Sunday, March 22, 2026

🕊️ मासूम कली के इंतिक़ाल से भीलवाड़ा में मातम, ग़मगीन फिज़ा में दुआओं का सिलसिला

निहायत ही रंजो-ग़म के साथ यह दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है कि जनाब अब्दुल सईद भट्टी (नीमच वाले) की पोती और उनके साहिबजादे जनाब मोहम्मद अख़लाख की नन्ही बेटी का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया। इस दर्दनाक खबर ने पूरे इलाके, खासतौर पर मोहल्ला गुलजार नगर, भीलवाड़ा (राजस्थान) में ग़म की लहर दौड़ा दी है।

परिजनों पर टूटे इस ग़म के पहाड़ ने हर आंख को नम कर दिया है। एक मासूम की जुदाई का सदमा ऐसा होता है, जिसे अल्फाज़ में बयां करना बेहद मुश्किल है। अल्लाह तआला मरहूमा को अपनी रहमतों के साए में जगह अता फरमाए और उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम नसीब करे। आमीन।

जनाब के परिजनों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, मय्यत को आज दिन इतवार, 22 मार्च 2026 को दिन में 3 बजे सूफियान कब्रिस्तान, भीलवाड़ा में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम अहबाब से गुजारिश है कि जनाज़े में शिरकत फरमा कर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मगफिरत करें और ग़मजदा परिवार को सब्र-ए-जमील की तस्सली दें।

इस दुख की घड़ी में पूरा मुल्तानी समाज और बिरादरी शोक संतप्त परिवार के साथ खड़ा है। अल्लाह तआला से दुआ है कि वह इस नन्ही फरिश्ता सिफ़त बच्ची की मगफिरत फरमाए और उसके सदके में घरवालों के गुनाहों को भी माफ़ फरमा दे।

🤲 दुआ:
“इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन।
या अल्लाह, मरहूमा की मगफिरत फरमा, उसकी क़ब्र को जन्नत का बाग़ बना दे और उसके वालिदैन को सब्र-ए-जमील अता फरमा। आमीन।”

📍 ख़ास रिपोर्ट:
अब्दुल क़ादिर मुल्तानी, भीलवाड़ा (राजस्थान)
मुल्तानी समाज न्यूज़ पोर्टल



Saturday, March 21, 2026

🕊️ इंतकाल की खबर: हाजी गुलाम रसूल साहब का इंतेक़ाल, आज 4 बजे होगी नमाज़-ए-जनाज़ा

निहायत ही रंजो-ग़म और अफसोस के साथ अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादराना हज़रात की खिदमत में यह इत्तिला पेश की जाती है कि
हाजी गुलाम रसूल साहब वल्द जनाब मोहम्मद हाफिजुद्दीन साहब (मूल निवासी: गाँव सिलना, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश) हाल बाशिंदे मकान नं० P-4, मस्जिद के सामने, सुल्तानपुरी, दिल्ली का आज दिन इतवार, तारीख़ 22 मार्च 2026 को सुबह क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम अपने अख़लाक, सादगी और बिरादरी में अपनी नेक साख के लिए जाने जाते थे। उनके इंतकाल की खबर से पूरे इलाके और बिरादरी में गहरा ग़म और मायूसी का माहौल है।

अल्लाह तआला से दुआ है कि मरहूम की मगफिरत फरमाए, उनकी कब्र को नूर से भर दे, उसे जन्नत के बागों में से एक बाग बना दे और उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए।
साथ ही, उनके तमाम अहले-खाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन। 🤲

🕌 नमाज़-ए-जनाज़ा:
आज शाम 3 से 4 बजे के दरमियान (इंशाअल्लाह) अदा की जाएगी।
तमाम अहबाब और बिरादराना हज़रात से पुरख़लूस इल्तिज़ा है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मगफिरत करें और सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

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✍️ रिपोर्ट: ज़मीर आलम, नई दिल्ली
(मुल्तानी समाज न्यूज़ नेटवर्क)


Friday, March 20, 2026

🕊️ इंतिक़ाल की खबर: मरहूम मोहम्मद कय्यूम साहब के लिए दुआ-ए-मग़फिरत की अपील

निहायत ही रंजो-ग़म के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि आज बरोज़ शनिवार, तारीख़ 21 मार्च 2026 को तक़रीबन रात 12:30 बजे, बीमारी के चलते जनाब मोहम्मद कय्यूम साहब वल्द जनाब मोहम्मद रफ़ीक साहब (मूल निवासी: गाँव कुरड़ी, ज़िला बागपत, उत्तर प्रदेश | हाल मुकाम: मीर विहार, दिल्ली) का क़ज़ा-ए-इलाही इंतिक़ाल हो गया।

मरहूम की उम्र लगभग 62 वर्ष थी। उनके इंतिक़ाल की खबर से पूरे इलाके और बिरादरी में गहरा शोक व्याप्त है। वे अपने पीछे ग़मगीन परिवार, अज़ीज़ो-अक़ारिब और चाहने वालों की एक बड़ी तादाद छोड़ गए हैं।

फिलहाल मय्यत के दफ़नाने का वक़्त समाचार लिखे जाने तक तय नहीं हो पाया है। जैसे ही कोई जानकारी प्राप्त होगी, उसे बाद नमाज़ ईद-उल-फितर अपडेट कर दिया जाएगा।

👉 तमाम अहले-ईमान से गुज़ारिश है कि मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फिरत फरमाएँ।
अल्लाह रब्बुल आलमीन मरहूम की मग़फ़िरत फरमाए और उनके अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।
आमीन, सुम्मा आमीन।

📞 अधिक जानकारी हेतु संपर्क करें:

जनाब मोहम्मद अय्यूब (कुरड़ी) – 9917653216

जनाब मोहम्मद एहसान (कुरड़ी) – 9624969568

✍️ सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से संचालित "मुल्तानी समाज" न्यूज़ पोर्टल के लिए नई दिल्ली से पत्रकार ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट

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Thursday, March 19, 2026

📰 देवबंद से अहम ऐलान: देश में नहीं दिखा शव्वाल का चांद, 21 मार्च को मनाई जाएगी ईद उल फितर

देवबंद से एक महत्वपूर्ण और विश्वसनीय खबर सामने आई है। देशभर में शव्वाल का चांद नजर नहीं आने की पुष्टि के बाद अब ईद उल फितर का त्योहार शनिवार, 21 मार्च 2026 को मनाया जाएगा।

दारुल उलूम देवबंद समेत विभिन्न इस्लामिक संगठनों ने शरई उसूलों के अनुसार चांद न दिखने का ऐलान किया है। इसके साथ ही यह भी बताया गया है कि शुक्रवार को अलविदा जुमा अदा किया जाएगा, जिसके बाद देशभर में ईद का त्योहार पूरे एहतराम और अकीदत के साथ मनाया जाएगा।

यह फैसला इस्लामी परंपराओं और चांद देखने की प्रक्रिया के तहत लिया गया है, ताकि मुस्लिम समाज में किसी प्रकार का भ्रम न रहे और सभी लोग एक ही दिन त्योहार मना सकें। हर साल की तरह इस बार भी चांद दिखने या न दिखने के आधार पर ईद की तारीख तय की गई है।

मुस्लिम समाज में ईद उल फितर का विशेष महत्व है। यह रमजान के मुकद्दस महीने के बाद खुशियों, भाईचारे और इंसानियत का पैगाम लेकर आती है। इस मौके पर लोग नमाज अदा करते हैं, जरूरतमंदों की मदद करते हैं और आपसी मोहब्बत को बढ़ावा देते हैं।

देशभर के उलेमा और जिम्मेदार लोग भी यही अपील कर रहे हैं कि ईद के मौके पर अमन, भाईचारा और अनुशासन बनाए रखें तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।


📍 रिपोर्ट: ज़मीर आलम (उत्तर प्रदेश / नई दिल्ली)
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⚠️ डिस्क्लेमर (Disclaimer):

यह लेख विश्वसनीय स्रोतों और संबंधित इस्लामिक संस्थाओं के आधिकारिक ऐलानों के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना है। किसी भी प्रकार की धार्मिक भावना को आहत करना या भ्रामक जानकारी देना हमारा उद्देश्य नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी निर्णय से पहले स्थानीय आधिकारिक घोषणा की पुष्टि अवश्य करें।



Wednesday, March 18, 2026

उज्जैन से दुखद खबर: बातुल बी का इंतकाल, बिरादरी में शोक की लहर

उज्जैन (मध्य प्रदेश) से एक बेहद दुखद और अफसोसनाक खबर सामने आई है। अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार व बढ़ई बिरादरी के लिए बड़े रंज और ग़म का मौका है। मरहूम जनाब अब्दुल रज़्ज़ाक़ भट्टी साहब (उज्जैन) की जोजा, मरहूमा बातुल बी का आज बरोज़ जुमेरात, 19 मार्च 2026 को क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया।

यह खबर सुनते ही पूरे इलाके और बिरादरी में ग़म की लहर दौड़ गई। मरहूमा अपने पीछे एक बड़ा कुनबा और चाहने वालों को छोड़कर रुख़्सत हो गईं। उनके इंतकाल से परिवार ही नहीं, बल्कि समाज में भी एक गहरा खालीपन महसूस किया जा रहा है।

अल्लाह तआला से दुआ है कि मरहूमा की मगफिरत फरमाए, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मक़ाम अता करे और तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।


📌 मय्यत से संबंधित जानकारी

मय्यत के सिलसिले में अधिक जानकारी के लिए आप
मोहम्मद साबिर मुल्तानी से मोबाइल नंबर 9827042292 पर संपर्क कर सकते हैं।


✍️ ख़ास रिपोर्ट

उज्जैन, मध्य प्रदेश से
पत्रकार: ज़मीर आलम


🌐 प्रकाशन

यह खबर “मुल्तानी समाज” — एक राष्ट्रीय स्तर की समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल — के लिए तैयार की गई है, जो देश की राजधानी दिल्ली से संचालित है और मुल्तानी लोहार व बढ़ई बिरादरी की आवाज़ को राष्ट्रीय स्तर पर मंच प्रदान करती है।

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Tuesday, March 17, 2026

नम आँखों से दी गई अंतिम विदाई: उद्योगपति व समाजसेवी अब्दुल कय्यूम का इंतकाल, शहर में शोक की लहर

मुजफ्फरनगर। शहर के जाने-माने उद्योगपति एवं वरिष्ठ समाजसेवी जनाब अब्दुल कय्यूम साहब के इंतकाल की खबर से पूरे क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त हो गया। उन्होंने 17 मार्च 2026, दिन मंगलवार को क़ज़ा-ए-इलाही से रुख़्सत फरमाया। जानकारी के अनुसार, पानीपत (हरियाणा) के एक निजी अस्पताल में उन्होंने शाम लगभग साढ़े 6 बजे आखिरी सांस ली।

मरहूम के पार्थिव शरीर को रात करीब 9 बजे मुजफ्फरनगर स्थित उनके आवास पर लाया गया। चूंकि रात अधिक हो चुकी थी और रमज़ान का पाक महीना भी चल रहा है, इसलिए परिजनों ने आपसी मशविरा कर सुपुर्द-ए-ख़ाक का समय अगले दिन, 18 मार्च 2026 (बुधवार) सुबह 10 बजे निर्धारित किया।

हालांकि रात गहरी होने के बावजूद, उनके चाहने वालों का हुजूम देर रात तक उनके आवास पर मौजूद रहा। बताया जाता है कि रात करीब 2 बजे तक लोग लगातार पहुंचकर मरहूम को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश करते रहे। सुबह फज्र की नमाज़ के बाद से ही रिश्तेदारों, मित्रों और शहर की जानी-मानी हस्तियों का तांता लगना शुरू हो गया।

सुपुर्द-ए-ख़ाक के समय का दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था। हजारों की संख्या में लोग—जिनमें महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल थे—कब्रिस्तान पहुंचे और नम आंखों से अब्दुल कय्यूम साहब को अंतिम विदाई दी। हर आंख नम थी और हर ज़ुबान उनकी नेकियों और सामाजिक सेवाओं को याद कर रही थी।

जनाब अब्दुल कय्यूम साहब न सिर्फ एक सफल उद्योगपति थे, बल्कि एक दरियादिल इंसान और समाज के लिए समर्पित व्यक्तित्व भी थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में अनेक सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और जरूरतमंदों की मदद को हमेशा प्राथमिकता दी। उनके इंतकाल से समाज ने एक ऐसी शख्सियत को खो दिया है, जिसकी भरपाई कर पाना आसान नहीं होगा।

अल्लाह तआला मरहूम को जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए और उनके परिजनों को सब्र-ए-जमील अता करे। आमीन।


(यह रिपोर्ट उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। समाचार का उद्देश्य केवल सूचनात्मक है और इसमें पूर्ण संवेदनशीलता व सम्मान बनाए रखा गया है।)

📍 रिपोर्ट: प्रधान संपादक ज़मीर आलम
📍 स्थान: मुजफ्फरनगर / नई दिल्ली

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🕊️ गहरे रंज-ओ-ग़म के साथ: मशहूर उद्योगपति जनाब अब्दुल कय्यूम साहब का इंतकाल, एक दौर का ख़ात्मा

मुजफ्फरनगर/उत्तर प्रदेश डेस्क से।

इंतिहाई अफ़सोस और दुख के साथ यह खबर दी जाती है कि प्रसिद्ध उद्योगपति, कई राष्ट्रीय स्तर के बिज़नेस अवॉर्ड से सम्मानित शख्सियत जनाब अब्दुल कय्यूम साहब (85 वर्ष) वल्द जनाब हाजी अमीर हसन साहब (मरहूम) का आज बरोज मंगल, बा - तारीख़ 17 मार्च 2026 को शाम तक़रीबन 6:30 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम अपने पीछे एक समृद्ध विरासत और मिसाल छोड़ गए हैं। वह अपने वालिद के घराने में पैदा हुए, जहां पाँच भाई और दो बहनों में सबसे बड़े थे। अपने जीवनकाल में उन्होंने मेहनत, दूरदर्शिता और सादगी के साथ उद्योग जगत में वह मुकाम हासिल किया, जिसे आज भी इज्जत और एहतराम के साथ याद किया जाता है।

कोल्हू और क्रेशर उद्योग से शुरुआत कर, सल्फर (मिनी शुगर मिल) के क्षेत्र में उन्होंने एक अलग पहचान बनाई और बाद में पेपर मिल उद्योग में भी कामयाबी हासिल की। एक समय ऐसा भी रहा जब देश के कई राज्यों में उनकी पहचान और कारोबार का डंका बजता था।

उनकी शख्सियत की सबसे खास बात उनकी सादगी और विनम्रता थी। कई बार राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होने और बड़े-बड़े उद्योगपतियों, नेताओं व मंत्रियों से करीबी संबंध होने के बावजूद, उन्होंने हमेशा खुद को दिखावे और प्रचार से दूर रखा। खबरों में आने से बचते हुए वे अक्सर मीडिया से भी विनम्रता के साथ दूरी बनाए रखते थे।

मरहूम अपने पीछे अपनी अहलिया, बेटियों—राबिया बी, सायरा बी, शारदा बी, हीना बी (मरहूमा ), शबाना बी, हुस्ना बी और नाज़िया बी—और बेटे साजिद समेत पौते-पोतियों, नाते-नातिनों और पूरे खानदान को ग़मगीन छोड़ गए हैं।

👉 जनाज़े की जानकारी:
मरहूम को अनुमानतः कल बरोज बुध, 18 मार्च 2026 को सुबह 10:00 बजे सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम अहबाब और जानने वालों से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

🤲 अल्लाह तआला से दुआ है कि मरहूम की मग़फिरत फरमाए, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता करे और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।


रिपोर्ट: ज़मीर आलम
प्रकाशन: मुल्तानी समाज (राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज़ पोर्टल व यूट्यूब चैनल)

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📌 नोट: मय्यत से संबंधित अधिक जानकारी के लिए संपादक ज़मीर आलम जी से दिए गए नंबर पर संपर्क किया जा सकता है।