Thursday, April 23, 2026

🕊️ “याद-ए-मरहूमीन: दुआओं का सिलसिला, सदक़ा-ए-जारीया का ज़रिया”

हम सब इस फ़ानी दुनिया के मुसाफ़िर हैं… आज हम हैं, कल हमें भी अपने रब के पास लौट जाना है। ज़िंदगी की ये हक़ीक़त जितनी सादा है, उतनी ही गहरी भी—और इसी में हमारे लिए नसीहत भी है।

इस्लाम हमें सिर्फ ज़िंदा लोगों के हक़ अदा करने की तालीम नहीं देता, बल्कि जो हमसे बिछड़ चुके हैं, उनके साथ भी एक मजबूत रिश्ता क़ायम रखने का तरीका सिखाता है—दुआ, खैर का ज़िक्र और उनकी नेकियों को ज़िंदा रखना। यही अमल उनके लिए राहत का सबब बनता है और हमारे लिए अज्र का ज़रिया।

इसी नेक मक़सद और दीनी जज़्बे के साथ हमने एक ऐसा प्लेटफॉर्म/ग्रुप तैयार किया है, जहाँ हम अपने छोटे-बड़े बुजुर्गों, रिश्तेदारों और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब—जो इस दुनिया से रुख़्सत हो चुके हैं—उनकी यादों को मोहब्बत और अदब के साथ ज़िंदा रख सकें।

यह महज़ एक ग्रुप नहीं… बल्कि दुआओं का एक सिलसिला है, जो इंशा-अल्लाह उनके लिए आख़िरत में नूर का सबब बनेगा।

✨ आपसे ख़ास गुज़ारिश

आप अपने किसी भी मरहूम अज़ीज़ की:

  • तस्वीर
  • नाम वल्दियत के साथ
  • पूरा पता
  • उनकी अच्छी आदतें, अख़लाक़, हुनर या कोई खास बात

हमें भेजें, या दिए गए नंबरों पर कॉल करके लिखवा दें।

🌙 इस अमल के दीनी फ़ायदे

  • हर पढ़ने वाला उनके लिए दुआ-ए-मग़फिरत करेगा
  • उनकी नेकियों का ज़िक्र सदक़ा-ए-जारीया बन सकता है
  • उनकी ज़िंदगी दूसरों के लिए नसीहत और इबरत बनेगी
  • और इंशा-अल्लाह, यह सब उनके लिए अजर व सवाब का ज़रिया होगा

कभी-कभी एक छोटी सी बात… किसी का दिल बदल देती है।
हो सकता है, आपके मरहूम की कोई खूबी किसी को नेक रास्ते पर ले आए—और वही अमल उनके लिए क़यामत तक सवाब बनता रहे।

🤲 एक दिल से निकली दुआ

आइए… हम अपने मरहूमीन को सिर्फ याद ही न करें, बल्कि उनके लिए ऐसा ज़रिया बनें, जो उनकी मग़फिरत और बुलंदी-ए-दराजात का सबब बने।

अल्लाह तआला तमाम मरहूमीन की मग़फिरत फरमाए, उनकी क़ब्रों को जन्नत का बाग़ बनाए और हमें उनके लिए सच्चे दिल से दुआ करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन 🤲


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आपका एक छोटा सा कदम इस नेक काम को आगे बढ़ाने और मरहूमीन के लिए ज्यादा से ज्यादा दुआओं का ज़रिया बन सकता है।


📰 ख़ास रिपोर्ट | मुल्तानी समाज

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका / न्यूज़ पोर्टल / यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए भीलवाड़ा (राजस्थान) से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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🕯️ इंतिहाई रंजो-अलम के साथ… हज्जन फातमा बी का इंतिक़ाल, पूरे इलाके में ग़म की लहर

बड़ौत (बागपत)। निहायत ही रंजो-ग़म के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि आज बरोज़ जुमा, 24 अप्रैल 2026 को सुबह तक़रीबन 3 बजे जनाब हाजी मोहम्मद हसन साहब (गांव सिलाने, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश) की अहलिया मोहतरमा हज्जन फातमा बी का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

मरहूमा की उम्र तकरीबन 75 साल थी। उनका हालिया मक़ाम बड़ी मस्जिद, मोहल्ला पठान कोट, क़स्बा बड़ौत, जिला बागपत (उत्तर प्रदेश) बताया गया है। उनके इंतिक़ाल की खबर मिलते ही इलाके में ग़म का माहौल छा गया और घर पर ताज़ियत करने वालों का सिलसिला जारी हो गया।

हज्जन फातमा बी अपने पीछे एक बड़ा भरा-पूरा कुनबा छोड़ गई हैं, जिसमें बेटे, बेटियां, पौते, पोतियां, नाते-नातिनें और तमाम अज़ीज़ो-अक़ारिब शामिल हैं। उनकी ज़िंदगी सादगी, ख़ुलूस और मोहब्बत की मिसाल रही, और यही वजह है कि हर आंख आज अश्कबार है।

परिवार की जानिब से दी गई जानकारी के मुताबिक, मरहूमा की मय्यत को बाद नमाज़ मगरिब गौरे ग़रीबा कब्रिस्तान हीरोज के पास क़स्बा बड़ौत जिला बागपत , उत्तर प्रदेश में किया जायगा सपुर्दे -ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम अहले-ईमान से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत कर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फिरत करें और उनके दर्जात बुलंद होने की दुआ करें।

👉 अल्लाह रब्बुल आलमीन मरहूमा की मग़फ़िरत फरमाए, उनकी क़ब्र को रौशन करे और उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए। साथ ही उनके अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।
आमीन, सुम्मा आमीन।

📞 मय्यत से संबंधित अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:

  • भाई सफीक: 8791117252
  • मोहम्मद ताहिर: 9990757786

✍️ ख़ास रिपोर्ट:
"मुल्तानी समाज" — सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज पोर्टल/यूट्यूब चैनल
बड़ौत, जिला बागपत (उ.प्र.) से
प्रधान संपादक: ज़मीर आलम

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Tuesday, April 21, 2026

🌟 बागपत की होनहार बेटी अलिज़ा की शानदार कामयाबी—92.08% अंक के साथ मेहनत, लगन और हौसले की मिसाल

बागपत, उत्तर प्रदेश। शिक्षा के क्षेत्र में एक और प्रेरणादायक उपलब्धि सामने आई है, जहां लक्ष्य पब्लिक स्कूल, दिल्ली रोड बागपत की छात्रा अलिज़ा ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 92.08% अंक प्राप्त कर एक नई मिसाल कायम की है। यह सफलता केवल अंकों तक सीमित नहीं, बल्कि मेहनत, अनुशासन और निरंतर प्रयास का बेहतरीन नतीजा है।

कक्षा XI-H की छात्रा अलिज़ा ने इतिहास, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र, अंग्रेज़ी समेत सभी विषयों में संतुलित और प्रभावशाली प्रदर्शन किया। उनके 600 में से 552 अंक इस बात का प्रमाण हैं कि उन्होंने पूरे सत्र में निरंतर मेहनत और फोकस बनाए रखा। यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत प्रयासों का परिणाम है, बल्कि परिवार और शिक्षकों के मार्गदर्शन का भी असर साफ दिखाई देता है।

रिपोर्ट कार्ड के अनुसार, अलिज़ा को क्रिएटिव थिंकिंग, हेल्थ एंड हाइजीन और सेल्फ कॉन्फिडेंस में ‘A’ ग्रेड प्राप्त हुआ, जो उनके सर्वांगीण विकास को दर्शाता है। वहीं अनुशासन में ‘B’ ग्रेड यह संकेत देता है कि उनमें और भी बेहतर करने की क्षमता मौजूद है। कक्षा अध्यापक द्वारा दिया गया यह विशेष उल्लेख—
“Excellent – Excellent academic performance throughout the session.”
उनकी मेहनत और निरंतरता की सच्ची पहचान है।

अलिज़ा की इस कामयाबी से उनके माता-पिता श्री इरशाद और श्रीमती फातिमा बेहद गर्व महसूस कर रहे हैं। परिवार के साथ-साथ विद्यालय और स्थानीय समाज में भी खुशी और गर्व का माहौल है। यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा है कि सही दिशा, समर्पण और मेहनत से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

आज के प्रतिस्पर्धात्मक दौर में जहां छात्रों पर कई तरह के दबाव होते हैं, वहां अलिज़ा की सफलता यह संदेश देती है कि अगर लगन सच्ची हो और मेहनत लगातार की जाए, तो सफलता निश्चित रूप से कदम चूमती है।


✍️ ख़ास रिपोर्ट: ज़मीर आलम, प्रधान संपादक
📍 बागपत, उत्तर प्रदेश

📢 “मुल्तानी समाज” — सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, मुस्लिम मुल्तानी लोहार व बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका / न्यूज़ पोर्टल / यूट्यूब चैनल।

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📰 “Multani In Loving Memory”: दुआओं और यादों का वो कारवां जो कभी थमता नहीं

नई दिल्ली। इंसानी ज़िंदगी फानी है, मगर नेक लोगों की यादें और उनके लिए की गई दुआएँ हमेशा ज़िंदा रहती हैं। इसी जज़्बे के साथ एक नई और ख़ालिस नीयत से शुरू किया गया प्लेटफॉर्म “Multani In Loving Memory” आज मुस्लिम मुल्तानी लोहार व बढ़ई बिरादरी के बीच एक ऐसी पहल बनकर सामने आया है, जो मरहूम अफ़राद की यादों को महफूज़ करने और उन्हें दुआओं से जोड़ने का जरिया बन रहा है।

इस पेज का मकसद सिर्फ याद करना नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए सदक़ा-ए-जारिया का सिलसिला जारी रखना है, जो हमसे रुख़्सत हो चुके हैं। जैसा कि क़ुरआन पाक में फरमाया गया—
“कुल्लु नफ़्सिन ज़ाइकतुल मौत” (हर जान को मौत का स्वाद चखना है) — (सूरह आल-इमरान 3:185)

और हदीस शरीफ़ में भी आता है कि इंसान के इंतकाल के बाद उसके अमल बंद हो जाते हैं, मगर तीन चीज़ें जारी रहती हैं—सदक़ा-ए-जारिया, फ़ायदेमंद इल्म और नेक औलाद की दुआ

इन्हीं उसूलों को सामने रखते हुए यह प्लेटफॉर्म बिरादरी के हर उस शख्स के लिए एक डिजिटल यादगार बन रहा है, जो अब इस दुनिया में नहीं है, मगर अपने पीछे मोहब्बत, रिश्ते और नेक नाम छोड़ गया है।

🤲 यादों को महफूज़ करने की एक कोशिश

आज के दौर में जब वक्त तेजी से बदल रहा है, तो कई बार हम अपने बुज़ुर्गों और अज़ीज़ों की यादों को ठीक से सहेज नहीं पाते। “Multani In Loving Memory” इसी कमी को पूरा करने की एक सच्ची कोशिश है—जहाँ हर शख्स अपने मरहूम रिश्तेदार, दोस्त या बिरादरी के किसी भी शख्स की तस्वीर, नाम और कुछ अल्फ़ाज़ साझा कर सकता है।

यह पेज न सिर्फ एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, बल्कि दुआओं का ऐसा सिलसिला है जो लोगों को जोड़ता है, रिश्तों को मजबूत करता है और आने वाली नस्लों को अपनी जड़ों से रूबरू कराता है।

📿 बिरादरी से खास अपील

मुल्तानी बिरादरी के तमाम अहबाब से दरख्वास्त है कि इस नेक पहल का हिस्सा बनें। अपने मरहूमीन की यादों को इस प्लेटफॉर्म पर साझा करें, ताकि उनकी यादें ज़िंदा रहें और उनके लिए दुआओं का सिलसिला जारी रहे।

एक छोटी सी कोशिश—एक पोस्ट, एक दुआ—किसी के लिए आखिरत में रोशनी का सबब बन सकती है।


🗞️ “मुल्तानी समाज” मीडिया प्लेटफॉर्म की खास पेशकश

यह खास रिपोर्ट सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, मुस्लिम मुल्तानी लोहार व बढ़ई बिरादरी की राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज पोर्टल/यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए प्रधान संपादक ज़मीर आलम द्वारा प्रस्तुत की गई है।

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अंत में एक पैग़ाम

मौत हक़ है, मगर यादें अमानत हैं।
आइए, अपने मरहूमीन को सिर्फ याद ही नहीं, बल्कि दुआओं में ज़िंदा रखें… 🤲

📰 गुमशुदा मासूम की तलाश: मुल्तानी समाज से इंसानी हमदर्दी की अपील

समाज की असली पहचान उसके दर्द को महसूस करने और मुश्किल वक्त में एक-दूसरे का साथ देने से होती है। आज मुल्तानी समाज के सामने ऐसा ही एक मामला आया है, जहाँ एक मासूम बच्चा अपने घर से लापता हो गया है और उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

उत्तर प्रदेश के जनपद शामली के ग्राम जाफरपुर से 15 वर्षीय रहमान मिर्जा बीते 20 अप्रैल 2026, सुबह करीब 5:30 बजे से लापता है। परिवारजन और स्थानीय लोग लगातार उसकी तलाश में जुटे हुए हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आ पाई है।

रहमान का हुलिया बेहद सामान्य बताया गया है—वह सफेद शर्ट और काला लोअर पहने हुए था तथा सिर पर काली टोपी थी। ऐसे में संभावना है कि वह आसानी से किसी भी भीड़ में पहचान से बच सकता है। यही वजह है कि समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।

यह केवल एक परिवार का मामला नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी बन जाता है कि ऐसे हालात में एकजुट होकर मदद की जाए। आज जरूरत है कि हम सभी अपने-अपने स्तर पर इस खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं—चाहे वह सोशल मीडिया हो, व्हाट्सएप ग्रुप्स हों या व्यक्तिगत संपर्क।

अगर किसी भी व्यक्ति को रहमान मिर्जा के बारे में कोई भी छोटी-बड़ी जानकारी मिलती है, तो तुरंत नीचे दिए गए नंबरों पर संपर्क करना बेहद जरूरी है:

📞 7017196830 – इमरान हकीम, जाफरपुर
📞 9389349026 – डॉक्टर फरमान, जाफरपुर
📞 8171711060 – मिस्त्री उस्मान, जाफरपुर

हर एक सूचना इस बच्चे को उसके परिवार से मिलाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

🤲 एक इंसानी फर्ज

आज जरूरत सिर्फ खबर पढ़ने की नहीं, बल्कि उसे आगे बढ़ाने की है। मुल्तानी समाज के तमाम अहबाब से खास अपील है कि इस खबर को हर व्हाट्सएप ग्रुप, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अपने जान-पहचान के लोगों तक जरूर पहुंचाएं, ताकि जल्द से जल्द रहमान अपने घर लौट सके।


🗞️ मुल्तानी समाज मीडिया प्लेटफॉर्म की ओर से विशेष अपील

यह खबर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, मुल्तानी लोहार एवं बढ़ई बिरादरी की राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज पोर्टल/यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ओर से प्रकाशित की गई है।

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✨ आख़िरी बात

एक शेयर, एक कॉल, या एक छोटी सी जानकारी—किसी के घर की खुशियां वापस ला सकती है।
आइए, इंसानियत के इस फर्ज को निभाएं… 🤲

Monday, April 20, 2026

🌟 “रिश्तों की रौनक, तहज़ीब की चमक: मेरठ कैंट में मोहम्मद अमान के वलीमे की यादगार शाम”

मेरठ। खुशियों, दुआओं और आपसी मोहब्बत से सजी एक खुशनुमा शाम 20 अप्रैल 2026 को उस वक्त यादगार बन गई, जब मेरठ कैंट स्थित कैसल व्यू, गेट नंबर 2 पर जनाब मोहम्मद अमान (फ़र्ज़ंद जनाब खालिक अहमद उर्फ पप्पी साहब, मेरठ) का वलीमा बड़े ही शानदार और पुरवक़ार अंदाज़ में आयोजित किया गया। यह आयोजन सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि रिश्तों की मजबूती, तहज़ीब की झलक और सामाजिक एकजुटता का खूबसूरत संगम बनकर सामने आया।

इससे पूर्व बारात मुज़फ्फरनगर (रुड़की रोड) में जनाब मोहम्मद सलीम साहब के यहां पहुंची, जहां उनकी साहबज़ादी साबिया नूर के साथ निकाह की रस्म सादगी और रूहानियत के माहौल में अदा की गई। निकाह के बाद आयोजित वलीमा समारोह में दोनों परिवारों की खुशियां और अपनाइयत साफ तौर पर झलक रही थी।

महफ़िल में दूल्हे के वालिद जनाब खालिक अहमद साहब और दुल्हन के वालिद जनाब मोहम्मद सलीम साहब की मौजूदगी ने आयोजन को गरिमा प्रदान की। मेहमानों की आवभगत और इंतज़ामात में जो सलीका और अनुशासन देखने को मिला, वह हर किसी के लिए मिसाल बन गया।

इस शानदार आयोजन में देश-विदेश से आई अज़ीम और मुअज्ज़ज़ शख्सियतों ने शिरकत कर इसे और भी खास बना दिया। दूल्हे के ताया-ज़ाद भाई इंजीनियर रिज़वान रफ़ीक साहब अपनी अहलिया के साथ यूके से तशरीफ लाए, जिनकी मौजूदगी ने परिवार की खुशियों में चार चांद लगा दिए। वहीं उनकी बहन नाहिदा अनवर साहिबा (मुज़फ्फरनगर, क़य्यूम साहब के ख़ानदान में रिश्ता) की शिरकत भी काबिले-तारीफ़ रही।


दिल्ली से मरहूम फारूक साहब (पूर्व वाइस चेयरमैन, MSCT दिल्ली) के अहल-ए-ख़ानदान—उनके बेहनोई, अहलिया, छोटे भाई और बहन—भी इस खुशी में शामिल हुए। मरहूम फारूक साहब की यादें महफ़िल में बार-बार ताज़ा होती रहीं और उनके तीनों बेटों की मौजूदगी ने इस रिश्ते की गहराई को और मजबूत किया।

इस अवसर पर जनाब मोहम्मद आलम साहब, एक्स चेयरमैन “मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट” (रजिस्टर्ड ऑल इंडिया) की गरिमामयी शिरकत ने कार्यक्रम को एक अलग ही वक़ार और सम्मान प्रदान किया। उनकी सामाजिक सेवाओं और अनुभवों का ज़िक्र महफ़िल में बड़े एहतराम के साथ किया गया।

इसके अलावा MSCT पंजाब के वाइस चेयरमैन इकरा सुल्तान साहब अपनी साहबज़ादियों के साथ उपस्थित रहे। दिल्ली हाई कोर्ट की एडवोकेट रबीया फारूक साहिबा, खतौली से एडवोकेट आबिद अली साहब, सरधना से इस्माइल साहब, फलौदा व खतौली से कई प्रतिष्ठित अधिवक्ता, इंजीनियर और बिरादरी के गणमान्य लोग इस आयोजन में शरीक हुए।

पूरे कार्यक्रम में जिस तरह मेहमाननवाज़ी, भाईचारे और तहज़ीब का शानदार प्रदर्शन हुआ, उसने इस वलीमे को एक यादगार मिसाल बना दिया। हर तरफ दुआओं और मुबारकबादों का सिलसिला जारी रहा।

अंत में सभी ने मिलकर यही दुआ की कि अल्लाह तआला नवविवाहित जोड़े को खुशहाल, कामयाब और बरकतों भरी ज़िंदगी अता फरमाए, उनके रिश्ते में मोहब्बत और सुकून कायम रखे। आमीन।




✍️ ख़ास रिपोर्ट: ज़मीर आलम, प्रधान संपादक (मेरठ, उत्तर प्रदेश )
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🕊️ “चार महीने की खुशियाँ… और फिर बिछड़ने का दर्द”नकुड़ (सहारनपुर) से एक दिल दहला देने वाली इंतकाल की खबर

सहारनपुर जनपद के क़स्बा नकुड़ से एक बेहद दुखद और दिल को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में गम का माहौल पैदा कर दिया है। जिंदगी की हकीकत एक बार फिर सबके सामने आई—जहां खुशियाँ अभी दस्तक ही दे रही थीं, वहीं अचानक मातम ने घर कर लिया।

मिली जानकारी के अनुसार, क़स्बा नकुड़ निवासी जनाब मरहूम अख्तर साहब के बेटे की अहलिया, जो कि देवबंद (जिला सहारनपुर) के हाफिज अतीक साहब की साहबजादी थीं, उनका 20 अप्रैल 2026, दिन सोमवार की रात चंडीगढ़ में इलाज के दौरान इंतकाल हो गया। यह खबर जैसे ही इलाके में फैली, हर दिल ग़मगीन हो उठा।

सबसे ज्यादा दर्दनाक पहलू यह है कि इस नवविवाहिता की शादी को अभी महज़ 4 महीने और 10 दिन ही गुजरे थे। जिस घर में अभी नई-नई खुशियों की शुरुआत हुई थी, वहां इतनी जल्दी मातम छा जाना हर किसी को अंदर तक तोड़ देने वाला है। यह घटना हमें एक बार फिर यह याद दिलाती है कि इंसानी जिंदगी कितनी नाज़ुक और अनिश्चित है—कब, किस मोड़ पर, क्या हो जाए, कोई नहीं जानता।

परिजनों और आसपास के लोगों के लिए यह सदमा बेहद गहरा है। हर आंख नम है और हर दिल दुआगो। ऐसे वक्त में हर कोई यही कह रहा है—
“अल्लाह की जैसी मर्जी, वही हकीकत है… और आखिरकार हर एक को उसी की तरफ लौटकर जाना है।”

अल्लाह रब्बुल करीम से दुआ है कि मरहूमा की मगफिरत फरमाए, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता करे और घरवालों को सब्र-ए-जमील नसीब फरमाए। आमीन।

🕌 जनाजे की नमाज आज, 21 अप्रैल 2026 (मंगलवार) को अदा की जाएगी। तमाम अहबाब से गुजारिश है कि जनाजे में शिरकत कर मरहूमा के लिए दुआएं करें और सवाबे दारेन हासिल करें।


✍️ रिपोर्ट: अब्दुल खालिक साहब (सहारनपुर)
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यह खबर केवल एक घटना नहीं, बल्कि एक गहरी सीख भी है—ज़िंदगी की कद्र करें, अपनों के साथ हर लम्हा मोहब्बत से जिएं… क्योंकि वक्त का कोई भरोसा नहीं।