Saturday, August 15, 2026

बड़ौत के मोहम्मद अली साहब का इंतिक़ाल — बिरादराने मुल्तानी समाज में ग़म की लहर, आज सुबह 10:30 बजे होगी नमाज़-ए-जनाज़ा

मोहम्मद अली साहब के इंतिक़ाल की ग़मगीन ख़बर

नमाज़-ए-जनाज़ा आज सुबह 10:30 बजे, गोरे ग़रीबा कब्रिस्तान में होगी

बड़ौत/बागपत। निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराने हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि मोहम्मद अली वल्द जनाब अब्दुल ग़फ़ूर साहब, उम्र लगभग 55 साल, निवासी गांव शिकोपुर, जिला बागपत, हाल मुकाम बड़ौली रोड, मस्जिद के पास, कस्बा बड़ौत, जिला बागपत, का शनिवार, 15 अगस्त 2026 की बीती रात लगभग 11 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम के इंतिक़ाल की ख़बर से परिवार, रिश्तेदारों, दोस्तों और बिरादराने मुल्तानी समाज में गहरा रंज-ओ-ग़म पाया जा रहा है। एक इंसान का दुनिया-ए-फ़ानी से रुख़्सत होना यक़ीनन अहले-ख़ाना और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब के लिए बेहद तकलीफ़देह लम्हा होता है। ऐसे वक़्त में सब्र, दुआ और मरहूम के लिए मग़फ़िरत की दुआ ही सबसे बड़ी तसल्ली है।

नमाज़-ए-जनाज़ा आज सुबह 10:30 बजे

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूम मोहम्मद अली साहब की नमाज़-ए-जनाज़ा रविवार, 16 अगस्त 2026 को सुबह 10:30 बजे अदा की जाएगी।

मुकाम:
गोरे ग़रीबा कब्रिस्तान, हीरोज़ कॉलेज के सामने, बड़ौत, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश।

तमाम बिरादराने हज़रात से गुज़ारिश है कि अपने तमाम मसरूफ़ियात में से वक़्त निकालकर नमाज़-ए-जनाज़ा में शिरकत फरमाएं और मरहूम की मग़फ़िरत के लिए दुआ-ए-ख़ैर करें।

मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत

अल्लाह तआला मरहूम मोहम्मद अली साहब की मुकम्मल मग़फ़िरत फरमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फरमाए, उनके दर्जात बुलंद फरमाए, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फरमाए और उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे।

ऐ अल्लाह! मरहूम को अपनी रहमत के साये में जगह अता फरमा, उनके लिए क़ब्र का सफ़र आसान फरमा, सवालात-ए-क़ब्र में कामयाबी अता फरमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम नसीब फरमा।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

अहले-ख़ाना के लिए दुआ

अल्लाह रब्बुल आलमीन मरहूम के तमाम अहले-ख़ाना, रिश्तेदारों और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को इस सदमे को बर्दाश्त करने का सब्र-ए-जमील अता फरमाए। उनके दिलों को सुकून दे और इस मुश्किल घड़ी में अपनी ख़ास रहमत और मदद अता फरमाए।

या अल्लाह! मरहूम के घरवालों को सब्र अता फरमा, उनके ग़म को अपनी रहमत से आसान फरमा और इस सदमे के बदले उन्हें बेहतर अज्र अता फरमा।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

दफ़्न के बाद की दुआ

अल्लाह तआला मरहूम को मिट्टी की इस आख़िरी मंज़िल में अपनी रहमत के साथ जगह अता फरमाए। उनकी क़ब्र को वुसअत और रौशनी अता फरमाए, उन्हें हर तरह के अज़ाब से महफ़ूज़ फरमाए और क़यामत के दिन उन्हें अपने नेक बंदों में उठाए।

अल्लाहुम्मग़फ़िर लहू वरहम्हु, व आफिहि व'अफ़ु अन्हु।

ऐ अल्लाह! उनकी मग़फ़िरत फरमा, उन पर रहम फरमा, उन्हें आफ़ियत अता फरमा और उन्हें माफ़ फरमा।

तमाम अहले-ईमान से गुज़ारिश है कि मरहूम को अपनी ख़ुसूसी दुआओं में याद रखें।

आमीन या रब्बुल आलमीन।


📰 मुल्तानी समाज की ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इत्तिहादी क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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