Monday, September 21, 2026

मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट में नई क़ौमी क़ियादत की तैयारी

1 अक्टूबर 2026 तक नए राष्ट्रीय सदर और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन का लक्ष्य — पूरे हिंदुस्तान से नाम और मशवरों की दरकार

नई दिल्ली। पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी की क़ौमी सतह पर सामाजिक ख़िदमात के लिए सरगर्म “मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट” (रजि.) ऑल इंडिया ने तंजीम को नए सिरे से मज़बूत और मुनज़्ज़म करने की दिशा में अहम पेशक़दमी शुरू कर दी है। ट्रस्ट की ओर से कुछ समय पूर्व अपनी राष्ट्रीय, प्रदेशीय, ज़िला, तहसील और नगर स्तर की तमाम इकाइयों को भंग कर दिया गया था। अब नई क़ौमी क़ियादत और नई तंजीमी इकाइयों के गठन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

ट्रस्ट के फाउंडर ज़मीर आलम के मुताबिक़, तंजीम में हर तीन वर्ष बाद नया राष्ट्रीय सदर और नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी गठित करने की व्यवस्था को आगे बढ़ाया जा रहा है। इस पहल का मक़सद यह है कि बिरादरी के हर तबक़े को तंजीम में अपनी ख़िदमात पेश करने का मौक़ा मिले और बिरादरी के ग़रीब से ग़रीब फ़र्द को भी उसकी सलाहियत, ख़िदमत और क़ाबिलियत की बुनियाद पर बड़ी से बड़ी तंजीमी ज़िम्मेदारी निभाने का अवसर हासिल हो।

पूरे हिंदुस्तान से नए राष्ट्रीय सदर के लिए नाम और मशवरे आमंत्रित

“मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट” की ओर से दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात समेत पूरे हिंदुस्तान में रहने वाले मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी के अफ़राद से नए राष्ट्रीय सदर और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के लिए नाम और मशवरे आमंत्रित किए गए हैं।

ट्रस्ट की अपील है कि बिरादरी के जो अफ़राद समाजी और तंजीमी ख़िदमात का तजुर्बा रखते हैं, लोगों को साथ लेकर चलने की सलाहियत रखते हैं और बिरादरी की बेहतरी के लिए अपना वक़्त और तजुर्बा पेश करना चाहते हैं, उनके नाम राष्ट्रीय सदर तथा राष्ट्रीय कार्यकारिणी के लिए सामने लाए जाएं।

बिरादरी के लोग अपने नाम, मशवरे और तंजीमी सुझाव हेल्पलाइन नंबर 8010884848 पर कॉल या व्हाट्सऐप के ज़रिए भेज सकते हैं।

1 अक्टूबर 2026 तक नई क़ौमी क़ियादत मुकम्मल करने का इरादा

फाउंडर ज़मीर आलम के मुताबिक़, ट्रस्ट का लक्ष्य है कि 1 अक्टूबर 2026 तक नए राष्ट्रीय सदर और राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन मुकम्मल कर लिया जाए। इसके बाद मुल्क के मुख़्तलिफ़ हिस्सों में प्रदेश, ज़िला, तहसील और नगर स्तर की नई तंजीमी इकाइयों के गठन का सिलसिला शुरू किया जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत राष्ट्रीय सदर को प्रदेशों, ज़िलों और नगरों तक तंजीमी ढांचे को तैयार करने में अहम ज़िम्मेदारी निभानी होगी। राष्ट्रीय कार्यकारिणी और प्रदेश स्तर के ज़िम्मेदार अफ़राद नए राष्ट्रीय सदर के साथ मिलकर इस तंजीमी सफ़र को आगे बढ़ाएंगे।

मिर्ज़ा से लेकर मुल्तानी, पुंवार और भट्टी तक—हर नाम, हर ख़ानदान का इस्तक़बाल

ट्रस्ट की ओर से साफ़ तौर पर कहा गया है कि पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी से ताल्लुक़ रखने वाला कोई भी फ़र्द अपने नाम या ख़ानदानी पहचान की वजह से इस मंच से दूर न समझे।

मिर्ज़ा, मुल्तानी, पुंवार, भट्टी, लाजवान, मोटियार, खैरादी, नाकेदार, नालबंद, मुगल, बेग, आलम, हसन, अहमद, अली, खान या कोई भी दूसरा नाम अथवा ख़ानदानी पहचान इस्तेमाल करने वाले तमाम मुस्लिम मुल्तानी अफ़राद के लिए यह मंच खुला है।

ट्रस्ट की तरफ़ से बिरादरी के तमाम अफ़राद को खुला निमंत्रण है कि वे अपनी तंजीम, अपनी बिरादरी और अपनी आने वाली नस्लों के बेहतर मुस्तक़बिल के लिए इस सामाजिक सफ़र में शामिल हों।

नाम अलग हो सकते हैं, लेकिन बिरादरी का रिश्ता और सामाजिक मक़सद हमें एक साथ जोड़ता है।

18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाला हर बिरादरी फ़र्द बन सकता है सदस्य

फाउंडर ज़मीर आलम के मुताबिक़, हिंदुस्तान में रहने वाला मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी का 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र का हर फ़र्द ट्रस्ट की सदस्यता हासिल कर सकता है।

ट्रस्ट का मक़सद बिरादरी के लोगों को एक मज़बूत सामाजिक मंच पर जोड़ना, समाजी ख़िदमात को बढ़ावा देना, ज़रूरतमंद अफ़राद की मदद करना और नई नस्ल को तंजीमी व सामाजिक ज़िम्मेदारियों से जोड़ना है।

ट्रस्ट की ओर से बिरादरी के तमाम बुज़ुर्गों, नौजवानों, तालीमयाफ़्ता अफ़राद, कारोबारियों, समाजी ख़िदमतगारों और मुख़्तलिफ़ पेशों से जुड़े लोगों से अपील की गई है कि वे अपनी राय और मशवरे सामने लाएं और ऐसे अफ़राद के नाम भी भेजें जो बिरादरी की ख़िदमत के लिए क़ाबिल और तैयार हों।

राष्ट्रीय सदर और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के लिए नाम/मशवरा भेजने हेतु

📞 8010884848
कॉल / व्हाट्सऐप


“मुल्तानी समाज” की ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार (विज्ञापन) क़ौमी सतह पर शाया या प्रसारित करवाना चाहते हैं तो राब्ता फ़रमाएँ।

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“आपका एतमाद ही हमारी सबसे बड़ी ताक़त है।”

“मुल्तानी समाज” — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।

नगीना में मुल्तानी बिरादरी के चुनावी नतीजे घोषित, जिसे अल्लाह तआला ने कामयाबी अता फ़रमाई, अब उसके कंधों पर बिरादरी की खिदमत की बड़ी ज़िम्मेदारी

नगीना, बिजनौर।
मुल्क की पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के बीच नगीना में हुए चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद बिरादरी के लोगों में खुशी और उत्साह का माहौल है। सामने आई चुनावी सूची में मुख़्तलिफ़ उम्मीदवारों को हासिल हुए वोटों के मुताबिक नतीजे दर्ज किए गए हैं।

बिरादरी के लोगों का कहना है कि चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है और इसमें हर उम्मीदवार ने अपनी काबिलियत, मेहनत और लोगों के भरोसे के साथ हिस्सा लिया। आखिरकार जिसे जितने लोगों की हिमायत और एतमाद हासिल हुआ, उसे उसी के मुताबिक कामयाबी मिली।

मुस्लिम समाज में आम तौर पर यह यक़ीन रखा जाता है कि इज़्ज़त, कामयाबी और काम करने के मौक़े अल्लाह तआला की तरफ़ से होते हैं। इसी जज़्बे के साथ बिरादरी के लोगों का कहना है कि “अल्लाह तआला ने जिसे कामयाबी अता फ़रमाई है, अब उसे इस कामयाबी को बिरादरी की खिदमत का ज़रिया बनाना चाहिए।”

उम्मीदवारों को हासिल हुए वोट

उपलब्ध कराई गई चुनावी सूची के मुताबिक उम्मीदवारों को निम्नलिखित वोट हासिल हुए—

  1. खलीक अहमद — 837 वोट
  2. नासिर खान — 781 वोट
  3. नासिर अहमद पुत्र मरग़ूब — 766 वोट
  4. अज़ीम — 687 वोट
  5. मोहम्मद सिद्दीक़ — 686 वोट
  6. मतीन अहमद — 567 वोट
  7. मोहम्मद आसिम — 544 वोट
  8. इकरार अहमद — 513 वोट
  9. हैदर सलीम — 494 वोट
  10. आतिफ़ अमीर — 473 वोट
  11. मोहम्मद साजिद — 470 वोट
  12. आबिद अरशी — 467 वोट
  13. मोहम्मद जावेद — 467 वोट

कामयाबी के साथ बढ़ जाती है खिदमत की ज़िम्मेदारी

चुनाव का नतीजा सामने आने के बाद अब असल इम्तिहान खिदमत का है। बिरादरी के लोगों की उम्मीद है कि कामयाब होने वाले तमाम अफ़राद अपनी नई ज़िम्मेदारियों को सिर्फ़ एक ओहदे के तौर पर नहीं, बल्कि बिरादरी की खिदमत, समाज की बेहतरी और आने वाली नस्लों के बेहतर मुस्तक़बिल की अमानत समझकर निभाएंगे।

बिरादरी की तरक़्क़ी के लिए तालीम को फ़रोग़ देना, नौजवानों को सही दिशा और रोज़गार के मौक़े उपलब्ध कराने की कोशिश करना, ज़रूरतमंद परिवारों की मदद करना, आपसी इत्तेहाद को मज़बूत करना तथा सामाजिक और फ़लाही कामों को बढ़ावा देना ऐसे अहम मैदान हैं, जिन पर नई क़यादत से बिरादरी को उम्मीदें रहती हैं।

इत्तेहाद और भाईचारा ही बिरादरी की असल ताक़त

चुनावी मुकाबला अपनी जगह, लेकिन नतीजे आने के बाद तमाम उम्मीदवार और बिरादरी के लोग एक-दूसरे के साथ मिलकर आगे बढ़ें—यही किसी भी सामाजिक चुनाव की खूबसूरती होती है।

बिरादरी के बुज़ुर्गों और समझदार अफ़राद की भी यह ज़िम्मेदारी है कि वे नौजवानों और नई क़यादत की रहनुमाई करें, जबकि नई क़यादत को चाहिए कि वह हर तबक़े की राय का एहतराम करते हुए सबको साथ लेकर चले।

जीत किसी एक शख़्स की हो सकती है, लेकिन बिरादरी की तरक़्क़ी तभी मुमकिन है जब कामयाबी का फ़ायदा पूरी बिरादरी तक पहुँचे।

“मुल्तानी समाज” की जानिब से मुबारकबाद और नेक दुआ

क़ौमी समाचार पत्रिका “मुल्तानी समाज” की जानिब से नगीना मुल्तानी बिरादरी के तमाम कामयाब उम्मीदवारों को दिली मुबारकबाद पेश की जाती है।

दुआ है कि अल्लाह तआला तमाम कामयाब अफ़राद को अपनी ज़िम्मेदारियां ईमानदारी, इंसाफ़, ख़ुलूस और समझदारी के साथ निभाने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए, उन्हें बिरादरी की खिदमत का जज़्बा दे और नगीना की मुल्तानी बिरादरी में इत्तेहाद, भाईचारा, तालीम, तरक़्क़ी और ख़ुशहाली को फ़रोग़ अता फ़रमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

ज़रूरी वज़ाहत

यह ख़बर उपलब्ध कराई गई चुनाव परिणाम सूची/चित्र में दर्ज आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है। आधिकारिक चुनाव प्राधिकरण की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध न होने की वजह से इन आंकड़ों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित आधिकारिक चुनाव परिणाम के तौर पर पेश नहीं किया जा रहा है।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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“मुल्तानी समाज”

अपनी बिरादरी की आवाज़ — अपनी पहचान

Sunday, September 20, 2026

नगीना के इलेक्शन में खतौली की तंजीम की सरगर्म मौजूदगी ने उठाया बड़ा सवाल

दूसरों की कमेटियों के चुनाव में इतनी दिलचस्पी तो अपनी कमेटी के इलेक्शन का इंतज़ार कब तक?

खतौली/नगीना/बिजनौर, उत्तर प्रदेश।

मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी में तंजीमी निज़ाम, जम्हूरी उसूल और कमेटियों के बाकायदा चुनाव को लेकर हमेशा से यह उम्मीद की जाती रही है कि बिरादरी की तमाम तंजीमें अपने-अपने दस्तूरी और जम्हूरी उसूलों के मुताबिक काम करें और वक्त-वक्त पर अपनी कमेटियों में चुनाव के ज़रिए नई क़यादत और नए लोगों को आगे आने का मौक़ा दें।

हाल ही में नगीना, जनपद बिजनौर में बिरादरी की एक कमेटी के ओहदेदारों के चुनाव का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस चुनाव में जनपद मुज़फ्फरनगर के क़स्बा खतौली से संचालित हमारी ही बिरादरी की एक सोसायटी के सदर और उनकी कमेटी के ज़िम्मेदारों की मौजूदगी और सरगर्म हिस्सेदारी सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों और वीडियो में दिखाई दी।

सोशल मीडिया पर उस तंजीम के ज़िम्मेदारों द्वारा साझा की गई तस्वीरों और वीडियो से यह ज़ाहिर होता है कि खतौली की उक्त सोसायटी के सदर अपनी कमेटी के कई ज़िम्मेदारों के साथ नगीना पहुंचे और वहां बिरादरी की कमेटी के चुनावी अमल में सक्रिय रूप से शामिल रहे।

बिरादरी की नज़र से देखा जाए तो यह पहल अपने आप में खुशी की बात है। आखिर हमारी बिरादरी की किसी भी कमेटी में अगर चुनाव का अमल होता है और बिरादरी के लोग जम्हूरी तरीके से अपने ओहदेदारों का इंतिखाब करते हैं, तो यह तंजीमी बेदारी की अलामत है।

लेकिन इसी तस्वीर का दूसरा पहलू भी है, और यही वह सवाल है जो बिरादरी के कई लोगों के ज़ेहन में लंबे समय से मौजूद है।

जब दूसरों की कमेटियों के चुनाव इतने अहम हैं, तो अपनी कमेटी का चुनाव कब?

बिरादरी में यह सवाल बार-बार उठता रहा है कि खतौली से संचालित यह तंजीम खुद अपनी कमेटी के बाकायदा चुनाव कब कराएगी?

जो तंजीम दूसरी जगहों पर बिरादरी की कमेटियों के चुनाव को इतनी दिलचस्पी और संजीदगी के साथ मुकम्मल कराने में अपना किरदार अदा कर रही है, उससे बिरादरी की स्वाभाविक उम्मीद है कि वह अपने यहां भी उसी जम्हूरी रिवायत को कायम करेगी।

नगीना में हुए चुनाव के दौरान खतौली की तंजीम के ज़िम्मेदारों की सरगर्म मौजूदगी देखकर बिरादरी के बीच एक दिलचस्प सवाल ने फिर सिर उठाया है—

क्या नगीना के चुनाव से खतौली की तंजीम के ज़िम्मेदार अपने लिए भी कोई जम्हूरी सबक लेकर लौटे हैं?

अगर जवाब हाँ है, तो यक़ीनन बिरादरी को इससे खुशी होगी।

नगीना से मिले जम्हूरी सबक को खतौली में कब लागू किया जाएगा?

नगीना में चुनावी अमल को करीब से देखने के बाद अगर खतौली की यह तंजीम भी अपनी कमेटी के चुनाव कराने की तैयारी करती है, तो इसे बिरादरी में एक सकारात्मक और काबिल-ए-तारीफ पहल के तौर पर देखा जाएगा।

क्योंकि किसी भी तंजीम की ताक़त सिर्फ उसके ओहदेदारों में नहीं होती, बल्कि उसकी असल ताक़त बिरादरी के भरोसे, जम्हूरी निज़ाम, जवाबदेही और नई क़यादत को मौक़ा देने में होती है।

वक्त के साथ कमेटियों में नए लोगों को आगे आने का मौक़ा देना, पुराने ज़िम्मेदारों के तजुर्बे से फायदा उठाना और बाकायदा चुनाव के ज़रिए जिम्मेदारियां तय करना किसी भी बिरादरी की तंजीमी तरक़्क़ी के लिए अहम है।

बिरादरी अब खतौली की तरफ देख रही है

नगीना में चुनाव का अमल मुकम्मल हो चुका है। वहां बिरादरी ने अपने ओहदेदारों का इंतिखाब कर लिया।

अब निगाहें खतौली की तरफ हैं।

बिरादरी यह देखना चाहती है कि नगीना के चुनाव में इतनी दिलचस्पी और सरगर्मी के साथ शामिल होने वाली खतौली की यह सोसायटी अपनी कमेटी के चुनाव का ऐलान कब करती है?

क्या वहां भी बिरादरी के तमाम अफ़राद को जम्हूरी तरीके से अपनी पसंद की क़यादत चुनने का मौक़ा मिलेगा?

क्या पुरानी कमेटी में नए लोगों को शामिल करने और जिम्मेदारियों में तब्दीली का अमल शुरू होगा?

और सबसे अहम सवाल—

क्या नगीना का चुनाव खतौली की तंजीम के लिए भी एक नई जम्हूरी शुरुआत का पैग़ाम लेकर आया है?

इन सवालों का जवाब आने वाला वक्त देगा।

“मुल्तानी समाज” की अपील

हमारा मक़सद किसी शख्स, कमेटी या तंजीम की तौहीन करना नहीं, बल्कि बिरादरी में जम्हूरी सोच, तंजीमी पारदर्शिता और जवाबदेही के हवाले से एक अहम सवाल बिरादरी के सामने रखना है।

अगर खतौली की सोसायटी के दस्तूर में कमेटी के चुनाव का कोई तय तरीका या मुद्दत मौजूद है, तो बिरादरी को उसी दस्तूर के मुताबिक चुनाव की तारीख और तरीका बताकर तस्वीर साफ़ करनी चाहिए।

और अगर नगीना के चुनाव से कोई अच्छा तंजीमी सबक मिला है, तो उससे बेहतर बात क्या होगी कि वही सबक अब अपनी तंजीम में भी अमल के साथ नज़र आए।

दूसरों की कमेटियों में जम्हूरियत को मजबूत करना यक़ीनन अच्छी बात है—और अपनी कमेटी में भी उसी जम्हूरियत को कायम करना उससे भी ज्यादा खूबसूरत मिसाल होगी।

अब बिरादरी इंतज़ार में है कि खतौली की यह सोसायटी अपनी कमेटी के चुनाव का ऐलान कब करती है।


मुल्तानी समाज — ख़ास रिपोर्ट

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Saturday, September 19, 2026

नगीना में मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की अंजुमन के चुनाव की प्रक्रिया शुरू

सदर समेत तमाम ओहदेदारों के इंतिख़ाब को लेकर बिरादरी में दिलचस्पी — “मुल्तानी समाज” की चुनावी प्रक्रिया पर पल-पल नज़र

नगीना, बिजनौर (उत्तर प्रदेश), 20 सितंबर 2026।

नगीना, जिला बिजनौर में आज रविवार, 20 सितंबर 2026 को पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की अंजुमन के सदर समेत तमाम ओहदेदारों के इंतिख़ाब की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अंजुमन के जिम्मेदार पदों के लिए होने वाली इस चुनावी प्रक्रिया को लेकर बिरादरी के लोगों में खासा उत्साह और दिलचस्पी देखने को मिल रही है।

बिरादरी की सामाजिक एकजुटता, आपसी भाईचारे और सामुदायिक मामलों में बेहतर नुमाइंदगी के लिहाज़ से अंजुमन के ओहदेदारों का चुनाव अहम माना जा रहा है। चुनावी प्रक्रिया के दौरान अदब, भाईचारे और आपसी इत्तेहाद की रिवायत को बरकरार रखने की उम्मीद की जा रही है।

“मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका इस पूरी चुनावी प्रक्रिया पर लगातार नज़र रखे हुए है। चुनाव से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां, प्रक्रिया की प्रगति तथा सामने आने वाले प्रमुख अपडेट बिरादरी के लोगों तक समय-समय पर पहुंचाए जाते रहेंगे।

बिरादरी के तमाम हज़रात से गुज़ारिश है कि चुनावी प्रक्रिया में आपसी मोहब्बत, भाईचारे, सब्र और तहज़ीब का दामन थामे रखें तथा अंजुमन और बिरादरी की बेहतरी के लिए सकारात्मक माहौल को क़ायम रखने में अपना किरदार अदा करें।

“मुल्तानी समाज” की ख़ास रिपोर्ट

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नीमच से ग़मगीन ख़बर: राबिया बानो का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल 🖤 इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

निहायत रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को इत्तिला दी जाती है कि नीमच में अब्दुल हमीद उर्फ़ बाबू भाई पुवार की अहलिया राबिया बानो साहिबा का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया है। मरहूमा के इंतिक़ाल की ख़बर से उनके खानदान, रिश्तेदारों, अहबाब और बिरादराने-मिल्लत में गहरे रंज-ओ-ग़म की लहर दौड़ गई है।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

यह दुनिया फ़ानी है और हर इंसान को एक दिन अपने रब्बे-करीम के हुज़ूर लौटकर जाना है। मरहूमा के इंतिक़ाल पर “मुल्तानी समाज” की पूरी टीम की ओर से भी अहले-ख़ाना से इज़हारे-ताज़ियत और हमदर्दी पेश की जाती है।

🕌 नमाज़-ए-जनाज़ा व दफ़्न

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूमा राबिया बानो साहिबा की नमाज़-ए-जनाज़ा दिनांक 20 सितंबर 2026, बरोज़ इतवार, सुबह 10 बजे महावीर नगर मस्जिद में अदा की जाएगी।

नमाज़-ए-जनाज़ा के बाद मरहूमा को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम बिरादराना हज़रात, रिश्तेदारों और अहबाब से पुरख़ुलूस गुज़ारिश है कि नमाज़-ए-जनाज़ा में शिरकत फ़रमाकर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और ग़मज़दा अहले-ख़ाना के साथ अपनी हमदर्दी का इज़हार करें।

🤲 मय्यत को क़ब्र में उतारते वक़्त की दुआ

بِسْمِ اللّٰهِ وَعَلَىٰ مِلَّةِ رَسُولِ اللّٰهِ ﷺ

“अल्लाह के नाम से और रसूलुल्लाह ﷺ की मिल्लत व तरीक़े पर।”

🤲 क़ब्र में मिट्टी देते वक़्त

पहली मर्तबा:
مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ
मिन्हा ख़लक़नाकुम
तर्जुमा: इसी मिट्टी से हमने तुम्हें पैदा किया।

दूसरी मर्तबा:
وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ
व फ़ीहा नुईदुकुम
तर्जुमा: और इसी मिट्टी में हम तुम्हें लौटाएंगे।

तीसरी मर्तबा:
وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ
व मिन्हा नुख़रिजुकुम तारतन उख़रा
तर्जुमा: और इसी मिट्टी से हम तुम्हें दोबारा निकालकर खड़ा करेंगे।

🤲 मग़फ़िरत की पुरख़ुलूस दुआ

या अल्लाह! मरहूमा राबिया बानो साहिबा की मग़फ़िरत फ़रमा। उनकी तमाम ख़ताओं और गुनाहों से दरगुज़र फ़रमा। उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा, क़ब्र को कुशादा और आरामगाह बना। उन्हें सवालात-ए-क़ब्र में आसानी अता फ़रमा और अपनी रहमत व मग़फ़िरत के साये में जगह अता फ़रमा।

या रब्बुल आलमीन! मरहूमा को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा, उन्हें अपने हबीब हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ की शफ़ाअत नसीब फ़रमा और उनके दरजात बुलंद फ़रमा।

अल्लाह तआला अब्दुल हमीद उर्फ़ बाबू भाई पुवार साहब समेत तमाम अहले-ख़ाना, रिश्तेदारों और अहबाब को इस सदमे पर सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए।

आमीन या रब्बल आलमीन।


“मुल्तानी समाज” की ओर से ताज़ियत

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए मध्यप्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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“मुल्तानी समाज”

अपनी बिरादरी की आवाज़ — अपनी पहचान

जनाब नसीम अहमद साहब का इंतिक़ाल- इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

निहायत रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि गांव कितास वाले, जनाब नसीम अहमद साहब का आज दिन इतवार, 20 सितंबर 2026 की बीती रात तक़रीबन ढाई बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया। मरहूम की फ़िलवक़्त रिहाइश निहाल विहार, नांगलोई, दिल्ली में थी।

मरहूम के इंतिक़ाल की ख़बर से खानदान, रिश्तेदारों, अहबाब और पूरी बिरादरी में गहरे रंज-ओ-ग़म की लहर दौड़ गई है। यह दुनिया फ़ानी है और हर ज़ी-रूह को एक दिन अपने परवरदिगार के हुज़ूर लौटकर जाना है। अल्लाह तआला मरहूम की तमाम ख़ताएँ माफ़ फरमाए और उन्हें अपनी रहमत के साये में जगह अता फरमाए।

नमाज़-ए-जनाज़ा और दफ़्न

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूम जनाब नसीम अहमद साहब की नमाज़-ए-जनाज़ा बाद नमाज़-ए-असर, निहाल विहार, नांगलोई, दिल्ली स्थित कब्रिस्तान में अदा की जाएगी। नमाज़-ए-जनाज़ा के बाद मरहूम को उसी कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम बिरादराना हज़रात, रिश्तेदारों और अहबाब से पुरख़ुलूस गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फ़रमाकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और अहले-ख़ाना के ग़म में शरीक हों।

दफ़्न के वक़्त की दुआ

जब मरहूम को क़ब्र में उतारा जाए तो दिल से यह दुआ की जाए:

اللّٰهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَارْحَمْهُ، وَعَافِهِ وَاعْفُ عَنْهُ۔

ऐ अल्लाह! मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमा, उन पर रहम फ़रमा, उन्हें आफ़ियत अता फ़रमा और उनसे दरगुज़र फ़रमा।

क़ब्र में उतारते वक़्त यह भी पढ़ा जाता है:

بِسْمِ اللّٰهِ وَعَلَىٰ مِلَّةِ رَسُولِ اللّٰهِ ﷺ

अल्लाह के नाम से और रसूलुल्लाह ﷺ के दीन व तरीक़े पर।

मिट्टी देते वक़्त

मिट्टी डालते समय यह आयत पढ़ना मुनासिब है:

مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ

“हमने तुम्हें इसी मिट्टी से पैदा किया, इसी में तुम्हें लौटाएंगे और इसी से दोबारा तुम्हें निकालेंगे।”

इसके बाद मरहूम के लिए दिल खोलकर दुआ की जाए कि:

या अल्लाह! जनाब नसीम अहमद साहब की मग़फ़िरत फ़रमा, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे, क़ब्र को कुशादा और रोशन फ़रमा, उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे। उनकी तमाम ख़ताओं और गुनाहों से दरगुज़र फ़रमा, उनकी नेकियों को क़ुबूल फ़रमा और उन्हें अपने महबूब हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ की शफ़ाअत नसीब फ़रमा। उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा।

या रब्बुल आलमीन! अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा और इस सदमे को बर्दाश्त करने की ताक़त दे। आमीन या रब्बल आलमीन।

إِنَّا لِلَّهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ

अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, दर्जात बुलंद फ़रमाए और तमाम पसमानदगान को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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“मुल्तानी समाज”

अपनी बिरादरी की आवाज़ — अपनी पहचान

सड़क हादसे में जावेद मिर्ज़ा का इंतिक़ाल, मुल्तानी बिरादरी में ग़म की लहर

हाजी सलीम साहब के फरज़ंद जावेद मिर्ज़ा का दर्दनाक हादसे में मौक़े पर ही इंतिक़ाल, बिरादरान-ए-मुल्तानी ने किया गहरे रंज-ओ-ग़म का इज़हार

छपरौली/बड़ौत (बागपत), 19 सितंबर 2026।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिल-फ़िगार करने वाली इत्तिला के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादराना हज़रात को सूचित किया जाता है कि जनाब हाजी सलीम साहब वल्द हाजी वली हसन साहब (मरहूम), निवासी क़स्बा छपरौली, तहसील बड़ौत, ज़िला बागपत, उत्तर प्रदेश तथा हाल निवासी स्वरूप नगर, दिल्ली के फरज़ंद-ए-अज़ीज़ जनाब जावेद मिर्ज़ा, उम्र तक़रीबन 42 साल, आज दिन शनिवार, 19 सितंबर 2026 को एक दर्दनाक सड़क हादसे का शिकार होकर इस दार-ए-फ़ानी से कूच कर गए।

मिली जानकारी के मुताबिक़ जावेद मिर्ज़ा अपने वालिद-ए-मुहतरम हाजी सलीम साहब के साथ मोटरसाइकिल पर किसी ज़रूरी काम के सिलसिले में जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में अचानक हुए सड़क हादसे में जावेद मिर्ज़ा को गंभीर चोटें आईं और उन्होंने मौक़ा-ए-वारदात पर ही क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल फ़रमा लिया।

इस दर्दनाक हादसे की ख़बर जैसे ही उनके अज़ीज़ो-अक़ारिब, दोस्तों और बिरादराना हज़रात तक पहुँची, हर तरफ़ ग़म और अफ़सोस की लहर दौड़ गई। एक जवान और परिवार के अज़ीज़ फ़र्द का इस तरह अचानक दुनिया से रुख़्सत हो जाना निश्चित रूप से उनके अहल-ए-ख़ाना के लिए बेहद तकलीफ़देह और सदमा-ए-अज़ीम है।

अल्लाह पाक मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए

हम तमाम अहल-ए-बिरादरी की जानिब से जनाब हाजी सलीम साहब और तमाम पसमान्दगान-ए-मरहूम की ख़िदमत में दिल की गहराइयों से ताज़ियत और पुरसा पेश करते हैं।

अल्लाह रब्बुल-आलमीन मरहूम जावेद मिर्ज़ा की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों से दरगुज़र फ़रमाए, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमाए, क़ब्र के सफ़र को आसान फ़रमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए।

या अल्लाह! जब मरहूम को कब्र में उतारा जाए और मिट्टी दी जाए तो अपनी रहमत के साये में उन्हें जगह अता फ़रमा। उनकी तन्हाई को अपनी रहमत से दूर फ़रमा, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे और सवाल-ए-क़ब्र में आसानी अता फ़रमा।

अल्लाह तआला उनके वालिद-ए-मुहतरम हाजी सलीम साहब, तमाम घरवालों, अज़ीज़ो-अक़ारिब और पसमान्दगान को यह सदमा बर्दाश्त करने की हिम्मत और सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए तथा मरहूम के लिए सदक़ा-ए-जारीया बनने वाले नेक अमल की तौफ़ीक़ दे।

आमीन या रब्बुल-आलमीन।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

हर जान को मौत का मज़ा चखना है।

दफ़्न का वक़्त बाद में बताया जाएगा

 ज़िम्मेदारान-ए-ख़ानदान की जानिब से नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन (दफ़्न) का वक़्त और मुक़ाम गौरीपुर नवादा जिला बागपत, उत्तर प्रदेश में बाद नमाज़ जौहर ठीक 2 बजे किया जाएगा सपुर्द - ए - खाक 

तमाम अहल-ए-बिरादरी से गुज़ारिश है कि मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएँ और पसमान्दगान के लिए सब्र-ए-जमील की दुआ करें।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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_*ख़बर अपडेट*_

हादसे में मुहम्मद जावेद का दर्दनाक इंतकाल, मुल्तानी बिरादरी में पसरा ग़म

गौरीपुर निवासी हाजी सहीनू उर्फ मुहम्मद सलीम के 42 वर्षीय बेटे का हादसे में इंतकाल

बागपत। निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि मुस्लिम मुल्तानी लौहार बढ़ई बिरादरी, गौरीपुर, जिला बागपत (उत्तर प्रदेश) निवासी हाजी सहीनू उर्फ मुहम्मद सलीम (छपरौली वाले) के बड़े बेटे मुहम्मद जावेद, उम्र लगभग 42 वर्ष, का आज 19 सितंबर 2026, शनिवार को एक दर्दनाक हादसे के कारण इंतकाल हो गया।

तीन भाइयों में से एक के बिछड़ने से परिवार सदमे में

गौरतलब है कि हाजी मुहम्मद सलीम के तीन बेटे मुहम्मद सुहेल, मुहम्मद शुएब और मुहम्मद जावेद थे। मुहम्मद जावेद के अचानक इंतकाल से उनके दोनों भाइयों सहित पूरा परिवार गहरे सदमे और ग़म में है।

परिवार के लिए यह सदमा और भी बेहद दर्दनाक है कि हाजी मुहम्मद सलीम पहले से ही पैर से माज़ूर हैं, और अब जवान बेटे के इंतकाल का पहाड़ जैसा ग़म उनके सामने है। इस कठिन घड़ी में अल्लाह तआला ही परिवार को सब्र और इस सदमे को बर्दाश्त करने की ताकत अता फरमा सकता है।

पहले बेटी का भी हो चुका है इंतकाल

बताया गया है कि मरहूम मुहम्मद जावेद की एक बेटी का भी लगभग 5-6 वर्ष पूर्व इंतकाल हो चुका है। मरहूम अपने पीछे दो बेटे मुहम्मद तकी और मुहम्मद ज़ैद छोड़ गए हैं, जिनका रो-रोकर बुरा हाल है।

रिश्तेदारी के लिहाज़ से भी अहम संबंध

मरहूम मुहम्मद जावेद, मुहम्मद आरिफ ढिकाना वाले के सगे बहनोई थे। वहीं वे अंजुमन के पूर्व सदर हाजी अय्यूब नंगला वाले के सगे भांजे भी बताए गए हैं।

20 सितंबर को होगा सुपुर्द-ए-ख़ाक

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूम मुहम्मद जावेद की नमाज़-ए-जनाज़ा एवं सुपुर्द-ए-ख़ाक की कार्रवाई रविवार, 20 सितंबर 2026 को दोपहर 02 बजे गौरीपुर निवाड़ा, जिला बागपत स्थित कलेक्ट्रेट के पास वाले कब्रिस्तान में की जाएगी।

तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फरमाकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फिरत करें और ग़मज़दा परिवार से ताज़ियत करें।

मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फिरत

हम अल्लाह रब्बुल आलमीन की बारगाह में दुआ करते हैं कि अल्लाह तआला मरहूम मुहम्मद जावेद की मग़फिरत फरमाए, उनकी कब्र को नूर से भर दे, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए और उनके तमाम ग़मज़दा परिजनों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।

आमीन सुम्मा आमीन।

राब्ते के लिए

हाजी अय्यूब नंगला वाले: 8923993396
सुहेल, पुत्र हाजी अय्यूब: 8077319070
मुहम्मद आरिफ ढिकाना: 8923247848