आज बरोज़ जुमा, बा-तारीख़ 16 जनवरी 2026, अभी कुछ ही देर पहले
मोहल्ला दरबार, कस्बा खतौली, ज़िला मुज़फ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) में
वहीदा बी, अहलिया जनाब रफ़ीक़ अहमद साहब (नांगल वालों) का
क़ज़ा-ए-ईलाही से इंतक़ाल हो गया है।
यह ख़बर न सिर्फ़ अहल-ए-ख़ाना बल्कि पूरी बिरादरी के लिए गहरे सदमे और दुख का कारण है।
अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनके दर्जात बुलंद फ़रमाए और
उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फरमाए। आमीन 🤲
ख़बर लिखे जाने तक मरहूमा के दफ़न का वक़्त मुक़र्रर नहीं हो पाया है,
जैसे ही तफ़सीलात हासिल होंगी, बिरादरी को इत्तला दी जाएगी, इंशाअल्लाह।
📢 एक ज़रूरी ऐलान
इंतेकाल की ख़बर भेजने से मुतअल्लिक़ अहम हिदायतें
अक्सर देखा गया है कि किसी अज़ीज़ के इंतक़ाल की ख़बर या तो देर से पहुँचती है
या फिर मुकम्मल जानकारी न होने की वजह से कई लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते।
इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका
तमाम बिरादराने इस्लाम से अदब के साथ गुज़ारिश करती है कि
जब भी इंतेकाल की कोई ख़बर भेजें तो इन बातों का ख़ास ख्याल रखें:
1️⃣ मरहूम / मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता — पैदाइशी और मौजूदा निवास।
3️⃣ दफ़न का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स (एक या दो) के फ़ोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतक़ाल हुआ हो तो मरहूम की फोटो भी शामिल करें।
6️⃣ इंतक़ाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम — जैसे माँ-बाप, भाई-बहन, औलाद वग़ैरह।
👉 इन तमाम जानकारियों से ख़बर मुकम्मल होती है और बिरादरी के लोगों को
सही और वक़्त पर इत्तला मिल पाती है।
📰 डिस्क्लेमर (Disclaimer)
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📌 सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
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पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी को समर्पित
देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए
✍️ ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट
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और इस दुख की घड़ी में पूरी बिरादरी को हिम्मत व तसल्ली नसीब फरमाए।
आमीन या रब्बुल आलमीन।