Thursday, February 5, 2026

मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी के एक ख़ामोश मेहनतकश का इंतेक़ाल — ठेकेदार मिस्त्री मुहम्मद रफ़ीक़ अहमद साहब अब हमारे दरमियान नहीं रहे

इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलैहि राजिऊन । मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी के लिए यह ख़बर निहायत ही रंजो-ग़म और दिल को बोझिल कर देने वाली है कि ठेकेदार मिस्त्री मुहम्मद रफ़ीक़ अहमद साहब (निवासी क़स्बा अमीनगर सराय, ज़िला बागपत — हाल बाशिंदा , हरियाणा) का बीते कल दिन जुमेरात, बा-तारीख़ 05 फ़रवरी 2026 को इशा की नमाज़ के बाद क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेक़ाल हो गया।

अल्लाह की यही मर्ज़ी थी।
हम सब इस फ़ैसले-ए-इलाही के आगे सर झुकाते हैं।

मरहूम अपने पीछे भरा-पूरा कुनबा छोड़ गए हैं। उनके तीन बेटे —
मुहम्मद अतीक़ अहमद,
मुहम्मद वसीम अहमद,
मुहम्मद शुऐब अहमद मुल्तानी — अपने वालिद के इंतेक़ाल से सदमे में हैं। अहल-ए-ख़ाना, रिश्तेदार, दोस्त और तमाम जानने वाले इस वक़्त ग़म की गहरी कैफ़ियत से गुज़र रहे हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक़, मरहूम का जनाज़ा से उनके पैतृक वतन , ज़िला (उत्तर प्रदेश) लाया जाएगा।
कल यानी आज 06 फ़रवरी 2026, दिन जुमा को साढ़े दस बजे क़स्बा अमीनगर सराय के क़ब्रिस्तान में मय्यत को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

लिहाज़ा तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े और दफ़्न में शिरकत कर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएँ और सवाबे दारेन हासिल करें।

हम बारगाह-ए-इलाही में दुआगो हैं कि
अल्लाह तआला मरहूम मुहम्मद रफ़ीक़ अहमद साहब की मग़फ़िरत फ़रमाए,
उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए,
और उन्हें जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए।
आमीन। सुम्मा आमीन।


अहम हिदायत (ग़म के मौके पर अदब और तहज़ीब का ख़याल रखें)

  • मय्यत वालों के घर जाकर हंसी-मज़ाक़ का माहौल न बनाएं।
  • ग़मगीन माहौल अख़्तियार करें और सब्र-ओ-तस्ली की बात करें।
  • मय्यत वालों के घर जाकर खाने-पीने का बोझ न बनें।
  • अव्वल कलिमा और दुआओं का एहतिमाम करें।
  • मय्यत के पीछे दुनियावी बातें, कारोबार या रिश्ते-नातों की चर्चा न करें।
  • जनाज़े के पीछे बतियाते हुए या गलबहियां बनाकर न चलें।

अल्लाह हमें और आप सबको इन बातों पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।
आमीन। सुम्मा आमीन।


एक ज़रूरी ऐलान — इंतेक़ाल की ख़बर भेजते वक़्त अहम हिदायतें

अक्सर देखा गया है कि इंतेक़ाल की ख़बर देर से या अधूरी पहुंचने की वजह से लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि ख़बर भेजते वक़्त निम्न जानकारी ज़रूर शामिल करें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम, वल्दियत या शौहर का नाम
2️⃣ पूरा पता (पैतृक व वर्तमान)
3️⃣ दफ़्न का सही वक़्त और क़ब्रिस्तान का नाम
4️⃣ घर के जिम्मेदार शख़्स का मोबाइल नंबर
5️⃣ अगर मर्द का इंतेक़ाल हुआ हो तो मरहूम की फोटो
6️⃣ इंतेक़ाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम — वालिदैन, भाई-बहन, औलाद वग़ैरह

इन तमाम जानकारियों से ख़बर मुकम्मल होती है और बिरादरी तक सही वक़्त पर सही सूचना पहुँचती है।


मय्यत के बारे में ज़्यादा मालूमात के लिए

अब्दुल क़य्यूम साहब
📞 9810191408


डिस्क्लेमर (Disclaimer)

पत्रिका में प्रकाशित लेख, समाचार, विचार, प्रेस विज्ञप्ति या विज्ञापन संबंधित लेखक, संवाददाता या विज्ञापनदाता के निजी विचार हैं।
इनसे पत्रिका के संपादक, प्रकाशक या प्रबंधन की सहमति आवश्यक रूप से अभिप्रेत नहीं है।
प्रकाशित सामग्री की सत्यता की ज़िम्मेदारी लेखक/विज्ञापनदाता की होगी।
किसी भी विवाद की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित,
पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी को समर्पित
देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए
अमीनगर सराय, ज़िला बागपत (उ.प्र.) से
अली हसन मुल्तानी की ख़ास रिपोर्ट

#multanisamaj
📞 8010884848
🌐 www.multanisamaj.com
🌐 www.msctindia.com
✉️ multanisamaj@gmail.com

No comments:

Post a Comment