रमज़ान की बरकतें और बोर्ड इम्तिहान की अहमियत — इस बार दोनों साथ-साथ दस्तक दे रहे हैं। एक तरफ़ रोज़े, तरावीह और इबादत का महीना; दूसरी तरफ़ मेहनत, एकाग्रता और भविष्य तय करने वाले इम्तिहान। ऐसे में ज़रूरी है कि हमारे मुमतहन (परीक्षार्थी) समझदारी, एहतियात और बेहतर प्लानिंग के साथ आगे बढ़ें।
यह दौर सिर्फ़ इम्तिहान का नहीं, बल्कि सब्र, तवक्कुल और तवाज़ुन (संतुलन) का भी है।
🌅 सेहरी और सुबह की तैयारी: लापरवाही नहीं, एहतियात ज़रूरी
- जिन बच्चों का पेपर सुबह की शिफ्ट में हो, वो सेहरी के बाद लेटने की कोशिश न करें। लेटकर पढ़ना भी ख़तरे से खाली नहीं — झपकी लग सकती है और पेपर छूटने तक की नौबत आ सकती है।
- वालिदैन भी तब तक आराम न करें जब तक बच्चे इम्तिहान के लिए रवाना न हो जाएँ। यह छोटी सी निगरानी बड़े नुक़सान से बचा सकती है।
- अपना मोबाइल साइलेंट न रखें, ताकि किसी ज़रूरी सूचना या साथी छात्रों से राब्ता आसानी से हो सके।
☕ सेहत का ख्याल: रोज़ा भी मुकम्मल, पेपर भी बेहतर
- जो बच्चे चाय पीने के आदी हैं, वो सेहरी में चाय ज़रूर लें। अचानक परहेज़ से सरदर्द या सुस्ती हो सकती है, जिसका असर सीधे इम्तिहान पर पड़ेगा।
- जो किसी भी तरह की दवा ले रहे हों, वह सेहरी में दवा लेना न भूलें। अगर किसी दवा से नींद आने की शिकायत हो, तो डॉक्टर से मशविरा कर उसके मुतबादिल (सब्सटिट्यूट) का इंतज़ाम पहले से कर लें।
- सेहरी और इफ़्तार में हल्का और पौष्टिक खाना लें। फल, दूध, अंडा, बादाम और मुरब्बा शामिल करें।
- बाज़ार के शरबत और ठंडे जूस से परहेज़ करें। अगर जूस लें तो घर का बना हुआ और सामान्य तापमान का हो।
- ऐसी चीज़ें बिल्कुल न खाएँ जिनसे पेट या गले की तकलीफ़ का अंदेशा हो।
📝 पेपर के बाद का रवैया: सुकून रखिए, आगे बढ़िए
- एग्ज़ाम से लौटकर सवालों को टैली करने का कोई फायदा नहीं। “कितना सही, कितना ग़लत” — यह सोच सिर्फ़ टेंशन बढ़ाती है।
- जो पेपर हो चुका, उस पर डिस्कशन न करें। हाँ, अगले पेपर की तैयारी पर बातचीत ज़रूर करें।
- घर लौटते ही किताबों पर न बैठ जाएँ। कुछ देर आराम करें, थोड़ी नींद लें, फिर तरोताज़ा होकर तैयारी शुरू करें।
🌤️ मौसम और एहतियात
रमज़ान का मतलब सिर्फ़ गर्मी नहीं। सुबह की ठंड अब भी बाकी है। घर में और इम्तिहान सेंटर जाते वक्त ठंड से बचाव ज़रूरी है।ख़ास तौर से नौजवान लड़के — गिरेबान खोलकर और बाइक को “हवाई जहाज़” बनाकर सेंटर पहुँचने का जोश थोड़ा कम रखें। सेहत सलामत रहेगी तो इम्तिहान भी बेहतर होगा।
🌙 रातों का निज़ाम और पढ़ाई का रूटीन
- रमज़ान में देर रात तक जागने की आदत से बचें, खासकर इम्तिहान के दिनों में।
- जिस दिन पेपर न भी हो, उस दिन भी सेहरी के बाद सोने के बजाय पढ़ाई का रूटीन बनाएं। सुबह का वक़्त याददाश्त के लिए सबसे मुफीद होता है।
👨👩👧👦 वालिदैन की ज़िम्मेदारी
बच्चों के साथ-साथ पैरेंट्स भी अपनी ज़िम्मेदारी समझें। घर का माहौल इम्तिहान की तैयारी के अनुकूल हो।
रमज़ान की रौनक़ अपनी जगह, मगर पूरा ध्यान पकौड़ी और कचौरी पर ही रहे — यह अंदाज़ बच्चों की मेहनत पर भारी पड़ सकता है।
✨ दुआ और हौसला
रमज़ान सब्र और बरकत का महीना है। इम्तिहान मेहनत और कामयाबी का रास्ता। जब दोनों एक साथ हों तो यह यक़ीन रखिए कि अल्लाह तआला की रहमत भी साथ होती है।
मेहनत कीजिए, एहतियात बरतिए, और बेफ़िक्र होकर आगे बढ़िए।
अल्लाह तआला तमाम बच्चों को कामयाबी, सेहत और रोशन मुस्तक़बिल अता फ़रमाए। आमीन।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट
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