Saturday, June 6, 2026

हर नेक सलाह का अंजाम नेक नहीं होता: एक बकरे, घोड़े और इंसानी फितरत की दिलचस्प दास्तान

बिना मांगे सलाह देने से पहले एक बार जरूर सोचें

ज़िंदगी में अक्सर हम दूसरों की परेशानियों को देखकर उनकी मदद करने के लिए आगे बढ़ जाते हैं। कई बार हमारी नीयत बिल्कुल साफ होती है, हम किसी का भला चाहते हैं, लेकिन हर अच्छे इरादे का नतीजा अच्छा ही निकले, यह जरूरी नहीं होता। यही हकीकत एक दिलचस्प कहानी के जरिए समझी जा सकती है।

एक व्यक्ति के पास एक घोड़ा और एक बकरा था। दोनों जानवर उसके लिए बेहद अज़ीज़ थे। वह उनकी खूब देखभाल करता था और उन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानता था।

एक दिन अचानक घोड़ा गंभीर रूप से बीमार पड़ गया। हालत इतनी खराब हो गई कि वह खड़ा तक नहीं हो पा रहा था। मालिक बहुत परेशान हुआ और उसने तुरंत एक डॉक्टर को बुलाया।

डॉक्टर ने घोड़े का अच्छी तरह मुआयना किया और फिर गंभीर लहजे में कहा,

"घोड़े को खतरनाक बीमारी है। मैं लगातार चार दिन तक इसका इलाज करूंगा। अगर चौथे दिन तक यह अपने पैरों पर खड़ा हो गया तो इसकी जान बच सकती है। लेकिन अगर यह खड़ा नहीं हुआ, तो मजबूरन इसे मारना पड़ेगा।"

यह सुनकर मालिक का दिल बैठ गया। वह अपने प्यारे घोड़े को खोना नहीं चाहता था, लेकिन हालात उसके हाथ में नहीं थे।

डॉक्टर के जाने के बाद पास खड़ा बकरा सारी बातें सुन चुका था। उसने सोचा कि अगर घोड़ा हिम्मत कर ले तो उसकी जान बच सकती है।

अगले दिन जब डॉक्टर आया तो घोड़ा वैसे ही पड़ा रहा। डॉक्टर दवा देकर चला गया। बकरे ने घोड़े को समझाया,

"दोस्त, थोड़ी हिम्मत करो। कोशिश करो खड़े होने की। तुम्हारी जान बच सकती है।"

लेकिन घोड़े ने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया।

दूसरे दिन भी यही हुआ। बकरे ने फिर समझाया, मगर कोई असर नहीं पड़ा।

तीसरे दिन डॉक्टर ने चेतावनी देते हुए कहा,

"अगर कल तक यह नहीं उठा तो फिर इसे बचाना मुश्किल होगा।"

डॉक्टर के जाने के बाद बकरे ने आखिरी बार घोड़े को समझाया,

"जिंदगी अल्लाह की बहुत बड़ी नेमत है। एक बार पूरी ताकत लगाकर कोशिश तो करो। शायद तुम्हारी मेहनत रंग ले आए।"

इस बार घोड़े ने बकरे की बात पर गौर किया। उसने सोचा कि कोशिश करने में क्या नुकसान है।

अगले दिन जैसे ही डॉक्टर घोड़े के पास पहुंचा, घोड़ा अचानक उठ खड़ा हुआ और धीरे-धीरे दौड़ने लगा।

डॉक्टर बेहद खुश हुआ और मालिक से बोला,

"मुबारक हो! आपका घोड़ा अब खतरे से बाहर है।"

मालिक की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने उत्साह में कहा,

"आज तो बहुत बड़ी खुशखबरी मिली है। इस खुशी में आज दावत होगी!"

और फिर उसने बकरे की ओर इशारा करते हुए कहा,

"आज बकरा कटेगा!"

यह सुनकर बकरा अवाक रह गया। जिस घोड़े की जान बचाने के लिए उसने इतनी मेहनत की थी, उसी खुशी का सबसे बड़ा नुकसान उसे खुद उठाना पड़ा।

कहानी का सबक

यह कहानी हमें सिखाती है कि दुनिया में हर काम सोच-समझकर करना चाहिए। दूसरों की मदद करना नेक काम है, लेकिन हर परिस्थिति को समझे बिना बीच में पड़ना कभी-कभी हमारे लिए मुश्किलें भी पैदा कर सकता है।

इस्लाम भी हमें हिकमत (बुद्धिमानी) के साथ काम करने की तालीम देता है। नेक नीयत के साथ-साथ सही समझ और दूरअंदेशी भी जरूरी है। हर सलाह सही समय, सही जगह और सही तरीके से दी जाए, तभी उसका वास्तविक फायदा होता है।

निष्कर्ष

दूसरों की मदद जरूर करें, लेकिन हालात को समझकर। नेक इरादे के साथ हिकमत भी जरूरी है। कई बार जो इंसान दूसरों की भलाई के लिए सबसे ज्यादा कोशिश करता है, वही अनजाने में खुद मुश्किल में पड़ जाता है।

इसलिए जिंदगी का एक अहम उसूल याद रखिए—

"नेकी कीजिए, लेकिन समझदारी और दूरदर्शिता के साथ।"


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज पोर्टल/यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए नई दिल्ली से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की विशेष प्रस्तुति।

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Friday, June 5, 2026

हाजी शौकत साहब का इंतिकाल | अग्रवाल मंडी टटीरी बागपत में शोक की लहर

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन: मुस्लिम मुल्तानी लोहार बढ़ई बिरादरी के बुजुर्ग हाजी शौकत साहब का इंतिकाल

बागपत (उत्तर प्रदेश)। मुस्लिम मुल्तानी लोहार बढ़ई बिरादरी के लिए बेहद दुखद ख़बर सामने आयी है। अग्रवाल मंडी टटीरी, जिला बागपत निवासी बिरादरी के सम्मानित बुजुर्ग हाजी शौकत साहब वल्द मरहूम हाजी सद्दीक साहब (बढ़ई) का आज दिन शनिचर, 6 जून 2026 को लंबी बीमारी के बाद कजा- ए - ईलाही से इंतिकाल हो गया। उनकी उम्र लगभग 76 वर्ष बताई गई है।

मरहूम के इंतिकाल की खबर से परिवार, रिश्तेदारों, दोस्तों और बिरादरी में गहरा शोक व्याप्त है। हाजी शौकत साहब अपने नेक अख़लाक, सादगी और सामाजिक व्यवहार के लिए जाने जाते थे। उनके अचानक हुए इन्तेकाल से इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।

परिजनों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मरहूम को शनिवार, 6 जून 2026 को अग्रवाल मंडी टटीरी स्थित बागपत रोड कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। जनाजे में इलाके के सैकड़ों लोगों द्वारा शिरकत कर मरहूम को नम आंखों से अंतिम विदाई देंगे।

हाजी शौकत साहब अपने पीछे तीन पुत्र—मोहम्मद इरशाद, मोहम्मद इरफान और मोहम्मद इमरान सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। परिवार और करीबी रिश्तेदारों के लिए यह नुकसान बहुत ही पीड़ादायक है।

इस अवसर पर बिरादरी और क्षेत्र के लोगों ने मरहूम के लिए दुआ-ए-मगफिरत की और अल्लाह तआला से उनकी बख्शिश की दुआओं की दरखास्त की है।

दुआ-ए-मगफिरत

अल्लाह तआला मरहूम हाजी शौकत साहब की मगफिरत फरमाए, उनकी तमाम खताओं को माफ फरमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत की क्यारीयों में से एक क्यारी बनाए, जन्नतुल फिरदौस में आला मकाम अता फरमाए और तमाम अहलेखाना को सब्र-ए-जमील नसीब फरमाए।
आमीन सुम्मा आमीन।

इस मौके पर सामाजिक और धार्मिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए लोगों से अपील की गई कि गमगीन परिवार के साथ संवेदनशील व्यवहार करें, उन्हें सांत्वना दें और मरहूम के लिए दुआ करते रहें।

दुनिया एक फानी सराय है और हर इंसान को एक दिन अपने रब की बारगाह में हाज़िर होना है। मरहूम हाजी शौकत साहब का इंतिकाल भी हमें यही याद दिलाता है कि नेक अमल, इंसानियत और अच्छे व्यवहार ही वह पूंजी हैं जो इंसान अपने पीछे छोड़कर जाता है।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

— ज़मीर आलम, प्रधान संपादक
"मुल्तानी समाज"
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
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17 जून: मुल्तानी समाज स्थापना दिवस — एकता, सेवा और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश

17 जून: मुल्तानी समाज स्थापना दिवस — एकता, सेवा और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश

भारत की विविध सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत में अनेक ऐसे समाज और बिरादरियां हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत, हुनर और सामाजिक सेवाओं के माध्यम से देश की तरक्की में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पैदायशी इंजीनियर कहे जाने वाले मुस्लिम मुल्तानी लोहार एवं बढ़ई समाज की पहचान भी इसी मेहनतकश परंपरा, कौशल और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ी हुई है।

देश की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी सामाजिक संस्था "मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट (रजि.)" का स्थापना दिवस प्रत्येक वर्ष 17 जून को पूरे देश में बड़े उत्साह और सम्मान के साथ मनाया जाता है। यह दिन केवल एक संगठन की स्थापना का प्रतीक नहीं है, बल्कि समाज की एकता, जागरूकता, सामाजिक सरोकार और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प का भी प्रतीक बन चुका है।

वृक्षारोपण के माध्यम से समाज सेवा का संदेश

मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक जनाब ज़मीर आलम द्वारा वर्ष 2011 में शुरू की गई एक अनूठी पहल ने आज राष्ट्रीय स्तर पर एक जनआंदोलन का रूप ले लिया है। हर वर्ष 17 जून को "मुल्तानी समाज स्थापना दिवस" के अवसर पर देशभर में फैले मुस्लिम मुल्तानी लोहार एवं बढ़ई बिरादरी के लोग अपने-अपने क्षेत्रों में छायादार और पर्यावरण के लिए उपयोगी वृक्ष लगाकर प्रकृति संरक्षण में अपना योगदान देते हैं।

इस मुहिम की सबसे विशेष बात यह है कि समाज के लोग वृक्षारोपण के बाद अपनी तस्वीरें और गतिविधियों को सोशल मीडिया एवं अन्य जनसंचार माध्यमों के जरिए साझा करते हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश दूर-दूर तक पहुंचता है। बीते वर्षों में यह अभियान राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र सहित देश के अनेक राज्यों में सफलतापूर्वक संचालित हुआ है।

जिम्मेदारियों का वितरण और तैयारियां शुरू

इस वर्ष भी स्थापना दिवस को यादगार बनाने के लिए संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों को विभिन्न क्षेत्रों की जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। संस्था के पूर्व राष्ट्रीय चेयरमैन जनाब मोहम्मद आलम, वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जनाब हाजी मोहम्मद इक़बाल काजी (भीलवाड़ा, राजस्थान), अब्दुल सत्तार साहब (सत्तार बॉस, इंदौर) तथा उज्जैन से जनाब फारूख साहब , महबूब खान करनाल, हरियाणा से और मोहम्मद इरफ़ान चमोली, उत्तराखंड से और फारूख साहब बागपत, उत्तर प्रदेश को हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी कार्यक्रम के सफल संचालन की जिम्मेदारी दी गई है।

समाज के जिम्मेदारों का मानना है कि वृक्षारोपण केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनकी देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी भी समाज के प्रत्येक सदस्य को निभानी चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण मिल सके।

एकता और पहचान का प्रतीक बन चुका है स्थापना दिवस


आज 17 जून का दिन केवल एक समारोह नहीं बल्कि मुल्तानी समाज की पहचान, एकता और सामाजिक चेतना का प्रतीक बन चुका है। देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले समाज के लोग इस दिन को आपसी भाईचारे, सामाजिक सहयोग और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ मनाते हैं।

समाज के बुजुर्गों और युवाओं का मानना है कि जिस प्रकार उनके पूर्वजों ने अपने हुनर और मेहनत से समाज में सम्मान अर्जित किया, उसी प्रकार वर्तमान पीढ़ी को भी सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए सकारात्मक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

निष्कर्ष

मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा शुरू किया गया वृक्षारोपण अभियान इस बात का प्रमाण है कि यदि किसी समाज की सोच सकारात्मक हो तो वह केवल अपने समुदाय तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे देश और मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत बन जाता है। 17 जून का स्थापना दिवस इसी प्रेरणा, सेवा भावना और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प का जीवंत उदाहरण है।

आइए, इस स्थापना दिवस पर हम सभी एक पौधा लगाकर और उसकी देखभाल का संकल्प लेकर प्रकृति को सुरक्षित रखने में अपना योगदान दें।


विशेष संवाददाता: अज़हर मुल्तानी, नई दिल्ली

प्रकाशन: मुल्तानी समाज (राष्ट्रीय समाचार पत्रिका / न्यूज पोर्टल / यूट्यूब चैनल)

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Thursday, June 4, 2026

!! नेक़ी का लिबास और अस्ल किरदार !!

♨️ आज का सबक़-आमोज़ वाक़िआ ♨️

एक दफ़ा एक फ़ाख़्ता और उसकी हमसफ़र फ़ाख़्ता एक दरख़्त की शाख़ पर बैठे हुए थे। दूर से उन्हें एक शख़्स अपनी तरफ़ आता दिखाई दिया।

मादा फ़ाख़्ता ने फ़िक्र के साथ कहा, "चलो यहाँ से उड़ चलते हैं, कहीं यह शख़्स हमें नुक़सान न पहुँचा दे।"

नर फ़ाख़्ता ने इत्मीनान से जवाब दिया, "घबराओ मत। उसके चेहरे पर बड़ी शराफ़त नज़र आ रही है, लिबास भी बहुत अच्छा है। ऐसा इंसान हमें क्यों नुक़सान पहुँचाएगा?"

मगर जब वह शख़्स क़रीब पहुँचा तो उसने अपने कपड़ों में छुपा हुआ तीर निकाला और फ़ौरन फ़ाख़्ते का शिकार कर लिया। देखते ही देखते उसकी जान निकल गई।

बेचारी फ़ाख़्ता किसी तरह अपनी जान बचाकर उड़ गई। अपने साथी की जुदाई का ग़म उसके लिए बहुत बड़ा सदमा था।

वह इंसाफ़ की तलाश में बादशाह के दरबार पहुँची और पूरा वाक़िआ बयान किया। बादशाह ने शिकारी को गिरफ़्तार करवाकर दरबार में पेश किया। शिकारी ने अपना जुर्म क़ुबूल कर लिया।

बादशाह ने फ़ाख़्ता से कहा, "तुम्हारे साथ बड़ा ज़ुल्म हुआ है। तुम जो सज़ा देना चाहो, वही दी जाएगी।"

फ़ाख़्ता ने कहा, "मेरे साथी को तो अब कोई वापस नहीं ला सकता। लेकिन मेरी गुज़ारिश है कि इस शिकारी को ऐसी सज़ा दी जाए जिससे लोग धोखे से बच सकें। अगर यह शिकारी है तो इसे शिकारी ही की पहचान के साथ रहना चाहिए। इसे नेक़ी और शराफ़त का लिबास पहनकर लोगों को धोखा देने का हक़ नहीं होना चाहिए।"

उसने आगे कहा, "जो लोग अच्छे इंसान बनने का दिखावा करते हैं मगर उनके आमाल बुरे होते हैं, वे समाज के लिए सबसे ज़्यादा नुक़सानदेह होते हैं।"

सबक़:

इस्लाम हमें सिखाता है कि इंसान की अस्ल पहचान उसके कपड़ों, बातों या दिखावे से नहीं, बल्कि उसके किरदार, अमानतदारी और अख़लाक़ से होती है।

अल्लाह तआला दिलों के हाल और इंसान के आमाल को देखता है। इसलिए हमें हर उस शख़्स से होशियार रहना चाहिए जो नेक़ी का लिबास ओढ़कर धोखे और फ़रेब का रास्ता अपनाता हो।

अल्लाह तआला हमें सच्चाई, अख़लास और अच्छे अख़लाक़ के साथ ज़िंदगी गुज़ारने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

रुड़की में रियल मुल्तानी लुहार वेलफेयर सोसाइटी का भव्य सम्मेलन सम्पन्न, चौधरी मौ० मुबश्शीर एडवोकेट को उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष चुना गया

रुड़की (उत्तराखंड): समाजी एकता, संगठनात्मक मजबूती और बिरादरी के विकास को समर्पित रियल मुल्तानी लुहार वेलफेयर सोसाइटी (भारतवर्ष) द्वारा दिनांक 31 मई 2026 को रुड़की में एक भव्य एवं गरिमामयी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन सोसाइटी के संस्थापक हाजी तौकीर साहब एवं उपाध्यक्ष मिर्ज़ा नसीम साहब के नेतृत्व में चौधरी मौ० मुबश्शीर एडवोकेट के आवास पर सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम में सोसाइटी के राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय पदाधिकारियों की विशेष उपस्थिति रही, जिनमें जनरल सेक्रेटरी शादाब मिर्ज़ा, राष्ट्रीय प्रेस प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी मु० वसीम देवबंदी, सेक्रेटरी अफजाल मुगल, मिर्ज़ा शाहनवाज़ (सहारनपुर), समाजसेवी मु० यासीन तथा संरक्षक मु० ताहिर (मुज़फ्फरनगर) प्रमुख रूप से शामिल रहे।

कार्यक्रम के दौरान रुड़की एवं आसपास के क्षेत्रों से आए गणमान्य व्यक्तियों का सम्मान किया गया। विशेष रूप से अब्दुल गफ्फार, अब्दुल रहमान उर्फ बाबा, कमर मामून, रऊफ अहमद तथा शाहिद हसन को उत्तराखंड में रुड़की कमेटी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपते हुए पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर उपस्थित सदस्यों एवं गणमान्य लोगों की सर्वसम्मति से चौधरी मौ० मुबश्शीर एडवोकेट को उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष एवं रुड़की अध्यक्ष चुना गया। इस महत्वपूर्ण घोषणा का ऐलान सोसाइटी के संरक्षक जनाब मौ० ताहिर साहब ने उनके गले में माला और शॉल पहनाकर किया। इस सम्मान समारोह ने पूरे कार्यक्रम को एक नई गरिमा और उत्साह प्रदान किया।

राष्ट्रीय कमेटी के सदस्य मु० यासीन साहब ने भी नव नियुक्त पदाधिकारियों को सम्मानित किया। वहीं राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष यासमीन साहिबा ने उपस्थित महिलाओं को सोसाइटी की सदस्यता दिलाकर महिला विंग के विस्तार अभियान की शुरुआत की तथा उन्हें सम्मानित करते हुए संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

नव नियुक्त पदाधिकारियों एवं सरपरस्तों ने समाज के उत्थान और संगठन को उत्तराखंड के गांव-गांव तथा शहर-शहर तक मजबूत बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने विश्वास दिलाया कि वे तन, मन और समय लगाकर समाज की एकता, शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और विकास के लिए कार्य करेंगे।

कार्यक्रम में मोहम्मद अजमल, उत्तराखंड हाईकोर्ट अधिवक्ता बिलाल अहमद, अब्दुल करीम, हसीन अहमद, सीनुद्दीन मिर्ज़ा, फारूक अहमद, सईद मेरठवी, दानिश, आमिर, रज़्ज़ाक़ सादिक, इसरार पत्रकार, मोहम्मद आमिर, अयान मिर्ज़ा सहित अनेक सम्मानित नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने संगठन की इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाज के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

कार्यक्रम का समापन आपसी भाईचारे, संगठनात्मक एकता और समाज की तरक्की की दुआओं के साथ हुआ। उपस्थित लोगों ने विश्वास व्यक्त किया कि रियल मुल्तानी लुहार वेलफेयर सोसाइटी आने वाले समय में समाज के विकास और नई पीढ़ी के मार्गदर्शन में अहम भूमिका निभाएगी।

— मोहम्मद वसीम, विशेष संवाददाता
मुल्तानी समाज
रुड़की, उत्तराखंड

मिस्त्री शाहिद के वालिद जनाब अब्दुल सत्तार का इंतिकाल, इलाके में शोक की लहर,

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन: 

बड़ौत/बागपत। बड़े ही रंज और अफ़सोस के साथ यह खबर प्राप्त हुई कि जनाब अब्दुल सत्तार पुत्र अजीजुद्दीन ( मरहूम मूल निवासी ग्राम वाजिदपुर, जिला बागपत (उत्तर प्रदेश) तथा हाल मुकाम छपरौली चुंगी, तोमर नर्सिंग होम के सामने, का आज 04 जून 2026 (जुमेरात) को लगभग दोपहर 1 बजे इंतिकाल हो गया।

मरहूम के इंतिकाल की खबर मिलते ही परिवार, रिश्तेदारों, दोस्तों और क्षेत्र के लोगों में गहरा दुख व्याप्त हो गया। जनाब अब्दुल सत्तार अपने सादगीपूर्ण स्वभाव, मिलनसार व्यक्तित्व और नेक अख़लाक़ के लिए जाने जाते थे। उनके इंतेकाल से परिवार ही नहीं बल्कि जानने वालों के बीच भी एक खालीपन महसूस किया जा रहा है।

परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार मरहूम की मैय्यत को आज बाद नमाज़ मग़रिब  सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। इस दुखद मौके पर बड़ी संख्या में लोगों के जनाज़े में शामिल होने की संभावना है।

हम सब अल्लाह तआला की बारगाह में दुआगो हैं कि वह मरहूम की तमाम खताओं को माफ़ फरमाए, उनकी मग़फिरत फरमाए, कब्र को जन्नत के बागों में से एक बाग बनाए और उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला से आला मकाम अता फरमाए। साथ ही उनके तमाम अहलेखाना, रिश्तेदारों और चाहने वालों को इस सदमे को बर्दाश्त करने की तौफीक़ अता फरमाए।

"हर जान को मौत का स्वाद चखना है, और फिर उसी की तरफ़ लौटकर जाना है।"

मुल्तानी समाज परिवार इस दुख की घड़ी में मरहूम के परिजनों के साथ अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता है तथा तमाम पाठकों और बिरादराना हज़रात से मरहूम के लिए ख़ुसूसी दुआ-ए-मग़फिरत की अपील करता है।

दुआ करें: अल्लाह तआला मरहूम अब्दुल सत्तार साहब की मग़फिरत फरमाए, उनकी कब्र को रौशन फरमाए, जन्नतुल फिरदौस में जगह अता फरमाए और तमाम अहलेखाना को सब्र-ए-जमील नसीब फरमाए। आमीन सुम्मा आमीन।

— ज़मीर आलम प्रधान संपादक, मुल्तानी समाज बड़ौत, जिला बागपत (उत्तर प्रदेश)

Wednesday, June 3, 2026

दिल्ली में शोक की लहर: हाजी सगीर अहमद साहब का इंतिकाल, नम आंखों के साथ किया गया सुपुर्द-ए-ख़ाक

नई दिल्ली, 04 जून 2026 | ख़ास रिपोर्ट

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और अफसोस के साथ यह खबर प्राप्त हुई कि दिल्ली के गोयला डेरी द्वारका क्षेत्र के सम्मानित बुज़ुर्ग, जनाब हाजी सगीर अहमद साहब वल्द मरहूम जनाब यासीन साहब ( शहदूड़ी वाले ) का आज तड़के दिन जुमेरात, 04 जून 2026 को लगभग 1:30 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिकाल हो गया। इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम की उम्र तकरीबन 71 वर्ष बताई गई है। उनके इंतिकाल की खबर मिलते ही परिवार, रिश्तेदारों, दोस्तों और जानने वालों में गहरे दुख और शोक की लहर दौड़ गई। हर आंख अश्कबार दिखाई दी और हर ज़ुबान से मरहूम की मग़फ़िरत के लिए दुआएं निकलती रहीं।

मिली जानकारी के अनुसार मरहूम का जनाज़ा आज सुबह 10:30 बजे अदा किया गया, जिसके बाद उन्हें नम आंखों और दुआओं के साथ सुपुर्द-ए-ख़ाक कर दिया गया। बड़ी संख्या में अकीदतमंदों, रिश्तेदारों और क्षेत्रवासियों ने जनाज़े में शिरकत कर मरहूम को अपनी अंतिम श्रद्धांजलि पेश की।

हाजी सगीर अहमद साहब अपने अच्छे अख़लाक़, मिलनसार स्वभाव और सामाजिक रिश्तों की मजबूती के लिए जाने जाते थे। उनका इंतिकाल न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे इलाके और जानने वालों के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।

मरहूम अपने पीछे तीन बेटों, चार बेटियों समेत भरा-पूरा कुनबा, रिश्तेदार और चाहने वालों को ग़मज़दा छोड़ गए हैं। उनके बिछड़ जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घर का माहौल ग़मगीन है और हर शख़्स उनकी यादों में डूबा हुआ है।

अल्लाह तआला मरहूम की तमाम खताओं को माफ़ फरमाए, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे, जन्नतुल फिरदौस में आला मकाम अता फरमाए और तमाम अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।

मैय्यत के संबंध में अधिक जानकारी के लिए:
मोहम्मद इमरान (न्याजपुरा, मुज़फ्फरनगर)
मोबाइल: 8273692121

ख़ास रिपोर्ट: ज़मीर आलम, प्रधान संपादक
"मुल्तानी समाज" राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज़ पोर्टल/यूट्यूब चैनल