Saturday, September 19, 2026

सड़क हादसे में जावेद मिर्ज़ा का इंतिक़ाल, मुल्तानी बिरादरी में ग़म की लहर

हाजी सलीम साहब के फरज़ंद जावेद मिर्ज़ा का दर्दनाक हादसे में मौक़े पर ही इंतिक़ाल, बिरादरान-ए-मुल्तानी ने किया गहरे रंज-ओ-ग़म का इज़हार

छपरौली/बड़ौत (बागपत), 19 सितंबर 2026।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिल-फ़िगार करने वाली इत्तिला के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादराना हज़रात को सूचित किया जाता है कि जनाब हाजी सलीम साहब वल्द हाजी वली हसन साहब (मरहूम), निवासी क़स्बा छपरौली, तहसील बड़ौत, ज़िला बागपत, उत्तर प्रदेश तथा हाल निवासी स्वरूप नगर, दिल्ली के फरज़ंद-ए-अज़ीज़ जनाब जावेद मिर्ज़ा, उम्र तक़रीबन 40 वर्ष, आज दिन शनिवार, 19 सितंबर 2026 को एक दर्दनाक सड़क हादसे का शिकार होकर इस दार-ए-फ़ानी से कूच कर गए।

मिली जानकारी के मुताबिक़ जावेद मिर्ज़ा अपने वालिद-ए-मुहतरम हाजी सलीम साहब के साथ मोटरसाइकिल पर किसी ज़रूरी काम के सिलसिले में जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में अचानक हुए सड़क हादसे में जावेद मिर्ज़ा को गंभीर चोटें आईं और उन्होंने मौक़ा-ए-वारदात पर ही क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल फ़रमा लिया।

इस दर्दनाक हादसे की ख़बर जैसे ही उनके अज़ीज़ो-अक़ारिब, दोस्तों और बिरादराना हज़रात तक पहुँची, हर तरफ़ ग़म और अफ़सोस की लहर दौड़ गई। एक जवान और परिवार के अज़ीज़ फ़र्द का इस तरह अचानक दुनिया से रुख़्सत हो जाना निश्चित रूप से उनके अहल-ए-ख़ाना के लिए बेहद तकलीफ़देह और सदमा-ए-अज़ीम है।

अल्लाह पाक मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए

हम तमाम अहल-ए-बिरादरी की जानिब से जनाब हाजी सलीम साहब और तमाम पसमान्दगान-ए-मरहूम की ख़िदमत में दिल की गहराइयों से ताज़ियत और पुरसा पेश करते हैं।

अल्लाह रब्बुल-आलमीन मरहूम जावेद मिर्ज़ा की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों से दरगुज़र फ़रमाए, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमाए, क़ब्र के सफ़र को आसान फ़रमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए।

या अल्लाह! जब मरहूम को कब्र में उतारा जाए और मिट्टी दी जाए तो अपनी रहमत के साये में उन्हें जगह अता फ़रमा। उनकी तन्हाई को अपनी रहमत से दूर फ़रमा, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे और सवाल-ए-क़ब्र में आसानी अता फ़रमा।

अल्लाह तआला उनके वालिद-ए-मुहतरम हाजी सलीम साहब, तमाम घरवालों, अज़ीज़ो-अक़ारिब और पसमान्दगान को यह सदमा बर्दाश्त करने की हिम्मत और सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए तथा मरहूम के लिए सदक़ा-ए-जारीया बनने वाले नेक अमल की तौफ़ीक़ दे।

आमीन या रब्बुल-आलमीन।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

हर जान को मौत का मज़ा चखना है।

दफ़्न का वक़्त बाद में बताया जाएगा

ख़बर लिखे जाने तक ज़िम्मेदारान-ए-ख़ानदान की जानिब से नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन (दफ़्न) का वक़्त और मुक़ाम मालूम नहीं हो सका था। जैसे ही दफ़्न और मिट्टी देने के समय के संबंध में कोई पुष्ट जानकारी हासिल होती है, उसे इसी ख़बर में अपडेट कर दिया जाएगा।

तमाम अहल-ए-बिरादरी से गुज़ारिश है कि मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएँ और पसमान्दगान के लिए सब्र-ए-जमील की दुआ करें।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

अपनी ख़बर हम तक पहुँचाएँ

अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार (विज्ञापन) क़ौमी सतह पर शाया (प्रकाशित) या प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो बराए मेहरबानी नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।

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"मुल्तानी समाज"

अपनी बिरादरी की आवाज़ — अपनी पहचान

Thursday, September 17, 2026

एक और बुज़ुर्ग शख़्सियत मिट्टी की आग़ोश में सो गई, हाजी अब्दुल गफ़ूर साहब के इंतक़ाल पर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी में ग़म की लहर

ख़बर-ए-इंतक़ाल | बूढेडा, थाना बिनौली, जिला बागपत”  | 17 सितंबर 2026

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म, दिली अफ़सोस और बेहद क़ल्बी सदमे के साथ आप तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि जनाब हाजी अब्दुल गफ़ूर साहब वल्द जनाब मोहम्मद कमरुद्दीन साहब, उम्र तक़रीबन 77 साल, निवासी गाँव बूढेडा, थाना बिनौली, जिला बागपत”, उत्तर प्रदेश, का आज दिन जुमेरात, बा-तारीख़ 17 सितंबर 2026 को तवील बीमारी के चलते बड़ौत, जिला बागपत के एक प्राइवेट अस्पताल में क़ज़ा-ए-इलाही से इंतक़ाल फ़रमा गए।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम के इंतक़ाल की ख़बर सुनते ही अहले-ख़ानदान, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, दोस्त-अहबाब और मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी में ग़म और सदमे की फ़िज़ा पैदा हो गई। एक बुज़ुर्ग और मोहतरम शख़्सियत का इस दुनिया-ए-फ़ानी से रुख़्सत हो जाना यक़ीनन परिवार और बिरादरी के लिए एक बड़ा सदमा है।

दुनिया की ज़िंदगी फ़ानी है और हर जान को एक दिन अपने रब की तरफ़ लौटना है। अल्लाह रब्बुल आलमीन मरहूम की तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फ़रमाए और उन्हें अपनी रहमत के साये में जगह अता फ़रमाए।

नमाज़-ए-जनाज़ा व दफ़्न

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूम हाजी अब्दुल गफ़ूर साहब की नमाज़-ए-जनाज़ा व तदफ़ीन शुक्रवार, बा-तारीख़ 18 सितंबर 2026 को सुबह 9:00 बजे,

बूढेडा, थाना बिनौली, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश के कब्रिस्तान में की जाएगी।

तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि अगर मुमकिन हो तो जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और सोगवार ख़ानदान के ग़म में शरीक हों।

दफ़्न और क़ब्र में उतारते वक़्त दुआ

जब मरहूम को क़ब्र में उतारा जाए तो दुआ की जाए:

«بِسْمِ اللّٰهِ وَعَلَىٰ مِلَّةِ رَسُولِ اللّٰهِ ﷺ»

तर्जुमा: “अल्लाह के नाम से और अल्लाह के रसूल ﷺ की मिल्लत पर।”

क़ब्र में रखने के बाद मरहूम के लिए मग़फ़िरत, साबित-क़दमी और रहमत की दुआ की जाए:

ऐ अल्लाह! हमारे इस मरहूम बंदे को माफ़ फ़रमा, उस पर रहम फ़रमा, उसकी क़ब्र को रोशन और कुशादा फ़रमा, उसे सवालात-ए-क़ब्र में साबित-क़दम रख और उसकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे।

मिट्टी देते वक़्त

क़ब्र पर मिट्टी डालते हुए यह आयत पढ़ी जाती है:

«مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ»

तर्जुमा: “हमने तुम्हें इसी मिट्टी से पैदा किया, इसी में तुम्हें वापस लौटाएँगे और इसी से दोबारा तुम्हें निकालेंगे।”

मिट्टी देने के बाद तमाम हज़रात मरहूम के लिए दिल से दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और उनके दर्जात की बुलंदी की दुआ करें।

मरहूम के लिए ख़ास दुआ

या अल्लाह! हाजी अब्दुल गफ़ूर साहब की मग़फ़िरत फ़रमा। उनकी तमाम ख़ताओं, गुनाहों और कोताहियों को अपने फ़ज़्ल-ओ-करम से माफ़ फ़रमा। उनके दरजात बुलंद फ़रमा। उनकी क़ब्र को नूर से भर दे, उसे वसीअ और रौशन फ़रमा। क़ब्र की तन्हाई को अपनी रहमत से दूर फ़रमा। उन्हें सवालात-ए-क़ब्र में कामयाबी अता फ़रमा। उनके लिए जन्नत के दरवाज़े खोल दे और उन्हें जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमा।

या रब्बुल आलमीन! उनके नेक आमाल को क़ुबूल फ़रमा, उनकी लग़ज़िशों से दरगुज़र फ़रमा और उन्हें अपने महबूब हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ की शफ़ाअत नसीब फ़रमा।

ऐ अल्लाह! मरहूम के तमाम सोगवारों, अहले-ख़ानदान, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और दोस्त-अहबाब को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा। इस सदमे को उनके लिए सब्र और अज्र का ज़रिया बना।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

राब्ता बराए मज़ीद मालूमात

मैय्यत के सिलसिले में और अधिक जानकारी के लिए मरहूम के रिश्तेदारों से इन नंबरों पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है:

📞 9988178695
📞 9411907263
📞 9356520013


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“मुल्तानी समाज”

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एक और शख़्सियत मिट्टी की आग़ोश में जा सोई, रशीद अहमद साहब के इंतिक़ाल पर बिरादरी में रंज-ओ-ग़म की लहर

ख़बर-ए-इंतिक़ाल — जामा मस्जिद, दिल्ली
17 सितंबर 2026

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और बेइंतिहा अफ़सोस के साथ तमाम अहले-इस्लाम, मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात तक यह दिलगुदाज़ ख़बर पहुँचाई जाती है कि आज दिन जुमेरात, बा-तारीख़ 17 सितंबर 2026, दोपहर तक़रीबन 2 बजे, जामा मस्जिद, दिल्ली-110006 के रहने वाले जनाब रशीद अहमद साहब वल्द नामा'लूम, मूल रूप से जलालाबाद, ज़िला शामली, उत्तर प्रदेश का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम के इंतिक़ाल की ख़बर से उनके अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादरान-ए-मिल्लत में गहरे रंज-ओ-ग़म की फ़िज़ा है। मौत एक ऐसी हक़ीक़त है जिससे किसी इंसान को फ़रार नहीं, और हर जान को एक न एक दिन अपने रब की तरफ़ लौटकर जाना है।

इस दुख की घड़ी में "मुल्तानी समाज" अपने तमाम बिरादराना हज़रात से पुरख़ुलूस गुज़ारिश करता है कि मरहूम को अपनी ख़ास दुआओं में याद रखें और उनके लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें।

दुआ-ए-मग़फ़िरत

ऐ अल्लाह! जनाब रशीद अहमद साहब की मग़फ़िरत फ़रमा, उनकी ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फ़रमा, उनकी तमाम नेकियों को अपनी बारगाह में क़ुबूल फ़रमा।

या अल्लाह! उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा, उसे कुशादा और आराम की जगह बना, क़ब्र की तन्हाई में उनका मददगार और हाफ़िज़ बन।

ऐ रब-ए-करीम! मरहूम को जन्नतुल-फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा और उन्हें अपने ख़ास रहमत व करम के साये में जगह अता फ़रमा।

मय्यत को बाद नमाज़ ईशा साढ़े 8 बजे दिल्ली गेट स्थित कब्रिस्तान में किया जायगा सपूर्दे ख़ाक, लिहाज़ा आप हज़रात भी जनाज़े में शरीक होकर सवाबे दारेन हासिल करें।।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

दफ़्न और सुपुर्द-ए-ख़ाक के मौक़े पर दुआ

जब मरहूम को क़ब्र में उतारा जाए तो तमाम अहले-ख़ाना और मौजूद हज़रात दिल से उनके लिए दुआ करें:

"ऐ अल्लाह! इन्हें अपनी रहमत में जगह अता फ़रमा, इनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे, इन्हें क़ब्र के अज़ाब से महफ़ूज़ फ़रमा और इनके लिए आख़िरत के सफ़र को आसान फ़रमा।"

मिट्टी देते वक़्त दिल में यह एहसास रहे कि आज हम एक अपने भाई को मिट्टी के सुपुर्द कर रहे हैं और कल हमें भी इसी सफ़र पर रवाना होना है। मरहूम के लिए सूरह-ए-फ़ातिहा, सूरह-ए-इख़लास और दुआ-ए-मग़फ़िरत का एहतिमाम किया जाए।

अल्लाह तआला तमाम अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और दोस्तों को इस सदमे को बर्दाश्त करने के लिए सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए और उन्हें इस मुश्किल घड़ी में अपनी रहमत व मदद से नवाज़े।

आमीन सुम्मा आमीन।

मज़ीद मालूमात के लिए

मरहूम के बेटे जनाब नशीर अहमद साहब से इस मोबाइल नंबर पर राब्ता कायम किया जा सकता है:

📞 9810693637


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"मुल्तानी समाज"

अपनी बिरादरी की आवाज़ — अपनी पहचान

तुगाना निवासी अली हसन साहब की अहलिया हाज़रा बी का इंतकाल — पुरनम माहौल में हुई रुख़्सती, इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

बड़ौत/तुगाना (बागपत)।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि आज दिन जुमेरात, बा-तारीख़ 17 सितंबर 2026 को गांव तुगाना, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश के निवासी और हाल निवासी पॉलिटेक्निकल कॉलेज के पास, बड़ौत, जिला बागपत जनाब अली हसन साहब वल्द जनाब हकीमुद्दीन साहब की अहलिया हाज़रा बी, उम्र तक़रीबन 59 साल, का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया।

मरहूमा का मायका गांव बाजितपुर, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश बताया गया है। उनके इंतकाल की ख़बर जैसे ही बिरादराना हज़रात, रिश्तेदारों और अहबाब तक पहुंची, हर तरफ़ ग़म और उदासी की फ़िज़ा छा गई। मरहूमा के इंतकाल से उनके घर-परिवार, रिश्तेदारों और जानने वालों को गहरा सदमा पहुंचा है।

मिली जानकारी के मुताबिक़ मरहूमा को आज बाद नमाज़-ए-मग़रिब सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फ़रमाकर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और उनके अहले-ख़ाना के ग़म में शरीक हों।

दफ़्न के मौक़े पर दुआ

जब मरहूमा को क़ब्र में उतारा जाए तो तमाम हज़रात उनके लिए मग़फ़िरत और रहमत की दुआ करें—

اللّٰهُمَّ اغْفِرْ لَهَا وَارْحَمْهَا، وَعَافِهَا وَاعْفُ عَنْهَا، وَأَكْرِمْ نُزُلَهَا، وَوَسِّعْ مُدْخَلَهَا

तर्जुमा:
“ऐ अल्लाह! इनकी मग़फ़िरत फ़रमा, इन पर रहम फ़रमा, इन्हें आफ़ियत अता फ़रमा, इनसे दरगुज़र फ़रमा, इनकी मेहमाननवाज़ी को इज़्ज़त वाली बना और इनकी क़ब्र को कुशादा फ़रमा।”

क़ब्र में उतारते वक़्त पढ़ा जाए:

بِسْمِ اللّٰهِ وَعَلَىٰ مِلَّةِ رَسُولِ اللّٰهِ ﷺ

और मिट्टी देते हुए दिल से यह दुआ की जाए:

اللّٰهُمَّ اجْعَلْ قَبْرَهَا رَوْضَةً مِنْ رِيَاضِ الْجَنَّةِ، وَلَا تَجْعَلْهَا حُفْرَةً مِنْ حُفَرِ النَّارِ۔

तर्जुमा:
“ऐ अल्लाह! इनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे और इसे जहन्नम के गड्ढों में से कोई गड्ढा न बना।”

मिट्टी देने के बाद मरहूमा के लिए ईमान की सलामती, मग़फ़िरत, रहमत, क़ब्र के सवालात में आसानी और जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम की दुआ की जाए।

अल्लाह तआला मरहूमा हाज़रा बी की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमाए, क़ब्र के तमाम मराहिल आसान फ़रमाए, उन्हें अपनी रहमत के साये में जगह अता फ़रमाए और जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम नसीब फ़रमाए।

अल्लाह पाक तमाम अहले-ख़ाना, रिश्तेदारों और अहबाब को इस सदमे पर सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए और मरहूमा के लिए सदक़ा-ए-जारीया बनने वाले नेक आमाल की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

राब्ता

मय्यत के सिलसिले में मज़ीद मालूमात के लिए उनके बेटे जनाब मोहम्मद साहब के मोबाइल नंबर 8077384268 पर राब्ता क़ायम करके पूरी जानकारी हासिल की जा सकती है।


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Wednesday, September 16, 2026

मोहम्मद उस्मान साहब के इंतक़ाल से बिरादराने-मुल्तानी में ग़म की लहर, अहले-ख़ाना से ताज़ियत और सब्र की अपील, इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

नई दिल्ली/यमुना विहार, 17 सितंबर 2026।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिली अफ़सोस के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि आज दिन जुमेरात, बा-तारीख़ 17 सितंबर 2026 को जनाब मोहम्मद उस्मान साहब, वल्द जनाब मोहम्मद अय्यूब साहब मरहूम, मूल निवासी क़स्बा सियाना, ज़िला बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश, हाल निवासी मकान नंबर - सी - 12/334, यमुना विहार, नई दिल्ली - 110053, का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतक़ाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मोहम्मद उस्मान साहब के इंतक़ाल की ख़बर से उनके अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, दोस्त-अहबाब और मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी में गहरे रंज और सदमे की लहर दौड़ गई है। मरहूम की जुदाई उनके घराने और तमाम जानने वालों के लिए एक ऐसा सदमा है जिसकी भरपाई आसान नहीं।

इस मौक़े पर "मुल्तानी समाज" की पूरी टीम और बिरादराने-मुल्तानी की जानिब से मरहूम के तमाम अहले-ख़ाना, रिश्तेदारों और अज़ीज़ों की ख़िदमत में दिली ताज़ियत पेश की जाती है।

हम बारगाह-ए-इलाही में दस्त-ब-दुआ हैं कि अल्लाह तआला मरहूम मोहम्मद उस्मान साहब की मग़फ़िरत फरमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फरमाए, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फरमाए, क़ब्र की मंज़िलों को आसान फरमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला से आला मुक़ाम अता फरमाए।

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त तमाम पसमान्दगान को सब्र-ए-जमील अता फरमाए और इस सदमे को बर्दाश्त करने की ताक़त दे।

आमीन सुम्मा आमीन।

नमाज़-ए-जनाज़ा और दफ़िने की जानकारी

मरहूम के दफ़िने और नमाज़-ए-जनाज़ा का वक़्त बाद नमाज़ असर 

तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि नमाज़-ए-जनाज़ा में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और सवाब-ए-दारैन हासिल करें।

अल्लाह तआला मरहूम को अपनी रहमत के साए में जगह अता फरमाए। आमीन।


"मुल्तानी समाज" — बिरादरी की आवाज़, बिरादरी की पहचान

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

अपनी ख़बर क़ौमी सतह तक पहुँचाएँ

अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार (विज्ञापन) क़ौमी सतह पर शाया (प्रकाशित) या प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो बराए मेहरबानी नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।

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सरधना में बानो बी का इंतिक़ाल — अहले बिरादरी में ग़म की लहर, आज सुबह 10 बजे होगी नमाज़-ए-जनाज़ा व तदफ़ीन, इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

सरधना (जिला मेरठ), 17 सितंबर 2026।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और बेइंतहा अफ़सोस के साथ तमाम अहले-मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि क़स्बा सरधना, जिला मेरठ, उत्तर प्रदेश में जनाब नसीमुद्दीन साहब, मरहूम गाँव भमौरी वालों की अहलिया बानो बी का कल दिन बुध, 16 सितंबर 2026 को क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल फ़रमा जाना बिरादरी के लिए बेहद दुख और सदमे का सबब है।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूमा के इंतिक़ाल की ख़बर से अहले-ख़ानदान, रिश्तेदारों, अज़ीज़ों और बिरादराना हज़रात में ग़म की फ़िज़ा है। एक इंसान का इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत हो जाना यक़ीनन बेहद दर्दनाक लम्हा होता है। मगर मोमिन का यक़ीन है कि हर जान को मौत का मज़ा चखना है और असल ज़िंदगी आख़िरत की ज़िंदगी है।

नमाज़-ए-जनाज़ा व तदफ़ीन

मरहूमा बानो बी की नमाज़-ए-जनाज़ा व तदफ़ीन आज दिन जुमेरात, 17 सितंबर 2026 को सुबह 10:00 बजे क़स्बा सरधना, जिला मेरठ, उत्तर प्रदेश में होगी।

तमाम अहले-बिरादरी और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फ़रमाकर मरहूमा के लिए मग़फ़िरत की दुआ करें और ग़मज़दा ख़ानदान के साथ इस मुश्किल वक़्त में शरीक-ए-ग़म हों।

मग़फ़िरत और तदफ़ीन के वक़्त की दुआ

अल्लाह तआला मरहूमा की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फ़रमाए, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमाए, उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे, क़ब्र की तंगी और अज़ाब से महफ़ूज़ फ़रमाए और उन्हें अपनी रहमत के साये में जगह अता फ़रमाए।

या अल्लाह! जब मरहूमा को मिट्टी के सुपुर्द किया जाए तो अपनी ख़ास रहमत नाज़िल फ़रमा। उनकी क़ब्र को कुशादा, रोशन और पुर-सुकून फ़रमा। उन्हें सवालात-ए-क़ब्र में कामयाबी अता फ़रमा और उन्हें जन्नतुल-फ़िरदौस में आला मक़ाम नसीब फ़रमा।

या रब्बुल आलमीन! मरहूमा की कब्र पर अपनी रहमतों की बारिश फ़रमा, उनके दर्जात बुलंद फ़रमा और उन्हें हज़रत मुहम्मद ﷺ की शफ़ाअत नसीब फ़रमा।

अल्लाह तआला तमाम पसमांदगान, अहले-ख़ाना और रिश्तेदारों को इस सदमे पर सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए, दिलों को सब्र और सुकून दे तथा मरहूमा के लिए सदक़ा-ए-जारीया और नेकियों का ज़रिया बनने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

तमाम अहले-बिरादरी से ख़ास गुज़ारिश

तमाम बिरादराना हज़रात से दरख़्वास्त है कि मरहूमा के लिए ख़ुलूस-ए-दिल से दुआ-ए-मग़फ़िरत करें। अगर मुमकिन हो तो उनके ईसाल-ए-सवाब के लिए सूरह-ए-फ़ातिहा, सूरह-ए-इख़लास और क़ुरआन-ए-पाक की तिलावत करके उसका सवाब मरहूमा को पहुँचाएँ।

अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फ़िरत फ़रमाए और उन्हें जन्नतुल-फ़िरदौस में आला से आला मक़ाम अता फ़रमाए।

आमीन सुम्मा आमीन।


ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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जनाब सलीम मिर्ज़ा ‘ड्राइवर साहब’ का इंतिक़ाल — कल सुबह 7 बजे होगी नमाज़-ए-जनाज़ा, उसके बाद सुपुर्द-ए-ख़ाक, इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

ग़मगीन ख़बर | गढ़ी पुख़्ता, ज़िला शामली, उत्तर प्रदेश

निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि चक्की राहों वाली गली, मोहल्ला कश्यपपुरी, क़स्बा गढ़ी पुख़्ता, ज़िला शामली, उत्तर प्रदेश निवासी जनाब सलीम मिर्ज़ा साहब ‘ड्राइवर’, वल्दियत जनाब बशीर अहमद साहब मरहूम, उम्र तक़रीबन 65 साल, का आज बरोज बुध, बा - तारीख़ 16 सितंबर 2026 को शाम तकरीबन 4:30 बजे पास के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज के दौरान क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

मरहूम, वसीम ड्राइवर साहब के वालिद-ए-मुहतरम थे। उनके इंतिक़ाल की ख़बर से खानदान, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादराना हज़रात में ग़म की लहर दौड़ गई है। हर आंख अश्कबार और हर दिल सदमे में है।

नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन

मय्यत की नमाज़-ए-जनाज़ा कल बरोज जुमेरात, बा - तारीख़ 17 सितंबर 2026 को सुबह 7:00 बजे अदा की जाएगी, जिसके बाद मरहूम को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फ़रमाकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और अहले-ख़ाना के ग़म में शरीक हों।

मय्यत को कब्र में उतारते और मिट्टी देते वक़्त

मुसलमान के लिए जनाज़े में शिरकत, मय्यत को कंधा देना, दफ़्न में हिस्सा लेना और उसके लिए दुआ करना बड़ी नेकी का काम है। मय्यत को कब्र में उतारते समय यह दुआ पढ़ी जा सकती है:

بِسْمِ اللّٰهِ وَعَلَىٰ مِلَّةِ رَسُولِ اللّٰهِ ﷺ

“बिस्मिल्लाहि व अला मिल्लति रसूलिल्लाह ﷺ”

अर्थ: “अल्लाह के नाम के साथ और रसूलुल्लाह ﷺ के दीन व तरीक़े पर।”

कब्र में मय्यत को रखने के बाद उसके लिए मग़फ़िरत, रहमत और साबित-क़दमी की दुआ की जाए। मिट्टी देते समय कोई ख़ास लाज़िमी दुआ मुक़र्रर नहीं है; अलबत्ता आम दुआ और इस्तिग़फ़ार करना बेहतर है।

मिट्टी देते समय यह आयत पढ़ी जा सकती है:

مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ

“इसी मिट्टी से हमने तुम्हें पैदा किया, इसी में तुम्हें लौटाएंगे और इसी से दोबारा तुम्हें निकालेंगे।”

इसके बाद मरहूम के लिए दिल से दुआ करें:

اَللّٰهُمَّ اغْفِرْ لَهٗ وَارْحَمْهٗ، وَعَافِهٖ وَاعْفُ عَنْهٗ، وَأَكْرِمْ نُزُلَهٗ، وَوَسِّعْ مُدْخَلَهٗ۔

“ऐ अल्लाह! मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमा, उन पर रहमत फ़रमा, उन्हें आफ़ियत अता फ़रमा, उनसे दरगुज़र फ़रमा, उनकी मेहमाननवाज़ी फ़रमा और उनकी क़ब्र को कुशादा फ़रमा।”

कब्र पर मिट्टी देने के बाद यह दुआ भी की जाए:

اَللّٰهُمَّ ثَبِّتْهُ عِنْدَ السُّؤَالِ، وَاغْفِرْ لَهٗ وَارْحَمْهٗ، وَاجْعَلْ قَبْرَهٗ رَوْضَةً مِّنْ رِّيَاضِ الْجَنَّةِ۔

“ऐ अल्लाह! सवाल के वक़्त उन्हें साबित-क़दम रखना, उनकी मग़फ़िरत फ़रमा, उन पर रहमत फ़रमा और उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे।”

दुआ-ए-मग़फ़िरत

या अल्लाह! जनाब सलीम मिर्ज़ा साहब की पूरी मग़फ़िरत फ़रमा। उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों से दरगुज़र फ़रमा। उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा, उसे कुशादा और आरामगाह बना दे। उन्हें सवाल-ए-क़ब्र में आसानी अता फ़रमा, दर्जात बुलंद फ़रमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा।

या रब्बुल आलमीन! अहले-ख़ाना, औलाद, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और तमाम मुतअस्सिर हज़रात को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा। इस सदमे को बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ दे और मरहूम के लिए की गई तमाम दुआओं को क़ुबूल फ़रमा।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

तमाम हज़रात से अपील है कि मरहूम के लिए एक बार सूरह-ए-फ़ातिहा और सूरह-ए-इख़लास पढ़कर दुआ-ए-मग़फ़िरत ज़रूर फ़रमाएँ।


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