Friday, August 21, 2026

पठानकोट, बड़ौत में दिलशाद की अहलिया के इंतकाल की पुरदर्द इत्तिला, इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

बड़ौत | 21 अगस्त 2026

निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ यह इत्तिला बिरादरान-ए-मिल्लत और तमाम अहबाब तक पहुंचाई जाती है कि दिलशाद साहब, वल्द मकसूद साहब, (गाँव पेलखा जिला शामली, उत्तर प्रदेश वाले ) की अहलिया इशरत जहां हाल मुकाम मोहल्ला पठानकोट, क़स्बा बड़ौत जिला बागपत, उत्तर प्रदेश,  उम्र तकरीबन 45 साल, कल दिन जुमा बा - तारीख़ 21 अगस्त 2026 को असर की नमाज़ के बाद इस दार-ए-फ़ानी से रुख़्सत फ़रमा हो गई।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूमा इशरत जहां के इंतकाल की खबर से अहल-ए-ख़ाना, रिश्तेदारों, दोस्तों और बिरादरी में गहरे रंज-ओ-ग़म की लहर दौड़ गई है। मरहूमा के चले जाने से उनके अहल-ए-ख़ाना और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को जो सदमा पहुंचा है, उसे अल्फ़ाज़ में बयान करना मुश्किल है।

नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन

मिली हुई इत्तिला के मुताबिक मरहूमा की नमाज़-ए-जनाज़ा एवं तदफ़ीन कल  ( आज ) दिन शनिचर बा - तारीख  22 अगस्त 2026 को सुबह 8:00 बजे
गोरे गरीबां कब्रिस्तान, हीरोज़ कॉलेज के सामने, बड़ौत में की जाएगी।

तमाम अहबाब, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादरान से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फ़रमाकर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फिरत करें और अहल-ए-ख़ाना के ग़म में शरीक हों।

दुआ-ए-मग़फिरत

या अल्लाह! मरहूमा इशरत जहां की मुकम्मल मग़फिरत फ़रमा।
उनकी तमाम ख़ताओं और गुनाहों को माफ़ फ़रमा, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा, क़ब्र को कुशादा और आरामगाह बना। उन्हें सवाल-ए-क़ब्र में आसानी अता फ़रमा और जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा।

या रब्बुल आलमीन! मरहूमा को अपने ख़ास फ़ज़्ल-ओ-करम के साये में जगह अता फ़रमा और उनके नेक आमाल को उनके लिए सदक़ा-ए-जारीया बना।

अल्लाह तआला तमाम अहल-ए-ख़ाना को इस सख़्त सदमे पर सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए और उन्हें इस मुसीबत का अजर-ए-अज़ीम नसीब फ़रमाए। मरहूमा का मायका रुड़की जिला हरिद्वार, उत्तराखंड का बताया जाता है।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

राब्ता:
भाई यूनुस बड़ौत
📞 +91 9389673274


"मुल्तानी समाज" की ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार (विज्ञापन) क़ौमी सतह पर शाया या प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो बराए मेहरबानी नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।

📞 9410652990
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Wednesday, August 19, 2026

इंतकाल की पुरदर्द इत्तिला — आलिया का इंतकाल



निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ यह इत्तिला तमाम बिरादराना हज़रात तक पहुंचाई जाती है कि सफीक अहमद कालिंदी वाले की अहलिया का कल दिन बुध, बा-तारीख़ 19 अगस्त 2026, मगरिब की नमाज़ के बाद तक़रीबन रात 8 बजे इंतकाल फ़रमा जाना बिरादरी के लिए बेहद अफ़सोसनाक और दर्दनाक ख़बर है।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूमा के इंतकाल की ख़बर से अज़ीज़ो-अक़ारिब, रिश्तेदारों, दोस्तों और पूरी बिरादरी में ग़म की लहर दौड़ गई। इस मुश्किल और सदमे की घड़ी में हम तमाम अहले-ख़ाना से दिली ताज़ियत का इज़हार करते हैं और बारगाह-ए-इलाही में दुआगो हैं कि अल्लाह तआला मरहूमा की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फ़रमाए, उनके दरजात बुलंद फ़रमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए।

अल्लाह रब्बुल-इज़्ज़त मरहूमा की क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमाए, उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे, क़ब्र की तमाम मंज़िलों को आसान फ़रमाए और उन्हें अपनी ख़ास रहमत के साये में जगह अता फ़रमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

📍 रिहाइश

संगम विहार, बतरा हॉस्पिटल के पास, नई दिल्ली — 110080

🕌 नमाज़-ए-जनाज़ा और सुपुर्द-ए-ख़ाक

मरहूमा को आज दिन जुमेरात, बा-तारीख़ 20 अगस्त 2026 को सुबह 9:30 बजे संगम विहार कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम बिरादराना हज़रात से पुरख़ुलूस गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फ़रमाकर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और अहले-ख़ाना के ग़म में शरीक होकर उन्हें सब्र-ए-जमील की ताक़त दें।

ऐ अल्लाह! मरहूमा को अपनी रहमत में जगह अता फ़रमा, उनकी मग़फ़िरत फ़रमा, उनके दरजात बुलंद फ़रमा, उनकी क़ब्र को रोशन और कुशादा फ़रमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा। अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील और इस सदमे को बर्दाश्त करने की हिम्मत अता फ़रमा। आमीन या रब्बुल आलमीन।

📞 मज़ीद मालूमात के लिए

8595701564

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📰 "मुल्तानी समाज" की ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

"मुल्तानी समाज" मरहूमा के इंतकाल पर अहले-ख़ाना के साथ इस ग़म की घड़ी में बराबर का शरीक है और बारगाह-ए-अल्लाह में दुआ करता है कि अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फ़िरत फरमाए और तमाम पसमान्दगान को सब्र अता फरमाए।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।
अल्लाहुम्मग़फ़िर लहा वरहमहा।
आमीन।

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Monday, August 17, 2026

बेइंतहा अफ़सोस! सहारनपुर की मारूफ़ शख्सियत हाजी फ़ज़लुर रहमान साहब के बेटे सलीम साहब का इंतकाल

सहारनपुर, 17 अगस्त 2026 बरोज पीर
बेइंतहा अफ़सोस और सद-अफ़सोस के साथ अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादराना हजरात को यह इत्तिला दी जाती है कि सहारनपुर की मारूफ़ शख्सियत हाजी फ़ज़लुर रहमान साहब के साहबज़ादे सलीम साहब का दौराने-इलाज कजा - ए - ईलाही से इंतकाल हो गया। उनके इंतकाल की ख़बर से खानदान, रिश्तेदारों, अज़ीज़ो-अक़ारिब और जानने वालों में ग़म की लहर दौड़ गई।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम सलीम साहब की शादी क़स्बा देवबंद में हुई थी। वह पिछले कुछ समय से इलाज के दौर से गुज़र रहे थे और इसी दौरान उनकी रूह परवाज़ कर गई। उनके इंतकाल की ख़बर ने परिवार और उनसे वाबस्ता लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया है।

मरहूम का खानदानी तार्रुफ़

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूम सलीम साहब पाँच भाइयों में से एक थे। उनके भाइयों की शादियाँ अलग-अलग मुक़ामात पर हुई हैं। दो भाइयों की शादी देवबंद, एक भाई की शादी छुटमलपुर, एक भाई की शादी शाहमदार, सहारनपुर और एक भाई की शादी खतौली में हुई है।

परिवार की तरफ़ से दी गई जानकारी के मुताबिक मैय्यत को कल दिन मंगल बा - तारीख़ 18 अगस्त 2026 को सुबह 10 बजे इस्लामिया डिग्री कॉलेज वाली मस्जिद सहारनपुर, उत्तर प्रदेश में ( आज ) किया जाएगा सपुर्दे ए - ख़ाक, लिहाज़ा आप हज़रात भी जनाजे में शरीक होकर सवाबे दारेन हासिल करें  

दुआ-ए-मग़फ़िरत

अल्लाह तआला मरहूम सलीम साहब की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फ़रमाए, उनके दरजात बुलंद फ़रमाए, क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए।

अल्लाह रब्बुल आलमीन तमाम अहले-ख़ाना, रिश्तेदारों और अज़ीज़ो-अक़ारिब को इस सदमे को सब्र व हौसले के साथ बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

राब्ता:
नौशाद साहब, लिंक रोड
📞 80772-49223


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Sunday, August 16, 2026

निम्बरी की बुज़ुर्ग शख्सियत मरियम बी का इंतिक़ाल — बिरादरी में ग़म की लहर, नमाज़-ए-असर के बाद सुपुर्द-ए-ख़ाक

निम्बरी/पानीपत (हरियाणा)।
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

निहायत रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ तमाम बिरादराने हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि मरहूम चौधरी मीर हसन नूरवालिया की बेगम मरियम साहिबा, उम्र 92 साल, निवासी गाँव निम्बरी, ज़िला पानीपत, हरियाणा, का इतवार 16 अगस्त 2026 को सुबह तकरीबन 10 बजे इंतिक़ाल हो गया।

मरहूमा मरियम साहिबा गाँव निम्बरी की सबसे बुज़ुर्ग और सम्मानित शख्सियतों में शुमार थीं। उनकी वफ़ात की ख़बर से परिवार, रिश्तेदारों, अज़ीज़ों और मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी में गहरे रंज-ओ-ग़म की लहर दौड़ गई है।

मरहूमा अब्दुल सत्तार साहब की वालिदा-ए-मुहतरमा थीं। वह अपने पाँच बेटों में दूसरे नंबर के बेटे अब्दुल सत्तार के साथ मनमोहन नगर, बाबैल रोड, मस्जिद अबू बकर के पास रह रही थीं।

नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूमा का जनाज़ा नमाज़-ए-असर से पहले उनके पुश्तैनी मकान, गाँव निम्बरी ले जाया जाएगा। इसके बाद बाद नमाज़-ए-असर गाँव निम्बरी के कब्रिस्तान में नमाज़-ए-जनाज़ा अदा किए जाने के बाद उन्हें सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

मरहूमा अपने पीछे 5 बेटे, 1 बेटी, 6 नवासे तथा लगभग 20–22 पोते-पोतियों समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। उनकी वफ़ात से परिवार पर ग़म का पहाड़ टूट पड़ा है और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब तथा रिश्तेदार गहरे सदमे में हैं।

मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त मरहूमा मरियम साहिबा की कामिल मग़फ़िरत फरमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फरमाए, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फरमाए, क़ब्र के तमाम मराहिल आसान फरमाए और उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे।

ऐ अल्लाह! मरहूमा को जन्नतुल फ़िरदौस में आला से आला मुक़ाम अता फरमा, उन्हें अपने ख़ास रहमत और करम के साये में जगह अता फरमा और उनके नेक आमाल को उनके लिए सदक़ा-ए-जारीया बना दे।

या अल्लाह! मरहूमा के जनाज़े में शरीक होने वाले तमाम हज़रात की हाज़िरी और दुआओं को क़ुबूल फरमा तथा उन्हें आख़िरत के लिए ज़ख़ीरा बना दे।

पसमांदगान के लिए दुआ

अल्लाह तआला मरहूमा के तमाम बेटे-बेटियों, नवासों, पोते-पोतियों, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। इस सदमे को सहने की ताक़त दे और मरहूमा के लिए की जाने वाली तमाम दुआओं को क़ुबूल फरमाए।

बेशक हम सब अल्लाह ही के हैं और उसी की तरफ़ लौटकर जाना है।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

संपर्क:
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"मुल्तानी समाज" की विशेष रिपोर्ट

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अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार (विज्ञापन) क़ौमी सतह पर शाया (प्रकाशित) अथवा प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो बराए मेहरबानी नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।

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Saturday, August 15, 2026

बड़ौत के मोहम्मद अली साहब का इंतिक़ाल — बिरादराने मुल्तानी समाज में ग़म की लहर, आज सुबह 10:30 बजे होगी नमाज़-ए-जनाज़ा

मोहम्मद अली साहब के इंतिक़ाल की ग़मगीन ख़बर

नमाज़-ए-जनाज़ा आज सुबह 10:30 बजे, गोरे ग़रीबा कब्रिस्तान में होगी

बड़ौत/बागपत। निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराने हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि मोहम्मद अली वल्द जनाब अब्दुल ग़फ़ूर साहब, उम्र लगभग 55 साल, निवासी गांव शिकोपुर, जिला बागपत, हाल मुकाम बड़ौली रोड, मस्जिद के पास, कस्बा बड़ौत, जिला बागपत, का शनिवार, 15 अगस्त 2026 की बीती रात लगभग 11 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम के इंतिक़ाल की ख़बर से परिवार, रिश्तेदारों, दोस्तों और बिरादराने मुल्तानी समाज में गहरा रंज-ओ-ग़म पाया जा रहा है। एक इंसान का दुनिया-ए-फ़ानी से रुख़्सत होना यक़ीनन अहले-ख़ाना और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब के लिए बेहद तकलीफ़देह लम्हा होता है। ऐसे वक़्त में सब्र, दुआ और मरहूम के लिए मग़फ़िरत की दुआ ही सबसे बड़ी तसल्ली है।

नमाज़-ए-जनाज़ा आज सुबह 10:30 बजे

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूम मोहम्मद अली साहब की नमाज़-ए-जनाज़ा रविवार, 16 अगस्त 2026 को सुबह 10:30 बजे अदा की जाएगी।

मुकाम:
गोरे ग़रीबा कब्रिस्तान, हीरोज़ कॉलेज के सामने, बड़ौत, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश।

तमाम बिरादराने हज़रात से गुज़ारिश है कि अपने तमाम मसरूफ़ियात में से वक़्त निकालकर नमाज़-ए-जनाज़ा में शिरकत फरमाएं और मरहूम की मग़फ़िरत के लिए दुआ-ए-ख़ैर करें।

मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत

अल्लाह तआला मरहूम मोहम्मद अली साहब की मुकम्मल मग़फ़िरत फरमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फरमाए, उनके दर्जात बुलंद फरमाए, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फरमाए और उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे।

ऐ अल्लाह! मरहूम को अपनी रहमत के साये में जगह अता फरमा, उनके लिए क़ब्र का सफ़र आसान फरमा, सवालात-ए-क़ब्र में कामयाबी अता फरमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम नसीब फरमा।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

अहले-ख़ाना के लिए दुआ

अल्लाह रब्बुल आलमीन मरहूम के तमाम अहले-ख़ाना, रिश्तेदारों और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को इस सदमे को बर्दाश्त करने का सब्र-ए-जमील अता फरमाए। उनके दिलों को सुकून दे और इस मुश्किल घड़ी में अपनी ख़ास रहमत और मदद अता फरमाए।

या अल्लाह! मरहूम के घरवालों को सब्र अता फरमा, उनके ग़म को अपनी रहमत से आसान फरमा और इस सदमे के बदले उन्हें बेहतर अज्र अता फरमा।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

दफ़्न के बाद की दुआ

अल्लाह तआला मरहूम को मिट्टी की इस आख़िरी मंज़िल में अपनी रहमत के साथ जगह अता फरमाए। उनकी क़ब्र को वुसअत और रौशनी अता फरमाए, उन्हें हर तरह के अज़ाब से महफ़ूज़ फरमाए और क़यामत के दिन उन्हें अपने नेक बंदों में उठाए।

अल्लाहुम्मग़फ़िर लहू वरहम्हु, व आफिहि व'अफ़ु अन्हु।

ऐ अल्लाह! उनकी मग़फ़िरत फरमा, उन पर रहम फरमा, उन्हें आफ़ियत अता फरमा और उन्हें माफ़ फरमा।

तमाम अहले-ईमान से गुज़ारिश है कि मरहूम को अपनी ख़ुसूसी दुआओं में याद रखें।

आमीन या रब्बुल आलमीन।


📰 मुल्तानी समाज की ख़ास रिपोर्ट

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अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार (विज्ञापन) क़ौमी सतह पर शाया या प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो बराए मेहरबानी राब्ता फ़रमाएँ।

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Friday, August 14, 2026

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन, धामपुर के शौकत अली मुल्तानी का इंतिक़ाल — अहल-ए-ख़ाना समेत पूरे कुनबे में ग़म की लहर

धामपुर। इंतिहाई रंज-ओ-अफ़सोस के साथ यह इत्तिला दी जाती है कि शौकत अली मुल्तानी पुत्र मरहूम शफ़ीउद्दीन क़ादर वाले, साकिन मोहल्ला बंदूकचियान, धामपुर, जिला बिजनौर, उत्तर प्रदेश का आज दिन जुमा, 14 अगस्त 2026 को दोपहर तक़रीबन 2:30 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

मरहूम की उम्र तक़रीबन 55 साल थी। उनके इंतिक़ाल की ख़बर मिलते ही अहल-ए-ख़ाना, रिश्तेदारों, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादरी के लोगों में गहरा रंज-ओ-ग़म फैल गया। मरहूम अपनी अहलिया, दो बच्चों समेत पूरे कुनबे-ख़ानदान और तमाम अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को ग़मज़दा छोड़कर इस दार-ए-फ़ानी से हमेशा-हमेशा के लिए रुख़्सत हो गए।

अहल-ए-ख़ाना और कुनबे में ग़म की लहर

मरहूम शौकत अली मुल्तानी के बड़े भाई मोहम्मद अली हैं, जबकि छोटे भाइयों में काशिफ अली, शाहबाज़ अली, राहत और अब्दुल्ला शामिल हैं। मरहूम की तीन बहनें भी हैं।

मरहूम के इंतिक़ाल से परिवार पर ग़म का पहाड़ टूट पड़ा है। इस सदमे की घड़ी में रिश्तेदारों, बिरादरी के लोगों और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब की बड़ी तादाद अहल-ए-ख़ाना से मुलाक़ात कर इज़हार-ए-ताज़ियत कर रही है और उन्हें सब्र-ए-जमील की दुआएँ दे रही है।

नमाज़-ए-जनाज़ा

मरहूम शौकत अली मुल्तानी की नमाज़-ए-जनाज़ा कल दिन शनिचर बा - तारीख़ 15 अगस्त 2026 को सुबह 10 बजे धामपुर के मोहल्ला बंदूकचियांन में अदा की जाएगी।

तमाम अहबाब, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादरी के हज़रात से गुज़ारिश है कि नमाज़-ए-जनाज़ा में शिरकत फ़रमाकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें।

अल्लाह रब्बुल आलमीन मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फ़रमाए, क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमाए, क़ब्र के तमाम मराहिल आसान फ़रमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए।

अल्लाह तआला तमाम पसमान्दगान, अहल-ए-ख़ाना और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को इस सदमे पर सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

नोट

मैय्यत के सिलसिले में मज़ीद मालूमात के लिए शाहबुद्दीन मुल्तानी साहब के मोबाइल नंबर 8595295648 पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है।


ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से शाया होने वाली, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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Tuesday, August 11, 2026

एक माह बाद घर लौटा अंसार अहमद, परिवार में लौटी रौनक — बड़े भाई की सूझबूझ से दूर हुई नाराज़गी, फिर एक साथ रहने पर राज़ी हुए दोनों पक्ष

कैराना में खुशी की लहर: घर से नाराज़ होकर लापता हुआ नौजवान जमात में चला गया था, आज बड़े भाई हाजी इसरार साहब उसे वापस लेकर घर पहुंचे

कैराना/शामली, 11 अगस्त 2026।
तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी के लोगों के लिए यह इत्तिला यक़ीनन खुशी और इत्मीनान का सबब है कि अंसार अहमद वल्द हाजी इश्तियाक साहब (मरहूम), मूल निवासी झिंझाना एवं हाल बाशिंदे कस्बा कैराना, जिला शामली, उत्तर प्रदेश, जो पिछले करीब एक माह से घर से लापता थे, आखिरकार आज खैरियत के साथ अपने घर वापस लौट आए हैं।

अंसार अहमद के लापता होने की खबर “मुल्तानी समाज” न्यूज़ पोर्टल पर भी प्रकाशित की गई थी, जिसके बाद बिरादरी के लोगों में उनके सकुशल घर लौटने को लेकर दुआ और फिक्र का माहौल बना हुआ था।

एक कॉल ने खत्म किया एक महीने का इंतज़ार

मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को उस समय परिवार की बेचैनी खुशी में बदल गई, जब लापता अंसार अहमद ने अपने बड़े भाई जनाब हाजी इसरार साहब, गुरुग्राम वालों को फोन करके अपनी लोकेशन के बारे में जानकारी दी।

भाई की लोकेशन मिलते ही हाजी इसरार साहब ने देर किए बगैर बताई गई जगह का रुख किया और वहां पहुंचकर अपने भाई अंसार अहमद को साथ लेकर कैराना स्थित उनके घर वापस पहुंचे।

एक माह से जिस घर में अंसार की वापसी का इंतज़ार हो रहा था, वहां उनके पहुंचते ही परिवार और कुनबे में खुशी की लहर दौड़ गई। अपनों को अपने सामने देखकर परिजनों की आंखों में खुशी और इत्मीनान साफ़ दिखाई दिया।

घर से नाराज़ होकर जमात में चले गए थे अंसार

घर वापस लौटने के बाद अंसार अहमद ने अपने परिजनों को बताया कि वह अपनी घर वालों से नाराज़ होकर जमात में चले गए थे। इसी नाराज़गी के चलते वह करीब एक महीने तक घर से दूर रहे।

इस दौरान परिवार के लोग उनकी सलामती और वापसी को लेकर लगातार परेशान रहे और उनके सकुशल घर लौटने की दुआ करते रहे।

बड़े भाई ने निभाया फर्ज़-ए-भाईचारा, टूटता परिवार फिर जुड़ा

इस पूरे मामले में अंसार अहमद के बड़े भाई जनाब हाजी इसरार साहब ने जिस सूझबूझ, सब्र और भाईचारे का मुज़ाहिरा किया, वह काबिल-ए-तारीफ़ है।

घर वापसी के बाद हाजी इसरार साहब ने परिवार के तमाम अफ़राद को एक जगह बैठाया और दोनों पक्षों के बीच पैदा हुई नाराज़गी को दूर करने की कोशिश की। हालात यहां तक पहुंच चुके थे कि दोनों पक्ष एक-दूसरे की शक्ल तक देखना पसंद नहीं कर रहे थे और परिवार के बीच दूरी पैदा हो गई थी।

लेकिन बड़े भाई ने समझदारी और मोहब्बत के साथ दोनों पक्षों की बात सुनी और उन्हें रिश्तों की अहमियत समझाते हुए आपसी गिले-शिकवे और नाराज़गी भुलाकर दोबारा मिल-जुलकर रहने के लिए राज़ी कर लिया।

इस तरह एक ऐसा परिवार, जो नाराज़गी और दूरी की वजह से बिखरने की कगार पर पहुंच गया था, आज फिर से आपसी मोहब्बत, भाईचारे और रिश्तों की गर्मजोशी की तरफ लौट आया।

बिरादरी के लिए भी खुशी की खबर

अंसार अहमद की सकुशल वापसी न सिर्फ उनके परिवार बल्कि तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के लिए भी खुशी और इत्मीनान की बात है। उम्मीद की जानी चाहिए कि अंसार अहमद और उनके परिवार के बीच अब सभी गिले-शिकवे दूर होकर जिंदगी दोबारा सुकून और मोहब्बत के साथ आगे बढ़ेगी।

“मुल्तानी समाज” परिवार की ओर से भी दुआ है कि अल्लाह तआला अंसार अहमद और उनके पूरे खानदान के बीच हमेशा मोहब्बत, इत्तेहाद और खुशहाली कायम रखे, तमाम गलतफहमियां दूर फरमाए और इस परिवार को हमेशा आबाद व खुशहाल रखे। आमीन।


“मुल्तानी समाज” की ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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