Friday, July 10, 2026

शामली की एक और अज़ीज़ शख़्सियत हमसे जुदा… जनाब अमीर अहमद उर्फ़ मीर साहब के इंतिकाल से मुल्तानी बिरादरी अश्कबार

शामली (उत्तर प्रदेश) | मुल्तानी समाज | उत्तर प्रदेश डेस्क

निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराना हज़रात की ख़िदमत में यह दर्दनाक इत्तिला पेश की जाती है कि (गांव भैंसवाल वाले) हाल निवासी माजरा रोड, शामली (उत्तर प्रदेश) के जनाब अमीर अहमद उर्फ़ मीर साहब वल्द जनाब नसीबी साहब (मरहूम) का आज पीजीआई हॉस्पिटल, चंडीगढ़ में क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिकाल हो गया। मरहूम की उम्र तक़रीबन 50 वर्ष थी।

मरहूम के इंतिकाल की ख़बर सुनते ही अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, दोस्तों और पूरी मुल्तानी बिरादरी में गहरे रंज-ओ-मलाल की लहर दौड़ गई। हर आंख नम है और हर ज़ुबान से मरहूम की मग़फ़िरत और बुलंदी-ए-दराजात की दुआएँ निकल रही हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूम सात भाइयों और दो बहनों के बड़े परिवार से ताल्लुक़ रखते थे। उनकी खुशमिज़ाजी, मिलनसार मिज़ाज और बिरादरी से मोहब्बत को हमेशा याद रखा जाएगा।

ख़बर लिखे जाने तक मरहूम की मैय्यत को पीजीआई हॉस्पिटल, चंडीगढ़ से शामली लाने की तैयारियाँ जारी थीं। जानकारी के अनुसार मैय्यत को मोहल्ला गुलशन नगर, शामली में उनके बड़े भाई जनाब मिस्त्री सगीर अहमद साहब के मकान पर लाया जाएगा।

इसके बाद नमाज़-ए-ईशा के बाद मरहूम को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फ़रमाकर मरहूम के हक़ में दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

🤲 दुआ-ए-मग़फ़िरत

ऐ अल्लाह! मरहूम जनाब अमीर अहमद उर्फ़ मीर साहब की तमाम ख़ताओं को अपनी रहमत से माफ़ फ़रमा। उनकी मग़फ़िरत फ़रमा, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे, उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे, हश्र के दिन उन्हें अपने नेक बंदों के साथ उठाना और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा। उनके तमाम लवाहिक़ीन को सब्र-ए-जमील, हिम्मत और इस्तिक़ामत अता फ़रमा। आमीन या रब्बुल आलमीन।

"إِنَّا لِلَّٰهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ"
"बेशक हम अल्लाह ही के हैं और उसी की तरफ़ लौटकर जाने वाले हैं।"


"मुल्तानी समाज" की जानिब से ताज़ियत

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" की पूरी टीम मरहूम के इंतिकाल पर गहरे दुख और अफ़सोस का इज़हार करती है तथा अहल-ए-ख़ाना से दिली ताज़ियत पेश करती है।

अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए। आमीन।

रिपोर्ट:
प्रधान संपादक – ज़मीर आलम
उत्तर प्रदेश डेस्क | "मुल्तानी समाज"


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إِنَّا لِلَّٰهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ खतौली की एक और अज़ीज़ शख्सियत हमसे जुदा… जनाब सलीम अहमद साहब का इंतिकाल, बिरादरी में ग़म की लहर

खतौली (मुज़फ्फरनगर), उत्तर प्रदेश | मुल्तानी समाज | उत्तर प्रदेश डेस्क

निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराना हज़रात की ख़िदमत में यह इत्तिला पेश की जाती है कि आज दिन जुमा, बा-तारीख़ 10 जुलाई 2026 को पक्का बाग, क़स्बा खतौली, ज़िला मुज़फ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले जनाब सलीम अहमद साहब वल्द जनाब मोहम्मद लतीफ़ साहब (मरहूम) गांव सलावे वाले तक़रीबन 60 साल की उम्र में मुज़फ्फरनगर के एक अस्पताल में क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिकाल हो गया।

मरहूम के इंतिकाल की ख़बर सुनते ही परिवार, रिश्तेदारों, अहबाब और पूरी मुल्तानी बिरादरी में गहरा रंज-ओ-ग़म छा गया। हर आंख नम है और हर ज़ुबान से मरहूम के लिए मग़फ़िरत और बुलंदी-ए-दराजात की दुआएँ निकल रही हैं।

 मय्यत को आज रात 10 बजे किया जाएगा सपुर्द-ए-खाक, लिहाज़ा आप हज़रात भी जनाज़े में शरीक होकर सवाबे दारेन हासिल करें। 

🤲 दुआ-ए-मग़फ़िरत

हम अल्लाह तआला की बारगाह में हाथ उठाकर दुआ करते हैं कि:

"ऐ अल्लाह! मरहूम जनाब सलीम अहमद साहब की तमाम ख़ताओं को माफ़ फ़रमा, उनकी मग़फ़िरत फ़रमा, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे, क़ब्र की तमाम मंज़िलों को आसान फ़रमा, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा और तमाम लवाहिक़ीन को सब्र-ए-जमील और हिम्मत अता फ़रमा। आमीन या रब्बुल आलमीन।"

"इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।"
"अल्लाहुम्मग़फ़िर लहू, वरहम्हू, वा आफिही, वा'फु अन्हू।"


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रिपोर्ट:
प्रधान संपादक – ज़मीर आलम
उत्तर प्रदेश डेस्क | "मुल्तानी समाज"


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Thursday, July 9, 2026

बारिश ने उजाड़ दिया एक घर: थानाभवन में टिन शेड और दीवार गिरने से पिता की दर्दनाक मौत, दो मासूम बेटे ज़िंदगी की जंग लड़ रहे हैं

ज़मीर आलम, प्रधान संपादक | मुल्तानी समाज | थानाभवन (जनपद शामली), उत्तर प्रदेश

थानाभवन कस्बे से एक ऐसी दर्दनाक खबर सामने आई है जिसने हर संवेदनशील दिल को ग़मगीन कर दिया। लगातार हो रही बारिश ने एक खुशहाल परिवार की खुशियां पलभर में उजाड़ दीं। एक आरा मशीन पर बना टिन शेड और उससे लगी दीवार अचानक भरभराकर गिर गई, जिसके मलबे में एक पिता अपने दो बेटों के साथ दब गया। इस हादसे में पिता की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दोनों बेटे गंभीर रूप से घायल हो गए और उनका उपचार जारी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान शाहिद पुत्र यूनुस (49 वर्ष) निवासी थानाभवन के रूप में हुई है। हादसे के वक्त शाहिद अपने दो बेटों अरमान (17 वर्ष) और नोमान उर्फ लुलु (15 वर्ष) के साथ मौजूद थे। अचानक टिन शेड और दीवार गिरने से तीनों मलबे में दब गए। हादसे की आवाज़ सुनते ही आसपास के लोग मौके पर दौड़ पड़े और बिना समय गंवाए राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों की कोशिशों से तीनों को मलबे से बाहर निकाला गया और तत्काल एक निजी अस्पताल पहुंचाया गया।

अस्पताल में चिकित्सकों ने शाहिद को मृत घोषित कर दिया, जबकि दोनों बेटों का इलाज जारी है। परिवार पर टूटा यह दुखों का पहाड़ पूरे इलाके में शोक का विषय बना हुआ है। हर आंख नम है और हर जुबान से मरहूम की मग़फ़िरत तथा घायल बेटों की जल्द से जल्द शिफ़ा के लिए दुआएं निकल रही हैं।

थाना भवन पुलिस निरीक्षक बिजेंद्र सिंह रावत ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटना की जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जांच में लगातार बारिश के कारण टिन शेड और दीवार के कमजोर होकर गिरने को हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है।

हालांकि, एक प्रत्यक्षदर्शी ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर दावा किया कि हादसा उस समय हुआ जब टिन शेड की मरम्मत का कार्य चल रहा था। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है, ताकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।

यह दर्दनाक हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि लगातार बारिश के दौरान जर्जर भवनों, कमजोर दीवारों और पुराने टिन शेडों के नीचे कार्य करना कितना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे मौसम में सुरक्षा संबंधी सभी आवश्यक सावधानियां अपनाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की दुखद घटनाओं से बचा जा सके।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।
अल्लाह तआला मरहूम शाहिद की मग़फ़िरत फरमाए, उनकी क़ब्र को रौशन करे, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मकाम अता फरमाए और उनके अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। साथ ही घायल दोनों बेटों को जल्द मुकम्मल शिफ़ा-ए-कामिला अता फरमाए। आमीन।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज़ पोर्टल/यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए थानाभवन, जनपद शामली (उत्तर प्रदेश) से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन — थानाभवन के जनाब शाहिद मिर्ज़ा का दर्दनाक हादसे में इंतिकाल, पूरी मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी ग़मज़दा

थानाभवन (शामली), 09 जुलाई 2026।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी को यह दुखद इत्तिला दी जाती है कि उत्तर प्रदेश के जनपद शामली के कस्बा थानाभवन जिला शामली, उत्तर प्रदेश स्थित मोहल्ला रेती सराय निवासी जनाब शाहिद मिर्ज़ा वल्द जनाब यूनुस साहब (मरहूम) का आज दिन जुमेरात, 09 जुलाई 2026 को तकरीबन शाम 4 बजे एक दर्दनाक हादसे में कज़ा-ए-इलाही से इंतिकाल हो गया। उनकी उम्र लगभग 50 साल थी।

बताया जाता है कि बरसात के दौरान अचानक हुए इस दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया। जैसे ही इस दर्दनाक हादसे की खबर फैली, मरहूम के घर पर मातम का माहौल छा गया। रिश्तेदार, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, दोस्त और बिरादरी के लोग बारिश की परवाह किए बिना मरहूम के घर पहुंचने लगे। हर शख्स की आंखें अश्कबार थीं और हर ज़ुबान पर यही दुआ थी कि अल्लाह तआला मरहूम की मग़फिरत फरमाए।

शाहिद मिर्ज़ा अपने पीछे अपनी अहलिया, दो बेटों, तीन बेटियों सहित पूरे खानदान, रिश्तेदारों और चाहने वालों को गहरे ग़म में छोड़कर इस फ़ानी दुनिया से हमेशा-हमेशा के लिए रुख़्सत हो गए। उनका इस तरह अचानक बिछड़ जाना न सिर्फ़ उनके परिवार बल्कि पूरी बिरादरी के लिए भरपाई करना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन है।

मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा और सुपुर्द-ए-ख़ाक आज रात 10:00 बजे सिटी गार्डन के पास स्थित कब्रिस्तान में अदा की जाएगी। तमाम अहबाब, बिरादरान और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत कर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फिरत करें और उनके लवाहिकीन को सब्र-ए-जमील अता होने की दुआ करें।

दुआ:
अल्लाह तआला मरहूम शाहिद मिर्ज़ा की मग़फिरत फरमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फरमाए और तमाम लवाहिकीन को इस सदमे को बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ के साथ सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

नोट:
मैय्यत के सिलसिले में अधिक जानकारी के लिए जनाब अज़ीज़ साहब (बशीर मार्किट वाले) से मोबाइल नंबर 6398598981 पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज़ पोर्टल/यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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Tuesday, July 7, 2026

खतौली की नजमा बी का इंतिक़ाल, नमाज़-ए-जनाज़ा आज दोपहर 2 बजे मस्जिद फतेहपुरी में अदा की जाएगी

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

मुज़फ्फरनगर/खतौली, उत्तर प्रदेश | मुल्तानी समाज | ख़ास रिपोर्ट

निहायत अफ़सोस और गहरे रंज-ओ-ग़म के साथ बिरादरी और तमाम अहबाब को इत्तिला दी जाती है कि नाहरीया धर्म कांटे के सामने मोहल्ला शाहबान, बुढ़ाना रोड, कस्बा खतौली, ज़िला मुज़फ्फरनगर की रहने वाली नजमा बी, अहलिया जनाब मिर्ज़ा अफ़ज़ाल साहब (कुशावली वाले) खजांची "मुल्तानी समाजसेवी संगठन का बीती रात तकरीबन 2:00 बजे मेरठ के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान कज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया। मरहूमा की उम्र लगभग 35 साल थी।

मरहूमा नजमा बी अपने पीछे अपने शौहर, चार बेटों और एक बेटी सहित पूरा खानदान, रिश्तेदार, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और चाहने वालों को ग़मज़दा छोड़कर इस फ़ानी दुनिया से हमेशा के लिए रुख़्सत हो गईं।

बताया जाता है कि मरहूमा, जनाब सईद अहमद साहब (गाँव दभेड़ी), हाल निवासी खतौली की साहबज़ादी थीं। उनके परिवार में तीन भाई और तीन बहनें हैं। इस सदमे से पूरे परिवार और बिरादरी में गहरा दुःख और मातम का माहौल है।

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूमा की नमाज़-ए-जनाज़ा आज, बुधवार 08 जुलाई 2026 को दोपहर 2:00 बजे मस्जिद फतेहपुरी, खतौली में अदा की जाएगी। इसके बाद गोर-ए-ग़रीबा कब्रिस्तान में तदफ़ीन अमल में लाई जाएगी। तमाम बिरादरान-ए-इस्लाम से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूमा के हक़ में दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और उनके लवाहिक़ीन को सब्र-ए-जमील की दुआ दें।

अल्लाह तआला मरहूमा नजमा बी की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे, उसे जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए और तमाम अहल-ए-ख़ाना को यह सदमा बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ के साथ सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

नोट: मरहूमा के संबंध में अधिक जानकारी के लिए उनके शौहर एवं बिरादरी की ख़िदमत में हमेशा पेश-पेश रहने वाले वरिष्ठ समाजसेवी जनाब मिर्ज़ा अफ़ज़ाल साहब (कुशावली वाले) खजांची मुल्तानी समाजसेवी संगठन से मोबाइल नंबर 8077790947 पर संपर्क किया जा सकता है।


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Monday, July 6, 2026

😭 जवान बेटे की असमय जुदाई ने बड़ौत को ग़म में डुबो दिया — जीशान की दर्दनाक सड़क दुर्घटना में इंतिकाल, अल्लाह मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए 🤲

मुल्तानी समाज उत्तर प्रदेश डेस्क

"इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।"

निहायत ही अफ़सोस और गहरे रंजो-ग़म के साथ मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी और तमाम अहबाब को इत्तिला दी जाती है कि जनाब दिलशाद साहब (पूर्व सभासद, नगर पालिका परिषद बड़ौत), निवासी गांव तुगाना, हाल निवासी मोहल्ला पठानकोट, बड़ौत, जनपद बागपत (उत्तर प्रदेश) के जिगर के टुकड़े जनाब जीशान (उम्र लगभग 20–22 वर्ष) का मंगलवार, 7 जुलाई 2026 की बीती रात लगभग 3 बजे एक दर्दनाक सड़क हादसे में कज़ा-ए-इलाही से इंतिकाल हो गया।

मिली जानकारी के अनुसार मरहूम जीशान दिल्ली से बाइक द्वारा अपने घर बड़ौत लौट रहे थे। इसी दौरान सरूरपुर एरिया में उनकी बाइक दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसा इतना भीषण था कि वह ज़िंदगी की जंग हार गए और अपने रब के हुक्म से इस फ़ानी दुनिया को अलविदा कह गए।

मरहूम अपने वालिदैन की उम्मीदों का सहारा थे। बताया जाता है कि उनकी तीन बहनें हैं और उन्हीं का इकलौता भाई थे। इस दर्दनाक हादसे की खबर जैसे ही बड़ौत पहुंची, घर में मातम छा गया। मोहल्ले और शहर में जिसे भी यह दुखद समाचार मिला, वह ग़मज़दा परिवार के घर ताज़ियत के लिए पहुंचने लगा। हर आंख अश्कबार है और हर ज़ुबान पर मरहूम की मग़फ़िरत की दुआ है।

परिजनों के अनुसार मरहूम के नाना और मामा मूल रूप से गांव कोताना के रहने वाले बताए जाते हैं, जो वर्तमान में गांव बावली, तहसील बड़ौत, जनपद बागपत में निवास करते हैं।

बाद नमाज़ असर मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा  होगी और बड़ौत के ही कब्रिस्तान मैं किए जायेंगे तदफ़ीन सपूर्दे ख़ाक लिहाज़ा आप हजरात भी जनाजे में शरीक होकर सवाबे दारेन हासिल करें।

हम अल्लाह तआला की बारगाह में दुआगो हैं कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त मरहूम जीशान की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए और तमाम लवाहिक़ीन को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन या रब्बल आलमीन।

दुआ की गुज़ारिश:
तमाम अहबाब से गुज़ारिश है कि मरहूम के लिए सूरह फ़ातिहा, इस्तिग़फ़ार और दुआ-ए-मग़फ़िरत का एहतमाम फ़रमाएं तथा उनके अहल-ए-ख़ाना के लिए सब्र और हिम्मत की दुआ करें।

नोट: मरहूम के संबंध में अधिक जानकारी के लिए उनके चाचा जनाब मईनुद्दीन साहब से मोबाइल नंबर 7455844715 पर संपर्क किया जा सकता है।

— प्रेस लाइन —
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी की राष्ट्रीय समाचार पत्रिका / न्यूज़ पोर्टल / यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की विशेष रिपोर्ट।

Sunday, July 5, 2026

700 साल पुरानी विरासत: मुल्तान से नागौर तक मुल्तानी समाज की गौरवशाली दास्तान

तोपसाज़ी, लोहे की दस्तकारी और सूफ़ी रिवायतों से जुड़ी एक ऐतिहासिक विरासत

विशेष संवाददाता | मुल्तानी समाज न्यूज़

राजस्थान के ऐतिहासिक शहर नागौर की सरज़मीन केवल सूफ़ी बुज़ुर्गों, किलों और सल्तनतों की वजह से ही मशहूर नहीं रही, बल्कि यह शहर सदियों से मुल्तानी समाज की मेहनत, दस्तकारी और इल्म-ओ-हुनर का भी गवाह रहा है। इतिहास, स्थानीय परंपराओं और समाज की मौखिक विरासत (Oral Traditions) के अनुसार, आज नागौर, राजस्थान और मध्य प्रदेश में बसे मुल्तानी समाज के अधिकांश परिवारों की जड़ें मुल्तान (वर्तमान पाकिस्तान) से जुड़ी मानी जाती हैं।

करीब 600 से 700 वर्ष पूर्व, जब उत्तर भारत में सल्तनत का दौर था, तब मुल्तान अपने लोहे के उद्योग, हथियार निर्माण और तोपसाज़ी के लिए पूरे हिंदुस्तान में प्रसिद्ध था। उसी दौर में अनेक कुशल लोहार, धातु-शिल्पी और तोप बनाने वाले कारीगर नागौर पहुँचे और यहीं की मिट्टी में हमेशा के लिए बस गए।


मुल्तान से नागौर तक का ऐतिहासिक सफ़र

इतिहासकारों के अनुसार 13वीं से 15वीं शताब्दी के बीच नागौर एक महत्वपूर्ण सैन्य, व्यापारिक और सूफ़ी केंद्र बन चुका था। किलों की सुरक्षा और सेना को मज़बूत बनाने के लिए कुशल तोपसाज़ों और हथियार बनाने वाले कारीगरों की आवश्यकता थी।

उसी समय मुल्तान से आए मुस्लिम लोहारों और धातु-शिल्पियों को नागौर के शासकों ने सम्मानपूर्वक बसाया। यही परिवार आगे चलकर "मुल्तानी लोहार" अथवा "मुल्तानी समाज" के नाम से पहचाने जाने लगे।


नागौर में बसने के तीन प्रमुख ऐतिहासिक चरण

पहला चरण – सूफ़ी सिलसिलों का दौर (13वीं शताब्दी)

इतिहास में यह उल्लेख मिलता है कि मुल्तान और नागौर के बीच आध्यात्मिक संबंध सूफ़ी संतों के माध्यम से अत्यंत प्रगाढ़ थे। क़ाज़ी हमीदुद्दीन नागौरी, हज़रत बहाउद्दीन ज़करिया और सूफ़ी सिलसिलों के माध्यम से अनेक विद्वान, मुरीद और कारीगर मुल्तान से नागौर पहुँचे। यही मुल्तानी समाज के आगमन की प्रारंभिक नींव मानी जाती है।


दूसरा चरण – खिलजी और तुगलक काल (14वीं शताब्दी)

अलाउद्दीन खिलजी और बाद में मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में नागौर एक विशाल सैन्य केंद्र के रूप में विकसित हुआ। किलों के विस्तार और हथियार निर्माण के लिए मुल्तान से दक्ष लोहारों और तोपसाज़ों को आमंत्रित किया गया।

इसी काल को मुल्तानी समाज के बड़े पैमाने पर नागौर में बसने का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है।


तीसरा चरण – नागौर सल्तनत का दौर (15वीं शताब्दी)

सन 1407 ईस्वी के बाद नागौर के शासकों ने अपनी सेना को आधुनिक स्वरूप देने के उद्देश्य से मुल्तान और गुजरात से विशेष रूप से तोपसाज़ों तथा लोहे के विशेषज्ञ कारीगरों को बुलाया और उन्हें किले के आसपास स्थायी रूप से बसाया।


बाबा हाजी सुलेमान मुल्तानी – समाज के आदि पुरुष

समाज की स्थानीय परंपराओं और बुज़ुर्गों के अनुसार बाबा हाजी सुलेमान मुल्तानी को नागौर में बसने वाले मुल्तानी समाज का प्रथम पूर्वज माना जाता है।

बताया जाता है कि वे एक कुशल धातु-शिल्पी, हथियार निर्माता और सूफ़ी विचारधारा से जुड़े हुए व्यक्तित्व थे। उन्होंने अपने साथ कई परिवारों को नागौर लाकर पहली भट्टी और कार्यशाला स्थापित की, जहाँ से इस समाज की नई पहचान शुरू हुई।


तोपखाने से कृषि उपकरणों तक का सफ़र

समय के साथ युद्धों का दौर समाप्त हुआ, लेकिन मुल्तानी समाज का हुनर कभी समाप्त नहीं हुआ।

जिन हाथों ने कभी तलवारें, तोपें और हथियार बनाए, उन्हीं हाथों ने आगे चलकर खेती-किसानी के लिए फावड़े, कुल्हाड़ियाँ, कल्टीवेटर, लोहे के औज़ार और घरेलू उपयोग की वस्तुएँ बनाकर पूरे देश में अपनी अलग पहचान स्थापित की।

आज भी नागौर का लोहा बाज़ार और वहाँ बनने वाले कृषि उपकरण इस ऐतिहासिक विरासत की जीवंत मिसाल माने जाते हैं।


सूफ़ी रिवायतों से जुड़ा रिश्ता

मुल्तान और नागौर का संबंध केवल व्यापार या दस्तकारी तक सीमित नहीं था, बल्कि सूफ़ी सिलसिलों ने भी दोनों शहरों को एक आध्यात्मिक डोर में बाँधा।

इतिहास में क़ाज़ी हमीदुद्दीन नागौरी और हज़रत बहाउद्दीन ज़करिया के बीच गहरे धार्मिक संबंधों का उल्लेख मिलता है। वहीं सूफ़ी हमीदुद्दीन नागौरी की फ़क़ीरी और इल्तुतमिश का उनके प्रति सम्मान आज भी नागौर की ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।


तारकीन का बुलंद दरवाज़ा – अदब और अकीदत की निशानी

नागौर स्थित सूफ़ी हमीदुद्दीन नागौरी की दरगाह का ऐतिहासिक बुलंद दरवाज़ा सुल्तान शम्सुद्दीन इल्तुतमिश द्वारा बनवाया गया माना जाता है। बाद में मुहम्मद बिन तुगलक के दौर में दरगाह परिसर के अन्य निर्माण और विस्तार कार्य हुए।

यह इमारत आज भी सूफ़ी परंपरा, अदब और सल्तनती इतिहास की एक अनमोल धरोहर है।


आज भी ज़िंदा है 700 साल पुरानी पहचान

मुल्तानी समाज ने सदियों तक अपने पूर्वजों की दस्तकारी, मेहनत और ईमानदारी की परंपरा को जीवित रखा है। बदलते दौर के बावजूद समाज ने अपने हुनर को नई पीढ़ियों तक पहुँचाया और देश के औद्योगिक तथा कृषि विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

आज राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश सहित देश के अनेक राज्यों में बसे मुल्तानी समाज के लोग अपने पूर्वजों की इसी ऐतिहासिक विरासत पर गर्व करते हैं।


संपादकीय टिप्पणी

यह इतिहास स्थानीय लोक-परंपराओं, समाज की मौखिक विरासत और विभिन्न ऐतिहासिक उल्लेखों पर आधारित है। इनमें से कुछ विवरण व्यापक रूप से स्वीकार किए जाते हैं, जबकि कुछ दावों (जैसे किसी एक व्यक्ति को समाज का पहला पूर्वज मानना या कुछ विशिष्ट घटनाएँ) के लिए स्वतंत्र समकालीन ऐतिहासिक स्रोत सीमित हैं। इसलिए इन्हें समाज की परंपरागत मान्यताओं के रूप में प्रस्तुत करना अधिक उपयुक्त है।

"जिस कौम ने कभी सल्तनतों की तोपें गढ़ीं, वही कौम आज अपने हुनर, मेहनत और ख़िदमत से समाज की पहचान गढ़ रही है। मुल्तानी समाज की यह 700 वर्ष पुरानी विरासत केवल इतिहास नहीं, बल्कि आने वाली नस्लों के लिए फ़ख्र, पहचान और प्रेरणा का अमूल्य ख़ज़ाना है।"