Thursday, February 5, 2026

अलीगढ़ की हिना मिर्जा को मिली राष्ट्रीय जिम्मेदारी, उपभोक्ता अधिकारों की आवाज़ बनेंगी वाइस चेयरपर्सन

अलीगढ़। समाज सेवा और जनहित के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय भूमिका निभा रहीं अलीगढ़ की हिना मिर्जा को एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दायित्व सौंपा गया है। उन्हें की अलीगढ़ जिला कमेटी का वाइस चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति राष्ट्रीय महासचिव डॉ. शाज़िया नाज़ एड. के अनुमोदन से आगामी तीन वर्षों के लिए की गई है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से जारी मनोनयन पत्र में स्पष्ट किया गया है कि हिना मिर्जा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम–2019 के तहत उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों, कर्तव्यों और उपलब्ध कानूनी उपायों के प्रति जागरूक करने हेतु विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन करेंगी। संगठन को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए ज़मीनी स्तर पर ठोस और प्रभावी पहल देखने को मिलेगी।

राष्ट्रीय महासचिव डॉ. शाज़िया नाज़ एड. ने हिना मिर्जा को इस नई जिम्मेदारी के लिए हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि उनका सामाजिक अनुभव और समर्पण संगठन को नई दिशा देगा। उन्होंने विश्वास जताया कि हिना मिर्जा उपभोक्ताओं की समस्याओं को गंभीरता से उठाते हुए संगठन को और अधिक सशक्त बनाएंगी।

अलीगढ़ जैसे ऐतिहासिक और शैक्षणिक शहर से जुड़ी इस नियुक्ति को सामाजिक हलकों में विशेष सराहना मिल रही है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी हिना मिर्जा को बधाइयाँ देते हुए आशा व्यक्त की है कि वे उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा में एक सशक्त सेतु साबित होंगी।


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देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित,
पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को समर्पित
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बेइंतहा रंज व ग़म की खबर: मोहम्मद रफ़ीक़ साहब (सराये वाले) का इंतक़ालअल्लाह मरहूम को जन्नत-उल-फ़िरदौस अता फरमाए, आमीन 🤲

बेहद अफ़सोस और दिली सदमे के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि मोहम्मद रफ़ीक़ साहब क़स्बा सराये वाले, जो हाल मुक़ाम गुड़गांव में रह रहे थे, आज दिन जुमेरात, 05 फ़रवरी 2026 को कुछ ही देर पहले क़ज़ा-ए-ईलाही से इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत फरमा गए।

यह खबर सुनते ही अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और पूरी बिरादरी में शोक की लहर दौड़ गई।

मरहूम एक नेकदिल, शरीफ़ और सादगी पसंद इंसान थे। उनके अचानक इंतक़ाल से जो ख़ला पैदा हुआ है, उसे भर पाना मुश्किल है।
मरहूम हाजी क़य्यूम सराये वाले के बड़े भाई थे। अल्लाह तआला अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।

🕊️ जनाज़े की जानकारी

मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा
📅 दिन: जुमाआ, 06 फ़रवरी 2026
वक़्त: सुबह 10:30 बजे

नमाज़ के बाद मरहूम को
📍 कब्रिस्तान: अमीनगर सराये, ज़िला बागपत (उत्तर प्रदेश)
में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फरमा कर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें।


📢 एक ज़रूरी और अहम अपील (इंतक़ाल की खबर भेजने से पहले)

अक्सर देखा जाता है कि अधूरी या देर से पहुंची जानकारी की वजह से लोग जनाज़े तक नहीं पहुंच पाते। इस परेशानी को खत्म करने के लिए राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से अदब के साथ गुज़ारिश करती है कि इंतेकाल की खबर भेजते वक़्त नीचे दी गई जानकारियां ज़रूर शामिल करें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम
2️⃣ पूरा पता (मूल निवास और मौजूदा निवास)
3️⃣ दफ़ीने का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स के 1-2 फ़ोन नंबर
5️⃣ अगर मर्द का इंतेकाल हुआ हो तो मरहूम की फोटो
6️⃣ इंतेकाल की वजह (अगर मुनासिब हो)
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम (भाई, बहन, वालिदैन, औलाद आदि)

👉 इन मालूमात से खबर मुकम्मल होगी और बिरादरी को सही वक़्त पर सही जानकारी मिल सकेगी।


📰 डिस्क्लेमर

पत्रिका में प्रकाशित सभी लेख, समाचार, विचार, प्रेस विज्ञप्ति या विज्ञापन संबंधित लेखक, संवाददाता या विज्ञापनदाता के निजी विचार हैं।
इनसे पत्रिका, संपादक, प्रकाशक या प्रबंधन की सहमति आवश्यक नहीं मानी जाएगी।
किसी भी विवाद की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) दिल्ली रहेगा।


🤲 दुआ

“ऐ अल्लाह! मरहूम मोहम्मद रफ़ीक़ साहब की मग़फ़िरत फरमा,
उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे,
और उनके अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमा।”

आमीन या रब्बुल आलमीन 🤲


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📌 ज़्यादा जानकारी के लिए संपर्क करें:
हाजी क़य्यूम सराये वाले
📱 9810191408

😭🤲

Wednesday, February 4, 2026

निहायत ही रंजो-ग़म के साथ अफ़साना परवीन के इंतेक़ाल की दुखद ख़बर

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम, निहायत ही रंजो-ग़म के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह दुखभरी इतल्ला दी जाती है कि बीती रात बरोज़ जुमेरात, बा-तारीख़ 05 फ़रवरी 2026, रात तक़रीबन 2:30 बजे, लंबी बीमारी के बाद

अफ़साना परवीन, वल्द जनाब मोहम्मद यूनुस साहब, साकिन गांव बरवाला, ज़िला बागपत (उत्तर प्रदेश) का क़ज़ा-ए-ईलाही से इंतेक़ाल हो गया।

इस असहनीय सदमे से परिवार, अज़ीज़ो-अक़ारिब और तमाम अहले-बिरादरी गहरे शोक में डूबे हुए हैं। मरहूमा अपने नेक अख़लाक़, सादगी और सब्र-ओ-शुक्र के लिए जानी जाती थीं। उनके अचानक बिछड़ जाने से पूरे इलाके में ग़म की लहर दौड़ गई है।

जनाज़े और तदफ़ीन की जानकारी

मिली जानकारी के मुताबिक, मरहूमा की नमाज़-ए-जनाज़ा बाद नमाज़-ए-ज़ोहर अदा की जाएगी। इसके बाद गांव बरवाला, ज़िला बागपत (उत्तर प्रदेश) स्थित कब्रिस्तान में मय्यत को सपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।
तमाम अहले-ईमान और अज़ीज़ो-अक़ारिब से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत कर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फिरत फ़रमाएँ।

अल्लाह रब्बुल आलमीन मरहूमा की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए और तमाम घरवालों को यह भारी सदमा सहन करने के लिए सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए।
आमीन, सुम्मा आमीन।

ज़रूरी संपर्क

मय्यत के संबंध में किसी भी अतिरिक्त जानकारी के लिए
मोहम्मद सरफराज साहब
📞 87002 72814
पर संपर्क किया जा सकता है।


एक ज़रूरी ऐलान

इंतेक़ाल की ख़बर भेजने के लिए अहम् हिदायतें

अक्सर देखा गया है कि इंतेक़ाल की ख़बर बिरादरी तक देर से या अधूरी जानकारी के साथ पहुँचती है, जिससे कई लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि जब भी किसी इंतेक़ाल की ख़बर भेजें, तो इन बातों का ख़ास ख़याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता (स्थायी व वर्तमान निवास)।
3️⃣ दफ़ीन का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार शख़्स (एक-दो) के फ़ोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतेक़ाल हुआ हो तो मरहूम की फोटो।
6️⃣ इंतेक़ाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ घर के बाक़ी अहल-ए-ख़ाना के नाम — जैसे भाई, बहन, माँ-बाप, औलाद आदि।

👉 इन तमाम जानकारियों से ख़बर मुकम्मल होती है और बिरादरी के लोगों तक सही वक़्त पर सही जानकारी पहुँच पाती है।


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किसी भी विवाद, शिकायत या न्यायिक कार्यवाही की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।

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Sunday, February 1, 2026

अपने बुज़ुर्गों को भुला देना ज़वाल है, उन्हें याद रखना दीन है — “मुल्तानी घराना” दीन-ए-इस्लाम की रौशनी में एक नेक क़दम

इस्लाम हमें यह तालीम देता है कि

“जिसने अपने अस्ल को पहचाना, उसने अपने रब को पहचाना।”

आज अफ़सोस के साथ कहना पड़ता है कि हम रोज़ आगे तो बढ़ रहे हैं,
मगर अपने पीछे छूटे बुज़ुर्गों को भूलते जा रहे हैं।
वो दादा, दादी, नाना, नानी…
जिनकी दुआओं से हमारी ज़िंदगियाँ आबाद हैं,
जिनकी मेहनत और कुर्बानियों से हमारी पहचान बाक़ी है।

इस्लाम सिर्फ़ नमाज़, रोज़ा और इबादत का नाम नहीं —
इस्लाम नसब की हिफ़ाज़त, रिश्तों को ज़िंदा रखने
और अपनी नस्लों को पहचान देने का नाम भी है।


इसी दीन की रौशनी में, इसी एहसास के साथ
पैदाइशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार–बढ़ई बिरादरी की
देश की सबसे बड़ी और ख़िदमतगुज़ार तंजीम
“मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट” (रजिस्टर्ड ऑल इंडिया)
एक ऐसा काम शुरू करने जा रही है
जो न सिर्फ़ क़ाबिले-फ़ख़्र है
बल्कि क़ाबिले-सवाब भी है।

SIR (Social Information Register) — “मुल्तानी घराना”

यह सिर्फ़ एक रिकॉर्ड नहीं,
यह हमारी नस्लों की अमानत है।

“मुल्तानी घराना” दरअसल हमारी बिरादरी का
मुकम्मल शिजरा-ए-नसब (Family Tree) है —
जिसके ज़रिए हम अपने पर-परदादा, पर-परदादी, परदादा, परदादी,
परनाना, परनानी
और तमाम बुज़ुर्गों को
फिर से ज़िंदा कर रहे हैं —
कम से कम यादों में, दुआओं में और इतिहास में।

इस्लाम क्या चाहता है हमसे ?

इस्लाम चाहता है कि:

  • हम अपने बुज़ुर्गों को भूलें नहीं
  • उनकी पहचान मिटने न दें
  • और आने वाली नस्लों को यह बता सकें
    कि तुम किस खानदान से हो, तुम्हारा अस्ल क्या है

आज अगर हमने अपने बुज़ुर्गों के फ़ोटो, नाम और रिश्ते
महफूज़ नहीं किए,
तो कल हमारी आने वाली नस्लें
सिर्फ़ नाम की मुसलमान होंगी —
नसब की पहचान से महरूम।

आपकी ज़िम्मेदारी — एक दीनि अमानत

आज आपसे गुज़ारिश है,
बल्कि दीन के वास्ते अपील है कि:

  • अपने तमाम बुज़ुर्गों के फ़ोटो
  • चाहे वे इस दुनिया में हों या अल्लाह को प्यारे हो चुके हों
  • अपनी पूरी फैमिली, कुनबा, खानदान और रिश्तेदारों
    के नाम और रिश्तों की मुकम्मल लिस्ट

आज ही तैयार कर लें।

क्योंकि बहुत जल्द
“मुल्तानी घराना” की टीम
आपके दरवाज़े पर दस्तक देने वाली है।

उस वक़्त अगर आपने तैयारी कर रखी होगी,
तो समझिए आपने:

  • अपने बुज़ुर्गों का हक़ अदा किया
  • अपनी नस्लों को पहचान दी
  • और एक नेक काम में शरीक होकर
    सवाब का ज़खीरा जमा किया।

यह काम एक इंसान का नहीं — पूरी उम्मत का है

यह सिर्फ़ ट्रस्ट का मिशन नहीं,
यह पूरी मुल्तानी बिरादरी की
दीनि और अख़लाक़ी ज़िम्मेदारी है।

और यक़ीन जानिए —
अल्लाह उस कौम को कभी ज़वाल नहीं देता
जो अपनी जड़ों से जुड़ी रहती है।

तो आइए,
दीन के नाम पर,
इस्लाम की तालीम के नाम पर,
अपने बुज़ुर्गों की याद और पहचान को
हमेशा के लिए महफूज़ कर लें।

“मुल्तानी घराना” — नस्लों की पहचान, दुआओं की अमानत


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🕊️ बिरादरी में ग़म की लहर: एक नौजवान व बुज़ुर्ग की जुदाई, हर आंख नम 🕊️


निहायत ही दुःख और अफ़सोस के साथ तमाम बिरादराना हजरात को यह इत्तिला दी जाती है कि बीती रात दिन इतवार, बा-तारीख़ 01 फ़रवरी 2026 को तक़रीबन 11:45 बजे जनाब मोहम्मद सूफियान के लख़्त-ए-जिगर मोहम्मद जुनैद का क़ज़ा-ए-ईलाही से इंतिक़ाल हो गया। मरहूम की उम्र तक़रीबन 26 वर्ष थी।

यह दुखद खबर सुनते ही पूरे इलाके और बिरादरी में शोक की लहर दौड़ गई। कम उम्र में इस तरह की जुदाई ने हर दिल को ग़मज़दा कर दिया है।

मरहूम का पता:
गांव मलकपुर वाले, गुराना रोड, निकट डॉक्टर पाण्डेय, बड़ौत, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश।

अल्लाह तआला मरहूम को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फरमाए और तमाम अहल-ए-ख़ाना को इस सदमे को बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ और सब्र अता फरमाए। आमीन।

नोट: मय्यत से मुताल्लिक़ किसी भी प्रकार की अतिरिक्त जानकारी के लिए
सुभान मेडिकल स्टोर, मोहम्मद रिज़वान साहब
मोबाइल नंबर: 9457567860
पर राब्ता किया जा सकता है।


🕯️ इंतेकाल की दूसरी दुःखद ख़बर 🕯️

इसी सिलसिले में एक और बेहद रंजो-ग़म भरी खबर हमें मिली है कि जनाब अब्दुल ग़फ्फ़ार साहब, निवासी गांव ( शिकोहपुर/नांदनौर वाले ) गौरीपुर जिला बागपत उप्र  का आज बरोज पीर, बा-तारीख़ 02 फ़रवरी 2026, सुबह तक़रीबन 3:30 बजे,क़ज़ा-ए-ईलाही से इंतिक़ाल हो गया है। मरहूम की उम्र तक़रीबन 80 साल बताई जा रही है।

मरहूम को 
गौरीपुर निवाड़ा, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश में दफ़नाया जाएगा।
मय्यत को बाद नमाज़-ए-ज़ोहर सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम बिरादराना हजरात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर सवाब-ए-दारेन हासिल करें।
अल्लाह तआला मरहूम की मग़फिरत फरमाए और उनके घर वालों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।


📢 एक ज़रूरी ऐलान – इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर देखने में आता है कि इंतेकाल की खबर देर से या अधूरी जानकारी के साथ पहुंचती है, जिसकी वजह से बिरादरी के लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से दरख़्वास्त करती है कि जब भी किसी अज़ीज़ के इंतिक़ाल की खबर भेजें तो इन बातों का ख़ास तौर पर ख़याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता (स्थायी व वर्तमान निवास)।
3️⃣ दफ़ीन का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स के एक या दो मोबाइल नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतिक़ाल हुआ हो तो मरहूम की फोटो।
6️⃣ इंतिक़ाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ घर के बाक़ी अहल-ए-ख़ाना के नाम (माता-पिता, भाई-बहन, औलाद आदि)।

👉 इन तमाम जानकारियों से खबर मुकम्मल होती है और बिरादरी तक सही और वक़्त पर सूचना पहुंच पाती है।


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ख़िदमत-ए-ख़ल्क की मिसाल: खतौली व सरधना में क़ुरआन-ए-मजीद और जानमाज़ तक़सीम का मुबारक प्रोग्राम

खतौली / सरधना (उत्तर प्रदेश)। 
निहायत अदब और एहतराम के साथ अहले-बिरादरान को इत्तिला दी जाती है कि कल बा-तारीख़ 2 फ़रवरी 2026, बरोज़ पीर, को कस्बा खतौली, ज़िला मुज़फ्फरनगर (उ.प्र.) में ख़िदमत-ए-ख़ल्क का एक ख़ैर-ओ-बरकत से भरपूर और नेक नियत पर आधारित प्रोग्राम मुनअक़िद किया जा रहा है।

इस मुबारक मुहिम के तहत, इंशाअल्लाह खतौली एवं सरधना, ज़िला मेरठ (उ.प्र.) में ज़रूरतमंद और मुस्तहिक़ अफ़राद के दरमियान क़ुरआन-ए-मजीद और जानमाज़ की तक़सीम अमल में लाई जाएगी। यह नेक क़दम समाज में दीनी बेदारी, आपसी मोहब्बत और इंसानियत की ख़िदमत का एक बेहतरीन नमूना है।

इस पाक और ख़ैराती काम में बिरादरी के कई जज़्बाती, हमदर्द और ख़ैर-ख़्वाह अफ़राद बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। इनमें
दिल्ली से हाजी सगीर साहब,
खतौली से हाजी नसीम साहब, मिर्ज़ा नौशाद साहब, जमीरउद्दीन साहब,
बुढ़ाना से यासमीन बाजी,
कुशवली से भाई मूसा अफ़ज़ल मिर्ज़ा व कामिल साहब,
सरधना से
शाहनवाज़ मिर्ज़ा,
और शामली से रेशमा ज़मीर (अहलिया ज़मीर आलम) — मुल्तानी घराना डॉट कॉम के फ़ाउंडर — अपनी क़ीमती ख़िदमात पेश कर रहे हैं।

कार्यक्रम के आयोजकों ने तमाम अहले-ख़ैर हज़रात से अपील की है कि जो भी इस नेक मुहिम में शरीक होकर सवाब-ए-दारेन हासिल करना चाहते हों, वे मिर्ज़ा नौशाद साहब (फलावदा वाले) या अफ़ज़ल मिर्ज़ा (कुशवली वाले), हाल बाशिंदे खतौली से राब्ता क़ायम फ़रमाएँ।

दुआ है कि अल्लाह तआला इस ख़िदमत-ए-ख़ल्क को अपने बारगाह में क़ुबूल फ़रमाए, इस नेक कोशिश को जारी रखने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए और इसे समाज के लिए रहनुमाई का ज़रिया बनाए—आमीन।


✍️ खास रिपोर्ट:
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खतौली / सरधना से:
शाहनवाज़ मिर्ज़ा एवं अफ़ज़ल मिर्ज़ा

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Saturday, January 31, 2026

🕊️ रूह कंपा देने वाली जुदाई — जनाब मोहसिन साहब का इंतकाल, एक पूरा दौर ख़ामोशी से विदा हो गया

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और गहरे अफ़सोस के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तला दी जाती है कि आज दिन इतवार, बा-तारीख़ 01 फ़रवरी 2026 को गांव ताना, जिला शामली (उत्तर प्रदेश) के बुज़ुर्ग, शरीफ़ और नेकदिल इंसान जनाब मोहसिन साहब (उम्र 87 वर्ष) वल्द जनाब नसीबुद्दीन साहब (मरहूम) का बीती रात तक़रीबन 2 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया।

इस दुखद ख़बर ने न सिर्फ़ उनके ख़ानदान बल्कि पूरे इलाके और बिरादरी को ग़मगीन कर दिया है।

मरहूम मोहसिन साहब एक सादा-मिज़ाज, सब्र-ओ-शुक्र वाले और ख़ानदानी रिवायतों को निभाने वाले बुज़ुर्ग थे। अल्लाह ने उन्हें लंबी उम्र अता फ़रमाई, मगर ज़िंदगी के इस सफ़र में उन्होंने एक-एक कर अपने क़रीबी अज़ीज़ों को खोने का ग़म भी झेला।
मरहूम के तीन भाई और एक बहन थे —
शरीफ़ अहमद (मरहूम), डॉक्टर अशरफ़ (मरहूम) और बहन कनीज़ बी मरहूमा (नानौता)
उनकी अहलिया का भी काफ़ी अरसा पहले इंतेकाल हो चुका था।

दर्दनाक पहलू यह भी है कि मरहूम के दोनों बेटे
मोहम्मद साजिद (मरहूम) और मोहम्मद राशिद (मरहूम) — पहले ही इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत हो चुके थे।
आज मरहूम अपने पीछे पोते-पोतियाँ, नाते-नातिनें, और एक भरा-पूरा कुनबा, ख़ानदान और तमाम अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को ग़म और यादों के साए में छोड़कर हमेशा-हमेशा के लिए विदा हो गए।

📿 दुआ है कि अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनके दर्जात बुलंद करे, क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए और तमाम पसमांदा अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।

🕯️ तदफ़ीन की इत्तला:
मरहूम की मय्यत को गांव बुन्दुगढ़ (नानौता), जिला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश में सपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।
तमाम हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएँ और सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

📞 नोट:
मय्यत के सिलसिले में किसी भी तरह की और ज़्यादा मालूमात के लिए मरहूम के भतीजे जनाब आफ़ताब साहब से इस नंबर पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है:
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🛑 एक ज़रूरी ऐलान — इंतेकाल की ख़बर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर देखने में आता है कि इंतेकाल की ख़बर या तो देर से पहुँचती है या अधूरी जानकारी की वजह से लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस अहम कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से दरख़्वास्त करती है कि इंतेकाल की ख़बर भेजते वक़्त इन बातों का ख़ास ख़याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता — स्थायी निवास और मौजूदा ठिकाना।
3️⃣ तदफ़ीन का सही वक़्त और क़ब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स (एक या दो) के मोबाइल नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतेकाल हुआ हो तो मरहूम की फोटो (मुमकिन हो तो)।
6️⃣ इंतेकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब समझें)।
7️⃣ घर के बाक़ी अहल-ए-ख़ाना — भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वग़ैरह।

👉 इन तमाम जानकारियों से ख़बर मुकम्मल होती है और बिरादरी तक सही, साफ़ और वक़्त पर इत्तला पहुँचती है।


📰 डिस्क्लेमर

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देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज”

✍️ ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट

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🕊️ अल्लाह मरहूम को जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए। आमीन।