अल्लाहुम्मग़फ़िर लहा वरहमहा व आफ़िहा वअफ़ु अन्हा। आमीन या रब्बुल आलमीन।
कोटा (राजस्थान), 15 अक्टूबर 2026। निहायत ही रंज-ओ-ग़म, अफ़सोस और दिली सदमे के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि आज दिन जुमेरात, बा-तारीख़ 15 अक्टूबर 2026 को कोटा, राजस्थान के साकिन जनाब इक़बाल हुसैन मुल्तानी साहब की ज़ौजा-ए-मोहतरमा नसीम बानो साहिबा का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया है।
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।
बेशक हम सब अल्लाह तआला ही के हैं और उसी की तरफ़ लौटकर जाने वाले हैं। मौत एक ऐसी हक़ीक़त है जिससे किसी को फ़रार नहीं, मगर किसी अज़ीज़ की जुदाई का ग़म दिल को गहरे सदमे में मुब्तिला कर देता है। नसीम बानो साहिबा के इंतिक़ाल की ख़बर से उनके अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़ो-अक़ारिब और बिरादरी के लोगों के दरमियान रंज-ओ-मलाल की कैफ़ियत है।
इस मुश्किल और ग़मगीन घड़ी में हम मरहूमा के तमाम अहल-ए-ख़ाना, ख़ुसूसन जनाब इक़बाल हुसैन मुल्तानी साहब और उनके घराने के अफ़राद के साथ दिली ताज़ियत और हमदर्दी का इज़हार करते हैं। अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त तमाम ग़मज़दा घरवालों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए और इस सदमे को बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ बख़्शे। आमीन।
🤲 मरहूमा की मग़फ़िरत के लिए ख़ुसूसी दुआ
ऐ अल्लाह! ऐ तमाम जहानों के परवरदिगार! तू रहमान है, तू रहीम है, तेरी रहमत हर शय पर छाई हुई है। हम अपने रब्बे-करीम की बारगाह में दस्त-ए-दुआ दराज़ करते हैं कि मरहूमा नसीम बानो साहिबा की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमा, उनकी ख़ताओं और कोताहियों से दरगुज़र फ़रमा और उनकी नेकियों को अपनी बारगाह में क़ुबूल फ़रमा।
اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهَا وَارْحَمْهَا وَعَافِهَا وَاعْفُ عَنْهَا
तर्जुमा: ऐ अल्लाह! उनकी मग़फ़िरत फ़रमा, उन पर रहम फ़रमा, उन्हें आफ़ियत अता फ़रमा और उनसे दरगुज़र फ़रमा।
या अल्लाह! मरहूमा की क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा, उसे उनके लिए सुकून और राहत का ज़रिया बना। उनकी क़ब्र को वसीअ फ़रमा, उसमें जन्नत की ठंडी हवाएँ और रहमतें नसीब फ़रमा। उन्हें अज़ाब-ए-क़ब्र और तमाम आफ़ात से महफ़ूज़ फ़रमा।
ऐ मालिक-ए-कायनात! मरहूमा को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमा। उनके दरजात बुलंद फ़रमा और उन्हें अपने नेक बंदों की सोहबत नसीब फ़रमा। हुज़ूर नबी-ए-करीम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर नाज़िल होने वाली रहमतों के सदक़े में हमारी इस दुआ को अपनी बारगाह में क़ुबूल फ़रमा। आमीन या रब्बुल आलमीन।
🕊️ दफ़्न और तदफ़ीन के मौक़े पर पढ़ी जाने वाली दुआएँ
मरहूमा की तदफ़ीन के मौक़े पर तमाम मुसलमान भाइयों से गुज़ारिश है कि शरीअत के मुताबिक़ अदब, सुकून और एहतराम के साथ जनाज़े में शिरकत करें और मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें।
1. क़ब्रिस्तान में दाख़िल होते वक़्त की दुआ
अस्सलामु अलैकुम अहलद-दियारि मिनल-मुमिनीना वल-मुस्लिमीन, व इन्ना इन्शा अल्लाहु बिकुम लाहिक़ून। नसअलुल्लाहा लना व लकुमुल आफ़ियह।
मफ़हूम: ऐ इस बस्ती के मोमिन और मुसलमान रहने वालो! तुम पर सलाम हो। इंशाअल्लाह हम भी तुमसे आ मिलने वाले हैं। हम अल्लाह से अपने और तुम्हारे लिए आफ़ियत माँगते हैं।
2. मरहूमा को क़ब्र में उतारते वक़्त की दुआ
बिस्मिल्लाहि व अला मिल्लति रसूलिल्लाह।
मफ़हूम: अल्लाह के नाम के साथ और रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दीन और तरीक़े पर।
यह दुआ मय्यत को क़ब्र में रखने के मौक़े पर पढ़ी जाती है।
3. मिट्टी देते वक़्त की याददिहानी
अल्लाह तआला ने क़ुरआन-ए-करीम में इरशाद फ़रमाया है:
مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ
तर्जुमा: इसी मिट्टी से हमने तुम्हें पैदा किया, इसी में तुम्हें लौटाएँगे और इसी से तुम्हें दोबारा निकालेंगे। (सूरह ताहा, आयत 55)
मिट्टी देते वक़्त इंसान को अपनी आख़िरत, जवाबदेही और अल्लाह तआला की बारगाह में वापसी को याद करना चाहिए। इस मौक़े पर मरहूमा के लिए रहमत, मग़फ़िरत और जन्नत की दुआ की जाए।
4. दफ़्न के बाद मरहूमा के लिए दुआ
जनाज़े की तदफ़ीन के बाद मरहूमा के लिए साबित-क़दम रहने, मग़फ़िरत और रहमत की दुआ करना मस्नून अमल है।
ऐ अल्लाह! नसीम बानो साहिबा को सवालात के वक़्त साबित-क़दम फ़रमा, उनकी मग़फ़िरत फ़रमा और उनके अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा। आमीन।
🌹 अहल-ए-ख़ाना के नाम ताज़ियती पैग़ाम
जनाब इक़बाल हुसैन मुल्तानी साहब और तमाम ग़मज़दा घरवालों से गुज़ारिश है कि इस मुश्किल वक़्त में अल्लाह तआला की रहमत से मायूस न हों। सब्र और दुआ को अपना सहारा बनाएँ। हम अल्लाह की बारगाह में दुआगो हैं कि वह आप सभी को हिम्मत, हौसला और सब्र अता फ़रमाए।
बिरादरी के तमाम हज़रात से भी गुज़ारिश है कि मरहूमा के लिए ख़ुलूस-ए-दिल से दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और ग़मज़दा ख़ानदान के साथ हमदर्दी का इज़हार करें।
अल्लाह पाक मरहूमा नसीम बानो साहिबा की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए।
आमीन सुम्मा आमीन, या रब्बुल आलमीन।
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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।
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