Sunday, August 16, 2026

निम्बरी की बुज़ुर्ग शख्सियत मरियम बी का इंतिक़ाल — बिरादरी में ग़म की लहर, नमाज़-ए-असर के बाद सुपुर्द-ए-ख़ाक

निम्बरी/पानीपत (हरियाणा)।
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

निहायत रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ तमाम बिरादराने हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि मरहूम चौधरी मीर हसन नूरवालिया की बेगम मरियम साहिबा, उम्र 92 साल, निवासी गाँव निम्बरी, ज़िला पानीपत, हरियाणा, का इतवार 16 अगस्त 2026 को सुबह तकरीबन 10 बजे इंतिक़ाल हो गया।

मरहूमा मरियम साहिबा गाँव निम्बरी की सबसे बुज़ुर्ग और सम्मानित शख्सियतों में शुमार थीं। उनकी वफ़ात की ख़बर से परिवार, रिश्तेदारों, अज़ीज़ों और मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी में गहरे रंज-ओ-ग़म की लहर दौड़ गई है।

मरहूमा अब्दुल सत्तार साहब की वालिदा-ए-मुहतरमा थीं। वह अपने पाँच बेटों में दूसरे नंबर के बेटे अब्दुल सत्तार के साथ मनमोहन नगर, बाबैल रोड, मस्जिद अबू बकर के पास रह रही थीं।

नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूमा का जनाज़ा नमाज़-ए-असर से पहले उनके पुश्तैनी मकान, गाँव निम्बरी ले जाया जाएगा। इसके बाद बाद नमाज़-ए-असर गाँव निम्बरी के कब्रिस्तान में नमाज़-ए-जनाज़ा अदा किए जाने के बाद उन्हें सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

मरहूमा अपने पीछे 5 बेटे, 1 बेटी, 6 नवासे तथा लगभग 20–22 पोते-पोतियों समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। उनकी वफ़ात से परिवार पर ग़म का पहाड़ टूट पड़ा है और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब तथा रिश्तेदार गहरे सदमे में हैं।

मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त मरहूमा मरियम साहिबा की कामिल मग़फ़िरत फरमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फरमाए, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फरमाए, क़ब्र के तमाम मराहिल आसान फरमाए और उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे।

ऐ अल्लाह! मरहूमा को जन्नतुल फ़िरदौस में आला से आला मुक़ाम अता फरमा, उन्हें अपने ख़ास रहमत और करम के साये में जगह अता फरमा और उनके नेक आमाल को उनके लिए सदक़ा-ए-जारीया बना दे।

या अल्लाह! मरहूमा के जनाज़े में शरीक होने वाले तमाम हज़रात की हाज़िरी और दुआओं को क़ुबूल फरमा तथा उन्हें आख़िरत के लिए ज़ख़ीरा बना दे।

पसमांदगान के लिए दुआ

अल्लाह तआला मरहूमा के तमाम बेटे-बेटियों, नवासों, पोते-पोतियों, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। इस सदमे को सहने की ताक़त दे और मरहूमा के लिए की जाने वाली तमाम दुआओं को क़ुबूल फरमाए।

बेशक हम सब अल्लाह ही के हैं और उसी की तरफ़ लौटकर जाना है।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

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Saturday, August 15, 2026

बड़ौत के मोहम्मद अली साहब का इंतिक़ाल — बिरादराने मुल्तानी समाज में ग़म की लहर, आज सुबह 10:30 बजे होगी नमाज़-ए-जनाज़ा

मोहम्मद अली साहब के इंतिक़ाल की ग़मगीन ख़बर

नमाज़-ए-जनाज़ा आज सुबह 10:30 बजे, गोरे ग़रीबा कब्रिस्तान में होगी

बड़ौत/बागपत। निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराने हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि मोहम्मद अली वल्द जनाब अब्दुल ग़फ़ूर साहब, उम्र लगभग 55 साल, निवासी गांव शिकोपुर, जिला बागपत, हाल मुकाम बड़ौली रोड, मस्जिद के पास, कस्बा बड़ौत, जिला बागपत, का शनिवार, 15 अगस्त 2026 की बीती रात लगभग 11 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम के इंतिक़ाल की ख़बर से परिवार, रिश्तेदारों, दोस्तों और बिरादराने मुल्तानी समाज में गहरा रंज-ओ-ग़म पाया जा रहा है। एक इंसान का दुनिया-ए-फ़ानी से रुख़्सत होना यक़ीनन अहले-ख़ाना और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब के लिए बेहद तकलीफ़देह लम्हा होता है। ऐसे वक़्त में सब्र, दुआ और मरहूम के लिए मग़फ़िरत की दुआ ही सबसे बड़ी तसल्ली है।

नमाज़-ए-जनाज़ा आज सुबह 10:30 बजे

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूम मोहम्मद अली साहब की नमाज़-ए-जनाज़ा रविवार, 16 अगस्त 2026 को सुबह 10:30 बजे अदा की जाएगी।

मुकाम:
गोरे ग़रीबा कब्रिस्तान, हीरोज़ कॉलेज के सामने, बड़ौत, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश।

तमाम बिरादराने हज़रात से गुज़ारिश है कि अपने तमाम मसरूफ़ियात में से वक़्त निकालकर नमाज़-ए-जनाज़ा में शिरकत फरमाएं और मरहूम की मग़फ़िरत के लिए दुआ-ए-ख़ैर करें।

मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत

अल्लाह तआला मरहूम मोहम्मद अली साहब की मुकम्मल मग़फ़िरत फरमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फरमाए, उनके दर्जात बुलंद फरमाए, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फरमाए और उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे।

ऐ अल्लाह! मरहूम को अपनी रहमत के साये में जगह अता फरमा, उनके लिए क़ब्र का सफ़र आसान फरमा, सवालात-ए-क़ब्र में कामयाबी अता फरमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम नसीब फरमा।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

अहले-ख़ाना के लिए दुआ

अल्लाह रब्बुल आलमीन मरहूम के तमाम अहले-ख़ाना, रिश्तेदारों और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को इस सदमे को बर्दाश्त करने का सब्र-ए-जमील अता फरमाए। उनके दिलों को सुकून दे और इस मुश्किल घड़ी में अपनी ख़ास रहमत और मदद अता फरमाए।

या अल्लाह! मरहूम के घरवालों को सब्र अता फरमा, उनके ग़म को अपनी रहमत से आसान फरमा और इस सदमे के बदले उन्हें बेहतर अज्र अता फरमा।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

दफ़्न के बाद की दुआ

अल्लाह तआला मरहूम को मिट्टी की इस आख़िरी मंज़िल में अपनी रहमत के साथ जगह अता फरमाए। उनकी क़ब्र को वुसअत और रौशनी अता फरमाए, उन्हें हर तरह के अज़ाब से महफ़ूज़ फरमाए और क़यामत के दिन उन्हें अपने नेक बंदों में उठाए।

अल्लाहुम्मग़फ़िर लहू वरहम्हु, व आफिहि व'अफ़ु अन्हु।

ऐ अल्लाह! उनकी मग़फ़िरत फरमा, उन पर रहम फरमा, उन्हें आफ़ियत अता फरमा और उन्हें माफ़ फरमा।

तमाम अहले-ईमान से गुज़ारिश है कि मरहूम को अपनी ख़ुसूसी दुआओं में याद रखें।

आमीन या रब्बुल आलमीन।


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Friday, August 14, 2026

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन, धामपुर के शौकत अली मुल्तानी का इंतिक़ाल — अहल-ए-ख़ाना समेत पूरे कुनबे में ग़म की लहर

धामपुर। इंतिहाई रंज-ओ-अफ़सोस के साथ यह इत्तिला दी जाती है कि शौकत अली मुल्तानी पुत्र मरहूम शफ़ीउद्दीन क़ादर वाले, साकिन मोहल्ला बंदूकचियान, धामपुर, जिला बिजनौर, उत्तर प्रदेश का आज दिन जुमा, 14 अगस्त 2026 को दोपहर तक़रीबन 2:30 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

मरहूम की उम्र तक़रीबन 55 साल थी। उनके इंतिक़ाल की ख़बर मिलते ही अहल-ए-ख़ाना, रिश्तेदारों, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादरी के लोगों में गहरा रंज-ओ-ग़म फैल गया। मरहूम अपनी अहलिया, दो बच्चों समेत पूरे कुनबे-ख़ानदान और तमाम अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को ग़मज़दा छोड़कर इस दार-ए-फ़ानी से हमेशा-हमेशा के लिए रुख़्सत हो गए।

अहल-ए-ख़ाना और कुनबे में ग़म की लहर

मरहूम शौकत अली मुल्तानी के बड़े भाई मोहम्मद अली हैं, जबकि छोटे भाइयों में काशिफ अली, शाहबाज़ अली, राहत और अब्दुल्ला शामिल हैं। मरहूम की तीन बहनें भी हैं।

मरहूम के इंतिक़ाल से परिवार पर ग़म का पहाड़ टूट पड़ा है। इस सदमे की घड़ी में रिश्तेदारों, बिरादरी के लोगों और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब की बड़ी तादाद अहल-ए-ख़ाना से मुलाक़ात कर इज़हार-ए-ताज़ियत कर रही है और उन्हें सब्र-ए-जमील की दुआएँ दे रही है।

नमाज़-ए-जनाज़ा

मरहूम शौकत अली मुल्तानी की नमाज़-ए-जनाज़ा कल दिन शनिचर बा - तारीख़ 15 अगस्त 2026 को सुबह 10 बजे धामपुर के मोहल्ला बंदूकचियांन में अदा की जाएगी।

तमाम अहबाब, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादरी के हज़रात से गुज़ारिश है कि नमाज़-ए-जनाज़ा में शिरकत फ़रमाकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें।

अल्लाह रब्बुल आलमीन मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फ़रमाए, क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमाए, क़ब्र के तमाम मराहिल आसान फ़रमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए।

अल्लाह तआला तमाम पसमान्दगान, अहल-ए-ख़ाना और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को इस सदमे पर सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

नोट

मैय्यत के सिलसिले में मज़ीद मालूमात के लिए शाहबुद्दीन मुल्तानी साहब के मोबाइल नंबर 8595295648 पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है।


ख़ास रिपोर्ट

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Tuesday, August 11, 2026

एक माह बाद घर लौटा अंसार अहमद, परिवार में लौटी रौनक — बड़े भाई की सूझबूझ से दूर हुई नाराज़गी, फिर एक साथ रहने पर राज़ी हुए दोनों पक्ष

कैराना में खुशी की लहर: घर से नाराज़ होकर लापता हुआ नौजवान जमात में चला गया था, आज बड़े भाई हाजी इसरार साहब उसे वापस लेकर घर पहुंचे

कैराना/शामली, 11 अगस्त 2026।
तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी के लोगों के लिए यह इत्तिला यक़ीनन खुशी और इत्मीनान का सबब है कि अंसार अहमद वल्द हाजी इश्तियाक साहब (मरहूम), मूल निवासी झिंझाना एवं हाल बाशिंदे कस्बा कैराना, जिला शामली, उत्तर प्रदेश, जो पिछले करीब एक माह से घर से लापता थे, आखिरकार आज खैरियत के साथ अपने घर वापस लौट आए हैं।

अंसार अहमद के लापता होने की खबर “मुल्तानी समाज” न्यूज़ पोर्टल पर भी प्रकाशित की गई थी, जिसके बाद बिरादरी के लोगों में उनके सकुशल घर लौटने को लेकर दुआ और फिक्र का माहौल बना हुआ था।

एक कॉल ने खत्म किया एक महीने का इंतज़ार

मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को उस समय परिवार की बेचैनी खुशी में बदल गई, जब लापता अंसार अहमद ने अपने बड़े भाई जनाब हाजी इसरार साहब, गुरुग्राम वालों को फोन करके अपनी लोकेशन के बारे में जानकारी दी।

भाई की लोकेशन मिलते ही हाजी इसरार साहब ने देर किए बगैर बताई गई जगह का रुख किया और वहां पहुंचकर अपने भाई अंसार अहमद को साथ लेकर कैराना स्थित उनके घर वापस पहुंचे।

एक माह से जिस घर में अंसार की वापसी का इंतज़ार हो रहा था, वहां उनके पहुंचते ही परिवार और कुनबे में खुशी की लहर दौड़ गई। अपनों को अपने सामने देखकर परिजनों की आंखों में खुशी और इत्मीनान साफ़ दिखाई दिया।

घर से नाराज़ होकर जमात में चले गए थे अंसार

घर वापस लौटने के बाद अंसार अहमद ने अपने परिजनों को बताया कि वह अपनी घर वालों से नाराज़ होकर जमात में चले गए थे। इसी नाराज़गी के चलते वह करीब एक महीने तक घर से दूर रहे।

इस दौरान परिवार के लोग उनकी सलामती और वापसी को लेकर लगातार परेशान रहे और उनके सकुशल घर लौटने की दुआ करते रहे।

बड़े भाई ने निभाया फर्ज़-ए-भाईचारा, टूटता परिवार फिर जुड़ा

इस पूरे मामले में अंसार अहमद के बड़े भाई जनाब हाजी इसरार साहब ने जिस सूझबूझ, सब्र और भाईचारे का मुज़ाहिरा किया, वह काबिल-ए-तारीफ़ है।

घर वापसी के बाद हाजी इसरार साहब ने परिवार के तमाम अफ़राद को एक जगह बैठाया और दोनों पक्षों के बीच पैदा हुई नाराज़गी को दूर करने की कोशिश की। हालात यहां तक पहुंच चुके थे कि दोनों पक्ष एक-दूसरे की शक्ल तक देखना पसंद नहीं कर रहे थे और परिवार के बीच दूरी पैदा हो गई थी।

लेकिन बड़े भाई ने समझदारी और मोहब्बत के साथ दोनों पक्षों की बात सुनी और उन्हें रिश्तों की अहमियत समझाते हुए आपसी गिले-शिकवे और नाराज़गी भुलाकर दोबारा मिल-जुलकर रहने के लिए राज़ी कर लिया।

इस तरह एक ऐसा परिवार, जो नाराज़गी और दूरी की वजह से बिखरने की कगार पर पहुंच गया था, आज फिर से आपसी मोहब्बत, भाईचारे और रिश्तों की गर्मजोशी की तरफ लौट आया।

बिरादरी के लिए भी खुशी की खबर

अंसार अहमद की सकुशल वापसी न सिर्फ उनके परिवार बल्कि तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के लिए भी खुशी और इत्मीनान की बात है। उम्मीद की जानी चाहिए कि अंसार अहमद और उनके परिवार के बीच अब सभी गिले-शिकवे दूर होकर जिंदगी दोबारा सुकून और मोहब्बत के साथ आगे बढ़ेगी।

“मुल्तानी समाज” परिवार की ओर से भी दुआ है कि अल्लाह तआला अंसार अहमद और उनके पूरे खानदान के बीच हमेशा मोहब्बत, इत्तेहाद और खुशहाली कायम रखे, तमाम गलतफहमियां दूर फरमाए और इस परिवार को हमेशा आबाद व खुशहाल रखे। आमीन।


“मुल्तानी समाज” की ख़ास रिपोर्ट

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Monday, August 10, 2026

मुल्तानी बिरादरी की बुज़ुर्ग ख़ातून बिलकिस बी का इंतिक़ाल, ग़म में डूबा खानदान

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

लंबी बीमारी के बाद 75 साल की उम्र में हुईं क़ज़ा-ए-इलाही से रूख़्सत — दिन मंगल को खुरेजी, दिल्ली में अदा होगी नमाज़-ए-जनाज़ा

नई दिल्ली। निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिली अफ़सोस के साथ मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के तमाम हज़रात को इत्तिला दी जाती है कि बिलकिस बी, उम्र तक़रीबन 75 साल, अहलिया-ए-मरहूम जनाब इदरीश साहब, मूल निवासी जमना नगर, जगाधरी, हरियाणा तथा हाल बाशिंदा पुरानी गोविंदपुरी, खुरेजी, दिल्ली का लंबी बीमारी के बाद आज बरोज पीर, बा - तारीख़ 10 अगस्त 2026 की रात तकरीबन 10 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूमा मोहम्मद शाहिद साहब और मोहम्मद राशिद साहब की वालिदा मोहतरमा थीं। मरहूमा का मायका कस्बा जलालाबाद, ज़िला शामली, उत्तर प्रदेश का था। उनके इंतिक़ाल की ख़बर से अहले-ख़ानदान, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और मुस्लिम मुल्तानी बिरादरी में गहरा रंज-ओ-ग़म पाया जा रहा है।

मरहूमा एक बुज़ुर्ग और खानदान की सम्मानित ख़ातून थीं। उनके इंतिक़ाल से परिवार ने अपनी एक अज़ीज़ और मोहतरम बुज़ुर्ग हस्ती को खो दिया है। इस ग़म की घड़ी में अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादरी के लोग ग़मज़दा खानदान के साथ खड़े हैं।

नमाज़-ए-जनाज़ा

मरहूमा की नमाज़-ए-जनाज़ा कल ( आज) बरोज मंगल, 11 अगस्त 2026 को बाद नमाज़-ए-ज़ोहर, खुरेजी, दिल्ली में अदा की जाएगी, इंशाअल्लाह।

तमाम अहले-बिरादरी, रिश्तेदारों और अहबाब से गुज़ारिश है कि नमाज़-ए-जनाज़ा में शिरकत फरमाकर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और ग़मज़दा खानदान के साथ ताज़ियत व हमदर्दी का इज़हार फरमाएँ।

मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत

अल्लाह तआला मरहूमा बिलकिस बी की मग़फ़िरत-ए-कामिला फरमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और लग़ज़िशों को माफ़ फरमाए, उनके नेक आमाल को अपनी बारगाह में क़ुबूल फरमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला से आला मक़ाम अता फरमाए।

ऐ अल्लाह! मरहूमा की क़ब्र को नूर से मुनव्वर फरमा, उसे कुशादा और रोशन फरमा, क़ब्र की तमाम मुश्किलात को आसान फरमा और उन्हें अपनी ख़ास रहमत व रज़ा में जगह अता फरमा।

दफ़्न के लिए दुआ

अल्लाह रब्बुल आलमीन मरहूमा के लिए दफ़्न की मंज़िल आसान फरमाए, उन्हें अपनी रहमत के साये में जगह दे, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे, मुनकिर-नकीर के सवालात में साबित-क़दम रखे और रोज़-ए-क़यामत उन्हें अपने नेक और महबूब बंदों में शामिल फरमाए।

अल्लाह पाक उनके तमाम पसमान्दगान, बेटों, रिश्तेदारों और अहले-ख़ानदान को सब्र-ए-जमील अता फरमाए और इस सदमे को बर्दाश्त करने की हिम्मत व तौफ़ीक़ दे।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

मैय्यत के सिलसिले में राब्ता

मैय्यत के सिलसिले में मज़ीद मालूमात के लिए जनाब मोहम्मद राशिद साहब से नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है:

📞 93108---23138
📞 98101--64671


“मुल्तानी समाज” की ओर से पुरसा

“मुल्तानी समाज” न्यूज़ फैमिली मरहूमा बिलकिस बी के इंतिक़ाल पर गहरे रंज-ओ-ग़म का इज़हार करता है और दुआगो है कि अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फ़िरत फरमाकर उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फरमाए तथा तमाम लवाहिक़ीन को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।


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Sunday, August 9, 2026

हज्जन रफ़ीक़न बी का इंतिक़ाल, 10 अगस्त को होगी नमाज़-ए-जनाज़ा

मेरठ उत्तर प्रदेश।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ यह इत्तिला मिली है कि मरहूम जनाब हबीब अहमद पेशकार साहब, मेरठ (ज़ैदी फ़ार्म) की अहलिया हज्जन रफ़ीक़न बी का आज दिन इतवार बा - तारीख़ 09 अगस्त 2026 को शाम लगभग 7 बजे, 90 साल की उम्र में बीमारी के चलते कजा - ए - ईलाही से इंतिक़ाल हो गया। उनके इंतिक़ाल की ख़बर से उनके कुनबा, खानदान, रिश्तेदारों और मायके समेत जानने वालों में गहरा सदमा और ग़म की लहर दौड़ गई।

मरहूमा अपनी ज़िंदगी के आख़िरी दौर में अपने साहबज़ादों इक़बाल अहमद, अक़ील अहमद और शकील अहमद के साथ रह रही थीं। उनके इंतिक़ाल की ख़बर सुनकर अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और अहबाब ने परिवार से ताज़ियत का इज़हार करते हुए मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत की।

नमाज़-ए-जनाज़ा 10 अगस्त को

परिवार की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक मरहूमा हज्जन रफ़ीक़न बी की नमाज़-ए-जनाज़ा बरोज पीर, बा - तारीख़ 10 अगस्त 2026 को सुबह 10 बजे बाल-ए-मियां क़ब्रिस्तान, नौचंदी ग्राउंड, मेरठ में अदा की जाएगी। नमाज़-ए-जनाज़ा के बाद मरहूमा को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

मरहूमा के परिजनों ने तमाम अज़ीज़ों, रिश्तेदारों और अहबाब से नमाज़-ए-जनाज़ा में शिरकत कर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत की दरख़्वास्त की है।

मरहूमा मिन्हाज मिर्ज़ा, फलावदा की रिश्ते में बहन की सास थीं। उनके इंतिक़ाल पर मिन्हाज मिर्ज़ा समेत तमाम रिश्तेदारों और परिचितों ने गहरे रंज और अफ़सोस का इज़हार किया।

दुआ-ए-मग़फ़िरत

अल्लाह तआला मरहूमा हज्जन रफ़ीक़न बेगम की तमाम ख़ताओं और लग़ज़िशों को माफ़ फरमाए, उनकी मग़फ़िरत फरमाए, क़ब्र को नूर से मुनव्वर फरमाए, क़ब्र के हर मरहले को आसान फरमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला से आला मक़ाम अता फरमाए।

अल्लाह पाक तमाम पसमान्दगान को यह सदमा सब्र-ओ-तहम्मुल के साथ बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।


मुल्तानी समाज की ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रकाशित/प्रसारित मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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Saturday, August 8, 2026

— मोहम्मद अशरफ़ के इंतिक़ाल से इकरामपुरा में पसरा मातम, कल सुपुर्द-ए-ख़ाक

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन 

कैराना/शामली। निहायत ही रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ यह इत्तिला दी जाती है कि मोहल्ला इकरामपुरा, क़स्बा कैराना, जनपद शामली निवासी जनाब मोहम्मद अशरफ़ साहब वल्द जनाब अब्दुल सत्तार साहब, उम्र तक़रीबन 40 साल, का लंबी बीमारी के बाद आज दिन शनिचर, बा - तारीख़ 08 अगस्त 2026 की शाम लगभग 5 से 6 बजे के दरमियान क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

मरहूम के इंतिक़ाल की ख़बर सुनते ही अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, रिश्तेदारों और अहबाब में ग़म की लहर दौड़ गई। मरहूम अपने पीछे अहलिया, एक बेटे, वालिदैन, चार भाइयों और दो बहनों समेत तमाम कुनबे और खानदान को गहरे सदमे और रंज में छोड़कर इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत हो गए।

मरहूम के इंतिक़ाल पर “मुल्तानी समाज” परिवार भी गहरे रंज-ओ-ग़म का इज़हार करता है और दुआगो है कि अल्लाह तआला मरहूम मोहम्मद अशरफ़ साहब की मुकम्मल मग़फ़िरत फरमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और लग़ज़िशों को माफ़ फरमाए, क़ब्र को नूर से मुनव्वर और कुशादा फरमाए, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फरमाए और उनके तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

कल होगा सुपुर्द-ए-ख़ाक

मिली जानकारी के मुताबिक़ मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन कल इतवार, 09 अगस्त 2026 को सुबह लगभग 9 बजे की जाएगी। तमाम बिरादरान-ए-इस्लाम से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फरमाकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

अल्लाह तआला तमाम मुसलमानों को मौत की इस हक़ीक़त से इबरत हासिल करने और अपने आख़िरत के सफ़र की तैयारी करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन।

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