Saturday, September 19, 2026

नगीना में मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की अंजुमन के चुनाव की प्रक्रिया शुरू

सदर समेत तमाम ओहदेदारों के इंतिख़ाब को लेकर बिरादरी में दिलचस्पी — “मुल्तानी समाज” की चुनावी प्रक्रिया पर पल-पल नज़र

नगीना, बिजनौर (उत्तर प्रदेश), 20 सितंबर 2026।

नगीना, जिला बिजनौर में आज रविवार, 20 सितंबर 2026 को पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की अंजुमन के सदर समेत तमाम ओहदेदारों के इंतिख़ाब की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अंजुमन के जिम्मेदार पदों के लिए होने वाली इस चुनावी प्रक्रिया को लेकर बिरादरी के लोगों में खासा उत्साह और दिलचस्पी देखने को मिल रही है।

बिरादरी की सामाजिक एकजुटता, आपसी भाईचारे और सामुदायिक मामलों में बेहतर नुमाइंदगी के लिहाज़ से अंजुमन के ओहदेदारों का चुनाव अहम माना जा रहा है। चुनावी प्रक्रिया के दौरान अदब, भाईचारे और आपसी इत्तेहाद की रिवायत को बरकरार रखने की उम्मीद की जा रही है।

“मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका इस पूरी चुनावी प्रक्रिया पर लगातार नज़र रखे हुए है। चुनाव से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां, प्रक्रिया की प्रगति तथा सामने आने वाले प्रमुख अपडेट बिरादरी के लोगों तक समय-समय पर पहुंचाए जाते रहेंगे।

बिरादरी के तमाम हज़रात से गुज़ारिश है कि चुनावी प्रक्रिया में आपसी मोहब्बत, भाईचारे, सब्र और तहज़ीब का दामन थामे रखें तथा अंजुमन और बिरादरी की बेहतरी के लिए सकारात्मक माहौल को क़ायम रखने में अपना किरदार अदा करें।

“मुल्तानी समाज” की ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।


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“मुल्तानी समाज”

अपनी बिरादरी की आवाज़ — अपनी पहचान।

नीमच से ग़मगीन ख़बर: राबिया बानो का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल 🖤 इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

निहायत रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को इत्तिला दी जाती है कि नीमच में अब्दुल हमीद उर्फ़ बाबू भाई पुवार की अहलिया राबिया बानो साहिबा का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया है। मरहूमा के इंतिक़ाल की ख़बर से उनके खानदान, रिश्तेदारों, अहबाब और बिरादराने-मिल्लत में गहरे रंज-ओ-ग़म की लहर दौड़ गई है।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

यह दुनिया फ़ानी है और हर इंसान को एक दिन अपने रब्बे-करीम के हुज़ूर लौटकर जाना है। मरहूमा के इंतिक़ाल पर “मुल्तानी समाज” की पूरी टीम की ओर से भी अहले-ख़ाना से इज़हारे-ताज़ियत और हमदर्दी पेश की जाती है।

🕌 नमाज़-ए-जनाज़ा व दफ़्न

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूमा राबिया बानो साहिबा की नमाज़-ए-जनाज़ा दिनांक 20 सितंबर 2026, बरोज़ इतवार, सुबह 10 बजे महावीर नगर मस्जिद में अदा की जाएगी।

नमाज़-ए-जनाज़ा के बाद मरहूमा को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम बिरादराना हज़रात, रिश्तेदारों और अहबाब से पुरख़ुलूस गुज़ारिश है कि नमाज़-ए-जनाज़ा में शिरकत फ़रमाकर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और ग़मज़दा अहले-ख़ाना के साथ अपनी हमदर्दी का इज़हार करें।

🤲 मय्यत को क़ब्र में उतारते वक़्त की दुआ

بِسْمِ اللّٰهِ وَعَلَىٰ مِلَّةِ رَسُولِ اللّٰهِ ﷺ

“अल्लाह के नाम से और रसूलुल्लाह ﷺ की मिल्लत व तरीक़े पर।”

🤲 क़ब्र में मिट्टी देते वक़्त

पहली मर्तबा:
مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ
मिन्हा ख़लक़नाकुम
तर्जुमा: इसी मिट्टी से हमने तुम्हें पैदा किया।

दूसरी मर्तबा:
وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ
व फ़ीहा नुईदुकुम
तर्जुमा: और इसी मिट्टी में हम तुम्हें लौटाएंगे।

तीसरी मर्तबा:
وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ
व मिन्हा नुख़रिजुकुम तारतन उख़रा
तर्जुमा: और इसी मिट्टी से हम तुम्हें दोबारा निकालकर खड़ा करेंगे।

🤲 मग़फ़िरत की पुरख़ुलूस दुआ

या अल्लाह! मरहूमा राबिया बानो साहिबा की मग़फ़िरत फ़रमा। उनकी तमाम ख़ताओं और गुनाहों से दरगुज़र फ़रमा। उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा, क़ब्र को कुशादा और आरामगाह बना। उन्हें सवालात-ए-क़ब्र में आसानी अता फ़रमा और अपनी रहमत व मग़फ़िरत के साये में जगह अता फ़रमा।

या रब्बुल आलमीन! मरहूमा को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा, उन्हें अपने हबीब हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ की शफ़ाअत नसीब फ़रमा और उनके दरजात बुलंद फ़रमा।

अल्लाह तआला अब्दुल हमीद उर्फ़ बाबू भाई पुवार साहब समेत तमाम अहले-ख़ाना, रिश्तेदारों और अहबाब को इस सदमे पर सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए।

आमीन या रब्बल आलमीन।


“मुल्तानी समाज” की ओर से ताज़ियत

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए मध्यप्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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अपनी बिरादरी की आवाज़ — अपनी पहचान

जनाब नसीम अहमद साहब का इंतिक़ाल- इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

निहायत रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि गांव कितास वाले, जनाब नसीम अहमद साहब का आज दिन इतवार, 20 सितंबर 2026 की बीती रात तक़रीबन ढाई बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया। मरहूम की फ़िलवक़्त रिहाइश निहाल विहार, नांगलोई, दिल्ली में थी।

मरहूम के इंतिक़ाल की ख़बर से खानदान, रिश्तेदारों, अहबाब और पूरी बिरादरी में गहरे रंज-ओ-ग़म की लहर दौड़ गई है। यह दुनिया फ़ानी है और हर ज़ी-रूह को एक दिन अपने परवरदिगार के हुज़ूर लौटकर जाना है। अल्लाह तआला मरहूम की तमाम ख़ताएँ माफ़ फरमाए और उन्हें अपनी रहमत के साये में जगह अता फरमाए।

नमाज़-ए-जनाज़ा और दफ़्न

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूम जनाब नसीम अहमद साहब की नमाज़-ए-जनाज़ा बाद नमाज़-ए-असर, निहाल विहार, नांगलोई, दिल्ली स्थित कब्रिस्तान में अदा की जाएगी। नमाज़-ए-जनाज़ा के बाद मरहूम को उसी कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम बिरादराना हज़रात, रिश्तेदारों और अहबाब से पुरख़ुलूस गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फ़रमाकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और अहले-ख़ाना के ग़म में शरीक हों।

दफ़्न के वक़्त की दुआ

जब मरहूम को क़ब्र में उतारा जाए तो दिल से यह दुआ की जाए:

اللّٰهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَارْحَمْهُ، وَعَافِهِ وَاعْفُ عَنْهُ۔

ऐ अल्लाह! मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमा, उन पर रहम फ़रमा, उन्हें आफ़ियत अता फ़रमा और उनसे दरगुज़र फ़रमा।

क़ब्र में उतारते वक़्त यह भी पढ़ा जाता है:

بِسْمِ اللّٰهِ وَعَلَىٰ مِلَّةِ رَسُولِ اللّٰهِ ﷺ

अल्लाह के नाम से और रसूलुल्लाह ﷺ के दीन व तरीक़े पर।

मिट्टी देते वक़्त

मिट्टी डालते समय यह आयत पढ़ना मुनासिब है:

مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ

“हमने तुम्हें इसी मिट्टी से पैदा किया, इसी में तुम्हें लौटाएंगे और इसी से दोबारा तुम्हें निकालेंगे।”

इसके बाद मरहूम के लिए दिल खोलकर दुआ की जाए कि:

या अल्लाह! जनाब नसीम अहमद साहब की मग़फ़िरत फ़रमा, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे, क़ब्र को कुशादा और रोशन फ़रमा, उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे। उनकी तमाम ख़ताओं और गुनाहों से दरगुज़र फ़रमा, उनकी नेकियों को क़ुबूल फ़रमा और उन्हें अपने महबूब हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ की शफ़ाअत नसीब फ़रमा। उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा।

या रब्बुल आलमीन! अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा और इस सदमे को बर्दाश्त करने की ताक़त दे। आमीन या रब्बल आलमीन।

إِنَّا لِلَّهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ

अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, दर्जात बुलंद फ़रमाए और तमाम पसमानदगान को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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“मुल्तानी समाज”

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सड़क हादसे में जावेद मिर्ज़ा का इंतिक़ाल, मुल्तानी बिरादरी में ग़म की लहर

हाजी सलीम साहब के फरज़ंद जावेद मिर्ज़ा का दर्दनाक हादसे में मौक़े पर ही इंतिक़ाल, बिरादरान-ए-मुल्तानी ने किया गहरे रंज-ओ-ग़म का इज़हार

छपरौली/बड़ौत (बागपत), 19 सितंबर 2026।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिल-फ़िगार करने वाली इत्तिला के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादराना हज़रात को सूचित किया जाता है कि जनाब हाजी सलीम साहब वल्द हाजी वली हसन साहब (मरहूम), निवासी क़स्बा छपरौली, तहसील बड़ौत, ज़िला बागपत, उत्तर प्रदेश तथा हाल निवासी स्वरूप नगर, दिल्ली के फरज़ंद-ए-अज़ीज़ जनाब जावेद मिर्ज़ा, उम्र तक़रीबन 42 साल, आज दिन शनिवार, 19 सितंबर 2026 को एक दर्दनाक सड़क हादसे का शिकार होकर इस दार-ए-फ़ानी से कूच कर गए।

मिली जानकारी के मुताबिक़ जावेद मिर्ज़ा अपने वालिद-ए-मुहतरम हाजी सलीम साहब के साथ मोटरसाइकिल पर किसी ज़रूरी काम के सिलसिले में जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में अचानक हुए सड़क हादसे में जावेद मिर्ज़ा को गंभीर चोटें आईं और उन्होंने मौक़ा-ए-वारदात पर ही क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल फ़रमा लिया।

इस दर्दनाक हादसे की ख़बर जैसे ही उनके अज़ीज़ो-अक़ारिब, दोस्तों और बिरादराना हज़रात तक पहुँची, हर तरफ़ ग़म और अफ़सोस की लहर दौड़ गई। एक जवान और परिवार के अज़ीज़ फ़र्द का इस तरह अचानक दुनिया से रुख़्सत हो जाना निश्चित रूप से उनके अहल-ए-ख़ाना के लिए बेहद तकलीफ़देह और सदमा-ए-अज़ीम है।

अल्लाह पाक मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए

हम तमाम अहल-ए-बिरादरी की जानिब से जनाब हाजी सलीम साहब और तमाम पसमान्दगान-ए-मरहूम की ख़िदमत में दिल की गहराइयों से ताज़ियत और पुरसा पेश करते हैं।

अल्लाह रब्बुल-आलमीन मरहूम जावेद मिर्ज़ा की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों से दरगुज़र फ़रमाए, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमाए, क़ब्र के सफ़र को आसान फ़रमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए।

या अल्लाह! जब मरहूम को कब्र में उतारा जाए और मिट्टी दी जाए तो अपनी रहमत के साये में उन्हें जगह अता फ़रमा। उनकी तन्हाई को अपनी रहमत से दूर फ़रमा, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे और सवाल-ए-क़ब्र में आसानी अता फ़रमा।

अल्लाह तआला उनके वालिद-ए-मुहतरम हाजी सलीम साहब, तमाम घरवालों, अज़ीज़ो-अक़ारिब और पसमान्दगान को यह सदमा बर्दाश्त करने की हिम्मत और सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए तथा मरहूम के लिए सदक़ा-ए-जारीया बनने वाले नेक अमल की तौफ़ीक़ दे।

आमीन या रब्बुल-आलमीन।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

हर जान को मौत का मज़ा चखना है।

दफ़्न का वक़्त बाद में बताया जाएगा

 ज़िम्मेदारान-ए-ख़ानदान की जानिब से नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन (दफ़्न) का वक़्त और मुक़ाम गौरीपुर नवादा जिला बागपत, उत्तर प्रदेश में बाद नमाज़ जौहर ठीक 2 बजे किया जाएगा सपुर्द - ए - खाक 

तमाम अहल-ए-बिरादरी से गुज़ारिश है कि मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएँ और पसमान्दगान के लिए सब्र-ए-जमील की दुआ करें।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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_*ख़बर अपडेट*_

हादसे में मुहम्मद जावेद का दर्दनाक इंतकाल, मुल्तानी बिरादरी में पसरा ग़म

गौरीपुर निवासी हाजी सहीनू उर्फ मुहम्मद सलीम के 42 वर्षीय बेटे का हादसे में इंतकाल

बागपत। निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि मुस्लिम मुल्तानी लौहार बढ़ई बिरादरी, गौरीपुर, जिला बागपत (उत्तर प्रदेश) निवासी हाजी सहीनू उर्फ मुहम्मद सलीम (छपरौली वाले) के बड़े बेटे मुहम्मद जावेद, उम्र लगभग 42 वर्ष, का आज 19 सितंबर 2026, शनिवार को एक दर्दनाक हादसे के कारण इंतकाल हो गया।

तीन भाइयों में से एक के बिछड़ने से परिवार सदमे में

गौरतलब है कि हाजी मुहम्मद सलीम के तीन बेटे मुहम्मद सुहेल, मुहम्मद शुएब और मुहम्मद जावेद थे। मुहम्मद जावेद के अचानक इंतकाल से उनके दोनों भाइयों सहित पूरा परिवार गहरे सदमे और ग़म में है।

परिवार के लिए यह सदमा और भी बेहद दर्दनाक है कि हाजी मुहम्मद सलीम पहले से ही पैर से माज़ूर हैं, और अब जवान बेटे के इंतकाल का पहाड़ जैसा ग़म उनके सामने है। इस कठिन घड़ी में अल्लाह तआला ही परिवार को सब्र और इस सदमे को बर्दाश्त करने की ताकत अता फरमा सकता है।

पहले बेटी का भी हो चुका है इंतकाल

बताया गया है कि मरहूम मुहम्मद जावेद की एक बेटी का भी लगभग 5-6 वर्ष पूर्व इंतकाल हो चुका है। मरहूम अपने पीछे दो बेटे मुहम्मद तकी और मुहम्मद ज़ैद छोड़ गए हैं, जिनका रो-रोकर बुरा हाल है।

रिश्तेदारी के लिहाज़ से भी अहम संबंध

मरहूम मुहम्मद जावेद, मुहम्मद आरिफ ढिकाना वाले के सगे बहनोई थे। वहीं वे अंजुमन के पूर्व सदर हाजी अय्यूब नंगला वाले के सगे भांजे भी बताए गए हैं।

20 सितंबर को होगा सुपुर्द-ए-ख़ाक

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूम मुहम्मद जावेद की नमाज़-ए-जनाज़ा एवं सुपुर्द-ए-ख़ाक की कार्रवाई रविवार, 20 सितंबर 2026 को दोपहर 02 बजे गौरीपुर निवाड़ा, जिला बागपत स्थित कलेक्ट्रेट के पास वाले कब्रिस्तान में की जाएगी।

तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फरमाकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फिरत करें और ग़मज़दा परिवार से ताज़ियत करें।

मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फिरत

हम अल्लाह रब्बुल आलमीन की बारगाह में दुआ करते हैं कि अल्लाह तआला मरहूम मुहम्मद जावेद की मग़फिरत फरमाए, उनकी कब्र को नूर से भर दे, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए और उनके तमाम ग़मज़दा परिजनों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।

आमीन सुम्मा आमीन।

राब्ते के लिए

हाजी अय्यूब नंगला वाले: 8923993396
सुहेल, पुत्र हाजी अय्यूब: 8077319070
मुहम्मद आरिफ ढिकाना: 8923247848


Thursday, September 17, 2026

एक और बुज़ुर्ग शख़्सियत मिट्टी की आग़ोश में सो गई, हाजी अब्दुल गफ़ूर साहब के इंतक़ाल पर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी में ग़म की लहर

ख़बर-ए-इंतक़ाल | बूढेडा, थाना बिनौली, जिला बागपत”  | 17 सितंबर 2026

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म, दिली अफ़सोस और बेहद क़ल्बी सदमे के साथ आप तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि जनाब हाजी अब्दुल गफ़ूर साहब वल्द जनाब मोहम्मद कमरुद्दीन साहब, उम्र तक़रीबन 77 साल, निवासी गाँव बूढेडा, थाना बिनौली, जिला बागपत”, उत्तर प्रदेश, का आज दिन जुमेरात, बा-तारीख़ 17 सितंबर 2026 को तवील बीमारी के चलते बड़ौत, जिला बागपत के एक प्राइवेट अस्पताल में क़ज़ा-ए-इलाही से इंतक़ाल फ़रमा गए।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम के इंतक़ाल की ख़बर सुनते ही अहले-ख़ानदान, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, दोस्त-अहबाब और मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी में ग़म और सदमे की फ़िज़ा पैदा हो गई। एक बुज़ुर्ग और मोहतरम शख़्सियत का इस दुनिया-ए-फ़ानी से रुख़्सत हो जाना यक़ीनन परिवार और बिरादरी के लिए एक बड़ा सदमा है।

दुनिया की ज़िंदगी फ़ानी है और हर जान को एक दिन अपने रब की तरफ़ लौटना है। अल्लाह रब्बुल आलमीन मरहूम की तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फ़रमाए और उन्हें अपनी रहमत के साये में जगह अता फ़रमाए।

नमाज़-ए-जनाज़ा व दफ़्न

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूम हाजी अब्दुल गफ़ूर साहब की नमाज़-ए-जनाज़ा व तदफ़ीन शुक्रवार, बा-तारीख़ 18 सितंबर 2026 को सुबह 9:00 बजे,

बूढेडा, थाना बिनौली, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश के कब्रिस्तान में की जाएगी।

तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि अगर मुमकिन हो तो जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और सोगवार ख़ानदान के ग़म में शरीक हों।

दफ़्न और क़ब्र में उतारते वक़्त दुआ

जब मरहूम को क़ब्र में उतारा जाए तो दुआ की जाए:

«بِسْمِ اللّٰهِ وَعَلَىٰ مِلَّةِ رَسُولِ اللّٰهِ ﷺ»

तर्जुमा: “अल्लाह के नाम से और अल्लाह के रसूल ﷺ की मिल्लत पर।”

क़ब्र में रखने के बाद मरहूम के लिए मग़फ़िरत, साबित-क़दमी और रहमत की दुआ की जाए:

ऐ अल्लाह! हमारे इस मरहूम बंदे को माफ़ फ़रमा, उस पर रहम फ़रमा, उसकी क़ब्र को रोशन और कुशादा फ़रमा, उसे सवालात-ए-क़ब्र में साबित-क़दम रख और उसकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे।

मिट्टी देते वक़्त

क़ब्र पर मिट्टी डालते हुए यह आयत पढ़ी जाती है:

«مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ»

तर्जुमा: “हमने तुम्हें इसी मिट्टी से पैदा किया, इसी में तुम्हें वापस लौटाएँगे और इसी से दोबारा तुम्हें निकालेंगे।”

मिट्टी देने के बाद तमाम हज़रात मरहूम के लिए दिल से दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और उनके दर्जात की बुलंदी की दुआ करें।

मरहूम के लिए ख़ास दुआ

या अल्लाह! हाजी अब्दुल गफ़ूर साहब की मग़फ़िरत फ़रमा। उनकी तमाम ख़ताओं, गुनाहों और कोताहियों को अपने फ़ज़्ल-ओ-करम से माफ़ फ़रमा। उनके दरजात बुलंद फ़रमा। उनकी क़ब्र को नूर से भर दे, उसे वसीअ और रौशन फ़रमा। क़ब्र की तन्हाई को अपनी रहमत से दूर फ़रमा। उन्हें सवालात-ए-क़ब्र में कामयाबी अता फ़रमा। उनके लिए जन्नत के दरवाज़े खोल दे और उन्हें जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमा।

या रब्बुल आलमीन! उनके नेक आमाल को क़ुबूल फ़रमा, उनकी लग़ज़िशों से दरगुज़र फ़रमा और उन्हें अपने महबूब हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ की शफ़ाअत नसीब फ़रमा।

ऐ अल्लाह! मरहूम के तमाम सोगवारों, अहले-ख़ानदान, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और दोस्त-अहबाब को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा। इस सदमे को उनके लिए सब्र और अज्र का ज़रिया बना।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

राब्ता बराए मज़ीद मालूमात

मैय्यत के सिलसिले में और अधिक जानकारी के लिए मरहूम के रिश्तेदारों से इन नंबरों पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है:

📞 9988178695
📞 9411907263
📞 9356520013


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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“मुल्तानी समाज”

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एक और शख़्सियत मिट्टी की आग़ोश में जा सोई, रशीद अहमद साहब के इंतिक़ाल पर बिरादरी में रंज-ओ-ग़म की लहर

ख़बर-ए-इंतिक़ाल — जामा मस्जिद, दिल्ली
17 सितंबर 2026

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और बेइंतिहा अफ़सोस के साथ तमाम अहले-इस्लाम, मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात तक यह दिलगुदाज़ ख़बर पहुँचाई जाती है कि आज दिन जुमेरात, बा-तारीख़ 17 सितंबर 2026, दोपहर तक़रीबन 2 बजे, जामा मस्जिद, दिल्ली-110006 के रहने वाले जनाब रशीद अहमद साहब वल्द नामा'लूम, मूल रूप से जलालाबाद, ज़िला शामली, उत्तर प्रदेश का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम के इंतिक़ाल की ख़बर से उनके अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादरान-ए-मिल्लत में गहरे रंज-ओ-ग़म की फ़िज़ा है। मौत एक ऐसी हक़ीक़त है जिससे किसी इंसान को फ़रार नहीं, और हर जान को एक न एक दिन अपने रब की तरफ़ लौटकर जाना है।

इस दुख की घड़ी में "मुल्तानी समाज" अपने तमाम बिरादराना हज़रात से पुरख़ुलूस गुज़ारिश करता है कि मरहूम को अपनी ख़ास दुआओं में याद रखें और उनके लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें।

दुआ-ए-मग़फ़िरत

ऐ अल्लाह! जनाब रशीद अहमद साहब की मग़फ़िरत फ़रमा, उनकी ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फ़रमा, उनकी तमाम नेकियों को अपनी बारगाह में क़ुबूल फ़रमा।

या अल्लाह! उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा, उसे कुशादा और आराम की जगह बना, क़ब्र की तन्हाई में उनका मददगार और हाफ़िज़ बन।

ऐ रब-ए-करीम! मरहूम को जन्नतुल-फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा और उन्हें अपने ख़ास रहमत व करम के साये में जगह अता फ़रमा।

मय्यत को बाद नमाज़ ईशा साढ़े 8 बजे दिल्ली गेट स्थित कब्रिस्तान में किया जायगा सपूर्दे ख़ाक, लिहाज़ा आप हज़रात भी जनाज़े में शरीक होकर सवाबे दारेन हासिल करें।।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

दफ़्न और सुपुर्द-ए-ख़ाक के मौक़े पर दुआ

जब मरहूम को क़ब्र में उतारा जाए तो तमाम अहले-ख़ाना और मौजूद हज़रात दिल से उनके लिए दुआ करें:

"ऐ अल्लाह! इन्हें अपनी रहमत में जगह अता फ़रमा, इनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे, इन्हें क़ब्र के अज़ाब से महफ़ूज़ फ़रमा और इनके लिए आख़िरत के सफ़र को आसान फ़रमा।"

मिट्टी देते वक़्त दिल में यह एहसास रहे कि आज हम एक अपने भाई को मिट्टी के सुपुर्द कर रहे हैं और कल हमें भी इसी सफ़र पर रवाना होना है। मरहूम के लिए सूरह-ए-फ़ातिहा, सूरह-ए-इख़लास और दुआ-ए-मग़फ़िरत का एहतिमाम किया जाए।

अल्लाह तआला तमाम अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और दोस्तों को इस सदमे को बर्दाश्त करने के लिए सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए और उन्हें इस मुश्किल घड़ी में अपनी रहमत व मदद से नवाज़े।

आमीन सुम्मा आमीन।

मज़ीद मालूमात के लिए

मरहूम के बेटे जनाब नशीर अहमद साहब से इस मोबाइल नंबर पर राब्ता कायम किया जा सकता है:

📞 9810693637


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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"मुल्तानी समाज"

अपनी बिरादरी की आवाज़ — अपनी पहचान

तुगाना निवासी अली हसन साहब की अहलिया हाज़रा बी का इंतकाल — पुरनम माहौल में हुई रुख़्सती, इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

बड़ौत/तुगाना (बागपत)।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि आज दिन जुमेरात, बा-तारीख़ 17 सितंबर 2026 को गांव तुगाना, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश के निवासी और हाल निवासी पॉलिटेक्निकल कॉलेज के पास, बड़ौत, जिला बागपत जनाब अली हसन साहब वल्द जनाब हकीमुद्दीन साहब की अहलिया हाज़रा बी, उम्र तक़रीबन 59 साल, का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया।

मरहूमा का मायका गांव बाजितपुर, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश बताया गया है। उनके इंतकाल की ख़बर जैसे ही बिरादराना हज़रात, रिश्तेदारों और अहबाब तक पहुंची, हर तरफ़ ग़म और उदासी की फ़िज़ा छा गई। मरहूमा के इंतकाल से उनके घर-परिवार, रिश्तेदारों और जानने वालों को गहरा सदमा पहुंचा है।

मिली जानकारी के मुताबिक़ मरहूमा को आज बाद नमाज़-ए-मग़रिब सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फ़रमाकर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और उनके अहले-ख़ाना के ग़म में शरीक हों।

दफ़्न के मौक़े पर दुआ

जब मरहूमा को क़ब्र में उतारा जाए तो तमाम हज़रात उनके लिए मग़फ़िरत और रहमत की दुआ करें—

اللّٰهُمَّ اغْفِرْ لَهَا وَارْحَمْهَا، وَعَافِهَا وَاعْفُ عَنْهَا، وَأَكْرِمْ نُزُلَهَا، وَوَسِّعْ مُدْخَلَهَا

तर्जुमा:
“ऐ अल्लाह! इनकी मग़फ़िरत फ़रमा, इन पर रहम फ़रमा, इन्हें आफ़ियत अता फ़रमा, इनसे दरगुज़र फ़रमा, इनकी मेहमाननवाज़ी को इज़्ज़त वाली बना और इनकी क़ब्र को कुशादा फ़रमा।”

क़ब्र में उतारते वक़्त पढ़ा जाए:

بِسْمِ اللّٰهِ وَعَلَىٰ مِلَّةِ رَسُولِ اللّٰهِ ﷺ

और मिट्टी देते हुए दिल से यह दुआ की जाए:

اللّٰهُمَّ اجْعَلْ قَبْرَهَا رَوْضَةً مِنْ رِيَاضِ الْجَنَّةِ، وَلَا تَجْعَلْهَا حُفْرَةً مِنْ حُفَرِ النَّارِ۔

तर्जुमा:
“ऐ अल्लाह! इनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे और इसे जहन्नम के गड्ढों में से कोई गड्ढा न बना।”

मिट्टी देने के बाद मरहूमा के लिए ईमान की सलामती, मग़फ़िरत, रहमत, क़ब्र के सवालात में आसानी और जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम की दुआ की जाए।

अल्लाह तआला मरहूमा हाज़रा बी की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमाए, क़ब्र के तमाम मराहिल आसान फ़रमाए, उन्हें अपनी रहमत के साये में जगह अता फ़रमाए और जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम नसीब फ़रमाए।

अल्लाह पाक तमाम अहले-ख़ाना, रिश्तेदारों और अहबाब को इस सदमे पर सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए और मरहूमा के लिए सदक़ा-ए-जारीया बनने वाले नेक आमाल की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

राब्ता

मय्यत के सिलसिले में मज़ीद मालूमात के लिए उनके बेटे जनाब मोहम्मद साहब के मोबाइल नंबर 8077384268 पर राब्ता क़ायम करके पूरी जानकारी हासिल की जा सकती है।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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