Monday, October 26, 2026

रुड़की में वलीद रिहान और ज़ैनब रज़ा की दावत-ए-वलीमा की पुरवक़ार तक़रीब, मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट के फ़ाउंडर ज़मीर आलम समेत बिरादरी की मुमताज़ शख़्सियात ने की शिरकत

हाजी नूर मोहम्मद साहब स्टेयरिंग वाले, जफ़र मिर्ज़ा, हाजी नसीम अहमद, वसीम अहमद, इनाम अहमद और इक़बाल डीलर समेत बिरादरी की जानी-मानी हस्तियों ने दूल्हा-दुल्हन को दी मुबारकबाद, ख़ुशहाल ज़िंदगी के लिए कीं नेक दुआएँ

रुड़की, उत्तराखंड | मुल्तानी समाज | उत्तराखंड डेस्क

अली हसन मुल्तानी की ख़ास रिपोर्ट

रुड़की। मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी में शादी-ब्याह की तक़रीबात आपसी मोहब्बत, भाईचारे, ख़ुलूस और बिरादराना इत्तेहाद की ख़ूबसूरत मिसाल पेश करती हैं। इसी सिलसिले में रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड के रुड़की में वलीद रिहान और ज़ैनब रज़ा की दावत-ए-वलीमा की पुरमसर्रत तक़रीब का एहतिमाम किया गया। इस मुबारक मौक़े पर बिरादरी की जानी-मानी शख़्सियात, बुज़ुर्गों और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब ने शिरकत करके दोनों ख़ानदानों को दिली मुबारकबाद पेश की और नवदंपति की ख़ुशहाल ज़िंदगी के लिए नेक दुआएँ कीं।

शशी गार्डन (राज़ महल होटल) में सजी वलीमे की महफ़िल

शादी के दावतनामे के मुताबिक, दावत-ए-वलीमा की तक़रीब शशी गार्डन (राज़ महल होटल), देहरादून रोड, रुड़की, उत्तराखंड में आयोजित की गई। दावतनामे में खाने का वक़्त शाम 7 बजे दर्ज था।

इस ख़ुशनुमा मौक़े पर रिश्तेदारों, दोस्तों और बिरादरी के लोगों ने शिरकत करके दूल्हा-दुल्हन और उनके अहल-ए-ख़ाना की ख़ुशियों में हिस्सा लिया। तक़रीब के दौरान आपसी मोहब्बत, अपनाइयत और भाईचारे का माहौल रहा। हाज़िरीन ने नवदंपति को मुबारकबाद पेश करते हुए उनके मुस्तक़बिल के लिए नेक ख़्वाहिशात का इज़हार किया।

ज़मीर आलम समेत बिरादरी की अज़ीम शख़्सियात की शिरकत

इस पुरवक़ार तक़रीब में मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट के फ़ाउंडर ज़मीर आलम, खजांची हाजी नूर मोहम्मद साहब स्टेयरिंग वाले, जफ़र मिर्ज़ा, हाजी नसीम अहमद, वसीम अहमद, इनाम अहमद और इक़बाल डीलर समेत बिरादरी की जानी-मानी हस्तियाँ मौजूद रहीं।

तमाम हज़रात ने दूल्हा-दुल्हन को शादी की दिली मुबारकबाद पेश की और उनके लिए ख़ैर-ओ-बरकत की दुआएँ कीं। बिरादरी की इन मुमताज़ शख़्सियात की मौजूदगी ने तक़रीब को और भी ख़ुशनुमा बनाया।

ऐसी सामाजिक तक़रीबात बिरादरी के लोगों को एक-दूसरे के क़रीब लाने, आपसी ताल्लुक़ात को मज़बूत करने और ख़ुशी व ग़म के मौक़ों पर एक-दूसरे का साथ निभाने का पैग़ाम देती हैं। बुज़ुर्गों की दुआएँ और अज़ीज़ों की मोहब्बत किसी भी ख़ानदानी ख़ुशी को यादगार बना देती हैं।

वलीद रिहान और ज़ैनब रज़ा के निकाह की ख़ुशियाँ

शादी के दावतनामे में दर्ज तफ़सील के मुताबिक, दूल्हे वलीद रिहान, मोहम्मद शकील अहमद के बेटे और मरहूम अब्दुल लतीफ़ के पोते हैं, जबकि दुल्हन ज़ैनब रज़ा, मरहूम मोहम्मद यूसुफ़ की बेटी हैं और मेरठ, उत्तर प्रदेश से ताल्लुक़ रखती हैं।

दोनों ख़ानदानों के लिए यह मौक़ा ख़ुशी, नई उम्मीदों और ज़िंदगी के एक नए सफ़र का आग़ाज़ है। दावत-ए-वलीमा की इस तक़रीब में बिरादरी की शख़्सियात ने नवदंपति के लिए नेक ख़्वाहिशात पेश करते हुए दुआ की कि अल्लाह तआला उनके रिश्ते को मोहब्बत, भरोसे, इज़्ज़त और सुकून से भर दे।

इस्लामी तालीमात में निकाह को एक पाकीज़ा रिश्ता और ज़िम्मेदारी भरा अहद माना गया है। मियाँ-बीवी के दरमियान मोहब्बत, रहमत, एक-दूसरे के हुक़ूक़ की अदायगी और मुश्किल व आसान वक़्त में साथ निभाना ख़ुशहाल ज़िंदगी की बुनियाद है।

नवदंपति के लिए ख़ुसूसी दुआ

रसूलुल्लाह ﷺ से निकाह के मौक़े पर सिखाई गई मुबारक दुआ है:

بَارَكَ اللَّهُ لَكَ، وَبَارَكَ عَلَيْكَ، وَجَمَعَ بَيْنَكُمَا فِي خَيْرٍ

तर्जुमा: अल्लाह तआला तुम्हारे लिए बरकत अता फ़रमाए, तुम पर अपनी बरकतें नाज़िल करे और तुम दोनों को भलाई के साथ एक-दूसरे के साथ रखे।

दुआ है कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त वलीद रिहान और ज़ैनब रज़ा की ज़िंदगी को रहमतों, बरकतों और ख़ुशियों से भर दे। दोनों के दरमियान हमेशा मोहब्बत, वफ़ादारी, एहतराम और हमदर्दी क़ायम रखे। उन्हें एक-दूसरे के लिए सुकून और राहत का ज़रिया बनाए, उनके घर को ख़ुशहाल रखे और दोनों ख़ानदानों के दरमियान हमेशा प्यार व इत्तेफ़ाक़ बाक़ी रखे।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

मुल्तानी समाज की जानिब से वलीद रिहान और ज़ैनब रज़ा तथा दोनों ख़ानदानों को शादी की पुरख़ुलूस मुबारकबाद पेश की जाती है।


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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल।

उत्तराखंड डेस्क से अली हसन मुल्तानी की ख़ास रिपोर्ट।

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मुज़फ्फरनगर में अज़ीम मिर्ज़ा की बारात का इस्तक़बाल, आज दिल्ली में होगी दावत-ए-वलीमा की महफ़िल

मोहम्मद आलम पूर्व चेयरमैन MSCT, रेशमा ज़मीर खजांची मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट समेत बिरादरी की मुमताज़ शख़्सियात ने बारात में की शिरकत, दूल्हा-दुल्हन की ख़ुशहाल ज़िंदगी के लिए कीं नेक दुआएँ

मुज़फ्फरनगर/नई दिल्ली।

मुल्तानी समाज | उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट

मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी में शादी-ब्याह के मौक़े ख़ुशी, मोहब्बत, भाईचारे, आपसी इत्तेहाद और ख़ानदानी रिश्तों की मज़बूती का पैग़ाम लेकर आते हैं। इन्हीं ख़ुशनुमा जज़्बात के साथ अज़ीम मिर्ज़ा और बुशरा मिर्ज़ा की शादी की ख़ुशियों के सिलसिले में रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को मुज़फ्फरनगर में बारात का इस्तक़बाल किया गया। इस पुरमसर्रत मौक़े पर बिरादरी की मुमताज़ शख़्सियात और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब ने शिरकत करके दोनों ख़ानदानों को मुबारकबाद पेश की और नवदंपति के लिए नेक ख़्वाहिशात का इज़हार किया।

तेजस बैंक्वेट हॉल, मुज़फ्फरनगर में बारात की पुरवक़ार महफ़िल

मसूल जानकारी और शादी के निमंत्रण-पत्र के मुताबिक, रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को मुज़फ्फरनगर स्थित तेजस बैंक्वेट हॉल में अज़ीम मिर्ज़ा की बारात पहुँची। इस मौक़े पर ख़ानदान के लोगों, रिश्तेदारों और बिरादरी के अफ़राद ने बारात का इस्तक़बाल किया और शादी की ख़ुशियों में शरीक होकर अपनी मोहब्बत और अपनाइयत का इज़हार किया।

इस ख़ुशी की महफ़िल में मोहम्मद आलम, पूर्व चेयरमैन MSCT, तथा रेशमा ज़मीर, खजांची मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट, समेत बिरादरी की अज़ीम शख़्सियात ने शिरकत की। उनकी मौजूदगी ने इस पारिवारिक तक़रीब को सामाजिक अपनाइयत और भाईचारे की ख़ूबसूरत मिसाल बनाया।

इस मौक़े पर दूल्हे और दोनों ख़ानदानों को दिली मुबारकबाद पेश की गई तथा दुआ की गई कि अल्लाह तआला इस नए रिश्ते को मोहब्बत, इज़्ज़त, सुकून और बरकतों से मालामाल फ़रमाए।

मरहूम मोहम्मद हसन के पोते हैं अज़ीम मिर्ज़ा

शादी के निमंत्रण-पत्र में दर्ज तफ़सील के मुताबिक, अज़ीम मिर्ज़ा, मोहम्मद ग़फ़्फ़ार अहमद के बेटे और मरहूम मोहम्मद हसन के पोते हैं, जबकि बुशरा मिर्ज़ा, मोहम्मद शहज़ाद की बेटी हैं।

दोनों ख़ानदानों के लिए यह मौक़ा ख़ुशी, नई उम्मीदों और एक नए सफ़र की शुरुआत का है। शादी जैसे मुबारक मौक़े पर बुज़ुर्गों की दुआएँ, अज़ीज़ों की मोहब्बत और बिरादरी के लोगों की शिरकत ख़ुशियों को दोगुना कर देती है। ऐसी तक़रीबात आपसी ताल्लुक़ात को मज़बूत करने और बिरादराना इत्तेहाद को फ़रोग़ देने में अहम किरदार अदा करती हैं।

आज दिल्ली में सजेंगी दावत-ए-वलीमा की ख़ुशियाँ

बारात की ख़ुशियों के बाद आज, सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को शाम 7 बजे से अज़ीम मिर्ज़ा और बुशरा मिर्ज़ा की दावत-ए-वलीमा का एहतिमाम किया गया है।

शादी के दावतनामे के मुताबिक, वलीमे की तक़रीब का मुक़ाम है:

इश्वर वाटिका (Ishwar Vatika)
मेन नांगलोई, नजफ़गढ़ रोड,
निलोठी मोड़, नई दिल्ली – 110041।

दावत-ए-वलीमा मुस्लिम समाज की एक अहम और मुबारक परंपरा है, जिसमें निकाह की ख़ुशी को अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और दोस्तों के साथ साझा किया जाता है। यह मौक़ा नए जोड़े के लिए नेक दुआएँ करने, दोनों ख़ानदानों के दरमियान मोहब्बत बढ़ाने और सामाजिक रिश्तों को मज़बूती देने का ज़रिया भी बनता है।

नवदंपति के लिए दिली मुबारकबाद और ख़ुसूसी दुआ

मुल्तानी समाज की जानिब से अज़ीम मिर्ज़ा और बुशरा मिर्ज़ा को शादी की पुरख़ुलूस मुबारकबाद पेश की जाती है। दुआ है कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त दोनों के दरमियान हमेशा उल्फ़त, मोहब्बत, भरोसा, एहतराम और हमदर्दी क़ायम रखे। उनकी ज़िंदगी को सुकून, ख़ुशहाली और बेशुमार बरकतों से भर दे तथा दोनों ख़ानदानों के दरमियान प्यार, इत्तेफ़ाक़ और ख़ैर-ओ-बरकत हमेशा बाक़ी रखे।

रसूलुल्लाह ﷺ से निकाह के मौक़े पर सिखाई गई मुबारक दुआ है:

بَارَكَ اللَّهُ لَكَ، وَبَارَكَ عَلَيْكَ، وَجَمَعَ بَيْنَكُمَا فِي خَيْرٍ

तर्जुमा: अल्लाह तुम्हारे लिए बरकत अता फ़रमाए, तुम पर अपनी बरकतें नाज़िल करे और तुम दोनों को भलाई के साथ एक-दूसरे के साथ रखे।

अल्लाह तआला अज़ीम मिर्ज़ा और बुशरा मिर्ज़ा के इस पाकीज़ा रिश्ते को हमेशा क़ायम-ओ-दायम रखे, दोनों को एक-दूसरे के लिए राहत-ओ-सुकून का ज़रिया बनाए, नेकियों और ख़ुशियों से नवाज़े तथा उनकी ज़िंदगी को रहमतों से भर दे। आमीन या रब्बुल आलमीन।


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उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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Sunday, October 25, 2026

जलालाबाद सम्मेलन में ‘सनम देर कर दी आते-आते’ के शेर पर छिड़ा बिरादराना घमासान! महिला सांसद इकरा हसन के इस्तक़बाल में पढ़े गए अशआर पर उठे सवाल, सदर साहब के रवैये से नाराज़ हुए तंजीम के जिम्मेदार

### *एक शेर ने महफ़िल का माहौल बदल दिया! अदब और एहतराम की बहस के बीच कमेटी की क़यादत पर उठने लगे सवाल, सदर से इस्तीफ़े और बहिष्कार तक की मांग*

**जलालाबाद, शामली (उत्तर प्रदेश)।** मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी के सामाजिक और तंजीमी हलक़ों में इन दिनों 15 अक्टूबर 2026 को क़स्बा जलालाबाद के **जोया पैलेस** में आयोजित एक सम्मेलन को लेकर चर्चा गर्म है। सम्मेलन में कैराना लोकसभा क्षेत्र की सांसद इकरा हसन को भी मदऊ किया गया था। कार्यक्रम के दौरान सांसद के इस्तक़बाल में पढ़े गए एक शेर को लेकर ऐसा विवाद खड़ा होने की बात सामने आई है, जिसने बिरादरी के भीतर अदब, एहतराम, तंजीमी ज़िम्मेदारी और क़यादत के तौर-तरीक़ों पर बहस छेड़ दी है।

मामले को लेकर बिरादरी के कुछ जिम्मेदारों ने नाराज़गी का इज़हार किया है। वहीं, कुछ लोगों की तरफ़ से कमेटी के सदर के रवैये पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इस पूरे मामले में संबंधित सदर साहब और सांसद इकरा हसन का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाक़ी है।

### क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के मुताबिक, 15 अक्टूबर को जलालाबाद स्थित **जोया पैलेस** में खतौली से ताल्लुक़ रखने वाली मुस्लिम मिर्ज़ा मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी की एक तंजीम का सम्मेलन आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में बिरादरी के लोगों के अलावा कैराना की लोकप्रिय सांसद इकरा हसन को भी शिरकत के लिए आमंत्रित किया गया था।

प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया जा रहा है कि सांसद इकरा हसन कार्यक्रम में कुछ देर से पहुँचीं। उनके आने पर तंजीम के सदर साहब ने मंच से उनका इस्तक़बाल करते हुए कथित तौर पर यह शेर पढ़ा—

**“सनम देर कर दी आते-आते!”**

बस, इसी शेर को लेकर महफ़िल में मौजूद कुछ लोगों की भौंहें तन गईं। बिरादरी के कुछ लोगों ने इसे एक महिला जनप्रतिनिधि के इस्तक़बाल के लिए मुनासिब अल्फ़ाज़ नहीं माना और सवाल उठाया कि सार्वजनिक मंच पर किसी सम्मानित महिला सांसद के लिए ऐसे अल्फ़ाज़ का इस्तेमाल करना क्या अदब और तहज़ीब के तक़ाज़ों के मुताबिक़ था?

प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि इस मौक़े पर सांसद की प्रतिक्रिया सहज नहीं थी, लेकिन उन्होंने सार्वजनिक कार्यक्रम की नज़ाकत को देखते हुए अपनी नाराज़गी ज़ाहिर नहीं की। हालांकि, सांसद की वास्तविक प्रतिक्रिया के बारे में उनकी तरफ़ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

### इस्तक़बाल का शेर या अदब की हदों से आगे बढ़ती ज़बान?

इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही उठ रहा है कि किसी भी तंजीम के सदर और मंच संचालक की ज़िम्मेदारी महज़ मेहमानों का स्वागत करना नहीं, बल्कि अपने अल्फ़ाज़ से कार्यक्रम की गरिमा बनाए रखना भी है।

सामाजिक हलक़ों में चर्चा है कि अगर किसी मेहमान के आने में देर हो जाए, तो उसका इस्तक़बाल ख़ुशआमदीद, इज़्ज़त-अफ़ज़ाई और दुआओं के अल्फ़ाज़ से भी किया जा सकता है। ऐसे में एक महिला जनप्रतिनिधि के लिए इस्तेमाल किए गए शेर को लेकर सवाल उठना लाज़िमी है।

हालांकि, किसी शेर का मतलब उसके संदर्भ और कहने के अंदाज़ से भी तय होता है। लिहाज़ा, पूरे वाक़ये की निष्पक्ष पड़ताल और संबंधित पक्षों का मौक़िफ़ सामने आना ज़रूरी है।

### कार्यक्रम के बाद भी नहीं थमा विवाद, जिम्मेदारों ने जताई नाराज़गी!

सूत्रों और बिरादरी के कुछ जिम्मेदारों के मुताबिक़, कार्यक्रम की समाप्ति के बाद इस शेर को लेकर कमेटी के कुछ लोगों ने सदर साहब के सामने अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की। उनका कहना बताया जा रहा है कि बिरादरी के मंच पर किसी मेहमान के स्वागत में ऐसे अल्फ़ाज़ का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए था, जिनसे उसकी गरिमा या सम्मान को ठेस पहुँचने की आशंका हो।

आरोप है कि सदर साहब ने अपनी ग़लती स्वीकार करने के बजाय आपत्ति जताने वाले जिम्मेदारों को ही गलत ठहराना शुरू कर दिया। इसी कथित रवैये ने मामले को और तूल दे दिया।

बिरादरी के कुछ लोगों का कहना है कि अगर किसी तंजीम के अंदर उसके कामकाज और ज़बान के इस्तेमाल पर सवाल उठाने वालों को ही ग़लत ठहराया जाने लगे, तो आपसी मशवरे और इस्लाही अमल की गुंजाइश कम हो जाती है।

हालांकि, सदर साहब का पक्ष सामने आने के बाद ही इस विवाद की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

### अली हसन का आरोप—‘हिटलरशाही’ के रवैये से परेशान हैं लोग!

बिरादरी के जिम्मेदार अली हसन साहब ने कथित तौर पर सदर साहब के काम करने के अंदाज़ पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सदर साहब का रवैया लंबे समय से हठधर्मिता वाला रहा है और तंजीम में दूसरे लोगों की राय को अहमियत नहीं दी जाती।

अली हसन के मुताबिक़, बिरादरी के कार्यक्रमों और तंजीमी गतिविधियों को लेकर भी मतभेद रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरी तंजीम के कार्यक्रमों की नकल करके उन्हें अपना बताने जैसी शिकायतें भी सामने आती रही हैं।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। संबंधित सदर साहब का पक्ष सामने आने पर ही इनकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

### अज़हर खान ने उठाया महिला सम्मान का सवाल

बिरादरी के एक अन्य जिम्मेदार अज़हर खान साहब का कहना है कि किसी भी जनप्रतिनिधि का इस्तक़बाल करते समय अल्फ़ाज़ का चुनाव बेहद एहतियात से होना चाहिए। उनका मानना है कि सार्वजनिक मंच पर महिला जनप्रतिनिधि के लिए इस्तेमाल की जाने वाली ज़बान में अदब, एहतराम और पेशेवर शाइस्तगी झलकनी चाहिए।

अज़हर खान के मुताबिक़, इस मामले में इस्तेमाल किए गए शेर को लेकर जो नाराज़गी सामने आई है, उसे हल्के में लेने के बजाय तंजीम के जिम्मेदारों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि तंजीम की साख उसके ओहदेदारों के व्यवहार और सार्वजनिक आचरण से बनती है। इसलिए पद पर बैठे व्यक्ति से दूसरों के मुकाबले अधिक संजीदगी और जवाबदेही की उम्मीद की जाती है।

### अकील अहमद की मांग—ऐसे रवैये पर हो जवाबदेही!

बिरादरी के एक अन्य शख़्स अकील अहमद ने इस मामले में सख़्त रुख़ अपनाते हुए कहा कि यदि किसी ओहदेदार के आचरण से बिरादरी की साख प्रभावित होती है, तो उस पर तंजीम के बुज़ुर्गों और जिम्मेदारों को गौर करना चाहिए।

उनका कहना है कि इस मामले में उचित कार्रवाई होनी चाहिए और यदि जांच में सदर साहब का रवैया अनुचित पाया जाता है, तो उनके पद पर बने रहने के बारे में भी फैसला किया जाना चाहिए।

अकील अहमद ने कथित तौर पर ऐसे सदर का सामाजिक बहिष्कार किए जाने की मांग भी उठाई है। हालांकि, यह उनकी निजी राय है और किसी सामूहिक फैसले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

### मक़सूद अहमद ने किया आगाह—मामला बढ़ा तो बिरादरी की साख पर पड़ेगा असर

मक़सूद अहमद का कहना है कि तंजीम के पढ़े-लिखे लोगों और बुज़ुर्गों को इस पूरे मामले पर जल्द बैठकर मशवरा करना चाहिए। उनके मुताबिक़, किसी एक शख़्स की ज़िद या आपसी मतभेद अगर पूरे समाज की प्रतिष्ठा को प्रभावित करने लगें, तो उसका नुकसान किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता।

उन्होंने मामले को आपसी बातचीत, निष्पक्ष जांच और तंजीमी उसूलों के मुताबिक़ हल करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

### एहसान अली की मांग—सदर साहब ख़ुद दें इस्तीफ़ा!

बिरादरी के जिम्मेदार एहसान अली का कहना है कि किसी भी ओहदे की असल अहमियत उस पर बैठे व्यक्ति के किरदार, व्यवहार और जवाबदेही से होती है। उनके मुताबिक़, अगर सदर साहब को लगता है कि उनके रवैये से बिरादरी के जिम्मेदारों का भरोसा कम हुआ है, तो उन्हें अपने पद के बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए।

एहसान अली ने कथित तौर पर सदर साहब से तत्काल इस्तीफ़ा देने और किसी ऐसे व्यक्ति को ज़िम्मेदारी सौंपने की मांग की है, जिसे बिरादरी के लोग स्वीकार करते हों।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस मामले का संतोषजनक समाधान नहीं निकाला गया, तो विरोध करने वाले लोग पूरी कमेटी के बहिष्कार का रास्ता भी अपना सकते हैं। फिलहाल, किसी औपचारिक बहिष्कार या नई कमेटी के गठन की पुष्टि नहीं हुई है।

### क्या नई तंजीम के गठन की तैयारी है?

इस पूरे विवाद के बाद बिरादरी के कुछ जिम्मेदारों के बीच एक नई कमेटी गठित करने को लेकर विचार-विमर्श होने की चर्चा भी सामने आ रही है। हालांकि, नई कमेटी के गठन, उसके सदस्यों या किसी आधिकारिक निर्णय की पुष्टि नहीं हो सकी है।

यदि वास्तव में ऐसा कोई कदम उठाया जाता है, तो यह केवल एक शेर पर उपजा विवाद नहीं, बल्कि बिरादरी के भीतर क़यादत, प्रतिनिधित्व और तंजीमी जवाबदेही को लेकर गहरे मतभेदों का संकेत हो सकता है।

दूसरी तरफ़, किसी भी नई तंजीम के गठन से पहले सभी पक्षों को आपसी बातचीत, दस्तावेज़ी तथ्यों और बिरादरी के व्यापक हितों को सामने रखकर निर्णय लेना चाहिए, ताकि विवाद का हल निकालने के बजाय नए विवाद पैदा न हों।

### बिरादरी के सामने बड़ा सवाल—ओहदा बड़ा या उसूल?

जलालाबाद के इस सम्मेलन से जुड़ा विवाद कई अहम सवाल छोड़ रहा है। क्या सामाजिक तंजीमों के ओहदेदारों को सार्वजनिक मंच पर अपनी ज़बान और व्यवहार के प्रति अधिक जवाबदेह नहीं होना चाहिए? क्या किसी विवाद पर सवाल उठाने वाले जिम्मेदारों की बात सुनी जानी चाहिए या उन्हें ही गलत ठहरा दिया जाना चाहिए? और क्या बिरादरी के भीतर मतभेदों को आपसी मशवरे से हल करना बेहतर नहीं होगा?

मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी के लिए यह वाक़या इस लिहाज़ से भी अहम है कि सामाजिक एकता केवल बड़े-बड़े सम्मेलनों और मंचों से नहीं, बल्कि आपसी एहतराम, बुज़ुर्गों की इज़्ज़त, महिलाओं की गरिमा और जिम्मेदाराना व्यवहार से मज़बूत होती है।

**याद रहे, अदब किसी ओहदे का मोहताज नहीं और जवाबदेही किसी एक तंजीम तक महदूद नहीं।** बिरादरी की साख उसी वक़्त बुलंद होती है, जब उसके जिम्मेदार अपने अल्फ़ाज़, अपने अमल और अपने फैसलों से मिसाल क़ायम करते हैं।

अब देखना यह है कि इस विवाद पर संबंधित सदर साहब क्या मौक़िफ़ अपनाते हैं, तंजीम के बुज़ुर्ग क्या फैसला करते हैं और क्या यह मामला आपसी मशवरे से सुलझता है या बिरादरी के भीतर एक नए तंजीमी विवाद की शक्ल अख़्तियार करता है।

**नोट:** इस रिपोर्ट में उल्लिखित आरोप और प्रतिक्रियाएँ संबंधित व्यक्तियों के हवाले से प्राप्त जानकारी पर आधारित हैं। संबंधित सदर साहब और सांसद इकरा हसन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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**रिपोर्ट: सादिक मुल्तानी**
उप -संपादक, उत्तर प्रदेश डेस्क
**‘मुल्तानी समाज’ — राष्ट्रीय समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल**

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इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन💔 रूड़की के मोहम्मद युसुफ़ साहब उर्फ़ बबलू के भांजे का मुंबई में इंतिक़ाल, देहरादून में आज होगी सुपुर्द-ए-ख़ाक की रस्म

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमाए और तमाम अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

रूड़की/देहरादून, 25 अक्टूबर 2026।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिली अफ़सोस के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि मोहल्ला चौर खाला बल्लुपुर देहरादून, उत्तराखंड निवासी जनाब मोहम्मद युसुफ़ साहब उर्फ़ बबलू (बंदूक साज़), साकिन रूड़की, ज़िला हरिद्वार, उत्तराखंड के भांजे सुहैल मिर्ज़ा का आज दिन इतवार, 25 अक्टूबर 2026 को मुंबई में क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया है। मरहूम मुंबई में रोज़गार के सिलसिले में काम करते थे। अफ़सोस कि इस फ़ानी दुनिया में उनकी ज़िंदगी का सफ़र मुकम्मल हो गया और वह अपने ख़ालिक़-ए-हक़ीक़ी से जा मिले।

सुहैल मिर्ज़ा वालिदा रिहाना बी उम्र तकरीबन 45-50 साल इस दुखद ख़बर से उनके रिश्तेदारों, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और तमाम जानने वालों में ग़म की लहर दौड़ गई है।

🕌 आज बाद नमाज़-ए-असर होगी सुपुर्द-ए-ख़ाक की रस्म

मिली हुई मालूमात के मुताबिक़, मरहूम की मैय्यत को आज बाद नमाज़-ए-असर, कब्रिस्तान इंदर रोड, देहरादून, उत्तराखंड में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि जो हज़रात जनाज़े में शरीक हो सकते हैं, वह जनाज़े की नमाज़ में शिरकत फ़रमाएँ, मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और इस दुख की घड़ी में अहले-ख़ाना के ग़म में शरीक होकर इंसानियत, भाईचारे और बिरादराना हमदर्दी का सबूत दें।

🤲 मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत

या अल्लाह! मरहूम की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमा। उनकी तमाम छोटी-बड़ी ख़ताओं और लग़ज़िशों को अपने फ़ज़्ल-ओ-करम से माफ़ फ़रमा। उनकी नेकियों को क़ुबूल फ़रमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा। आमीन।

🤲 जनाज़े की नमाज़ में पढ़ी जाने वाली दुआ

अगर मरहूम बालिग़ मर्द हैं, तो जनाज़े की नमाज़ में पढ़ी जाने वाली मशहूर दुआ यह है:

اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِحَيِّنَا وَمَيِّتِنَا وَشَاهِدِنَا وَغَائِبِنَا وَصَغِيرِنَا وَكَبِيرِنَا وَذَكَرِنَا وَأُنْثَانَا

तर्जुमा: ऐ अल्लाह! हमारे ज़िंदा और मरहूम, मौजूद और ग़ैर-मौजूद, छोटे और बड़े, मर्द और औरत सबकी मग़फ़िरत फ़रमा।

नोट: जनाज़े की दुआ मरहूम की उम्र और हालत के मुताबिक़ पढ़ी जाती है। ऊपर दी गई दुआ का इस्तेमाल आम दुआ के तौर पर भी किया जा सकता है।

🤲 मैय्यत को क़ब्र में उतारते वक़्त की दुआ

मैय्यत को क़ब्र में उतारते वक़्त यह दुआ पढ़ना मशरूअ है:

بِسْمِ اللَّهِ وَعَلَى مِلَّةِ رَسُولِ اللَّهِ ﷺ

तर्जुमा: अल्लाह के नाम के साथ और रसूलुल्लाह ﷺ के दीन व तरीक़े पर।

🤲 मिट्टी देते वक़्त की याददिहानी और दुआ

क़ब्र पर मिट्टी डालते वक़्त अल्लाह तआला की तरफ़ रुजू करते हुए मौत और आख़िरत को याद किया जाए। क़ुरआन-ए-पाक की यह आयत पढ़ना मसनून है:

مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ

तर्जुमा: इसी मिट्टी से हमने तुम्हें पैदा किया, इसी में तुम्हें वापस लौटाएँगे और इसी से तुम्हें दोबारा निकालेंगे।

(सूरह ताहा, आयत 55)

क़ब्र पर मिट्टी देने के बाद मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत और साबित-क़दमी की दुआ करना भी मुस्तहब है।

🤲 दफ़्न के बाद मरहूम के लिए दुआ

اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَثَبِّتْهُ عِنْدَ السُّؤَالِ

तर्जुमा: ऐ अल्लाह! इनकी मग़फ़िरत फ़रमा और सवाल के वक़्त इन्हें साबित-क़दम रख।

ऐ अल्लाह! मरहूम की क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे। क़ब्र की तन्हाई को अपनी रहमत से दूर फ़रमा, उनकी क़ब्र को वसीअ और रौशन फ़रमा और उन्हें हश्र के दिन अपने महबूब बंदों के साथ उठाना। उनके घर वालों को इस सदमे को बर्दाश्त करने की हिम्मत, सब्र और सुकून अता फ़रमा।

आमीन सुम्मा आमीन, या रब्बुल आलमीन।

📞 मैय्यत के सिलसिले में राब्ते के लिए

मैय्यत, जनाज़े और सुपुर्द-ए-ख़ाक से मुताल्लिक़ मज़ीद मालूमात हासिल करने के लिए जनाब मोहम्मद हनीफ़ साहब (भगवानपुर वाले) से नीचे दिए गए मोबाइल नंबर पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है:

मोबाइल नंबर: 9897563371


📰 मुल्तानी समाज — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार क़ौमी सतह पर शाया या प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो बराए मेहरबानी नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।

📞 9410652990

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"मुल्तानी समाज" — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।

Friday, October 23, 2026

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन 💔 रूड़की में मोहम्मद अनस के इंतिक़ाल से मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी में ग़म की लहर, बाद नमाज़-ए-जुमा होगा सुपुर्द-ए-ख़ाक

रूड़की, हरिद्वार (उत्तराखंड)।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म, दिली सदमे और अश्कबार आँखों के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि जनाब हाजी मोहम्मद नदीम साहब, वल्द मरहूम हाजी मोहम्मद यामीन साहब के साहबज़ादे मोहम्मद अनस का आज दिन जुमा, बा-तारीख़ 23 अक्टूबर 2026 की दरमियानी रात तक़रीबन 2 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया है।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

बेशक हम अल्लाह ही के हैं और उसी की तरफ़ हमें लौटकर जाना है।

मोहम्मद अनस साहब के इंतिक़ाल की दर्दनाक ख़बर से अहले-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, दोस्त-अहबाब और मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी में ग़म और अफ़सोस की लहर दौड़ गई है। इस दुख की घड़ी में लफ़्ज़ साथ नहीं देते और दिल इस हक़ीक़त को तस्लीम करने में बोझिल हो जाता है कि एक अज़ीज़ हस्ती अब इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत हो चुकी है।

मौत बरहक़ है और हर जानदार को एक दिन अपने रब के हुज़ूर हाज़िर होना है। यह दुनिया फ़ानी है और आख़िरत ही हमेशा रहने का मुक़ाम है। ऐसे पुर-अलम मौक़े पर हम सबकी ज़िम्मेदारी है कि मरहूम के लिए दिल की गहराइयों से दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और ग़मज़दा अहले-ख़ाना के साथ हमदर्दी का इज़हार करते हुए उन्हें सब्र-ओ-हौसले की तसल्ली दें।

🕌 नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन की इत्तिला

मिली हुई इत्तिला के मुताबिक़, मरहूम मोहम्मद अनस साहब की नमाज़-ए-जनाज़ा के बाद आज दिन जुमा, कब्रिस्तान ईदगाह, रूड़की, ज़िला हरिद्वार, उत्तराखंड में तदफ़ीन अमल में लाई जाएगी। अहले-ख़ाना की तरफ़ से दी गई इत्तिला के मुताबिक़, मैय्यत को बाद नमाज़-ए-जुमा सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम बिरादराना हज़रात, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और मरहूम के चाहने वालों से गुज़ारिश है कि इस ग़म की घड़ी में शरीक होकर नमाज़-ए-जनाज़ा में शिरकत फ़रमाएँ, मरहूम के लिए मग़फ़िरत की दुआ करें और ग़मज़दा ख़ानदान को सब्र की तसल्ली दें।

🤲 मरहूम की मग़फ़िरत और जन्नतुल फ़िरदौस के लिए ख़ुसूसी दुआ

ऐ अल्लाह! ऐ हमारे परवरदिगार!

तू ग़फ़ूर-उर-रहीम है, तू रहम करने वालों में सबसे बढ़कर रहम करने वाला है। हम तेरे दरबार में अपने मरहूम भाई मोहम्मद अनस साहब के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करते हैं। या अल्लाह! उनकी मग़फ़िरत फ़रमा, उनकी ख़ताओं और कोताहियों से दरगुज़र फ़रमा, उनकी लग़ज़िशों को माफ़ फ़रमा और उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा।

या रब्बुल आलमीन! मरहूम की क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे। क़ब्र की तन्हाई को अपनी रहमत से दूर फ़रमा, क़ब्र को वसीअ और रौशन फ़रमा तथा उन्हें क़ब्र के अज़ाब और आख़िरत की तमाम मुश्किलात से महफ़ूज़ फ़रमा।

ऐ अल्लाह! मरहूम को जन्नतुल फ़िरदौस में आला से आला मक़ाम अता फ़रमा। उनके दरजात बुलंद फ़रमा, उनकी नेकियों को क़ुबूल फ़रमा और अपनी बेपनाह रहमत के साये में जगह अता फ़रमा।

🤲 मैय्यत को क़ब्र में उतारते वक़्त पढ़ी जाने वाली दुआ

जब मैय्यत को क़ब्र में उतारा जाए, तो यह दुआ पढ़ना मस्नून है:

بِسْمِ اللّٰهِ وَعَلَىٰ مِلَّةِ رَسُولِ اللّٰهِ ﷺ

तर्जुमा: अल्लाह के नाम के साथ और रसूलुल्लाह ﷺ के दीन व तरीक़े पर।

या अल्लाह! जब मरहूम को क़ब्र में उतारा जाए, उस वक़्त अपनी रहमत और करम से उन्हें ढाँप लेना। उनकी क़ब्र को सुकून, नूर और राहत का मुक़ाम बना देना। उन्हें सवालात-ए-क़ब्र में साबित-क़दम रखना और अपने फ़रिश्तों के ज़रिये उन पर रहमत फ़रमाना।

🤲 मिट्टी देते वक़्त की याद दिलाने वाली आयत

मैय्यत को दफ़न करते हुए मिट्टी डालने के मौक़े पर क़ुरआन-ए-करीम की यह आयत याद दिलाती है कि इंसान की पैदाइश भी मिट्टी से है और वापसी भी उसी की तरफ़ है:

مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ

तर्जुमा: हमने तुम्हें इसी मिट्टी से पैदा किया, और इसी में तुम्हें लौटाएँगे, और इसी से तुम्हें दोबारा निकालेंगे।
(सूरह ताहा, आयत 55)

ऐ अल्लाह! जिस मिट्टी में हमारे मरहूम भाई को सुपुर्द किया जा रहा है, उसे उनके लिए राहत और सुकून का ज़रिया बना दे। उनकी आख़िरत आसान फ़रमा और रोज़-ए-महशर उन्हें अपने महबूब बंदों के साथ उठाना।

🤲 ग़मज़दा अहले-ख़ाना के लिए दुआ-ए-सब्र

या अल्लाह! हाजी मोहम्मद नदीम साहब और तमाम अहले-ख़ाना को इस सदमे को बर्दाश्त करने की ताक़त अता फ़रमा। उनके दिलों को सब्र-ए-जमील से भर दे, उनकी आँखों के आँसुओं को अपनी रहमत का ज़रिया बना और इस मुश्किल वक़्त में उन्हें हिम्मत, सुकून और तसल्ली अता फ़रमा।

या रब! ग़मज़दा ख़ानदान को अपने हिफ़्ज़-ओ-अमान में रखना, उन्हें इस इम्तिहान में सब्र करने की तौफ़ीक़ देना और मरहूम के लिए सदक़ा-ए-जारीया बनने वाले नेक आमाल की तौफ़ीक़ अता फ़रमा।

अल्लाह तबारक व तआला मरहूम मोहम्मद अनस साहब की बिलावास्ता मग़फ़िरत फ़रमाए, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए और तमाम अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

आख़िर में तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि मरहूम को अपनी ख़ुसूसी दुआओं में याद रखें। किसी अज़ीज़ की रुख़्सती का ग़म ऐसा सदमा है जिसे सिर्फ़ अल्लाह की रहमत, अपनों की हमदर्दी और सब्र ही सहने की ताक़त देते हैं।


📰 मुल्तानी समाज — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तराखंड डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार क़ौमी सतह पर शाया व प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।

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Thursday, October 22, 2026

💔 इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन 💔जयपुर में ग़म की लहर: मरहूम अब्दुल क़दीर साहब के फ़रज़ंद जलालुद्दीन साहब का इंतिक़ाल, कल शास्त्री नगर क़ब्रिस्तान में होगी तदफ़ीन

जयपुर, राजस्थान।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिली अफ़सोस के साथ इत्तिला दी जाती है कि मरहूम अब्दुल क़दीर साहब उर्फ़ चुन्नू मियाँ, चाँदपोल वालों के साहबज़ादे जलालुद्दीन साहब का क़ज़ा-ए-इलाही से आज, जुमेरात, 22 अक्टूबर 2026 को इंतिक़ाल हो गया है।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

बेशक, हर जान को मौत का ज़ायका चखना है और हम सबको एक दिन अपने रब की बारगाह में वापस लौटकर जाना है। मगर किसी अज़ीज़ के दुनिया से रुख़्सत हो जाने की ख़बर दिल को ग़मगीन कर देती है। जलालुद्दीन साहब के इंतिक़ाल की इत्तिला से उनके अहले-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, दोस्तों और जानने वालों में रंज-ओ-मलाल की कैफ़ियत है।

इस मुश्किल घड़ी में तमाम अहबाब और बिरादरी के लोगों से गुज़ारिश है कि मरहूम के हक़ में दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और उनके घर वालों को सब्र-ए-जमील अता होने की दुआ फ़रमाएँ।

🕊️ नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन की इत्तिला

मरहूम जलालुद्दीन साहब की तदफ़ीन के सिलसिले में अहले-ख़ाना की जानिब से दी गई इत्तिला के मुताबिक़ तमाम हज़रात से वक़्त की पाबंदी के साथ शिरकत की गुज़ारिश की गई है।

  • तारीख़-ए-इंतिक़ाल: जुमेरात, 22 अक्टूबर 2026
  • जनाज़े की तारीख़: जुमा, 23 अक्टूबर 2026
  • जनाज़े के घर से रवाना होने का वक़्त: सुबह 09:00 बजे
  • मक़ाम-ए-तदफ़ीन: नाहरी का नाका, शास्त्री नगर क़ब्रिस्तान, जयपुर, राजस्थान
  • रिहाइश का पता: 4-T-32, आर.सी. सेंटर के सामने, पेट्रोल पंप के पास वाली गली, शास्त्री नगर, जयपुर, राजस्थान।

तमाम अहबाब, रिश्तेदारों और बिरादरी के लोगों से पुरख़ुलूस गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें, नमाज़-ए-जनाज़ा अदा करें और इस ग़म की घड़ी में अहले-ख़ाना के साथ खड़े होकर उन्हें तसल्ली दें।

नोट: नमाज़-ए-जनाज़ा का सही वक़्त और जनाज़े की रवानगी के बारे में तस्दीक़ के लिए नीचे दिए गए राब्ता नंबरों पर मालूमात हासिल की जा सकती हैं।

📞 9660946299
📞 9680185341

🤲 मरहूम की मग़फ़िरत के लिए दुआ

ऐ अल्लाह! जलालुद्दीन साहब की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमा। उनकी ख़ताओं और लग़ज़िशों को माफ़ फ़रमा, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा और उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे।

ऐ रब्बे-करीम! मरहूम पर अपनी ख़ास रहमत नाज़िल फ़रमा, उनकी क़ब्र की तंगी और वहशत को दूर फ़रमा, उन्हें सवालात-ए-क़ब्र में साबित-क़दम रख और अपनी रहमत के साये में जगह अता फ़रमा।

ऐ अल्लाह! उन्हें जन्नतुल-फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमा, उनकी नेकियों को क़ुबूल फ़रमा और उनकी तमाम कोताहियों से दरगुज़र फ़रमा। उन्हें अपने महबूब बंदों और नेक लोगों की रिफ़ाक़त नसीब फ़रमा।

ऐ अल्लाह! जब मरहूम को क़ब्र में उतारा जाए, उस वक़्त उन पर अपनी रहमत फ़रमा। क़ब्र को उनके लिए सुकून, राहत और नूर का मुक़ाम बना दे। उन्हें तन्हाई में अपनी रहमत का एहसास अता फ़रमा और रोज़-ए-क़यामत उन्हें अपने फ़ज़्ल-ओ-करम से कामयाबी नसीब फ़रमा। आमीन या रब्बुल आलमीन।

🤲 दफ़्न के वक़्त और मिट्टी देने की मस्नून दुआएँ

जब किसी मुसलमान को क़ब्र में उतारा जाता है, तो इस मौक़े पर मौत और आख़िरत की याद के साथ मरहूम के हक़ में दुआ करना चाहिए।

1. मिट्टी देते वक़्त पढ़ी जाने वाली आयत

إِنَّا لِلّٰهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ

तर्जुमा: बेशक हम अल्लाह ही के हैं और उसी की तरफ़ लौटकर जाने वाले हैं।

2. दफ़्न के बाद मरहूम के लिए दुआ

اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَثَبِّتْهُ عِنْدَ السُّؤَالِ

तर्जुमा: ऐ अल्लाह! इनकी मग़फ़िरत फ़रमा और सवाल के वक़्त इन्हें साबित-क़दम रख।

दफ़्न के बाद मरहूम के लिए मग़फ़िरत और साबित-क़दमी की दुआ करना सुन्नत से साबित है। तमाम हाज़िरीन से गुज़ारिश है कि ख़ुलूस-ए-दिल के साथ मरहूम के लिए दुआ करें और अहले-ख़ाना को सब्र की तलक़ीन करें।

🕯️ अहले-ख़ाना के लिए दुआ-ए-सब्र

ऐ अल्लाह! मरहूम के तमाम घर वालों, अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और दोस्तों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा। उनके दिलों को सुकून दे, इस सदमे को बर्दाश्त करने की ताक़त अता फ़रमा और उन्हें अपनी रहमत से मायूस न होने दे।

अल्लाह तआला इस ग़म को सहने वाले तमाम लोगों के लिए आसानी फ़रमाए और मरहूम को अपनी बेपनाह रहमतों में जगह अता फ़रमाए।

आमीन सुम्मा आमीन या रब्बुल आलमीन।


📰 मुल्तानी समाज की जानिब से पुरसा

मुल्तानी समाज राष्ट्रीय समाचार पत्रिका की जानिब से मरहूम जलालुद्दीन साहब के इंतिक़ाल पर उनके तमाम अहले-ख़ाना और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब की ख़िदमत में दिली ताज़ियत और पुरसा पेश किया जाता है।

हम दुआगो हैं कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उन्हें जन्नतुल-फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए और तमाम ग़मज़दा घर वालों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मौत बरहक़ है और वापसी अल्लाह ही की तरफ़ है।

ख़ास रिपोर्ट — राजस्थान डेस्क
ज़मीर आलम, प्रधान संपादक
मुल्तानी समाज — राष्ट्रीय समाचार पत्रिका एवं न्यूज़ पोर्टल

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, नई दिल्ली से प्रकाशित/प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका “मुल्तानी समाज”।

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आपका एतमाद ही हमारी सबसे बड़ी ताक़त है।

“मुल्तानी समाज” — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन 💔 भीलवाड़ा में मासूम शिफा मरियम के इंतकाल से पसरा ग़म का माहौल, नम आँखों से दी जाएगी आख़िरी विदाई

गरीब नवाज़ कॉलोनी, भवानी नगर (भीलवाड़ा, राजस्थान)।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिली अफ़सोस के साथ मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी को यह इत्तिला दी जाती है कि मोहम्मद इरफ़ान इब्ने मरहूम मोहम्मद यूसुफ़ मक्कड़, साकिन दांथल वाले की पोती एवं मोहम्मद फ़ैज़ान की प्यारी बेटी शिफा मरियम का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया है।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

इस दर्दनाक ख़बर से अहले-ख़ानदान, अज़ीज़ो-अक़ारिब और जानने वालों के दरमियान ग़म की लहर दौड़ गई है। एक मासूम बच्ची का इस दुनिया से रुख़्सत हो जाना ऐसा सदमा है, जिसे अल्फ़ाज़ में बयान करना आसान नहीं। इस मुश्किल घड़ी में घर के हर फ़र्द पर ग़म का पहाड़ टूट पड़ा है। अल्लाह तआला तमाम घरवालों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए और इस अज़ीम सदमे को बर्दाश्त करने की हिम्मत बख़्शे। आमीन।

🕊️ नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन की इत्तिला

मिली हुई इत्तिला के मुताबिक़, मरहूमा शिफा मरियम की तदफ़ीन 22 अक्टूबर 2026, बरोज़ जुमेरात, नमाज़-ए-मग़रिब के बाद, सूफ़ियान क़ब्रिस्तान, भीलवाड़ा में की जाएगी।

तमाम अहबाब, अज़ीज़ो-अक़ारिब और बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि वक़्त पर पहुँचकर जनाज़े में शिरकत फ़रमाएँ, मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और ग़मज़दा ख़ानदान के साथ हमदर्दी का इज़हार फ़रमाएँ।

🤲 मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत

ऐ अल्लाह! तू रहमान भी है और रहीम भी। हम तेरी बारगाह में हाथ फैलाकर इस मासूम बच्ची शिफा मरियम के लिए रहमत और मग़फ़िरत की दुआ करते हैं।

या अल्लाह! मरहूमा पर अपनी ख़ास रहमत नाज़िल फ़रमा। उसकी मग़फ़िरत फ़रमा, उसे अपनी अमान और रहमत के साये में जगह अता फ़रमा। उसकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा, उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे और क़ब्र की तमाम वहशतों व तन्हाइयों को उसके लिए राहत और सुकून का ज़रिया बना दे।

या रब्बुल आलमीन! जब मरहूमा को क़ब्र में उतारा जाए, उस वक़्त अपनी रहमत से उसे ढाँप लेना। जब उसके ऊपर मिट्टी डाली जाए, तो उसकी क़ब्र को नूर, सुकून और रहमत से भर देना। उसे जन्नतुल-फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमा और अपने फ़ज़्ल-ओ-करम से जन्नती नेमतों से नवाज़ना।

ऐ अल्लाह! उसके वालिद मोहम्मद फ़ैज़ान, दादा मोहम्मद इरफ़ान, तमाम घरवालों और अहले-ख़ानदान को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा। उनके दिलों को सुकून दे, उनके आँसुओं को अपनी रहमत का सहारा अता फ़रमा और इस मुश्किल वक़्त में उन्हें अपने क़रीब कर ले।

ऐ अल्लाह! इस ग़मज़दा ख़ानदान को तनहा न छोड़ना। उन्हें हौसला, सब्र और अपने फ़ैसले पर रज़ामंदी अता फ़रमा। आमीन या रब्बुल आलमीन।

🤲 तदफ़ीन के वक़्त पढ़ी जाने वाली दुआ

क़ब्र में मैय्यत को उतारते वक़्त यह दुआ पढ़ना सुन्नत से साबित है:

بِسْمِ اللَّهِ وَعَلَى مِلَّةِ رَسُولِ اللَّهِ ﷺ

तर्जुमा: अल्लाह के नाम के साथ और रसूलुल्लाह ﷺ के दीन व तरीक़े पर।

मिट्टी देते वक़्त हर शख़्स को आख़िरत की याद, अल्लाह की तरफ़ वापसी और अपने आमाल की फ़िक्र करनी चाहिए। मैय्यत के लिए रहमत व मग़फ़िरत और पीछे रहने वालों के लिए सब्र की दुआ करनी चाहिए।

🖤 बिरादरी से पुरख़ुलूस गुज़ारिश

मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के तमाम अफ़राद से दरख़्वास्त है कि इस ग़म की घड़ी में मरहूमा के ख़ानदान के लिए दुआ करें। अल्लाह तआला मरहूमा को अपनी बेपनाह रहमत में जगह अता फ़रमाए और तमाम अहले-ख़ानदान को सब्र-ओ-सुकून नसीब फ़रमाए।

आमीन सुम्मा आमीन।


ख़बरनवीस: ज़मीर आलम
प्रधान संपादक — मुल्तानी समाज
राष्ट्रीय समाचार पत्रिका | न्यूज़ पोर्टल | यूट्यूब चैनल
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत पत्रिका के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से ख़ास रिपोर्ट।

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