Monday, February 16, 2026

🌙📚 रमज़ान और बोर्ड इम्तिहान: इबादत भी, कामयाबी भी

रमज़ान की बरकतें और बोर्ड इम्तिहान की अहमियत — इस बार दोनों साथ-साथ दस्तक दे रहे हैं। एक तरफ़ रोज़े, तरावीह और इबादत का महीना; दूसरी तरफ़ मेहनत, एकाग्रता और भविष्य तय करने वाले इम्तिहान। ऐसे में ज़रूरी है कि हमारे मुमतहन (परीक्षार्थी) समझदारी, एहतियात और बेहतर प्लानिंग के साथ आगे बढ़ें।

यह दौर सिर्फ़ इम्तिहान का नहीं, बल्कि सब्र, तवक्कुल और तवाज़ुन (संतुलन) का भी है।


🌅 सेहरी और सुबह की तैयारी: लापरवाही नहीं, एहतियात ज़रूरी

  • जिन बच्चों का पेपर सुबह की शिफ्ट में हो, वो सेहरी के बाद लेटने की कोशिश न करें। लेटकर पढ़ना भी ख़तरे से खाली नहीं — झपकी लग सकती है और पेपर छूटने तक की नौबत आ सकती है।
  • वालिदैन भी तब तक आराम न करें जब तक बच्चे इम्तिहान के लिए रवाना न हो जाएँ। यह छोटी सी निगरानी बड़े नुक़सान से बचा सकती है।
  • अपना मोबाइल साइलेंट न रखें, ताकि किसी ज़रूरी सूचना या साथी छात्रों से राब्ता आसानी से हो सके।

☕ सेहत का ख्याल: रोज़ा भी मुकम्मल, पेपर भी बेहतर

  • जो बच्चे चाय पीने के आदी हैं, वो सेहरी में चाय ज़रूर लें। अचानक परहेज़ से सरदर्द या सुस्ती हो सकती है, जिसका असर सीधे इम्तिहान पर पड़ेगा।
  • जो किसी भी तरह की दवा ले रहे हों, वह सेहरी में दवा लेना न भूलें। अगर किसी दवा से नींद आने की शिकायत हो, तो डॉक्टर से मशविरा कर उसके मुतबादिल (सब्सटिट्यूट) का इंतज़ाम पहले से कर लें।
  • सेहरी और इफ़्तार में हल्का और पौष्टिक खाना लें। फल, दूध, अंडा, बादाम और मुरब्बा शामिल करें।
  • बाज़ार के शरबत और ठंडे जूस से परहेज़ करें। अगर जूस लें तो घर का बना हुआ और सामान्य तापमान का हो।
  • ऐसी चीज़ें बिल्कुल न खाएँ जिनसे पेट या गले की तकलीफ़ का अंदेशा हो।

📝 पेपर के बाद का रवैया: सुकून रखिए, आगे बढ़िए

  • एग्ज़ाम से लौटकर सवालों को टैली करने का कोई फायदा नहीं। “कितना सही, कितना ग़लत” — यह सोच सिर्फ़ टेंशन बढ़ाती है।
  • जो पेपर हो चुका, उस पर डिस्कशन न करें। हाँ, अगले पेपर की तैयारी पर बातचीत ज़रूर करें।
  • घर लौटते ही किताबों पर न बैठ जाएँ। कुछ देर आराम करें, थोड़ी नींद लें, फिर तरोताज़ा होकर तैयारी शुरू करें।

🌤️ मौसम और एहतियात

रमज़ान का मतलब सिर्फ़ गर्मी नहीं। सुबह की ठंड अब भी बाकी है। घर में और इम्तिहान सेंटर जाते वक्त ठंड से बचाव ज़रूरी है।

ख़ास तौर से नौजवान लड़के — गिरेबान खोलकर और बाइक को “हवाई जहाज़” बनाकर सेंटर पहुँचने का जोश थोड़ा कम रखें। सेहत सलामत रहेगी तो इम्तिहान भी बेहतर होगा।


🌙 रातों का निज़ाम और पढ़ाई का रूटीन

  • रमज़ान में देर रात तक जागने की आदत से बचें, खासकर इम्तिहान के दिनों में।
  • जिस दिन पेपर न भी हो, उस दिन भी सेहरी के बाद सोने के बजाय पढ़ाई का रूटीन बनाएं। सुबह का वक़्त याददाश्त के लिए सबसे मुफीद होता है।

👨‍👩‍👧‍👦 वालिदैन की ज़िम्मेदारी

बच्चों के साथ-साथ पैरेंट्स भी अपनी ज़िम्मेदारी समझें। घर का माहौल इम्तिहान की तैयारी के अनुकूल हो।
रमज़ान की रौनक़ अपनी जगह, मगर पूरा ध्यान पकौड़ी और कचौरी पर ही रहे — यह अंदाज़ बच्चों की मेहनत पर भारी पड़ सकता है।


✨ दुआ और हौसला

रमज़ान सब्र और बरकत का महीना है। इम्तिहान मेहनत और कामयाबी का रास्ता। जब दोनों एक साथ हों तो यह यक़ीन रखिए कि अल्लाह तआला की रहमत भी साथ होती है।

मेहनत कीजिए, एहतियात बरतिए, और बेफ़िक्र होकर आगे बढ़िए।
अल्लाह तआला तमाम बच्चों को कामयाबी, सेहत और रोशन मुस्तक़बिल अता फ़रमाए। आमीन।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट

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Sunday, February 15, 2026

🕯️ इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊनपूर्वी महावीर, मेरठ से एक अफ़सोसनाक ख़बर – नौजवान का इंतक़ाल

निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराने इस्लाम को यह इत्तिला दी जाती है कि बरोज़ इतवार, 15 फ़रवरी 2026 की शाम तक़रीबन 6 बजे के आसपास के इलाक़ा पूर्वी महावीर के रहने वाले जनाब मोहम्मद जाहिद साहब वल्द जनाब खलीक साहब के साहबज़ादे, जनाब मोहम्मद जाहिद साहब का कज़ा-ए-इलाही से इंतक़ाल हो गया।

यह दर्दनाक ख़बर हमें सोशल मीडिया के ज़रिये हासिल हुई। खबर के मुताबिक़ मरहूम की मय्यत को आज बरोज़ पीर, 16 फ़रवरी 2026 को सुबह 11 बजे सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाना बताया गया है, लिहाज़ा आप हजरात भी जनाजे में शरीक होकर सवाबे दारेन हासिल करें।

इस दुखद मौके पर पूरा मुल्तानी समाज ग़मज़दा है। एक नौजवान का यूँ अचानक रुख़्सत हो जाना न सिर्फ़ अहल-ए-ख़ाना बल्कि पूरी बिरादरी के लिए सदमे से कम नहीं। अल्लाह तआला मरहूम की मग़फिरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को रौशन करे और तमाम लवाहितीन को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।


📢 बिरादरी से गुज़ारिश

जो भी हज़रत मरहूम के बारे में मुकम्मल और सही जानकारी रखते हों—ख़ास तौर पर दफीने के वक़्त और कब्रिस्तान के नाम के संबंध में—वो बराए करम “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के दिये गये नंबर या ईमेल के ज़रिये इत्तिला दें, ताकि सही और तस्दीक़शुदा जानकारी बिरादरी तक पहुंचाई जा सके।


📌 एक ज़रूरी ऐलान

इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर देखा गया है कि किसी अज़ीज़ के इंतक़ाल की खबर देर से या अधूरी जानकारी के साथ पहुंचती है, जिसकी वजह से कई लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से अदबाना गुज़ारिश करती है कि इंतेकाल की खबर भेजते वक़्त इन बातों का ख़ास एहतिमाम करें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ मुकम्मल पता – पहले कहाँ के रहने वाले थे और फिलहाल कहाँ रह रहे थे।
3️⃣ दफीने का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार अफ़राद (कम से कम एक-दो) के फ़ोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतक़ाल हुआ है तो मरहूम का फोटो।
6️⃣ इंतक़ाल की वजह (अगर बयान करना मुनासिब समझें)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम – जैसे वालिदैन, भाई-बहन, औलाद वगैरह।

👉 इन तमाम जानकारियों से खबर मुकम्मल और मुस्तनद बनेगी तथा बिरादरी को सही मालूमात हासिल होंगी।


📰 डिस्क्लेमर (Disclaimer)

पत्रिका में प्रकाशित किसी भी प्रकार का लेख, समाचार, संपादकीय, विचार, टिप्पणी, प्रेस विज्ञप्ति, विज्ञापन या अन्य सामग्री संबंधित लेखक, संवाददाता या विज्ञापनदाता के व्यक्तिगत विचार हैं।
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किसी भी विवाद की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित, मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए
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🤲 अल्लाह मरहूम की मग़फिरत फ़रमाए, अपने रहमत का साया अता फ़रमाए। आमीन।

बड़ौत की सरज़मीं पर अदब व एहतराम का नूर: मास्टर यामीन आज़ाद साहब के साहेबजादे का यादगार दावत-ए-वलीमा

बड़ौत (जनपद बागपत): खुशियों, दुआओं और मुहब्बत की रौशनी से जगमगाता एक ऐसा दिन, जिसने बड़ौत की फिज़ा को खास बना दिया। जनपद की प्रतिष्ठित शख्सियत, राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित, समाजसेवा के लिए समर्पित आदरणीय (सलाहकार – MMWS एवं खिदमत सोसाइटी) के सुपुत्र के दावत-ए-वलीमा का आयोजन बड़ौत स्थित में अत्यंत गरिमामयी वातावरण में संपन्न हुआ।

यह महज़ एक पारिवारिक समारोह नहीं था, बल्कि बड़ौत की गंगा-जमुनी तहज़ीब, भाईचारे और सामाजिक एकजुटता का जीवंत प्रतीक बनकर उभरा।


गरिमामयी उपस्थिति ने बढ़ाई रौनक

समारोह में क्षेत्र की राजनीति, शिक्षा और सामाजिक जगत की नामचीन हस्तियों ने शिरकत कर कार्यक्रम की शोभा में चार चाँद लगा दिए।

मुख्य अतिथियों में सम्मानित , जिला पंचायत अध्यक्ष , वरिष्ठ रालोद नेता , , , एडवोकेट , गायत्री देवी कॉलेज के चेयरमैन , बड़ौत चेयरमैन , वरिष्ठ रालोद नेता एडवोकेट तथा युवा नेता ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई और नव-विवाहित जोड़े को स्नेह व आशीर्वाद प्रदान किया।

मेहमानों की आत्मीय सहभागिता ने आयोजन को यादगार बना दिया।


संस्थाओं का समर्पित सहयोग

समारोह की व्यवस्थाओं और रौनक में (MMWS) का विशेष योगदान रहा।

  • सदर जनाब इंजीनियर उस्मान साहब व उनकी समर्पित टीम
  • तनाज़ा हल कमेटी से हमदम मिर्ज़ा जी
  • खेल कमेटी से सनव्वर साहब
  • लीगल सेल से एडवोकेट आबिद मिर्ज़ा जी
  • मैरिज ब्यूरो सेल के कन्वीनर अब्दुल खालिक
  • एजुकेशन कमेटी के सदर मास्टर खलील अहमद

इन सभी ने अपने-अपने दायित्वों को पूरी निष्ठा से निभाते हुए आयोजन को सुव्यवस्थित और सफल बनाया।


खिदमत का जज़्बा और मेहमाननवाज़ी की मिसाल

कार्यक्रम के दौरान अनुशासन और आतिथ्य-सत्कार की जिम्मेदारी के कंधों पर रही। डॉक्टर इरफ़ान मलिक और उनकी टीम ने बारीक से बारीक इंतज़ाम को इतनी खूबसूरती से संभाला कि हर मेहमान ने खुले दिल से प्रशंसा की।

यह आयोजन आपसी भाईचारे, दोस्ती निभाने के जज़्बे और सामाजिक सौहार्द की एक शानदार मिसाल बनकर सामने आया।


दुआओं के साए में नई ज़िंदगी की शुरुआत

मास्टर यामीन आज़ाद साहब और उनके समस्त परिवार को इस नई खुशी पर दिली मुबारकबाद। दुआ है कि नव-विवाहित जोड़े की ज़िंदगी खुशियों, कामयाबी और बरकतों से महकती रहे, और उनका दामन हमेशा सुकून व मोहब्बत से भरा रहे। 🤲🌹


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
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Saturday, February 14, 2026

🌿 बिरादरी की पहचान, तालीम और तरक़्क़ी का नया सफ़र “मुल्तानी घराना” – शिजरा, शऊर और शुमारी का भरोसेमंद प्लेटफ़ॉर्म

जब भी किसी महफ़िल या घर की बैठकी में सवाल उठता है—

हमारी बिरादरी का इतिहास क्या है?
पूरे भारत में हमारी तादाद कितनी है?
हमारी तंजीम ने अब तक क्या काम किया है?
बेटे-बेटी के लिए अच्छा रिश्ता कहाँ मिलेगा?

तो ये सिर्फ़ सवाल नहीं होते, ये अपनी जड़ों से जुड़ने की चाहत होती है।

सन 2011 में जब “पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी” की तंजीम की बुनियाद रखी गई, तो हर तरफ़ एक उम्मीद की लहर थी। आज उसी ख्वाब को आगे बढ़ाते हुए “मुल्तानी घराना” एक मुकम्मल डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के तौर पर सामने है।


📜 शिजरा और दीन की रोशनी

इस्लाम में नसब (वंशावली) की हिफ़ाज़त को अहम माना गया है, ताकि रिश्तों में साफ़गोई रहे और आने वाली नस्लें अपने बुजुर्गों की पहचान जान सकें।

शिजरा सिर्फ नामों की फेहरिस्त नहीं, बल्कि दुआओं की एक सिलसिला होता है।
“मुल्तानी घराना” का मकसद यही है कि बिरादरी के अफ़राद का रिकॉर्ड सुरक्षित रहे, ताकि कल की नस्लों को अपना सिलसिला ढूंढने में परेशानी न हो।


💻 रोज़गार के साथ खिदमत का मौका

यह पहल सिर्फ डेटा जमा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि बिरादरी के नौजवानों को रोज़गार देने का भी जरिया है।

जो युवा मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप से सॉफ्टवेयर पर काम कर सकते हैं, उन्हें इस नेक काम में शामिल होने का मौका दिया जा रहा है।

📲 इच्छुक नौजवान साथी हेल्पडेस्क नंबर 9410652990 पर अपना नाम और शहर लिखकर व्हाट्सऐप करें।
“मुल्तानी घराना” की टीम आपसे राब्ता करेगी। पसंद आने पर आपको जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

साथ ही—

  • 💰 अच्छी सैलरी
  • 🎁 आकर्षक इनाम
  • 📜 सर्टिफिकेट
  • 🌟 “मुल्तानी गौरव” अवॉर्ड

भी दिए जाएंगे।

यह सिर्फ नौकरी नहीं, बिरादरी की खिदमत का मौका है।


🤝 रिश्तों का भरोसेमंद ज़रिया

हर मां-बाप की ख्वाहिश होती है कि उनके बच्चे का रिश्ता अच्छे घराने में हो।
“मुल्तानी घराना” का प्लेटफ़ॉर्म रिश्तों के लिए सही और भरोसेमंद जानकारी देने में मददगार साबित होगा, ताकि फैसले आसानी और इत्मीनान से लिए जा सकें।


📰 बिरादरी की आवाज़

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित, बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” इस मुहिम की आधिकारिक आवाज़ है।


✍️ खास रिपोर्ट

ज़मीर आलम
संपर्क: 8010884848

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दुआ है कि अल्लाह तआला इस कोशिश को कबूल फरमाए, इसे हमारी बिरादरी के लिए सदका-ए-जारीया बनाए और हमें इत्तेहाद, तरक़्क़ी और खुशहाली की राह पर कायम रखे।

अब वक्त है जुड़ने का…
अपना नाम और शहर भेजिए, और इस नेक काम में हिस्सा बनिए। 🤲

अहतराम के साथ इत्तिला:

इस ख़बर में शामिल की गई तस्वीरें सिर्फ़ समझाने और मालूमात को वाज़ेह करने के लिए लगाई गई हैं। इनका किसी शख्स, इदारे या वाक़िये से सीधा या ग़ैर-सीधा कोई ताल्लुक़ नहीं है। अगर किसी को इनसे कोई ग़लतफ़हमी हो तो हम दिली तौर पर माज़रत ख़्वाह हैं— किसी की दिलआज़ारी हमारा मक़सद हरगिज़ नहीं है। 🤲

Friday, February 13, 2026

🌟 मुल्तानी बिरादरी के लिए ऐतिहासिक डिजिटल विरासत “मुल्तानी घराना” — शिजरे को डिजिटल अमानत बनाने की क्रांतिकारी पहल

अल्हम्दुलिल्लाह, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार–बढ़ई बिरादरी की देशव्यापी तंजीम “मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट (रजिस्टर्ड ऑल इंडिया)” ने एक ऐसा ड्रीम प्रोजेक्ट पेश किया है, जो आने वाली नस्लों के लिए एक बेशकीमती डिजिटल विरासत साबित होगा।

बिरादरी की जनगणना, फैमिली ट्री (शिजरा) और रिश्तों-नातों को सुव्यवस्थित व आसान बनाने के मक़सद से आधुनिक टेक्नोलॉजी के साथ “मुल्तानी घराना” सॉफ्टवेयर तैयार कराया गया है।


📌 एक स्थायी डिजिटल अमानत

इस क्रांतिकारी सॉफ्टवेयर को इस दूरअंदेशी सोच के साथ विकसित किया गया है कि बिरादरी के करोड़ों अफ़राद के आंकड़े हमेशा-हमेशा के लिए महफूज़ रह सकें।

ताकि आने वाली नस्लों को अपने खानदान का शिजरा तलाश करने के लिए दर-ब-दर भटकना न पड़े, बल्कि एक क्लिक पर उन्हें अपने बुजुर्गों की पहचान, रिश्तों की कड़ियां और पारिवारिक इतिहास मुकम्मल तौर पर मिल सके।

यह महज़ एक सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि बिरादरी की पहचान, एकता और इतिहास को डिजिटल दस्तावेज़ की शक्ल में सुरक्षित रखने का सुनियोजित और ऐतिहासिक कदम है।


💻 क्या कर सकेंगे आप?

  • अपने बड़े बुजुर्गों की तफ़सील और तस्वीरें सुरक्षित अपलोड
  • पूरे खानदान का डिजिटल शिजरा तैयार
  • रिश्तों की सही पहचान और आपसी कनेक्टिविटी आसान
  • मोबाइल, टैब, लैपटॉप या डेस्कटॉप से घर बैठे उपयोग

🚀 फिलहाल ट्रायल चरण में

इस प्रोजेक्ट को अभी ट्रायल के तौर पर शुरू किया गया है। बहुत जल्द इसके तमाम फीचर्स मुकम्मल तौर पर शुरू कर दिए जाएंगे। बिरादरी के अफ़राद से दरख्वास्त है कि इस ऐतिहासिक पहल का हिस्सा बनें और अपने सुझाव देकर इसे और मजबूत बनाएं।


🌐 जानकारी व रजिस्ट्रेशन

Chrome या Google पर लिखें:
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या हेल्पडेस्क पर व्हाट्सएप करें:
📱 9410652990

“मुल्तानी समाज” की टीम हर कदम पर आपकी रहनुमाई के लिए मौजूद है।


📖 यह विशेष रिपोर्ट
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देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित
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के लिए
✍️ ज़मीर आलम (प्रधान संपादक)

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Thursday, February 12, 2026

🕯️ बेहद अफ़सोसनाक… बिरादरी में दो इत्तेक़ाल, दिल अश्कबार 🕯️

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन… अहले मुस्लिम मुल्तानी लुहार, बढ़ई बिरादरी को निहायत रंज-ओ-ग़म के साथ इत्तिला दी जाती है कि बीती रात बरोज़ जुमेरात, 12 फ़रवरी 2026 को हमारी बिरादरी में दो ग़मगीन इत्तेक़ाल हुए, जिनकी खबर ने हर दिल को मायूस कर दिया।


🌙 पहला इत्तेक़ाल – ज़िला बागपत / सहारनपुर (उत्तर प्रदेश)

जनाब मोहम्मद यूसुफ़ ख़ान वल्द जनाब मोहम्मद मोहम्मद ख़ान साहब के फ़रज़ंद का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।
मरहूम मूल रूप से ढिकाना के रहने वाले थे और वर्तमान में बड़ौत, बड़का रोड, सरकारी स्कूल के पीछे (ज़िला बागपत, उत्तर प्रदेश) में निवास कर रहे थे।

  • 🗓️ इंतिक़ाल: 12 फ़रवरी 2026 (बरोज़ जुमेरात)
  • ⏰ वक़्त: करीब 11:00 बजे रात
  • 🕌 नमाज़-ए-जनाज़ा व तदफ़ीन: 13 फ़रवरी 2026 (बरोज़ जुमे) सुबह 10:00 बजे
  • 📍 मुक़ाम: स्थानीय क़ब्रिस्तान, बड़ौत

बिरादराना गुज़ारिश है कि आप हज़रात जनाज़े में शरीक होकर सवाब-ए-दारैन हासिल करें और मरहूम के हक़ में दुआ-ए-मग़फ़िरत फरमाएँ।


🌙 दूसरा इत्तेक़ाल – मोहल्ला कोटला शेर अली, क़स्बा गंगोह (ज़िला सहारनपुर)

मोहल्ला कोटला शेर अली मस्जिद, क़स्बा गंगोह (ज़िला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश) में जनाब राशिद साहब की अहलिया और भाई खुरैद की वालिदा का भी क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया है।

  • 🗓️ इंतिक़ाल: 12 फ़रवरी 2026
  • 🕌 नमाज़-ए-जनाज़ा: दोपहर 1:15 बजे, अशरफ-उल-उलूम बड़ा मदरसा
  • ⚰️ तदफ़ीन: इमाम साहब क़ब्रिस्तान, गंगोह

तमाम बिरादरान से इल्तिज़ा है कि जनाज़े में शिरकत कर मरहूमा के लिए मग़फ़िरत और जन्नतुल फ़िरदौस की दुआ करें।


🤲 दुआ

अल्लाह तआला मरहूम/मरहूमा की मग़फ़िरत फरमाए, उनकी क़ब्र को रौशन और वसीअ करे, जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता करे और अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।


📋 बिरादरी रिकॉर्ड हेतु आवश्यक विवरण

“मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के रिकॉर्ड में पूर्ण जानकारी दर्ज की जाती है, जो बिरादराना एतबार से भविष्य में काम आ सकती है।
कृपया निम्न विवरण उपलब्ध कराएँ:

  • इंतिक़ाल कब और कहाँ हुआ
  • पूरा आवासीय पता
  • वालिद का नाम
  • उम्र
  • कुल औलादें व बेटों की संख्या
  • कोई विशेष पहचान (डॉक्टर, मास्टर, मैकेनिक, इंजीनियर, नेता, दस्तकार, पत्रकार, उद्योगपति आदि)
  • तदफ़ीन का स्थान व समय
  • नज़दीकी वारिस का संपर्क नंबर
  • खबर देने वाले का नाम, पता व दूरभाष
  • कोई आख़िरी तस्वीर (यदि उपलब्ध हो)

यदि हमारे ग्रुप में पहले भी खबर प्रसारित हुई हो तो तारीख़ और नाम बताने पर रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जा सकता है।


📢 महत्वपूर्ण सूचना

यह सेवा मुस्लिम मुल्तानी लुहार-बढ़ई बिरादरी के लिए ज़मीर आलम साहब की ओर से निःशुल्क है।

बिरादरी के सुख-दुख की खबरें
“मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के ग्रुप में प्रेषित करें।

सरकारी पुष्टि नहीं की जाएगी और न ही कोई सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा।


📰 डिस्क्लेमर (Disclaimer)

पत्रिका में प्रकाशित लेख, समाचार, संपादकीय, विचार, टिप्पणी, प्रेस विज्ञप्ति या विज्ञापन लेखक/विज्ञापनदाता के व्यक्तिगत विचार हैं। संपादक, प्रकाशक या प्रबंधन उनसे अनिवार्य रूप से सहमत हों यह आवश्यक नहीं।

सामग्री की सत्यता एवं दावों के लिए लेखक/विज्ञापनदाता स्वयं उत्तरदायी होंगे। पत्रिका एवं प्रबंधन किसी भी प्रकार की कानूनी, सामाजिक या वित्तीय जिम्मेदारी से पूर्णतः मुक्त रहेंगे।

किसी भी विवाद या न्यायिक कार्यवाही की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।


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ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट

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अल्लाह तआला हम सबको सब्र, हिम्मत और नेकी की राह पर कायम रखे। 🤲

Tuesday, February 10, 2026

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन, हाजी अब्दुल अज़ीज़ (कुतुबगढ़ वाले) का इंतकाल – बिरादरी का एक साया उठ गया

निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराने इस्लाम को इत्तला दी जाती है कि आज बरोज़ बुधवार, तारीख़ 11 फ़रवरी 2026 को मोहल्ला रेत्ती, मेन रोड, क़स्बा थानाभवन, जिला शामली (उत्तर प्रदेश) के मक़ीम हाजी अब्दुल अज़ीज़ वल्द जनाब अलीमुद्दीन साहब (मरहूम), उम्र तक़रीबन 87 साल, क़ज़ा-ए-इलाही से इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत हो गए।

मरहूम का ताल्लुक़ कुतुबगढ़ वालों से था और वह अपनी नेक सीरत, ख़ुलूस, इबादतगुज़ारी और बिरादरी में मोहब्बत व हमदर्दी के लिए जाने जाते थे। उनका इंतकाल यक़ीनन अहल-ए-ख़ाना ही नहीं बल्कि पूरे खानदान और इलाके के लिए गहरा सदमा है।


🏠 पसमांदगान ( ग़मजदा फैमिली )

मरहूम अपने पीछे ग़मगीन खानदान छोड़ गए हैं, जिनमें:

  • बड़े भाई हाजी अब्दुल हमीद साहब (मरहूम)
  • जनाब अब्दुल हाफ़िज़ साहब (मरहूम)
  • सबसे छोटे भाई जनाब अब्दुल रहीम (हयात)
  • एक बहन जमशीदा बी (मरहूमा) अहलिया जनाब मोहम्मद इस्लामुद्दीन साहब (थानाभवन)

औलाद में:

  • जनाब मोहम्मद असलम
  • हाफ़िज़ मोहम्मद अफ़ज़ल
  • मोहम्मद अकरम
  • आस मोहम्मद

और दो साहिबज़ादियां:

  • फरजाना बी, अहलिया हाफ़िज़ शरीफ़ अहमद (गढ़ी पुख़्ता)
  • मुबबशरा बी, अहलिया मोहम्मद इरफ़ान (चरथावल)

इसके अलावा पौते-पोतियां, नाती-नातिनें और तमाम अज़ीज़-ओ-अक़ारिब इस सदमे में ग़मगीन हैं।


🕌 नमाज़-ए-जनाज़ा व तदफीन

मरहूम की मय्यत को आज बाद नमाज़ ईसा ठीक साढ़े 7 बजे चरथावल बस स्टैंड से आगे गोरे ग़रीबा कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम अहबाब से दरख़्वास्त है कि नमाज़-ए-जनाज़ा में शरीक होकर सवाब-ए-दारेन हासिल करें और मरहूम के हक़ में दुआ-ए-मग़फ़िरत करें।


📞 मालूमात के लिए राब्ता

मय्यत से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए मरहूम के भतीजे
मोहम्मद साजिद
📱 9152561843
से राब्ता कायम करें।


🤲 दुआ

अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए, उनके दर्जात बुलंद फ़रमाए और तमाम घर वालों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए।
आमीन या रब्बुल आलमीन।