Monday, March 2, 2026

मुल्तानी बिरादरी की मोअज्ज़ज़ बुज़ुर्ग हस्ती नूरजहां बी का इंतेकाल, इलाक़े में ग़म की लहर

इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन, अहले बिरादरी मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई समाज के लिए यह खबर निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ पेश की जा रही है कि बरोज पीर, तारीख़ 02 मार्च की बीती रात तकरीबन साढ़े 11 बजे मरहूमा नूरजहां बी (68 साल) अहलिया जनाब अनीस अहमद साहब वल्द जनाब अज़ीमुल्ला साहब (मरहूम), निवासी गढ़ी पुख्ता, ज़िला शामली (उ.प्र.), हाल बाशिंदे क़स्बा किच्छा, ज़िला उधमसिंह नगर (उत्तराखंड) का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया।

इस दर्दनाक खबर ने न सिर्फ उनके घर बल्कि पूरी बिरादरी को ग़मगीन कर दिया है।


🏡 जिंदगी का सफर

मरहूमा का मायका गांव जसोई, ज़िला मुजफ्फरनगर (उ.प्र.) में था। वह मरहूम जनाब रसीद साहब की बेटी थीं। उनके कोई भाई नहीं थे। उनकी दो बहनें—जरीना (जसोई) और हसीना (पानीपत)—अपनी-अपनी जगह आबाद हैं।

काफी अरसा पहले उनका परिवार क़स्बा बाजपुर, ज़िला उधमसिंह नगर (उत्तराखंड) में आकर बसा और बाद में किच्छा में मुक़ीम हो गया। अपनी सादगी, नेक अख़लाक़ और बिरादरी से गहरा ताल्लुक रखने वाली नूरजहां बी ने पूरी ज़िंदगी खामोशी और इख़लास के साथ गुज़ारी।


👨‍👩‍👧‍👦 पीछे रह गए अहल-ए-ख़ाना

मरहूमा अपने पीछे अपने शौहर जनाब अनीस अहमद साहब समेत तीन बेटे—

  • जनाब शहज़ाद साहब
  • जनाब अशरफ़ साहब
  • जनाब अरशद साहब

और दो बेटियां—

  • बड़ी बेटी सन्नो (आजाद चौक, शामली, उ.प्र.)
  • दूसरी बेटी शबनम (नजीबाबाद, बिजनौर, उ.प्र.)

को ग़मगीन छोड़ गई हैं।

घर का हर कोना आज उनकी याद में नम है। माँ का साया उठ जाना वह खालीपन है जिसे कोई भर नहीं सकता।


🕌 नमाज़-ए-जनाज़ा और सुपुर्द-ए-ख़ाक

मरहूमा को आज दिन मंगल, तारीख़ 03 मार्च 2026 को सुबह 10 बजे क़स्बा किच्छा, ज़िला उधमसिंह नगर (उत्तराखंड) में ही सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर सवाब-ए-दारेन हासिल करें और मरहूमा के लिए मग़फिरत की दुआ फरमाएं।

📞 मय्यत के सिलसिले में ज्यादा मालूमात के लिए मोहम्मद एहसान से मोबाइल नंबर 9756156658 पर राब्ता किया जा सकता है।


🤲 दुआ-ए-मग़फिरत

अल्लाह तआला मरहूमा नूरजहां बी की मग़फिरत फरमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए और घरवालों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।
आमीन या रब्बुल आलमीन।


📢 एक ज़रूरी ऐलान – इंतेकाल की खबर भेजने के लिए हिदायतें

अक्सर अधूरी जानकारी की वजह से खबर देर से पहुंचती है। “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से दरख़्वास्त करती है कि इंतेकाल की खबर भेजते वक़्त इन बातों का खास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता – असल व मौजूदा।
3️⃣ दफीने का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ जिम्मेदार शख्स का फोन नंबर।
5️⃣ (अगर मर्द का इंतकाल हो) तो फोटो शामिल करें।
6️⃣ इंतकाल की वजह (अगर मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम।

👉 मुकम्मल जानकारी से खबर सही वक़्त पर और सही तरीके से बिरादरी तक पहुंचेगी।


📰 डिस्क्लेमर

पत्रिका में प्रकाशित लेख, समाचार, विचार, प्रेस विज्ञप्ति या विज्ञापन संबंधित लेखक/संवाददाता/विज्ञापनदाता के निजी विचार हैं। इनसे संपादक, प्रकाशक या प्रबंधन की सहमति आवश्यक नहीं है। सामग्री की सत्यता व दावों के लिए संबंधित लेखक/विज्ञापनदाता स्वयं जिम्मेदार होंगे। किसी भी विवाद की स्थिति में न्याय क्षेत्र केवल दिल्ली रहेगा।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित, मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका

📰 “मुल्तानी समाज”

✍️ ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट
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नोट:- शिनाख्त के लिए ख़बर में मरहूमा के शौहर जनाब अनीस अहमद साहब के फ़ोटो लगाए गए है।

दो सगे भाइयों का लगातार इंतिक़ाल… मुजफ्फरनगर से छुटमुलपुर तक मातम की फिज़ा, मुल्तानी बिरादरी सदमे में

🕯️ इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट

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अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादराना हज़रात को बड़े ही रंज-ओ-ग़म के साथ इत्तिला दी जाती है कि जनाब राशिद साहब (उम्र लगभग 50 वर्ष) वल्द जनाब सगीर अहमद (मनक पुट्टी वाले), हाल मुकाम मोहल्ला मल्हूपुरा, जनपद मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश का आज बरोज़ पीर, तारीख़ 02 मार्च 2026 को मगरिब के बाद कज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

इस खबर ने पूरे इलाके और बिरादरी को गहरे सदमे में डाल दिया है।

ग़ौरतलब है कि जनाब राशिद साहब के सगे भाई जनाब ज़ाकिर साहब, जो कस्बा बड़ौत, जिला बागपत में रह रहे थे, उनका भी बरोज़ शनिवार, 28 फ़रवरी 2026 को इंतिक़ाल हो गया था। महज़ तीन-चार दिन के अंदर दूसरे भाई के भी दुनिया से रुख़्सत हो जाने से इस घर पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

मरहूम राशिद साहब और मरहूम जमील साहब, कस्बा छुटमुलपुर, जिला सहारनपुर से नगर पंचायत की चेयरमैन शमा परवीन के चाचा थे। पूरे खानदान और रिश्तेदारों में ग़म की लहर दौड़ गई है।


🕊️ सुपुर्द-ए-ख़ाक

मरहूम राशिद साहब की मय्यत को बरोज़ मंगल, तारीख़ 03 मार्च 2026 को सभी को इत्तिला दी जाती है कि राशिद मिर्जा मुजफ्फरनगर वालो कि नमाजे जनाजा 1 बजे पीर वाली मस्जिद मल्लुहपुरा में अदा की जायेगी कई बार बताने के लिए मजरात चाहता हूं अब ये टाइम बिल्कुल फिक्स है। तमाम अहले बिरादरी से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर सवाब-ए-दारेन हासिल करें और घरवालों को सब्र की तसल्ली दें।


यह लम्हा सिर्फ एक खानदान का ग़म नहीं, बल्कि पूरे मुल्तानी समाज का सामूहिक दुख है। दो भाइयों का यूं लगातार इंतिक़ाल हमें जिंदगी की नापायेदारी का एहसास कराता है।

अल्लाह तआला से दुआ है कि दोनों मरहूमीन की मग़फिरत फरमाए, उनकी क़ब्र को रौशन और वसीअ बनाए, जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता करे और तमाम अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।

आमीन या रब्बुल आलमीन।


📞 नोट: मय्यत के बारे में ज्यादा मालूमात के लिए हाजी जाहिद साहब से मोबाइल नंबर 9258491478 पर राब्ता कायम किया जा सकता है।


📢 एक ज़रूरी ऐलान – इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर अधूरी जानकारी की वजह से बिरादरी के लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि इंतिक़ाल की खबर भेजते समय इन बातों का ख़ास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता – असल निवास और मौजूदा मुकाम।
3️⃣ दफीने का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार एक-दो अफ़राद के फोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतिक़ाल हुआ है तो मरहूम का फोटो शामिल करें।
6️⃣ इंतिक़ाल की वजह (अगर बताना मुनासिब समझें)।
7️⃣ बाकी अहले-ख़ाना के नाम – जैसे भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वगैरह।

👉 मुकम्मल जानकारी से खबर सही और वक़्त पर पहुंचती है, जिससे बिरादरी एक-दूसरे के ग़म में शरीक हो सके।


📰 डिस्क्लेमर (Disclaimer)

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प्रकाशित सामग्री की सत्यता या किसी दावे के लिए संबंधित लेखक/विज्ञापनदाता स्वयं उत्तरदायी होंगे। पत्रिका एवं प्रबंधन किसी भी कानूनी, सामाजिक या वित्तीय जिम्मेदारी से मुक्त रहेंगे।

किसी भी विवाद या न्यायिक कार्यवाही की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।


🖤 ग़म की इस घड़ी में पूरा मुल्तानी समाज दुआओं में शरीक है।

Sunday, March 1, 2026

🌙 खतौली में खिदमत-ए-खल्क का रूहानी मंज़र — जरूरतमंदों के लिए सेहरी व अफ़्तारी किट तकसीम

बरोज़ पीर, 02 मार्च 2026 को , ज़िला (उत्तर प्रदेश) में खिदमत-ए-खल्क का एक बेहद मुबारक और पुरअसर प्रोग्राम शानदार अंदाज़ में अंजाम दिया गया। इस नेक पहल के तहत तंजीम की जानिब से जरूरतमंद परिवारों के लिए सेहरी और अफ़्तारी से मुतअल्लिक किट्स तकसीम की गईं, ताकि रमज़ान के मुबारक महीने में कोई भी घर खाली दस्‍तरख़्वान के साथ इफ्तार या सेहरी के लिए मजबूर न हो।

इस प्रोग्राम में बिरादरी के कई जिम्मेदार और खैरख़्वाह हज़रात ने दिल खोलकर शिरकत की। जिन नामों ने इस नेक काम में अपना हिस्सा डाला, उनमें शामिल हैं —
जनाब हाजी नसीम साहब (खतौली),
जनाब ताहिर मिर्जा (मुजफ्फरनगर),
जनाबा यास्मीन साहिबा (बुढ़ाना),
रेशमा ज़मीर (मुल्तानी समाज न्यूज़),
जनाब हाजी दानिस साहब (देवबंद),
जनाब अब्दुल रहीम साहब,
जनाब जमीरुद्दीन साहब,
जनाब नौशाद मिर्ज़ा साहब (खतौली),
जनाब अफजाल साहब मिर्जा (खतौली),
जनाब शाहनवाज मिर्ज़ा (सरधना),
जनाब वसीम मिर्जा,
जनाब कय्यूम मिर्जा,
जनाब इकराम साहब,
जनाब मूसा जी (खतौली) आदि।

इन तमाम हज़रात की मौजूदगी ने प्रोग्राम को न सिर्फ कामयाब बनाया बल्कि बिरादरी में इत्तेहाद, हमदर्दी और भाईचारे का खूबसूरत पैग़ाम भी दिया। जरूरतमंदों के चेहरों पर आई मुस्कान इस बात की गवाह रही कि खिदमत का यह सिलसिला कितनी दिली लगन और सच्चाई के साथ अंजाम दिया गया।

रमज़ान का महीना सब्र, शुक्र और सख़ावत का महीना है। ऐसे में सेहरी और अफ़्तारी किट की तकसीम महज़ राशन बाँटना नहीं, बल्कि उम्मीद, राहत और मोहब्बत बाँटना है। यह अमल उस तालीम की तर्जुमानी करता है जो हमें इंसानियत की खिदमत का सबक देती है।

दुआ है कि अल्लाह तआला इस नेक काम में हिस्सा लेने वाले तमाम हज़रात के कारोबार में बरकत अता फरमाए, उनकी औलाद को नेक और फरमाबरदार बनाए और उनकी हर जायज़ तमन्ना को पूरा फरमाए। आमीन, सुम्मा आमीन।

यह खास रिपोर्ट सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए , ज़िला (उत्तर प्रदेश) से जनाब शाहनवाज मिर्ज़ा द्वारा भेजी गई।

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Saturday, February 28, 2026

🕯️ बेहद अफसोसनाक दिन: 28 फ़रवरी 2026 को बिरादरी से चार इंतेकाल की ख़बरें

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजीऊन

आज दिन शनिचर, बा-तारीख़ 28 फ़रवरी 2026, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी के लिए बेहद गमगीन रहा। एक ही दिन में चार अलग-अलग मकामात से इंतेकाल की खबरें पहुंचीं। अल्लाह तआला तमाम मरहूमीन की मग़फिरत फरमाए और अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता करे। आमीन।


🕯️ इंतेकाल की पहली ख़बर

📍 (ज़िला ) / हाल मुकाम

मोहम्मद जाकिर (मुजफ्फरनगर वालो) का आज सुबह करीब 02:30 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया। मरहूम हाल मुकाम पठानकोट, बड़ी मस्जिद बड़ौत (ज़िला बागपत, उत्तर प्रदेश) के पास रह रहे थे।

अल्लाह तआला मरहूम को जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए और तमाम गुनाहों को माफ़ फरमाए। आमीन।


🕯️ इंतेकाल की दूसरी ख़बर

📍

मरहूम हाजी मोहम्मद इब्राहिम साहब बारी वालों के फरज़ंद जनाब मोहम्मद यूसुफ साहब बारी वालों का भी क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया।

दफ़न का वक़्त सुबह 10:30 बजे मुक़र्रर किया गया।
मरहूम का घर: इश्क़कबाद कॉलोनी, निंबाहेड़ा — हाजी मोहम्मद यूनुस बारी वालों के यहां।

अल्लाह मरहूम की मग़फिरत फरमाए और घर वालों को सब्र अता करे। आमीन।


🕯️ इंतेकाल की तीसरी ख़बर

📍 (स्वरूप नगर)

बड़े दुख के साथ इत्तिला दी जाती है कि हाजी जाबिर व हाजी जहीर साहिब (सिक्का, ज़िला बागपत) की वालिदा साहिबा का आज सुबह तकरीबन 8:30 बजे इंतेकाल हो गया।

नमाज़-ए-जनाज़ा व तदफ़ीन कल दिन इतवार, 01 मार्च 2026, सुबह 10 बजे में अदा की जाएगी, इंशाअल्लाह।

अल्लाह मरहूमा को जन्नत में आला मुकाम अता फरमाए और औलाद को सब्र-ए-जमील दे। आमीन।


🕯️ इंतेकाल की चौथी ख़बर

📍 (ज़िला )

जनाब जमील साहब वल्द जनाब हाजी अब्दुल रहमान साहब, निवासी मोहल्ला लुहारान, क़स्बा बेहट का आज शाम साढ़े 6 से 7 बजे के दरमियान इंतेकाल हो गया।

मरहूम अपने पीछे अहलिया और तीन लड़कों समेत पूरा कुनबा छोड़ गए। वे नेकदिल, मिलनसार शख्सियत के मालिक थे और अपने वार्ड के मेंबर भी रहे।

तदफ़ीन कल दिन इतवार, 01 मार्च 2026, बाद नमाज़-ए-जौहर (2 बजे) की जाएगी।

अल्लाह मरहूम की मग़फिरत फरमाए, उनकी कब्र को नूर से भर दे और अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता करे। आमीन।


📢 एक ज़रूरी ऐलान – इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर अधूरी जानकारी की वजह से बिरादरी के लोग जनाज़े तक नहीं पहुँच पाते। “मुल्तानी समाज” तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि खबर भेजते वक़्त इन बातों का खास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत/शौहर का नाम
2️⃣ पूरा पता (मूल निवास और हाल मुकाम)
3️⃣ दफ़न का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम
4️⃣ घर के जिम्मेदार शख्स के 1–2 फ़ोन नंबर
5️⃣ (मर्द के इंतकाल की सूरत में) मरहूम का फोटो
6️⃣ इंतकाल की वजह (अगर मुनासिब हो)
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम

👉 मुकम्मल जानकारी से खबर सही तरीके से प्रकाशित होगी और बिरादरी को सहूलत मिलेगी।


📰 डिस्क्लेमर

पत्रिका में प्रकाशित लेख, समाचार, विचार, प्रेस विज्ञप्ति, विज्ञापन आदि संबंधित लेखक/विज्ञापनदाता के निजी विचार हैं। इनसे संपादक, प्रकाशक या प्रबंधन की सहमति आवश्यक रूप से अभिप्रेत नहीं है।
सामग्री की सत्यता व दावों के लिए लेखक/विज्ञापनदाता स्वयं उत्तरदायी होंगे।
किसी भी विवाद की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।


📰 सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट।

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अल्लाह तमाम मरहूमीन को जन्नतुल फिरदौस अता फरमाए और उनके घर वालों को सब्र-ए-जमील बख्शे। आमीन। 🤲

Friday, February 27, 2026

“मोहब्बत, आज़ादी और माँ-बाप की ख़ामोश चीख” घर से भागकर शादी करने के फैसलों के पीछे छूटते रिश्तों की सच्चाई

कभी-कभी एक फैसला सिर्फ दो लोगों का नहीं होता — वह पूरे परिवार की ज़िंदगी की दिशा बदल देता है।

आज की यह बात उन बेटियों और बेटों के नाम है जो घर से भागकर शादी करने का फैसला कर लेते हैं… और उन माँ-बाप के नाम भी, जो बाहर से भले सख्त दिखाई दें, लेकिन अंदर से हर रोज़ टूटते रहते हैं।


जब एक बेटी घर छोड़ती है…

जब कोई बेटी घर की चौखट पार करती है, तो वह अकेली नहीं जाती। उसके साथ जाता है घर का सुकून, बरसों की परवरिश का भरोसा, समाज में बना सम्मान और रिश्तों की नाज़ुक डोर।

माँ की आँखें दरवाज़े पर टिक जाती हैं। हर आहट पर दिल धड़कता है —
“शायद मेरी बच्ची वापस आ जाए…”

पिता बाहर से चुप रहते हैं, मगर भीतर ही भीतर शर्म, गुस्से और दर्द की आग में जलते रहते हैं।
भाई-बहन स्कूल, कॉलेज और मोहल्ले में तानों का सामना करते हैं। समाज सवाल कम पूछता है, फैसले ज़्यादा सुनाता है। रिश्तेदार सहारा देने के बजाय दूरी बना लेते हैं। हर शादी-ब्याह, हर समारोह में परिवार खुद को झुका हुआ महसूस करता है।


प्यार गुनाह नहीं… तरीका मायने रखता है

मोहब्बत इंसानी फितरत है, इसमें कोई बुराई नहीं। लेकिन मोहब्बत का तरीका, उसका वक्त और उसका असर — ये सब बहुत अहम होते हैं।

जब फैसला घरवालों को बताए बिना, उनसे रिश्ता तोड़कर लिया जाता है, तो वह सिर्फ एक शादी नहीं होती — वह भरोसे के टूटने की आवाज़ भी होती है।

भविष्य के दुष्परिणामों पर भी सोचना जरूरी है। रिश्ते सिर्फ दो दिलों के नहीं होते, दो परिवारों के भी होते हैं।


कानून, अधिकार और माँ-बाप की बेबसी

आज के दौर में जैसे ही लड़का या लड़की बालिग होते हैं, कानून उन्हें अपने फैसले लेने का पूरा अधिकार देता है। पुलिस थाने में गर्दन झुकाए खड़े पिता को अक्सर यही जवाब मिलता है —
“दोनों बालिग हैं, अपनी मर्जी से गए हैं… हम कुछ नहीं कर सकते।”

कानून कहता है — व्यक्ति की स्वतंत्रता सर्वोपरि है।
यह बात सही भी है, क्योंकि अधिकारों की रक्षा जरूरी है।

लेकिन सवाल यह भी है कि क्या स्वतंत्रता का अर्थ यह है कि परिवार की प्रतिष्ठा, भावनाएं और वर्षों का विश्वास एक पल में तोड़ दिया जाए?

कानून आँसू नहीं देखता, वह माँ की टूटी रातें नहीं गिनता। वह केवल उम्र और सहमति देखता है।
मगर एक माँ-बाप के लिए यह घटना उम्र की नहीं, रिश्ते की होती है।


अधिकार के साथ कर्तव्य भी जरूरी

यह सच है कि हर इंसान को अपनी ज़िंदगी चुनने का अधिकार है। लेकिन अधिकार के साथ कर्तव्य भी आते हैं।

स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं कि घरवालों को अंधेरे में रखकर फैसला लिया जाए।
अगर बच्चे अपने माता-पिता से संवाद करें, समझाएँ, धैर्य रखें — तो कई बार रास्ते निकल आते हैं।

माँ-बाप भी यह समझें कि बदलते समय के साथ बच्चों की भावनाएँ बदलती हैं।
और बच्चों को यह समझना होगा कि माँ-बाप की इज़्ज़त और भावनाएँ भी उतनी ही अहम हैं जितनी उनकी अपनी पसंद।


समाधान संवाद में है, टकराव में नहीं

घर से भाग जाना आख़िरी रास्ता नहीं होना चाहिए।
अगर रिश्ते की नींव सच्ची है, तो उसे मजबूती संवाद से मिलती है, छुपकर लिए गए फैसलों से नहीं।

समाज को भी बदलना होगा — तानों की जगह समझ, और फैसलों की जगह सहानुभूति देनी होगी।
तभी परिवार टूटने से बचेंगे और रिश्ते बचेंगे।


आख़िर में बस इतना —
मोहब्बत कीजिए, मगर अपने माँ-बाप की इज़्ज़त और उनके दिल का ख्याल रखते हुए।
क्योंकि दुनिया में सबसे सच्चा प्यार वही होता है, जो आपकी हर गलती के बाद भी आपके लौट आने का इंतजार करता है।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित
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ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट

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🕯️ एक ही दिन में तीन सदमात – अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी में ग़म की लहर


इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी के लिए आज का दिन बेहद अफ़सोसनाक और ग़मगीन रहा। एक ही दिन में तीन इंतेकाल की खबरों ने दिलों को झकझोर कर रख दिया। हम अल्लाह तआला की बारगाह में हाथ उठाकर दुआ करते हैं कि वह मरहूमीन के सगीरा-कबीरा गुनाहों को माफ़ फरमाए, उनकी मग़फिरत फरमाए और जन्नतुल फिरदौस में आला मक़ाम अता फरमाए। घर वालों को सब्र-ए-जमील अता हो। आमीन, सुम्मा आमीन।


🕊️ पहली खबर – गांव बिनोली, खतौली (जनपद , )

आज दिन जुमा, बा-तारीख़ 27 फ़रवरी 2026 को कस्बा खतौली, जिला मुजफ्फरनगर के गांव बिनोली निवासी जनाब असलम साहब की वाल्दा का कज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया है।

दफीने का वक़्त अभी मालूम नहीं हो सका है। जैसे ही जानकारी प्राप्त होगी, बिरादरी को इत्तिला दी जाएगी।

अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फिरत फरमाए और तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र अता करे।


🕊️ दूसरी खबर – बिज़रोल (ज़िला )

निहायत ही रंजो-ग़म के साथ यह इत्तिला दी जाती है कि आज दिन जुमा, 27 फ़रवरी 2026, तक़रीबन असर के वक़्त जनाब हाफिज रहीमुद्दीन साहब s/o हाजी नजीर साहब का इंतिक़ाल हो गया। मरहूम की उम्र तक़रीबन 65 वर्ष थी।

मरहूम की मय्यत को कल दिन शनिवार, 28 फ़रवरी 2026 को सुबह 10 बजे बिज़रोल (बागपत) के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम अहले-ईमान और अज़ीज़ो-अक़ारिब से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत कर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फिरत फरमाएं।

अल्लाह रब्बुल आलमीन मरहूम की मग़फिरत फरमाए और घर वालों को सब्र-ए-जमील अता करे। आमीन।


🕊️ तीसरी खबर – खतौली / दिल्ली

बड़े रंजो-ग़म के साथ यह खबर दी जाती है कि खतौली के मरहूम हाजी जलालुद्दीन के बेटे मरहूम शरीफ अहमद की अहलिया और मोहम्मद असलम की वाल्दा का इंतकाल दिल्ली के एक हॉस्पिटल में हो गया है।

जनाज़ा अभी खतौली नहीं पहुंचा है, इसलिए दफनाने का वक़्त मालूम नहीं हो सका है। जैसे ही जानकारी प्राप्त होगी, बिरादरी को अवगत कराया जाएगा।

मरहूमा की मग़फिरत के लिए खास दुआ की दरख्वास्त है।


📢 एक ज़रूरी ऐलान – इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर देखने में आता है कि किसी अज़ीज़ के इंतेकाल की खबर अधूरी जानकारी या देरी से पहुंचती है, जिसकी वजह से कई लोग जनाज़े में शिरकत नहीं कर पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि जब भी इंतेकाल की खबर भेजें तो इन बातों का खास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता (मूल निवासी और वर्तमान निवास)।
3️⃣ दफीने का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार शख्स के एक-दो फोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतकाल हुआ हो तो मरहूम का फोटो शामिल करें।
6️⃣ इंतकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब समझें)।
7️⃣ घर के बाकी अहल-ए-ख़ाना के नाम (भाई, बहन, औलाद आदि)।

👉 मुकम्मल जानकारी से खबर सही और भरोसेमंद बनती है, जिससे बिरादरी के लोगों को आसानी रहती है और वे वक्त पर जनाज़े में शिरकत कर पाते हैं।


🤲 दुआ के साथ

अल्लाह तआला इन तीनों मरहूमीन की मग़फिरत फरमाए, उनकी क़ब्र को रौशन करे, जन्नतुल फिरदौस में आला मुक़ाम अता करे और तमाम लवाहितीन को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।

आमीन या रब्बुल आलमीन।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट।

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Thursday, February 26, 2026

🕯️ इंतकाल की ख़बर: जनाब सलीम साहब का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल — दफ़ीना जुमे की नमाज़ के बाद

निहायत ही अफसोस और रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराने इस्लाम को इत्तला दी जाती है कि बरोज़ जुमेरात, 26 फ़रवरी 2026 को क़स्बा , ज़िला (उत्तर प्रदेश) के रहनुमा शख्सियत जनाब सलीम साहब वल्द नामालूम का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम की जुदाई से घर-ख़ानदान और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब गहरे सदमे में हैं। अल्लाह तआला मरहूम की मग़फिरत फ़रमाए, उनकी कब्र को रौशन और वसीअ फ़रमाए, जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता करे और तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।

🕌 दफ़ीना

मरहूम का दफ़ीना जुमे की नमाज़ के बाद रखा गया है। तमाम हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत कर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फिरत फ़रमाएं।

📞 मालूमात के लिए राब्ता:
मिर्ज़ा शाहनवाज़ साहब — 9720378056


📢 एक ज़रूरी ऐलान – इंतेकाल की ख़बर भेजने के लिए अहम् हिदायतें

अक्सर ऐसा होता है कि इंतकाल की खबर देर से या अधूरी पहुंचती है, जिसकी वजह से कई लोग जनाज़े में शामिल नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि खबर भेजते वक्त इन बातों का ख़ास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता (मूल निवास और वर्तमान निवास)।
3️⃣ दफ़ीने का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार शख्स के 1–2 फ़ोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतकाल हुआ हो तो मरहूम की तस्वीर।
6️⃣ इंतकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम — भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वगैरह।

👉 मुकम्मल जानकारी से खबर सही और वक़्त पर पहुंचती है, जिससे बिरादरी को आसानी रहती है।


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