Friday, May 22, 2026

बिरादरी की भलाई के लिए मुल्तानी समाजसेवी संगठन का अहम फैसला, ईद-उल-अज़हा पर ( कुर्बानी ) के साथ आर्थिक मदद का भी होगा इंतज़ाम

“खिदमत-ए-खल्क़ ही असली इबादत — मुल्तानी समाजसेवी संगठन ने जरूरतमंदों के सहारे का लिया अहम फैसला”

“( कुर्बानी ) की खुशियों में गरीब और मिस्कीन परिवारों को भी किया जाएगा शामिल — संगठन की बैठक में बनी रणनीति”

खतौली, मुजफ्फरनगर।
बिरादरी की मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों और जरूरतमंद परिवारों की परेशानियों को मद्देनज़र रखते हुए मुल्तानी समाजसेवी संगठन के कार्यकर्ताओं की एक अहम बैठक जमीरउद्दीन साहब के आवास पर आयोजित की गई। बैठक का माहौल बेहद संजीदा, भाईचारे और इंसानियत की भावना से सराबोर रहा, जिसमें समाज की भलाई और गरीब तबके की मदद को लेकर कई अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में यह सर्वसम्मति से तय किया गया कि आने वाली ईद-उल-अज़हा के मौके पर जहां ( कुर्बानी ) के गोश्त की तक्सीम जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाई जाएगी, वहीं बिरादरी के गरीब, बेसहारा और मिस्कीन लोगों की आर्थिक मदद का भी विशेष इंतज़ाम किया जाएगा, ताकि कोई भी परिवार खुशियों से महरूम न रहे। संगठन के पदाधिकारियों ने इस नेक पहल को इंसानियत और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल बताते हुए इसे लगातार जारी रखने का संकल्प लिया।

बैठक में मुल्तानी समाजसेवी संगठन के राष्ट्रीय सदर हाजी नसीम साहब ने कहा कि समाज की तरक्की केवल बातों से नहीं बल्कि आपसी सहयोग और जरूरतमंदों के सहारे से संभव होती है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वह आगे बढ़कर गरीब परिवारों की मदद करें और समाज में भाईचारे, मोहब्बत और इंसानियत का पैगाम आम करें।

इस मौके पर संगठन के नायब सदर जमीरउद्दीन साहब ने मेहमानों का इस्तकबाल करते हुए कहा कि मौजूदा दौर में जरूरतमंद लोगों की मदद करना वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है। संगठन सेक्रेटरी मिर्ज़ा नौशाद साहब ने संगठन की आगामी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की, जबकि कोषाध्यक्ष अफजाल मिर्जा (कुसावली) ने आर्थिक सहयोग और सहायता व्यवस्था को मजबूत करने पर अपने विचार रखे।

बैठक का संचालन प्रभारी शाहनवाज मिर्जा (सरधने वालों) ने बेहद सलीके और खूबसूरत अंदाज में किया। उन्होंने संगठन की एकजुटता और सामाजिक जिम्मेदारी को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।

बैठक के आखिर में सभी मौजूद लोगों ने यह संकल्प लिया कि बिरादरी के गरीब और जरूरतमंद लोगों की हर संभव मदद की जाएगी तथा समाज में शिक्षा, आपसी सहयोग और इंसानियत के जज़्बे को मजबूत किया जाएगा।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज पोर्टल/यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए खतौली जिला मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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10 साल पुराने पांच मुकदमों का हुआ आपसी समझौता, तंजीम की कोशिशों से बसा टूटा रिश्ता

हाजी नज़ीर अहमद की पहल से दोनों परिवारों में बनी रज़ामंदी, दहेज का सामान भी कराया वापस

समाज में बढ़ते घरेलू विवादों और पारिवारिक मामलों के बीच जहां रिश्ते अदालतों की चौखट तक पहुंचकर टूट जाते हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो समाज को जोड़ने और रिश्तों को बचाने का काम करते हैं। पैदाइशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार बढ़ई बिरादरी में ऐसा ही एक सराहनीय मामला सामने आया है, जिसने समाज में आपसी भाईचारे और तंजीमी एकता की मिसाल पेश की है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते लगभग 10 वर्षों से एक लड़का और लड़की पक्ष के बीच पांच मुकदमे अलग-अलग मामलों को लेकर चल रहे थे। इन मामलों ने दोनों परिवारों के बीच दूरियां पैदा कर दी थीं और कई पंचायतों के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा था।

बताया जाता है कि बिरादरी की तंजीम से जुड़े वरिष्ठ समाजसेवी एवं प्रसिद्ध बिजनेसमैन जनाब हाजी नज़ीर अहमद साहब निवासी जलालाबाद, जिला शामली ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों पक्षों को समझाने और रिश्ते को बचाने की लगातार कोशिश की। उन्होंने पहले पति-पत्नी को दोबारा घर बसाने और साथ रहने के लिए राज़ी करने का प्रयास किया, लेकिन जब दोनों पक्ष इसके लिए तैयार नहीं हुए तो आपसी रज़ामंदी के साथ शांतिपूर्ण समझौते का रास्ता निकाला गया।

इस समझौते में बिरादरी के विभिन्न शहरों जैसे खतौली, मुजफ्फरनगर, रामपुर, जलालाबाद, शामली, चौसाना आदि से जुड़े जिम्मेदार और सम्मानित लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तंजीम के बुजुर्गों और जिम्मेदार सदस्यों की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच चल रहे विवादों को समाप्त कराया गया और अदालतों में चल रहे मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया भी पूरी कराई गई।

इतना ही नहीं, लड़की पक्ष का दहेज का सामान भी सम्मानपूर्वक वापस कराया गया। जानकारी के अनुसार, हाजी नज़ीर साहब स्वयं मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने दोनों परिवारों को एक-दूसरे से हाथ मिलवाकर पुराने गिले-शिकवे खत्म कराए।

इस मौके पर मौजूद लोगों ने कहा कि समाज में ऐसे फैसले अदालतों से ज्यादा रिश्तों को बचाने वाले साबित होते हैं। लोगों ने हाजी नज़ीर अहमद और तंजीम से जुड़े जिम्मेदारों की इस कोशिश की सराहना करते हुए इसे बिरादरी की एक बड़ी कामयाबी बताया।

अल्लाह पाक से दुआ की गई कि दोनों पक्षों को आगे चलकर बेहतर जीवनसाथी नसीब हों और उनकी जिंदगी खुशहाल बने। साथ ही तंजीम के सभी ओहदेदारों और समाजसेवियों को इस नेक कार्य का बेहतर अज्र अता फरमाए।

यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर हाजी नज़ीर अहमद साहब द्वारा साझा की गई वायरल सूचना के आधार पर तैयार की गई है।


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Thursday, May 21, 2026

मुल्तानी समाज का भविष्य: पढ़ाई से तरक्की, फिजूल खर्च से बर्बादी

जिस समाज ने इल्म को अपनाया, उसी ने तरक्की पाई “उस समाज के हालात कभी नहीं बदलते जो समाज अपने हालात बदलना नहीं चाहता।”

यह सिर्फ एक जुमला नहीं, बल्कि आज के दौर की सबसे बड़ी सच्चाई है। वक्त तेजी से बदल रहा है। दुनिया टेक्नोलॉजी, पढ़ाई और हुनर के दम पर आगे बढ़ रही है, लेकिन अगर कोई समाज अब भी पुरानी सोच, दिखावे और फिजूल रस्मों में उलझा रहे तो उसका पीछे रह जाना तय है।

पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी के बीच आज सबसे ज्यादा जरूरत इस बात की है कि हम अपनी नई नस्ल को तालीम और हुनर की तरफ लेकर जाएं। क्योंकि अब सिर्फ मेहनत काफी नहीं, मेहनत के साथ इल्म भी जरूरी है।

पढ़ाई ही असली दौलत है

एक वक्त था जब लोग जमीन, दुकान और कारोबार को ही सबसे बड़ी पूंजी समझते थे। लेकिन आज का दौर अलग है। अब वही इंसान आगे बढ़ रहा है जिसके पास तालीम, हुनर और नई सोच है। पढ़ा-लिखा नौजवान नौकरी भी हासिल कर सकता है, कारोबार भी खड़ा कर सकता है और डिजिटल दुनिया में भी अपनी पहचान बना सकता है।

आज कंप्यूटर, अकाउंटिंग, मेडिकल, डिजाइनिंग, मोबाइल टेक्नोलॉजी, ऑनलाइन बिजनेस और सरकारी नौकरियों में हर तरफ मौके मौजूद हैं। जरूरत सिर्फ सही दिशा और मेहनत की है।

सबसे अहम बात यह है कि बेटियों की तालीम को भी उतनी ही अहमियत दी जाए जितनी बेटों की। क्योंकि एक पढ़ी-लिखी बेटी सिर्फ खुद नहीं बदलती, बल्कि पूरे घर और आने वाली नस्लों की सोच बदल देती है। जिस घर की मां तालीमयाफ्ता होती है, वहां बच्चों की परवरिश, तहज़ीब और तरक्की खुद-ब-खुद बेहतर हो जाती है।

हर घर को कोशिश करनी चाहिए कि कम से कम एक बच्चा कॉलेज तक जरूर पढ़े। अगर आर्थिक परेशानी हो तो स्कॉलरशिप, सरकारी योजनाओं और समाजी मदद का सहारा लिया जाए। तालीम पर खर्च कभी बर्बाद नहीं जाता।

शादी में दिखावा समाज को कमजोर कर रहा है

आज समाज के कई घर सिर्फ इसलिए परेशान हैं क्योंकि शादी को जरूरत से ज्यादा मुश्किल और महंगा बना दिया गया है। दो दिन की रस्मों के लिए लोग कई-कई साल तक कर्ज चुकाते रहते हैं।

महंगे बैंक्वेट हॉल, लंबी बारात, जरूरत से ज्यादा खाना, दिखावटी डेकोरेशन, दहेज और “लोग क्या कहेंगे” जैसी सोच ने समाज को आर्थिक रूप से कमजोर कर दिया है। कई गरीब परिवार सिर्फ इन बेकार रस्मों की वजह से बेटियों की शादी तक टाल देते हैं।

हकीकत यह है कि शादी की असली खूबसूरती सादगी, मोहब्बत और आसानी में है, ना कि फिजूल खर्च और दिखावे में।

बदलाव की शुरुआत अपने घर से करें

अगर समाज को बदलना है तो शुरुआत हर इंसान को अपने घर से करनी होगी। शादी को आसान बनाइए। मस्जिद में सादा निकाह और घर या छोटे हॉल में सादा वलीमा भी एक बेहतर और शरीफाना तरीका है। 100 से 150 मेहमान काफी होते हैं, बाकी पैसा बच्चों की पढ़ाई, कारोबार या भविष्य की जरूरतों के लिए बचाया जा सकता है।

सामूहिक निकाह जैसी मुहिम भी समाज के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है। एक ही जगह कई जोड़ों की शादी होने से खर्च कम होता है और गरीब परिवारों पर बोझ भी नहीं पड़ता।

सबसे जरूरी बात यह है कि बेटी को बोझ समझने की सोच खत्म की जाए। बेटियों को इतना काबिल बनाया जाए कि वे जरूरत पड़ने पर खुद अपने पैरों पर खड़ी हो सकें और अपने परिवार का सहारा बन सकें।

इल्म हमेशा साथ रहता है

पैसा कभी कम तो कभी ज्यादा होता रहता है। रस्में और रिवाज भी वक्त के साथ बदल जाते हैं। लेकिन इल्म एक ऐसी दौलत है जो इंसान से कभी जुदा नहीं होती।

आज जरूरत इस बात की है कि अगली शादी में दिखावे के बजाय सादगी को अपनाया जाए, फिजूल खर्ची के बजाय बचत की जाए और उस बचत को बच्चों की तालीम और बेहतर भविष्य पर लगाया जाए। यही सोच मुल्तानी समाज को मजबूती देगी और आने वाली नस्लों को कामयाबी की नई राह दिखाएगी।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज पोर्टल/यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए राजस्थान से अब्दुल हकीम इमलीवाला की ख़ास रिपोर्ट।

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🤲 दुआओं की दरख्वास्त : बिरादरी के बुज़ुर्ग मिस्त्री अय्यूब अहमद साहब की हालत नाज़ुक, आईसीयू में भर्ती


अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार बढ़ई बिरादरी के लिए यह खबर बेहद अफसोसनाक और फिक्र करने वाली है कि बिरादरी के बुज़ुर्ग एवं सम्मानित शख्सियत जनाब मिस्त्री अय्यूब अहमद साहब वल्द जनाब मिस्त्री अज़ीमुल्ला साहब (मरहूम) निवासी गढ़ी पुख़्ता, हाल बाशिंदे नज़दीक मक्का मस्जिद, शामली (उत्तर प्रदेश) इन दिनों गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। उनकी हालत नाज़ुक बनी हुई है और उन्हें शामली स्थित प्राइवेट हॉस्पिटल “गंगा अमृत” के आईसीयू विभाग में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है।

बताया जाता है कि तकरीबन 85 वर्षीय मिस्त्री अय्यूब साहब को लगभग तीन वर्ष पूर्व ब्रेन स्ट्रोक आने की वजह से पैरालाइसिस (लकवा) हो गया था। इसके बाद से वह लगातार शारीरिक परेशानियों से जूझते रहे, लेकिन उम्र और बीमारी के बावजूद उन्होंने हमेशा सब्र, हिम्मत और अल्लाह की रज़ा पर भरोसा कायम रखा। आज उनकी बिगड़ती तबीयत ने पूरे बिरादरी समाज को गमगीन और फिक्रमंद कर दिया है।

मिस्त्री अय्यूब साहब अपनी सादगी, मेहनतकशी और नेक अखलाक की वजह से बिरादरी में खास पहचान रखते हैं। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी मेहनत, ईमानदारी और रिश्तों की मोहब्बत के साथ गुज़ारी। उनके चाहने वाले और जानने वाले लोग लगातार उनकी सेहतयाबी के लिए दुआएं कर रहे हैं।

आप तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि अल्लाह तआला के हुज़ूर खास दुआ फरमाएं कि अल्लाह मिस्त्री अय्यूब साहब को जल्द से जल्द मुकम्मल शिफ़ा-ए-कामिला अता फरमाए, उन्हें सेहत और तंदुरुस्ती के साथ दोबारा अपने घर और अपनों के बीच लौटाए तथा उनका साया हमेशा उनके परिवार पर कायम रखे।

🤲 अल्लाह तआला अपने हबीब ﷺ के सदके मिस्त्री अय्यूब साहब को जल्द शिफ़ा अता फरमाए।
आमीन सुम्मा आमीन।

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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका / न्यूज पोर्टल / यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए शामली, उत्तर प्रदेश से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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Wednesday, May 20, 2026

वाजिदपुर की अज़ीम शख्सियत हाजी महमूद हसन का इंतेकाल, मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी में शोक की लहर

बागपत जनपद की तहसील बड़ौत के गांव वाजिदपुर से मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी के लिए एक बेहद दुखद और गमगीन खबर सामने आई है। बिरादरी के सम्मानित एवं नेकदिल शख्सियत हाजी महमूद हसन साहब का बुधवार 20 मई 2026 को कज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया। उनके इंतेकाल की खबर मिलते ही गांव समेत आसपास के इलाकों और बिरादरी में शोक की लहर दौड़ गई। हर आंख नम दिखाई दी और लोगों ने गहरे दुख के साथ मरहूम को याद किया।

"इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलैहि राजिऊन"

बताया गया कि हाजी महमूद हसन साहब बेहद मिलनसार, दीनदार और समाज से जुड़े हुए इंसान थे। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी लोगों के बीच मोहब्बत, भाईचारे और इंसानियत का पैगाम देने में गुजारी। उनके अच्छे अखलाक और सादगी की वजह से गांव और बिरादरी में उन्हें खास इज्जत की निगाह से देखा जाता था।

मरहूम अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं, जिनमें उनके चार बेटे मुश्ताक अहमद, अब्बास अहमद, आरिफ हसन और मुहम्मद नदीम शामिल हैं। इसके अलावा तीन बेटियां, नाती-पोते, रिश्तेदार और चाहने वालों की बड़ी तादाद आज गम में डूबी हुई है। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और पूरे गांव में मातमी माहौल बना हुआ है।

हाजी महमूद हसन साहब की मय्यत को बुधवार शाम मगरिब की नमाज के बाद गांव वाजिदपुर के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक कर दिया गया। जनाजे में बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत कर मरहूम को नम आंखों से आखिरी विदाई दी। लोगों ने उनकी मगफिरत और जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम के लिए दुआएं कीं।

इस मौके पर बिरादराना हजरात से अपील की गई कि मय्यत वालों के घर जाकर उन पर खाने-पीने का अतिरिक्त बोझ न बनें और गम के माहौल में हंसी-मजाक या गैर जरूरी बातों से परहेज करें। साथ ही जनाजे के दौरान मोबाइल फोन पर बातचीत या दुनियावी चर्चाओं से बचते हुए कलिमा तय्यबा “ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुर्र रसूल अल्लाह” का विर्द करते रहने की भी नसीहत की गई।

अल्लाह तआला मरहूम हाजी महमूद हसन साहब की मगफिरत फरमाए, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता करे और तमाम घरवालों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन सुम्मा आमीन।

ज्यादा जानकारी के लिए मुहम्मद इरशाद (पावी) लोनी गाजियाबाद के मोबाइल नंबर 8882118573 पर संपर्क किया जा सकता है।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज पोर्टल/यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए बागपत, उत्तर प्रदेश से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की विशेष रिपोर्ट।

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Tuesday, May 19, 2026

😭 बिरादरी पर टूटा ग़म का पहाड़ — दो घरों से उठीं मातम की सदाएं, नम आंखों के साथ कीजिए मगफिरत की दुआ 😭

पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी से आज दो बेहद अफ़सोसनाक और दिल को ग़मगीन कर देने वाली खबरें हासिल हुई हैं, जिनसे पूरे इलाके में रंजो-ग़म की लहर दौड़ गई। दोनों मरहूमीन अपने अच्छे अख़लाक, मिलनसारी और नेक सीरत की वजह से बिरादरी में खास पहचान रखते थे। उनके इंतेकाल की खबर सुनकर हर आंख अश्कबार है और लोग उनके लिए दुआ-ए-मगफिरत कर रहे हैं।

🕯️ जनाब कालू मिस्त्री साहब की अहलिया का इंतकाल

आप सभी बिरादराना हजरात को यह इत्तला दी जाती है कि आज दिन बुध बा-तारीख़ 20 मई 2026 को गांव पुसार जिला बागपत, उत्तर प्रदेश हाल बाशिंदे लोनी जिला गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश में जनाब कालू मिस्त्री साहब की अहलिया का कज़ा-ए-ईलाही से इंतेकाल हो गया।

मरहूमा के इंतकाल की खबर सुनते ही रिश्तेदारों, अजीज़ों और इलाके के लोगों में गहरा दुख फैल गया। बाद नमाज़ जौहर मैय्यत को किया जाएगा सपुर्द खाक, लिहाज़ा आप सभी हजरात भी जनाजे में शरीक होकर सवाबे दारेन हासिल करें 

अल्लाह तआला मरहूमा की मगफिरत फरमाए, उनकी कब्र को नूर से भर दे, कब्र की तमाम मंजिलों को आसान फरमाए और जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए।
अल्लाह पाक तमाम अहलेखाना को यह सदमा बर्दाश्त करने का हौसला दे और सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।

दफ़्न की दुआ:
“अल्लाहुम्मग़फिर लहा वरहम्हा व आफिहा वाफु अन्हा।”
ऐ अल्लाह! मरहूमा की मगफिरत फरमा, उन पर रहम फरमा, उन्हें आफियत अता फरमा और उनकी खताओं से दरगुज़र फरमा।


🕯️ सामाजिक कार्यकर्ता जनाब महमूद हसन साहब का इंतकाल

दूसरी ग़मगीन खबर कस्बा छपरोली जिला बागपत, उत्तर प्रदेश से हासिल हुई है, जहां बेहद मिलनसार, नेकदिल और सामाजिक कार्यकर्ता जनाब महमूद हसन साहब वल्द जनाब हाजी हकीमू साहब का कल दिन पीर बा-तारीख 18 मई 2026 को कज़ा-ए-ईलाही से इंतेकाल हो गया।

मरहूम अपने खुशमिजाज मिज़ाज, अच्छे अख़लाक और समाजी खिदमात की वजह से इलाके में खास मुकाम रखते थे। उनके इंतकाल से बिरादरी ने एक नेक इंसान और समाज ने एक हमदर्द शख्सियत को खो दिया है। जो भी उनसे मिला, उनके अख़लाक और मोहब्बत को कभी भूल नहीं पाएगा।

मैय्यत को आज दिन मंगल बा-तारीख 19 मई 2026 को सुबह कस्बा छपरोली के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया। लिहाज़ा तमाम हजरात से गुजारिश है कि मरहूम के लिए दुआ-ए-मगफिरत करें और सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

अल्लाह तआला मरहूम की मगफिरत फरमाए, उनकी कब्र को जन्नत के बागों में से एक बाग बनाए और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।

जनाज़े और दफ़्न की दुआ:
“अल्लाहुम्मा इन्ना फलाना फी जिम्मतिका व हब्लि जिवारिका फक़िहि मिन फित्नतिल क़ब्रि व अज़ाबिन्नार।”
ऐ अल्लाह! मरहूम को अपनी हिफाज़त और रहमत में जगह अता फरमा तथा कब्र और जहन्नम के अज़ाब से महफूज़ फरमा।


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Friday, May 15, 2026

💔 “एक और साया उठ गया… ”सोनीपत की सरज़मीं ने खो दिया बिरादरी का एक नेक, असरदार और मिलनसार बुज़ुर्ग


निहायत ही रंजो-ग़म के साथ आप सभी बिरादराना हजरात को यह इत्तिला दी जाती है कि गांव हुल्लाहेरी, जिला सोनीपत हरियाणा के मूल निवासी एवं हाल बाशिंदा ईदगाह कॉलोनी, सोनीपत हरियाणा जनाब हाजी अब्दुल लतीफ़ साहब का आज दिन शनिचर, 16 मई 2026 को कज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया। मरहूम की उम्र तकरीबन 95 साल बताई जा रही है।

मरहूम हाजी अब्दुल लतीफ़ साहब अपनी नेकदिली, मिलनसारी, शानदार अख़लाक़ और बिरादरी में मजबूत पकड़ रखने वाले बुज़ुर्गों में शुमार किए जाते थे। वह ऐसे इंसान थे जिनकी बात को लोग एहतराम से सुनते और मानते थे। उनके इंतेकाल की खबर से पूरे इलाके और बिरादरी में ग़म की लहर दौड़ गई है।

बताया गया है कि मय्यत को आज बाद नमाज़ असर सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम अहबाब और बिरादराना हजरात से गुजारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मगफिरत करें और सवाबे दारेन हासिल करें।

🤲 कब्र पर मिट्टी डालते वक्त पढ़ी जाने वाली दुआ

"मिन्हा खलक्नाकुम व फीहा नुईदुकुम व मिन्हा नुख्रिजुकुम तारतन उख़रा"

तर्जुमा:
“हमने तुम्हें इसी मिट्टी से पैदा किया, और इसी में तुम्हें लौटाएंगे, और इसी से दोबारा निकालेंगे।”

इसके बाद यह दुआ भी पढ़ी जाती है:

"अल्लाहुम्मग़फिर लहु वरहम्हु व आफिहि वाफु अन्हु"

तर्जुमा:
“ऐ अल्लाह! मरहूम की मगफिरत फरमा, उन पर रहम फरमा, उन्हें आफियत अता फरमा और उनकी खतााओं को माफ फरमा।”

अल्लाह तआला मरहूम हाजी अब्दुल लतीफ़ साहब की मगफिरत फरमाए, उनकी कब्र को जन्नत के बागों में से एक बाग बनाए और तमाम घरवालों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।

📞 ज्यादा जानकारी के लिए राब्ता करें:

- मोहम्मद इरफ़ान साहब (गौरीपुर वाले) — 9896263240
- मोहम्मद साजिद साहब (सोनीपत वाले) — 9896564786

🔹 पारिवारिक जानकारी 🔹

मरहूम हाजी लतीफ़ साहब के वालिद मोहतरम जनाब सिराजुद्दीन साहब थे। वह कुल 9 भाइयों में शामिल थे, जिनमें से इस वक्त दो भाई हयात हैं जबकि बाकी सभी भाई पहले ही इंतेकाल फरमा चुके हैं।

मरहूम अपने पीछे 4 लड़के, 3 लड़कियां, पौते-पोतियां, नाते-नातिन समेत बड़ा कुनबा और भरा-पूरा खानदान छोड़ गए हैं। उनके इंतेकाल से पूरे परिवार और बिरादरी में गहरा ग़म पाया जा रहा है।

✍️ सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज पोर्टल/यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए सोनीपत, हरियाणा से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट।

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