Saturday, October 31, 2026

रशीदा बी के इंतिक़ाल से मुल्तानी बिरादरी में ग़म की लहर, आज बाद नमाज़े असर गौरीपुर के कब्रिस्तान में होंगी सुपुर्द-ए-ख़ाक

शरीफ़ अहमद नांगल वाले (मरहूम) की अहलिया रशीदा बी ने बीमारी के चलते दुनिया-ए-फ़ानी को कहा अलविदा, अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फ़िरत फ़रमाए और तमाम घर वालों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।

उत्तर प्रदेश। निहायत ही रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि आज दिन इतवार, बा-तारीख़ 01 नवंबर 2026 को जनाब शरीफ़ अहमद नांगल वाले (मरहूम), हाल मुक़ाम गौरीपुर, ज़िला बागपत, उत्तर प्रदेश की अहलिया मोहतरमा रशीदा बी का बीमारी के चलते क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया है।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूमा के इंतिक़ाल की ख़बर से उनके अहल-ए-ख़ाना, रिश्तेदारों, अज़ीज़ों और बिरादरी के लोगों में गहरा रंज-ओ-ग़म पाया जा रहा है। यह दुनिया फ़ानी है और हर जान को एक दिन अपने रब की बारगाह में लौटकर जाना है। बेशक अल्लाह की मर्ज़ी के आगे किसी का ज़ोर नहीं चलता।

आज बाद नमाज़े असर अदा होगी नमाज़-ए-जनाज़ा और सुपुर्द-ए-ख़ाक

मिली जानकारी के मुताबिक़ मरहूमा रशीदा बी की मय्यत को आज दिन इतवार, बाद नमाज़े असर, गांव गौरीपुर, ज़िला बागपत, उत्तर प्रदेश स्थित क़ब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

लिहाज़ा तमाम बिरादराना हज़रात, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और अहल-ए-ईमान से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फ़रमाकर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और ग़मज़दा अहल-ए-ख़ाना के साथ ताज़ियत और दिलजोई का इज़हार फ़रमाएं।

दफ़न के वक़्त पढ़ी जाने वाली दुआ

जब मरहूमा को क़ब्र में उतारा जाए तो यह दुआ पढ़ना मस्नून है:

بِسْمِ اللّٰهِ وَعَلٰى مِلَّةِ رَسُوْلِ اللّٰهِ

बिस्मिल्लाहि व अला मिल्लति रसूलिल्लाह।

तर्जुमा: अल्लाह के नाम के साथ और रसूलुल्लाह ﷺ के दीन व तरीक़े पर।

मिट्टी देते वक़्त की दुआ

क़ब्र पर मिट्टी डालते वक़्त यह क़ुरआनी आयत पढ़ी जाती है:

مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ

मिन्हा ख़लक़नाकुम व फ़ीहा नुईदुकुम व मिन्हा नुख़रिजुकुम तारतन उख़रा।

तर्जुमा: इसी मिट्टी से हमने तुम्हें पैदा किया, इसी में तुम्हें लौटाएंगे और इसी से तुम्हें दोबारा निकालेंगे।

मरहूमा की मग़फ़िरत के लिए ख़ास दुआ

اللّٰهُمَّ اغْفِرْ لَهَا وَارْحَمْهَا وَعَافِهَا وَاعْفُ عَنْهَا

अल्लाहुम्मग़फ़िर लहा वरहमहा व आफ़िहा व अफ़ु अन्हा।

ऐ अल्लाह! मरहूमा की मग़फ़िरत फ़रमा, उन पर रहम फ़रमा, उन्हें आफ़ियत अता फ़रमा और उनकी ख़ताओं से दरगुज़र फ़रमा।

मुल्तानी समाज की तरफ़ से पुरदर्द ताज़ियत

राष्ट्रीय समाचार पत्रिका 'मुल्तानी समाज' के प्रधान संपादक ज़मीर आलम एवं समस्त टीम की जानिब से मरहूमा रशीदा बी के इंतिक़ाल पर उनके तमाम अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और मुतअल्लिक़ीन की ख़िदमत में दिली ताज़ियत पेश की जाती है।

हमारी बारगाह-ए-इलाही में दुआ है कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त मरहूमा रशीदा बी की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमाए, क़ब्र की तन्हाई को अपनी रहमत से दूर फ़रमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए।

अल्लाह तआला मरहूमा की तमाम छोटी-बड़ी ख़ताओं को माफ़ फ़रमाए, उनकी नेकियों को क़ुबूल फ़रमाए और उन्हें अपने प्यारे महबूब हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ की शफ़ाअत नसीब फ़रमाए।

अल्लाह उनके अहल-ए-ख़ाना को इस मुश्किल घड़ी में सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। तमाम घर वालों को हिम्मत और हौसला दे और इस सदमे को बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

इंतिक़ाल और जनाज़े के सिलसिले में मालूमात

मरहूमा के इंतिक़ाल, जनाज़े और दफ़न के सिलसिले में मज़ीद जानकारी हासिल करने के लिए जनाब ख़ालिद साहब से नीचे दिए गए मोबाइल नंबर पर राब्ता क़ायम कर सकते हैं।

📞 9410682228

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विशेष रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश डेस्क

ज़मीर आलम
प्रधान संपादक
'मुल्तानी समाज'

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रकाशित एवं प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल।

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'मुल्तानी समाज' — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।

मुल्तानी बिरादरी के लिए डिजिटल दुनिया की अनोखी सौगात: एक ही सॉफ्टवेयर में रिश्ते-नाते, बिरादरी की जनगणना और खानदानी शिजरा

ज़मीर आलम मुल्तानी की वर्षों की मेहनत लाई रंग, 'मुल्तानी घराना' बनेगा बिरादरी की पहचान, रिश्तों और नस्लों का डिजिटल आईना

तीन बड़े मिशन, एक मुकम्मल डिजिटल प्लेटफॉर्म — अब अपनी बिरादरी का इतिहास जानना, बच्चों के लिए मुनासिब रिश्ते तलाश करना और अपनी आबादी का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना होगा बेहद आसान।

नई दिल्ली। किसी भी क़ौम और बिरादरी की असल पहचान सिर्फ़ उसके नाम से नहीं होती, बल्कि उसकी तारीख़, बुज़ुर्गों की विरासत, खानदानी सिलसिले, आपसी रिश्तों और आने वाली नस्लों से होती है। जो बिरादरी अपने माज़ी को महफ़ूज़ रखती है, वही अपने मुस्तकबिल को बेहतर अंदाज़ में संवार सकती है। इसी सोच, जज़्बे और बिरादराना ख़िदमत के अज़्म के साथ मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के लिए एक ऐसा अनोखा डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है, जो आने वाले वक्त में बिरादरी की सबसे बड़ी पहचान और ज़रूरत बन सकता है।

हम बात कर रहे हैं 'मुल्तानी घराना' (www.multanigharana.com) सॉफ्टवेयर की, जिसके ज़रिए एक ही प्लेटफॉर्म पर तीन बेहद अहम काम अंजाम दिए जा सकेंगे।

पहला, बिरादरी के शादी के क़ाबिल नौजवान लड़के-लड़कियों के लिए उनकी तालीम, क़ाबिलियत और पारिवारिक जानकारी के मुताबिक़ मुनासिब रिश्तों की तलाश।

दूसरा, पूरे हिन्दुस्तान और दुनिया के मुख़्तलिफ़ इलाक़ों में आबाद मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की जनगणना और आंकड़ों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना।

तीसरा, बिरादरी का मुकम्मल शिजरा और अपने-अपने खानदान, कुनबे तथा परिवारों का नस्ली सिलसिला महफ़ूज़ करना।

इस बड़े और दूरअंदेशी मिशन के पीछे मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक ज़मीर आलम मुल्तानी की वर्षों की मेहनत, लगन और बिरादरी के लिए कुछ कर गुज़रने का जज़्बा शामिल है।

बिरादरी की पहचान की तलाश से शुरू हुआ एक बड़ा सफ़र

लंबे अरसे से मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के लोगों के दिलों में एक सवाल मौजूद था कि आखिर हमारी बिरादरी का असल शिजरा क्या है? हमारे बुज़ुर्ग कौन थे? हमारी नस्लों का सिलसिला कहां से शुरू हुआ? हम कहां से आए और हिन्दुस्तान के किन-किन इलाक़ों के अलावा दुनिया के किन मुल्कों में आबाद हैं? बिरादरी के लोग अपने नाम के साथ कौन-कौन से गोत्र, उपनाम और खानदानी पहचान इस्तेमाल करते हैं?

इन तमाम सवालों के जवाब तलाशने और बिरादरी की बिखरी हुई पहचान को एक जगह लाने का बीड़ा ज़मीर आलम मुल्तानी ने उठाया। इसके लिए उन्होंने कई वर्षों तक हिन्दुस्तान के मुख़्तलिफ़ राज्यों, ज़िलों, शहरों और गांवों का सफ़र किया। बिरादरी के लोगों से राब्ता क़ायम किया, उनके खानदानी सिलसिलों की जानकारी जुटाई और अलग-अलग इलाक़ों में आबाद लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने की कोशिश की।

उनका मक़सद सिर्फ़ जानकारी इकट्ठा करना नहीं था, बल्कि आने वाली नस्लों के लिए ऐसा दस्तावेज़ तैयार करना था, जिसके ज़रिए हमारी औलादें अपने बुज़ुर्गों, अपने खानदान और अपनी बिरादरी की तारीख़ से वाक़िफ़ हो सकें।

दूसरा बड़ा मिशन: बच्चों के लिए मुनासिब रिश्तों की तलाश होगी आसान

आज के इस तेज़ रफ़्तार दौर में हर वालिदैन की ख्वाहिश होती है कि उनके बेटे और बेटी के लिए ऐसा रिश्ता मिले, जो तालीम, क़ाबिलियत, खानदानी पृष्ठभूमि और पारिवारिक मुनासिबत के लिहाज़ से बेहतर हो।

मगर हिन्दुस्तान के मुख़्तलिफ़ राज्यों और शहरों में बिखरी हुई बिरादरी के सामने सबसे बड़ी परेशानी यही थी कि एक-दूसरे के परिवारों तक पहुंचना और शादी के क़ाबिल बच्चों के बारे में सही जानकारी हासिल करना आसान नहीं था।

इसी परेशानी को समझते हुए 'मुल्तानी घराना' सॉफ्टवेयर में रिश्तों की तलाश को आसान बनाने की पहल की गई है। अब परिवार अपनी ज़रूरत और मुनासिबत के मुताबिक़ शादी के क़ाबिल लड़के-लड़कियों की जानकारी तलाश सकेंगे। तालीम, पेशा, क़ाबिलियत और उपलब्ध पारिवारिक विवरण के आधार पर रिश्तों तक पहुंचने का एक डिजिटल ज़रिया उपलब्ध होगा।

इसका मक़सद बिरादरी के घरानों को एक-दूसरे के क़रीब लाना और रिश्तों के सिलसिले को आसान बनाना है, ताकि वालिदैन को अपने बच्चों के मुस्तकबिल के लिए बेहतर विकल्प तलाशने में सहूलियत मिल सके।

तीसरा और सबसे अहम मिशन: बिरादरी की डिजिटल जनगणना

किसी भी बिरादरी की असल ताक़त उसकी एकता, तादाद और आपसी राब्ते में होती है। मगर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की पूरे हिन्दुस्तान में कुल आबादी के सही और मुकम्मल आंकड़े एक जगह उपलब्ध कराने का कोई व्यवस्थित डिजिटल माध्यम मौजूद नहीं था।

कौन-सा परिवार किस शहर में रहता है? कौन-सा कुनबा किस ज़िले में आबाद है? किस प्रदेश, तहसील, ब्लॉक, गांव और शहर में बिरादरी के कितने परिवार मौजूद हैं? इन तमाम सवालों के जवाब हासिल करने के लिए 'मुल्तानी घराना' एक अहम ज़रिया बनने जा रहा है।

अब बिरादरी के लोग अपने घरों में बैठे-बैठे इंटरनेट के ज़रिए अपने परिवार की ज़रूरी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इस तरह धीरे-धीरे बिरादरी का एक व्यवस्थित डिजिटल डेटा तैयार करने में मदद मिलेगी।

अब अपना खानदानी शिजरा भी ख़ुद तैयार कीजिए

'मुल्तानी घराना' की एक और ख़ासियत यह है कि इसमें सिर्फ़ बिरादरी का सामूहिक शिजरा ही नहीं, बल्कि हर परिवार अपने वालिदैन, दादा-दादी, नाना-नानी, बुज़ुर्गों और अगली नस्लों का खानदानी सिलसिला भी दर्ज करके अपना फैमिली ट्री तैयार कर सकेगा।

यानी अब अपने खानदान की तारीख़ को काग़ज़ों, पुरानी डायरी और याददाश्त तक महदूद रखने की ज़रूरत नहीं होगी। डिजिटल माध्यम से परिवार अपनी जानकारी को एक जगह महफ़ूज़ रखने की दिशा में कदम बढ़ा सकेंगे।

जल्द ही यूट्यूब चैनल पर सिखाया जाएगा सॉफ्टवेयर चलाने का आसान तरीका

मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट की तरफ़ से बिरादरी के तमाम लोगों को इस सॉफ्टवेयर से जोड़ने के लिए जल्द ही अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल 'मुल्तानी समाज' पर आसान और तफ़सीली वीडियो ट्यूटोरियल जारी किए जाएंगे।

इन वीडियो के ज़रिए घर बैठे मोबाइल या लैपटॉप पर 'मुल्तानी घराना' सॉफ्टवेयर खोलने, अपनी फैमिली की जानकारी दर्ज करने, खानदानी शिजरा तैयार करने और उपलब्ध सुविधाओं का इस्तेमाल करने का तरीका समझाया जाएगा।

आपके डेटा की हिफ़ाज़त ट्रस्ट की अहम ज़िम्मेदारी

मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट का कहना है कि बिरादरी के लोगों की तरफ़ से दर्ज की जाने वाली पारिवारिक जानकारी और डेटा बेहद क़ीमती अमानत है। इसकी हिफ़ाज़त, महफ़ूज़ रखने और मुनासिब तरीके से मेंटेन करने की ज़िम्मेदारी ट्रस्ट की रहेगी।

ट्रस्ट का मक़सद है कि लोगों का भरोसा क़ायम रखते हुए उनकी जानकारी को ज़िम्मेदारी के साथ संभाला जाए। परिवारों से भी अपील की गई है कि वे सॉफ्टवेयर पर जानकारी दर्ज करते समय सही और तस्दीक़शुदा विवरण दें तथा परिवार के सदस्यों की निजी जानकारी साझा करने से पहले उनकी रज़ामंदी ज़रूर हासिल करें।

बिरादरी के होनहार नौजवानों के लिए रोज़गार का भी सुनहरा मौक़ा

इस डिजिटल मिशन को सिर्फ़ सॉफ्टवेयर तक महदूद नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाने के लिए बिरादरी के हुनरमंद नौजवानों को भी साथ जोड़ा जाएगा।

मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट को अपनी बिरादरी के ऐसे होनहार और क़ाबिल नौजवानों की सख़्त ज़रूरत है, जो इस मुहिम को आगे बढ़ाने में अपना किरदार अदा कर सकें।

ख़ासतौर पर यूट्यूबर, कंटेंट क्रिएटर, फ्रीलांसर, वीडियो एडिटर, कैमरामैन, सोशल मीडिया एक्सपर्ट, डिजिटल मार्केटिंग से जुड़े नौजवान और डेटा एंट्री ऑपरेटर संपर्क कर सकते हैं।

इन सभी को उनकी क़ाबिलियत, तजुर्बे और ज़िम्मेदारी के मुताबिक़ सैलरी भी दी जाएगी।

बिरादरी के लिए तीन डिजिटल प्लेटफॉर्म, एक ही मक़सद — पहचान और तरक़्क़ी

मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट ने बिरादरी की सामाजिक, तालीमी और डिजिटल तरक़्क़ी के लिए अलग-अलग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराए हैं। बिरादरी के लोग इन वेबसाइटों के ज़रिए संबंधित सेवाओं और जानकारियों तक पहुंच सकते हैं।

1. मुल्तानी घराना — रिश्ते, जनगणना और खानदानी शिजरा

🌐 www.multanigharana.com

2. मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट — संस्था, सामाजिक मिशन और संगठनात्मक गतिविधियां

🌐 www.msctindia.com

3. मुल्तानी समाज — राष्ट्रीय समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और बिरादरी की खबरें

🌐 www.multanisamaj.com

इन तीनों डिजिटल प्लेटफॉर्म का मक़सद बिरादरी को जानकारी, पहचान, आपसी राब्ते और सामाजिक तरक़्क़ी के एक मज़बूत सिलसिले से जोड़ना है।

ज़मीर आलम मुल्तानी की दूरअंदेशी को बिरादरी का साथ ज़रूरी

मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक ज़मीर आलम मुल्तानी की यह कोशिश महज़ एक सॉफ्टवेयर बनाने तक सीमित नहीं है। यह एक ऐसी डिजिटल बुनियाद तैयार करने की कोशिश है, जिसके ज़रिए बिरादरी की पहचान, खानदानी विरासत, आपसी रिश्ते और सामूहिक आंकड़े आने वाली नस्लों के लिए महफ़ूज़ किए जा सकें।

अब इस मिशन को कामयाबी की मंज़िल तक पहुंचाने के लिए सिर्फ़ एक शख़्स या एक संस्था की मेहनत काफ़ी नहीं होगी, बल्कि पूरी बिरादरी को आगे आना होगा। हर परिवार को अपनी सही जानकारी दर्ज करनी होगी, हर ज़िम्मेदार शख़्स को इस पैग़ाम को आगे बढ़ाना होगा और हर नौजवान को अपनी क़ाबिलियत के मुताबिक़ इस मुहिम में हिस्सा लेना होगा।

दुआ है कि 'मुल्तानी घराना' बिरादरी की तरक़्क़ी का नया बाब लिखे

अल्लाह तआला से दुआ है कि वह मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट की इस नेक कोशिश को अपनी बारगाह में क़ुबूल फ़रमाए, ज़मीर आलम मुल्तानी और उनकी पूरी टीम को इस मिशन को मुकम्मल करने की हिम्मत, हौसला और कामयाबी अता फ़रमाए।

अल्लाह करे कि 'मुल्तानी घराना' सॉफ्टवेयर हमारी बिरादरी के इत्तेहाद, पहचान, आपसी मोहब्बत और तरक़्क़ी का एक मज़बूत ज़रिया बने। हमारी आने वाली नस्लें अपने बुज़ुर्गों को पहचानें, अपने खानदान की तारीख़ जानें और अपनी बिरादरी की ताक़त को समझें।

क्योंकि जो क़ौम अपने बुज़ुर्गों को याद रखती है, अपनी नस्लों का सिलसिला महफ़ूज़ रखती है और अपने मुस्तकबिल की फ़िक्र करती है, वही क़ौम आने वाले दौर में अपनी अलग पहचान क़ायम करती है।

मुल्तानी घराना — रिश्तों की आसानी, बिरादरी की पहचान और खानदानी विरासत का डिजिटल ख़ज़ाना।

आइए! इस मुहिम का हिस्सा बनिए, आज ही www.multanigharana.com पर जाइए, अपने घराने की जानकारी दर्ज कीजिए और अपनी आने वाली नस्लों के लिए अपनी पहचान महफ़ूज़ कीजिए।


विशेष रिपोर्ट: दिल्ली डेस्क

ज़मीर आलम
प्रधान संपादक
'मुल्तानी समाज'

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, नई दिल्ली से प्रकाशित एवं प्रसारित मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल।

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट की क़ौमी तंजीम के विस्तार का बड़ा मंसूबा! 5 जिलों की 20 तहसीलों से गांव-गांव तक पहुंचेगा संगठन

सहारनपुर से बिजनौर तक जिला और तहसील स्तर पर कायम होंगी नई कार्यकारिणियां, चेयरमैन बनने के ख़्वाहिशमंद हज़रात से प्रोग्राम तय करने की अपील; नगर, ब्लॉक, तहसील, जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय पदाधिकारियों की तस्वीरें वेबसाइट पर होंगी प्रकाशित।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश। पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी क़ौमी तंजीम के तौर पर अपनी अलग पहचान रखने वाली मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट (रजिस्टर्ड ऑल इंडिया तंजीम) ने बिरादरी के इत्तेहाद, तरक़्क़ी, तालीम, समाजी बेदारी और बाहमी इमदाद के पैग़ाम को शहरों से लेकर गांवों तक पहुंचाने के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संगठन के बड़े पैमाने पर विस्तार की तैयारी शुरू कर दी है।

इस तंजीमी मंसूबे के पहले मरहले में सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ और बिजनौर समेत पांच अहम जिलों की 20 तहसीलों को शामिल किया गया है। इन सभी जिलों में जिला और तहसील स्तर पर नई कार्यकारिणियां कायम करने की योजना है। इसके साथ ही संगठन का दायरा नगर, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर तक पहुंचाने की भी तैयारी है।

तंजीम की कोशिश है कि बिरादरी के बा-सलाहियत, तालीमयाफ्ता, संजीदा, मेहनती और समाजी ख़िदमत का जज़्बा रखने वाले अफ़राद को आगे लाकर एक ऐसा मज़बूत तंजीमी ढांचा तैयार किया जाए, जो आने वाली नस्लों के लिए भी एक मिसाली प्लेटफॉर्म साबित हो।

पांच जिलों की 20 तहसीलों में होगा संगठन का विस्तार

तंजीम की तजवीज़ के मुताबिक पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इन पांच जिलों की निम्नलिखित तहसीलों में संगठनात्मक विस्तार किया जाएगा।

1. जिला सहारनपुर — 5 तहसीलें

  • सहारनपुर
  • बेहट
  • देवबंद
  • रामपुर मनिहारान
  • नकुड़

2. जिला मुजफ्फरनगर — 4 तहसीलें

  • मुजफ्फरनगर सदर
  • जानसठ
  • खतौली
  • बुढ़ाना

3. जिला बागपत — 3 तहसीलें

  • बागपत
  • बड़ौत
  • खेकड़ा

4. जिला मेरठ — 3 तहसीलें

  • मेरठ
  • मवाना
  • सरधना

5. जिला बिजनौर — 5 तहसीलें

  • बिजनौर
  • चांदपुर
  • धामपुर
  • नगीना
  • नजीबाबाद

इस तरह पहले मरहले में पांच जिलों और 20 तहसीलों तक संगठन का दायरा पहुंचाने की तैयारी है। हर जिले में जिला कार्यकारिणी और हर तहसील में अलग तहसील कार्यकारिणी गठित की जाएगी।

ओहदे के तलबगार नहीं, समाज की ख़िदमत का जज़्बा रखने वालों को मिलेगी तरजीह

तंजीम की नई रणनीति में इस बात पर ख़ास ज़ोर दिया जा रहा है कि कार्यकारिणियों में केवल नाम के लिए ओहदे हासिल करने वालों के बजाय ऐसे अफ़राद को शामिल किया जाए, जो अपने इलाके में बिरादरी के दरमियान अच्छी पहचान रखते हों और समाजी कामों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का जज़्बा रखते हों।

तंजीम चाहती है कि हर जिले और हर तहसील में ऐसी मज़बूत टीम तैयार हो, जो समय-समय पर समाजी इजलास, तालीमी बेदारी के प्रोग्राम, नौजवानों की हौसलाअफ़ज़ाई, ज़रूरतमंद परिवारों की मदद, आपसी इत्तेहाद और बिरादरी की बेहतरी के लिए मुनज़्ज़म तौर पर काम कर सके।

संगठन में शामिल हर पदाधिकारी की ज़िम्मेदारी तय करने और उसकी तंजीमी कारगुज़ारी का जायज़ा लेने पर भी तवज्जो दी जाएगी, ताकि संगठन केवल काग़ज़ों तक महदूद न रहे, बल्कि ज़मीनी सतह पर भी अपनी कारगुज़ारी दिखाए।

अब वेबसाइट पर दिखेगी तंजीम के तमाम ओहदेदारों की तस्वीर और पहचान

मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट की एक अहम डिजिटल पहल के तहत संगठन के नगर, ब्लॉक, तहसील, जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के सभी पदाधिकारियों की तस्वीरें वेबसाइट पर प्रकाशित करने की व्यवस्था की जाएगी।

इस पहल के ज़रिये बिरादरी के लोग अपने शहर, ब्लॉक, तहसील, जिले और प्रदेश के जिम्मेदार पदाधिकारियों की पहचान कर सकेंगे। साथ ही राष्ट्रीय कार्यकारिणी के पदाधिकारियों की तस्वीरें और संगठनात्मक पहचान भी वेबसाइट पर उपलब्ध कराने का मंसूबा है।

इसका मक़सद संगठनात्मक पहचान को मजबूत करना, पदाधिकारियों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना और बिरादरी के लोगों को अपने जिम्मेदार नुमाइंदों तक पहुंचने में आसानी पैदा करना है।

मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइटें:

🌐 www.multanisamaj.com

🌐 www.msctindia.com

🌐 www.multanigharana.com

इन वेबसाइटों को संगठन की डिजिटल पहचान और बिरादरी से जुड़े लोगों के लिए अहम जानकारी का प्लेटफॉर्म बनाने की दिशा में विकसित किया जाएगा।

जिला और तहसील चेयरमैन बनने के ख़्वाहिशमंद हज़रात से ख़ास अपील

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिला सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ और बिजनौर की तमाम तहसीलों में रहने वाले मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के ऐसे हज़रात, जो अपने जिले या तहसील में मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन की ज़िम्मेदारी संभालने के ख़्वाहिशमंद हैं और समाज की ख़िदमत का जज़्बा रखते हैं, उनसे ख़ास तौर पर अपील की जाती है कि वह नीचे दिए गए संपर्क नंबरों पर कॉल या व्हाट्सऐप मैसेज के ज़रिये राब्ता कायम करें।

इच्छुक हज़रात अपने जिले या तहसील में संगठनात्मक प्रोग्राम, परिचय बैठक या तंजीमी इजलास रखने के लिए अपना पैग़ाम भेजें, ताकि आपसी मशविरे और मुनासिब तंजीमी कार्रवाई के बाद संगठन के विस्तार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।

ख़ास हिदायत: तंजीम में ओहदा हासिल करना असल मक़सद नहीं, बल्कि उस ओहदे के ज़रिये बिरादरी की ख़िदमत करना ही सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी है। लिहाज़ा ऐसे ही संजीदा, बा-अख़लाक़, ज़िम्मेदार और अमली तौर पर सक्रिय हज़रात आगे आएं, जो तंजीम के उसूलों के मुताबिक अपनी ज़िम्मेदारियां निभाने की सलाहियत रखते हों।

गांव-गांव तक पहुंचेगा इत्तेहाद, तालीम और तरक़्क़ी का पैग़ाम

इस तौसीई मंसूबे का मक़सद सिर्फ़ जिला और तहसील स्तर पर ओहदेदार मुक़र्रर करना नहीं, बल्कि एक ऐसा मुनज़्ज़म और मज़बूत तंजीमी नेटवर्क तैयार करना है, जिसकी पहुंच बिरादरी के हर शहर, नगर, ब्लॉक, कस्बे और गांव तक हो।

आने वाले मरहलों में ग्राम पंचायत स्तर पर भी समाज के बा-अमल नुमाइंदों को जोड़ने की तजवीज़ है, ताकि बिरादरी के मसाइल को मुनासिब प्लेटफॉर्म पर उठाया जा सके और तालीम, रोज़गार, समाजी इस्लाह, बाहमी इमदाद तथा नौजवानों की रहनुमाई जैसे अहम मौज़ूआत पर कारगर काम किया जा सके।

तंजीम का पैग़ाम बिल्कुल साफ़ है कि बिरादरी की तरक़्क़ी के लिए इत्तेहाद, तालीम, तंजीम और अमली जद्दोजहद बेहद ज़रूरी है। जब समाज के संजीदा और सलाहियत रखने वाले अफ़राद एक प्लेटफॉर्म पर जमा होंगे, तभी आने वाली नस्लों के लिए एक बेहतर और मज़बूत रास्ता हमवार किया जा सकेगा।

पांच जिलों की 20 तहसीलों से शुरू होने वाली यह पहल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी को एक मज़बूत क़ौमी प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में अहम पेशरफ़्त साबित हो सकती है।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत क़ौमी समाचार माध्यम की ख़ास रिपोर्ट

मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

अपनी ख़बर, अपनी आवाज़ को क़ौमी सतह तक पहुंचाएं

अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार (विज्ञापन) क़ौमी सतह पर शाया (प्रकाशित) या प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो बराए मेहरबानी नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएं।

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"मुल्तानी समाज"

अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।

🥀 इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन 🥀निहायत ही अफ़सोसनाक ख़बर — मिस्त्री खलीक साहब का 88 वर्ष की उम्र में इंतिक़ाल, बिरादराने इस्लाम में ग़म की लहर

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर करे और तमाम अहले ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिली अफ़सोस के साथ आप तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि आज दिन शनिचर, बा-तारीख़ 31 अक्टूबर 2026 को मोहल्ला पूर्वा महावीर नगर, मेरठ, उत्तर प्रदेश में जनाब मिस्त्री खलीक साहब वल्द हाजी अब्दुल लतीफ़ मरहूम, उम्र तक़रीबन 88 साल, इस दार-ए-फ़ानी से कूच फ़रमा गए और क़ज़ा-ए-इलाही से उनका इंतिक़ाल हो गया।

मरहूम के इंतिक़ाल की ख़बर से खानदान, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, अहबाब और मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी में ग़म और अफ़सोस की लहर दौड़ गई है। उम्र के इस पड़ाव पर उनका दुनिया से रुख़्सत हो जाना तमाम चाहने वालों के लिए एक बड़ा सदमा है। अल्लाह तआला मरहूम की तमाम ख़िदमात, नेक आमाल और इबादात को अपनी बारगाह में क़ुबूल फ़रमाए।

जनाज़े और तदफ़ीन की इत्तिला

मिली जानकारी के मुताबिक़ मरहूम की मय्यत को कल दिन इतवार, बा-तारीख़ 01 नवंबर 2026 को सुबह 10:30 बजे मोहल्ला पूर्वा महावीर नगर, मेरठ, उत्तर प्रदेश में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम बिरादराना हज़रात, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और अहबाब से पुरख़ुलूस गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएँ और सवाब-ए-दारैन हासिल करें।

दफ़न के वक़्त पढ़ी जाने वाली दुआ

जब मय्यत को क़ब्र में उतारा जाए तो यह दुआ पढ़ें:

بِسْمِ اللّٰهِ وَعَلٰى مِلَّةِ رَسُوْلِ اللّٰهِ ﷺ

बिस्मिल्लाहि व अला मिल्लति रसूलिल्लाह ﷺ

तर्जुमा: अल्लाह के नाम के साथ और रसूलुल्लाह ﷺ के दीन और तरीक़े पर।

क़ब्र पर मिट्टी डालते वक़्त की दुआ

क़ब्र पर मिट्टी डालते वक़्त क़ुरआन-ए-पाक की यह आयत पढ़ना मसनून है:

مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ

मिन्हा ख़लक़नाकुम व फ़ीहा नुईदुकुम व मिन्हा नुख़रिजुकुम तारतन उख़रा।

तर्जुमा: इसी मिट्टी से हमने तुम्हें पैदा किया, इसी में तुम्हें वापस लौटाएँगे और इसी से तुम्हें दोबारा निकालेंगे।

मरहूम के लिए ख़ुसूसी दुआ-ए-मग़फ़िरत

ऐ अल्लाह! जनाब मिस्त्री खलीक साहब की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमा। उनकी तमाम छोटी-बड़ी ख़ताओं और गुनाहों को माफ़ फ़रमा। उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे। क़ब्र की तन्हाई को अपनी रहमत के नूर से दूर फ़रमा। सवालात-ए-क़ब्र में आसानी अता फ़रमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमा।

ऐ अल्लाह! मरहूम की नेकियों को क़ुबूल फ़रमा, उनकी लग़ज़िशों से दरगुज़र फ़रमा और उनके दर्जात बुलंद फ़रमा। उनके तमाम अहले ख़ाना, बेटों, बेटियों, रिश्तेदारों और चाहने वालों को इस सदमे को बर्दाश्त करने की ताक़त, सब्र-ए-जमील और हौसला अता फ़रमा।

बेशक हम सब अल्लाह ही के हैं और हमें उसी की तरफ़ लौटकर जाना है।

आमीन सुम्मा आमीन या रब्बुल आलमीन।

नोट: मरहूम के इंतिक़ाल, जनाज़े और तदफ़ीन के सिलसिले में मज़ीद मालूमात हासिल करने के लिए जनाब एहसान अहमद साहब के मोबाइल नंबर 9837510873 पर राब्ता क़ायम फ़रमाएँ।


ख़बर, मज़मून और इश्तिहार के लिए राब्ता फ़रमाएँ

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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"मुल्तानी समाज"

अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ इत्तिला-ए-इंतिक़ाल, सुंदर नगरी दिल्ली में मोहम्मद सलीम का इंतिक़ाल

अल्लाह की मर्ज़ी के आगे हर इंसान बेबस है। दुनिया की यह ज़िंदगी फ़ानी है और हर जान को एक दिन अपने रब की बारगाह में लौटकर जाना है।

बेइंतिहा अफ़सोस और दिली रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि आज दिन शनिचर, बा-तारीख़ 31 अक्टूबर 2026 को सुंदर नगरी, दिल्ली में जनाब मोहम्मद सलीम वल्द मरहूम मोहम्मद इस्माइल (नगले वाले) का लंबी बीमारी के बाद क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया है।

मरहूम का ताल्लुक़ उत्तर प्रदेश के ज़िला मुज़फ्फरनगर के क़स्बा खतौली से था। वह बुढ़ाना रोड, क़स्बा खतौली के रहने वाले थे। उनके भाई और परिवार के दूसरे अफ़राद भी खतौली में ही मुक़ीम हैं। मरहूम के इंतिक़ाल की ख़बर से उनके अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, रिश्तेदारों, दोस्तों और बिरादरी के लोगों में ग़म की लहर दौड़ गई है। एक इंसान का दुनिया से रुख़्सत हो जाना उसके घर-परिवार के लिए ऐसा सदमा होता है, जिसकी भरपाई मुमकिन नहीं।

दफ़्न और नमाज़-ए-जनाज़ा के वक़्त की इत्तिला

ख़बर लिखे जाने तक मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन (सुपुर्द-ए-ख़ाक) के वक़्त और मुक़ाम की पुख़्ता जानकारी हासिल नहीं हो सकी है। जैसे ही अहले ख़ाना की तरफ़ से कोई तस्दीक़शुदा इत्तिला हासिल होगी, उसे बिरादरी के तमाम हज़रात तक पहुँचाने के लिए ख़बर को अपडेट कर दिया जाएगा।

तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएँ और उनके अहले ख़ाना को इस मुश्किल घड़ी में सब्र की तलक़ीन करें।

मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत

اَللّٰهُمَّ اغْفِرْ لَهٗ وَارْحَمْهُ وَعَافِهٖ وَاعْفُ عَنْهُ وَأَكْرِمْ نُزُلَهٗ وَوَسِّعْ مُدْخَلَهٗ

या अल्लाह! मरहूम मोहम्मद सलीम की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमा, उन पर अपनी ख़ास रहमत नाज़िल फ़रमा, उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फ़रमा और उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा।

या रब्बुल आलमीन! उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे। क़ब्र की तंगी और तारीकी को दूर फ़रमा। उन्हें सवालात-ए-क़ब्र में साबित-क़दम रख और मुनकर-नकीर के सवालों के जवाब आसान फ़रमा।

ऐ अल्लाह! मरहूम को क़ब्र में उतारने वाले तमाम हाथों पर अपना करम फ़रमा। जो लोग उनके जिस्म-ए-मुबारक को क़ब्र में उतारें, उन्हें अज्र-ए-अज़ीम अता फ़रमा। जो लोग उनके जिस्म पर मिट्टी डालें, उनके इस अमल को नेकियों में शुमार फ़रमा और मरहूम के लिए इस मिट्टी को रहमत और नूर का ज़रिया बना दे।

या अल्लाह! उनकी क़ब्र को जन्नत की ठंडी हवाओं से भर दे, उनकी तन्हाई को अपनी रहमत से दूर फ़रमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा।

ऐ अल्लाह! मरहूम के तमाम गुनाहों को नेकीयों में तब्दील फ़रमा, उनकी आख़िरत आसान फ़रमा और उन्हें अपने महबूब बंदों में शामिल फ़रमा। आमीन या रब्बुल आलमीन।

अहले ख़ाना के लिए दुआ

हम तमाम बिरादराना हज़रात की तरफ़ से मरहूम के तमाम अहले ख़ाना, भाई-बहनों, रिश्तेदारों और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब के साथ इस ग़म की घड़ी में दिली हमदर्दी और ताज़ियत का इज़हार करते हैं।

अल्लाह तआला तमाम घरवालों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए, इस सदमे को बर्दाश्त करने की हिम्मत दे और मरहूम की जुदाई को उनके लिए सब्र और अज्र का ज़रिया बनाए।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।


ख़बर एवं इत्तिला

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए दिल्ली डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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"मुल्तानी समाज"

अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।

मोहम्मद आलम साहब को फिर मिली मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट की राष्ट्रीय कमान, लगातार दूसरी बार बने राष्ट्रीय चेयरमैन; पाँच वर्षों तक संभालेंगे बिरादरी की रहनुमाई, मुल्तानी समाज में खुशी और मुबारकबाद का सिलसिला

नई दिल्ली। पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की एकता, तालीम, तरक़्क़ी, सामाजिक बेदारी और नुमाइंदगी के लिए राष्ट्रीय सतह पर अपनी अलग पहचान रखने वाली देश की प्रमुख तंजीम 'मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट (रजिस्टर्ड ऑल इंडिया)' में एक अहम संगठनात्मक फैसला लिया गया है। ट्रस्ट के संस्थापक एवं फाउंडर ज़मीर आलम मुल्तानी ने बिरादरी के जिम्मेदारान और बुजुर्गों की राय-मशविरे के बाद पूर्व राष्ट्रीय चेयरमैन जनाब मोहम्मद आलम साहब पर एक बार फिर भरोसा जताते हुए उन्हें आगामी पाँच वर्षों के लिए राष्ट्रीय चेयरमैन की जिम्मेदारी सौंपी है।

मोहम्मद आलम साहब को दोबारा राष्ट्रीय चेयरमैन नियुक्त किए जाने की खबर से मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी में खुशी की लहर दौड़ गई है। बिरादरी के जिम्मेदारों, सामाजिक रहनुमाओं और तंजीम से जुड़े लोगों की ओर से उन्हें मुबारकबाद पेश किए जाने का सिलसिला जारी है। इस फैसले को तंजीम के संगठनात्मक इस्तेहकाम, आपसी इत्तेहाद और बिरादरी की सामूहिक रहनुमाई के लिहाज से एक अहम कदम माना जा रहा है।

पाँच साल की नई जिम्मेदारी, एक नवंबर से होगा आग़ाज़

गौरतलब है कि इससे पहले राष्ट्रीय चेयरमैन का कार्यकाल तीन वर्ष निर्धारित था, लेकिन इस बार तंजीम ने संगठन को और अधिक मजबूत बनाने, राष्ट्रीय स्तर पर उसकी गतिविधियों को विस्तार देने तथा बिरादरी के सामाजिक और तालीमी मसाइल पर तवज्जो देने के मकसद से चेयरमैन का कार्यकाल बढ़ाकर पाँच वर्ष कर दिया है।

जारी जानकारी के मुताबिक, जनाब मोहम्मद आलम साहब का नया कार्यकाल 01 नवंबर 2026 से 31 अक्टूबर 2031 तक रहेगा। इस दौरान वह राष्ट्रीय चेयरमैन के तौर पर ट्रस्ट की संगठनात्मक सरगर्मियों की रहनुमाई करेंगे और बिरादरी को एक मजबूत प्लेटफॉर्म पर मुत्तहिद करने की जिम्मेदारी निभाएंगे।

संस्थापक ज़मीर आलम मुल्तानी ने सौंपी अहम संगठनात्मक जिम्मेदारियां

ट्रस्ट के संस्थापक ज़मीर आलम मुल्तानी ने नवनियुक्त राष्ट्रीय चेयरमैन मोहम्मद आलम साहब को उनकी नई जिम्मेदारी के साथ कुछ अहम संगठनात्मक निर्देश भी दिए हैं।

संस्थापक की ओर से उन्हें एक माह के भीतर राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन और विभिन्न प्रदेशों के चेयरमैन की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि मुल्क के मुख्तलिफ राज्यों में तंजीम के संगठनात्मक ढांचे को व्यवस्थित और मजबूत किया जा सके।

इसके साथ ही उन्हें ट्रस्ट की राष्ट्रीय समाचार पत्रिका 'मुल्तानी समाज' के सालाना राष्ट्रीय अधिवेशन की तैयारियां शुरू करने का भी जिम्मा दिया गया है। इस राष्ट्रीय अधिवेशन को ट्रस्ट की ओर से 'मुल्तानी-डे' के नाम से मनाया जाता है, जो बिरादरी की पहचान, तारीख़, तहज़ीब, इत्तेहाद और सामाजिक बेदारी को समर्पित एक अहम आयोजन है।

राष्ट्रीय चेयरमैन के सामने अब सबसे पहली प्राथमिकता राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन, प्रदेश स्तर पर संगठन का विस्तार और आगामी मुल्तानी-डे राष्ट्रीय अधिवेशन को कामयाब बनाने की होगी।

बिरादरी की एकता और तरक़्क़ी के लिए नई उम्मीदें

मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट का मकसद मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी को एक ऐसा राष्ट्रीय मंच मुहैया कराना है, जहां बिरादरी के तालीमी, समाजी, मआशी और संगठनात्मक मसाइल को आवाज़ मिल सके। तंजीम की कोशिश है कि बिरादरी के नौजवानों को आगे बढ़ने के मौके मिलें, बच्चों की तालीम को फरोग मिले, जरूरतमंद परिवारों की मदद हो और देशभर में फैले बिरादरी के लोगों के बीच आपसी राब्ता और इत्तेहाद मजबूत हो।

मोहम्मद आलम साहब को लगातार दूसरी बार राष्ट्रीय चेयरमैन की जिम्मेदारी मिलना उनके प्रति जताए गए भरोसे और तंजीम की आगे की संगठनात्मक उम्मीदों को भी जाहिर करता है।

बिरादरी के लोगों को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में राष्ट्रीय कार्यकारिणी को नई ऊर्जा मिलेगी, प्रदेशों में संगठनात्मक गतिविधियों को रफ्तार मिलेगी और मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट अपनी समाजी एवं फलाही जिम्मेदारियों को और बेहतर अंदाज में अंजाम देगा।

मुबारकबाद और नेक ख्वाहिशात का सिलसिला

इस मौके पर बिरादरी के तमाम जिम्मेदारान और अहले-ख़ैर की जानिब से जनाब मोहम्मद आलम साहब को नई जिम्मेदारी की दिली मुबारकबाद पेश की जा रही है। दुआ है कि अल्लाह तआला उन्हें सेहत, हौसला, हिकमत और नेक नीयती के साथ इस अमानत को निभाने की तौफीक अता फरमाए।

क्योंकि किसी भी तंजीम की असल ताकत उसका ओहदा नहीं, बल्कि उसकी नीयत, अमल, इत्तेहाद और बिरादरी के लिए की जाने वाली बे-लौस खिदमत होती है।

उम्मीद की जानी चाहिए कि आने वाले पाँच वर्षों में मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट नई मिसालें कायम करेगा और पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की आवाज़ को राष्ट्रीय सतह पर और अधिक मजबूती के साथ बुलंद करेगा।

अल्लाह तआला इस तंजीम को तरक़्क़ी अता फरमाए और बिरादरी के दरमियान मोहब्बत, इत्तेहाद और भाईचारे को हमेशा कायम रखे। आमीन।


विशेष रिपोर्ट | उत्तर प्रदेश डेस्क

अज़हर खान 
उप - संपादक
राष्ट्रीय समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल
'मुल्तानी समाज'

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, देश की राजधानी नई दिल्ली से प्रकाशित एवं प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी को समर्पित राष्ट्रीय समाचार मंच।

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Friday, October 30, 2026

🖤 इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन 🖤निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ इत्तिला-ए-इन्तिक़ाल

बागपत के किशनपुर बिराल में पसरा मातम, हाज़ी हनीफ़ साहब की बहू और जनाब इस्तेखार साहब की अहलिया खालिदा बी का तक़रीबन 40 वर्ष की उम्र में इंतिक़ाल

बागपत (उत्तर प्रदेश)।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म, दिली अफ़सोस और नम आँखों के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि आज दिन जुमा, बा-तारीख़ 30 अक्टूबर 2026 को गाँव किशनपुर बिराल, तहसील बड़ौत, ज़िला बागपत, उत्तर प्रदेश निवासी हाज़ी हनीफ़ साहब के फ़रज़ंद जनाब इस्तेखार साहब की अहलिया खालिदा बी साहिबा (उम्र तक़रीबन 40 वर्ष) का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया है।

मरहूमा का मायका गाँव लिलौन खेड़ी, ज़िला शामली, उत्तर प्रदेश में है। उनके इंतिक़ाल की दुखद ख़बर से दोनों ख़ानदानों, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, रिश्तेदारों और जानने वालों में ग़म की लहर दौड़ गई है। इस दुखद घड़ी में परिवार पर ग़म का पहाड़ टूट पड़ा है। एक ख़ुशहाल ख़ानदान की इस अज़ीज़ हस्ती के दुनिया से रुख़्सत हो जाने से हर आँख अश्कबार है।

इस मौक़े पर तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि मरहूमा के लिए ख़ुसूसी तौर पर दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएँ और उनके अहल-ए-ख़ाना को इस सदमे को बर्दाश्त करने के लिए सब्र-ओ-हौसला अता होने की दुआ करें।

🕌 मरहूमा की मग़फ़िरत और बुलंदी-ए-दरजात के लिए दुआ

ऐ अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त! मरहूमा खालिदा बी साहिबा की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमा। उनकी तमाम ख़ताओं, कोताहियों और लग़ज़िशों को अपने फ़ज़्ल-ओ-करम से माफ़ फ़रमा। उनकी नेकियों को क़ुबूल फ़रमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला से आला मुक़ाम अता फ़रमा।

या अल्लाह! उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे। उनकी क़ब्र को वसीअ, रौशन और मुनव्वर फ़रमा। क़ब्र की तन्हाई में अपनी रहमत का साया अता फ़रमा और उन्हें अज़ाब-ए-क़ब्र से महफ़ूज़ रख।

🤲 नमाज़-ए-जनाज़ा, दफ़्न और मिट्टी देने के वक़्त की दुआ

ऐ परवरदिगार! जब मरहूमा को ग़ुस्ल दिया जाए तो अपनी रहमत और पाकीज़गी से नवाज़ना। जब नमाज़-ए-जनाज़ा अदा की जाए तो तमाम दुआओं और इस्तिग़फ़ार को उनके हक़ में क़ुबूल फ़रमाना।

या अल्लाह! जब मरहूमा को क़ब्र में उतारा जाए तो उनके लिए आसानी फ़रमा। क़ब्र को उनके लिए सुकून और राहत का मुक़ाम बना दे। जब उनके चाहने वाले और अज़ीज़ मिट्टी दें तो उस मिट्टी के हर ज़र्रे को उनके लिए रहमत और मग़फ़िरत का ज़रिया बना दे।

ऐ अल्लाह! क़ब्र के सवालात में उन्हें साबित-क़दम रखना, उनकी क़ब्र को नूर से भर देना और रोज़-ए-महशर उन्हें अपने नेक और मक़बूल बंदों के साथ उठाना।

ऐ अल्लाह! मरहूमा के शौहर जनाब इस्तेखार साहब, सास-ससुर, तमाम घर वालों, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और रिश्तेदारों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा। उनके दिलों को सुकून दे और इस मुश्किल घड़ी में उन्हें हिम्मत और हौसला अता फ़रमा।

आमीन या रब्बुल आलमीन, सुम्मा आमीन।

📢 नमाज़-ए-जनाज़ा और दफ़्नाने के वक़्त की जानकारी

मिली जानकारी के मुताबिक मय्यत को कल दिन शनिचर बा - तारीख़ 31 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजे गाँव किशनपुर बिराल स्थित कब्रिस्तान में ही किया जाएगा सपूर्दे ख़ाक लिहाजा आप हज़रात भी जनाज़े में शरीक होकर सवाबे दारैन हासिल करें 

तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि मरहूमा की मग़फ़िरत, बुलंदी-ए-दरजात और घर वालों के सब्र के लिए ख़ुसूसी दुआ फ़रमाएँ।

मय्यत के सिलसिले में मज़ीद मालूमात के लिए राब्ता करें:

जनाब फारूख़ ख़ान साहब

📞 8279878458

📞 8273022877


📰 ख़बर एवं इशाअत

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रकाशित एवं पूरे मुल्क में प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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