Wednesday, January 7, 2026

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम🕊️ हाजी खुरशेद साहब के बड़े साहबज़ादे मुहम्मद नौशाद का इंतेकाल — बिरादरी में ग़म की लहर

निहायत ही अफ़सोस और रंजो-ग़म के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि आज 8 जनवरी 2026, दिन जुमेरात, सुबह सवेरे क़स्बा बड़ौत, ज़िला बाग़पत (उत्तर प्रदेश) में मुस्लिम मुल्तानी लोहार बढ़ई बिरादरी के जाने-माने शख़्स हाजी खुरशेद साहब (किशनपुर बिराल वाले) के बड़े बेटे मुहम्मद नौशाद का इंतेकाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।
अल्लाह तआला की यही मर्ज़ी थी।

मरहूम मुहम्मद नौशाद अपने पीछे दो बेटों, बुज़ुर्ग वालिदैन और भरे-पूरे परिवार को सदमे और ग़म की हालत में छोड़कर इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत हो गए। मरहूम एक मेहनती, शरीफ़ और ख़ुश-अख़लाक़ इंसान थे। बड़ौत में दिल्ली–सहारनपुर
मार्ग
पर उनका लघु उद्योग (बैरिंग की कोण बनाने का कारख़ाना) था, जिसके ज़रिये उन्होंने न सिर्फ़ अपने परिवार बल्कि समाज में भी अपनी अलग पहचान बनाई।

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फरमाए।
आमीन सुम्मा आमीन।

🕌 जनाज़े व तदफ़ीन की सूचना

मालूम हुआ है कि आज ही ज़ुहर की नमाज़ के बाद, बड़ौत में छपरौली चुंगी चौराहे के पास स्थित क़ब्रिस्तान में मरहूम की मय्यत को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

📞 अधिक जानकारी के लिए संपर्क

  • हाजी इलियास (मलकपुर वाले / कारख़ाने वाले) – 9411904310
  • मुहम्मद फ़रीद इलियास – 9634335217
  • मुहम्मद फिरोज़ इलियास – 9045380036

📢 एक ज़रूरी ऐलान

इंतेकाल की ख़बर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर देखा गया है कि किसी अज़ीज़ के इंतेकाल की ख़बर देर से या अधूरी पहुँचने के कारण बिरादरी के लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि इंतेकाल की ख़बर भेजते वक़्त इन बातों का ख़ास ख़याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता — पैदाइशी और मौजूदा रिहाइश।
3️⃣ तदफ़ीन का सही वक़्त और क़ब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स (एक-दो) के फ़ोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतेकाल हुआ हो तो मरहूम की फ़ोटो।
6️⃣ इंतेकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम — वालिदैन, भाई-बहन, औलाद वग़ैरह।

👉 इन तमाम मालूमात से ख़बर मुकम्मल होती है और बिरादरी तक सही व वक़्त पर जानकारी पहुँचती है।


📰 डिस्क्लेमर

पत्रिका में प्रकाशित लेख, समाचार, विचार, टिप्पणी, प्रेस विज्ञप्ति या विज्ञापन लेखक/संवाददाता/विज्ञापनदाता के निजी विचार हैं। इनसे पत्रिका के संपादक, प्रकाशक या प्रबंधन की सहमति आवश्यक रूप से अभिप्रेत नहीं होती।
प्रकाशित सामग्री की सत्यता के लिए लेखक या विज्ञापनदाता स्वयं ज़िम्मेदार होंगे। किसी भी विवाद या न्यायिक कार्यवाही की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका

“मुल्तानी समाज”

बड़ौत, ज़िला बाग़पत (उत्तर प्रदेश) से
अलीहसन मुल्तानी की ख़ास रिपोर्ट

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अल्लाह तआला मरहूम को जन्नत में आला मुक़ाम अता फरमाए और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता करे। आमीन।

Tuesday, January 6, 2026

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजेऊन मोहल्ला तलाही झिंझाना में एक और चराग़ बुझ गया, शम्मो बी का इंतकाल

निहायत ही रंज व ग़म के साथ तमाम बिरादराने इस्लाम को इत्तला दी जाती है कि आज दिन बुध, तारीख़ 07 जनवरी 2026 को शम्मो बी (उम्र तक़रीबन 70 साल), अहलिया मरहूम जनाब हाफ़िज़ अब्दुल वहीद साहब, साकिन मोहल्ला तलाही, क़स्बा झिंझाना, जनपद शामली (उत्तर प्रदेश) का अलसुबह तक़रीबन 4 बजे क़ज़ा-ए-ईलाही से इंतकाल हो गया।

मरहूमा इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत हो गईं और अपने पीछे दो बेटे—जनाब तौहीद आलम, जनाब तौफीक आलम, तथा तीन बेटियां—नसरीन, आयशा, अशमा, समेत तमाम कुनबा, ख़ानदान और अज़ीज़ो-अक़ारिब को ग़मज़दा छोड़ गई हैं।

मरहूमा का मायका क़स्बा गढ़ी पुख़्ता, जनपद शामली था, लेकिन अरसे पहले उनके मायके वाले भी क़स्बा झिंझाना के गाड़ी वाले चौराहे के पास आकर आबाद हो गए थे।
अल्लाह तआला से दुआ है कि वह मरहूमा की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनके दर्जात बुलंद करे और घर वालों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।

जनाज़े की नमाज़ आज ज़ोहर की नमाज़ के फ़ौरन बाद
मदरसा नूरिया, मोहल्ला तलाही में अदा की जाएगी,
और मय्यत को इमाम साहब वाले क़ब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।
तमाम अहले-ईमान से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

नोट: मय्यत के मुतअल्लिक़ और ज़्यादा मालूमात के लिए
जनाब हाफ़िज़ मोहम्मद हाशिम साहब वल्द मरहूम जनाब अब्दुल लतीफ़ साहब
मोबाइल: 7906309363 पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है।


एक ज़रूरी ऐलान — इंतेकाल की ख़बर भेजने से पहले अहम् हिदायतें

अक्सर देखा गया है कि किसी अज़ीज़ के इंतकाल की ख़बर देर से या अधूरी पहुँचने के सबब लोग जनाज़े तक नहीं पहुँच पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि इंतेकाल की ख़बर भेजते वक़्त इन बातों का ख़ास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम
2️⃣ पूरा पता (मूल निवास व वर्तमान निवास)
3️⃣ दफ़न का सही वक़्त और क़ब्रिस्तान का नाम
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स/शख़्सियतों के फ़ोन नंबर
5️⃣ अगर मर्द का इंतकाल हो तो मरहूम की फोटो (मुनासिब हो तो)
6️⃣ इंतकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम—भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वग़ैरह

👉 इन तमाम मालूमात से ख़बर मुकम्मल होती है और बिरादरी तक सही वक़्त पर सही जानकारी पहुँचती है।


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लोकतंत्र की मजबूती की ओर एक ज़िम्मेदार पहल | S.I.R. 2026

स्थित में S.I.R. 2026 के अंतर्गत ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन एवं परीक्षण का एक महत्वपूर्ण और सराहनीय कार्यक्रम अदब व तहज़ीब के साथ संपन्न हुआ। यह आयोजन लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पारदर्शिता, शुद्धता और नागरिक सहभागिता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम क़दम रहा।

कार्यक्रम में की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने पूरी प्रक्रिया का सूक्ष्म निरीक्षण किया और मतदाता सूची की शुद्धता, निष्पक्षता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उनके मार्गदर्शन में अधिकारियों ने आम नागरिकों को सूची देखने, समझने और अपने मताधिकार के प्रति सजग होने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी सक्रिय रूप से उपस्थित रहे। से अनिल सिंघल व राकेश गाबा, से सभासद जमील अहमद के पुत्र फैसल मिर्ज़ा, वहीं अन्य दलों से अरशद खान, मुस्तकीम अय्यूबी, जिशान, हमींद सहित कई गणमान्य लोगों ने मतदाता सूची के परीक्षण व जागरूकता अभियान में सहभागिता निभाई।

कार्यक्रम के दौरान नागरिकों को यह जानकारी दी गई कि ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी हो चुकी है। सभी नागरिकों से अपील की गई कि वे अपने नाम व विवरण अवश्य जाँच लें। यदि किसी प्रकार की त्रुटि, छूट या आपत्ति हो, तो समय रहते उसे दर्ज कराएँ, ताकि अंतिम मतदाता सूची सही, निष्पक्ष और त्रुटिरहित रूप में तैयार की जा सके।

यह पहल इस संदेश के साथ संपन्न हुई कि नागरिकों की छोटी-सी सजगता लोकतंत्र को मज़बूत बनाती है। आइए, ज़िम्मेदार नागरिक बनकर अपने मताधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करें और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करें।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित पत्रिका के लिए बेहट, जिला सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) से फैसल मिर्ज़ा की ख़ास रिपोर्ट।
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🕯️ दो घरों से उठी ख्वातिनों की मय्यत, मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी ग़म में डूबी

उत्तर प्रदेश से आई दो दर्दनाक इंतेकाल की ख़बरें, निहायत ही अफ़सोस और रंज-ओ-ग़म के साथ अहले-मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को यह दर्दनाक इत्तिला दी जाती है कि आज दिन मंगलवार, 6 जनवरी 2026 को उत्तर प्रदेश राज्य से बिरादरी की दो मुअज्ज़ज़ ख्वातिनों के इंतेकाल की ख़बर हमें सोशल मीडिया के ज़रिये हासिल हुई है।

“मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका अपना फ़र्ज़ अदा करते हुए यह ग़मगीन ख़बर पूरे अदब-ओ-तहज़ीब के साथ आप हज़रात तक पहुँचा रही है।


🖤 पहली इंतेकाल की ख़बर

मिली जानकारी के मुताबिक
एहसान-उल-हक कुल्हाड़ों वाले (पूर्व प्रधान, पेलो)
हाल निवासी: इंदिरा कॉलोनी, बेहट, जिला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश
की वालिदा मोहतर्मा का इंतकाल हो गया है।

👉 नमाज़-ए-जनाज़ा
ज़ोहर की नमाज़ के बाद, दोपहर 2:00 बजे
जामा मस्जिद, बेहट, जिला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश के सामने अदा की जाएगी।

अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फ़िरत फरमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए और तमाम अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। 🤲 आमीन


🖤 दूसरी इंतेकाल की ख़बर

إِنَّا لِلّٰهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ

मुज़फ़्फ़रनगर, उत्तर प्रदेश से प्राप्त जानकारी के अनुसार
मोहतर्म जनाब इदरीस साहब की वालिदा मोहतर्मा का इंतकाल हो गया है।

👉 नमाज़-ए-जनाज़ा व तद्फ़ीन
असर की नमाज़ के बाद नमाज़-ए-जनाज़ा अदा की जाएगी और उसके फौरन बाद तद्फ़ीन अमल में लाई जाएगी।

अल्लाह तआला मरहूमा को अपनी रहमत के साए में जन्नत-उल-फिरदौस में आला से आला मक़ाम अता फरमाए और ग़मज़दा अहले-ख़ाना को सब्र-ओ-सुकून नसीब फरमाए। 🤲 आमीन


🤲 अहले-बिरादरी से खास गुज़ारिश

अहले-मुज़फ़्फ़रनगर, रिश्तेदारों, दोस्तों और तमाम अहले-बिरादरी से पूरे अदब के साथ इल्तिजा है कि ज़्यादा से ज़्यादा तादाद में नमाज़-ए-जनाज़ा में शरीक होकर मरहूमात की मग़फ़िरत के लिए दुआ फरमाएं।
आपकी मौजूदगी अहले-ख़ाना के लिए तस्कीन-ए-क़ल्ब का सबब बनेगी।


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इंतेकाल की ख़बर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर देखा गया है कि अधूरी या देर से मिली जानकारी की वजह से बिरादरी के लोग जनाज़े तक नहीं पहुँच पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने-इस्लाम से अदब के साथ गुज़ारिश करती है कि इंतेकाल की ख़बर भेजते वक़्त नीचे दी गई जानकारियाँ ज़रूर शामिल करें—

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम तथा वल्दियत या शौहर का नाम
2️⃣ मुकम्मल पता (स्थायी एवं वर्तमान निवास)
3️⃣ दफीने का सही वक़्त और क़ब्रिस्तान का नाम
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स के एक-दो मोबाइल नंबर
5️⃣ अगर मर्द का इंतेकाल हुआ हो तो मरहूम की फ़ोटो
6️⃣ इंतेकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)
7️⃣ अहले-ख़ाना के अन्य नाम (भाई, बहन, औलाद आदि)

👉 इन तमाम जानकारियों से ख़बर मुकम्मल होती है और बिरादरी तक सही वक़्त पर सही सूचना पहुँचती है।


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अल्लाह तआला हम सबको ईमान की हिफ़ाज़त के साथ ख़ातिमा बिल-ख़ैर अता फरमाए। आमीन 🤲

Wednesday, December 31, 2025

यातायात के नियम: डर से नहीं, ज़िम्मेदारी और इंसानियत से

क्या यातायात के नियमों का पालन सिर्फ़ चालान या कार्रवाई के डर से ही होना चाहिए?

या फिर हमें यह समझना चाहिए कि ये नियम हमारी और हमारे अपनों की हिफ़ाज़त के लिए बनाए गए हैं?

हक़ीक़त यह है कि ट्रैफिक पुलिस कोहरा हो या सर्दी, गर्मी हो या बरसात—हर हाल में सड़कों पर खड़ी रहती है। उनका मक़सद हमें रोकना नहीं, बल्कि यह यक़ीन दिलाना होता है कि हम सलामत अपने घर, अपने बीवी-बच्चों और अपने बुज़ुर्गों तक पहुंच सकें। अफ़सोस की बात यह है कि हम में से बहुत-से लोग उनकी मौजूदगी को नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

आज शहरों में यह एक आम मंज़र बन गया है कि कुछ नौजवान अपनी बुलेट मोटरसाइकिलों पर मोडिफ़ाइड साइलेंसर लगाकर गोली-नुमा आवाज़ें निकालते हुए ख़ुद को हीरो समझते हैं। मगर क्या उन्होंने कभी यह सोचा है कि सड़क पर चल रहा कोई बुज़ुर्ग, कोई बच्चा या कोई दिल का मरीज़ उस आवाज़ से घबरा कर अपनी जान तक गंवा सकता है?
हीरोगिरी शोर मचाने में नहीं, बल्कि दूसरों की जान की क़द्र करने में है।

इस्लाम हमें सिखाता है कि किसी एक इंसान की जान बचाना पूरी इंसानियत को बचाने के बराबर है। फिर हम कैसे यह सोच सकते हैं कि तेज़ रफ्तार, लापरवाही या नियमों की अनदेखी कोई मामूली बात है?

अक्सर जल्दबाज़ी में लोग ट्रैफिक नियमों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं—रेड सिग्नल तोड़ देते हैं, सीट बेल्ट नहीं लगाते, हेलमेट पहनने में कोताही करते हैं। नतीजा यह होता है कि एक छोटी-सी ग़लती ज़िंदगी भर का पछतावा बन जाती है।
आंकड़े साफ़ बताते हैं कि ज़्यादातर सड़क हादसे तेज़ रफ्तार और ग़ैर-ज़िम्मेदार ड्राइविंग की वजह से होते हैं।

अगर हम चार पहिया वाहन चला रहे हैं तो सीट बेल्ट लगाना हमारी ज़िम्मेदारी है।
अगर बाइक चला रहे हैं तो हेलमेट पहनना सिर्फ़ क़ानून नहीं, बल्कि हमारी हिफ़ाज़त का ज़रिया है।
स्पीड ब्रेकर हो या मोड़—रफ्तार कम करना, हॉर्न देकर गाड़ी मोड़ना और सही लेन में चलना—ये सब बातें हमें और दूसरों को हादसों से बचाती हैं।

याद रखिए, यातायात के नियम सरकार या ट्रैफिक पुलिस के फायदे के लिए नहीं बने हैं। ये नियम हमारी सेफ्टी, हमारे घर वालों की ख़ुशी और हमारी ज़िंदगी की सलामती के लिए हैं।
ज़िंदगी बहुत छोटी है—यह कब, कहां और कैसे ख़त्म हो जाए, कोई नहीं जानता। इसलिए अक़्लमंदी इसी में है कि हम खुद भी महफूज़ रहें और दूसरों को भी महफूज़ रखें।

आइए, आज यह अहद करें कि हम यातायात नियमों का पालन डर से नहीं, बल्कि
ज़िम्मेदारी, इंसानियत और दीन की तालीम के तहत करेंगे।

क्योंकि असली समझदारी वही है जो
हमें भी बचाए और दूसरों की जान भी सलामत रखे।


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Monday, December 29, 2025

🕯️ इंतेकाल की दर्दनाक खबर ख़तौली के सदर जनाब नसीम साहब के छोटे भाई जनाब शमीम साहब उर्फ़ जज साहब का इंतेकाल

निहायत ही रंजो-ग़म के साथ तमाम बिरादराने इस्लाम को यह इत्तला दी जाती है कि आज दिन पीर, बा-तारीख़ 29 दिसंबर 2025 को ख़तौली के सदर जनाब नसीम साहब के छोटे भाई जनाब शमीम साहब उर्फ़ जज साहब वल्द जनाब मोहम्मद हसन (उम्र तक़रीबन 50 साल) बाशिंदे महलकी वाले, हाल निवासी बुढ़ाना रोड, ख़तौली, जिला मुज़फ़्फ़रनगर (उ.प्र.) का क़ज़ा-ए-ईलाही से इंतेकाल हो गया।

मरहूम काफ़ी अरसे से बड़ी बीमारी में मुब्तिला थे और आख़िरकार अल्लाह तआला की मर्ज़ी के आगे सर-ए-तस्लीम ख़म करते हुए इस फ़ानी दुनिया से हमेशा-हमेशा के लिए रुख़्सत हो गए।
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम अपने पीछे अपनी अहलिया, एक बेटे और दो बेटियों समेत भरा-पूरा परिवार, खानदान, रिश्तेदार और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को ग़मज़दा छोड़ गए हैं। इस दुख की घड़ी में पूरा इलाका और बिरादरी शोकाकुल है।

🕊️ जनाज़े की जानकारी

मरहूम की मय्यत को कल दिन मंगल, बा-तारीख़ 30 दिसंबर 2025 को सुबह 11 बजे सपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम अहबाब से गुज़ारिश है कि ज़्यादा से ज़्यादा तादाद में शरीक होकर सवाब-ए-दारैन हासिल करें और मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत फरमाएँ।

☎️ राब्ते की जानकारी

मय्यत के सिलसिले में किसी भी किस्म की मालूमात के लिए मरहूम के बड़े भाई एवं सदर ख़तौली
जनाब नसीम साहब
📞 मोबाइल: 9897206187
पर राब्ता कायम किया जा सकता है।

🤲 दुआ

अल्लाह तआला मरहूम जनाब शमीम साहब की मग़फ़िरत फरमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए, और घरवालों को इस अज़ीम सदमे को बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए।
आमीन या रब्बुल आलमीन।


📢 एक ज़रूरी ऐलान – इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर देखने में आता है कि किसी अज़ीज़ के इंतेकाल की खबर बिरादरी तक देर से या अधूरी जानकारी के साथ पहुँचती है, जिसकी वजह से लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से अदब के साथ गुज़ारिश करती है कि जब भी इंतेकाल की खबर भेजें, तो इन बातों का ख़ास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता (स्थायी और वर्तमान निवास)।
3️⃣ दफ़न का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार एक-दो अफ़राद के फ़ोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतेकाल हुआ हो तो मरहूम की साफ़ फोटो।
6️⃣ इंतेकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम — जैसे माँ-बाप, भाई-बहन, औलाद वग़ैरह।

👉 इन तमाम मालूमात से खबर मुकम्मल होगी और बिरादरी तक सही व वक़्त पर जानकारी पहुँच सकेगी।


📰 डिस्क्लेमर

पत्रिका में प्रकाशित किसी भी प्रकार का लेख, समाचार, संपादकीय, विचार, टिप्पणी, प्रेस विज्ञप्ति, विज्ञापन या अन्य सामग्री लेखक, संवाददाता अथवा विज्ञापनदाता के निजी विचार हैं।
इनसे पत्रिका के संपादक, प्रकाशक, प्रबंधन या संस्थान की सहमति या समर्थन आवश्यक रूप से अभिप्रेत नहीं है।

प्रकाशित सामग्री की सत्यता एवं किसी भी प्रकार के दावे के लिए संबंधित लेखक या विज्ञापनदाता स्वयं उत्तरदायी होंगे।
पत्रिका एवं प्रबंधन किसी भी प्रकार की कानूनी, सामाजिक या वित्तीय जिम्मेदारी से पूर्णतः मुक्त रहेंगे।

किसी भी विवाद या न्यायिक कार्यवाही की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
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Sunday, December 28, 2025

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन हाजी सलीमुद्दीन साहब का इंतेकाल — बिरादरी में ग़म की लहर, मग़फिरत व सब्र की दुआ

निहायत ही अफ़सोस और रंजो-ग़म के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि आज दिन इतवार, 28 दिसंबर 2025 की शाम तक़रीबन 6–6:30 बजे के दरमियान हाजी सलीमुद्दीन साहब (उम्र लगभग 80 वर्ष), निवासी सारंग रोड, का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया।

अल्लाह तआला की यही मर्ज़ी थी।

मरहूम, गुलाब ठेकेदार (गुहाना), पानीपत वालों के बड़े भाई थे और मूल रूप से (जनपद बागपत, उ.प्र.) के निवासी थे। अपने पीछे एक पुत्र, दो पुत्रियाँ, अहल-ए-ख़ाना, ख़ानदान, कुनबा और तमाम रिश्तेदारों को रोता-बिलखता छोड़कर यह फ़ानी दुनिया हमेशा-हमेशा के लिए छोड़ गए।
हम दुआगो हैं कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त मरहूम की मग़फिरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए और तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।

तदफ़ीन (दफ़न) की जानकारी

मरहूम को कल दिन पीर, 29 दिसंबर 2025 को दोपहर 12 बजे सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

नोट: मरहूम के बारे में और अधिक मालूमात के लिए उनके भतीजे बिलाल ख़ान (वल्द जनाब गुलाब ठेकेदार साहब) से मोबाईल नंबर 92554-26000 पर संपर्क किया जा सकता है।


एक ज़रूरी ऐलान — इंतेकाल की खबर भेजने से पहले अहम् हिदायतें

अक्सर देखने में आता है कि इंतेकाल की खबर देर से या अधूरी पहुँचने के कारण बिरादरी के लोग जनाज़े तक नहीं पहुँच पाते। इस कमी को दूर करने के लिए तमाम बिरादराने इस्लाम से अदब के साथ गुज़ारिश करती है कि जब भी किसी अज़ीज़ के इंतेकाल की खबर भेजें, तो निम्नलिखित बातों का ख़ास ख़याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता (मूल निवास और वर्तमान निवास)।
3️⃣ दफ़न का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स (एक-दो) के फ़ोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतेकाल हो, तो मरहूम की फोटो (अगर मुनासिब हो)।
6️⃣ इंतेकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम — जैसे भाई-बहन, वालिदैन, औलाद वग़ैरह।

👉 इन तमाम जानकारियों से खबर मुकम्मल होती है और बिरादरी तक सही-सही मालूमात वक़्त पर पहुँचती है।


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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत; देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित— पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट
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