नई दिल्ली से प्रकाशित राष्ट्रीय समाचार पत्रिका ‘मुल्तानी समाज’ के पंजीकरण की सालगिरह पर हर साल 12 नवंबर को मनाया जाता है ‘मुल्तानी-डे’; मुफ़लिस बच्चियों की इज्तेमाई शादी, बिरादरी के तालीमयाफ़्ता नौजवानों की हौसला-अफ़ज़ाई और ख़िदमतगार अफ़राद को एज़ाज़ से नवाज़ने का एलान।
शामली, उत्तर प्रदेश। पैदाइशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की आवाज़, पहचान और सामाजिक बेदारी को आम करने के मक़सद से दिल्ली से प्रकाशित और पूरे हिंदुस्तान में प्रसारित राष्ट्रीय समाचार पत्रिका ‘मुल्तानी समाज’ अपने 13 साल मुकम्मल होने की ख़ुशी में इस साल भी 12 नवंबर 2026 को ‘मुल्तानी-डे’ मनाने जा रही है। इस मौक़े पर बिरादरी के लोगों से अपील की गई है कि वे इस दिन को सादगी, इत्तेहाद, तालीम, ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ और अपनी क़ौमी पहचान के पैग़ाम के साथ मनाएँ।
पत्रिका के प्रधान संपादक ज़मीर आलम के मुताबिक़, ‘मुल्तानी-डे’ किसी शख़्स की पैदाइश, सालगिरह या वफ़ात से जुड़ा हुआ दिन नहीं है, बल्कि यह दिन बिरादरी के नाम से शुरू की गई राष्ट्रीय समाचार पत्रिका ‘मुल्तानी समाज’ के पंजीकरण की याद और उसकी सामाजिक व सहाफ़ती सफ़र की ख़ुशी से मंसूब है।
12 नवंबर 2013 को रखी गई थी एक ख़ास सहाफ़ती सफ़र की बुनियाद
क़स्बा गढ़ी पुख़्ता, ज़िला शामली, उत्तर प्रदेश के रहने वाले ज़मीर आलम ने 12 नवंबर 2013 को अपनी बिरादरी ‘मुल्तानी समाज’ के नाम से पत्रिका के पंजीकरण की बुनियाद रखी थी। उनका मक़सद मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी के लोगों को एक ऐसा सहाफ़ती प्लेटफ़ॉर्म मुहैया कराना था, जिसके ज़रिए बिरादरी की ख़बरें, सामाजिक सरगर्मियाँ, तालीमी कामयाबियाँ, कारोबारी पेशरफ़्त, समाजी मसाइल और ख़ुशी व ग़म के मौक़ों की इत्तिलाआत पूरे मुल्क तक पहुँचाई जा सकें।
ज़मीर आलम के मुताबिक़, इसी तारीख़ की याद में हर साल 12 नवंबर को ‘मुल्तानी-डे’ मनाने का सिलसिला शुरू किया गया। वक़्त के साथ इस दिन को बिरादरी के लोगों से राब्ता क़ायम करने, नौजवान नस्ल को तालीम की तरफ़ राग़िब करने और समाजी ख़िदमत के जज़्बे को फ़रोग़ देने के मौक़े के तौर पर पेश किया गया।
आज ‘मुल्तानी समाज’ के नाम से समाचार पत्रिका के साथ न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल के ज़रिए भी बिरादरी की आवाज़ को सामने लाने की कोशिश की जा रही है।
‘मुल्तानी-डे’ को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कराने के लिए भी की गई थी पहल
प्रधान संपादक ज़मीर आलम ने बताया कि ‘मुल्तानी-डे’ को सरकारी सतह पर पहचान दिलाने और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कराने की ग़रज़ से कई साल पहले दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात समेत मुख़्तलिफ़ राज्यों की सरकारों को ख़ुतूत और ईमेल भेजे गए थे।
उनके मुताबिक़, इस सिलसिले में कुछ सरकारी दफ़्तरों की तरफ़ से ईमेल के ज़रिए जवाब भी मौसूल हुए थे। उनका कहना है कि यह कोशिश इस दिन को बिरादरी की सहाफ़ती और समाजी पहचान के साथ जोड़कर महफ़ूज़ करने की ग़रज़ से की गई थी।
हालाँकि, इस पहल के नतीजे में ‘मुल्तानी-डे’ को बाक़ायदा सरकारी मान्यता या सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किए जाने की मौजूदा हैसियत की तस्दीक़ संबंधित सरकारी दस्तावेज़ों से की जानी ज़रूरी है।
‘मुल्तानी-डे’ के नाम और इवेंट को लेकर उठे सवाल
ज़मीर आलम ने अपनी बात रखते हुए कहा कि पिछले कुछ अरसे से बिरादरी की कुछ तंजीमों की तरफ़ से अक्टूबर के महीने में ऐसे प्रोग्राम किए जा रहे हैं, जिनमें ‘मुल्तानी-डे’ के नाम और उससे जुड़े इवेंट की तारीख़ व शुरुआत को लेकर मुख़्तलिफ़ दावे सामने आ रहे हैं।
उनका इल्ज़ाम है कि कुछ तंजीमें उनके शुरू किए गए इवेंट की पहचान को कमज़ोर करने और बिरादरी के लोगों को तारीख़ के हवाले से उलझाने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ‘मुल्तानी समाज’ की तरफ़ से 12 नवंबर की तारीख़ को पत्रिका के पंजीकरण की ख़ुशी से जोड़कर मनाया जाता रहा है और इस सिलसिले में उनके पास अपने पुराने रिकॉर्ड व दस्तावेज़ मौजूद हैं।
प्रधान संपादक ने कहा, “अगर पूरे हिंदुस्तान की कोई भी तंजीम ‘मुल्तानी समाज’ की पत्रिका के पंजीकरण से पहले ‘मुल्तानी-डे’ के इसी नाम और इसी हवाले से अपने इस्तेमाल के पुख़्ता सबूत पेश कर दे, तो हम अपने दावे पर दोबारा ग़ौर करने के लिए तैयार हैं।”
उन्होंने बिरादरी के तमाम ज़िम्मेदार अफ़राद से अपील की कि तारीख़ों और तहरीरी दावों पर बहस करते वक़्त दस्तावेज़ात, पुराने इश्तिहारात, पंजीकरण रिकॉर्ड और प्रकाशित सामग्री को बुनियाद बनाया जाए, ताकि आपसी इख़्तिलाफ़ात के बजाय हक़ीक़त और भाईचारे को फ़रोग़ मिले।
इस मामले में मुख़्तलिफ़ तंजीमों के दावों की स्वतंत्र तस्दीक़ और पुराने दस्तावेज़ों का जायज़ा लेना अहम है, ताकि बिरादरी के सामने तमाम पहलू वाज़ेह हो सकें।
12 ग़रीब बच्चियों की इज्तेमाई शादी का ख़्वाब
‘मुल्तानी-डे’ के मौक़े पर समाजी ख़िदमत को अहमियत देते हुए ज़मीर आलम ने 12 ज़रूरतमंद बच्चियों की इज्तेमाई शादी कराने के अपने मक़सद का भी इज़हार किया है। उनका कहना है कि समाज की असल तरक़्क़ी उसी वक़्त मुमकिन है, जब ख़ुशियों के मौक़ों पर ज़रूरतमंद परिवारों को भी याद रखा जाए और उनकी परेशानियों को कम करने के लिए अमली क़दम उठाए जाएँ।
उन्होंने कहा कि इज्तेमाई शादी जैसे कामों का मक़सद किसी एक परिवार या तंजीम की शोहरत नहीं, बल्कि उन घरों का सहारा बनना होना चाहिए जिनके लिए बच्चियों की शादी के अख़राजात उठाना मुश्किल हो जाता है।
इस तरह के नेक काम को अमली जामा पहनाने के लिए बिरादरी के साहिब-ए-हैसियत अफ़राद, समाजी कारकुनों और ख़ैरख़्वाहों का तआवुन अहम होगा, ताकि मदद इज़्ज़त-ए-नफ़्स के साथ और ज़रूरतमंद परिवारों की रज़ामंदी से पहुँचाई जा सके।
बिरादरी के ‘कोहिनूर हीरो’ को मिलेंगे ‘मुल्तानी गौरव अवॉर्ड’ और ‘मुल्तानी स्टार अवॉर्ड’
ज़मीर आलम ने बताया कि ‘मुल्तानी समाज’ की तरफ़ से बिरादरी का नाम रोशन करने वाले अफ़राद की पहचान करके उन्हें समाज के सामने लाने की कोशिश भी की जा रही है। इसके तहत तालीम, समाजी ख़िदमत और अपनी मेहनत से कामयाबी हासिल करने वाले लोगों की हौसला-अफ़ज़ाई के लिए ‘मुल्तानी गौरव अवॉर्ड’ और ‘मुल्तानी स्टार अवॉर्ड’ जैसे एज़ाज़ देने का इरादा है।
उन्होंने बताया कि ‘मुल्तानी स्टार’ का तसव्वुर ख़ास तौर पर तालीम से जुड़ा है। उनके बताए गए पैमाने के मुताबिक़, जिस घर में जितने ग्रेजुएट होंगे, उस घर को उतने ही स्टार अवॉर्ड से नवाज़ने की योजना है।
इस पहल का बुनियादी पैग़ाम यह है कि बिरादरी के घरों में तालीम का शौक़ बढ़े, बच्चे और बच्चियाँ आला तालीम हासिल करें और वालिदैन अपनी औलाद की पढ़ाई को पहली तरजीह दें।
आज के दौर में तालीम ही वह ताक़त है जो किसी भी समाज को ख़ुदएतमादी, रोज़गार, बेहतर मआशी हालात और समाजी एहतिराम की तरफ़ ले जा सकती है। लिहाज़ा, ऐसे एज़ाज़ात का असल मक़सद महज़ इनाम देना नहीं, बल्कि आने वाली नस्लों के लिए कामयाबी की मिसालें क़ायम करना होना चाहिए।
सोशल मीडिया पर ‘मुल्तानी-डे’ का मुफ़्त पोस्टर जारी करने की तैयारी
‘मुल्तानी समाज’ की तरफ़ से हर साल की तरह इस साल भी बिरादरी के लोगों के लिए उनके नाम और तस्वीर के साथ ‘मुल्तानी-डे’ का मुफ़्त पोस्टर तैयार करने की पहल की जा रही है। इस पोस्टर को लोग अपने सोशल मीडिया अकाउंट, फ़ेसबुक, व्हाट्सऐप स्टेटस और दूसरे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर अपने नाम से साझा कर सकेंगे।
पत्रिका की तरफ़ से उन तमाम लोगों का शुक्रिया अदा किया गया है जो हर साल पोस्टर बनवाकर और उसे सोशल मीडिया पर साझा करके इस मुहिम का हौसला बढ़ाते हैं।
जो अफ़राद अपना पोस्टर बनवाना चाहते हैं, वे अपनी पासपोर्ट साइज़ तस्वीर और ज़रूरी तफ़सीलात नीचे दिए गए मोबाइल नंबरों पर भेज सकते हैं:
‘मुल्तानी समाज’ राष्ट्रीय समाचार पत्रिका: 9410652990
प्रधान संपादक ज़मीर आलम: 8010884848
तस्वीर या पहचान से संबंधित दस्तावेज़ भेजते वक़्त अपनी निजी जानकारी की हिफ़ाज़त का ख़याल रखना भी ज़रूरी है। आधार कार्ड की पूरी तस्वीर भेजने के बजाय, अगर सिर्फ़ नाम और पहचान की तस्दीक़ मक़सद हो, तो पहले पत्रिका से पूछ लिया जाए कि क्या कोई कम संवेदनशील विकल्प क़बूल किया जा सकता है।
‘मुल्तानी-डे’ का पैग़ाम: इत्तेहाद, तालीम, ख़िदमत और अपनी पहचान
ज़मीर आलम का कहना है कि ‘मुल्तानी-डे’ को किसी शख़्सियत या एक तंजीम की शोहरत तक महदूद नहीं रखा जाना चाहिए। इस दिन का असल मक़सद बिरादरी के लोगों को एक-दूसरे के क़रीब लाना, तालीम की अहमियत उजागर करना, ज़रूरतमंदों की मदद करना और उन अफ़राद की हौसला-अफ़ज़ाई करना है जो अपनी मेहनत से समाज की तरक़्क़ी में हिस्सा डाल रहे हैं।
उन्होंने बिरादरी के तमाम बुज़ुर्गों, नौजवानों, तालीमयाफ़्ता अफ़राद, कारोबारियों, समाजी कारकुनों और मुख़्तलिफ़ तंजीमों से अपील की कि 12 नवंबर को अपने-अपने घरों में सादगी के साथ ‘मुल्तानी-डे’ मनाएँ और इस मौक़े पर इत्तेहाद, भाईचारे, तालीम और ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ का अहद करें।
उन्होंने कहा कि किसी भी बिरादरी की असल पहचान उसके तालीमयाफ़्ता नौजवानों, समाजी ख़िदमतगारों, ईमानदार कारोबारियों और एक-दूसरे के काम आने वाले लोगों से बनती है। अगर समाज के तमाम अफ़राद मिलकर इन बुनियादी उसूलों पर अमल करें, तो आने वाली नस्लों के लिए बेहतर मुस्तक़बिल की राह हमवार हो सकती है।
इश्तिहार, ख़बर और मज़मून की इशाअत के लिए राब्ता करें
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकरण के बारे में पत्रिका की तरफ़ से दी गई जानकारी के मुताबिक़, नई दिल्ली से प्रकाशित और प्रसारित ‘मुल्तानी समाज’ राष्ट्रीय समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल के ज़रिए बिरादरी की ख़बरों और समाजी सरगर्मियों को आम करने की कोशिश की जाती है।
अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून, पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना या अपने कारोबार का विज्ञापन राष्ट्रीय सतह पर प्रकाशित या प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।
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‘मुल्तानी समाज’ — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।
ख़ास रिपोर्ट: ज़मीर आलम, प्रधान संपादक, ‘मुल्तानी समाज’ राष्ट्रीय समाचार पत्रिका, उत्तर प्रदेश डेस्क।