Sunday, January 25, 2026

🇮🇳 मुस्लिम मुल्तानी लोहार बिरादरी ने मनाया गणतंत्र दिवस, ध्वजारोहण समारोह एवं समाजहित बैठक का गरिमामय आयोजन

मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश। 26 जनवरी के पावन और राष्ट्रीय महत्व के अवसर पर मुस्लिम मुल्तानी लोहार बिरादरी से जुड़ी मुल्तानी मिर्ज़ा वेलफेयर सोसायटी के ज़िलाध्यक्ष मिर्ज़ा हाजी इदरीश के आवास पर ध्वजारोहण समारोह एवं समाजहित बैठक का शालीन और गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः राष्ट्रध्वज फहराकर की गई, जहां उपस्थित सभी लोगों ने देश की एकता, अखंडता और संविधान के प्रति अपनी निष्ठा प्रकट की।

ध्वजारोहण के पश्चात बैठक में समाज के हित से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई। बताया गया कि SIR में किसी भी प्रकार के छूटे हुए अथवा गलत नामों को दुरुस्त कराने के उद्देश्य से शीघ्र ही एक विशेष कैंप का आयोजन किया जाएगा, जिससे समाज के जरूरतमंद लोगों को सीधा लाभ मिल सकेगा। इस पहल को उपस्थित जनसमूह ने अत्यंत सराहना के साथ स्वीकार किया।

बैठक की अध्यक्षता सोसायटी के अध्यक्ष हाजी अलीमुद्दीन साहब ने की, जबकि कार्यक्रम का सुचारु संचालन हाजी अनीस साहब ने किया। इस अवसर पर हाजी ज़ाहिद ज़ुल्फ़िकार, अहमद सलाहुद्दीन, अहमद नौशाद, अहमद शहज़ाद, अहमद परवेज़, नज्म शुऐब एवं डॉ. आक़िब आसिफ ने अपने विचार रखते हुए मुस्लिम मुल्तानी लोहार बिरादरी की सामाजिक एकता, जागरूकता और संगठनात्मक मजबूती पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में उपरोक्त सभी गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

यह आयोजन न केवल गणतंत्र दिवस के मूल्यों को सहेजने वाला रहा, बल्कि मुस्लिम मुल्तानी लोहार बिरादरी के सामाजिक हित में उठाए गए सकारात्मक कदमों के कारण भी विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा।


हाजी जाहिद की खास रिपोर्ट
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित
पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार–बढ़ई बिरादरी को समर्पित
देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए
मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश

संपर्क: 8010884848
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Saturday, January 24, 2026

मोहम्मद यामीन साहब का इंतेकाल ,ग़म की इस घड़ी में पूरा मुल्तानी समाज शरीक-ए-दुख़ है।

निहायत ही ग़म और रंज के साथ तमाम बिरादराने इस्लाम को यह इत्तला दी जाती है कि

मोहम्मद यामीन साहब (उम्र 63 वर्ष) वल्द मरहूम जनाब नज़ीर साहब,
बाशिंदा गांव बसी, ज़िला बागपत, उत्तर प्रदेश तथा हाल बाशिंदा ई-ब्लॉक, जहांगीरपुरी, दिल्ली का
इतवार, 25 जनवरी 2026 को अल-सुबह क़ज़ा-ए-ईलाही से इंतेकाल हो गया।

मरहूम मोहम्मद यामीन साहब कुल तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। उनके बड़े भाई मोहम्मद यूसुफ साहब और मोहम्मद यासीन साहब सहित वालिदैन का भी पहले ही इंतेकाल हो चुका है।

मरहूम अपने पीछे अपनी अहलिया, चार बेटियां
रुख़सार, इशरत, रुकैय्या, फरहीन
और एक बेटा मोहम्मद समीर समेत भरा-पूरा कुनबा, खानदान, रिश्तेदार और अज़ीज़-ओ-अकारिब को ग़मगीन छोड़कर इस फ़ानी दुनिया से हमेशा-हमेशा के लिए रुख़्सत हो गए।

अल्लाह तआला से दुआ है कि वह मरहूम की मग़फिरत फरमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए और तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।
आमीन।

नमाज़-ए-जनाज़ा बाद नमाज़-ए-ज़ोहर,
जहांगीरपुरी, दिल्ली में अदा की जाएगी और वहीं मय्यत को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फरमाकर सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

मय्यत के सिलसिले में किसी भी तरह की मालूमात के लिए
मरहूम के भांजे जनाब दिलशाद मुल्तानी जी
मोबाइल नंबर: 9760383915
पर राब्ता किया जा सकता है।


एक ज़रूरी ऐलान

(इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम हिदायतें)

अक्सर देखने में आता है कि किसी अज़ीज़ के इंतकाल की खबर देर से या अधूरी पहुंचती है, जिससे बिरादरी के लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि इंतेकाल की खबर भेजते वक़्त इन बातों का ख़ास ख़्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता (मूल निवास और वर्तमान निवास)।
3️⃣ दफीने का सही वक़्त और क़ब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार शख़्स के एक-दो मोबाइल नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतेकाल हुआ हो तो मरहूम की फोटो।
6️⃣ इंतेकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम – जैसे भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वगैरह।

👉 इन तमाम जानकारियों से खबर मुकम्मल होगी और बिरादरी तक सही वक़्त पर सही जानकारी पहुंचेगी।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित,
पैदाइशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को समर्पित
देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए
ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट

दुआओं की दरख़्वास्त के साथ

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Friday, January 23, 2026

नंदनवन कॉलोनी इंदौर से लापता मोहम्मद अहमद मुल्तानी की तलाश, परिजनों की अपील – सहयोग करें

ब्लॉग रिपोर्ट | मुल्तानी समाज नंदनवन कॉलोनी इंदौर , मध्यप्रदेश निवासी मोहम्मद अहमद मुल्तानी दिन जुमेरात बा - तारीख़ 22 जनवरी 2026 की रात से अपने घर से कहीं चले गए हैं। परिजनों और शुभचिंतकों के अनुसार अब तक उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है, जिससे परिवार गहरी चिंता में है।

परिवार की ओर से तमाम भाइयों, अकीदतमंदों और क्षेत्रवासियों से अदब के साथ गुज़ारिश की जाती है कि यदि किसी भाई को मोहम्मद अहमद मुल्तानी के बारे में कोई भी जानकारी प्राप्त हो, तो कृपया तत्काल मोबाइल नंबर: 7987164027 पर संपर्क कर सहयोग करें। आपकी एक छोटी-सी सूचना किसी परिवार की बड़ी चिंता को दूर कर सकती है।

यह सूचना सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार/बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए
अब्दुल कादिर मुल्तानी की ख़ास रिपोर्ट के रूप में प्रस्तुत की जा रही है।

हम दुआगो हैं कि मोहम्मद अहमद जल्द से जल्द सकुशल अपने घर लौटें। सभी से दरख़्वास्त है कि इस सूचना को अधिक से अधिक साझा करें, ताकि तलाश में तेज़ी आ सके।

संपर्क व जानकारी:
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Wednesday, January 21, 2026

🖤 बेहद ग़मगीन इत्तिला: जीशान मिर्ज़ा साहब का इंतेकाल — दुआओं की दरख़्वास्त 🖤

बेइंतहा अफ़सोस और गहरे रंजो-ग़म के साथ यह दिल को झकझोर देने वाली ख़बर तमाम अहल-ए-बिरादरी तक पहुंचाई जाती है कि बीती रात, दिन बुध, बा-तारीख़ 21 जनवरी 2026, जीशान मिर्ज़ा (उम्र 55 वर्ष) वल्द जनाब सुलेमान साहब (मरहूम), साकिन मोहल्ला पक्का बाग, सहारनपुर, उत्तर प्रदेश का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया।

मरहूम जीशान मिर्ज़ा अपने पीछे चार बहनें, एक छोटा भाई सूफ़ियान, अपनी अहलिया, दो बेटे और एक बेटी सहित तमाम कुनबा, रिश्तेदार और अज़ीज़-ओ-अक़ारीब को ग़मज़दा छोड़कर इस फ़ानी दुनिया से हमेशा के लिए रुख़्सत हो गए। वह नेकदिल, कम-गो और अपनी बात को सोच-समझकर कहने वाले सादा-मिज़ाज इंसान थे। उनके वालिद, वालिदा और एक जवान बहन का इंतेकाल पहले ही हो चुका है।

मरहूम की मय्यत आज दिन जुमेरात, 22 जनवरी 2026, नमाज़-ए-ज़ोहर के बाद सुपुर्द-ए-ख़ाक की जाएगी। तमाम अहल-ए-बिरादरी से अदबन गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर सवाब-ए-दारैन हासिल करें और मग़फ़िरत की दुआओं में मरहूम को याद रखें।

जीशान साहब रुड़की की मशहूर व मारूफ़ शख़्सियत महबूब नाल-बंद वालों के दामाद, महमूद साहब के बहनोई तथा मंज़ूर अहमद (गढ़ी पुख़्ता वाले)—हाल बाशिंदा यमुना विहार, दिल्ली—के साले थे। उनकी अचानक जुदाई से तमाम घराने और बिरादरी में शोक की लहर दौड़ गई है।


🕊️ ज़रूरी ऐलान — इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर देखा गया है कि इंतेकाल की खबर देर से या अधूरी पहुंचने के कारण लोग जनाज़े तक नहीं पहुंच पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने-इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि खबर भेजते वक़्त इन बातों का ख़ास ख़याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता — स्थायी व वर्तमान निवास।
3️⃣ दफ़्न का सही वक़्त और क़ब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स (एक-दो) के फ़ोन नंबर।
5️⃣ मर्द के इंतेकाल की सूरत में मरहूम की फोटो।
6️⃣ इंतेकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम — भाई, बहन, माँ-बाप, औलाद वगैरह।

👉 इन तमाम जानकारियों से खबर मुकम्मल होती है और बिरादरी तक सही वक़्त पर सही जानकारी पहुंचती है।


📰 डिस्क्लेमर

पत्रिका में प्रकाशित लेख, समाचार, विचार, टिप्पणी, विज्ञापन या अन्य सामग्री लेखक/संवाददाता/विज्ञापनदाता के अपने विचार हैं। इनसे संपादक, प्रकाशक या प्रबंधन की सहमति आवश्यक नहीं मानी जाएगी।
प्रकाशित सामग्री की सत्यता व दावों की ज़िम्मेदारी संबंधित लेखक/विज्ञापनदाता की होगी। किसी भी विवाद की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।


दुआ है कि अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए, दर्जात बुलंद करे और अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।

“मुल्तानी समाज” — सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, दिल्ली से प्रकाशित
ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट

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हाजी रिज़वान साहब का इंतेकाल — मुल्तानी बिरादरी के लिए एक गहरा सदमा

निहायत ही अफ़सोस और गहरे रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि

हाजी रिज़वान साहब वल्द हाजी खलीक साहब मरहूम (उम्र लगभग 71 वर्ष)
का आज दिन जुमेरात, 22 जनवरी 2026 को बीती रात तक़रीबन 2 बजे
मोहल्ला इकरामपुरा, क़स्बा कैराना, ज़िला शामली (उत्तर प्रदेश) में क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

मरहूम पाँच भाइयों में सबसे बड़े थे। उनके छोटे भाई
हाजी सत्तार साहब, हाजी ग़फ़्फ़ार साहब, मोहम्मद अदनान साहब हैं, जबकि
मरहूम इस्लाम साहब पहले ही इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत हो चुके हैं।
तीन बहनों में सबसे बड़ी मरहूमा रुक़ैय्या बी थीं, जबकि आयशा बी और ज़ुबैदा बी अल्लाह के फ़ज़्ल से मौजूद हैं।

मरहूम हाजी रिज़वान साहब अपने अख़लाक़, सादगी और नेकदिल शख़्सियत के लिए जाने जाते थे। कम बोलना, सिर्फ़ ज़रूरी और मुद्दे की बात करना, अपनी बात को बेहद संजीदगी से पेश करना—यह उनकी पहचान थी। रोज़ा-नमाज़ के पाबंद, मेहमाननवाज़ और जिंदा-दिल इंसान के तौर पर उन्होंने हर दिल में अपनी जगह बनाई। पल भर में अपनों जैसा एहसास दिला देना उनकी खास ख़ूबी थी।

मरहूम अपने पीछे
एक बेटे मोहम्मद फ़ुरक़ान साहब,
एक बेटी शहनाज़ बी (अहलिया मोहम्मद अकरम साहब, क़स्बा थानाभवन, ज़िला शामली),
पौते-पोतियाँ, नाते-नातिन, अहल-ए-ख़ाना, रिश्तेदार और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को ग़मगीन छोड़कर इस दुनिया से हमेशा के लिए रुख़्सत हो गए।


सऊदी अरब से जनपद मुज़फ्फरनगर, सहारनपुर और बागपत तक अपनी मेहनत, हुनर और ईमानदारी की धाक जमाने वाले मरहूम रिज़वान साहब उस दौर की शख़्सियत थे, जब विदेश जाने की हिम्मत करना भी आसान नहीं था। उन्होंने अपनी ज़िंदगी का तक़रीबन 35 साल सऊदी अरब में खैराद के कारीगर के रूप में गुज़ारे। सऊदी अरब में रहते हुए मशीनरी पार्ट्स के काम के सिलसिले में उन्होंने दर्जनों मुल्कों की खाक छानी। पैदायशी इंजीनियर सिफ़त, मुस्लिम मुल्तानी लोहार बिरादरी का यह चमकता सितारा उस ज़माने में सऊदी अरब की अत्याधुनिक कंप्यूटरीकृत मशीनों पर काम करता रहा, जिस दौर में हम उन मशीनों के बारे में सोच भी नहीं सकते थे।
सबसे बड़ी बात यह रही कि बेरोज़गारी से जूझ रहे अनेकों नौजवानों को उन्होंने बिल्कुल मुफ़्त सऊदी अरब ले जाकर रोज़गार मुहैय्या कराया। ख़ुद भी पूरी जवानी उन्होंने सऊदी अरब में नौकरी करते हुए गुज़ारी और दूसरों के लिए रोज़गार का ज़रिया बनते रहे। उनका इंतेकाल मुल्तानी समाज ही नहीं, बल्कि पूरे इलाक़े के लिए एक बहुत बड़ी कमी है जिसकी भरपाई करना मुमकिन ही नहीं ।

अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए और तमाम घर वालों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।


🕌 जनाज़े की जानकारी

मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा
बाद नमाज़ ज़ोहर, ठीक डेढ़ बजे
सराय वाली मस्जिद में अदा की जाएगी।
इसके बाद मय्यत को सरकारी अस्पताल के पास, बाढ़ियो वाले क़ब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

📞 ज़्यादा मालूमात के लिए राब्ता:
मोहम्मद अकरम साहब (थानाभवन वाले)
मोबाइल: 7017481648


🔔 एक ज़रूरी ऐलान – इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम् हिदायतें

अक्सर देखा गया है कि इंतेकाल की खबर या तो देर से पहुँचती है या अधूरी होती है, जिससे बिरादरी के लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि इंतेकाल की खबर भेजते वक़्त नीचे दी गई जानकारी ज़रूर शामिल करें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत/शौहर का नाम
2️⃣ पूरा पता (स्थायी व वर्तमान)
3️⃣ दफ़न का सही वक़्त और क़ब्रिस्तान का नाम
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स (एक-दो) के मोबाइल नंबर
5️⃣ अगर मर्द का इंतेकाल हुआ हो तो मरहूम का फ़ोटो
6️⃣ इंतेकाल की वजह (अगर मुनासिब हो)
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम — भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वगैरह

👉 इन तमाम जानकारियों से खबर मुकम्मल होती है और बिरादरी तक सही वक़्त पर सही सूचना पहुँचती है।


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Saturday, January 17, 2026

बेहद अफ़सोसनाक इत्तिला: एक नौजवान माँ का पर्दा फ़रमा जाना

निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम अहल-ए-बिरादरी को यह दुखद ख़बर दी जाती है कि बीती रात बरोज़ बार, बा-तारीख़ 17 जनवरी 2026 को इरफ़ान साहब की अहलिया मरहूमा इरफ़ाना बी (उम्र 32 वर्ष), साकिन बागू वाले, हाल बाशिंदा चाँद बाग, दिल्ली का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेक़ाल हो गया।

मरहूमा का मायका तथा वालिद जनाब ग़ुलाम मोहम्मद साहब का ताल्लुक़ गाँव बूढ़पुर, ज़िला बागपत (उत्तर प्रदेश) से था।

मरहूमा अपने पीछे अपने शौहर और तीन मासूम बच्चों को इस फ़ानी दुनिया में छोड़कर अपने रब के पास चली गईं। यह सदमा न सिर्फ़ उनके घराने बल्कि तमाम जानने-वालों के लिए अत्यंत पीड़ादायक है। अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनके दर्ज़ात बुलंद फ़रमाए और शौहर व अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।

मिली जानकारी के मुताबिक़, मरहूमा की मय्यत को आज बरोज़ इतवार, बा-तारीख़ 18 जनवरी 2026, बाद नमाज़-ए-ज़ोहर, मुस्तफ़ाबाद, दिल्ली के क़ब्रिस्तान में सपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम अहल-ए-बिरादरी से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर सवाब-ए-दारैन हासिल करें और घराने के ग़म में शरीक हों।

ज़्यादा मालूमात के लिए राब्ता:
मरहूमा के ससुर जनाब मोहम्मद इस्लाम साहब
मोबाइल: 9818830622, 8178412398


एक ज़रूरी ऐलान: इंतेक़ाल की ख़बर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर देखा गया है कि अधूरी या देर से पहुंची जानकारी की वजह से बिरादरी के लोग जनाज़े तक नहीं पहुंच पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादरान-ए-इस्लाम से दरख़्वास्त करती है कि इंतेक़ाल की ख़बर भेजते वक़्त निम्न बिंदुओं का ख़ास ख़याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम
2️⃣ पूरा पता (मूल निवास और वर्तमान पता)
3️⃣ दफ़्न का सही वक़्त और क़ब्रिस्तान का नाम
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स (एक-दो) के फ़ोन नंबर
5️⃣ अगर मर्द का इंतेक़ाल हुआ हो तो मरहूम की फ़ोटो
6️⃣ इंतेक़ाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)
7️⃣ घर के बाक़ी अहल-ए-ख़ाना के नाम (भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वग़ैरह)

👉 इन जानकारियों से ख़बर मुकम्मल होगी और बिरादरी तक सही वक़्त पर सही सूचना पहुंचेगी।


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ख़ास रिपोर्ट: मोहम्मद इरशाद, दिल्ली
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दुआ:
या अल्लाह! मरहूमा को जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमा, उनके बच्चों को अपनी हिफ़ाज़त में रख, और इस घराने को सब्र-ओ-सुकून नसीब फ़रमा। आमीन।

Friday, January 16, 2026

🕯️ इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजेऊन 🕯️🌙 एक दर्दनाक और रंजो-ग़म से भरी ख़बर

निहायत ही अफ़सोस और दिली रंज के साथ तमाम बिरादराने हज़रात को यह इत्तला दी जाती है कि

आज बरोज़ जुमा, बा-तारीख़ 16 जनवरी 2026, अभी कुछ ही देर पहले
मोहल्ला दरबार, कस्बा खतौली, ज़िला मुज़फ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) में
वहीदा बी, अहलिया जनाब रफ़ीक़ अहमद साहब (नांगल वालों) का
क़ज़ा-ए-ईलाही से इंतक़ाल हो गया है।

यह ख़बर न सिर्फ़ अहल-ए-ख़ाना बल्कि पूरी बिरादरी के लिए गहरे सदमे और दुख का कारण है।
अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनके दर्जात बुलंद फ़रमाए और
उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फरमाए। आमीन 🤲

ख़बर लिखे जाने तक मरहूमा के दफ़न का वक़्त मुक़र्रर नहीं हो पाया है,
जैसे ही तफ़सीलात हासिल होंगी, बिरादरी को इत्तला दी जाएगी, इंशाअल्लाह।


📢 एक ज़रूरी ऐलान

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अक्सर देखा गया है कि किसी अज़ीज़ के इंतक़ाल की ख़बर या तो देर से पहुँचती है
या फिर मुकम्मल जानकारी न होने की वजह से कई लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते।
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जब भी इंतेकाल की कोई ख़बर भेजें तो इन बातों का ख़ास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम / मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता — पैदाइशी और मौजूदा निवास।
3️⃣ दफ़न का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स (एक या दो) के फ़ोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतक़ाल हुआ हो तो मरहूम की फोटो भी शामिल करें।
6️⃣ इंतक़ाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम — जैसे माँ-बाप, भाई-बहन, औलाद वग़ैरह।

👉 इन तमाम जानकारियों से ख़बर मुकम्मल होती है और बिरादरी के लोगों को
सही और वक़्त पर इत्तला मिल पाती है।


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🤲 अल्लाह तआला मरहूमा के अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए
और इस दुख की घड़ी में पूरी बिरादरी को हिम्मत व तसल्ली नसीब फरमाए।
आमीन या रब्बुल आलमीन।