेगा।"
यह सुनकर मालिक का दिल बैठ गया। वह अपने प्यारे घोड़े को खोना नहीं चाहता था, लेकिन हालात उसके हाथ में नहीं थे।
डॉक्टर के जाने के बाद पास खड़ा बकरा सारी बातें सुन चुका था। उसने सोचा कि अगर घोड़ा हिम्मत कर ले तो उसकी जान बच सकती है।
अगले दिन जब डॉक्टर आया तो घोड़ा वैसे ही पड़ा रहा। डॉक्टर दवा देकर चला गया। बकरे ने घोड़े को समझाया,
"दोस्त, थोड़ी हिम्मत करो। कोशिश करो खड़े होने की। तुम्हारी जान बच सकती है।"
लेकिन घोड़े ने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया।
दूसरे दिन भी यही हुआ। बकरे ने फिर समझाया, मगर कोई असर नहीं पड़ा।
तीसरे दिन डॉक्टर ने चेतावनी देते हुए कहा,
"अगर कल तक यह नहीं उठा तो फिर इसे बचाना मुश्किल होगा।"
डॉक्टर के जाने के बाद बकरे ने आखिरी बार घोड़े को समझाया,
"जिंदगी अल्लाह की बहुत बड़ी नेमत है। एक बार पूरी ताकत लगाकर कोशिश तो करो। शायद तुम्हारी मेहनत रंग ले आए।"
इस बार घोड़े ने बकरे की बात पर गौर किया। उसने सोचा कि कोशिश करने में क्या नुकसान है।
अगले दिन जैसे ही डॉक्टर घोड़े के पास पहुंचा, घोड़ा अचानक उठ खड़ा हुआ और धीरे-धीरे दौड़ने लगा।
डॉक्टर बेहद खुश हुआ और मालिक से बोला,
"मुबारक हो! आपका घोड़ा अब खतरे से बाहर है।"
मालिक की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने उत्साह में कहा,
"आज तो बहुत बड़ी खुशखबरी मिली है। इस खुशी में आज दावत होगी!"
और फिर उसने बकरे की ओर इशारा करते हुए कहा,
"आज बकरा कटेगा!"
यह सुनकर बकरा अवाक रह गया। जिस घोड़े की जान बचाने के लिए उसने इतनी मेहनत की थी, उसी खुशी का सबसे बड़ा नुकसान उसे खुद उठाना पड़ा।
कहानी का सबक
यह कहानी हमें सिखाती है कि दुनिया में हर काम सोच-समझकर करना चाहिए। दूसरों की मदद करना नेक काम है, लेकिन हर परिस्थिति को समझे बिना बीच में पड़ना कभी-कभी हमारे लिए मुश्किलें भी पैदा कर सकता है।
इस्लाम भी हमें हिकमत (बुद्धिमानी) के साथ काम करने की तालीम देता है। नेक नीयत के साथ-साथ सही समझ और दूरअंदेशी भी जरूरी है। हर सलाह सही समय, सही जगह और सही तरीके से दी जाए, तभी उसका वास्तविक फायदा होता है।
निष्कर्ष
दूसरों की मदद जरूर करें, लेकिन हालात को समझकर। नेक इरादे के साथ हिकमत भी जरूरी है। कई बार जो इंसान दूसरों की भलाई के लिए सबसे ज्यादा कोशिश करता है, वही अनजाने में खुद मुश्किल में पड़ जाता है।
इसलिए जिंदगी का एक अहम उसूल याद रखिए—
"नेकी कीजिए, लेकिन समझदारी और दूरदर्शिता के साथ।"
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज पोर्टल/यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए नई दिल्ली से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की विशेष प्रस्तुति।
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