Thursday, October 15, 2026

🥀 इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन 🥀इंतिहाई रंज-ओ-ग़म के साथ ताज़ियती ख़बर, कोटा (राजस्थान) की नसीम बानो का इंतिक़ाल, मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी में ग़म की लहर

अल्लाहुम्मग़फ़िर लहा वरहमहा व आफ़िहा वअफ़ु अन्हा। आमीन या रब्बुल आलमीन।

कोटा (राजस्थान), 15 अक्टूबर 2026। निहायत ही रंज-ओ-ग़म, अफ़सोस और दिली सदमे के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि आज दिन जुमेरात, बा-तारीख़ 15 अक्टूबर 2026 को कोटा, राजस्थान के साकिन जनाब इक़बाल हुसैन मुल्तानी साहब की ज़ौजा-ए-मोहतरमा नसीम बानो साहिबा का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया है।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

बेशक हम सब अल्लाह तआला ही के हैं और उसी की तरफ़ लौटकर जाने वाले हैं। मौत एक ऐसी हक़ीक़त है जिससे किसी को फ़रार नहीं, मगर किसी अज़ीज़ की जुदाई का ग़म दिल को गहरे सदमे में मुब्तिला कर देता है। नसीम बानो साहिबा के इंतिक़ाल की ख़बर से उनके अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़ो-अक़ारिब और बिरादरी के लोगों के दरमियान रंज-ओ-मलाल की कैफ़ियत है।

इस मुश्किल और ग़मगीन घड़ी में हम मरहूमा के तमाम अहल-ए-ख़ाना, ख़ुसूसन जनाब इक़बाल हुसैन मुल्तानी साहब और उनके घराने के अफ़राद के साथ दिली ताज़ियत और हमदर्दी का इज़हार करते हैं। अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त तमाम ग़मज़दा घरवालों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए और इस सदमे को बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ बख़्शे। आमीन।

🤲 मरहूमा की मग़फ़िरत के लिए ख़ुसूसी दुआ

ऐ अल्लाह! ऐ तमाम जहानों के परवरदिगार! तू रहमान है, तू रहीम है, तेरी रहमत हर शय पर छाई हुई है। हम अपने रब्बे-करीम की बारगाह में दस्त-ए-दुआ दराज़ करते हैं कि मरहूमा नसीम बानो साहिबा की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमा, उनकी ख़ताओं और कोताहियों से दरगुज़र फ़रमा और उनकी नेकियों को अपनी बारगाह में क़ुबूल फ़रमा।

اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهَا وَارْحَمْهَا وَعَافِهَا وَاعْفُ عَنْهَا

तर्जुमा: ऐ अल्लाह! उनकी मग़फ़िरत फ़रमा, उन पर रहम फ़रमा, उन्हें आफ़ियत अता फ़रमा और उनसे दरगुज़र फ़रमा।

या अल्लाह! मरहूमा की क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा, उसे उनके लिए सुकून और राहत का ज़रिया बना। उनकी क़ब्र को वसीअ फ़रमा, उसमें जन्नत की ठंडी हवाएँ और रहमतें नसीब फ़रमा। उन्हें अज़ाब-ए-क़ब्र और तमाम आफ़ात से महफ़ूज़ फ़रमा।

ऐ मालिक-ए-कायनात! मरहूमा को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमा। उनके दरजात बुलंद फ़रमा और उन्हें अपने नेक बंदों की सोहबत नसीब फ़रमा। हुज़ूर नबी-ए-करीम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर नाज़िल होने वाली रहमतों के सदक़े में हमारी इस दुआ को अपनी बारगाह में क़ुबूल फ़रमा। आमीन या रब्बुल आलमीन।

🕊️ दफ़्न और तदफ़ीन के मौक़े पर पढ़ी जाने वाली दुआएँ

मरहूमा की तदफ़ीन के मौक़े पर तमाम मुसलमान भाइयों से गुज़ारिश है कि शरीअत के मुताबिक़ अदब, सुकून और एहतराम के साथ जनाज़े में शिरकत करें और मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें।

1. क़ब्रिस्तान में दाख़िल होते वक़्त की दुआ

अस्सलामु अलैकुम अहलद-दियारि मिनल-मुमिनीना वल-मुस्लिमीन, व इन्ना इन्शा अल्लाहु बिकुम लाहिक़ून। नसअलुल्लाहा लना व लकुमुल आफ़ियह।

मफ़हूम: ऐ इस बस्ती के मोमिन और मुसलमान रहने वालो! तुम पर सलाम हो। इंशाअल्लाह हम भी तुमसे आ मिलने वाले हैं। हम अल्लाह से अपने और तुम्हारे लिए आफ़ियत माँगते हैं।

2. मरहूमा को क़ब्र में उतारते वक़्त की दुआ

बिस्मिल्लाहि व अला मिल्लति रसूलिल्लाह।

मफ़हूम: अल्लाह के नाम के साथ और रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दीन और तरीक़े पर।

यह दुआ मय्यत को क़ब्र में रखने के मौक़े पर पढ़ी जाती है।

3. मिट्टी देते वक़्त की याददिहानी

अल्लाह तआला ने क़ुरआन-ए-करीम में इरशाद फ़रमाया है:

مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ

तर्जुमा: इसी मिट्टी से हमने तुम्हें पैदा किया, इसी में तुम्हें लौटाएँगे और इसी से तुम्हें दोबारा निकालेंगे। (सूरह ताहा, आयत 55)

मिट्टी देते वक़्त इंसान को अपनी आख़िरत, जवाबदेही और अल्लाह तआला की बारगाह में वापसी को याद करना चाहिए। इस मौक़े पर मरहूमा के लिए रहमत, मग़फ़िरत और जन्नत की दुआ की जाए।

4. दफ़्न के बाद मरहूमा के लिए दुआ

जनाज़े की तदफ़ीन के बाद मरहूमा के लिए साबित-क़दम रहने, मग़फ़िरत और रहमत की दुआ करना मस्नून अमल है।

ऐ अल्लाह! नसीम बानो साहिबा को सवालात के वक़्त साबित-क़दम फ़रमा, उनकी मग़फ़िरत फ़रमा और उनके अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा। आमीन।

🌹 अहल-ए-ख़ाना के नाम ताज़ियती पैग़ाम

जनाब इक़बाल हुसैन मुल्तानी साहब और तमाम ग़मज़दा घरवालों से गुज़ारिश है कि इस मुश्किल वक़्त में अल्लाह तआला की रहमत से मायूस न हों। सब्र और दुआ को अपना सहारा बनाएँ। हम अल्लाह की बारगाह में दुआगो हैं कि वह आप सभी को हिम्मत, हौसला और सब्र अता फ़रमाए।

बिरादरी के तमाम हज़रात से भी गुज़ारिश है कि मरहूमा के लिए ख़ुलूस-ए-दिल से दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और ग़मज़दा ख़ानदान के साथ हमदर्दी का इज़हार करें।

अल्लाह पाक मरहूमा नसीम बानो साहिबा की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए।

आमीन सुम्मा आमीन, या रब्बुल आलमीन।

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📰 मुल्तानी समाज — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार क़ौमी सतह पर शाया या प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो बराए मेहरबानी नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।

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“मुल्तानी समाज” — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।

Wednesday, October 14, 2026

15 अक्टूबर को मुल्तानी बिरादरी के दो अलग-अलग कार्यक्रमों का ऐलान, बागपत में बिरादरी सम्मेलन तो क़स्बा जलालाबाद, ज़िला शामली में सजेगा ‘मिर्ज़ा मुल्तानी मिलन समारोह

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती के मौक़े पर सामाजिक जागरूकता, तालीम, प्रतिभा सम्मान और बिरादरी के इत्तिहाद का पैग़ाम; दोनों आयोजनों में अलग-अलग कार्यक्रमों की तैयारी।

बागपत/क़स्बा जलालाबाद, ज़िला शामली, उत्तर प्रदेश। मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी से जुड़ी मिली जानकारी के मुताबिक़, 15 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश के जनपद बागपत और क़स्बा जलालाबाद, ज़िला शामली में दो अलग-अलग सामाजिक एवं संगठनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की घोषणा की गई है। दोनों आयोजनों में बिरादरी की सामाजिक सरगर्मियों, तालीमी बेदारी, प्रतिभाओं की हौसला-अफ़ज़ाई और आपसी राब्ते को मज़बूत करने से जुड़े विषयों को अहमियत दी गई है।

एक तरफ़ जनपद बागपत में मुल्तानी वेलफेयर सोसायटी की जानिब से बिरादरी सम्मेलन और प्रतिभा सम्मान समारोह की तैयारी की गई है, वहीं दूसरी तरफ़ क़स्बा जलालाबाद, ज़िला शामली में ‘मिर्ज़ा मुल्तानी मिलन समारोह’ के ज़रिये तालीमी, समाजी, मआशी और पर्यावरणीय बेदारी का पैग़ाम आम करने की घोषणा की गई है।

बागपत में मुल्तानी वेलफेयर सोसायटी का बिरादरी सम्मेलन

मिली जानकारी के मुताबिक़, मुल्तानी वेलफेयर सोसायटी, जनपद बागपत की जानिब से जुमेरात, 15 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजे आशीर्वाद गार्डन, दिल्ली रोड, बागपत में एक सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की घोषणा की गई है।

इस कार्यक्रम में भारत के पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के यौम-ए-पैदाइश, बेटियों के निकाह, छात्र-छात्राओं के प्रतिभा सम्मान समारोह और मुल्तानी बिरादरी सम्मेलन जैसे अहम विषयों को शामिल किया गया है।

इस आयोजन के ज़रिये बिरादरी के लोगों को एक मंच पर लाने, आपसी ताल्लुक़ात को बेहतर बनाने, समाज की प्रतिभाओं की हौसला-अफ़ज़ाई करने और सामाजिक ज़िम्मेदारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का पैग़ाम दिया गया है।

मुस्लिम समाज में तालीम, अख़लाक़, आपसी इत्तिहाद और ज़रूरतमंदों की मदद को हमेशा अहमियत दी जाती रही है। ऐसे कार्यक्रम नई नस्ल को अपनी सामाजिक ज़िम्मेदारियों से जोड़ने और समाज की बेहतरी के लिए मिल-जुलकर काम करने की प्रेरणा दे सकते हैं।

क़स्बा जलालाबाद, ज़िला शामली में होगा ‘मिर्ज़ा मुल्तानी मिलन समारोह’

इसी सिलसिले में मिली जानकारी के मुताबिक़, क़स्बा जलालाबाद, ज़िला शामली में जुमेरात, 15 अक्टूबर 2026 को सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक ‘मिर्ज़ा मुल्तानी मिलन समारोह’ आयोजित किए जाने की घोषणा की गई है। कार्यक्रम का निर्धारित स्थल जोया मैरिज होम, दिल्ली-सहारनपुर रोड, क़स्बा जलालाबाद, ज़िला शामली, उत्तर प्रदेश बताया गया है।

इस समारोह को भारत रत्न, मिसाइल मैन और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती के मौक़े से जोड़ते हुए तालीमी, मआशी, सियासी, समाजी और पर्यावरणीय क्षेत्रों में बेदारी और तरक़्क़ी का पैग़ाम दिया गया है।

मिली जानकारी के मुताबिक़, कार्यक्रम के संयोजक एवं आयोजकों में हाजी नज़ीर अहमद (जलालाबाद), खलील अहमद (बनत), सलीम अहमद (गढ़ी पुख़्ता) और सलीम अहमद (थाना भवन) सहित संबंधित संगठन के पदाधिकारियों का उल्लेख किया गया है।

तिलावत-ए-क़ुरआन से लेकर प्रतिभा सम्मान तक के कार्यक्रम

मिली जानकारी के मुताबिक़, जलालाबाद में प्रस्तावित समारोह की कार्यक्रम-सारणी में क़ुरआन-ए-पाक की तिलावत, तिलावत का तर्जुमा, नात-ए-रसूल ﷺ और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की ज़िंदगी तथा उनकी ख़िदमात से परिचय जैसे कार्यक्रम शामिल किए गए हैं।

इसके अलावा इस्तक़बालिया बयान, सोसायटी की गतिविधियों का तआरुफ़, सदर और अन्य ज़िम्मेदारों की ओर से संगठनात्मक कार्यों की जानकारी, विभिन्न उपसमितियों की पिछली कारगुज़ारियों और आइंदा के मंसूबों पर गुफ़्तगू तथा मेहमानों और वक्ताओं के ख़िताबात के लिए भी वक़्त निर्धारित किया गया है।

कार्यक्रम में नमाज़ और लंच के लिए भी समय रखा गया है। इसके साथ ही ‘मिर्ज़ा मुल्तानी सुपर आइकॉन प्रतिभा सम्मान समारोह’ आयोजित करने की घोषणा की गई है, जिसके ज़रिये विभिन्न क्षेत्रों में क़ाबिलियत का मुज़ाहिरा करने वाली प्रतिभाओं की हौसला-अफ़ज़ाई का उद्देश्य सामने रखा गया है।

कार्यक्रम-सारणी में आगामी साल के लिए कार्ययोजना तैयार करने, ज़िम्मेदारियों के निर्धारण और अगले आयोजन के स्थान की घोषणा जैसे विषयों का भी उल्लेख किया गया है।

डॉ. कलाम की जयंती और नई नस्ल की तरबियत का पैग़ाम

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की ज़िंदगी तालीम, मेहनत, ख़ुद-एतमादी और मुल्क की ख़िदमत की मिसाल के तौर पर याद की जाती है। उनका सफ़र इस बात की प्रेरणा देता है कि इंसान इल्म, लगन और लगातार कोशिश के ज़रिये अपनी मंज़िल हासिल कर सकता है।

ऐसे मौक़ों पर तालीमी बेदारी, बच्चों की हौसला-अफ़ज़ाई, नौजवानों की रहनुमाई और समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना ख़ास अहमियत रखता है। बिरादरी के सामाजिक कार्यक्रमों में इन विषयों को शामिल करना नई नस्ल को बेहतर मुस्तक़बिल की तरफ़ बढ़ने का हौसला दे सकता है।

दो आयोजन, अलग-अलग मंच और सामाजिक बेहतरी की उम्मीद

15 अक्टूबर 2026 को बागपत और क़स्बा जलालाबाद, ज़िला शामली में प्रस्तावित दोनों कार्यक्रमों का अपना अलग आयोजन, स्थान और कार्यक्रम-सारणी है। एक तरफ़ बिरादरी सम्मेलन और प्रतिभा सम्मान से जुड़ी गतिविधियों की घोषणा की गई है, तो दूसरी तरफ़ मिलन समारोह के माध्यम से संगठनात्मक चर्चा, तालीमी जागरूकता और प्रतिभाओं के सम्मान की योजना सामने आई है।

मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के लिए तालीम, आपसी इत्तिहाद, सामाजिक ख़िदमत और नई नस्ल की तरक़्क़ी जैसे विषय हमेशा अहम रहे हैं। उम्मीद की जाती है कि ऐसे आयोजन समाज के लोगों के बीच सकारात्मक संवाद को बढ़ावा देंगे और सामाजिक बेहतरी के लिए मिल-जुलकर काम करने की राह हमवार करेंगे।

यह रिपोर्ट दोनों आयोजनों के संबंध में मिली जानकारी पर आधारित है। कार्यक्रमों में वास्तविक भागीदारी, संपन्न हुई गतिविधियों और आयोजकों की ओर से लिए गए निर्णयों की तस्दीक़ आयोजन के बाद उपलब्ध जानकारी के आधार पर की जा सकेगी।


‘मुल्तानी समाज’ की ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल ‘मुल्तानी समाज’ के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार (विज्ञापन) क़ौमी सतह पर शाया (प्रकाशित) या प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो बराए मेहरबानी नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।

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‘मुल्तानी समाज’ — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।

🥀 इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन 🥀इंतिक़ाल-ए-वकीला बी से सरधना में छाया ग़म का माहौल, लगभग 100 साल की उम्र में दुनिया-ए-फ़ानी से रुख़्सत; नम आँखों से दी जाएगी आख़िरी विदाई अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फ़िरत फ़रमाए,

उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर करे और तमाम अहले-ख़ानदान को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

सरधना (ज़िला मेरठ), उत्तर प्रदेश।
निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिली अफ़सोस के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात को इत्तिला दी जाती है कि क़स्बा सरधना, ज़िला मेरठ, उत्तर प्रदेश में गाँव बड़कली से ताल्लुक़ रखने वाले मोहतरम रशीद अहमद साहब की वालिदा-ए-मोहतरमा वकीला बी साहिबा, अहलिया-ए-मोहम्मद हफ़ीज़ साहब मरहूम, उम्र तक़रीबन 100 साल का आज दिन जुमेरात, बा-तारीख़ 15 अक्टूबर 2026 को तड़के तक़रीबन साढ़े चार बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूमा के इंतिक़ाल की ख़बर से उनके ख़ानदान, रिश्तेदारों, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और जानने वालों में ग़म की लहर दौड़ गई। उम्र के तक़रीबन सौ बरस मुकम्मल करने के बाद इस दार-ए-फ़ानी से रुख़्सत होने वाली मरहूमा अपने पीछे औलाद, पोते-पोतियों, नाते-नातिनों और भरे-पूरे ख़ानदान को ग़मज़दा छोड़ गई हैं। दुनिया की ज़िंदगी आरज़ी है और हर जान को आख़िरकार अपने रब की तरफ़ लौटकर जाना है। ऐसे मौक़े पर हम सबकी ज़िम्मेदारी है कि मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और उनके परिजनों को सब्र की तौफ़ीक़ के लिए अल्लाह तआला के हुज़ूर इल्तिजा करें।

🥀 मरहूमा अपने पीछे भरा-पूरा ख़ानदान छोड़ गईं

मिली हुई जानकारी के मुताबिक़, मरहूमा वकीला बी साहिबा के छह बेटों में मोहतरम रशीद अहमद साहब, मोहम्मद फ़ैयाज़ मरहूम, मोहम्मद शाहिद साहब, मोहम्मद दिलशाद साहब, मोहम्मद इरशाद साहब और मोहम्मद रईस साहब शामिल हैं। इसके अलावा उनकी दो बेटियाँ कनीज़ा बी और ख़ातिजा बी हैं।

मरहूमा अपने पीछे बेटों, बेटियों, पोते-पोतियों, नाते-नातिनों, अन्य परिजनों और तमाम अज़ीज़-ओ-अक़ारिब पर मुश्तमिल एक भरा-पूरा ख़ानदान छोड़कर इस दुनिया से हमेशा के लिए रुख़्सत हो गईं। माँ का साया उठ जाना औलाद के लिए ऐसा सदमा है, जिसकी कमी ज़िंदगी भर महसूस होती रहती है। इस मुश्किल घड़ी में तमाम अहले-ख़ानदान के साथ हमदर्दी का इज़हार करते हुए उनके लिए सब्र और हौसले की दुआ की जाती है।

🕌 नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन की इत्तिला

मिली हुई इत्तिला के मुताबिक़, मरहूमा की मैय्यत को बाद नमाज़-ए-ज़ुहर सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम बिरादराना हज़रात, रिश्तेदारों, दोस्तों और अहबाब से गुज़ारिश है कि नमाज़-ए-जनाज़ा में शरीक होकर मरहूमा के हक़ में दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और इस नेक अमल के ज़रिये सवाब हासिल करें।

अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और लग़ज़िशों से दरगुज़र फ़रमाए, उनकी नेकियों को क़ुबूल फ़रमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए। आमीन।

🤲 मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत

ऐ अल्लाह! वकीला बी मरहूमा पर अपनी ख़ास रहमत नाज़िल फ़रमा। उनकी मग़फ़िरत फ़रमा, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे। उनकी क़ब्र को वसीअ और रौशन फ़रमा, उसमें नूर ही नूर अता फ़रमा और उसे हर तरह की तंगी, वहशत और अज़ाब से महफ़ूज़ रख।

ऐ रब्बुल आलमीन! मरहूमा की तमाम ख़ताओं को माफ़ फ़रमा, उनकी नेकियों को अपने दरबार में शरफ़-ए-क़ुबूलियत अता फ़रमा और उनके दर्जात बुलंद फ़रमा। उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में जगह अता फ़रमा और हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ की शफ़ाअत नसीब फ़रमा।

ऐ अल्लाह! जब मरहूमा को क़ब्र में उतारा जाए, उस वक़्त उन पर अपनी रहमत फ़रमा। उनकी क़ब्र को सुकून, सलामती और नूर का मरकज़ बना दे। सवालात-ए-क़ब्र के वक़्त उन्हें साबित-क़दम रख और अपने फ़ज़्ल-ओ-करम से उनकी मंज़िलें आसान फ़रमा।

ऐ मालिक-ए-कायनात! मरहूमा की औलाद, उनके बेटों-बेटियों, पोते-पोतियों, नाते-नातिनों और तमाम अहले-ख़ानदान को इस सदमे को बर्दाश्त करने की हिम्मत अता फ़रमा। उनके दिलों को सब्र-ओ-सुकून दे, उन्हें सब्र-ए-जमील अता फ़रमा और इस मुश्किल घड़ी में उनकी मदद फ़रमा।

आमीन सुम्मा आमीन, या रब्बुल आलमीन।

🤲 दफ़्न और मिट्टी देने के मौक़े की मस्नून दुआएँ

1. मैय्यत को क़ब्र में उतारते वक़्त पढ़ी जाने वाली दुआ:

بِسْمِ اللّٰهِ وَعَلَىٰ مِلَّةِ رَسُولِ اللّٰهِ ﷺ

तर्जुमा: अल्लाह के नाम के साथ और रसूलुल्लाह ﷺ के दीन और तरीक़े पर।

2. मिट्टी देने और क़ब्रिस्तान में दुआ करने के मौक़े पर:

ऐ अल्लाह! इस मरहूमा की मग़फ़िरत फ़रमा, उन पर रहम फ़रमा, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमा। उनके अहले-ख़ानदान को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा। आमीन।

3. ताज़ियत और सब्र की दुआ:

إِنَّا لِلّٰهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ

तर्जुमा: बेशक हम अल्लाह ही के हैं और बेशक हमें उसी की तरफ़ लौटकर जाना है।

इस मौक़े पर तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि मरहूमा को अपनी ख़ास दुआओं में याद रखें और उनके लिए मग़फ़िरत की दुआ करें। अल्लाह तआला मरहूमा की आख़िरी मंज़िल आसान फ़रमाए और उन्हें अपनी रहमत के साये में जगह अता फ़रमाए। आमीन।


📰 मुल्तानी समाज — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, नई दिल्ली से प्रसारित, मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल ‘मुल्तानी समाज’ के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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‘मुल्तानी समाज’ — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।

बागपत कमेटी के शानदार इंतज़ाम को दिल से सलाम — बुज़ुर्गों की इज़्ज़त, बेटियों की ख़ुशियाँ और बिरादरी के इत्तिहाद का ख़ूबसूरत पैग़ाम बना मुल्तानी वेलफेयर सोसायटी का बैनर

बागपत की सरज़मीन पर 15 अक्टूबर को सजेगी ख़ुशियों, ख़िदमत, इल्म और बिरादराना इत्तिहाद की महफ़िल; बुज़ुर्गों की एकजुट तस्वीर ने जीता सबका दिल

बागपत, उत्तर प्रदेश। माशाअल्लाह, मुल्तानी वेलफेयर सोसायटी, जनपद बागपत की जानिब से तैयार किया गया ख़ूबसूरत बैनर देखकर दिल को बेहद ख़ुशी और इत्मीनान हासिल हुआ। बैनर में जिस सलीक़े, ख़ूबसूरती और एहतराम के साथ तमाम बुज़ुर्गों, सरपरस्तों और बिरादरी के ज़िम्मेदारों को एक साथ जगह दी गई है, वह क़ाबिल-ए-तारीफ़ है। पहले जिन अल्फ़ाज़ और जानकारियों की कमी महसूस हो रही थी, अब वह भी मुकम्मल और साफ़ नज़र आ रही हैं।

यह महज़ एक बैनर नहीं, बल्कि बिरादरी के आपसी ताल्लुक़ात, बुज़ुर्गों के एहतराम, बेटियों की ख़ुशियों और आने वाली नस्लों के बेहतर मुस्तक़बिल का एक ख़ूबसूरत पैग़ाम है।

🌙 एक ही फ़्रेम में बुज़ुर्गों का एहतराम, इत्तिहाद की मिसाल

इस बैनर की सबसे ख़ास और दिल को छू लेने वाली बात यह है कि ऊपर से नीचे तक हमारी बिरादरी के बुज़ुर्गों और ज़िम्मेदारों को एक साथ पेश किया गया है। किसी भी क़ौम की असल दौलत उसके बुज़ुर्गों का तजुर्बा, उनकी दुआएँ, उनकी रहनुमाई और नई नस्लों के लिए उनकी फ़िक्र होती है।

जब बुज़ुर्ग एक साथ नज़र आते हैं, तो नौजवानों को हौसला मिलता है, बच्चों को अपनी पहचान पर फ़ख़्र महसूस होता है और बिरादरी में आपसी मोहब्बत व इत्तिहाद का जज़्बा मज़बूत होता है।

हमारी यही एकजुटता हमारी असल ताक़त है। अल्लाह तआला हमारी बिरादरी के तमाम बुज़ुर्गों को सेहत, आफ़ियत, इज़्ज़त और दराज़ी-ए-उम्र अता फ़रमाए तथा उनकी रहनुमाई को हमारी आने वाली नस्लों के लिए ज़रिया-ए-रौशनी बनाए। आमीन!

✨ एक कार्यक्रम, कई नेक मक़ासिद

बैनर पर दर्ज जानकारी के मुताबिक़, पूर्व राष्ट्रपति-ए-जम्हूरिया-ए-हिंद डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम साहब के यौमे पैदाइश के मौक़े पर तीन अहम मक़ासिद को सामने रखते हुए इस प्रोग्राम का आयोजन किया जा रहा है—

  • बेटियों का निकाह: बेटियों की ख़ुशियों, उनके बेहतर मुस्तक़बिल और समाज में ख़ुशियों के पैग़ाम को आम करने की एक अहम कोशिश।
  • छात्र-छात्रा प्रतिभा सम्मान समारोह: तालीम के मैदान में मेहनत करने वाले बच्चों की हौसलाअफ़ज़ाई और उनकी कामयाबियों का एतराफ़।
  • मुल्तानी बिरादरी सम्मेलन: बिरादरी के लोगों को एक मंच पर लाकर आपसी राब्ते, मशवरे, मोहब्बत और इत्तिहाद को फ़रोग़ देने की कोशिश।

ये तीनों पहलू अपने अंदर एक अहम सामाजिक पैग़ाम समेटे हुए हैं। बेटियों की ख़ुशियाँ, बच्चों की तालीमी तरक़्क़ी और बिरादरी की एकजुटता—ये ऐसे मक़ासिद हैं जिनके लिए मिल-जुलकर कोशिश करना वक़्त की अहम ज़रूरत है।

📍 कार्यक्रम की मुकम्मल तफ़सील

आयोजक: मुल्तानी वेलफेयर सोसायटी, जनपद बागपत

दिन: जुमेरात, 15 अक्टूबर 2026

वक़्त: सुबह 10:00 बजे

मक़ाम: आशीर्वाद गार्डन, दिल्ली रोड, बागपत

प्रोग्राम: बेटियों का निकाह, छात्र-छात्रा प्रतिभा सम्मान समारोह एवं मुल्तानी बिरादरी सम्मेलन।

🌹 बागपत की टीम की मेहनत को दिल से सलाम

बागपत कमेटी ने जिस मोहब्बत, लगन और तवज्जोह के साथ इस कार्यक्रम की तैयारी को बैनर पर पेश किया है, वह हौसला बढ़ाने वाली बात है। किसी भी सामाजिक काम की ख़ूबसूरती सिर्फ़ उसके बड़े इंतज़ामात में नहीं, बल्कि उसकी नेक नीयती, आपसी तालमेल और लोगों को साथ लेकर चलने के जज़्बे में होती है।

अल्लाह तआला बागपत कमेटी के तमाम ज़िम्मेदारों की मेहनत को क़ुबूल फ़रमाए, उनके दरमियान इत्तिहाद और मोहब्बत क़ायम रखे और इस प्रोग्राम को ख़ैर-ओ-बरकत, कामयाबी और ख़ुशियों का ज़रिया बनाए। आमीन या रब्बुल आलमीन!

🖋️ इत्तिहाद के नाम एक ख़ूबसूरत पैग़ाम

चिराग़ जलते हैं तो अँधेरा ख़ुद ही मिट जाता है,
क़ौम में इत्तिहाद हो तो मुक़द्दर भी सँवर जाता है।

बुज़ुर्गों की दुआओं से महकती हैं नस्लें,
मोहब्बत से जुड़ें दिल तो बदल जाती हैं शक्लें।

यक़ीनन, जब किसी बिरादरी के बुज़ुर्ग, नौजवान और ज़िम्मेदार लोग एक-दूसरे के एहतराम के साथ आगे बढ़ते हैं, तो समाज में बेहतरी की नई राहें खुलती हैं। हमारी कोशिश होनी चाहिए कि ऐसे कार्यक्रम सिर्फ़ एक दिन की यादगार बनकर न रह जाएँ, बल्कि इनके ज़रिये तालीम, समाजी इस्लाह, बेटियों की बेहतरी और आपसी भाईचारे के लिए लगातार काम करने का जज़्बा पैदा हो।

बागपत कमेटी की इस ख़ूबसूरत सोच और मेहनत को दिल से सलाम!

अल्लाह करे कि यह इत्तिहाद हमेशा क़ायम रहे, बिरादरी में मोहब्बत बढ़े और हमारी आने वाली नस्लें इल्म, अख़लाक़, अमल और ख़िदमत के मैदान में नई मिसालें क़ायम करें। आमीन!


📰 मुल्तानी समाज — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत होने तथा मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित होने का परिचय देने वाली, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका ‘मुल्तानी समाज’ की उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

हमारा मक़सद बिरादरी की ख़बरों, समाजी सरगर्मियों, तालीमी कामयाबियों, ख़ुशियों, ग़म के मौक़ों और ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ से जुड़े नेक कामों को क़ौमी सतह पर आवाज़ देना है।

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अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार क़ौमी सतह पर शाया व प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।

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🌹 ‘मुल्तानी समाज’ — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।

🥀 इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन 🥀नागौर की जरीना बानो (रानी) का इंतकाल, मुल्तानी बिरादरी में ग़म की लहर; अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फ़िरत फ़रमाए और जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए — आमीन या रब्बुल आलमीन

नागौर, राजस्थान।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिली अफ़सोस के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि आज दिन बुध, बा-तारीख़ 14 अक्टूबर 2026 को नक़्शबंद मस्जिद के पास, लोहार पूरा, नागौर, राजस्थान निवासी जनाब शौकत अली साहब (रांझे वाले) की ज़ौजा-ए-मोहतरमा जरीना बानो (रानी) साहिबा का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतक़ाल हो गया है।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

बेशक हम सब अल्लाह ही के हैं और उसी की तरफ़ लौटकर जाने वाले हैं।

मरहूमा के इंतक़ाल की ख़बर से अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी के लोगों में ग़म और अफ़सोस की कैफ़ियत है। यह दुनिया फ़ानी है और हर जान को एक दिन अपने परवरदिगार की तरफ़ लौटना है। मौत एक ऐसी हक़ीक़त है जिससे किसी को मफ़र नहीं, मगर किसी अपने के दुनिया से रुख़्सत हो जाने का सदमा दिल को ग़मगीन कर देता है।

इस पुरदर्द मौक़े पर हम अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की बारगाह में दस्त-ब-दुआ हैं कि वह मरहूमा पर अपनी ख़ास रहमत नाज़िल फ़रमाए, उनकी मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी ख़ताओं और लग़ज़िशों से दरगुज़र फ़रमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला से आला मक़ाम अता फ़रमाए। आमीन।

🤲 मरहूमा की मग़फ़िरत के लिए ख़ास दुआ

اَللّٰهُمَّ اغْفِرْ لَهَا وَارْحَمْهَا وَعَافِهَا وَاعْفُ عَنْهَا

तर्जुमा: ऐ अल्लाह! मरहूमा की मग़फ़िरत फ़रमा, उन पर रहम फ़रमा, उन्हें आफ़ियत अता फ़रमा और उनसे दरगुज़र फ़रमा।

ऐ अल्लाह! मरहूमा की क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा। उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे। क़ब्र की तन्हाई को अपनी रहमत से दूर फ़रमा, उनकी मंज़िलें आसान फ़रमा और उन्हें सवालात-ए-क़ब्र के वक़्त साबित-क़दम रख।

ऐ हमारे परवरदिगार! अगर मरहूमा से ज़िंदगी में कोई ख़ता, ग़लती या कोताही हुई हो तो अपने फ़ज़्ल-ओ-करम से माफ़ फ़रमा। उनकी नेकियों को क़ुबूल फ़रमा, उनके दरजात बुलंद फ़रमा और उन्हें अपने महबूब बंदों के साथ जन्नतुल फ़िरदौस में जगह अता फ़रमा।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

🕊️ दफ़्न और मिट्टी देने के मौक़े पर पढ़ी जाने वाली दुआएँ

इस पुरदर्द वक़्त में तमाम अहल-ए-ईमान से गुज़ारिश है कि मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएँ और उनके घर वालों को सब्र-ओ-हौसला अता होने की दुआ करें।

1. क़ब्रिस्तान में दाख़िल होते वक़्त की दुआ

اَلسَّلَامُ عَلَيْكُمْ أَهْلَ الدِّيَارِ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُسْلِمِينَ، وَإِنَّا إِنْ شَاءَ اللّٰهُ بِكُمْ لَاحِقُونَ، نَسْأَلُ اللّٰهَ لَنَا وَلَكُمُ الْعَافِيَةَ

तर्जुमा: ऐ मोमिनों और मुसलमानों के घर वालो! तुम पर सलाम हो। इंशाअल्लाह, हम भी तुमसे आ मिलने वाले हैं। हम अल्लाह से अपने और तुम्हारे लिए आफ़ियत माँगते हैं।

2. मैय्यत को क़ब्र में उतारते वक़्त की दुआ

بِسْمِ اللّٰهِ وَعَلَى مِلَّةِ رَسُولِ اللّٰهِ

तर्जुमा: अल्लाह के नाम के साथ और अल्लाह के रसूल ﷺ के दीन पर।

यह दुआ मैय्यत को क़ब्र में रखते वक़्त पढ़ी जाती है।

3. मिट्टी देते वक़्त की याददिहानी

मिट्टी देते वक़्त इंसान को अपनी पैदाइश, दुनिया में आमद और आख़िरत की वापसी याद रखनी चाहिए। क़ुरआन-ए-करीम में इरशाद है:

مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ

तर्जुमा: इसी ज़मीन से हमने तुम्हें पैदा किया, इसी में तुम्हें लौटाएँगे और इसी से तुम्हें दोबारा निकालेंगे।

(सूरह ताहा, आयत 55)

4. दफ़्न के बाद मरहूमा के लिए दुआ

अल्लाह तआला से दुआ है कि वह मरहूमा को मग़फ़िरत, रहमत और सुकून अता फ़रमाए। क़ब्र में उन्हें साबित-क़दम रखे और उनकी आख़िरत को बेहतर फ़रमाए।

इस्लामी तालीमात के मुताबिक़ दफ़्न के बाद मैय्यत के लिए मग़फ़िरत और साबित-क़दमी की दुआ करना मुस्तहब है। तमाम हाज़िरीन से गुज़ारिश है कि मरहूमा के हक़ में दिल से दुआ करें।

🤲 अहल-ए-ख़ाना के लिए दुआ-ए-सब्र

ऐ अल्लाह! जनाब शौकत अली साहब (रांझे वाले), मरहूमा के तमाम घर वालों, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और अहबाब को इस सदमे को बर्दाश्त करने की ताक़त अता फ़रमा। उनके दिलों को सब्र-ओ-क़रार अता फ़रमा और उन्हें इस मुश्किल वक़्त में अपने ज़िक्र और रहमत से सुकून नसीब फ़रमा।

ऐ अल्लाह! मरहूमा के घर वालों के लिए इस इम्तिहान को आसान फ़रमा। उन्हें सब्र-ए-जमील अता फ़रमा और मरहूमा की याद को उनके लिए नेकियों और दुआओं का ज़रिया बना दे।

आमीन सुम्मा आमीन।

🥀 मुल्तानी समाज की जानिब से पुरसा-ए-ताज़ियत

राष्ट्रीय समाचार पत्रिका “मुल्तानी समाज” की पूरी टीम, उत्तर प्रदेश डेस्क और प्रधान संपादक की जानिब से मरहूमा जरीना बानो (रानी) साहिबा के इंतक़ाल पर जनाब शौकत अली साहब और तमाम पसमान्दगान-ए-मरहूमा की ख़िदमत में दिली ताज़ियत और पुरसा पेश किया जाता है।

हम इस ग़म की घड़ी में अहल-ए-ख़ाना के साथ अपनी हमदर्दी का इज़हार करते हैं और दुआगो हैं कि अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फ़िरत फ़रमाए, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए और तमाम घर वालों को सब्र-ए-जमील नसीब फ़रमाए।

अल्लाहुम्मग़फ़िर लहा वरहमहा, वजअल मक़ामहा फ़िल जन्नत।

ऐ अल्लाह! उनकी मग़फ़िरत फ़रमा, उन पर रहम फ़रमा और जन्नत में उनका मक़ाम अता फ़रमा।

आमीन या रब्बुल आलमीन।


📰 मुल्तानी समाज — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार क़ौमी सतह पर शाया या प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो बराए मेहरबानी नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।

📞 9410652990

📞 8010884848

आपका एतमाद ही हमारी सबसे बड़ी ताक़त है।

“मुल्तानी समाज” — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।

🥀 इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन 🥀निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ ताज़ियती ख़बर

ख़ातून-ए-इस्लाम शफ़ीक़न बी का इंतिक़ाल, ख़तौली में पसरा मातम; नमाज़-ए-जनाज़ा बाद नमाज़-ए-असर, ग़ौरे-ग़रीबा क़ब्रिस्तान में होगी तदफ़ीन

ख़तौली, मुज़फ़्फ़रनगर, उत्तर प्रदेश।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिली अफ़सोस के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात को इत्तिला दी जाती है कि मोहल्ला इस्लाम नगर, क़स्बा ख़तौली, ज़िला मुज़फ़्फ़रनगर, उत्तर प्रदेश की साकिन शफ़ीक़न बी साहिबा, अहलिया-ए-जनाब रहीमुद्दीन साहब मरहूम, उम्र तक़रीबन 80 साल, आज बुध, बा-तारीख़ 14 अक्टूबर 2026 को सुबह तक़रीबन 7 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इस दार-ए-फ़ानी से कूच फ़रमा गईं।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

बेशक हम सब अल्लाह ही के हैं और उसी की तरफ़ हमें लौटकर जाना है।

मरहूमा के इंतिक़ाल की ख़बर से अहल-ए-ख़ाना, ख़ानदान, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और तमाम जानने वालों में ग़म की लहर दौड़ गई है। मरहूमा अपने पीछे अपने बेटे-बेटियों, पोते-पोतियों, नाते-नातिनों समेत भरा-पूरा कुनबा, ख़ानदान और मुतअद्दिद अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को सोगवार छोड़कर हमेशा के लिए इस दुनिया से रुख़्सत हो गईं।

एक बुज़ुर्ग ख़ातून का दुनिया से चले जाना घर-परिवार के लिए ऐसा सदमा है जिसकी कमी को आसानी से पूरा नहीं किया जा सकता। उम्र के इस पड़ाव पर अपनों से जुदाई का यह लम्हा अहल-ए-ख़ाना के लिए बेहद तकलीफ़देह है। अल्लाह तआला तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए और इस सदमे को बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ बख़्शे। आमीन।

मरहूमा का मायका मंगलौर में था

मिली हुई मालूमात के मुताबिक़, मरहूमा शफ़ीक़न बी साहिबा का मायका क़स्बा मंगलौर, ज़िला हरिद्वार, उत्तराखंड में था। बताया जाता है कि अब उनके मायके वाले मुज़फ़्फ़रनगर शहर में आबाद हो गए हैं।

नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन की मालूमात

तमाम बिरादराना हज़रात को इत्तिला दी जाती है कि मरहूमा की नमाज़-ए-जनाज़ा आज बाद नमाज़-ए-असर अदा की जाएगी। इसके बाद उन्हें रोडवेज़ बस स्टैंड के सामने वाक़े ग़ौरे-ग़रीबा क़ब्रिस्तान, ख़तौली में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम अहबाब, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फ़रमाकर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और इस कार-ए-ख़ैर में हिस्सा लेकर सवाब-ए-दारैन हासिल करें।

🤲 मरहूमा की मग़फ़िरत के लिए दुआ

अल्लाहुम्मग़फ़िर लहा वरहमहा व आफ़िहा वअफ़ु अन्हा।

ऐ अल्लाह! मरहूमा की मग़फ़िरत फ़रमा, उन पर अपनी ख़ास रहमत नाज़िल फ़रमा, उन्हें आफ़ियत अता फ़रमा और उनकी ख़ताओं से दरगुज़र फ़रमा।

या अल्लाह! मरहूमा की तमाम छोटी-बड़ी ख़ताओं को माफ़ फ़रमा। उनकी नेकियों को क़ुबूल फ़रमा, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा और उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे। उनकी क़ब्र की तंगी और वहशत को दूर फ़रमा, उन्हें सवालात-ए-क़ब्र में साबित-क़दम रख और अपनी रहमत के साये में जगह अता फ़रमा।

ऐ रब्बुल आलमीन! मरहूमा को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमा, उन्हें हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ की शफ़ाअत नसीब फ़रमा और उनके दरजात बुलंद से बुलंदतर फ़रमा।

🤲 मैय्यत को क़ब्र में उतारते वक़्त की दुआ

मैय्यत को क़ब्र में उतारते वक़्त यह दुआ पढ़ना मसनून है:

بِسْمِ اللَّهِ وَعَلَى مِلَّةِ رَسُولِ اللَّهِ ﷺ

तर्जुमा: अल्लाह के नाम के साथ और रसूलुल्लाह ﷺ के दीन व तरीक़े पर।

या अल्लाह! इस अमानत को तेरी बारगाह में पेश करते हैं। मरहूमा पर अपनी रहमत फ़रमा, उन्हें क़ब्र में सुकून अता फ़रमा और अपनी रज़ा व मग़फ़िरत से नवाज़ दे। आमीन।

🤲 मिट्टी देते वक़्त की दुआ और आख़िरत की याद

मिट्टी देते वक़्त कुरआन-ए-करीम की यह आयत पढ़ना मुनासिब है:

مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ

तर्जुमा: हमने तुम्हें इसी ज़मीन से पैदा किया, इसी में तुम्हें वापस लौटाएँगे और इसी से तुम्हें दोबारा निकालेंगे।

(सूरह ताहा, आयत 55)

मिट्टी देने के मौक़े पर तमाम हाज़िरीन को चाहिए कि आख़िरत को याद करें, मरहूमा के लिए मग़फ़िरत की दुआ करें और अहल-ए-ख़ाना को सब्र की तलक़ीन करें।

🤲 दफ़्न के बाद की दुआ

जनाज़े की तदफ़ीन के बाद मरहूमा के लिए मग़फ़िरत और साबित-क़दमी की दुआ करना चाहिए।

اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهَا وَثَبِّتْهَا عِنْدَ السُّؤَالِ

तर्जुमा: ऐ अल्लाह! इनकी मग़फ़िरत फ़रमा और सवाल के वक़्त इन्हें साबित-क़दम रख।

या अल्लाह! मरहूमा को अपनी रहमत में जगह अता फ़रमा। उनकी क़ब्र को आरामगाह बना, उन्हें अज़ाब-ए-क़ब्र से महफ़ूज़ रख और रोज़-ए-महशर उन्हें अपने नेक बंदों के साथ उठाना। उनके तमाम गुनाहों को माफ़ फ़रमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला दर्जा अता फ़रमा।

या अल्लाह! उनके तमाम बच्चों, पोते-पोतियों, नाते-नातिनों, रिश्तेदारों और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा। उनके दिलों को सुकून दे, इस सदमे को बर्दाश्त करने की हिम्मत अता फ़रमा और तमाम ख़ानदान को अपनी हिफ़ाज़त में रख।

आमीन या रब्बल आलमीन।

तफ़सीली मालूमात के लिए राब्ता करें

मैय्यत और नमाज़-ए-जनाज़ा के सिलसिले में मज़ीद मालूमात हासिल करने के लिए जनाब अब्दुल क़य्यूम साहब से नीचे दिए गए मोबाइल नंबर पर राब्ता फ़रमा सकते हैं।

📞 मोबाइल नंबर: 9358509980


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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रकाशित व प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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Tuesday, October 13, 2026

🥀 इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन 🥀कम उम्र में समद मिर्ज़ा का दर्दनाक इंतिक़ाल, मिर्ज़ा ख़ानदान और बिरादरी में ग़म की लहर

हादसे में गंभीर रूप से ज़ख़्मी होने के बाद सुभारती हॉस्पिटल मेरठ में ली आख़िरी साँस, नम आँखों से दी जा रही हैं ख़िराज-ए-अक़ीदत और मग़फ़िरत की दुआएँ

मुज़फ़्फ़रनगर/मेरठ, उत्तर प्रदेश।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

बेहद रंज-ओ-ग़म, दिली अफ़सोस और बोझिल दिल के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि वार्ड नंबर 4, अलावलपुर रोड, मुज़फ़्फ़रनगर, उत्तर प्रदेश के साजिद मिर्ज़ा (मथाने वाले) के फ़रज़ंद और छुटमलपुर, ज़िला सहारनपुर की नगर पंचायत चेयरपर्सन के भतीजे समद मिर्ज़ा का मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को इलाज के दौरान इंतिक़ाल हो गया।

मिली हुई इत्तिला के मुताबिक़, समद मिर्ज़ा एक हादसे में गंभीर रूप से ज़ख़्मी हो गए थे। उन्हें बेहतर इलाज के लिए मेरठ के सुभारती हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहाँ ज़िंदगी और मौत के दरमियान जारी जद्दोजहद के बाद आख़िरकार उन्होंने दम तोड़ दिया। उनकी कम उम्र में इस दुनिया-ए-फ़ानी से रुख़्सती की ख़बर ने अहल-ए-ख़ाना, रिश्तेदारों, अज़ीज़ों, दोस्तों और बिरादरी के लोगों को गहरे सदमे और रंज में मुब्तिला कर दिया है।

समद मिर्ज़ा की जुदाई का यह सदमा उनके घरवालों के लिए ऐसा दुख है, जिसकी भरपाई करना आसान नहीं। जिस उम्र में इंसान की ज़िंदगी उम्मीदों, ख़्वाबों और नए अरमानों से सजी होती है, उसी उम्र में उनका दुनिया से चले जाना हर सुनने वाले के दिल को ग़मगीन कर रहा है। इस दर्दनाक ख़बर से मिर्ज़ा ख़ानदान और उनसे मुहब्बत रखने वाले तमाम लोगों में शोक की लहर दौड़ गई है।

अल्लाह तआला मरहूम के तमाम घरवालों, वालिदैन, अहल-ए-ख़ाना और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को इस मुश्किल वक़्त में सब्र-ओ-हौसला अता फ़रमाए। आमीन।

🕊️ मरहूम की मग़फ़िरत के लिए दिली दुआ

इस मौक़े पर तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि मरहूम समद मिर्ज़ा की मग़फ़िरत, रहमत और बुलंदी-ए-दरजात के लिए ख़ुसूसी दुआ फ़रमाएँ।

ऐ अल्लाह! समद मिर्ज़ा की मग़फ़िरत फ़रमा, उनकी ख़ताओं और लग़ज़िशों से दरगुज़र फ़रमा, उनकी नेकियों को क़ुबूल फ़रमा और अपनी बेपनाह रहमत के साये में जगह अता फ़रमा।

या रब्बुल आलमीन! मरहूम पर अपना ख़ास करम फ़रमा, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा, उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे। क़ब्र की तंगी, वहशत और हर तकलीफ़ से महफ़ूज़ फ़रमा। हिसाब-ओ-किताब में आसानी फ़रमा और रोज़-ए-क़ियामत उन्हें अपने महबूब बंदों के साथ उठाना।

ऐ अल्लाह! मरहूम को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा, उन्हें अपने नबी हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ की शफ़ाअत नसीब फ़रमा और उनके वालिदैन व अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा।

ऐ अल्लाह! इस सदमे से टूटे हुए दिलों को सुकून अता फ़रमा, घरवालों की आँखों के आँसू पोंछ दे और उन्हें इस इम्तिहान को बर्दाश्त करने की ताक़त अता फ़रमा। आमीन या रब्बुल आलमीन।

🤲 नमाज़-ए-जनाज़ा, तदफ़ीन और मिट्टी देने के वक़्त की दुआएँ

नमाज़-ए-जनाज़ा, तदफ़ीन और सुपुर्द-ए-ख़ाक किए जाने के वक़्त तमाम हाज़िरीन से गुज़ारिश है कि मरहूम के लिए ख़ुलूस-ए-दिल से मग़फ़िरत की दुआ करें। नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन का सही वक़्त, तारीख़ तथा मुक़ाम की तस्दीक़ अहल-ए-ख़ाना से की जाए।

1. मैय्यत को क़ब्र में उतारते वक़्त की मस्नून दुआ

अरबी: بِسْمِ اللَّهِ وَعَلَى مِلَّةِ رَسُولِ اللَّهِ

हिंदी उच्चारण: बिस्मिल्लाहि व अला मिल्लति रसूलिल्लाह।

मफ़हूम: अल्लाह के नाम के साथ और अल्लाह के रसूल ﷺ के दीन व तरीक़े पर।

2. मैय्यत को मिट्टी देते वक़्त की याद-दिहानी

अल्लाह तआला ने इंसान की पैदाइश मिट्टी से फ़रमाई और उसी की तरफ़ उसकी वापसी है। क़ब्र पर मिट्टी डालते वक़्त क़ुरआन मजीद की यह आयत पढ़ना मुस्तहब है:

अरबी: مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ

हिंदी उच्चारण: मिन्हा ख़लक़नाकुम व फ़ीहा नुईदुकुम व मिन्हा नुख़रिजुकुम तारतन उख़रा।

मफ़हूम: इसी मिट्टी से हमने तुम्हें पैदा किया, इसी में तुम्हें वापस लौटाएँगे और इसी से तुम्हें दोबारा निकालेंगे।

(सूरह ताहा, आयत 55)

3. दफ़न के बाद मरहूम के लिए दुआ

दफ़न के बाद मरहूम के लिए मग़फ़िरत और साबित-क़दमी की दुआ करना चाहिए। रसूलुल्लाह ﷺ से दफ़न के बाद मैय्यत के लिए मग़फ़िरत और साबित-क़दमी की दुआ करने की तालीम साबित है।

अरबी: اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَثَبِّتْهُ

हिंदी उच्चारण: अल्लाहुम्मग़फ़िर लहू व सब्बित्हू।

मफ़हूम: ऐ अल्लाह! उनकी मग़फ़िरत फ़रमा और उन्हें साबित-क़दम रख।

ऐ अल्लाह! समद मिर्ज़ा को क़ब्र के सवालों में साबित-क़दम रख, उनकी मग़फ़िरत फ़रमा और उन्हें अपनी रहमत में जगह अता फ़रमा। आमीन।

नोट: मरहूम मर्द हैं, इसलिए उनके लिए दुआ में “लहू” का इस्तेमाल किया गया है। नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन के सिलसिले में स्थानीय इमाम या आलिम-ए-दीन की रहनुमाई के मुताबिक़ अमल किया जाए।

🖤 तमाम बिरादराना हज़रात से ख़ुसूसी गुज़ारिश

तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी, मिर्ज़ा ख़ानदान से ताल्लुक़ रखने वाले अज़ीज़ों, दोस्तों और तमाम अहबाब से गुज़ारिश है कि इस दुख की घड़ी में मरहूम के घरवालों के साथ हमदर्दी और दिलजोई का इज़हार करें। अपनी दुआओं में मरहूम को याद रखें और अल्लाह तआला से उनके लिए रहमत, मग़फ़िरत और जन्नतुल फ़िरदौस की दुआ करें।

किसी अज़ीज़ का दुनिया से चले जाना इंसानी ज़िंदगी की सबसे कठिन आज़माइशों में से एक है। ऐसे वक़्त में सब्र, दुआ, हमदर्दी और एक-दूसरे का सहारा बनना ही इंसानियत और भाईचारे की असल पहचान है।

अल्लाह तआला मरहूम समद मिर्ज़ा की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे, उनके दर्जात बुलंद फ़रमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए। उनके तमाम घरवालों को सब्र-ए-जमील और अज्र-ए-अज़ीम अता फ़रमाए।

आमीन सुम्मा आमीन, या रब्बुल आलमीन।


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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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