Sunday, August 16, 2026

निम्बरी की बुज़ुर्ग शख्सियत मरियम बी का इंतिक़ाल — बिरादरी में ग़म की लहर, नमाज़-ए-असर के बाद सुपुर्द-ए-ख़ाक

निम्बरी/पानीपत (हरियाणा)।
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

निहायत रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ तमाम बिरादराने हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि मरहूम चौधरी मीर हसन नूरवालिया की बेगम मरियम साहिबा, उम्र 92 साल, निवासी गाँव निम्बरी, ज़िला पानीपत, हरियाणा, का इतवार 16 अगस्त 2026 को सुबह तकरीबन 10 बजे इंतिक़ाल हो गया।

मरहूमा मरियम साहिबा गाँव निम्बरी की सबसे बुज़ुर्ग और सम्मानित शख्सियतों में शुमार थीं। उनकी वफ़ात की ख़बर से परिवार, रिश्तेदारों, अज़ीज़ों और मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी में गहरे रंज-ओ-ग़म की लहर दौड़ गई है।

मरहूमा अब्दुल सत्तार साहब की वालिदा-ए-मुहतरमा थीं। वह अपने पाँच बेटों में दूसरे नंबर के बेटे अब्दुल सत्तार के साथ मनमोहन नगर, बाबैल रोड, मस्जिद अबू बकर के पास रह रही थीं।

नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूमा का जनाज़ा नमाज़-ए-असर से पहले उनके पुश्तैनी मकान, गाँव निम्बरी ले जाया जाएगा। इसके बाद बाद नमाज़-ए-असर गाँव निम्बरी के कब्रिस्तान में नमाज़-ए-जनाज़ा अदा किए जाने के बाद उन्हें सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

मरहूमा अपने पीछे 5 बेटे, 1 बेटी, 6 नवासे तथा लगभग 20–22 पोते-पोतियों समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। उनकी वफ़ात से परिवार पर ग़म का पहाड़ टूट पड़ा है और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब तथा रिश्तेदार गहरे सदमे में हैं।

मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त मरहूमा मरियम साहिबा की कामिल मग़फ़िरत फरमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फरमाए, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फरमाए, क़ब्र के तमाम मराहिल आसान फरमाए और उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे।

ऐ अल्लाह! मरहूमा को जन्नतुल फ़िरदौस में आला से आला मुक़ाम अता फरमा, उन्हें अपने ख़ास रहमत और करम के साये में जगह अता फरमा और उनके नेक आमाल को उनके लिए सदक़ा-ए-जारीया बना दे।

या अल्लाह! मरहूमा के जनाज़े में शरीक होने वाले तमाम हज़रात की हाज़िरी और दुआओं को क़ुबूल फरमा तथा उन्हें आख़िरत के लिए ज़ख़ीरा बना दे।

पसमांदगान के लिए दुआ

अल्लाह तआला मरहूमा के तमाम बेटे-बेटियों, नवासों, पोते-पोतियों, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। इस सदमे को सहने की ताक़त दे और मरहूमा के लिए की जाने वाली तमाम दुआओं को क़ुबूल फरमाए।

बेशक हम सब अल्लाह ही के हैं और उसी की तरफ़ लौटकर जाना है।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

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"मुल्तानी समाज" की विशेष रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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