मरहूम के पार्थिव शरीर को रात करीब 9 बजे मुजफ्फरनगर स्थित उनके आवास पर लाया गया। चूंकि रात अधिक हो चुकी थी और रमज़ान का पाक महीना भी चल रहा है, इसलिए परिजनों ने आपसी मशविरा कर सुपुर्द-ए-ख़ाक का समय अगले दिन, 18 मार्च 2026 (बुधवार) सुबह 10 बजे निर्धारित किया।
हालांकि रात गहरी होने के बावजूद, उनके चाहने वालों का हुजूम देर रात तक उनके आवास पर मौजूद रहा। बताया जाता है कि रात करीब 2 बजे तक लोग लगातार पहुंचकर मरहूम को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश करते रहे। सुबह फज्र की नमाज़ के बाद से ही रिश्तेदारों, मित्रों और शहर की जानी-मानी हस्तियों का तांता लगना शुरू हो गया।
सुपुर्द-ए-ख़ाक के समय का दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था। हजारों की संख्या में लोग—जिनमें महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल थे—कब्रिस्तान पहुंचे और नम आंखों से अब्दुल कय्यूम साहब को अंतिम विदाई दी। हर आंख नम थी और हर ज़ुबान उनकी नेकियों और सामाजिक सेवाओं को याद कर रही थी।
जनाब अब्दुल कय्यूम साहब न सिर्फ एक सफल उद्योगपति थे, बल्कि एक दरियादिल इंसान और समाज के लिए समर्पित व्यक्तित्व भी थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में अनेक सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और जरूरतमंदों की मदद को हमेशा प्राथमिकता दी। उनके इंतकाल से समाज ने एक ऐसी शख्सियत को खो दिया है, जिसकी भरपाई कर पाना आसान नहीं होगा।
अल्लाह तआला मरहूम को जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए और उनके परिजनों को सब्र-ए-जमील अता करे। आमीन।
(यह रिपोर्ट उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। समाचार का उद्देश्य केवल सूचनात्मक है और इसमें पूर्ण संवेदनशीलता व सम्मान बनाए रखा गया है।)
📍 रिपोर्ट: प्रधान संपादक ज़मीर आलम
📍 स्थान: मुजफ्फरनगर / नई दिल्ली
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