Saturday, January 10, 2026

ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ की रोशन मिसाल: मुल्तानी सोसाइटी का कंबल तक़सीम प्रोग्राम, खतौली में इंसानियत की गर्माहट

आज दिन शनिचर, 10 जनवरी 2026 को उत्तर प्रदेश के ज़िला मुज़फ्फरनगर के क़स्बा खतौली, जिसे मुल्तानी बिरादरी की राजधानी कहा जाता है, में मुल्तानी सोसाइटी की जानिब से ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ की एक बेहतरीन और क़ाबिले-तारीफ़ मिसाल पेश की गई। कड़ाके की ठंड के बीच ज़रूरतमंदों की राहत के लिए कंबल तक़सीम प्रोग्राम का आयोजन किया गया, जिसमें बिरादरी की कई अज़ीम और मोअज़्ज़ज़ शख़्सियतों ने शिरकत फरमाई।

इस इंसानी और समाजी मुहिम में बुढ़ाना से वरिष्ठ समाजसेविका मोहतरमा यास्मीन मिर्ज़ा, बुलंदशहर से सईद अहमद, सरधना से मोहतरमा आयशा परवीन और मिर्ज़ा नौशाद (फलावदा वाले), शाहनवाज़ मुल्तानी के साथ-साथ हाजी नसीम, ज़मीरउद्दीन मिर्ज़ा, अफ़ज़ाल मिर्ज़ा (कुशावली वाले), आशु मिर्ज़ा, इरफ़ान अली निज़ामी, मोहम्मद याक़ूब मिर्ज़ा, मोहम्मद मूसा मुल्तानी सहित कई जिम्मेदार और समाज-सेवी हज़रात मौजूद रहे।

मोहतरमा यास्मीन मिर्ज़ा ने अपने ख़िताब में कहा कि बिरादरी की ताक़त आपसी एकता, मोहब्बत और ख़िदमत में है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि जिस तरह कुनबा और ख़ानदान हमें जोड़कर रखते हैं, उसी तरह बिरादरी का आपस में जुड़े रहना भी समाज की तरक़्क़ी और भलाई के लिए बेहद ज़रूरी है।

यह प्रोग्राम न सिर्फ़ ठंड से राहत देने का ज़रिया बना, बल्कि समाज में इंसानियत, हमदर्दी और भाईचारे के पैग़ाम को भी मज़बूती से आगे बढ़ाने वाला साबित हुआ। मुल्तानी सोसाइटी की यह कोशिश क़ाबिले-सिताइश है और उम्मीद की जाती है कि आने वाले वक़्त में भी ऐसी समाजी और फ़लाही गतिविधियाँ जारी रहेंगी।


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इनसे पत्रिका के संपादक, प्रकाशक, प्रबंधन या संस्थान की सहमति या समर्थन आवश्यक रूप से अभिप्रेत नहीं है।

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पत्रिका एवं प्रबंधन इस संबंध में किसी भी प्रकार की कानूनी, सामाजिक या वित्तीय जिम्मेदारी से पूर्णतः मुक्त रहेंगे।

किसी भी विवाद, शिकायत या न्यायिक कार्यवाही की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।


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✍️ ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट

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🌙 मुल्तानी अहंगरान सेवा सोसाइटी भीलवाड़ा की नेक पहल: इज्तेमाई निकाह 10 मई 2026 को इंशाअल्लाह

तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार व बढ़ई बिरादरी के लिए यह खबर बेइंतहा खुशी और मसarrत का पैग़ाम लेकर आई है। बिरादरी की जिम्मेदार और समाजसेवी तंजीम मुल्तानी अहंगरान सेवा सोसाइटी, भीलवाड़ा की जानिब से एक नेक और काबिले-तारीफ क़दम उठाते हुए इज्तेमाई निकाह की तारीख मुकर्रर की गई है।

तंजीम की ओर से एलान किया गया है कि यह इज्तेमाई शादी 10 मई 2026, बरोज़ इतवार को अदा की जाएगी। इंशाअल्लाह, इस मुबारक मौके पर कई जोड़े सुन्नत के मुताबिक़ निकाह के पाक रिश्ते में बंधेंगे।

मुल्तानी अहंगरान सेवा सोसाइटी भीलवाड़ा तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार व बढ़ई बिरादरी के भाइयों से अदब के साथ गुज़ारिश करती है कि जिन घरों में शादी के लायक लड़का या लड़की के रिश्ते तय हो चुके हों, वे इस इज्तेमाई निकाह में ज़रूर शिरकत फरमाएं और इस नेक कार-ए-ख़ैर का हिस्सा बनें।

इज्तेमाई निकाह जैसी पहल न सिर्फ़ समाज में सादगी, भाईचारे और एकजुटता को बढ़ावा देती है, बल्कि फिज़ूलखर्ची और गैर-ज़रूरी रस्मों से बचने का पैग़ाम भी देती है। यह क़दम आने वाली नस्लों के लिए एक मिसाली नज़ीर साबित होगा।

इस मुबारक आयोजन को कामयाब बनाने के लिए समस्त पंच भीलवाड़ा, राजस्थान की जानिब से पूरी लगन और खिदमत का यक़ीन दिलाया गया है।


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✍️ हाजी मोहम्मद इक़बाल क़ाज़ी की खास रिपोर्ट
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नोट:- ख़बर में दिखाएं गए सभी फ़ोटो काल्पनिक है।



Friday, January 9, 2026

ग़मगीन ख़बर | इंतेकाल | इक़बाल साहब का इंतेकाल — बिरादरी के लिए एक दुखद घड़ी

निहायत ही अफ़सोस और रंजो-ग़म के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को इत्तिला दी जाती है कि गांव भूड़, तहसील खतौली, जिला मुज़फ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) में आज दिन जुमा, तारीख़ 09 जनवरी 2026 को दोपहर जनाब इक़बाल साहब (मुजाहिदपुर वालों) का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया। मरहूम काफ़ी अरसे से बीमारी से जूझ रहे थे।

इस दुखद ख़बर से पूरे इलाक़े और बिरादरी में ग़म की लहर दौड़ गई है।

मरहूम की जनाज़े की नमाज़ आज ईशा की नमाज़ के बाद अदा की जाएगी, इंशाअल्लाह।
जनाज़े की नमाज़: भूड़ बड़ी मस्जिद के अहाते में
तदफ़ीन: चूना भट्टी, जानसठ रोड स्थित क़ब्रिस्तान में की जाएगी।

हम तमाम अहल-ए-ईमान से गुज़ारिश करते हैं कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएँ और उनके अहल-ए-ख़ाना के सब्र-ओ-हिम्मत के लिए ख़ुसूसी दुआ करें।
अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए और उनके लवाहिक़ीन को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।

नोट: मरहूम के बारे में अधिक जानकारी के लिए हाजी जाहिद साहब (मुज़फ्फरनगर) से संपर्क किया जा सकता है — मोबाइल: 9258491478


एक ज़रूरी ऐलान — इंतेकाल की ख़बर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर देखा जाता है कि किसी अज़ीज़ के इंतेकाल की सूचना देर से या अधूरी पहुँचने के कारण लोग जनाज़े तक नहीं पहुँच पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि इंतेकाल की ख़बर भेजते वक़्त निम्नलिखित बातों का ख़ास ख़याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम तथा वल्दियत/शौहर का नाम
2️⃣ पूरा पता (मूल निवास एवं वर्तमान निवास)
3️⃣ तदफ़ीन का सही वक़्त और क़ब्रिस्तान का नाम
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स (एक-दो) के संपर्क नंबर
5️⃣ यदि मर्द का इंतेकाल हुआ हो तो मरहूम की तस्वीर (यदि मुनासिब हो)
6️⃣ इंतेकाल की वजह (यदि बताना मुनासिब हो)
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना का संक्षिप्त विवरण (भाई, बहन, वालिदैन, औलाद आदि)

👉 इन तमाम जानकारियों से ख़बर मुकम्मल होती है और बिरादरी तक सही वक़्त पर सही जानकारी पहुँचती है।


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मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश से — हाजी जाहिद की ख़ास रिपोर्ट

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Wednesday, January 7, 2026

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम🕊️ हाजी खुरशेद साहब के बड़े साहबज़ादे मुहम्मद नौशाद का इंतेकाल — बिरादरी में ग़म की लहर

निहायत ही अफ़सोस और रंजो-ग़म के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि आज 8 जनवरी 2026, दिन जुमेरात, सुबह सवेरे क़स्बा बड़ौत, ज़िला बाग़पत (उत्तर प्रदेश) में मुस्लिम मुल्तानी लोहार बढ़ई बिरादरी के जाने-माने शख़्स हाजी खुरशेद साहब (किशनपुर बिराल वाले) के बड़े बेटे मुहम्मद नौशाद का इंतेकाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।
अल्लाह तआला की यही मर्ज़ी थी।

मरहूम मुहम्मद नौशाद अपने पीछे दो बेटों, बुज़ुर्ग वालिदैन और भरे-पूरे परिवार को सदमे और ग़म की हालत में छोड़कर इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत हो गए। मरहूम एक मेहनती, शरीफ़ और ख़ुश-अख़लाक़ इंसान थे। बड़ौत में दिल्ली–सहारनपुर
मार्ग
पर उनका लघु उद्योग (बैरिंग की कोण बनाने का कारख़ाना) था, जिसके ज़रिये उन्होंने न सिर्फ़ अपने परिवार बल्कि समाज में भी अपनी अलग पहचान बनाई।

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फरमाए।
आमीन सुम्मा आमीन।

🕌 जनाज़े व तदफ़ीन की सूचना

मालूम हुआ है कि आज ही ज़ुहर की नमाज़ के बाद, बड़ौत में छपरौली चुंगी चौराहे के पास स्थित क़ब्रिस्तान में मरहूम की मय्यत को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

📞 अधिक जानकारी के लिए संपर्क

  • हाजी इलियास (मलकपुर वाले / कारख़ाने वाले) – 9411904310
  • मुहम्मद फ़रीद इलियास – 9634335217
  • मुहम्मद फिरोज़ इलियास – 9045380036

📢 एक ज़रूरी ऐलान

इंतेकाल की ख़बर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर देखा गया है कि किसी अज़ीज़ के इंतेकाल की ख़बर देर से या अधूरी पहुँचने के कारण बिरादरी के लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि इंतेकाल की ख़बर भेजते वक़्त इन बातों का ख़ास ख़याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता — पैदाइशी और मौजूदा रिहाइश।
3️⃣ तदफ़ीन का सही वक़्त और क़ब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स (एक-दो) के फ़ोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतेकाल हुआ हो तो मरहूम की फ़ोटो।
6️⃣ इंतेकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम — वालिदैन, भाई-बहन, औलाद वग़ैरह।

👉 इन तमाम मालूमात से ख़बर मुकम्मल होती है और बिरादरी तक सही व वक़्त पर जानकारी पहुँचती है।


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पत्रिका में प्रकाशित लेख, समाचार, विचार, टिप्पणी, प्रेस विज्ञप्ति या विज्ञापन लेखक/संवाददाता/विज्ञापनदाता के निजी विचार हैं। इनसे पत्रिका के संपादक, प्रकाशक या प्रबंधन की सहमति आवश्यक रूप से अभिप्रेत नहीं होती।
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“मुल्तानी समाज”

बड़ौत, ज़िला बाग़पत (उत्तर प्रदेश) से
अलीहसन मुल्तानी की ख़ास रिपोर्ट

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अल्लाह तआला मरहूम को जन्नत में आला मुक़ाम अता फरमाए और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता करे। आमीन।

Tuesday, January 6, 2026

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजेऊन मोहल्ला तलाही झिंझाना में एक और चराग़ बुझ गया, शम्मो बी का इंतकाल

निहायत ही रंज व ग़म के साथ तमाम बिरादराने इस्लाम को इत्तला दी जाती है कि आज दिन बुध, तारीख़ 07 जनवरी 2026 को शम्मो बी (उम्र तक़रीबन 70 साल), अहलिया मरहूम जनाब हाफ़िज़ अब्दुल वहीद साहब, साकिन मोहल्ला तलाही, क़स्बा झिंझाना, जनपद शामली (उत्तर प्रदेश) का अलसुबह तक़रीबन 4 बजे क़ज़ा-ए-ईलाही से इंतकाल हो गया।

मरहूमा इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत हो गईं और अपने पीछे दो बेटे—जनाब तौहीद आलम, जनाब तौफीक आलम, तथा तीन बेटियां—नसरीन, आयशा, अशमा, समेत तमाम कुनबा, ख़ानदान और अज़ीज़ो-अक़ारिब को ग़मज़दा छोड़ गई हैं।

मरहूमा का मायका क़स्बा गढ़ी पुख़्ता, जनपद शामली था, लेकिन अरसे पहले उनके मायके वाले भी क़स्बा झिंझाना के गाड़ी वाले चौराहे के पास आकर आबाद हो गए थे।
अल्लाह तआला से दुआ है कि वह मरहूमा की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनके दर्जात बुलंद करे और घर वालों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।

जनाज़े की नमाज़ आज ज़ोहर की नमाज़ के फ़ौरन बाद
मदरसा नूरिया, मोहल्ला तलाही में अदा की जाएगी,
और मय्यत को इमाम साहब वाले क़ब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।
तमाम अहले-ईमान से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

नोट: मय्यत के मुतअल्लिक़ और ज़्यादा मालूमात के लिए
जनाब हाफ़िज़ मोहम्मद हाशिम साहब वल्द मरहूम जनाब अब्दुल लतीफ़ साहब
मोबाइल: 7906309363 पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है।


एक ज़रूरी ऐलान — इंतेकाल की ख़बर भेजने से पहले अहम् हिदायतें

अक्सर देखा गया है कि किसी अज़ीज़ के इंतकाल की ख़बर देर से या अधूरी पहुँचने के सबब लोग जनाज़े तक नहीं पहुँच पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि इंतेकाल की ख़बर भेजते वक़्त इन बातों का ख़ास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम
2️⃣ पूरा पता (मूल निवास व वर्तमान निवास)
3️⃣ दफ़न का सही वक़्त और क़ब्रिस्तान का नाम
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स/शख़्सियतों के फ़ोन नंबर
5️⃣ अगर मर्द का इंतकाल हो तो मरहूम की फोटो (मुनासिब हो तो)
6️⃣ इंतकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम—भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वग़ैरह

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लोकतंत्र की मजबूती की ओर एक ज़िम्मेदार पहल | S.I.R. 2026

स्थित में S.I.R. 2026 के अंतर्गत ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन एवं परीक्षण का एक महत्वपूर्ण और सराहनीय कार्यक्रम अदब व तहज़ीब के साथ संपन्न हुआ। यह आयोजन लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पारदर्शिता, शुद्धता और नागरिक सहभागिता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम क़दम रहा।

कार्यक्रम में की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने पूरी प्रक्रिया का सूक्ष्म निरीक्षण किया और मतदाता सूची की शुद्धता, निष्पक्षता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उनके मार्गदर्शन में अधिकारियों ने आम नागरिकों को सूची देखने, समझने और अपने मताधिकार के प्रति सजग होने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी सक्रिय रूप से उपस्थित रहे। से अनिल सिंघल व राकेश गाबा, से सभासद जमील अहमद के पुत्र फैसल मिर्ज़ा, वहीं अन्य दलों से अरशद खान, मुस्तकीम अय्यूबी, जिशान, हमींद सहित कई गणमान्य लोगों ने मतदाता सूची के परीक्षण व जागरूकता अभियान में सहभागिता निभाई।

कार्यक्रम के दौरान नागरिकों को यह जानकारी दी गई कि ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी हो चुकी है। सभी नागरिकों से अपील की गई कि वे अपने नाम व विवरण अवश्य जाँच लें। यदि किसी प्रकार की त्रुटि, छूट या आपत्ति हो, तो समय रहते उसे दर्ज कराएँ, ताकि अंतिम मतदाता सूची सही, निष्पक्ष और त्रुटिरहित रूप में तैयार की जा सके।

यह पहल इस संदेश के साथ संपन्न हुई कि नागरिकों की छोटी-सी सजगता लोकतंत्र को मज़बूत बनाती है। आइए, ज़िम्मेदार नागरिक बनकर अपने मताधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करें और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करें।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित पत्रिका के लिए बेहट, जिला सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) से फैसल मिर्ज़ा की ख़ास रिपोर्ट।
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🕯️ दो घरों से उठी ख्वातिनों की मय्यत, मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी ग़म में डूबी

उत्तर प्रदेश से आई दो दर्दनाक इंतेकाल की ख़बरें, निहायत ही अफ़सोस और रंज-ओ-ग़म के साथ अहले-मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को यह दर्दनाक इत्तिला दी जाती है कि आज दिन मंगलवार, 6 जनवरी 2026 को उत्तर प्रदेश राज्य से बिरादरी की दो मुअज्ज़ज़ ख्वातिनों के इंतेकाल की ख़बर हमें सोशल मीडिया के ज़रिये हासिल हुई है।

“मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका अपना फ़र्ज़ अदा करते हुए यह ग़मगीन ख़बर पूरे अदब-ओ-तहज़ीब के साथ आप हज़रात तक पहुँचा रही है।


🖤 पहली इंतेकाल की ख़बर

मिली जानकारी के मुताबिक
एहसान-उल-हक कुल्हाड़ों वाले (पूर्व प्रधान, पेलो)
हाल निवासी: इंदिरा कॉलोनी, बेहट, जिला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश
की वालिदा मोहतर्मा का इंतकाल हो गया है।

👉 नमाज़-ए-जनाज़ा
ज़ोहर की नमाज़ के बाद, दोपहर 2:00 बजे
जामा मस्जिद, बेहट, जिला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश के सामने अदा की जाएगी।

अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फ़िरत फरमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए और तमाम अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। 🤲 आमीन


🖤 दूसरी इंतेकाल की ख़बर

إِنَّا لِلّٰهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ

मुज़फ़्फ़रनगर, उत्तर प्रदेश से प्राप्त जानकारी के अनुसार
मोहतर्म जनाब इदरीस साहब की वालिदा मोहतर्मा का इंतकाल हो गया है।

👉 नमाज़-ए-जनाज़ा व तद्फ़ीन
असर की नमाज़ के बाद नमाज़-ए-जनाज़ा अदा की जाएगी और उसके फौरन बाद तद्फ़ीन अमल में लाई जाएगी।

अल्लाह तआला मरहूमा को अपनी रहमत के साए में जन्नत-उल-फिरदौस में आला से आला मक़ाम अता फरमाए और ग़मज़दा अहले-ख़ाना को सब्र-ओ-सुकून नसीब फरमाए। 🤲 आमीन


🤲 अहले-बिरादरी से खास गुज़ारिश

अहले-मुज़फ़्फ़रनगर, रिश्तेदारों, दोस्तों और तमाम अहले-बिरादरी से पूरे अदब के साथ इल्तिजा है कि ज़्यादा से ज़्यादा तादाद में नमाज़-ए-जनाज़ा में शरीक होकर मरहूमात की मग़फ़िरत के लिए दुआ फरमाएं।
आपकी मौजूदगी अहले-ख़ाना के लिए तस्कीन-ए-क़ल्ब का सबब बनेगी।


📢 एक ज़रूरी ऐलान

इंतेकाल की ख़बर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर देखा गया है कि अधूरी या देर से मिली जानकारी की वजह से बिरादरी के लोग जनाज़े तक नहीं पहुँच पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने-इस्लाम से अदब के साथ गुज़ारिश करती है कि इंतेकाल की ख़बर भेजते वक़्त नीचे दी गई जानकारियाँ ज़रूर शामिल करें—

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम तथा वल्दियत या शौहर का नाम
2️⃣ मुकम्मल पता (स्थायी एवं वर्तमान निवास)
3️⃣ दफीने का सही वक़्त और क़ब्रिस्तान का नाम
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स के एक-दो मोबाइल नंबर
5️⃣ अगर मर्द का इंतेकाल हुआ हो तो मरहूम की फ़ोटो
6️⃣ इंतेकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)
7️⃣ अहले-ख़ाना के अन्य नाम (भाई, बहन, औलाद आदि)

👉 इन तमाम जानकारियों से ख़बर मुकम्मल होती है और बिरादरी तक सही वक़्त पर सही सूचना पहुँचती है।


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अल्लाह तआला हम सबको ईमान की हिफ़ाज़त के साथ ख़ातिमा बिल-ख़ैर अता फरमाए। आमीन 🤲