इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।
मरहूम अब्दुल ग़फ़्फ़ार मोटियार साहब (छावनी वाले) के बड़े फ़र्ज़ंद जनाब अब्दुल सलाम साहब ने दुनिया-ए-फ़ानी को कहा अलविदा; अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए और तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।
कोटा, राजस्थान। निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिली अफ़सोस के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को इत्तिला दी जाती है कि आज दिन बुध, बा-तारीख़ 21 अक्टूबर 2026 को राजस्थान के शहर कोटा में मरहूम जनाब अब्दुल ग़फ़्फ़ार मोटियार साहब (छावनी वाले) के बड़े फ़र्ज़ंद, जनाब अब्दुल सलाम साहब का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया है।
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन। बेशक हम सब अल्लाह ही के हैं और उसी की तरफ़ लौटकर जाने वाले हैं।
जनाब अब्दुल सलाम साहब के इंतिक़ाल की ख़बर से उनके अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, दोस्तों, अहबाब और मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी में ग़म और अफ़सोस की लहर दौड़ गई है। इस मुश्किल घड़ी में मरहूम के तमाम घर वालों और रिश्तेदारों के साथ हमारी दिली हमदर्दी और ताज़ियत है।
🥀 कोटा शहर के क़ब्रिस्तान में होगी तदफ़ीन
मिली जानकारी के मुताबिक़, मरहूम जनाब अब्दुल सलाम साहब की मैय्यत को कोटा शहर के ही क़ब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। ख़बर लिखे जाने तक नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन का वक़्त मालूम नहीं हो सका है।
जैसे ही नमाज़-ए-जनाज़ा और सुपुर्द-ए-ख़ाक किए जाने के वक़्त की तस्दीक़शुदा जानकारी हासिल होगी, उसे ख़बर में अपडेट कर दिया जाएगा।
तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि जानकारी मिलने पर जनाज़े में शिरकत फ़रमाएँ, मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और उनके अहल-ए-ख़ाना को इस सदमे को बर्दाश्त करने के लिए सब्र की तौफ़ीक़ अता फ़रमाने की दुआ करें।
🤲 मरहूम की मग़फ़िरत के लिए दुआ
या अल्लाह! जनाब अब्दुल सलाम साहब की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमा। उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फ़रमा, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा और उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे।
ऐ अल्लाह! उनकी क़ब्र को वसीअ फ़रमा, उसमें राहत, सुकून और रौशनी अता फ़रमा। क़ब्र की तन्हाई को अपनी रहमत से दूर फ़रमा और मरहूम को सवालात-ए-क़ब्र के वक़्त साबित-क़दम रख।
या रब्बुल आलमीन! मरहूम को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमा, उनके दरजात बुलंद फ़रमा और उन्हें अपने महबूब हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ की शफ़ाअत नसीब फ़रमा।
ऐ अल्लाह! मरहूम के वालिद मरहूम जनाब अब्दुल ग़फ़्फ़ार मोटियार साहब के फ़र्ज़ंद की इस जुदाई पर तमाम घर वालों, अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और चाहने वालों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा। उनके दिलों को सुकून दे और इस ग़म को बर्दाश्त करने की हिम्मत अता फ़रमा।
आमीन सुम्मा आमीन, या रब्बुल आलमीन।
🤲 नमाज़-ए-जनाज़ा और मैय्यत को सुपुर्द-ए-ख़ाक करने की दुआएँ
मुसलमान भाइयों से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर सुन्नत के मुताबिक़ नमाज़-ए-जनाज़ा अदा करें और मरहूम के लिए ख़ुलूस-ए-दिल से मग़फ़िरत की दुआ करें।
नमाज़-ए-जनाज़ा में चौथी तकबीर के बाद सलाम फेरने से पहले यह दुआ पढ़ी जा सकती है:
اللَّهُمَّ لَا تَحْرِمْنَا أَجْرَهُ وَلَا تَفْتِنَّا بَعْدَهُ وَاغْفِرْ لَنَا وَلَهُ
तर्जुमा: ऐ अल्लाह! हमें उनके अज्र से महरूम न फ़रमा, उनके बाद हमें आज़माइश में न डाल और हमारी तथा उनकी मग़फ़िरत फ़रमा।
मैय्यत को क़ब्र में उतारते वक़्त यह दुआ पढ़ना मस्नून है:
بِسْمِ اللَّهِ وَعَلَى مِلَّةِ رَسُولِ اللَّهِ ﷺ
तर्जुमा: अल्लाह के नाम के साथ और रसूलुल्लाह ﷺ के दीन और तरीक़े पर।
क़ब्र में मैय्यत को रखने के बाद अल्लाह तआला से उसकी मग़फ़िरत, साबित-क़दमी और रहमत की दुआ की जाए।
दफ़्न के बाद मरहूम के लिए यह दुआ करें:
اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَثَبِّتْهُ عِنْدَ السُّؤَالِ
तर्जुमा: ऐ अल्लाह! इनकी मग़फ़िरत फ़रमा और सवाल के वक़्त इन्हें साबित-क़दम रख।
अल्लाह तआला मरहूम की क़ब्र को नूर से भर दे, उनकी आख़िरत आसान फ़रमाए और उन्हें अपनी बेपनाह रहमत के साये में जगह अता फ़रमाए। आमीन।
नोट: जनाज़े के वक़्त और दफ़्न की जगह के संबंध में अंतिम जानकारी की तस्दीक़ के बाद ही आगे प्रसारित करें।
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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए राजस्थान डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।
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