Thursday, March 19, 2026

📰 देवबंद से अहम ऐलान: देश में नहीं दिखा शव्वाल का चांद, 21 मार्च को मनाई जाएगी ईद उल फितर

देवबंद से एक महत्वपूर्ण और विश्वसनीय खबर सामने आई है। देशभर में शव्वाल का चांद नजर नहीं आने की पुष्टि के बाद अब ईद उल फितर का त्योहार शनिवार, 21 मार्च 2026 को मनाया जाएगा।

दारुल उलूम देवबंद समेत विभिन्न इस्लामिक संगठनों ने शरई उसूलों के अनुसार चांद न दिखने का ऐलान किया है। इसके साथ ही यह भी बताया गया है कि शुक्रवार को अलविदा जुमा अदा किया जाएगा, जिसके बाद देशभर में ईद का त्योहार पूरे एहतराम और अकीदत के साथ मनाया जाएगा।

यह फैसला इस्लामी परंपराओं और चांद देखने की प्रक्रिया के तहत लिया गया है, ताकि मुस्लिम समाज में किसी प्रकार का भ्रम न रहे और सभी लोग एक ही दिन त्योहार मना सकें। हर साल की तरह इस बार भी चांद दिखने या न दिखने के आधार पर ईद की तारीख तय की गई है।

मुस्लिम समाज में ईद उल फितर का विशेष महत्व है। यह रमजान के मुकद्दस महीने के बाद खुशियों, भाईचारे और इंसानियत का पैगाम लेकर आती है। इस मौके पर लोग नमाज अदा करते हैं, जरूरतमंदों की मदद करते हैं और आपसी मोहब्बत को बढ़ावा देते हैं।

देशभर के उलेमा और जिम्मेदार लोग भी यही अपील कर रहे हैं कि ईद के मौके पर अमन, भाईचारा और अनुशासन बनाए रखें तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।


📍 रिपोर्ट: ज़मीर आलम (उत्तर प्रदेश / नई दिल्ली)
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⚠️ डिस्क्लेमर (Disclaimer):

यह लेख विश्वसनीय स्रोतों और संबंधित इस्लामिक संस्थाओं के आधिकारिक ऐलानों के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना है। किसी भी प्रकार की धार्मिक भावना को आहत करना या भ्रामक जानकारी देना हमारा उद्देश्य नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी निर्णय से पहले स्थानीय आधिकारिक घोषणा की पुष्टि अवश्य करें।



Wednesday, March 18, 2026

उज्जैन से दुखद खबर: बातुल बी का इंतकाल, बिरादरी में शोक की लहर

उज्जैन (मध्य प्रदेश) से एक बेहद दुखद और अफसोसनाक खबर सामने आई है। अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार व बढ़ई बिरादरी के लिए बड़े रंज और ग़म का मौका है। मरहूम जनाब अब्दुल रज़्ज़ाक़ भट्टी साहब (उज्जैन) की जोजा, मरहूमा बातुल बी का आज बरोज़ जुमेरात, 19 मार्च 2026 को क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया।

यह खबर सुनते ही पूरे इलाके और बिरादरी में ग़म की लहर दौड़ गई। मरहूमा अपने पीछे एक बड़ा कुनबा और चाहने वालों को छोड़कर रुख़्सत हो गईं। उनके इंतकाल से परिवार ही नहीं, बल्कि समाज में भी एक गहरा खालीपन महसूस किया जा रहा है।

अल्लाह तआला से दुआ है कि मरहूमा की मगफिरत फरमाए, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मक़ाम अता करे और तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।


📌 मय्यत से संबंधित जानकारी

मय्यत के सिलसिले में अधिक जानकारी के लिए आप
मोहम्मद साबिर मुल्तानी से मोबाइल नंबर 9827042292 पर संपर्क कर सकते हैं।


✍️ ख़ास रिपोर्ट

उज्जैन, मध्य प्रदेश से
पत्रकार: ज़मीर आलम


🌐 प्रकाशन

यह खबर “मुल्तानी समाज” — एक राष्ट्रीय स्तर की समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल — के लिए तैयार की गई है, जो देश की राजधानी दिल्ली से संचालित है और मुल्तानी लोहार व बढ़ई बिरादरी की आवाज़ को राष्ट्रीय स्तर पर मंच प्रदान करती है।

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Tuesday, March 17, 2026

नम आँखों से दी गई अंतिम विदाई: उद्योगपति व समाजसेवी अब्दुल कय्यूम का इंतकाल, शहर में शोक की लहर

मुजफ्फरनगर। शहर के जाने-माने उद्योगपति एवं वरिष्ठ समाजसेवी जनाब अब्दुल कय्यूम साहब के इंतकाल की खबर से पूरे क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त हो गया। उन्होंने 17 मार्च 2026, दिन मंगलवार को क़ज़ा-ए-इलाही से रुख़्सत फरमाया। जानकारी के अनुसार, पानीपत (हरियाणा) के एक निजी अस्पताल में उन्होंने शाम लगभग साढ़े 6 बजे आखिरी सांस ली।

मरहूम के पार्थिव शरीर को रात करीब 9 बजे मुजफ्फरनगर स्थित उनके आवास पर लाया गया। चूंकि रात अधिक हो चुकी थी और रमज़ान का पाक महीना भी चल रहा है, इसलिए परिजनों ने आपसी मशविरा कर सुपुर्द-ए-ख़ाक का समय अगले दिन, 18 मार्च 2026 (बुधवार) सुबह 10 बजे निर्धारित किया।

हालांकि रात गहरी होने के बावजूद, उनके चाहने वालों का हुजूम देर रात तक उनके आवास पर मौजूद रहा। बताया जाता है कि रात करीब 2 बजे तक लोग लगातार पहुंचकर मरहूम को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश करते रहे। सुबह फज्र की नमाज़ के बाद से ही रिश्तेदारों, मित्रों और शहर की जानी-मानी हस्तियों का तांता लगना शुरू हो गया।

सुपुर्द-ए-ख़ाक के समय का दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था। हजारों की संख्या में लोग—जिनमें महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल थे—कब्रिस्तान पहुंचे और नम आंखों से अब्दुल कय्यूम साहब को अंतिम विदाई दी। हर आंख नम थी और हर ज़ुबान उनकी नेकियों और सामाजिक सेवाओं को याद कर रही थी।

जनाब अब्दुल कय्यूम साहब न सिर्फ एक सफल उद्योगपति थे, बल्कि एक दरियादिल इंसान और समाज के लिए समर्पित व्यक्तित्व भी थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में अनेक सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और जरूरतमंदों की मदद को हमेशा प्राथमिकता दी। उनके इंतकाल से समाज ने एक ऐसी शख्सियत को खो दिया है, जिसकी भरपाई कर पाना आसान नहीं होगा।

अल्लाह तआला मरहूम को जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए और उनके परिजनों को सब्र-ए-जमील अता करे। आमीन।


(यह रिपोर्ट उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। समाचार का उद्देश्य केवल सूचनात्मक है और इसमें पूर्ण संवेदनशीलता व सम्मान बनाए रखा गया है।)

📍 रिपोर्ट: प्रधान संपादक ज़मीर आलम
📍 स्थान: मुजफ्फरनगर / नई दिल्ली

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🕊️ गहरे रंज-ओ-ग़म के साथ: मशहूर उद्योगपति जनाब अब्दुल कय्यूम साहब का इंतकाल, एक दौर का ख़ात्मा

मुजफ्फरनगर/उत्तर प्रदेश डेस्क से।

इंतिहाई अफ़सोस और दुख के साथ यह खबर दी जाती है कि प्रसिद्ध उद्योगपति, कई राष्ट्रीय स्तर के बिज़नेस अवॉर्ड से सम्मानित शख्सियत जनाब अब्दुल कय्यूम साहब (85 वर्ष) वल्द जनाब हाजी अमीर हसन साहब (मरहूम) का आज बरोज मंगल, बा - तारीख़ 17 मार्च 2026 को शाम तक़रीबन 6:30 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम अपने पीछे एक समृद्ध विरासत और मिसाल छोड़ गए हैं। वह अपने वालिद के घराने में पैदा हुए, जहां पाँच भाई और दो बहनों में सबसे बड़े थे। अपने जीवनकाल में उन्होंने मेहनत, दूरदर्शिता और सादगी के साथ उद्योग जगत में वह मुकाम हासिल किया, जिसे आज भी इज्जत और एहतराम के साथ याद किया जाता है।

कोल्हू और क्रेशर उद्योग से शुरुआत कर, सल्फर (मिनी शुगर मिल) के क्षेत्र में उन्होंने एक अलग पहचान बनाई और बाद में पेपर मिल उद्योग में भी कामयाबी हासिल की। एक समय ऐसा भी रहा जब देश के कई राज्यों में उनकी पहचान और कारोबार का डंका बजता था।

उनकी शख्सियत की सबसे खास बात उनकी सादगी और विनम्रता थी। कई बार राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होने और बड़े-बड़े उद्योगपतियों, नेताओं व मंत्रियों से करीबी संबंध होने के बावजूद, उन्होंने हमेशा खुद को दिखावे और प्रचार से दूर रखा। खबरों में आने से बचते हुए वे अक्सर मीडिया से भी विनम्रता के साथ दूरी बनाए रखते थे।

मरहूम अपने पीछे अपनी अहलिया, बेटियों—राबिया बी, सायरा बी, शारदा बी, हीना बी (मरहूमा ), शबाना बी, हुस्ना बी और नाज़िया बी—और बेटे साजिद समेत पौते-पोतियों, नाते-नातिनों और पूरे खानदान को ग़मगीन छोड़ गए हैं।

👉 जनाज़े की जानकारी:
मरहूम को अनुमानतः कल बरोज बुध, 18 मार्च 2026 को सुबह 10:00 बजे सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम अहबाब और जानने वालों से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

🤲 अल्लाह तआला से दुआ है कि मरहूम की मग़फिरत फरमाए, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता करे और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।


रिपोर्ट: ज़मीर आलम
प्रकाशन: मुल्तानी समाज (राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज़ पोर्टल व यूट्यूब चैनल)

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📌 नोट: मय्यत से संबंधित अधिक जानकारी के लिए संपादक ज़मीर आलम जी से दिए गए नंबर पर संपर्क किया जा सकता है।

🕊️ इंतिहाई रंज-ओ-ग़म के साथ: जनाब मोहम्मद इलयास साहब का इंतकाल, इलाके में शोक की लहर

बड़ौत/बागपत (उत्तर प्रदेश)।अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी के लिए आज का दिन गहरे दुख और अफ़सोस का पैग़ाम लेकर आया। बड़े ही अदब और रंज के साथ यह इत्तला दी जाती है कि जनाब मोहम्मद इलयास साहब वल्द जनाब अमीरुल्लाह साहब (मरहूम), असल निवासी गांव बुढपुर (जिला बागपत) तथा हाल मुकाम मोहल्ला पठानकोट, क़स्बा बड़ौत (गोल मस्जिद के सामने वाली गली), का आज मंगलवार, 17 मार्च 2026 को शाम लगभग 5:15 बजे इंतकाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम के इंतकाल की खबर से पूरे क्षेत्र और बिरादरी में शोक की लहर दौड़ गई है। लोग ग़मगीन दिल के साथ उनके घर पहुंचकर परिजनों को तसल्ली दे रहे हैं। मरहूम अपने नेक अख़लाक, मिलनसार स्वभाव और समाज के प्रति सकारात्मक योगदान के लिए जाने जाते थे। उनका इस तरह अचानक रुख़्सत हो जाना, परिवार और जानने वालों के लिए एक बड़ा सदमा है।

अल्लाह तआला से दुआ है कि मरहूम को जन्नतुल फिरदौस में आला मकाम अता फरमाए, उनकी मग़फिरत फरमाए और अहल-ए-ख़ाना को इस मुश्किल घड़ी में सब्र-ए-जमील अता करे। आमीन।

👉 नोट: मय्यत को सुपुर्द-ए-ख़ाक कल दिन बुध बा तारीख़ 18 मार्च 2026 को सुबह 10 बजे किया जाएगा सपुर्द - ए - ख़ाक, लिहाज़ा आप हज़रात भी जनाज़े में शरीक होकर सवाबे दारेन हासिल करें।

नोट:- मय्यत के सिलसिले में और ज्यादा मालूमात के लिए जनाब अली हसन साहब के मोबाईल नंबर - 9027475784 पर कॉल करके जानकारी हासिल कर सकते है।


रिपोर्ट: ज़मीर आलम
स्थान: नई दिल्ली

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🤲 दुआ की दरख़्वास्त है कि अल्लाह मरहूम की मग़फिरत फरमाए और उन्हें जन्नत में ऊंचा मुकाम अता करे।

Monday, March 16, 2026

आने वाले हालात को देखते हुए सादगी अपनाने की अपील — फिजूल खर्च से बचें और भविष्य के लिए तैयार रहें

मौजूदा समय में दुनियाभर में आर्थिक हालात तेजी से बदल रहे हैं। कई देशों में महंगाई बढ़ने, व्यापारिक अस्थिरता और संघर्ष की परिस्थितियों ने लोगों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। ऐसे हालात में समाज के जिम्मेदार लोगों और कई बड़े आलिम-उलेमा ने आम लोगों से अपील की है कि आने वाले समय को ध्यान में रखते हुए अपनी जिंदगी में सादगी और एहतियात को अपनाया जाए।

जानकारों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती महंगाई, आर्थिक दबाव और विभिन्न क्षेत्रों में हो रही उथल-पुथल का असर धीरे-धीरे दूसरे देशों पर भी पड़ सकता है। मध्य-पूर्व समेत कई इलाकों में तनाव और नुकसान की खबरों के बीच यह आशंका जताई जा रही है कि आने वाले समय में आर्थिक चुनौतियाँ और बढ़ सकती हैं। ऐसे में आम लोगों को अभी से अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और अनावश्यक खर्च से बचने की सलाह दी जा रही है।

समाज के जिम्मेदार लोगों ने विशेष रूप से आगामी ईद के अवसर को लेकर यह अपील की है कि त्योहार को सादगी के साथ मनाया जाए। ईद खुशियों का त्योहार है, लेकिन इसका असली संदेश आपसी भाईचारा, जरूरतमंदों की मदद और संयमित जीवनशैली है। इसलिए कोशिश की जाए कि फिजूल खर्च से बचा जाए और अपनी क्षमता के अनुसार ही खर्च किया जाए।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर लोग अपनी आमदनी के हिसाब से खर्च करेंगे और थोड़ा बहुत बचत करने की आदत डालेंगे तो भविष्य में आने वाली आर्थिक मुश्किलों का सामना करना आसान होगा। कई बार लोग सामाजिक दिखावे या प्रतिस्पर्धा में आकर जरूरत से ज्यादा खर्च कर बैठते हैं, जो बाद में आर्थिक दबाव का कारण बन जाता है। इसलिए बेहतर यही है कि जिंदगी में सादगी को अपनाया जाए और बचत की आदत को मजबूत किया जाए।

साथ ही समाज में यह भी जागरूकता फैलाने की जरूरत बताई गई है कि लोग कर्ज और ब्याज के जाल में फंसने से बचें। धार्मिक शिक्षाओं में भी ब्याज लेने और देने दोनों से बचने की हिदायत दी गई है। इसलिए समझदारी इसी में है कि लोग अपनी जरूरतों को सीमित रखें और जितना संभव हो उतना सादगीपूर्ण जीवन जीने की कोशिश करें।

समाज के जिम्मेदार लोग यह भी कहते हैं कि मुश्किल समय में आपसी सहयोग और एकजुटता ही सबसे बड़ी ताकत होती है। अगर समाज के लोग मिल-जुलकर जरूरतमंदों की मदद करें और एक दूसरे का सहारा बनें तो किसी भी कठिन परिस्थिति से निकलना आसान हो सकता है।

अंत में सभी लोगों से यही अपील की जा रही है कि हालात को समझते हुए संयम, सादगी और समझदारी को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाएं। अनावश्यक खर्च से बचें, बचत की आदत डालें और अपने परिवार तथा समाज के साथ मिलकर एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य की तैयारी करें।

अल्लाह तआला से दुआ है कि वह हम सबकी हिफाजत फरमाए और दुनिया भर में अमन-ओ-सलामती कायम रखे।

— ज़मीर आलम
पत्रकार, नई दिल्ली
मुल्तानी समाज / मुल्तानी घराना नेटवर्क
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Saturday, March 14, 2026

🕊️ इंतिहाई अफ़सोसनाक ख़बर: जनाब रशीद साहब की अहलिया निशात बी का इंतक़ाल, इलाक़े में ग़म की लहर

देवबंद (ज़िला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश) से एक बेहद रंज-ओ-ग़म भरी ख़बर सामने आई है। अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को निहायत ही अफ़सोस के साथ यह इत्तला दी जाती है कि मोहल्ला पठानपुरा, रेती चौक, देवबंद निवासी जनाब रशीद साहब की अहलिया निशात बी का आज बरोज़ शनिवार, 14 मार्च 2026 की शाम क़ज़ा-ए-इलाही से इंतक़ाल हो गया।

इस ग़मगीन ख़बर के फैलते ही इलाके और बिरादरी में शोक की लहर दौड़ गई। मरहूमा निशात बी एक नेकदिल, सादा-मिज़ाज और मिलनसार ख़ातून के तौर पर जानी जाती थीं। उनके इंतक़ाल से परिवार के साथ-साथ जानने वालों में भी गहरा दुख और अफ़सोस पाया जा रहा है।

परिवार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार मय्यत को कल बरोज़ इतवार, 15 मार्च 2026 को सुबह 10 बजे सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम अहबाब, रिश्तेदारों और बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश की जाती है कि जनाज़े में शिरकत कर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और सवाब-ए-दारैन हासिल करें।

अल्लाह तआला से दुआ है कि मरहूमा की मग़फ़िरत फरमाए, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे और तमाम अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।

यह खबर केवल जानकारी और सामाजिक उद्देश्य से साझा की जा रही है, ताकि बिरादरी और जानने वाले लोग इस दुखद पलों में इस परिवार के साथ खड़े हो सकें और मरहूमा के लिए दुआ कर सकें।


मुल्तानी समाज
(सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत)
देश की राजधानी दिल्ली से संचालित
मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की राष्ट्रीय समाचार पत्रिका / न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल

ख़ास रिपोर्ट: पत्रकार ज़मीर आलम, देवबंद, सहारनपुर, उत्तर प्रदेश 

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