Monday, July 27, 2026

बिरादरी के बुज़ुर्ग मिस्त्री अय्यूब अहमद साहब का इंतिक़ाल — शामली की फ़िज़ा ग़मगीन, अहले बिरादरी में दौड़ गई शोक की लहर

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन 

निहायत ही रंज़-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ यह दुखद इत्तिला दी जाती है कि अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की एक बुज़ुर्ग, नेकदिल, शरीफ़ और सम्मानित शख्सियत जनाब मिस्त्री अय्यूब अहमद साहब वल्द जनाब मिस्त्री अज़ीमुल्ला साहब (मरहूम) निवासी गढ़ी पुख़्ता, हाल बाशिंदे नज़दीक मक्का मस्जिद, शामली (उत्तर प्रदेश) का आज बरोज़ पीर, 27 जुलाई 2026, शाम लगभग 4:30 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

मरहूम काफ़ी लंबे अर्से से गंभीर बीमारी में मुब्तिला थे। तमाम इलाज और दुआओं के बावजूद आखिरकार अल्लाह तआला का हुक्म पूरा हुआ और वह इस फ़ानी दुनिया को अलविदा कहकर अपने असली मालिक की बारगाह में हाज़िर हो गए।

मरहूम मिस्त्री अय्यूब अहमद साहब अपनी सादगी, नेक अख़लाक़, ख़ुशमिज़ाजी, मेहनतकशी और बिरादरी के प्रति मोहब्बत के लिए जाने जाते थे। उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी इज़्ज़त, ईमानदारी और ख़िदमत के साथ गुज़ारी। उनके इंतिक़ाल की ख़बर से शामली, गढ़ी पुख़्ता और आसपास के इलाक़ों सहित पूरी मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी में गहरे रंज़-ओ-ग़म की लहर दौड़ गई है। जो भी इस दुखद समाचार को सुन रहा है, वह मरहूम के लिए मग़फ़िरत की दुआ और उनके अहल-ए-ख़ाना के लिए सब्र-ए-जमील की दुआ कर रहा है।

मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा बाद नमाज़-ए-ईशा अदा की जाएगी, जिसके बाद उन्हें सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम अहले बिरादरी, रिश्तेदारों, दोस्तों और अकीदतमंदों से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए मग़फ़िरत, बुलंदी-ए-दराजात और जन्नतुल फ़िरदौस की दुआ करें। जनाज़े में शिरकत करना मुसलमान का अपने भाई पर हक़ भी है और अज़ीम सवाब का ज़रिया भी।

हम बारगाह-ए-इलाही में हाथ उठाकर दुआगो हैं:

ऐ अल्लाह! मरहूम मिस्त्री अय्यूब अहमद साहब की तमाम ख़ताओं को माफ़ फ़रमा। उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे। क़ब्र की तमाम मंज़िलों को आसान फ़रमा। उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा। उनके अहल-ओ-अयाल, औलाद, रिश्तेदारों और तमाम चाहने वालों को सब्र-ए-जमील और हिम्मत अता फ़रमा। आमीन या रब्बुल आलमीन।»

मुल्तानी समाज की ओर से ताज़ियत

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" मरहूम के इंतिक़ाल पर गहरा दुख व्यक्त करता है तथा समूचे शोकाकुल परिवार से दिली ताज़ियत पेश करता है।

अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को रौशन फ़रमाए और उन्हें अपनी रहमत के साये में जगह अता फ़रमाए। आमीन।

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"मुल्तानी समाज" — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।

सहारनपुर से शामली तक मोहब्बत, यकजहती और भरोसे का सफ़र — मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट के कार्यालय पर हुआ गर्मजोशी से इस्तक़बाल

"जब क़ौम अपने लोगों से मिलने निकलती है, तो सिर्फ़ मुलाक़ातें नहीं होतीं, बल्कि भरोसे, मोहब्बत और इत्तेहाद की नई दास्तानें भी लिखी जाती हैं।"

शामली (उत्तर प्रदेश):
बीते रोज़, इतवार, 26 जुलाई 2026 को सहारनपुर के लिंक रोड निवासी जनाब मोहम्मद नौशाद साहब और जनाब मोहम्मद राशिद साहब अपनी फैमिली के साथ पैदाइशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की देश की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी तंजीम "मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट (रजिस्टर्ड ऑल इंडिया)" एवं "मुल्तानी समाज" राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के प्रधान-संपादक ज़मीर आलम मुल्तानी के शामली स्थित कार्यालय पहुँचे।

कार्यालय पहुँचने पर सभी मेहमानों का बेहद गर्मजोशी, अपनत्व और इज़्ज़त के साथ इस्तक़बाल किया गया। इस ख़ुशनुमा मुलाक़ात के दौरान बिरादरी की तरक़्क़ी, तालीम, सामाजिक एकता, नौजवानों के बेहतर मुस्तक़बिल और आने वाले वक़्त में संगठन को और मज़बूत बनाने जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई।

इस अवसर पर मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट के कानूनी सलाहकार हाजी शकील अहमद साहब तथा ख़ज़ांची हाजी नूरमोहम्मद साहब भी मौजूद रहे। सभी ने बिरादरी के हित में एकजुट होकर काम करने और समाज को नई बुलंदियों तक पहुँचाने का संकल्प दोहराया।

प्रधान-संपादक ज़मीर आलम मुल्तानी ने कहा कि "मुल्तानी समाज" केवल एक समाचार पत्रिका नहीं, बल्कि बिरादरी की आवाज़, पहचान और हक़ूक़ की बुलंद आवाज़ है। इसका उद्देश्य समाज को जोड़ना, प्रतिभाओं को सामने लाना, शिक्षा को बढ़ावा देना और देशभर में फैले मुल्तानी समाज के लोगों को एक मज़बूत मंच उपलब्ध कराना है।

यह मुलाक़ात इस बात का भी प्रमाण है कि आज देश के विभिन्न राज्यों से बिरादरी के लोग संगठन और समाचार पत्रिका पर लगातार अपना भरोसा जता रहे हैं तथा समाज की बेहतरी के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ रहे हैं।


उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान-संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट

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बावली बिरादरी पर ग़म का पहाड़ टूटा — जनाब वहीदू साहब (बावली वाले) की अहलिया का इंतेक़ाल, आज मगरिब के बाद बावली कब्रिस्तान में होगी नमाज़-ए-जनाज़ा व तदफ़ीन

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी और अहले-ईमान को यह ग़मगीन इत्तिला दी जाती है कि आज बरोज़ पीर, बा-तारीख़ 27 जुलाई 2026 को जनाब वहीदू साहब (बावली वाले), हाल मुक़ाम दिल्ली की मोहतरमा अहलिया इस फ़ानी दुनिया को अलविदा कहकर अपने ख़ालिक़-ए-हक़ीक़ी से जा मिलीं।

إِنَّا لِلَّٰهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ

मरहूमा, हाजी खालिद अहमद (बावली वाले) की चाची थीं। उनके इंतेक़ाल की खबर सुनते ही पूरे ख़ानदान, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, अहबाब और बिरादरी में ग़म की लहर दौड़ गई। मरहूमा अपने पीछे रोने वाले अज़ीज़, रिश्तेदार, चाहने वाले और दुआ करने वालों की एक बड़ी तादाद छोड़ गई हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक मय्यत को दिल्ली से उनके पैतृक गांव बावली लाया जा रहा है। मरहूमा की तदफ़ीन का वक़्त मगरिब की नमाज़ के बाद तय किया गया है।
नमाज़-ए-जनाज़ा इंशाअल्लाह बावली कब्रिस्तान में अदा की जाएगी, जिसके बाद उन्हें सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

ज़िंदगी और मौत का मालिक सिर्फ़ अल्लाह तआला है। हर जान को एक न एक दिन मौत का मज़ा चखना है। आज मरहूमा अपने तमाम दुनियावी रिश्तों को पीछे छोड़कर उस सफ़र पर रवाना हो चुकी हैं, जहाँ से कोई वापस नहीं आता। अब उनके लिए सबसे क़ीमती तोहफ़ा सिर्फ़ दुआ-ए-मग़फ़िरत, ईसाल-ए-सवाब और नेक अमल हैं।

👉 तमाम अहले-ईमान से पुरख़ुलूस गुज़ारिश है कि मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएँ।

ऐ अल्लाह!
मरहूमा की तमाम ख़ताओं को माफ़ फ़रमा।
उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे।
क़ब्र की तंगी और अज़ाब से महफ़ूज़ फ़रमा।
उनकी मंज़िल आसान फ़रमा, हश्र के दिन उन्हें अपनी रहमत के साये में जगह अता फ़रमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम नसीब फ़रमा।
उनके तमाम अहले-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और चाहने वालों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा।

आमीन या रब्बुल आलमीन, सुम्मा आमीन।


📰 सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

📌 नोट:
अधिक जानकारी के लिए हाजी खालिद अहमद (बावली वाले) से मोबाइल नंबर 79848 44198 पर राब्ता क़ायम करें।


अपनी ख़बर हम तक पहुँचाइए

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Sunday, July 26, 2026

ग्राम ढिकाना के जनाब शरीफ़ अहमद का इंतेकाल, आज होगी सुपुर्द-ए-ख़ाक की रस्म

बागपत (उत्तर प्रदेश): निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ आप सभी बिरादराना हज़रात को इत्तिला दी जाती है कि ग्राम ढिकाना, तहसील बड़ौत, ज़िला बागपत (उत्तर प्रदेश) निवासी जनाब शरीफ़ अहमद वल्द जनाब निज़ामू साहब (मरहूम) का आज, दिन इतवार, 26 जुलाई 2026 को शाम तक़रीबन 5:30 बजे कज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया। मरहूम की उम्र तक़रीबन 72 वर्ष थी।

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा एवं सुपुर्द-ए-ख़ाक की रस्म कल, दिन पीर, 27 जुलाई 2026 को सुबह 9:00 बजे अदा की जाएगी। तमाम अहबाब, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फ़रमाकर मरहूम के हक़ में दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे, जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए और तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।

नोट: मरहूम के सिलसिले में अधिक जानकारी के लिए मोहम्मद युनुस अहमद से मोबाइल नंबर 9368574237 पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है।


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Saturday, July 25, 2026

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन लंबी बीमारी के चलते जाफराबाद (दिल्ली) निवासी रईस अहमद का इंतेकाल, नम आंखों से किया गया सुपुर्द-ए-ख़ाक

दिल्ली। निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादरान-ए-इस्लाम, ख़ुसूसन मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी को यह इत्तिला दी जाती है कि जाफराबाद, दिल्ली निवासी जनाब रईस अहमद वल्द मरहूम नज़ीर अहमद का शनिवार, 25 जुलाई 2026 को तक़रीबन 65 वर्ष की उम्र में लंबी बीमारी के बाद कज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया।

मरहूम को रविवार, 26 जुलाई 2026 को दोपहर साढ़े 12 बजे नम आंखों और ग़मगीन माहौल में सुपुर्द-ए-ख़ाक कर दिया गया। उनके इंतेकाल से पूरे कुनबे, खानदान और बिरादरी में शोक की लहर दौड़ गई।

मरहूम अपने पीछे अहलिया (पत्नी), एक बेटा, दो बेटियां, समूचे खानदान, रिश्तेदारों और तमाम अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को ग़मज़दा छोड़कर इस फ़ानी दुनिया से हमेशा-हमेशा के लिए रुख़्सत हो गए।

दुआ है कि अल्लाह तआला मरहूम की मग़फिरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए, जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।


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ग़म में डूबी मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी — जनाब इक़बाल साहब का दर्दनाक हादसे में इंतेकाल, कल लिबासपुर कब्रिस्तान में होंगे सुपुर्द-ए-ख़ाक

कैराना/शामली/नई दिल्ली।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी को यह इत्तिला दी जाती है कि गाँव इस्सोपुर, तहसील कैराना, जनपद शामली (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले एवं हाल निवासी स्वरूप नगर, दिल्ली जनाब इक़बाल साहब वल्द जनाब शमशुद्दीन साहब (उम्र तकरीबन 60 वर्ष) का आज शनिवार, 25 जुलाई 2026 को साइट पर काम करने के दौरान अचानक हुए एक दर्दनाक हादसे में क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया।

मरहूम के अचानक इंतेकाल की खबर से उनके खानदान, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और पूरी मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी में गहरे रंज-ओ-मलाल की लहर दौड़ गई है। हर आँख अश्कबार है और हर ज़ुबान से मरहूम की मग़फ़िरत एवं बुलंद-ए-दराज़ात के लिए दुआएँ निकल रही हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूम जनाब इक़बाल साहब की नमाज़-ए-जनाज़ा अदा किए जाने के बाद, रविवार 26 जुलाई 2026 को लिबासपुर कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम बिरादरान-ए-इस्लाम से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत फरमाएँ और उनके एहले-ख़ाना के ग़म में शरीक होकर सब्र-ओ-हौसले का पैग़ाम दें।

अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फरमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मक़ाम अता फरमाए और तमाम लवाहिक़ीन को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

मालूमात के लिए संपर्क

  • जनाब नसीम साहब (छोटे भाई): 8273273227
  • जनाब मुस्तकीम साहब (भतीजे): 9012101507

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🕋 अज़ीम अफ़सोसनाक ख़बर | मिस्त्री दिलशाद साहब के इंतेकाल से मुस्लिम मुल्तानी लौहार (बढ़ई) बिरादरी में मातम की लहर, आज मग़रिब के बाद होंगे सुपुर्द-ए-ख़ाक

बड़ौली (तहसील बड़ौत, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश):
निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिली अफ़सोस के साथ मुस्लिम मुल्तानी लौहार (बढ़ई) बिरादरी के तमाम बिरादरान-ए-इस्लाम की ख़िदमत में यह ग़मगीन इत्तिला पेश की जाती है कि जनाब हाजी अब्दुल गफूर साहब के फ़र्ज़ंद मिस्त्री दिलशाद साहब (उम्र तक़रीबन 48 वर्ष) का शनिवार, 25 जुलाई 2026 को दोपहर लगभग 1:00 बजे लंबी बीमारी के बाद इंतिक़ाल हो गया।

إِنَّا لِلّٰهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ

हर जान को मौत का मज़ा चखना है और आख़िरकार अपने रब की बारगाह में लौटकर जाना है। अल्लाह तआला की यही मर्ज़ी थी।

मरहूम के इंतेकाल की ख़बर फैलते ही गांव बड़ौली सहित पूरे क्षेत्र और मुस्लिम मुल्तानी लौहार (बढ़ई) बिरादरी में ग़म की लहर दौड़ गई। बड़ी तादाद में अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, दोस्त-अहबाब और बिरादरी के लोग मरहूम के घर पहुँचे और ग़मज़दा परिवार से ताज़ियत का इज़हार करते हुए सब्र-ए-जमील की दुआ की।

मरहूम अपने पीछे एक भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके वालिद हाजी अब्दुल गफूर साहब के आठ बेटे और तीन बेटियाँ हैं। मरहूम दिलशाद साहब अपने पीछे अपने तीन बेटों—

  • मुहम्मद वसीम
  • मुहम्मद नसीम
  • मुहम्मद इरफ़ान

—सहित तमाम अहल-ए-ख़ाना, रिश्तेदारों और चाहने वालों को ग़मज़दा छोड़कर इस फ़ानी दुनिया से हमेशा के लिए रुख़्सत हो गए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आज शनिवार, 25 जुलाई 2026 को मग़रिब की नमाज़ के बाद गांव बड़ौली के कब्रिस्तान में नमाज़-ए-जनाज़ा अदा की जाएगी, जिसके बाद मरहूम को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। बिरादरी के तमाम हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत कर मरहूम के हक़ में दुआ-ए-मग़फिरत करें और सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

"मुल्तानी समाज" न्यूज़ परिवार अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की बारगाह में दुआगो है कि अल्लाह तआला मरहूम मिस्त्री दिलशाद साहब की मग़फिरत फरमाए, उनकी तमाम ख़ताओं को अपनी रहमत से माफ़ फरमाए, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फरमाए और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन या रब्बल आलमीन। सुम्मा आमीन।

📿 अहल-ए-ईमान के लिए अहम हिदायतें

  • मय्यत वालों के घर जाकर हँसी-मज़ाक और गैर-ज़रूरी बातों से परहेज़ करें।
  • ग़मज़दा परिवार पर खाने-पीने या मेहमाननवाज़ी का बोझ न बनें।
  • जनाज़े के पीछे चलते समय मोबाइल फ़ोन पर बातचीत और दुनियावी मशग़ूलियत से बचें।
  • जनाज़े के साथ अदब व एहतराम के साथ कलिमा-ए-तय्यिब "ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह" और ज़िक्र-ए-इलाही में मशग़ूल रहें।

नोट:
अधिक जानकारी के लिए पप्पू चौधरी, बड़ौली से मोबाइल नंबर 8126853165 पर राब्ता कायम किया जा सकता है।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लौहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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