Sunday, May 31, 2026

सिलाना से सोनीपत तक मातम की लहर: हारून साहब का इंतिकाल, बिरादरी में गहरा शोक

सोनीपत/बागपत। इंसान इस दुनिया में एक मुसाफिर की तरह आता है और एक दिन अपने रब के हुक्म से वापस लौट जाता है। इसी हकीकत को फिर एक बार याद दिलाते हुए आज बिरादरी को एक बेहद दुखद खबर मिली। बड़े ही रंज-ओ-ग़म के साथ यह इत्तिला हमें हासिल हुई कि गांव सिलाना, जिला बागपत (उत्तर प्रदेश) के मूल निवासी तथा फिलवक्त में मोहल्ला नंदवानी (मामू-भांजा), सोनीपत (हरियाणा) में रह रहे जनाब हारून साहब वल्द हाजी मोहम्मद मुन्तियाज साहब का आज इतवार, 31 मई 2026 को तकरीबन 55 साल की उम्र में कज़ा-ए-इलाही से इंतिकाल हो गया।

मरहूम के इंतिकाल की खबर सुनते ही परिजनों, रिश्तेदारों, दोस्तों और बिरादरी के लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। बताया जाता है कि हारून साहब अपने अच्छे अख़लाक, मिलनसार स्वभाव और समाज के प्रति सकारात्मक सोच के लिए जाने जाते थे। उनके अचानक इस दुनिया से रुख़्सत हो जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

मिली जानकारी के अनुसार मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा के बाद उन्हें ईदगाह कॉलोनी, सोनीपत (हरियाणा) में बाद नमाज़-ए-ईशा सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। बिरादरी और तमाम अहबाब से गुजारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मगफिरत करें तथा ग़मज़दा परिवार को ढांढस बंधाएं।

दुनिया की जिंदगी फानी है और हर जान को मौत का स्वाद चखना है। ऐसे मुश्किल वक्त में हम सबकी जिम्मेदारी है कि मरहूम के लिए ज्यादा से ज्यादा दुआ करें और उनके परिवार के साथ हमदर्दी का इज़हार करें।

दुआ-ए-मगफिरत:
अल्लाह तआला मरहूम हारून साहब की तमाम खताओं को माफ फरमाए, उनकी मगफिरत फरमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बागों में से एक बाग बनाए, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए और तमाम लवाहिकीन को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।


ख़ास रिपोर्ट: ज़मीर आलम, प्रधान संपादक
मुल्तानी समाज
(सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज़ पोर्टल/यूट्यूब चैनल)

संपर्क:
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Saturday, May 30, 2026

मुल्तानी समाजसेवी संगठन: सीमित संसाधनों के बावजूद सेवा और भाईचारे का मजबूत प्रतीक, जल्द लगेगा निःशुल्क मेडिकल कैंप

खतौली/मुजफ्फरनगर। समाज की बेहतरी और जरूरतमंद लोगों की मदद का जज़्बा यदि सच्चा हो तो सीमित संसाधन भी बड़ी से बड़ी सेवा का माध्यम बन जाते हैं। इसी सोच और सामाजिक सरोकारों के साथ कार्य कर रहा मुल्तानी समाजसेवी संगठन लगातार बिरादरी और समाज के सुख-दुख में अपनी सक्रिय भागीदारी निभा रहा है।

संगठन के पदाधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि आर्थिक रूप से संगठन भले ही बहुत मजबूत न हो, लेकिन सेवा, सहयोग और इंसानियत का जज़्बा इसकी सबसे बड़ी ताकत है। संगठन हमेशा बिरादरी के लोगों के साथ खड़ा रहने का प्रयास करता है और हर संभव मदद के लिए तत्पर रहता है।

पदाधिकारियों के अनुसार आगामी ईद-उल-अजहा (बकरीद) के अवसर पर कुर्बानी के गोश्त की तकसीम (वितरण) का कार्य पूरा होने के बाद संगठन द्वारा एक निःशुल्क मेडिकल कैंप आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। इस कैंप के माध्यम से जरूरतमंद और आम लोगों को स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। मेडिकल कैंप की तारीख और स्थान का औपचारिक ऐलान जल्द किया जाएगा।

संगठन के राष्ट्रीय सदर हाजी नसीम साहब, नायब सदर जमीरउद्दीन साहब, संगठन सचिव मिर्ज़ा नौशाद साहब, कोषाध्यक्ष अफजाल मिर्जा (कुशवली वाले) तथा संचालक प्रभारी शाहनवाज मिर्जा (सरधना वाले) ने संयुक्त रूप से कहा कि समाज की तरक्की, आपसी एकता और जरूरतमंदों की सहायता ही संगठन का मूल उद्देश्य है। उन्होंने बिरादरी के लोगों से अपील की कि सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर सहयोग करें ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुंचाई जा सके।

गौरतलब है कि मुल्तानी समाजसेवी संगठन समय-समय पर सामाजिक, शैक्षिक और जनकल्याणकारी गतिविधियों के माध्यम से लोगों की सेवा करने का प्रयास करता रहा है। संगठन के पदाधिकारियों का मानना है कि समाज की मजबूती केवल आर्थिक संसाधनों से नहीं, बल्कि आपसी सहयोग, भाईचारे और नेक नीयत से भी सुनिश्चित होती है।


(विशेष रिपोर्ट)

यह समाचार सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की राष्ट्रीय समाचार पत्रिका, न्यूज पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए प्रधान संपादक ज़मीर आलम द्वारा खतौली, जनपद मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) से तैयार की गई विशेष रिपोर्ट है।

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Wednesday, May 27, 2026

ईद-उल-अजहा : कुर्बानी से इंसानियत तक — करोड़ों गरीबों की थाली और देश की अर्थव्यवस्था को सहारा देने वाला त्योहार

✍️ विशेष लेख : ज़मीर आलम

प्रधान संपादक — मुल्तानी समाज
नई दिल्ली

भारत विविधताओं का देश है, जहां हर त्योहार केवल धार्मिक रस्म नहीं बल्कि सामाजिक भाईचारे, इंसानियत और आर्थिक सहयोग का भी प्रतीक बन जाता है। ऐसा ही एक पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है ईद-उल-अजहा यानी बकरीद, जिसे पूरी दुनिया में मुसलमान हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की कुर्बानी और अल्लाह की राह में समर्पण की याद में मनाते हैं।

यह त्योहार केवल जानवर की कुर्बानी तक सीमित नहीं है, बल्कि त्याग, इंसानियत, बराबरी, जरूरतमंदों की मदद और सामाजिक सहभागिता का एक बेहद खूबसूरत संदेश देता है। भारत जैसे विशाल देश में यह पर्व धार्मिक भावना के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और गरीब तबकों के लिए भी एक बड़ी राहत बनकर सामने आता है।


🐐 भारत में कितनी होती है कुर्बानी?

भारत में मुस्लिम आबादी 20 करोड़ से अधिक मानी जाती है। स्वतंत्र आर्थिक अध्ययनों और विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इनमें से लगभग 8 से 10 प्रतिशत परिवार आर्थिक रूप से सक्षम होने के कारण कुर्बानी में हिस्सा लेते हैं।

अनुमानों के मुताबिक —

  • देशभर में लगभग 1.5 करोड़ से 2 करोड़ तक बकरों और भेड़ों की कुर्बानी दी जाती है।
  • वहीं जिन राज्यों में नियमों के अंतर्गत बड़े जानवरों की अनुमति है, वहां 20 लाख से 40 लाख तक बड़े जानवरों की सामूहिक कुर्बानी होने का अनुमान लगाया जाता है।

मुंबई की देवनार मंडी, हैदराबाद, दिल्ली, लखनऊ, सहारनपुर, मेरठ और उत्तर भारत की कई बड़ी मंडियां इस दौरान लाखों पशुओं की खरीद-बिक्री का केंद्र बन जाती हैं।


💰 बकरीद और भारत की अर्थव्यवस्था

ईद-उल-अजहा केवल धार्मिक पर्व नहीं बल्कि भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा आर्थिक सहारा भी है। पशुपालक, किसान, ट्रांसपोर्टर, चारा व्यापारी, कारीगर, चमड़ा उद्योग, मसाला व्यापारी और छोटे कारोबारी — सभी को इस अवसर पर रोजगार और आय प्राप्त होती है।

विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार —

📌 पशुओं की खरीद-बिक्री

एक औसत बकरे की कीमत ₹15,000 से ₹25,000 तक होती है। इसी आधार पर केवल पशुओं की खरीद-बिक्री का कारोबार लगभग —

₹30,000 करोड़ से ₹40,000 करोड़ तक पहुंच जाता है।

📌 कुल आर्थिक प्रभाव

यदि परिवहन, चारा, मजदूरी, कपड़े, मसाले, चमड़ा उद्योग और अन्य संबंधित कारोबार को भी शामिल कर लिया जाए तो यह आंकड़ा —

₹45,000 करोड़ से ₹50,000 करोड़ तक माना जाता है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस धनराशि का बड़ा हिस्सा सीधे गांवों में रहने वाले पशुपालकों और किसानों तक पहुंचता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।


🍛 करोड़ों गरीबों तक पहुंचता है भोजन

इस्लाम में कुर्बानी के गोश्त को बांटने का स्पष्ट तरीका बताया गया है। परंपरा के अनुसार गोश्त के तीन हिस्से किए जाते हैं

  • एक हिस्सा अपने परिवार के लिए,
  • एक हिस्सा रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए,
  • और एक बड़ा हिस्सा गरीबों एवं जरूरतमंदों के लिए।

यही वह पहलू है जो इस पर्व को इंसानियत और सामाजिक बराबरी का संदेश देने वाला त्योहार बनाता है।

अनुमान है कि भारत में लगभग 15 करोड़ से 20 करोड़ जरूरतमंद लोगों तक इस अवसर पर भोजन पहुंचता है। इनमें ऐसे परिवार भी शामिल होते हैं जिन्हें पूरे साल मांस या पौष्टिक भोजन नसीब नहीं हो पाता।

एक जरूरतमंद परिवार को इस वितरण के माध्यम से कम से कम 2 से 4 वक्त का भरपूर और प्रोटीन युक्त भोजन आसानी से मिल जाता है। कई स्थानों पर बिरयानी, पका हुआ खाना और सूखा राशन भी बड़े पैमाने पर बांटा जाता है।


🤝 बकरीद का असली पैगाम

ईद-उल-अजहा केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि यह इंसान को यह सिखाती है कि —

  • जरूरतमंदों का ख्याल रखा जाए,
  • समाज में बराबरी कायम हो,
  • अपनी कमाई में गरीबों का हिस्सा समझा जाए,
  • और इंसानियत को सबसे ऊपर रखा जाए।

आज जब दुनिया स्वार्थ और भौतिकता की ओर तेजी से बढ़ रही है, ऐसे समय में यह पर्व हमें त्याग, मोहब्बत, साझेदारी और सामाजिक जिम्मेदारी का एहसास कराता है।


🌹 आखिर में…

बकरीद का यह पर्व भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब, भाईचारे और साझा संस्कृति की खूबसूरत मिसाल भी है। यह त्योहार केवल मुसलमानों का नहीं बल्कि इंसानियत, मदद और सामाजिक सहयोग की भावना का प्रतीक बन चुका है।

जरूरत इस बात की है कि हम त्योहारों को केवल रस्मों तक सीमित न रखें बल्कि उनके असली संदेश — इंसानियत, मोहब्बत और साझेदारी — को अपने जीवन में उतारें।


📢 विशेष सूचना

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका / न्यूज़ पोर्टल / यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए यह विशेष लेख प्रधान संपादक ज़मीर आलम द्वारा प्रस्तुत।

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ईद की खुशियों में इंसानियत की मिसाल बना “मुल्तानी समाजसेवी संगठन”, जरूरतमंदों तक पहुंचाई जाएगी मदद

खतौली / मुज़फ्फरनगर : ईद-उल-अजहा सिर्फ कुर्बानी का त्योहार नहीं, बल्कि मोहब्बत, भाईचारे, हमदर्दी और इंसानियत का पैग़ाम देने वाला मुकद्दस त्योहार है। इसी जज़्बे को आगे बढ़ाते हुए “मुल्तानी समाजसेवी संगठन” ने इस बार भी जरूरतमंद परिवारों के चेहरों पर मुस्कान लाने का सराहनीय कदम उठाया है।

संगठन की ओर से ऐलान किया गया कि ईद के मौके पर गरीब और जरूरतमंद लोगों को कुर्बानी के गोश्त के साथ-साथ तेल, रिफाइंड, बेसन और रोज़मर्रा की ज़रूरी खाद्य सामग्री भी वितरित की जाएगी, ताकि समाज का कोई भी जरूरतमंद परिवार ईद की खुशियों से महरूम न रहे और हर घर में खुशी और राहत का माहौल बन सके।

संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि मुल्तानी समाजसेवी संगठन शुरू से ही बिरादरी और समाज की बेहतरी के लिए काम करता आ रहा है। इससे पहले भी संगठन द्वारा अनेक जरूरतमंद परिवारों की मदद की जा चुकी है और भविष्य में भी यह सिलसिला लगातार जारी रहेगा।

कमेटी के सदस्यों ने बताया कि बिरादरी की तरक्की, आपसी एकता, शिक्षा, समाज सेवा और जरूरतमंदों की सहायता को लेकर कई महत्वपूर्ण एजेंडे तैयार किए गए हैं, जिन पर अब और तेजी से कार्य किया जाएगा। संगठन का उद्देश्य सिर्फ सहायता करना ही नहीं, बल्कि बिरादरी को एक परिवार की तरह जोड़कर मजबूत बनाना भी है।

मुल्तानी समाजसेवी संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि यह ग्रुप बिरादरी के लिए एक घर की तरह है, जहां हर व्यक्ति की बात सुनी जाती है और हर जरूरतमंद की मदद के लिए संगठन हर वक्त तैयार रहता है।

इस अवसर पर संगठन के राष्ट्रीय सदर हाजी नसीम साहब, नायब सदर जमीरउद्दीन साहब, संगठन सेक्रेटरी मिर्ज़ा नौशाद साहब, खजांची अफजाल मिर्जा कुशवली वाले सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। वहीं बैठक का संचालन प्रभारी शाहनवाज मिर्जा सरधने वाले एवं राष्ट्रीय अध्यक्षा मोहतरमा यास्मीन मिर्जा बुढ़ाना वाली ने बेहतरीन अंदाज में किया।

समाजसेवा और इंसानियत की यह मिसाल निश्चित रूप से अन्य संगठनों और समाज के लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है।

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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका / न्यूज़ पोर्टल / यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए खतौली, जिला मुज़फ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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Tuesday, May 26, 2026

MS Businessmen Club : बिरादरी के कारोबार, रोजगार और तरक़्क़ी को नई दिशा देने वाली ऐतिहासिक पहल

मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट रजिस्टर्ड ऑल इंडिया की जानिब से कारोबारियों और नौजवानों के लिए एक मजबूत प्लेटफॉर्म

आज के इस तेज़ रफ़्तार और मुकाबले भरे दौर में हर शख़्स चाहता है कि उसका कारोबार तरक़्क़ी करे, उसे सही रहनुमाई मिले और अपने लोगों का साथ हासिल हो। इसी नेक सोच, बिरादराना जज़्बे और कौमी हमदर्दी के साथ पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार बढ़ई बिरादरी की देश की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी तंजीम “मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट” रजिस्टर्ड ऑल इंडिया की जानिब से MS Businessmen Club की शुरुआत की गई है।

यह प्लेटफॉर्म खास तौर पर मुल्तानी समाज के उन कारोबारियों, ताजिर साथियों, हुनरमंद नौजवानों और प्रोफेशनल लोगों के लिए तैयार किया गया है जो अपने कारोबार को आगे बढ़ाना चाहते हैं, नए मौके तलाश रहे हैं या अपनी मेहनत, तजुर्बे और हुनर के दम पर कामयाबी हासिल करना चाहते हैं।

क्या है MS Businessmen Club?

MS Businessmen Club दरअसल बिरादरी के कारोबारियों और प्रोफेशनल साथियों को एक-दूसरे से जोड़ने वाला ऐसा मजबूत मंच है जहां आपसी मशवरा, कारोबार में मदद, रोजगार के मौके, बिज़नेस नेटवर्किंग और व्यापारिक तआरुफ़ को बढ़ावा दिया जाएगा।

इस प्लेटफॉर्म के ज़रिए —

- कारोबारी साथी अपने बिज़नेस का प्रचार-प्रसार कर सकेंगे
- बेरोजगार नौजवानों को नौकरी और रोजगार के मौके मिल सकेंगे
- नए कारोबार शुरू करने वालों को सही सलाह और रहनुमाई हासिल होगी
- फ्रेंचाइजी, एजेंसी या चैनल पार्टनर बनकर नया कारोबार शुरू करने के अवसर मिलेंगे
- तजुर्बेकार कारोबारियों से कारोबार बढ़ाने के तरीके सीखे जा सकेंगे
- बिरादरी के अंदर आपसी व्यापारिक रिश्ते और भरोसा मजबूत होगा
- छोटे कारोबारियों को बड़े स्तर पर पहचान बनाने का मौका मिलेगा

नौजवानों के लिए उम्मीद की नई किरण

आज बड़ी तादाद में पढ़े-लिखे नौजवान बेहतर रोजगार और कारोबार की तलाश में हैं। ऐसे में MS Businessmen Club उनके लिए एक अहम ज़रिया साबित हो सकता है।

अगर कोई नौजवान अपना कारोबार शुरू करना चाहता है लेकिन उसे सही जानकारी, तजुर्बे या सहयोग की ज़रूरत है, तो यह मंच उसे बिरादरी के तजुर्बेकार कारोबारियों से जोड़ने का काम करेगा।

साथ ही जिन कारोबारियों को अपने कारोबार के लिए स्टाफ, सेल्समैन, सुपरवाइज़र, मार्केटिंग टीम या बिज़नेस पार्टनर की ज़रूरत है, वह भी इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से आसानी से अपने लोगों तक पहुंच सकेंगे।

कारोबार के प्रचार-प्रसार का बेहतरीन जरिया

आज के डिजिटल दौर में सिर्फ मेहनत काफी नहीं, बल्कि कारोबार का सही तरीके से प्रचार होना भी बेहद जरूरी है।

MS Businessmen Club के ज़रिए बिरादरी के छोटे और बड़े कारोबारी अपने प्रोडक्ट, सर्विस और व्यापारिक योजनाओं को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचा सकेंगे। इससे कारोबार को नई पहचान, नए ग्राहक और बेहतर मौके मिलने की उम्मीद है।

यह मंच आने वाले वक्त में बिरादरी के कारोबारियों के लिए एक मजबूत बिज़नेस नेटवर्क के तौर पर उभर सकता है।

“मुल्तानी समाज” की राष्ट्रीय पहचान

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत तथा देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार एवं बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका, न्यूज पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” लगातार समाज की आवाज़ को मुल्क भर में पहुंचाने का काम कर रहा है।

प्रधान संपादक जनाब ज़मीर आलम की खास कोशिशों और मेहनत से यह मंच समाज के सामाजिक, तालीमी, कारोबारी और कौमी मसाइल को लगातार उठाता रहा है। अब MS Businessmen Club के ज़रिए बिरादरी के कारोबारियों और नौजवानों को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाने की दिशा में एक नई पहल की जा रही है।

अपनी खबर, पैगाम या विज्ञापन कैसे भेजें?

अगर आप भी —

- अपने कारोबार का प्रचार करना चाहते हैं
- कोई खबर, आर्टिकल या पैगाम प्रसारित कराना चाहते हैं
- रोजगार या व्यापार से जुड़ी जानकारी साझा करना चाहते हैं
- अपने बिज़नेस का विज्ञापन देना चाहते हैं
- फ्रेंचाइजी, एजेंसी या पार्टनरशिप के अवसर साझा करना चाहते हैं

तो नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता कर सकते हैं —

📞 9410652990
📞 8010884848

जरूरी नोट

बिरादरी के कुछ साथी अलग-अलग नामों से बनाए गए ग्रुप्स को बिना उसका मकसद समझे तंज या गलत नजरिये से देखने लगते हैं, जबकि हकीकत यह है कि हर ग्रुप एक खास उद्देश्य और अलग-अलग केटेगिरी को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

हमारी तमाम बिरादराना साथियों से अदब के साथ गुजारिश है कि किसी भी ग्रुप को ज्वॉइन करने से पहले उसके मकसद, नियम और विषय को अच्छी तरह समझ लें। क्योंकि जब कोई शख़्स बिना जानकारी के किसी ग्रुप में शामिल होता है, तो वहां मिलने वाली खबरें, पोस्ट, इत्तिलाएं या पैगाम उसकी पसंद के मुताबिक हों यह जरूरी नहीं।

ऐसी सूरत में कई बार गलतफहमियां और बेवजह की परेशानी पैदा हो जाती है। इसलिए बेहतर यही है कि हर साथी सोच-समझकर उसी ग्रुप से जुड़े जो उसकी दिलचस्पी, जरूरत और मकसद के मुताबिक हो।

हमारा मकसद सिर्फ बिरादरी के लोगों को सही जानकारी, कारोबार, रोजगार, तालीम और आपसी सहयोग के बेहतर प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना है, ताकि हर केटेगिरी के लोग अपनी जरूरत और दिलचस्पी के हिसाब से फायदा उठा सकें।

आखिर में

MS Businessmen Club सिर्फ एक प्लेटफॉर्म नहीं बल्कि बिरादरी की तरक़्क़ी, आपसी सहयोग, रोजगार और कारोबार को मजबूत करने की एक खूबसूरत और दूरदर्शी कोशिश है।

अगर बिरादरी के कारोबारी, ताजिर और नौजवान एक-दूसरे का साथ दें, अपने तजुर्बे साझा करें और आपसी भरोसे को मजबूत बनाएं, तो इंशाअल्लाह आने वाले वक्त में यह मंच हजारों लोगों के लिए रोजगार, कारोबार और कामयाबी का बड़ा जरिया बन सकता है।

अल्लाह तआला इस नेक कोशिश को कामयाबी अता फरमाए और बिरादरी को तरक़्क़ी, इत्तेहाद, खुशहाली और कामयाबी से नवाज़े। आमीन।

हज : इस्लाम का अज़ीम और रूहानी सफ़र

दुनिया में अगर किसी इबादत को सबसे ज़्यादा रूहानी, पुरअसर और मोहब्बत से भरा सफ़र कहा जाए तो वह “हज” है। हज सिर्फ़ एक सफ़र नहीं बल्कि अल्लाह की बारगाह में हाज़िरी देने का नाम है। यह वह मुक़द्दस इबादत है जहाँ इंसान अपने गुनाहों की माफी मांगता है, अपने रब के सामने झुकता है और दुनिया की तमाम ऊँच-नीच भूलकर सिर्फ़ “लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक” की सदाओं में खो जाता है।

ज़िलहिज्जा इस्लामी साल का बेहद बरकतों वाला महीना माना जाता है। इसी महीने में दुनिया भर से लाखों मुसलमान सऊदी अरब के मुक़द्दस शहर मक्का मुकर्रमा पहुँचते हैं और हज की अदायगी करते हैं। अरफात का मैदान वह मुक़ाम है जहाँ इंसानियत, बराबरी और अल्लाह की रहमत का सबसे बड़ा मंज़र दिखाई देता है। सफेद एहराम में लिपटे अमीर-गरीब, छोटे-बड़े, काले-गोरे सब एक साथ खड़े होकर अपने रब से दुआ करते हैं।

हज की शुरुआत और हज़रत आदम अलैहिस्सलाम

इस्लामी रिवायतों के मुताबिक़, दुनिया में सबसे पहला इंसान हज़रत आदम अलैहिस्सलाम थे। जन्नत से दुनिया में भेजे जाने के बाद हज़रत आदम और बीबी हव्वा अलैहिस्सलाम एक-दूसरे से जुदा हो गए थे। बाद में अल्लाह के हुक्म से अरफात के मैदान में दोनों की मुलाकात हुई। यही वजह है कि अरफात का मैदान इस्लामी तारीख़ में बेहद अहम मुक़ाम रखता है।

कहा जाता है कि दुनिया का पहला हज भी हज़रत आदम अलैहिस्सलाम ने ही अदा किया था। तभी से लेकर आज तक यह सिलसिला जारी है और क़यामत तक जारी रहेगा इंशाअल्लाह।

अरफात का मैदान : हज का सबसे अहम रुक्न

हज का सबसे अहम दिन 9 ज़िलहिज्जा का होता है। इसी दिन लाखों हाजी अरफात के मैदान में जमा होते हैं। इस मौके पर इंसान अपने तमाम गुनाहों की माफी मांगता है। इस दिन की दुआओं को खास कबूलियत हासिल होती है।

हदीस शरीफ में आता है कि “हज अरफात ही है।” यानी अगर किसी का अरफात में ठहरना रह जाए तो उसका हज मुकम्मल नहीं माना जाता। यही वह जगह है जहाँ इंसान अपने रब के सबसे करीब महसूस करता है।

मीना, मुज़दलिफा और कुर्बानी

अरफात से लौटने के बाद हाजी मुज़दलिफा में रात गुजारते हैं। यहाँ इबादत की जाती है और शैतान को मारने के लिए कंकड़ियाँ जमा की जाती हैं। इसके बाद मीना में जाकर जमरात पर शैतान को कंकड़ी मारी जाती है।

यह अमल इस बात की निशानी है कि इंसान अपने अंदर की बुराइयों, घमंड, लालच और शैतानी ख्यालात को खत्म करने का इरादा कर रहा है। इसके बाद कुर्बानी दी जाती है, जो हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम और हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम की याद को ताज़ा करती है।

हज का पैगाम

हज हमें सब्र, बराबरी, भाईचारे और इंसानियत का पैगाम देता है। यहाँ कोई बड़ा या छोटा नहीं होता, हर इंसान सिर्फ़ अल्लाह का बंदा बनकर आता है।

हज यह सिखाता है कि इंसान दुनिया की दिखावे वाली ज़िंदगी छोड़कर अपने रब से रिश्ता मज़बूत करे, गुनाहों से तौबा करे और इंसानियत की खिदमत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारे।

आज भी जब अरफात के मैदान में लाखों लोग एक साथ हाथ उठाकर दुआ करते हैं तो ऐसा महसूस होता है जैसे पूरी इंसानियत अपने रब के सामने झुकी हुई है। यही हज की असली रूह है, यही उसकी खूबसूरती और यही उसकी अज़मत है।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका / न्यूज़ पोर्टल / यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए जाफराबाद, नई दिल्ली से मोहम्मद आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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Monday, May 25, 2026

तीस साल की उम्र में वसीम अहमद का इंतकाल, इलाके में दौड़ी ग़म की लहर

सरवट कब्रिस्तान मुज़फ्फरनगर में बाद नमाज़-ए-ईशा होगी तदफ़ीन, मरहूम की मग़फिरत के लिए उठे हजारों हाथ

निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ यह दर्दनाक इत्तिला सामने आई है कि गांव छोए, जिला शामली, उत्तर प्रदेश निवासी वसीम अहमद वल्द इकबाल अहमद मरहूम का आज दिन पीर, बा-तारीख़ 25 मई 2026 को तक़रीबन तीन बजे कज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया। मरहूम की अचानक वफ़ात की खबर से पूरे इलाके, रिश्तेदारों, दोस्तों और बिरादरी में ग़म की लहर दौड़ गई।

मरहूम वसीम अहमद तीन भाइयों और तीन बहनों में सबसे छोटे थे। उनकी उम्र तक़रीबन तीस साल बताई जा रही है। सादगी, खुशअख़लाक़ी और मिलनसार तबीयत की वजह से वह अपने जानने वालों में बेहद मक़बूल थे। उनके इंतकाल की खबर सुनते ही घर पर ताज़ियत करने वालों का सिलसिला लगातार जारी है।

मरहूम की हाल रिहाइश मोहल्ला सरवट, महमूद नगर, मुज़फ्फरनगर उत्तर प्रदेश में बताई गई है। परिवार की जानिब से मिली जानकारी के मुताबिक़ मैय्यत को बाद नमाज़-ए-ईशा सरवट कब्रिस्तान, मुज़फ्फरनगर में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। अहले ख़ानदान ने तमाम बिरादराना हज़रात, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और दोस्तों से जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फिरत करने की दरख्वास्त की है।

ऐसे दुखद मौक़ों पर इंसानी ज़िंदगी की नापायदारी का एहसास और भी गहरा हो जाता है। अल्लाह तआला मरहूम वसीम अहमद की मग़फिरत फरमाए, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे, जन्नतुल फिरदौस में आला मुक़ाम अता फरमाए और तमाम घरवालों को सब्र-ए-जमील अता करे। आमीन।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका / न्यूज़ पोर्टल / यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए सोशल मीडिया पर वायरल संदेश के आधार पर प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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Saturday, May 23, 2026

कांधला में शोक की लहर — मिस्त्री सद्दीक साहब का इंतेकाल, आज सुबह सुपुर्द-ए-ख़ाक किए जाएंगे


निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ बिरादरी और क्षेत्रवासियों को यह दुखद सूचना दी जाती है कि मिस्त्री सद्दीक साहब वल्द जनाब रफ़ीक साहब निवासी ग्राम इस्सोपुर, हाल मुकाम छोटी नहर बाईपास, क़स्बा कांधला, जिला शामली (उत्तर प्रदेश) का आज शनिवार, 24 मई 2026 को कज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया। मरहूम की उम्र लगभग 75 वर्ष बताई गई है।

मरहूम मिस्त्री सद्दीक साहब अपने अच्छे अखलाक, मिलनसार स्वभाव और मेहनतकश जिंदगी के लिए इलाके में खास पहचान रखते थे। उनके इंतेकाल की खबर मिलते ही कांधला और आसपास के क्षेत्रों में गम का माहौल फैल गया। रिश्तेदारों, दोस्तों और बिरादरी के लोगों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए मरहूम के लिए दुआ-ए-मगफिरत की।

परिवार की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, मय्यत को क़स्बा कांधला स्थित कब्रिस्तान में कल दिन इतवार, 24 मई 2026 को सुबह 9 बजे सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम बिरादराना हज़रात से गुजारिश की गई है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मगफिरत करें और सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

अल्लाह तआला मरहूम मिस्त्री सद्दीक साहब की मगफिरत फरमाए, उनकी तमाम खतााओं को माफ फरमाकर उन्हें जन्नत-उल-फिरदौस में आला मुकाम अता करे। अल्लाह उनकी क़ब्र को नूर से भर दे, उसे जन्नत के बागों में से एक बाग बना दे और तमाम घरवालों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन सुम्मा आमीन।

यह दुनिया फानी है और हर जान को एक दिन मौत का स्वाद चखना है। ऐसे मौके इंसान को जिंदगी की हकीकत और आखिरत की तैयारी की याद दिलाते हैं। बिरादरी और समाज के लोगों ने मरहूम के परिवार के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज़ पोर्टल/यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए कांधला, जिला शामली (उत्तर प्रदेश) से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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पुराना मुस्तफाबाद, दिल्ली में शोक की लहर — पप्पू और शान मोहम्मद साहब की वालिदा मीला बी का इंतेकाल

निहायत ही रंजो-ग़म के साथ बिरादरी और क्षेत्रवासियों को यह दुखद इत्तिला दी जाती है कि जनाब मोहम्मद अय्यूब उर्फ पप्पू और शान मोहम्मद साहब की वालिदा, मरहूमा मीला बी अहलिया जनाब अलाउद्दीन साहब (मरहूम) का आज दिन शनिवार, 23 मई 2026 को कज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया। मरहूमा की उम्र तकरीबन 90 साल बताई गई है।

मरहूमा मूल रूप से ग्राम बिराल, जिला बागपत (उत्तर प्रदेश) की निवासी थीं तथा वर्तमान में गली नंबर-18, पुराना मुस्तफाबाद, दिल्ली में रह रही थीं। उनके इंतेकाल की खबर मिलते ही इलाके और बिरादरी में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार, रिश्तेदारों और जानने वालों में गहरा दुख व्याप्त है।

जनाब मोहम्मद अय्यूब उर्फ पप्पू और शान मोहम्मद साहब को बिरादरी में लोग प्यार और सम्मान के साथ “पप्पू” और “शान” के नाम से जानते हैं। उनकी वालिदा के इंतेकाल पर लोगों ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए मरहूमा के लिए मगफिरत की दुआ की।

फैमिली की ओर से बताया गया है कि मय्यत को बाद नमाज़-ए-ईशा मुस्तफाबाद, दिल्ली स्थित कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। बिरादरी और तमाम अहबाब से गुजारिश की गई है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मगफिरत करें और सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

अल्लाह तआला मरहूमा मीला बी की मगफिरत फरमाए, उनकी कब्र को जन्नत के बागों में से एक बाग बनाए और तमाम घरवालों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।

मय्यत के सिलसिले में अधिक जानकारी हासिल करने के लिए जनाब मोहम्मद इरशाद साहब से मोबाइल नंबर -8178767976 पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है।

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ईद-उल-अज़हा पर मुल्तानी समाजसेवी संगठन का बड़ा फैसला, कुर्बानी के गोश्त के साथ तेल और बेसन भी होंगे तक्सीम

मुज़फ्फरनगर जनपद के खतौली क्षेत्र में मुल्तानी समाजसेवी संगठन की एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें ईद-उल-अज़हा के मौके पर ज़रूरतमंद परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाने को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। संगठन की ओर से पहले ही कुर्बानी के गोश्त की तक्सीम का कार्यक्रम तय किया गया था, लेकिन अब कमेटी ने इसमें और विस्तार करते हुए तेल रिफाइंड तथा बेसन भी शामिल करने का फैसला लिया है।

बैठक में मौजूद पदाधिकारियों ने कहा कि संगठन का उद्देश्य केवल रस्मी कार्यक्रम करना नहीं, बल्कि समाज के गरीब, मजबूर और जरूरतमंद लोगों तक वास्तविक मदद पहुंचाना है। कमेटी के सदस्यों का मानना है कि ईद की खुशियां तभी मुकम्मल होती हैं जब समाज के हर तबके तक राहत और सहयोग पहुंचे। इसी सोच के साथ इस बार कुर्बानी के गोश्त के अलावा जरूरी खाद्य सामग्री भी वितरित की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक परिवारों को राहत मिल सके।

संगठन के पदाधिकारियों ने ग्रुप और बिरादरी के तमाम लोगों से अपील करते हुए कहा कि इस नेक मिशन की कामयाबी के लिए अल्लाह से दुआ करें। उन्होंने कहा कि अल्लाह तआला सभी लोगों की मदद और सहयोग को अपनी बारगाह में कबूल फरमाए।

कमेटी की ओर से यह भी कहा गया कि मुल्तानी समाजसेवी संगठन लगातार बिरादरी और समाज की खिदमत करता आया है और आगे भी इसी जज़्बे के साथ सेवा कार्य जारी रखेगा। संगठन का उद्देश्य समाज में भाईचारा, सहयोग और इंसानियत के संदेश को मजबूत करना है।

आज आयोजित बैठक में राष्ट्रीय सदर हाजी नसीम साहब, राष्ट्रीय अध्यक्षा यास्मीन मिर्जा साहिबा, नायब सदर जमीरउद्दीन साहब, संगठन सेक्रेटरी मिर्जा नौशाद साहब, कोषाध्यक्ष अफजाल मिर्जा कुशवली वाले, संचालक प्रभारी शाहनवाज मिर्जा सरधने वाले, मिर्जा बाबा मास्टर जाहिद साहब, जीशान मिर्जा सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। बैठक में आगामी कार्यक्रमों और समाजहित से जुड़े कई विषयों पर भी चर्चा की गई।

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“100 जुमों की मोहब्बत, खिदमत और लंगर की रौनक — सरहिंद शरीफ़ में इंसानियत का खूबसूरत पैग़ाम”

सरहिंद शरीफ़, पंजाब की पाक सरज़मीं पर इंसानियत, मोहब्बत और मेहमाननवाज़ी की एक ऐसी मिसाल कायम हुई जिसने हर दिल को छू लिया। बाबा फरीद सर्व धर्म सेवा समिति की जानिब से लगातार 100 हफ़्तों तक हर जुमे के दिन लगने वाले लंगर ने आज अपने 100 हफ़्ते मुकम्मल कर लिए। यह सिर्फ़ एक लंगर नहीं बल्कि इंसानियत की खिदमत, भाईचारे और मोहब्बत का वह सिलसिला है जिसने अनगिनत दिलों को जोड़ने का काम किया।

इस नेक काम में मिर्जा मुल्तानी लोहार बिरादरी के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, वहीं दुबई से आए गुरजीत सिंह का सहयोग भी बेहद क़ाबिल-ए-तारीफ़ रहा। उनकी मोहब्बत और दिलदारी ने इस खिदमत को और भी खूबसूरत बना दिया।

हाजी बाबा ने इस मौके पर तफसील से बताया कि पिछले 100 हफ़्तों में हर जुमे को अलग-अलग तरह के लंगर का एहतिमाम किया गया। कभी खुशबूदार चिकन बिरयानी तैयार की गई, तो कभी स्वादिष्ट मटर पुलाव और कई मौकों पर पनीर बिरयानी से मेहमानों की ख़ातिरदारी की गई। यूँ ही देखते-देखते मोहब्बत और खिदमत का यह कारवां 100 हफ़्तों तक पहुंच गया।

आज के इस खास मौके पर शहर की एक फैक्ट्री के मैनेजर साहब, कॉलेज के प्रिंसिपल साहब, इमाम वासिल सहित बड़ी तादाद में लोगों ने शिरकत की और इस नेक पहल की दिल खोलकर सराहना की। माहौल में अपनापन, अदब और इंसानियत की खुशबू साफ महसूस की जा रही थी।

इस मौके पर हाजी बाबा ने बेहद असरदार अल्फाज़ में कहा कि

"खिदमत-ए-ख़ल्क से ही अल्लाह मिलता है। इंसान अगर इंसान के काम आए, भूखे को खाना खिलाए और मोहब्बत बांटे तो यही सबसे बड़ी इबादत है।"

वहीं प्रिंसिपल साहब और मैनेजर साहब ने अपने ख्यालात का इज़हार करते हुए कहा कि मेहमाननवाज़ी और इंसानियत की सेवा बेहद अज़ीम काम है। अल्लाह और उसके रसूल को ऐसे लोग बेहद पसंद हैं जो दूसरों की भलाई के लिए आगे आते हैं। उन्होंने कहा कि समाज के हर व्यक्ति को मिलजुल कर ऐसे नेक कामों में हिस्सा लेना चाहिए ताकि मोहब्बत और भाईचारे का माहौल कायम रहे।

दुआओं और मोहब्बतों के इस खूबसूरत माहौल में सभी लोगों ने अल्लाह तआला से हाजी बाबा की लंबी उम्र, सेहत और कामयाबी के लिए दुआ की और कहा —
"अल्लाह तआला हाजी बाबा को सलामत रखे और उन्हें यूँ ही इंसानियत की खिदमत करने की तौफीक अता फरमाए। आमीन।"


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका / न्यूज़ पोर्टल / यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए सरहिंद शरीफ़, पंजाब से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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Friday, May 22, 2026

बिरादरी की भलाई के लिए मुल्तानी समाजसेवी संगठन का अहम फैसला, ईद-उल-अज़हा पर ( कुर्बानी ) के साथ आर्थिक मदद का भी होगा इंतज़ाम

“खिदमत-ए-खल्क़ ही असली इबादत — मुल्तानी समाजसेवी संगठन ने जरूरतमंदों के सहारे का लिया अहम फैसला”

“( कुर्बानी ) की खुशियों में गरीब और मिस्कीन परिवारों को भी किया जाएगा शामिल — संगठन की बैठक में बनी रणनीति”

खतौली, मुजफ्फरनगर।
बिरादरी की मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों और जरूरतमंद परिवारों की परेशानियों को मद्देनज़र रखते हुए मुल्तानी समाजसेवी संगठन के कार्यकर्ताओं की एक अहम बैठक जमीरउद्दीन साहब के आवास पर आयोजित की गई। बैठक का माहौल बेहद संजीदा, भाईचारे और इंसानियत की भावना से सराबोर रहा, जिसमें समाज की भलाई और गरीब तबके की मदद को लेकर कई अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में यह सर्वसम्मति से तय किया गया कि आने वाली ईद-उल-अज़हा के मौके पर जहां ( कुर्बानी ) के गोश्त की तक्सीम जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाई जाएगी, वहीं बिरादरी के गरीब, बेसहारा और मिस्कीन लोगों की आर्थिक मदद का भी विशेष इंतज़ाम किया जाएगा, ताकि कोई भी परिवार खुशियों से महरूम न रहे। संगठन के पदाधिकारियों ने इस नेक पहल को इंसानियत और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल बताते हुए इसे लगातार जारी रखने का संकल्प लिया।

बैठक में मुल्तानी समाजसेवी संगठन के राष्ट्रीय सदर हाजी नसीम साहब ने कहा कि समाज की तरक्की केवल बातों से नहीं बल्कि आपसी सहयोग और जरूरतमंदों के सहारे से संभव होती है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वह आगे बढ़कर गरीब परिवारों की मदद करें और समाज में भाईचारे, मोहब्बत और इंसानियत का पैगाम आम करें।

इस मौके पर संगठन के नायब सदर जमीरउद्दीन साहब ने मेहमानों का इस्तकबाल करते हुए कहा कि मौजूदा दौर में जरूरतमंद लोगों की मदद करना वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है। संगठन सेक्रेटरी मिर्ज़ा नौशाद साहब ने संगठन की आगामी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की, जबकि कोषाध्यक्ष अफजाल मिर्जा (कुसावली) ने आर्थिक सहयोग और सहायता व्यवस्था को मजबूत करने पर अपने विचार रखे।

बैठक का संचालन प्रभारी शाहनवाज मिर्जा (सरधने वालों) ने बेहद सलीके और खूबसूरत अंदाज में किया। उन्होंने संगठन की एकजुटता और सामाजिक जिम्मेदारी को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।

बैठक के आखिर में सभी मौजूद लोगों ने यह संकल्प लिया कि बिरादरी के गरीब और जरूरतमंद लोगों की हर संभव मदद की जाएगी तथा समाज में शिक्षा, आपसी सहयोग और इंसानियत के जज़्बे को मजबूत किया जाएगा।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज पोर्टल/यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए खतौली जिला मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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10 साल पुराने पांच मुकदमों का हुआ आपसी समझौता, तंजीम की कोशिशों से बसा टूटा रिश्ता

हाजी नज़ीर अहमद की पहल से दोनों परिवारों में बनी रज़ामंदी, दहेज का सामान भी कराया वापस

समाज में बढ़ते घरेलू विवादों और पारिवारिक मामलों के बीच जहां रिश्ते अदालतों की चौखट तक पहुंचकर टूट जाते हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो समाज को जोड़ने और रिश्तों को बचाने का काम करते हैं। पैदाइशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार बढ़ई बिरादरी में ऐसा ही एक सराहनीय मामला सामने आया है, जिसने समाज में आपसी भाईचारे और तंजीमी एकता की मिसाल पेश की है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते लगभग 10 वर्षों से एक लड़का और लड़की पक्ष के बीच पांच मुकदमे अलग-अलग मामलों को लेकर चल रहे थे। इन मामलों ने दोनों परिवारों के बीच दूरियां पैदा कर दी थीं और कई पंचायतों के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा था।

बताया जाता है कि बिरादरी की तंजीम से जुड़े वरिष्ठ समाजसेवी एवं प्रसिद्ध बिजनेसमैन जनाब हाजी नज़ीर अहमद साहब निवासी जलालाबाद, जिला शामली ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों पक्षों को समझाने और रिश्ते को बचाने की लगातार कोशिश की। उन्होंने पहले पति-पत्नी को दोबारा घर बसाने और साथ रहने के लिए राज़ी करने का प्रयास किया, लेकिन जब दोनों पक्ष इसके लिए तैयार नहीं हुए तो आपसी रज़ामंदी के साथ शांतिपूर्ण समझौते का रास्ता निकाला गया।

इस समझौते में बिरादरी के विभिन्न शहरों जैसे खतौली, मुजफ्फरनगर, रामपुर, जलालाबाद, शामली, चौसाना आदि से जुड़े जिम्मेदार और सम्मानित लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तंजीम के बुजुर्गों और जिम्मेदार सदस्यों की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच चल रहे विवादों को समाप्त कराया गया और अदालतों में चल रहे मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया भी पूरी कराई गई।

इतना ही नहीं, लड़की पक्ष का दहेज का सामान भी सम्मानपूर्वक वापस कराया गया। जानकारी के अनुसार, हाजी नज़ीर साहब स्वयं मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने दोनों परिवारों को एक-दूसरे से हाथ मिलवाकर पुराने गिले-शिकवे खत्म कराए।

इस मौके पर मौजूद लोगों ने कहा कि समाज में ऐसे फैसले अदालतों से ज्यादा रिश्तों को बचाने वाले साबित होते हैं। लोगों ने हाजी नज़ीर अहमद और तंजीम से जुड़े जिम्मेदारों की इस कोशिश की सराहना करते हुए इसे बिरादरी की एक बड़ी कामयाबी बताया।

अल्लाह पाक से दुआ की गई कि दोनों पक्षों को आगे चलकर बेहतर जीवनसाथी नसीब हों और उनकी जिंदगी खुशहाल बने। साथ ही तंजीम के सभी ओहदेदारों और समाजसेवियों को इस नेक कार्य का बेहतर अज्र अता फरमाए।

यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर हाजी नज़ीर अहमद साहब द्वारा साझा की गई वायरल सूचना के आधार पर तैयार की गई है।


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Thursday, May 21, 2026

मुल्तानी समाज का भविष्य: पढ़ाई से तरक्की, फिजूल खर्च से बर्बादी

जिस समाज ने इल्म को अपनाया, उसी ने तरक्की पाई “उस समाज के हालात कभी नहीं बदलते जो समाज अपने हालात बदलना नहीं चाहता।”

यह सिर्फ एक जुमला नहीं, बल्कि आज के दौर की सबसे बड़ी सच्चाई है। वक्त तेजी से बदल रहा है। दुनिया टेक्नोलॉजी, पढ़ाई और हुनर के दम पर आगे बढ़ रही है, लेकिन अगर कोई समाज अब भी पुरानी सोच, दिखावे और फिजूल रस्मों में उलझा रहे तो उसका पीछे रह जाना तय है।

पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी के बीच आज सबसे ज्यादा जरूरत इस बात की है कि हम अपनी नई नस्ल को तालीम और हुनर की तरफ लेकर जाएं। क्योंकि अब सिर्फ मेहनत काफी नहीं, मेहनत के साथ इल्म भी जरूरी है।

पढ़ाई ही असली दौलत है

एक वक्त था जब लोग जमीन, दुकान और कारोबार को ही सबसे बड़ी पूंजी समझते थे। लेकिन आज का दौर अलग है। अब वही इंसान आगे बढ़ रहा है जिसके पास तालीम, हुनर और नई सोच है। पढ़ा-लिखा नौजवान नौकरी भी हासिल कर सकता है, कारोबार भी खड़ा कर सकता है और डिजिटल दुनिया में भी अपनी पहचान बना सकता है।

आज कंप्यूटर, अकाउंटिंग, मेडिकल, डिजाइनिंग, मोबाइल टेक्नोलॉजी, ऑनलाइन बिजनेस और सरकारी नौकरियों में हर तरफ मौके मौजूद हैं। जरूरत सिर्फ सही दिशा और मेहनत की है।

सबसे अहम बात यह है कि बेटियों की तालीम को भी उतनी ही अहमियत दी जाए जितनी बेटों की। क्योंकि एक पढ़ी-लिखी बेटी सिर्फ खुद नहीं बदलती, बल्कि पूरे घर और आने वाली नस्लों की सोच बदल देती है। जिस घर की मां तालीमयाफ्ता होती है, वहां बच्चों की परवरिश, तहज़ीब और तरक्की खुद-ब-खुद बेहतर हो जाती है।

हर घर को कोशिश करनी चाहिए कि कम से कम एक बच्चा कॉलेज तक जरूर पढ़े। अगर आर्थिक परेशानी हो तो स्कॉलरशिप, सरकारी योजनाओं और समाजी मदद का सहारा लिया जाए। तालीम पर खर्च कभी बर्बाद नहीं जाता।

शादी में दिखावा समाज को कमजोर कर रहा है

आज समाज के कई घर सिर्फ इसलिए परेशान हैं क्योंकि शादी को जरूरत से ज्यादा मुश्किल और महंगा बना दिया गया है। दो दिन की रस्मों के लिए लोग कई-कई साल तक कर्ज चुकाते रहते हैं।

महंगे बैंक्वेट हॉल, लंबी बारात, जरूरत से ज्यादा खाना, दिखावटी डेकोरेशन, दहेज और “लोग क्या कहेंगे” जैसी सोच ने समाज को आर्थिक रूप से कमजोर कर दिया है। कई गरीब परिवार सिर्फ इन बेकार रस्मों की वजह से बेटियों की शादी तक टाल देते हैं।

हकीकत यह है कि शादी की असली खूबसूरती सादगी, मोहब्बत और आसानी में है, ना कि फिजूल खर्च और दिखावे में।

बदलाव की शुरुआत अपने घर से करें

अगर समाज को बदलना है तो शुरुआत हर इंसान को अपने घर से करनी होगी। शादी को आसान बनाइए। मस्जिद में सादा निकाह और घर या छोटे हॉल में सादा वलीमा भी एक बेहतर और शरीफाना तरीका है। 100 से 150 मेहमान काफी होते हैं, बाकी पैसा बच्चों की पढ़ाई, कारोबार या भविष्य की जरूरतों के लिए बचाया जा सकता है।

सामूहिक निकाह जैसी मुहिम भी समाज के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है। एक ही जगह कई जोड़ों की शादी होने से खर्च कम होता है और गरीब परिवारों पर बोझ भी नहीं पड़ता।

सबसे जरूरी बात यह है कि बेटी को बोझ समझने की सोच खत्म की जाए। बेटियों को इतना काबिल बनाया जाए कि वे जरूरत पड़ने पर खुद अपने पैरों पर खड़ी हो सकें और अपने परिवार का सहारा बन सकें।

इल्म हमेशा साथ रहता है

पैसा कभी कम तो कभी ज्यादा होता रहता है। रस्में और रिवाज भी वक्त के साथ बदल जाते हैं। लेकिन इल्म एक ऐसी दौलत है जो इंसान से कभी जुदा नहीं होती।

आज जरूरत इस बात की है कि अगली शादी में दिखावे के बजाय सादगी को अपनाया जाए, फिजूल खर्ची के बजाय बचत की जाए और उस बचत को बच्चों की तालीम और बेहतर भविष्य पर लगाया जाए। यही सोच मुल्तानी समाज को मजबूती देगी और आने वाली नस्लों को कामयाबी की नई राह दिखाएगी।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज पोर्टल/यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए राजस्थान से अब्दुल हकीम इमलीवाला की ख़ास रिपोर्ट।

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🤲 दुआओं की दरख्वास्त : बिरादरी के बुज़ुर्ग मिस्त्री अय्यूब अहमद साहब की हालत नाज़ुक, आईसीयू में भर्ती


अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार बढ़ई बिरादरी के लिए यह खबर बेहद अफसोसनाक और फिक्र करने वाली है कि बिरादरी के बुज़ुर्ग एवं सम्मानित शख्सियत जनाब मिस्त्री अय्यूब अहमद साहब वल्द जनाब मिस्त्री अज़ीमुल्ला साहब (मरहूम) निवासी गढ़ी पुख़्ता, हाल बाशिंदे नज़दीक मक्का मस्जिद, शामली (उत्तर प्रदेश) इन दिनों गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। उनकी हालत नाज़ुक बनी हुई है और उन्हें शामली स्थित प्राइवेट हॉस्पिटल “गंगा अमृत” के आईसीयू विभाग में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है।

बताया जाता है कि तकरीबन 85 वर्षीय मिस्त्री अय्यूब साहब को लगभग तीन वर्ष पूर्व ब्रेन स्ट्रोक आने की वजह से पैरालाइसिस (लकवा) हो गया था। इसके बाद से वह लगातार शारीरिक परेशानियों से जूझते रहे, लेकिन उम्र और बीमारी के बावजूद उन्होंने हमेशा सब्र, हिम्मत और अल्लाह की रज़ा पर भरोसा कायम रखा। आज उनकी बिगड़ती तबीयत ने पूरे बिरादरी समाज को गमगीन और फिक्रमंद कर दिया है।

मिस्त्री अय्यूब साहब अपनी सादगी, मेहनतकशी और नेक अखलाक की वजह से बिरादरी में खास पहचान रखते हैं। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी मेहनत, ईमानदारी और रिश्तों की मोहब्बत के साथ गुज़ारी। उनके चाहने वाले और जानने वाले लोग लगातार उनकी सेहतयाबी के लिए दुआएं कर रहे हैं।

आप तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि अल्लाह तआला के हुज़ूर खास दुआ फरमाएं कि अल्लाह मिस्त्री अय्यूब साहब को जल्द से जल्द मुकम्मल शिफ़ा-ए-कामिला अता फरमाए, उन्हें सेहत और तंदुरुस्ती के साथ दोबारा अपने घर और अपनों के बीच लौटाए तथा उनका साया हमेशा उनके परिवार पर कायम रखे।

🤲 अल्लाह तआला अपने हबीब ﷺ के सदके मिस्त्री अय्यूब साहब को जल्द शिफ़ा अता फरमाए।
आमीन सुम्मा आमीन।

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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका / न्यूज पोर्टल / यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए शामली, उत्तर प्रदेश से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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Wednesday, May 20, 2026

वाजिदपुर की अज़ीम शख्सियत हाजी महमूद हसन का इंतेकाल, मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी में शोक की लहर

बागपत जनपद की तहसील बड़ौत के गांव वाजिदपुर से मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी के लिए एक बेहद दुखद और गमगीन खबर सामने आई है। बिरादरी के सम्मानित एवं नेकदिल शख्सियत हाजी महमूद हसन साहब का बुधवार 20 मई 2026 को कज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया। उनके इंतेकाल की खबर मिलते ही गांव समेत आसपास के इलाकों और बिरादरी में शोक की लहर दौड़ गई। हर आंख नम दिखाई दी और लोगों ने गहरे दुख के साथ मरहूम को याद किया।

"इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलैहि राजिऊन"

बताया गया कि हाजी महमूद हसन साहब बेहद मिलनसार, दीनदार और समाज से जुड़े हुए इंसान थे। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी लोगों के बीच मोहब्बत, भाईचारे और इंसानियत का पैगाम देने में गुजारी। उनके अच्छे अखलाक और सादगी की वजह से गांव और बिरादरी में उन्हें खास इज्जत की निगाह से देखा जाता था।

मरहूम अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं, जिनमें उनके चार बेटे मुश्ताक अहमद, अब्बास अहमद, आरिफ हसन और मुहम्मद नदीम शामिल हैं। इसके अलावा तीन बेटियां, नाती-पोते, रिश्तेदार और चाहने वालों की बड़ी तादाद आज गम में डूबी हुई है। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और पूरे गांव में मातमी माहौल बना हुआ है।

हाजी महमूद हसन साहब की मय्यत को बुधवार शाम मगरिब की नमाज के बाद गांव वाजिदपुर के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक कर दिया गया। जनाजे में बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत कर मरहूम को नम आंखों से आखिरी विदाई दी। लोगों ने उनकी मगफिरत और जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम के लिए दुआएं कीं।

इस मौके पर बिरादराना हजरात से अपील की गई कि मय्यत वालों के घर जाकर उन पर खाने-पीने का अतिरिक्त बोझ न बनें और गम के माहौल में हंसी-मजाक या गैर जरूरी बातों से परहेज करें। साथ ही जनाजे के दौरान मोबाइल फोन पर बातचीत या दुनियावी चर्चाओं से बचते हुए कलिमा तय्यबा “ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुर्र रसूल अल्लाह” का विर्द करते रहने की भी नसीहत की गई।

अल्लाह तआला मरहूम हाजी महमूद हसन साहब की मगफिरत फरमाए, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता करे और तमाम घरवालों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन सुम्मा आमीन।

ज्यादा जानकारी के लिए मुहम्मद इरशाद (पावी) लोनी गाजियाबाद के मोबाइल नंबर 8882118573 पर संपर्क किया जा सकता है।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज पोर्टल/यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए बागपत, उत्तर प्रदेश से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की विशेष रिपोर्ट।

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Tuesday, May 19, 2026

😭 बिरादरी पर टूटा ग़म का पहाड़ — दो घरों से उठीं मातम की सदाएं, नम आंखों के साथ कीजिए मगफिरत की दुआ 😭

पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी से आज दो बेहद अफ़सोसनाक और दिल को ग़मगीन कर देने वाली खबरें हासिल हुई हैं, जिनसे पूरे इलाके में रंजो-ग़म की लहर दौड़ गई। दोनों मरहूमीन अपने अच्छे अख़लाक, मिलनसारी और नेक सीरत की वजह से बिरादरी में खास पहचान रखते थे। उनके इंतेकाल की खबर सुनकर हर आंख अश्कबार है और लोग उनके लिए दुआ-ए-मगफिरत कर रहे हैं।

🕯️ जनाब कालू मिस्त्री साहब की अहलिया का इंतकाल

आप सभी बिरादराना हजरात को यह इत्तला दी जाती है कि आज दिन बुध बा-तारीख़ 20 मई 2026 को गांव पुसार जिला बागपत, उत्तर प्रदेश हाल बाशिंदे लोनी जिला गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश में जनाब कालू मिस्त्री साहब की अहलिया का कज़ा-ए-ईलाही से इंतेकाल हो गया।

मरहूमा के इंतकाल की खबर सुनते ही रिश्तेदारों, अजीज़ों और इलाके के लोगों में गहरा दुख फैल गया। बाद नमाज़ जौहर मैय्यत को किया जाएगा सपुर्द खाक, लिहाज़ा आप सभी हजरात भी जनाजे में शरीक होकर सवाबे दारेन हासिल करें 

अल्लाह तआला मरहूमा की मगफिरत फरमाए, उनकी कब्र को नूर से भर दे, कब्र की तमाम मंजिलों को आसान फरमाए और जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए।
अल्लाह पाक तमाम अहलेखाना को यह सदमा बर्दाश्त करने का हौसला दे और सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।

दफ़्न की दुआ:
“अल्लाहुम्मग़फिर लहा वरहम्हा व आफिहा वाफु अन्हा।”
ऐ अल्लाह! मरहूमा की मगफिरत फरमा, उन पर रहम फरमा, उन्हें आफियत अता फरमा और उनकी खताओं से दरगुज़र फरमा।


🕯️ सामाजिक कार्यकर्ता जनाब महमूद हसन साहब का इंतकाल

दूसरी ग़मगीन खबर कस्बा छपरोली जिला बागपत, उत्तर प्रदेश से हासिल हुई है, जहां बेहद मिलनसार, नेकदिल और सामाजिक कार्यकर्ता जनाब महमूद हसन साहब वल्द जनाब हाजी हकीमू साहब का कल दिन पीर बा-तारीख 18 मई 2026 को कज़ा-ए-ईलाही से इंतेकाल हो गया।

मरहूम अपने खुशमिजाज मिज़ाज, अच्छे अख़लाक और समाजी खिदमात की वजह से इलाके में खास मुकाम रखते थे। उनके इंतकाल से बिरादरी ने एक नेक इंसान और समाज ने एक हमदर्द शख्सियत को खो दिया है। जो भी उनसे मिला, उनके अख़लाक और मोहब्बत को कभी भूल नहीं पाएगा।

मैय्यत को आज दिन मंगल बा-तारीख 19 मई 2026 को सुबह कस्बा छपरोली के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया। लिहाज़ा तमाम हजरात से गुजारिश है कि मरहूम के लिए दुआ-ए-मगफिरत करें और सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

अल्लाह तआला मरहूम की मगफिरत फरमाए, उनकी कब्र को जन्नत के बागों में से एक बाग बनाए और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।

जनाज़े और दफ़्न की दुआ:
“अल्लाहुम्मा इन्ना फलाना फी जिम्मतिका व हब्लि जिवारिका फक़िहि मिन फित्नतिल क़ब्रि व अज़ाबिन्नार।”
ऐ अल्लाह! मरहूम को अपनी हिफाज़त और रहमत में जगह अता फरमा तथा कब्र और जहन्नम के अज़ाब से महफूज़ फरमा।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी की देश की इकलौती राष्ट्रीय समाचार पत्रिका / न्यूज पोर्टल / यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए बागपत, उत्तर प्रदेश से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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Friday, May 15, 2026

💔 “एक और साया उठ गया… ”सोनीपत की सरज़मीं ने खो दिया बिरादरी का एक नेक, असरदार और मिलनसार बुज़ुर्ग


निहायत ही रंजो-ग़म के साथ आप सभी बिरादराना हजरात को यह इत्तिला दी जाती है कि गांव हुल्लाहेरी, जिला सोनीपत हरियाणा के मूल निवासी एवं हाल बाशिंदा ईदगाह कॉलोनी, सोनीपत हरियाणा जनाब हाजी अब्दुल लतीफ़ साहब का आज दिन शनिचर, 16 मई 2026 को कज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया। मरहूम की उम्र तकरीबन 95 साल बताई जा रही है।

मरहूम हाजी अब्दुल लतीफ़ साहब अपनी नेकदिली, मिलनसारी, शानदार अख़लाक़ और बिरादरी में मजबूत पकड़ रखने वाले बुज़ुर्गों में शुमार किए जाते थे। वह ऐसे इंसान थे जिनकी बात को लोग एहतराम से सुनते और मानते थे। उनके इंतेकाल की खबर से पूरे इलाके और बिरादरी में ग़म की लहर दौड़ गई है।

बताया गया है कि मय्यत को आज बाद नमाज़ असर सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम अहबाब और बिरादराना हजरात से गुजारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मगफिरत करें और सवाबे दारेन हासिल करें।

🤲 कब्र पर मिट्टी डालते वक्त पढ़ी जाने वाली दुआ

"मिन्हा खलक्नाकुम व फीहा नुईदुकुम व मिन्हा नुख्रिजुकुम तारतन उख़रा"

तर्जुमा:
“हमने तुम्हें इसी मिट्टी से पैदा किया, और इसी में तुम्हें लौटाएंगे, और इसी से दोबारा निकालेंगे।”

इसके बाद यह दुआ भी पढ़ी जाती है:

"अल्लाहुम्मग़फिर लहु वरहम्हु व आफिहि वाफु अन्हु"

तर्जुमा:
“ऐ अल्लाह! मरहूम की मगफिरत फरमा, उन पर रहम फरमा, उन्हें आफियत अता फरमा और उनकी खतााओं को माफ फरमा।”

अल्लाह तआला मरहूम हाजी अब्दुल लतीफ़ साहब की मगफिरत फरमाए, उनकी कब्र को जन्नत के बागों में से एक बाग बनाए और तमाम घरवालों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।

📞 ज्यादा जानकारी के लिए राब्ता करें:

- मोहम्मद इरफ़ान साहब (गौरीपुर वाले) — 9896263240
- मोहम्मद साजिद साहब (सोनीपत वाले) — 9896564786

🔹 पारिवारिक जानकारी 🔹

मरहूम हाजी लतीफ़ साहब के वालिद मोहतरम जनाब सिराजुद्दीन साहब थे। वह कुल 9 भाइयों में शामिल थे, जिनमें से इस वक्त दो भाई हयात हैं जबकि बाकी सभी भाई पहले ही इंतेकाल फरमा चुके हैं।

मरहूम अपने पीछे 4 लड़के, 3 लड़कियां, पौते-पोतियां, नाते-नातिन समेत बड़ा कुनबा और भरा-पूरा खानदान छोड़ गए हैं। उनके इंतेकाल से पूरे परिवार और बिरादरी में गहरा ग़म पाया जा रहा है।

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Thursday, May 14, 2026

🕯️ मोमबत्ती की रोशनी में लिखी गई कामयाबी की कहानी — अरमिश मिर्ज़ा ने साबित कर दिया कि हालात नहीं, हौसले जीतते हैं

जहां आज के दौर में बच्चे छोटी-छोटी सुविधाओं के बिना पढ़ाई की कल्पना भी नहीं कर पाते, वहीं उत्तर प्रदेश के जनपद बागपत की होनहार बेटी अरमिश मिर्ज़ा ने संघर्ष, सब्र और मेहनत की ऐसी मिसाल पेश की है जिसने हर आंख को नम और हर दिल को गर्व से भर दिया है।

Gateway The No.1 School की छात्रा अरमिश मिर्ज़ा ने CBSE बोर्ड परीक्षा 2025-26 में शानदार 90% अंक प्राप्त कर न केवल अपनी क्लास में पहला मुकाम हासिल किया बल्कि पूरे कॉलेज में 14वां स्थान प्राप्त कर अपने परिवार, खानदान, बिरादरी और समाज का सिर फख्र से ऊंचा कर दिया।

आपको बताते चलें कि नगर पालिका के सामने एवं कोतवाली सदर बागपत, उत्तर प्रदेश निवासी जनाब मोहम्मद शमी साहब की साहिबजादी अरमिश मिर्ज़ा का परिवार लंबे समय से आपसी रंजिश और घरेलू तनाव से गुजर रहा है। हालात इतने कठिन हो गए कि घर पर लगा सोलर सिस्टम तक हटा दिया गया और घर की बिजली भी काट दी गई

लेकिन कहते हैं ना कि जिनके इरादे बुलंद हों, उनके रास्ते हालात नहीं रोक सकते।
अरमिश मिर्ज़ा ने कभी अपने वालिद मोहम्मद शमी साहब और वालिदा कौशर जहां से किसी सुख-सुविधा की मांग नहीं की। बिजली के अभाव में इस बेटी ने मोमबत्ती की रोशनी में पढ़ाई कर वह मुकाम हासिल किया, जिसे पाने का सपना हजारों विद्यार्थी देखते हैं।

यह केवल एक छात्रा की सफलता नहीं, बल्कि संघर्षों पर जीत, हालातों को चुनौती और समाज को आईना दिखाने वाली एक प्रेरणादायक दास्तान है। अरमिश मिर्ज़ा ने साबित कर दिया कि अगर इंसान के अंदर मेहनत, लगन और आत्मविश्वास हो तो अंधेरे घरों से भी रोशनी की नई मिसालें जन्म लेती हैं।

आज पूरी बिरादरी को इस बेटी पर फख्र है।
"मुल्तानी समाज" न्यूज़ परिवार इस होनहार बच्ची को दिल से सैल्यूट करता है और देश की सबसे बड़ी एवं क्रांतिकारी तंजीम "मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट" रजिस्टर्ड ऑल इंडिया से मांग करता है कि अरमिश मिर्ज़ा को बिरादरी के सबसे प्रतिष्ठित सम्मान "मुल्तानी गौरव अवॉर्ड" से नवाज़ा जाए, ताकि आने वाली नस्लों को भी संघर्ष से लड़कर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल सके।

यह कहानी उन लोगों के लिए भी एक जवाब है जो यह समझते हैं कि कामयाबी केवल सुविधाओं से मिलती है।
असलियत यह है कि इतिहास हमेशा उन्हीं लोगों ने लिखा है जिन्होंने अंधेरों में भी अपने सपनों का दिया बुझने नहीं दिया।


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