Thursday, October 29, 2026

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन इंतिक़ाल की दर्दनाक ख़बर: क़स्बा स्याना के जनाब इशाक़ साहब का इंतिक़ाल, आज बाद नमाज़-ए-ईशा होगी तदफ़ीन; बिरादराना हज़रात से जनाज़े में शिरकत की पुरख़ुलूस अपील

सियाना, बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश)।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म, अफ़सोस और दिली सदमे के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि क़स्बा सियाना, ज़िला बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश के साकिन जनाब इशाक़ साहब वल्द जनाब हकीमुद्दीन साहब, उम्र तक़रीबन 70 साल, का आज दिन जुमेरात, बा-तारीख़ 29 अक्टूबर 2026 को क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया है।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम के इंतिक़ाल की ख़बर से अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और तमाम बिरादराना हज़रात में ग़म और अफ़सोस की लहर दौड़ गई है। दुनिया की ज़िंदगी फ़ानी है और हर जानदार को एक दिन अपने रब की तरफ़ लौटकर जाना है। मगर किसी अपने का बिछड़ जाना दिल को ग़मगीन कर देता है और उसकी कमी हमेशा महसूस होती है।

इस ग़मगीन मौक़े पर मुल्तानी समाज राष्ट्रीय समाचार पत्रिका की पूरी टीम मरहूम के अहल-ए-ख़ाना, फ़र्ज़ंद, रिश्तेदारों और तमाम अज़ीज़-ओ-अक़ारिब के साथ दिली ताज़ियत का इज़हार करती है और बारगाह-ए-इलाही में दस्त-ब-दुआ है कि अल्लाह तआला मरहूम की कामिल मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी ख़ताओं और कोताहियों से दरगुज़र फ़रमाए और उन्हें अपनी बेपनाह रहमतों के साये में जगह अता फ़रमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

🕊️ नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन की इत्तिला

मिली जानकारी के मुताबिक़, मरहूम जनाब इशाक़ साहब की नमाज़-ए-जनाज़ा आज बाद नमाज़-ए-ईशा अदा की जाएगी और इसके बाद उन्हें सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात से पुरख़ुलूस गुज़ारिश है कि इस ग़म की घड़ी में मरहूम के जनाज़े में शरीक होकर नमाज़-ए-जनाज़ा अदा करें, उनके हक़ में मग़फ़िरत की दुआ करें और अहल-ए-ख़ाना के ग़म में शरीक होकर उन्हें सब्र-ओ-तसल्ली दें। जनाज़े में शिरकत करना मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत और पीछे रह जाने वालों के लिए दिलजोई का ज़रिया है।

🤲 मरहूम की मग़फ़िरत के लिए दुआ

अल्लाहुम्मग़फ़िर लहू वरहम्हू व आफ़िहि वअफ़ु अन्हु।

ऐ अल्लाह! मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमा, उन पर रहम फ़रमा, उन्हें आफ़ियत अता फ़रमा और उनसे दरगुज़र फ़रमा।

ऐ अल्लाह! मरहूम की क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा, उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे। उनकी क़ब्र को कुशादा फ़रमा, उसमें राहत और सुकून अता फ़रमा और उसे अज़ाब-ए-क़ब्र से महफ़ूज़ फ़रमा।

ऐ रब्बे करीम! जब मरहूम को क़ब्र में उतारा जाए, तो अपनी रहमत से उन्हें तन्हाई और वहशत से महफ़ूज़ रखना। क़ब्र के हर मरहले में उन पर रहम फ़रमाना और उनकी मंज़िलें आसान फ़रमाना। उनकी नेकियों को क़ुबूल फ़रमा, गुनाहों को माफ़ फ़रमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमा।

ऐ अल्लाह! जब उनके चाहने वाले उन पर मिट्टी डालें और नम आँखों से वापस लौटें, तो उस वक़्त भी अपनी रहमत से उन्हें महरूम न फ़रमाना। उनके लिए क़ब्र को सुकून, नूर और राहत का ठिकाना बना देना।

ऐ अल्लाह! मरहूम के फ़र्ज़ंद जनाब फुरक़ान मिर्ज़ा समेत तमाम अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और चाहने वालों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा। उनके दिलों को सुकून दे, इस सदमे को बर्दाश्त करने की ताक़त अता फ़रमा और उन्हें अपने फ़ज़्ल-ओ-करम से अज्र-ए-अज़ीम नसीब फ़रमा।

आमीन सुम्मा आमीन, या रब्बुल आलमीन।

📞 जनाज़े और तदफ़ीन के सिलसिले में राब्ता

मरहूम के जनाज़े, नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन के सिलसिले में मजीद मालूमात हासिल करने के लिए उनके फ़र्ज़ंद जनाब फुरक़ान मिर्ज़ा से नीचे दिए गए मोबाइल नंबर पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है।

मोबाइल नंबर: 9917157863

ख़बर एवं इशाअत

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत तथा मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार क़ौमी सतह पर शाया या प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो बराए मेहरबानी नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।

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“मुल्तानी समाज” — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।

अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील नसीब फ़रमाए। आमीन।

Wednesday, October 28, 2026

12 नवंबर को पूरे मुल्क में मनाया जाएगा ‘मुल्तानी-डे’; राष्ट्रीय समाचार पत्रिका ‘मुल्तानी समाज’ के 13 साल मुकम्मल, बिरादरी की तालीम, तरक़्क़ी और ख़िदमत का पैग़ाम आम करने की तैयारी

नई दिल्ली से प्रकाशित राष्ट्रीय समाचार पत्रिका ‘मुल्तानी समाज’ के पंजीकरण की सालगिरह पर हर साल 12 नवंबर को मनाया जाता है ‘मुल्तानी-डे’; मुफ़लिस बच्चियों की इज्तेमाई शादी, बिरादरी के तालीमयाफ़्ता नौजवानों की हौसला-अफ़ज़ाई और ख़िदमतगार अफ़राद को एज़ाज़ से नवाज़ने का एलान।

शामली, उत्तर प्रदेश। पैदाइशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की आवाज़, पहचान और सामाजिक बेदारी को आम करने के मक़सद से दिल्ली से प्रकाशित और पूरे हिंदुस्तान में प्रसारित राष्ट्रीय समाचार पत्रिका ‘मुल्तानी समाज’ अपने 13 साल मुकम्मल होने की ख़ुशी में इस साल भी 12 नवंबर 2026 को ‘मुल्तानी-डे’ मनाने जा रही है। इस मौक़े पर बिरादरी के लोगों से अपील की गई है कि वे इस दिन को सादगी, इत्तेहाद, तालीम, ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ और अपनी क़ौमी पहचान के पैग़ाम के साथ मनाएँ।

पत्रिका के प्रधान संपादक ज़मीर आलम के मुताबिक़, ‘मुल्तानी-डे’ किसी शख़्स की पैदाइश, सालगिरह या वफ़ात से जुड़ा हुआ दिन नहीं है, बल्कि यह दिन बिरादरी के नाम से शुरू की गई राष्ट्रीय समाचार पत्रिका ‘मुल्तानी समाज’ के पंजीकरण की याद और उसकी सामाजिक व सहाफ़ती सफ़र की ख़ुशी से मंसूब है।

12 नवंबर 2013 को रखी गई थी एक ख़ास सहाफ़ती सफ़र की बुनियाद

क़स्बा गढ़ी पुख़्ता, ज़िला शामली, उत्तर प्रदेश के रहने वाले ज़मीर आलम ने 12 नवंबर 2013 को अपनी बिरादरी ‘मुल्तानी समाज’ के नाम से पत्रिका के पंजीकरण की बुनियाद रखी थी। उनका मक़सद मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी के लोगों को एक ऐसा सहाफ़ती प्लेटफ़ॉर्म मुहैया कराना था, जिसके ज़रिए बिरादरी की ख़बरें, सामाजिक सरगर्मियाँ, तालीमी कामयाबियाँ, कारोबारी पेशरफ़्त, समाजी मसाइल और ख़ुशी व ग़म के मौक़ों की इत्तिलाआत पूरे मुल्क तक पहुँचाई जा सकें।

ज़मीर आलम के मुताबिक़, इसी तारीख़ की याद में हर साल 12 नवंबर को ‘मुल्तानी-डे’ मनाने का सिलसिला शुरू किया गया। वक़्त के साथ इस दिन को बिरादरी के लोगों से राब्ता क़ायम करने, नौजवान नस्ल को तालीम की तरफ़ राग़िब करने और समाजी ख़िदमत के जज़्बे को फ़रोग़ देने के मौक़े के तौर पर पेश किया गया।

आज ‘मुल्तानी समाज’ के नाम से समाचार पत्रिका के साथ न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल के ज़रिए भी बिरादरी की आवाज़ को सामने लाने की कोशिश की जा रही है।

‘मुल्तानी-डे’ को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कराने के लिए भी की गई थी पहल

प्रधान संपादक ज़मीर आलम ने बताया कि ‘मुल्तानी-डे’ को सरकारी सतह पर पहचान दिलाने और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कराने की ग़रज़ से कई साल पहले दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात समेत मुख़्तलिफ़ राज्यों की सरकारों को ख़ुतूत और ईमेल भेजे गए थे।

उनके मुताबिक़, इस सिलसिले में कुछ सरकारी दफ़्तरों की तरफ़ से ईमेल के ज़रिए जवाब भी मौसूल हुए थे। उनका कहना है कि यह कोशिश इस दिन को बिरादरी की सहाफ़ती और समाजी पहचान के साथ जोड़कर महफ़ूज़ करने की ग़रज़ से की गई थी।

हालाँकि, इस पहल के नतीजे में ‘मुल्तानी-डे’ को बाक़ायदा सरकारी मान्यता या सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किए जाने की मौजूदा हैसियत की तस्दीक़ संबंधित सरकारी दस्तावेज़ों से की जानी ज़रूरी है।

‘मुल्तानी-डे’ के नाम और इवेंट को लेकर उठे सवाल

ज़मीर आलम ने अपनी बात रखते हुए कहा कि पिछले कुछ अरसे से बिरादरी की कुछ तंजीमों की तरफ़ से अक्टूबर के महीने में ऐसे प्रोग्राम किए जा रहे हैं, जिनमें ‘मुल्तानी-डे’ के नाम और उससे जुड़े इवेंट की तारीख़ व शुरुआत को लेकर मुख़्तलिफ़ दावे सामने आ रहे हैं।

उनका इल्ज़ाम है कि कुछ तंजीमें उनके शुरू किए गए इवेंट की पहचान को कमज़ोर करने और बिरादरी के लोगों को तारीख़ के हवाले से उलझाने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ‘मुल्तानी समाज’ की तरफ़ से 12 नवंबर की तारीख़ को पत्रिका के पंजीकरण की ख़ुशी से जोड़कर मनाया जाता रहा है और इस सिलसिले में उनके पास अपने पुराने रिकॉर्ड व दस्तावेज़ मौजूद हैं।

प्रधान संपादक ने कहा, “अगर पूरे हिंदुस्तान की कोई भी तंजीम ‘मुल्तानी समाज’ की पत्रिका के पंजीकरण से पहले ‘मुल्तानी-डे’ के इसी नाम और इसी हवाले से अपने इस्तेमाल के पुख़्ता सबूत पेश कर दे, तो हम अपने दावे पर दोबारा ग़ौर करने के लिए तैयार हैं।”

उन्होंने बिरादरी के तमाम ज़िम्मेदार अफ़राद से अपील की कि तारीख़ों और तहरीरी दावों पर बहस करते वक़्त दस्तावेज़ात, पुराने इश्तिहारात, पंजीकरण रिकॉर्ड और प्रकाशित सामग्री को बुनियाद बनाया जाए, ताकि आपसी इख़्तिलाफ़ात के बजाय हक़ीक़त और भाईचारे को फ़रोग़ मिले।

इस मामले में मुख़्तलिफ़ तंजीमों के दावों की स्वतंत्र तस्दीक़ और पुराने दस्तावेज़ों का जायज़ा लेना अहम है, ताकि बिरादरी के सामने तमाम पहलू वाज़ेह हो सकें।

12 ग़रीब बच्चियों की इज्तेमाई शादी का ख़्वाब

‘मुल्तानी-डे’ के मौक़े पर समाजी ख़िदमत को अहमियत देते हुए ज़मीर आलम ने 12 ज़रूरतमंद बच्चियों की इज्तेमाई शादी कराने के अपने मक़सद का भी इज़हार किया है। उनका कहना है कि समाज की असल तरक़्क़ी उसी वक़्त मुमकिन है, जब ख़ुशियों के मौक़ों पर ज़रूरतमंद परिवारों को भी याद रखा जाए और उनकी परेशानियों को कम करने के लिए अमली क़दम उठाए जाएँ।

उन्होंने कहा कि इज्तेमाई शादी जैसे कामों का मक़सद किसी एक परिवार या तंजीम की शोहरत नहीं, बल्कि उन घरों का सहारा बनना होना चाहिए जिनके लिए बच्चियों की शादी के अख़राजात उठाना मुश्किल हो जाता है।

इस तरह के नेक काम को अमली जामा पहनाने के लिए बिरादरी के साहिब-ए-हैसियत अफ़राद, समाजी कारकुनों और ख़ैरख़्वाहों का तआवुन अहम होगा, ताकि मदद इज़्ज़त-ए-नफ़्स के साथ और ज़रूरतमंद परिवारों की रज़ामंदी से पहुँचाई जा सके।

बिरादरी के ‘कोहिनूर हीरो’ को मिलेंगे ‘मुल्तानी गौरव अवॉर्ड’ और ‘मुल्तानी स्टार अवॉर्ड’

ज़मीर आलम ने बताया कि ‘मुल्तानी समाज’ की तरफ़ से बिरादरी का नाम रोशन करने वाले अफ़राद की पहचान करके उन्हें समाज के सामने लाने की कोशिश भी की जा रही है। इसके तहत तालीम, समाजी ख़िदमत और अपनी मेहनत से कामयाबी हासिल करने वाले लोगों की हौसला-अफ़ज़ाई के लिए ‘मुल्तानी गौरव अवॉर्ड’ और ‘मुल्तानी स्टार अवॉर्ड’ जैसे एज़ाज़ देने का इरादा है।

उन्होंने बताया कि ‘मुल्तानी स्टार’ का तसव्वुर ख़ास तौर पर तालीम से जुड़ा है। उनके बताए गए पैमाने के मुताबिक़, जिस घर में जितने ग्रेजुएट होंगे, उस घर को उतने ही स्टार अवॉर्ड से नवाज़ने की योजना है।

इस पहल का बुनियादी पैग़ाम यह है कि बिरादरी के घरों में तालीम का शौक़ बढ़े, बच्चे और बच्चियाँ आला तालीम हासिल करें और वालिदैन अपनी औलाद की पढ़ाई को पहली तरजीह दें।

आज के दौर में तालीम ही वह ताक़त है जो किसी भी समाज को ख़ुदएतमादी, रोज़गार, बेहतर मआशी हालात और समाजी एहतिराम की तरफ़ ले जा सकती है। लिहाज़ा, ऐसे एज़ाज़ात का असल मक़सद महज़ इनाम देना नहीं, बल्कि आने वाली नस्लों के लिए कामयाबी की मिसालें क़ायम करना होना चाहिए।

सोशल मीडिया पर ‘मुल्तानी-डे’ का मुफ़्त पोस्टर जारी करने की तैयारी

‘मुल्तानी समाज’ की तरफ़ से हर साल की तरह इस साल भी बिरादरी के लोगों के लिए उनके नाम और तस्वीर के साथ ‘मुल्तानी-डे’ का मुफ़्त पोस्टर तैयार करने की पहल की जा रही है। इस पोस्टर को लोग अपने सोशल मीडिया अकाउंट, फ़ेसबुक, व्हाट्सऐप स्टेटस और दूसरे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर अपने नाम से साझा कर सकेंगे।

पत्रिका की तरफ़ से उन तमाम लोगों का शुक्रिया अदा किया गया है जो हर साल पोस्टर बनवाकर और उसे सोशल मीडिया पर साझा करके इस मुहिम का हौसला बढ़ाते हैं।

जो अफ़राद अपना पोस्टर बनवाना चाहते हैं, वे अपनी पासपोर्ट साइज़ तस्वीर और ज़रूरी तफ़सीलात नीचे दिए गए मोबाइल नंबरों पर भेज सकते हैं:

‘मुल्तानी समाज’ राष्ट्रीय समाचार पत्रिका: 9410652990

प्रधान संपादक ज़मीर आलम: 8010884848

तस्वीर या पहचान से संबंधित दस्तावेज़ भेजते वक़्त अपनी निजी जानकारी की हिफ़ाज़त का ख़याल रखना भी ज़रूरी है। आधार कार्ड की पूरी तस्वीर भेजने के बजाय, अगर सिर्फ़ नाम और पहचान की तस्दीक़ मक़सद हो, तो पहले पत्रिका से पूछ लिया जाए कि क्या कोई कम संवेदनशील विकल्प क़बूल किया जा सकता है।

‘मुल्तानी-डे’ का पैग़ाम: इत्तेहाद, तालीम, ख़िदमत और अपनी पहचान

ज़मीर आलम का कहना है कि ‘मुल्तानी-डे’ को किसी शख़्सियत या एक तंजीम की शोहरत तक महदूद नहीं रखा जाना चाहिए। इस दिन का असल मक़सद बिरादरी के लोगों को एक-दूसरे के क़रीब लाना, तालीम की अहमियत उजागर करना, ज़रूरतमंदों की मदद करना और उन अफ़राद की हौसला-अफ़ज़ाई करना है जो अपनी मेहनत से समाज की तरक़्क़ी में हिस्सा डाल रहे हैं।

उन्होंने बिरादरी के तमाम बुज़ुर्गों, नौजवानों, तालीमयाफ़्ता अफ़राद, कारोबारियों, समाजी कारकुनों और मुख़्तलिफ़ तंजीमों से अपील की कि 12 नवंबर को अपने-अपने घरों में सादगी के साथ ‘मुल्तानी-डे’ मनाएँ और इस मौक़े पर इत्तेहाद, भाईचारे, तालीम और ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ का अहद करें।

उन्होंने कहा कि किसी भी बिरादरी की असल पहचान उसके तालीमयाफ़्ता नौजवानों, समाजी ख़िदमतगारों, ईमानदार कारोबारियों और एक-दूसरे के काम आने वाले लोगों से बनती है। अगर समाज के तमाम अफ़राद मिलकर इन बुनियादी उसूलों पर अमल करें, तो आने वाली नस्लों के लिए बेहतर मुस्तक़बिल की राह हमवार हो सकती है।


इश्तिहार, ख़बर और मज़मून की इशाअत के लिए राब्ता करें

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकरण के बारे में पत्रिका की तरफ़ से दी गई जानकारी के मुताबिक़, नई दिल्ली से प्रकाशित और प्रसारित ‘मुल्तानी समाज’ राष्ट्रीय समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल के ज़रिए बिरादरी की ख़बरों और समाजी सरगर्मियों को आम करने की कोशिश की जाती है।

अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून, पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना या अपने कारोबार का विज्ञापन राष्ट्रीय सतह पर प्रकाशित या प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।

राब्ता नंबर:

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वेबसाइट:

  • www.multanisamaj.com
  • www.msctindia.com
  • www.multanigharana.com

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‘मुल्तानी समाज’ — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।

ख़ास रिपोर्ट: ज़मीर आलम, प्रधान संपादक, ‘मुल्तानी समाज’ राष्ट्रीय समाचार पत्रिका, उत्तर प्रदेश डेस्क।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन: मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी में ग़म की लहर, नगीना और राजस्थान से दो मरहूमात के इंतिक़ाल की इत्तिला; एक की आज तदफ़ीन, दूसरी की तदफ़ीन हो चुकी

महमूदा बी और हज्जानी जैतून बी के इंतिक़ाल से अहले-ख़ाना में गहरा रंज-ओ-ग़म; मरहूमात की मग़फ़िरत, बुलंदी-ए-दरजात और तमाम पसमान्दगान के लिए सब्र-ए-जमील की दुआ

नगीना (बिजनौर), उत्तर प्रदेश / राजस्थान।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात को इत्तिला दी जाती है कि क़ज़ा-ए-इलाही से दो ख़वातीन के इंतिक़ाल की ख़बरें मौसूल हुई हैं। पहली ख़बर उत्तर प्रदेश के ज़िला बिजनौर के क़स्बा नगीना से है, जबकि दूसरी ख़बर राजस्थान से है। इन ग़मगीन ख़बरों से मरहूमात के अहले-ख़ाना, अज़ीज़ो-अक़ारिब और बिरादराना हज़रात में रंज-ओ-ग़म की फ़िज़ा है।

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त तमाम मरहूमीन व मरहूमात की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्रों को नूर से मुनव्वर फ़रमाए और तमाम पसमान्दगान को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

पहली ख़बर: क़स्बा नगीना, ज़िला बिजनौर से महमूदा बी के इंतिक़ाल की इत्तिला

निहायत ही अफ़सोस के साथ इत्तिला दी जाती है कि क़स्बा नगीना, ज़िला बिजनौर, उत्तर प्रदेश के तार वाला बाग़ की रहने वाली मरहूमा महमूदा बी, अहलिया जनाब यासीन साहब मरहूम, गंजी वाले, उम्र तक़रीबन 70 साल, का दिन बुध, 28 अक्टूबर 2026 को क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

मरहूमा के इंतिक़ाल की ख़बर से उनके अहले-ख़ाना और अज़ीज़ो-अक़ारिब में गहरा सदमा है। इस दुख की घड़ी में तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और उनके घरवालों को सब्र व हौसला अता होने की दुआ फ़रमाएँ।

नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन

मौसूल जानकारी के मुताबिक़, मरहूमा की मैय्यत को आज, दिन जुमेरात, 29 अक्टूबर 2026 को सुबह 11 बजे सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि नमाज़-ए-जनाज़ा में शिरकत फ़रमाकर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें।

मज़ीद मालूमात के लिए राब्ता करें:

  • मोहम्मद शाकिर: 9259083650
  • मोहम्मद आसिफ: 6396630070

दुआ-ए-मग़फ़िरत

ऐ अल्लाह! मरहूमा महमूदा बी की मग़फ़िरत फ़रमा, उनकी ख़ताओं से दरगुज़र फ़रमा, उनकी क़ब्र को वसीअ और मुनव्वर फ़रमा। जब उन्हें क़ब्र में उतारा जाए और उन पर मिट्टी डाली जाए, तो अपनी रहमत व करम से उन्हें सुकून अता फ़रमा। क़ब्र की मंज़िल आसान फ़रमा और उन्हें जन्नतुल-फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमा। उनके तमाम अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा। आमीन।

दूसरी ख़बर: राजस्थान से हज्जानी जैतून बी के इंतिक़ाल की इत्तिला

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

अफ़सोस और रंज-ओ-ग़म के साथ इत्तिला दी जाती है कि मरहूम हाजी अहमद हुसैन भुट्टो की ज़ौजा हज्जानी जैतून बी का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

मौसूल जानकारी के मुताबिक़, मरहूमा को दिन बुध, 28 अक्टूबर 2026 को बाद नमाज़-ए-इशा, रात तक़रीबन 9:30 बजे आयङ क़ब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया।

मरहूमा के इंतिक़ाल से उनके अहले-ख़ाना, अज़ीज़ो-अक़ारिब और जानने वालों में ग़म की लहर दौड़ गई है। हम तमाम पसमान्दगान के ग़म में शरीक हैं और बारगाह-ए-इलाही में दुआगो हैं कि अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनके दर्जात बुलंद फ़रमाए और उनके परिजनों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए।

सोयम और फ़ातेहा की इत्तिला

मौसूल इत्तिला के मुताबिक़, मरहूमा के इसाल-ए-सवाब के लिए आज, दिन जुमेरात, 29 अक्टूबर 2026 को बाद नमाज़-ए-ज़ुहर नूरानी मस्जिद, गांधी नगर, पहाड़ा में सोयम की फ़ातेहा रखी गई है।

तमाम अहले-ख़ाना, रिश्तेदारों, अज़ीज़ो-अक़ारिब और बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि सोयम की फ़ातेहा में शिरकत फ़रमाकर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें।

दुआ-ए-मग़फ़िरत और इसाल-ए-सवाब

या अल्लाह! मरहूमा हज्जानी जैतून बी की मग़फ़िरत फ़रमा, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे और उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे। उनकी आख़िरत की तमाम मंज़िलें आसान फ़रमा और उन्हें जन्नतुल-फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमा।

ऐ परवरदिगार! जिस वक़्त मरहूमा को क़ब्र में उतारा गया और उन पर मिट्टी डाली गई, उस वक़्त से लेकर रोज़-ए-क़यामत तक उन्हें अपनी रहमत और अमान में रखना। उनके गुनाहों को माफ़ फ़रमा, उनकी नेकियों को क़ुबूल फ़रमा और तमाम अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा। आमीन या रब्बुल आलमीन।

मुल्तानी समाज की तरफ़ से ताज़ियत

“मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका की तरफ़ से मरहूमा महमूदा बी और मरहूमा हज्जानी जैतून बी के तमाम अहले-ख़ाना, अज़ीज़ो-अक़ारिब और बिरादराना हज़रात के साथ गहरी हमदर्दी और ताज़ियत का इज़हार किया जाता है।

हमारी बारगाह-ए-इलाही में दुआ है कि अल्लाह तआला दोनों मरहूमात की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्रों को नूर से मुनव्वर फ़रमाए, उनकी मंज़िलें आसान फ़रमाए और उन्हें जन्नतुल-फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए। उनके घरवालों को इस ग़म को बर्दाश्त करने की ताक़त और सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मुल्तानी समाज — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” की उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार क़ौमी सतह पर शाया या प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।

📞 9410652990

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आपका एतमाद ही हमारी सबसे बड़ी ताक़त है।

“मुल्तानी समाज” — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ इंतिक़ाल की दर्दनाक इत्तिला

हाजी अय्यूब साहब मरहूम की अहलिया जीजन बी का इंतिक़ाल, कल सुबह 9:30 बजे दिल्ली में होगी तदफ़ीन — तमाम बिरादराना हज़रात से जनाज़े में शिरकत की पुरख़ुलूस दरख़्वास्त

अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर करे और तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिली अफ़सोस के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात को इत्तिला दी जाती है कि आज दिन बुध, बा-तारीख़ 28 अक्टूबर 2026 को गाँव कुशावली, तहसील खतौली, ज़िला मुज़फ़्फ़रनगर, उत्तर प्रदेश की मूल निवासी और फ़िलहाल एल ब्लॉक 1601, 28 शनि बाजार, ऑटो स्टैंड, संगम विहार दिल्ली - 110080 में रिहाइश-पज़ीर, हाजी अय्यूब साहब मरहूम की अहलिया मोहतरमा जीजन बी, उम्र तक़रीबन 76 साल, जिनका मायका गाँव काकड़ा, ज़िला मुज़फ़्फ़रनगर, उत्तर प्रदेश में है, का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया है।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

बेशक हम सब अल्लाह ही के हैं और उसी की तरफ़ लौटकर जाने वाले हैं।

मरहूमा के इंतिक़ाल की ख़बर से अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादराना हज़रात में ग़म की लहर दौड़ गई है। इस दुख की घड़ी में हम तमाम ग़मज़दा ख़ानदान के साथ दिली हमदर्दी और ताज़ियत का इज़हार करते हैं। अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त मरहूमा की तमाम ख़ताकारियों से दरगुज़र फ़रमाए, उनकी मग़फ़िरत फ़रमाए और उन्हें अपनी रहमत के साये में जगह अता फ़रमाए।

🕌 नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन की इत्तिला

मिली हुई जानकारी के मुताबिक़ मरहूमा को कल दिन जुमेरात, बा-तारीख़ 29 अक्टूबर 2026 को सुबह 9:30 बजे, संगम विहार, दिल्ली में वाक़े कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, दोस्त-अहबाब और तमाम अहल-ए-ईमान से पुरख़ुलूस दरख़्वास्त है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूमा के हक़ में दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएँ और ग़मज़दा ख़ानदान के साथ इस दुख की घड़ी में शरीक होकर इंसानी हमदर्दी, बिरादराना इत्तिहाद और इस्लामी भाईचारे का सबूत दें।

अल्लाह तआला आप तमाम हज़रात को इस नेक अमल का अज्र-ए-अज़ीम अता फ़रमाए। आमीन।

🤲 मरहूमा की मग़फ़िरत के लिए दुआ

ऐ अल्लाह! तू ग़फ़ूर-ओ-रहीम है, तू रहम करने वालों में सबसे बेहतर रहम करने वाला है। हम तेरे हुज़ूर दस्त-ए-दुआ हैं कि मरहूमा जीजन बी की मग़फ़िरत फ़रमा, उनकी ख़ताओं और लग़ज़िशों से दरगुज़र फ़रमा और उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे।

ऐ अल्लाह! उनकी क़ब्र को कुशादा फ़रमा, उसमें नूर ही नूर अता फ़रमा, उसे तंगियों और अज़ाब से महफ़ूज़ फ़रमा और अपनी रहमत के दरवाज़े उनके लिए खोल दे।

ऐ परवरदिगार! मरहूमा को सवालात-ए-क़ब्र के वक़्त साबित-क़दम रख, उन्हें अपने फ़ज़्ल-ओ-करम से सुकून अता फ़रमा और उनकी मंज़िलें आसान फ़रमा।

ऐ अल्लाह! उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमा, हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ की शफ़ाअत नसीब फ़रमा और उन्हें अपने नेक बंदों के ज़ुमरे में शामिल फ़रमा।

आमीन या रब्बल आलमीन।

🤲 मैय्यत को क़ब्र में उतारते वक़्त की दुआ

जब मैय्यत को क़ब्र में उतारा जाए, तो यह दुआ पढ़ना मस्नून है:

بِسْمِ اللّٰهِ وَعَلَىٰ مِلَّةِ رَسُولِ اللّٰهِ ﷺ

तर्जुमा: अल्लाह के नाम से और अल्लाह के रसूल ﷺ के दीन व तरीक़े पर।

क़ब्र में मैय्यत को उतारते वक़्त अदब, एहतराम और नर्मी का ख़ास ख़याल रखा जाए। इस मौक़े पर मरहूमा के लिए रहमत, मग़फ़िरत और साबित-क़दमी की दुआ की जाए।

🤲 मिट्टी देते वक़्त और दफ़्न के बाद की दुआ

मिट्टी देते वक़्त इंसान को अपनी आख़िरत और अल्लाह की तरफ़ वापसी को याद करना चाहिए। क़ुरआन-ए-करीम में इरशाद है:

مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ

तर्जुमा: इसी मिट्टी से हमने तुम्हें पैदा किया, इसी में तुम्हें वापस लौटाएँगे और इसी से तुम्हें दोबारा निकालेंगे।
(सूरह ताहा, आयत 55)

दफ़्न के बाद मरहूमा के लिए यह दुआ की जा सकती है:

اللّٰهُمَّ اغْفِرْ لَهَا وَارْحَمْهَا وَعَافِهَا وَاعْفُ عَنْهَا

तर्जुमा: ऐ अल्लाह! उनकी मग़फ़िरत फ़रमा, उन पर रहम फ़रमा, उन्हें आफ़ियत अता फ़रमा और उनसे दरगुज़र फ़रमा।

दफ़्न के बाद अल्लाह तआला से दुआ की जाए कि वह मरहूमा को सवालात-ए-क़ब्र में साबित-क़दम रखे, उनकी क़ब्र को रौशन करे और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में जगह अता फ़रमाए।

🤲 ग़मज़दा ख़ानदान के लिए दुआ

ऐ अल्लाह! हाजी अय्यूब साहब मरहूम के अहल-ए-ख़ाना, बच्चों, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और तमाम ग़मज़दा रिश्तेदारों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा। उनके दिलों को सुकून दे, इस सदमे को बर्दाश्त करने की हिम्मत अता फ़रमा और उन्हें अपने फ़ज़्ल-ओ-करम से अज्र-ए-अज़ीम नसीब फ़रमा।

ऐ अल्लाह! इस दुख की घड़ी में तमाम घरवालों का हामि-ओ-नासिर बन, उन्हें हौसला अता फ़रमा और मरहूमा की नेकियों को उनके लिए सदक़ा-ए-जारीया और नजात का ज़रिया बना दे।

आमीन सुम्मा आमीन या रब्बल आलमीन।

📞 तफ़सीलात के लिए राब्ता

मैय्यत, जनाज़े और तदफ़ीन के सिलसिले में मज़ीद मालूमात हासिल करने के लिए नीचे दिए गए मोबाइल नंबरों पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है:

  • 7065000666
  • 9716145540

📰 मुल्तानी समाज — क़ौमी समाचार पत्रिका की ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

अपनी ख़बर, तहरीर और इश्तिहार क़ौमी सतह पर शाया करवाएँ

अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार क़ौमी सतह पर शाया (प्रकाशित) या प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो बराए मेहरबानी नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।

📞 9410652990

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आपका एतमाद ही हमारी सबसे बड़ी ताक़त है।

“मुल्तानी समाज” — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।

दुआ की दरख़्वास्त: तमाम अहल-ए-ईमान से गुज़ारिश है कि मरहूमा जीजन बी की मग़फ़िरत, बुलंदी-ए-दरजात और जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम के लिए ख़ुसूसी दुआ फ़रमाएँ।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

हाजी नज़ीर अहमद साहब की समझदारी और नेक पहल से साढ़े चार साल पुराने मियां-बीवी के विवाद का ख़ातमा, दोनों ख़ानदानों में सुलह की राह हमवार

जलालाबाद के वरिष्ठ समाजसेवी हाजी नज़ीर अहमद साहब की कोशिशों से मुक़दमेबाज़ी में उलझे दो ख़ानदानों के दरमियान हुआ आपसी सुलहनामा, बिरादरी में अमन, इत्तेहाद और भाईचारे का पैग़ाम

जलालाबाद, ज़िला शामली, उत्तर प्रदेश।

मियां-बीवी के दरमियान पैदा होने वाले इख़्तिलाफ़ात अगर वक़्त रहते समझदारी, सब्र और आपसी बातचीत के ज़रिए हल कर लिए जाएँ, तो न सिर्फ़ एक घर को बिखरने से बचाया जा सकता है, बल्कि दोनों ख़ानदानों को भी परेशानी, तनाव और लंबी मुक़दमेबाज़ी से निजात मिल सकती है। इस्लाम भी आपसी सुलह, मोहब्बत, रहमदिली और रिश्तों की हिफ़ाज़त का पैग़ाम देता है।

इसी नेक सोच और समाजी ख़िदमत की एक मिसाल बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को कस्बा जलालाबाद, ज़िला शामली, उत्तर प्रदेश में देखने को मिली। यहाँ के वरिष्ठ समाजसेवी हाजी नज़ीर अहमद साहब की कोशिशों से पिछले साढ़े चार साल से चले आ रहे एक मियां-बीवी के विवाद को आपसी बातचीत और समझाइश के ज़रिए सुलझाने में कामयाबी मिली। दोनों पक्षों के दरमियान आपसी सुलहनामा कराया गया और उनके बीच जारी विवाद को ख़त्म करने की दिशा में अहम क़दम उठाया गया।

साढ़े चार साल से परेशान थे दोनों ख़ानदान

मिली जानकारी के मुताबिक़, यह मामला पिछले तक़रीबन साढ़े चार साल से चला आ रहा था। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच कई मर्तबा अलग-अलग पंचायतें हुईं और मामले को आपसी तौर पर सुलझाने की कोशिशें भी की गईं, लेकिन कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आ सका। हालात ऐसे बने कि मामला अदालत और क़ानूनी मुक़दमेबाज़ी तक जा पहुँचा, जिससे दोनों पक्षों को लंबे अरसे तक परेशानी का सामना करना पड़ा।

बताया गया है कि मियां पक्ष का ताल्लुक़ कस्बा गंगोह, ज़िला सहारनपुर से है, जबकि बीवी पक्ष गाँव चिलकाना, ज़िला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। दोनों पक्ष अपने-अपने मामलों में मुक़दमेबाज़ी का सामना कर रहे थे।

हाजी नज़ीर अहमद साहब ने दोनों पक्षों को बुलाकर की समझाइश

इसी दौरान किसी शख़्स के ज़रिए दोनों पक्षों को कस्बा जलालाबाद के वरिष्ठ समाजसेवी हाजी नज़ीर अहमद साहब के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद दोनों पक्षों को उनके आवास पर बुलाया गया, जहाँ हाजी साहब ने दोनों की बात सुनी और उन्हें समझाया-बुझाया।

उन्होंने आपसी इख़्तिलाफ़ात को बातचीत, सब्र, समझदारी और आपसी रज़ामंदी से हल करने की कोशिश की। उनकी कोशिशों से दोनों पक्षों के दरमियान सुलह की राह निकली और आपसी सुलहनामा कराया गया। इस तरह लंबे समय से चले आ रहे विवाद को आपसी सहमति से निपटाने की दिशा में अहम कामयाबी हासिल हुई।

यह पहल इस बात की याद दिलाती है कि जब समाज के ज़िम्मेदार और समझदार लोग ख़ुलूस-ए-नियत के साथ आगे आते हैं, तो कई बार सालों से उलझे मसलों को भी बातचीत के ज़रिए हल करने का रास्ता निकल सकता है।

इससे पहले भी कई मियां-बीवी के मामले सुलझा चुके हैं हाजी साहब

बताया जाता है कि हाजी नज़ीर अहमद साहब इससे पहले भी कई मियां-बीवी के मामलों में आपसी सुलह कराने और पारिवारिक इख़्तिलाफ़ात को दूर करने की कोशिशें कर चुके हैं। उनकी यह समाजी ख़िदमत परिवारों के बीच बातचीत, आपसी समझ और भाईचारे को बढ़ावा देने की अहमियत को उजागर करती है।

समाज में ऐसे लोगों की कोशिशें क़ाबिल-ए-तारीफ़ हैं, जो लोगों को आपसी दुश्मनी और खींचतान से निकालकर सुलह, अमन और इत्तेहाद की तरफ़ लाने में अपना वक़्त लगाते हैं। घरेलू मामलों में समझदारी और ज़िम्मेदारी के साथ की गई मध्यस्थता कई परिवारों को मानसिक परेशानी और लंबे विवादों से राहत दिलाने में मददगार साबित हो सकती है।

अलबत्ता, पारिवारिक मामलों में सुलह हमेशा दोनों पक्षों की स्वतंत्र रज़ामंदी, इज़्ज़त और क़ानूनी हुक़ूक़ की हिफ़ाज़त के साथ होनी चाहिए। अदालत में चल रहे मुक़दमों की औपचारिक समाप्ति के लिए जहाँ ज़रूरी हो, वहाँ संबंधित अदालत की क़ानूनी प्रक्रिया पूरी करना भी अहम है।

दोनों ख़ानदानों के लिए ख़ास दुआ

इस मौक़े पर दुआ है कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त हाजी नज़ीर अहमद साहब को उनकी नेक कोशिशों का बेहतरीन अज्र अता फ़रमाए। अल्लाह तआला उन्हें सेहत-ओ-आफ़ियत, लंबी उम्र, रिज़्क़ में बरकत और ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ के लिए और ज़्यादा हौसला अता फ़रमाए।

अल्लाह पाक मियां-बीवी और दोनों ख़ानदानों के दरमियान मोहब्बत, सुकून, इज़्ज़त और भरोसा क़ायम फ़रमाए। दिलों से नाराज़गी और कड़वाहट दूर फ़रमाकर आपसी रिश्तों में ख़ैर-ओ-बरकत अता करे। अगर दोनों ने अपने रिश्ते को आगे बढ़ाने का फ़ैसला किया है, तो अल्लाह उनके घर को मोहब्बत, रहमत और सुकून का मरकज़ बनाए तथा उन्हें एक-दूसरे के हुक़ूक़ अदा करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।

आमीन या रब्बुल आलमीन।


विशेष रिपोर्ट: ज़मीर आलम, प्रधान संपादक
उत्तर प्रदेश डेस्क — मुल्तानी समाज

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, देश की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज”।

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“मुल्तानी समाज” — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।

🥀 इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन 🥀निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ इंतिक़ाल की इत्तिला जनाब शब्बीर अहमद साहब का इंतिक़ाल, आज बाद नमाज़-ए-मग़रिब होगी तदफ़ीन

अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमाए और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात को इत्तिला दी जाती है कि आज बुधवार, 28 अक्टूबर 2026, दोपहर पौने एक बजे (12:45 बजे) गाँव अब्दाननगर, ब्लॉक व तहसील ऊन, ज़िला शामली, उत्तर प्रदेश के साकिन, जनाब शब्बीर अहमद साहब वल्द जनाब अलीहसन साहब (साकिन गाँव पिंडौरा) उम्र तक़रीबन 70 साल, का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया है।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम के इंतिक़ाल की ख़बर से अहल-ए-ख़ानदान, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादराना हज़रात में ग़म की लहर दौड़ गई है। यह दुनिया फ़ानी है और हर जान को एक दिन अपने रब की तरफ़ लौटकर जाना है। अल्लाह तआला ने क़ुरआन-ए-पाक में इरशाद फ़रमाया है कि हर जान को मौत का मज़ा चखना है।

इस पुरदर्द मौक़े पर हम तमाम अहल-ए-ख़ानदान और ग़मज़दा लवाहिक़ीन के साथ दिली ताज़ियत का इज़हार करते हैं और बारगाह-ए-इलाही में दुआगो हैं कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी ख़ताओं और लग़ज़िशों से दरगुज़र फ़रमाए तथा उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए। आमीन।

🕌 नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन की इत्तिला

मौसूल होने वाली इत्तिला के मुताबिक़, मरहूम जनाब शब्बीर अहमद साहब की मय्यत को आज बाद नमाज़-ए-मग़रिब सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि वक़्त निकालकर नमाज़-ए-जनाज़ा में शरीक हों, मरहूम के हक़ में दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और इस दुख की घड़ी में अहल-ए-ख़ानदान को तसल्ली दें।

नोट: नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन के मुकम्मल वक़्त व मक़ाम की तस्दीक़ के लिए नीचे दिए गए नंबर पर राब्ता फ़रमाएँ।

राब्ता बराए मालूमात:

मोहम्मद इमरान साहब
📞 8219318604

🤲 मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत

اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَارْحَمْهُ وَعَافِهِ وَاعْفُ عَنْهُ

तर्जुमा: ऐ अल्लाह! मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमा, उन पर रहम फ़रमा, उन्हें आफ़ियत अता फ़रमा और उनसे दरगुज़र फ़रमा।

ऐ अल्लाह! जनाब शब्बीर अहमद साहब की तमाम छोटी-बड़ी ख़ताओं को माफ़ फ़रमा। उनकी नेकियों को क़ुबूल फ़रमा, उनके दर्जात बुलंद फ़रमा और उन्हें अपनी बेपनाह रहमत के साये में जगह अता फ़रमा। उनकी आख़िरत को बेहतर फ़रमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला से आला मक़ाम नसीब फ़रमा। आमीन।

🤲 मय्यत को क़ब्र में उतारते वक़्त की दुआ

بِسْمِ اللَّهِ وَعَلَى مِلَّةِ رَسُولِ اللَّهِ ﷺ

तर्जुमा: अल्लाह के नाम के साथ और रसूलुल्लाह ﷺ के दीन व तरीक़े पर।

🤲 दफ़्न के बाद की दुआ

اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ، اللَّهُمَّ ثَبِّتْهُ عِنْدَ السُّؤَالِ

तर्जुमा: ऐ अल्लाह! इनकी मग़फ़िरत फ़रमा और सवाल के वक़्त इन्हें साबितक़दम रख।

ऐ अल्लाह! इनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे। क़ब्र की तंगी और तन्हाई को अपनी रहमत से दूर फ़रमा। क़ब्र को नूर से भर दे और इसे सुकून व राहत का ठिकाना बना दे। मरहूम को क़ब्र के अज़ाब से महफ़ूज़ फ़रमा और रोज़-ए-क़ियामत अपने महबूब नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ की शफ़ाअत नसीब फ़रमा। आमीन या रब्बुल आलमीन।

🤲 मिट्टी देते वक़्त पढ़ी जाने वाली आयत

مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ

तर्जुमा: इसी ज़मीन से हमने तुम्हें पैदा किया, इसी में तुम्हें वापस लौटाएँगे और इसी से तुम्हें दोबारा निकालेंगे।

(सूरह ताहा, आयत 55)

अल्लाह तआला तमाम अहल-ए-ईमान को मौत की हक़ीक़त समझने, नेक आमाल की तौफ़ीक़ पाने और ईमान पर ख़ातिमा नसीब फ़रमाए। मरहूम के घरवालों को सब्र-ए-जमील और इस सदमे को बर्दाश्त करने की हिम्मत अता फ़रमाए। आमीन सुम्मा आमीन।


📰 मुल्तानी समाज — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत तथा मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना या अपने कारोबार का इश्तिहार क़ौमी सतह पर शाया व प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो बराए मेहरबानी नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।

📞 9410652990
📞 8010884848

आपका एतमाद ही हमारी सबसे बड़ी ताक़त है।

“मुल्तानी समाज” — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।

अल्लाह तआला मरहूम को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए और तमाम लवाहिक़ीन को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।

Monday, October 26, 2026

💔 इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन 💔इंतज़ार साहब के इंतिक़ाल से मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी में ग़म की लहर, मरहूम की मग़फ़िरत के लिए दुआओं की दरख़्वास्त

शामली, उत्तर प्रदेश।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिली अफ़सोस के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि आज दिन मंगल, बा-तारीख़ 27 अक्टूबर 2026 को दिल्ली रोड, गाँव खेड़ी, ज़िला शामली, उत्तर प्रदेश में जनाब महफ़ूज़ साहब मरहूम, साकिन नगला जसौई, के बड़े साहबज़ादे जनाब इंतज़ार साहब का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया है।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

बेशक हम सब अल्लाह तआला ही के हैं और उसी की तरफ़ हमें लौटकर जाना है। इंतज़ार साहब के इंतिक़ाल की ख़बर से अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादरी के लोगों में ग़म और अफ़सोस की लहर दौड़ गई है। यह दुनिया फ़ानी है और हर जान को मौत का ज़ायका चखना है। मगर किसी अपने के दुनिया से रुख़्सत हो जाने का सदमा दिल को ग़मगीन कर देता है।

इस पुरदर्द मौक़े पर हम तमाम अहल-ए-ख़ाना, रिश्तेदारों और ग़मज़दा ख़ानदान के साथ अपनी दिली हमदर्दी और ताज़ियत का इज़हार करते हैं। अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए और इस सदमे को बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ बख़्शे। आमीन या रब्बुल आलमीन।

🤲 मरहूम की मग़फ़िरत के लिए ख़ास दुआ

या अल्लाह! जनाब इंतज़ार साहब की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमा। उनकी तमाम ख़ताएँ और लग़ज़िशें माफ़ फ़रमा। उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा, उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे और क़ब्र की तंगी, वहशत और तमाम तकलीफ़ों से महफ़ूज़ फ़रमा।

ऐ अल्लाह! मरहूम के साथ रहमत और करम का मामला फ़रमा। उनकी नेकियों को क़ुबूल फ़रमा, उनकी बुराइयों से दरगुज़र फ़रमा और उन्हें अपनी बेपनाह रहमत के साये में जगह अता फ़रमा। उनके दर्जात बुलंद फ़रमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमा।

ऐ अल्लाह! जब मरहूम को क़ब्र में उतारा जाए, तो उनकी क़ब्र को सुकून और नूर से भर दे। उन्हें सवालात-ए-क़ब्र के वक़्त साबित-क़दम रख और अपनी रहमत से कामयाबी अता फ़रमा। क़ब्र को उनके लिए आराम और राहत का ठिकाना बना दे। आमीन सुम्मा आमीन।

🤲 दफ़ीने और मिट्टी देने के वक़्त की मस्नून दुआएँ

जब मरहूम को क़ब्र में उतारा जाए, तो यह दुआ पढ़ना मसनून है:

بِسْمِ اللّٰهِ وَعَلَىٰ مِلَّةِ رَسُولِ اللّٰهِ ﷺ

बिस्मिल्लाहि व अला मिल्लति रसूलिल्लाह ﷺ।

तर्जुमा: अल्लाह के नाम के साथ और रसूलुल्लाह ﷺ के दीन व तरीक़े पर।

क़ब्र पर मिट्टी डालते वक़्त क़ुरआन-ए-करीम की इस आयत को याद किया जाता है:

مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ

मिन्हा ख़लक़नाकुम व फ़ीहा नुईदुकुम व मिन्हा नुख़रिजुकुम तारतन उख़रा।

तर्जुमा: इसी ज़मीन से हमने तुम्हें पैदा किया, इसी में तुम्हें वापस लौटाएँगे और इसी से तुम्हें दोबारा निकालेंगे।

क़ब्र पर मिट्टी डालते और दफ़ीने के बाद मरहूम के लिए मग़फ़िरत, रहमत और साबित-क़दमी की दुआ की जाए। अल्लाह तआला मरहूम को अपने जवार-ए-रहमत में जगह अता फ़रमाए। आमीन।

📢 दफ़ीने का वक़्त बाद में बताया जाएगा

ख़बर लिखे जाने तक मरहूम इंतज़ार साहब के दफ़ीने का वक़्त मुकर्रर नहीं हो पाया था। जैसे ही दफ़ीने के वक़्त के बारे में तस्दीक़शुदा इत्तिला हासिल होगी, उसे इसी ख़बर में अपडेट कर दिया जाएगा। तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि ताज़ा इत्तिला के लिए इस ख़बर पर नज़र रखें।

अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनके अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए और तमाम ग़मज़दा लोगों को इस सदमे को बर्दाश्त करने की हिम्मत बख़्शे। आमीन या रब्बुल आलमीन।


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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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