Friday, October 16, 2026

🕊️ इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन 🕊️बेहद रंज-ओ-ग़म के साथ इत्तिला-ए-इंतिक़ाल — जनाब सगीर साहब (डीज़ल) का इंतिक़ाल, आज रात 10 बजे दिल्ली में होगी तदफ़ीन

मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी में ग़म की लहर, अहले ख़ाना से इज़हारे ताज़ियत और मरहूम की मग़फ़िरत के लिए दुआ की अपील

नई दिल्ली / उत्तर प्रदेश। निहायत ही रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ तमाम अहले-ईमान, मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात को इत्तिला दी जाती है कि जनाब सगीर साहब (डीज़ल), वल्दियत नामालूम, साकिन गाँव पिठलकर , सरधना, ज़िला मेरठ, उत्तर प्रदेश, हाल मुक़ीम गली नंबर-5, एच-ब्लॉक, सुंदर नगरी, नई दिल्ली का आज दिन जुमा, 16 अक्टूबर 2026 को क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया है।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम के इंतिक़ाल की दर्दनाक ख़बर से अहले-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादरी के लोगों में ग़म की फ़िज़ा है। यह दुनिया फ़ानी है और हर जान को एक दिन अपने रब की तरफ़ लौटकर जाना है। मगर किसी अज़ीज़ का बिछड़ जाना घर-परिवार के लिए ऐसा सदमा होता है, जिसकी भरपाई आसान नहीं होती। इस ग़म की घड़ी में हम तमाम अहले-ख़ाना और तमाम लवाहिक़ीन के साथ दिली हमदर्दी और इज़हारे ताज़ियत करते हैं।

🕌 नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन की इत्तिला

मयस्सर इत्तिलाआत के मुताबिक़, मरहूम जनाब सगीर साहब की मैय्यत को आज रात 10 बजे सुंदर नगरी, नई दिल्ली स्थित क़ब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम बिरादराना हज़रात, दोस्तों, अज़ीज़ों और अहले-मोहल्ला से गुज़ारिश है कि वक़्त पर पहुँचकर जनाज़े में शिरकत फ़रमाएँ, मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और अहले-ख़ाना को सब्र की तलक़ीन करें। जनाज़े में शिरकत करना, मरहूम के हक़ में दुआ करना और ग़मज़दा घराने के साथ खड़े रहना इंसानी हमदर्दी और इस्लामी भाईचारे की अहम अलामत है।

🤲 मरहूम की मग़फ़िरत के लिए दुआ

ऐ अल्लाह! जनाब सगीर साहब की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमा। उनकी ख़ताओं और लग़ज़िशों से दरगुज़र फ़रमा। उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा, उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे और क़ब्र की तंगी, वहशत और तमाम मुश्किलात से महफ़ूज़ फ़रमा।

या रब्बुल आलमीन! मरहूम पर अपनी ख़ास रहमत नाज़िल फ़रमा, उनकी नेकियों को क़ुबूल फ़रमा, उनके दर्जात बुलंद फ़रमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा। उन्हें अपने फ़ज़्ल-ओ-करम से जन्नत में जगह अता फ़रमा और रोज़-ए-महशर अपने महबूब बंदों के साथ उठाना।

ऐ अल्लाह! उनके तमाम घरवालों, अज़ीज़ों और लवाहिक़ीन को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा। उनके दिलों को सुकून दे, इस मुश्किल घड़ी में उन्हें हिम्मत अता फ़रमा और इस सदमे को बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन या रब्बुल आलमीन।

🤲 तदफ़ीन के वक़्त पढ़ी जाने वाली दुआ

मैय्यत को क़ब्र में उतारते वक़्त यह दुआ पढ़ना मस्नून है:

بِسْمِ اللَّهِ وَعَلَى مِلَّةِ رَسُولِ اللَّهِ

तर्जुमा: अल्लाह के नाम के साथ और रसूलुल्लाह ﷺ के दीन व तरीक़े पर।

🤲 मिट्टी देते वक़्त की दुआ

क़ब्र पर मिट्टी डालते वक़्त क़ुरआन मजीद की यह आयत पढ़ना मुस्तहब है:

مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ

तर्जुमा: इसी ज़मीन से हमने तुम्हें पैदा किया, इसी में तुम्हें वापस लौटाएँगे और इसी से तुम्हें दोबारा निकालेंगे।

(सूरह ताहा, आयत 55)

🤲 क़ब्रिस्तान से वापसी पर दुआ की गुज़ारिश

तमाम हज़रात से गुज़ारिश है कि तदफ़ीन के बाद भी मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करते रहें। अल्लाह तआला मरहूम की क़ब्र को सुकून और नूर का मक़ाम बनाए, उनकी मग़फ़िरत फ़रमाए और तमाम अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन सुम्मा आमीन।

📞 मज़ीद मालूमात के लिए राब्ता

मैय्यत और तदफ़ीन के सिलसिले में मज़ीद मालूमात हासिल करने के लिए बाबू ख़ान साहब से नीचे दिए गए मोबाइल नंबर पर राब्ता क़ायम करें:

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उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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बागपत में मुल्तानी बिरादरी का शानदार इज्तिमा, तीन बेटियों के निकाह कराकर पेश की ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ की मिसाल

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की यौम-ए-पैदाइश पर आयोजित प्रोग्राम में डॉक्टरों की दस्तारबंदी व सम्मान, मुल्तानी बिरादरी को क़ब्रिस्तान के लिए ज़मीन देने का ऐलान

बागपत, उत्तर प्रदेश।
मुल्तानी समाज राष्ट्रीय समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की समाजी बेदारी, आपसी इत्तिहाद, तालीम की तरक़्क़ी और ख़िदमत-ए-इंसानियत के जज़्बे को उजागर करने वाला एक अहम प्रोग्राम 15 अक्टूबर 2026 को जनपद बागपत स्थित आशीर्वाद गार्डन में आयोजित किया गया। यह प्रोग्राम मुल्क के पूर्व राष्ट्रपति और मशहूर वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की यौम-ए-पैदाइश के मौक़े पर आयोजित हुआ, जिसमें बिरादरी की सरपरस्त शख़्सियात, समाजी रहनुमा, डॉक्टरों और अन्य ज़िम्मेदार हज़रात ने शिरकत की।

प्रोग्राम का माहौल बिरादराना मोहब्बत, बाहमी इत्तिफ़ाक़, समाजी ज़िम्मेदारी और आने वाली नस्लों के बेहतर मुस्तक़बिल के तसव्वुर से सराबोर रहा। इस मौक़े पर जहाँ तालीम और समाजी ख़िदमात अंजाम देने वाली शख़्सियात की हौसला-अफ़ज़ाई की गई, वहीं बिरादरी की तीन बेटियों के निकाह कराकर और उन्हें ज़रूरत के मुताबिक़ जहेज़ का सामान देकर एक अहम समाजी ज़िम्मेदारी भी निभाई गई।

बिरादरी के सरपरस्तों की मौजूदगी ने बढ़ाई प्रोग्राम की शान

आशीर्वाद गार्डन में आयोजित इस प्रोग्राम की सदारत हाज़िरन के बताए गए विवरण के मुताबिक़ हाजी यूसुफ़ साहब और हाजी दिलशाद साहब ने की। प्रोग्राम में मुल्तानी बिरादरी के सरपरस्तों और समाजी तौर पर सरगर्म शख़्सियात ने हिस्सा लेकर बिरादरी की तरक़्क़ी, इत्तिहाद और बेहतरी के हवाले से अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

ऐसे इज्तिमाआत की अहमियत महज़ लोगों के एक जगह जमा होने तक महदूद नहीं होती, बल्कि ये बिरादरी के अफ़राद को एक-दूसरे के क़रीब लाने, नई नस्ल को अपनी रवायतों से वाक़िफ़ कराने और समाजी मसाइल के हल के लिए मिल-जुलकर कोशिश करने का मौक़ा भी फ़राहम करते हैं।

मुल्तानी बिरादरी को क़ब्रिस्तान के लिए ज़मीन देने का ऐलान

इस प्रोग्राम की एक अहम और तवज्जोह-तलब बात उस वक़्त सामने आई, जब प्रोग्राम के मुख्य अतिथि जनाब नवाब अहमद हमीद साहब, बागपत ने मुल्तानी बिरादरी के लिए बागपत में क़ब्रिस्तान की ज़मीन उपलब्ध कराने के संबंध में ऐलान किया।

क़ब्रिस्तान किसी भी बिरादरी की बुनियादी समाजी ज़रूरतों में शामिल होता है। इस सिलसिले में किया गया ऐलान स्थानीय बिरादरी के लिए अहमियत रखता है। अब इस ऐलान को अमली जामा पहनाने के लिए ज़रूरी इंतिज़ामी और क़ानूनी कार्रवाई की तकमील भी अहम होगी, ताकि बिरादरी को मुस्तक़बिल में इसका फ़ायदा हासिल हो सके।

मुख्य अतिथि के इस ऐलान को प्रोग्राम में मौजूद लोगों ने बिरादरी की ज़रूरतों से जुड़ा एक अहम पहलू माना। उम्मीद की जाती है कि आपसी मशवरे और मुत्तहिद कोशिशों के ज़रिये इस सिलसिले में आगे की कार्रवाई को अंजाम दिया जाएगा।

डॉक्टरों की हौसला-अफ़ज़ाई, तालीम की अहमियत पर ज़ोर

प्रोग्राम के दौरान तालीमी और पेशेवर मैदान में अपनी पहचान बनाने वाली शख़्सियात की हौसला-अफ़ज़ाई भी की गई। इस मौक़े पर । इस मौक़े पर डॉ. रिज़वान साहब, डॉ. सज्जाद साहब (दिल्ली), डॉ. इरफ़ान साहब (बड़ौत) और डॉ. फ़रहान ज़ाहिद (बागपत) को सम्मानित किया गया।

डॉक्टर किसी भी समाज में सेहत की हिफ़ाज़त और इंसानी ख़िदमत का अहम किरदार अदा करते हैं। बिरादरी के नौजवानों के लिए ऐसे कामयाब अफ़राद की कामयाबी इस बात का पैग़ाम है कि मेहनत, लगन, तालीम और पुख़्ता इरादे के ज़रिये ज़िंदगी के मुख़्तलिफ़ शोबों में कामयाबी हासिल की जा सकती है।

समाज की तरक़्क़ी के लिए ज़रूरी है कि बच्चों को बेहतर तालीम के मौक़े दिए जाएँ, बेटों और बेटियों दोनों की हौसला-अफ़ज़ाई की जाए और हुनरमंद तथा पेशेवर अफ़राद की कामयाबियों को नई नस्ल के सामने मिसाल के तौर पर पेश किया जाए।

तीन बेटियों के निकाह कराकर निभाई समाजी ज़िम्मेदारी

इस इज्तिमा का सबसे ख़ुशगवार और इंसानियत से भरपूर पहलू बिरादरी की तीन बेटियों के निकाह का इंतिज़ाम रहा। प्रोग्राम के दौरान तीन बेटियों के निकाह कराए गए और उन्हें जहेज़ का सामान भी दिया गया।

बेटियों के निकाह में मदद करना और ज़रूरतमंद घरानों का सहारा बनना एक अहम समाजी ख़िदमत है। ऐसे काम न सिर्फ़ ख़ुशियों को बढ़ावा देते हैं, बल्कि आपसी हमदर्दी, भाईचारे और सामूहिक ज़िम्मेदारी के जज़्बे को भी मज़बूत करते हैं।

इस मौक़े का पैग़ाम यही है कि समाज के साहिब-ए-हैसियत अफ़राद और समाजी तंज़ीमों को चाहिए कि वे ज़रूरतमंद घरानों की मदद के लिए आगे आएँ, ताकि किसी बेटी के निकाह में माली परेशानी रुकावट न बने। साथ ही, निकाह को सादगी, आपसी रज़ामंदी और इस्लामी तालीमात के मुताबिक़ आसान बनाने की कोशिश भी की जानी चाहिए।

समाजी रहनुमाओं और ज़िम्मेदार हज़रात की शिरकत

 कमेटी और बिरादरी से जुड़े जिन हज़रात के नाम दर्ज हैं, उनमें ज़ाहिद अली, ज़ियाउर रहमान, हाजी इलियास, हारून, साजिद, इज़हार, हाजी मन्नू, आरिफ़ गौरीपुरी, नौशाद, शमशाद और हाजी तौक़ीर सहारनपुरी। सहित अन्य नाम शामिल हैं। इन शख़्सियात की मौजूदगी ने प्रोग्राम को बिरादराना रंग और समाजी अहमियत प्रदान की।

बिरादरी की बेहतरी के लिए ज़रूरी है कि समाजी रहनुमा आपसी इख़्तिलाफ़ात को पीछे छोड़कर तालीम, रोज़गार, सेहत, बेटियों की मदद और बुनियादी ज़रूरतों जैसे अहम मसलों पर मिल-जुलकर काम करें। जब समाज के मुख़्तलिफ़ तबक़ात एक मक़सद के लिए मुत्तहिद होते हैं, तो तरक़्क़ी की राहें आसान होती हैं।

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की ज़िंदगी से प्रेरणा लेने का मौक़ा

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का नाम मुल्क की वैज्ञानिक तरक़्क़ी, तालीम और नौजवानों में उम्मीद जगाने के हवाले से हमेशा याद किया जाता है। उनकी ज़िंदगी इस बात की मिसाल है कि इल्म, मेहनत, सादगी और मुल्क की ख़िदमत का जज़्बा इंसान को बुलंद मुक़ाम तक पहुँचा सकता है।

उनकी यौम-ए-पैदाइश के मौक़े पर ऐसे प्रोग्राम का आयोजन इस बात की याददिहानी भी है कि बिरादरी के बच्चों और नौजवानों को तालीम, साइंस, टेक्नोलॉजी, मेडिकल, कारोबार और दूसरे पेशेवर मैदानों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाए।


इत्तिहाद, तालीम और ख़िदमत ही तरक़्क़ी का रास्ता

बागपत में आयोजित इस प्रोग्राम के मुख़्तलिफ़ पहलुओं से यह पैग़ाम उभरकर सामने आता है कि किसी भी बिरादरी की असल ताक़त उसके अफ़राद का इत्तिहाद, उसकी नई नस्ल की तालीम और समाज के कमज़ोर तबक़े के लिए की जाने वाली ख़िदमत में होती है।

क़ब्रिस्तान जैसी बुनियादी ज़रूरत के लिए पहल, डॉक्टरों की हौसला-अफ़ज़ाई और तीन बेटियों के निकाह में मदद—ये तमाम पहलू समाजी ज़िम्मेदारी के मुख़्तलिफ़ रूपों को सामने लाते हैं। अगर ऐसे काम मुसलसल और मंसूबाबंद अंदाज़ में जारी रहें, तो बिरादरी के लिए बेहतर मुस्तक़बिल की राह हमवार हो सकती है।

दुआ है कि अल्लाह तआला इस नेक कोशिश में हिस्सा लेने वाले तमाम हज़रात की ख़िदमात को क़ुबूल फ़रमाए, निकाह के बंधन में बंधने वाली तीनों बेटियों की ज़िंदगी में ख़ुशियाँ, सुकून और बरकत अता फ़रमाए और पूरी मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी में इत्तिहाद, मोहब्बत और तरक़्क़ी का जज़्बा पैदा फ़रमाए। आमीन।

कार्यक्रम के दौरान बिरादरी के सम्मानित नौजवानों और बुज़ुर्गों को पारंपरिक पगड़ी पहनाकर ख़ुसूसी तौर पर सम्मानित किया गया। इस मौक़े पर उनकी समाजी ख़िदमात, तजुर्बे और बिरादरी के लिए उनकी क़ाबिल-ए-तारीफ़ कोशिशों को सराहा गया।



मुल्तानी समाज — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत
मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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Thursday, October 15, 2026

🕊️ इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन 🕊️पुरानी दिल्ली की बुज़ुर्ग ख़ातून ज़ुबैदा बी का 95 वर्ष की उम्र में इंतिक़ाल, ग़म में डूबा ख़ानदान और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब

अल्लाह की रहमत के साये में रुख़्सत हुईं ज़ुबैदा बी, पीछे छोड़ गईं छह साहबज़ादे, चार साहबज़ादियाँ और ग़मज़दा ख़ानदान — दिल्ली गेट के क़ब्रिस्तान में नमाज़-ए-असर के बाद सुपुर्द-ए-ख़ाक

नई दिल्ली/बड़ौत (उत्तर प्रदेश)।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिली अफ़सोस के साथ तमाम अहले-इस्लाम, ख़ास तौर पर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के हज़रात को इत्तिला दी जाती है कि पुरानी दिल्ली के मोहल्ला कवाबान, करीम होटल वाली गली, जामा मस्जिद, दिल्ली-110006 की साकिन बुज़ुर्ग ख़ातून ज़ुबैदा बी, अहलिया जनाब मरहूम नज़ीर अहमद साहब, का जुमेरात, 15 अक्टूबर 2026 को तक़रीबन पौने ग्यारह बजे दिन, क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया। मरहूमा की उम्र तक़रीबन 95 बरस थी।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

“बेशक हम अल्लाह ही के हैं और बेशक हमें उसी की तरफ़ लौटकर जाना है।”

मरहूमा के इंतिक़ाल की ख़बर से उनके ख़ानदान, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और जानने वालों में ग़म की लहर दौड़ गई। उम्र के तक़रीबन 95 बरस मुकम्मल करने के बाद इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत होने वाली मरहूमा अपने पीछे छह साहबज़ादे, चार साहबज़ादियाँ, पोते-पोतियाँ, नाती-नातिनियाँ और दीगर अज़ीज़-ओ-अक़ारिब समेत एक बड़ा ख़ानदान सोगवार छोड़ गईं।

ज़िंदगी की इस पुरदर्द हक़ीक़त के सामने हर इंसान बेबस है कि दुनिया की हर रौनक़ और हर रिश्ता एक दिन यहीं रह जाता है और इंसान को अपने रब की तरफ़ लौट जाना होता है। मरहूमा के इंतिक़ाल से उनके अहल-ए-ख़ाना पर ग़म का पहाड़ टूट पड़ा। इस मुश्किल घड़ी में तमाम अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और हमदर्दों की दिली हमदर्दी उनके साथ है।

🕊️ नमाज़-ए-जनाज़ा के बाद सुपुर्द-ए-ख़ाक

मरहूमा ज़ुबैदा बी को बृहस्पतिवार, 15 अक्टूबर 2026 को नमाज़-ए-असर के बाद दिल्ली गेट स्थित क़ब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया। मिट्टी के इस फ़ानी सफ़र के बाद मरहूमा को क़ब्र की मंज़िल में उतारते हुए उनके अहल-ए-ख़ाना और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब ने भारी दिल और नम आँखों के साथ उन्हें आख़िरी विदाई दी।

इस मौक़े पर इस्लामी तालीमात के मुताबिक़ मरहूमा के लिए मग़फ़िरत, रहमत और क़ब्र की आसानी की दुआ की गई। हर शख़्स की ज़िंदगी में यह लम्हा एक बड़ी नसीहत है कि दुनिया की ज़िंदगी आरज़ी है और आख़िरकार हर जान को अपने परवरदिगार के हुज़ूर हाज़िर होना है।

अल्लाह तआला मरहूमा की क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमाए, उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे और तमाम मरहूमीन की मग़फ़िरत फ़रमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

🌹 मायका क़स्बा बड़ौत, ज़िला बागपत में था

मालूमात के मुताबिक़ मरहूमा ज़ुबैदा बी का मायका उत्तर प्रदेश के क़स्बा बड़ौत, ज़िला बागपत में था। दिल्ली की पुरानी आबादी से ताल्लुक़ रखने वाली मरहूमा के इंतिक़ाल की ख़बर से उनके मायके और ससुराल से जुड़े अज़ीज़ों तथा बिरादरी के लोगों के बीच भी ग़म और अफ़सोस का माहौल है।

इस मौक़े पर तमाम अहले-ख़ानदान, बिरादरान और हमदर्दों से गुज़ारिश है कि मरहूमा के लिए ख़ुसूसी दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएँ और उनके अहल-ए-ख़ाना को इस सदमे को बर्दाश्त करने के लिए सब्र-ए-जमील अता होने की दुआ करें।

🤲 मरहूमा की मग़फ़िरत, क़ब्र में उतारने और मिट्टी देने की दुआ

या अल्लाह! मरहूमा ज़ुबैदा बी पर अपनी ख़ास रहमत नाज़िल फ़रमा। उनकी मग़फ़िरत फ़रमा, उनकी ख़ताओं और कोताहियों से दरगुज़र फ़रमा और उनकी नेकियों को अपनी बारगाह में क़ुबूल फ़रमा।

या रब्बे-करीम! जब मरहूमा को क़ब्र में उतारा गया और उनके ऊपर मिट्टी डाली गई, उस वक़्त से उनकी आख़िरत की मंज़िलों तक अपनी रहमत का साया क़ायम फ़रमा। उनकी क़ब्र को कुशादा फ़रमा, उसे नूर से भर दे, वहशत और तन्हाई को उनके लिए आसान फ़रमा और उन्हें सवालात-ए-क़ब्र में साबित-क़दम रख।

ऐ हमारे परवरदिगार! मरहूमा को अज़ाब-ए-क़ब्र और अज़ाब-ए-आख़िरत से महफ़ूज़ फ़रमा। उन्हें जन्नतुल-फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमा और अपने प्यारे नबिये करीम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ की शफ़ाअत नसीब फ़रमा।

या अल्लाह! उनके छह साहबज़ादों, चार साहबज़ादियों, तमाम पोते-पोतियों, नाती-नातिनियों और दीगर अहल-ए-ख़ानदान को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा। उनके दिलों को सुकून दे, इस सदमे को बर्दाश्त करने की हिम्मत अता फ़रमा और उन्हें मरहूमा के लिए सदक़ा-ए-जारीया और नेक आमाल का ज़रिया बनने की तौफ़ीक़ अता फ़रमा।

आमीन सुम्मा आमीन, या रब्बुल आलमीन।

📞 मरहूमा के बारे में मज़ीद मालूमात के लिए

मरहूमा ज़ुबैदा बी के बारे में मज़ीद तफ़सीलात हासिल करने के लिए उनके दामाद और मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट के पूर्व राष्ट्रीय चेयरमैन जनाब मोहम्मद आलम साहब से नीचे दिए गए मोबाइल नंबर पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है।

मोबाइल नंबर: 7503296786


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एक तीर से कई निशाने! इंजीनियर उस्मान ने बिरादरी के इजलास को बनाया सियासी ताक़त के इज़हार का मंच? विधायक-सांसद की मौजूदगी में दिखी मुल्तानी बिरादरी की बड़ी तादाद

जलालाबाद में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की यौमे पैदाइश पर शानदार इजलास, सांसद इकरा हसन और विधायक अशरफ अली खान की शिरकत बनी चर्चा का मौज़ू

जलालाबाद (शामली), 15 अक्टूबर 2026।
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की यौमे पैदाइश के मौक़े पर जलालाबाद स्थित जोया पैलेस में मिर्ज़ा/मुल्तानी बिरादरी का एक शानदार इजलास मुनअक़िद किया गया। इस इजलास में उत्तर प्रदेश समेत दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, गुजरात और पंजाब से बिरादरी के लोगों ने शिरकत की। प्रोग्राम में सियासी रहनुमाओं, समाजी शख़्सियात, उलेमा और बिरादरी के ज़िम्मेदारों की मौजूदगी ने इसे ख़ास बना दिया।

विधायक अशरफ अली खान ने फीता काटकर इजलास का इफ़्तिताह किया, जबकि कैराना की लोकप्रिय सांसद इकरा हसन साहिबा चीफ़ गेस्ट के तौर पर शरीक हुईं। ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय संयोजक शमीम अंसारी साहब, मौलाना रकीब साहब, शकील अंसारी साहब और दीगर मेहमानों की मौजूदगी भी प्रोग्राम की अहमियत को ज़ाहिर करती रही।

लेकिन इस पूरे इजलास के बाद एक सवाल चर्चा का मौज़ू बन सकता है—क्या यह महज़ बिरादरी के इत्तिहाद और समाजी बेदारी का प्रोग्राम था, या इसके ज़रिये बिरादरी की तादाद और उसके सियासी असर-ओ-रसूख़ का पैग़ाम भी दिया गया?

एक तीर से कई निशाने—इंजीनियर उस्मान की सियासी बिसात की चर्चा!

बिरादरी के इजलास में बड़ी तादाद में लोगों की शिरकत, सियासी रहनुमाओं की मौजूदगी और मुख़्तलिफ़ सूबों के ज़िम्मेदारों की भागीदारी को देखकर यह सवाल उठना लाज़िमी है कि ऐसे प्रोग्रामों से समाजी मक़सद के साथ-साथ सियासी पैग़ाम भी किस हद तक जुड़ जाते हैं।

प्रोग्राम के संचालन में इंजीनियर उस्मान और मास्टर यामीन का नाम सामने आया। इसी संदर्भ में एक तल्ख़ सियासी तजज़िया यह भी हो सकता है कि “एक ही तीर से कई शिकार”—क्या इंजीनियर उस्मान ने बिरादरी की भीड़ और इजलास के मंच के ज़रिये अपनी सियासी हैसियत का इज़हार करने की कोशिश की?

क्या इस प्रोग्राम के ज़रिये ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम समाज के रहनुमाओं, विधायक अशरफ अली खान और सांसद इकरा हसन साहिबा को यह पैग़ाम देने की कोशिश की गई कि मिर्ज़ा/मुल्तानी बिरादरी की एक बड़ी तादाद को एक मंच पर जमा किया जा सकता है?

ये सवाल सियासी और समाजी हल्क़ों में बहस का विषय बन सकते हैं। अलबत्ता, इंजीनियर उस्मान की नीयत, उनके सियासी इरादों या बिरादरी के वोटों पर उनके किसी ख़ास असर के बारे में कोई क़तई दावा करने के लिए उनके अपने मौक़िफ़ और दूसरे ठोस सबूत भी ज़रूरी हैं।

बिरादरी का इत्तिहाद या सियासी ताक़त का इज़हार?

मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की समाजी और तालीमी तरक़्क़ी के लिए ऐसे इजलास अहम किरदार अदा कर सकते हैं। इनका असल मक़सद तालीम, रोज़गार, क़ौमी इत्तिहाद, नौजवानों की रहनुमाई, क़ानूनी मदद और समाजी मसाइल के हल की राह हमवार करना होना चाहिए।

इसके साथ ही यह भी क़ाबिले-ग़ौर है कि जब किसी बिरादरी के प्रोग्राम में सांसद, विधायक और बड़े समाजी रहनुमा एक साथ शरीक होते हैं, तो उसकी समाजी अहमियत के साथ सियासी अहमियत पर भी चर्चा होने लगती है। मगर किसी प्रोग्राम में भीड़ की मौजूदगी को तमाम लोगों के एक ही सियासी ख़याल या किसी एक शख़्स के इशारे पर वोट देने का सबूत नहीं माना जा सकता।

बिरादरी के वोट किसी की निजी मिल्कियत नहीं, बल्कि हर वोटर का अपना जम्हूरी हक़ हैं। किसी भी समाजी रहनुमा की असल हैसियत का अंदाज़ा उसके काम, ख़िदमात, अवाम के मसाइल के हल और बिरादरी के मुस्तक़बिल के लिए उठाए गए क़दमों से होना चाहिए।

सदारत, मेहमाने ख़ुसूसी और निज़ामत

इजलास की सदारत डॉक्टर दाऊद साहब ने की, जबकि मौलाना हारून मुल्तानी मेहमाने ख़ुसूसी के तौर पर शरीक हुए। प्रोग्राम की निज़ामत इंजीनियर उस्मान और मास्टर यामीन ने की।

इजलास के प्रोग्राम संयोजक हाजी नज़ीर साहब रहे। मुख्य आयोजक मास्टर ख़लील अहमद साहब के साथ सलीम अहमद थानाभवन, मौलाना सलीम गढ़ी पुख़्ता, मेहरान अहमद और उनकी टीम ने आयोजन की ज़िम्मेदारियां निभाईं।

प्रोग्राम में ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय संयोजक शमीम अंसारी साहब, प्रभारी शमीम अंसारी साहब, उलेमा बोर्ड के संगठन मंत्री मौलाना रकीब साहब और मंत्री शकील अंसारी साहब की शिरकत भी दर्ज की गई।

मुख़्तलिफ़ सूबों के सदर और ज़िम्मेदारों की शिरकत

इजलास में उत्तर प्रदेश के सदर अब्दुल हमीद साहब, दिल्ली के सदर हाजी सगीर हसन साहब, हरियाणा के सदर हाजी ग़फ़्फ़ार साहब और उत्तराखंड के प्रभारी हनीफ़ साहब अपनी-अपनी टीमों के साथ मौजूद रहे। मुख़्तलिफ़ उप-कमेटियों के सदर और उनके साथी भी प्रोग्राम में शरीक हुए।

बिरादरी के कई सूबों से आए लोगों की भागीदारी ने आपसी राब्ते और इत्तिहाद की अहमियत को उजागर किया। इस तरह के इजलास से यह उम्मीद की जाती है कि बिरादरी के समाजी मसाइल को समझने और उनके हल के लिए मुश्तरका कोशिशों को आगे बढ़ाया जाएगा।

जकात फंड से लीगल सेल तक—कमेटियों की मौजूदगी

प्रोग्राम में समाजी ख़िदमात से जुड़ी मुख़्तलिफ़ कमेटियों के ज़िम्मेदार भी मौजूद रहे। इनमें जकात फंड के सदर एडवोकेट इरशाद साहब, लीगल सेल के सदर मिर्ज़ा आबिद अली एडवोकेट, तनाज़ा हल कमेटी के सदर मिर्ज़ा हाशिमुद्दीन हमदम साहब, एजुकेशन कमेटी के सदर मास्टर ख़लील साहब, स्पोर्ट्स कमेटी के सदर सनव्वर खान साहब और युवा कमेटी के सदर जुनैद मुल्तानी साहब अपनी-अपनी टीमों के साथ शरीक हुए।

इन कमेटियों की मौजूदगी से तालीम, क़ानूनी रहनुमाई, समाजी इख़्तिलाफ़ात के हल, खेलकूद और नौजवानों की भागीदारी जैसे अहम मौज़ूआत पर तवज्जोह देने की गुंजाइश सामने आती है।

मेहमानों का इस्तक़बाल, आबे ज़मज़म और खजूर की पेशकश

इजलास में आने वाले तमाम मेहमानों का गेट पर फूल-मालाओं से इस्तक़बाल किया गया। मेहमानों को आबे ज़मज़म और खजूर पेश किए गए। मुस्लिम तहज़ीब में मेहमाननवाज़ी और एहतराम की अपनी ख़ास अहमियत है, और इस आयोजन में भी इसका ख़ास एहतिमाम किया गया।

आयोजकों के मुताबिक़, प्रोग्राम को कामयाब बनाने में हाजी नज़ीर साहब, मुख्य आयोजक मास्टर ख़लील अहमद साहब, मौलाना सलीम साहब थानाभवन, सलीम अहमद गढ़ी पुख़्ता, समन्वयक मेहरान अहमद, सरपरस्तों, खान-पान कमेटी, इस्तक़बाल कमेटी और दीगर तआवुन करने वालों ने अहम किरदार अदा किया।

मिर्ज़ा/मुल्तानी वेलफेयर सोसाइटी ने अदा किया शुक्रिया

मिर्ज़ा/मुल्तानी वेलफेयर सोसाइटी ने इजलास में शिरकत करने वाले तमाम मेहमानों, बिरादरी के लोगों, समाजी रहनुमाओं और आयोजन में सहयोग देने वाले सभी अफ़राद का दिल से शुक्रिया अदा किया।

आख़िरी सवाल—बिरादरी को क्या हासिल हुआ?

जलालाबाद का यह इजलास अपनी बड़ी शिरकत और सियासी रहनुमाओं की मौजूदगी के कारण चर्चा का विषय बना। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस जमावड़े से बिरादरी को तालीम, रोज़गार, नौजवानों की तरक़्क़ी, क़ानूनी मदद और समाजी मसाइल के हल के मैदान में क्या ठोस फ़ायदा मिलता है।

क्योंकि बिरादरी की असल ताक़त सिर्फ़ भीड़ जमा करने में नहीं, बल्कि उस भीड़ के भरोसे को समाजी तरक़्क़ी, इत्तिहाद और अवामी ख़िदमत में बदलने में है।


विशेष रिपोर्ट: ज़मीर आलम, प्रधान संपादक
उत्तर प्रदेश डेस्क — मुल्तानी समाज

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत होने तथा नई दिल्ली से प्रसारित होने संबंधी प्रकाशन के परिचय का विवरण संपादकीय अभिलेखों के अनुसार प्रकाशित किया जाना चाहिए।

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🥀 इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन! कोटा, राजस्थान में हालिमा बानो के इंतकाल से ग़म की लहर, आज दोपहर 12 बजे जामा मस्जिद में अदा की जाएगी नमाज़-ए-जनाज़ा

मंशा पूरा, कोटा (राजस्थान) | शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 | राजस्थान डेस्क

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ इत्तिला-ए-इंतकाल

إِنَّا لِلّهِ وَإِنَّـا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

“बेशक हम अल्लाह ही के हैं और बेशक हमें उसी की तरफ़ लौटकर जाना है।”

निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात को इत्तिला दी जाती है कि मंशा पूरा, कोटा, राजस्थान निवासी मरहूम मोहम्मद हुसैन जी भुट्टो की ज़ौजा (अहलिया) और अल्ताफ़ हुसैन की वालिदा, मोहतरमा हालिमा बानो का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया है।

मरहूमा के इंतकाल की ख़बर से अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और जानने वालों में ग़म की लहर दौड़ गई है। दुनिया की ज़िंदगी फ़ानी है और हर जानदार को एक दिन अपने रब की तरफ़ लौटकर जाना है। ऐसे पुरदर्द मौक़े पर हम तमाम अहल-ए-ख़ाना से इज़हार-ए-ताज़ियत करते हैं और बारगाह-ए-इलाही में दुआगो हैं कि अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फ़िरत फ़रमाए और तमाम घरवालों को यह सदमा बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।

🕌 नमाज़-ए-जनाज़ा की इत्तिला

मरहूमा हालिमा बानो की नमाज़-ए-जनाज़ा आज, शुक्रवार 16 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजे, जामा मस्जिद, कोटा, राजस्थान में अदा की जाएगी।

तमाम बिरादराना हज़रात, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, दोस्तों और अहबाब से गुज़ारिश है कि नमाज़-ए-जनाज़ा में शिरकत फ़रमाकर मरहूमा के हक़ में दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और सवाब-ए-दारैन हासिल करें।

मौत एक ऐसी हक़ीक़त है जिससे किसी को फ़रार नहीं। किसी अपने के दुनिया से रुख़्सत हो जाने का दर्द बेहद गहरा होता है। ऐसे वक़्त में ग़मज़दा घराने के साथ खड़े होना, उन्हें तसल्ली देना और मरहूम के लिए दुआ करना इंसानियत, भाईचारे और इस्लामी अख़लाक़ का तक़ाज़ा है।

🤲 दुआ-ए-मग़फ़िरत और मरहूमा के लिए इल्तिजा

ऐ अल्लाह! तू रहमान है, तू रहीम है, तू ग़फ़ूर-उर-रहीम है। हम तेरी बारगाह में हाथ उठाकर मरहूमा हालिमा बानो की मग़फ़िरत की दुआ करते हैं।

اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهَا وَارْحَمْهَا وَعَافِهَا وَاعْفُ عَنْهَا

अल्लाहुम्मग़फ़िर लहा, वरहमहा, व आफ़िहा, वअफ़ु अन्हा।

ऐ अल्लाह! मरहूमा की मग़फ़िरत फ़रमा, उन पर रहम फ़रमा, उन्हें आफ़ियत अता फ़रमा और उनकी ख़ताओं-दरगुज़र फ़रमा।

ऐ परवरदिगार! मरहूमा की क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे। उनकी क़ब्र को कुशादा और मुनव्वर फ़रमा। क़ब्र की तन्हाई में उन पर अपनी रहमत नाज़िल फ़रमा और उन्हें सवालात-ए-क़ब्र में आसानी अता फ़रमा।

ऐ अल्लाह! उनकी छोटी-बड़ी ख़ताओं को माफ़ फ़रमा, उनकी नेकियों को क़बूल फ़रमा, उनकी मंज़िलें आसान फ़रमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमा।

ऐ अल्लाह! उनके तमाम अहल-ए-ख़ाना, ख़ास तौर पर उनके बेटे अल्ताफ़ हुसैन और तमाम अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा। उनके दिलों को सुकून दे और इस ग़म की घड़ी में उन्हें हिम्मत और हौसला अता फ़रमा।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

🤲 दफ़्न और मिट्टी देने के वक़्त पढ़ी जाने वाली दुआएँ

इस्लामी तालीमात के मुताबिक़ मैय्यत को क़ब्र में उतारते वक़्त अल्लाह का नाम लेकर दुआ पढ़ी जाती है।

मैय्यत को क़ब्र में उतारते वक़्त:

بِسْمِ اللَّهِ وَعَلَى مِلَّةِ رَسُولِ اللَّهِ

तर्जुमा: अल्लाह के नाम के साथ और रसूलुल्लाह ﷺ के दीन व सुन्नत पर।

क़ब्रिस्तान में दाख़िल होने और अहल-ए-क़ुबूर के लिए दुआ:

السَّلَامُ عَلَيْكُمْ أَهْلَ الدِّيَارِ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُسْلِمِينَ، وَإِنَّا إِنْ شَاءَ اللَّهُ بِكُمْ لَاحِقُونَ

तर्जुमा: ऐ मोमिनों और मुसलमानों की बस्तियों में रहने वालो! तुम पर सलामती हो। इंशाअल्लाह, हम भी तुमसे मिलने वाले हैं।

मिट्टी देते वक़्त:

مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ

तर्जुमा: इसी मिट्टी से हमने तुम्हें पैदा किया, इसी में तुम्हें वापस लौटाएँगे और इसी से तुम्हें दोबारा निकालेंगे।

(सूरह ताहा, आयत 55)

मैय्यत को दफ़्न करने के बाद मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करना, उनकी साबित-क़दमी और आख़िरत की आसानी के लिए दुआ करना चाहिए।

ऐ अल्लाह! मरहूमा हालिमा बानो की आख़िरत की तमाम मंज़िलें आसान फ़रमा, उन्हें अपनी रहमत के साये में जगह अता फ़रमा और उनके घरवालों को सब्र-ओ-सुकून नसीब फ़रमा।

आमीन सुम्मा आमीन।


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🥀 इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन 🥀इंतिहाई रंज-ओ-ग़म के साथ ताज़ियती ख़बर, कोटा (राजस्थान) की नसीम बानो का इंतिक़ाल, मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी में ग़म की लहर

अल्लाहुम्मग़फ़िर लहा वरहमहा व आफ़िहा वअफ़ु अन्हा। आमीन या रब्बुल आलमीन।

कोटा (राजस्थान), 15 अक्टूबर 2026। निहायत ही रंज-ओ-ग़म, अफ़सोस और दिली सदमे के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि आज दिन जुमेरात, बा-तारीख़ 15 अक्टूबर 2026 को कोटा, राजस्थान के साकिन जनाब इक़बाल हुसैन मुल्तानी साहब की ज़ौजा-ए-मोहतरमा नसीम बानो साहिबा का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया है।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

बेशक हम सब अल्लाह तआला ही के हैं और उसी की तरफ़ लौटकर जाने वाले हैं। मौत एक ऐसी हक़ीक़त है जिससे किसी को फ़रार नहीं, मगर किसी अज़ीज़ की जुदाई का ग़म दिल को गहरे सदमे में मुब्तिला कर देता है। नसीम बानो साहिबा के इंतिक़ाल की ख़बर से उनके अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़ो-अक़ारिब और बिरादरी के लोगों के दरमियान रंज-ओ-मलाल की कैफ़ियत है।

इस मुश्किल और ग़मगीन घड़ी में हम मरहूमा के तमाम अहल-ए-ख़ाना, ख़ुसूसन जनाब इक़बाल हुसैन मुल्तानी साहब और उनके घराने के अफ़राद के साथ दिली ताज़ियत और हमदर्दी का इज़हार करते हैं। अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त तमाम ग़मज़दा घरवालों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए और इस सदमे को बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ बख़्शे। आमीन।

🤲 मरहूमा की मग़फ़िरत के लिए ख़ुसूसी दुआ

ऐ अल्लाह! ऐ तमाम जहानों के परवरदिगार! तू रहमान है, तू रहीम है, तेरी रहमत हर शय पर छाई हुई है। हम अपने रब्बे-करीम की बारगाह में दस्त-ए-दुआ दराज़ करते हैं कि मरहूमा नसीम बानो साहिबा की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमा, उनकी ख़ताओं और कोताहियों से दरगुज़र फ़रमा और उनकी नेकियों को अपनी बारगाह में क़ुबूल फ़रमा।

اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهَا وَارْحَمْهَا وَعَافِهَا وَاعْفُ عَنْهَا

तर्जुमा: ऐ अल्लाह! उनकी मग़फ़िरत फ़रमा, उन पर रहम फ़रमा, उन्हें आफ़ियत अता फ़रमा और उनसे दरगुज़र फ़रमा।

या अल्लाह! मरहूमा की क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा, उसे उनके लिए सुकून और राहत का ज़रिया बना। उनकी क़ब्र को वसीअ फ़रमा, उसमें जन्नत की ठंडी हवाएँ और रहमतें नसीब फ़रमा। उन्हें अज़ाब-ए-क़ब्र और तमाम आफ़ात से महफ़ूज़ फ़रमा।

ऐ मालिक-ए-कायनात! मरहूमा को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमा। उनके दरजात बुलंद फ़रमा और उन्हें अपने नेक बंदों की सोहबत नसीब फ़रमा। हुज़ूर नबी-ए-करीम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर नाज़िल होने वाली रहमतों के सदक़े में हमारी इस दुआ को अपनी बारगाह में क़ुबूल फ़रमा। आमीन या रब्बुल आलमीन।

🕊️ दफ़्न और तदफ़ीन के मौक़े पर पढ़ी जाने वाली दुआएँ

मरहूमा की तदफ़ीन के मौक़े पर तमाम मुसलमान भाइयों से गुज़ारिश है कि शरीअत के मुताबिक़ अदब, सुकून और एहतराम के साथ जनाज़े में शिरकत करें और मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें।

1. क़ब्रिस्तान में दाख़िल होते वक़्त की दुआ

अस्सलामु अलैकुम अहलद-दियारि मिनल-मुमिनीना वल-मुस्लिमीन, व इन्ना इन्शा अल्लाहु बिकुम लाहिक़ून। नसअलुल्लाहा लना व लकुमुल आफ़ियह।

मफ़हूम: ऐ इस बस्ती के मोमिन और मुसलमान रहने वालो! तुम पर सलाम हो। इंशाअल्लाह हम भी तुमसे आ मिलने वाले हैं। हम अल्लाह से अपने और तुम्हारे लिए आफ़ियत माँगते हैं।

2. मरहूमा को क़ब्र में उतारते वक़्त की दुआ

बिस्मिल्लाहि व अला मिल्लति रसूलिल्लाह।

मफ़हूम: अल्लाह के नाम के साथ और रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दीन और तरीक़े पर।

यह दुआ मय्यत को क़ब्र में रखने के मौक़े पर पढ़ी जाती है।

3. मिट्टी देते वक़्त की याददिहानी

अल्लाह तआला ने क़ुरआन-ए-करीम में इरशाद फ़रमाया है:

مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ

तर्जुमा: इसी मिट्टी से हमने तुम्हें पैदा किया, इसी में तुम्हें लौटाएँगे और इसी से तुम्हें दोबारा निकालेंगे। (सूरह ताहा, आयत 55)

मिट्टी देते वक़्त इंसान को अपनी आख़िरत, जवाबदेही और अल्लाह तआला की बारगाह में वापसी को याद करना चाहिए। इस मौक़े पर मरहूमा के लिए रहमत, मग़फ़िरत और जन्नत की दुआ की जाए।

4. दफ़्न के बाद मरहूमा के लिए दुआ

जनाज़े की तदफ़ीन के बाद मरहूमा के लिए साबित-क़दम रहने, मग़फ़िरत और रहमत की दुआ करना मस्नून अमल है।

ऐ अल्लाह! नसीम बानो साहिबा को सवालात के वक़्त साबित-क़दम फ़रमा, उनकी मग़फ़िरत फ़रमा और उनके अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा। आमीन।

🌹 अहल-ए-ख़ाना के नाम ताज़ियती पैग़ाम

जनाब इक़बाल हुसैन मुल्तानी साहब और तमाम ग़मज़दा घरवालों से गुज़ारिश है कि इस मुश्किल वक़्त में अल्लाह तआला की रहमत से मायूस न हों। सब्र और दुआ को अपना सहारा बनाएँ। हम अल्लाह की बारगाह में दुआगो हैं कि वह आप सभी को हिम्मत, हौसला और सब्र अता फ़रमाए।

बिरादरी के तमाम हज़रात से भी गुज़ारिश है कि मरहूमा के लिए ख़ुलूस-ए-दिल से दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और ग़मज़दा ख़ानदान के साथ हमदर्दी का इज़हार करें।

अल्लाह पाक मरहूमा नसीम बानो साहिबा की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए।

आमीन सुम्मा आमीन, या रब्बुल आलमीन।

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Wednesday, October 14, 2026

15 अक्टूबर को मुल्तानी बिरादरी के दो अलग-अलग कार्यक्रमों का ऐलान, बागपत में बिरादरी सम्मेलन तो क़स्बा जलालाबाद, ज़िला शामली में सजेगा ‘मिर्ज़ा मुल्तानी मिलन समारोह

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती के मौक़े पर सामाजिक जागरूकता, तालीम, प्रतिभा सम्मान और बिरादरी के इत्तिहाद का पैग़ाम; दोनों आयोजनों में अलग-अलग कार्यक्रमों की तैयारी।

बागपत/क़स्बा जलालाबाद, ज़िला शामली, उत्तर प्रदेश। मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी से जुड़ी मिली जानकारी के मुताबिक़, 15 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश के जनपद बागपत और क़स्बा जलालाबाद, ज़िला शामली में दो अलग-अलग सामाजिक एवं संगठनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की घोषणा की गई है। दोनों आयोजनों में बिरादरी की सामाजिक सरगर्मियों, तालीमी बेदारी, प्रतिभाओं की हौसला-अफ़ज़ाई और आपसी राब्ते को मज़बूत करने से जुड़े विषयों को अहमियत दी गई है।

एक तरफ़ जनपद बागपत में मुल्तानी वेलफेयर सोसायटी की जानिब से बिरादरी सम्मेलन और प्रतिभा सम्मान समारोह की तैयारी की गई है, वहीं दूसरी तरफ़ क़स्बा जलालाबाद, ज़िला शामली में ‘मिर्ज़ा मुल्तानी मिलन समारोह’ के ज़रिये तालीमी, समाजी, मआशी और पर्यावरणीय बेदारी का पैग़ाम आम करने की घोषणा की गई है।

बागपत में मुल्तानी वेलफेयर सोसायटी का बिरादरी सम्मेलन

मिली जानकारी के मुताबिक़, मुल्तानी वेलफेयर सोसायटी, जनपद बागपत की जानिब से जुमेरात, 15 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजे आशीर्वाद गार्डन, दिल्ली रोड, बागपत में एक सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की घोषणा की गई है।

इस कार्यक्रम में भारत के पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के यौम-ए-पैदाइश, बेटियों के निकाह, छात्र-छात्राओं के प्रतिभा सम्मान समारोह और मुल्तानी बिरादरी सम्मेलन जैसे अहम विषयों को शामिल किया गया है।

इस आयोजन के ज़रिये बिरादरी के लोगों को एक मंच पर लाने, आपसी ताल्लुक़ात को बेहतर बनाने, समाज की प्रतिभाओं की हौसला-अफ़ज़ाई करने और सामाजिक ज़िम्मेदारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का पैग़ाम दिया गया है।

मुस्लिम समाज में तालीम, अख़लाक़, आपसी इत्तिहाद और ज़रूरतमंदों की मदद को हमेशा अहमियत दी जाती रही है। ऐसे कार्यक्रम नई नस्ल को अपनी सामाजिक ज़िम्मेदारियों से जोड़ने और समाज की बेहतरी के लिए मिल-जुलकर काम करने की प्रेरणा दे सकते हैं।

क़स्बा जलालाबाद, ज़िला शामली में होगा ‘मिर्ज़ा मुल्तानी मिलन समारोह’

इसी सिलसिले में मिली जानकारी के मुताबिक़, क़स्बा जलालाबाद, ज़िला शामली में जुमेरात, 15 अक्टूबर 2026 को सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक ‘मिर्ज़ा मुल्तानी मिलन समारोह’ आयोजित किए जाने की घोषणा की गई है। कार्यक्रम का निर्धारित स्थल जोया मैरिज होम, दिल्ली-सहारनपुर रोड, क़स्बा जलालाबाद, ज़िला शामली, उत्तर प्रदेश बताया गया है।

इस समारोह को भारत रत्न, मिसाइल मैन और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती के मौक़े से जोड़ते हुए तालीमी, मआशी, सियासी, समाजी और पर्यावरणीय क्षेत्रों में बेदारी और तरक़्क़ी का पैग़ाम दिया गया है।

मिली जानकारी के मुताबिक़, कार्यक्रम के संयोजक एवं आयोजकों में हाजी नज़ीर अहमद (जलालाबाद), खलील अहमद (बनत), सलीम अहमद (गढ़ी पुख़्ता) और सलीम अहमद (थाना भवन) सहित संबंधित संगठन के पदाधिकारियों का उल्लेख किया गया है।

तिलावत-ए-क़ुरआन से लेकर प्रतिभा सम्मान तक के कार्यक्रम

मिली जानकारी के मुताबिक़, जलालाबाद में प्रस्तावित समारोह की कार्यक्रम-सारणी में क़ुरआन-ए-पाक की तिलावत, तिलावत का तर्जुमा, नात-ए-रसूल ﷺ और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की ज़िंदगी तथा उनकी ख़िदमात से परिचय जैसे कार्यक्रम शामिल किए गए हैं।

इसके अलावा इस्तक़बालिया बयान, सोसायटी की गतिविधियों का तआरुफ़, सदर और अन्य ज़िम्मेदारों की ओर से संगठनात्मक कार्यों की जानकारी, विभिन्न उपसमितियों की पिछली कारगुज़ारियों और आइंदा के मंसूबों पर गुफ़्तगू तथा मेहमानों और वक्ताओं के ख़िताबात के लिए भी वक़्त निर्धारित किया गया है।

कार्यक्रम में नमाज़ और लंच के लिए भी समय रखा गया है। इसके साथ ही ‘मिर्ज़ा मुल्तानी सुपर आइकॉन प्रतिभा सम्मान समारोह’ आयोजित करने की घोषणा की गई है, जिसके ज़रिये विभिन्न क्षेत्रों में क़ाबिलियत का मुज़ाहिरा करने वाली प्रतिभाओं की हौसला-अफ़ज़ाई का उद्देश्य सामने रखा गया है।

कार्यक्रम-सारणी में आगामी साल के लिए कार्ययोजना तैयार करने, ज़िम्मेदारियों के निर्धारण और अगले आयोजन के स्थान की घोषणा जैसे विषयों का भी उल्लेख किया गया है।

डॉ. कलाम की जयंती और नई नस्ल की तरबियत का पैग़ाम

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की ज़िंदगी तालीम, मेहनत, ख़ुद-एतमादी और मुल्क की ख़िदमत की मिसाल के तौर पर याद की जाती है। उनका सफ़र इस बात की प्रेरणा देता है कि इंसान इल्म, लगन और लगातार कोशिश के ज़रिये अपनी मंज़िल हासिल कर सकता है।

ऐसे मौक़ों पर तालीमी बेदारी, बच्चों की हौसला-अफ़ज़ाई, नौजवानों की रहनुमाई और समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना ख़ास अहमियत रखता है। बिरादरी के सामाजिक कार्यक्रमों में इन विषयों को शामिल करना नई नस्ल को बेहतर मुस्तक़बिल की तरफ़ बढ़ने का हौसला दे सकता है।

दो आयोजन, अलग-अलग मंच और सामाजिक बेहतरी की उम्मीद

15 अक्टूबर 2026 को बागपत और क़स्बा जलालाबाद, ज़िला शामली में प्रस्तावित दोनों कार्यक्रमों का अपना अलग आयोजन, स्थान और कार्यक्रम-सारणी है। एक तरफ़ बिरादरी सम्मेलन और प्रतिभा सम्मान से जुड़ी गतिविधियों की घोषणा की गई है, तो दूसरी तरफ़ मिलन समारोह के माध्यम से संगठनात्मक चर्चा, तालीमी जागरूकता और प्रतिभाओं के सम्मान की योजना सामने आई है।

मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के लिए तालीम, आपसी इत्तिहाद, सामाजिक ख़िदमत और नई नस्ल की तरक़्क़ी जैसे विषय हमेशा अहम रहे हैं। उम्मीद की जाती है कि ऐसे आयोजन समाज के लोगों के बीच सकारात्मक संवाद को बढ़ावा देंगे और सामाजिक बेहतरी के लिए मिल-जुलकर काम करने की राह हमवार करेंगे।

यह रिपोर्ट दोनों आयोजनों के संबंध में मिली जानकारी पर आधारित है। कार्यक्रमों में वास्तविक भागीदारी, संपन्न हुई गतिविधियों और आयोजकों की ओर से लिए गए निर्णयों की तस्दीक़ आयोजन के बाद उपलब्ध जानकारी के आधार पर की जा सकेगी।


‘मुल्तानी समाज’ की ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल ‘मुल्तानी समाज’ के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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