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Monday, May 11, 2026
मंगलौर रुड़की निवासी इदरीस साहब का इंतकाल, इलाके में शोक की लहर — नम आंखों से की जाएगी सुपुर्द-ए-ख़ाक
रुड़की से आई इंतकाल की दर्दनाक खबर, मुल्तानी बिरादरी में शोक की लहर
मरहूम मोहम्मद साले आबिद के इंतकाल पर मगफिरत की दुआओं का सिलसिला जारी
क़स्बा रुड़की, जिला हरिद्वार उत्तराखंड से आज एक बेहद रंज-ओ-ग़म की खबर सामने आई, जिसने मुस्लिम मुल्तानी लौहार एवं बढ़ई बिरादरी को गहरे सदमे में डाल दिया। निहायत ही अफसोस के साथ यह इत्तिला दी जाती है कि मोहम्मद साले आबिद साहब (जालीसुर रहमान बड़े कारखाने, एक्सपोर्टर वाले के साले साहब) का आज बरोज़ पीर, तारीख़ 11 मई 2026 को सुबह इंतकाल हो गया।
मरहूम निवासी मोहल्ला सत्ती, निकट मस्जिद लोहारान, रुड़की थे और अपने अच्छे अख़लाक, मिलनसार तबीयत तथा बिरादरी में इज़्ज़तदार पहचान के लिए जाने जाते थे। उनके इंतकाल की खबर सुनते ही इलाके में ग़म का माहौल छा गया और दूर-दराज़ से लोगों ने पहुंचकर अफसोस जताया।
मय्यत को बाद नमाज़ ज़ोहर सुपुर्द-ए-ख़ाक कर दिया गया, जहां बड़ी तादाद में लोगों ने नम आंखों के साथ आख़िरी दीदार किया और मरहूम के लिए दुआ-ए-मगफिरत की। हर जुबान पर यही दुआ रही कि अल्लाह तआला मरहूम की मगफिरत फरमाए, उनकी कब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए और उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए। आमीन।
साथ ही तमाम अहल-ए-ख़ाना और रिश्तेदारों के लिए सब्र-ए-जमील की दुआ की जा रही है। किसी अपने का बिछड़ जाना जिंदगी का सबसे बड़ा ग़म होता है और इस मुश्किल घड़ी में पूरी बिरादरी ग़मज़दा परिवार के साथ खड़ी है।
मय्यत के सिलसिले में ज्यादा मालूमात हासिल करने के लिए मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट के जिला चैयरमैन मोहम्मद मुद्दसिर साहब से मोबाइल नंबर 9917117593 पर राब्ता कायम किया जा सकता है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार एवं बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका, न्यूज पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए भीलवाड़ा, राजस्थान से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट।
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दुआ:
“ऐ अल्लाह! मरहूम की तमाम खतााओं को माफ फरमा, उनकी मगफिरत अता फरमा, उनकी कब्र को नूर से भर दे और तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमा। आमीन या रब्बुल आलमीन।”
कैराना से बेहद ग़मगीन खबर : मोहम्मद कमर साहब का इंतेकाल, इलाके में शोक की लहर
कैराना, शामली (उत्तर प्रदेश) से एक निहायत ही रंज-ओ-ग़म भरी खबर सामने आई है। क़स्बा कैराना निवासी जनाब मोहम्मद कमर साहब वल्द जनाब हाफ़िज़ मोहम्मद उमर साहब का आज बरोज पीर, बा-तारीख़ 11 मई 2026 को कज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया। इस दुखद खबर के बाद परिवार, रिश्तेदारों और बिरादरी में गहरे ग़म का माहौल बना हुआ है।
मरहूम अपने अख़लाक, सादगी और मिलनसार तबीयत की वजह से इलाके में खास पहचान रखते थे। उनके इंतेकाल की खबर सुनते ही लोगों का ताज़ियत के लिए उनके निवास स्थान पर पहुंचना लगातार जारी है। हर आंख नम है और हर ज़ुबान से मरहूम के लिए मग़फिरत की दुआ निकल रही है।
परिजनों के मुताबिक मरहूम की मय्यत को बाद नमाज़ असर सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम अहबाब, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश की गई है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फिरत करें और ग़मज़दा परिवार को सब्र दें।
अल्लाह तआला मरहूम की मग़फिरत फरमाए, उनकी कब्र को नूर से भर दे और उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए। साथ ही घर वालों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।नोट :
मय्यत के सिलसिले में ज्यादा मालूमात के लिए मोहम्मद शहज़ाद साहब से मोबाईल नंबर 9639473913 पर राब्ता कायम किया जा सकता है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका / न्यूज पोर्टल / यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए कैराना, शामली (उत्तर प्रदेश) से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट।
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Saturday, May 9, 2026
शामली में गम की लहर: हज्जन शमशीदा बी का इंतकाल, नम आंखों से दी जाएगी आख़िरी विदाई
शामली जनपद के मोहल्ला गुलशन नगर में उस वक्त गम और मायूसी का माहौल छा गया, जब इलाके की सम्मानित और दीनी ख्यालात रखने वाली बुजुर्ग शख्सियत हज्जन शमशीदा बी का इंतकाल हो गया।
इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलैहि राजिऊन।
मिली जानकारी के अनुसार गली नंबर-2, मोहल्ला गुलशन नगर, शामली निवासी हाजी इलियास साहब (नए गांव वाले) की अहलिया हज्जन शमशीदा बी, जिनका मायका बंतीखेड़ा बताया जाता है, का आज सुबह मेरठ के एक प्राइवेट अस्पताल में कज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया। उनकी उम्र तकरीबन 65 वर्ष थी।
बीमारी के बावजूद पूरा किया था हज का सफर
परिवार और करीबी लोगों के मुताबिक हज्जन शमशीदा बी काफी समय से अस्वस्थ चल रही थीं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने पिछले वर्ष हज का मुकद्दस सफर भी पूरा किया था।
इलाके की महिलाओं में उन्हें एक बेहद नेक, मिलनसार और दीनी ख्यालात रखने वाली शख्सियत के तौर पर जाना जाता था।
बताया जाता है कि वह नमाज़ और रोज़े की पाबंद थीं तथा हमेशा लोगों से मोहब्बत और अदब के साथ पेश आती थीं। उनके इंतकाल की खबर मिलते ही रिश्तेदारों, पड़ोसियों और जानने वालों का उनके घर पहुंचना शुरू हो गया।
पीछे छोड़ गई भरा-पूरा कुनबा
मरहूमा अपने पीछे अपने शौहर हाजी इलियास साहब समेत छह बेटे —मोहम्मद परवेज, मोहम्मद जावेद, मोहम्मद शाहिद, मोहम्मद जाहिद, मोहम्मद जुनैद और मोहम्मद अमिल — तथा दो बेटियां शाइस्ता बी (खतौली) और गुलिस्ता (भगवानपुर, रुड़की) को रोता-बिलखता छोड़ गईं।
इसके अलावा पौते-पोतियां, नाते-नातिन, रिश्तेदार और पूरा खानदान इस दुखद घटना से सदमे में है।
घर में मातम का माहौल है और हर आंख नम दिखाई दे रही है।
असर की नमाज़ के बाद होगी सुपुर्द-ए-खाक
परिवार से मिली जानकारी के अनुसार मरहूमा की मय्यत को आज बाद नमाज़ असर मोहल्ला गुलशन नगर स्थित कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
बिरादरी और इलाके के लोगों से जनाज़े में शरीक होकर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मगफिरत करने की अपील की गई है, ताकि सवाब-ए-दारेन हासिल हो सके।
दुआ-ए-मगफिरत की अपील
अल्लाह तआला मरहूमा हज्जन शमशीदा बी की मगफिरत फरमाए, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता करे और तमाम घर वालों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।
आमीन सुम्मा आमीन।
ज्यादा जानकारी के लिए संपर्क करें
मरहूमा के सिलसिले में अधिक जानकारी के लिए जनाब महबूब साहब (गढ़ी पुख्ता वाले) से संपर्क किया जा सकता है:
मोबाइल नंबर: 9719345444
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार बढ़ई बिरादरी की राष्ट्रीय समाचार पत्रिका / न्यूज़ पोर्टल / यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए शामली, उत्तर प्रदेश से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की विशेष रिपोर्ट।
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शामली से बेहद गमगीन खबर: मोहम्मद इलियास की अहलिया का इंतेकाल, इलाके में शोक की लहर
निहायत ही अफसोस और रंजो-ग़म के साथ तमाम बिरादराना हजरात को इत्तिला दी जाती है कि मोहम्मद इलियास वल्द हाजी इस्माईल (मरहूम) नए गांव वाले,हाल निवासी गली नंबर-2, मोहल्ला गुलशन, शामली, उत्तर प्रदेश की अहलिया का इंतकाल हो गया है।
इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलैहि राजिऊन।
इस दुखद खबर के बाद परिवार, रिश्तेदारों और इलाके में गम का माहौल है।
पूरी खबर तफसील के साथ कुछ ही देर में…
बड़ौत में शोक की लहर: अंजुमन के पहले सदर हाजी इदरीश साहब के बेटे महमूद का इंतकाल, बिरादरी में गम का माहौल
बागपत जनपद के बड़ौत नगर स्थित मुस्लिम मुल्तानी लोहार बढ़ई बिरादरी में उस समय गम और मायूसी की लहर दौड़ गई, जब बिरादरी के सम्मानित परिवार से ताल्लुक रखने वाले महमूद पुत्र हाजी जनाब इदरीश साहब का इंतकाल हो गया।
मिली जानकारी के अनुसार महमूद की उम्र लगभग 45 वर्ष थी और उनका इंतकाल दिनांक 9 मई 2026 की शाम इशा की नमाज़ के वक्त हुआ।
मरहूम महमूद बड़ौत के फूंस वाली मस्जिद के पीछे, मुहल्ला पुरियान वाली गली के निवासी थे। उनके इंतकाल की खबर फैलते ही रिश्तेदारों, अजीजों, दोस्तों और बिरादरी के लोगों का उनके घर पहुंचना शुरू हो गया। पूरे इलाके में गमगीन माहौल बना हुआ है।
दो साल पहले जवान बेटे का भी हुआ था इंतकाल
इस दुखद घटना ने लोगों को इसलिए भी ज्यादा भावुक कर दिया क्योंकि लगभग दो वर्ष पूर्व मरहूम महमूद के जवान बेटे मुहम्मद कैश का भी इंतकाल हो गया था।
एक पिता के रूप में उस सदमे को सहने के बाद अब खुद महमूद साहब का इस दुनिया से चले जाना परिवार पर दुखों का पहाड़ बनकर टूटा है।
मरहूम अपने पीछे तीन बेटियां, पत्नी और भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं, जो इस समय गहरे सदमे और गम में डूबा हुआ है।
नमाज़-ए-जनाज़ा और सुपुर्द-ए-खाक की तैयारी
परिवार और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार मरहूम महमूद की नमाज़-ए-जनाज़ा कल दिनांक 10 मई 2026 को सुबह लगभग 9 बजे से 10 बजे के बीच फूंस वाली मस्जिद, बड़ौत में अदा किए जाने की उम्मीद है।
इसके बाद मरहूम को गौर-ए-गरीबां कब्रिस्तान, बड़का रोड बड़ौत में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
हालांकि अंतिम समय की आधिकारिक पुष्टि परिवार द्वारा की जाएगी।
बिरादरी और क्षेत्र में शोक
मुस्लिम मुल्तानी लोहार बढ़ई बिरादरी के लोगों ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि मरहूम महमूद बेहद मिलनसार और सादगी पसंद इंसान थे। उनके इंतकाल से बिरादरी ने एक नेकदिल शख्सियत को खो दिया है।
लोग लगातार उनके घर पहुंचकर परिवार को तसल्ली दे रहे हैं और मरहूम के लिए दुआ-ए-मगफिरत की जा रही है।
दुआ की अपील
अल्लाह तआला मरहूम महमूद को जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए, उनकी मगफिरत फरमाए और परिवार को सब्र-ए-जमील अता करे।
आमीन सुम्मा आमीन।
ज्यादा जानकारी के लिए दिलशाद वल्द हफीजुद्दीन साहब से संपर्क किया जा सकता है:
मोबाइल: 9897221083
एक-दूसरे तक खबर पहुंचाने की गुजारिश की गई है।
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Tuesday, May 5, 2026
🌙 सब्र, हिम्मत और खुशियों का सफर: शीबा–मुस्तफा कमाल का मुकद्दस निकाह सहारनपुर में अदा
देवबंद निवासी जनाब अब्दुल सलाम साहब की बहन, नोशरा साहिबा एक मशहूर-ओ-मारूफ शख्सियत के तौर पर जानी जाती हैं। उनकी ज़िंदगी अपने आप में सब्र, हिम्मत और जिम्मेदारियों को निभाने की एक मिसाल रही है। उनका निकाह थाना भवन के प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखने वाले, मुश्ताक साहब (ट्रैक्टर वालों) के छोटे भाई जनाब हारून अली साहब से हुआ था। निकाह के बाद वह लिलौन में अपने ससुराल में ससुर साहब के साथ बेहद सुकून और इज़्ज़त के साथ रह रही थीं।
🌿 जिंदगी के इम्तिहान और हिम्मत की मिसाल
वक्त ने करवट ली और ससुर साहब के साथ-साथ उनके शौहर हारून अली साहब का इंतकाल हो गया। यह दौर उनके लिए बेहद दर्दनाक रहा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। पहले देवबंद और फिर रुड़की मुन्तक़िल होकर उन्होंने अपनी जिंदगी को नए सिरे से संभाला और आगे बढ़ाया।👩👧 बेटी की परवरिश और बेहतर परवरिश का नतीजा
नोशरा साहिबा ने अपनी बेटी शीबा की परवरिश बेहद अच्छे संस्कारों और तालीम के साथ की। उनकी मेहनत और परवरिश का ही नतीजा रहा कि शीबा एक नेक और सलीकेदार शख्सियत के रूप में सामने आईं।💍 मुबारक निकाह: एक खुशनुमा मौका
आखिरकार वह खुशनुमा घड़ी आई जब शीबा का निकाह सहारनपुर के सम्मानित परिवार से ताल्लुक रखने वाले जनाब मुस्तफा कमाल साहब के साथ तय हुआ। यह मुबारक निकाह सहारनपुर के मशहूर न्यू हैदराबाद पैलेस, 62 फुटा रोड पर बड़े ही शानदार और सादगी भरे अंदाज़ में अदा किया गया। नोशरा साहिबा रुड़की से सहारनपुर पहुंचीं और पूरे परिवार के साथ इस खुशी के मौके में शरीक हुईं।🤝 बिरादरी की खास शिरकत
इस शादी में मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट के पूर्व राष्ट्रीय चेयरमैन जनाब मोहम्मद आलम साहब समेत बिरादरी के कई मशहूर और कोहिनूर शख्सियतों ने शिरकत की और दूल्हा-दुल्हन को अपनी दुआओं से नवाज़ा।🕊️ दुआओं और खुशियों से भरा समां
निकाह की रस्में बेहद खुशनुमा माहौल में अदा की गईं, जहां बारात का स्वागत, निकाह मस्नून, दावत और रुखसती—हर लम्हा यादगार बन गया। यह शादी सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि दो परिवारों के बीच मोहब्बत और रिश्तों की एक नई शुरुआत भी थी।✨ एक प्रेरणादायक कहानी
नोशरा साहिबा की जिंदगी यह साबित करती है कि मुश्किल हालात में भी अगर इंसान सब्र और हिम्मत से काम ले, तो वह अपने बच्चों के लिए बेहतर मुकाम बना सकता है।📢 ख़ास सूचना:
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