Friday, February 20, 2026

🌍 “मुल्तानी घराना” — नस्लों को जोड़ने वाला डिजिटल शिजरा, जो देश ही नहीं विदेशों तक बिरादरी का नाम रोशन कर रहा है

द्वारा शुरू किया गया “मुल्तानी घराना” प्रोजेक्ट आज मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के लिए सिर्फ एक सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि हमारी पहचान, विरासत और अमानत बन चुका है। यह वह डिजिटल शिजरा है जो हमारी जड़ों को संभालते हुए आने वाली नस्लों के लिए राह रोशन कर रहा है।


🧭 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि — “मुल्तानी” पहचान की जड़ें

“मुल्तानी” पहचान का संबंध ऐतिहासिक मुल्तान क्षेत्र से माना जाता है। लोहे और लकड़ी की कारीगरी—यानी लोहार और बढ़ई का हुनर—हमारी असल पहचान रही है। रोज़गार, व्यापार और सामाजिक परिस्थितियों के चलते अलग-अलग दौर में हिजरत हुई, और बिरादरी भारत के कई राज्यों में बसती चली गई।

आज भी यह हुनर हमारी रगों में है—बस औज़ार बदले हैं, इरादे नहीं।


🗺️ भारत में राज्यवार फैलाव — मेहनत की मिसाल

🔹 उत्तर भारत (मुख्य केंद्र)

  • उत्तर प्रदेश — पश्चिमी यूपी (शामली, मुज़फ्फरनगर, मेरठ, सहारनपुर), रोहिलखंड, अवध
  • दिल्ली (NCT) — पुरानी दिल्ली, उत्तर-पूर्वी व बाहरी दिल्ली
  • हरियाणा — यमुनानगर, करनाल, पानीपत
  • पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश (सीमावर्ती क्षेत्र)

🔹 पश्चिम व मध्य भारत

  • राजस्थान — जयपुर, अजमेर, अलवर
  • गुजरात — अहमदाबाद, सूरत
  • महाराष्ट्र — मुंबई, पुणे
  • मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़

🔹 पूर्व व अन्य क्षेत्र

  • बिहार, झारखंड
  • जम्मू क्षेत्र

यह फैलाव हमारी मेहनत, हुनर और हालात से तालमेल की गवाही देता है।


🧬 नस्लनामा — सिलसिला-ए-अव्वल से आज तक

शिजरा सिर्फ नामों की सूची नहीं, बल्कि रिश्तों की अमानत है।

बुनियादी मूल:
मूल स्थान — मुल्तान
पहचान — मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई)
पारंपरिक पेशा — लोहे व लकड़ी की कारीगरी

सिलसिला-ए-अव्वल:
हाजी मुल्तानी साहब → शेख नूर मोहम्मद → हाजी करीमुद्दीन → हाजी सत्तार → मियां अब्दुल गफ्फार → मोहम्मद इस्माईल → हाजी रहमुद्दीन → हाजी सगीर अहमद → ज़मीर आलम → लारेब ज़मीर / रुशान ज़मीर

यह सिलसिला बताता है कि हम कहाँ से आए, कैसे फैले और किन-किन नामों ने इस पहचान को आगे बढ़ाया।


💻 “मुल्तानी घराना” — डिजिटल दौर की दीनी व सामाजिक ज़रूरत

ट्रस्ट ने वर्षों की मेहनत और संसाधनों से शिजरे को डिजिटल रूप दिया है, ताकि:

  • देश-विदेश में फैली बिरादरी अपने कुनबे को जोड़ सके
  • आने वाली नस्लों को सही जानकारी मिले
  • खानदान की मैपिंग आसान हो
  • विरासत हमेशा के लिए महफ़ूज़ रहे

दीनी ऐतबार से भी यह काम सवाब का ज़रिया है—
अपनी नस्ल, अपने बुजुर्गों और अपने सिलसिले को याद रखना और उसे सुरक्षित रखना एक अमानत की हिफ़ाज़त है। जब नई पीढ़ी अपने अस्ल से वाकिफ़ होगी, तो उसमें इत्तेहाद, जिम्मेदारी और खिदमत का जज़्बा और मजबूत होगा।


🤝 युवाओं के लिए सुनहरा मौका

इस प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए ऐसे पढ़े-लिखे युवक-युवतियों की ज़रूरत है जो अपने-अपने शहर से ही सॉफ्टवेयर पर काम करना चाहें।
यह सिर्फ टेक्निकल काम नहीं—यह बिरादरी की खिदमत है।


📰 बिरादरी की आवाज़

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत और दिल्ली से प्रकाशित बिरादरी की पत्रिका “मुल्तानी समाज” भी इस मुहिम को मजबूती दे रही है—ताकि हर घर तक सही जानकारी पहुंचे।


🌿 “मुल्तानी घराना” — पहली से सातवीं पीढ़ी तक नस्लों को जोड़ने वाला डिजिटल शिजरा

की जानिब से तैयार किया गया “मुल्तानी घराना” सिर्फ एक सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की नस्लों को जोड़ने वाली अमानत है। यह वह डिजिटल शिजरा है जो हमारे बुजुर्गों की याद, हमारी पहचान और आने वाली पीढ़ियों की राह को एक साथ सुरक्षित करता है।


🧭 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि — अस्ल से पहचान तक

“मुल्तानी” पहचान का रिश्ता ऐतिहासिक मुल्तान से माना जाता है। लोहे और लकड़ी की कारीगरी हमारी बुनियादी पहचान रही। वक्त के साथ रोज़गार और हालात के चलते बिरादरी भारत के अलग-अलग सूबों में फैलती चली गई—मगर अपनी तहज़ीब और दीनी जड़ों से जुड़ी रही।


🧬 पहली से सातवीं पीढ़ी तक पूरा सिलसिला

👴 पहली पीढ़ी (सिलसिला-ए-अव्वल)

हाजी मुल्तानी साहब
↳ “मुल्तानी” पहचान यहीं से मशहूर मानी जाती है।


👨‍🦳 दूसरी पीढ़ी

  1. हाजी करीमुद्दीन मुल्तानी
  2. शेख नूर मोहम्मद मुल्तानी

👨 तीसरी पीढ़ी (फैलाव की शुरुआत)

उत्तर भारत शाखा:

  • हाजी सत्तार मुल्तानी
  • मियां अब्दुल गफ्फार

पश्चिम भारत शाखा:

  • हाजी यूसुफ़ मुल्तानी
  • शेख अब्दुल वहीद

👨‍👦 चौथी पीढ़ी (राज्यवार पहचान)

  • उत्तर प्रदेश — उस्ताद इलाही बख्श, मियां रशीद अहमद
  • दिल्ली — हाजी कादिर बख्श, मियां हबीबुल्लाह
  • हरियाणा — मियां गुलाम हुसैन, शेख रज़ा मोहम्मद
  • पंजाब — हाजी फज़ल करीम, मियां खुदा बख्श
  • राजस्थान — उस्ताद नूर अहमद, मियां सलीमुद्दीन

👨‍👦‍👦 पांचवीं पीढ़ी (विस्तार काल)

  • मध्य प्रदेश — हाजी जमील अहमद, शेख बशीर अहमद
  • गुजरात — हाजी इस्माइल मुल्तानी, मियां अज़ीज़ अहमद
  • उत्तराखंड — हाजी रशीद अहमद, शेख नज़ीर अहमद

👨‍👧‍👦 छठी पीढ़ी (आधुनिक दौर)

  • महाराष्ट्र — हाजी अब्दुल मजीद, शेख अनीस अहमद
  • बिहार — हाजी लतीफ़ अहमद
  • झारखंड — मियां हामिद अली
  • छत्तीसगढ़ — हाजी वहीद अहमद
  • हिमाचल प्रदेश — मियां नूर मोहम्मद
  • जम्मू — हाजी अब्दुल रऊफ

🧑‍💼 सातवीं पीढ़ी (वर्तमान और भविष्य)

आज की पीढ़ी — जो शिक्षा, व्यापार, सरकारी-गैरसरकारी नौकरी, टेक्नोलॉजी और समाजसेवा में आगे बढ़ रही है — अपने-अपने शहरों में खानदान, कुनबा और घराना के नाम से पहचानी जाती है।

यही पीढ़ी “मुल्तानी घराना” डिजिटल शिजरे के जरिए अपनी जड़ों को आने वाली नस्लों तक पहुंचा रही है।


💻 “मुल्तानी घराना” — दीनी और सामाजिक फायदे

  • नस्ल और सिलसिले की सही जानकारी महफ़ूज़ रहती है
  • आने वाली पीढ़ियां अपने बुजुर्गों से जुड़ी रहती हैं
  • बिरादरी में इत्तेहाद और पहचान मजबूत होती है
  • गलतफहमियों और बिखराव से बचाव होता है
  • दीनी एतबार से अपने अस्ल और बुजुर्गों को याद रखना सवाब का ज़रिया है

यह प्रोजेक्ट वर्षों की मेहनत, समय और संसाधनों से तैयार किया गया ताकि देश-विदेश में फैली बिरादरी एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जुड़ सके।


🤝 युवाओं के लिए पैग़ाम

ट्रस्ट को ऐसे पढ़े-लिखे युवक-युवतियों की जरूरत है जो अपने शहर से ही इस सॉफ्टवेयर पर काम कर सकें। यह सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि अपनी कौम की खिदमत है।


✨ आख़िरी बात

“मुल्तानी घराना” सिर्फ नाम नहीं—
यह हमारी पहचान, हमारी तहज़ीब और हमारी नस्लों को जोड़ने वाली कड़ी है।

आइए, अपने शिजरे को अपडेट करें, अपनी जानकारी दर्ज कराएं और इस धरोहर को मजबूत बनाएं—ताकि आने वाली नस्लें फख्र से कह सकें कि हमने अपनी जड़ों को संभाल कर रखा।



✨ निष्कर्ष

“मुल्तानी घराना” सिर्फ एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नहीं—
यह हमारी पहचान, हमारी जड़ों और हमारी आने वाली नस्लों का पुल है।

आज वक्त है कि हम सब मिलकर इस धरोहर को मजबूत करें, अपने शिजरे को अपडेट करें और बिरादरी की इस टेक्नोलॉजी को हर घर तक पहुँचाएँ।
जब कौम अपने अस्ल को पहचान लेती है, तो तरक़्क़ी की राह खुद-ब-खुद आसान हो जाती है।


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Thursday, February 19, 2026

🕊️ ग़मगीन इत्तिला: मेरठ की मोहतरमा का इंतिक़ाल, बिरादरी में शोक की लहर

निहायत ही अफ़सोस और रंज-ओ-ग़म के साथ अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को यह इत्तिला दी जाती है कि बीती रात, दिन जुमेरात बा-तारीख़ 19 फ़रवरी 2026 को जनाब हाफिज़ फारूख साहब मशीन वाले (साकिन: पूर्वी फैय्याज अली, नज़दीक नगर निगम घंटाघर, मेरठ, उत्तर प्रदेश) की अहलिया मोहतरमा का इंतिक़ाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूमा का जनाज़ा नमाज़-ए-जुमा के वक़्त, मोहल्ला पूर्वी फैय्याज अली, मेरठ में ही अदा किया जाएगा। तमाम अहबाब से गुज़ारिश है कि ज़्यादा से ज़्यादा तादाद में शरीक होकर मरहूमा के हक़ में दुआ-ए-मग़फिरत फरमाएं और घर वालों को सब्र-ए-जमील की तसल्ली दें।

अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फिरत फरमाए, उनकी कब्र को रौशन करे और जन्नतुल फिरदौस में आला मुक़ाम अता फरमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।


📌 मुकम्मल मालूमात की दरख्वास्त

यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल इत्तिला के ज़रिए मालूम हुई। खबर की तस्दीक और तकमील के मक़सद से इसे प्रकाशित किया जा रहा है।
जो हजरात मरहूमा के बारे में मुकम्मल और सही मालूमात रखते हों, उनसे दरख्वास्त है कि फौरन “मुल्तानी समाज” न्यूज के मोबाईल नंबर 📞 9410652990 पर कॉल या मैसेज के ज़रिए तफसीली जानकारी मुहैया कराएं, ताकि बिरादरी तक सही और भरोसेमंद खबर पहुंच सके।


📢 एक ज़रूरी ऐलान – इंतेकाल की खबर भेजने के लिये अहम् हिदायतें

अक्सर अधूरी जानकारी की वजह से लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते या सही वक़्त का इल्म नहीं हो पाता। इस अहम मसले को मद्देनज़र रखते हुए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से इल्तिज़ा करती है कि जब भी किसी अज़ीज़ के इंतकाल की खबर भेजें, तो इन बातों का ख़ास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ मुकम्मल पता – अस्ल वतन और मौजूदा सुकूनत।
3️⃣ दफ़ीने का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार अफ़राद (एक-दो) के फोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतकाल हो तो मरहूम का फोटो शामिल करें।
6️⃣ इंतकाल की वजह (अगर बयान करना मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम – जैसे भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वगैरह।

👉 इन तमाम जानकारियों से खबर मुकम्मल और मुस्तनद बनेगी, जिससे बिरादरी के अफराद तक सही और वक़्ती इत्तिला पहुंच सके।


📰 डिस्क्लेमर (Disclaimer)

पत्रिका में प्रकाशित किसी भी प्रकार का लेख, समाचार, संपादकीय, विचार, टिप्पणी, प्रेस विज्ञप्ति, विज्ञापन या अन्य सामग्री संबंधित लेखक, संवाददाता या विज्ञापनदाता के व्यक्तिगत विचार हैं।

इनसे पत्रिका के संपादक, प्रकाशक, प्रबंधन या संस्थान की सहमति आवश्यक रूप से अभिप्रेत नहीं है। प्रकाशित सामग्री की सत्यता, विश्वसनीयता अथवा किसी दावे के लिए संबंधित लेखक या विज्ञापनदाता स्वयं उत्तरदायी होंगे।

पत्रिका एवं प्रबंधन इस संबंध में किसी भी प्रकार की कानूनी, सामाजिक या वित्तीय जिम्मेदारी से पूर्णतः मुक्त रहेंगे। किसी भी विवाद या न्यायिक कार्यवाही की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।


📚 सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित
पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका

🖋️ “मुल्तानी समाज”
ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट

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🕊️ इंतकाल की खबर: जनाब इस्लाम साहब फोरमैन का क़ज़ा-ए-इलाही से विसाल

निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराने इस्लाम को यह इत्तिला दी जाती है कि जनाब इस्लाम साहब फोरमैन (अस्ल साकिन: गंगेरू, कांधला, ज़िला शामली, उत्तर प्रदेश | हाल बाशिंदा: हिसार, हरियाणा) का आज दिन जुमेरात, 19 फ़रवरी 2026 को क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन।

यह खबर हमें सोशल मीडिया के ज़रिए मालूम हुई। “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका की टीम ने खबर की तस्दीक के लिए संबंधित जिम्मेदारान से राब्ता करने की कोशिश की, मगर किसी वजह से कॉल रिसीव न हो सकी।

जिन हजरात को मरहूम के बारे में मुकम्मल मालूमात हो, उनसे गुज़ारिश है कि दिए गए व्हाट्सएप नंबर पर राब्ता करके सही और तफ्सीली जानकारी मुहैया कराएं, ताकि बिरादरी तक सही इत्तिला पहुंचाई जा सके और कोई भी शख्स जनाज़े व ताज़ियत से महरूम न रहे।

📌 नोट: यह खबर मोहम्मद आबान खान साहब के जरिए मोबाईल नंबर 9992744983 से वायरल की गई है।


📢 एक ज़रूरी ऐलान – इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम् हिदायतें

अक्सर देखा गया है कि अधूरी जानकारी की वजह से लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते या सही वक्त का इल्म नहीं हो पाता। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से दरख्वास्त करती है कि जब भी किसी अज़ीज़ के इंतकाल की खबर भेजें, तो दरज-ए-ज़ैल बातों का ख़ास एहतिमाम फरमाएं:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ मुकम्मल पता – अस्ल वतन और मौजूदा रिहाइश।
3️⃣ दफ़ीने का सही वक्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार अफ़राद (एक या दो) के फोन नंबर।
5️⃣ अगर मरहूम मर्द हैं तो उनका फोटो शामिल करें।
6️⃣ इंतकाल की वजह (अगर बयान करना मुनासिब समझें)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम – जैसे भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वगैरह।

👉 इन तमाम मालूमात से खबर मुकम्मल और भरोसेमंद होगी, जिससे बिरादरी के अफराद तक सही और वक़्ती जानकारी पहुंच सके।


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Wednesday, February 18, 2026

🕯️ सेहरी की रूहानी घड़ी में एक सदा-ए-ग़म — मरहूमा का इंतेकाल

इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन। बड़े ही रंजो-ग़म के साथ इत्तला दी जाती है कि मोहम्मद शमशाद साहब, साकिन इंचौली, जिला बागपत (उत्तर प्रदेश), हाल बाशिंदे छतरपुर, दिल्ली की अहलिया, उम्र तकरीबन 50 साल, आज सेहरी के वक्त लगभग साढ़े 4 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल फरमा गईं।

मरहूमा हाजी गफूर साहब (मथेडी) हाल निवासी छतरपुर, दिल्ली की साहबज़ादी थीं। यह खबर पूरे इलाके और बिरादरी में गहरे दुख का सबब बनी हुई है। सेहरी की पाक और रूहानी घड़ी में दुनिया-ए-फ़ानी से रुख़्सत होना, अपने आप में एक गहरी हिकमत समेटे हुए है।

अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फिरत फरमाए, उनकी कब्र को रौशन और वसीअ फरमाए, और जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फरमाए। आमीन।
घरवालों, अहल-ए-ख़ाना और तमाम अज़ीज़ो-अक़ारिब को सब्र-ए-जमील अता हो। आमीन सुम्मा आमीन।


📞 मय्यत से मुतअल्लिक मालूमात

मय्यत के सिलसिले में मुकम्मल जानकारी के लिए आप मरहूमा के भाई मोहम्मद अशरफ़ साहब के मोबाइल नंबर 8910833786 पर राब्ता कायम कर सकते हैं।


📢 एक ज़रूरी ऐलान — इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर ऐसा देखा गया है कि किसी अज़ीज़ के इंतेकाल की खबर बिरादरी तक देर से पहुँचती है या अधूरी जानकारी की वजह से लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से अदबाना गुज़ारिश करती है कि जब भी इंतेकाल की खबर भेजें, तो इन बातों का खास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और उनकी वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता — असल रहने का स्थान और फिलहाल का निवास।
3️⃣ दफीने का सही वक्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार शख्स (एक-दो) के फोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतेकाल हुआ हो तो मरहूम का फोटो भी शामिल करें।
6️⃣ इंतेकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ घर के बाकी अहल-ए-ख़ाना के नाम — जैसे भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वगैरह।

👉 इन तमाम मालूमात से खबर मुकम्मल होगी और बिरादरी के लोगों तक सही वक़्त पर सही जानकारी पहुंच सकेगी।


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पत्रिका एवं प्रबंधन इस संबंध में किसी भी प्रकार की कानूनी, सामाजिक या वित्तीय जिम्मेदारी से पूर्णतः मुक्त रहेंगे।

किसी भी विवाद, शिकायत या न्यायिक कार्यवाही की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।


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अल्लाह तआला मरहूमा की तमाम खता-ओ-लरज़िशों को माफ़ फरमाए और उनके दरजात बुलंद करे।
दुआ है कि यह सदमा घरवालों के लिए सब्र और आख़िरत में अज्र का ज़रिया बने। 🤲

😢 पहले रोज़े की सहर में बिछड़ गए मुहम्मद इलियास बिजरौल वाले — बिरादरी में शोक की लहर

अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को बड़े ही रंजो-ग़म के साथ यह इत्तला दी जाती है कि मिस्त्री इस्हाक के बेटे मुहम्मद इलियास (उम्र लगभग 37 वर्ष), निवासी बिजरौल, का आज दिन जुमेरात, 19 फ़रवरी 2026 को पहले रोज़े की सहरी के वक्त कज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया।

इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम इस वक्त बेगमपुर, दिल्ली में रह रहे थे। अल्लाह की यही मर्ज़ी थी। उनके पीछे दो मासूम बेटियां हैं, जिनकी परवरिश और सब्र के लिए पूरी बिरादरी दुआगो है।


🕌 जनाज़ा और दफीना

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूम का जनाज़ा मुहल्ला पठानकोट, बड़ौत (जिला बाग़पत) में गोल मस्जिद के पास उनके दूसरे घर लाया जाएगा।

दफीना आज दिन जुमेरात, 19 फ़रवरी 2026 को चाश्त की नमाज़ के वक्त सुबह साढ़े दस बजे, बड़का मार्ग स्थित वीर स्मारक इंटर कॉलेज के सामने वाले कब्रिस्तान में अमल में आएगा।

तमाम अहबाब से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत कर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फिरत करें और सवाबे दारेन हासिल करें।


🤲 दुआ

हम अल्लाह तआला से दुआ करते हैं कि अल्लाह मरहूम मुहम्मद इलियास की मग़फिरत फरमाए, उनकी तमाम ख़ताएं माफ़ करे, क़ब्र को रौशन और वसीअ फरमाए और जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए।

उनके अहले ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।

आमीन। सुम्मा आमीन।


📞 ज्यादा जानकारी के लिए राब्ता

  • मुहम्मद खालिद उद्यमी बावली वाले: 7984844498
  • गफूर नेता जी बावली वाले: 9412061270

📢 एक ज़रूरी ऐलान – इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर इंतकाल की खबर अधूरी या देर से पहुंचने की वजह से बिरादरी के लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि खबर भेजते वक्त इन बातों का खास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत/शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता (असली व मौजूदा निवास)।
3️⃣ दफीने का सही वक्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार शख्स के फोन नंबर।
5️⃣ मर्द के इंतकाल की सूरत में मरहूम का फोटो।
6️⃣ इंतकाल की वजह (अगर मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-खाना के नाम — भाई, बहन, वालिदैन, औलाद आदि।

👉 मुकम्मल जानकारी से खबर सही और वक़्त पर बिरादरी तक पहुंच सकेगी।


📰 डिस्क्लेमर

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पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका

“मुल्तानी समाज”
खास रिपोर्ट: ज़मीर आलम

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रमजान और होली को लेकर प्रशासन से विशेष इंतज़ाम की मांग

तहसील ऊन, जिला शामली से शाकिर अली की खास रिपोर्ट

बिडौली/झिंझाना क्षेत्र में आने वाले पवित्र रमजान और होली के मद्देनज़र स्थानीय प्रशासन से साफ-सफाई, पेयजल और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराने की मांग की गई है।

(AIMIM) के पश्चिम प्रदेश संयुक्त सचिव हाफिज मोहम्मद इनाम ने उपजिलाधिकारी ऊन के नाम तहसीलदार को एक ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि त्योहारों के दौरान गांवों और कस्बों में मूलभूत सुविधाओं का बेहतर प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है।

साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं पर जोर

ज्ञापन में विशेष रूप से गलियों में जमा कीचड़ और कूड़े के ढेरों की तत्काल सफाई कराने की मांग उठाई गई। हाफिज मोहम्मद इनाम ने कहा कि रमजान के दौरान रोज़ेदारों को सेहरी और इफ्तार के समय पानी व बिजली की उपलब्धता बेहद जरूरी है, वहीं होली जैसे रंगों के त्योहार में भी स्वच्छ वातावरण और पर्याप्त जल आपूर्ति अनिवार्य है।

उन्होंने प्रशासन से अपील की कि त्योहारों से पहले ही व्यापक स्तर पर सफाई अभियान चलाया जाए, ताकि लोगों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

प्रशासन का आश्वासन

तहसील प्रशासन की ओर से ज्ञापन को संज्ञान में लेते हुए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि संबंधित विभागों को निर्देशित कर समस्याओं के समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

मौजूद रहे पदाधिकारी

इस अवसर पर असरफ ग्राम अध्यक्ष, शाहिद ग्राम अध्यक्ष, मुदस्सिर सहित अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे और उन्होंने भी क्षेत्र में व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की आवश्यकता पर बल दिया।


त्योहार सामाजिक सद्भाव और खुशियों का संदेश लेकर आते हैं। ऐसे में प्रशासनिक तैयारी और जनप्रतिनिधियों की सक्रियता ही यह सुनिश्चित कर सकती है कि हर घर में त्योहार की रौनक बिना किसी व्यवधान के पहुंच सके।

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🌹 12 नवंबर 2026: “मुल्तानी-डे” पर 12 ग़रीब बच्चियों के निकाह की ऐतिहासिक शुरुआत 🌹

بسم اللہ الرحمن الرحیم

पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की देश की अग्रणी और क्रांतिकारी तंजीम मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट (रजिस्टर्ड ऑल इंडिया) ने वर्षों पहले देश की राजधानी दिल्ली स्थित सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से अपनी बिरादरी की पत्रिका “मुल्तानी समाज” का पंजीकरण कराया। हर साल 12 नवंबर को पूरे देश में “मुल्तानी-डे” मनाया जाता है—खिदमत, इत्तेहाद और बिरादरी की तरक़्क़ी का दिन।

✨ नई प्रतिबद्धता

तंजीम ने संकल्प लिया है कि 12 नवंबर 2026 से हर साल “मुल्तानी-डे” के मुबारक मौके पर 12 ग़रीब बच्चियों के निकाह अपने खर्चे से कराए जाएंगे। बीते वर्षों में नोटबंदी और कोरोना महामारी के कारण यह पहल शुरू न हो सकी, लेकिन अब इसे अमली जामा पहनाने का बीड़ा उठाया गया है।

🤲 बिरादरी से अपील

यह नेक काम आप सबके सहयोग के बिना संभव नहीं। रमज़ान के बरकत भरे महीने से ही तैयारी शुरू कर दी जाए, ताकि नवंबर तक इस मुहिम को कामयाबी से अंजाम दिया जा सके। सभी जिम्मेदार, कारोबारी और खैरख्वाह साथी खुलकर हिस्सा लें।


🏦 ट्रस्ट के आधिकारिक बैंक विवरण

A/C Name: Multani Samaj Charitable Trust
A/C No.: 13332191075333
Bank: Punjab National Bank
Branch: Yamuna Vihar, Delhi
IFSC: PUNB0225600

आप सीधे ट्रस्ट के खाते में या UPI के माध्यम से सहयोग राशि भेज सकते हैं। कृपया ट्रांजेक्शन का विवरण साझा अवश्य करें।


📍 निकाह की प्रक्रिया

“मुल्तानी-डे” के मुबारक अवसर पर बिरादरी के जिम्मेदारों की सलाह से इस नेक काम की शुरुआत किसी भी शहर से की जा सकती है। जिन जरूरतमंद लड़कियों का निकाह तंजीम के माध्यम से कराना हो, रिश्ता तय होने के बाद नीचे दिए गए नंबर पर कॉल या मैसेज कर पूरी जानकारी दर्ज कराएँ:

📞 9410652990


अल्लाह तआला इस मुहिम को कबूलियत, बरकत और इस्तिक़ामत अता फरमाए; जिन घरों में ये निकाह होंगे वहाँ सुकून, मोहब्बत और खुशहाली कायम करे। आमीन।

खास रिपोर्ट: ज़मीर आलम
पत्रिका: मुल्तानी समाज

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