निहायत ही रंज-ओ-ग़म और गहरे अफ़सोस के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तला दी जाती है कि आज दिन इतवार, बा-तारीख़
01 फ़रवरी 2026 को गांव
ताना, जिला शामली (उत्तर प्रदेश) के बुज़ुर्ग, शरीफ़ और नेकदिल इंसान
जनाब मोहसिन साहब (उम्र 87 वर्ष) वल्द
जनाब नसीबुद्दीन साहब (मरहूम) का बीती रात तक़रीबन
2 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया।
इस दुखद ख़बर ने न सिर्फ़ उनके ख़ानदान बल्कि पूरे इलाके और बिरादरी को ग़मगीन कर दिया है।
मरहूम मोहसिन साहब एक सादा-मिज़ाज, सब्र-ओ-शुक्र वाले और ख़ानदानी रिवायतों को निभाने वाले बुज़ुर्ग थे। अल्लाह ने उन्हें लंबी उम्र अता फ़रमाई, मगर ज़िंदगी के इस सफ़र में उन्होंने एक-एक कर अपने क़रीबी अज़ीज़ों को खोने का ग़म भी झेला।
मरहूम के तीन भाई और एक बहन थे —
शरीफ़ अहमद (मरहूम), डॉक्टर अशरफ़ (मरहूम) और बहन कनीज़ बी मरहूमा (नानौता)।
उनकी अहलिया का भी काफ़ी अरसा पहले इंतेकाल हो चुका था।
दर्दनाक पहलू यह भी है कि मरहूम के दोनों बेटे —
मोहम्मद साजिद (मरहूम) और मोहम्मद राशिद (मरहूम) — पहले ही इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत हो चुके थे।
आज मरहूम अपने पीछे पोते-पोतियाँ, नाते-नातिनें, और एक भरा-पूरा कुनबा, ख़ानदान और तमाम अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को ग़म और यादों के साए में छोड़कर हमेशा-हमेशा के लिए विदा हो गए।
📿 दुआ है कि अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनके दर्जात बुलंद करे, क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए और तमाम पसमांदा अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।
🕯️ तदफ़ीन की इत्तला:
मरहूम की मय्यत को गांव बुन्दुगढ़ (नानौता), जिला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश में सपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।
तमाम हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएँ और सवाब-ए-दारेन हासिल करें।
📞 नोट:
मय्यत के सिलसिले में किसी भी तरह की और ज़्यादा मालूमात के लिए मरहूम के भतीजे जनाब आफ़ताब साहब से इस नंबर पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है:
📱 8954654370
🛑 एक ज़रूरी ऐलान — इंतेकाल की ख़बर भेजने के लिए अहम हिदायतें
अक्सर देखने में आता है कि इंतेकाल की ख़बर या तो देर से पहुँचती है या अधूरी जानकारी की वजह से लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस अहम कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से दरख़्वास्त करती है कि इंतेकाल की ख़बर भेजते वक़्त इन बातों का ख़ास ख़याल रखें:
1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता — स्थायी निवास और मौजूदा ठिकाना।
3️⃣ तदफ़ीन का सही वक़्त और क़ब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स (एक या दो) के मोबाइल नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतेकाल हुआ हो तो मरहूम की फोटो (मुमकिन हो तो)।
6️⃣ इंतेकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब समझें)।
7️⃣ घर के बाक़ी अहल-ए-ख़ाना — भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वग़ैरह।
👉 इन तमाम जानकारियों से ख़बर मुकम्मल होती है और बिरादरी तक सही, साफ़ और वक़्त पर इत्तला पहुँचती है।
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🕊️ अल्लाह मरहूम को जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए। आमीन।