Friday, February 13, 2026

🌟 मुल्तानी बिरादरी के लिए ऐतिहासिक डिजिटल विरासत “मुल्तानी घराना” — शिजरे को डिजिटल अमानत बनाने की क्रांतिकारी पहल

अल्हम्दुलिल्लाह, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार–बढ़ई बिरादरी की देशव्यापी तंजीम “मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट (रजिस्टर्ड ऑल इंडिया)” ने एक ऐसा ड्रीम प्रोजेक्ट पेश किया है, जो आने वाली नस्लों के लिए एक बेशकीमती डिजिटल विरासत साबित होगा।

बिरादरी की जनगणना, फैमिली ट्री (शिजरा) और रिश्तों-नातों को सुव्यवस्थित व आसान बनाने के मक़सद से आधुनिक टेक्नोलॉजी के साथ “मुल्तानी घराना” सॉफ्टवेयर तैयार कराया गया है।


📌 एक स्थायी डिजिटल अमानत

इस क्रांतिकारी सॉफ्टवेयर को इस दूरअंदेशी सोच के साथ विकसित किया गया है कि बिरादरी के करोड़ों अफ़राद के आंकड़े हमेशा-हमेशा के लिए महफूज़ रह सकें।

ताकि आने वाली नस्लों को अपने खानदान का शिजरा तलाश करने के लिए दर-ब-दर भटकना न पड़े, बल्कि एक क्लिक पर उन्हें अपने बुजुर्गों की पहचान, रिश्तों की कड़ियां और पारिवारिक इतिहास मुकम्मल तौर पर मिल सके।

यह महज़ एक सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि बिरादरी की पहचान, एकता और इतिहास को डिजिटल दस्तावेज़ की शक्ल में सुरक्षित रखने का सुनियोजित और ऐतिहासिक कदम है।


💻 क्या कर सकेंगे आप?

  • अपने बड़े बुजुर्गों की तफ़सील और तस्वीरें सुरक्षित अपलोड
  • पूरे खानदान का डिजिटल शिजरा तैयार
  • रिश्तों की सही पहचान और आपसी कनेक्टिविटी आसान
  • मोबाइल, टैब, लैपटॉप या डेस्कटॉप से घर बैठे उपयोग

🚀 फिलहाल ट्रायल चरण में

इस प्रोजेक्ट को अभी ट्रायल के तौर पर शुरू किया गया है। बहुत जल्द इसके तमाम फीचर्स मुकम्मल तौर पर शुरू कर दिए जाएंगे। बिरादरी के अफ़राद से दरख्वास्त है कि इस ऐतिहासिक पहल का हिस्सा बनें और अपने सुझाव देकर इसे और मजबूत बनाएं।


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“मुल्तानी समाज” की टीम हर कदम पर आपकी रहनुमाई के लिए मौजूद है।


📖 यह विशेष रिपोर्ट
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पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार–बढ़ई बिरादरी को समर्पित
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✍️ ज़मीर आलम (प्रधान संपादक)

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Thursday, February 12, 2026

🕯️ बेहद अफ़सोसनाक… बिरादरी में दो इत्तेक़ाल, दिल अश्कबार 🕯️

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन… अहले मुस्लिम मुल्तानी लुहार, बढ़ई बिरादरी को निहायत रंज-ओ-ग़म के साथ इत्तिला दी जाती है कि बीती रात बरोज़ जुमेरात, 12 फ़रवरी 2026 को हमारी बिरादरी में दो ग़मगीन इत्तेक़ाल हुए, जिनकी खबर ने हर दिल को मायूस कर दिया।


🌙 पहला इत्तेक़ाल – ज़िला बागपत / सहारनपुर (उत्तर प्रदेश)

जनाब मोहम्मद यूसुफ़ ख़ान वल्द जनाब मोहम्मद मोहम्मद ख़ान साहब के फ़रज़ंद का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।
मरहूम मूल रूप से ढिकाना के रहने वाले थे और वर्तमान में बड़ौत, बड़का रोड, सरकारी स्कूल के पीछे (ज़िला बागपत, उत्तर प्रदेश) में निवास कर रहे थे।

  • 🗓️ इंतिक़ाल: 12 फ़रवरी 2026 (बरोज़ जुमेरात)
  • ⏰ वक़्त: करीब 11:00 बजे रात
  • 🕌 नमाज़-ए-जनाज़ा व तदफ़ीन: 13 फ़रवरी 2026 (बरोज़ जुमे) सुबह 10:00 बजे
  • 📍 मुक़ाम: स्थानीय क़ब्रिस्तान, बड़ौत

बिरादराना गुज़ारिश है कि आप हज़रात जनाज़े में शरीक होकर सवाब-ए-दारैन हासिल करें और मरहूम के हक़ में दुआ-ए-मग़फ़िरत फरमाएँ।


🌙 दूसरा इत्तेक़ाल – मोहल्ला कोटला शेर अली, क़स्बा गंगोह (ज़िला सहारनपुर)

मोहल्ला कोटला शेर अली मस्जिद, क़स्बा गंगोह (ज़िला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश) में जनाब राशिद साहब की अहलिया और भाई खुरैद की वालिदा का भी क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया है।

  • 🗓️ इंतिक़ाल: 12 फ़रवरी 2026
  • 🕌 नमाज़-ए-जनाज़ा: दोपहर 1:15 बजे, अशरफ-उल-उलूम बड़ा मदरसा
  • ⚰️ तदफ़ीन: इमाम साहब क़ब्रिस्तान, गंगोह

तमाम बिरादरान से इल्तिज़ा है कि जनाज़े में शिरकत कर मरहूमा के लिए मग़फ़िरत और जन्नतुल फ़िरदौस की दुआ करें।


🤲 दुआ

अल्लाह तआला मरहूम/मरहूमा की मग़फ़िरत फरमाए, उनकी क़ब्र को रौशन और वसीअ करे, जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता करे और अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।


📋 बिरादरी रिकॉर्ड हेतु आवश्यक विवरण

“मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के रिकॉर्ड में पूर्ण जानकारी दर्ज की जाती है, जो बिरादराना एतबार से भविष्य में काम आ सकती है।
कृपया निम्न विवरण उपलब्ध कराएँ:

  • इंतिक़ाल कब और कहाँ हुआ
  • पूरा आवासीय पता
  • वालिद का नाम
  • उम्र
  • कुल औलादें व बेटों की संख्या
  • कोई विशेष पहचान (डॉक्टर, मास्टर, मैकेनिक, इंजीनियर, नेता, दस्तकार, पत्रकार, उद्योगपति आदि)
  • तदफ़ीन का स्थान व समय
  • नज़दीकी वारिस का संपर्क नंबर
  • खबर देने वाले का नाम, पता व दूरभाष
  • कोई आख़िरी तस्वीर (यदि उपलब्ध हो)

यदि हमारे ग्रुप में पहले भी खबर प्रसारित हुई हो तो तारीख़ और नाम बताने पर रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जा सकता है।


📢 महत्वपूर्ण सूचना

यह सेवा मुस्लिम मुल्तानी लुहार-बढ़ई बिरादरी के लिए ज़मीर आलम साहब की ओर से निःशुल्क है।

बिरादरी के सुख-दुख की खबरें
“मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के ग्रुप में प्रेषित करें।

सरकारी पुष्टि नहीं की जाएगी और न ही कोई सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा।


📰 डिस्क्लेमर (Disclaimer)

पत्रिका में प्रकाशित लेख, समाचार, संपादकीय, विचार, टिप्पणी, प्रेस विज्ञप्ति या विज्ञापन लेखक/विज्ञापनदाता के व्यक्तिगत विचार हैं। संपादक, प्रकाशक या प्रबंधन उनसे अनिवार्य रूप से सहमत हों यह आवश्यक नहीं।

सामग्री की सत्यता एवं दावों के लिए लेखक/विज्ञापनदाता स्वयं उत्तरदायी होंगे। पत्रिका एवं प्रबंधन किसी भी प्रकार की कानूनी, सामाजिक या वित्तीय जिम्मेदारी से पूर्णतः मुक्त रहेंगे।

किसी भी विवाद या न्यायिक कार्यवाही की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।


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“मुल्तानी समाज” के लिए
ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट

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अल्लाह तआला हम सबको सब्र, हिम्मत और नेकी की राह पर कायम रखे। 🤲

Tuesday, February 10, 2026

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन, हाजी अब्दुल अज़ीज़ (कुतुबगढ़ वाले) का इंतकाल – बिरादरी का एक साया उठ गया

निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराने इस्लाम को इत्तला दी जाती है कि आज बरोज़ बुधवार, तारीख़ 11 फ़रवरी 2026 को मोहल्ला रेत्ती, मेन रोड, क़स्बा थानाभवन, जिला शामली (उत्तर प्रदेश) के मक़ीम हाजी अब्दुल अज़ीज़ वल्द जनाब अलीमुद्दीन साहब (मरहूम), उम्र तक़रीबन 87 साल, क़ज़ा-ए-इलाही से इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत हो गए।

मरहूम का ताल्लुक़ कुतुबगढ़ वालों से था और वह अपनी नेक सीरत, ख़ुलूस, इबादतगुज़ारी और बिरादरी में मोहब्बत व हमदर्दी के लिए जाने जाते थे। उनका इंतकाल यक़ीनन अहल-ए-ख़ाना ही नहीं बल्कि पूरे खानदान और इलाके के लिए गहरा सदमा है।


🏠 पसमांदगान ( ग़मजदा फैमिली )

मरहूम अपने पीछे ग़मगीन खानदान छोड़ गए हैं, जिनमें:

  • बड़े भाई हाजी अब्दुल हमीद साहब (मरहूम)
  • जनाब अब्दुल हाफ़िज़ साहब (मरहूम)
  • सबसे छोटे भाई जनाब अब्दुल रहीम (हयात)
  • एक बहन जमशीदा बी (मरहूमा) अहलिया जनाब मोहम्मद इस्लामुद्दीन साहब (थानाभवन)

औलाद में:

  • जनाब मोहम्मद असलम
  • हाफ़िज़ मोहम्मद अफ़ज़ल
  • मोहम्मद अकरम
  • आस मोहम्मद

और दो साहिबज़ादियां:

  • फरजाना बी, अहलिया हाफ़िज़ शरीफ़ अहमद (गढ़ी पुख़्ता)
  • मुबबशरा बी, अहलिया मोहम्मद इरफ़ान (चरथावल)

इसके अलावा पौते-पोतियां, नाती-नातिनें और तमाम अज़ीज़-ओ-अक़ारिब इस सदमे में ग़मगीन हैं।


🕌 नमाज़-ए-जनाज़ा व तदफीन

मरहूम की मय्यत को आज बाद नमाज़ ईसा ठीक साढ़े 7 बजे चरथावल बस स्टैंड से आगे गोरे ग़रीबा कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम अहबाब से दरख़्वास्त है कि नमाज़-ए-जनाज़ा में शरीक होकर सवाब-ए-दारेन हासिल करें और मरहूम के हक़ में दुआ-ए-मग़फ़िरत करें।


📞 मालूमात के लिए राब्ता

मय्यत से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए मरहूम के भतीजे
मोहम्मद साजिद
📱 9152561843
से राब्ता कायम करें।


🤲 दुआ

अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए, उनके दर्जात बुलंद फ़रमाए और तमाम घर वालों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए।
आमीन या रब्बुल आलमीन।

🕊️ मरहूम मुहम्मद हसन साहब का इंतेकाल — मुल्तानी बिरादरी में ग़म की लहर

अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार–बढ़ई बिरादरी को बड़े ही रंज-ओ-ग़म के साथ इत्तिला दी जाती है कि दिल्ली के मंगोलपुरी में रह रहे जनाब हाजी बशीर साहब (अस्ल निवासी कस्बा छपरौली, ज़िला बागपत, उत्तर प्रदेश) के सुपुत्र मरहूम मुहम्मद हसन साहब (उम्र 70 वर्ष) का बीती शाम, 10 फ़रवरी 2026 बरोज़ मंगल, मंगोलपुरी (दिल्ली) में इंतेकाल हो गया।

इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलैहि राजिऊन।
अल्लाह की मर्ज़ी के आगे सब सर झुकाते हैं।

मरहूम के पीछे तीन बेटे और अहल-ए-ख़ाना ग़मगीन हालत में मौजूद हैं। बिरादरी के लिए यह खबर गहरे दुख का सबब बनी है। मरहूम अपने सादगी भरे स्वभाव, मिलनसार मिज़ाज और बिरादरी से जुड़ाव के लिए जाने जाते थे।

🕌 दफ़ीने की जानकारी

मिली जानकारी के मुताबिक, मय्यत को आज 11 फ़रवरी 2026, बरोज़ बुध, सुबह 10:30 बजे
दिल्ली, मंगोलपुरी Y-ब्लॉक कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम बिरादराने इस्लाम से दरख़्वास्त है कि जनाज़े में शिरकत कर सवाब-ए-दारैन हासिल करें और मरहूम के लिए मग़फ़िरत की दुआ करें।


🤲 दुआ-ए-मग़फ़िरत

हम अल्लाह तआला से दुआ करते हैं कि मरहूम मुहम्मद हसन साहब को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए, उनकी मग़फ़िरत फ़रमाए, कब्र को रौशन और वसीअ करे, और अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता करे।
आमीन। सुम्मा आमीन।


⚠️ अहम् हिदायात (अदब और एहतराम के साथ)

ग़म के इस माहौल में बिरादरी के तमाम अफ़राद से गुज़ारिश है कि:

  • मय्यत वालों के घर जाकर हंसी-मज़ाक से परहेज़ करें और ग़मगीन माहौल का लिहाज़ रखें।
  • पान, बीड़ी, सिगरेट, गुटखा या तंबाकू वगैरह का इस्तेमाल न करें।
  • मय्यत वालों के घर खाना खाने का बोझ न बनें।
  • जनाज़े के पीछे चलते हुए फ़ोन पर बातें न करें; अव्वल कलिमा पढ़ने का एहतिमाम करें।

📞 मरहूम के बारे में और मालूमात के लिए: 8882071608


📢 एक ज़रूरी ऐलान — इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम् हिदायतें

अक्सर देखा गया है कि किसी अज़ीज़ के इंतेकाल की खबर देर से या अधूरी जानकारी के साथ पहुंचती है, जिसकी वजह से लोग जनाज़े में शिरकत नहीं कर पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से दरख़्वास्त करती है कि इंतेकाल की खबर भेजते वक्त इन बातों का खास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ अस्ल व मौजूदा पता।
3️⃣ दफ़ीने का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार अफ़राद के एक-दो मोबाइल नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतेकाल हुआ है तो मरहूम की तस्वीर शामिल करें।
6️⃣ इंतेकाल की वजह (अगर मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम — जैसे भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वग़ैरह।

👉 मुकम्मल जानकारी से खबर सही और वक़्त पर बिरादरी तक पहुंचेगी।


📰 सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए अलीहसन मुल्तानी की खास रिपोर्ट।

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अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए और बिरादरी को इत्तेहाद व सब्र की तौफ़ीक़ अता करे। 🤲

Monday, February 9, 2026

🕊️ इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन 🕊️सरधना की नई बस्ती से उठी एक ग़मगीन ख़बर – इमरान मिर्ज़ा का इंतिक़ाल

बड़े रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराने इस्लाम को यह दुखद इत्तिला दी जाती है कि नई बस्ती, मोहल्ला मंडी चमारान, कस्बा सरधना, ज़िला मेरठ (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले, जनाब मिर्ज़ा अमीर हसन (छाबड़िया वालों) के छोटे साहबज़ादे इमरान मिर्ज़ा (उम्र लगभग 35 वर्ष) का चार दिन से जारी इलाज के दौरान अस्पताल में इंतिक़ाल हो गया।

मरहूम, लियाक़त मिर्ज़ा के छोटे भाई थे।

मरहूम इमरान मिर्ज़ा की तदफ़ीन आज, 10 फ़रवरी 2026, बरोज़ मंगलवार, नमाज़-ए-मगरिब के बाद, बिनोली रोड स्थित कब्रिस्तान में अमल में लाई जाएगी।
तमाम अहले-ईमान से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फ़रमाकर सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनके दरजात बुलंद करे और उन्हें जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए। आमीन।
अल्लाह तआला अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए।


📝 एक ज़रूरी ऐलान

इंतिक़ाल की ख़बर भेजते वक़्त अहम हिदायतें

अक्सर देखने में आता है कि किसी अज़ीज़ के इंतिक़ाल की ख़बर बिरादरी तक देर से पहुँचती है या अधूरी मालूमात की वजह से लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस अहम कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से अदब के साथ गुज़ारिश करती है कि जब भी इंतिक़ाल की ख़बर भेजी जाए, तो इन बातों का ख़ास ख़्याल रखा जाए:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या (औरत के लिए) शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता — मूल निवास और मौजूदा रहने की जगह।
3️⃣ तदफ़ीन का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार शख़्स (एक-दो) के संपर्क नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतिक़ाल हुआ हो तो मरहूम की तस्वीर।
6️⃣ इंतिक़ाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम — जैसे माँ-बाप, भाई-बहन, औलाद वग़ैरह।

👉 इन तमाम मालूमात से ख़बर मुकम्मल होती है और बिरादरी के लोगों तक सही वक़्त पर सही जानकारी पहुँचती है।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
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✍️ महताब मिर्ज़ा की ख़ास रिपोर्ट

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Friday, February 6, 2026

🌹✨ ख़ुशी, बरकत और दुआओं का पैग़ाम — मुल्तानी खानदान में तय हुआ नेक रिश्ता ✨🌹

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम, अस्सलातु वस्सलामु अलैका या रसूलल्लाह ﷺअल्लाह तआला के फ़ज़्ल-ओ-करम से, हुज़ूर-ए-अकरम ﷺ के सदक़े तुफ़ैल, गौस-ओ-ख़्वाजा और आला हज़रत रज़ा के वसीले से, मुल्तानी बिरादरी के लिए यह बेहद मस्रूरकुन और मुबारक मौक़ा है कि एक पाक और नेक रिश्ता तय पाया है।

हाजी अब्दुल शकूर साहब की पोती और हाजी अब्दुल रहीम साहब की नेक दुख़्तर का निकाह, पूरे ख़ानदानी मशवरे और खुशी के साथ तय हो गया है। यह रिश्ता न सिर्फ़ दो घरानों को जोड़ रहा है, बल्कि मोहब्बत, एहतराम और दीनी रिवायतों की एक खूबसूरत मिसाल भी पेश कर रहा है।

🌸 दुल्हन

हज्जन ज़ीनत बानो
बिन्ते जनाब हाजी अब्दुल रहीम जी
(मोटियार कोटड़ी – पारोली वाले)

🌸 दूल्हा

मोहम्मद फ़ुरक़ान
इब्ने मरहूम क़ाबिल हुसैन
(डडियाल पितास वाले, भवानी नगर, भीलवाड़ा)

💍 तक़रीब-ए-निकाह

29 शव्वाल 1448 हिजरी
18 अप्रैल 2026, दिन शनिचर
बाद नमाज़-ए-असर — इंशाअल्लाह

इस मुबारक मौके पर तमाम बिरादराने अहले मुल्तानी से ख़ास गुज़ारिश है कि इस पाक तक़रीब-ए-निकाह में तशरीफ़ लाकर जश्न-ए-शादी की रौनक़ बढ़ाएं और दूल्हा-दुल्हन को अपनी ख़ुलूस भरी दुआओं से नवाज़ें।

🌹 सरपरस्त

हाजी अब्दुल शकूर साहब

🌹 अल मुकल्लेफ़ीन

अब्दुल गफूर जी, हाजी मोहम्मद हुसैन, अब्दुल हक़, मोहम्मद फारुख

🌹 अददाईन

हाजी अब्दुल रहीम जी, हाजी अब्दुल करीम जी, हाजी अब्दुल क़ादिर जी,
अब्दुल सत्तार जी, अब्दुल मंज़ूर जी

🌹 चश्मे बराह

अब्दुल रहूफ, अब्दुल क़ादिर, मोहम्मद अली, अब्दुल क़य्यूम, अहमद अली,
सद्दाम हुसैन, मोहसीन अली, मोहम्मद शाहरुख, शाकिर हुसैन,
मोहम्मद हुसैन एवं अहले मोटियार ख़ानदान, पारोली

🌹 लख़्ते जिगर

अहमद नूर, मोहम्मद आमीन, मोहम्मद ओवैस, मोहम्मद नूर,
मोहम्मद इब्राहीम, मोहम्मद बिलाल, नियामत अली,
शौकत अली, आज़म अली, ओवैस रज़ा, मोहम्मद हाशिम

🌹 नन्ही इल्तिज़ा

शहनाज़ बानो, सुल्ताना बानो, इरम फ़ातिमा, नूरीन फ़ातिमा,
नाज़िया नूर, अफ़साना नूर, नूर फ़ातिमा —
मेरी फुफ्फी की शादी में जलूल-जलूल तशरीफ़ लाएं

📍 पता

ईदगाह के सामने, जहाजपुर रोड, कोटड़ी, भीलवाड़ा

फर्म: गरीब नवाज़ वेल्डिंग वर्क्स, कोटड़ी
📞 9785391427 | 8058370436


🤲 दुआ

अल्लाह तआला इस निकाह को दोनों परिवारों के लिए सरापा बरकत बनाए,
दूल्हा-दुल्हन को इत्तेहाद, मोहब्बत और आफ़ियत अता फरमाए,
और उनकी ज़िंदगी को दीन व दुनिया की कामयाबियों से भर दे।
आमीन या रब्बुल आलमीन।


✍️ ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट
पत्रिका: “मुल्तानी समाज”
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Thursday, February 5, 2026

मुस्लिम मुल्तानी लोहार–बढ़ई बिरादरी मेहनत, हुनर और हिजरत से बनी एक पहचान (भारत में फैलाव की रिवायती कहानी – राज्यवार पूर्वजों के हवाले से)

मुस्लिम मुल्तानी लोहार–बढ़ई बिरादरी की कहानी सिर्फ़ लोहे, लकड़ी या औज़ारों की नहीं है,

यह कहानी है मेहनत की इबादत, हुनर की विरासत और हिजरत के सब्र की।

हमारे बुज़ुर्गों ने सिर्फ़ औज़ार नहीं गढ़े,
उन्होंने अपनी पेशानी के पसीने से समाज में इज़्ज़त, रोज़गार और भरोसे की बुनियाद रखी।
वक़्त बदला, ज़रूरतें बदलीं, मगर कारीगरी और ईमानदारी की रूह वही रही।

मुल्तान की सरज़मीं से निकलकर यह बिरादरी
रोज़ी-रोटी, कारीगरी की मांग और सामाजिक हालात के चलते
हिंदुस्तान के अलग-अलग हिस्सों तक पहुँची।

यह लेख उसी सफ़र को समझने और समझाने की एक अदना-सी कोशिश है।


⚠️ एक ज़रूरी दीनि व हक़ीक़ी वज़ाहत

यहाँ लिखे गए तमाम नाम
रिवायत, इलाक़ाई पहचान और बुज़ुर्गों से चली आ रही बातें हैं।

➡️ यह किसी भी खानदान के लिए अंतिम या क़तई नसब का दावा नहीं है।
हर परिवार का असली शजरा
उसके अपने परदादा, पर-परदादा और प्रमाणित सिलसिले से ही तय होता है।

इस्लाम बिना सबूत नसब जोड़ने की इजाज़त नहीं देता —
और इसी उसूल की पूरी पाबंदी यहाँ रखी गई है।


पंजाब (भारत)

भारत में प्रवेश का पहला पड़ाव

रिवायतों के मुताबिक़
मुल्तान से भारत में दाख़िल होने का पहला बड़ा इलाक़ा पंजाब रहा।
यहीं से मुल्तानी लोहार–बढ़ई बिरादरी ने
अपने हुनर को ज़मीन दी और पहचान पाई।

बुज़ुर्गों में
शेख़ मुल्तान शाह और शेख़ इस्माईल मुल्तानी
के नाम लिए जाते हैं।
लोहे से जुड़ी कारीगरी ने यहीं से मज़बूत शक्ल अख़्तियार की।


राजस्थान

कारीगरी से बनी पहचान

बीकानेर, नागौर, जयपुर और मेवाड़ जैसे इलाक़ों में
मुल्तानी बिरादरी का फैलाव
कारीगरों की क़द्र करने वाली रियासतों से जुड़ा बताया जाता है।

यहाँ
शेख़ सुल्तान अहमद मुल्तानी
और शेख़ बदरुद्दीन मुल्तानी
से जुड़ी रिवायतें मिलती हैं।

राजपूताना दौर में
हुनरमंद हाथ हमेशा इज़्ज़त के साथ देखे गए।


पश्चिमी उत्तर प्रदेश

मज़बूत सामाजिक जड़ें

मेरठ, मुज़फ़्फ़रनगर, शामली, सहारनपुर और बिजनौर
आज भी मुल्तानी लोहार–बढ़ई बिरादरी के
मज़बूत केंद्र माने जाते हैं।

इस फैलाव को
शेख़ क़ासिम मुल्तानी
और शेख़ हबीबुल्लाह मुल्तानी
से जोड़ा जाता है।

यह इलाक़ा
आज भी बिरादरी की सामाजिक, शैक्षिक और पारिवारिक पहचान का गढ़ है।


हरियाणा

मेहनत और रोज़गार का विस्तार

रोहतक, झज्जर, मेवात, सोनीपत और पानीपत
जैसे क्षेत्रों में
मुल्तानी कारीगरों ने खेती और औज़ार निर्माण को अपनाया।

रिवायतों में
शेख़ फ़ज़ल करीम मुल्तानी
और शेख़ नसीरुद्दीन मुल्तानी
के नाम सामने आते हैं।


उत्तराखंड

मैदानों से पहाड़ों तक

हरिद्वार, रुड़की और देहरादून के आसपास
मुल्तानी बिरादरी का पहुँचना
मैदानी इलाक़ों से रोज़गार की तलाश का नतीजा माना जाता है।

यहाँ
शेख़ याक़ूब मुल्तानी
का नाम बुज़ुर्गों की रिवायतों में लिया जाता है।


दिल्ली

शाही दौर और कारीगर

मुग़ल दौर में दिल्ली
हुनरमंद कारीगरों का बड़ा मरकज़ थी।
शहर की तामीर और रोज़मर्रा की ज़रूरतों में
लोहार-बढ़ई की अहम भूमिका रही।

यहाँ
शेख़ सुल्तान अहमद मुल्तानी
और शेख़ हबीबुल्लाह मुल्तानी
से जुड़ी बसावट की बातें मिलती हैं।


गुजरात

व्यापार और हुनर का संगम

अहमदाबाद और सूरत जैसे शहरों में
मुल्तानी बिरादरी का पहुँचना
व्यापार और औज़ार निर्माण से जोड़ा जाता है।

यहाँ
शेख़ क़ासिम मुल्तानी
का नाम रिवायती तौर पर लिया जाता है।


मध्य प्रदेश

मध्य भारत में बसावट

मालवा क्षेत्र, भोपाल और इंदौर के आसपास
उत्तर भारत से आए कारीगरों की बसावट मानी जाती है।

यहाँ
शेख़ नसीरुद्दीन मुल्तानी
और शेख़ बदरुद्दीन मुल्तानी
के नाम प्रचलित हैं।


नतीजा : सच के साथ पहचान

यह पूरी तहरीर
इतिहास, रिवायत और बुज़ुर्गों की बताई बातों पर आधारित है —
न कि किसी एक खानदान के लिए अंतिम नसब।

इसी उसूल पर चलते हुए
“मुल्तानी घराना (SIR – Social Information Register)”
की शुरुआत की जा रही है,
ताकि हर राज्य, हर ज़िला और हर परिवार
अपना अलग, सही और प्रमाणित शजरा
आने वाली नस्लों के लिए महफूज़ कर सके।

अपनी जड़ों को सच के साथ जानना ही असली पहचान है।


✍️ मुल्तानी समाज पत्रिका के लिए

ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित
पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार–बढ़ई बिरादरी को समर्पित
देश की एकमात्र पत्रिका — “मुल्तानी समाज”

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