Monday, February 16, 2026

🌙📚 रमज़ान और बोर्ड इम्तिहान: इबादत भी, कामयाबी भी

रमज़ान की बरकतें और बोर्ड इम्तिहान की अहमियत — इस बार दोनों साथ-साथ दस्तक दे रहे हैं। एक तरफ़ रोज़े, तरावीह और इबादत का महीना; दूसरी तरफ़ मेहनत, एकाग्रता और भविष्य तय करने वाले इम्तिहान। ऐसे में ज़रूरी है कि हमारे मुमतहन (परीक्षार्थी) समझदारी, एहतियात और बेहतर प्लानिंग के साथ आगे बढ़ें।

यह दौर सिर्फ़ इम्तिहान का नहीं, बल्कि सब्र, तवक्कुल और तवाज़ुन (संतुलन) का भी है।


🌅 सेहरी और सुबह की तैयारी: लापरवाही नहीं, एहतियात ज़रूरी

  • जिन बच्चों का पेपर सुबह की शिफ्ट में हो, वो सेहरी के बाद लेटने की कोशिश न करें। लेटकर पढ़ना भी ख़तरे से खाली नहीं — झपकी लग सकती है और पेपर छूटने तक की नौबत आ सकती है।
  • वालिदैन भी तब तक आराम न करें जब तक बच्चे इम्तिहान के लिए रवाना न हो जाएँ। यह छोटी सी निगरानी बड़े नुक़सान से बचा सकती है।
  • अपना मोबाइल साइलेंट न रखें, ताकि किसी ज़रूरी सूचना या साथी छात्रों से राब्ता आसानी से हो सके।

☕ सेहत का ख्याल: रोज़ा भी मुकम्मल, पेपर भी बेहतर

  • जो बच्चे चाय पीने के आदी हैं, वो सेहरी में चाय ज़रूर लें। अचानक परहेज़ से सरदर्द या सुस्ती हो सकती है, जिसका असर सीधे इम्तिहान पर पड़ेगा।
  • जो किसी भी तरह की दवा ले रहे हों, वह सेहरी में दवा लेना न भूलें। अगर किसी दवा से नींद आने की शिकायत हो, तो डॉक्टर से मशविरा कर उसके मुतबादिल (सब्सटिट्यूट) का इंतज़ाम पहले से कर लें।
  • सेहरी और इफ़्तार में हल्का और पौष्टिक खाना लें। फल, दूध, अंडा, बादाम और मुरब्बा शामिल करें।
  • बाज़ार के शरबत और ठंडे जूस से परहेज़ करें। अगर जूस लें तो घर का बना हुआ और सामान्य तापमान का हो।
  • ऐसी चीज़ें बिल्कुल न खाएँ जिनसे पेट या गले की तकलीफ़ का अंदेशा हो।

📝 पेपर के बाद का रवैया: सुकून रखिए, आगे बढ़िए

  • एग्ज़ाम से लौटकर सवालों को टैली करने का कोई फायदा नहीं। “कितना सही, कितना ग़लत” — यह सोच सिर्फ़ टेंशन बढ़ाती है।
  • जो पेपर हो चुका, उस पर डिस्कशन न करें। हाँ, अगले पेपर की तैयारी पर बातचीत ज़रूर करें।
  • घर लौटते ही किताबों पर न बैठ जाएँ। कुछ देर आराम करें, थोड़ी नींद लें, फिर तरोताज़ा होकर तैयारी शुरू करें।

🌤️ मौसम और एहतियात

रमज़ान का मतलब सिर्फ़ गर्मी नहीं। सुबह की ठंड अब भी बाकी है। घर में और इम्तिहान सेंटर जाते वक्त ठंड से बचाव ज़रूरी है।

ख़ास तौर से नौजवान लड़के — गिरेबान खोलकर और बाइक को “हवाई जहाज़” बनाकर सेंटर पहुँचने का जोश थोड़ा कम रखें। सेहत सलामत रहेगी तो इम्तिहान भी बेहतर होगा।


🌙 रातों का निज़ाम और पढ़ाई का रूटीन

  • रमज़ान में देर रात तक जागने की आदत से बचें, खासकर इम्तिहान के दिनों में।
  • जिस दिन पेपर न भी हो, उस दिन भी सेहरी के बाद सोने के बजाय पढ़ाई का रूटीन बनाएं। सुबह का वक़्त याददाश्त के लिए सबसे मुफीद होता है।

👨‍👩‍👧‍👦 वालिदैन की ज़िम्मेदारी

बच्चों के साथ-साथ पैरेंट्स भी अपनी ज़िम्मेदारी समझें। घर का माहौल इम्तिहान की तैयारी के अनुकूल हो।
रमज़ान की रौनक़ अपनी जगह, मगर पूरा ध्यान पकौड़ी और कचौरी पर ही रहे — यह अंदाज़ बच्चों की मेहनत पर भारी पड़ सकता है।


✨ दुआ और हौसला

रमज़ान सब्र और बरकत का महीना है। इम्तिहान मेहनत और कामयाबी का रास्ता। जब दोनों एक साथ हों तो यह यक़ीन रखिए कि अल्लाह तआला की रहमत भी साथ होती है।

मेहनत कीजिए, एहतियात बरतिए, और बेफ़िक्र होकर आगे बढ़िए।
अल्लाह तआला तमाम बच्चों को कामयाबी, सेहत और रोशन मुस्तक़बिल अता फ़रमाए। आमीन।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट

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Sunday, February 15, 2026

🕯️ इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊनपूर्वी महावीर, मेरठ से एक अफ़सोसनाक ख़बर – नौजवान का इंतक़ाल

निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराने इस्लाम को यह इत्तिला दी जाती है कि बरोज़ इतवार, 15 फ़रवरी 2026 की शाम तक़रीबन 6 बजे के आसपास के इलाक़ा पूर्वी महावीर के रहने वाले जनाब मोहम्मद जाहिद साहब वल्द जनाब खलीक साहब के साहबज़ादे, जनाब मोहम्मद जाहिद साहब का कज़ा-ए-इलाही से इंतक़ाल हो गया।

यह दर्दनाक ख़बर हमें सोशल मीडिया के ज़रिये हासिल हुई। खबर के मुताबिक़ मरहूम की मय्यत को आज बरोज़ पीर, 16 फ़रवरी 2026 को सुबह 11 बजे सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाना बताया गया है, लिहाज़ा आप हजरात भी जनाजे में शरीक होकर सवाबे दारेन हासिल करें।

इस दुखद मौके पर पूरा मुल्तानी समाज ग़मज़दा है। एक नौजवान का यूँ अचानक रुख़्सत हो जाना न सिर्फ़ अहल-ए-ख़ाना बल्कि पूरी बिरादरी के लिए सदमे से कम नहीं। अल्लाह तआला मरहूम की मग़फिरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को रौशन करे और तमाम लवाहितीन को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।


📢 बिरादरी से गुज़ारिश

जो भी हज़रत मरहूम के बारे में मुकम्मल और सही जानकारी रखते हों—ख़ास तौर पर दफीने के वक़्त और कब्रिस्तान के नाम के संबंध में—वो बराए करम “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के दिये गये नंबर या ईमेल के ज़रिये इत्तिला दें, ताकि सही और तस्दीक़शुदा जानकारी बिरादरी तक पहुंचाई जा सके।


📌 एक ज़रूरी ऐलान

इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर देखा गया है कि किसी अज़ीज़ के इंतक़ाल की खबर देर से या अधूरी जानकारी के साथ पहुंचती है, जिसकी वजह से कई लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से अदबाना गुज़ारिश करती है कि इंतेकाल की खबर भेजते वक़्त इन बातों का ख़ास एहतिमाम करें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ मुकम्मल पता – पहले कहाँ के रहने वाले थे और फिलहाल कहाँ रह रहे थे।
3️⃣ दफीने का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार अफ़राद (कम से कम एक-दो) के फ़ोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतक़ाल हुआ है तो मरहूम का फोटो।
6️⃣ इंतक़ाल की वजह (अगर बयान करना मुनासिब समझें)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम – जैसे वालिदैन, भाई-बहन, औलाद वगैरह।

👉 इन तमाम जानकारियों से खबर मुकम्मल और मुस्तनद बनेगी तथा बिरादरी को सही मालूमात हासिल होंगी।


📰 डिस्क्लेमर (Disclaimer)

पत्रिका में प्रकाशित किसी भी प्रकार का लेख, समाचार, संपादकीय, विचार, टिप्पणी, प्रेस विज्ञप्ति, विज्ञापन या अन्य सामग्री संबंधित लेखक, संवाददाता या विज्ञापनदाता के व्यक्तिगत विचार हैं।
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किसी भी विवाद की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित, मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए
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🤲 अल्लाह मरहूम की मग़फिरत फ़रमाए, अपने रहमत का साया अता फ़रमाए। आमीन।

बड़ौत की सरज़मीं पर अदब व एहतराम का नूर: मास्टर यामीन आज़ाद साहब के साहेबजादे का यादगार दावत-ए-वलीमा

बड़ौत (जनपद बागपत): खुशियों, दुआओं और मुहब्बत की रौशनी से जगमगाता एक ऐसा दिन, जिसने बड़ौत की फिज़ा को खास बना दिया। जनपद की प्रतिष्ठित शख्सियत, राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित, समाजसेवा के लिए समर्पित आदरणीय (सलाहकार – MMWS एवं खिदमत सोसाइटी) के सुपुत्र के दावत-ए-वलीमा का आयोजन बड़ौत स्थित में अत्यंत गरिमामयी वातावरण में संपन्न हुआ।

यह महज़ एक पारिवारिक समारोह नहीं था, बल्कि बड़ौत की गंगा-जमुनी तहज़ीब, भाईचारे और सामाजिक एकजुटता का जीवंत प्रतीक बनकर उभरा।


गरिमामयी उपस्थिति ने बढ़ाई रौनक

समारोह में क्षेत्र की राजनीति, शिक्षा और सामाजिक जगत की नामचीन हस्तियों ने शिरकत कर कार्यक्रम की शोभा में चार चाँद लगा दिए।

मुख्य अतिथियों में सम्मानित , जिला पंचायत अध्यक्ष , वरिष्ठ रालोद नेता , , , एडवोकेट , गायत्री देवी कॉलेज के चेयरमैन , बड़ौत चेयरमैन , वरिष्ठ रालोद नेता एडवोकेट तथा युवा नेता ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई और नव-विवाहित जोड़े को स्नेह व आशीर्वाद प्रदान किया।

मेहमानों की आत्मीय सहभागिता ने आयोजन को यादगार बना दिया।


संस्थाओं का समर्पित सहयोग

समारोह की व्यवस्थाओं और रौनक में (MMWS) का विशेष योगदान रहा।

  • सदर जनाब इंजीनियर उस्मान साहब व उनकी समर्पित टीम
  • तनाज़ा हल कमेटी से हमदम मिर्ज़ा जी
  • खेल कमेटी से सनव्वर साहब
  • लीगल सेल से एडवोकेट आबिद मिर्ज़ा जी
  • मैरिज ब्यूरो सेल के कन्वीनर अब्दुल खालिक
  • एजुकेशन कमेटी के सदर मास्टर खलील अहमद

इन सभी ने अपने-अपने दायित्वों को पूरी निष्ठा से निभाते हुए आयोजन को सुव्यवस्थित और सफल बनाया।


खिदमत का जज़्बा और मेहमाननवाज़ी की मिसाल

कार्यक्रम के दौरान अनुशासन और आतिथ्य-सत्कार की जिम्मेदारी के कंधों पर रही। डॉक्टर इरफ़ान मलिक और उनकी टीम ने बारीक से बारीक इंतज़ाम को इतनी खूबसूरती से संभाला कि हर मेहमान ने खुले दिल से प्रशंसा की।

यह आयोजन आपसी भाईचारे, दोस्ती निभाने के जज़्बे और सामाजिक सौहार्द की एक शानदार मिसाल बनकर सामने आया।


दुआओं के साए में नई ज़िंदगी की शुरुआत

मास्टर यामीन आज़ाद साहब और उनके समस्त परिवार को इस नई खुशी पर दिली मुबारकबाद। दुआ है कि नव-विवाहित जोड़े की ज़िंदगी खुशियों, कामयाबी और बरकतों से महकती रहे, और उनका दामन हमेशा सुकून व मोहब्बत से भरा रहे। 🤲🌹


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
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Saturday, February 14, 2026

🌿 बिरादरी की पहचान, तालीम और तरक़्क़ी का नया सफ़र “मुल्तानी घराना” – शिजरा, शऊर और शुमारी का भरोसेमंद प्लेटफ़ॉर्म

जब भी किसी महफ़िल या घर की बैठकी में सवाल उठता है—

हमारी बिरादरी का इतिहास क्या है?
पूरे भारत में हमारी तादाद कितनी है?
हमारी तंजीम ने अब तक क्या काम किया है?
बेटे-बेटी के लिए अच्छा रिश्ता कहाँ मिलेगा?

तो ये सिर्फ़ सवाल नहीं होते, ये अपनी जड़ों से जुड़ने की चाहत होती है।

सन 2011 में जब “पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी” की तंजीम की बुनियाद रखी गई, तो हर तरफ़ एक उम्मीद की लहर थी। आज उसी ख्वाब को आगे बढ़ाते हुए “मुल्तानी घराना” एक मुकम्मल डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के तौर पर सामने है।


📜 शिजरा और दीन की रोशनी

इस्लाम में नसब (वंशावली) की हिफ़ाज़त को अहम माना गया है, ताकि रिश्तों में साफ़गोई रहे और आने वाली नस्लें अपने बुजुर्गों की पहचान जान सकें।

शिजरा सिर्फ नामों की फेहरिस्त नहीं, बल्कि दुआओं की एक सिलसिला होता है।
“मुल्तानी घराना” का मकसद यही है कि बिरादरी के अफ़राद का रिकॉर्ड सुरक्षित रहे, ताकि कल की नस्लों को अपना सिलसिला ढूंढने में परेशानी न हो।


💻 रोज़गार के साथ खिदमत का मौका

यह पहल सिर्फ डेटा जमा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि बिरादरी के नौजवानों को रोज़गार देने का भी जरिया है।

जो युवा मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप से सॉफ्टवेयर पर काम कर सकते हैं, उन्हें इस नेक काम में शामिल होने का मौका दिया जा रहा है।

📲 इच्छुक नौजवान साथी हेल्पडेस्क नंबर 9410652990 पर अपना नाम और शहर लिखकर व्हाट्सऐप करें।
“मुल्तानी घराना” की टीम आपसे राब्ता करेगी। पसंद आने पर आपको जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

साथ ही—

  • 💰 अच्छी सैलरी
  • 🎁 आकर्षक इनाम
  • 📜 सर्टिफिकेट
  • 🌟 “मुल्तानी गौरव” अवॉर्ड

भी दिए जाएंगे।

यह सिर्फ नौकरी नहीं, बिरादरी की खिदमत का मौका है।


🤝 रिश्तों का भरोसेमंद ज़रिया

हर मां-बाप की ख्वाहिश होती है कि उनके बच्चे का रिश्ता अच्छे घराने में हो।
“मुल्तानी घराना” का प्लेटफ़ॉर्म रिश्तों के लिए सही और भरोसेमंद जानकारी देने में मददगार साबित होगा, ताकि फैसले आसानी और इत्मीनान से लिए जा सकें।


📰 बिरादरी की आवाज़

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित, बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” इस मुहिम की आधिकारिक आवाज़ है।


✍️ खास रिपोर्ट

ज़मीर आलम
संपर्क: 8010884848

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दुआ है कि अल्लाह तआला इस कोशिश को कबूल फरमाए, इसे हमारी बिरादरी के लिए सदका-ए-जारीया बनाए और हमें इत्तेहाद, तरक़्क़ी और खुशहाली की राह पर कायम रखे।

अब वक्त है जुड़ने का…
अपना नाम और शहर भेजिए, और इस नेक काम में हिस्सा बनिए। 🤲

अहतराम के साथ इत्तिला:

इस ख़बर में शामिल की गई तस्वीरें सिर्फ़ समझाने और मालूमात को वाज़ेह करने के लिए लगाई गई हैं। इनका किसी शख्स, इदारे या वाक़िये से सीधा या ग़ैर-सीधा कोई ताल्लुक़ नहीं है। अगर किसी को इनसे कोई ग़लतफ़हमी हो तो हम दिली तौर पर माज़रत ख़्वाह हैं— किसी की दिलआज़ारी हमारा मक़सद हरगिज़ नहीं है। 🤲

Friday, February 13, 2026

🌟 मुल्तानी बिरादरी के लिए ऐतिहासिक डिजिटल विरासत “मुल्तानी घराना” — शिजरे को डिजिटल अमानत बनाने की क्रांतिकारी पहल

अल्हम्दुलिल्लाह, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार–बढ़ई बिरादरी की देशव्यापी तंजीम “मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट (रजिस्टर्ड ऑल इंडिया)” ने एक ऐसा ड्रीम प्रोजेक्ट पेश किया है, जो आने वाली नस्लों के लिए एक बेशकीमती डिजिटल विरासत साबित होगा।

बिरादरी की जनगणना, फैमिली ट्री (शिजरा) और रिश्तों-नातों को सुव्यवस्थित व आसान बनाने के मक़सद से आधुनिक टेक्नोलॉजी के साथ “मुल्तानी घराना” सॉफ्टवेयर तैयार कराया गया है।


📌 एक स्थायी डिजिटल अमानत

इस क्रांतिकारी सॉफ्टवेयर को इस दूरअंदेशी सोच के साथ विकसित किया गया है कि बिरादरी के करोड़ों अफ़राद के आंकड़े हमेशा-हमेशा के लिए महफूज़ रह सकें।

ताकि आने वाली नस्लों को अपने खानदान का शिजरा तलाश करने के लिए दर-ब-दर भटकना न पड़े, बल्कि एक क्लिक पर उन्हें अपने बुजुर्गों की पहचान, रिश्तों की कड़ियां और पारिवारिक इतिहास मुकम्मल तौर पर मिल सके।

यह महज़ एक सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि बिरादरी की पहचान, एकता और इतिहास को डिजिटल दस्तावेज़ की शक्ल में सुरक्षित रखने का सुनियोजित और ऐतिहासिक कदम है।


💻 क्या कर सकेंगे आप?

  • अपने बड़े बुजुर्गों की तफ़सील और तस्वीरें सुरक्षित अपलोड
  • पूरे खानदान का डिजिटल शिजरा तैयार
  • रिश्तों की सही पहचान और आपसी कनेक्टिविटी आसान
  • मोबाइल, टैब, लैपटॉप या डेस्कटॉप से घर बैठे उपयोग

🚀 फिलहाल ट्रायल चरण में

इस प्रोजेक्ट को अभी ट्रायल के तौर पर शुरू किया गया है। बहुत जल्द इसके तमाम फीचर्स मुकम्मल तौर पर शुरू कर दिए जाएंगे। बिरादरी के अफ़राद से दरख्वास्त है कि इस ऐतिहासिक पहल का हिस्सा बनें और अपने सुझाव देकर इसे और मजबूत बनाएं।


🌐 जानकारी व रजिस्ट्रेशन

Chrome या Google पर लिखें:
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या हेल्पडेस्क पर व्हाट्सएप करें:
📱 9410652990

“मुल्तानी समाज” की टीम हर कदम पर आपकी रहनुमाई के लिए मौजूद है।


📖 यह विशेष रिपोर्ट
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देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित
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के लिए
✍️ ज़मीर आलम (प्रधान संपादक)

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Thursday, February 12, 2026

🕯️ बेहद अफ़सोसनाक… बिरादरी में दो इत्तेक़ाल, दिल अश्कबार 🕯️

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन… अहले मुस्लिम मुल्तानी लुहार, बढ़ई बिरादरी को निहायत रंज-ओ-ग़म के साथ इत्तिला दी जाती है कि बीती रात बरोज़ जुमेरात, 12 फ़रवरी 2026 को हमारी बिरादरी में दो ग़मगीन इत्तेक़ाल हुए, जिनकी खबर ने हर दिल को मायूस कर दिया।


🌙 पहला इत्तेक़ाल – ज़िला बागपत / सहारनपुर (उत्तर प्रदेश)

जनाब मोहम्मद यूसुफ़ ख़ान वल्द जनाब मोहम्मद मोहम्मद ख़ान साहब के फ़रज़ंद का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।
मरहूम मूल रूप से ढिकाना के रहने वाले थे और वर्तमान में बड़ौत, बड़का रोड, सरकारी स्कूल के पीछे (ज़िला बागपत, उत्तर प्रदेश) में निवास कर रहे थे।

  • 🗓️ इंतिक़ाल: 12 फ़रवरी 2026 (बरोज़ जुमेरात)
  • ⏰ वक़्त: करीब 11:00 बजे रात
  • 🕌 नमाज़-ए-जनाज़ा व तदफ़ीन: 13 फ़रवरी 2026 (बरोज़ जुमे) सुबह 10:00 बजे
  • 📍 मुक़ाम: स्थानीय क़ब्रिस्तान, बड़ौत

बिरादराना गुज़ारिश है कि आप हज़रात जनाज़े में शरीक होकर सवाब-ए-दारैन हासिल करें और मरहूम के हक़ में दुआ-ए-मग़फ़िरत फरमाएँ।


🌙 दूसरा इत्तेक़ाल – मोहल्ला कोटला शेर अली, क़स्बा गंगोह (ज़िला सहारनपुर)

मोहल्ला कोटला शेर अली मस्जिद, क़स्बा गंगोह (ज़िला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश) में जनाब राशिद साहब की अहलिया और भाई खुरैद की वालिदा का भी क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया है।

  • 🗓️ इंतिक़ाल: 12 फ़रवरी 2026
  • 🕌 नमाज़-ए-जनाज़ा: दोपहर 1:15 बजे, अशरफ-उल-उलूम बड़ा मदरसा
  • ⚰️ तदफ़ीन: इमाम साहब क़ब्रिस्तान, गंगोह

तमाम बिरादरान से इल्तिज़ा है कि जनाज़े में शिरकत कर मरहूमा के लिए मग़फ़िरत और जन्नतुल फ़िरदौस की दुआ करें।


🤲 दुआ

अल्लाह तआला मरहूम/मरहूमा की मग़फ़िरत फरमाए, उनकी क़ब्र को रौशन और वसीअ करे, जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता करे और अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।


📋 बिरादरी रिकॉर्ड हेतु आवश्यक विवरण

“मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के रिकॉर्ड में पूर्ण जानकारी दर्ज की जाती है, जो बिरादराना एतबार से भविष्य में काम आ सकती है।
कृपया निम्न विवरण उपलब्ध कराएँ:

  • इंतिक़ाल कब और कहाँ हुआ
  • पूरा आवासीय पता
  • वालिद का नाम
  • उम्र
  • कुल औलादें व बेटों की संख्या
  • कोई विशेष पहचान (डॉक्टर, मास्टर, मैकेनिक, इंजीनियर, नेता, दस्तकार, पत्रकार, उद्योगपति आदि)
  • तदफ़ीन का स्थान व समय
  • नज़दीकी वारिस का संपर्क नंबर
  • खबर देने वाले का नाम, पता व दूरभाष
  • कोई आख़िरी तस्वीर (यदि उपलब्ध हो)

यदि हमारे ग्रुप में पहले भी खबर प्रसारित हुई हो तो तारीख़ और नाम बताने पर रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जा सकता है।


📢 महत्वपूर्ण सूचना

यह सेवा मुस्लिम मुल्तानी लुहार-बढ़ई बिरादरी के लिए ज़मीर आलम साहब की ओर से निःशुल्क है।

बिरादरी के सुख-दुख की खबरें
“मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के ग्रुप में प्रेषित करें।

सरकारी पुष्टि नहीं की जाएगी और न ही कोई सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा।


📰 डिस्क्लेमर (Disclaimer)

पत्रिका में प्रकाशित लेख, समाचार, संपादकीय, विचार, टिप्पणी, प्रेस विज्ञप्ति या विज्ञापन लेखक/विज्ञापनदाता के व्यक्तिगत विचार हैं। संपादक, प्रकाशक या प्रबंधन उनसे अनिवार्य रूप से सहमत हों यह आवश्यक नहीं।

सामग्री की सत्यता एवं दावों के लिए लेखक/विज्ञापनदाता स्वयं उत्तरदायी होंगे। पत्रिका एवं प्रबंधन किसी भी प्रकार की कानूनी, सामाजिक या वित्तीय जिम्मेदारी से पूर्णतः मुक्त रहेंगे।

किसी भी विवाद या न्यायिक कार्यवाही की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।


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ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट

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अल्लाह तआला हम सबको सब्र, हिम्मत और नेकी की राह पर कायम रखे। 🤲

Tuesday, February 10, 2026

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन, हाजी अब्दुल अज़ीज़ (कुतुबगढ़ वाले) का इंतकाल – बिरादरी का एक साया उठ गया

निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराने इस्लाम को इत्तला दी जाती है कि आज बरोज़ बुधवार, तारीख़ 11 फ़रवरी 2026 को मोहल्ला रेत्ती, मेन रोड, क़स्बा थानाभवन, जिला शामली (उत्तर प्रदेश) के मक़ीम हाजी अब्दुल अज़ीज़ वल्द जनाब अलीमुद्दीन साहब (मरहूम), उम्र तक़रीबन 87 साल, क़ज़ा-ए-इलाही से इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत हो गए।

मरहूम का ताल्लुक़ कुतुबगढ़ वालों से था और वह अपनी नेक सीरत, ख़ुलूस, इबादतगुज़ारी और बिरादरी में मोहब्बत व हमदर्दी के लिए जाने जाते थे। उनका इंतकाल यक़ीनन अहल-ए-ख़ाना ही नहीं बल्कि पूरे खानदान और इलाके के लिए गहरा सदमा है।


🏠 पसमांदगान ( ग़मजदा फैमिली )

मरहूम अपने पीछे ग़मगीन खानदान छोड़ गए हैं, जिनमें:

  • बड़े भाई हाजी अब्दुल हमीद साहब (मरहूम)
  • जनाब अब्दुल हाफ़िज़ साहब (मरहूम)
  • सबसे छोटे भाई जनाब अब्दुल रहीम (हयात)
  • एक बहन जमशीदा बी (मरहूमा) अहलिया जनाब मोहम्मद इस्लामुद्दीन साहब (थानाभवन)

औलाद में:

  • जनाब मोहम्मद असलम
  • हाफ़िज़ मोहम्मद अफ़ज़ल
  • मोहम्मद अकरम
  • आस मोहम्मद

और दो साहिबज़ादियां:

  • फरजाना बी, अहलिया हाफ़िज़ शरीफ़ अहमद (गढ़ी पुख़्ता)
  • मुबबशरा बी, अहलिया मोहम्मद इरफ़ान (चरथावल)

इसके अलावा पौते-पोतियां, नाती-नातिनें और तमाम अज़ीज़-ओ-अक़ारिब इस सदमे में ग़मगीन हैं।


🕌 नमाज़-ए-जनाज़ा व तदफीन

मरहूम की मय्यत को आज बाद नमाज़ ईसा ठीक साढ़े 7 बजे चरथावल बस स्टैंड से आगे गोरे ग़रीबा कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम अहबाब से दरख़्वास्त है कि नमाज़-ए-जनाज़ा में शरीक होकर सवाब-ए-दारेन हासिल करें और मरहूम के हक़ में दुआ-ए-मग़फ़िरत करें।


📞 मालूमात के लिए राब्ता

मय्यत से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए मरहूम के भतीजे
मोहम्मद साजिद
📱 9152561843
से राब्ता कायम करें।


🤲 दुआ

अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए, उनके दर्जात बुलंद फ़रमाए और तमाम घर वालों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए।
आमीन या रब्बुल आलमीन।

🕊️ मरहूम मुहम्मद हसन साहब का इंतेकाल — मुल्तानी बिरादरी में ग़म की लहर

अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार–बढ़ई बिरादरी को बड़े ही रंज-ओ-ग़म के साथ इत्तिला दी जाती है कि दिल्ली के मंगोलपुरी में रह रहे जनाब हाजी बशीर साहब (अस्ल निवासी कस्बा छपरौली, ज़िला बागपत, उत्तर प्रदेश) के सुपुत्र मरहूम मुहम्मद हसन साहब (उम्र 70 वर्ष) का बीती शाम, 10 फ़रवरी 2026 बरोज़ मंगल, मंगोलपुरी (दिल्ली) में इंतेकाल हो गया।

इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलैहि राजिऊन।
अल्लाह की मर्ज़ी के आगे सब सर झुकाते हैं।

मरहूम के पीछे तीन बेटे और अहल-ए-ख़ाना ग़मगीन हालत में मौजूद हैं। बिरादरी के लिए यह खबर गहरे दुख का सबब बनी है। मरहूम अपने सादगी भरे स्वभाव, मिलनसार मिज़ाज और बिरादरी से जुड़ाव के लिए जाने जाते थे।

🕌 दफ़ीने की जानकारी

मिली जानकारी के मुताबिक, मय्यत को आज 11 फ़रवरी 2026, बरोज़ बुध, सुबह 10:30 बजे
दिल्ली, मंगोलपुरी Y-ब्लॉक कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम बिरादराने इस्लाम से दरख़्वास्त है कि जनाज़े में शिरकत कर सवाब-ए-दारैन हासिल करें और मरहूम के लिए मग़फ़िरत की दुआ करें।


🤲 दुआ-ए-मग़फ़िरत

हम अल्लाह तआला से दुआ करते हैं कि मरहूम मुहम्मद हसन साहब को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए, उनकी मग़फ़िरत फ़रमाए, कब्र को रौशन और वसीअ करे, और अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता करे।
आमीन। सुम्मा आमीन।


⚠️ अहम् हिदायात (अदब और एहतराम के साथ)

ग़म के इस माहौल में बिरादरी के तमाम अफ़राद से गुज़ारिश है कि:

  • मय्यत वालों के घर जाकर हंसी-मज़ाक से परहेज़ करें और ग़मगीन माहौल का लिहाज़ रखें।
  • पान, बीड़ी, सिगरेट, गुटखा या तंबाकू वगैरह का इस्तेमाल न करें।
  • मय्यत वालों के घर खाना खाने का बोझ न बनें।
  • जनाज़े के पीछे चलते हुए फ़ोन पर बातें न करें; अव्वल कलिमा पढ़ने का एहतिमाम करें।

📞 मरहूम के बारे में और मालूमात के लिए: 8882071608


📢 एक ज़रूरी ऐलान — इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम् हिदायतें

अक्सर देखा गया है कि किसी अज़ीज़ के इंतेकाल की खबर देर से या अधूरी जानकारी के साथ पहुंचती है, जिसकी वजह से लोग जनाज़े में शिरकत नहीं कर पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से दरख़्वास्त करती है कि इंतेकाल की खबर भेजते वक्त इन बातों का खास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ अस्ल व मौजूदा पता।
3️⃣ दफ़ीने का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार अफ़राद के एक-दो मोबाइल नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतेकाल हुआ है तो मरहूम की तस्वीर शामिल करें।
6️⃣ इंतेकाल की वजह (अगर मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम — जैसे भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वग़ैरह।

👉 मुकम्मल जानकारी से खबर सही और वक़्त पर बिरादरी तक पहुंचेगी।


📰 सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए अलीहसन मुल्तानी की खास रिपोर्ट।

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अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए और बिरादरी को इत्तेहाद व सब्र की तौफ़ीक़ अता करे। 🤲

Monday, February 9, 2026

🕊️ इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन 🕊️सरधना की नई बस्ती से उठी एक ग़मगीन ख़बर – इमरान मिर्ज़ा का इंतिक़ाल

बड़े रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराने इस्लाम को यह दुखद इत्तिला दी जाती है कि नई बस्ती, मोहल्ला मंडी चमारान, कस्बा सरधना, ज़िला मेरठ (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले, जनाब मिर्ज़ा अमीर हसन (छाबड़िया वालों) के छोटे साहबज़ादे इमरान मिर्ज़ा (उम्र लगभग 35 वर्ष) का चार दिन से जारी इलाज के दौरान अस्पताल में इंतिक़ाल हो गया।

मरहूम, लियाक़त मिर्ज़ा के छोटे भाई थे।

मरहूम इमरान मिर्ज़ा की तदफ़ीन आज, 10 फ़रवरी 2026, बरोज़ मंगलवार, नमाज़-ए-मगरिब के बाद, बिनोली रोड स्थित कब्रिस्तान में अमल में लाई जाएगी।
तमाम अहले-ईमान से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फ़रमाकर सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनके दरजात बुलंद करे और उन्हें जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए। आमीन।
अल्लाह तआला अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए।


📝 एक ज़रूरी ऐलान

इंतिक़ाल की ख़बर भेजते वक़्त अहम हिदायतें

अक्सर देखने में आता है कि किसी अज़ीज़ के इंतिक़ाल की ख़बर बिरादरी तक देर से पहुँचती है या अधूरी मालूमात की वजह से लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस अहम कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से अदब के साथ गुज़ारिश करती है कि जब भी इंतिक़ाल की ख़बर भेजी जाए, तो इन बातों का ख़ास ख़्याल रखा जाए:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या (औरत के लिए) शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता — मूल निवास और मौजूदा रहने की जगह।
3️⃣ तदफ़ीन का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार शख़्स (एक-दो) के संपर्क नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतिक़ाल हुआ हो तो मरहूम की तस्वीर।
6️⃣ इंतिक़ाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम — जैसे माँ-बाप, भाई-बहन, औलाद वग़ैरह।

👉 इन तमाम मालूमात से ख़बर मुकम्मल होती है और बिरादरी के लोगों तक सही वक़्त पर सही जानकारी पहुँचती है।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित
पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को समर्पित
देश की एकमात्र पत्रिका — “मुल्तानी समाज”

✍️ महताब मिर्ज़ा की ख़ास रिपोर्ट

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Friday, February 6, 2026

🌹✨ ख़ुशी, बरकत और दुआओं का पैग़ाम — मुल्तानी खानदान में तय हुआ नेक रिश्ता ✨🌹

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम, अस्सलातु वस्सलामु अलैका या रसूलल्लाह ﷺअल्लाह तआला के फ़ज़्ल-ओ-करम से, हुज़ूर-ए-अकरम ﷺ के सदक़े तुफ़ैल, गौस-ओ-ख़्वाजा और आला हज़रत रज़ा के वसीले से, मुल्तानी बिरादरी के लिए यह बेहद मस्रूरकुन और मुबारक मौक़ा है कि एक पाक और नेक रिश्ता तय पाया है।

हाजी अब्दुल शकूर साहब की पोती और हाजी अब्दुल रहीम साहब की नेक दुख़्तर का निकाह, पूरे ख़ानदानी मशवरे और खुशी के साथ तय हो गया है। यह रिश्ता न सिर्फ़ दो घरानों को जोड़ रहा है, बल्कि मोहब्बत, एहतराम और दीनी रिवायतों की एक खूबसूरत मिसाल भी पेश कर रहा है।

🌸 दुल्हन

हज्जन ज़ीनत बानो
बिन्ते जनाब हाजी अब्दुल रहीम जी
(मोटियार कोटड़ी – पारोली वाले)

🌸 दूल्हा

मोहम्मद फ़ुरक़ान
इब्ने मरहूम क़ाबिल हुसैन
(डडियाल पितास वाले, भवानी नगर, भीलवाड़ा)

💍 तक़रीब-ए-निकाह

29 शव्वाल 1448 हिजरी
18 अप्रैल 2026, दिन शनिचर
बाद नमाज़-ए-असर — इंशाअल्लाह

इस मुबारक मौके पर तमाम बिरादराने अहले मुल्तानी से ख़ास गुज़ारिश है कि इस पाक तक़रीब-ए-निकाह में तशरीफ़ लाकर जश्न-ए-शादी की रौनक़ बढ़ाएं और दूल्हा-दुल्हन को अपनी ख़ुलूस भरी दुआओं से नवाज़ें।

🌹 सरपरस्त

हाजी अब्दुल शकूर साहब

🌹 अल मुकल्लेफ़ीन

अब्दुल गफूर जी, हाजी मोहम्मद हुसैन, अब्दुल हक़, मोहम्मद फारुख

🌹 अददाईन

हाजी अब्दुल रहीम जी, हाजी अब्दुल करीम जी, हाजी अब्दुल क़ादिर जी,
अब्दुल सत्तार जी, अब्दुल मंज़ूर जी

🌹 चश्मे बराह

अब्दुल रहूफ, अब्दुल क़ादिर, मोहम्मद अली, अब्दुल क़य्यूम, अहमद अली,
सद्दाम हुसैन, मोहसीन अली, मोहम्मद शाहरुख, शाकिर हुसैन,
मोहम्मद हुसैन एवं अहले मोटियार ख़ानदान, पारोली

🌹 लख़्ते जिगर

अहमद नूर, मोहम्मद आमीन, मोहम्मद ओवैस, मोहम्मद नूर,
मोहम्मद इब्राहीम, मोहम्मद बिलाल, नियामत अली,
शौकत अली, आज़म अली, ओवैस रज़ा, मोहम्मद हाशिम

🌹 नन्ही इल्तिज़ा

शहनाज़ बानो, सुल्ताना बानो, इरम फ़ातिमा, नूरीन फ़ातिमा,
नाज़िया नूर, अफ़साना नूर, नूर फ़ातिमा —
मेरी फुफ्फी की शादी में जलूल-जलूल तशरीफ़ लाएं

📍 पता

ईदगाह के सामने, जहाजपुर रोड, कोटड़ी, भीलवाड़ा

फर्म: गरीब नवाज़ वेल्डिंग वर्क्स, कोटड़ी
📞 9785391427 | 8058370436


🤲 दुआ

अल्लाह तआला इस निकाह को दोनों परिवारों के लिए सरापा बरकत बनाए,
दूल्हा-दुल्हन को इत्तेहाद, मोहब्बत और आफ़ियत अता फरमाए,
और उनकी ज़िंदगी को दीन व दुनिया की कामयाबियों से भर दे।
आमीन या रब्बुल आलमीन।


✍️ ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट
पत्रिका: “मुल्तानी समाज”
#multanisamaj


Thursday, February 5, 2026

मुस्लिम मुल्तानी लोहार–बढ़ई बिरादरी मेहनत, हुनर और हिजरत से बनी एक पहचान (भारत में फैलाव की रिवायती कहानी – राज्यवार पूर्वजों के हवाले से)

मुस्लिम मुल्तानी लोहार–बढ़ई बिरादरी की कहानी सिर्फ़ लोहे, लकड़ी या औज़ारों की नहीं है,

यह कहानी है मेहनत की इबादत, हुनर की विरासत और हिजरत के सब्र की।

हमारे बुज़ुर्गों ने सिर्फ़ औज़ार नहीं गढ़े,
उन्होंने अपनी पेशानी के पसीने से समाज में इज़्ज़त, रोज़गार और भरोसे की बुनियाद रखी।
वक़्त बदला, ज़रूरतें बदलीं, मगर कारीगरी और ईमानदारी की रूह वही रही।

मुल्तान की सरज़मीं से निकलकर यह बिरादरी
रोज़ी-रोटी, कारीगरी की मांग और सामाजिक हालात के चलते
हिंदुस्तान के अलग-अलग हिस्सों तक पहुँची।

यह लेख उसी सफ़र को समझने और समझाने की एक अदना-सी कोशिश है।


⚠️ एक ज़रूरी दीनि व हक़ीक़ी वज़ाहत

यहाँ लिखे गए तमाम नाम
रिवायत, इलाक़ाई पहचान और बुज़ुर्गों से चली आ रही बातें हैं।

➡️ यह किसी भी खानदान के लिए अंतिम या क़तई नसब का दावा नहीं है।
हर परिवार का असली शजरा
उसके अपने परदादा, पर-परदादा और प्रमाणित सिलसिले से ही तय होता है।

इस्लाम बिना सबूत नसब जोड़ने की इजाज़त नहीं देता —
और इसी उसूल की पूरी पाबंदी यहाँ रखी गई है।


पंजाब (भारत)

भारत में प्रवेश का पहला पड़ाव

रिवायतों के मुताबिक़
मुल्तान से भारत में दाख़िल होने का पहला बड़ा इलाक़ा पंजाब रहा।
यहीं से मुल्तानी लोहार–बढ़ई बिरादरी ने
अपने हुनर को ज़मीन दी और पहचान पाई।

बुज़ुर्गों में
शेख़ मुल्तान शाह और शेख़ इस्माईल मुल्तानी
के नाम लिए जाते हैं।
लोहे से जुड़ी कारीगरी ने यहीं से मज़बूत शक्ल अख़्तियार की।


राजस्थान

कारीगरी से बनी पहचान

बीकानेर, नागौर, जयपुर और मेवाड़ जैसे इलाक़ों में
मुल्तानी बिरादरी का फैलाव
कारीगरों की क़द्र करने वाली रियासतों से जुड़ा बताया जाता है।

यहाँ
शेख़ सुल्तान अहमद मुल्तानी
और शेख़ बदरुद्दीन मुल्तानी
से जुड़ी रिवायतें मिलती हैं।

राजपूताना दौर में
हुनरमंद हाथ हमेशा इज़्ज़त के साथ देखे गए।


पश्चिमी उत्तर प्रदेश

मज़बूत सामाजिक जड़ें

मेरठ, मुज़फ़्फ़रनगर, शामली, सहारनपुर और बिजनौर
आज भी मुल्तानी लोहार–बढ़ई बिरादरी के
मज़बूत केंद्र माने जाते हैं।

इस फैलाव को
शेख़ क़ासिम मुल्तानी
और शेख़ हबीबुल्लाह मुल्तानी
से जोड़ा जाता है।

यह इलाक़ा
आज भी बिरादरी की सामाजिक, शैक्षिक और पारिवारिक पहचान का गढ़ है।


हरियाणा

मेहनत और रोज़गार का विस्तार

रोहतक, झज्जर, मेवात, सोनीपत और पानीपत
जैसे क्षेत्रों में
मुल्तानी कारीगरों ने खेती और औज़ार निर्माण को अपनाया।

रिवायतों में
शेख़ फ़ज़ल करीम मुल्तानी
और शेख़ नसीरुद्दीन मुल्तानी
के नाम सामने आते हैं।


उत्तराखंड

मैदानों से पहाड़ों तक

हरिद्वार, रुड़की और देहरादून के आसपास
मुल्तानी बिरादरी का पहुँचना
मैदानी इलाक़ों से रोज़गार की तलाश का नतीजा माना जाता है।

यहाँ
शेख़ याक़ूब मुल्तानी
का नाम बुज़ुर्गों की रिवायतों में लिया जाता है।


दिल्ली

शाही दौर और कारीगर

मुग़ल दौर में दिल्ली
हुनरमंद कारीगरों का बड़ा मरकज़ थी।
शहर की तामीर और रोज़मर्रा की ज़रूरतों में
लोहार-बढ़ई की अहम भूमिका रही।

यहाँ
शेख़ सुल्तान अहमद मुल्तानी
और शेख़ हबीबुल्लाह मुल्तानी
से जुड़ी बसावट की बातें मिलती हैं।


गुजरात

व्यापार और हुनर का संगम

अहमदाबाद और सूरत जैसे शहरों में
मुल्तानी बिरादरी का पहुँचना
व्यापार और औज़ार निर्माण से जोड़ा जाता है।

यहाँ
शेख़ क़ासिम मुल्तानी
का नाम रिवायती तौर पर लिया जाता है।


मध्य प्रदेश

मध्य भारत में बसावट

मालवा क्षेत्र, भोपाल और इंदौर के आसपास
उत्तर भारत से आए कारीगरों की बसावट मानी जाती है।

यहाँ
शेख़ नसीरुद्दीन मुल्तानी
और शेख़ बदरुद्दीन मुल्तानी
के नाम प्रचलित हैं।


नतीजा : सच के साथ पहचान

यह पूरी तहरीर
इतिहास, रिवायत और बुज़ुर्गों की बताई बातों पर आधारित है —
न कि किसी एक खानदान के लिए अंतिम नसब।

इसी उसूल पर चलते हुए
“मुल्तानी घराना (SIR – Social Information Register)”
की शुरुआत की जा रही है,
ताकि हर राज्य, हर ज़िला और हर परिवार
अपना अलग, सही और प्रमाणित शजरा
आने वाली नस्लों के लिए महफूज़ कर सके।

अपनी जड़ों को सच के साथ जानना ही असली पहचान है।


✍️ मुल्तानी समाज पत्रिका के लिए

ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
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पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार–बढ़ई बिरादरी को समर्पित
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मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी के एक ख़ामोश मेहनतकश का इंतेक़ाल — ठेकेदार मिस्त्री मुहम्मद रफ़ीक़ अहमद साहब अब हमारे दरमियान नहीं रहे

इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलैहि राजिऊन । मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी के लिए यह ख़बर निहायत ही रंजो-ग़म और दिल को बोझिल कर देने वाली है कि ठेकेदार मिस्त्री मुहम्मद रफ़ीक़ अहमद साहब (निवासी क़स्बा अमीनगर सराय, ज़िला बागपत — हाल बाशिंदा , हरियाणा) का बीते कल दिन जुमेरात, बा-तारीख़ 05 फ़रवरी 2026 को इशा की नमाज़ के बाद क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेक़ाल हो गया।

अल्लाह की यही मर्ज़ी थी।
हम सब इस फ़ैसले-ए-इलाही के आगे सर झुकाते हैं।

मरहूम अपने पीछे भरा-पूरा कुनबा छोड़ गए हैं। उनके तीन बेटे —
मुहम्मद अतीक़ अहमद,
मुहम्मद वसीम अहमद,
मुहम्मद शुऐब अहमद मुल्तानी — अपने वालिद के इंतेक़ाल से सदमे में हैं। अहल-ए-ख़ाना, रिश्तेदार, दोस्त और तमाम जानने वाले इस वक़्त ग़म की गहरी कैफ़ियत से गुज़र रहे हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक़, मरहूम का जनाज़ा से उनके पैतृक वतन , ज़िला (उत्तर प्रदेश) लाया जाएगा।
कल यानी आज 06 फ़रवरी 2026, दिन जुमा को साढ़े दस बजे क़स्बा अमीनगर सराय के क़ब्रिस्तान में मय्यत को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

लिहाज़ा तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े और दफ़्न में शिरकत कर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएँ और सवाबे दारेन हासिल करें।

हम बारगाह-ए-इलाही में दुआगो हैं कि
अल्लाह तआला मरहूम मुहम्मद रफ़ीक़ अहमद साहब की मग़फ़िरत फ़रमाए,
उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए,
और उन्हें जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए।
आमीन। सुम्मा आमीन।


अहम हिदायत (ग़म के मौके पर अदब और तहज़ीब का ख़याल रखें)

  • मय्यत वालों के घर जाकर हंसी-मज़ाक़ का माहौल न बनाएं।
  • ग़मगीन माहौल अख़्तियार करें और सब्र-ओ-तस्ली की बात करें।
  • मय्यत वालों के घर जाकर खाने-पीने का बोझ न बनें।
  • अव्वल कलिमा और दुआओं का एहतिमाम करें।
  • मय्यत के पीछे दुनियावी बातें, कारोबार या रिश्ते-नातों की चर्चा न करें।
  • जनाज़े के पीछे बतियाते हुए या गलबहियां बनाकर न चलें।

अल्लाह हमें और आप सबको इन बातों पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।
आमीन। सुम्मा आमीन।


एक ज़रूरी ऐलान — इंतेक़ाल की ख़बर भेजते वक़्त अहम हिदायतें

अक्सर देखा गया है कि इंतेक़ाल की ख़बर देर से या अधूरी पहुंचने की वजह से लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि ख़बर भेजते वक़्त निम्न जानकारी ज़रूर शामिल करें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम, वल्दियत या शौहर का नाम
2️⃣ पूरा पता (पैतृक व वर्तमान)
3️⃣ दफ़्न का सही वक़्त और क़ब्रिस्तान का नाम
4️⃣ घर के जिम्मेदार शख़्स का मोबाइल नंबर
5️⃣ अगर मर्द का इंतेक़ाल हुआ हो तो मरहूम की फोटो
6️⃣ इंतेक़ाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम — वालिदैन, भाई-बहन, औलाद वग़ैरह

इन तमाम जानकारियों से ख़बर मुकम्मल होती है और बिरादरी तक सही वक़्त पर सही सूचना पहुँचती है।


मय्यत के बारे में ज़्यादा मालूमात के लिए

अब्दुल क़य्यूम साहब
📞 9810191408


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अमीनगर सराय, ज़िला बागपत (उ.प्र.) से
अली हसन मुल्तानी की ख़ास रिपोर्ट

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अलीगढ़ की हिना मिर्जा को मिली राष्ट्रीय जिम्मेदारी, उपभोक्ता अधिकारों की आवाज़ बनेंगी वाइस चेयरपर्सन

अलीगढ़। समाज सेवा और जनहित के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय भूमिका निभा रहीं अलीगढ़ की हिना मिर्जा को एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दायित्व सौंपा गया है। उन्हें की अलीगढ़ जिला कमेटी का वाइस चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति राष्ट्रीय महासचिव डॉ. शाज़िया नाज़ एड. के अनुमोदन से आगामी तीन वर्षों के लिए की गई है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से जारी मनोनयन पत्र में स्पष्ट किया गया है कि हिना मिर्जा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम–2019 के तहत उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों, कर्तव्यों और उपलब्ध कानूनी उपायों के प्रति जागरूक करने हेतु विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन करेंगी। संगठन को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए ज़मीनी स्तर पर ठोस और प्रभावी पहल देखने को मिलेगी।

राष्ट्रीय महासचिव डॉ. शाज़िया नाज़ एड. ने हिना मिर्जा को इस नई जिम्मेदारी के लिए हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि उनका सामाजिक अनुभव और समर्पण संगठन को नई दिशा देगा। उन्होंने विश्वास जताया कि हिना मिर्जा उपभोक्ताओं की समस्याओं को गंभीरता से उठाते हुए संगठन को और अधिक सशक्त बनाएंगी।

अलीगढ़ जैसे ऐतिहासिक और शैक्षणिक शहर से जुड़ी इस नियुक्ति को सामाजिक हलकों में विशेष सराहना मिल रही है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी हिना मिर्जा को बधाइयाँ देते हुए आशा व्यक्त की है कि वे उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा में एक सशक्त सेतु साबित होंगी।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित,
पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को समर्पित
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बेइंतहा रंज व ग़म की खबर: मोहम्मद रफ़ीक़ साहब (सराये वाले) का इंतक़ालअल्लाह मरहूम को जन्नत-उल-फ़िरदौस अता फरमाए, आमीन 🤲

बेहद अफ़सोस और दिली सदमे के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि मोहम्मद रफ़ीक़ साहब क़स्बा सराये वाले, जो हाल मुक़ाम गुड़गांव में रह रहे थे, आज दिन जुमेरात, 05 फ़रवरी 2026 को कुछ ही देर पहले क़ज़ा-ए-ईलाही से इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत फरमा गए।

यह खबर सुनते ही अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और पूरी बिरादरी में शोक की लहर दौड़ गई।

मरहूम एक नेकदिल, शरीफ़ और सादगी पसंद इंसान थे। उनके अचानक इंतक़ाल से जो ख़ला पैदा हुआ है, उसे भर पाना मुश्किल है।
मरहूम हाजी क़य्यूम सराये वाले के बड़े भाई थे। अल्लाह तआला अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।

🕊️ जनाज़े की जानकारी

मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा
📅 दिन: जुमाआ, 06 फ़रवरी 2026
वक़्त: सुबह 10:30 बजे

नमाज़ के बाद मरहूम को
📍 कब्रिस्तान: अमीनगर सराये, ज़िला बागपत (उत्तर प्रदेश)
में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फरमा कर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें।


📢 एक ज़रूरी और अहम अपील (इंतक़ाल की खबर भेजने से पहले)

अक्सर देखा जाता है कि अधूरी या देर से पहुंची जानकारी की वजह से लोग जनाज़े तक नहीं पहुंच पाते। इस परेशानी को खत्म करने के लिए राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से अदब के साथ गुज़ारिश करती है कि इंतेकाल की खबर भेजते वक़्त नीचे दी गई जानकारियां ज़रूर शामिल करें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम
2️⃣ पूरा पता (मूल निवास और मौजूदा निवास)
3️⃣ दफ़ीने का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स के 1-2 फ़ोन नंबर
5️⃣ अगर मर्द का इंतेकाल हुआ हो तो मरहूम की फोटो
6️⃣ इंतेकाल की वजह (अगर मुनासिब हो)
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम (भाई, बहन, वालिदैन, औलाद आदि)

👉 इन मालूमात से खबर मुकम्मल होगी और बिरादरी को सही वक़्त पर सही जानकारी मिल सकेगी।


📰 डिस्क्लेमर

पत्रिका में प्रकाशित सभी लेख, समाचार, विचार, प्रेस विज्ञप्ति या विज्ञापन संबंधित लेखक, संवाददाता या विज्ञापनदाता के निजी विचार हैं।
इनसे पत्रिका, संपादक, प्रकाशक या प्रबंधन की सहमति आवश्यक नहीं मानी जाएगी।
किसी भी विवाद की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) दिल्ली रहेगा।


🤲 दुआ

“ऐ अल्लाह! मरहूम मोहम्मद रफ़ीक़ साहब की मग़फ़िरत फरमा,
उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे,
और उनके अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमा।”

आमीन या रब्बुल आलमीन 🤲


✍️ ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट
📰 मुल्तानी समाज
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📌 ज़्यादा जानकारी के लिए संपर्क करें:
हाजी क़य्यूम सराये वाले
📱 9810191408

😭🤲

Wednesday, February 4, 2026

निहायत ही रंजो-ग़म के साथ अफ़साना परवीन के इंतेक़ाल की दुखद ख़बर

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम, निहायत ही रंजो-ग़म के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह दुखभरी इतल्ला दी जाती है कि बीती रात बरोज़ जुमेरात, बा-तारीख़ 05 फ़रवरी 2026, रात तक़रीबन 2:30 बजे, लंबी बीमारी के बाद

अफ़साना परवीन, वल्द जनाब मोहम्मद यूनुस साहब, साकिन गांव बरवाला, ज़िला बागपत (उत्तर प्रदेश) का क़ज़ा-ए-ईलाही से इंतेक़ाल हो गया।

इस असहनीय सदमे से परिवार, अज़ीज़ो-अक़ारिब और तमाम अहले-बिरादरी गहरे शोक में डूबे हुए हैं। मरहूमा अपने नेक अख़लाक़, सादगी और सब्र-ओ-शुक्र के लिए जानी जाती थीं। उनके अचानक बिछड़ जाने से पूरे इलाके में ग़म की लहर दौड़ गई है।

जनाज़े और तदफ़ीन की जानकारी

मिली जानकारी के मुताबिक, मरहूमा की नमाज़-ए-जनाज़ा बाद नमाज़-ए-ज़ोहर अदा की जाएगी। इसके बाद गांव बरवाला, ज़िला बागपत (उत्तर प्रदेश) स्थित कब्रिस्तान में मय्यत को सपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।
तमाम अहले-ईमान और अज़ीज़ो-अक़ारिब से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत कर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फिरत फ़रमाएँ।

अल्लाह रब्बुल आलमीन मरहूमा की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए और तमाम घरवालों को यह भारी सदमा सहन करने के लिए सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए।
आमीन, सुम्मा आमीन।

ज़रूरी संपर्क

मय्यत के संबंध में किसी भी अतिरिक्त जानकारी के लिए
मोहम्मद सरफराज साहब
📞 87002 72814
पर संपर्क किया जा सकता है।


एक ज़रूरी ऐलान

इंतेक़ाल की ख़बर भेजने के लिए अहम् हिदायतें

अक्सर देखा गया है कि इंतेक़ाल की ख़बर बिरादरी तक देर से या अधूरी जानकारी के साथ पहुँचती है, जिससे कई लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि जब भी किसी इंतेक़ाल की ख़बर भेजें, तो इन बातों का ख़ास ख़याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता (स्थायी व वर्तमान निवास)।
3️⃣ दफ़ीन का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार शख़्स (एक-दो) के फ़ोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतेक़ाल हुआ हो तो मरहूम की फोटो।
6️⃣ इंतेक़ाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ घर के बाक़ी अहल-ए-ख़ाना के नाम — जैसे भाई, बहन, माँ-बाप, औलाद आदि।

👉 इन तमाम जानकारियों से ख़बर मुकम्मल होती है और बिरादरी के लोगों तक सही वक़्त पर सही जानकारी पहुँच पाती है।


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प्रकाशित सामग्री की सत्यता, विश्वसनीयता या किसी भी दावे के लिए लेखक/विज्ञापनदाता स्वयं उत्तरदायी होंगे। पत्रिका एवं प्रबंधन किसी भी प्रकार की कानूनी, सामाजिक या वित्तीय जिम्मेदारी से पूर्णतः मुक्त रहेंगे।
किसी भी विवाद, शिकायत या न्यायिक कार्यवाही की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।

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Sunday, February 1, 2026

अपने बुज़ुर्गों को भुला देना ज़वाल है, उन्हें याद रखना दीन है — “मुल्तानी घराना” दीन-ए-इस्लाम की रौशनी में एक नेक क़दम

इस्लाम हमें यह तालीम देता है कि

“जिसने अपने अस्ल को पहचाना, उसने अपने रब को पहचाना।”

आज अफ़सोस के साथ कहना पड़ता है कि हम रोज़ आगे तो बढ़ रहे हैं,
मगर अपने पीछे छूटे बुज़ुर्गों को भूलते जा रहे हैं।
वो दादा, दादी, नाना, नानी…
जिनकी दुआओं से हमारी ज़िंदगियाँ आबाद हैं,
जिनकी मेहनत और कुर्बानियों से हमारी पहचान बाक़ी है।

इस्लाम सिर्फ़ नमाज़, रोज़ा और इबादत का नाम नहीं —
इस्लाम नसब की हिफ़ाज़त, रिश्तों को ज़िंदा रखने
और अपनी नस्लों को पहचान देने का नाम भी है।


इसी दीन की रौशनी में, इसी एहसास के साथ
पैदाइशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार–बढ़ई बिरादरी की
देश की सबसे बड़ी और ख़िदमतगुज़ार तंजीम
“मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट” (रजिस्टर्ड ऑल इंडिया)
एक ऐसा काम शुरू करने जा रही है
जो न सिर्फ़ क़ाबिले-फ़ख़्र है
बल्कि क़ाबिले-सवाब भी है।

SIR (Social Information Register) — “मुल्तानी घराना”

यह सिर्फ़ एक रिकॉर्ड नहीं,
यह हमारी नस्लों की अमानत है।

“मुल्तानी घराना” दरअसल हमारी बिरादरी का
मुकम्मल शिजरा-ए-नसब (Family Tree) है —
जिसके ज़रिए हम अपने पर-परदादा, पर-परदादी, परदादा, परदादी,
परनाना, परनानी
और तमाम बुज़ुर्गों को
फिर से ज़िंदा कर रहे हैं —
कम से कम यादों में, दुआओं में और इतिहास में।

इस्लाम क्या चाहता है हमसे ?

इस्लाम चाहता है कि:

  • हम अपने बुज़ुर्गों को भूलें नहीं
  • उनकी पहचान मिटने न दें
  • और आने वाली नस्लों को यह बता सकें
    कि तुम किस खानदान से हो, तुम्हारा अस्ल क्या है

आज अगर हमने अपने बुज़ुर्गों के फ़ोटो, नाम और रिश्ते
महफूज़ नहीं किए,
तो कल हमारी आने वाली नस्लें
सिर्फ़ नाम की मुसलमान होंगी —
नसब की पहचान से महरूम।

आपकी ज़िम्मेदारी — एक दीनि अमानत

आज आपसे गुज़ारिश है,
बल्कि दीन के वास्ते अपील है कि:

  • अपने तमाम बुज़ुर्गों के फ़ोटो
  • चाहे वे इस दुनिया में हों या अल्लाह को प्यारे हो चुके हों
  • अपनी पूरी फैमिली, कुनबा, खानदान और रिश्तेदारों
    के नाम और रिश्तों की मुकम्मल लिस्ट

आज ही तैयार कर लें।

क्योंकि बहुत जल्द
“मुल्तानी घराना” की टीम
आपके दरवाज़े पर दस्तक देने वाली है।

उस वक़्त अगर आपने तैयारी कर रखी होगी,
तो समझिए आपने:

  • अपने बुज़ुर्गों का हक़ अदा किया
  • अपनी नस्लों को पहचान दी
  • और एक नेक काम में शरीक होकर
    सवाब का ज़खीरा जमा किया।

यह काम एक इंसान का नहीं — पूरी उम्मत का है

यह सिर्फ़ ट्रस्ट का मिशन नहीं,
यह पूरी मुल्तानी बिरादरी की
दीनि और अख़लाक़ी ज़िम्मेदारी है।

और यक़ीन जानिए —
अल्लाह उस कौम को कभी ज़वाल नहीं देता
जो अपनी जड़ों से जुड़ी रहती है।

तो आइए,
दीन के नाम पर,
इस्लाम की तालीम के नाम पर,
अपने बुज़ुर्गों की याद और पहचान को
हमेशा के लिए महफूज़ कर लें।

“मुल्तानी घराना” — नस्लों की पहचान, दुआओं की अमानत


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