यह न्यूज़ चैनल समर्पित है पैदाइशी इंजीनियर लोहार बढ़ई ( मुल्तानी समाज) को , इस बिरादरी ने राजा महाराजाओं को युद्ध में लड़ने के लिए अस्त्र शस्त्र से लेकर देश के किसानों को खेती करने के लिए आधुनिक यंत्र बनाकर इस देश को सोने की चिड़िया बनाने में मुल्तानी समाज की अहम भूमिका रही है लेकिन मुल्तानी समाज की हर सरकार ने अनदेखी ही की है सरकारों को मुल्तानी समाज का देशभक्त चेहरा दिखा कर इस चैनल के माध्यम से समाज की मुख्यधारा में शामिल कराना ही हमारा अहम मकसद है।
Friday, October 2, 2026
2 अक्टूबर: गांधी जयंती, शास्त्री जयंती और 1187 में बैतुल मुक़द्दस की फ़तह—एक तारीख़, इतिहास के कई अहम पड़ाव
Thursday, October 1, 2026
रिश्तों की तलाश अब अपनी बिरादरी में होगी आसान — मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी के लिए महफ़ूज़ ऑनलाइन मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म फिर शुरू करने की तैयारी
तालीमयाफ़्ता, मुलाज़मतपेशा और कारोबारी नौजवानों के लिए मुनासिब रिश्तों की तलाश आसान बनाने की पहल — “मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट” की नई कोशिश
ज़मीर आलम, प्रधान संपादक की ख़ास रिपोर्ट | उत्तर प्रदेश डेस्क
नई दिल्ली/उत्तर प्रदेश। मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी के शादी के क़ाबिल नौजवानों और बच्चियों के लिए मुनासिब रिश्तों की तलाश को आसान, महफ़ूज़ और भरोसेमंद बनाने की दिशा में “मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट” रजिस्टर्ड ऑल इंडिया की जानिब से एक बार फिर ऑनलाइन रिश्तों का एक मज़बूत और महफ़ूज़ प्लेटफॉर्म शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
बिरादरी के फ़िक्रमंद और बेदार अफ़राद की तरफ़ से लगातार यह बात सामने आ रही है कि आज हमारी बिरादरी में बड़ी तादाद ऐसे नौजवानों और बच्चियों की है जो आला तालीम हासिल कर चुके हैं, सरकारी व निजी मुलाज़मत से जुड़े हैं, अपने कारोबार में कामयाब हैं और अपनी ज़िंदगी के मुस्तकबिल को लेकर संजीदा हैं, लेकिन उनके लिए अपनी ही बिरादरी में मुनासिब रिश्तों की जानकारी एक जगह आसानी से दस्तयाब नहीं है।
इसी वजह से कई घरानों को अपनी औलाद के लिए मुनासिब रिश्ता तलाश करने में दुश्वारी पेश आती है और मजबूरन उन्हें दूसरे मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म का सहारा लेना पड़ता है।
पहले भी रिश्तों को जोड़ने की कोशिश कर चुका है ट्रस्ट
यह पहली बार नहीं है कि “मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट” की तरफ़ से बिरादरी के रिश्तों को आसान बनाने की कोशिश की जा रही है।
ट्रस्ट की जानिब से पहले भी ऑनलाइन रिश्तों के लिए व्हाट्सऐप ग्रुप, टेलीग्राम ग्रुप और “रिश्तों की दुनिया” के नाम से वेबसाइट शुरू कराई गई थी, ताकि मुल्क के मुख़्तलिफ़ शहरों और ज़िलों में रहने वाले मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई खानदान एक-दूसरे तक पहुँच सकें।
लेकिन उस वक़्त बिरादरी का उतना बड़ा तबक़ा एक साथ इन प्लेटफॉर्म से नहीं जुड़ सका था, जितना बड़ा तबक़ा आज सोशल मीडिया और डिजिटल ज़राए के ज़रिये “मुल्तानी समाज” से जुड़ा हुआ है।
इसी बदलते हुए माहौल को देखते हुए अब बिरादरी के लिए एक नए, मुनज़्ज़म, महफ़ूज़ और भरोसेमंद डिजिटल रिश्तों के प्लेटफॉर्म की ज़रूरत महसूस की जा रही है।
तालीमयाफ़्ता और मुलाज़मतपेशा बच्चों के रिश्तों को लेकर बढ़ी फ़िक्र
“मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट” के फाउंडर ज़मीर आलम को बिरादरी के कई बेदार और फ़िक्रमंद अफ़राद ने इस अहम मसले की तरफ़ तवज्जो दिलाई है।
उनका कहना है कि आज बिरादरी में ऐसे बहुत से नौजवान और बच्चियाँ हैं जो डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, शिक्षक, बैंक कर्मचारी, सरकारी मुलाज़िम, आईटी प्रोफेशनल, कारोबारी और दूसरे मुख़्तलिफ़ शोबों से जुड़े हुए हैं।
लेकिन अफ़सोस की बात यह है कि उनकी तालीम, काबिलियत और पेशे के मुताबिक़ बिरादरी के अंदर मुनासिब रिश्तों की जानकारी एक जगह मौजूद नहीं है।
नतीजा यह निकल रहा है कि कई घराने रिश्ते तलाश करने के लिए आम मैट्रिमोनियल वेबसाइटों और ऐप्स का रुख़ कर रहे हैं।
दूसरी मैट्रिमोनियल वेबसाइटों से रिश्ते तलाश करने की सुविधा के साथ कुछ फ़िक्रें भी
आज इंटरनेट पर सैकड़ों मैट्रिमोनियल वेबसाइट और मोबाइल ऐप मौजूद हैं। इन प्लेटफॉर्म की मदद से युवक-युवतियों और उनके घरवालों को बड़ी तादाद में रिश्तों की जानकारी हासिल हो सकती है।
लेकिन बिरादरी के फ़िक्रमंद अफ़राद का कहना है कि जब अपनी बिरादरी का कोई मजबूत और मुनासिब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म मौजूद नहीं होता, तो नौजवान आम मैट्रिमोनियल वेबसाइटों का इस्तेमाल करने लगते हैं।
इन वेबसाइटों पर मुख़्तलिफ़ बिरादरियों, मज़ाहिब, ज़बानों, इलाक़ों और सामाजिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक़ रखने वाले लोगों की प्रोफाइल मौजूद होती हैं।
ऐसे में नौजवान अपनी पसंद के मुताबिक़ किसी भी प्रोफाइल से संपर्क कर सकते हैं, बातचीत आगे बढ़ा सकते हैं और कई बार परिवार वालों को बाद में इसकी जानकारी होती है।
बिरादरी के लोगों की फ़िक्र यह है कि अगर हमारी अपनी बिरादरी के मुनासिब रिश्ते एक जगह आसानी से दस्तयाब हों, तो हमारे घरानों को अपनी औलाद के लिए रिश्ते तलाश करने में अधिक सहूलत मिल सकती है।
यहाँ यह बात भी साफ़ है कि हर गैर-बिरादरी शादी को किसी एक वेबसाइट या ऐप का नतीजा नहीं कहा जा सकता। शादी का फैसला कई व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक असबाब की बुनियाद पर होता है।
लेकिन बिरादरी के फ़िक्रमंद अफ़राद का मानना है कि अपनी बिरादरी के अंदर मुनासिब रिश्तों की जानकारी आसानी से दस्तयाब कराना इस सिलसिले में एक सकारात्मक क़दम हो सकता है।
अपनी बिरादरी की मैट्रिमोनियल वेबसाइट के क्या फ़ायदे होंगे?
अगर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी के लिए अपना महफ़ूज़ ऑनलाइन मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म तैयार किया जाता है तो उसका मक़सद सिर्फ़ लड़के और लड़की की प्रोफाइल दिखाना नहीं, बल्कि दो खानदानों को एक-दूसरे तक पहुँचाना होना चाहिए।
इस प्लेटफॉर्म में कई अहम सहूलियतें शामिल की जा सकती हैं—
◆ सिर्फ़ बिरादरी के रिश्तों पर तवज्जो
प्लेटफॉर्म का बुनियादी मक़सद मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी के खानदानों के बीच मुनासिब रिश्तों की तलाश को आसान बनाना हो।
◆ तालीम और पेशे की पूरी जानकारी
लड़के या लड़की की तालीम, मुलाज़मत, कारोबार, पेशा और शहर आदि की बुनियादी जानकारी उपलब्ध हो, ताकि घराने अपनी ज़रूरत के मुताबिक़ रिश्ता तलाश कर सकें।
◆ घरवालों की निगरानी में बातचीत
रिश्ते की शुरुआती बातचीत घरवालों या अधिकृत सरपरस्त के ज़रिये शुरू कराने की व्यवस्था हो, ताकि अनजान अफ़राद के बीच सीधे और बे-लगाम संपर्क की गुंजाइश कम हो।
◆ मोबाइल नंबर और निजी जानकारी की हिफ़ाज़त
किसी भी लड़के या लड़की का मोबाइल नंबर, ईमेल, पूरा पता या दूसरी निजी जानकारी खुले तौर पर न दिखाई जाए।
ज़रूरत के मुताबिक़ अधिकृत परिवारों को ही जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
◆ प्रोफाइल की तस्दीक़
फर्जी प्रोफाइल और गलत जानकारी से बचने के लिए मोबाइल नंबर, पहचान और ज़रूरी दस्तावेज़ों की तस्दीक़ का इंतज़ाम किया जा सकता है।
◆ शहर और स्टेट व ज़िले के हिसाब से रिश्ते
दिल्ली , उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात और मुल्क के दूसरे शहरों में रहने वाले खानदान अपनी ज़रूरत के मुताबिक़ रिश्ते तलाश कर सकें।
◆ तालीमयाफ़्ता और प्रोफेशनल नौजवानों के लिए अलग कैटेगरी
डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, शिक्षक, सरकारी मुलाज़िम, बैंक कर्मचारी, आईटी प्रोफेशनल, कारोबारी और दूसरे पेशों से जुड़े नौजवानों की प्रोफाइल आसानी से तलाश की जा सके।
◆ रिश्ता पसंद आने पर परिवार से संपर्क
लड़के या लड़की को सीधे संपर्क में लाने के बजाय पहले दोनों खानदानों के बीच बातचीत का रास्ता बनाया जा सके।
◆ रिश्ता तय होते ही प्रोफाइल बंद
जिस लड़के या लड़की का रिश्ता तय हो जाए, उसकी प्रोफाइल को तुरंत बंद या निष्क्रिय किया जा सके, ताकि बाद में अनावश्यक संपर्क न हो।
बिरादरी की नई नस्ल के लिए नई ज़रूरत
आज का ज़माना डिजिटल है। कारोबार से लेकर तालीम, मुलाज़मत, बैंकिंग और सामाजिक रिश्तों तक बहुत कुछ ऑनलाइन हो चुका है।
ऐसे में यह ज़रूरी है कि हमारी बिरादरी भी अपनी नई नस्ल की ज़रूरतों को समझे और बिरादरी की रवायत और खानदानी उसूलों के साथ आधुनिक तकनीक का ऐसा इस्तेमाल करे जिससे रिश्ते तलाश करने का काम आसान भी हो और महफ़ूज़ भी।
अपनी बिरादरी का मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म इसी सोच के साथ तैयार किया जा सकता है।
इसका मक़सद नौजवानों की ज़िंदगी के फैसले अपने हाथ में लेना नहीं, बल्कि उन्हें अपनी ही बिरादरी के अंदर मौजूद मुनासिब रिश्तों की जानकारी और बेहतर विकल्प उपलब्ध कराना होना चाहिए।
नई नस्ल की पसंद और घरवालों की रज़ामंदी—दोनों का एहतराम
बिरादरी के बुज़ुर्गों और ज़िम्मेदार अफ़राद के सामने आज एक अहम सवाल यह भी है कि नई नस्ल की पसंद और घरवालों की रज़ामंदी के बीच बेहतर तालमेल किस तरह पैदा किया जाए।
आज का नौजवान अपनी तालीम, नौकरी और कारोबार के साथ-साथ अपने मुस्तकबिल के जीवनसाथी को लेकर भी अपनी राय रखता है।
अगर उसे अपनी ही बिरादरी में तालीमयाफ़्ता, समझदार और हममिज़ाज रिश्ते आसानी से देखने और समझने का मौक़ा मिले, तो घरवालों और बच्चों के बीच बातचीत का रास्ता भी आसान हो सकता है।
हर निकाह की बुनियाद रज़ामंदी, आपसी इज़्ज़त, भरोसे, अच्छे अख़लाक़ और खानदानी समझ पर होनी चाहिए।
इसलिए प्रस्तावित प्लेटफॉर्म का मक़सद किसी पर रिश्ता या निकाह थोपना नहीं, बल्कि मुनासिब रिश्तों तक पहुँच आसान बनाना होना चाहिए।
बिरादरी की आबादी और मुस्तकबिल को लेकर फ़िक्रमंदी
बिरादरी के कई फ़िक्रमंद अफ़राद का कहना है कि अगर शादी के क़ाबिल बच्चों के लिए बिरादरी के अंदर मुनासिब रिश्तों की तलाश का कोई आसान ज़रिया मौजूद नहीं होगा, तो आने वाले वक़्त में इसका असर बिरादरी के सामाजिक ताने-बाने पर पड़ सकता है।
बिरादरी के बीच यह बात भी कही जाती रही है कि अगर एक बेटी बिरादरी से बाहर निकाह करती है तो उसका असर आने वाली नस्लों के बिरादरी से सामाजिक जुड़ाव पर भी पड़ सकता है।
इसी सिलसिले में कुछ लोग यह अनुमान पेश करते हैं कि एक लड़की के गैर-बिरादरी निकाह का असर लंबे अरसे में बिरादरी की आबादी और सामाजिक ताक़त पर बहुत बड़ा पड़ सकता है।
हालाँकि “एक लड़की के गैर-बिरादरी निकाह से एक लाख की आबादी कम हो जाती है” जैसी बात को किसी सरकारी या प्रमाणित जनगणना के आँकड़े के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता। यह बिरादरी के बीच व्यक्त की जाने वाली एक सामाजिक फ़िक्र और अनुमान है।
असल ज़रूरत यह है कि हमारी बिरादरी के बच्चों को अपनी बिरादरी में ही मुनासिब, तालीमयाफ़्ता और अच्छे खानदानों के रिश्ते तलाश करने का पर्याप्त मौक़ा मिले।
रिश्ते जोड़ना सिर्फ़ दो अफ़राद को जोड़ना नहीं
एक अच्छा रिश्ता सिर्फ़ लड़के और लड़की का रिश्ता नहीं होता, बल्कि दो खानदानों, दो घरों और आने वाली नस्लों के बीच एक नया रिश्ता कायम करता है।
इसी सोच के तहत “मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट” की तरफ़ से बिरादरी के लिए एक ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म की ज़रूरत महसूस की जा रही है जो महफ़ूज़ भी हो, भरोसेमंद भी हो और बिरादरी के हर तबक़े के लिए आसानी से इस्तेमाल करने लायक़ भी हो।
ख़ास तौर पर ऐसे नौजवान जो आज तालीम हासिल करके डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, शिक्षक, सरकारी मुलाज़िम, प्राइवेट सेक्टर के प्रोफेशनल या कारोबारी बन चुके हैं, उनके लिए बिरादरी के अंदर मुनासिब रिश्तों की तलाश का दायरा बढ़ाना इस प्लेटफॉर्म का अहम मक़सद हो सकता है।
बिरादरी के चौधरियों और जागरूक अफ़राद से तवज्जो की अपील
आज ज़रूरत है कि बिरादरी के चौधरी, बुज़ुर्ग, समाजी रहनुमा, तालीमयाफ़्ता नौजवान, कारोबारी और हर फ़िक्रमंद घराना इस अहम मसले पर संजीदगी से ग़ौर करे।
हमारी कोशिश किसी युवक या युवती की निजी ज़िंदगी और पसंद में दख़ल देना नहीं है।
हमारा मक़सद सिर्फ़ इतना है कि—
अगर हमारी अपनी बिरादरी में अच्छे, तालीमयाफ़्ता, शरीफ़ और मुनासिब रिश्ते मौजूद हैं तो उनकी जानकारी हमारी नई नस्ल तक भी आसानी से पहुँचे।
ताकि किसी घराने को सिर्फ़ इसलिए दूसरे प्लेटफॉर्म का सहारा न लेना पड़े कि उसे अपनी बिरादरी में मुनासिब रिश्ता तलाश करने का कोई आसान ज़रिया उपलब्ध नहीं था।
मुल्तानी बिरादरी की एकजुटता, हमारी नई नस्ल की बेहतरी और आने वाली नस्लों का मुस्तकबिल—हम सबकी साझा ज़िम्मेदारी है।
मुल्तानी समाज — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान
वज़ारत-ए-इत्तेलाआत व नशरियात, हुकूमत-ए-हिंद से पंजीकृत, मुल्क की दारुल-हुकूमत नई दिल्ली से शाया होने वाली, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।
अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून, पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना या अपने कारोबार का इश्तिहार क़ौमी सतह पर शाया या प्रसारित करवाना चाहते हैं तो बराए मेहरबानी नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।
📞 9410652990
📞 8010884848
आपका एतमाद ही हमारी सबसे बड़ी ताक़त है।
“मुल्तानी समाज” — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।
🌙 जश्ने “मुल्तानी-डे” के मौक़े पर बिरादरी के लिए ख़ुशख़बरी
अपना नाम, शहर और तस्वीर भेजिए और पाइए बिल्कुल मुफ़्त ख़ूबसूरत पोस्टर
पैदाइशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादराना हज़रात के लिए ख़ास पैग़ाम
12 नवंबर को मनाए जाने वाले जश्ने “मुल्तानी-डे” के मुबारक मौक़े पर मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट और “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका की जानिब से गुज़िश्ता वर्षों की तरह इस साल भी एक ख़ास और ख़ूबसूरत मुहिम का आग़ाज़ किया गया है।
इस मुहिम का मक़सद सिर्फ़ पोस्टर बनाना नहीं, बल्कि मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी के इस ख़ास दिन की जानकारी को मुल्क और दुनिया के कोने-कोने तक पहुँचाना, बिरादरी की यकजहती, पहचान और भाईचारे को मज़बूत करना है।
📢 आप भी इस ख़ूबसूरत मुहिम का हिस्सा बनिए
अगर आप भी जश्ने “मुल्तानी-डे” के मौक़े पर अपने नाम और अपने शहर के नाम के साथ एक ख़ूबसूरत पोस्टर बनवाना चाहते हैं, तो आपको इसके लिए कोई फ़ीस अदा नहीं करनी होगी।
आपको सिर्फ़ अपना:
- पूरा नाम
- अपने शहर/ज़िले का नाम
- पासपोर्ट साइज़ की हालिया साफ़ तस्वीर
व्हाट्सऐप के ज़रिए “मुल्तानी समाज” हेल्पलाइन नंबर 8010884848 पर भेजना है।
इसके बाद “मुल्तानी समाज” की टीम आपके नाम, शहर और तस्वीर के साथ जश्ने “मुल्तानी-डे” का पोस्टर बिल्कुल मुफ़्त तैयार करके आपको व्हाट्सऐप पर भेजेगी।
🌍 आपकी तस्वीर, आपकी पहचान और पूरी दुनिया तक बिरादरी का पैग़ाम
आपके लिए तैयार किया गया पोस्टर “मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट” तथा “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर भी प्रकाशित किया जाएगा, ताकि जश्ने “मुल्तानी-डे” का पैग़ाम ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँच सके।
यह मुहिम बिरादरी के हर उस फ़र्द को जोड़ने की एक कोशिश है जो अपनी मुल्तानी पहचान, अपनी बिरादराना रवायत और अपनी आने वाली नस्लों के लिए इस विरसे को महफ़ूज़ रखने का जज़्बा रखता है।
🤝 आइए, मिलकर अपनी पहचान को मज़बूत करें
आज के दौर में सोशल मीडिया किसी भी पैग़ाम को दूर-दराज़ तक पहुँचाने का एक अहम ज़रिया बन चुका है। ऐसे में आपका एक पोस्टर भी आपकी पहचान के साथ जश्ने “मुल्तानी-डे” का पैग़ाम सैकड़ों और हज़ारों लोगों तक पहुँचा सकता है।
इसलिए देर न कीजिए।
आज ही अपना नाम, अपने शहर का नाम और अपनी पासपोर्ट साइज़ की नवीनतम तस्वीर व्हाट्सऐप करें।
📱 मुल्तानी समाज हेल्पलाइन:
8010884848
और पाइए—
जश्ने “मुल्तानी-डे” का आपका ख़ास पोस्टर, बिल्कुल मुफ़्त।
🕌 जश्ने “मुल्तानी-डे” — अपनी पहचान, अपनी बिरादरी, अपना जश्न
यह सिर्फ़ एक दिन नहीं, बल्कि मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की पहचान, आपसी मोहब्बत, भाईचारे और बिरादराना यकजहती को याद करने और उसे अगली नस्ल तक पहुँचाने का एक ज़रिया है।
आइए, इस मुबारक मौक़े पर हम सब मिलकर अपनी बिरादरी की आवाज़ को मज़बूत करें और दुनिया को अपनी पहचान से रूबरू कराएँ।
📰 “मुल्तानी समाज” की ख़ास रिपोर्ट
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदाइशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।
📣 अपनी ख़बर क़ौमी सतह तक पहुँचाएँ
अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार (विज्ञापन) क़ौमी सतह पर शाया या प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो बराए मेहरबानी इन नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ:
📞 9410652990
📞 8010884848
आपका एतमाद ही हमारी सबसे बड़ी ताक़त है।
“मुल्तानी समाज”
अपनी बिरादरी की आवाज़ — अपनी पहचान।
Wednesday, September 30, 2026
हर खुशी का दिन बना ‘मुल्तानी-डे’: 12 नवंबर को सगाई, निकाह और अकीकाह की खुशियाँ मनाने का बढ़ता रुझान
मुल्तानी समाज में नई रिवायत ने पकड़ी रफ़्तार, बिरादरी के घरों में 12 नवंबर को जश्न की तैयारियाँ
नई दिल्ली/उत्तर प्रदेश।
पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी में अपनी सामूहिक पहचान, भाईचारे और खुशियों को एक-दूसरे से जोड़ने की एक खूबसूरत रिवायत लगातार मज़बूत होती जा रही है। बिरादरी के अनेक परिवार अब अपने घरों में होने वाली खुशियों—सगाई, निकाह, अकीकाह और दीगर खुशी के मौकों—को 12 नवंबर यानी “मुल्तानी-डे” के मुबारक दिन के साथ जोड़ने लगे हैं।
बिरादरी के लिए यह दिन महज़ एक तारीख़ नहीं, बल्कि अपनी कौमी पहचान, इत्तेहाद, भाईचारे और आपसी मोहब्बत के इज़हार का एक खास मौक़ा बनता जा रहा है।
12 नवंबर से जुड़ी है ‘मुल्तानी-डे’ की खास पहचान
पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी की देश की राजधानी नई दिल्ली से संचालित “मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट” के मुताबिक, राष्ट्रीय स्तर पर बिरादरी की आवाज़ को एक मंच देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय समाचार पत्रिका “मुल्तानी समाज” का पंजीकरण 12 नवंबर को हुआ था।
इसी सिलसिले में ट्रस्ट की ओर से यह ऐलान किया गया कि हर वर्ष पत्रिका के राष्ट्रीय अधिवेशन को “मुल्तानी-डे” के नाम से मनाया जाएगा। इसके बाद से बिरादरी के लोग अपने-अपने गाँव, कस्बों और शहरों में अपने घरों तथा सामाजिक स्तर पर इस दिन को खुशी और मिलन के अवसर के रूप में मनाते आ रहे हैं।
समय के साथ यह दिन बिरादरी के बीच एक सामूहिक पहचान और खुशी के प्रतीक के तौर पर अपनी जगह बनाता गया।
अब निकाह से लेकर अकीकाह तक, खुशियों को ‘मुल्तानी-डे’ से जोड़ने की पहल
इस रिवायत को अब एक नई दिशा मिलती दिखाई दे रही है। बिरादरी के कई परिवार अपने घर में आने वाली खुशियों को 12 नवंबर के मुबारक मौके से जोड़ने लगे हैं।
कहीं सगाई की तारीख़ 12 नवंबर रखी जा रही है तो कहीं निकाह और अकीकाह जैसे मुबारक मौकों को इसी दिन मनाने की तैयारियाँ की जा रही हैं। इस तरह व्यक्तिगत खुशी धीरे-धीरे सामूहिक खुशी में बदलती दिखाई दे रही है।
इस पहल की खूबसूरती यह है कि एक परिवार की खुशी को बिरादरी के दूसरे परिवार भी अपनी खुशी समझकर उसमें शरीक हो सकते हैं। यही जज़्बा किसी भी बिरादरी के सामाजिक रिश्तों को मज़बूत करने में अहम किरदार अदा करता है।
एक तारीख़, एक पहचान और हजारों खुशियाँ
12 नवंबर को लेकर बिरादरी में बढ़ता यह रुझान आने वाले समय में एक ऐसी सामाजिक रिवायत की शक्ल ले सकता है, जिसमें मुल्तानी परिवार अपने घर की खुशियों को एक साझा दिन के साथ जोड़कर पूरी बिरादरी को उस खुशी का हिस्सा बनाएं।
सगाई हो, निकाह हो, अकीकाह हो या किसी और खुशी का मौका—अगर इन खुशियों के साथ “मुल्तानी-डे” का नाम जुड़ता है तो यह दिन परिवार की खुशी के साथ-साथ बिरादरी की एकजुटता और आपसी मोहब्बत का भी प्रतीक बन सकता है।
बिरादरी की नई नस्ल के लिए भी बन सकता है पहचान का माध्यम
आज के दौर में जब नई पीढ़ी अपनी पारिवारिक और बिरादराना रवायतों से जुड़ने के लिए नए माध्यम तलाश रही है, ऐसे सामूहिक आयोजन उन्हें अपनी जड़ों, अपनी तारीख़ और अपनी सामाजिक पहचान से जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
“मुल्तानी-डे” को खुशियों से जोड़ने की यह पहल अगर मोहब्बत, भाईचारे और आपसी इत्तेहाद के साथ आगे बढ़ती है, तो यह आने वाली नस्लों के लिए भी एक यादगार सामाजिक रिवायत बन सकती है।
बिरादरी के लोगों का कहना है कि खुशी चाहे छोटी हो या बड़ी, अगर उसमें अपने लोगों की शिरकत और दुआएँ शामिल हो जाएँ तो उसकी खुशी कई गुना बढ़ जाती है। शायद यही वजह है कि अब कई परिवार अपनी खुशियों के लिए 12 नवंबर को एक खास दिन के तौर पर देखने लगे हैं।
‘मुल्तानी समाज’ की ख़ास रिपोर्ट
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, देश की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की राष्ट्रीय समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।
आपकी आवाज़, आपकी ख़बर—कौमी सतह तक
अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार (विज्ञापन) कौमी सतह पर शाया अथवा प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो बराए मेहरबानी नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।
📞 9410652990
📞 8010884848
आपका एतमाद ही हमारी सबसे बड़ी ताक़त है।
“मुल्तानी समाज”
अपनी बिरादरी की आवाज़ — अपनी पहचान।
एक ही रात मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी के दो घरों में पसरा मातम
नजीबाबाद और बागपत से दो अफ़राद के इंतक़ाल की दर्दनाक इत्तिला, बिरादराना हज़रात से जनाज़े में शिरकत और मरहूमीन के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत की अपील
निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिली अफ़सोस के साथ मुल्क भर में रहने वाले तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात को यह दर्दनाक इत्तिला दी जाती है कि बीती रात बुध बा-तारीख़ 30 सितंबर 2026 को बिरादरी के दो अलग-अलग जिलों से दो अफ़राद के क़ज़ा-ए-इलाही से इंतक़ाल की ख़बर सामने आई है। दोनों सदमों ने बिरादरी के लोगों को गहरे रंज-ओ-ग़म में मुब्तिला कर दिया है।
नजीबाबाद, जिला बिजनौर से पहली इंतक़ाल की इत्तिला
मोहल्ला मुग़लुशा, क़स्बा नजीबाबाद, जिला बिजनौर, उत्तर प्रदेश के रहने वाले जनाब फ़ख़रे आलम साहब वल्द मरहूम जनाब अख़्तर मुल्तानी साहब का बीती रात क़ज़ा-ए-इलाही से इंतक़ाल हो गया।मरहूम के इंतक़ाल की ख़बर से खानदान, रिश्तेदारों, अहबाब और बिरादरी में गहरे सदमे और ग़म की लहर दौड़ गई। हर तरफ़ से मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत और अहले-ख़ाना के लिए सब्र-ए-जमील की दुआएँ की जा रही हैं।
मैय्यत को बाद नमाज़ जौहर तदफिन होगा।
1.30 बजे जनाज़ा उनकी रिहाइशगाह मोहल्ला मुग़लशा इस्लामी फंड के सामने से होज़ वाले कब्रिस्तान ले जाया जाएगा। बाद नमाज़-ए-ज़ुहर सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और सवाब-ए-दारेन हासिल करें।
मैय्यत के सिलसिले में मज़ीद मालूमात के लिए जनाब शेकुलरहमान साहब — 9719174812 पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है।
बागपत से दूसरी दर्दनाक इत्तिला
इसी के साथ गाँव बावली, तहसील बड़ौत, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश से भी इंतक़ाल की दूसरी बेहद अफ़सोसनाक इत्तिला मिली है।
गाँव बावली के जनाब अलीहसन साहब वल्द जनाब हाजी मुंसी जी के बड़े फ़रज़ंद का भी बीती रात बुध बा-तारीख़ 30 सितंबर 2026 को क़ज़ा-ए-इलाही से इंतक़ाल हो गया।
इस दर्दनाक ख़बर से अहले-ख़ाना, रिश्तेदारों, दोस्तों और बिरादरी के लोगों में ग़म की लहर दौड़ गई। मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा आज जुमेरात बा-तारीख़ 01 अक्टूबर 2026 को नमाज़-ए-ज़ुहर के बाद गाँव बावली में अदा की जाएगी, जिसके बाद मरहूम को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।
तमाम बिरादराना हज़रात से पुरख़ुलूस गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और अहले-ख़ाना के ग़म में शरीक हों।
मैय्यत के सिलसिले में मज़ीद मालूमात के लिए जनाब ख़ालिद साहब — 7984844198 पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है।
दुआ-ए-मग़फ़िरत
ऐ अल्लाह! दोनों मरहूमीन की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमा, उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फ़रमा, उनकी क़ब्रों को नूर से मुनव्वर फ़रमा, क़ब्र को उनके लिए जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे और उसमें कुशादगी अता फ़रमा।
या अल्लाह! जब उन्हें क़ब्र में उतारा जाए और मिट्टी दी जाए तो अपनी रहमत के साये में उन्हें जगह अता फ़रमा। उनकी क़ब्र की तन्हाई को अपनी रहमत से दूर फ़रमा, सवालात-ए-क़ब्र में आसानी फ़रमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमा।
या रब्बुल आलमीन! मरहूमीन की मग़फ़िरत फ़रमा, उनकी नेकियों को क़ुबूल फ़रमा, उनकी लग़ज़िशों से दरगुज़र फ़रमा और उन्हें अपने प्यारे हबीब हज़रत मुहम्मद ﷺ की शफ़ाअत नसीब फ़रमा।
अल्लाह तआला दोनों मरहूमीन को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए और तमाम अहले-ख़ाना को इस सदमे को बर्दाश्त करने के लिए सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए।
आमीन या रब्बुल आलमीन।
तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि इन दोनों ग़मज़दा ख़ानदानों के लिए ख़ुसूसी दुआ करें और जहाँ मुमकिन हो, जनाज़े में शरीक होकर बिरादराना हमदर्दी का इज़हार करें।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।
अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार (विज्ञापन) क़ौमी सतह पर शाया या प्रसारित करवाना चाहते हैं तो बराए मेहरबानी नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।
📞 9410652990
📞 8010884848
आपका एतमाद ही हमारी सबसे बड़ी ताक़त है।
“मुल्तानी समाज”
अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।
Tuesday, September 29, 2026
🌹 दो घरानों में बजेगी निकाह की शहनाई, सजेंगे खुशियों के रंग
मोहम्मद जावेद व सानिया नूर तथा जियाउर्रहमान व अमरीन बानो के निकाह की तैयारियाँ मुकम्मल
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
अस्सलातु वस्सलामु अलैका या रसूलल्लाह ﷺ
🌹 “अन-निकाहु मिन सुन्नती” 🌹
उदयपुर। अल्लाह तआला के फ़ज़्लो-करम और सरवरे कायनात, रहमतुल्लिल-आलमीन हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ के सदक़े व तुफ़ैल दो खानदानों में निकाह की मुबारक खुशियाँ दस्तक देने जा रही हैं। इस मुबारक मौक़े पर अहले मुल्तानी बिरादरी के दो नौजवानों के निकाह की खुशखबरी ने रिश्तेदारों और अज़ीज़ो-अक़ारिब में ख़ुशी की लहर पैदा कर दी है।
मरहूम रहीम बख्श साहब के परपोते तथा मरहूम हाजी अब्दुल क़ादिर पटेल साहब के पोते जनाब मोहम्मद जावेद, इब्ने अब्दुल वहीद पटेल (पुंवार), आयड़, उदयपुर, का निकाह सानिया नूर, बिन्ते मोहम्मद शरीफ़ साहब, पुंवार (उदयपुर) के साथ दोनों खानदानों की बाहमी रज़ामंदी से तय पाया है।
💐 पहला निकाह — मोहम्मद जावेद एवं सानिया नूर
इस मुबारक निकाह की तक़रीब 6 जमादिउल अव्वल 1448 हिजरी, मुताबिक़ 17 अक्टूबर 2026, बरोज़ शनिवार, बाद नमाज़-ए-मग़रिब लोहार कॉलोनी, उदयपुर में आयोजित होगी।
अल्लाह तआला इस पाक रिश्ते को मोहब्बत, बरकत, सुकून और ख़ुशहाली से मालामाल फ़रमाए और दोनों को उम्र भर एक-दूसरे का ख़ैरख़्वाह और हमसफ़र बनाए। आमीन।
🌹 दूसरा निकाह — जियाउर्रहमान एवं अमरीन बानो
इसी ख़ुशनुमा सिलसिले में जनाब जियाउर्रहमान, इब्ने अब्दुल हमीद पटेल (पुंवार), आयड़, उदयपुर, का निकाह अमरीन बानो, बिन्ते अब्दुल अज़ीज़ साहब, मोटीयार (इंदौर) के साथ तय पाया है।
यह मुबारक निकाह 8 जमादिउल अव्वल 1448 हिजरी, मुताबिक़ 19 अक्टूबर 2026, बरोज़ सोमवार, बाद नमाज़-ए-मग़रिब इंदौर में, इंशाअल्लाह, अदा होगा।
दोनों परिवारों में निकाह की तैयारियाँ अपने पूरे जोश व ख़ुशी के साथ जारी हैं और रिश्तेदारों, दोस्तों तथा बिरादराने अहले मुल्तानी की आमद से इन मुबारक तक़रीबात की रौनक़ में और इज़ाफ़ा होगा।
🌺 दावते वलीमा
निकाह की इन मुबारक तक़रीबात के बाद 21 अक्टूबर 2026, बरोज़ बुधवार को तुलसी वाटिका, यूनिवर्सिटी रोड, उदयपुर में दावते वलीमा का एहतिमाम किया गया है।
इस मौक़े पर खानदान के अज़ीज़ो-अक़ारिब, दोस्तों और बिरादरी के लोगों से शिरकत फ़रमाकर नवविवाहित जोड़ों को अपनी दुआओं से नवाज़ने की दरख़्वास्त की गई है।
🌹 दुआ है...
अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त दोनों नवविवाहित जोड़ों के निकाह को अपनी बारगाह में क़ुबूल फ़रमाए। उनके आने वाले सफ़र को ईमान, मोहब्बत, रहमत, बरकत और सुकून से भर दे। दोनों परिवारों के बीच मोहब्बत और भाईचारा हमेशा क़ायम रखे तथा घरों को ख़ुशियों, नेक औलाद और अपनी रहमतों से आबाद फ़रमाए।
आमीन या रब्बुल आलमीन। 🤲🌹
🌺 अदईय्यान
अब्दुल जलील पटेल साहब, अब्दुल अज़ीज़ पटेल, अब्दुल गफ़्फ़ार पटेल, मोहम्मद इब्राहीम पटेल, अब्दुल हमीद पटेल एवं अब्दुल वहीद पटेल।
🌺 अल-मुक़ल्लिफ़ीन
अब्दुल रशीद, अब्दुल मजीद, मोहम्मद सलीम, अब्दुल सलाम, मोहम्मद फ़ारूक़, मोहम्मद इरफ़ान, मोहम्मद शरीफ़, मोहम्मद हनीफ़, अब्दुल वहीद, मोहम्मद इमरान, अताउर्रहमान, मोहम्मद इदरीस, मोहम्मद आसिफ़, हबीबुर्रहमान, मोहम्मद इलियास, मोहम्मद फ़ैज़ल, मोहम्मद तौसीफ़, अब्दुल कलाम, मोहम्मद मुजाहिद, मोहम्मद शाहिद एवं मोहम्मद अल्तमश।
🌷 नन्ही इल्तिजा
मोहम्मद ताबिश एवं अक़लीमा फ़ातिमा
🌹 ननिहाल की तरफ़ से
मामा जी: हाजी मक़बूल अहमद साहब, मौलाना मोहम्मद अय्यूब, मोहम्मद शरीफ़, अहमद हुसैन, मोहम्मद सलीम, मोहम्मद सईद, मोहम्मद आरिफ़ एवं अब्दुल रशीद।
बहनोई: हाजी मोहम्मद फ़ारूक़ डड्डियाल।
भांजे: मोहम्मद तारिक़, मोहम्मद साजिद, मोहम्मद नूर, मोहम्मद सलीम, मोहम्मद फ़ुरक़ान एवं मोहम्मद फ़ैज़ान।
🌹 नियाज़मंद
अब्दुल गफ़्फ़ार पटेल — 7727019647
अब्दुल हमीद पटेल — 7737719595
अब्दुल वहीद पटेल — 9414474105
पता: 84, गली नंबर 3, लोहार कॉलोनी, उदयपुर (राजस्थान)
📰 मुल्तानी समाज — आपकी बिरादरी की अपनी आवाज़
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।
अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून, पैग़ाम-ए-मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना या अपने कारोबार का इश्तिहार क़ौमी सतह पर शाया व प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो राब्ता फ़रमाएँ।
📞 9410652990
📞 8010884848
“आपका एतमाद ही हमारी सबसे बड़ी ताक़त है।”
🌹 “मुल्तानी समाज”
अपनी बिरादरी की आवाज़ — अपनी पहचान।
Monday, September 28, 2026
सिर्फ़ एक मौत नहीं, हमारे लिए एक बड़ा सवाल है — 38 साल की उम्र में मोहम्मद शहज़ाद का अचानक इंतक़ाल
रात 11 बजे तक दोस्तों के साथ हंसी-ख़ुशी मुलाक़ातें… और महज़ पौने दो घंटे बाद मौत की ख़बर — एक ख़ुशमिज़ाज नौजवान का यूँ अचानक चले जाना हर दिल को झकझोर गया
शामली।
कभी-कभी ज़िंदगी हमें ऐसे सदमे से रूबरू करा देती है, जिसके बाद इंसान देर तक यही सोचता रह जाता है कि आखिर कुछ ही लम्हों में सब कुछ कैसे बदल गया।
मोहम्मद शहज़ाद का अचानक इंतक़ाल भी ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला वाक़िया है। महज़ 38 साल की उम्र में उनका अचानक हार्ट फेल होने से इंतक़ाल हो जाना न सिर्फ़ उनके खानदान, रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए बल्कि पूरी मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के लिए गहरे रंज और सदमे का सबब है।
बताया जाता है कि 28 सितंबर 2026 की रात करीब 11 बजे तक मोहम्मद शहज़ाद अपने यार-दोस्तों के साथ हंसी-ख़ुशी घूमते, मिलते-जुलते और बातचीत करते रहे। उस वक़्त न किसी को किसी अनहोनी का अंदेशा था और न ही किसी ने यह सोचा होगा कि कुछ ही देर बाद हालात इतने बदल जाएंगे।
लेकिन रात आगे बढ़ी और करीब 12 बजकर 45 मिनट पर अचानक उनके इंतक़ाल की ख़बर सामने आई।
महज़ करीब पौने दो घंटे का यह फ़ासला ज़िंदगी और मौत के बीच ऐसा फ़ासला बन गया, जिसने हर सुनने वाले को अंदर तक हिला दिया।
मौत ने न डॉक्टर तक पहुंचने की मोहलत दी, न इलाज का मौक़ा
मोहम्मद शहज़ाद का परिवार मेडिकल सेक्टर से जुड़ा हुआ बताया जाता है। उनका अपना होलसेल और रिटेल मेडिकल स्टोर था। शामली की पॉश कॉलोनी में उनका आलीशान अस्पताल भी बताया जाता है। शहर के छोटे-बड़े मेडिकल स्टोर संचालकों से लेकर बड़े से बड़े डॉक्टरों तक उनके अच्छे ताल्लुक़ात थे।
लेकिन इंसान के पास चाहे कितने ही साधन क्यों न हों, मौत का वक़्त जब मुक़र्रर होता है तो तमाम इंतज़ामात बेबस हो जाते हैं।
जिस शख़्स के आसपास हर वक़्त दवाइयां, डॉक्टर और इलाज की सुविधाएं मौजूद थीं, उसे डॉक्टर को बुलाने या अस्पताल तक पहुंचाने तक की मोहलत भी न मिल सकी।
यही बात इस हादसे को और भी ज़्यादा झकझोर देने वाला बना देती है।
क्या 38 साल की उम्र में अचानक दिल का जवाब दे देना महज़ एक इत्तेफ़ाक़ है?
मोहम्मद शहज़ाद के इंतक़ाल को किसी एक वजह से जोड़ देना सही नहीं होगा। अचानक होने वाली हृदय संबंधी घटनाओं के पीछे कई अलग-अलग चिकित्सकीय कारण हो सकते हैं और किसी व्यक्ति की मौत का वास्तविक कारण डॉक्टरों की जांच तथा मेडिकल रिकॉर्ड के बिना तय नहीं किया जा सकता।
लेकिन यह हादसा हमें अपने आप से कुछ सवाल करने का मौक़ा ज़रूर देता है।
आज हमारी ज़िंदगी में भागदौड़ बढ़ रही है। खान-पान का अंदाज़ बदल रहा है। बाज़ार में मिलने वाली चीज़ों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहते हैं। नींद पूरी न होना, लगातार तनाव, शारीरिक गतिविधि की कमी, धूम्रपान या तंबाकू का इस्तेमाल और कई दूसरे जोखिम भी दिल की सेहत को प्रभावित कर सकते हैं।
इसीलिए मोहम्मद शहज़ाद का इंतक़ाल सिर्फ़ एक दर्दनाक ख़बर बनकर न रह जाए, बल्कि हमें अपनी ज़िंदगी और सेहत के बारे में सोचने पर भी मजबूर करे।
मिलावट और जहरीले माहौल का सवाल—लेकिन जवाब सबूत के साथ ही
आजकल अक्सर अचानक होने वाली मौतों के बाद लोग मिलावटी खाने, नकली खाद्य पदार्थों, प्रदूषण या जहरीले वातावरण को संभावित वजह मानने लगते हैं।
इन पहलुओं पर सवाल उठना अपनी जगह अहम है, लेकिन बिना चिकित्सकीय जांच और वैज्ञानिक प्रमाण के मोहम्मद शहज़ाद की मौत को इनमें से किसी एक वजह से जोड़ना उचित नहीं होगा।
हाँ, एक समाज के तौर पर हमें यह ज़रूर पूछना चाहिए कि—
हम जो खा रहे हैं, उसकी गुणवत्ता कैसी है?
हमारी रोज़मर्रा की जीवनशैली कितनी सेहतमंद है?
क्या हम नियमित स्वास्थ्य जांच को गंभीरता से लेते हैं?
क्या हम अपने दिल की सेहत, ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसी बुनियादी चीज़ों पर ध्यान देते हैं?
क्या हम अपनी नींद, खान-पान और रोज़ाना की शारीरिक गतिविधि को पर्याप्त महत्व देते हैं?
ये सवाल सिर्फ़ मोहम्मद शहज़ाद के परिवार के नहीं, बल्कि हम सबके हैं।
ज़िंदगी का भरोसा नहीं, मगर एहतियात हमारे हाथ में है
इस दुनिया की सबसे बड़ी हक़ीक़त यही है कि मौत का वक़्त किसी इंसान को मालूम नहीं।
क़ुरआन हमें मौत की हक़ीक़त की याद दिलाता है और इस्लामी तालीम इंसान को अपनी ज़िंदगी की हिफ़ाज़त और सेहत का भी ख़याल रखने की सीख देती है।
इसलिए मौत को याद करना हमें मायूस करने के लिए नहीं, बल्कि ज़िंदगी को बेहतर तरीके से जीने के लिए होना चाहिए।
मोहम्मद शहज़ाद की ज़िंदगी और उनका अचानक चला जाना हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हम अपनी सेहत को कल पर न टालें।
बीमारी का इंतज़ार करने के बजाय एहतियात करें।
लक्षणों को नज़रअंदाज़ करने के बजाय डॉक्टर से मशवरा करें।
खान-पान में लापरवाही के बजाय संतुलन अपनाएं।
और अपनी तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में अपने शरीर और दिल के लिए भी थोड़ा वक़्त निकालें।
एक ख़ुशमिज़ाज नौजवान की याद और हमारे लिए सबक
मोहम्मद शहज़ाद की आख़िरी रात शायद उनके दोस्तों के लिए हमेशा यादगार रहेगी।
रात 11 बजे तक साथ बैठना, मिलना-जुलना, हंसी-मज़ाक और बातचीत… और फिर कुछ ही देर बाद यह ख़बर कि शहज़ाद अब इस दुनिया में नहीं रहे।
ऐसे वाक़ियात इंसान को अंदर तक हिला देते हैं।
आज हम उनके लिए मग़फ़िरत की दुआ करें, उनके खानदान के ग़म में शरीक हों और साथ ही उनकी मौत को सनसनी नहीं बल्कि एक सामाजिक और सेहत संबंधी सबक बनाने की कोशिश करें।
क्योंकि सवाल सिर्फ़ यह नहीं कि मोहम्मद शहज़ाद के साथ क्या हुआ?
एक बड़ा सवाल यह भी है—
क्या हम अपनी ज़िंदगी, खान-पान और सेहत के बारे में आज से कुछ बेहतर करने का फ़ैसला करेंगे?
या फिर हम भी इस भरोसे में जीते रहेंगे कि हमारे साथ ऐसा कभी नहीं होगा?
अल्लाह तआला मरहूम मोहम्मद शहज़ाद की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनके दर्जात बुलंद फ़रमाए और तमाम अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।
"मुल्तानी समाज" की ख़ास रिपोर्ट
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।
आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार (विज्ञापन) क़ौमी सतह पर शाया (प्रकाशित) या प्रसारित करवाना चाहते हैं तो बराए मेहरबानी नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।
📞 9410652990
📞 8010884848
आपका एतमाद ही हमारी सबसे बड़ी ताक़त है।