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Tuesday, November 3, 2026
हमारी बिरादरी का इतिहास अब गुमनाम नहीं रहेगा। जिन्होंने अपनी ज़िंदगी बिरादरी की ख़िदमत में गुज़ार दी, अब उनकी ख़िदमात और क़ुर्बानियाँ वेबसाइट पर होंगी महफ़ूज़; हर उस शख़्स की तस्वीर और तआरुफ़ होगा प्रकाशित, जिसने मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी का नाम रोशन किया है।
सऊदी अरब की सरज़मीन पर हमेशा के लिए सो गए सालिरी के उस्मान मिर्ज़ा... उमराह की पाकीज़ा तमन्ना लेकर गए थे, मगर वहीं से लौटा जनाज़ा, गांव में पसरा मातम और परिवार पर टूटा ग़मों का पहाड़
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।
सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद के चिलकाना क्षेत्र के गांव सालिरी से ताल्लुक़ रखने वाले उस्मान मिर्ज़ा के इंतिक़ाल की दर्दनाक ख़बर ने पूरे गांव और रिश्तेदारों में ग़म की लहर दौड़ा दी। जिस मुक़द्दस सफ़र पर वह अल्लाह के घर की ज़ियारत और उमराह की अदायगी के लिए रवाना हुए थे, वही सफ़र उनकी ज़िंदगी का आख़िरी सफ़र साबित हुआ। सऊदी अरब की पाकीज़ा सरज़मीन पर बीमारी के चलते उनका इंतिक़ाल हो गया। इस ख़बर के गांव पहुंचते ही उनके घर में कोहराम मच गया और हर आंख अश्कबार हो उठी।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक़, गांव सालिरी निवासी उस्मान मिर्ज़ा पुत्र मरहूम महबूब मिर्ज़ा 18 अक्टूबर को अपनी बेटी और कुछ अन्य साथियों के साथ उमराह की अदायगी के लिए सऊदी अरब गए थे। सभी के दिलों में हरम शरीफ़ की ज़ियारत और इबादत की ख़ुशी थी। उन्होंने मक्का मुकर्रमा पहुंचकर उमराह की धार्मिक रस्में भी अदा कीं।
बताया गया कि 26 अक्टूबर को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और वह बुख़ार की चपेट में आ गए। हालत में सुधार न होने पर उनके साथ मौजूद साथियों ने उन्हें मक्का मुकर्रमा के एक अस्पताल में भर्ती कराया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज जारी रहा। मगर अफ़सोस कि तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी ज़िंदगी की मोहलत पूरी हो गई और इलाज के दौरान उन्होंने आख़िरी सांस ली।
ख़बर पहुंचते ही गांव सालिरी में मचा कोहराम
उस्मान मिर्ज़ा के इंतिक़ाल की ख़बर जैसे ही उनके गांव सालिरी पहुंची, पूरे परिवार पर ग़म का पहाड़ टूट पड़ा। घर में मौजूद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। रिश्तेदारों, अज़ीज़ों और गांव के लोगों में भी गहरा रंज-ओ-ग़म देखने को मिला। हर कोई इस दर्दनाक ख़बर से सदमे में है।
एक तरफ़ उमराह की मुक़द्दस अदायगी की ख़ुशी थी, तो दूसरी तरफ़ अचानक पेश आए इस हादसे ने पूरे परिवार को उम्र भर न भूलने वाला सदमा दे दिया।
सऊदी अरब की सरज़मीन पर हुई तदफ़ीन
मिली जानकारी के अनुसार, उस्मान मिर्ज़ा के मय्यत को भारत लाने के बजाय सऊदी अरब में ही बरोज़ मंगल को स्थानीय क़ब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक कर दिया गया। इस तरह गांव सालिरी का एक और शख़्स सऊदी अरब की सरज़मीन में हमेशा के लिए दफ़्न हो गया।
क़ब्र में उतारे जाते वक़्त और मिट्टी देते समय उनके लिए मग़फ़िरत, रहमत और दरजात की बुलंदी की दुआएं की गईं। उनके चाहने वालों और अज़ीज़ों के लिए यह कल्पना करना भी बेहद तकलीफ़देह है कि जो शख़्स कुछ दिन पहले अपने घरवालों के साथ उमराह की नीयत से रवाना हुआ था, अब उसकी क़ब्र सऊदी अरब की मिट्टी में है।
पीछे छोड़ गए भरा-पूरा परिवार
मरहूम उस्मान मिर्ज़ा अपने पीछे तीन बेटे और चार बेटियों समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। बताया जाता है कि उनकी अधिकांश औलाद की शादियां हो चुकी हैं। उनके इंतिक़ाल से परिवार ने अपना एक अहम सहारा और अज़ीज़ रिश्तेदारों ने अपना प्यारा हमदर्द खो दिया है।
अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फ़रमाए, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए। साथ ही तमाम अहल-ए-ख़ाना, बेटों, बेटियों, दामादों, रिश्तेदारों और अज़ीज़ों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।
मरहूम के लिए मग़फ़िरत की ख़ास दुआ
اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَارْحَمْهُ وَعَافِهِ وَاعْفُ عَنْهُ
अल्लाहुम्मग़फ़िर लहू वरहम्हु व आफ़िहि वअफ़ु अन्हु।
ऐ अल्लाह! मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमा, उन पर रहम फ़रमा, उन्हें आफ़ियत अता फ़रमा और उनकी तमाम ख़ताओं को माफ़ फ़रमा।
क़ब्र में उतारते वक़्त पढ़ी जाने वाली दुआ
بِسْمِ اللَّهِ وَعَلَى مِلَّةِ رَسُولِ اللَّهِ
बिस्मिल्लाहि व अला मिल्लति रसूलिल्लाह।
अल्लाह के नाम के साथ और रसूलुल्लाह ﷺ के दीन व तरीक़े पर।
मिट्टी देते समय पढ़ी जाने वाली आयत
مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ
मिन्हा ख़लक़नाकुम व फ़ीहा नुईदुकुम व मिन्हा नुख़रिजुकुम तारतन उख़रा।
तर्जुमा: इसी मिट्टी से हमने तुम्हें पैदा किया, इसी में तुम्हें वापस लौटाएंगे और इसी से तुम्हें दोबारा निकालेंगे।
ऐ अल्लाह! मरहूम उस्मान मिर्ज़ा की क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे। क़ब्र की तन्हाई को अपनी रहमत से दूर फ़रमा, हिसाब को आसान फ़रमा और रोज़-ए-क़यामत उन्हें अपने महबूब बंदों के साथ उठाना। आमीन सुम्मा आमीन।
ख़बर: ज़मीर आलम
प्रधान-संपादक, उत्तर प्रदेश डेस्क
"मुल्तानी समाज" राष्ट्रीय समाचार पत्रिका
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इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊननिहायत ही अफ़सोस और रंज-ओ-ग़म के साथ इंतिक़ाल की दर्दनाक ख़बर
मौलाना अब्दुल शकूर साहब (मरहूम) गाँव बस्सी वालों की अहलिया मोहतरमा शहर बानो साहिबा का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल, मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी में ग़म की लहर।
निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिली अफ़सोस के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात को इत्तिला दी जाती है कि आज दिनांक 03 नवंबर 2026, मंगलवार को राजस्थान के नागौर शहर में स्थित लोहार पूरा, लजवानों की गली, बस्सी वालों का मोहल्ला में मौलाना अब्दुल शकूर साहब (मरहूम), गाँव बस्सी वालों की अहलिया मोहतरमा शहर बानो साहिबा उम्र तकरीबन 60 बरस का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया है।
इस दुखद ख़बर से खानदान, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, रिश्तेदारों और मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी में गहरे रंज-ओ-ग़म की लहर दौड़ गई है। मरहूमा का इस दुनिया-ए-फ़ानी से रुख़्सत हो जाना उनके परिजनों के लिए एक ऐसा सदमा है, जिसकी भरपाई मुमकिन नहीं। इस मुश्किल घड़ी में तमाम बिरादराना हज़रात की हमदर्दियाँ और दुआएँ ग़मज़दा खानदान के साथ हैं।
मरहूमा की मग़फ़िरत के लिए ख़ास दुआ
अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त से ख़ास दुआ है कि वह मरहूमा शहर बानो साहिबा की कामिल मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फ़रमाकर उन्हें अपनी रहमत के साये में जगह अता फ़रमाए। उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमाए, उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे और क़ब्र की तन्हाई को अपनी रहमत से आसान फ़रमाए।
या अल्लाह! मरहूमा को सवालात-ए-क़ब्र के वक़्त साबित-क़दमी अता फ़रमा, उनकी क़ब्र को वसीअ और रोशन फ़रमा, हिसाब-ओ-किताब आसान फ़रमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा। उन्हें हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ की शफ़ाअत नसीब फ़रमा।
दफ़्न और मिट्टी देते वक़्त पढ़ी जाने वाली दुआ
जब मरहूमा को क़ब्र में उतारा जाए तो यह दुआ पढ़ी जाए:
بِسْمِ اللّٰهِ وَعَلٰى مِلَّةِ رَسُوْلِ اللّٰهِ ﷺ
बिस्मिल्लाहि व अला मिल्लति रसूलिल्लाह ﷺ
तर्जुमा: अल्लाह के नाम के साथ और रसूलुल्लाह ﷺ के दीन व तरीक़े पर।
मिट्टी देते वक़्त क़ुरआन-ए-पाक की यह आयत पढ़ना मुस्तहब है:
مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ
मिन्हा ख़लक़नाकुम व फ़ीहा नुईदुकुम व मिन्हा नुख़रिजुकुम तारतन उख़रा।
तर्जुमा: इसी ज़मीन से हमने तुम्हें पैदा किया, इसी में तुम्हें लौटाएँगे और इसी से तुम्हें दोबारा निकालेंगे।
दफ़्न के बाद दुआ:
अल्लाह तआला से गुज़ारिश है कि मरहूमा को क़ब्र में साबित-क़दम रखे, उनकी मग़फ़िरत फ़रमाए और तमाम ग़मज़दा घर वालों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।
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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल — 'मुल्तानी समाज'।
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Monday, November 2, 2026
बिरादरी के रत्नों की आमद से सहारनपुर में सजी महफ़िल-ए-वलीमा, अफ़ज़ाल मुग़ल के भांजे की शादी में उमड़ा बिरादरी का प्यार; दूल्हा-दुल्हन को दीं दिली मुबारकबाद और नेक दुआएँ
सहारनपुर, उत्तर प्रदेश।
बिरादरी की मोहब्बत, आपसी भाईचारे, ख़ुलूस और सामाजिक इत्तेहाद की ख़ूबसूरत मिसाल उस वक़्त देखने को मिली, जब सहारनपुर की सरज़मीं पर आयोजित एक शानदार महफ़िल-ए-वलीमा में मुल्क के मुख़्तलिफ़ शहरों से बिरादरी की नामचीन और मोअज़्ज़िज़ शख़्सियात ने शिरकत करके महफ़िल की रौनक़ में चार चाँद लगा दिए। इस मौक़े पर हर तरफ़ ख़ुशी, मोहब्बत, अपनाइयत और दुआओं का ख़ूबसूरत माहौल नज़र आया।
बीती शाम, बरोज़ पीर, दिनांक 02 नवंबर 2026 को मन्नत फ़ॉर्म, अंबाला रोड, सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) में जनाब अफ़ज़ाल मुग़ल साहब (मुग़ल होटल वाले) निकट विजय टॉकीज सहारनपुर , उत्तर प्रदेश के भांजे, दूल्हा मोहम्मद फ़ैज़, फ़रज़ंद जनाब हाजी मुस्तकीम साहब का शानदार वलीमा आयोजित किया गया। दूल्हे के दादा जनाब गुलज़ार अहमद साहब और दादी मोहतरमा ज़ुबैदा बेगम साहिबा के परिवार में इस ख़ुशी के मौक़े पर ख़ास रौनक़ देखने को मिली। दुल्हन आयशा मिर्ज़ा, नेक दुख़्तर जनाब सलीम अहमद साहब, निवासी हरबर्टपुर, देहरादून (उत्तराखंड) के साथ इस नए सफ़र के आग़ाज़ पर दोनों ख़ानदानों को दिली मुबारकबाद पेश की गई। दूल्हा मोहम्मद फ़ैज़ और दुल्हन आयशा मिर्ज़ा की ख़ुशियों में शरीक होने और उन्हें नई ज़िंदगी की शुरुआत पर नेक दुआओं से नवाज़ने के लिए बिरादरी की अनेक जानी-मानी हस्तियाँ मुख़्तलिफ़ शहरों से तशरीफ़ लाईं।इस ख़ुशनुमा मौक़े पर मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट के राष्ट्रीय चेयरमैन जनाब मोहम्मद आलम साहब ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराकर दूल्हा-दुल्हन और दोनों ख़ानदानों की ख़ुशियों में शिरकत की।
महफ़िल में राजपुरा (पंजाब) से जनाब नसीम साहब, छुटमलपुर नगर पंचायत की चेयरपर्सन मोहतरमा शमा परवीन साहिबा, बिरादरी की आन-बान और शान माने जाने वाले जनाब हाजी क़ासिम साहब, हाजी तौकीर साहब, शहज़ाद सलीम, एडवोकेट शकील अहमद और बुढ़ाना की शेरनी के नाम से पहचानी जाने वाली मोहतरमा यास्मीन साहिबा, जनाब यासीन एडवोकेट साहब समेत बिरादरी की अनेक मोअज़्ज़िज़ और नामचीन शख़्सियात ने शिरकत की। तमाम मेहमानों ने अपनी मौजूदगी, मोहब्बत और दुआओं से इस ख़ुशी के मौक़े को और भी यादगार बना दिया। महफ़िल में मुल्तानी बिरादरी की आपसी मोहब्बत, एक-दूसरे के सुख-दुख में शरीक होने की रवायत और सामाजिक रिश्तों की मज़बूती साफ़ तौर पर दिखाई दी। जब बिरादरी के लोग एक-दूसरे की ख़ुशियों में शरीक होते हैं तो ऐसे मौक़े महज़ एक तक़रीब नहीं रहते, बल्कि मोहब्बत और इत्तेहाद की यादगार तस्वीर बन जाते हैं।दूल्हा-दुल्हन के लिए ख़ास दुआएँ
इस पुरमसर्रत मौक़े पर दूल्हा मोहम्मद फ़ैज़ और दुल्हन आयशा मिर्ज़ा को दिल की गहराइयों से मुबारकबाद पेश करते हुए दुआ है कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त इस नए जोड़े की ज़िंदगी को रहमतों, बरकतों, ख़ुशियों और कामयाबियों से भर दे।अल्लाह तआला दोनों के दरमियान हमेशा मोहब्बत, उल्फ़त, हमदर्दी, एतमाद और एक-दूसरे का एहतराम क़ायम रखे। हर मुश्किल में दोनों को एक-दूसरे का सहारा बनाए और हर ख़ुशी में साथ मुस्कुराने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।
उनके घर को सुकून, अमन, ईमान और बरकत का गहवारा बनाए। उन्हें नेक और सालेह औलाद से नवाज़े और दोनों ख़ानदानों के दरमियान मोहब्बत और रिश्तों की मिठास हमेशा बरक़रार रखे।आमीन या रब्बुल आलमीन।
मुल्तानी समाज की जानिब से दिली मुबारकबाद
इस शानदार और कामयाब तक़रीब के पुरख़ुलूस एहतिमाम पर "मुल्तानी समाज" राष्ट्रीय समाचार पत्रिका की पूरी टीम जनाब हाजी मुस्तकीम साहब, जनाब अफ़ज़ाल मुग़ल साहब और दोनों ख़ानदानों को दिल की गहराइयों से मुबारकबाद पेश करती है।
अल्लाह तआला इस ख़ानदानी ख़ुशी को हमेशा बरक़रार रखे और मोहम्मद फ़ैज़ व आयशा मिर्ज़ा की जोड़ी को दुनिया और आख़िरत की भलाई से नवाज़े।सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत | नई दिल्ली से प्रकाशित एवं प्रसारित
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बिरादरी को चौधराहट नहीं, नौजवानों की ताक़त और सामूहिक इत्तेहाद की ज़रूरत है!
करोड़ों की आबादी, हज़ारों के दावे और चंद हज़ार सक्रिय लोग! आख़िर कब बदलेगी हमारी क़ौम की तस्वीर?
ज़रा सोचिए! जिस बिरादरी की आबादी करोड़ों में होने का अनुमान लगाया जाता है, उस बिरादरी की तालीम, तरक़्क़ी, कारोबार, रोज़गार और डिजिटल पहचान के लिए मैदान में कितने लोग वास्तव में अमली तौर पर काम कर रहे हैं?
आज पूरे हिंदुस्तान में मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के नौजवानों, तालीमयाफ़्ता लोगों और कारोबार से जुड़े ज़िम्मेदार अफ़राद के दरमियान कई अहम सवालात पर गुफ़्तगू हो रही है। कहीं नए व्हाट्सऐप ग्रुप बनाए जा रहे हैं, कहीं नई तंजीम का ऐलान हो रहा है, कहीं नए ओहदेदार मुक़र्रर किए जा रहे हैं और कहीं नए सदर, चेयरमैन तथा सरपरस्त बनाए जा रहे हैं।
मगर अफ़सोस! इन तमाम सरगर्मियों के बीच एक बुनियादी सवाल पर बहुत कम लोग ग़ौर कर रहे हैं कि आख़िर हमारी बिरादरी की असल तरक़्क़ी के लिए अमली तौर पर किया क्या जा रहा है?
क्या सिर्फ़ नए ग्रुप बनाने, ओहदों के ऐलान करने और सोशल मीडिया पर तस्वीरें लगाने से हमारी आने वाली नस्लों का मुस्तक़बिल संवर जाएगा?
क्या बिरादरी की तरक़्क़ी का रास्ता सिर्फ़ सदर, चेयरमैन और राष्ट्रीय पदाधिकारी बनने से होकर गुज़रता है?
नहीं जनाब! अब वक़्त आ गया है कि हम इन सवालों का जवाब तलाशें।
मुझे बिरादरी का चौधरी नहीं बनना, मुझे बिरादरी को आगे बढ़ते देखना है!
मैं ज़मीर आलम, आज अपनी बिरादरी के तमाम नौजवानों, बुज़ुर्गों, कारोबारियों और सामाजिक ज़िम्मेदारों के सामने अपनी बात पूरी साफ़गोई के साथ रखना चाहता हूँ।
मुझे न बिरादरी का चौधरी बनना है, न किसी ओहदे की लालसा है और न ही किसी तंजीम के ओहदेदार से कोई मुक़ाबला करना है।
मेरा मक़सद सिर्फ़ इतना है कि हमारी बिरादरी को मुल्क की एक तालीमयाफ़्ता, बा-शऊर, तरक़्क़ीपसंद और डिजिटल तौर पर मज़बूत बिरादरी के रूप में पहचाना जाए।
अगर किसी तंजीम ने किसी शख़्स को चेयरमैन बनाया है तो यह उनका अपना फ़ैसला है। हम उनका एहतराम करते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ़ चेयरमैन बना देने से बिरादरी की तक़दीर बदल जाएगी?
अगर किसी ओहदेदार के पास बिरादरी की तालीम, रोज़गार, कारोबार, नौजवानों की रहनुमाई और सामाजिक बेदारी के लिए कोई अमली मंसूबा नहीं है, तो फिर सिर्फ़ ओहदे की अहमियत क्या रह जाती है?
मेरा यक़ीन है कि बिरादरी की ख़िदमत ओहदों से नहीं, बल्कि ख़ुलूस, मेहनत, क़ुर्बानी और लगातार अमल से होती है।
करोड़ों की बिरादरी और चंद हज़ार ख़िदमतगार! यह हमारी सबसे बड़ी फ़िक्र होनी चाहिए
आज हमारे सामने मौजूद सामाजिक तंजीमों और उनसे जुड़े लोगों की तादाद पर ग़ौर करने की ज़रूरत है।
मेरे तजुर्बे, सामाजिक सरगर्मियों और बिरादरी के अलग-अलग हल्क़ों से मिलने वाली मालूमात के मुताबिक़, पूरे मुल्क में बिरादरी की ख़िदमत का दावा करने वाली कई तंजीमें मौजूद हैं। इनमें से कुछ बाक़ायदा रजिस्टर्ड हैं और कुछ सामाजिक सतह पर काम कर रही हैं।
अगर इन तमाम तंजीमों के साथ वास्तव में जुड़े हुए लोगों, पदाधिकारियों और अमली तौर पर काम करने वाले अफ़राद की तादाद का जायज़ा लिया जाए तो यह तादाद बिरादरी की कुल आबादी के मुक़ाबले बेहद कम नज़र आती है।
एक शुरुआती अंदाज़े के मुताबिक़, तमाम तंजीमों के सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ताओं और उनसे जुड़े लोगों की कुल तादाद कुछ हज़ार तक ही सीमित हो सकती है। यह कोई सरकारी या प्रमाणित सर्वे नहीं, बल्कि एक सामाजिक जायज़े की ज़रूरत की तरफ़ इशारा है।
अब ज़रा सोचिए!
जिस बिरादरी की आबादी करोड़ों में होने का अनुमान लगाया जाता है, उसके लिए अगर चंद हज़ार लोग ही सरगर्म हों तो क्या इतने कम लोग अकेले पूरी बिरादरी की तस्वीर बदल सकते हैं?
आख़िर बाक़ी लोग कहाँ हैं? क्या बिरादरी की तरक़्क़ी सिर्फ़ कुछ लोगों की ज़िम्मेदारी है?
सोशल मीडिया के हज़ारों फ़ॉलोअर्स को तंजीम का मेंबर समझने की भूल मत कीजिए!
आजकल एक और दिलचस्प सूरतेहाल देखने को मिल रही है।
कई तंजीमें अपने साथ 10 हज़ार, 20 हज़ार या उससे भी ज़्यादा लोगों के जुड़े होने का दावा करती हैं। हम भी इन दावों को सुनते हैं और ख़ुशी होती है कि हमारी बिरादरी के लोग बड़ी तादाद में एक प्लेटफ़ॉर्म पर जमा हो रहे हैं।
लेकिन असल तस्वीर जानने के लिए कुछ बुनियादी सवाल पूछना ज़रूरी है।
- तंजीम के बाक़ायदा मेंबरशिप रजिस्टर में कितने लोगों के नाम दर्ज हैं?
- कितने लोगों ने बाक़ायदा सदस्यता हासिल की है?
- कितने लोग तंजीम के सामाजिक और तालीमी मिशन में हिस्सा लेते हैं?
- कितने नौजवान रोज़ाना बिरादरी की बेदारी के लिए वक़्त निकालते हैं?
- कितने लोग किसी ज़रूरतमंद की मदद के लिए आगे आते हैं?
सोशल मीडिया पर किसी फ़ेसबुक पेज को फ़ॉलो करने, इंस्टाग्राम अकाउंट से जुड़ने या व्हाट्सऐप ग्रुप में शामिल होने का मतलब यह नहीं कि वह शख़्स किसी तंजीम का बाक़ायदा मेंबर भी बन गया है।
हक़ीक़त यह है कि एक ही शख़्स बिरादरी की कई तंजीमों, दर्जनों सोशल मीडिया पेजों और सैकड़ों व्हाट्सऐप ग्रुपों से जुड़ा हुआ मिल सकता है।
इसलिए सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली तादाद और बाक़ायदा सदस्यता को एक जैसा समझना दुरुस्त नहीं।
हमें तादाद के दावों से ज़्यादा अमली कारगुज़ारी, पारदर्शिता और नतीजों पर तवज्जो देनी होगी।
100 से 150 व्हाट्सऐप ग्रुप, मगर कितने लोग हैं अमली तौर पर सरगर्म?
ज़रा किसी भी तंजीम के ज़िम्मेदार के मोबाइल पर मौजूद बिरादरी के व्हाट्सऐप ग्रुपों का जायज़ा लीजिए।
कई लोगों के मोबाइल में 100 से 150 तक ग्रुप मौजूद मिल सकते हैं। लेकिन सवाल यह है कि इन ग्रुपों में कितने लोग वाक़ई सरगर्मी से हिस्सा लेते हैं?
कितने लोग तालीम की जानकारी शेयर करते हैं?
कितने लोग सरकारी स्कीमों, रोज़गार, कारोबार और क़ानूनी रहनुमाई की मालूमात दूसरों तक पहुँचाते हैं?
कितने लोग किसी ज़रूरतमंद की मदद के लिए आगे आते हैं?
अक्सर देखा जाता है कि ग्रुप में सैकड़ों लोग शामिल होते हैं, लेकिन पैग़ाम भेजने और सामाजिक कामों में हिस्सा लेने वाले चंद ही लोग होते हैं।
अब वक़्त है कि हम सिर्फ़ ग्रुप में शामिल होने वाले नहीं, बल्कि बिरादरी के लिए काम करने वाले बनें।
ऐ नौजवानों! आपकी जेब में मौजूद मोबाइल हमारी बिरादरी का मुस्तक़बिल बदल सकता है!
मेरे प्यारे नौजवान भाइयों!
आप रोज़ाना सोशल मीडिया पर कितना वक़्त गुज़ारते हैं? फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हाट्सऐप पर कितनी देर सरगर्म रहते हैं?
क्या उसी वक़्त में से सिर्फ़ 10 से 15 मिनट अपनी बिरादरी की तरक़्क़ी के लिए नहीं निकाल सकते?
यक़ीन मानिए, अगर हमारी बिरादरी का हर नौजवान रोज़ाना सिर्फ़ 10 से 15 मिनट भी किसी मुनज़्ज़म और मुस्तनद सामाजिक प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए ख़िदमत के लिए दे दे तो एक ऐसी तहरीक खड़ी हो सकती है जिसका असर पूरे हिंदुस्तान में दिखाई देगा।
आपको न अपना कारोबार छोड़ना है, न नौकरी से छुट्टी लेनी है और न ही घर से बाहर निकलने की ज़रूरत है।
आप घर बैठे अपने मोबाइल से यह काम कर सकते हैं।
मसलन:
- बिरादरी के बच्चों को तालीम हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करना।
- सरकारी योजनाओं, स्कॉलरशिप और दाख़िलों की जानकारी शेयर करना।
- बेरोज़गार नौजवानों तक रोज़गार और नौकरी की जानकारी पहुँचाना।
- कारोबारियों के कारोबार को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर पहचान दिलाना।
- बिरादरी के होनहार बच्चों और कामयाब अफ़राद की हौसलाअफ़ज़ाई करना।
- ज़रूरतमंद परिवारों और तालीमी मदद के मुस्तहिक़ लोगों की जानकारी सही प्लेटफ़ॉर्म तक पहुँचाना।
- बिरादरी के बुज़ुर्गों, तंजीमों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अच्छे कामों को आम करना।
- बिरादरी में इत्तेहाद, भाईचारे और आपसी एहतराम को फ़रोग़ देना।
- ग़लत मालूमात और अफ़वाहों के बजाय सही और मुस्तनद जानकारी को बढ़ावा देना।
- मुल्क के हर शहर और क़स्बे में बिरादरी की डिजिटल पहचान को मज़बूत करना।
सोशल मीडिया की ताक़त को पहचानिए, दुनिया बदलने का ज़रिया बनाइए!
आज दुनिया में बड़े-बड़े सामाजिक और कारोबारी ब्रांड अपनी पहचान सोशल मीडिया के ज़रिए बना रहे हैं।एक छोटी-सी टीम अगर मुनज़्ज़म तरीक़े से काम करे तो उसकी आवाज़ मुल्क के कोने-कोने तक पहुँच सकती है।
जब दूसरी क़ौमें अपने नौजवानों को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, तालीम, कारोबार और नए मौक़ों से जोड़ रही हैं, तो फिर हमारी बिरादरी पीछे क्यों रहे?
हमारे नौजवान किसी से कम नहीं हैं। हमारे बच्चों में सलाहियत है, कारोबारियों में तजुर्बा है, बुज़ुर्गों के पास इल्म और तजुर्बे का ख़ज़ाना है और हमारे पास एक बड़ी सामाजिक ताक़त मौजूद है।
ज़रूरत सिर्फ़ इस ताक़त को एक मुनज़्ज़म सिम्त देने की है।
हमें एक-दूसरे की टाँग खींचने के बजाय एक-दूसरे का हाथ थामना होगा।
मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट की तरफ़ से बिरादरी के नौजवानों को पुरख़ुलूस दावत
आज इसी मक़सद के साथ मैं ज़मीर आलम, अपनी पूरी बिरादरी के नौजवानों, तालीमयाफ़्ता भाइयों, कारोबारियों और सामाजिक तौर पर सरगर्म अफ़राद को मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट के साथ जुड़ने की पुरख़ुलूस दावत देता हूँ।
हमारा मक़सद किसी दूसरी तंजीम को कमतर दिखाना या किसी के काम में रुकावट पैदा करना हरगिज़ नहीं है।
हम तमाम तंजीमों, उनके ज़िम्मेदारों और बिरादरी के लिए ख़िदमत अंजाम देने वाले हर शख़्स का एहतराम करते हैं।
हमारी कोशिश यह है कि बिरादरी की तालीम, डिजिटल बेदारी, सामाजिक इत्तेहाद, कारोबार, रोज़गार और नई नस्लों के मुस्तक़बिल के लिए एक ऐसा मुनज़्ज़म प्लेटफ़ॉर्म तैयार किया जाए जिसमें हर शहर, हर क़स्बे और हर इलाक़े के नौजवान को अपनी सलाहियत के मुताबिक़ ख़िदमत का मौक़ा मिले।
हम आपको कोई बड़ा ओहदा देने का वादा नहीं कर रहे।
हम आपको एक बड़ा मक़सद दे रहे हैं।
हम आपको किसी चौधराहट की दावत नहीं दे रहे।
हम आपको अपनी बिरादरी की ख़िदमत की दावत दे रहे हैं।
सिर्फ़ 6 महीने दीजिए, एक नई सामाजिक तहरीक की बुनियाद रखिए!
मेरी अपने नौजवान साथियों से पुरख़ुलूस गुज़ारिश है कि आप सिर्फ़ 6 महीने तक रोज़ाना 10 से 15 मिनट बिरादरी की डिजिटल बेदारी और तरक़्क़ी के लिए देने का इरादा कीजिए।
हमारी कोशिश होगी कि इस दौरान एक मुनज़्ज़म डिजिटल नेटवर्क तैयार किया जाए, शहरों और ज़िलों के नौजवानों को जोड़ा जाए, तालीम और रोज़गार की मालूमात पहुँचाई जाए और बिरादरी के अच्छे कामों को क़ौमी सतह पर पहचान दिलाई जाए।
छह महीने में कितना बदलाव आएगा, यह हमारे सबके इत्तेहाद, मेहनत और अमल पर निर्भर करेगा। लेकिन अगर हम आज से शुरुआत करें तो आने वाले वक़्त में एक मज़बूत बुनियाद ज़रूर रख सकते हैं।
याद रखिए, तारीख़ें ओहदे हासिल करने वालों को नहीं, बल्कि अपनी क़ौम और समाज के लिए अमली ख़िदमत करने वालों को याद रखती है।
आज ही आगे आइए, अपनी बिरादरी की तरक़्क़ी में हिस्सा लीजिए!
अगर आप मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी से ताल्लुक़ रखते हैं और अपनी बिरादरी के लिए कुछ करने का जज़्बा रखते हैं तो आज ही नीचे दिए गए नंबरों पर कॉल या व्हाट्सऐप पैग़ाम भेजकर अपना नाम और अपने शहर का नाम लिखकर भेजें।
हमारी टीम आपसे राब्ता क़ायम करेगी और आपको तफ़सील से समझाएगी कि आप घर बैठे अपने मोबाइल के ज़रिए इस सामाजिक मुहिम का हिस्सा कैसे बन सकते हैं।
हमें ऐसे नौजवान चाहिए जो सिर्फ़ बातें न करें, बल्कि अमल करके दिखाएँ।
हमें ऐसे कारोबारी चाहिए जो अपनी कामयाबी के साथ बिरादरी के दूसरे नौजवानों के लिए भी रास्ते खोलें।
हमें ऐसे तालीमयाफ़्ता अफ़राद चाहिए जो अपने इल्म और सलाहियत से दूसरों की रहनुमाई करें।
और हमें ऐसे ज़िम्मेदार बुज़ुर्ग चाहिए जो अपनी दुआओं, मशवरों और तजुर्बे से इस मुहिम को मज़बूत बनाएँ।
आइए! मिलकर अपनी बिरादरी को तालीमयाफ़्ता, बा-शऊर, ख़ुशहाल और डिजिटल तौर पर मज़बूत बनाने का अहद करें।
क्योंकि बिरादरी की तरक़्क़ी किसी एक शख़्स की ज़िम्मेदारी नहीं, बल्कि हम सबकी मुश्तरका ज़िम्मेदारी है।
हमारी पहचान, हमारा मिशन और हमारा पैग़ाम
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रकाशित एवं प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल — "मुल्तानी समाज"।
उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।
अपनी तहरीर, ख़बर और कारोबार को क़ौमी पहचान दिलाएँ
अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार (विज्ञापन) क़ौमी सतह पर शाया या प्रसारित करवाना चाहते हैं तो बराए मेहरबानी नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।
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आपका एतमाद ही हमारी सबसे बड़ी ताक़त है।
"मुल्तानी समाज"
अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।
आपका
ज़मीर आलम
प्रधान - संपादक
मुल्तानी समाज
राष्ट्रीय समाचार पत्रिका
Sunday, November 1, 2026
हेलीकॉप्टर से बारात लेकर पहुंचे रिहान मुल्तानी, माहिन मुल्तानी के निकाह ने बागपत से दिल्ली तक बिखेरी शाही शान; मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी में यादगार बना यह निकाह
बागपत। खुशियों के नग़्मे, रिश्तों की मिठास, अपनों की मोहब्बत और एक यादगार निकाह की शानदार तस्वीरों ने 01 नवंबर 2026, दिन इतवार को बागपत की सरज़मीं पर ऐसा समां बांधा कि यह दिन मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी के लिए लंबे अरसे तक याद रखा जाएगा।
मोहम्मद अखलाक साहब वल्द जनाब मोहम्मद इस्माईल साहब, निवासी बाग्गू वाले, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश की नेक और सालेहा दुख़्तर माहिन मुल्तानी के निकाह की खुशियां उस वक्त और भी यादगार बन गईं, जब सलीम मुल्तानी साहब वल्द मरहूम मोहम्मद लतीफ़ मुल्तानी, रेलवे ठेकेदार, गांव बाजिदपुर वाले तथा हाल निवासी स्वरूप नगर, दिल्ली, अपने फरज़ंद रिहान मुल्तानी की बारात लेकर हेलीकॉप्टर के ज़रिये बसंत गार्डन, गौरीपुर, बागपत पहुंचे। दूल्हे मियां की हेलीकॉप्टर से आमद ने शादी के इस मुबारक मौके को एक अलग ही शान और रौनक अता कर दी। बारात की आमद की खबर सुनकर न केवल बागपत बल्कि आसपास के इलाकों से भी बड़ी तादाद में लोग अपने खानदान और परिवार के साथ इस यादगार लम्हे का गवाह बनने पहुंचे।हेलीकॉप्टर की आमद बनी हर किसी की तवज्जो का मरकज़
इस शानदार शादी की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि शादी में शरीक होने के लिए मर्दों के साथ-साथ महिलाओं और बच्चों में भी ग़ैरमामूली जोश और उत्सुकता देखने को मिली। खास तौर पर महिलाओं में हेलीकॉप्टर से आने वाली बारात को देखने और इस ऐतिहासिक लम्हे को अपने मोबाइल कैमरों में महफूज़ करने का खासा शौक दिखाई दिया।
कोई हेलीकॉप्टर की आमद का नज़ारा अपने कैमरे में कैद कर रहा था, तो कोई दूल्हा मियां के साथ तस्वीरें खिंचवाकर इस खुशी को यादगार बनाने में मशगूल था। बच्चे भी इस अनोखे नज़ारे को देखने के लिए खासे पुरजोश दिखाई दिए। शादी के हर लम्हे में खुशियों की चमक, अपनों का प्यार और मेहमानों की रौनक साफ़ नज़र आ रही थी। यूं महसूस हो रहा था कि जैसे पूरा माहौल एक यादगार जश्न में तब्दील हो गया हो।दुल्हन के चाचा और ताऊ की खुशियों का नहीं रहा ठिकाना
अपनी भतीजी माहिन मुल्तानी की इस शानदार शादी पर दुल्हन के ताऊ मोहम्मद इरफ़ान मुल्तानी साहब तथा चाचा रिजवान मुल्तानी और शाहनवाज मुल्तानी साहब की खुशियां देखते ही बन रही थीं। अपने परिवार की इस खुशी और शानदार आयोजन को देखकर तमाम अहले-खानदान के चेहरों पर मुस्कुराहट और दिलों में खुशी की लहर दिखाई दी।
बेशक, शादी-ब्याह तो हर खानदान में होते हैं, मगर कुछ आयोजन अपनी अनूठी खासियत, शानदार इंतज़ाम और यादगार लम्हों की वजह से लोगों के दिलों में हमेशा के लिए जगह बना लेते हैं। रिहान मुल्तानी और माहिन मुल्तानी का यह निकाह भी उन्हीं यादगार आयोजनों में शामिल हो गया।बिरादरी के लिए यादगार बना 01 नवंबर 2026
पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी के लिए 01 नवंबर 2026 का यह दिन एक यादगार तारीख़ बन गया। बागपत की सरज़मीं पर हेलीकॉप्टर से बारात की आमद ने इस निकाह को न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि बिरादरी के बीच भी चर्चा का मौज़ू बना दिया।
इस शादी की चर्चा हर तरफ सुनाई दी। लोगों ने अपने-अपने अंदाज़ में इस शानदार आयोजन की तारीफ़ की और इस खुशी के मौके को अपने लिए भी एक यादगार अनुभव बताया।मगर इस पूरे आयोजन की असल खूबसूरती सिर्फ़ शानो-शौकत नहीं, बल्कि दो खानदानों का आपसी रिश्ता, मोहब्बत, अपनापन और एक नए सफ़र की शुरुआत है। आखिरकार निकाह इस्लाम में एक पाकीज़ा रिश्ता और दो परिवारों के बीच मोहब्बत व जिम्मेदारियों का खूबसूरत अहद है।
दूल्हा-दुल्हन के लिए बिरादरी की तरफ़ से ख़ास दुआएं
इस मुबारक मौके पर "मुल्तानी समाज" राष्ट्रीय समाचार पत्रिका, मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट और पूरी मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी की जानिब से नवनिकाहिता जोड़ी रिहान मुल्तानी और माहिन मुल्तानी को दिली मुबारकबाद और ढेरों नेक ख्वाहिशात पेश की जाती हैं।अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त से दुआ है कि इस नए जोड़े की जिंदगी को हमेशा खुशियों, मोहब्बत, सुकून, रहमत और बरकतों से भर दे। दोनों के दरमियान हमेशा इत्तेहाद, एक-दूसरे का एहतराम, वफ़ादारी और बेपनाह मोहब्बत कायम रहे।
अल्लाह तआला दोनों को एक-दूसरे के लिए आंखों की ठंडक बनाए, हर मुश्किल में एक-दूसरे का सहारा बनाए, हलाल रिज़्क़ में बरकत अता फरमाए और नेक व सालेह औलाद से नवाज़े।
اللَّهُمَّ بَارِكْ لَهُمَا وَبَارِكْ عَلَيْهِمَا وَاجْمَعْ بَيْنَهُمَا فِي خَيْرٍ
तर्जुमा: ऐ अल्लाह! इन दोनों के लिए बरकत अता फरमा, इन पर अपनी बरकतें नाज़िल फरमा और इन्हें भलाई के साथ हमेशा एक-दूसरे के साथ रख।
आमीन या रब्बुल आलमीन!
03 नवंबर को दिल्ली में होगा दावत-ए-वलीमा
रिहान मुल्तानी और माहिन मुल्तानी के निकाह के बाद अब इस खुशी के मौके पर दावत-ए-वलीमा का शानदार प्रोग्राम बाकी है, जो दिन मंगल, बा-तारीख़ 03 नवंबर 2026 को ब्रिस्टल फॉर्म, बकौली विलेज, बख्तावरपुर रोड, अलीपुर, दिल्ली में मुनअक़िद होगा। उम्मीद है कि इस मुबारक तक़रीब में भी बिरादरी की जानी-मानी शख्सियात, सामाजिक और कारोबारी हस्तियां, वीआईपी एवं वीवीआईपी मेहमानों के साथ दोनों खानदानों के अज़ीज़ो-अक़ारिब बड़ी तादाद में शिरकत करेंगे और नवनिकाहिता जोड़ी को अपनी दुआओं से नवाज़ेंगे।"मुल्तानी समाज" की ख़ास कोशिश — यादगार लम्हों को बिरादरी तक पहुंचाना
"मुल्तानी समाज" राष्ट्रीय समाचार पत्रिका की कोशिश रहेगी कि इस शानदार निकाह और दावत-ए-वलीमा में शरीक रहने वाली अहम शख्सियात, वीआईपी एवं वीवीआईपी मेहमानों, दूल्हा-दुल्हन के वालिदैन, ताऊ, चाचा, रिश्तेदारों, अज़ीज़ो-अक़ारिब और दोनों खानदानों से अपने पाठकों को रूबरू कराया जाए।यदि मोहम्मद अखलाक साहब और सलीम मुल्तानी साहब की जानिब से "मुल्तानी समाज" राष्ट्रीय समाचार पत्रिका को इस यादगार शादी के बाकी लम्हों और वलीमे की कवरेज के लिए दावत दी जाती है, तो हमारी कोशिश होगी कि इस खुशी के मौके की खास तस्वीरें और अहम जानकारियां बिरादरी तक पहुंचाई जाएं, ताकि आने वाली नस्लें भी इस यादगार आयोजन के बारे में जान सकें।
आखिर में एक बार फिर रिहान मुल्तानी और माहिन मुल्तानी को दिली मुबारकबाद। अल्लाह पाक आपके नए सफ़र को खुशहाल बनाए और दोनों खानदानों के दरमियान मोहब्बत, इज़्ज़त और रिश्तों की मिठास हमेशा कायम रखे।
प्रसारित: उत्तर प्रदेश डेस्क
ज़मीर आलम प्रधान संपादक
"मुल्तानी समाज" राष्ट्रीय समाचार पत्रिका | न्यूज़ पोर्टल | यूट्यूब चैनल
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पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका।
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"मुल्तानी समाज" — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।
आसमान की बुलंदियों से उतरा दूल्हा रिहान मुल्तानी का शाही अंदाज़! हेलीकॉप्टर से दुल्हन माहिन को लेने बागपत पहुंची बारात, आसमान से ज़मीन तक बना चर्चा का विषय
दिल्ली से उड़ान भरकर गौरीपुर पहुंचे रिहान मुल्तानी, हेलीकॉप्टर में अपनी शरीके हयात माहिन मुल्तानी को लेकर हुए विदा | स्कॉर्पियो और ऑडी कारों के काफ़िले के साथ पहुंची बारात, मुल्तानी बिरादरी में शादी की धूम
बागपत, उत्तर प्रदेश।
किसी ने सच ही कहा है कि जब ख़ुशियों के अरमान बुलंद हों तो आसमान भी रास्ता दे देता है। कहीं शहनाइयों की गूंज थी, कहीं फूलों की ख़ुशबू और कहीं अपनों की मोहब्बत से सजा ख़ुशनुमा माहौल। लेकिन इस बार शादी का अंदाज़ कुछ ऐसा निराला रहा कि आसमान से लेकर ज़मीन तक हर तरफ़ इसी बारात के चर्चे होने लगे। जी हां! हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के जनपद बागपत की, जहां दिन इतवार, बा-तारीख़ 01 नवंबर 2026 को रिहान मुल्तानी अपनी शरीके हयात माहिन मुल्तानी को लेने किसी आम बाराती की तरह नहीं, बल्कि दिल्ली से हेलीकॉप्टर से उड़ान भरकर पहुंचे। आसमान की ऊंचाइयों से अपने महबूब रिश्ते की नई मंज़िल की ओर बढ़ते दूल्हे का यह अंदाज़ शादी समारोह का सबसे दिलचस्प और यादगार लम्हा बन गया। मिली जानकारी के मुताबिक, जनाब सलीम मुल्तानी वल्द जनाब मोहम्मद लतीफ़ मुल्तानी साहब (मरहूम), निवासी ग्राम वाजिदपुर, तहसील बड़ौत, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश एवं हाल निवासी स्वरूप नगर, दिल्ली के फ़रज़ंद रिहान मुल्तानी की शादी माहिन मुल्तानी वल्द मोहम्मद अखलाक साहब निवासी बागुवाला जिला बागपत उत्तर प्रदेश के साथ तय हुई। इस ख़ुशनुमा मौक़े पर दूल्हे रिहान मुल्तानी और उनकी फैमिली ने बारात के सफ़र को यादगार बनाने के लिए हेलीकॉप्टर का इंतज़ाम किया। दिन के तक़रीबन 12 बजे स्वरूप नगर, दिल्ली से हेलीकॉप्टर ने गौरीपुर, जनपद बागपत के लिए उड़ान भरी और महज़ आधे घंटे के सफ़र के बाद दोपहर 12:30 बजे गौरीपुर बैंक्वेट हॉल में शानदार अंदाज़ से आमद हुई। उधर, बारातियों का क़ाफ़िला भी किसी शाही जुलूस से कम नहीं था। तक़रीबन 200 बाराती स्कॉर्पियो और ऑडी जैसी शानदार गाड़ियों के ज़रिए बारात लेकर बसंत गार्डन, गौरीपुर, बागपत पहुंचे। एक तरफ़ आसमान में हेलीकॉप्टर की आमद और दूसरी तरफ़ ज़मीन पर गाड़ियों का शानदार क़ाफ़िला, इस नज़ारे ने शादी की रौनक़ में चार चांद लगा दिए।आसमान से आई बारात, हेलीकॉप्टर में हुई दुल्हन की विदाई!
इस पूरे आयोजन का सबसे ख़ास और दिल को छू लेने वाला लम्हा उस वक़्त आया, जब अपनी शरीके हयात माहिन मुल्तानी को साथ लेकर रिहान मुल्तानी ने हेलीकॉप्टर से विदाई की तैयारी की। दोपहर ठीक 3 बजकर 20 मिनट पर हेलीकॉप्टर ने गौरीपुर से दिल्ली की वापसी की उड़ान भरी और 3 बजकर 50 मिनट पर रिहान मुल्तानी अपनी दुल्हन माहिन मुल्तानी के साथ अपने घर दिल्ली पहुंच गए। यह सिर्फ़ एक हवाई सफ़र नहीं, बल्कि दो परिवारों की ख़ुशियों, मोहब्बत और नए रिश्ते की शुरुआत का एक ऐसा यादगार लम्हा था, जिसकी यादें लंबे अरसे तक दोनों परिवारों और इस शादी में शरीक होने वाले मेहमानों के दिलों में महफ़ूज़ रहेंगी।अब 03 नवंबर को दिल्ली में सजेगी वलीमे की महफ़िल!
इस यादगार शादी के बाद अब अगला ख़ास मौक़ा वलीमे की दावत का है। दिन मंगल, बा-तारीख़ 03 नवंबर 2026 को ब्रिस्टल फार्म, बकौली गाँव, बख़्तावरपुर रोड, अलीपुर, दिल्ली-110036 पर वलीमे की शानदार दावत का एहतिमाम किया जाएगा। आज किसी वजह से इस आलीशान शादी में शरीक न हो पाने वाले कई मेहमानों के बीच भी इस बारात की ख़ूब चर्चा हो रही है। शादी के इस दिलचस्प अंदाज़ के चर्चे सुनकर अब मेहमान वलीमे की दावत में शिरकत करने के लिए बेहद पुरजोश नज़र आ रहे हैं।दूल्हा-दुल्हन के लिए ख़ास दुआएं
मुल्तानी समाज राष्ट्रीय समाचार पत्रिका की पूरी टीम की जानिब से दूल्हा रिहान मुल्तानी और दुल्हन माहिन मुल्तानी को शादी की दिली मुबारकबाद।
अल्लाह तआला इस नए रिश्ते को हमेशा सलामत रखे, दोनों के दरमियान मोहब्बत, उल्फ़त, इज़्ज़त और वफ़ा क़ायम रखे। ज़िंदगी का हर आने वाला दिन ख़ुशियों से रोशन हो, हर क़दम पर कामयाबी मिले और दोनों परिवारों में हमेशा रहमतों और बरकतों का नुज़ूल होता रहे।माशाअल्लाह! अल्लाह इस ख़ूबसूरत जोड़ी को हर बुरी नज़र, हसद और बला से महफ़ूज़ रखे। किसी की नज़र न लगे। दोनों का साथ उम्रभर बना रहे और यह जोड़ी हमेशा आबाद रहे। आमीन या रब्बुल आलमीन!
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