Sunday, June 14, 2026

हज 2026 के मुबारक सफ़र से लौटे हाजियों के सम्मान में आयोजित हुई शानदार दावत, फूलों और मोहब्बत से हुआ इस्तकबाल

शामली से ज़मीर आलम की विशेष रिपोर्ट

शामली। हज जैसे मुक़द्दस और रूहानी सफ़र से लौटने वाले हाजियों का सम्मान करना इस्लामी परंपराओं और सामाजिक भाईचारे की खूबसूरत मिसाल माना जाता है। इसी सिलसिले में शामली शहर के मोहल्ला सलेक विहार निवासी समाजसेवी हाजी नूरमोहम्मद साहब (स्टेयरिंग वालों की) की ओर से शनिवार, 13 जून 2026 को अपने निजी मुक़ाम पर हज 2026 से लौटे हाजियों के सम्मान में एक मोहब्बत से लबरेज दावत एवं इस्तकबाल कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में जिला मुजफ्फरनगर , उत्तर प्रदेश के कस्बा खतौली समेत विभिन्न इलाकों से हज 2026 का पाक सफ़र पूरा करके लौटे हाजियों ने शिरकत की। इस अवसर पर मेहमानों का फूलों के हार, गुलदस्तों और दुआओं के साथ गर्मजोशी से इस्तकबाल किया गया। मौजूद मेहमानों ने हाजियों से मुलाकात कर उन्हें हज की मुबारकबाद पेश की और उनके तजुर्बों और सफ़र के दौरान की वाकयो को भी सुना।

इस मुबारक़ मौके पर हाजी नूरमोहम्मद साहब की अहलिया मुसर्रत बी ने भी ख़ास तौर पर हज से लौटी हज्जनों का बेहद गर्मजोशी से इस्तकबाल किया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने परिवार की मेहमाननवाज़ी और बेहद दीनी माहौल की खुलकर तारीफ की।

शहर के लोगों के मुताबिक हाजी नूरमोहम्मद साहब और उनकी फैमिली लंबे समय से दीनी, सामाजिक एवं जनता की भलाई से जुड़े हर कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। समय-समय पर विभिन्न धार्मिक विद्वानों, हाजियों, उमराह यात्रियों और समाज के प्रतिष्ठित लोगों के सम्मान में भी कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न सामाजिक, शैक्षिक और जनहित के कार्यों से जुड़ी संस्थाओं के साथ भी उनका सहयोग बना रहता है।

कार्यक्रम के दौरान आपसी भाईचारे, सामाजिक एकता और इंसानियत की सेवा के महत्व पर भी चर्चा हुई। उपस्थित लोगों ने इस प्रकार के आयोजनों को समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव और पारस्परिक सम्मान को बढ़ावा देने वाला बताया।

हज से लौटे मेहमानों ने आयोजकों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि इस तरह का सम्मान और मोहब्बत भरा माहौल उनके लिए यादगार रहेगा। कार्यक्रम का समापन दुआओं और एकसाथ बैठकर खाने के साथ हुआ।


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Saturday, June 13, 2026

कच्ची गढ़ी निवासी तौकीर अहमद का इंतिकाल, परिवार और बिरादरी में शोक की लहर, इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

ज़िंदगी और मौत अल्लाह तआला के हाथ में है। हर इंसान को एक दिन अपने रब की बारगाह में हाज़िर होना है। इसी हकीकत की याद दिलाते हुए मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी को एक और गमगीन खबर मिली है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार गांव कच्ची गढ़ी, तहसील ऊन, जिला शामली निवासी जनाब तौकीर अहमद वल्द मरहूम जनाब अब्दुल हकीम साहब का बीती रात चंडीगढ़ के एक अस्पताल में इलाज के दौरान इंतिकाल हो गया। मरहूम की उम्र लगभग 45 वर्ष बताई गई है।

मरहूम तौकीर अहमद अपने परिवार में चार भाइयों और दो बहनों में सबसे छोटे थे। उनके दो भाई चंडीगढ़ में तथा दो भाई उत्तर प्रदेश के जनपद शामली स्थित कस्बा थानाभवन में निवास करते हैं। मरहूम स्वयं भी चंडीगढ़ में रहकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे।

उनके इंतिकाल की खबर मिलते ही परिवार, रिश्तेदारों, मित्रों और बिरादरी में गहरा दुख और शोक व्याप्त हो गया। मरहूम अपने पीछे अपनी वालिदा, अहलिया, चार भाइयों, दो बहनों, दो बेटों, एक बेटी तथा तमाम रिश्तेदारों और चाहने वालों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।

मिली जानकारी के अनुसार मरहूम का पार्थिव शरीर चंडीगढ़ से कस्बा थानाभवन लाया जाएगा। इसके बाद नई बस्ती, विजय वाटिका के पीछे स्थित जनाब तौसीफ साहब के निवास पर अंतिम दीदार के लिए रखा जाएगा। तत्पश्चात कस्बा थानाभवन के गौरे गरीबा कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

इस दुखद अवसर पर हम सभी अल्लाह तआला की बारगाह में दुआ करते हैं कि वह मरहूम तौकीर अहमद की तमाम खतााओं को माफ फरमाए, उनकी मगफिरत फरमाए, उनकी कब्र को नूर से भर दे, उसे जन्नत के बागों में से एक बाग बना दे और उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए। आमीन।

अल्लाह तआला मरहूम की कब्र को वसीअ फरमाए, हश्र के दिन उन्हें नेक बंदों के साथ उठाए और उनकी तमाम नेकियों को उनके लिए सदका-ए-जारीया बनाए। आमीन।

साथ ही हम दुआगो हैं कि अल्लाह तआला उनकी वालिदा, पत्नी, बच्चों, भाइयों, बहनों तथा समस्त अहल-ए-खाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए और इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की ताकत प्रदान करे।

मरहूम के संबंध में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए उनके बड़े भाई जनाब मुस्तकीम साहब से मोबाइल नंबर 7520140083 पर संपर्क किया जा सकता है।

निस्संदेह हर जान को मौत का स्वाद चखना है और अंततः अपने रब की ओर लौटना है। अल्लाह मरहूम पर अपनी रहमतों की बारिश फरमाए और उन्हें अपनी जन्नत में बेहतर ठिकाना अता करे।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।


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शामली की फातिमा बी का इंतिकाल, परिवार और बिरादरी में शोक की लहर, इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

मौत एक ऐसी हकीकत है जिससे कोई भी इंकार नहीं कर सकता। हर इंसान को एक दिन अपने रब के सामने हाजिर होना है। इसी कड़वी सच्चाई के साथ आज मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी को एक और गमगीन खबर मिली है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार मोहल्ला सरवर पीर, जनपद शामली निवासी जनाब मोहम्मद यासीन साहब (मूल निवासी गांव गंगेरू, ब्लॉक कांधला, जिला शामली) की अहलिया मोहतरमा फातिमा बी ( मायका झिंझाना जिला शामली) का आज दिन शनिचर, 13 जून 2026 को लगभग साढ़े 12 बजे कजा ए - ईलाही से इंतिकाल हो गया। मरहूमा की उम्र लगभग 52 वर्ष बताई गई है।

मरहूमा फातिमा बी अपने पीछे अपने शौहर जनाब मोहम्मद यासीन साहब, दो बेटे, दो बेटियां तथा पूरा भरा-पूरा परिवार, रिश्तेदार और अजीज-ओ-अकारिब छोड़ गई हैं। उनके इंतिकाल की खबर सुनते ही परिवार और समाज में गहरा दुख व्याप्त हो गया तथा शोक संवेदनाओं का सिलसिला शुरू हो गया।

मिली जानकारी के अनुसार मरहूमा की नमाज़-ए-जनाज़ा बाद नमाज़ ईशा अदा की जाएगी, जिसके बाद मोहल्ला गुलशन नगर स्थित टायर मार्किट कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। बिरादरी और क्षेत्र के लोगों से अपील की गई है कि वे जनाज़े में शरीक होकर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मगफिरत करें और दुखी परिवार के साथ अपनी हमदर्दी का इज़हार करें।

हम सभी अल्लाह तआला की बारगाह में हाथ उठाकर दुआ करते हैं कि अल्लाह मरहूमा फातिमा बी की तमाम खताओं को माफ फरमाए, उनकी कब्र को नूर से भर दे, उसे जन्नत के बागों में से एक बाग बना दे और उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए। आमीन।

अल्लाह तआला मरहूमा के शौहर, बेटों, बेटियों, समस्त परिवार, रिश्तेदारों और चाहने वालों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए तथा इस सदमे को बर्दाश्त करने की ताकत प्रदान करे। आमीन या रब्बुल आलमीन।

मरहूमा के संबंध में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए उनके शौहर जनाब मोहम्मद यासीन साहब से मोबाइल नंबर 8059673450 पर संपर्क किया जा सकता है।

बेशक़ यह दुनिया एक अस्थायी पड़ाव है और हर इंसान को अपने रब की ओर लौटना है। अल्लाह तआला मरहूमा की मगफिरत फरमाए और उन्हें अपनी रहमतों के साए में जगह अता करे।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

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गंगेरू की जरीना बी का इंतिकाल, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर, इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

दुनिया की जिंदगी एक अमानत है और हर जान को एक दिन अपने रब की बारगाह में हाज़िर होना है। इसी हकीकत की याद दिलाते हुए गांव गंगेरू, ब्लॉक कांधला, तहसील कैराना, जनपद शामली से एक बेहद गमगीन खबर सामने आई है।

निहायत ही रंज व गम के साथ यह इत्तला प्राप्त हुई है कि गांव गंगेरू निवासी मरहूम जनाब अमीर अहमद साहब वल्द मरहूम जनाब बशीर अहमद साहब की अहलिया, मोहतरमा जरीना बी का आज दिनांक 13 जून 2026 को सुबह लगभग 9 बजे कजा ए - ईलाही से इंतिकाल हो गया। मरहूमा की उम्र लगभग 75 वर्ष बताई गई है। उनका मायका जिला सोनीपत (हरियाणा) में था।

मरहूमा जरीना बी अपने पीछे तीन बेटों, चार बेटियों, नाती-पोतों, रिश्तेदारों और अजीज-ओ-अकारिब का भरा-पूरा कुनबा छोड़कर इस फानी दुनिया से रुख्सत हो गईं। उनके इंतिकाल की खबर सुनते ही परिवार, रिश्तेदारों और क्षेत्र के लोगों में गहरा दुख व्याप्त हो गया।

जानकारी के अनुसार मरहूमा का जनाजा आज बाद नमाज असर उठाया जाएगा तथा उन्हें स्थानीय कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। क्षेत्र के लोगों से अपील की गई है कि जनाजे में शरीक होकर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मगफिरत करें और उनके परिवार के दुख में सहभागी बनें।

अल्लाह तआला मरहूमा जरीना बी की तमाम खताओं को माफ फरमाए, उनकी मगफिरत फरमाए, उनकी कब्र को नूर से भर दे, उसे जन्नत के बागों में से एक बाग बना दे और उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए। आमीन।

साथ ही अल्लाह तआला उनके तमाम अहल-ए-खाना, बेटों, बेटियों, रिश्तेदारों और चाहने वालों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए तथा इस सदमे को बर्दाश्त करने की तौफीक प्रदान करे। आमीन या रब्बुल आलमीन।

मरहूमा के संबंध में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए जनाब अब्दुल करीम साहब से मोबाइल नंबर 9548250005 पर संपर्क किया जा सकता है।

दुआ है कि अल्लाह तआला मरहूमा की कब्र पर अपनी रहमतों की बारिश फरमाए और उन्हें अपनी बेपनाह रहमतों के साए में जगह अता करे।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

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Friday, June 12, 2026

शंकरपुर, देहरादून के जनाब मुहम्मद मूसा साहब का इंतिक़ाल, आज बाद नमाज़-ए-ईशा अदा की जाएगी नमाज़-ए-जनाज़ा

देहरादून (उत्तराखंड) से एक अत्यंत दुःखद और ग़मगीन ख़बर सामने आई है। अत्यंत अफ़सोस और रंजो-ग़म के साथ यह सूचना प्राप्त हुई कि जनाब मुहम्मद मूसा साहब, निवासी गाँव शंकरपुर, पोस्ट रामपुर कलां, जिला देहरादून (उत्तराखंड) का आज बरोज़ जुमा, 12 जून 2026 को क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

मरहूम के इंतिक़ाल की ख़बर से परिवार, रिश्तेदारों, अज़ीज़ो-अक़ारिब, दोस्तों तथा पूरे बिरादरी समाज में शोक की लहर दौड़ गई है। यह संसार फानी है और हर जीव को एक दिन अपने रब के सामने हाज़िर होना है। जनाब मुहम्मद मूसा साहब अपने अच्छे अख़लाक़, मिलनसार स्वभाव और समाज में सम्मानित व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते थे। उनके इंतिक़ाल से एक ऐसा ख़ला पैदा हुआ है जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी।

परिवार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा आज बाद नमाज़-ए-ईशा, मदरसा अज़मत-उल-क़ुरआन, गाँव शंकरपुर (देहरादून) में अदा की जाएगी, जिसके बाद उन्हें सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा, इंशा अल्लाह।

इस दुख की घड़ी में हम सभी अहले-ख़ाना और तमाम पसमांदगान के ग़म में बराबर के शरीक हैं। अल्लाह तआला मरहूम की तमाम ख़ताओं को माफ़ फरमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुक़ाम अता फरमाए और उनके पीछे रह जाने वाले अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील नसीब फरमाए। आमीन।

तमाम बिरादराना हज़रात और अहबाब से पुरख़ुलूस गुज़ारिश है कि मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फिरत करें, सूरह फ़ातिहा और दुरूद शरीफ़ का एहतेमाम करें तथा उनके लिए बख़्शिश और रहमत की दुआ करें।

मय्यत से संबंधित अधिक जानकारी के लिए मरहूम के बड़े भाई जनाब गुलाम मुस्तफ़ा साहब से मोबाइल नंबर 9458980786 पर संपर्क किया जा सकता है।

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दुआ-ए-मग़फिरत

«"ऐ अल्लाह! मरहूम मुहम्मद मूसा साहब की मग़फिरत फ़रमा, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे, उनके दर्जात बुलंद फ़रमा, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में जगह अता फ़रमा और तमाम अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील नसीब फ़रमा। आमीन या रब्बल आलमीन।"»

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज पोर्टल/यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए देहरादून (उत्तराखंड) से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की विशेष रिपोर्ट।

यदि आप भी अपनी कोई खबर, लेख, संदेश, सामाजिक गतिविधि, किस्सा, कहानी अथवा विज्ञापन प्रकाशित या प्रसारित कराना चाहते हैं तो निम्नलिखित नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:

मो.: 9410652990, 8010884848

Thursday, June 11, 2026

मुल्तानी लोहार बिरादरी के बुज़ुर्ग हाजी मुहम्मद चमन साहब का इंतिकाल, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर

बागपत। बड़े ही रंजो-ग़म और अफ़सोस के साथ यह समाचार प्राप्त हुआ कि मुल्तानी लोहार बिरादरी के सम्मानित बुज़ुर्ग, नेकदिल और समाज में अपनी सादगी तथा खुशअख़लाक़ी के लिए पहचाने जाने वाले जनाब हाजी मुहम्मद चमन साहब पुत्र वल्द मोहम्मद नसीबुद्दीन ( मरहूम ) का आज बरोज़ जुमा, 12 जून 2026 को तड़के लगभग 3:30 बजे इंतिकाल हो गया। मरहूम की उम्र लगभग 98 वर्ष थी।

मरहूम मूल रूप से खेड़ा हटाने वाले परिवार से संबंध रखते थे तथा वर्तमान में गौरीपुर, जनपद बागपत , उत्तर प्रदेश में निवास कर रहे थे। अपने लंबे जीवनकाल में उन्होंने समाज और परिवार के बीच सम्मान, मोहब्बत और भाईचारे की मिसाल कायम की। उनके इंतिकाल की खबर सुनते ही रिश्तेदारों, मित्रों और बिरादरी के लोगों में गहरा दुख व्याप्त हो गया।

हाजी मुहम्मद चमन साहब अपने पीछे अज़ीज़ो-अक़ारिब, चाहने वालों और एक बड़ा परिवार छोड़ गए हैं, जो उनकी कमी को हमेशा महसूस करेगा। उनकी सादगी, नेकनीयती और मिलनसार स्वभाव की यादें हमेशा लोगों के दिलों में ज़िंदा रहेंगी।

ख़बर लिखे जाने तक मरहूम की मय्यत के दफ़नाने का समय तय नहीं हो पाया था। जैसे ही दफ़न से संबंधित जानकारी हासिल होगी, उसे बिरादरी और आम लोगों तक पहुंचाया जाएगा।

मुस्लिम मुल्तानी लोहार बिरादरी तथा समस्त अहले-ईमान से गुज़ारिश है कि मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फिरत करें और अल्लाह तआला से उनकी बख्शिश की दुआ मांगें।

दुआ:

"ऐ अल्लाह! मरहूम हाजी मुहम्मद चमन साहब की मग़फिरत फरमा, उनकी कब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे, उनकी तमाम खताओं को माफ़ फरमा और उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मकाम अता फरमा। उनके अहले-ख़ाना, रिश्तेदारों और तमाम चाहने वालों को सब्र-ए-जमील अता फरमा। आमीन सुम्मा आमीन। मैय्यत को बाद नमाज़ असर की नमाज़ 5:30 बजे गौरीपुर में ही गौरीपुर के कब्रस्तान में किए जाएगा सपुर्द - ए - ख़ाक, लिहाजा आप हजरात भी जनाजे में शरीक हॉकर सवाबे दारेन हासिल करें।

मरहूम के बारे में संबंधित जानकारी के लिए संपर्क करें:

📞 8630433158
📞 9457567860 (मुहम्मद रिज़वान, सुभान मेडिकल स्टोर)

— ज़मीर आलम
प्रधान संपादक, मुल्तानी समाज
बागपत, उत्तर प्रदेश

Wednesday, June 10, 2026

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन: मोहल्ला नौ-कुआँ शामली में शोक की लहर, जनाब मोहम्मद इस्लाम साहब का इंतकाल

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन, शामली के मोहल्ला नौ-कुआँ में शोक की लहर, जनाब मोहम्मद इस्लाम साहब अपने रब से जा मिले

शामली, उत्तर प्रदेश। मौत एक ऐसी हकीकत है जिससे कोई इंकार नहीं कर सकता। हर जान को एक न एक दिन अपने पैदा करने वाले रब की बारगाह में हाजिर होना है। इसी हकीकत के साथ आज शामली जनपद से एक बेहद गमगीन खबर सामने आई है, जिसने परिवार, रिश्तेदारों, बिरादरी और जानने वालों की आंखों को नम कर दिया।

मिली जानकारी के अनुसार गांव हाथी करौदा, जिला शामली के मूल निवासी तथा वर्तमान में मोहल्ला नौ-कुआँ, शामली में रह रहे जनाब मोहम्मद इस्लाम साहब पुत्र जनाब मोहम्मद मजीद साहब का बुधवार, 10 जून 2026 को लगभग दोपहर 2 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया। मरहूम की उम्र लगभग 75 वर्ष बताई गई है।

जनाब मोहम्मद इस्लाम साहब अपने पीछे एक भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके परिवार में दो बेटे जनाब मोहम्मद इकराम एवं जनाब मोहम्मद इरफान सहित बेटियां और अन्य परिजन शामिल हैं। इसके अलावा पौते-पोतियां, नाती-नातिन तथा अज़ीज़-ओ-अकारिब की बड़ी तादाद है, जो आज इस दुखद पलों में गहरे सदमे और गम में डूबी हुई है।

मरहूम के इंतकाल की खबर फैलते ही मोहल्ले और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। ताज़ियत पेश करने वालों का सिलसिला लगातार जारी है। हर जुबान पर मरहूम के लिए दुआ और हर आंख में उनके बिछड़ने का गम दिखाई दे रहा है।

परिवार और परिचितों के अनुसार जनाब मोहम्मद इस्लाम साहब एक नेक, शरीफ, मिलनसार और खुशमिजाज इंसान थे। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी रिश्तों को निभाने, लोगों की इज्जत करने और परिवार को जोड़कर रखने में गुजारी। यही वजह है कि उनके इंतकाल की खबर ने अनेक लोगों को भावुक कर दिया।

मिली जानकारी के अनुसार मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा आज बाद नमाज़ ईशा अदा की जाएगी। इसके बाद मोहल्ला गुलशन नगर, शामली स्थित कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। परिवार की ओर से तमाम बिरादरान, दोस्तों और अज़ीज़-ओ-अकारिब से जनाज़े में शिरकत कर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फिरत करने की गुजारिश की गई है।

इस दुखद मौके पर "मुल्तानी समाज" परिवार मरहूम के परिजनों के साथ अपनी गहरी हमदर्दी रखता है और अल्लाह तआला से दुआ करता है कि वह मरहूम की तमाम खताओं को माफ फरमाए, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए तथा उनके पीछे रह जाने वाले परिवार को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।

दुआ-ए-मग़फिरत

"ऐ अल्लाह! मरहूम मोहम्मद इस्लाम साहब की मग़फिरत फरमा, उनकी क़ब्र को जन्नत के बागों में से एक बाग बना, उनके दर्जात बुलंद फरमा, उन्हें हिसाब-किताब में आसानी अता फरमा और जन्नतुल फिरदौस में आला से आला मुकाम नसीब फरमा। आमीन।"

दुआ-ए-दफ़्न

"ऐ अल्लाह! मरहूम की मंज़िल आसान फरमा, क़ब्र की तन्हाई को रहमत से भर दे, उसे नूर का घर बना दे और हश्र के दिन उन्हें अपने नेक बंदों के साथ उठाना। आमीन।"

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

— ज़मीर आलम
प्रधान संपादक
"मुल्तानी समाज" राष्ट्रीय समाचार पत्रिका / न्यूज़ पोर्टल / यूट्यूब चैनल