Tuesday, September 29, 2026

🌹 दो घरानों में बजेगी निकाह की शहनाई, सजेंगे खुशियों के रंग

मोहम्मद जावेद व सानिया नूर तथा जियाउर्रहमान व अमरीन बानो के निकाह की तैयारियाँ मुकम्मल

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

अस्सलातु वस्सलामु अलैका या रसूलल्लाह ﷺ

🌹 “अन-निकाहु मिन सुन्नती” 🌹

उदयपुर। अल्लाह तआला के फ़ज़्लो-करम और सरवरे कायनात, रहमतुल्लिल-आलमीन हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ के सदक़े व तुफ़ैल दो खानदानों में निकाह की मुबारक खुशियाँ दस्तक देने जा रही हैं। इस मुबारक मौक़े पर अहले मुल्तानी बिरादरी के दो नौजवानों के निकाह की खुशखबरी ने रिश्तेदारों और अज़ीज़ो-अक़ारिब में ख़ुशी की लहर पैदा कर दी है।

मरहूम रहीम बख्श साहब के परपोते तथा मरहूम हाजी अब्दुल क़ादिर पटेल साहब के पोते जनाब मोहम्मद जावेद, इब्ने अब्दुल वहीद पटेल (पुंवार), आयड़, उदयपुर, का निकाह सानिया नूर, बिन्ते मोहम्मद शरीफ़ साहब, पुंवार (उदयपुर) के साथ दोनों खानदानों की बाहमी रज़ामंदी से तय पाया है।

💐 पहला निकाह — मोहम्मद जावेद एवं सानिया नूर

इस मुबारक निकाह की तक़रीब 6 जमादिउल अव्वल 1448 हिजरी, मुताबिक़ 17 अक्टूबर 2026, बरोज़ शनिवार, बाद नमाज़-ए-मग़रिब लोहार कॉलोनी, उदयपुर में आयोजित होगी।

अल्लाह तआला इस पाक रिश्ते को मोहब्बत, बरकत, सुकून और ख़ुशहाली से मालामाल फ़रमाए और दोनों को उम्र भर एक-दूसरे का ख़ैरख़्वाह और हमसफ़र बनाए। आमीन।


🌹 दूसरा निकाह — जियाउर्रहमान एवं अमरीन बानो

इसी ख़ुशनुमा सिलसिले में जनाब जियाउर्रहमान, इब्ने अब्दुल हमीद पटेल (पुंवार), आयड़, उदयपुर, का निकाह अमरीन बानो, बिन्ते अब्दुल अज़ीज़ साहब, मोटीयार (इंदौर) के साथ तय पाया है।

यह मुबारक निकाह 8 जमादिउल अव्वल 1448 हिजरी, मुताबिक़ 19 अक्टूबर 2026, बरोज़ सोमवार, बाद नमाज़-ए-मग़रिब इंदौर में, इंशाअल्लाह, अदा होगा।

दोनों परिवारों में निकाह की तैयारियाँ अपने पूरे जोश व ख़ुशी के साथ जारी हैं और रिश्तेदारों, दोस्तों तथा बिरादराने अहले मुल्तानी की आमद से इन मुबारक तक़रीबात की रौनक़ में और इज़ाफ़ा होगा।

🌺 दावते वलीमा

निकाह की इन मुबारक तक़रीबात के बाद 21 अक्टूबर 2026, बरोज़ बुधवार को तुलसी वाटिका, यूनिवर्सिटी रोड, उदयपुर में दावते वलीमा का एहतिमाम किया गया है।

इस मौक़े पर खानदान के अज़ीज़ो-अक़ारिब, दोस्तों और बिरादरी के लोगों से शिरकत फ़रमाकर नवविवाहित जोड़ों को अपनी दुआओं से नवाज़ने की दरख़्वास्त की गई है।

🌹 दुआ है...

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त दोनों नवविवाहित जोड़ों के निकाह को अपनी बारगाह में क़ुबूल फ़रमाए। उनके आने वाले सफ़र को ईमान, मोहब्बत, रहमत, बरकत और सुकून से भर दे। दोनों परिवारों के बीच मोहब्बत और भाईचारा हमेशा क़ायम रखे तथा घरों को ख़ुशियों, नेक औलाद और अपनी रहमतों से आबाद फ़रमाए।

आमीन या रब्बुल आलमीन। 🤲🌹

🌺 अदईय्यान

अब्दुल जलील पटेल साहब, अब्दुल अज़ीज़ पटेल, अब्दुल गफ़्फ़ार पटेल, मोहम्मद इब्राहीम पटेल, अब्दुल हमीद पटेल एवं अब्दुल वहीद पटेल।

🌺 अल-मुक़ल्लिफ़ीन

अब्दुल रशीद, अब्दुल मजीद, मोहम्मद सलीम, अब्दुल सलाम, मोहम्मद फ़ारूक़, मोहम्मद इरफ़ान, मोहम्मद शरीफ़, मोहम्मद हनीफ़, अब्दुल वहीद, मोहम्मद इमरान, अताउर्रहमान, मोहम्मद इदरीस, मोहम्मद आसिफ़, हबीबुर्रहमान, मोहम्मद इलियास, मोहम्मद फ़ैज़ल, मोहम्मद तौसीफ़, अब्दुल कलाम, मोहम्मद मुजाहिद, मोहम्मद शाहिद एवं मोहम्मद अल्तमश।

🌷 नन्ही इल्तिजा

मोहम्मद ताबिश एवं अक़लीमा फ़ातिमा

🌹 ननिहाल की तरफ़ से

मामा जी: हाजी मक़बूल अहमद साहब, मौलाना मोहम्मद अय्यूब, मोहम्मद शरीफ़, अहमद हुसैन, मोहम्मद सलीम, मोहम्मद सईद, मोहम्मद आरिफ़ एवं अब्दुल रशीद।

बहनोई: हाजी मोहम्मद फ़ारूक़ डड्डियाल।

भांजे: मोहम्मद तारिक़, मोहम्मद साजिद, मोहम्मद नूर, मोहम्मद सलीम, मोहम्मद फ़ुरक़ान एवं मोहम्मद फ़ैज़ान।

🌹 नियाज़मंद

अब्दुल गफ़्फ़ार पटेल — 7727019647
अब्दुल हमीद पटेल — 7737719595
अब्दुल वहीद पटेल — 9414474105

पता: 84, गली नंबर 3, लोहार कॉलोनी, उदयपुर (राजस्थान)


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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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Monday, September 28, 2026

सिर्फ़ एक मौत नहीं, हमारे लिए एक बड़ा सवाल है — 38 साल की उम्र में मोहम्मद शहज़ाद का अचानक इंतक़ाल

रात 11 बजे तक दोस्तों के साथ हंसी-ख़ुशी मुलाक़ातें… और महज़ पौने दो घंटे बाद मौत की ख़बर — एक ख़ुशमिज़ाज नौजवान का यूँ अचानक चले जाना हर दिल को झकझोर गया

शामली।
कभी-कभी ज़िंदगी हमें ऐसे सदमे से रूबरू करा देती है, जिसके बाद इंसान देर तक यही सोचता रह जाता है कि आखिर कुछ ही लम्हों में सब कुछ कैसे बदल गया।

मोहम्मद शहज़ाद का अचानक इंतक़ाल भी ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला वाक़िया है। महज़ 38 साल की उम्र में उनका अचानक हार्ट फेल होने से इंतक़ाल हो जाना न सिर्फ़ उनके खानदान, रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए बल्कि पूरी मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के लिए गहरे रंज और सदमे का सबब है।

बताया जाता है कि 28 सितंबर 2026 की रात करीब 11 बजे तक मोहम्मद शहज़ाद अपने यार-दोस्तों के साथ हंसी-ख़ुशी घूमते, मिलते-जुलते और बातचीत करते रहे। उस वक़्त न किसी को किसी अनहोनी का अंदेशा था और न ही किसी ने यह सोचा होगा कि कुछ ही देर बाद हालात इतने बदल जाएंगे।

लेकिन रात आगे बढ़ी और करीब 12 बजकर 45 मिनट पर अचानक उनके इंतक़ाल की ख़बर सामने आई।

महज़ करीब पौने दो घंटे का यह फ़ासला ज़िंदगी और मौत के बीच ऐसा फ़ासला बन गया, जिसने हर सुनने वाले को अंदर तक हिला दिया।


मौत ने न डॉक्टर तक पहुंचने की मोहलत दी, न इलाज का मौक़ा

मोहम्मद शहज़ाद का परिवार मेडिकल सेक्टर से जुड़ा हुआ बताया जाता है। उनका अपना होलसेल और रिटेल मेडिकल स्टोर था। शामली की पॉश कॉलोनी में उनका आलीशान अस्पताल भी बताया जाता है। शहर के छोटे-बड़े मेडिकल स्टोर संचालकों से लेकर बड़े से बड़े डॉक्टरों तक उनके अच्छे ताल्लुक़ात थे।

लेकिन इंसान के पास चाहे कितने ही साधन क्यों न हों, मौत का वक़्त जब मुक़र्रर होता है तो तमाम इंतज़ामात बेबस हो जाते हैं।

जिस शख़्स के आसपास हर वक़्त दवाइयां, डॉक्टर और इलाज की सुविधाएं मौजूद थीं, उसे डॉक्टर को बुलाने या अस्पताल तक पहुंचाने तक की मोहलत भी न मिल सकी।

यही बात इस हादसे को और भी ज़्यादा झकझोर देने वाला बना देती है।


क्या 38 साल की उम्र में अचानक दिल का जवाब दे देना महज़ एक इत्तेफ़ाक़ है?

मोहम्मद शहज़ाद के इंतक़ाल को किसी एक वजह से जोड़ देना सही नहीं होगा। अचानक होने वाली हृदय संबंधी घटनाओं के पीछे कई अलग-अलग चिकित्सकीय कारण हो सकते हैं और किसी व्यक्ति की मौत का वास्तविक कारण डॉक्टरों की जांच तथा मेडिकल रिकॉर्ड के बिना तय नहीं किया जा सकता।

लेकिन यह हादसा हमें अपने आप से कुछ सवाल करने का मौक़ा ज़रूर देता है।

आज हमारी ज़िंदगी में भागदौड़ बढ़ रही है। खान-पान का अंदाज़ बदल रहा है। बाज़ार में मिलने वाली चीज़ों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहते हैं। नींद पूरी न होना, लगातार तनाव, शारीरिक गतिविधि की कमी, धूम्रपान या तंबाकू का इस्तेमाल और कई दूसरे जोखिम भी दिल की सेहत को प्रभावित कर सकते हैं।

इसीलिए मोहम्मद शहज़ाद का इंतक़ाल सिर्फ़ एक दर्दनाक ख़बर बनकर न रह जाए, बल्कि हमें अपनी ज़िंदगी और सेहत के बारे में सोचने पर भी मजबूर करे।


मिलावट और जहरीले माहौल का सवाल—लेकिन जवाब सबूत के साथ ही

आजकल अक्सर अचानक होने वाली मौतों के बाद लोग मिलावटी खाने, नकली खाद्य पदार्थों, प्रदूषण या जहरीले वातावरण को संभावित वजह मानने लगते हैं।

इन पहलुओं पर सवाल उठना अपनी जगह अहम है, लेकिन बिना चिकित्सकीय जांच और वैज्ञानिक प्रमाण के मोहम्मद शहज़ाद की मौत को इनमें से किसी एक वजह से जोड़ना उचित नहीं होगा।

हाँ, एक समाज के तौर पर हमें यह ज़रूर पूछना चाहिए कि—

हम जो खा रहे हैं, उसकी गुणवत्ता कैसी है?
हमारी रोज़मर्रा की जीवनशैली कितनी सेहतमंद है?
क्या हम नियमित स्वास्थ्य जांच को गंभीरता से लेते हैं?
क्या हम अपने दिल की सेहत, ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसी बुनियादी चीज़ों पर ध्यान देते हैं?
क्या हम अपनी नींद, खान-पान और रोज़ाना की शारीरिक गतिविधि को पर्याप्त महत्व देते हैं?

ये सवाल सिर्फ़ मोहम्मद शहज़ाद के परिवार के नहीं, बल्कि हम सबके हैं।


ज़िंदगी का भरोसा नहीं, मगर एहतियात हमारे हाथ में है

इस दुनिया की सबसे बड़ी हक़ीक़त यही है कि मौत का वक़्त किसी इंसान को मालूम नहीं।

क़ुरआन हमें मौत की हक़ीक़त की याद दिलाता है और इस्लामी तालीम इंसान को अपनी ज़िंदगी की हिफ़ाज़त और सेहत का भी ख़याल रखने की सीख देती है।

इसलिए मौत को याद करना हमें मायूस करने के लिए नहीं, बल्कि ज़िंदगी को बेहतर तरीके से जीने के लिए होना चाहिए।

मोहम्मद शहज़ाद की ज़िंदगी और उनका अचानक चला जाना हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हम अपनी सेहत को कल पर न टालें।

बीमारी का इंतज़ार करने के बजाय एहतियात करें।
लक्षणों को नज़रअंदाज़ करने के बजाय डॉक्टर से मशवरा करें।
खान-पान में लापरवाही के बजाय संतुलन अपनाएं।
और अपनी तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में अपने शरीर और दिल के लिए भी थोड़ा वक़्त निकालें।


एक ख़ुशमिज़ाज नौजवान की याद और हमारे लिए सबक

मोहम्मद शहज़ाद की आख़िरी रात शायद उनके दोस्तों के लिए हमेशा यादगार रहेगी।

रात 11 बजे तक साथ बैठना, मिलना-जुलना, हंसी-मज़ाक और बातचीत… और फिर कुछ ही देर बाद यह ख़बर कि शहज़ाद अब इस दुनिया में नहीं रहे।

ऐसे वाक़ियात इंसान को अंदर तक हिला देते हैं।

आज हम उनके लिए मग़फ़िरत की दुआ करें, उनके खानदान के ग़म में शरीक हों और साथ ही उनकी मौत को सनसनी नहीं बल्कि एक सामाजिक और सेहत संबंधी सबक बनाने की कोशिश करें।

क्योंकि सवाल सिर्फ़ यह नहीं कि मोहम्मद शहज़ाद के साथ क्या हुआ?

एक बड़ा सवाल यह भी है—

क्या हम अपनी ज़िंदगी, खान-पान और सेहत के बारे में आज से कुछ बेहतर करने का फ़ैसला करेंगे?

या फिर हम भी इस भरोसे में जीते रहेंगे कि हमारे साथ ऐसा कभी नहीं होगा?

अल्लाह तआला मरहूम मोहम्मद शहज़ाद की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनके दर्जात बुलंद फ़रमाए और तमाम अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।


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इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन,निशा बानू के इंतकाल से बिरादरी में पसरा रंज-ओ-ग़म, नमाज़-ए-जनाज़ा के बाद सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा

पारोली, जिला भीलवाड़ा (राजस्थान), 29 सितंबर 2026।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि आज दिन मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को पारोली, जिला भीलवाड़ा, राजस्थान में मोहम्मद इब्राहिम जी पुवार की बहू तथा अब्दुल हक़ पुवार की अहलिया, निशा बानू का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूमा के इंतकाल की ख़बर सुनकर खानदान, रिश्तेदारों, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादराने मुल्तानी में गहरे रंज-ओ-ग़म की लहर दौड़ गई। इस दुख की घड़ी में हर शख़्स मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फिरत और उनके अहले-ख़ाना के लिए सब्र-ए-जमील की दुआ कर रहा है।

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूमा की नमाज़-ए-जनाज़ा नमाज़-ए-ज़ुहर के बाद अदा की जाएगी, जिसके पश्चात उन्हें उनके आबाई/मुक़ामी कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि अपनी मसरूफ़ियत में से वक़्त निकालकर नमाज़-ए-जनाज़ा में शिरकत फ़रमाएँ और मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें।

मैय्यत को कब्र में उतारते वक़्त दुआ

जब मरहूमा को कब्र में उतारा जाए तो अल्लाह तआला उनके लिए कब्र के सफ़र को आसान फरमाए, कब्र को नूर से मुनव्वर फरमाए और उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे।

اللّٰهُمَّ اغْفِرْ لَهَا وَارْحَمْهَا، وَعَافِهَا وَاعْفُ عَنْهَا۔

ऐ अल्लाह! मरहूमा की मग़फ़िरत फरमा, उन पर रहम फरमा, उन्हें आफ़ियत अता फरमा और उनसे दरगुज़र फरमा।

اللّٰهُمَّ نَوِّرْ قَبْرَهَا وَوَسِّعْ مُدْخَلَهَا۔

ऐ अल्लाह! उनकी कब्र को नूर से भर दे और उनकी कब्र को कुशादा फरमा।

कब्र पर मिट्टी डालते वक़्त

मैय्यत को मिट्टी देते हुए यह दुआ की जाए कि:

اللّٰهُمَّ ثَبِّتْهَا عِنْدَ السُّؤَالِ، وَاجْعَلْ قَبْرَهَا رَوْضَةً مِنْ رِيَاضِ الْجَنَّةِ।

ऐ अल्लाह! सवाल के वक़्त उन्हें साबित-क़दम रख और उनकी कब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे।

तमाम हज़रात से गुज़ारिश है कि मरहूमा के लिए सूरह-ए-फ़ातिहा, सूरह-ए-इख़लास और दुआ-ए-मग़फ़िरत फरमाएँ। अल्लाह रब्बुल आलमीन मरहूमा के तमाम सग़ीरा-कबीरा गुनाहों को माफ़ फरमाए, उनकी कब्र को रोशन और कुशादा फरमाए, सवाल-ए-कब्र को आसान फरमाए, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला से आला मक़ाम अता फरमाए और अपने हबीब हज़रत मुहम्मद ﷺ की शफ़ाअत नसीब फरमाए।

अहले-ख़ाना के लिए दुआ

अल्लाह तआला मरहूमा के तमाम अहले-ख़ाना, रिश्तेदारों और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को इस सदमे को बर्दाश्त करने की ताक़त अता फरमाए, उन्हें सब्र-ए-जमील नसीब फरमाए और इस ग़म की घड़ी में अपना ख़ास करम फरमाए।

या अल्लाह! मरहूमा निशा बानू की मग़फ़िरत फरमा, उनकी कब्र को नूर से भर दे, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फरमा और उनके तमाम घरवालों को सब्र-ए-जमील अता फरमा।

आमीन या रब्बुल आलमीन।


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इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन — मोहम्मद शहज़ाद के अचानक इंतिक़ाल से ग़म में डूबा शामली और गढ़ी पुख़्ता

महज़ 38 वर्ष की उम्र में दुनिया-ए-फ़ानी से रुख़्सत हुए शहज़ाद, अचानक मौत की ख़बर से बिरादरी में पसरा मातम

भूल सुधार एवं विस्तृत सूचना

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि मोहल्ला सलेक विहार, शामली, उत्तर प्रदेश निवासी मोहम्मद शहज़ाद वल्द जनाब हाजी इश्तियाक साहब, उम्र तक़रीबन 38 वर्ष, का बीती रात अचानक तबीयत ख़राब होने के बाद इंतिक़ाल हो गया।

मिली जानकारी के मुताबिक आज दिन मंगलवार, 29 सितंबर 2026 की बीती रात तक़रीबन पौने एक बजे अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन उन्हें इलाज के लिए शामली के मशहूर डॉक्टर खुर्शीद अनवर के नर्सिंग होम पर लेकर पहुंचे, जहां इलाज के दौरान हार्ट फेल होने से कुछ ही मिनटों में क़ज़ा-ए-इलाही से उनका इंतिक़ाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मोहम्मद शहज़ाद के अचानक इंतिक़ाल की दर्दनाक ख़बर धीरे-धीरे पूरे शहर में आग की तरह फैलती चली गई। जिस किसी को भी इस दुखद हादसे की इत्तिला मिली, वह ग़मज़दा परिवार से मिलने और ताज़ियत के लिए उनके घर की ओर दौड़ पड़ा। अचानक हुई इस मौत ने परिवार, रिश्तेदारों, दोस्तों और बिरादराना हज़रात को गहरे सदमे में डाल दिया।

बताया गया कि रात तक़रीबन 2 से 3 बजे के बीच मृतक शहज़ाद के परिजन भी शामली पहुंच गए। परिजनों की राय के मुताबिक मैय्यत को क़स्बा गढ़ी पुख़्ता ले जाकर दफ़न किया जाना था। इसके बाद मृतक के बड़े भाई डॉक्टर मुन्तियाज़ अली साहब के कहने पर मैय्यत को क़स्बा गढ़ी पुख़्ता में मिस्त्री सगीर के कारखाने के पीछे स्थित मृतक के छोटे भाई फुरकान के मकान पर ले जाया गया।

मिली जानकारी के मुताबिक आज बाद नमाज़-ए-ज़ुहर ठीक 2 बजे जनाज़े की नमाज़ अदा किए जाने के बाद मैय्यत को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए मग़फ़िरत की दुआ करें और परिवार को इस मुश्किल घड़ी में सब्र-ओ-तसल्ली दें।

मैय्यत को सुपुर्द-ए-ख़ाक करते वक़्त दुआ

अल्लाह तआला मरहूम मोहम्मद शहज़ाद साहब की मुकम्मल मग़फ़िरत फरमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और गुनाहों को माफ़ फरमाए, उनके दरजात को बुलंद फरमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फरमाए।

या अल्लाह! मरहूम की क़ब्र को नूर से मुनव्वर फरमा, उसे उनके लिए जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे, क़ब्र की तंगी और अंधेरे से महफ़ूज़ फरमा, उन्हें सवालात-ए-क़ब्र में कामयाबी अता फरमा और अपनी रहमत के साये में जगह अता फरमा।

या अल्लाह! जब मरहूम को क़ब्र में उतारा जाए तो उनके लिए आसानी फरमा, उनके कदमों को साबित रख, उनकी तन्हाई को अपनी रहमत से दूर फरमा और उन्हें अपनी रज़ा और मग़फ़िरत नसीब फरमा।

ऐ अल्लाह! जो मिट्टी उनके जिस्म को ढांपे, उसी मिट्टी को उनके लिए सुकून, रहमत और नूर का ज़रिया बना दे।

परिवार के तमाम अफ़राद, रिश्तेदारों और अहले-बिरादरी को सब्र-ए-जमील अता फरमाए और इस सदमे को बर्दाश्त करने की ताक़त दे।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

तमाम हज़रात मरहूम के लिए ज़्यादा से ज़्यादा दुआ-ए-मग़फ़िरत और ईसाल-ए-सवाब करें।


मालूमात के लिए राब्ता

मैय्यत के बारे में और ज़्यादा मालूमात के लिए उनके बड़े भाई डॉक्टर मुन्तियाज़ साहब से नीचे दिए गए मोबाइल नंबरों पर राब्ता किया जा सकता है:

📞 9368119416
📞 9719823744


"मुल्तानी समाज" की तरफ़ से ताज़ियत

मुल्तानी समाज राष्ट्रीय समाचार पत्रिका की पूरी टीम इस ग़म की घड़ी में मरहूम मोहम्मद शहज़ाद साहब के परिवार के साथ है।

हम दुआगो हैं कि रब्बे-करीम मरहूम की मग़फ़िरत फरमाए, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में जगह अता फरमाए और तमाम अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।


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इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन मोहम्मद शहज़ाद के अचानक इंतिक़ाल से बिरादरी में पसरा रंज-ओ-ग़म — गढ़ी पुख्ता में सुपुर्द-ए-ख़ाक किए जाने की तैयारियाँ

शामली/गंगोह, 29 सितंबर 2026।
निहायत ही रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि क़स्बा गंगोह, ज़िला सहारनपुर के रहने वाले और फ़िलहाल मोहल्ला सलेक विहार, शामली, उत्तर प्रदेश में क़याम-पज़ीर मोहम्मद शहज़ाद साहब, जिन्हें लोग “अली मेडिकल स्टोर” के नाम से भी जानते थे, का आज मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को तक़रीबन 38 वर्ष की उम्र में अचानक इंतिक़ाल हो गया।

मिली जानकारी के मुताबिक़ आज लगभग 1 बजे अचानक तबीयत ख़राब होने पर उन्हें डॉक्टर खुर्शीद अनवर के हॉस्पिटल में इलाज के लिए ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा और क़ज़ा-ए-इलाही से उनका इंतिक़ाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मोहम्मद शहज़ाद के अचानक इंतिक़ाल की ख़बर से उनके अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, दोस्त-अहबाब और बिरादरी के लोगों में गहरा रंज-ओ-ग़म है। ख़बर लिखे जाने तक उनके घर वाले शामली पहुंच चुके थे और घर में मातम का माहौल है।

मैय्यत को दफनाने के बारे में 

परिवार और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब की ओर से मैय्यत को क़स्बा गढ़ी पुख़्ता जिला शामली ले जाकर वहीं सुपुर्द-ए-ख़ाक किए जाएंगे नमाज़-ए-जनाज़ा बाद नमाज़ जोहर अदा करके ठीक 2 बजे मैय्यत को किया जाएगा सपुर्द - ए - ख़ाक 

तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि मैय्यत के जनाज़े में शिरकत फ़रमाएं, नमाज़-ए-जनाज़ा अदा करें और मरहूम के हक़ में दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएं।

मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत

अल्लाह तआला मरहूम मोहम्मद शहज़ाद साहब की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और ग़लतियों को माफ़ फ़रमाए, उनकी नेकियों को क़ुबूल फ़रमाए और उन्हें अपनी रहमत-ओ-मग़फ़िरत के साए में जगह अता फ़रमाए।

या अल्लाह! उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा, उसे कुशादा फ़रमा और उन्हें रौज़ा-ए-जन्नत में से एक बाग़ बना दे। क़ब्र की तन्हाई में उनका हाफ़िज़-ओ-नासिर बन, उन्हें सवालात-ए-क़ब्र में कामयाबी अता फ़रमा और अपनी ख़ास रहमत से नवाज़।

दफ़्न के वक़्त की दुआ

जब मरहूम को क़ब्र में उतारा जाए तो या अल्लाह, उस आख़िरी मंज़िल को उनके लिए आसान फ़रमा। मिट्टी की इस आख़िरी आरामगाह को उनके लिए सुकून, रहमत और नूर का मक़ाम बना दे।

या अल्लाह! जो लोग अपने हाथों से मरहूम को क़ब्र में उतारें, उनके इस अमल को अपनी बारगाह में क़ुबूल फ़रमा और जो लोग मिट्टी दें, उनके हर मुट्ठी भर मिट्टी को मरहूम के लिए रहमत का सबब बना दे।

या रब्बुल आलमीन! मरहूम के तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा, उन्हें इस सदमे को बर्दाश्त करने की ताक़त दे और उनके दिलों को अपने ज़िक्र और अपनी रहमत से सुकून अता फ़रमा।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

तमाम हज़रात से गुज़ारिश है कि मरहूम के लिए सूरह-ए-फ़ातिहा, सूरह-ए-इख़लास और दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएं।

अल्लाह तआला मरहूम को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए।

आमीन सुम्मा आमीन।


मुल्तानी समाज की ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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Saturday, September 26, 2026

गुज़ारिश: तालीम को आम कीजिए, क्योंकि असली बदलाव इल्म से आता है

दौलत से सुविधाएँ खरीदी जा सकती हैं, मगर अदब, तहज़ीब, ईमानदारी, सुकून और इंसानियत नहीं—इन नेमतों की बुनियाद तालीम है

हमारा मुआशरा उस वक़्त खूबसूरत बनता है, जब उसमें अदब-ओ-तहज़ीब, बेफ़िक्री, सुकून, ईमानदारी, इल्म, शऊर और इंसानियत का बोलबाला हो। जब लोग एक-दूसरे का एहतराम करें, बातचीत में मिठास हो, घरों में सुकून हो, गलियों और मोहल्लों में पाकीज़ा माहौल हो और हर शख़्स दूसरे के दुख-दर्द को अपना समझकर उसके काम आए—तो ऐसा मुआशरा किसी जन्नत से कम नहीं होता।

लेकिन सवाल यह है कि क्या ये तमाम नेमतें सिर्फ़ दौलत और माल-ओ-दौलत से हासिल की जा सकती हैं?

यक़ीन जानिए—हरगिज़ नहीं।

दौलत इंसान को सहूलियतें दे सकती है, मगर अदब नहीं खरीद सकती।
दौलत घर बड़ा कर सकती है, मगर दिल बड़ा नहीं कर सकती।
दौलत सामान मुहैया करा सकती है, मगर इल्म, शऊर, तहज़ीब और सच्ची इंसानियत पैदा नहीं कर सकती।

इन तमाम खूबियों की बुनियाद तालीम है।

तालीम सिर्फ़ डिग्री का नाम नहीं

हमें तालीम का मतलब महज़ स्कूल, कॉलेज या डिग्री हासिल करना नहीं समझना चाहिए। असल तालीम वह है जो इंसान को अच्छा इंसान बनाना सिखाए, बड़ों का एहतराम, छोटों से मोहब्बत, पड़ोसी के हक़ की अदायगी, सच बोलने की आदत, मेहनत की क़द्र और समाज के लिए कुछ करने का जज़्बा पैदा करे।

तालीम इंसान के अंदर यह शऊर पैदा करती है कि वह अपने साथ-साथ अपने खानदान, बिरादरी, मुआशरे और मुल्क की तरक़्क़ी के बारे में भी सोचे।

बदलाव अपने घर से शुरू करना होगा

अगर हम सचमुच अपने मुआशरे में कोई बड़ा बदलाव देखना चाहते हैं तो शुरुआत किसी दूसरे से नहीं, अपने आप से करनी होगी।

हमें खुद से सवाल करना होगा—

मैंने तालीम के लिए अब तक क्या किया?
जो करना चाहिए था, वह क्यों नहीं किया?
आज और अभी से मैं क्या कर सकता हूँ?

और इसके बाद सिर्फ़ खुद तक सीमित न रहकर दूसरों को भी तालीम की तरफ़ लाने की कोशिश करनी होगी।

अपने आसपास नज़र डालिए।
हमारे पड़ोस में कितने बच्चे हैं?
हमारे रिश्तेदारों में कितने बच्चे पढ़ रहे हैं?
किस बच्चे की पढ़ाई आर्थिक परेशानी की वजह से रुक रही है?
किसे किताबों की ज़रूरत है?
किसे स्कूल की फीस की मदद चाहिए?
किसे सही मशवरे और रहनुमाई की ज़रूरत है?

अगर हम सिर्फ़ एक बच्चे की पढ़ाई की ज़िम्मेदारी उठाने का फैसला कर लें, तो यह भी एक बड़ी शुरुआत हो सकती है।

जिसके पास हैसियत है, वह किसी और का सहारा बने

हर शख़्स अपनी हैसियत के मुताबिक़ किसी बच्चे की मदद कर सकता है।

कोई फीस में मदद कर सकता है, कोई किताबें दिला सकता है, कोई यूनिफॉर्म और स्टेशनरी का इंतज़ाम कर सकता है, कोई स्कूल में दाख़िला दिलाने में मदद कर सकता है और कोई सिर्फ़ बच्चे की हौसला-अफ़ज़ाई करके उसे पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित कर सकता है।

और अगर किसी एक शख़्स के लिए यह सब करना मुश्किल हो, तो वह अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और साहिबे-हैसियत लोगों से मिलकर एक बच्चे की मदद का इंतज़ाम कर सकता है।

फिर एक शख़्स दूसरे को तैयार करे, दूसरा तीसरे को और तीसरा चौथे को।

यही छोटी-छोटी कोशिशें आगे चलकर एक बड़ी तहरीक बन सकती हैं।

तालीम आम होगी तो हर शोबे में हमारी मौजूदगी होगी

जब हमारी नई नस्ल तालीम हासिल करेगी तो आने वाले वक़्त में मुख़्तलिफ़ शोबों में डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, शिक्षक, प्रोफ़ेसर, अफ़सर, कारोबारी, वैज्ञानिक और दूसरे ज़िम्मेदार ओहदों पर काबिज़ लोग सामने आएँगे।

और यहीं से मुआशरे में वास्तविक बदलाव की शुरुआत होगी।

बड़े बदलाव हमेशा सिर्फ़ दौलत से नहीं आते। कई बार बदलाव के लिए इल्म, शऊर, क़ाबिलियत और ज़िम्मेदार ओहदों पर मौजूदगी ज़्यादा अहम होती है।

इसलिए हमारी कोशिश यह होनी चाहिए कि कोई बच्चा सिर्फ़ आर्थिक परेशानियों की वजह से तालीम से महरूम न रहे।

आइए, आज ही एक बच्चे की ज़िम्मेदारी लेते हैं

तालीम को आम करने के लिए किसी बड़े ऐलान का इंतज़ार मत कीजिए।

अपने घर से शुरुआत कीजिए।
अपने पड़ोस से शुरुआत कीजिए।
अपने रिश्तेदारों से शुरुआत कीजिए।
एक बच्चे से शुरुआत कीजिए।

अगर हर साहिबे-हैसियत शख़्स सिर्फ़ एक ज़रूरतमंद बच्चे की तालीम में मदद करने का अहद कर ले, तो देखते ही देखते यह कोशिश एक ऐसी ज़ंजीर बन सकती है जिसकी हर कड़ी किसी न किसी बच्चे के बेहतर मुस्तक़बिल से जुड़ी होगी।

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त हमारे दिलों में इल्म और तालीम की मोहब्बत पैदा फरमाए, हमारी औलाद को नेक, क़ाबिल और बा-अख़लाक़ बनाए और हमें अपनी बिरादरी तथा पूरे मुआशरे की बेहतरी के लिए काम करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

शुक्रिया।

आपका — गुलज़ार अहमद ‘गुलज़ार’


मुल्तानी समाज — विशेष प्रस्तुति

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और YouTube चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊनमहज़ 15 बरस की उम्र में दुनिया-ए-फ़ानी से रुख़्सत हुई मासूम — बज्जन खानदान में पसरा ग़म, हर आँख हुई अश्कबार

बड़ौत, जनपद बागपत।
निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिल को सदमा पहुँचा देने वाली इत्तिला है कि आज शनिवार, 26 सितंबर 2026 को जनाब मौलाना अब्दुल जब्बार साहब के बड़े भाई मरहूम अब्दुल गफूर साहब (बज्जन खानदान) की पोती तथा मोहम्मद शुऐब साहब, पूर्व नायब सचिव, अंजुमन मुल्तानी बड़ौत, की 15 वर्षीय बेटी का अचानक तबीयत बिगड़ने और बीपी डाउन हो जाने के बाद क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मासूम उम्र में इस तरह अचानक दुनिया से रुख़्सत हो जाने की ख़बर ने खानदान, रिश्तेदारों, अहबाब और मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी में गहरे रंज-ओ-ग़म की लहर दौड़ा दी है। इस सदमे के मौक़े पर हर शख़्स की ज़बान पर मरहूमा के लिए मग़फिरत की दुआ और उनके अहले-ख़ाना के लिए सब्र की दुआ है।

आज रात 11 बजे होगी तदफ़ीन

मिली इत्तिला के मुताबिक़ मरहूमा को आज रात 11 बजे सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फिरत करें और ग़मज़दा खानदान के साथ शरीक-ए-ग़म हों।

जनाज़ा व तदफ़ीन का मक़ाम:
कब्रिस्तान ग़ौरे ग़रीबा, हीरोज़ कॉलेज के पास, बड़का रोड, बड़ौत, जनपद बागपत।

मग़फिरत और तदफ़ीन के मौक़े की दुआ

अल्लाह तआला इस मासूम मरहूमा की मुकम्मल मग़फिरत फरमाए, उनके तमाम सग़ीरा-कबीरा गुनाहों को माफ़ फरमाए, उन्हें अपनी रहमत के साए में जगह अता फरमाए और जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम नसीब फरमाए।

या अल्लाह! जब इस मासूम को कब्र में उतारा जाए तो उसकी कब्र को नूर से भर दे। कब्र को उसके लिए जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे, उसे तन्हाई और वहशत से महफ़ूज़ फरमा और सवालात-ए-कब्र में आसानी अता फरमा।

या रब्बुल आलमीन! जब मिट्टी दी जाए तो हर मुट्ठी मिट्टी को उसके लिए रहमत और सुकून का ज़रिया बना दे। उसकी कब्र को कुशादा फरमा, उसमें अपनी रहमत और नूर नाज़िल फरमा और उसे रोज़-ए-महशर अपने नेक बंदों के साथ उठाना।

अल्लाह तआला वालिदैन, दादा-दादी, तमाम अहले-ख़ाना और रिश्तेदारों को इस अज़ीम सदमे पर सब्र-ए-जमील अता फरमाए और इस सदमे को उनके लिए अज्र-ए-अज़ीम का ज़रिया बनाए।

ऐ अल्लाह! मरहूमा को अपनी रहमत में जगह दे, उनके दर्जात बुलंद फरमा और अहले-ख़ाना को सब्र व इस्तिक़ामत अता फरमा।

आमीन या रब्बुल आलमीन। 🤲

राब्ता

मैय्यत के सिलसिले में मज़ीद मालूमात के लिए मौलाना अब्दुल जब्बार साहब से मोबाइल नंबर 9310186111 पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है।


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