Tuesday, July 7, 2026

खतौली की नजमा बी का इंतिक़ाल, नमाज़-ए-जनाज़ा आज दोपहर 2 बजे मस्जिद फतेहपुरी में अदा की जाएगी

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

मुज़फ्फरनगर/खतौली, उत्तर प्रदेश | मुल्तानी समाज | ख़ास रिपोर्ट

निहायत अफ़सोस और गहरे रंज-ओ-ग़म के साथ बिरादरी और तमाम अहबाब को इत्तिला दी जाती है कि नाहरीया धर्म कांटे के सामने मोहल्ला शाहबान, बुढ़ाना रोड, कस्बा खतौली, ज़िला मुज़फ्फरनगर की रहने वाली नजमा बी, अहलिया जनाब मिर्ज़ा अफ़ज़ाल साहब (कुशावली वाले) खजांची "मुल्तानी समाजसेवी संगठन का बीती रात तकरीबन 2:00 बजे मेरठ के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान कज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया। मरहूमा की उम्र लगभग 35 साल थी।

मरहूमा नजमा बी अपने पीछे अपने शौहर, चार बेटों और एक बेटी सहित पूरा खानदान, रिश्तेदार, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और चाहने वालों को ग़मज़दा छोड़कर इस फ़ानी दुनिया से हमेशा के लिए रुख़्सत हो गईं।

बताया जाता है कि मरहूमा, जनाब सईद अहमद साहब (गाँव दभेड़ी), हाल निवासी खतौली की साहबज़ादी थीं। उनके परिवार में तीन भाई और तीन बहनें हैं। इस सदमे से पूरे परिवार और बिरादरी में गहरा दुःख और मातम का माहौल है।

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूमा की नमाज़-ए-जनाज़ा आज, बुधवार 08 जुलाई 2026 को दोपहर 2:00 बजे मस्जिद फतेहपुरी, खतौली में अदा की जाएगी। इसके बाद गोर-ए-ग़रीबा कब्रिस्तान में तदफ़ीन अमल में लाई जाएगी। तमाम बिरादरान-ए-इस्लाम से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूमा के हक़ में दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और उनके लवाहिक़ीन को सब्र-ए-जमील की दुआ दें।

अल्लाह तआला मरहूमा नजमा बी की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे, उसे जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए और तमाम अहल-ए-ख़ाना को यह सदमा बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ के साथ सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

नोट: मरहूमा के संबंध में अधिक जानकारी के लिए उनके शौहर एवं बिरादरी की ख़िदमत में हमेशा पेश-पेश रहने वाले वरिष्ठ समाजसेवी जनाब मिर्ज़ा अफ़ज़ाल साहब (कुशावली वाले) खजांची मुल्तानी समाजसेवी संगठन से मोबाइल नंबर 8077790947 पर संपर्क किया जा सकता है।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज़ पोर्टल/यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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Monday, July 6, 2026

😭 जवान बेटे की असमय जुदाई ने बड़ौत को ग़म में डुबो दिया — जीशान की दर्दनाक सड़क दुर्घटना में इंतिकाल, अल्लाह मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए 🤲

मुल्तानी समाज उत्तर प्रदेश डेस्क

"इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।"

निहायत ही अफ़सोस और गहरे रंजो-ग़म के साथ मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी और तमाम अहबाब को इत्तिला दी जाती है कि जनाब दिलशाद साहब (पूर्व सभासद, नगर पालिका परिषद बड़ौत), निवासी गांव तुगाना, हाल निवासी मोहल्ला पठानकोट, बड़ौत, जनपद बागपत (उत्तर प्रदेश) के जिगर के टुकड़े जनाब जीशान (उम्र लगभग 20–22 वर्ष) का मंगलवार, 7 जुलाई 2026 की बीती रात लगभग 3 बजे एक दर्दनाक सड़क हादसे में कज़ा-ए-इलाही से इंतिकाल हो गया।

मिली जानकारी के अनुसार मरहूम जीशान दिल्ली से बाइक द्वारा अपने घर बड़ौत लौट रहे थे। इसी दौरान सरूरपुर एरिया में उनकी बाइक दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसा इतना भीषण था कि वह ज़िंदगी की जंग हार गए और अपने रब के हुक्म से इस फ़ानी दुनिया को अलविदा कह गए।

मरहूम अपने वालिदैन की उम्मीदों का सहारा थे। बताया जाता है कि उनकी तीन बहनें हैं और उन्हीं का इकलौता भाई थे। इस दर्दनाक हादसे की खबर जैसे ही बड़ौत पहुंची, घर में मातम छा गया। मोहल्ले और शहर में जिसे भी यह दुखद समाचार मिला, वह ग़मज़दा परिवार के घर ताज़ियत के लिए पहुंचने लगा। हर आंख अश्कबार है और हर ज़ुबान पर मरहूम की मग़फ़िरत की दुआ है।

परिजनों के अनुसार मरहूम के नाना और मामा मूल रूप से गांव कोताना के रहने वाले बताए जाते हैं, जो वर्तमान में गांव बावली, तहसील बड़ौत, जनपद बागपत में निवास करते हैं।

बाद नमाज़ असर मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा  होगी और बड़ौत के ही कब्रिस्तान मैं किए जायेंगे तदफ़ीन सपूर्दे ख़ाक लिहाज़ा आप हजरात भी जनाजे में शरीक होकर सवाबे दारेन हासिल करें।

हम अल्लाह तआला की बारगाह में दुआगो हैं कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त मरहूम जीशान की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए और तमाम लवाहिक़ीन को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन या रब्बल आलमीन।

दुआ की गुज़ारिश:
तमाम अहबाब से गुज़ारिश है कि मरहूम के लिए सूरह फ़ातिहा, इस्तिग़फ़ार और दुआ-ए-मग़फ़िरत का एहतमाम फ़रमाएं तथा उनके अहल-ए-ख़ाना के लिए सब्र और हिम्मत की दुआ करें।

नोट: मरहूम के संबंध में अधिक जानकारी के लिए उनके चाचा जनाब मईनुद्दीन साहब से मोबाइल नंबर 7455844715 पर संपर्क किया जा सकता है।

— प्रेस लाइन —
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी की राष्ट्रीय समाचार पत्रिका / न्यूज़ पोर्टल / यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की विशेष रिपोर्ट।

Sunday, July 5, 2026

700 साल पुरानी विरासत: मुल्तान से नागौर तक मुल्तानी समाज की गौरवशाली दास्तान

तोपसाज़ी, लोहे की दस्तकारी और सूफ़ी रिवायतों से जुड़ी एक ऐतिहासिक विरासत

विशेष संवाददाता | मुल्तानी समाज न्यूज़

राजस्थान के ऐतिहासिक शहर नागौर की सरज़मीन केवल सूफ़ी बुज़ुर्गों, किलों और सल्तनतों की वजह से ही मशहूर नहीं रही, बल्कि यह शहर सदियों से मुल्तानी समाज की मेहनत, दस्तकारी और इल्म-ओ-हुनर का भी गवाह रहा है। इतिहास, स्थानीय परंपराओं और समाज की मौखिक विरासत (Oral Traditions) के अनुसार, आज नागौर, राजस्थान और मध्य प्रदेश में बसे मुल्तानी समाज के अधिकांश परिवारों की जड़ें मुल्तान (वर्तमान पाकिस्तान) से जुड़ी मानी जाती हैं।

करीब 600 से 700 वर्ष पूर्व, जब उत्तर भारत में सल्तनत का दौर था, तब मुल्तान अपने लोहे के उद्योग, हथियार निर्माण और तोपसाज़ी के लिए पूरे हिंदुस्तान में प्रसिद्ध था। उसी दौर में अनेक कुशल लोहार, धातु-शिल्पी और तोप बनाने वाले कारीगर नागौर पहुँचे और यहीं की मिट्टी में हमेशा के लिए बस गए।


मुल्तान से नागौर तक का ऐतिहासिक सफ़र

इतिहासकारों के अनुसार 13वीं से 15वीं शताब्दी के बीच नागौर एक महत्वपूर्ण सैन्य, व्यापारिक और सूफ़ी केंद्र बन चुका था। किलों की सुरक्षा और सेना को मज़बूत बनाने के लिए कुशल तोपसाज़ों और हथियार बनाने वाले कारीगरों की आवश्यकता थी।

उसी समय मुल्तान से आए मुस्लिम लोहारों और धातु-शिल्पियों को नागौर के शासकों ने सम्मानपूर्वक बसाया। यही परिवार आगे चलकर "मुल्तानी लोहार" अथवा "मुल्तानी समाज" के नाम से पहचाने जाने लगे।


नागौर में बसने के तीन प्रमुख ऐतिहासिक चरण

पहला चरण – सूफ़ी सिलसिलों का दौर (13वीं शताब्दी)

इतिहास में यह उल्लेख मिलता है कि मुल्तान और नागौर के बीच आध्यात्मिक संबंध सूफ़ी संतों के माध्यम से अत्यंत प्रगाढ़ थे। क़ाज़ी हमीदुद्दीन नागौरी, हज़रत बहाउद्दीन ज़करिया और सूफ़ी सिलसिलों के माध्यम से अनेक विद्वान, मुरीद और कारीगर मुल्तान से नागौर पहुँचे। यही मुल्तानी समाज के आगमन की प्रारंभिक नींव मानी जाती है।


दूसरा चरण – खिलजी और तुगलक काल (14वीं शताब्दी)

अलाउद्दीन खिलजी और बाद में मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में नागौर एक विशाल सैन्य केंद्र के रूप में विकसित हुआ। किलों के विस्तार और हथियार निर्माण के लिए मुल्तान से दक्ष लोहारों और तोपसाज़ों को आमंत्रित किया गया।

इसी काल को मुल्तानी समाज के बड़े पैमाने पर नागौर में बसने का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है।


तीसरा चरण – नागौर सल्तनत का दौर (15वीं शताब्दी)

सन 1407 ईस्वी के बाद नागौर के शासकों ने अपनी सेना को आधुनिक स्वरूप देने के उद्देश्य से मुल्तान और गुजरात से विशेष रूप से तोपसाज़ों तथा लोहे के विशेषज्ञ कारीगरों को बुलाया और उन्हें किले के आसपास स्थायी रूप से बसाया।


बाबा हाजी सुलेमान मुल्तानी – समाज के आदि पुरुष

समाज की स्थानीय परंपराओं और बुज़ुर्गों के अनुसार बाबा हाजी सुलेमान मुल्तानी को नागौर में बसने वाले मुल्तानी समाज का प्रथम पूर्वज माना जाता है।

बताया जाता है कि वे एक कुशल धातु-शिल्पी, हथियार निर्माता और सूफ़ी विचारधारा से जुड़े हुए व्यक्तित्व थे। उन्होंने अपने साथ कई परिवारों को नागौर लाकर पहली भट्टी और कार्यशाला स्थापित की, जहाँ से इस समाज की नई पहचान शुरू हुई।


तोपखाने से कृषि उपकरणों तक का सफ़र

समय के साथ युद्धों का दौर समाप्त हुआ, लेकिन मुल्तानी समाज का हुनर कभी समाप्त नहीं हुआ।

जिन हाथों ने कभी तलवारें, तोपें और हथियार बनाए, उन्हीं हाथों ने आगे चलकर खेती-किसानी के लिए फावड़े, कुल्हाड़ियाँ, कल्टीवेटर, लोहे के औज़ार और घरेलू उपयोग की वस्तुएँ बनाकर पूरे देश में अपनी अलग पहचान स्थापित की।

आज भी नागौर का लोहा बाज़ार और वहाँ बनने वाले कृषि उपकरण इस ऐतिहासिक विरासत की जीवंत मिसाल माने जाते हैं।


सूफ़ी रिवायतों से जुड़ा रिश्ता

मुल्तान और नागौर का संबंध केवल व्यापार या दस्तकारी तक सीमित नहीं था, बल्कि सूफ़ी सिलसिलों ने भी दोनों शहरों को एक आध्यात्मिक डोर में बाँधा।

इतिहास में क़ाज़ी हमीदुद्दीन नागौरी और हज़रत बहाउद्दीन ज़करिया के बीच गहरे धार्मिक संबंधों का उल्लेख मिलता है। वहीं सूफ़ी हमीदुद्दीन नागौरी की फ़क़ीरी और इल्तुतमिश का उनके प्रति सम्मान आज भी नागौर की ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।


तारकीन का बुलंद दरवाज़ा – अदब और अकीदत की निशानी

नागौर स्थित सूफ़ी हमीदुद्दीन नागौरी की दरगाह का ऐतिहासिक बुलंद दरवाज़ा सुल्तान शम्सुद्दीन इल्तुतमिश द्वारा बनवाया गया माना जाता है। बाद में मुहम्मद बिन तुगलक के दौर में दरगाह परिसर के अन्य निर्माण और विस्तार कार्य हुए।

यह इमारत आज भी सूफ़ी परंपरा, अदब और सल्तनती इतिहास की एक अनमोल धरोहर है।


आज भी ज़िंदा है 700 साल पुरानी पहचान

मुल्तानी समाज ने सदियों तक अपने पूर्वजों की दस्तकारी, मेहनत और ईमानदारी की परंपरा को जीवित रखा है। बदलते दौर के बावजूद समाज ने अपने हुनर को नई पीढ़ियों तक पहुँचाया और देश के औद्योगिक तथा कृषि विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

आज राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश सहित देश के अनेक राज्यों में बसे मुल्तानी समाज के लोग अपने पूर्वजों की इसी ऐतिहासिक विरासत पर गर्व करते हैं।


संपादकीय टिप्पणी

यह इतिहास स्थानीय लोक-परंपराओं, समाज की मौखिक विरासत और विभिन्न ऐतिहासिक उल्लेखों पर आधारित है। इनमें से कुछ विवरण व्यापक रूप से स्वीकार किए जाते हैं, जबकि कुछ दावों (जैसे किसी एक व्यक्ति को समाज का पहला पूर्वज मानना या कुछ विशिष्ट घटनाएँ) के लिए स्वतंत्र समकालीन ऐतिहासिक स्रोत सीमित हैं। इसलिए इन्हें समाज की परंपरागत मान्यताओं के रूप में प्रस्तुत करना अधिक उपयुक्त है।

"जिस कौम ने कभी सल्तनतों की तोपें गढ़ीं, वही कौम आज अपने हुनर, मेहनत और ख़िदमत से समाज की पहचान गढ़ रही है। मुल्तानी समाज की यह 700 वर्ष पुरानी विरासत केवल इतिहास नहीं, बल्कि आने वाली नस्लों के लिए फ़ख्र, पहचान और प्रेरणा का अमूल्य ख़ज़ाना है।"

Wednesday, July 1, 2026

जलालाबाद में सुलह की मिसाल: जब हिकमत, सब्र और ख़ुलूस ने डेढ़ साल पुराने पारिवारिक विवाद का कर दिया ख़ातिमा


✍️ ज़मीर आलम | प्रधान संपादक, मुल्तानी समाज

जलालाबाद (जनपद शामली, उत्तर प्रदेश)।

समाज की असली ख़ूबसूरती सिर्फ़ रिश्ते बनाने में नहीं, बल्कि टूटते हुए रिश्तों को फिर से जोड़ने में होती है। जब नफ़रत, ग़ुस्सा और मुक़दमेबाज़ी रिश्तों पर हावी होने लगें, तब कुछ ऐसे लोग सामने आते हैं जो अपनी हिकमत, सब्र, अख़लाक़ और ख़ुलूस से बिखरते घरों को फिर आबाद कर देते हैं। क़स्बा जलालाबाद में पेश आया एक ऐसा ही वाक़िया आज पूरे समाज के लिए एक मिसाल बन गया।

जनपद शामली के एक युवक और क़स्बा जलालाबाद की एक युवती के बीच काफ़ी समय से घरेलू विवाद चला आ रहा था। दोनों परिवारों के बीच लगभग डेढ़ वर्ष से मुक़दमेबाज़ी जारी थी। रिश्तेदारों, बिरादरी के ज़िम्मेदार लोगों और स्थानीय गणमान्य नागरिकों ने कई बार दोनों पक्षों के बीच सुलह कराने की कोशिश की। यह मामला तीन बार स्थानीय विधायक तक भी पहुँचा, मगर तमाम कोशिशों के बावजूद कोई स्थायी हल नहीं निकल सका।

मामले ने उस समय और भी दर्दनाक मोड़ ले लिया जब इस दौरान दुल्हन के सिर से उसके वालिद का साया उठ गया और वह यतीम हो गई। इस हादसे ने हर दर्दमंद दिल को झकझोर दिया, लेकिन इसके बावजूद विवाद समाप्त नहीं हो सका।

अल्हम्दुलिल्लाह, जब यह मामला जलालाबाद के वरिष्ठ समाजसेवी हाजी नज़ीर अहमद साहब तक पहुँचा तो उन्होंने इसे महज़ एक पारिवारिक झगड़ा नहीं, बल्कि समाज की अमानत समझा। उन्होंने रामपुर (ज़िला सहारनपुर) निवासी जनाब अमीर हसन साहब, इज़हार मेंबर साहब तथा हाजी मसीउल्लाह साहब (जलालाबाद) के साथ मिलकर दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाया।

लंबी बातचीत, आपसी मशवरे, सब्र, हिकमत और इस्लामी उसूलों के मुताबिक़ सुलह-सफ़ाई की कोशिशों के बाद आख़िरकार दोनों पक्ष आपसी रज़ामंदी से समझौते पर राज़ी हो गए। सबसे ख़ुशी की बात यह रही कि दोनों परिवारों ने एक-दूसरे के विरुद्ध दर्ज सभी मुक़दमे भी वापस लेने का फ़ैसला किया। इस तरह एक लंबे समय से चला आ रहा विवाद भाईचारे, मोहब्बत और समझदारी के साथ समाप्त हो गया।

इस्लाम हमेशा अमन, मोहब्बत, माफ़ी और सुलह की तालीम देता है। क़ुरआन-ए-करीम और हदीस-ए-पाक में भी लोगों के दरमियान सुलह कराने को बड़ी नेकी और अज़ीम अमल बताया गया है। ऐसे में जलालाबाद के समाजसेवियों की यह पहल न सिर्फ़ दोनों परिवारों के लिए राहत लेकर आई, बल्कि पूरे समाज के लिए यह पैग़ाम भी दे गई कि बातचीत और आपसी समझदारी से बड़े से बड़ा विवाद भी ख़त्म किया जा सकता है।

आज ज़रूरत इस बात की है कि समाज में मुक़दमेबाज़ी, कटुता और नफ़रत की बजाय आपसी मशवरे, सुलह और भाईचारे की संस्कृति को बढ़ावा दिया जाए। जब समाज के ज़िम्मेदार लोग अपनी ज़िम्मेदारी ईमानदारी से निभाते हैं तो न सिर्फ़ परिवार बचते हैं, बल्कि आने वाली नस्लों के लिए भी बेहतर माहौल तैयार होता है।

अल्लाह तआला से दुआ है कि वह दोनों परिवारों के दरमियान हमेशा मोहब्बत, अमन, बरकत और इत्तेहाद क़ायम रखे तथा इस नेक पहल में शामिल सभी समाजसेवियों को दुनिया और आख़िरत में बेहतरीन अज्र-ओ-सवाब अता फ़रमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।


✍️ ख़ास रिपोर्ट: ज़मीर आलम, प्रधान संपादक (उत्तर प्रदेश डेस्क)

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Monday, June 29, 2026

बागपत की नामवर शख्सियत मरहूम हाजी इकरामुल्ला साहब की अहलिया कनीज बी का इंतिक़ाल, बिरादरी में दौड़ गई ग़म की लहर, इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

बागपत (उत्तर प्रदेश) | उत्तर प्रदेश डेस्क

निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि आज, दिन पीर, 29 जून 2026 को उत्तर प्रदेश के जनपद बागपत की हमारी बिरादरी की नामचीन, खिदमतगार और मशहूर उद्योगपति रहे मरहूम जनाब हाजी इकरामुल्ला साहब की अहलिया कनीज बी उम्र तकरीबन 85 साल का लंबी बीमारी के बाद कज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया। मरहूमा अपने पीछे चार साहेबजादे जनाब अनीस- उर - रहमान, नफीस - उर - रहमान, शफ़ीक़ - उर - रहमान और खलील - उर - रहमान और समेत पौते, पोतियां और नाते नातिन समेत कुनबा, खानदान, रिश्तेदारों और तमाम अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को ग़मज़दा छोड़कर इस फ़ानी दुनिया से हमेशा-हमेशा के लिए पर्दा फरमा गईं। उनके इंतिक़ाल की खबर सुनते ही बिरादरी और जानने वालों में गहरे दुख और अफ़सोस की लहर दौड़ गई। लोग मरहूमा की मग़फ़िरत और उनके घरवालों के लिए सब्र-ओ-हिम्मत की दुआएँ कर रहे हैं।

इस मौके पर "मुल्तानी समाज" परिवार मरहूमा के तमाम अहल-ए-ख़ाना के ग़म में बराबर का शरीक है और अल्लाह तआला की बारगाह में दुआगो है कि वह मरहूमा की तमाम ख़ताओं को माफ़ फरमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुकाम अता फरमाए और तमाम लवाहिकीन को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।

दुआ:

اللهم اغفر لها وارحمها وعافها واعف عنها، وأكرم نزلها ووسع مدخلها، واجعل قبرها روضة من رياض الجنة. آمين يا رب العالمين۔

नोट : नमाज़ मैय्यत को आज रात 11 बजे किया जाएगा सपुर्द - ए - ख़ाक, लिहाज़ा आप हज़रात भी जनाज़े में शरीक होकर सवाबे दारेन हासिल करें।


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Sunday, June 28, 2026

शामली की मरहूमा रूकसाना बी का इंतिक़ाल, आज बाद नमाज़-ए-जौहर सुपुर्द-ए-ख़ाक की जाएँगी, इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

शामली (उत्तर प्रदेश) | मुल्तानी समाज न्यूज़ डेस्क

निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादरान-ए-इस्लाम को इत्तिला दी जाती है कि मोहल्ला नानूपुरा, नज़दीक राम रहीम बारात घर, क़स्बा शामली की साकिना मरहूमा रूकसाना बी, अहलिया मरहूम जनाब मोहम्मद यासीन साहब (असल साकिन गाँव भैसानी, थाना भवन, ज़िला शामली) का आज दिन पीर, 29 जून 2026 को लगभग 65 वर्ष की उम्र में क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूमा का मायका क़स्बा चरथावल, ज़िला मुज़फ्फरनगर में था। उन्होंने अपने पीछे दो बेटे, दो बेटियाँ, अहल-ओ-अयाल, रिश्तेदारों और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब का भरा-पूरा ख़ानदान ग़मज़दा छोड़ दिया है। उनके इंतिक़ाल की ख़बर से पूरे परिवार और जानने वालों में गहरा रंज-ओ-मलाल पाया जा रहा है।

मरहूमा की नमाज़-ए-जनाज़ा आज बाद नमाज़-ए-जौहर, दोपहर 1:30 बजे अदा की जाएगी। इसके बाद मोहल्ला गुलशन नगर, टायर मार्किट स्थित क़ब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम अहबाब, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएँ और उनके लवाहिक़ीन के लिए सब्र-ए-जमील की दुआ करें।

दुआ

ऐ अल्लाह! मरहूमा रूकसाना बी की मग़फ़िरत फ़रमा, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे, क़ब्र की तमाम मंज़िलों को आसान फ़रमा, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा और तमाम लवाहिक़ीन को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा। आमीन या रब्बुल आलमीन।

मज़ीद मालूमात के लिए:
मिस्त्री अख़्तर अली साहब
📞 9756274223


प्रेस लाइन

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हज की सआदत से वापसी पर जनाब हाजी इक़बाल साहब का इस्तक़बाल, छह बच्चों व पोता-पोती के अकीके की दावत में बिरादरी ने दी मुबारकबाद

अलीगढ़, संवाददाता (मुल्तानी समाज):
हज-ए-बैतुल्लाह की मुक़द्दस सआदत हासिल कर 13 जून को हरमैन शरीफ़ैन से वतन वापस लौटने वाले जनाब हाजी इक़बाल साहब एवं उनकी अहलिया के इस्तक़बाल और हज की ख़ुशी के मौके पर अलीगढ़ में एक शानदार और पुरवक़ार तक़रीब का आयोजन किया गया। यह खुशनुमा कार्यक्रम धर्मपुर कोर्टयार्ड, मैरिस रोड, अलीगढ़ में बड़े ही अदब, एहतराम और पुरजोश माहौल में संपन्न हुआ।

इस मौके पर हाजी इक़बाल साहब ने अपनी हज की सआदत की ख़ुशी को अपने परिवार की खुशियों के साथ जोड़ते हुए अपने छह बच्चों तथा पोता-पोती के अकीके की दावत का भी स्पेशल प्रोग्राम रखा। प्रोग्राम में मुल्तानी बिरादरी के रसूखदार लोग, रिश्तेदार, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, समाजसेवी एवं अलग अलग क्षेत्रों की मशहूर हस्तियों ने बड़ी तादाद में शिरकत की।

महफ़िल का माहौल मोहब्बत, भाईचारे और मुसर्रत से सराबोर रहा। मेहमानों ने हाजी इक़बाल साहब और उनकी अहलिया को हज की मुकम्मल अदायगी पर दिली मुबारकबाद पेश की और उनकी इबादतों की क़ुबूलियत, सेहत, सलामती तथा पूरे ख़ानदान की खुशहाली के लिए दुआएँ कीं।

प्रोग्राम के दौरान मेहमानों की शानदार मेहमाननवाज़ी की गई और आपसी मेल-मिलाप तथा बिरादराना यकजहती का ख़ूबसूरत मंज़र देखने को मिला। प्रोग्राम में मौजूद लोगों ने इस आयोजन को सामाजिक एकता, पारिवारिक मोहब्बत और दीनी रिवायतों का बेहतरीन संगम बताते हुए मेज़बान परिवार की भरपूर सराहना की।

यह तक़रीब न सिर्फ़ हज की सआदत की ख़ुशी का इज़हार थी, बल्कि मुल्तानी बिरादरी के आपसी इत्तेहाद, मोहब्बत और भाईचारे की भी एक शानदार मिसाल बनकर सामने आई।

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✍️ ख़ास पेशकश | मुल्तानी समाज

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार–बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की यह ख़ास रिपोर्ट।

अगर आप भी अपनी बिरादरी से मुतअल्लिक़ किसी ख़ुशनुमा तक़रीब, दीनी, समाजी या तालीमी प्रोग्राम, ख़बर, मक़ाला (आर्टिकल), पैग़ाम, ताज़ियती इत्तिला, मुबारकबाद, किस्से, कहानियाँ या तिजारती इश्तिहार को मुल्क भर में प्रकाशित व प्रसारित कराना चाहते हैं, तो बेझिझक हमसे राब्ता फ़रमाएँ।

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जयपुर में अब्दुल समद साहब (नेता जी) का इंतेकाल, मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी में ग़म की लहर, इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

जयपुर (राजस्थान)।

निहायत ही रंजो-ग़म के साथ यह इत्तेला दी जाती है कि आज दिन इतवार, 28 जून 2026 को बट्टा बस्ती, गुजराती पार्क, जयपुर (राजस्थान) के रहने वाले, मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की एक सम्मानित शख्सियत जनाब अब्दुल समद साहब (नेता जी) का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया।

"इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन"
(बेशक हम अल्लाह ही के हैं और उसी की तरफ़ लौटकर जाने वाले हैं।)

मरहूम के इंतेकाल की खबर मिलते ही परिवार, रिश्तेदारों, दोस्तों और बिरादरी के लोगों में गहरा दुख और अफ़सोस व्याप्त हो गया। हर शख्स अल्लाह तआला से उनकी मग़फिरत, बुलंदी-ए-दरजात और जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुकाम की दुआ कर रहा है।

अल्लाह तआला मरहूम की तमाम ख़ताओं को माफ़ फरमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए, मुनकर-नकीर के सवालात आसान फरमाए, क़ब्र की तमाम मंज़िलें आसान करे और उन्हें अपनी रहमत के साए में जगह अता फरमाए। आमीन।

साथ ही अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त मरहूम के तमाम अहलेख़ाना, रिश्तेदारों और चाहने वालों को इस सदमे को बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ दे तथा सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा एवं तदफ़ीन आज रात 10:00 बजे नारी का नाका कब्रिस्तान, जयपुर (राजस्थान) में अदा की जाएगी। तमाम अहबाब, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए मग़फिरत की दुआ करें और इस दुख की घड़ी में परिवार का हौसला बढ़ाएँ।

मरहूम के संबंध में अधिक जानकारी के लिए निम्नलिखित नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है—

अब्दुल सलाम: 9352667963
बिलाल अहमद: 9166339486
अब्दुल वहिद: 8005850484


राजस्थान डेस्क से विशेष रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत तथा देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की राष्ट्रीय समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए यह विशेष रिपोर्ट प्रधान संपादक ज़मीर आलम के निर्देशन में राजस्थान डेस्क से प्रस्तुत की गई है।

यदि आप भी अपनी कोई सामाजिक, धार्मिक, शैक्षिक अथवा सामुदायिक खबर, लेख, संदेश, संस्मरण, कहानी या विज्ञापन प्रकाशित एवं प्रसारित कराना चाहते हैं, तो संपर्क करें—

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दुआ:
ऐ अल्लाह! मरहूम जनाब अब्दुल समद साहब (नेता जी) की मग़फिरत फरमा, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुकाम अता फरमा, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे और उनके तमाम अहलेख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमा। आमीन या रब्बुल आलमीन।


मुस्लिम मुल्तानी लोहार बिरादरी के बुज़ुर्ग जनाब बशीर अहमद साहब का इंतिकाल, पूरे इलाके में ग़म की लहर

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज़ पोर्टल/यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

खतौली (मुजफ्फरनगर), 28 जून 2026।
निहायत ही अफ़सोस और रंज-ओ-ग़म के साथ यह इत्तिला दी जाती है कि आलू गोदाम के पास, बुढ़ाना रोड, क़स्बा खतौली निवासी जनाब बशीर अहमद साहब वल्द मरहूम जनाब इस्माईल साहब (गाँव सिकन्दरपुर वाले) का आज इतवार, 28 जून 2026 को सुबह तकरीबन 10 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिकाल हो गया। मरहूम की उम्र तकरीबन 94 वर्ष थी।

मरहूम अपनी नेक सीरत, सादा मिज़ाजी, खुशअख़लाक़ी और बिरादरी में इज़्ज़त व एहतराम के लिए जाने जाते थे। उनके इंतिकाल की खबर मिलते ही रिश्तेदारों, दोस्तों, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादरी के लोगों में गहरे दुख की लहर दौड़ गई। उनके आवास पर ताज़ियत पेश करने वालों का सिलसिला जारी है।

मरहूम अपने पीछे पाँच बेटे, पाँच बेटियाँ, पोते-पोतियाँ, नाती-नातिन, रिश्तेदारों तथा एक बड़ा कुनबा छोड़ गए हैं। परिवार इस समय गहरे सदमे में है और हर आंख नम है।

मिली जानकारी के मुताबिक, मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा आज बाद नमाज़-ए-ईशा अदा की जाएगी, जिसके बाद उन्हें स्थानीय कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम अहबाब, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादरी के लोगों से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत कर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फिरत फरमाएँ और उनके हक़ में ईसाल-ए-सवाब करें।

मरहूम के संबंध में अधिक जानकारी के लिए उनके साहबज़ादे सिकंदर सलीम उर्फ़ पप्पू से मोबाइल नंबर 7895192977 पर संपर्क किया जा सकता है।

🤲 दुआ-ए-मग़फिरत

अल्लाह तआला मरहूम की तमाम ख़ताओं को माफ़ फरमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे, क़ब्र की तमाम मंज़िलों को आसान फरमाए, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फरमाए और उनके अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

"इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन"
"बेशक हम अल्लाह ही के हैं और उसी की ओर लौटकर जाने वाले हैं।"

Thursday, June 25, 2026

मुल्तानी समाजसेवी संगठन की खतौली बैठक में लिया गया अहम फैसला

मेरठ मेडिकल में गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बेहतर इलाज व दवाइयों में हरसंभव सहायता दिलाने की पहल

मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) | मुल्तानी समाज विशेष रिपोर्ट

कस्बा खतौली, जनपद मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) में समाज सेवा और इंसानी खिदमत के जज़्बे को मज़बूत करने के उद्देश्य से मुल्तानी समाजसेवी संगठन की एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता जनाब हाजी इक़बाल साहब के आवास पर किया गया।

बैठक का माहौल आपसी भाईचारे, मशवरे और समाज के ज़रूरतमंद तबकों की बेहतरी के जज़्बे से सराबोर रहा। इस अवसर पर अलग-अलग शहरों से आए समाज के गणमान्य लोगों ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और समाज हित से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।

बैठक में रामपुर मनिहारान से जनाब इरशाद साहब, उस्मान साहब एवं मिर्ज़ा नसीम साहब, दिल्ली (बवाना) से जनाब कय्यूम साहब, अशद मिर्ज़ा साहब, तीतरो से वसीम साहब तथा मेरठ सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए समाजसेवी शामिल हुए।

बैठक का सबसे अहम निर्णय यह रहा कि समाज के ऐसे गरीब, असहाय और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार, जो गंभीर बीमारियों के कारण बेहतर इलाज कराने में असमर्थ हैं, उन्हें मेरठ मेडिकल में उपचार एवं दवाइयों की व्यवस्था में हरसंभव सहयोग दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए संगठन की एक प्रतिनिधि टीम शीघ्र ही मेरठ जाकर डॉ. चौधरी वकार साहब से मुलाकात करेगी, ताकि जरूरतमंद मरीजों को इलाज, चिकित्सकीय परामर्श और दवाइयों में अधिक से अधिक राहत दिलाने की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की जा सके।

बैठक में संगठन के राष्ट्रीय सदर जनाब हाजी नसीम साहब, नायब सदर जनाब जमीरउद्दीन साहब, संगठन सचिव जनाब मिर्ज़ा नौशाद साहब, कोषाध्यक्ष जनाब अफज़ाल मिर्ज़ा (कुशवली) तथा प्रभारी जनाब शाहनवाज़ मिर्ज़ा (सरधना) सहित अनेक समाजसेवी उपस्थित रहे।

बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि समाज की वास्तविक सेवा केवल शब्दों से नहीं, बल्कि ज़रूरतमंद लोगों के जीवन में राहत पहुँचाने वाले ठोस प्रयासों से होती है। इसी भावना के साथ संगठन ने स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में यह पहल शुरू करने का संकल्प लिया।

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एक ही रात बिरादरी पर टूटा ग़म का पहाड़, शामली और बागपत ने अपने दो बुज़ुर्ग सायों को खो दिया, इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

उत्तर प्रदेश | मुल्तानी समाज विशेष रिपोर्ट

निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ यह दुखद ख़बर हासिल हुई कि 25 जून 2026, जुमेरात की रात मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी ने अपने दो बुज़ुर्ग और सम्मानित हस्तियों को खो दिया। एक ही रात में उत्तर प्रदेश के दो अलग-अलग जनपदों से लगातार आई इन दुखद खबरों ने पूरी मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को गहरे सदमे में डाल दिया।

शामली जनपद से दुखद ख़बर 

गाँव पिंडारो, ब्लॉक एवं तहसील ऊन, जनपद शामली (उत्तर प्रदेश) के मूल बाशिंदे और हाल मुकामी गाँव जुड़ला, जिला करनाल (हरियाणा) में रह रहे जनाब हाजी उमरदीन साहब, वल्द मरहूम हाजी करीमुद्दीन साहब, उम्र तकरीबन 85 साल ने बीती रात बा तारीख़ 25 जून 2026 की रात तकरीबन 9:00 बजे अपने रब के हुक्म से इस फ़ानी दुनिया को अलविदा कह गए।

मरहूम अपने पीछे अपनी अहलिया, तीन बेटों, चार बेटियों समेत भरा-पूरा परिवार, रिश्तेदारों और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को ग़मज़दा छोड़ गए हैं।

मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा एवं सुपुर्द-ए-ख़ाक 26 जून 2026 (जुमे) की सुबह 9:00 बजे गाँव पिंडारो, जनपद शामली में अदा की जाएगी।

बड़ौत (बागपत) से भी पहुँची ग़मगीन खबर

इसी रात जनपद बागपत के कस्बा बड़ौत से भी एक दुखद ख़बर "मुल्तानी समाज" न्यूज़ को मिली है। गाँव नसौली के मूल निवासी तथा फिलवक़्त में इदारे के सामने, मोहल्ला पठानकोट, बड़ौत में रहने वाले जनाब हाजी यामीन साहब, वल्द जनाब शफीतुल्ला साहब, तकरीबन **85 साल की उम्र में 25 जून 2026 की बीती रात तकरीबन **10:30 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल कर गए।

मरहूम अपने पीछे पाँच बेटों, दो बेटियों तथा पूरे परिवार और रिश्तेदारों को ग़म में छोड़ गए हैं। उनका सुपुर्द-ए-ख़ाक 26 जून 2026 (जुमे) को सुबह किया जाएगा।

दुआ-ए-मग़फिरत

हम अल्लाह तआला से दिल की गहराइयों से दुआ करते हैं कि वह दोनों मरहूमीन की मग़फिरत फ़रमाए, उनकी कब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए, कब्र की तमाम मंज़िलों को आसान फ़रमाए, हश्र के दिन अपनी रहमत के साए में जगह अता करे और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम नसीब फ़रमाए।

अल्लाह तआला दोनों परिवारों, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और तमाम बिरादरी को यह सदमा बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ दे तथा सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

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Monday, June 22, 2026

सौ बरस की रौशन ज़िंदगी का चराग़ बुझ गया — जनाब हमीद साहब के इंतेक़ाल से मुल्तानी बिरादरी ग़मगीन

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

निहायत ही अफ़सोस, रंज और गहरे ग़म के साथ यह इत्तिला दी जाती है कि मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की एक बुज़ुर्ग, सम्मानित और नेक हस्ती जनाब हमीद साहब वल्द जनाब हबीब साहब निवासी गांव पाड़ली, ब्लॉक चड़ोली, तहसील बेहट, जनपद सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) का आज बरोज़ पीर, 22 जून 2026 को तक़रीबन 100 वर्ष से अधिक आयु में क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेक़ाल हो गया।

मरहूम अपनी सादगी, ख़ुशअख़लाक़ी, बुज़ुर्गाना शख़्सियत और बिरादरी में सम्मानित मुक़ाम के लिए जाने जाते थे। उनकी पूरी ज़िंदगी मेहनत, ईमानदारी, ख़िदमत और इंसानी हमदर्दी का खूबसूरत नमूना रही। उनके इंतेक़ाल की ख़बर से पूरे इलाक़े और बिरादरी में शोक की लहर दौड़ गई है।

मरहूम अपने पीछे अपनी अहलिया, दो साहबज़ादे, पांच साहबज़ादियां, पौते-पोतियां, नाते-नातिन, रिश्तेदारों, अज़ीज़ों और चाहने वालों का एक बड़ा कुनबा छोड़ गए हैं, जो आज इस सदमे से ग़मज़दा है।

ख़ानदानी सिलसिले में मरहूम कुल पांच भाइयों और दो बहनों में शामिल थे। उनके भाइयों में मरहूम रसीद साहब, मरहूम मजीद साहब, मरहूम हमीद साहब, मरहूम खलील साहब तथा एक भाई जनाब मोहम्मद यामीन साहब हयात हैं। बहनों में मरहूमा भूरी बी तथा जनाबा जहूरन बी शामिल हैं।

दफ़्न की जानकारी

मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा के बाद आज बाद नमाज़-ए-ईशा तक़रीबन रात 9:00 से 9:30 बजे के बीच उन्हें सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम अहबाब, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फरमाकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

दुआ-ए-मग़फ़िरत

अल्लाह तआला मरहूम की तमाम ख़ताओं को माफ़ फरमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फरमाए और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।

ऐ अल्लाह! मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमा, उनकी मंज़िल आसान फ़रमा, क़ब्र को नूर से भर दे और उन्हें अपनी रहमत के साये में जगह अता फ़रमा। आमीन या रब्बल आलमीन।

संपर्क

मरहूम के संबंध में अधिक जानकारी प्राप्त करने हेतु उनके भतीजे जनाब शहज़ाद मिर्ज़ा से मोबाइल नंबर 9456482230 पर संपर्क किया जा सकता है।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की विशेष रिपोर्ट।

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Sunday, June 21, 2026

खतौली में इंसानियत और खिदमत का खूबसूरत संगम: मुल्तानी समाजसेवी संगठन के मेडिकल कैंप में सैकड़ों लोगों ने उठाया लाभ

खतौली (मुज़फ्फरनगर)। 21 जून, रविवार का दिन खतौली क्षेत्र के लिए इंसानियत, सेवा और सामाजिक एकता का यादगार दिन साबित हुआ। मुल्तानी समाजसेवी संगठन की जानिब से आयोजित विशाल रक्तदान शिविर एवं निःशुल्क मेडिकल कैंप में दूर-दराज़ से आए बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और जरूरतमंद मरीजों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया।

इस विशेष मेडिकल कैंप में नाक, कान, गला एवं आंखों से संबंधित बीमारियों की जांच और परामर्श के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम मौजूद रही। मरीजों को न केवल स्वास्थ्य संबंधी सलाह दी गई बल्कि आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग भी प्रदान किया गया।

कार्यक्रम की कामयाबी में बाहर से तशरीफ़ लाई डॉक्टरों की टीम और मुल्तानी समाजसेवी संगठन के कार्यकर्ताओं का अहम योगदान रहा। पूरे दिन सेवा का सिलसिला जारी रहा और आने वाले मरीजों को पूरी तवज्जो के साथ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।

कैंप में अपनी विशेषज्ञ सेवाएं देने वाले वरिष्ठ चिकित्सकों में डॉ. आस मोहम्मद साहब, डॉ. वकार चौधरी साहब (मेरठ), नेत्र विशेषज्ञ डॉ. आरिफ साहब, डॉ. खालिद साहब, डॉ. शाइस्ता परवीन तथा पैथोलॉजी विशेषज्ञों ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसके अलावा वरिष्ठ पत्रकार अनिल साहब, नाजिम साहब, वसीम साहब समेत अन्य गणमान्य अतिथियों ने भी कार्यक्रम में शिरकत कर आयोजन की सराहना की।

मुल्तानी समाजसेवी संगठन की ओर से सभी चिकित्सकों, पत्रकारों और समाजसेवियों को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह का उद्देश्य समाज की बेहतरी के लिए निस्वार्थ भाव से कार्य करने वाले लोगों का हौसला बढ़ाना था।

इस अवसर पर संगठन के राष्ट्रीय सदर हाजी नसीम साहब, सरपरस्त मूसा जी, नायब सदर जमीरउद्दीन साहब, संगठन सचिव मिर्ज़ा नौशाद साहब, कोषाध्यक्ष अफजाल मिर्जा, प्रभारी शाहनवाज मिर्जा, अरशान मिर्जा, कयूम मिर्जा, इकराम साहब, गुड्डू मिर्जा, असद मिर्जा सहित अनेक गणमान्य सदस्य एवं समाजसेवी मौजूद रहे।

कार्यक्रम के अंत में संगठन पदाधिकारियों ने सभी डॉक्टरों, पत्रकारों, स्वयंसेवकों और सहयोगियों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि समाज की तरक्की और खुशहाली के लिए ऐसे सेवा कार्य भविष्य में भी जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में संगठन लगातार अपनी जिम्मेदारियां निभाता रहेगा।

यह मेडिकल कैंप केवल स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज में आपसी भाईचारे, सहयोग और इंसानियत की मिसाल भी पेश कर गया।


ज़मीर आलम, प्रधान संपादक"मुल्तानी समाज"

देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल
(पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की आवाज़)

मोबाइल: 9410652990, 8010884848

Saturday, June 20, 2026

मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी के बुजुर्ग जनाब मिर्जा सलीमुद्दीन साहब का इंतिकाल, क्षेत्र में शोक की लहर, इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

खतौली/मुजफ्फरनगर। निहायत ही रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी के तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि गांव मंडावली, जिला मुजफ्फरनगर के मूल निवासी एवं मोहल्ला मंसूर खां, क़स्बा खतौली निवासी बुजुर्ग शख्सियत जनाब मिर्जा सलीमुद्दीन साहब वल्द जनाब सुबराती साहब का आज दिन शनिवार, 20 जून 2026 को शाम लगभग 6 बजे कज़ा-ए-इलाही से इंतिकाल हो गया।

मरहूम की उम्र तकरीबन 80 वर्ष बताई जा रही है। उनके इंतिकाल की खबर सुनते ही परिवार, रिश्तेदारों, दोस्तों और बिरादरी में गहरे दुःख और शोक का माहौल व्याप्त हो गया। मरहूम अपने अच्छे अख़लाक, मिलनसार मिज़ाज और सामाजिक संबंधों के लिए जाने जाते थे। उनका जीवन सादगी, मेहनत और इंसानी रिश्तों की कद्र करने की मिसाल रहा।

मिली जानकारी के अनुसार मरहूम अपने पीछे अपनी अहलिया, दो साहबज़ादों, चार साहबज़ादियों सहित पूरा कुनबा, खानदान, रिश्तेदार और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब छोड़ गए हैं, जो उनके इंतिकाल से सदमे में हैं। उनके जाने से परिवार पर जो दुख का पहाड़ टूटा है, उसकी भरपाई संभव नहीं है।

परिवार के सूत्रों के अनुसार मैय्यत को कल दिन इतवार, 21 जून 2026 को सुबह लगभग 9 बजे सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम अहबाब, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फिरत फरमाएं और सवाबे दारेन हासिल करें।

दुआ-ए-मग़फिरत

अल्लाह तआला मरहूम जनाब मिर्जा सलीमुद्दीन साहब की मग़फिरत फरमाए, उनकी तमाम खताओं को माफ़ फरमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुकाम अता फरमाए और उनके तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

जानकारी हेतु संपर्क

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खतौली में कल लगेगा विशाल निःशुल्क मेडिकल कैंप, मोतियाबिंद ऑपरेशन सहित गंभीर बीमारियों के उपचार की रहेगी विशेष व्यवस्था

डॉक्टरों की टीम देगी सेवाएं, घर-घर प्रचार कर अधिक से अधिक मरीजों तक पहुंचाने की तैयारी पूरी

खतौली (मुजफ्फरनगर)। इंसानियत की खिदमत और जरूरतमंद मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के मकसद से क़स्बा खतौली स्थित काज़ी गार्डन के निकट रविवार, 21 जून 2026 को एक विशाल निःशुल्क मेडिकल कैंप आयोजित किया जा रहा है। इस कैंप में मोतियाबिंद (आंखों के ऑपरेशन) के अलावा शुगर, हृदय रोग तथा अन्य गंभीर बीमारियों की जांच एवं उपचार की विशेष सुविधा उपलब्ध रहेगी।

इसी सिलसिले में आज प्रसिद्ध समाजसेवी अफजाल मिर्जा कुशवली वाले के आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें कैंप की रूपरेखा, व्यवस्थाओं एवं जनसंपर्क अभियान पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में मौजूद चिकित्सकों एवं आयोजकों ने यह सुनिश्चित किया कि कैंप का लाभ अधिक से अधिक जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचे।

आयोजकों ने बताया कि मेडिकल कैंप का समय प्रातः 10:00 बजे से सायं 5:00 बजे तक निर्धारित किया गया है। कैंप के सफल संचालन के लिए नगर एवं आसपास के क्षेत्रों में घर-घर, गली-मोहल्लों तथा सार्वजनिक स्थलों पर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, ताकि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति इस स्वास्थ्य सेवा से वंचित न रह जाए।

बैठक में उपस्थित लोगों ने कहा कि समाज की बेहतरी और मानव सेवा का सबसे बड़ा माध्यम स्वास्थ्य सेवा है। ऐसे आयोजन न केवल मरीजों को राहत प्रदान करते हैं, बल्कि समाज में जागरूकता और भाईचारे की भावना को भी मजबूत करते हैं।

इस अवसर पर हाजी नसीम साहब, नायब सदर जमीरउद्दीन साहब, संगठन सचिव मिर्ज़ा नौशाद साहब, कोषाध्यक्ष अफजाल मिर्जा कुशवली वाले तथा संचालक प्रभारी शाहनवाज़ मिर्जा सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने कैंप की तैयारियों का जायजा लिया तथा सफल आयोजन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

आयोजकों ने क्षेत्र के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे स्वयं भी इस निःशुल्क मेडिकल कैंप का लाभ उठाएं और अपने आसपास के जरूरतमंद मरीजों को भी इसकी जानकारी देकर अधिक से अधिक लोगों तक इस नेक पहल को पहुंचाएं।


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Friday, June 19, 2026

कांधला के मरहूम जनाब इकबाल साहब का इंतिकाल, बिरादरी में शोक की लहर, इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

दिल्ली/शामली। निहायत ही अफ़सोस और गहरे रंज-ओ-ग़म के साथ यह इत्तिला दी जाती है कि जनाब इकबाल साहब (असल निवासी कांधला, जिला शामली, उत्तर प्रदेश), जो इन दिनों कर्दमपुरी, दिल्ली में मुकीम थे, का आज ब-तारीख़ 20 जून 2026, रोज़ शनिचर सुबह क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिकाल हो गया।

मरहूम का इस दुनिया-ए-फ़ानी से रुख़्सत हो जाना न सिर्फ़ उनके अहल-ए-ख़ाना बल्कि तमाम अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, दोस्तों, रिश्तेदारों और बिरादरी के लिए एक बड़ा सदमा है। मरहूम अपने पीछे अपनी अहलिया, चार बेटियां, तीन बेटे शहज़ाद, सलीम और शादाब, बहुएं, पोते-पोतियां, नवासे-नवासियां तथा एक बड़ा खानदानी कुनबा छोड़ गए हैं, जो आज उनके बिछड़ जाने के ग़म में अश्कबार हैं।

मौत एक ऐसी हक़ीक़त है जिससे किसी को भी फरार नहीं। इंसान इस दुनिया में अल्लाह तआला की अमानत होता है और एक दिन उसी की बारगाह में लौट जाना होता है। जनाब इकबाल साहब का इंतिकाल भी इसी हक़ीक़त की याद दिलाता है कि दुनिया की ज़िंदगी चंद रोज़ा है और आखिरत की ज़िंदगी ही हमेशा रहने वाली है।

दुआ है कि अल्लाह तआला मरहूम जनाब इकबाल साहब की मग़फिरत फरमाए, उनकी तमाम ख़ताओं को माफ़ फरमाकर जन्नतुल फिरदौस में आला मकाम अता फरमाए।
या अल्लाह! मरहूम की क़ब्र को अपनी रहमतों का गुलशन बना दे, उसे नूर से भर दे और हश्र के दिन अपने नेक बंदों के साथ उठाए।

साथ ही अल्लाह पाक मरहूम के तमाम अहल-ए-ख़ाना, बेटों, बेटियों, रिश्तेदारों और चाहने वालों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए और इस सदमे को बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ नसीब फरमाए। आमीन या रब्बल आलमीन।

दफ़्न का समय

मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा और तद्फ़ीन बाद नमाज़ असर कर्दमपुरी , दिल्ली में ही किए जायेंगे सपुर्दे ख़ाक, लिहाजा आप हज़रात भी जनाज़े में शरीक होकर सवाबे दारेन हासिल करें।

अधिक जानकारी के लिए 

मरहूम के संबंध में और ज्यादा मालूमात हासिल करने के लिए हाजी अनीस साहब ( बवाना वाले) से संपर्क किया जा सकता है।

मोबाइल: 9311534571


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मुल्तानी समाज — बिरादरी की आवाज़, बिरादरी के साथ।

Thursday, June 18, 2026

15वाँ जश्न-ए-मुल्तानी स्थापना दिवस: मुल्तानी बिरादरी ने मुल्क ही नहीं विदेशों में भी पेश की एकता, खिदमत और हरियाली की मिसाल

मोहम्मद आलम की सरपरस्ती में देश-विदेश में धूमधाम से मनाया गया स्थापना दिवस, आने वाली नस्लों के नाम किया गया वृक्षारोपण

नई दिल्ली। 
किसी भी कौम और बिरादरी की असली ताकत उसके महलों, दावतों और दिखावों में नहीं, बल्कि उसके उन नेक इरादों में छिपी होती है जो आने वाली नस्लों के लिए राहें आसान बनाते हैं। यही पैग़ाम इस वर्ष 17 जून को मनाए गए 15वें "जश्न-ए-मुल्तानी स्थापना दिवस" के अवसर पर दुनिया भर में बसे मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी के लोगों ने दिया।

देश की राजधानी दिल्ली से पंजीकृत पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी की अग्रणी एवं क्रांतिकारी तंजीम के आह्वान पर आयोजित इस विशेष दिवस को भारत के विभिन्न राज्यों, जनपदों, कस्बों और गांवों के साथ-साथ विदेशों में रहने वाले बिरादरी के लोगों ने भी पूरे उत्साह, सादगी और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ मनाया।

इस अवसर पर बिरादरी के लोगों ने अपने-अपने क्षेत्रों में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल स्थापना दिवस मनाना नहीं था, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली, स्वच्छ वातावरण और सामाजिक जागरूकता की ऐसी विरासत छोड़ना था जो आने वाले वर्षों तक समाज को प्रेरित करती रहे।

खिदमत का जज़्बा बना कार्यक्रम की पहचान

स्थापना दिवस के अवसर पर बिरादरी की अनेक नामचीन हस्तियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों, व्यवसायियों और ख्वातीन ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। विभिन्न स्थानों से वृक्षारोपण की तस्वीरें और संदेश साझा करते हुए सभी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि समाज की तरक्की केवल बड़े-बड़े आयोजनों और खर्चीले कार्यक्रमों से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे नेक कामों से भी संभव है।

कार्यक्रम में शामिल लोगों का मानना था कि यदि नीयत साफ हो और मकसद समाज की भलाई हो, तो बिना किसी बड़े आर्थिक बोझ के भी पूरी बिरादरी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी सकारात्मक पहचान कायम कर सकती है।

नई नस्लों को दिया गया जिम्मेदारी और पर्यावरण का पैग़ाम

वृक्षारोपण कार्यक्रम के माध्यम से नौजवानों और बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व से भी अवगत कराया गया। वक्ताओं ने कहा कि आज लगाया गया एक पौधा आने वाले वर्षों में न केवल छाया देगा बल्कि समाज की दूरअंदेशी सोच का प्रतीक भी बनेगा।

उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति यदि अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करने का संकल्प ले, तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जा सकता है।

सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश

स्थापना दिवस के अवसर पर विभिन्न स्थानों से प्राप्त संदेशों में सामाजिक एकता, आपसी भाईचारे, शिक्षा, जागरूकता और समाज सुधार पर विशेष बल दिया गया। बिरादरी के वरिष्ठजनों ने कहा कि संगठन की स्थापना का मूल उद्देश्य समाज को जोड़ना, नई पीढ़ी को सही दिशा देना और सामाजिक विकास के लिए सामूहिक प्रयास करना रहा है।

आज जब दुनिया विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रही है, ऐसे में सामाजिक संगठनों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे लोगों को सकारात्मक कार्यों के लिए प्रेरित करें और समाज में भाईचारे तथा इंसानियत की भावना को मजबूत करें।

देश-विदेश से मिला भरपूर समर्थन

स्थापना दिवस के अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों तथा विदेशों में रहने वाले बिरादरी के लोगों ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में वृक्षारोपण कर कार्यक्रम को सफल बनाया। सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की गई तस्वीरों और संदेशों ने यह साबित कर दिया कि मुल्तानी बिरादरी आज वैश्विक स्तर पर भी अपनी एक अलग पहचान रखती है और समाजहित के कार्यों में हमेशा अग्रणी भूमिका निभाती है।

आयोजकों ने कार्यक्रम में शामिल सभी गणमान्य व्यक्तियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं, महिलाओं और बच्चों का आभार व्यक्त करते हुए आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी इसी प्रकार समाजहित और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।


इन महान हस्तियों ने कार्यक्रम को बनाया यादगार

इस अवसर पर देश एवं विदेश से बिरादरी की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों, समाजसेवियों, शिक्षाविदों, उद्योगपतियों, ख्वातीन प्रतिनिधियों तथा युवाओं ने सहभागिता कर वृक्षारोपण कार्यक्रम को सफल बनाया। कार्यक्रम में विशेष रूप से

देश-विदेश की नामचीन हस्तियों ने निभाई पर्यावरण और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी

15वें जश्न-ए-मुल्तानी स्थापना दिवस एवं वृक्षारोपण अभियान में देश और विदेश से बिरादरी की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों, समाजसेवियों, शिक्षाविदों, व्यवसायियों, चिकित्सकों, अधिवक्ताओं, ख्वातीन प्रतिनिधियों और युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

इस अवसर पर जनाब इनाम साहब (खतौली, मुजफ्फरनगर), तंजीम के सरपरस्त मोहम्मद आलम साहब, जनाब महबूब खान साहब (करनाल, हरियाणा), मोहतरमा इकरा सुल्ताना (जम्मू-कश्मीर), मोहतरमा रेशमा जमाल (बिजनौर), मोहतरमा शाजदा सबा (देवबंद), जनाब अब्दुल सलाम साहब (देवबंद)
, जनाब हासिमुद्दीन साहब एवं जनाब मिर्ज़ा मिन्हाजुद्दीन साहब (फलावदा, मेरठ), जनाब सिकंदर साहब (भगवानपुर, उत्तराखंड), एडवोकेट इरशाद मुल्तानी साहब (नगीना, बिजनौर), धामपुर के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. कमाल साहब, वरिष्ठ समाजसेवी एवं योग प्रशिक्षक जनाब नूरमोहम्मद साहब "स्टीयरिंग वाले" (शामली), जनाब फैसल साहब (रुड़की), जनाब
सलीम साहब उर्फ़ पप्पू (देवबंद)
, जनाब नाज़िम साहब (शामली), जनाब मोहम्मद दानिश साहब (दुबई, यूएई), जनाब फैसल इस्माईल साहब (सरधना, मेरठ), जनाब इरशाद साहब (बिजनौर)
, जनाब आशिफ अली (रुड़की, उत्तराखंड), मोहतरमा
नाहिदा खान (मुजफ्फरनगर)
, हाजी इरफान साहब (चंडीगढ़), जनाब अब्दुल हफ़ीज़ साहब (गुरुग्राम, हरियाणा), हाजी दिलशाद साहब (निजामुद्दीन मरकज़, नई दिल्ली), हाजी इक़बाल साहब (अलीगढ़) राफ़िया  फ़ारूक़, कबीर नगर दिल्ली, उसामा साजिद , देहरादून,
हाजी साज़िद मिर्ज़ा साहब (वज़ीराबाद, दिल्ली), वसीम सलीम (मुजफ्फरनगर), इरफान साहब (चमोली, उत्तराखंड), फैज़ मोहम्मद साहब (वल्लभगढ़, हरियाणा) तथा हाजी लियाकत अली साहब (सोनीपत, हरियाणा) सहित देश-विदेश की अनेक सम्मानित हस्तियों ने वृक्षारोपण कर स्थापना दिवस को यादगार बनाया।

इन सभी हस्तियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में पौधे लगाकर न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया, बल्कि यह भी साबित किया कि मुल्तानी बिरादरी सामाजिक एकता,
शिक्षा, जागरूकता और इंसानियत की खिदमत के लिए हमेशा अग्रणी भूमिका निभाती रही है। कार्यक्रम में शामिल अन्य गणमान्य व्यक्तियों, ख्वातीन और युवाओं सहित दर्जनों गणमान्य लोगों ने सहभागिता कर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई।


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