Wednesday, March 11, 2026

साहित्य की दुनिया में बढ़ा सरधना का मान: डॉ. फुरकान अहमद सरधनवी “मेरठ रत्न” सम्मान से नवाज़े गए

मेरठ। ऑल इंडिया कॉन्फ्रेंस ऑफ इंटेलेक्चुअल (AICOI) के तत्वावधान में रविवार को शांति निकेतन विद्यापीठ, मेरठ में एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में शिक्षा, साहित्य और समाज सेवा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रतिभाशाली व्यक्तियों को सम्मानित किया गया।

इसी अवसर पर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले सरधना (जिला मेरठ, उत्तर प्रदेश) के प्रसिद्ध लेखक, शायर एवं साहित्यकार डॉ. फुरकान अहमद सरधनवी को साहित्य और कविता के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए “मेरठ रत्न” अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता ऑल इंडिया कॉन्फ्रेंस ऑफ इंटेलेक्चुअल के महासचिव प्रकाश निधि शर्मा ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में लोक अदालत, नैनीताल हाईकोर्ट के जज जस्टिस राजेश टंडन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के संयोजक प्रकाश निधि शर्मा, सह संयोजक अनुश्री तथा शांति निकेतन विद्यापीठ के डायरेक्टर विशाल जैन ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लगभग दस प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह, मेडल, शॉल ओढ़ाकर तथा पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया।

डॉ. फुरकान अहमद सरधनवी को मिला यह सम्मान न केवल उनकी साहित्यिक साधना की पहचान है, बल्कि इससे सरधना और मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी का नाम भी पूरे प्रदेश में गौरवान्वित हुआ है। उनकी लेखनी लंबे समय से समाज, साहित्य और संस्कृति के विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती रही है, जिससे नई पीढ़ी को भी प्रेरणा मिलती है।

मुल्तानी समाज” न्यूज़ परिवार की ओर से डॉ. फुरकान अहमद सरधनवी को इस सम्मान के लिए दिली मुबारकबाद दी गई है। साथ ही अल्लाह तआला से दुआ की गई है कि वे इसी तरह अपनी काबिलियत और इल्मी खिदमत के जरिए अपने कस्बे, बिरादरी और पूरे देश का नाम रोशन करते रहें।


रिपोर्ट: ज़मीर आलम, पत्रकार
सरधना, जिला मेरठ (उत्तर प्रदेश)

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत तथा देश की राजधानी दिल्ली से संचालित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की राष्ट्रीय समाचार पत्रिका / न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए विशेष रिपोर्ट।

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खतौली में शोक की लहर: हाजी मोबीन साहब की वालिदा का इंतकाल, बिरादरी में गहरा ग़म

क़स्बा खतौली, जिला मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) से एक निहायत ही अफ़सोसनाक और रंज-ओ-ग़म की ख़बर सामने आई है। मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले हाजी मोबीन साहब (गांव राडधने वालों) की मोहतरमा वालिदा का आज बुधवार, 11 मार्च 2026 को असर की नमाज़ के बाद तक़रीबन शाम 5:30 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतक़ाल हो गया।

इस दुखद खबर के बाद परिवार, रिश्तेदारों और पूरी बिरादरी में गहरा ग़म और शोक का माहौल है। मरहूमा के इंतक़ाल की खबर सुनते ही आसपास के इलाकों और बिरादरी के लोगों ने घर पहुंचकर परिजनों से ताज़ियत का इज़हार किया और मरहूमा के लिए मग़फिरत की दुआएँ कीं।

बताया गया है कि मरहूमा की नमाज़-ए-जनाज़ा आज रात लगभग 11 बजे अदा की जाएगी, इंशाअल्लाह। बिरादरी के तमाम अहबाब और इलाक़े के लोगों से गुज़ारिश की गई है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फिरत करें और इस मुश्किल घड़ी में परिवार के साथ हमदर्दी और ताज़ियत का इज़हार करें।

अल्लाह तआला से दुआ है कि वह मरहूमा की मग़फिरत फरमाए, उनकी क़ब्र को रौशन और वसीअ फरमाए, जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फरमाए और तमाम घरवालों को इस सदमे को बर्दाश्त करने के लिए सब्र-ए-जमील अता फरमाए।
आमीन।


रिपोर्ट: ज़मीर आलम, पत्रकार
खतौली, जिला मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश)

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Tuesday, March 10, 2026

कुरान खत्म शरीफ की मुकद्दस महफ़िल में दुआओं का सिलसिला, हाजी बाबा ने मिठाई और चाय से किया लोगों का इस्तकबाल


नई दिल्ली / विशेष रिपोर्ट:

हाल ही में आयोजित एक रूहानी और बरकत भरी महफ़िल में कुरान खत्म शरीफ के मुकद्दस मौके पर सामूहिक दुआ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मौजूद लोगों के चेहरों पर खुशी और सुकून साफ झलक रहा था। कार्यक्रम में लोगों ने मिलकर कुरान शरीफ की तिलावत के बाद अल्लाह की बारगाह में दुआएँ मांगीं।

इस मौके पर हाजी बाबा ने पूरे अदब और मेहमाननवाज़ी के साथ उपस्थित लोगों का स्वागत किया। कार्यक्रम के बाद उन्होंने सभी लोगों को मिठाई, चाय और मट्ठी पेश की और महफ़िल में शामिल होने वाले लोगों का सम्मान भी किया। इस दौरान माहौल में भाईचारे, मोहब्बत और आपसी एकजुटता की झलक देखने को मिली।

दुआ के दौरान अल्लाह तआला से उन तमाम लोगों के लिए मगफिरत की दुआ की गई जो इस दुनिया से रुखसत हो चुके हैं। साथ ही मौजूद लोगों के रोज़गार, कारोबार और खुशहाली के लिए भी दुआएँ की गईं।

इस रूहानी महफ़िल में मुल्क की अमन-ओ-सलामती और तरक्की के लिए भी खास तौर पर दुआ की गई। इसके अलावा मिर्जा मुल्तानी लोहार बिरादरी की भलाई, एकता और तरक्की के लिए भी अल्लाह की बारगाह में दुआ मांगी गई।

कार्यक्रम का माहौल बेहद सादगी, मोहब्बत और आध्यात्मिकता से भरपूर रहा, जहाँ लोगों ने मिलकर दुआओं के जरिए इंसानियत, भाईचारे और आपसी सहयोग का संदेश दिया।


(नई दिल्ली डेस्क से पत्रकार ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट)

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Sunday, March 8, 2026

नीमच में भट्टी खानदान की खुशियों भरी दस्तक — मंतशा नूर और मोहम्मद फैजान का निकाह 24 अप्रैल को

मध्यप्रदेश के नीमच शहर में भट्टी खानदान के घर खुशियों की रौनक सजने जा रही है। अल्लाह तआला के फज़्लो करम और सरकारे दो आलम हज़रत मोहम्मद मुस्तफा ﷺ के सदके-तुफैल भट्टी परिवार में एक मुबारक मौके का ऐलान किया गया है। खानदान और बिरादरी में खुशी और मुहब्बत के माहौल के साथ यह जानकारी साझा की गई है कि एक पवित्र रिश्ते का आगाज़ होने जा रहा है।

मिली जानकारी के अनुसार मरहूम मोहम्मद सुलेमान साहब भट्टी की सडपोती, मरहूम मोहम्मद हसन साहब भट्टी की परपोती, मरहूम हाजी मोहम्मद यूसुफ साहब की पोती तथा जनाब अहमद हुसैन साहब भट्टी की साहिबजादी मंतशा नूर का निकाह तय किया गया है। यह निकाह भट्टी खानदान की पारंपरिक रस्मों और बिरादरी की मौजूदगी में संपन्न होगा।

दूल्हा मोहम्मद फैजान, हाजी अब्दुल समद साहब भट्टी (हाट वाले, नीमच) के सुपुत्र हैं। दोनों परिवारों ने इस रिश्ते को खुशी-खुशी मंजूरी देते हुए इसे एक नेक और मुबारक बंधन बताया है।

निकाह की रस्म 6 शव्वाल 1447 हिजरी, मुताबिक 24 अप्रैल 2026 (बरोज़ जुम्मा) को असर और मगरिब की नमाज़ के दरमियान अदा की जाएगी। यह मुबारक कार्यक्रम फ्रेंड्स कॉलोनी, कब्रिस्तान के पास, नीमच (मध्यप्रदेश) में आयोजित होगा, जहां खानदान, रिश्तेदारों और बिरादरी के जिम्मेदार लोग मौजूद रहेंगे।

परिवार की ओर से सभी अज़ीज़ो-अक़ारिब, दोस्तों और बिरादराने मुल्तानी से दरख्वास्त की गई है कि इस खुशी के मौके पर अपनी तशरीफ-आवरी से नवदंपति को दुआओं से नवाजें और इस नेक मौके की रौनक में शामिल होकर अपने प्यार और मुहब्बत का इज़हार करें।

आमद के मुंतज़िर और कार्यक्रम के इंतज़ाम में लगे बुजुर्गों और जिम्मेदारों में हाजी अब्दुल रशीद, मोहम्मद सादिक, हाजी मोहम्मद उस्मान, हाजी मोहम्मद हनीफ, अब्दुल रऊफ, मोहम्मद उमर, अब्दुल सलाम, हाजी अब्दुल सत्तार, अब्दुल सईद, मोहम्मद फारूख, अब्दुल जब्बार और मोहम्मद सलीम समेत अन्य जिम्मेदार शामिल हैं।

वहीं कार्यक्रम के मुकल्लिफीन में हाजी अब्दुल गफूर, मोहम्मद रफीक, हाजी मेहमूद हसन, अहमद हुसैन, अनवर हुसैन, गुलाम हुसैन, अल्ताफ हुसैन, उबैदुर रहमान, जाकिर हुसैन, मकबूल हुसैन, वाहिद हुसैन, नासिर हुसैन, मुजफ्फर हुसैन, मोहम्मद शाकिर, मोहम्मद वसीम, आबिद हुसैन, साजिद हुसैन, शाहिद हुसैन, मोहम्मद सलमान, मोहम्मद शाहरुख, मोहम्मद शहजाद, मोहम्मद समीर, मोहम्मद अली, मोहम्मद सोहेल और मोहम्मद जुबेर सहित कई लोग शामिल हैं।

परिवार की ओर से यह भी कहा गया है कि यह पवित्र निकाह सुन्नते रसूल ﷺ के मुताबिक सादगी और अदब के साथ अंजाम दिया जाएगा, जिसमें शामिल होकर दूल्हा-दुल्हन के लिए दुआ करना सबसे बड़ी खुशी और नेकी होगी।

(रिपोर्ट: अब्दुल क़ादिर मुल्तानी, नीमच, मध्यप्रदेश)
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Monday, March 2, 2026

मुल्तानी बिरादरी की मोअज्ज़ज़ बुज़ुर्ग हस्ती नूरजहां बी का इंतेकाल, इलाक़े में ग़म की लहर

इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन, अहले बिरादरी मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई समाज के लिए यह खबर निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ पेश की जा रही है कि बरोज पीर, तारीख़ 02 मार्च की बीती रात तकरीबन साढ़े 11 बजे मरहूमा नूरजहां बी (68 साल) अहलिया जनाब अनीस अहमद साहब वल्द जनाब अज़ीमुल्ला साहब (मरहूम), निवासी गढ़ी पुख्ता, ज़िला शामली (उ.प्र.), हाल बाशिंदे क़स्बा किच्छा, ज़िला उधमसिंह नगर (उत्तराखंड) का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया।

इस दर्दनाक खबर ने न सिर्फ उनके घर बल्कि पूरी बिरादरी को ग़मगीन कर दिया है।


🏡 जिंदगी का सफर

मरहूमा का मायका गांव जसोई, ज़िला मुजफ्फरनगर (उ.प्र.) में था। वह मरहूम जनाब रसीद साहब की बेटी थीं। उनके कोई भाई नहीं थे। उनकी दो बहनें—जरीना (जसोई) और हसीना (पानीपत)—अपनी-अपनी जगह आबाद हैं।

काफी अरसा पहले उनका परिवार क़स्बा बाजपुर, ज़िला उधमसिंह नगर (उत्तराखंड) में आकर बसा और बाद में किच्छा में मुक़ीम हो गया। अपनी सादगी, नेक अख़लाक़ और बिरादरी से गहरा ताल्लुक रखने वाली नूरजहां बी ने पूरी ज़िंदगी खामोशी और इख़लास के साथ गुज़ारी।


👨‍👩‍👧‍👦 पीछे रह गए अहल-ए-ख़ाना

मरहूमा अपने पीछे अपने शौहर जनाब अनीस अहमद साहब समेत तीन बेटे—

  • जनाब शहज़ाद साहब
  • जनाब अशरफ़ साहब
  • जनाब अरशद साहब

और दो बेटियां—

  • बड़ी बेटी सन्नो (आजाद चौक, शामली, उ.प्र.)
  • दूसरी बेटी शबनम (नजीबाबाद, बिजनौर, उ.प्र.)

को ग़मगीन छोड़ गई हैं।

घर का हर कोना आज उनकी याद में नम है। माँ का साया उठ जाना वह खालीपन है जिसे कोई भर नहीं सकता।


🕌 नमाज़-ए-जनाज़ा और सुपुर्द-ए-ख़ाक

मरहूमा को आज दिन मंगल, तारीख़ 03 मार्च 2026 को सुबह 10 बजे क़स्बा किच्छा, ज़िला उधमसिंह नगर (उत्तराखंड) में ही सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर सवाब-ए-दारेन हासिल करें और मरहूमा के लिए मग़फिरत की दुआ फरमाएं।

📞 मय्यत के सिलसिले में ज्यादा मालूमात के लिए मोहम्मद एहसान से मोबाइल नंबर 9756156658 पर राब्ता किया जा सकता है।


🤲 दुआ-ए-मग़फिरत

अल्लाह तआला मरहूमा नूरजहां बी की मग़फिरत फरमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए और घरवालों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।
आमीन या रब्बुल आलमीन।


📢 एक ज़रूरी ऐलान – इंतेकाल की खबर भेजने के लिए हिदायतें

अक्सर अधूरी जानकारी की वजह से खबर देर से पहुंचती है। “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से दरख़्वास्त करती है कि इंतेकाल की खबर भेजते वक़्त इन बातों का खास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता – असल व मौजूदा।
3️⃣ दफीने का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ जिम्मेदार शख्स का फोन नंबर।
5️⃣ (अगर मर्द का इंतकाल हो) तो फोटो शामिल करें।
6️⃣ इंतकाल की वजह (अगर मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम।

👉 मुकम्मल जानकारी से खबर सही वक़्त पर और सही तरीके से बिरादरी तक पहुंचेगी।


📰 डिस्क्लेमर

पत्रिका में प्रकाशित लेख, समाचार, विचार, प्रेस विज्ञप्ति या विज्ञापन संबंधित लेखक/संवाददाता/विज्ञापनदाता के निजी विचार हैं। इनसे संपादक, प्रकाशक या प्रबंधन की सहमति आवश्यक नहीं है। सामग्री की सत्यता व दावों के लिए संबंधित लेखक/विज्ञापनदाता स्वयं जिम्मेदार होंगे। किसी भी विवाद की स्थिति में न्याय क्षेत्र केवल दिल्ली रहेगा।


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देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित, मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका

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✍️ ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट
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नोट:- शिनाख्त के लिए ख़बर में मरहूमा के शौहर जनाब अनीस अहमद साहब के फ़ोटो लगाए गए है।

दो सगे भाइयों का लगातार इंतिक़ाल… मुजफ्फरनगर से छुटमुलपुर तक मातम की फिज़ा, मुल्तानी बिरादरी सदमे में

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अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादराना हज़रात को बड़े ही रंज-ओ-ग़म के साथ इत्तिला दी जाती है कि जनाब राशिद साहब (उम्र लगभग 50 वर्ष) वल्द जनाब सगीर अहमद (मनक पुट्टी वाले), हाल मुकाम मोहल्ला मल्हूपुरा, जनपद मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश का आज बरोज़ पीर, तारीख़ 02 मार्च 2026 को मगरिब के बाद कज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

इस खबर ने पूरे इलाके और बिरादरी को गहरे सदमे में डाल दिया है।

ग़ौरतलब है कि जनाब राशिद साहब के सगे भाई जनाब ज़ाकिर साहब, जो कस्बा बड़ौत, जिला बागपत में रह रहे थे, उनका भी बरोज़ शनिवार, 28 फ़रवरी 2026 को इंतिक़ाल हो गया था। महज़ तीन-चार दिन के अंदर दूसरे भाई के भी दुनिया से रुख़्सत हो जाने से इस घर पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

मरहूम राशिद साहब और मरहूम जमील साहब, कस्बा छुटमुलपुर, जिला सहारनपुर से नगर पंचायत की चेयरमैन शमा परवीन के चाचा थे। पूरे खानदान और रिश्तेदारों में ग़म की लहर दौड़ गई है।


🕊️ सुपुर्द-ए-ख़ाक

मरहूम राशिद साहब की मय्यत को बरोज़ मंगल, तारीख़ 03 मार्च 2026 को सभी को इत्तिला दी जाती है कि राशिद मिर्जा मुजफ्फरनगर वालो कि नमाजे जनाजा 1 बजे पीर वाली मस्जिद मल्लुहपुरा में अदा की जायेगी कई बार बताने के लिए मजरात चाहता हूं अब ये टाइम बिल्कुल फिक्स है। तमाम अहले बिरादरी से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर सवाब-ए-दारेन हासिल करें और घरवालों को सब्र की तसल्ली दें।


यह लम्हा सिर्फ एक खानदान का ग़म नहीं, बल्कि पूरे मुल्तानी समाज का सामूहिक दुख है। दो भाइयों का यूं लगातार इंतिक़ाल हमें जिंदगी की नापायेदारी का एहसास कराता है।

अल्लाह तआला से दुआ है कि दोनों मरहूमीन की मग़फिरत फरमाए, उनकी क़ब्र को रौशन और वसीअ बनाए, जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता करे और तमाम अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।

आमीन या रब्बुल आलमीन।


📞 नोट: मय्यत के बारे में ज्यादा मालूमात के लिए हाजी जाहिद साहब से मोबाइल नंबर 9258491478 पर राब्ता कायम किया जा सकता है।


📢 एक ज़रूरी ऐलान – इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर अधूरी जानकारी की वजह से बिरादरी के लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि इंतिक़ाल की खबर भेजते समय इन बातों का ख़ास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता – असल निवास और मौजूदा मुकाम।
3️⃣ दफीने का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार एक-दो अफ़राद के फोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतिक़ाल हुआ है तो मरहूम का फोटो शामिल करें।
6️⃣ इंतिक़ाल की वजह (अगर बताना मुनासिब समझें)।
7️⃣ बाकी अहले-ख़ाना के नाम – जैसे भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वगैरह।

👉 मुकम्मल जानकारी से खबर सही और वक़्त पर पहुंचती है, जिससे बिरादरी एक-दूसरे के ग़म में शरीक हो सके।


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🖤 ग़म की इस घड़ी में पूरा मुल्तानी समाज दुआओं में शरीक है।

Sunday, March 1, 2026

🌙 खतौली में खिदमत-ए-खल्क का रूहानी मंज़र — जरूरतमंदों के लिए सेहरी व अफ़्तारी किट तकसीम

बरोज़ पीर, 02 मार्च 2026 को , ज़िला (उत्तर प्रदेश) में खिदमत-ए-खल्क का एक बेहद मुबारक और पुरअसर प्रोग्राम शानदार अंदाज़ में अंजाम दिया गया। इस नेक पहल के तहत तंजीम की जानिब से जरूरतमंद परिवारों के लिए सेहरी और अफ़्तारी से मुतअल्लिक किट्स तकसीम की गईं, ताकि रमज़ान के मुबारक महीने में कोई भी घर खाली दस्‍तरख़्वान के साथ इफ्तार या सेहरी के लिए मजबूर न हो।

इस प्रोग्राम में बिरादरी के कई जिम्मेदार और खैरख़्वाह हज़रात ने दिल खोलकर शिरकत की। जिन नामों ने इस नेक काम में अपना हिस्सा डाला, उनमें शामिल हैं —
जनाब हाजी नसीम साहब (खतौली),
जनाब ताहिर मिर्जा (मुजफ्फरनगर),
जनाबा यास्मीन साहिबा (बुढ़ाना),
रेशमा ज़मीर (मुल्तानी समाज न्यूज़),
जनाब हाजी दानिस साहब (देवबंद),
जनाब अब्दुल रहीम साहब,
जनाब जमीरुद्दीन साहब,
जनाब नौशाद मिर्ज़ा साहब (खतौली),
जनाब अफजाल साहब मिर्जा (खतौली),
जनाब शाहनवाज मिर्ज़ा (सरधना),
जनाब वसीम मिर्जा,
जनाब कय्यूम मिर्जा,
जनाब इकराम साहब,
जनाब मूसा जी (खतौली) आदि।

इन तमाम हज़रात की मौजूदगी ने प्रोग्राम को न सिर्फ कामयाब बनाया बल्कि बिरादरी में इत्तेहाद, हमदर्दी और भाईचारे का खूबसूरत पैग़ाम भी दिया। जरूरतमंदों के चेहरों पर आई मुस्कान इस बात की गवाह रही कि खिदमत का यह सिलसिला कितनी दिली लगन और सच्चाई के साथ अंजाम दिया गया।

रमज़ान का महीना सब्र, शुक्र और सख़ावत का महीना है। ऐसे में सेहरी और अफ़्तारी किट की तकसीम महज़ राशन बाँटना नहीं, बल्कि उम्मीद, राहत और मोहब्बत बाँटना है। यह अमल उस तालीम की तर्जुमानी करता है जो हमें इंसानियत की खिदमत का सबक देती है।

दुआ है कि अल्लाह तआला इस नेक काम में हिस्सा लेने वाले तमाम हज़रात के कारोबार में बरकत अता फरमाए, उनकी औलाद को नेक और फरमाबरदार बनाए और उनकी हर जायज़ तमन्ना को पूरा फरमाए। आमीन, सुम्मा आमीन।

यह खास रिपोर्ट सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए , ज़िला (उत्तर प्रदेश) से जनाब शाहनवाज मिर्ज़ा द्वारा भेजी गई।

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