Saturday, May 23, 2026

कांधला में शोक की लहर — मिस्त्री सद्दीक साहब का इंतेकाल, आज सुबह सुपुर्द-ए-ख़ाक किए जाएंगे


निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ बिरादरी और क्षेत्रवासियों को यह दुखद सूचना दी जाती है कि मिस्त्री सद्दीक साहब वल्द जनाब रफ़ीक साहब निवासी ग्राम इस्सोपुर, हाल मुकाम छोटी नहर बाईपास, क़स्बा कांधला, जिला शामली (उत्तर प्रदेश) का आज शनिवार, 24 मई 2026 को कज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया। मरहूम की उम्र लगभग 75 वर्ष बताई गई है।

मरहूम मिस्त्री सद्दीक साहब अपने अच्छे अखलाक, मिलनसार स्वभाव और मेहनतकश जिंदगी के लिए इलाके में खास पहचान रखते थे। उनके इंतेकाल की खबर मिलते ही कांधला और आसपास के क्षेत्रों में गम का माहौल फैल गया। रिश्तेदारों, दोस्तों और बिरादरी के लोगों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए मरहूम के लिए दुआ-ए-मगफिरत की।

परिवार की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, मय्यत को क़स्बा कांधला स्थित कब्रिस्तान में कल दिन इतवार, 24 मई 2026 को सुबह 9 बजे सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम बिरादराना हज़रात से गुजारिश की गई है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मगफिरत करें और सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

अल्लाह तआला मरहूम मिस्त्री सद्दीक साहब की मगफिरत फरमाए, उनकी तमाम खतााओं को माफ फरमाकर उन्हें जन्नत-उल-फिरदौस में आला मुकाम अता करे। अल्लाह उनकी क़ब्र को नूर से भर दे, उसे जन्नत के बागों में से एक बाग बना दे और तमाम घरवालों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन सुम्मा आमीन।

यह दुनिया फानी है और हर जान को एक दिन मौत का स्वाद चखना है। ऐसे मौके इंसान को जिंदगी की हकीकत और आखिरत की तैयारी की याद दिलाते हैं। बिरादरी और समाज के लोगों ने मरहूम के परिवार के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज़ पोर्टल/यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए कांधला, जिला शामली (उत्तर प्रदेश) से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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पुराना मुस्तफाबाद, दिल्ली में शोक की लहर — पप्पू और शान मोहम्मद साहब की वालिदा मीला बी का इंतेकाल

निहायत ही रंजो-ग़म के साथ बिरादरी और क्षेत्रवासियों को यह दुखद सूचना दी जाती है कि जनाब मोहम्मद अय्यूब उर्फ पप्पू और शान मोहम्मद साहब की वालिदा, मरहूमा मीला बी अहलिया जनाब अलाउद्दीन साहब (मरहूम) का आज दिन शनिवार, 23 मई 2026 को कज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया। मरहूमा की उम्र तकरीबन 90 वर्ष बताई गई है।

मरहूमा मूल रूप से ग्राम बिराल, जिला बागपत (उत्तर प्रदेश) की निवासी थीं तथा वर्तमान में गली नंबर-18, पुराना मुस्तफाबाद, दिल्ली में रह रही थीं। उनके इंतेकाल की खबर मिलते ही इलाके और बिरादरी में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार, रिश्तेदारों और जानने वालों में गहरा दुख व्याप्त है।

जनाब मोहम्मद अय्यूब उर्फ पप्पू और शान मोहम्मद साहब को क्षेत्र में लोग प्यार और सम्मान के साथ “पप्पू” और “शान” के नाम से जानते हैं। उनकी वालिदा के इंतेकाल पर लोगों ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए मरहूमा के लिए मगफिरत की दुआ की।

परिवार की ओर से बताया गया है कि मय्यत को बाद नमाज़-ए-ईशा मुस्तफाबाद, दिल्ली स्थित कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। बिरादरी और तमाम अहबाब से गुजारिश की गई है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मगफिरत करें और सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

अल्लाह तआला मरहूमा मीला बी की मगफिरत फरमाए, उनकी कब्र को जन्नत के बागों में से एक बाग बनाए और तमाम घरवालों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।

मय्यत के सिलसिले में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए जनाब मोहम्मद इरशाद साहब से मोबाइल नंबर 8188767976 पर संपर्क किया जा सकता है।

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ईद-उल-अज़हा पर मुल्तानी समाजसेवी संगठन का बड़ा फैसला, कुर्बानी के गोश्त के साथ तेल और बेसन भी होंगे तक्सीम

मुज़फ्फरनगर जनपद के खतौली क्षेत्र में मुल्तानी समाजसेवी संगठन की एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें ईद-उल-अज़हा के मौके पर ज़रूरतमंद परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाने को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। संगठन की ओर से पहले ही कुर्बानी के गोश्त की तक्सीम का कार्यक्रम तय किया गया था, लेकिन अब कमेटी ने इसमें और विस्तार करते हुए तेल रिफाइंड तथा बेसन भी शामिल करने का फैसला लिया है।

बैठक में मौजूद पदाधिकारियों ने कहा कि संगठन का उद्देश्य केवल रस्मी कार्यक्रम करना नहीं, बल्कि समाज के गरीब, मजबूर और जरूरतमंद लोगों तक वास्तविक मदद पहुंचाना है। कमेटी के सदस्यों का मानना है कि ईद की खुशियां तभी मुकम्मल होती हैं जब समाज के हर तबके तक राहत और सहयोग पहुंचे। इसी सोच के साथ इस बार कुर्बानी के गोश्त के अलावा जरूरी खाद्य सामग्री भी वितरित की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक परिवारों को राहत मिल सके।

संगठन के पदाधिकारियों ने ग्रुप और बिरादरी के तमाम लोगों से अपील करते हुए कहा कि इस नेक मिशन की कामयाबी के लिए अल्लाह से दुआ करें। उन्होंने कहा कि अल्लाह तआला सभी लोगों की मदद और सहयोग को अपनी बारगाह में कबूल फरमाए।

कमेटी की ओर से यह भी कहा गया कि मुल्तानी समाजसेवी संगठन लगातार बिरादरी और समाज की खिदमत करता आया है और आगे भी इसी जज़्बे के साथ सेवा कार्य जारी रखेगा। संगठन का उद्देश्य समाज में भाईचारा, सहयोग और इंसानियत के संदेश को मजबूत करना है।

आज आयोजित बैठक में राष्ट्रीय सदर हाजी नसीम साहब, राष्ट्रीय अध्यक्षा यास्मीन मिर्जा साहिबा, नायब सदर जमीरउद्दीन साहब, संगठन सेक्रेटरी मिर्जा नौशाद साहब, कोषाध्यक्ष अफजाल मिर्जा कुशवली वाले, संचालक प्रभारी शाहनवाज मिर्जा सरधने वाले, मिर्जा बाबा मास्टर जाहिद साहब, जीशान मिर्जा सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। बैठक में आगामी कार्यक्रमों और समाजहित से जुड़े कई विषयों पर भी चर्चा की गई।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज़ पोर्टल/यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए खतौली, जिला मुज़फ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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“100 जुमों की मोहब्बत, खिदमत और लंगर की रौनक — सरहिंद शरीफ़ में इंसानियत का खूबसूरत पैग़ाम”

सरहिंद शरीफ़, पंजाब की पाक सरज़मीं पर इंसानियत, मोहब्बत और मेहमाननवाज़ी की एक ऐसी मिसाल कायम हुई जिसने हर दिल को छू लिया। बाबा फरीद सर्व धर्म सेवा समिति की जानिब से लगातार 100 हफ़्तों तक हर जुमे के दिन लगने वाले लंगर ने आज अपने 100 हफ़्ते मुकम्मल कर लिए। यह सिर्फ़ एक लंगर नहीं बल्कि इंसानियत की खिदमत, भाईचारे और मोहब्बत का वह सिलसिला है जिसने अनगिनत दिलों को जोड़ने का काम किया।

इस नेक काम में मिर्जा मुल्तानी लोहार बिरादरी के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, वहीं दुबई से आए गुरजीत सिंह का सहयोग भी बेहद क़ाबिल-ए-तारीफ़ रहा। उनकी मोहब्बत और दिलदारी ने इस खिदमत को और भी खूबसूरत बना दिया।

हाजी बाबा ने इस मौके पर तफसील से बताया कि पिछले 100 हफ़्तों में हर जुमे को अलग-अलग तरह के लंगर का एहतिमाम किया गया। कभी खुशबूदार चिकन बिरयानी तैयार की गई, तो कभी स्वादिष्ट मटर पुलाव और कई मौकों पर पनीर बिरयानी से मेहमानों की ख़ातिरदारी की गई। यूँ ही देखते-देखते मोहब्बत और खिदमत का यह कारवां 100 हफ़्तों तक पहुंच गया।

आज के इस खास मौके पर शहर की एक फैक्ट्री के मैनेजर साहब, कॉलेज के प्रिंसिपल साहब, इमाम वासिल सहित बड़ी तादाद में लोगों ने शिरकत की और इस नेक पहल की दिल खोलकर सराहना की। माहौल में अपनापन, अदब और इंसानियत की खुशबू साफ महसूस की जा रही थी।

इस मौके पर हाजी बाबा ने बेहद असरदार अल्फाज़ में कहा कि

"खिदमत-ए-ख़ल्क से ही अल्लाह मिलता है। इंसान अगर इंसान के काम आए, भूखे को खाना खिलाए और मोहब्बत बांटे तो यही सबसे बड़ी इबादत है।"

वहीं प्रिंसिपल साहब और मैनेजर साहब ने अपने ख्यालात का इज़हार करते हुए कहा कि मेहमाननवाज़ी और इंसानियत की सेवा बेहद अज़ीम काम है। अल्लाह और उसके रसूल को ऐसे लोग बेहद पसंद हैं जो दूसरों की भलाई के लिए आगे आते हैं। उन्होंने कहा कि समाज के हर व्यक्ति को मिलजुल कर ऐसे नेक कामों में हिस्सा लेना चाहिए ताकि मोहब्बत और भाईचारे का माहौल कायम रहे।

दुआओं और मोहब्बतों के इस खूबसूरत माहौल में सभी लोगों ने अल्लाह तआला से हाजी बाबा की लंबी उम्र, सेहत और कामयाबी के लिए दुआ की और कहा —
"अल्लाह तआला हाजी बाबा को सलामत रखे और उन्हें यूँ ही इंसानियत की खिदमत करने की तौफीक अता फरमाए। आमीन।"


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका / न्यूज़ पोर्टल / यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए सरहिंद शरीफ़, पंजाब से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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Friday, May 22, 2026

बिरादरी की भलाई के लिए मुल्तानी समाजसेवी संगठन का अहम फैसला, ईद-उल-अज़हा पर ( कुर्बानी ) के साथ आर्थिक मदद का भी होगा इंतज़ाम

“खिदमत-ए-खल्क़ ही असली इबादत — मुल्तानी समाजसेवी संगठन ने जरूरतमंदों के सहारे का लिया अहम फैसला”

“( कुर्बानी ) की खुशियों में गरीब और मिस्कीन परिवारों को भी किया जाएगा शामिल — संगठन की बैठक में बनी रणनीति”

खतौली, मुजफ्फरनगर।
बिरादरी की मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों और जरूरतमंद परिवारों की परेशानियों को मद्देनज़र रखते हुए मुल्तानी समाजसेवी संगठन के कार्यकर्ताओं की एक अहम बैठक जमीरउद्दीन साहब के आवास पर आयोजित की गई। बैठक का माहौल बेहद संजीदा, भाईचारे और इंसानियत की भावना से सराबोर रहा, जिसमें समाज की भलाई और गरीब तबके की मदद को लेकर कई अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में यह सर्वसम्मति से तय किया गया कि आने वाली ईद-उल-अज़हा के मौके पर जहां ( कुर्बानी ) के गोश्त की तक्सीम जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाई जाएगी, वहीं बिरादरी के गरीब, बेसहारा और मिस्कीन लोगों की आर्थिक मदद का भी विशेष इंतज़ाम किया जाएगा, ताकि कोई भी परिवार खुशियों से महरूम न रहे। संगठन के पदाधिकारियों ने इस नेक पहल को इंसानियत और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल बताते हुए इसे लगातार जारी रखने का संकल्प लिया।

बैठक में मुल्तानी समाजसेवी संगठन के राष्ट्रीय सदर हाजी नसीम साहब ने कहा कि समाज की तरक्की केवल बातों से नहीं बल्कि आपसी सहयोग और जरूरतमंदों के सहारे से संभव होती है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वह आगे बढ़कर गरीब परिवारों की मदद करें और समाज में भाईचारे, मोहब्बत और इंसानियत का पैगाम आम करें।

इस मौके पर संगठन के नायब सदर जमीरउद्दीन साहब ने मेहमानों का इस्तकबाल करते हुए कहा कि मौजूदा दौर में जरूरतमंद लोगों की मदद करना वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है। संगठन सेक्रेटरी मिर्ज़ा नौशाद साहब ने संगठन की आगामी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की, जबकि कोषाध्यक्ष अफजाल मिर्जा (कुसावली) ने आर्थिक सहयोग और सहायता व्यवस्था को मजबूत करने पर अपने विचार रखे।

बैठक का संचालन प्रभारी शाहनवाज मिर्जा (सरधने वालों) ने बेहद सलीके और खूबसूरत अंदाज में किया। उन्होंने संगठन की एकजुटता और सामाजिक जिम्मेदारी को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।

बैठक के आखिर में सभी मौजूद लोगों ने यह संकल्प लिया कि बिरादरी के गरीब और जरूरतमंद लोगों की हर संभव मदद की जाएगी तथा समाज में शिक्षा, आपसी सहयोग और इंसानियत के जज़्बे को मजबूत किया जाएगा।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज पोर्टल/यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए खतौली जिला मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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10 साल पुराने पांच मुकदमों का हुआ आपसी समझौता, तंजीम की कोशिशों से बसा टूटा रिश्ता

हाजी नज़ीर अहमद की पहल से दोनों परिवारों में बनी रज़ामंदी, दहेज का सामान भी कराया वापस

समाज में बढ़ते घरेलू विवादों और पारिवारिक मामलों के बीच जहां रिश्ते अदालतों की चौखट तक पहुंचकर टूट जाते हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो समाज को जोड़ने और रिश्तों को बचाने का काम करते हैं। पैदाइशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार बढ़ई बिरादरी में ऐसा ही एक सराहनीय मामला सामने आया है, जिसने समाज में आपसी भाईचारे और तंजीमी एकता की मिसाल पेश की है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते लगभग 10 वर्षों से एक लड़का और लड़की पक्ष के बीच पांच मुकदमे अलग-अलग मामलों को लेकर चल रहे थे। इन मामलों ने दोनों परिवारों के बीच दूरियां पैदा कर दी थीं और कई पंचायतों के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा था।

बताया जाता है कि बिरादरी की तंजीम से जुड़े वरिष्ठ समाजसेवी एवं प्रसिद्ध बिजनेसमैन जनाब हाजी नज़ीर अहमद साहब निवासी जलालाबाद, जिला शामली ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों पक्षों को समझाने और रिश्ते को बचाने की लगातार कोशिश की। उन्होंने पहले पति-पत्नी को दोबारा घर बसाने और साथ रहने के लिए राज़ी करने का प्रयास किया, लेकिन जब दोनों पक्ष इसके लिए तैयार नहीं हुए तो आपसी रज़ामंदी के साथ शांतिपूर्ण समझौते का रास्ता निकाला गया।

इस समझौते में बिरादरी के विभिन्न शहरों जैसे खतौली, मुजफ्फरनगर, रामपुर, जलालाबाद, शामली, चौसाना आदि से जुड़े जिम्मेदार और सम्मानित लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तंजीम के बुजुर्गों और जिम्मेदार सदस्यों की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच चल रहे विवादों को समाप्त कराया गया और अदालतों में चल रहे मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया भी पूरी कराई गई।

इतना ही नहीं, लड़की पक्ष का दहेज का सामान भी सम्मानपूर्वक वापस कराया गया। जानकारी के अनुसार, हाजी नज़ीर साहब स्वयं मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने दोनों परिवारों को एक-दूसरे से हाथ मिलवाकर पुराने गिले-शिकवे खत्म कराए।

इस मौके पर मौजूद लोगों ने कहा कि समाज में ऐसे फैसले अदालतों से ज्यादा रिश्तों को बचाने वाले साबित होते हैं। लोगों ने हाजी नज़ीर अहमद और तंजीम से जुड़े जिम्मेदारों की इस कोशिश की सराहना करते हुए इसे बिरादरी की एक बड़ी कामयाबी बताया।

अल्लाह पाक से दुआ की गई कि दोनों पक्षों को आगे चलकर बेहतर जीवनसाथी नसीब हों और उनकी जिंदगी खुशहाल बने। साथ ही तंजीम के सभी ओहदेदारों और समाजसेवियों को इस नेक कार्य का बेहतर अज्र अता फरमाए।

यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर हाजी नज़ीर अहमद साहब द्वारा साझा की गई वायरल सूचना के आधार पर तैयार की गई है।


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Thursday, May 21, 2026

मुल्तानी समाज का भविष्य: पढ़ाई से तरक्की, फिजूल खर्च से बर्बादी

जिस समाज ने इल्म को अपनाया, उसी ने तरक्की पाई “उस समाज के हालात कभी नहीं बदलते जो समाज अपने हालात बदलना नहीं चाहता।”

यह सिर्फ एक जुमला नहीं, बल्कि आज के दौर की सबसे बड़ी सच्चाई है। वक्त तेजी से बदल रहा है। दुनिया टेक्नोलॉजी, पढ़ाई और हुनर के दम पर आगे बढ़ रही है, लेकिन अगर कोई समाज अब भी पुरानी सोच, दिखावे और फिजूल रस्मों में उलझा रहे तो उसका पीछे रह जाना तय है।

पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी के बीच आज सबसे ज्यादा जरूरत इस बात की है कि हम अपनी नई नस्ल को तालीम और हुनर की तरफ लेकर जाएं। क्योंकि अब सिर्फ मेहनत काफी नहीं, मेहनत के साथ इल्म भी जरूरी है।

पढ़ाई ही असली दौलत है

एक वक्त था जब लोग जमीन, दुकान और कारोबार को ही सबसे बड़ी पूंजी समझते थे। लेकिन आज का दौर अलग है। अब वही इंसान आगे बढ़ रहा है जिसके पास तालीम, हुनर और नई सोच है। पढ़ा-लिखा नौजवान नौकरी भी हासिल कर सकता है, कारोबार भी खड़ा कर सकता है और डिजिटल दुनिया में भी अपनी पहचान बना सकता है।

आज कंप्यूटर, अकाउंटिंग, मेडिकल, डिजाइनिंग, मोबाइल टेक्नोलॉजी, ऑनलाइन बिजनेस और सरकारी नौकरियों में हर तरफ मौके मौजूद हैं। जरूरत सिर्फ सही दिशा और मेहनत की है।

सबसे अहम बात यह है कि बेटियों की तालीम को भी उतनी ही अहमियत दी जाए जितनी बेटों की। क्योंकि एक पढ़ी-लिखी बेटी सिर्फ खुद नहीं बदलती, बल्कि पूरे घर और आने वाली नस्लों की सोच बदल देती है। जिस घर की मां तालीमयाफ्ता होती है, वहां बच्चों की परवरिश, तहज़ीब और तरक्की खुद-ब-खुद बेहतर हो जाती है।

हर घर को कोशिश करनी चाहिए कि कम से कम एक बच्चा कॉलेज तक जरूर पढ़े। अगर आर्थिक परेशानी हो तो स्कॉलरशिप, सरकारी योजनाओं और समाजी मदद का सहारा लिया जाए। तालीम पर खर्च कभी बर्बाद नहीं जाता।

शादी में दिखावा समाज को कमजोर कर रहा है

आज समाज के कई घर सिर्फ इसलिए परेशान हैं क्योंकि शादी को जरूरत से ज्यादा मुश्किल और महंगा बना दिया गया है। दो दिन की रस्मों के लिए लोग कई-कई साल तक कर्ज चुकाते रहते हैं।

महंगे बैंक्वेट हॉल, लंबी बारात, जरूरत से ज्यादा खाना, दिखावटी डेकोरेशन, दहेज और “लोग क्या कहेंगे” जैसी सोच ने समाज को आर्थिक रूप से कमजोर कर दिया है। कई गरीब परिवार सिर्फ इन बेकार रस्मों की वजह से बेटियों की शादी तक टाल देते हैं।

हकीकत यह है कि शादी की असली खूबसूरती सादगी, मोहब्बत और आसानी में है, ना कि फिजूल खर्च और दिखावे में।

बदलाव की शुरुआत अपने घर से करें

अगर समाज को बदलना है तो शुरुआत हर इंसान को अपने घर से करनी होगी। शादी को आसान बनाइए। मस्जिद में सादा निकाह और घर या छोटे हॉल में सादा वलीमा भी एक बेहतर और शरीफाना तरीका है। 100 से 150 मेहमान काफी होते हैं, बाकी पैसा बच्चों की पढ़ाई, कारोबार या भविष्य की जरूरतों के लिए बचाया जा सकता है।

सामूहिक निकाह जैसी मुहिम भी समाज के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है। एक ही जगह कई जोड़ों की शादी होने से खर्च कम होता है और गरीब परिवारों पर बोझ भी नहीं पड़ता।

सबसे जरूरी बात यह है कि बेटी को बोझ समझने की सोच खत्म की जाए। बेटियों को इतना काबिल बनाया जाए कि वे जरूरत पड़ने पर खुद अपने पैरों पर खड़ी हो सकें और अपने परिवार का सहारा बन सकें।

इल्म हमेशा साथ रहता है

पैसा कभी कम तो कभी ज्यादा होता रहता है। रस्में और रिवाज भी वक्त के साथ बदल जाते हैं। लेकिन इल्म एक ऐसी दौलत है जो इंसान से कभी जुदा नहीं होती।

आज जरूरत इस बात की है कि अगली शादी में दिखावे के बजाय सादगी को अपनाया जाए, फिजूल खर्ची के बजाय बचत की जाए और उस बचत को बच्चों की तालीम और बेहतर भविष्य पर लगाया जाए। यही सोच मुल्तानी समाज को मजबूती देगी और आने वाली नस्लों को कामयाबी की नई राह दिखाएगी।


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