Sunday, August 23, 2026

इन्तक़ाल-ए-पुरमलाल: हाजी हाफिज़ अब्दुल जब्बार काज़ी मुल्तानी का इंतक़ाल

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ यह इत्तिला तमाम अहले-बिरादरी और अहले-मोहब्बत तक पहुँचाई जाती है कि हाजी हाफिज़ अब्दुल जब्बार साहब काज़ी मुल्तानी का दिनांक 22 अगस्त 2026, शनिवार, ईशा बाद इंतक़ाल हो गया।

मरहूम, हाफिज़ मुश्ताक काज़ी मुल्तानी और हाफिज़ मुख्तार काज़ी मुल्तानी के वालिद-ए-मोहतरम तथा मरहूम हाजी मोहम्मद इस्माइल साहब काज़ी के फ़रज़ंद थे।

मरहूम की तदफ़ीन 23 अगस्त 2026, रविवार को सुबह 10 बजे की गई।

क़ुरआनख़्वानी व फ़ातेहा-ए-सोयम

मरहूम के ईसाल-ए-सवाब के लिए क़ुरआनख़्वानी व सोयम की फ़ातेहा दिनांक 24 अगस्त 2026, सोमवार, ज़ोहर के बाद, मस्जिद उमर, ग्रीन पार्क कॉलोनी, इंदौर (मध्य प्रदेश) में रखी गई है।

तमाम अहले-बिरादरी से गुज़ारिश है कि मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत फरमाएँ और ईसाल-ए-सवाब के लिए फ़ातेहा व क़ुरआनख़्वानी में शिरकत करें।

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त मरहूम की मग़फ़िरत फरमाए, उनकी तमाम ख़ताएँ माफ़ फरमाए, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फरमाए और तमाम अहले-ख़ानदान को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

रब्बना इग़फ़िर लहू वरहम्हु, व आफिहि व'अफ़ु अन्हु।

📞 9827740769
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मुल्तानी समाज — ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार (विज्ञापन) क़ौमी सतह पर शाया या प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो बराए मेहरबानी राब्ता फरमाएँ।

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“मुल्तानी समाज” — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।

इंतकाल की दो गमगीन खबरें, बिरादरी के दो खानदानों में पसरा मातम, अहलेखाना से इज़हार-ए-ताज़ियत और मरहूमीन के लिए दुआ-ए-मगफिरत की अपील

पहली खबर — गांव मोहाना, जिला सोनीपत

तमाम अहले बिरादरी को निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ यह इत्तिला दी जाती है कि रईस अहमद वल्द मरहूम याकूब अली, बावली, जिला बागपत वाले, उम्र तकरीबन 65 साल, हाल मुकाम गांव मोहाना, जिला सोनीपत, हरियाणा का आज रविवार, 23 अगस्त 2026 को सुबह करीब 6 बजे इस फानी दुनिया से इंतकाल हो गया।

मरहूम के इंतकाल की खबर से अहलेखाना, रिश्तेदारों, दोस्तों और बिरादरी के लोगों में गहरा रंज-ओ-ग़म पाया जा रहा है। मरहूम अपने पीछे 4 लड़के और 3 लड़कियां छोड़ गए हैं।

मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा बाद नमाज़-ए-असर, गांव मोहाना, जिला सोनीपत, हरियाणा में अदा की जाएगी, इंशाअल्लाह। इसके बाद मरहूम को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

मैय्यत के सिलसिले में अधिक मालूमात के लिए मोहम्मद राहिल — 9416487304 पर राब्ता किया जा सकता है।

हम दुआगो हैं कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त मरहूम की मुकम्मल मगफिरत फरमाए, उनकी तमाम खताओं और लग्ज़िशों को माफ फरमाए, कब्र को नूर से मुनव्वर फरमाए, कब्र की मंजिल आसान फरमाए और उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए।

अल्लाह तआला तमाम अहलेखाना को यह सदमा बर्दाश्त करने की तौफीक और सब्र-ए-जमील अता फरमाए।
आमीन या रब्बुल आलमीन।


दूसरी खबर — लुहारी सराय, नगीना, जिला बिजनौर

मरहूमा जनाब नज़ीर अहमद मुल्तानी साहब मेडिकल वाले की अहलिया का इंतकाल

इसी तरह लुहारी सराय, नगीना, जिला बिजनौर से भी एक बेहद अफसोसनाक खबर सामने आई है। तमाम अहले बिरादरी को निहायत ही रंज-ओ-मलाल के साथ इत्तिला दी जाती है कि मरहूम जनाब नज़ीर अहमद मुल्तानी साहब मेडिकल वाले की अहलिया का इंतकाल हो गया है।

मरहूमा, जनाब निसार एडवोकेट साहब, नजीबाबाद की समधन और जनाब शाहिद मुल्तानी साहब, पूर्व बैंक मैनेजर, नजीबाबाद की सास थीं।

मरहूमा के इंतकाल की खबर से अहलेखाना, रिश्तेदारों और उनसे जुड़े तमाम लोगों में गहरे ग़म और सदमे की लहर है। इस दुख की घड़ी में "मुल्तानी समाज" परिवार तमाम अहलेखाना और परिजनों के साथ दिली हमदर्दी और इज़हार-ए-ताज़ियत पेश करता है।

नमाज़-ए-जनाज़ा और तद्फीन के बारे में जानकारी उपलब्ध होने पर अहले बिरादरी को उससे अवगत कराया जाएगा।

अल्लाह तआला मरहूमा की मगफिरत-ए-कामिला फरमाए, उनकी कब्र को नूर से भर दे, कब्र की तमाम मंजिलें आसान फरमाए और उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मकाम अता फरमाए।

परवरदिगार-ए-आलम तमाम अहलेखाना को इस सदमे पर सब्र-ए-जमील, हौसला और बर्दाश्त अता फरमाए तथा मरहूमा की नेकियों को उनके लिए सदका-ए-जारीया बनाए।

आमीन सुम्मा आमीन।


दुआ-ए-मगफिरत

ऐ अल्लाह! हमारे इन मरहूमीन पर अपनी खास रहमत नाज़िल फरमा, उनकी मगफिरत फरमा, उनकी कब्रों को रोशन और कुशादा फरमा, उन्हें कब्र के अज़ाब से महफूज़ फरमा और जन्नतुल फिरदौस में अपने नेक बंदों के साथ जगह अता फरमा। उनके अहलेखाना को सब्र और सुकून अता फरमा।

या अल्लाह! उनकी तमाम खामियों को दरगुज़र फरमा और उनकी नेकियों को अपनी बारगाह में कुबूल फरमा। आमीन या रब्बुल आलमीन।


मुल्तानी समाज — प्रधान संपादक की खास रिपोर्ट

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Friday, August 21, 2026

इन्तक़ाल पुर-मलाल — मोहम्मद रफ़ीक़ के इंतक़ाल पर बिरादराने-मुल्तानी में ग़म की लहर

भीलवाड़ा। निहायत ही रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ यह इत्तिला बिरादराने-मुल्तानी हज़रात तक पहुँचाई जाती है कि अब्दुल अज़ीज़ ठेकेदार कोटरी वाले के फ़र्ज़न्द मोहम्मद रफ़ीक़, निवासी गुलज़ार नगर, गली नंबर-1, भीलवाड़ा, का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतक़ाल हो गया है।

मरहूम के इंतक़ाल की ख़बर से उनके अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, दोस्तों, अहबाब और बिरादराने-मुल्तानी में गहरा रंज-ओ-ग़म पाया जा रहा है। मरहूम के इंतक़ाल से परिवार ने अपना एक अज़ीज़ फ़र्द खो दिया है, जिसकी कमी हमेशा महसूस की जाती रहेगी।

إِنَّا لِلّهِ وَإِنَّـا إِلَيْهِ رَاجِعونَ
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

तमाम बिरादराने-मुल्तानी और अहबाब से गुज़ारिश है कि मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएँ और उनके अहल-ए-ख़ाना को इस सदमे को बर्दाश्त करने के लिए सब्र-ए-जमील अता होने की दुआ करें।

🤲 दुआ-ए-मग़फ़िरत

ऐ अल्लाह! मरहूम मोहम्मद रफ़ीक़ की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमा, उनकी ख़ताओं और गुनाहों को माफ़ फ़रमा, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा, क़ब्र की तमाम मुश्किलात आसान फ़रमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमा।

या रब्बुल आलमीन! मरहूम के तमाम अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और दोस्तों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा तथा इस सदमे को उनके लिए आसान फ़रमा।

आमीन या रब्बुल आलमीन। 🤲

क़ब्र में मिट्टी देने की दुआ

पहली मर्तबा:
मिन्हा ख़लक़नाकुम।

दूसरी मर्तबा:
व फ़ीहा नुईदुकुम।

तीसरी मर्तबा:
व मिन्हा नुख़रिजुकुम तारतन उख़रा।

अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए। आमीन।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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पठानकोट, बड़ौत में दिलशाद की अहलिया के इंतकाल की पुरदर्द इत्तिला, इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

बड़ौत | 21 अगस्त 2026

निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ यह इत्तिला बिरादरान-ए-मिल्लत और तमाम अहबाब तक पहुंचाई जाती है कि दिलशाद साहब, वल्द मकसूद साहब, (गाँव पेलखा जिला शामली, उत्तर प्रदेश वाले ) की अहलिया इशरत जहां हाल मुकाम मोहल्ला पठानकोट, क़स्बा बड़ौत जिला बागपत, उत्तर प्रदेश,  उम्र तकरीबन 45 साल, कल दिन जुमा बा - तारीख़ 21 अगस्त 2026 को असर की नमाज़ के बाद इस दार-ए-फ़ानी से रुख़्सत फ़रमा हो गई।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूमा इशरत जहां के इंतकाल की खबर से अहल-ए-ख़ाना, रिश्तेदारों, दोस्तों और बिरादरी में गहरे रंज-ओ-ग़म की लहर दौड़ गई है। मरहूमा के चले जाने से उनके अहल-ए-ख़ाना और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को जो सदमा पहुंचा है, उसे अल्फ़ाज़ में बयान करना मुश्किल है।

नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन

मिली हुई इत्तिला के मुताबिक मरहूमा की नमाज़-ए-जनाज़ा एवं तदफ़ीन कल  ( आज ) दिन शनिचर बा - तारीख  22 अगस्त 2026 को सुबह 8:00 बजे
गोरे गरीबां कब्रिस्तान, हीरोज़ कॉलेज के सामने, बड़ौत में की जाएगी।

तमाम अहबाब, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादरान से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फ़रमाकर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फिरत करें और अहल-ए-ख़ाना के ग़म में शरीक हों।

दुआ-ए-मग़फिरत

या अल्लाह! मरहूमा इशरत जहां की मुकम्मल मग़फिरत फ़रमा।
उनकी तमाम ख़ताओं और गुनाहों को माफ़ फ़रमा, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा, क़ब्र को कुशादा और आरामगाह बना। उन्हें सवाल-ए-क़ब्र में आसानी अता फ़रमा और जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा।

या रब्बुल आलमीन! मरहूमा को अपने ख़ास फ़ज़्ल-ओ-करम के साये में जगह अता फ़रमा और उनके नेक आमाल को उनके लिए सदक़ा-ए-जारीया बना।

अल्लाह तआला तमाम अहल-ए-ख़ाना को इस सख़्त सदमे पर सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए और उन्हें इस मुसीबत का अजर-ए-अज़ीम नसीब फ़रमाए। मरहूमा का मायका रुड़की जिला हरिद्वार, उत्तराखंड का बताया जाता है।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

राब्ता:
भाई यूनुस बड़ौत
📞 +91 9389673274


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Wednesday, August 19, 2026

इंतकाल की पुरदर्द इत्तिला — आलिया का इंतकाल



निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ यह इत्तिला तमाम बिरादराना हज़रात तक पहुंचाई जाती है कि सफीक अहमद कालिंदी वाले की अहलिया का कल दिन बुध, बा-तारीख़ 19 अगस्त 2026, मगरिब की नमाज़ के बाद तक़रीबन रात 8 बजे इंतकाल फ़रमा जाना बिरादरी के लिए बेहद अफ़सोसनाक और दर्दनाक ख़बर है।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूमा के इंतकाल की ख़बर से अज़ीज़ो-अक़ारिब, रिश्तेदारों, दोस्तों और पूरी बिरादरी में ग़म की लहर दौड़ गई। इस मुश्किल और सदमे की घड़ी में हम तमाम अहले-ख़ाना से दिली ताज़ियत का इज़हार करते हैं और बारगाह-ए-इलाही में दुआगो हैं कि अल्लाह तआला मरहूमा की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फ़रमाए, उनके दरजात बुलंद फ़रमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए।

अल्लाह रब्बुल-इज़्ज़त मरहूमा की क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमाए, उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे, क़ब्र की तमाम मंज़िलों को आसान फ़रमाए और उन्हें अपनी ख़ास रहमत के साये में जगह अता फ़रमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

📍 रिहाइश

संगम विहार, बतरा हॉस्पिटल के पास, नई दिल्ली — 110080

🕌 नमाज़-ए-जनाज़ा और सुपुर्द-ए-ख़ाक

मरहूमा को आज दिन जुमेरात, बा-तारीख़ 20 अगस्त 2026 को सुबह 9:30 बजे संगम विहार कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम बिरादराना हज़रात से पुरख़ुलूस गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फ़रमाकर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और अहले-ख़ाना के ग़म में शरीक होकर उन्हें सब्र-ए-जमील की ताक़त दें।

ऐ अल्लाह! मरहूमा को अपनी रहमत में जगह अता फ़रमा, उनकी मग़फ़िरत फ़रमा, उनके दरजात बुलंद फ़रमा, उनकी क़ब्र को रोशन और कुशादा फ़रमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा। अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील और इस सदमे को बर्दाश्त करने की हिम्मत अता फ़रमा। आमीन या रब्बुल आलमीन।

📞 मज़ीद मालूमात के लिए

8595701564

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📰 "मुल्तानी समाज" की ख़ास रिपोर्ट

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"मुल्तानी समाज" मरहूमा के इंतकाल पर अहले-ख़ाना के साथ इस ग़म की घड़ी में बराबर का शरीक है और बारगाह-ए-अल्लाह में दुआ करता है कि अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फ़िरत फरमाए और तमाम पसमान्दगान को सब्र अता फरमाए।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।
अल्लाहुम्मग़फ़िर लहा वरहमहा।
आमीन।

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Monday, August 17, 2026

बेइंतहा अफ़सोस! सहारनपुर की मारूफ़ शख्सियत हाजी फ़ज़लुर रहमान साहब के बेटे सलीम साहब का इंतकाल

सहारनपुर, 17 अगस्त 2026 बरोज पीर
बेइंतहा अफ़सोस और सद-अफ़सोस के साथ अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादराना हजरात को यह इत्तिला दी जाती है कि सहारनपुर की मारूफ़ शख्सियत हाजी फ़ज़लुर रहमान साहब के साहबज़ादे सलीम साहब का दौराने-इलाज कजा - ए - ईलाही से इंतकाल हो गया। उनके इंतकाल की ख़बर से खानदान, रिश्तेदारों, अज़ीज़ो-अक़ारिब और जानने वालों में ग़म की लहर दौड़ गई।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम सलीम साहब की शादी क़स्बा देवबंद में हुई थी। वह पिछले कुछ समय से इलाज के दौर से गुज़र रहे थे और इसी दौरान उनकी रूह परवाज़ कर गई। उनके इंतकाल की ख़बर ने परिवार और उनसे वाबस्ता लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया है।

मरहूम का खानदानी तार्रुफ़

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूम सलीम साहब पाँच भाइयों में से एक थे। उनके भाइयों की शादियाँ अलग-अलग मुक़ामात पर हुई हैं। दो भाइयों की शादी देवबंद, एक भाई की शादी छुटमलपुर, एक भाई की शादी शाहमदार, सहारनपुर और एक भाई की शादी खतौली में हुई है।

परिवार की तरफ़ से दी गई जानकारी के मुताबिक मैय्यत को कल दिन मंगल बा - तारीख़ 18 अगस्त 2026 को सुबह 10 बजे इस्लामिया डिग्री कॉलेज वाली मस्जिद सहारनपुर, उत्तर प्रदेश में ( आज ) किया जाएगा सपुर्दे ए - ख़ाक, लिहाज़ा आप हज़रात भी जनाजे में शरीक होकर सवाबे दारेन हासिल करें  

दुआ-ए-मग़फ़िरत

अल्लाह तआला मरहूम सलीम साहब की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फ़रमाए, उनके दरजात बुलंद फ़रमाए, क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए।

अल्लाह रब्बुल आलमीन तमाम अहले-ख़ाना, रिश्तेदारों और अज़ीज़ो-अक़ारिब को इस सदमे को सब्र व हौसले के साथ बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

राब्ता:
नौशाद साहब, लिंक रोड
📞 80772-49223


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अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार (विज्ञापन) क़ौमी सतह पर शाया (प्रकाशित) या प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो बराए मेहरबानी नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।

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Sunday, August 16, 2026

निम्बरी की बुज़ुर्ग शख्सियत मरियम बी का इंतिक़ाल — बिरादरी में ग़म की लहर, नमाज़-ए-असर के बाद सुपुर्द-ए-ख़ाक

निम्बरी/पानीपत (हरियाणा)।
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

निहायत रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ तमाम बिरादराने हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि मरहूम चौधरी मीर हसन नूरवालिया की बेगम मरियम साहिबा, उम्र 92 साल, निवासी गाँव निम्बरी, ज़िला पानीपत, हरियाणा, का इतवार 16 अगस्त 2026 को सुबह तकरीबन 10 बजे इंतिक़ाल हो गया।

मरहूमा मरियम साहिबा गाँव निम्बरी की सबसे बुज़ुर्ग और सम्मानित शख्सियतों में शुमार थीं। उनकी वफ़ात की ख़बर से परिवार, रिश्तेदारों, अज़ीज़ों और मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी में गहरे रंज-ओ-ग़म की लहर दौड़ गई है।

मरहूमा अब्दुल सत्तार साहब की वालिदा-ए-मुहतरमा थीं। वह अपने पाँच बेटों में दूसरे नंबर के बेटे अब्दुल सत्तार के साथ मनमोहन नगर, बाबैल रोड, मस्जिद अबू बकर के पास रह रही थीं।

नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूमा का जनाज़ा नमाज़-ए-असर से पहले उनके पुश्तैनी मकान, गाँव निम्बरी ले जाया जाएगा। इसके बाद बाद नमाज़-ए-असर गाँव निम्बरी के कब्रिस्तान में नमाज़-ए-जनाज़ा अदा किए जाने के बाद उन्हें सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

मरहूमा अपने पीछे 5 बेटे, 1 बेटी, 6 नवासे तथा लगभग 20–22 पोते-पोतियों समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। उनकी वफ़ात से परिवार पर ग़म का पहाड़ टूट पड़ा है और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब तथा रिश्तेदार गहरे सदमे में हैं।

मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त मरहूमा मरियम साहिबा की कामिल मग़फ़िरत फरमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फरमाए, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फरमाए, क़ब्र के तमाम मराहिल आसान फरमाए और उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे।

ऐ अल्लाह! मरहूमा को जन्नतुल फ़िरदौस में आला से आला मुक़ाम अता फरमा, उन्हें अपने ख़ास रहमत और करम के साये में जगह अता फरमा और उनके नेक आमाल को उनके लिए सदक़ा-ए-जारीया बना दे।

या अल्लाह! मरहूमा के जनाज़े में शरीक होने वाले तमाम हज़रात की हाज़िरी और दुआओं को क़ुबूल फरमा तथा उन्हें आख़िरत के लिए ज़ख़ीरा बना दे।

पसमांदगान के लिए दुआ

अल्लाह तआला मरहूमा के तमाम बेटे-बेटियों, नवासों, पोते-पोतियों, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। इस सदमे को सहने की ताक़त दे और मरहूमा के लिए की जाने वाली तमाम दुआओं को क़ुबूल फरमाए।

बेशक हम सब अल्लाह ही के हैं और उसी की तरफ़ लौटकर जाना है।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

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Saturday, August 15, 2026

बड़ौत के मोहम्मद अली साहब का इंतिक़ाल — बिरादराने मुल्तानी समाज में ग़म की लहर, आज सुबह 10:30 बजे होगी नमाज़-ए-जनाज़ा

मोहम्मद अली साहब के इंतिक़ाल की ग़मगीन ख़बर

नमाज़-ए-जनाज़ा आज सुबह 10:30 बजे, गोरे ग़रीबा कब्रिस्तान में होगी

बड़ौत/बागपत। निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराने हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि मोहम्मद अली वल्द जनाब अब्दुल ग़फ़ूर साहब, उम्र लगभग 55 साल, निवासी गांव शिकोपुर, जिला बागपत, हाल मुकाम बड़ौली रोड, मस्जिद के पास, कस्बा बड़ौत, जिला बागपत, का शनिवार, 15 अगस्त 2026 की बीती रात लगभग 11 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम के इंतिक़ाल की ख़बर से परिवार, रिश्तेदारों, दोस्तों और बिरादराने मुल्तानी समाज में गहरा रंज-ओ-ग़म पाया जा रहा है। एक इंसान का दुनिया-ए-फ़ानी से रुख़्सत होना यक़ीनन अहले-ख़ाना और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब के लिए बेहद तकलीफ़देह लम्हा होता है। ऐसे वक़्त में सब्र, दुआ और मरहूम के लिए मग़फ़िरत की दुआ ही सबसे बड़ी तसल्ली है।

नमाज़-ए-जनाज़ा आज सुबह 10:30 बजे

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूम मोहम्मद अली साहब की नमाज़-ए-जनाज़ा रविवार, 16 अगस्त 2026 को सुबह 10:30 बजे अदा की जाएगी।

मुकाम:
गोरे ग़रीबा कब्रिस्तान, हीरोज़ कॉलेज के सामने, बड़ौत, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश।

तमाम बिरादराने हज़रात से गुज़ारिश है कि अपने तमाम मसरूफ़ियात में से वक़्त निकालकर नमाज़-ए-जनाज़ा में शिरकत फरमाएं और मरहूम की मग़फ़िरत के लिए दुआ-ए-ख़ैर करें।

मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत

अल्लाह तआला मरहूम मोहम्मद अली साहब की मुकम्मल मग़फ़िरत फरमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फरमाए, उनके दर्जात बुलंद फरमाए, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फरमाए और उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे।

ऐ अल्लाह! मरहूम को अपनी रहमत के साये में जगह अता फरमा, उनके लिए क़ब्र का सफ़र आसान फरमा, सवालात-ए-क़ब्र में कामयाबी अता फरमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम नसीब फरमा।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

अहले-ख़ाना के लिए दुआ

अल्लाह रब्बुल आलमीन मरहूम के तमाम अहले-ख़ाना, रिश्तेदारों और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को इस सदमे को बर्दाश्त करने का सब्र-ए-जमील अता फरमाए। उनके दिलों को सुकून दे और इस मुश्किल घड़ी में अपनी ख़ास रहमत और मदद अता फरमाए।

या अल्लाह! मरहूम के घरवालों को सब्र अता फरमा, उनके ग़म को अपनी रहमत से आसान फरमा और इस सदमे के बदले उन्हें बेहतर अज्र अता फरमा।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

दफ़्न के बाद की दुआ

अल्लाह तआला मरहूम को मिट्टी की इस आख़िरी मंज़िल में अपनी रहमत के साथ जगह अता फरमाए। उनकी क़ब्र को वुसअत और रौशनी अता फरमाए, उन्हें हर तरह के अज़ाब से महफ़ूज़ फरमाए और क़यामत के दिन उन्हें अपने नेक बंदों में उठाए।

अल्लाहुम्मग़फ़िर लहू वरहम्हु, व आफिहि व'अफ़ु अन्हु।

ऐ अल्लाह! उनकी मग़फ़िरत फरमा, उन पर रहम फरमा, उन्हें आफ़ियत अता फरमा और उन्हें माफ़ फरमा।

तमाम अहले-ईमान से गुज़ारिश है कि मरहूम को अपनी ख़ुसूसी दुआओं में याद रखें।

आमीन या रब्बुल आलमीन।


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Friday, August 14, 2026

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन, धामपुर के शौकत अली मुल्तानी का इंतिक़ाल — अहल-ए-ख़ाना समेत पूरे कुनबे में ग़म की लहर

धामपुर। इंतिहाई रंज-ओ-अफ़सोस के साथ यह इत्तिला दी जाती है कि शौकत अली मुल्तानी पुत्र मरहूम शफ़ीउद्दीन क़ादर वाले, साकिन मोहल्ला बंदूकचियान, धामपुर, जिला बिजनौर, उत्तर प्रदेश का आज दिन जुमा, 14 अगस्त 2026 को दोपहर तक़रीबन 2:30 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

मरहूम की उम्र तक़रीबन 55 साल थी। उनके इंतिक़ाल की ख़बर मिलते ही अहल-ए-ख़ाना, रिश्तेदारों, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादरी के लोगों में गहरा रंज-ओ-ग़म फैल गया। मरहूम अपनी अहलिया, दो बच्चों समेत पूरे कुनबे-ख़ानदान और तमाम अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को ग़मज़दा छोड़कर इस दार-ए-फ़ानी से हमेशा-हमेशा के लिए रुख़्सत हो गए।

अहल-ए-ख़ाना और कुनबे में ग़म की लहर

मरहूम शौकत अली मुल्तानी के बड़े भाई मोहम्मद अली हैं, जबकि छोटे भाइयों में काशिफ अली, शाहबाज़ अली, राहत और अब्दुल्ला शामिल हैं। मरहूम की तीन बहनें भी हैं।

मरहूम के इंतिक़ाल से परिवार पर ग़म का पहाड़ टूट पड़ा है। इस सदमे की घड़ी में रिश्तेदारों, बिरादरी के लोगों और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब की बड़ी तादाद अहल-ए-ख़ाना से मुलाक़ात कर इज़हार-ए-ताज़ियत कर रही है और उन्हें सब्र-ए-जमील की दुआएँ दे रही है।

नमाज़-ए-जनाज़ा

मरहूम शौकत अली मुल्तानी की नमाज़-ए-जनाज़ा कल दिन शनिचर बा - तारीख़ 15 अगस्त 2026 को सुबह 10 बजे धामपुर के मोहल्ला बंदूकचियांन में अदा की जाएगी।

तमाम अहबाब, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादरी के हज़रात से गुज़ारिश है कि नमाज़-ए-जनाज़ा में शिरकत फ़रमाकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें।

अल्लाह रब्बुल आलमीन मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फ़रमाए, क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमाए, क़ब्र के तमाम मराहिल आसान फ़रमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए।

अल्लाह तआला तमाम पसमान्दगान, अहल-ए-ख़ाना और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को इस सदमे पर सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

नोट

मैय्यत के सिलसिले में मज़ीद मालूमात के लिए शाहबुद्दीन मुल्तानी साहब के मोबाइल नंबर 8595295648 पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है।


ख़ास रिपोर्ट

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Tuesday, August 11, 2026

एक माह बाद घर लौटा अंसार अहमद, परिवार में लौटी रौनक — बड़े भाई की सूझबूझ से दूर हुई नाराज़गी, फिर एक साथ रहने पर राज़ी हुए दोनों पक्ष

कैराना में खुशी की लहर: घर से नाराज़ होकर लापता हुआ नौजवान जमात में चला गया था, आज बड़े भाई हाजी इसरार साहब उसे वापस लेकर घर पहुंचे

कैराना/शामली, 11 अगस्त 2026।
तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी के लोगों के लिए यह इत्तिला यक़ीनन खुशी और इत्मीनान का सबब है कि अंसार अहमद वल्द हाजी इश्तियाक साहब (मरहूम), मूल निवासी झिंझाना एवं हाल बाशिंदे कस्बा कैराना, जिला शामली, उत्तर प्रदेश, जो पिछले करीब एक माह से घर से लापता थे, आखिरकार आज खैरियत के साथ अपने घर वापस लौट आए हैं।

अंसार अहमद के लापता होने की खबर “मुल्तानी समाज” न्यूज़ पोर्टल पर भी प्रकाशित की गई थी, जिसके बाद बिरादरी के लोगों में उनके सकुशल घर लौटने को लेकर दुआ और फिक्र का माहौल बना हुआ था।

एक कॉल ने खत्म किया एक महीने का इंतज़ार

मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को उस समय परिवार की बेचैनी खुशी में बदल गई, जब लापता अंसार अहमद ने अपने बड़े भाई जनाब हाजी इसरार साहब, गुरुग्राम वालों को फोन करके अपनी लोकेशन के बारे में जानकारी दी।

भाई की लोकेशन मिलते ही हाजी इसरार साहब ने देर किए बगैर बताई गई जगह का रुख किया और वहां पहुंचकर अपने भाई अंसार अहमद को साथ लेकर कैराना स्थित उनके घर वापस पहुंचे।

एक माह से जिस घर में अंसार की वापसी का इंतज़ार हो रहा था, वहां उनके पहुंचते ही परिवार और कुनबे में खुशी की लहर दौड़ गई। अपनों को अपने सामने देखकर परिजनों की आंखों में खुशी और इत्मीनान साफ़ दिखाई दिया।

घर से नाराज़ होकर जमात में चले गए थे अंसार

घर वापस लौटने के बाद अंसार अहमद ने अपने परिजनों को बताया कि वह अपनी घर वालों से नाराज़ होकर जमात में चले गए थे। इसी नाराज़गी के चलते वह करीब एक महीने तक घर से दूर रहे।

इस दौरान परिवार के लोग उनकी सलामती और वापसी को लेकर लगातार परेशान रहे और उनके सकुशल घर लौटने की दुआ करते रहे।

बड़े भाई ने निभाया फर्ज़-ए-भाईचारा, टूटता परिवार फिर जुड़ा

इस पूरे मामले में अंसार अहमद के बड़े भाई जनाब हाजी इसरार साहब ने जिस सूझबूझ, सब्र और भाईचारे का मुज़ाहिरा किया, वह काबिल-ए-तारीफ़ है।

घर वापसी के बाद हाजी इसरार साहब ने परिवार के तमाम अफ़राद को एक जगह बैठाया और दोनों पक्षों के बीच पैदा हुई नाराज़गी को दूर करने की कोशिश की। हालात यहां तक पहुंच चुके थे कि दोनों पक्ष एक-दूसरे की शक्ल तक देखना पसंद नहीं कर रहे थे और परिवार के बीच दूरी पैदा हो गई थी।

लेकिन बड़े भाई ने समझदारी और मोहब्बत के साथ दोनों पक्षों की बात सुनी और उन्हें रिश्तों की अहमियत समझाते हुए आपसी गिले-शिकवे और नाराज़गी भुलाकर दोबारा मिल-जुलकर रहने के लिए राज़ी कर लिया।

इस तरह एक ऐसा परिवार, जो नाराज़गी और दूरी की वजह से बिखरने की कगार पर पहुंच गया था, आज फिर से आपसी मोहब्बत, भाईचारे और रिश्तों की गर्मजोशी की तरफ लौट आया।

बिरादरी के लिए भी खुशी की खबर

अंसार अहमद की सकुशल वापसी न सिर्फ उनके परिवार बल्कि तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के लिए भी खुशी और इत्मीनान की बात है। उम्मीद की जानी चाहिए कि अंसार अहमद और उनके परिवार के बीच अब सभी गिले-शिकवे दूर होकर जिंदगी दोबारा सुकून और मोहब्बत के साथ आगे बढ़ेगी।

“मुल्तानी समाज” परिवार की ओर से भी दुआ है कि अल्लाह तआला अंसार अहमद और उनके पूरे खानदान के बीच हमेशा मोहब्बत, इत्तेहाद और खुशहाली कायम रखे, तमाम गलतफहमियां दूर फरमाए और इस परिवार को हमेशा आबाद व खुशहाल रखे। आमीन।


“मुल्तानी समाज” की ख़ास रिपोर्ट

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Monday, August 10, 2026

मुल्तानी बिरादरी की बुज़ुर्ग ख़ातून बिलकिस बी का इंतिक़ाल, ग़म में डूबा खानदान

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

लंबी बीमारी के बाद 75 साल की उम्र में हुईं क़ज़ा-ए-इलाही से रूख़्सत — दिन मंगल को खुरेजी, दिल्ली में अदा होगी नमाज़-ए-जनाज़ा

नई दिल्ली। निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिली अफ़सोस के साथ मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के तमाम हज़रात को इत्तिला दी जाती है कि बिलकिस बी, उम्र तक़रीबन 75 साल, अहलिया-ए-मरहूम जनाब इदरीश साहब, मूल निवासी जमना नगर, जगाधरी, हरियाणा तथा हाल बाशिंदा पुरानी गोविंदपुरी, खुरेजी, दिल्ली का लंबी बीमारी के बाद आज बरोज पीर, बा - तारीख़ 10 अगस्त 2026 की रात तकरीबन 10 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूमा मोहम्मद शाहिद साहब और मोहम्मद राशिद साहब की वालिदा मोहतरमा थीं। मरहूमा का मायका कस्बा जलालाबाद, ज़िला शामली, उत्तर प्रदेश का था। उनके इंतिक़ाल की ख़बर से अहले-ख़ानदान, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और मुस्लिम मुल्तानी बिरादरी में गहरा रंज-ओ-ग़म पाया जा रहा है।

मरहूमा एक बुज़ुर्ग और खानदान की सम्मानित ख़ातून थीं। उनके इंतिक़ाल से परिवार ने अपनी एक अज़ीज़ और मोहतरम बुज़ुर्ग हस्ती को खो दिया है। इस ग़म की घड़ी में अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादरी के लोग ग़मज़दा खानदान के साथ खड़े हैं।

नमाज़-ए-जनाज़ा

मरहूमा की नमाज़-ए-जनाज़ा कल ( आज) बरोज मंगल, 11 अगस्त 2026 को बाद नमाज़-ए-ज़ोहर, खुरेजी, दिल्ली में अदा की जाएगी, इंशाअल्लाह।

तमाम अहले-बिरादरी, रिश्तेदारों और अहबाब से गुज़ारिश है कि नमाज़-ए-जनाज़ा में शिरकत फरमाकर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और ग़मज़दा खानदान के साथ ताज़ियत व हमदर्दी का इज़हार फरमाएँ।

मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत

अल्लाह तआला मरहूमा बिलकिस बी की मग़फ़िरत-ए-कामिला फरमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और लग़ज़िशों को माफ़ फरमाए, उनके नेक आमाल को अपनी बारगाह में क़ुबूल फरमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला से आला मक़ाम अता फरमाए।

ऐ अल्लाह! मरहूमा की क़ब्र को नूर से मुनव्वर फरमा, उसे कुशादा और रोशन फरमा, क़ब्र की तमाम मुश्किलात को आसान फरमा और उन्हें अपनी ख़ास रहमत व रज़ा में जगह अता फरमा।

दफ़्न के लिए दुआ

अल्लाह रब्बुल आलमीन मरहूमा के लिए दफ़्न की मंज़िल आसान फरमाए, उन्हें अपनी रहमत के साये में जगह दे, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे, मुनकिर-नकीर के सवालात में साबित-क़दम रखे और रोज़-ए-क़यामत उन्हें अपने नेक और महबूब बंदों में शामिल फरमाए।

अल्लाह पाक उनके तमाम पसमान्दगान, बेटों, रिश्तेदारों और अहले-ख़ानदान को सब्र-ए-जमील अता फरमाए और इस सदमे को बर्दाश्त करने की हिम्मत व तौफ़ीक़ दे।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

मैय्यत के सिलसिले में राब्ता

मैय्यत के सिलसिले में मज़ीद मालूमात के लिए जनाब मोहम्मद राशिद साहब से नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है:

📞 93108---23138
📞 98101--64671


“मुल्तानी समाज” की ओर से पुरसा

“मुल्तानी समाज” न्यूज़ फैमिली मरहूमा बिलकिस बी के इंतिक़ाल पर गहरे रंज-ओ-ग़म का इज़हार करता है और दुआगो है कि अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फ़िरत फरमाकर उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फरमाए तथा तमाम लवाहिक़ीन को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार (विज्ञापन) क़ौमी सतह पर शाया या प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो बराए मेहरबानी नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।

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“मुल्तानी समाज” — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।

Sunday, August 9, 2026

हज्जन रफ़ीक़न बी का इंतिक़ाल, 10 अगस्त को होगी नमाज़-ए-जनाज़ा

मेरठ उत्तर प्रदेश।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ यह इत्तिला मिली है कि मरहूम जनाब हबीब अहमद पेशकार साहब, मेरठ (ज़ैदी फ़ार्म) की अहलिया हज्जन रफ़ीक़न बी का आज दिन इतवार बा - तारीख़ 09 अगस्त 2026 को शाम लगभग 7 बजे, 90 साल की उम्र में बीमारी के चलते कजा - ए - ईलाही से इंतिक़ाल हो गया। उनके इंतिक़ाल की ख़बर से उनके कुनबा, खानदान, रिश्तेदारों और मायके समेत जानने वालों में गहरा सदमा और ग़म की लहर दौड़ गई।

मरहूमा अपनी ज़िंदगी के आख़िरी दौर में अपने साहबज़ादों इक़बाल अहमद, अक़ील अहमद और शकील अहमद के साथ रह रही थीं। उनके इंतिक़ाल की ख़बर सुनकर अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और अहबाब ने परिवार से ताज़ियत का इज़हार करते हुए मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत की।

नमाज़-ए-जनाज़ा 10 अगस्त को

परिवार की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक मरहूमा हज्जन रफ़ीक़न बी की नमाज़-ए-जनाज़ा बरोज पीर, बा - तारीख़ 10 अगस्त 2026 को सुबह 10 बजे बाल-ए-मियां क़ब्रिस्तान, नौचंदी ग्राउंड, मेरठ में अदा की जाएगी। नमाज़-ए-जनाज़ा के बाद मरहूमा को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

मरहूमा के परिजनों ने तमाम अज़ीज़ों, रिश्तेदारों और अहबाब से नमाज़-ए-जनाज़ा में शिरकत कर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत की दरख़्वास्त की है।

मरहूमा मिन्हाज मिर्ज़ा, फलावदा की रिश्ते में बहन की सास थीं। उनके इंतिक़ाल पर मिन्हाज मिर्ज़ा समेत तमाम रिश्तेदारों और परिचितों ने गहरे रंज और अफ़सोस का इज़हार किया।

दुआ-ए-मग़फ़िरत

अल्लाह तआला मरहूमा हज्जन रफ़ीक़न बेगम की तमाम ख़ताओं और लग़ज़िशों को माफ़ फरमाए, उनकी मग़फ़िरत फरमाए, क़ब्र को नूर से मुनव्वर फरमाए, क़ब्र के हर मरहले को आसान फरमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला से आला मक़ाम अता फरमाए।

अल्लाह पाक तमाम पसमान्दगान को यह सदमा सब्र-ओ-तहम्मुल के साथ बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।


मुल्तानी समाज की ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रकाशित/प्रसारित मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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Saturday, August 8, 2026

— मोहम्मद अशरफ़ के इंतिक़ाल से इकरामपुरा में पसरा मातम, कल सुपुर्द-ए-ख़ाक

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन 

कैराना/शामली। निहायत ही रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ यह इत्तिला दी जाती है कि मोहल्ला इकरामपुरा, क़स्बा कैराना, जनपद शामली निवासी जनाब मोहम्मद अशरफ़ साहब वल्द जनाब अब्दुल सत्तार साहब, उम्र तक़रीबन 40 साल, का लंबी बीमारी के बाद आज दिन शनिचर, बा - तारीख़ 08 अगस्त 2026 की शाम लगभग 5 से 6 बजे के दरमियान क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

मरहूम के इंतिक़ाल की ख़बर सुनते ही अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, रिश्तेदारों और अहबाब में ग़म की लहर दौड़ गई। मरहूम अपने पीछे अहलिया, एक बेटे, वालिदैन, चार भाइयों और दो बहनों समेत तमाम कुनबे और खानदान को गहरे सदमे और रंज में छोड़कर इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत हो गए।

मरहूम के इंतिक़ाल पर “मुल्तानी समाज” परिवार भी गहरे रंज-ओ-ग़म का इज़हार करता है और दुआगो है कि अल्लाह तआला मरहूम मोहम्मद अशरफ़ साहब की मुकम्मल मग़फ़िरत फरमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और लग़ज़िशों को माफ़ फरमाए, क़ब्र को नूर से मुनव्वर और कुशादा फरमाए, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फरमाए और उनके तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

कल होगा सुपुर्द-ए-ख़ाक

मिली जानकारी के मुताबिक़ मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन कल इतवार, 09 अगस्त 2026 को सुबह लगभग 9 बजे की जाएगी। तमाम बिरादरान-ए-इस्लाम से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फरमाकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

अल्लाह तआला तमाम मुसलमानों को मौत की इस हक़ीक़त से इबरत हासिल करने और अपने आख़िरत के सफ़र की तैयारी करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन।

मैय्यत से मुताल्लिक़ मज़ीद मालूमात के लिए:
📞 अदनान साहब: 8923222201
📞 आसिफ़ साहब: 9971070796


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Wednesday, August 5, 2026

बिरादरी पर ग़म का पहाड़: रूबी बी का इंतिक़ाल, सात माह की बीमारी के बाद अपने ख़ालिक़-ए-हक़ीक़ी से जा मिलीं

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

बागपत/शामली/नई दिल्ली।

अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी को बड़े ही रंज व ग़म के साथ इत्तिला दी जाती है कि आज बरोज बुध, बा - तारीख़ 05 अगस्त 2026 को जनपद बागपत के गाँव बिराल की रहने वाली तथा हाल मुक़ीम अलीपुर, दिल्ली की रूबी बी, अहलिया जनाब अब्दुल वाजिद (फरजंद जनाब शौकत अली) का आज सुबह लगभग 11:00 बजे लंबी बीमारी के बाद क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

मरहूमा पिछले लगभग सात माह से बीमार थीं और उनका इलाज पीजीआई अस्पताल, चंडीगढ़ में चल रहा था। तमाम इलाज और दुआओं के बावजूद अल्लाह तआला को कुछ और ही मंज़ूर था। आखिरकार मरहूमा अपने ख़ालिक़-ए-हक़ीक़ी से जा मिलीं।

मरहूमा, जनाब हाजी लियाक़त साहब के छोटे भाई जनाब शौकत अली के फ़र्ज़ंद जनाब अब्दुल वाजिद की अहलिया थीं। अपने पीछे वह अपने शौहर, लगभग 5 वर्ष के एक मासूम बेटे, तमाम अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, रिश्तेदारों और पूरी बिरादरी को ग़मज़दा छोड़ गई हैं। मरहूमा का मायका जनपद शामली (उत्तर प्रदेश) में था, जहाँ भी इस दुखद समाचार से ग़म की लहर दौड़ गई।

ख़बर लिखे जाने तक ज़िम्मेदारान की जानिब से नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन के वक़्त का एलान नहीं किया गया था। जैसे ही इसकी मुकम्मल मालूमात हासिल होगी, इसी ख़बर में तदफ़ीन का वक़्त और अन्य आवश्यक जानकारी अपडेट कर दी जाएगी।

दुआ है कि अल्लाह तआला मरहूमा रूबी बी की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी तमाम ख़ताओं से दरगुज़र फ़रमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला से आला मुक़ाम अता फ़रमाए और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

मैय्यत के सिलसिले में मालूमात

मैय्यत एवं तदफ़ीन के संबंध में अधिक जानकारी के लिए जनाब उम्मेद ख़ान साहब (गौरीपुर वाले) से मोबाइल नंबर 9528000342 पर राब्ता किया जा सकता है।


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Monday, August 3, 2026

🕊️ ग़मगीन ख़बर | एक और घर का चराग़ बुझ गया, बिरादरी ग़म में डूब गई


"إِنَّا لِلّٰهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ"
अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फ़िरत फ़रमाए, क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील नसीब फ़रमाए। आमीन।

नई दिल्ली / मुज़फ्फरनगर।
निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ बिरादरान-ए-मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) को यह दर्दनाक इत्तिला दी जाती है कि उत्तर प्रदेश के जनपद मुज़फ्फरनगर के गाँव महाददौ की मूल निवासी तथा हाल मुक़ीम मकान संख्या M-295, सुंदर नगरी, दिल्ली-110094 की रहने वाली अनीसा बी (उम्र तक़रीबन 50 वर्ष), अहलिया मरहूम जनाब अनवर साहब, का आज मंगल, 04 अगस्त 2026 की सुबह तकरीबन 6:00 बजे सुंदर नगरी, दिल्ली में कजा - ए - ईलाही से इंतिक़ाल हो गया।

यह ख़बर इसलिए भी दिलों को और ज़्यादा अश्कबार कर देने वाली है कि मरहूमा के शौहर जनाब अनवर साहब का भी महज़ 11 माह पहले इंतिक़ाल हुआ था। अभी वह सदमा पूरी तरह कम भी न हुआ था कि आज यह दूसरा बड़ा सदमा पूरे ख़ानदान, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादरी पर टूट पड़ा।

मरहूमा अपने पीछे दो साहबज़ादे, छह साहबज़ादियाँ तथा पूरा ख़ानदान, रिश्तेदार, अहबाब और चाहने वालों को ग़मज़दा छोड़कर अपने ख़ालिक़-ए-हक़ीक़ी से जा मिलीं। मरहूमा का मायका शाहपुर, ज़िला मुज़फ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) में था और अपने नेक अख़लाक़, सादगी तथा ख़ुशनुमां मिज़ाज की वजह से बिरादरी में अच्छी पहचान रखती थी मरहूमा की नमाज़-ए-जनाज़ा के बाद आज नमाज़-ए-जोहर सुंदर नगरी, दिल्ली में ही सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम अहबाब, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादरान-ए-इस्लाम से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएँ और उनके लिए ईसाल-ए-सवाब का एहतेमाम करें।

दुआ है कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त मरहूमा की तमाम ख़ताओं से दरगुज़र फ़रमाए, क़ब्र की तंगी और वहशत को आसान फ़रमाए, मुनकर-नकीर के सवालात में कामयाबी अता फ़रमाए, हश्र के दिन अपने ख़ास करम से साया-ए-रहमत नसीब फ़रमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में अपने नेक बंदों के साथ आला मुक़ाम अता फ़रमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

📌 नोट :
मय्यत के सिलसिले में किसी भी तरह की तफ़सील मालूम करने के लिए जनाब मोहम्मद नौशाद साहब (छुर वालों) से मोबाइल नंबर 9971840143 पर राब्ता किया जा सकता है।

— उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट
"मुल्तानी समाज"
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Sunday, August 2, 2026

📢 सार्वजनिक सूचना / अहम इत्तिला

अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू

तमाम अहबाब, अज़ीज़ों और बिरादराने इस्लाम को इत्तिला दी जाती है कि क़स्बा थानाभवन, जिला शामली (उत्तर प्रदेश) निवासी जनाब अकरम साहब वल्द जनाब अब्दुल अज़ीज़ साहब (मरहूम), क़ुतुबगढ़ वाले का व्हाट्सएप नंबर 7017481648 किसी खुराफाती शख्स द्वारा हैक कर लिया गया है।

हैकर इस नंबर के ज़रिए लोगों को मैसेज भेजकर पैसों की मांग कर रहा है। आप सभी से गुज़ारिश है कि इस नंबर से आने वाले किसी भी मैसेज, कॉल या पैसों की मांग पर हरगिज़ भरोसा न करें और कोई भी रकम ट्रांसफर न करें।

अगर इस नंबर से आपके पास कोई संदिग्ध मैसेज या कॉल आए, तो कृपया उसे नज़रअंदाज़ करें और इसकी जानकारी तुरंत नीचे दिए गए नंबर पर दें।

संपर्क (अकरम साहब):
📞 9719999101

आप सभी हज़रात से दरख़्वास्त है कि इस सार्वजनिक सूचना को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें, ताकि कोई भी धोखाधड़ी का शिकार न हो।

भवदीय
अकरम
थानाभवन, जिला शामली (उ.प्र.)

Thursday, July 30, 2026

🚨 गुमशुदगी की इत्तिला | 15 दिनों से लापता मोहम्मद अंसार की तलाश में तआवुन की अपील

بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ

निहायत अहम् और फ़िक्रअंगेज़ इत्तिला तमाम अहले बिरादरी की ख़िदमत में पेश की जाती है।

आप सभी बिरादराना हज़रात से अदब के साथ गुज़ारिश है कि मोहल्ला शाहमुबारिक, कस्बा झिंझाना, ज़िला शामली (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले तथा हाल बाशिंदा कैराना, ज़िला शामली के निवासी जनाब मोहम्मद अंसार साहब वल्द मरहूम जनाब हाजी इश्तियाक साहब (सऊदी वाले) पिछले करीब 15 दिनों से घर से नाराज़ होकर लापता हैं। अब तक उनका कोई सुराग़ नहीं मिल सका है, जिसकी वजह से उनके अहल-ए-ख़ाना बेहद परेशान और फ़िक्रमंद हैं।

तमाम अहले बिरादरी से दर्दमंदाना इल्तिज़ा है कि इस नेक काम में अपना भरपूर तआवुन फ़रमाएँ। अगर किसी भी हज़रत को मोहम्मद अंसार साहब कहीं भी नज़र आएँ या उनके बारे में किसी भी क़िस्म की मालूमात हासिल हो, तो बराए करम फ़ौरन उनके बड़े भाई जनाब हाजी इसरार साहब से नीचे दिए गए नंबर पर राब्ता करें—

📞 82678 07373

या फिर "मुल्तानी समाज" न्यूज़ के हेल्पलाइन नंबरों पर इत्तिला दें—

📞 9410652990
📞 8010884848

आपकी एक छोटी-सी इत्तिला किसी परिवार की बड़ी परेशानी को दूर कर सकती है। इसलिए इस पैग़ाम को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर फ़रमाएँ ताकि यह ख़बर हर उस शख़्स तक पहुँचे जो उनकी तलाश में मददगार साबित हो सके।

अल्लाह तआला से दुआ है कि मोहम्मद अंसार साहब को महफ़ूज़ व सलामत उनके घर वालों से जल्द अज़ जल्द मिला दे और उनके अहल-ए-ख़ाना को सुकून-ए-क़ल्ब अता फ़रमाए। आमीन या रब्बल आलमीन।

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Wednesday, July 29, 2026

إِنَّا لِلّٰهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ गाँव जिमानी की बुज़ुर्ग ख़ातून जुलेखा बी का इंतिक़ाल, पूरे इलाक़े में ग़म की लहर


निहायत ही रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ आप तमाम अहले बिरादरी को इत्तिला दी जाती है कि आज, 30 जुलाई 2026 (जुमेरात) को रात तक़रीबन 1:30 बजे गाँव जिमानी निवासी मरहूमा जुलेखा बी, अहलिया जनाब अब्दुल हमीद साहब, जिनकी उम्र तक़रीबन 68 साल थी और जो जनाब साजिद जिमानी वाले की वालिदा-ए-माजिदा थीं, कज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल फ़रमा गईं।

إِنَّا لِلّٰهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ

यह ख़बर सुनकर पूरे इलाके और बिरादरी में गहरे दुख और अफ़सोस की लहर दौड़ गई। मरहूमा अपने अख़लाक़, सादगी, ख़ुलूस और नेक सीरत की वजह से बिरादरी में एहतराम की निगाह से देखी जाती थीं। अल्लाह तआला ने जो फैसला फ़रमाया, उसी पर सब्र करना मोमिन की पहचान है।

मरहूमा की नमाज़-ए-जनाज़ा एवं तदफ़ीन आज दिन जुमेरात को दोपहर 12:00 बजे, गाँव जिमानी के क़ब्रिस्तान में अदा की जाएगी।

🤲 मग़फ़िरत और सब्र की दुआ

हम बारगाह-ए-इलाही में दुआगो हैं कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त मरहूमा जुलेखा बी की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे, उसे नूर से मुनव्वर फ़रमाए, सवालात-ए-क़ब्र को आसान फ़रमाए, तमाम सगीरा व कबीरा ख़ताओं को माफ़ फ़रमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए। आमीन।

अल्लाह तआला मरहूमा के तमाम अहल-ए-ख़ाना, रिश्तेदारों और चाहने वालों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए और इस सदमे को बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ नसीब फ़रमाए। आमीन या रब्बल आलमीन।

मज़ीद मालूमात के लिए संपर्क करें:
📞 9012645041


"मुल्तानी समाज" विशेष रिपोर्ट

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Monday, July 27, 2026

बिरादरी के बुज़ुर्ग मिस्त्री अय्यूब अहमद साहब का इंतिक़ाल — शामली की फ़िज़ा ग़मगीन, अहले बिरादरी में दौड़ गई शोक की लहर

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन 

निहायत ही रंज़-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ यह दुखद इत्तिला दी जाती है कि अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की एक बुज़ुर्ग, नेकदिल, शरीफ़ और सम्मानित शख्सियत जनाब मिस्त्री अय्यूब अहमद साहब वल्द जनाब मिस्त्री अज़ीमुल्ला साहब (मरहूम) निवासी गढ़ी पुख़्ता, हाल बाशिंदे नज़दीक मक्का मस्जिद, शामली (उत्तर प्रदेश) का आज बरोज़ पीर, 27 जुलाई 2026, शाम लगभग 4:30 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

मरहूम काफ़ी लंबे अर्से से गंभीर बीमारी में मुब्तिला थे। तमाम इलाज और दुआओं के बावजूद आखिरकार अल्लाह तआला का हुक्म पूरा हुआ और वह इस फ़ानी दुनिया को अलविदा कहकर अपने असली मालिक की बारगाह में हाज़िर हो गए।

मरहूम मिस्त्री अय्यूब अहमद साहब अपनी सादगी, नेक अख़लाक़, ख़ुशमिज़ाजी, मेहनतकशी और बिरादरी के प्रति मोहब्बत के लिए जाने जाते थे। उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी इज़्ज़त, ईमानदारी और ख़िदमत के साथ गुज़ारी। उनके इंतिक़ाल की ख़बर से शामली, गढ़ी पुख़्ता और आसपास के इलाक़ों सहित पूरी मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी में गहरे रंज़-ओ-ग़म की लहर दौड़ गई है। जो भी इस दुखद समाचार को सुन रहा है, वह मरहूम के लिए मग़फ़िरत की दुआ और उनके अहल-ए-ख़ाना के लिए सब्र-ए-जमील की दुआ कर रहा है।

मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा बाद नमाज़-ए-ईशा अदा की जाएगी, जिसके बाद उन्हें सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम अहले बिरादरी, रिश्तेदारों, दोस्तों और अकीदतमंदों से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए मग़फ़िरत, बुलंदी-ए-दराजात और जन्नतुल फ़िरदौस की दुआ करें। जनाज़े में शिरकत करना मुसलमान का अपने भाई पर हक़ भी है और अज़ीम सवाब का ज़रिया भी।

हम बारगाह-ए-इलाही में हाथ उठाकर दुआगो हैं:

ऐ अल्लाह! मरहूम मिस्त्री अय्यूब अहमद साहब की तमाम ख़ताओं को माफ़ फ़रमा। उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे। क़ब्र की तमाम मंज़िलों को आसान फ़रमा। उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा। उनके अहल-ओ-अयाल, औलाद, रिश्तेदारों और तमाम चाहने वालों को सब्र-ए-जमील और हिम्मत अता फ़रमा। आमीन या रब्बुल आलमीन।»

मुल्तानी समाज की ओर से ताज़ियत

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अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को रौशन फ़रमाए और उन्हें अपनी रहमत के साये में जगह अता फ़रमाए। आमीन।

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"मुल्तानी समाज" — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।

सहारनपुर से शामली तक मोहब्बत, यकजहती और भरोसे का सफ़र — मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट के कार्यालय पर हुआ गर्मजोशी से इस्तक़बाल

"जब क़ौम अपने लोगों से मिलने निकलती है, तो सिर्फ़ मुलाक़ातें नहीं होतीं, बल्कि भरोसे, मोहब्बत और इत्तेहाद की नई दास्तानें भी लिखी जाती हैं।"

शामली (उत्तर प्रदेश):
बीते रोज़, इतवार, 26 जुलाई 2026 को सहारनपुर के लिंक रोड निवासी जनाब मोहम्मद नौशाद साहब और जनाब मोहम्मद राशिद साहब अपनी फैमिली के साथ पैदाइशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की देश की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी तंजीम "मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट (रजिस्टर्ड ऑल इंडिया)" एवं "मुल्तानी समाज" राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के प्रधान-संपादक ज़मीर आलम मुल्तानी के शामली स्थित कार्यालय पहुँचे।

कार्यालय पहुँचने पर सभी मेहमानों का बेहद गर्मजोशी, अपनत्व और इज़्ज़त के साथ इस्तक़बाल किया गया। इस ख़ुशनुमा मुलाक़ात के दौरान बिरादरी की तरक़्क़ी, तालीम, सामाजिक एकता, नौजवानों के बेहतर मुस्तक़बिल और आने वाले वक़्त में संगठन को और मज़बूत बनाने जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई।

इस अवसर पर मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट के कानूनी सलाहकार हाजी शकील अहमद साहब तथा ख़ज़ांची हाजी नूरमोहम्मद साहब भी मौजूद रहे। सभी ने बिरादरी के हित में एकजुट होकर काम करने और समाज को नई बुलंदियों तक पहुँचाने का संकल्प दोहराया।

प्रधान-संपादक ज़मीर आलम मुल्तानी ने कहा कि "मुल्तानी समाज" केवल एक समाचार पत्रिका नहीं, बल्कि बिरादरी की आवाज़, पहचान और हक़ूक़ की बुलंद आवाज़ है। इसका उद्देश्य समाज को जोड़ना, प्रतिभाओं को सामने लाना, शिक्षा को बढ़ावा देना और देशभर में फैले मुल्तानी समाज के लोगों को एक मज़बूत मंच उपलब्ध कराना है।

यह मुलाक़ात इस बात का भी प्रमाण है कि आज देश के विभिन्न राज्यों से बिरादरी के लोग संगठन और समाचार पत्रिका पर लगातार अपना भरोसा जता रहे हैं तथा समाज की बेहतरी के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ रहे हैं।


उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान-संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदाइशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज"।

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बावली बिरादरी पर ग़म का पहाड़ टूटा — जनाब वहीदू साहब (बावली वाले) की अहलिया का इंतेक़ाल, आज मगरिब के बाद बावली कब्रिस्तान में होगी नमाज़-ए-जनाज़ा व तदफ़ीन

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी और अहले-ईमान को यह ग़मगीन इत्तिला दी जाती है कि आज बरोज़ पीर, बा-तारीख़ 27 जुलाई 2026 को जनाब वहीदू साहब (बावली वाले), हाल मुक़ाम दिल्ली की मोहतरमा अहलिया इस फ़ानी दुनिया को अलविदा कहकर अपने ख़ालिक़-ए-हक़ीक़ी से जा मिलीं।

إِنَّا لِلَّٰهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ

मरहूमा, हाजी खालिद अहमद (बावली वाले) की चाची थीं। उनके इंतेक़ाल की खबर सुनते ही पूरे ख़ानदान, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, अहबाब और बिरादरी में ग़म की लहर दौड़ गई। मरहूमा अपने पीछे रोने वाले अज़ीज़, रिश्तेदार, चाहने वाले और दुआ करने वालों की एक बड़ी तादाद छोड़ गई हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक मय्यत को दिल्ली से उनके पैतृक गांव बावली लाया जा रहा है। मरहूमा की तदफ़ीन का वक़्त मगरिब की नमाज़ के बाद तय किया गया है।
नमाज़-ए-जनाज़ा इंशाअल्लाह बावली कब्रिस्तान में अदा की जाएगी, जिसके बाद उन्हें सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

ज़िंदगी और मौत का मालिक सिर्फ़ अल्लाह तआला है। हर जान को एक न एक दिन मौत का मज़ा चखना है। आज मरहूमा अपने तमाम दुनियावी रिश्तों को पीछे छोड़कर उस सफ़र पर रवाना हो चुकी हैं, जहाँ से कोई वापस नहीं आता। अब उनके लिए सबसे क़ीमती तोहफ़ा सिर्फ़ दुआ-ए-मग़फ़िरत, ईसाल-ए-सवाब और नेक अमल हैं।

👉 तमाम अहले-ईमान से पुरख़ुलूस गुज़ारिश है कि मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएँ।

ऐ अल्लाह!
मरहूमा की तमाम ख़ताओं को माफ़ फ़रमा।
उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे।
क़ब्र की तंगी और अज़ाब से महफ़ूज़ फ़रमा।
उनकी मंज़िल आसान फ़रमा, हश्र के दिन उन्हें अपनी रहमत के साये में जगह अता फ़रमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम नसीब फ़रमा।
उनके तमाम अहले-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और चाहने वालों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा।

आमीन या रब्बुल आलमीन, सुम्मा आमीन।


📰 सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

📌 नोट:
अधिक जानकारी के लिए हाजी खालिद अहमद (बावली वाले) से मोबाइल नंबर 79848 44198 पर राब्ता क़ायम करें।


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Sunday, July 26, 2026

ग्राम ढिकाना के जनाब शरीफ़ अहमद का इंतेकाल, आज होगी सुपुर्द-ए-ख़ाक की रस्म

बागपत (उत्तर प्रदेश): निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ आप सभी बिरादराना हज़रात को इत्तिला दी जाती है कि ग्राम ढिकाना, तहसील बड़ौत, ज़िला बागपत (उत्तर प्रदेश) निवासी जनाब शरीफ़ अहमद वल्द जनाब निज़ामू साहब (मरहूम) का आज, दिन इतवार, 26 जुलाई 2026 को शाम तक़रीबन 5:30 बजे कज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया। मरहूम की उम्र तक़रीबन 72 वर्ष थी।

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा एवं सुपुर्द-ए-ख़ाक की रस्म कल, दिन पीर, 27 जुलाई 2026 को सुबह 9:00 बजे अदा की जाएगी। तमाम अहबाब, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फ़रमाकर मरहूम के हक़ में दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे, जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए और तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।

नोट: मरहूम के सिलसिले में अधिक जानकारी के लिए मोहम्मद युनुस अहमद से मोबाइल नंबर 9368574237 पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है।


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Saturday, July 25, 2026

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन लंबी बीमारी के चलते जाफराबाद (दिल्ली) निवासी रईस अहमद का इंतेकाल, नम आंखों से किया गया सुपुर्द-ए-ख़ाक

दिल्ली। निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादरान-ए-इस्लाम, ख़ुसूसन मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी को यह इत्तिला दी जाती है कि जाफराबाद, दिल्ली निवासी जनाब रईस अहमद वल्द मरहूम नज़ीर अहमद का शनिवार, 25 जुलाई 2026 को तक़रीबन 65 वर्ष की उम्र में लंबी बीमारी के बाद कज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया।

मरहूम को रविवार, 26 जुलाई 2026 को दोपहर साढ़े 12 बजे नम आंखों और ग़मगीन माहौल में सुपुर्द-ए-ख़ाक कर दिया गया। उनके इंतेकाल से पूरे कुनबे, खानदान और बिरादरी में शोक की लहर दौड़ गई।

मरहूम अपने पीछे अहलिया (पत्नी), एक बेटा, दो बेटियां, समूचे खानदान, रिश्तेदारों और तमाम अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को ग़मज़दा छोड़कर इस फ़ानी दुनिया से हमेशा-हमेशा के लिए रुख़्सत हो गए।

दुआ है कि अल्लाह तआला मरहूम की मग़फिरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए, जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।


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ग़म में डूबी मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी — जनाब इक़बाल साहब का दर्दनाक हादसे में इंतेकाल, कल लिबासपुर कब्रिस्तान में होंगे सुपुर्द-ए-ख़ाक

कैराना/शामली/नई दिल्ली।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी को यह इत्तिला दी जाती है कि गाँव इस्सोपुर, तहसील कैराना, जनपद शामली (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले एवं हाल निवासी स्वरूप नगर, दिल्ली जनाब इक़बाल साहब वल्द जनाब शमशुद्दीन साहब (उम्र तकरीबन 60 वर्ष) का आज शनिवार, 25 जुलाई 2026 को साइट पर काम करने के दौरान अचानक हुए एक दर्दनाक हादसे में क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया।

मरहूम के अचानक इंतेकाल की खबर से उनके खानदान, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और पूरी मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी में गहरे रंज-ओ-मलाल की लहर दौड़ गई है। हर आँख अश्कबार है और हर ज़ुबान से मरहूम की मग़फ़िरत एवं बुलंद-ए-दराज़ात के लिए दुआएँ निकल रही हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूम जनाब इक़बाल साहब की नमाज़-ए-जनाज़ा अदा किए जाने के बाद, रविवार 26 जुलाई 2026 को लिबासपुर कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम बिरादरान-ए-इस्लाम से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत फरमाएँ और उनके एहले-ख़ाना के ग़म में शरीक होकर सब्र-ओ-हौसले का पैग़ाम दें।

अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फरमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मक़ाम अता फरमाए और तमाम लवाहिक़ीन को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

मालूमात के लिए संपर्क

  • जनाब नसीम साहब (छोटे भाई): 8273273227
  • जनाब मुस्तकीम साहब (भतीजे): 9012101507

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🕋 अज़ीम अफ़सोसनाक ख़बर | मिस्त्री दिलशाद साहब के इंतेकाल से मुस्लिम मुल्तानी लौहार (बढ़ई) बिरादरी में मातम की लहर, आज मग़रिब के बाद होंगे सुपुर्द-ए-ख़ाक

बड़ौली (तहसील बड़ौत, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश):
निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिली अफ़सोस के साथ मुस्लिम मुल्तानी लौहार (बढ़ई) बिरादरी के तमाम बिरादरान-ए-इस्लाम की ख़िदमत में यह ग़मगीन इत्तिला पेश की जाती है कि जनाब हाजी अब्दुल गफूर साहब के फ़र्ज़ंद मिस्त्री दिलशाद साहब (उम्र तक़रीबन 48 वर्ष) का शनिवार, 25 जुलाई 2026 को दोपहर लगभग 1:00 बजे लंबी बीमारी के बाद इंतिक़ाल हो गया।

إِنَّا لِلّٰهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ

हर जान को मौत का मज़ा चखना है और आख़िरकार अपने रब की बारगाह में लौटकर जाना है। अल्लाह तआला की यही मर्ज़ी थी।

मरहूम के इंतेकाल की ख़बर फैलते ही गांव बड़ौली सहित पूरे क्षेत्र और मुस्लिम मुल्तानी लौहार (बढ़ई) बिरादरी में ग़म की लहर दौड़ गई। बड़ी तादाद में अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, दोस्त-अहबाब और बिरादरी के लोग मरहूम के घर पहुँचे और ग़मज़दा परिवार से ताज़ियत का इज़हार करते हुए सब्र-ए-जमील की दुआ की।

मरहूम अपने पीछे एक भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके वालिद हाजी अब्दुल गफूर साहब के आठ बेटे और तीन बेटियाँ हैं। मरहूम दिलशाद साहब अपने पीछे अपने तीन बेटों—

  • मुहम्मद वसीम
  • मुहम्मद नसीम
  • मुहम्मद इरफ़ान

—सहित तमाम अहल-ए-ख़ाना, रिश्तेदारों और चाहने वालों को ग़मज़दा छोड़कर इस फ़ानी दुनिया से हमेशा के लिए रुख़्सत हो गए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आज शनिवार, 25 जुलाई 2026 को मग़रिब की नमाज़ के बाद गांव बड़ौली के कब्रिस्तान में नमाज़-ए-जनाज़ा अदा की जाएगी, जिसके बाद मरहूम को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। बिरादरी के तमाम हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत कर मरहूम के हक़ में दुआ-ए-मग़फिरत करें और सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

"मुल्तानी समाज" न्यूज़ परिवार अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की बारगाह में दुआगो है कि अल्लाह तआला मरहूम मिस्त्री दिलशाद साहब की मग़फिरत फरमाए, उनकी तमाम ख़ताओं को अपनी रहमत से माफ़ फरमाए, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फरमाए और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन या रब्बल आलमीन। सुम्मा आमीन।

📿 अहल-ए-ईमान के लिए अहम हिदायतें

  • मय्यत वालों के घर जाकर हँसी-मज़ाक और गैर-ज़रूरी बातों से परहेज़ करें।
  • ग़मज़दा परिवार पर खाने-पीने या मेहमाननवाज़ी का बोझ न बनें।
  • जनाज़े के पीछे चलते समय मोबाइल फ़ोन पर बातचीत और दुनियावी मशग़ूलियत से बचें।
  • जनाज़े के साथ अदब व एहतराम के साथ कलिमा-ए-तय्यिब "ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह" और ज़िक्र-ए-इलाही में मशग़ूल रहें।

नोट:
अधिक जानकारी के लिए पप्पू चौधरी, बड़ौली से मोबाइल नंबर 8126853165 पर राब्ता कायम किया जा सकता है।


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🕋 अश्कबार ख़बर | बिरादरी की बुज़ुर्ग ख़ातून हज्जन सफीदन बी सुपुर्द-ए-ख़ाक, अहल-ए-ख़ाना व तमाम बिरादरी ग़म में डूबी

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

बड़ौत (जिला बागपत, उत्तर प्रदेश):
निहायत ही रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ मुस्लिम मुल्तानी लौहार (बढ़ई) बिरादरी के तमाम बिरादरान-ए-इस्लाम की ख़िदमत में इत्तिला दी जाती है कि अंजुमन मुल्तानी मुग़ल आह्नग्रान, बड़ौत के पूर्व सदर हाजी इदरीश साहब की अहेलिया मरहूमा हज्जन सफीदन बी का शनिवार, 25 जुलाई 2026 की रात लंबी बीमारी के बाद अपने ख़ालिक़-ए-हक़ीक़ी से जा मिलीं।

إِنَّا لِلّٰهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ

मरहूमा ने अपने निवास मुहल्ला पुरियांव वाली गली, फूंस वाली मस्जिद के पीछे, कस्बा बड़ौत, जिला बागपत (उत्तर प्रदेश) में आख़िरी साँस ली। उनके इंतेकाल की ख़बर फैलते ही पूरे कस्बे और मुस्लिम मुल्तानी लौहार (बढ़ई) बिरादरी में ग़म की लहर दौड़ गई। बड़ी तादाद में अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, दोस्त-अहबाब और बिरादरी के लोगों ने पहुँचकर अहल-ए-ख़ाना से ताज़ियत की और मरहूमा के लिए मग़फिरत की दुआ की।

मरहूमा अपने पीछे एक भरा-पूरा और ख़ुशहाल परिवार छोड़ गई हैं। उनके सुपुत्र हैं—

  • हाजी इलाहुद्दीन
  • मुहम्मद इलियास
  • मुहम्मद फय्याज़
  • मुहम्मद इरशाद

जबकि उनके एक बेटे मरहूम महमूद अली का कुछ ही समय पूर्व इंतेकाल हो चुका था। एक ही परिवार पर लगातार आए इन सदमों ने हर दिल को अश्कबार कर दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिचर, 25 जुलाई 2026 को सुबह 10:00 बजे बड़का रोड, बड़ौत स्थित गौर-ए-गरीबां कब्रिस्तान में नमाज़-ए-जनाज़ा अदा की गई, जिसके बाद मरहूमा को नम आँखों और दुआओं के साथ सुपुर्द-ए-ख़ाक कर दिया गया। जनाज़े में बिरादरी के गणमान्य लोग, रिश्तेदार, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बड़ी संख्या में नमाज़ियों ने शिरकत कर मरहूमा को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश किया।

यह दुनिया फ़ानी है और हर जान को एक न एक दिन मौत का मज़ा चखना है। मरहूमा ने अपनी ज़िंदगी का सफ़र पूरा किया और अपने पीछे ऐसी यादें छोड़ गईं जिन्हें उनके चाहने वाले हमेशा याद रखेंगे।

हम बारगाह-ए-इलाही में हाथ उठाकर दुआ करते हैं कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त मरहूमा हज्जन सफीदन बी की तमाम ख़ताओं को माफ़ फरमाए, उनकी मग़फिरत फरमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे, क़ब्र की तमाम मंज़िलों को आसान फरमाए, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फरमाए और अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन या रब्बल आलमीन। सुम्मा आमीन।

📿 अहल-ए-ईमान के लिए चंद गुज़ारिशात

  • मय्यत वालों के घर जाकर हँसी-मज़ाक और गैर-ज़रूरी बातों से परहेज़ करें।
  • ग़मज़दा परिवार पर खाने-पीने या मेहमाननवाज़ी का बोझ न डालें।
  • जनाज़े और क़ब्रिस्तान में मोबाइल फ़ोन पर बातचीत और दुनियावी मशग़ूलियत से बचें।
  • जनाज़े के साथ अदब, ख़ामोशी और ज़िक्र-ए-इलाही में मशग़ूल रहते हुए चलें तथा मरहूम/मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फिरत करते रहें।

नोट:
अधिक जानकारी के लिए मुहम्मद हासिम साहब से मोबाइल नंबर 9917275762 पर राब्ता कायम किया जा सकता है।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लौहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

यदि आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार (विज्ञापन) क़ौमी सतह पर शाया (प्रकाशित) या प्रसारित करवाना चाहते हैं तो बराए मेहरबानी निम्न नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ—

📞 9410652990
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"आपका एतमाद ही हमारी सबसे बड़ी ताक़त है।"
"मुल्तानी समाज" — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।

Tuesday, July 21, 2026

भूड मिल, खतौली से उठी ग़म की लहर — जनाब सलीम साहब (गाँव बलवा वाले) का इंतिक़ाल, आज बाद नमाज़-ए-असर होगी तद्फ़ीन,इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

खतौली (मुज़फ्फरनगर), उत्तर प्रदेश।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ आप तमाम बिरादरान-ए-मुल्तानी लोहार को यह दर्दनाक इत्तिला दी जाती है कि भूड मिल के पास, क़स्बा खतौली, जिला मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश के रहने वाले जनाब सलीम साहब वल्द जनाब निज़ामुद्दीन साहब (गाँव बलवा वाले) का आज बुध, 22 जुलाई 2026 की रात तक़रीबन 3:00 बजे कज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

यह ख़बर सुनते ही पूरे इलाक़े और बिरादरी में ग़म की लहर दौड़ गई। मरहूम अपने नेक अख़्लाक़, खुश-मिज़ाजी और मिलनसार तबीयत की वजह से लोगों के दिलों में ख़ास मुक़ाम रखते थे। उनके इंतिक़ाल से अहल-ए-ख़ानदान, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और तमाम जानने वालों को गहरा सदमा पहुँचा है।

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा आज बाद नमाज़-ए-असर अदा की जाएगी, जिसके बाद उन्हें सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम अहबाब, रिश्तेदारों और बिरादरान-ए-वतन से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

हम बारगाह-ए-इलाही में दिल की गहराइयों से दुआगो हैं कि अल्लाह तआला मरहूम की तमाम ख़ताओं को माफ़ फ़रमाए, उनकी मग़फ़िरत फ़रमाए, क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार (विज्ञापन) क़ौमी सतह पर शाया (प्रकाशित) या प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो बराए मेहरबानी नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।

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आपका एतमाद ही हमारी सबसे बड़ी ताक़त है।
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बाद-ए-दफ़्न मरहूम जनाब यूनुस साहब की मग़फ़िरत के लिए ख़ुसूसी ताज़ियती इत्तिला

एक नेकदिल इंसान अपने रब से जा मिला, दुआ है अल्लाह तआला उनकी मग़फ़िरत फ़रमाए और जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ तमाम बिरादरान-ए-मुल्तानी लोहार (बढ़ई) को इत्तिला दी जाती है कि मरहूम जनाब यूनुस साहब निवासी गाँव फतेहपुर, छुटमलपुर, ज़िला सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) का मंगलवार, 21 जुलाई 2026 को सेलाकुई, ज़िला देहरादून (उत्तराखंड) में लंबी बीमारी के बाद कज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

मरहूम अपनी ख़ुशअख़्लाक़ी, नेक सीरत और मिलनसार मिज़ाज की वजह से बिरादरी में एक अच्छी पहचान रखते थे। सर्विस के दौरान उनकी रहाइश मसूरी (देहरादून) में भी रही। उनके इंतिक़ाल की ख़बर से पूरे इलाक़े और बिरादरी में ग़म की लहर दौड़ गई।

मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा के बाद उन्हें सुपुर्द-ए-ख़ाक कर दिया गया। इस मौक़े पर बड़ी तादाद में अहबाब, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादरी के लोगों ने नम आँखों से उन्हें आख़िरी विदाई दी और उनकी मग़फ़िरत के लिए ख़ुसूसी दुआएँ कीं।

दुआ है कि अल्लाह तआला मरहूम की तमाम ख़ताओं को माफ़ फ़रमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे, क़ब्र की तमाम मंज़िलें आसान फ़रमाए, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए और अहल-ए-ख़ाना व तमाम पसमान्दगान को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

नोट:
मरहूम के सिलसिले में अधिक जानकारी के लिए जनाब मोहम्मद हनीफ़ साहब (भगवानपुर, ज़िला हरिद्वार, उत्तराखंड) से मोबाइल नंबर 9897563371 पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

यदि आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार (विज्ञापन) क़ौमी सतह पर शाया (प्रकाशित) या प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।

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आपका एतमाद ही हमारी सबसे बड़ी ताक़त है।
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