रिश्तों में दिखावा नहीं, मोहब्बत और अदब को तरजीह—लारेब ज़मीर और जवेरिया की सगाई ने पेश की सादगी भरी रस्म की नई मिसाल
नई दिल्ली/सहारनपुर।
आज के दौर में जब शादी-ब्याह और रिश्तों की खुशियों को बड़े-बड़े जलसों, सैकड़ों मेहमानों और बेपनाह खर्च के साथ मनाने का चलन आम होता जा रहा है, वहीं “मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट (रजि.) ऑल इंडिया” के फाऊंडर एवं “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के प्रधान-संपादक ज़मीर आलम ने अपने फरजंद की सगाई की रस्म को बेहद सादगी और ख़ुशअख़लाक़ी के साथ अंजाम देकर एक ख़ूबसूरत मिसाल कायम की है।
पैदाइशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की देश की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी तंजीम के फाउंडर ज़मीर आलम की इस सादगी की बिरादरी के लोगों ने जमकर सराहना की है। लोगों का कहना है कि आज जब छोटी-सी खुशी को भी बड़ा आयोजन बनाने की होड़ लगी हुई है, ऐसे में सिर्फ़ पाँच लोगों के साथ रिश्ता लेकर जाना सादगी, दिली सुकून और रिश्तों की असल खूबसूरती का पैग़ाम देता है।
मुंहज़बानी तय हुआ रिश्ता, दिलों में पैदा हुई मोहब्बत
मिली जानकारी के मुताबिक, ज़मीर आलम ने अपने बड़े फरजंद लारेब ज़मीर का रिश्ता लिंक रोड, सहारनपुर, उत्तर प्रदेश निवासी जनाब मोहम्मद राशिद साहब की बेटी जवेरिया के साथ तय किया है।
बताया जाता है कि यह रिश्ता किसी दिखावे या शो - बाजी या किसी होड़ समारोह के बजाय मुंहज़बानी बातचीत और आपसी रज़ामंदी से तय हुआ। दोनों फैमिली के बीच रिश्ते को लेकर मोहब्बत और एतमाद का माहौल बना और बात निकाह की तरफ़ आगे बढ़ी।
हालांकि लड़की पक्ष की ख़्वाहिश थी कि ज़मीर आलम अपने पूरे ख़ानदान, रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ सहारनपुर आएँ, ताकि शुरुआती रस्म अदायगी बाकायदा पूरे कुनबे की मौजूदगी में हो और अपनी होने वाली बहू के सिर पर हाथ रखकर उसे दुआओं से नवाज़ें।
“हम आपकी बेटी को लेने नहीं, दुआ देने आएँगे”
ज़मीर आलम का कहना था कि किसी भी रिश्ते की शुरुआत बोझ, दिखावे या गैर-ज़रूरी खर्च से नहीं होनी चाहिए। वह नहीं चाहते थे कि लड़की पक्ष पर किसी तरह का बे - फ़िज़ूल दबाव या खर्च आए।
काफी मान-मनौव्वल के बाद जब ज़मीर आलम लड़की पक्ष की ख़्वाहिश का एहतराम करने के लिए राज़ी हुए तो उन्होंने साफ़ अल्फ़ाज़ में कहा कि—
“आप जब कहेंगे, हम आपकी बेटी के सिर पर हाथ रखकर उसे अपनी होने वाली बहू के रूप में दुआओं से नवाज़ने ज़रूर आएँगे, लेकिन हमारी तरफ़ से सिर्फ़ पाँच लोग ही आएँगे।”
ज़मीर आलम की इस बात में जहाँ सादगी और ख़ुद्दारी दिखाई दी, वहीं लड़की पक्ष की इज़्ज़त और जज़्बात का भी पूरा ख़याल रखा गया।
आख़िरकार लड़की के बड़े अब्बू जनाब मोहम्मद नौशाद साहब ने उनकी इस सादगी भरी बात को क़ुबूल किया और दोनों फैमिली की रज़ामंदी से दिन शनिचर, बा - तारीख़ 05 सितंबर 2026 की शाम का समय तय किया गया।
महफ़िल छोटी, मगर दुआएँ बड़ी
बेफिजूल सगाई की यह रस्म भले ही मेहमानों की तादाद के लिहाज़ से छोटी रही, लेकिन इसकी ख़ूबसूरती इसी सादगी में नज़र आई। महज़ पाँच लोगों की मौजूदगी में होने वाली यह रस्म इस बात का पैग़ाम देती है कि रिश्तों की मज़बूती मेहमानों की तादाद, खाने की variedad या सजावट से नहीं, बल्कि दिलों की मोहब्बत और नीयत की पाकीज़गी से होती है।
ज़मीर आलम की कोशिश को बिरादरी के लोगों ने इसलिए भी पसंद किया कि उन्होंने एक ऐसे दौर में, जब शादी-ब्याह में गैर-ज़रूरी खर्च और दिखावे का चलन बढ़ता जा रहा है, सादगी को तरजीह देकर एक बेहतरीन सामाजिक मैसेज देने की कोशिश की है।
बिरादरी के लोगों का कहना है कि अगर खुशियों की रस्मों को इसी तरह सादगी, मोहब्बत और आपसी सम्मान के साथ अंजाम दिया जाए तो इससे न केवल परिवारों पर आर्थिक बोझ कम होगा बल्कि रिश्तों में भी बरकत और अपनापन बढ़ेगा।
बिरादरी के लिए एक ख़ूबसूरत पैग़ाम
ज़मीर आलम की यह पहल महज़ उनके परिवार की खुशी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे बिरादरी के लिए एक सामाजिक मैसेज के तौर पर भी देखा जा रहा है।
“सादगी अपनाइए, रिश्ते निभाइए और खुशियों को बोझ मत बनाइए”— यही इस पूरे वाक़िये का सबसे ख़ूबसूरत पैग़ाम कहा जा सकता है।
अल्लाह तआला लारेब ज़मीर और जवेरिया की जोड़ी को हमेशा सलामत रखे, दोनों के दरमियान मोहब्बत, उल्फ़त, एतमाद और इज़्ज़त कायम रखे, उनके आने वाले वैवाहिक जीवन में ख़ुशियाँ, सुकून और बरकत अता फ़रमाए तथा दोनों ख़ानदानों के बीच मोहब्बत के रिश्ते को और मज़बूत करे।
आमीन या रब्बुल आलमीन।
प्रधान संपादक की ख़ास रिपोर्ट
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदाइशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से पत्रकार अज़हर खान की ख़ास रिपोर्ट।
अपनी ख़बर हमें भेजें
अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार (विज्ञापन) क़ौमी सतह पर शाया (प्रकाशित) या प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो बराए मेहरबानी नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।
📞 9410652990
📞 8010884848
आपका एतमाद ही हमारी सबसे बड़ी ताक़त है।
“मुल्तानी समाज”
अपनी बिरादरी की आवाज़ — अपनी पहचान