देवबंद निवासी जनाब अब्दुल सलाम साहब की बहन, नोशरा साहिबा एक मशहूर-ओ-मारूफ शख्सियत के तौर पर जानी जाती हैं। उनकी ज़िंदगी अपने आप में सब्र, हिम्मत और जिम्मेदारियों को निभाने की एक मिसाल रही है। उनका निकाह थाना भवन के प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखने वाले, मुश्ताक साहब (ट्रैक्टर वालों) के छोटे भाई जनाब हारून अली साहब से हुआ था। निकाह के बाद वह लिलौन में अपने ससुराल में ससुर साहब के साथ बेहद सुकून और इज़्ज़त के साथ रह रही थीं।
🌿 जिंदगी के इम्तिहान और हिम्मत की मिसाल
वक्त ने करवट ली और ससुर साहब के साथ-साथ उनके शौहर हारून अली साहब का इंतकाल हो गया। यह दौर उनके लिए बेहद दर्दनाक रहा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। पहले देवबंद और फिर रुड़की मुन्तक़िल होकर उन्होंने अपनी जिंदगी को नए सिरे से संभाला और आगे बढ़ाया।👩👧 बेटी की परवरिश और बेहतर परवरिश का नतीजा
नोशरा साहिबा ने अपनी बेटी शीबा की परवरिश बेहद अच्छे संस्कारों और तालीम के साथ की। उनकी मेहनत और परवरिश का ही नतीजा रहा कि शीबा एक नेक और सलीकेदार शख्सियत के रूप में सामने आईं।💍 मुबारक निकाह: एक खुशनुमा मौका
आखिरकार वह खुशनुमा घड़ी आई जब शीबा का निकाह सहारनपुर के सम्मानित परिवार से ताल्लुक रखने वाले जनाब मुस्तफा कमाल साहब के साथ तय हुआ। यह मुबारक निकाह सहारनपुर के मशहूर न्यू हैदराबाद पैलेस, 62 फुटा रोड पर बड़े ही शानदार और सादगी भरे अंदाज़ में अदा किया गया। नोशरा साहिबा रुड़की से सहारनपुर पहुंचीं और पूरे परिवार के साथ इस खुशी के मौके में शरीक हुईं।🤝 बिरादरी की खास शिरकत
इस शादी में मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट के पूर्व राष्ट्रीय चेयरमैन जनाब मोहम्मद आलम साहब समेत बिरादरी के कई मशहूर और कोहिनूर शख्सियतों ने शिरकत की और दूल्हा-दुल्हन को अपनी दुआओं से नवाज़ा।🕊️ दुआओं और खुशियों से भरा समां
निकाह की रस्में बेहद खुशनुमा माहौल में अदा की गईं, जहां बारात का स्वागत, निकाह मस्नून, दावत और रुखसती—हर लम्हा यादगार बन गया। यह शादी सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि दो परिवारों के बीच मोहब्बत और रिश्तों की एक नई शुरुआत भी थी।✨ एक प्रेरणादायक कहानी
नोशरा साहिबा की जिंदगी यह साबित करती है कि मुश्किल हालात में भी अगर इंसान सब्र और हिम्मत से काम ले, तो वह अपने बच्चों के लिए बेहतर मुकाम बना सकता है।📢 ख़ास सूचना:
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