Wednesday, June 17, 2026

15वाँ जश्न-ए-मुल्तानी स्थापना दिवस: मुल्तानी बिरादरी ने मुल्क ही नहीं विदेशों में भी पेश की एकता, खिदमत और हरियाली की मिसाल

मोहम्मद आलम की सरपरस्ती में देश-विदेश में धूमधाम से मनाया गया स्थापना दिवस, आने वाली नस्लों के नाम किया गया वृक्षारोपण

नई दिल्ली। किसी भी कौम और बिरादरी की असली ताकत उसके महलों, दावतों और दिखावों में नहीं, बल्कि उसके उन नेक इरादों में छिपी होती है जो आने वाली नस्लों के लिए राहें आसान बनाते हैं। यही पैग़ाम इस वर्ष 17 जून को मनाए गए 15वें "जश्न-ए-मुल्तानी स्थापना दिवस" के अवसर पर दुनिया भर में बसे मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी के लोगों ने दिया।

देश की राजधानी दिल्ली से पंजीकृत पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी की अग्रणी एवं क्रांतिकारी तंजीम के आह्वान पर आयोजित इस विशेष दिवस को भारत के विभिन्न राज्यों, जनपदों, कस्बों और गांवों के साथ-साथ विदेशों में रहने वाले बिरादरी के लोगों ने भी पूरे उत्साह, सादगी और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ मनाया।

इस अवसर पर बिरादरी के लोगों ने अपने-अपने क्षेत्रों में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल स्थापना दिवस मनाना नहीं था, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली, स्वच्छ वातावरण और सामाजिक जागरूकता की ऐसी विरासत छोड़ना था जो आने वाले वर्षों तक समाज को प्रेरित करती रहे।

खिदमत का जज़्बा बना कार्यक्रम की पहचान

स्थापना दिवस के अवसर पर बिरादरी की अनेक नामचीन हस्तियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों, व्यवसायियों और ख्वातीन ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। विभिन्न स्थानों से वृक्षारोपण की तस्वीरें और संदेश साझा करते हुए सभी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि समाज की तरक्की केवल बड़े-बड़े आयोजनों और खर्चीले कार्यक्रमों से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे नेक कामों से भी संभव है।

कार्यक्रम में शामिल लोगों का मानना था कि यदि नीयत साफ हो और मकसद समाज की भलाई हो, तो बिना किसी बड़े आर्थिक बोझ के भी पूरी बिरादरी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी सकारात्मक पहचान कायम कर सकती है।

नई नस्लों को दिया गया जिम्मेदारी और पर्यावरण का पैग़ाम

वृक्षारोपण कार्यक्रम के माध्यम से नौजवानों और बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व से भी अवगत कराया गया। वक्ताओं ने कहा कि आज लगाया गया एक पौधा आने वाले वर्षों में न केवल छाया देगा बल्कि समाज की दूरअंदेशी सोच का प्रतीक भी बनेगा।

उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति यदि अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करने का संकल्प ले, तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जा सकता है।

सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश

स्थापना दिवस के अवसर पर विभिन्न स्थानों से प्राप्त संदेशों में सामाजिक एकता, आपसी भाईचारे, शिक्षा, जागरूकता और समाज सुधार पर विशेष बल दिया गया। बिरादरी के वरिष्ठजनों ने कहा कि संगठन की स्थापना का मूल उद्देश्य समाज को जोड़ना, नई पीढ़ी को सही दिशा देना और सामाजिक विकास के लिए सामूहिक प्रयास करना रहा है।

आज जब दुनिया विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रही है, ऐसे में सामाजिक संगठनों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे लोगों को सकारात्मक कार्यों के लिए प्रेरित करें और समाज में भाईचारे तथा इंसानियत की भावना को मजबूत करें।

देश-विदेश से मिला भरपूर समर्थन

स्थापना दिवस के अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों तथा विदेशों में रहने वाले बिरादरी के लोगों ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में वृक्षारोपण कर कार्यक्रम को सफल बनाया। सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की गई तस्वीरों और संदेशों ने यह साबित कर दिया कि मुल्तानी बिरादरी आज वैश्विक स्तर पर भी अपनी एक अलग पहचान रखती है और समाजहित के कार्यों में हमेशा अग्रणी भूमिका निभाती है।

आयोजकों ने कार्यक्रम में शामिल सभी गणमान्य व्यक्तियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं, महिलाओं और बच्चों का आभार व्यक्त करते हुए आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी इसी प्रकार समाजहित और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।


इन महान हस्तियों ने कार्यक्रम को बनाया यादगार

इस अवसर पर देश एवं विदेश से बिरादरी की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों, समाजसेवियों, शिक्षाविदों, उद्योगपतियों, ख्वातीन प्रतिनिधियों तथा युवाओं ने सहभागिता कर वृक्षारोपण कार्यक्रम को सफल बनाया। कार्यक्रम में विशेष रूप से

देश-विदेश की नामचीन हस्तियों ने निभाई पर्यावरण और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी

15वें जश्न-ए-मुल्तानी स्थापना दिवस एवं वृक्षारोपण अभियान में देश और विदेश से बिरादरी की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों, समाजसेवियों, शिक्षाविदों, व्यवसायियों, चिकित्सकों, अधिवक्ताओं, ख्वातीन प्रतिनिधियों और युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

इस अवसर पर जनाब इनाम साहब (खतौली, मुजफ्फरनगर), तंजीम के सरपरस्त मोहम्मद आलम साहब, जनाब महबूब खान साहब (करनाल, हरियाणा), मोहतरमा इकरा सुल्ताना (जम्मू-कश्मीर), मोहतरमा रेशमा जमाल (बिजनौर), मोहतरमा शाजदा सबा (देवबंद), जनाब अब्दुल सलाम साहब (देवबंद)
, जनाब हासिमुद्दीन साहब एवं जनाब मिर्ज़ा मिन्हाजुद्दीन साहब (फलावदा, मेरठ), जनाब सिकंदर साहब (भगवानपुर, उत्तराखंड), एडवोकेट इरशाद मुल्तानी साहब (नगीना, बिजनौर), धामपुर के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. कमाल साहब, वरिष्ठ समाजसेवी एवं योग प्रशिक्षक जनाब नूरमोहम्मद साहब "स्टीयरिंग वाले" (शामली), जनाब फैसल साहब (रुड़की), जनाब
सलीम साहब उर्फ़ पप्पू (देवबंद)
, जनाब नाज़िम साहब (शामली), जनाब मोहम्मद दानिश साहब (दुबई, यूएई), जनाब फैसल इस्माईल साहब (सरधना, मेरठ), जनाब इरशाद साहब (बिजनौर)
, जनाब आशिफ अली (रुड़की, उत्तराखंड), मोहतरमा
नाहिदा खान (मुजफ्फरनगर)
, हाजी इरफान साहब (चंडीगढ़), जनाब अब्दुल हफ़ीज़ साहब (गुरुग्राम, हरियाणा), हाजी दिलशाद साहब (निजामुद्दीन मरकज़, नई दिल्ली)
, हाजी इक़बाल साहब (अलीगढ़)
,
हाजी साज़िद मिर्ज़ा साहब (वज़ीराबाद, दिल्ली), वसीम सलीम (मुजफ्फरनगर), इरफान साहब (चमोली, उत्तराखंड), फैज़ मोहम्मद साहब (वल्लभगढ़, हरियाणा) तथा हाजी लियाकत अली साहब (सोनीपत, हरियाणा) सहित देश-विदेश की अनेक सम्मानित हस्तियों ने वृक्षारोपण कर स्थापना दिवस को यादगार बनाया।

इन सभी हस्तियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में पौधे लगाकर न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया, बल्कि यह भी साबित किया कि मुल्तानी बिरादरी सामाजिक एकता,
शिक्षा, जागरूकता और इंसानियत की खिदमत के लिए हमेशा अग्रणी भूमिका निभाती रही है। कार्यक्रम में शामिल अन्य गणमान्य व्यक्तियों, ख्वातीन और युवाओं सहित दर्जनों गणमान्य लोगों ने सहभागिता कर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई।


प्रेस लाइन

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, देश की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी की राष्ट्रीय समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए नई दिल्ली डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की विशेष रिपोर्ट।

यदि आप भी अपनी खबर, लेख, सामाजिक संदेश, संस्मरण, धार्मिक लेख, विज्ञापन अथवा बिरादरी से संबंधित जानकारी प्रकाशित कराना चाहते हैं, तो संपर्क करें:

📞 9410652990
📞 8010884848

Tuesday, June 16, 2026

बावली (बागपत) के मरहूम अब्दुल सत्तार साहब का इंतिकाल, बिरादरी में शोक की लहर ,इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलैहि राजिऊन

बावली, बागपत (उत्तर प्रदेश)।पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार एवं बढ़ई बिरादरी के लिए आज का दिन गहरे रंज और ग़म का दिन साबित हुआ। गांव बावली, तहसील बड़ौत, जिला बागपत निवासी मरहूम मिस्त्री यूसुफ साहब के सुपुत्र जनाब अब्दुल सत्तार साहब का आज दिनांक 17 जून 2026 को सुबह लगभग 5 बजे लंबी बीमारी के बाद इंतिकाल हो गया। उनकी उम्र लगभग 65 वर्ष बताई गई है।

अल्लाह तआला की यही मर्ज़ी थी और हर जान को एक दिन मौत का स्वाद चखना है।

"इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलैहि राजिऊन"
(बेशक हम अल्लाह ही के हैं और उसी की तरफ लौटकर जाने वाले हैं।)

पारिवारिक परिचय

मरहूम अब्दुल सत्तार साहब, मिस्त्री यूसुफ साहब के सुपुत्र थे। मरहूम यूसुफ साहब के चार बेटे थे—

  • जनाब इरशाद साहब
  • जनाब मईनू राशन वाले
  • मरहूम शमशाद साहब
  • मरहूम अब्दुल सत्तार साहब

गौरतलब है कि अब्दुल सत्तार साहब के भाई शमशाद साहब का इंतिकाल पहले ही हो चुका था।

भरा-पूरा परिवार छोड़ गए

मरहूम अब्दुल सत्तार साहब अपने पीछे एक भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके परिवार में—

  • मुहम्मद फारूख
  • मुहम्मद इरफान
  • मुहम्मद इदरीश

के अलावा दो बेटियां भी हैं।

अपने अजीजों, रिश्तेदारों और चाहने वालों को गमगीन छोड़कर मरहूम इस फानी दुनिया से रुख्सत हो गए। उनके इंतिकाल की खबर से पूरे क्षेत्र और बिरादरी में शोक की लहर दौड़ गई है।

आज असर की नमाज़ के बाद होगी तदफीन

प्राप्त जानकारी के अनुसार मरहूम अब्दुल सत्तार साहब की नमाज़-ए-जनाज़ा के बाद आज 17 जून 2026 को असर की नमाज़ के बाद बिजलीघर के सामने स्थित कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

जनाज़े के अदब और इस्लामी तालीमात

इस मौके पर तमाम अहबाब, रिश्तेदारों और बिरादराना हजरात से गुजारिश की जाती है कि जनाज़े और ताज़ियत के दौरान इस्लामी आदाब का पूरा ख्याल रखें।

  • मय्यत वालों के घर जाकर हंसी-मजाक और गैर जरूरी बातों से परहेज़ करें।
  • गमजदा परिवार पर खाने-पीने का अतिरिक्त बोझ न बनें।
  • जनाज़े के साथ अदब और खामोशी के साथ चलें।
  • रास्ते में दुनियावी बातचीत और मोबाइल फोन पर मशगूल रहने से बचें।
  • मरहूम के लिए मगफिरत और बुलंदी-ए-दराजात की दुआ करते रहें।
  • "ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह" का विर्द करते हुए जनाज़े में शरीक हों।

बिरादरी का फर्ज़

किसी भी बिरादरी की ताकत उसके आपसी रिश्तों, हमदर्दी और दुख-सुख में शरीक होने से बढ़ती है। इसलिए बिरादरी के हर जिम्मेदार फर्द का फर्ज़ है कि वह ऐसी खबरों को एक-दूसरे तक पहुंचाए और गम की इस घड़ी में मरहूम के परिवार का हौसला बढ़ाए।

दुआ-ए-मगफिरत

हम सभी अल्लाह तआला की बारगाह में हाथ उठाकर दुआ करते हैं कि—

"ऐ अल्लाह! मरहूम अब्दुल सत्तार साहब की मगफिरत फरमा, उनकी तमाम खताओं को माफ फरमा, उनकी क़ब्र को जन्नत के बागों में से एक बाग बना दे, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमा और तमाम अहले-खाना को सब्र-ए-जमील अता फरमा। आमीन या रब्बुल आलमीन।"


संपर्क सूत्र

अधिक जानकारी के लिए निम्न व्यक्तियों से संपर्क किया जा सकता है—

  • फरदीन : 9045326620
  • डा. शमशाद साहब, बावली : 9058647438
  • हाजी गफूर साहब (नेता जी ट्रैक्टर वाले), बावली : 9412061270
  • मुहम्मद हसन (मुहम्मद) : 9548844201
  • चौधरी इरशाद (पप्पू हाडी फैब्रिकेटर्स) : 9756277494

प्रेस लाइन

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार एवं बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका, न्यूज पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की विशेष रिपोर्ट।

समाचार, लेख, संदेश, सामाजिक गतिविधियों एवं विज्ञापन के प्रकाशन हेतु संपर्क करें :
📞 9410652990
📞 8010884848

इस्लामिक नए साल और मुल्तानी समाज स्थापना दिवस का मुबारक संगम: आइए एक पेड़ लगाकर आने वाली नस्लों को तोहफा दें

इस्लामिक नए साल और मुल्तानी समाज स्थापना दिवस की तमाम बिरादराना हजरात को दिली मुबारकबाद

एक पेड़ देश के नाम, एक पेड़ आने वाली नस्लों के नाम

लेखक: ज़मीर आलम, प्रधान संपादक, मुल्तानी समाज

आज का दिन पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार एवं बढ़ई बिरादरी के लिए दोहरी खुशियों का पैगाम लेकर आया है। एक तरफ इस्लामी कैलेंडर का नया साल शुरू हुआ है, वहीं दूसरी तरफ देश की सबसे बड़ी सामाजिक एवं क्रांतिकारी तंजीम "मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट" का स्थापना दिवस भी पूरे भारत में बड़े उत्साह और जोश के साथ मनाया जा रहा है।

17 जून का दिन हमारी बिरादरी के इतिहास में एक सुनहरे अध्याय के रूप में दर्ज है। इसी दिन देश की राजधानी नई दिल्ली में समाज की बेहतरी, शिक्षा, एकता, भाईचारे और सामाजिक उत्थान के उद्देश्य से मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट का पंजीकरण हुआ था। तब से लेकर आज तक यह तंजीम पूरे भारत में समाज सेवा, जागरूकता और कौमी एकता के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

इस वर्ष बिरादरी अपना

15वां "मुल्तानी समाज स्थापना दिवस" मना रही है। हर वर्ष की तरह इस बार भी स्थापना दिवस को वृक्षारोपण अभियान के रूप में मनाया जा रहा है। देश के विभिन्न राज्यों, शहरों, कस्बों और गांवों में बिरादरी के लोग पेड़-पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं।

इस्लाम में पेड़ लगाने की अहमियत

इस्लाम हमें केवल इबादत ही नहीं सिखाता बल्कि इंसानियत और प्रकृति की हिफाजत का भी हुक्म देता है। हज़रत मुहम्मद ﷺ ने फरमाया:

"अगर किसी मुसलमान ने कोई पेड़ लगाया और उससे कोई इंसान, परिंदा या जानवर फायदा उठाए तो वह उसके लिए सदका (दान) माना जाएगा।"

पेड़ लगाना केवल पर्यावरण की सेवा नहीं बल्कि एक ऐसी नेक अमल है जिसका सवाब इंसान को उसके इंतिकाल के बाद भी मिलता रहता है। यही वजह है कि इस्लाम में वृक्षारोपण को सदक़ा-ए-जारिया कहा गया है।

सरकार भी चला रही है हरियाली अभियान

भारत सरकार और विभिन्न राज्य सरकारें लगातार पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए वृक्षारोपण अभियान चला रही हैं। "एक पेड़ मां के नाम" जैसे अभियान लोगों को प्रकृति से जोड़ने का काम कर रहे हैं।

बढ़ते प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग और जल संकट के दौर में पेड़ लगाना केवल एक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि राष्ट्रीय कर्तव्य भी बन गया है। एक पेड़ कई पीढ़ियों को ऑक्सीजन, छाया, फल और स्वच्छ वातावरण प्रदान करता है।

दुनियावी फायदे भी कम नहीं

पेड़-पौधे हमारे जीवन का आधार हैं। इनके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। वृक्षारोपण से:

  • वातावरण शुद्ध होता है।
  • ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है।
  • वर्षा संतुलित रहती है।
  • भूजल स्तर सुरक्षित रहता है।
  • गर्मी और प्रदूषण कम होता है।
  • पक्षियों और जीव-जंतुओं को आश्रय मिलता है।
  • आने वाली पीढ़ियों को बेहतर भविष्य मिलता है।

आज जब दुनिया पर्यावरण संकट से जूझ रही है, तब एक पेड़ लगाना मानवता की सबसे बड़ी सेवाओं में से एक है।

मोहम्मद आलम ने कायम की प्रेरणादायक परंपरा

हर वर्ष की तरह इस बार भी मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट के पूर्व राष्ट्रीय चेयरमैन जनाब मोहम्मद आलम साहब, निवासी मुस्तफाबाद, दिल्ली ने सबसे पहले वृक्षारोपण कर अपनी तस्वीरें साझा कीं और समाज के लोगों को इस मुहिम में बढ़-चढ़कर भाग लेने का संदेश दिया।

उनकी यह पहल पूरे देश के लिए प्रेरणा बन चुकी है। समाज के हजारों लोग हर वर्ष उनकी प्रेरणा से वृक्षारोपण अभियान में हिस्सा लेते हैं।

आइए हम भी हिस्सा बनें

यदि आप पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार एवं बढ़ई बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं तो आज के मुबारक दिन एक पेड़ अवश्य लगाएं। अपने बच्चों को भी इसके महत्व से अवगत कराएं और उनकी जिम्मेदारी बनाएं कि वे अपने लगाए हुए पौधे की देखभाल भी करें।

याद रखिए, पेड़ लगाना आसान है लेकिन उसकी परवरिश करना असली सेवा है।

आइए इस इस्लामिक नए साल पर हम यह संकल्प लें कि अपने देश, समाज और आने वाली नस्लों के लिए कम से कम एक पेड़ अवश्य लगाएंगे।

मुल्तानी समाज स्थापना दिवस एवं इस्लामिक नए साल की तमाम बिरादराना हजरात को दिली मुबारकबाद।

अल्लाह तआला हम सभी को इंसानियत, भाईचारे और प्रकृति की हिफाजत करने की तौफीक अता फरमाए। आमीन।


प्रेस लाइन

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार एवं बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका, न्यूज पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए प्रधान संपादक ज़मीर आलम की विशेष रिपोर्ट।

समाचार, लेख, संदेश, सामाजिक गतिविधियों, विज्ञापन एवं अन्य जानकारी के प्रकाशन हेतु संपर्क करें: 📞 9410652990
📞 8010884848

Sunday, June 14, 2026

हज 2026 के मुबारक सफ़र से लौटे हाजियों के सम्मान में आयोजित हुई शानदार दावत, फूलों और मोहब्बत से हुआ इस्तकबाल

शामली से ज़मीर आलम की विशेष रिपोर्ट

शामली। हज जैसे मुक़द्दस और रूहानी सफ़र से लौटने वाले हाजियों का सम्मान करना इस्लामी परंपराओं और सामाजिक भाईचारे की खूबसूरत मिसाल माना जाता है। इसी सिलसिले में शामली शहर के मोहल्ला सलेक विहार निवासी समाजसेवी हाजी नूरमोहम्मद साहब (स्टेयरिंग वालों की) की ओर से शनिवार, 13 जून 2026 को अपने निजी मुक़ाम पर हज 2026 से लौटे हाजियों के सम्मान में एक मोहब्बत से लबरेज दावत एवं इस्तकबाल कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में जिला मुजफ्फरनगर , उत्तर प्रदेश के कस्बा खतौली समेत विभिन्न इलाकों से हज 2026 का पाक सफ़र पूरा करके लौटे हाजियों ने शिरकत की। इस अवसर पर मेहमानों का फूलों के हार, गुलदस्तों और दुआओं के साथ गर्मजोशी से इस्तकबाल किया गया। मौजूद मेहमानों ने हाजियों से मुलाकात कर उन्हें हज की मुबारकबाद पेश की और उनके तजुर्बों और सफ़र के दौरान की वाकयो को भी सुना।

इस मुबारक़ मौके पर हाजी नूरमोहम्मद साहब की अहलिया मुसर्रत बी ने भी ख़ास तौर पर हज से लौटी हज्जनों का बेहद गर्मजोशी से इस्तकबाल किया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने परिवार की मेहमाननवाज़ी और बेहद दीनी माहौल की खुलकर तारीफ की।

शहर के लोगों के मुताबिक हाजी नूरमोहम्मद साहब और उनकी फैमिली लंबे समय से दीनी, सामाजिक एवं जनता की भलाई से जुड़े हर कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। समय-समय पर विभिन्न धार्मिक विद्वानों, हाजियों, उमराह यात्रियों और समाज के प्रतिष्ठित लोगों के सम्मान में भी कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न सामाजिक, शैक्षिक और जनहित के कार्यों से जुड़ी संस्थाओं के साथ भी उनका सहयोग बना रहता है।

कार्यक्रम के दौरान आपसी भाईचारे, सामाजिक एकता और इंसानियत की सेवा के महत्व पर भी चर्चा हुई। उपस्थित लोगों ने इस प्रकार के आयोजनों को समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव और पारस्परिक सम्मान को बढ़ावा देने वाला बताया।

हज से लौटे मेहमानों ने आयोजकों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि इस तरह का सम्मान और मोहब्बत भरा माहौल उनके लिए यादगार रहेगा। कार्यक्रम का समापन दुआओं और एकसाथ बैठकर खाने के साथ हुआ।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित मुस्लिम मुल्तानी लोहार एवं बढ़ई बिरादरी की राष्ट्रीय समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की विशेष रिपोर्ट।

यदि आप भी अपनी खबर, लेख, सामाजिक संदेश, संस्मरण, साहित्यिक रचना अथवा विज्ञापन प्रकाशित या प्रसारित कराना चाहते हैं, तो निम्नलिखित नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:

📞 9410652990
📞 8010884848

Saturday, June 13, 2026

कच्ची गढ़ी निवासी तौकीर अहमद का इंतिकाल, परिवार और बिरादरी में शोक की लहर, इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

ज़िंदगी और मौत अल्लाह तआला के हाथ में है। हर इंसान को एक दिन अपने रब की बारगाह में हाज़िर होना है। इसी हकीकत की याद दिलाते हुए मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी को एक और गमगीन खबर मिली है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार गांव कच्ची गढ़ी, तहसील ऊन, जिला शामली निवासी जनाब तौकीर अहमद वल्द मरहूम जनाब अब्दुल हकीम साहब का बीती रात चंडीगढ़ के एक अस्पताल में इलाज के दौरान इंतिकाल हो गया। मरहूम की उम्र लगभग 45 वर्ष बताई गई है।

मरहूम तौकीर अहमद अपने परिवार में चार भाइयों और दो बहनों में सबसे छोटे थे। उनके दो भाई चंडीगढ़ में तथा दो भाई उत्तर प्रदेश के जनपद शामली स्थित कस्बा थानाभवन में निवास करते हैं। मरहूम स्वयं भी चंडीगढ़ में रहकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे।

उनके इंतिकाल की खबर मिलते ही परिवार, रिश्तेदारों, मित्रों और बिरादरी में गहरा दुख और शोक व्याप्त हो गया। मरहूम अपने पीछे अपनी वालिदा, अहलिया, चार भाइयों, दो बहनों, दो बेटों, एक बेटी तथा तमाम रिश्तेदारों और चाहने वालों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।

मिली जानकारी के अनुसार मरहूम का पार्थिव शरीर चंडीगढ़ से कस्बा थानाभवन लाया जाएगा। इसके बाद नई बस्ती, विजय वाटिका के पीछे स्थित जनाब तौसीफ साहब के निवास पर अंतिम दीदार के लिए रखा जाएगा। तत्पश्चात कस्बा थानाभवन के गौरे गरीबा कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

इस दुखद अवसर पर हम सभी अल्लाह तआला की बारगाह में दुआ करते हैं कि वह मरहूम तौकीर अहमद की तमाम खतााओं को माफ फरमाए, उनकी मगफिरत फरमाए, उनकी कब्र को नूर से भर दे, उसे जन्नत के बागों में से एक बाग बना दे और उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए। आमीन।

अल्लाह तआला मरहूम की कब्र को वसीअ फरमाए, हश्र के दिन उन्हें नेक बंदों के साथ उठाए और उनकी तमाम नेकियों को उनके लिए सदका-ए-जारीया बनाए। आमीन।

साथ ही हम दुआगो हैं कि अल्लाह तआला उनकी वालिदा, पत्नी, बच्चों, भाइयों, बहनों तथा समस्त अहल-ए-खाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए और इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की ताकत प्रदान करे।

मरहूम के संबंध में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए उनके बड़े भाई जनाब मुस्तकीम साहब से मोबाइल नंबर 7520140083 पर संपर्क किया जा सकता है।

निस्संदेह हर जान को मौत का स्वाद चखना है और अंततः अपने रब की ओर लौटना है। अल्लाह मरहूम पर अपनी रहमतों की बारिश फरमाए और उन्हें अपनी जन्नत में बेहतर ठिकाना अता करे।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की राष्ट्रीय समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए भीलवाड़ा (राजस्थान) से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की विशेष रिपोर्ट।
यदि आप भी अपनी खबर, लेख, सामाजिक गतिविधि, शोक संदेश, विज्ञापन, संदेश, किस्से-कहानियां अथवा अन्य महत्वपूर्ण जानकारी देश-विदेश में बसे मुल्तानी समाज तक पहुंचाना चाहते हैं, तो निम्न नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं।
📞 9410652990
📞 8010884848


शामली की फातिमा बी का इंतिकाल, परिवार और बिरादरी में शोक की लहर, इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

मौत एक ऐसी हकीकत है जिससे कोई भी इंकार नहीं कर सकता। हर इंसान को एक दिन अपने रब के सामने हाजिर होना है। इसी कड़वी सच्चाई के साथ आज मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी को एक और गमगीन खबर मिली है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार मोहल्ला सरवर पीर, जनपद शामली निवासी जनाब मोहम्मद यासीन साहब (मूल निवासी गांव गंगेरू, ब्लॉक कांधला, जिला शामली) की अहलिया मोहतरमा फातिमा बी ( मायका झिंझाना जिला शामली) का आज दिन शनिचर, 13 जून 2026 को लगभग साढ़े 12 बजे कजा ए - ईलाही से इंतिकाल हो गया। मरहूमा की उम्र लगभग 52 वर्ष बताई गई है।

मरहूमा फातिमा बी अपने पीछे अपने शौहर जनाब मोहम्मद यासीन साहब, दो बेटे, दो बेटियां तथा पूरा भरा-पूरा परिवार, रिश्तेदार और अजीज-ओ-अकारिब छोड़ गई हैं। उनके इंतिकाल की खबर सुनते ही परिवार और समाज में गहरा दुख व्याप्त हो गया तथा शोक संवेदनाओं का सिलसिला शुरू हो गया।

मिली जानकारी के अनुसार मरहूमा की नमाज़-ए-जनाज़ा बाद नमाज़ ईशा अदा की जाएगी, जिसके बाद मोहल्ला गुलशन नगर स्थित टायर मार्किट कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। बिरादरी और क्षेत्र के लोगों से अपील की गई है कि वे जनाज़े में शरीक होकर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मगफिरत करें और दुखी परिवार के साथ अपनी हमदर्दी का इज़हार करें।

हम सभी अल्लाह तआला की बारगाह में हाथ उठाकर दुआ करते हैं कि अल्लाह मरहूमा फातिमा बी की तमाम खताओं को माफ फरमाए, उनकी कब्र को नूर से भर दे, उसे जन्नत के बागों में से एक बाग बना दे और उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए। आमीन।

अल्लाह तआला मरहूमा के शौहर, बेटों, बेटियों, समस्त परिवार, रिश्तेदारों और चाहने वालों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए तथा इस सदमे को बर्दाश्त करने की ताकत प्रदान करे। आमीन या रब्बुल आलमीन।

मरहूमा के संबंध में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए उनके शौहर जनाब मोहम्मद यासीन साहब से मोबाइल नंबर 8059673450 पर संपर्क किया जा सकता है।

बेशक़ यह दुनिया एक अस्थायी पड़ाव है और हर इंसान को अपने रब की ओर लौटना है। अल्लाह तआला मरहूमा की मगफिरत फरमाए और उन्हें अपनी रहमतों के साए में जगह अता करे।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की राष्ट्रीय समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की विशेष रिपोर्ट।

यदि आप भी अपनी खबर, लेख, शोक संदेश, सामाजिक गतिविधि, विज्ञापन, संदेश या अन्य महत्वपूर्ण जानकारी देश-विदेश में बसे मुल्तानी समाज तक पहुंचाना चाहते हैं, तो निम्न नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं।

📞 9410652990

📞 8010884848

गंगेरू की जरीना बी का इंतिकाल, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर, इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

दुनिया की जिंदगी एक अमानत है और हर जान को एक दिन अपने रब की बारगाह में हाज़िर होना है। इसी हकीकत की याद दिलाते हुए गांव गंगेरू, ब्लॉक कांधला, तहसील कैराना, जनपद शामली से एक बेहद गमगीन खबर सामने आई है।

निहायत ही रंज व गम के साथ यह इत्तला प्राप्त हुई है कि गांव गंगेरू निवासी मरहूम जनाब अमीर अहमद साहब वल्द मरहूम जनाब बशीर अहमद साहब की अहलिया, मोहतरमा जरीना बी का आज दिनांक 13 जून 2026 को सुबह लगभग 9 बजे कजा ए - ईलाही से इंतिकाल हो गया। मरहूमा की उम्र लगभग 75 वर्ष बताई गई है। उनका मायका जिला सोनीपत (हरियाणा) में था।

मरहूमा जरीना बी अपने पीछे तीन बेटों, चार बेटियों, नाती-पोतों, रिश्तेदारों और अजीज-ओ-अकारिब का भरा-पूरा कुनबा छोड़कर इस फानी दुनिया से रुख्सत हो गईं। उनके इंतिकाल की खबर सुनते ही परिवार, रिश्तेदारों और क्षेत्र के लोगों में गहरा दुख व्याप्त हो गया।

जानकारी के अनुसार मरहूमा का जनाजा आज बाद नमाज असर उठाया जाएगा तथा उन्हें स्थानीय कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। क्षेत्र के लोगों से अपील की गई है कि जनाजे में शरीक होकर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मगफिरत करें और उनके परिवार के दुख में सहभागी बनें।

अल्लाह तआला मरहूमा जरीना बी की तमाम खताओं को माफ फरमाए, उनकी मगफिरत फरमाए, उनकी कब्र को नूर से भर दे, उसे जन्नत के बागों में से एक बाग बना दे और उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए। आमीन।

साथ ही अल्लाह तआला उनके तमाम अहल-ए-खाना, बेटों, बेटियों, रिश्तेदारों और चाहने वालों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए तथा इस सदमे को बर्दाश्त करने की तौफीक प्रदान करे। आमीन या रब्बुल आलमीन।

मरहूमा के संबंध में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए जनाब अब्दुल करीम साहब से मोबाइल नंबर 9548250005 पर संपर्क किया जा सकता है।

दुआ है कि अल्लाह तआला मरहूमा की कब्र पर अपनी रहमतों की बारिश फरमाए और उन्हें अपनी बेपनाह रहमतों के साए में जगह अता करे।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से संचालित मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की राष्ट्रीय समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज न्यूज़" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की विशेष रिपोर्ट।

यदि आप भी अपने क्षेत्र की खबर, सामाजिक गतिविधि, शोक संदेश, वैवाहिक सूचना, लेख, विज्ञापन अथवा अन्य महत्वपूर्ण जानकारी देश-विदेश में बसे मुल्तानी समाज तक पहुंचाना चाहते हैं, तो निम्न नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं।

📞 9410652990

📞 8010884848

मुल्तानी समाज न्यूज़ — बिरादरी की आवाज़, बिरादरी के साथ। 🤲🕊️