पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी से आज दो बेहद अफ़सोसनाक और दिल को ग़मगीन कर देने वाली खबरें हासिल हुई हैं, जिनसे पूरे इलाके में रंजो-ग़म की लहर दौड़ गई। दोनों मरहूमीन अपने अच्छे अख़लाक, मिलनसारी और नेक सीरत की वजह से बिरादरी में खास पहचान रखते थे। उनके इंतेकाल की खबर सुनकर हर आंख अश्कबार है और लोग उनके लिए दुआ-ए-मगफिरत कर रहे हैं।
🕯️ जनाब कालू मिस्त्री साहब की अहलिया का इंतकाल
आप सभी बिरादराना हजरात को यह इत्तला दी जाती है कि आज दिन बुध बा-तारीख़ 20 मई 2026 को गांव पुसार जिला बागपत, उत्तर प्रदेश हाल बाशिंदे लोनी जिला गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश में जनाब कालू मिस्त्री साहब की अहलिया का कज़ा-ए-ईलाही से इंतेकाल हो गया।
मरहूमा के इंतकाल की खबर सुनते ही रिश्तेदारों, अजीज़ों और इलाके के लोगों में गहरा दुख फैल गया। खबर लिखे जाने तक जिम्मेदार हजरात की तरफ से दफ़ीने का वक्त मालूम नहीं हो सका था, जिसे बाद में अपडेट किया जाएगा।
अल्लाह तआला मरहूमा की मगफिरत फरमाए, उनकी कब्र को नूर से भर दे, कब्र की तमाम मंजिलों को आसान फरमाए और जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए।
अल्लाह पाक तमाम अहलेखाना को यह सदमा बर्दाश्त करने का हौसला दे और सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।
दफ़्न की दुआ:
“अल्लाहुम्मग़फिर लहा वरहम्हा व आफिहा वाफु अन्हा।”
ऐ अल्लाह! मरहूमा की मगफिरत फरमा, उन पर रहम फरमा, उन्हें आफियत अता फरमा और उनकी खताओं से दरगुज़र फरमा।
🕯️ सामाजिक कार्यकर्ता जनाब महमूद हसन साहब का इंतकाल
दूसरी ग़मगीन खबर कस्बा छपरोली जिला बागपत, उत्तर प्रदेश से हासिल हुई है, जहां बेहद मिलनसार, नेकदिल और सामाजिक कार्यकर्ता जनाब महमूद हसन साहब वल्द जनाब हाजी हकीमू साहब का कल दिन मंगल बा-तारीख 19 मई 2026 को कज़ा-ए-ईलाही से इंतेकाल हो गया।
मरहूम अपने खुशमिजाज मिज़ाज, अच्छे अख़लाक और समाजी खिदमात की वजह से इलाके में खास मुकाम रखते थे। उनके इंतकाल से बिरादरी ने एक नेक इंसान और समाज ने एक हमदर्द शख्सियत को खो दिया है। जो भी उनसे मिला, उनके अख़लाक और मोहब्बत को कभी भूल नहीं पाएगा।
मैय्यत को आज दिन बुध बा-तारीख 20 मई 2026 को सुबह कस्बा छपरोली के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। लिहाज़ा तमाम हजरात से गुजारिश है कि जनाजे में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मगफिरत करें और सवाब-ए-दारेन हासिल करें।
अल्लाह तआला मरहूम की मगफिरत फरमाए, उनकी कब्र को जन्नत के बागों में से एक बाग बनाए और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।
जनाज़े और दफ़्न की दुआ:
“अल्लाहुम्मा इन्ना फलाना फी जिम्मतिका व हब्लि जिवारिका फक़िहि मिन फित्नतिल क़ब्रि व अज़ाबिन्नार।”
ऐ अल्लाह! मरहूम को अपनी हिफाज़त और रहमत में जगह अता फरमा तथा कब्र और जहन्नम के अज़ाब से महफूज़ फरमा।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका / न्यूज पोर्टल / यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए बागपत, उत्तर प्रदेश से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।
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