Wednesday, October 21, 2026

🥀 इंतिक़ाल की दर्दनाक ख़बर: कोटा के अब्दुल सलाम साहब का इंतिक़ाल, बिरादरी में ग़म की लहर

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम अब्दुल ग़फ़्फ़ार मोटियार साहब (छावनी वाले) के बड़े फ़र्ज़ंद जनाब अब्दुल सलाम साहब ने दुनिया-ए-फ़ानी को कहा अलविदा; अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए और तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

कोटा, राजस्थान। निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिली अफ़सोस के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को इत्तिला दी जाती है कि आज दिन बुध, बा-तारीख़ 21 अक्टूबर 2026 को राजस्थान के शहर कोटा में मरहूम जनाब अब्दुल ग़फ़्फ़ार मोटियार साहब (छावनी वाले) के बड़े फ़र्ज़ंद, जनाब अब्दुल सलाम साहब का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया है।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन। बेशक हम सब अल्लाह ही के हैं और उसी की तरफ़ लौटकर जाने वाले हैं।

जनाब अब्दुल सलाम साहब के इंतिक़ाल की ख़बर से उनके अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, दोस्तों, अहबाब और मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी में ग़म और अफ़सोस की लहर दौड़ गई है। इस मुश्किल घड़ी में मरहूम के तमाम घर वालों और रिश्तेदारों के साथ हमारी दिली हमदर्दी और ताज़ियत है।

🥀 कोटा शहर के क़ब्रिस्तान में होगी तदफ़ीन

मिली जानकारी के मुताबिक़, मरहूम जनाब अब्दुल सलाम साहब की मैय्यत को कोटा शहर के ही क़ब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। ख़बर लिखे जाने तक नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन का वक़्त मालूम नहीं हो सका है।

जैसे ही नमाज़-ए-जनाज़ा और सुपुर्द-ए-ख़ाक किए जाने के वक़्त की तस्दीक़शुदा जानकारी हासिल होगी, उसे ख़बर में अपडेट कर दिया जाएगा।

तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि जानकारी मिलने पर जनाज़े में शिरकत फ़रमाएँ, मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और उनके अहल-ए-ख़ाना को इस सदमे को बर्दाश्त करने के लिए सब्र की तौफ़ीक़ अता फ़रमाने की दुआ करें।

🤲 मरहूम की मग़फ़िरत के लिए दुआ

या अल्लाह! जनाब अब्दुल सलाम साहब की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमा। उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फ़रमा, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा और उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे।

ऐ अल्लाह! उनकी क़ब्र को वसीअ फ़रमा, उसमें राहत, सुकून और रौशनी अता फ़रमा। क़ब्र की तन्हाई को अपनी रहमत से दूर फ़रमा और मरहूम को सवालात-ए-क़ब्र के वक़्त साबित-क़दम रख।

या रब्बुल आलमीन! मरहूम को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमा, उनके दरजात बुलंद फ़रमा और उन्हें अपने महबूब हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ की शफ़ाअत नसीब फ़रमा।

ऐ अल्लाह! मरहूम के वालिद मरहूम जनाब अब्दुल ग़फ़्फ़ार मोटियार साहब के फ़र्ज़ंद की इस जुदाई पर तमाम घर वालों, अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और चाहने वालों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा। उनके दिलों को सुकून दे और इस ग़म को बर्दाश्त करने की हिम्मत अता फ़रमा।

आमीन सुम्मा आमीन, या रब्बुल आलमीन।

🤲 नमाज़-ए-जनाज़ा और मैय्यत को सुपुर्द-ए-ख़ाक करने की दुआएँ

मुसलमान भाइयों से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर सुन्नत के मुताबिक़ नमाज़-ए-जनाज़ा अदा करें और मरहूम के लिए ख़ुलूस-ए-दिल से मग़फ़िरत की दुआ करें।

नमाज़-ए-जनाज़ा में चौथी तकबीर के बाद सलाम फेरने से पहले यह दुआ पढ़ी जा सकती है:

اللَّهُمَّ لَا تَحْرِمْنَا أَجْرَهُ وَلَا تَفْتِنَّا بَعْدَهُ وَاغْفِرْ لَنَا وَلَهُ

तर्जुमा: ऐ अल्लाह! हमें उनके अज्र से महरूम न फ़रमा, उनके बाद हमें आज़माइश में न डाल और हमारी तथा उनकी मग़फ़िरत फ़रमा।

मैय्यत को क़ब्र में उतारते वक़्त यह दुआ पढ़ना मस्नून है:

بِسْمِ اللَّهِ وَعَلَى مِلَّةِ رَسُولِ اللَّهِ ﷺ

तर्जुमा: अल्लाह के नाम के साथ और रसूलुल्लाह ﷺ के दीन और तरीक़े पर।

क़ब्र में मैय्यत को रखने के बाद अल्लाह तआला से उसकी मग़फ़िरत, साबित-क़दमी और रहमत की दुआ की जाए।

दफ़्न के बाद मरहूम के लिए यह दुआ करें:

اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَثَبِّتْهُ عِنْدَ السُّؤَالِ

तर्जुमा: ऐ अल्लाह! इनकी मग़फ़िरत फ़रमा और सवाल के वक़्त इन्हें साबित-क़दम रख।

अल्लाह तआला मरहूम की क़ब्र को नूर से भर दे, उनकी आख़िरत आसान फ़रमाए और उन्हें अपनी बेपनाह रहमत के साये में जगह अता फ़रमाए। आमीन।

नोट: जनाज़े के वक़्त और दफ़्न की जगह के संबंध में अंतिम जानकारी की तस्दीक़ के बाद ही आगे प्रसारित करें।


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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए राजस्थान डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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🌹 मुस्लिम मुल्तानी लोहार बिरादरी में निकाह की पुरमस्सरत इत्तिला 🌹

मोहम्मद रज़ा की शादी शाहीना बानो से 2 जनवरी 2027 को उदयपुर में होगी; खानदान में खुशी का माहौल

بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ

الصَّلَاةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُولَ اللّٰهِ ﷺ

अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू!

तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरान की ख़िदमत में अदब व एहतराम के साथ एक पुरमस्सरत इत्तिला पेश की जाती है कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त के फ़ज़्लो करम, हुज़ूर नबी करीम ﷺ के सदक़े और वालिदैन की दुआओं से उस्ता खानदान में निकाह की खुशियों का मुबारक मौक़ा आने वाला है।

खानदान के बुज़ुर्ग मरहूम हज़रत मोहम्मद इस्माइल उस्ता के पोते और जनाब साबिर हुसैन उस्ता के फ़रज़ंद मोहम्मद रज़ा का निकाह, जनाब अब्दुल ग़फ़्फ़ार साहब मोटियार, उदयपुर की नेक सीरत बेटी शाहीना बानो के साथ तय पाया है। यह पुरमस्सरत तक़रीब 2 जनवरी 2027, बरोज़ शनिचर, बाद नमाज़-ए-अस्र, राजस्थान के शहर उदयपुर में मुनअक़िद होगी।

इस मुबारक मौक़े पर उस्ता खानदान की जानिब से तमाम अज़ीज़ो-अक़ारिब, रिश्तेदारों, दोस्तों और मुस्लिम मुल्तानी लोहार बिरादरी के तमाम हज़रात को इस ख़ुशी में शरीक होने की दावत दी जाती है।

🌹 निकाह की तफ़सील 🌹

  • दूल्हा: मोहम्मद रज़ा
  • वालिद: जनाब साबिर हुसैन उस्ता
  • दुल्हन: शाहीना बानो
  • वालिद: जनाब अब्दुल ग़फ़्फ़ार साहब मोटियार
  • तारीख़-ए-निकाह: 2 जनवरी 2027, बरोज़ शनिचर
  • वक़्त: बाद नमाज़-ए-अस्र
  • मक़ाम: नया RTO ऑफिस रोड के पास, रूप नगर कच्ची बस्ती, उदयपुर, राजस्थान।

🌹 दुआगो व दावत देने वाले 🌹

साबिर हुसैन, जाकिर हुसैन और आबिद हुसैन

मरहूम मोहम्मद इस्माइल उस्ता और मरहूम नासिर हुसैन उस्ता के खानदान के तमाम अफ़राद की जानिब से इस मुबारक तक़रीब में शिरकत की पुरख़ुलूस दावत पेश की जाती है।

🌹 उस्ता खानदान के अफ़राद 🌹

जाहिद हुसैन, शाहिद हुसैन, आकिब हुसैन, इसरार अहमद, मोहम्मद जुनैद, मोहम्मद अनस और मोहम्मद जुबैर समेत खानदान के तमाम अफ़राद इस ख़ुशी के मौक़े पर अपनी नेक तमन्नाओं और दुआओं के साथ शामिल हैं।

🌹 नूर-ए-चश्म 🌹

मोहम्मद रेहान, मोहम्मद अदनान, मोहम्मद साद, मोहम्मद जैद, मोहम्मद मुदस्सिर, मोहम्मद रियान, मोहम्मद शायन, मोहम्मद हम्ज़ा और मोहम्मद सफ़वान।

🌹 नन्ही इल्तिजा 🌹

सारा नूर और मोहम्मद सफ़वान की जानिब से भी इस मुबारक मौक़े पर तमाम हज़रात की दुआओं और नेक ख़्वाहिशात का इस्तिक़बाल है।

🤲 दुआओं की दरख़्वास्त 🤲

अल्लाह तआला से दुआ है कि वह इस निकाह को दोनों खानदानों के लिए ख़ैर व बरकत, खुशी और रहमत का ज़रिया बनाए। दूल्हा-दुल्हन की ज़िंदगी को मोहब्बत, मवद्दत, रहमत, सुकून और ख़ुशहाली से भर दे। दोनों को एक-दूसरे के हुक़ूक़ अदा करने, नेक रास्ते पर चलने और दीन व दुनिया की भलाइयाँ हासिल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।

अल्लाह तआला इस नए सफ़र को मुबारक फ़रमाए, दोनों को सलामती के साथ ज़िंदगी गुज़ारने और नेक व सालेह औलाद से नवाज़े। आमीन या रब्बुल आलमीन!


📰 मुल्तानी समाज — राष्ट्रीय समाचार पत्रिका की ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, नई दिल्ली से प्रसारित मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल ‘मुल्तानी समाज’ के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

‘मुल्तानी समाज’ की जानिब से मोहम्मद रज़ा और शाहीना बानो को निकाह की पेशगी मुबारकबाद और दोनों खानदानों को दिली मुबारकबाद पेश की जाती है। दुआ है कि यह मुबारक रिश्ता दोनों परिवारों के लिए हमेशा ख़ुशियों, इज़्ज़त, आपसी मोहब्बत और बरकत का सबब बना रहे।

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इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन बड़ौत में 19 वर्षीय मोहम्मद आरिश का इंतिक़ाल, गुलाब नबी साहब के पोते के रुख़्सत होने से बिरादरी में ग़म की लहर

लंबी बीमारी के बाद आज सुबह 7 बजे ली आख़िरी साँस, अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए — आमीन या रब्बुल आलमीन।

बड़ौत, ज़िला बागपत (उत्तर प्रदेश)।
निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिली अफ़सोस के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादराना हज़रात को इत्तिला दी जाती है कि आज बरोज़ बुध, बा-तारीख़ 21 अक्टूबर 2026 को गली नम्बर 6, गुराना रोड, क़स्बा बड़ौत, ज़िला बागपत, उत्तर प्रदेश के साकिन, जनाब गुलाब नबी साहब डूडूखेड़ा वालों के पोते और जनाब मोहम्मद मैनुद्दीन साहब के फ़रज़ंद, लगभग 19 वर्षीय मोहम्मद आरिश साहब का तवील बीमारी के चलते आज सुबह क़रीब 7 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया है।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

बेशक हम सब अल्लाह ही के हैं और उसी की तरफ़ हमें लौटकर जाना है। यह दुनिया फ़ानी है और मौत एक ऐसी हक़ीक़त है जिससे किसी को फ़रार नहीं। मगर कमसिनी में किसी नौजवान का दुनिया-ए-फ़ानी से रुख़्सत हो जाना वालिदैन, अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और तमाम चाहने वालों के लिए बेहद दर्दनाक सदमा होता है। मोहम्मद आरिश साहब के इंतिक़ाल की ख़बर से उनके घराने और बिरादरी के लोगों में ग़म और अफ़सोस की कैफ़ियत है।

इस मुश्किल घड़ी में दुआ है कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त अपने फ़ज़्ल-ओ-करम से मरहूम को अपनी बेपनाह रहमतों के साये में जगह अता फ़रमाए, उनकी तमाम ख़ताओं से दरगुज़र फ़रमाए और उनके घरवालों को इस सदमे को बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।

मरहूम की मग़फ़िरत के लिए ख़ुसूसी दुआ

ऐ अल्लाह! ऐ तमाम जहानों के परवरदिगार! तू बड़ा ग़फ़ूर-ओ-रहीम है। अपने महबूब हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ के सदक़े में मरहूम मोहम्मद आरिश साहब की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमा।

या अल्लाह! मरहूम पर अपनी ख़ास रहमत नाज़िल फ़रमा, उनकी लग़ज़िशों से दरगुज़र फ़रमा, उनकी नेकियों को क़ुबूल फ़रमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमा। उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा और उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे।

या अल्लाह! मरहूम के वालिदैन, दादा-दादी, तमाम घरवालों, रिश्तेदारों और अज़ीज़ों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा। उनके दिलों को सुकून दे, इस अज़ीम सदमे को बर्दाश्त करने की हिम्मत अता फ़रमा और उन्हें अपनी रहमत से मायूस न होने देना।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

तदफ़ीन के वक़्त के मुताल्लिक़ अहम इत्तिला

ख़बर लिखे जाने तक मरहूम मोहम्मद आरिश साहब की नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन का वक़्त मालूम नहीं हो सका है। जैसे ही घरवालों या ज़िम्मेदार अफ़राद की तरफ़ से सही इत्तिला हासिल होगी, उसे ख़बर में अपडेट कर दिया जाएगा।

तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि तदफ़ीन के वक़्त की तस्दीक़शुदा इत्तिला हासिल होने पर जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और ग़मज़दा ख़ानदान के साथ ताज़ियत व दिलजोई का इज़हार फ़रमाएँ।

दफ़्न और क़ब्र में उतारने के वक़्त की मस्नून दुआएँ

जब किसी मुसलमान को क़ब्र में उतारा जाए, तो यह दुआ पढ़ना मस्नून है:

بِسْمِ اللّٰهِ وَعَلَىٰ مِلَّةِ رَسُولِ اللّٰهِ ﷺ

तर्जुमा: अल्लाह के नाम के साथ और रसूलुल्लाह ﷺ के दीन व तरीक़े पर।

दफ़्न के बाद मरहूम के लिए मग़फ़िरत और साबित-क़दमी की दुआ करनी चाहिए। रसूलुल्लाह ﷺ से साबित है कि आप ﷺ दफ़्न से फ़ारिग़ होने के बाद फ़रमाते थे कि अपने भाई के लिए मग़फ़िरत माँगो और उसके लिए साबित-क़दमी की दुआ करो, क्योंकि अब उससे सवाल किया जा रहा है।

इस मौक़े पर तमाम हाज़िरीन अपने हाथ उठाकर या दिल ही दिल में मरहूम के लिए दुआ करें:

اللّٰهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَارْحَمْهُ وَثَبِّتْهُ عِنْدَ السُّؤَالِ

तर्जुमा: ऐ अल्लाह! उनकी मग़फ़िरत फ़रमा, उन पर रहम फ़रमा और सवाल के वक़्त उन्हें साबित-क़दम रख।

क़ब्र पर मिट्टी डालते वक़्त की दुआ

क़ब्र पर मिट्टी डालते वक़्त क़ुरआन-ए-करीम की यह आयत याद रखना मुनासिब है:

مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ

तर्जुमा: इसी ज़मीन से हमने तुम्हें पैदा किया, इसी में तुम्हें लौटाएँगे और इसी से तुम्हें दोबारा निकालेंगे।
(सूरह ताहा, आयत 55)

क़ब्र पर मिट्टी डालते वक़्त इस आयत को पढ़ना अहल-ए-इल्म के यहाँ मअरूफ़ अमल है। इसे हर मिट्टी डालने वाले के लिए लाज़िमी या फ़र्ज़ न समझा जाए।

ऐ अल्लाह! इस मिट्टी को मरहूम के हक़ में सुकून और रहमत का ज़रिया बना। उनकी क़ब्र को तंगियों से महफ़ूज़ फ़रमा, उसे नूर से भर दे और क़यामत के दिन उन्हें अपने नेक बंदों के साथ उठाना।

आमीन सुम्मा आमीन।

बिरादराना हज़रात से ख़ुसूसी गुज़ारिश

तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि इस ग़म की घड़ी में मरहूम के ख़ानदान को अपनी दुआओं में याद रखें। अल्लाह तआला हम सबको ईमान पर ज़िंदगी और ईमान पर ख़ातिमा नसीब फ़रमाए तथा हमारे तमाम मरहूमीन की मग़फ़िरत फ़रमाए।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।


ख़ास रिपोर्ट — उत्तर प्रदेश डेस्क

ज़मीर आलम
प्रधान संपादक
“मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, देश की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल — “मुल्तानी समाज”

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Tuesday, October 20, 2026

मक्का मुकर्रमा की मस्जिद में कथित अश्लील हरकत के मामले में दो बांग्लादेशी नागरिकों को मौत की सज़ा-ए-इदाम दी गई

सोशल मीडिया पर शौहर-बीवी, आठ साल की बच्ची और हज यात्रियों से जुड़ी कहानियों की हक़ीक़त क्या है? जानिए सऊदी हुकूमत के एलान और बांग्लादेशी मीडिया की रिपोर्टों के आधार पर पूरी ख़बर

नई दिल्ली | मुल्तानी समाज विशेष रिपोर्ट

मस्जिदों की हुरमत, मुक़द्दस मक़ामात का अदब और सोशल मीडिया पर फैलने वाली ख़बरों की सच्चाई को लेकर एक अहम मामला चर्चा में है। सऊदी अरब के मक्का मुकर्रमा क्षेत्र में दो बांग्लादेशी नागरिकों को मस्जिद के अंदर कथित तौर पर अश्लील हरकत करने के मामले में अदालत से मौत की सज़ा सुनाए जाने के बाद 14 अक्टूबर 2026 को सज़ा-ए-इदाम दी गई। सऊदी अरब के गृह मंत्रालय के बयान के मुताबिक़, अदालत ने मामले की संगीनियत और वाक़िये के मुक़द्दस मक़ाम व वक़्त से जुड़े होने को सज़ा की वजह बताया।

हालाँकि, इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। कहीं दोनों को शौहर-बीवी बताया जा रहा है, कहीं उनके आठ साल की बच्ची होने का दावा किया जा रहा है, तो कहीं यह कहा जा रहा है कि वे हज के लिए सऊदी अरब गए थे और मस्जिद में एक-दूसरे को चूमने के कारण उन्हें मौत की सज़ा दी गई।

लेकिन इन तमाम दावों को एक ही साँस में सच मान लेना दुरुस्त नहीं होगा। उपलब्ध आधिकारिक बयान में न तो कथित हरकत की पूरी तफ़सील दी गई है और न ही दोनों के आपसी रिश्ते, निकाह या औलाद के बारे में कोई तस्दीक़ की गई है। लिहाज़ा, किसी भी अपुष्ट दावे को यक़ीनी हक़ीक़त बनाकर पेश करना पत्रकारिता के उसूलों के ख़िलाफ़ होगा।

कौन थे दोनों बांग्लादेशी नागरिक?

सऊदी अरब के गृह मंत्रालय के बयान और बांग्लादेशी मीडिया की रिपोर्टों में दोनों की पहचान नज़रुल इस्लाम अब्दुल बासिर और सिति अख़्तर के नाम से की गई है। कुछ रिपोर्टों में महिला का नाम स्वीटी अख़्तर भी लिखा गया है।

सऊदी गृह मंत्रालय के मुताबिक़, सुरक्षा अधिकारियों ने दोनों को गिरफ़्तार किया, तफ़्तीश के बाद मामला संबंधित अदालत में पेश किया गया और अदालत ने आरोप साबित होने पर मौत की सज़ा सुनाई। बाद में फ़ैसले को संबंधित न्यायिक प्राधिकरण से बरक़रार रखे जाने और शाही आदेश जारी होने के बाद 14 अक्टूबर 2026 को मक्का क्षेत्र में सज़ा लागू की गई।

इस मामले में एक अहम बात यह भी है कि बांग्लादेश के जेद्दा स्थित कॉन्सुलेट जनरल ने कहा कि उसे सज़ा लागू किए जाने से पहले इसकी इत्तिला नहीं दी गई थी। कॉन्सुलेट ने सऊदी अधिकारियों से औपचारिक जानकारी माँगी थी। इस पहलू ने मामले की क़ानूनी कार्रवाई और क़ौंसुलर जानकारी को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

स्रोत: बांग्लादेशी समाचार पत्र द डेली स्टार और द बिज़नेस स्टैंडर्ड, 15–16 अक्टूबर 2026 की रिपोर्टें।

क्या दोनों शौहर-बीवी थे या गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड?

सोशल मीडिया पर इस मामले के साथ सबसे ज़्यादा चर्चा दोनों के आपसी रिश्ते को लेकर हो रही है। कुछ पोस्ट में उन्हें शादीशुदा जोड़ा बताकर यह दावा किया जा रहा है कि उनकी आठ साल की एक बेटी भी थी। दूसरी ओर, कुछ पोस्ट में उन्हें गर्लफ्रेंड और बॉयफ्रेंड कहा जा रहा है।

लेकिन उपलब्ध आधिकारिक बयान से इन दोनों में से किसी दावे की पुष्टि नहीं होती। इसलिए यह कहना कि वे निश्चित रूप से शौहर-बीवी थे या निश्चित रूप से गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड थे, अभी उपलब्ध जानकारी से आगे बढ़कर दावा करना होगा।

इसी तरह, यह कहना भी सही नहीं होगा कि उन्हें केवल एक-दूसरे को चूमने की वजह से मौत की सज़ा दी गई। सऊदी अधिकारियों ने कथित हरकत को अश्लील या अनैतिक कृत्य बताया है, लेकिन उसकी सटीक प्रकृति का सार्वजनिक रूप से विस्तृत ब्योरा नहीं दिया है।

सऊदी अरब में मौत की सज़ा क्यों दी गई?

सऊदी गृह मंत्रालय के बयान के मुताबिक़, अदालत ने मामले की संगीनियत और उस वक़्त व मक़ाम की हुरमत के उल्लंघन को ध्यान में रखते हुए सज़ा सुनाई। रिपोर्टों में सज़ा को ताज़ीर के तहत बताया गया है। इस्लामी क़ानूनी परंपरा में ताज़ीर उन अपराधों के लिए न्यायिक विवेक के तहत दी जाने वाली सज़ा को कहा जाता है जिनकी सज़ा निर्धारित हुदूद की श्रेणी में नहीं आती।

हालाँकि, इस मामले में अदालत के विस्तृत फ़ैसले, सभी साक्ष्यों और कानूनी दलीलों का पूरा सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध न होने के कारण यह कहना मुनासिब नहीं होगा कि मुक़दमे की हर क़ानूनी बारीकी सामने आ चुकी है।

यह भी समझना ज़रूरी है कि सऊदी अरब में किसी ख़ास अपराध के लिए मौत की सज़ा दिए जाने की ख़बर से यह नतीजा नहीं निकाला जा सकता कि मस्जिद में हर प्रकार की ग़लत हरकत की क़ानूनी सज़ा अनिवार्य रूप से मौत ही है। सज़ा का निर्धारण संबंधित क़ानून, आरोप, साक्ष्य और अदालत के फ़ैसले के अनुसार होता है।

मस्जिद की हुरमत और इस्लामी तहज़ीब

इस्लाम में मस्जिद को इबादत, ज़िक्र, तिलावत और अल्लाह तआला की बंदगी का मुक़द्दस मक़ाम माना गया है। मस्जिद में दाख़िल होने से लेकर वहाँ बैठने, बातचीत करने और इबादत करने तक, हर मामले में अदब, पाकीज़गी और दूसरों के हुक़ूक़ का ख़याल रखना चाहिए।

मक्का मुकर्रमा और मस्जिद अल-हराम की धार्मिक अहमियत तमाम मुसलमानों के दिलों में ख़ास मुक़ाम रखती है। ऐसे मुक़द्दस मक़ामात का एहतराम करना हर मुसलमान की धार्मिक और अख़लाक़ी ज़िम्मेदारी है।

क़ुरआन-ए-करीम में अल्लाह तआला इरशाद फ़रमाता है:

“और जो अल्लाह की निशानियों की ताज़ीम करता है, तो बेशक यह दिलों के तक़वे से है।”

— सूरह अल-हज्ज, आयत 32

इसलिए मस्जिदों का एहतराम, वहाँ के आदाब की पाबंदी और पाकीज़गी का ख़याल रखना हमारी दीनदाराना ज़िंदगी का अहम हिस्सा है।

सोशल मीडिया पर ख़बर साझा करने वालों के लिए अहम पैग़ाम

आज के दौर में सोशल मीडिया पर कोई भी तस्वीर, वीडियो या सनसनीख़ेज़ दावा कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक पहुँच जाता है। मगर किसी ख़बर का तेज़ी से फैलना उसके सही होने की दलील नहीं है।

इस मामले में भी तीन बातों को अलग-अलग समझना ज़रूरी है:

  1. पुष्ट जानकारी: सऊदी गृह मंत्रालय ने दो बांग्लादेशी नागरिकों को मस्जिद में कथित अनैतिक कृत्य के मामले में मौत की सज़ा दिए जाने और 14 अक्टूबर 2026 को सज़ा लागू किए जाने की जानकारी दी है।
  2. अभी अपुष्ट दावे: दोनों के शादीशुदा होने या गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड होने, उनकी आठ साल की बच्ची होने और केवल एक-दूसरे को चूमने के कारण सज़ा मिलने की बातों की उपलब्ध आधिकारिक बयान से पुष्टि नहीं होती।
  3. क़ानूनी प्रक्रिया से जुड़े सवाल: बांग्लादेशी कॉन्सुलेट ने पहले से इत्तिला न दिए जाने की बात कही और सऊदी अधिकारियों से जानकारी माँगी। इसलिए इस मामले के सभी पहलुओं को पूरी तरह स्पष्ट मान लेना भी उचित नहीं होगा।

किसी भी व्यक्ति के बारे में अपुष्ट इल्ज़ाम फैलाने से उसकी इज़्ज़त, उसके परिवार और समाज पर बुरा असर पड़ सकता है। इस्लाम भी बिना तहक़ीक़ के किसी ख़बर को आगे बढ़ाने से बचने की तालीम देता है।

क़ुरआन-ए-करीम में इरशाद है:

“ऐ ईमान वालो! अगर तुम्हारे पास कोई फ़ासिक़ ख़बर लेकर आए, तो तहक़ीक़ कर लिया करो।”

— सूरह अल-हुजुरात, आयत 6

इसलिए किसी भी ख़बर को साझा करने से पहले उसके स्रोत, तारीख़ और विश्वसनीयता की जाँच करना बेहद ज़रूरी है।

मुल्तानी समाज का पैग़ाम

मस्जिद की हुरमत और इस्लामी आदाब का एहतराम करना हर मुसलमान की ज़िम्मेदारी है। साथ ही, इंसाफ़, तहक़ीक़ और सच्चाई को भी उतनी ही अहमियत दी जानी चाहिए।

किसी अदालत के फ़ैसले पर चर्चा करते समय न तो अपुष्ट बातों को यक़ीनी हक़ीक़त बनाकर पेश करना चाहिए और न ही किसी व्यक्ति या परिवार के बारे में बग़ैर प्रमाण के फ़ैसला सुनाना चाहिए।

दीन हमें अदब सिखाता है, अख़लाक़ हमें ज़िम्मेदारी का एहसास दिलाता है और सच्चाई हमें बिना तहक़ीक़ के किसी नतीजे पर पहुँचने से रोकती है।

अल्लाह तआला हम सबको मस्जिदों की हुरमत करने, सही और ग़लत में फ़र्क़ समझने, सच्ची बात कहने और हर मामले में इंसाफ़ व हक़ का साथ देने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।


विशेष रिपोर्ट: ज़मीर आलम
प्रधान संपादक — मुल्तानी समाज राष्ट्रीय समाचार पत्रिका
नई दिल्ली डेस्क

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल — “मुल्तानी समाज”

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सार्वजनिक सूचना पर्स (बटुआ) गुम होने के संबंध में

सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि मैं अलीहसन मुल्तानी पुत्र हबीब अहमद, निवासी बड़का मार्ग, बड़ौत, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश, दिनांक 20 अक्टूबर 2026 को शाम लगभग 5:30 बजे किसी कार्य से नगर क्षेत्र बड़ौत के बाजार में गया था। इसी दौरान मेरा पर्स (बटुआ) कहीं गुम हो गया।

गुम हुए पर्स में 700 रुपये नकद, मेरा आधार कार्ड, पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, सलाम खाकी न्यूज़ का पत्रकारिता पहचान पत्र, कारोबारी एवं राजनीतिक विजिटिंग कार्ड सहित अनेक महत्वपूर्ण कागजात मौजूद थे।

पर्स की काफी तलाश की गई, लेकिन अभी तक उसका कोई पता नहीं चल पाया है।

अतः सर्वसाधारण से विनम्र अनुरोध है कि यदि किसी सज्जन को उक्त पर्स अथवा उसमें रखे कागजात मिलें, तो कृपया नीचे दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क करके पर्स लौटाने की कृपा करें। इस नेक कार्य के लिए मैं आपका सदैव आभारी रहूँगा।

सूचनाकर्ता: अलीहसन मुल्तानी
पता: बड़का मार्ग, बड़ौत, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश
मोबाइल नंबर: 9027004684

Saturday, October 17, 2026

🏆 मुल्तानी समाज के होनहार जीशान मिर्ज़ा का कैरम में शानदार कारनामा, उत्तर प्रदेश की 30वीं राज्य चैंपियनशिप में बने एकल विजेता!

मुज़फ्फरनगर के जीशान मिर्ज़ा ने अपनी प्रतिभा, मेहनत और शानदार खेल से हासिल किया ख़िताबी मुक़ाम, मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी और उत्तर प्रदेश का नाम किया रोशन

नई दिल्ली। मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के लिए यह ख़ुशी और फ़ख़्र का मौक़ा है कि उत्तर प्रदेश के ज़िला मुज़फ्फरनगर से ताल्लुक़ रखने वाले होनहार खिलाड़ी जीशान मिर्ज़ा ने कैरम के मैदान में अपनी शानदार प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए 30वीं उत्तर प्रदेश राज्य कैरम चैंपियनशिप की एकल स्पर्धा का ख़िताब अपने नाम कर लिया। जीशान मिर्ज़ा की इस शानदार कामयाबी से न सिर्फ़ मुज़फ्फरनगर और उत्तर प्रदेश का नाम रोशन हुआ है, बल्कि मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के लोगों में भी ख़ुशी और फ़ख़्र की लहर दौड़ गई है।

जीशान मिर्ज़ा की यह कामयाबी इस बात की मिसाल है कि मेहनत, लगन, सब्र और लगातार कोशिश के ज़रिए इंसान अपनी मंज़िल हासिल कर सकता है। उनकी जीत नौजवानों के लिए एक हौसला-अफ़ज़ा पैग़ाम है कि अपनी सलाहियत को पहचानकर मैदान में उतरने वाले लोग अपनी मेहनत से नई पहचान बना सकते हैं।

30वीं उत्तर प्रदेश राज्य कैरम चैंपियनशिप का शानदार समापन

उत्तर प्रदेश कैरम एसोसिएशन एवं गौतम बुद्ध नगर कैरम एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में हरिकिशन सिंह सुरजीत भवन, इंद्रजीत गुप्ता में आयोजित 30वीं उत्तर प्रदेश राज्य कैरम चैंपियनशिप का समापन हुआ। इस प्रतियोगिता में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए खिलाड़ियों ने अपनी खेल प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया और ख़िताबी मुक़ाबलों में अपनी जगह बनाने के लिए भरपूर मेहनत की।

टीम चैंपियनशिप में प्रयागराज की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया, जबकि मुरादाबाद की टीम दूसरे और झांसी की टीम तीसरे स्थान पर रही। फ़ाइनल मुक़ाबले में प्रयागराज ने मुरादाबाद को तथा झांसी ने गोरखपुर को 3-0 से शिकस्त दी।

इसी चैंपियनशिप की एकल स्पर्धा में मुज़फ्फरनगर के जीशान मिर्ज़ा ने अपनी बेहतरीन खेल रणनीति, एकाग्रता और शानदार प्रदर्शन के दम पर ख़िताबी जीत दर्ज की।

जीशान मिर्ज़ा ने फ़ाइनल में मोहम्मद ताबिश को दी शिकस्त

एकल स्पर्धा के फ़ाइनल मुक़ाबले में जीशान मिर्ज़ा का सामना प्रयागराज के खिलाड़ी मोहम्मद ताबिश से हुआ। इस अहम मुक़ाबले में जीशान ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए मोहम्मद ताबिश को 24-1 और 25-18 के स्कोर से हराकर चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।

जीशान मिर्ज़ा की यह जीत उनके खेल कौशल, एकाग्रता और दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता को दर्शाती है। राज्य स्तर की प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में ख़िताब जीतना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि है। ऐसे में मुज़फ्फरनगर के इस होनहार खिलाड़ी की कामयाबी को बिरादरी के लिए भी एक यादगार उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।

प्रतियोगिता में वाराणसी के कृष्ण दयाल यादव ने तीसरा और झांसी के पद्म सौरभ सिंहारिया ने चौथा स्थान हासिल किया।

सेमीफ़ाइनल से फ़ाइनल तक जीशान का शानदार सफ़र


चैंपियनशिप के सेमीफ़ाइनल मुक़ाबले में जीशान मिर्ज़ा ने वाराणसी के कृष्ण दयाल यादव को कड़े मुक़ाबले में 25-8 और 24-6 से पराजित कर फ़ाइनल में अपनी जगह पक्की की। वहीं दूसरे सेमीफ़ाइनल में प्रयागराज के मोहम्मद ताबिश ने झांसी के पद्म सौरभ सिंहारिया को 19-24, 25-16 और 25-17 के स्कोर से हराकर फ़ाइनल में प्रवेश किया।

क्वार्टर फ़ाइनल मुक़ाबलों में भी खिलाड़ियों के बीच दिलचस्प प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। जीशान मिर्ज़ा ने शहादत को, कृष्ण दयाल यादव ने जमशेद आलम को, पद्म सौरभ सिंहारिया ने मोहम्मद आसिफ को और मोहम्मद ताबिश ने मीजान अंसारी को हराकर अगले दौर में जगह बनाई।

इन तमाम मुक़ाबलों के बाद जीशान मिर्ज़ा ने अपनी शानदार फ़ॉर्म बरक़रार रखते हुए फ़ाइनल में जीत हासिल की और राज्य चैंपियन बनने का सम्मान प्राप्त किया।

विजेताओं को ट्रॉफ़ी, मेडल और प्रमाणपत्र देकर किया गया सम्मानित

चैंपियनशिप के समापन समारोह में अंतरराष्ट्रीय कैरम महासंघ के महासचिव वी.डी. नारायण, आयोजन सचिव एवं नेशनल कैरम फेडरेशन की महासचिव भारती नारायण, उत्तर प्रदेश कैरम एसोसिएशन के अध्यक्ष बैजनाथ सिंह तथा प्रदेश सचिव एडवोकेट सिराजुद्दीन ने विजेता खिलाड़ियों को ट्रॉफ़ी, मेडल और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया।

इस मौक़े पर वी.डी. नारायण ने कैरम को एक वैज्ञानिक खेल बताते हुए कहा कि इसमें खिलाड़ियों की मानसिक और शारीरिक क्षमताओं की परीक्षा होती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में कैरम देश और दुनिया के लोकप्रिय इंडोर खेलों में अपनी एक मज़बूत पहचान बनाएगा।

समारोह को दिल्ली कैरम एसोसिएशन के फारुख अहमद, जाहिद भाई तथा मध्यप्रदेश कैरम एसोसिएशन के काशीराम ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन एडवोकेट सिराजुद्दीन ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन उपाध्यक्ष अनिल सहमद ने प्रस्तुत किया।

प्रतियोगिता के मैचों का संचालन इंटरनेशनल रेफ़री काशीराम, रमेश वर्मा एवं टेक्निकल डायरेक्टर सरदार रणवीर सिंह के नेतृत्व में हुआ। आयोजकों के अनुसार, प्रतियोगिता में सभी मुक़ाबले कैरम बोर्ड पर बिना अंपायर के खेले गए, जिसे खिलाड़ियों ने एक नए प्रयोग के तौर पर सराहा।

मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश और मुल्तानी बिरादरी के लिए फ़ख़्र का मौक़ा

जीशान मिर्ज़ा की इस कामयाबी को केवल एक खेल प्रतियोगिता में मिली जीत तक सीमित नहीं समझा जाना चाहिए। यह कामयाबी इस बात का पैग़ाम भी है कि हमारे समाज के नौजवानों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। ज़रूरत है उनकी सलाहियत को पहचानने, उन्हें आगे बढ़ने के मौक़े देने और उनकी मेहनत की हौसला-अफ़ज़ाई करने की।

मुज़फ्फरनगर के जीशान मिर्ज़ा ने राज्य स्तर की चैंपियनशिप में एकल ख़िताब जीतकर अपने ज़िले और उत्तर प्रदेश को गौरवान्वित किया है। उनकी इस उपलब्धि से मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के नौजवानों को भी खेल और दूसरे क्षेत्रों में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।

हमारी बिरादरी के ऐसे होनहार नौजवान समाज की असल पूँजी हैं। जब हमारे बच्चे और नौजवान अपनी मेहनत, हुनर और क़ाबिलियत से कामयाबी हासिल करते हैं, तो उनका यह सफ़र आने वाली नस्लों के लिए उम्मीद की नई राहें खोलता है।

अख़बार की ओर से पैग़ाम: जीशान मिर्ज़ा की कामयाबी पर उन्हें दिली मुबारकबाद। दुआ है कि अल्लाह तआला उन्हें इसी तरह कामयाबी, इज़्ज़त और तरक़्क़ी अता फ़रमाए तथा वे भविष्य में भी अपने वालिदैन, अपने ज़िले मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश और मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी का नाम रोशन करते रहें। आमीन।


मुल्तानी समाज की ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल ‘मुल्तानी समाज’ के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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सर सैयद अहमद ख़ानؒ की यौम-ए-पैदाइश पर ख़िराज-ए-अक़ीदत तालीम, तहज़ीब और इस्लाह-ए-मुआशरा के अलमबरदार की याद में मुल्तानी समाज का ख़ुसूसी पैग़ाम

मुल्तानी समाज राष्ट्रीय समाचार पत्रिका | 17 अक्टूबर 2026

अलीगढ़/नई दिल्ली। हिंदुस्तान की तारीख़ में कुछ शख़्सियतें ऐसी होती हैं जिनकी ख़िदमात का नूर आने वाली नस्लों के लिए मशाल-ए-राह बन जाता है। सर सैयद अहमद ख़ान उन्हीं अज़ीम शख़्सियात में से एक थे, जिन्होंने तालीम, शऊर, तहज़ीब और समाजी इस्लाह के ज़रिये मुस्लिम मुआशरे को नई राह दिखाने की कोशिश की। 17 अक्टूबर 1817 को दिल्ली में पैदा होने वाले सर सैयद अहमद ख़ान ने अपनी ज़िंदगी का एक बड़ा हिस्सा मुस्लिम समाज में इल्म की अहमियत उजागर करने और आधुनिक तालीम को फ़रोग़ देने के लिए वक़्फ़ कर दिया।

मुल्तानी समाज राष्ट्रीय समाचार पत्रिका की ओर से इस अज़ीम मुस्लिह-ए-क़ौम की यौम-ए-पैदाइश के मौक़े पर उन्हें ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश किया जाता है और उनकी तालीमी व समाजी ख़िदमात को याद किया जाता है।

सर सैयद अहमद ख़ान: इल्म की रोशनी से मुआशरे को मुनव्वर करने वाली शख़्सियत

सर सैयद अहमद ख़ान का नाम हिंदुस्तान में आधुनिक मुस्लिम तालीम की तारीख़ में ख़ास अहमियत रखता है। उन्होंने उस दौर में शिक्षा की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, जब समाज के एक बड़े हिस्से को आधुनिक तालीम की तरफ़ लाने के लिए लगातार कोशिशों की ज़रूरत थी। उनका मक़सद नौजवानों को इल्म, दानिश, तर्क़ और नए ज़माने के ज्ञान से आरास्ता करना था, ताकि वे बदलते हुए दौर में अपनी सलाहियतों का भरपूर इस्तेमाल कर सकें।

उन्होंने 1863 में साइंटिफिक सोसाइटी क़ायम की, जिसके ज़रिये आधुनिक इल्म और वैज्ञानिक विचारों को भारतीय समाज तक पहुँचाने की कोशिश की गई। इसके बाद उन्होंने तहज़ीब-उल-अख़लाक़ के माध्यम से समाजी इस्लाह, अख़लाक़ी बेदारी और बेहतर सामाजिक रवैये की हिमायत की।

तहरीक-ए-अलीगढ़: मुस्लिम तालीम की तारीख़ का अहम बाब

सर सैयद अहमद ख़ान की सबसे अहम तालीमी कोशिशों में से एक अलीगढ़ में मोहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना थी। वर्ष 1875 में शुरू होने वाली इस तहरीक ने आगे चलकर भारतीय मुस्लिम समाज में आधुनिक शिक्षा के प्रसार को एक नई पहचान दी। वर्ष 1920 में यही संस्थान अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित हुआ।

अलीगढ़ की यह तालीमी विरासत आज भी इस बात की याद दिलाती है कि किसी भी क़ौम की तरक़्क़ी के लिए स्कूल, कॉलेज, किताबें, इल्म और तालीमी इदारों की अहमियत बुनियादी होती है।

मुस्लिम मुआशरे की तरक़्क़ी का रास्ता: तालीम, हुनर और शऊर

आज के दौर में सर सैयद अहमद ख़ान की तालीमी सोच से सबक़ लेते हुए मुस्लिम समाज को अपने बच्चों और नौजवानों की शिक्षा पर विशेष तवज्जोह देने की ज़रूरत है। दीनी तालीम के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा, तकनीकी ज्ञान, रोज़गारपरक हुनर और साइंस के मैदान में आगे बढ़ना भी वक़्त की अहम ज़रूरत है।

वालिदैन की ज़िम्मेदारी है कि वे अपने बच्चों की तालीम को प्राथमिकता दें, उन्हें अच्छे स्कूलों और कॉलेजों तक पहुँचाने की कोशिश करें तथा उनकी सलाहियतों को पहचानकर आगे बढ़ने में मदद करें। समाज के ज़िम्मेदार अफ़राद, तंजीमें और ख़ैराती इदारे भी ज़रूरतमंद और होनहार विद्यार्थियों की मदद के लिए आगे आएँ।

किसी भी बिरादरी की असल ताक़त सिर्फ़ उसकी आबादी या तारीख़ी पहचान में नहीं, बल्कि उसके बच्चों के इल्म, अख़लाक़, हुनर और किरदार में होती है।

मुल्तानी समाज का पैग़ाम: अपनी नस्लों को तालीम से जोड़िए

मुल्तानी समाज राष्ट्रीय समाचार पत्रिका का मानना है कि बिरादरी की बेहतरी के लिए तालीमी बेदारी, समाजी इत्तेहाद और एक-दूसरे की मदद का जज़्बा बेहद ज़रूरी है। हमें चाहिए कि हम अपने बच्चों को तालीम के मैदान में आगे बढ़ाएँ, बेटियों की शिक्षा को भी पूरी अहमियत दें, नौजवानों को हुनरमंद बनाएँ और ज़रूरतमंद परिवारों के बच्चों की पढ़ाई में अपनी हैसियत के मुताबिक़ मदद करें।

सर सैयद अहमद ख़ान की ज़िंदगी हमें यह पैग़ाम देती है कि समाजी बेदारी के लिए दूरअंदेशी, मेहनत और इल्म से मोहब्बत ज़रूरी है। अगर हम अपनी आने वाली नस्लों को तालीम और अच्छे अख़लाक़ का तोहफ़ा देंगे, तो यही हमारे समाज के बेहतर मुस्तक़बिल की मज़बूत बुनियाद बनेगा।

सर सैयद साहब को सच्चा ख़िराज-ए-अक़ीदत

सर सैयद अहमद ख़ान की यौम-ए-पैदाइश पर उन्हें याद करना केवल एक रस्मी अमल नहीं, बल्कि उनके तालीमी मिशन से सबक़ लेने का मौक़ा भी है। आइए, हम सब मिलकर यह अहद करें कि अपने घरों, मोहल्लों और बिरादरी में तालीम की अहमियत को आम करेंगे, बच्चों की पढ़ाई में मदद करेंगे और समाज में इल्म, तहज़ीब, अख़लाक़ तथा भाईचारे को फ़रोग़ देंगे।

इल्म से शऊर, शऊर से तरक़्क़ी और तरक़्क़ी से रोशन मुस्तक़बिल की राह निकलती है।

मुल्तानी समाज राष्ट्रीय समाचार पत्रिका की ओर से सर सैयद अहमद ख़ान को ख़िराज-ए-अक़ीदत और तमाम अहले-वतन को तालीम, अमन, इत्तेहाद और भाईचारे का पैग़ाम।


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आपका एतमाद ही हमारी सबसे बड़ी ताक़त है। आपकी बिरादरी, आपकी ख़बरें, आपकी कामयाबियाँ और आपके समाजी मसाइल हमारी तवज्जोह का मरकज़ हैं। मुल्तानी समाज राष्ट्रीय समाचार पत्रिका का मक़सद बिरादरी की आवाज़ को ज़िम्मेदारी के साथ सामने लाना, समाजी बेदारी को फ़रोग़ देना और आपसी राब्ते को मज़बूत बनाना है।

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