Wednesday, September 16, 2026

मोहम्मद उस्मान साहब के इंतक़ाल से बिरादराने-मुल्तानी में ग़म की लहर, अहले-ख़ाना से ताज़ियत और सब्र की अपील, इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

नई दिल्ली/यमुना विहार, 17 सितंबर 2026।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिली अफ़सोस के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि आज दिन जुमेरात, बा-तारीख़ 17 सितंबर 2026 को जनाब मोहम्मद उस्मान साहब, वल्द जनाब मोहम्मद अय्यूब साहब मरहूम, मूल निवासी क़स्बा सियाना, ज़िला बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश, हाल निवासी मकान नंबर - सी - 12/334, यमुना विहार, नई दिल्ली - 110053, का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतक़ाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मोहम्मद उस्मान साहब के इंतक़ाल की ख़बर से उनके अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, दोस्त-अहबाब और मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी में गहरे रंज और सदमे की लहर दौड़ गई है। मरहूम की जुदाई उनके घराने और तमाम जानने वालों के लिए एक ऐसा सदमा है जिसकी भरपाई आसान नहीं।

इस मौक़े पर "मुल्तानी समाज" की पूरी टीम और बिरादराने-मुल्तानी की जानिब से मरहूम के तमाम अहले-ख़ाना, रिश्तेदारों और अज़ीज़ों की ख़िदमत में दिली ताज़ियत पेश की जाती है।

हम बारगाह-ए-इलाही में दस्त-ब-दुआ हैं कि अल्लाह तआला मरहूम मोहम्मद उस्मान साहब की मग़फ़िरत फरमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फरमाए, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फरमाए, क़ब्र की मंज़िलों को आसान फरमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला से आला मुक़ाम अता फरमाए।

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त तमाम पसमान्दगान को सब्र-ए-जमील अता फरमाए और इस सदमे को बर्दाश्त करने की ताक़त दे।

आमीन सुम्मा आमीन।

नमाज़-ए-जनाज़ा और दफ़िने की जानकारी

मरहूम के दफ़िने और नमाज़-ए-जनाज़ा का वक़्त बाद नमाज़ असर 

तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि नमाज़-ए-जनाज़ा में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और सवाब-ए-दारैन हासिल करें।

अल्लाह तआला मरहूम को अपनी रहमत के साए में जगह अता फरमाए। आमीन।


"मुल्तानी समाज" — बिरादरी की आवाज़, बिरादरी की पहचान

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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"मुल्तानी समाज"

अपनी बिरादरी की आवाज़ • अपनी बिरादरी की पहचान

सरधना में बानो बी का इंतिक़ाल — अहले बिरादरी में ग़म की लहर, आज सुबह 10 बजे होगी नमाज़-ए-जनाज़ा व तदफ़ीन, इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

सरधना (जिला मेरठ), 17 सितंबर 2026।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और बेइंतहा अफ़सोस के साथ तमाम अहले-मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि क़स्बा सरधना, जिला मेरठ, उत्तर प्रदेश में जनाब नसीमुद्दीन साहब, मरहूम गाँव भमौरी वालों की अहलिया बानो बी का कल दिन बुध, 16 सितंबर 2026 को क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल फ़रमा जाना बिरादरी के लिए बेहद दुख और सदमे का सबब है।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूमा के इंतिक़ाल की ख़बर से अहले-ख़ानदान, रिश्तेदारों, अज़ीज़ों और बिरादराना हज़रात में ग़म की फ़िज़ा है। एक इंसान का इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत हो जाना यक़ीनन बेहद दर्दनाक लम्हा होता है। मगर मोमिन का यक़ीन है कि हर जान को मौत का मज़ा चखना है और असल ज़िंदगी आख़िरत की ज़िंदगी है।

नमाज़-ए-जनाज़ा व तदफ़ीन

मरहूमा बानो बी की नमाज़-ए-जनाज़ा व तदफ़ीन आज दिन जुमेरात, 17 सितंबर 2026 को सुबह 10:00 बजे क़स्बा सरधना, जिला मेरठ, उत्तर प्रदेश में होगी।

तमाम अहले-बिरादरी और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फ़रमाकर मरहूमा के लिए मग़फ़िरत की दुआ करें और ग़मज़दा ख़ानदान के साथ इस मुश्किल वक़्त में शरीक-ए-ग़म हों।

मग़फ़िरत और तदफ़ीन के वक़्त की दुआ

अल्लाह तआला मरहूमा की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फ़रमाए, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमाए, उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे, क़ब्र की तंगी और अज़ाब से महफ़ूज़ फ़रमाए और उन्हें अपनी रहमत के साये में जगह अता फ़रमाए।

या अल्लाह! जब मरहूमा को मिट्टी के सुपुर्द किया जाए तो अपनी ख़ास रहमत नाज़िल फ़रमा। उनकी क़ब्र को कुशादा, रोशन और पुर-सुकून फ़रमा। उन्हें सवालात-ए-क़ब्र में कामयाबी अता फ़रमा और उन्हें जन्नतुल-फ़िरदौस में आला मक़ाम नसीब फ़रमा।

या रब्बुल आलमीन! मरहूमा की कब्र पर अपनी रहमतों की बारिश फ़रमा, उनके दर्जात बुलंद फ़रमा और उन्हें हज़रत मुहम्मद ﷺ की शफ़ाअत नसीब फ़रमा।

अल्लाह तआला तमाम पसमांदगान, अहले-ख़ाना और रिश्तेदारों को इस सदमे पर सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए, दिलों को सब्र और सुकून दे तथा मरहूमा के लिए सदक़ा-ए-जारीया और नेकियों का ज़रिया बनने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

तमाम अहले-बिरादरी से ख़ास गुज़ारिश

तमाम बिरादराना हज़रात से दरख़्वास्त है कि मरहूमा के लिए ख़ुलूस-ए-दिल से दुआ-ए-मग़फ़िरत करें। अगर मुमकिन हो तो उनके ईसाल-ए-सवाब के लिए सूरह-ए-फ़ातिहा, सूरह-ए-इख़लास और क़ुरआन-ए-पाक की तिलावत करके उसका सवाब मरहूमा को पहुँचाएँ।

अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फ़िरत फ़रमाए और उन्हें जन्नतुल-फ़िरदौस में आला से आला मक़ाम अता फ़रमाए।

आमीन सुम्मा आमीन।


ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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"मुल्तानी समाज"

अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।

जनाब सलीम मिर्ज़ा ‘ड्राइवर साहब’ का इंतिक़ाल — कल सुबह 7 बजे होगी नमाज़-ए-जनाज़ा, उसके बाद सुपुर्द-ए-ख़ाक, इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

ग़मगीन ख़बर | गढ़ी पुख़्ता, ज़िला शामली, उत्तर प्रदेश

निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि चक्की राहों वाली गली, मोहल्ला कश्यपपुरी, क़स्बा गढ़ी पुख़्ता, ज़िला शामली, उत्तर प्रदेश निवासी जनाब सलीम मिर्ज़ा साहब ‘ड्राइवर’, वल्दियत जनाब बशीर अहमद साहब मरहूम, उम्र तक़रीबन 65 साल, का आज बरोज बुध, बा - तारीख़ 16 सितंबर 2026 को शाम तकरीबन 4:30 बजे पास के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज के दौरान क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

मरहूम, वसीम ड्राइवर साहब के वालिद-ए-मुहतरम थे। उनके इंतिक़ाल की ख़बर से खानदान, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादराना हज़रात में ग़म की लहर दौड़ गई है। हर आंख अश्कबार और हर दिल सदमे में है।

नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन

मय्यत की नमाज़-ए-जनाज़ा कल बरोज जुमेरात, बा - तारीख़ 17 सितंबर 2026 को सुबह 7:00 बजे अदा की जाएगी, जिसके बाद मरहूम को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फ़रमाकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और अहले-ख़ाना के ग़म में शरीक हों।

मय्यत को कब्र में उतारते और मिट्टी देते वक़्त

मुसलमान के लिए जनाज़े में शिरकत, मय्यत को कंधा देना, दफ़्न में हिस्सा लेना और उसके लिए दुआ करना बड़ी नेकी का काम है। मय्यत को कब्र में उतारते समय यह दुआ पढ़ी जा सकती है:

بِسْمِ اللّٰهِ وَعَلَىٰ مِلَّةِ رَسُولِ اللّٰهِ ﷺ

“बिस्मिल्लाहि व अला मिल्लति रसूलिल्लाह ﷺ”

अर्थ: “अल्लाह के नाम के साथ और रसूलुल्लाह ﷺ के दीन व तरीक़े पर।”

कब्र में मय्यत को रखने के बाद उसके लिए मग़फ़िरत, रहमत और साबित-क़दमी की दुआ की जाए। मिट्टी देते समय कोई ख़ास लाज़िमी दुआ मुक़र्रर नहीं है; अलबत्ता आम दुआ और इस्तिग़फ़ार करना बेहतर है।

मिट्टी देते समय यह आयत पढ़ी जा सकती है:

مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ

“इसी मिट्टी से हमने तुम्हें पैदा किया, इसी में तुम्हें लौटाएंगे और इसी से दोबारा तुम्हें निकालेंगे।”

इसके बाद मरहूम के लिए दिल से दुआ करें:

اَللّٰهُمَّ اغْفِرْ لَهٗ وَارْحَمْهٗ، وَعَافِهٖ وَاعْفُ عَنْهٗ، وَأَكْرِمْ نُزُلَهٗ، وَوَسِّعْ مُدْخَلَهٗ۔

“ऐ अल्लाह! मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमा, उन पर रहमत फ़रमा, उन्हें आफ़ियत अता फ़रमा, उनसे दरगुज़र फ़रमा, उनकी मेहमाननवाज़ी फ़रमा और उनकी क़ब्र को कुशादा फ़रमा।”

कब्र पर मिट्टी देने के बाद यह दुआ भी की जाए:

اَللّٰهُمَّ ثَبِّتْهُ عِنْدَ السُّؤَالِ، وَاغْفِرْ لَهٗ وَارْحَمْهٗ، وَاجْعَلْ قَبْرَهٗ رَوْضَةً مِّنْ رِّيَاضِ الْجَنَّةِ۔

“ऐ अल्लाह! सवाल के वक़्त उन्हें साबित-क़दम रखना, उनकी मग़फ़िरत फ़रमा, उन पर रहमत फ़रमा और उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे।”

दुआ-ए-मग़फ़िरत

या अल्लाह! जनाब सलीम मिर्ज़ा साहब की पूरी मग़फ़िरत फ़रमा। उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों से दरगुज़र फ़रमा। उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा, उसे कुशादा और आरामगाह बना दे। उन्हें सवाल-ए-क़ब्र में आसानी अता फ़रमा, दर्जात बुलंद फ़रमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा।

या रब्बुल आलमीन! अहले-ख़ाना, औलाद, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और तमाम मुतअस्सिर हज़रात को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा। इस सदमे को बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ दे और मरहूम के लिए की गई तमाम दुआओं को क़ुबूल फ़रमा।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

तमाम हज़रात से अपील है कि मरहूम के लिए एक बार सूरह-ए-फ़ातिहा और सूरह-ए-इख़लास पढ़कर दुआ-ए-मग़फ़िरत ज़रूर फ़रमाएँ।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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“मुल्तानी समाज” — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।

अपनी जनगणना खुद कीजिए — अपने मोबाइल से! “मुल्तानी घराना” बना बिरादरी की पहचान, शिजरा-ए-खानदान और डिजिटल जनगणना को महफ़ूज़ करने का नया ज़रिया

पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के हर फ़र्द से ख़ास अपील — आज ही अपना और अपने ख़ानदान का डेटा दर्ज कराइए

नई दिल्ली/उत्तर प्रदेश डेस्क।
पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के लिए यह ख़बर यक़ीनन ख़ुशी और फ़ख़्र का सबब है कि हमारी बिरादरी की तारीख़, नस्ल, ख़ानदान, कुनबे और आने वाली नस्लों की मालूमात को डिजिटल तौर पर महफ़ूज़ रखने की दिशा में एक अहम क़दम उठाया गया है।

मुल्तानी बिरादरी मुल्क के मुख़्तलिफ़ राज्यों, शहरों, कस्बों और गांवों में आबाद है। सदियों से बिखरे हुए इन ख़ानदानों को एक-दूसरे से जोड़ने, अपने पुरखों की यादों को महफ़ूज़ रखने और बिरादरी की सही तस्वीर सामने लाने के लिए एक मुकम्मल और भरोसेमंद डिजिटल जनगणना की ज़रूरत लंबे अरसे से महसूस की जाती रही है।

बिरादरी के जागरूक अफ़राद की हमेशा यह ख़्वाहिश रही कि पूरे हिंदुस्तान में मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की असली, सटीक और ख़ुद बिरादरी के अफ़राद द्वारा तैयार की गई जनगणना सामने आए, ताकि हमारी आबादी, ख़ानदानों, शहरों और नई नस्ल की सही जानकारी एक जगह महफ़ूज़ हो सके।

मैनुअल जनगणना की कोशिश हुई, मगर मुकम्मल आंकड़े सामने नहीं आ सके

लगभग चार-पांच वर्ष पूर्व मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट (रजि.) ऑल इंडिया की ओर से बिरादरी की मैनुअल जनगणना कराने की कोशिश की गई। इसके लिए देश के अलग-अलग शहरों में जनगणना अधिकारियों की नियुक्ति की गई, ताकि वह अपने-अपने शहरों और इलाक़ों में रहने वाले बिरादरी के अफ़राद की जानकारी एकत्र कर ट्रस्ट को उपलब्ध करा सकें।

मगर मैनुअल तरीके से जमा किए गए आंकड़े एक समान प्रारूप और मुकम्मल डिजिटल व्यवस्था के तहत दर्ज नहीं हो सके। नतीजा यह निकला कि बिरादरी की सटीक और भरोसेमंद कुल आबादी तथा ख़ानदानी आंकड़ों की वह तस्वीर सामने नहीं आ सकी जिसकी उम्मीद की जा रही थी।

यही वह मौक़ा था जब ट्रस्ट के फाउंडर ज़मीर आलम मुल्तानी ने इस मसले को नए अंदाज़ में हल करने का इरादा किया।

“क्यों न बिरादरी अपनी जनगणना खुद करे?”

ट्रस्ट के फाउंडर ज़मीर आलम मुल्तानी ने इस सवाल पर गंभीरता से काम शुरू किया कि अगर बिरादरी के हर फ़र्द को अपनी और अपने परिवार की जानकारी ख़ुद दर्ज करने का मौक़ा दिया जाए, तो न सिर्फ़ डेटा अधिक व्यवस्थित होगा बल्कि आने वाली नस्लों के लिए भी एक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा सकता है।

इसके बाद ऐसे सॉफ्टवेयर की तलाश और तैयारी का सिलसिला शुरू हुआ जिसमें बिरादरी के ख़ानदानों से जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित तरीके से दर्ज और सुरक्षित रखा जा सके।

लंबी मेहनत और लगातार कोशिशों के बाद एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म तैयार कराया गया, जिसे बिरादरी के लिए एक ख़ास पहचान देते हुए नाम दिया गया—

“मुल्तानी घराना”

अब हर फ़र्द खुद दर्ज करेगा अपने ख़ानदान की दास्तान

“मुल्तानी घराना” के ज़रिए बिरादरी का हर शख़्स अपने मोबाइल, टैबलेट, लैपटॉप या कंप्यूटर से अपना अकाउंट बनाकर अपनी और अपने परिवार की ज़रूरी जानकारी दर्ज कर सकता है।

यानी अब किसी दूसरे शख़्स के घर-घर जाकर जानकारी इकट्ठा करने का इंतज़ार नहीं—हर घर खुद अपनी जानकारी दर्ज करेगा और हर ख़ानदान अपनी पहचान खुद सुरक्षित करेगा।

इस डिजिटल व्यवस्था के ज़रिए अपने:

  • अपने नाम और व्यक्तिगत विवरण
  • वालिदैन की जानकारी
  • बच्चों और परिवार के अफ़राद
  • कुनबे और रिश्तेदारों की जानकारी
  • ख़ानदानी सिलसिले और शिजरा
  • पुरखों से जुड़ी जानकारी
  • रहने वाले शहर/इलाके की जानकारी

को व्यवस्थित रूप से दर्ज करने की गुंजाइश रखी गई है।

शिजरा-ए-ख़ानदान — आने वाली नस्लों के लिए एक अमानत

हमारी बिरादरी के बुज़ुर्गों के पास अपने पुरखों, दादा-परदादा और खानदान के बारे में बहुत-सी ऐसी मालूमात रही हैं जो ज़बानी तौर पर एक नस्ल से दूसरी नस्ल तक पहुंचती रही हैं।

लेकिन वक़्त के साथ बहुत-सी जानकारी लोगों की यादों के साथ ही ख़त्म हो जाती है।

“मुल्तानी घराना” का मक़सद इसी ख़ानदानी विरासत को डिजिटल तौर पर महफ़ूज़ रखने की दिशा में एक कोशिश है, ताकि आज का दर्ज किया गया रिकॉर्ड आने वाली नस्लों के लिए उनके पुरखों की पहचान और ख़ानदानी सिलसिले का ज़रिया बन सके।

आज हम अपने पुरखों का शिजरा सुरक्षित करेंगे, तो कल हमारी औलाद हमें याद रखने के लिए एक मुकम्मल रिकॉर्ड अपने पास पाएगी।

सिर्फ़ शिजरा ही नहीं, बिरादरी की डिजिटल जनगणना भी

इस प्रोजेक्ट की सबसे अहम ख़ासियत यह है कि अगर बिरादरी के ज़्यादा से ज़्यादा ख़ानदान इसमें अपनी सही जानकारी दर्ज करते हैं, तो इससे बिरादरी के सामाजिक और ख़ानदानी आंकड़ों को समझने में मदद मिल सकती है।

आज हमें अक्सर यह सवाल परेशान करता है कि—

“पूरे हिंदुस्तान में मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की कुल आबादी कितनी है?”

हमारे कितने ख़ानदान किस राज्य में रहते हैं?

किस शहर और कस्बे में बिरादरी की कितनी आबादी है?

हमारी नई नस्ल की तालीमी और पेशेवर स्थिति क्या है?

हमारे कितने ख़ानदान देश के अलग-अलग हिस्सों में आबाद हैं?

इन सवालों के जवाब के लिए सबसे पहला क़दम है—अपनी जानकारी खुद दर्ज करना।

जितने ज़्यादा ख़ानदान अपनी सही जानकारी दर्ज करेंगे, उतना ही बेहतर डिजिटल डेटा तैयार होगा।

अब ज़िम्मेदारी सिर्फ़ एक तंजीम की नहीं — हर घर की है

बिरादरी की तरक़्क़ी सिर्फ़ एक शख़्स, एक कमेटी या एक तंजीम की ज़िम्मेदारी नहीं होती। यह हम सबकी सामूहिक ज़िम्मेदारी है।

इसलिए “मुल्तानी घराना” के इस अभियान को कामयाब बनाने के लिए बिरादरी के हर जागरूक फ़र्द से अपील है कि वह पहले अपना अकाउंट बनाए, फिर अपने परिवार की जानकारी दर्ज करे और उसके बाद अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और बिरादरी के दूसरे ख़ानदानों तक भी इस पैग़ाम को पहुंचाए।

एक घर की जानकारी एक रिकॉर्ड है, लेकिन लाखों घरों की जानकारी हमारी पूरी बिरादरी की तस्वीर बन सकती है।

आज ही शुरुआत करें

अगर आप मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी से ताल्लुक़ रखते हैं तो देर न करें।

आज ही अपने मोबाइल या कंप्यूटर से:

www.multanigharana.com

पर लॉगिन करें, अपना अकाउंट बनाएं और अपनी, अपने परिवार, कुनबे, ख़ानदान तथा रिश्तेदारों की सही जानकारी दर्ज करें।

याद रखिए—

अपना डेटा खुद दर्ज कीजिए,
अपना शिजरा खुद सुरक्षित कीजिए,
और अपनी बिरादरी की सही तस्वीर बनाने में अपना किरदार अदा कीजिए।

यह सिर्फ़ एक वेबसाइट पर जानकारी भरने का काम नहीं, बल्कि अपनी नस्ली पहचान, ख़ानदानी विरासत और आने वाली नस्लों के लिए एक डिजिटल अमानत छोड़ने की कोशिश है।


“मुल्तानी घराना” — आज की जानकारी, कल की विरासत

आइए, हम सब मिलकर अपनी बिरादरी की वह डिजिटल तस्वीर तैयार करें जो आने वाली नस्लों को बताए कि हम कौन थे, हमारे पुरखे कौन थे, हमारे ख़ानदान कहां-कहां आबाद रहे और हमारी बिरादरी ने हिंदुस्तान की सामाजिक ज़िंदगी में किस तरह अपना किरदार अदा किया।

आपका एक अकाउंट, आपके पूरे ख़ानदान की पहचान को महफ़ूज़ करने की शुरुआत हो सकता है।

आज ही जुड़िए —
www.multanigharana.com


ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रकाशित/प्रसारित पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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“मुल्तानी समाज”

अपनी बिरादरी की आवाज़ — अपनी पहचान

Tuesday, September 15, 2026

गांव गढ़ी अब्दुल्ला (कच्ची गढ़ी) के जनाब गय्यूर अहमद साहब का इंतिक़ाल — बाद नमाज़-ए-असर होगी नमाज़-ए-जनाज़ा व तदफ़ीन, इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

शामली, उत्तर प्रदेश।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिल को मलकूल कर देने वाले अंदाज़ में आप तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि आज बुध, 16 सितंबर 2026 को गांव गढ़ी अब्दुल्ला (कच्ची गढ़ी), जिला शामली, उत्तर प्रदेश के रहने वाले जनाब गय्यूर अहमद साहब वल्द जनाब जिंदा हसन साहब, उम्र तकरीबन 55 साल, का लंबे अरसे से बीमारी से जूझने के बाद पीजीआई हॉस्पिटल, चंडीगढ़ में क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम अपने पीछे अपनी अहलिया, भाइयों मर्ग़ूब, महबूब, शाहिद और साजिद समेत तमाम खानदान, कुनबे, रिश्तेदारों, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और अहबाब को गहरे रंज-ओ-ग़म में मुब्तिला छोड़कर इस आरज़ी और फ़ानी दुनिया से हमेशा के लिए रुख़्सत हो गए।

मरहूम के इंतिक़ाल की ख़बर से खानदान, बिरादरी और जानने वालों में ग़म की लहर दौड़ गई है। हर आंख अश्कबार और हर दिल ग़मज़दा है। अल्लाह तआला मरहूम की तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फ़रमाए और उन्हें अपनी रहमत के साये में जगह अता फ़रमाए।

नमाज़-ए-जनाज़ा व तदफ़ीन

मिली जानकारी के मुताबिक मैय्यत को बाद नमाज़-ए-असर सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम बिरादराना हज़रात, रिश्तेदारों और अहबाब से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फ़रमाकर मरहूम के लिए मग़फ़िरत की दुआ करें और सवाब-ए-दारैन हासिल करें।

कब्र में उतारते और मिट्टी देते वक़्त दुआ

अल्लाह के बंदे को कब्र में उतारते वक़्त दिल में यह यक़ीन रहे कि हम सब उसी अल्लाह के हैं और उसी की तरफ़ लौटकर जाना है।

اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَارْحَمْهُ، وَعَافِهِ وَاعْفُ عَنْهُ، وَأَكْرِمْ نُزُلَهُ، وَوَسِّعْ مُدْخَلَهُ۔

तर्जुमा:
ऐ अल्लाह! इसकी मग़फ़िरत फ़रमा, इस पर रहम फ़रमा, इसे आफ़ियत अता फ़रमा, इससे दरगुज़र फ़रमा, इसकी मेहमाननवाज़ी इज़्ज़त वाली फ़रमा और इसकी कब्र को कुशादा फ़रमा।

कब्र में मिट्टी देते वक़्त पढ़ें:

مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ

तर्जुमा:
हमने तुम्हें इसी मिट्टी से पैदा किया, इसी में तुम्हें वापस लौटाएंगे और इसी से दोबारा तुम्हें निकालेंगे।

मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत

या अल्लाह! जनाब गय्यूर अहमद साहब की मग़फ़िरत फ़रमा। उनकी तमाम ख़ताओं, कोताहियों और गुनाहों को माफ़ फ़रमा। उनकी कब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा, उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे। कब्र की तंगी और वहशत को दूर फ़रमा।

या रब्बुल आलमीन! मरहूम को सवाल-ए-कब्र में आसानी अता फ़रमा, उन्हें अपने हबीब हज़रत मुहम्मद ﷺ की शफ़ाअत नसीब फ़रमा और जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा।

या अल्लाह! तमाम अहल-ए-ख़ाना, भाइयों, रिश्तेदारों और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को इस सदमे पर सब्र-ए-जमील अता फ़रमा और उन्हें इस ग़म को सहने का हौसला अता फ़रमा।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

राब्ता बराए मज़ीद मालूमात

मैय्यत, नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन के सिलसिले में मज़ीद मालूमात के लिए:

📞 शहाने आलम साहब: 9149163224
📞 8699765480
📞 7830669296

पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है।


ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

आपका एतमाद ही हमारी सबसे बड़ी ताक़त है।

"मुल्तानी समाज" — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।

अपनी ख़बर क़ौमी सतह तक पहुंचाएँ

अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार (विज्ञापन) क़ौमी सतह पर शाया या प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो बराए मेहरबानी नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।

📞 9410652990
📞 8010884848

दो ग़मगीन इंतिक़ाल से बिरादरी में पसरा मातम — मरहूमीन की मग़फ़िरत और दरजात की बुलंदी के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत, इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि आज बुध, 16 सितंबर 2026 को हमारी बिरादरी के दो घरानों में इंतिक़ाल की ख़बर से गहरा सदमा पहुंचा है। दोनों मरहूमीन के इंतिक़ाल पर अहल-ए-ख़ाना और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब गहरे सदमे और रंज में हैं।

गांव किशनपुर बराल, जिला बागपत के नौजवान का सड़क हादसे में इंतिक़ाल

गांव किशनपुर बराल, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश निवासी जनाब अब्दुल रशीद साहब के पोते, जनाब ख़ुर्शीद साहब के साहबज़ादे और हाजी अब्दुल क़दीर साहब, अलीपुर के भतीजे का आज एक दर्दनाक सड़क हादसे में क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

मरहूम के अचानक इंतिक़ाल की ख़बर से परिवार, रिश्तेदारों और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब में गहरा ग़म और मातम छा गया है।

मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन (सुपुर्द-ए-ख़ाक) आज हाल मुक़ाम पलड़ा-पलड़ी, हरियाणा में ज़ोहर की नमाज़ के बाद, लगभग 2:00 बजे अदा की जाएगी।

तमाम बिरादराना हज़रात से पुरख़ुलूस गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत फरमाएं और अहल-ए-ख़ाना के ग़म में शरीक हों।

दुआ-ए-मग़फ़िरत:
या अल्लाह! मरहूम की मुकम्मल मग़फ़िरत फरमा, उनकी ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फरमा, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फरमा, क़ब्र को कुशादा और आरामगाह बना, उनके दरजात बुलंद फरमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फरमा। आमीन या रब्बुल आलमीन।

कब्र में उतारते वक़्त दुआ:
बिस्मिल्लाहि व अला मिल्लति रसूलिल्लाह।
अर्थात: अल्लाह के नाम से और अल्लाह के रसूल ﷺ के दीन व तरीक़े पर।

मिट्टी देते वक़्त दुआ:
मिन्हा ख़लक़्नाकुम् व फ़ीहा नुईदुकुम् व मिन्हा नुख़रिजुकुम् तारतन उख़रा।
अर्थात: हमने तुम्हें इसी मिट्टी से पैदा किया, इसी में तुम्हें वापस लौटाएंगे और इसी से दोबारा निकालेंगे।


भूड क़स्बा खतौली में जनाब सुबहान साहब का इंतिक़ाल

दूसरी ग़मगीन इत्तिला यह है कि भूड क़स्बा खतौली, जिला मुज़फ़्फ़रनगर, उत्तर प्रदेश निवासी जनाब सुबहान साहब वल्द जनाब हाजी अनवर साहब (मरहूम) का आज 16 सितंबर 2026, बुधवार को तड़के क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

मरहूम के इंतिक़ाल की ख़बर से अहल-ए-ख़ाना, रिश्तेदारों और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब में गहरा रंज-ओ-ग़म पाया जा रहा है।

तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि मरहूम के लिए दिल से दुआ-ए-मग़फ़िरत फरमाएं और अल्लाह तआला से उनके दरजात की बुलंदी के लिए दुआ करें।

दुआ:
या अल्लाह! जनाब सुबहान साहब की मग़फ़िरत फरमा, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे, उन्हें सवालात-ए-क़ब्र में आसानी अता फरमा, क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे, उनके दरजात बुलंद फरमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में जगह अता फरमा। अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील और इस सदमे को बर्दाश्त करने की ताक़त अता फरमा। आमीन या रब्बुल आलमीन।

अहल-ए-ख़ाना के लिए दुआ

या रब्बुल आलमीन! दोनों मरहूमीन के घरवालों, रिश्तेदारों और तमाम पसमान्दगान को सब्र-ए-जमील अता फरमा। उनके दिलों को सुकून अता फरमा, इस मुश्किल वक़्त में उन्हें अपने फ़ज़्ल-ओ-करम से संभाल और मरहूमीन के सदक़े में तमाम अहल-ए-ख़ाना पर अपनी रहमत नाज़िल फरमा। आमीन।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

हर जानदार को मौत का मज़ा चखना है। अल्लाह तआला दोनों मरहूमीन की मग़फ़िरत फरमाए, उनकी क़ब्रों को नूर से मुनव्वर करे और तमाम पसमान्दगान को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन सुम्मा आमीन।


मुल्तानी समाज — बिरादरी की आवाज़, बिरादरी की पहचान

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार (विज्ञापन) क़ौमी सतह पर शाया या प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो बराए मेहरबानी नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फरमाएं।

📞 9410652990
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Monday, September 14, 2026

जश्ने “मुल्तानी-डे” : बिरादरी की एकता, पहचान और ख़िदमत का सालाना पैग़ाम

12 नवंबर को पूरे मुल्क में मनाया जाएगा जश्ने “मुल्तानी-डे” — हर ज़िले में 12 ग़रीब और शादी के लायक़ बेटियों की शादी का तंजीमी प्रस्ताव

नई दिल्ली/उत्तर प्रदेश डेस्क।
पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की सामाजिक एकता, तंजीमी बेदारी, आपसी भाईचारे और बिरादरी की ख़िदमत के हवाले से 12 नवंबर का दिन अब एक ख़ास और यादगार तारीख़ की हैसियत हासिल कर चुका है। बिरादरी के लोग इस दिन को सालों से पूरे जोशो-ख़रोश और ख़ुशी के साथ जश्ने “मुल्तानी-डे” के तौर पर मनाते आ रहे हैं।

इस ख़ास दिन की बुनियाद उस ऐतिहासिक क़दम से जुड़ी हुई है, जब “मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट (रजि.) ऑल इंडिया” की ख़ज़ांची रेशमा ज़मीर ने ट्रस्ट के नाम से मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से राष्ट्रीय स्तर की पत्रिका “मुल्तानी समाज” का पंजीकरण कराया। इस राष्ट्रीय पत्रिका का पंजीकरण 12 नवंबर 2013 को हुआ था। उसी ऐतिहासिक दिन की याद को ताज़ा रखने और बिरादरी के लोगों में इत्तिहाद, भाईचारे और तंजीमी शऊर को मज़बूत करने के मक़सद से हर साल 12 नवंबर को जश्ने “मुल्तानी-डे” मनाने की रवायत क़ायम की गई।

12 नवंबर बना बिरादरी की तारीख़ का अहम दिन

12 नवंबर महज़ एक तारीख़ नहीं, बल्कि पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी के लिए इत्तिहाद, तंजीम, पहचान और ख़िदमत का एक अहम पैग़ाम लेकर आता है। यह दिन बिरादरी के उन तमाम अफ़राद को एक मंच पर आने का मौक़ा देता है, जो अपनी बिरादरी की तरक़्क़ी, बच्चों की तालीम, नौजवानों के बेहतर मुस्तक़बिल, ग़रीब और ज़रूरतमंद परिवारों की मदद तथा सामाजिक सुधार के लिए अपना किरदार अदा करना चाहते हैं।

“मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका इसी तंजीमी और समाजी मक़सद को आम करने में अपनी अहम भूमिका निभा रही है और बिरादरी की आवाज़ को राष्ट्रीय सतह तक पहुंचाने का सिलसिला जारी रखे हुए है।

हर ज़िले में 12 ग़रीब बेटियों की शादी का प्रस्ताव

जश्ने “मुल्तानी-डे” के मुबारक मौक़े पर बिरादरी की ख़िदमत के लिए एक बेहद अहम और क़ाबिले-तारीफ़ तंजीमी पहल का प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत हर ज़िले में 12 ग़रीब और शादी के लायक़ बेटियों की शादी करवाने का प्रोग्राम तंजीम के प्रस्ताव में शामिल है, जिसे जल्द ही शुरू किए जाने की तैयारी है।

अगर यह ख़िदमत का सिलसिला मुकम्मल तौर पर शुरू होता है तो यह न सिर्फ़ ज़रूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित होगा, बल्कि बिरादरी के अंदर आपसी मदद, भाईचारे और इंसानी हमदर्दी की एक मज़बूत मिसाल भी क़ायम करेगा।

बिरादरी के साहिब-ए-हैसियत अफ़राद, कारोबारी हज़रात, नौजवान, समाजी कारकुन और तंजीमी ज़िम्मेदारान अगर इस नेक मक़सद में आगे बढ़कर हिस्सा लें तो इस ख़िदमती मुहिम को और ज़्यादा कामयाब बनाया जा सकता है।

हर घर तक पहुंचे “मुल्तानी-डे” का पैग़ाम

तंजीम की जानिब से तमाम बिरादराने-मिल्लत और बिरादरी के अफ़राद से अपील की गई है कि जश्ने “मुल्तानी-डे” की इस ख़बर और पैग़ाम को ज़्यादा से ज़्यादा व्हाट्सऐप ग्रुप्स, फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम और दीगर सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर शेयर करें, ताकि मुल्क के हर कोने में रहने वाले मुल्तानी बिरादरी के अफ़राद तक इस दिन की अहमियत और इसके मक़सद का पैग़ाम पहुंच सके।

यह दिन सिर्फ़ जश्न मनाने का नहीं, बल्कि अपनी बिरादरी से जुड़ने, उसे समझने, उसकी बेहतरी के लिए सोचने और अपनी आने वाली नस्लों के मुस्तक़बिल को बेहतर बनाने का दिन भी बनाया जा सकता है।

अपने नाम से हासिल करें मुफ़्त “मुल्तानी-डे” पोस्टर

जश्ने “मुल्तानी-डे” को सोशल मीडिया पर और ज़्यादा पुरअसर बनाने के लिए बिरादरी के अफ़राद को अपने नाम का मुफ़्त “मुल्तानी-डे” पोस्टर हासिल करने का मौक़ा भी दिया जा रहा है।

जो हज़रात अपने नाम से पोस्टर बनवाना चाहते हैं, वह अपना पासपोर्ट साइज फ़ोटो, पूरा नाम और पता भेज सकते हैं। उनके नाम से तैयार किया गया पोस्टर “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर प्रकाशित करके उन्हें भेजा जाएगा।

इस पहल का मक़सद यही है कि जश्ने “मुल्तानी-डे” का पैग़ाम हर घर, हर परिवार और हर बिरादरी के फ़र्द तक पहुंचे और हर शख़्स इस मुबारक दिन से अपनी वाबस्तगी महसूस करे।

बिरादरी की राय — हमारी अगली मंज़िल

“मुल्तानी समाज” की जानिब से तमाम बिरादरी के अफ़राद से यह भी दरख़्वास्त की गई है कि जश्ने “मुल्तानी-डे” को और बेहतर, बा-मक़सद और यादगार बनाने के लिए अपनी राय, मशवरा और तजावीज़ ज़रूर पेश करें।

आख़िर कोई भी तहरीक सिर्फ़ चंद लोगों की कोशिश से कामयाब नहीं होती; जब पूरी बिरादरी मिलकर अपनी ज़िम्मेदारी महसूस करती है तो वही कोशिश एक मज़बूत तहरीक की शक्ल इख़्तियार कर लेती है।

आइए, 12 नवंबर को सिर्फ़ जश्न न मनाएं—बल्कि इत्तिहाद, तालीम, ख़िदमत, भाईचारे और बिरादरी की तरक़्क़ी का नया अहद करें।

“मुल्तानी-डे” — हमारी तारीख़, हमारी पहचान और हमारी बिरादरी के बेहतर मुस्तक़बिल का पैग़ाम।


ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से

ज़मीर आलम
प्रधान संपादक — “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका


अपनी आवाज़ को क़ौमी सतह तक पहुंचाइए

अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार (विज्ञापन) क़ौमी सतह पर शाया या प्रसारित करवाना चाहते हैं तो बराए मेहरबानी नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।

📞 9410652990
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“मुल्तानी समाज” — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।