मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी में ग़म की लहर, अहले ख़ाना से इज़हारे ताज़ियत और मरहूम की मग़फ़िरत के लिए दुआ की अपील
नई दिल्ली / उत्तर प्रदेश। निहायत ही रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ तमाम अहले-ईमान, मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात को इत्तिला दी जाती है कि जनाब सगीर साहब (डीज़ल), वल्दियत नामालूम, साकिन गाँव पिठलकर , सरधना, ज़िला मेरठ, उत्तर प्रदेश, हाल मुक़ीम गली नंबर-5, एच-ब्लॉक, सुंदर नगरी, नई दिल्ली का आज दिन जुमा, 16 अक्टूबर 2026 को क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया है।
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।
मरहूम के इंतिक़ाल की दर्दनाक ख़बर से अहले-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादरी के लोगों में ग़म की फ़िज़ा है। यह दुनिया फ़ानी है और हर जान को एक दिन अपने रब की तरफ़ लौटकर जाना है। मगर किसी अज़ीज़ का बिछड़ जाना घर-परिवार के लिए ऐसा सदमा होता है, जिसकी भरपाई आसान नहीं होती। इस ग़म की घड़ी में हम तमाम अहले-ख़ाना और तमाम लवाहिक़ीन के साथ दिली हमदर्दी और इज़हारे ताज़ियत करते हैं।
🕌 नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन की इत्तिला
मयस्सर इत्तिलाआत के मुताबिक़, मरहूम जनाब सगीर साहब की मैय्यत को आज रात 10 बजे सुंदर नगरी, नई दिल्ली स्थित क़ब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।
तमाम बिरादराना हज़रात, दोस्तों, अज़ीज़ों और अहले-मोहल्ला से गुज़ारिश है कि वक़्त पर पहुँचकर जनाज़े में शिरकत फ़रमाएँ, मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और अहले-ख़ाना को सब्र की तलक़ीन करें। जनाज़े में शिरकत करना, मरहूम के हक़ में दुआ करना और ग़मज़दा घराने के साथ खड़े रहना इंसानी हमदर्दी और इस्लामी भाईचारे की अहम अलामत है।
🤲 मरहूम की मग़फ़िरत के लिए दुआ
ऐ अल्लाह! जनाब सगीर साहब की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमा। उनकी ख़ताओं और लग़ज़िशों से दरगुज़र फ़रमा। उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा, उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे और क़ब्र की तंगी, वहशत और तमाम मुश्किलात से महफ़ूज़ फ़रमा।
या रब्बुल आलमीन! मरहूम पर अपनी ख़ास रहमत नाज़िल फ़रमा, उनकी नेकियों को क़ुबूल फ़रमा, उनके दर्जात बुलंद फ़रमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा। उन्हें अपने फ़ज़्ल-ओ-करम से जन्नत में जगह अता फ़रमा और रोज़-ए-महशर अपने महबूब बंदों के साथ उठाना।
ऐ अल्लाह! उनके तमाम घरवालों, अज़ीज़ों और लवाहिक़ीन को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा। उनके दिलों को सुकून दे, इस मुश्किल घड़ी में उन्हें हिम्मत अता फ़रमा और इस सदमे को बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन या रब्बुल आलमीन।
🤲 तदफ़ीन के वक़्त पढ़ी जाने वाली दुआ
मैय्यत को क़ब्र में उतारते वक़्त यह दुआ पढ़ना मस्नून है:
بِسْمِ اللَّهِ وَعَلَى مِلَّةِ رَسُولِ اللَّهِ
तर्जुमा: अल्लाह के नाम के साथ और रसूलुल्लाह ﷺ के दीन व तरीक़े पर।
🤲 मिट्टी देते वक़्त की दुआ
क़ब्र पर मिट्टी डालते वक़्त क़ुरआन मजीद की यह आयत पढ़ना मुस्तहब है:
مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ
तर्जुमा: इसी ज़मीन से हमने तुम्हें पैदा किया, इसी में तुम्हें वापस लौटाएँगे और इसी से तुम्हें दोबारा निकालेंगे।
(सूरह ताहा, आयत 55)
🤲 क़ब्रिस्तान से वापसी पर दुआ की गुज़ारिश
तमाम हज़रात से गुज़ारिश है कि तदफ़ीन के बाद भी मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करते रहें। अल्लाह तआला मरहूम की क़ब्र को सुकून और नूर का मक़ाम बनाए, उनकी मग़फ़िरत फ़रमाए और तमाम अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन सुम्मा आमीन।
📞 मज़ीद मालूमात के लिए राब्ता
मैय्यत और तदफ़ीन के सिलसिले में मज़ीद मालूमात हासिल करने के लिए बाबू ख़ान साहब से नीचे दिए गए मोबाइल नंबर पर राब्ता क़ायम करें:
मोबाइल नंबर: 9818566684
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उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।
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