Friday, February 20, 2026

🕊️ ग़मगीन इत्तिला: मेरठ की मोहतरमा का इंतिक़ाल, बिरादरी में शोक की लहर

निहायत ही अफ़सोस और रंज-ओ-ग़म के साथ अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को यह इत्तिला दी जाती है कि बीती रात, दिन जुमेरात बा-तारीख़ 19 फ़रवरी 2026 को जनाब हाफिज़ फारूख साहब मशीन वाले (साकिन: पूर्वी फैय्याज अली, नज़दीक नगर निगम घंटाघर, मेरठ, उत्तर प्रदेश) की अहलिया मोहतरमा का इंतिक़ाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूमा का जनाज़ा नमाज़-ए-जुमा के वक़्त, मोहल्ला पूर्वी फैय्याज अली, मेरठ में ही अदा किया जाएगा। तमाम अहबाब से गुज़ारिश है कि ज़्यादा से ज़्यादा तादाद में शरीक होकर मरहूमा के हक़ में दुआ-ए-मग़फिरत फरमाएं और घर वालों को सब्र-ए-जमील की तसल्ली दें।

अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फिरत फरमाए, उनकी कब्र को रौशन करे और जन्नतुल फिरदौस में आला मुक़ाम अता फरमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।


📌 मुकम्मल मालूमात की दरख्वास्त

यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल इत्तिला के ज़रिए मालूम हुई। खबर की तस्दीक और तकमील के मक़सद से इसे प्रकाशित किया जा रहा है।
जो हजरात मरहूमा के बारे में मुकम्मल और सही मालूमात रखते हों, उनसे दरख्वास्त है कि फौरन “मुल्तानी समाज” न्यूज के मोबाईल नंबर 📞 9410652990 पर कॉल या मैसेज के ज़रिए तफसीली जानकारी मुहैया कराएं, ताकि बिरादरी तक सही और भरोसेमंद खबर पहुंच सके।


📢 एक ज़रूरी ऐलान – इंतेकाल की खबर भेजने के लिये अहम् हिदायतें

अक्सर अधूरी जानकारी की वजह से लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते या सही वक़्त का इल्म नहीं हो पाता। इस अहम मसले को मद्देनज़र रखते हुए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से इल्तिज़ा करती है कि जब भी किसी अज़ीज़ के इंतकाल की खबर भेजें, तो इन बातों का ख़ास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ मुकम्मल पता – अस्ल वतन और मौजूदा सुकूनत।
3️⃣ दफ़ीने का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार अफ़राद (एक-दो) के फोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतकाल हो तो मरहूम का फोटो शामिल करें।
6️⃣ इंतकाल की वजह (अगर बयान करना मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम – जैसे भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वगैरह।

👉 इन तमाम जानकारियों से खबर मुकम्मल और मुस्तनद बनेगी, जिससे बिरादरी के अफराद तक सही और वक़्ती इत्तिला पहुंच सके।


📰 डिस्क्लेमर (Disclaimer)

पत्रिका में प्रकाशित किसी भी प्रकार का लेख, समाचार, संपादकीय, विचार, टिप्पणी, प्रेस विज्ञप्ति, विज्ञापन या अन्य सामग्री संबंधित लेखक, संवाददाता या विज्ञापनदाता के व्यक्तिगत विचार हैं।

इनसे पत्रिका के संपादक, प्रकाशक, प्रबंधन या संस्थान की सहमति आवश्यक रूप से अभिप्रेत नहीं है। प्रकाशित सामग्री की सत्यता, विश्वसनीयता अथवा किसी दावे के लिए संबंधित लेखक या विज्ञापनदाता स्वयं उत्तरदायी होंगे।

पत्रिका एवं प्रबंधन इस संबंध में किसी भी प्रकार की कानूनी, सामाजिक या वित्तीय जिम्मेदारी से पूर्णतः मुक्त रहेंगे। किसी भी विवाद या न्यायिक कार्यवाही की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।


📚 सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित
पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका

🖋️ “मुल्तानी समाज”
ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट

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इंतिहाई अफ़सोसनाक इत्तिला: हज्जन शाहजहां बी का इंतिक़ाल, बिरादरी ग़मगीन

अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादराना हज़रात को बड़े ही रंजो-ग़म के साथ यह इत्तिला दी जाती है कि मरहूम जनाब तय्यब साहिब (जानसठ वाले) की अहलिया, हज्जन शाहजहां बी का आज दिन शनिवार, 21 फ़रवरी 2026 को अल सुबह लगभग 4 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया। इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूमा का इंतिक़ाल न सिर्फ़ उनके खानदान बल्कि पूरी बिरादरी के लिए गहरे सदमे का सबब बना है। वह रिश्ते में मिन्हाज मिर्ज़ा फलावदा वालों की अम्मी की चची थीं और ज़ैदी फ़ार्म, मेरठ निवासी हबीब अहमद पेशकार साहब के साहबज़ादे शकील अहमद साहब की सास थीं। मरहूमा अपने लख़्ते-जिगर जनाब आमिल साहब और जनाब आदिल साहब के साथ रह रही थीं।

हज्जन शाहजहां बी अपनी सादगी, शराफ़त, और दीनी मिज़ाज के लिए जानी जाती थीं। उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी ख़ामोशी से खिदमत, सब्र और शुक्र के साथ गुज़ारी। उनकी मौजूदगी घर के लिए रहमत और बरकत का सबब थी। आज उनके जाने से एक ऐसा खालीपन पैदा हुआ है जिसे अल्फ़ाज़ में बयान करना मुश्किल है।

मरहूमा के जनाज़े की नमाज़ आज दोपहर 1 बजे रूड़की रोड, मुहल्ला रामपुरी, मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश में अदा की जाएगी। तमाम अहबाब से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फिरत करें और सवाबे दारेन हासिल करें।

अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फिरत फरमाए, उनकी कब्र को रौशन और वसीअ फरमाए, और जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फरमाए। आमीन।
अल्लाह तआला अहले-खानदान को सब्र-ए-जमील अता फरमाए और इस सदमे को बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ दे।


🚨 ज़रूरी ऐलान

इंतेकाल की खबर भेजने के लिये अहम् हिदायतें

अक्सर देखा गया है कि किसी अज़ीज़ के इंतिक़ाल की खबर देर से या अधूरी जानकारी के साथ पहुंचती है, जिसकी वजह से कई लोग जनाज़े और दफ़ीने में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि इंतिक़ाल की खबर भेजते वक़्त नीचे दी गई बातों का खास एहतिमाम करें:

📌 भेजते समय इन बातों का ज़रूर ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम तथा वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता — अस्लन कहां के रहने वाले थे और फिलहाल कहां मुक़ीम थे।
3️⃣ जनाज़े/दफ़ीने का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार शख्स (एक या दो) के मोबाइल नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतिक़ाल हुआ हो तो मरहूम की साफ़ फोटो भी साथ भेजें।
6️⃣ इंतिक़ाल की वजह (अगर बयान करना मुनासिब समझें)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम — जैसे वालिदैन, भाई-बहन, औलाद वगैरह।

👉 मुकम्मल मालूमात से खबर वक़्त पर और सही अंदाज़ में शाया की जा सकेगी, जिससे बिरादरी के लोग आसानी से शरीक हो सकेंगे।


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किसी भी विवाद, शिकायत या न्यायिक कार्यवाही की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।




सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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🌍 “मुल्तानी घराना” — नस्लों को जोड़ने वाला डिजिटल शिजरा, जो देश ही नहीं विदेशों तक बिरादरी का नाम रोशन कर रहा है

द्वारा शुरू किया गया “मुल्तानी घराना” प्रोजेक्ट आज मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के लिए सिर्फ एक सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि हमारी पहचान, विरासत और अमानत बन चुका है। यह वह डिजिटल शिजरा है जो हमारी जड़ों को संभालते हुए आने वाली नस्लों के लिए राह रोशन कर रहा है।


🧭 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि — “मुल्तानी” पहचान की जड़ें

“मुल्तानी” पहचान का संबंध ऐतिहासिक मुल्तान क्षेत्र से माना जाता है। लोहे और लकड़ी की कारीगरी—यानी लोहार और बढ़ई का हुनर—हमारी असल पहचान रही है। रोज़गार, व्यापार और सामाजिक परिस्थितियों के चलते अलग-अलग दौर में हिजरत हुई, और बिरादरी भारत के कई राज्यों में बसती चली गई।

आज भी यह हुनर हमारी रगों में है—बस औज़ार बदले हैं, इरादे नहीं।


🗺️ भारत में राज्यवार फैलाव — मेहनत की मिसाल

🔹 उत्तर भारत (मुख्य केंद्र)

  • उत्तर प्रदेश — पश्चिमी यूपी (शामली, मुज़फ्फरनगर, मेरठ, सहारनपुर), रोहिलखंड, अवध
  • दिल्ली (NCT) — पुरानी दिल्ली, उत्तर-पूर्वी व बाहरी दिल्ली
  • हरियाणा — यमुनानगर, करनाल, पानीपत
  • पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश (सीमावर्ती क्षेत्र)

🔹 पश्चिम व मध्य भारत

  • राजस्थान — जयपुर, अजमेर, अलवर
  • गुजरात — अहमदाबाद, सूरत
  • महाराष्ट्र — मुंबई, पुणे
  • मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़

🔹 पूर्व व अन्य क्षेत्र

  • बिहार, झारखंड
  • जम्मू क्षेत्र

यह फैलाव हमारी मेहनत, हुनर और हालात से तालमेल की गवाही देता है।


🧬 नस्लनामा — सिलसिला-ए-अव्वल से आज तक

शिजरा सिर्फ नामों की सूची नहीं, बल्कि रिश्तों की अमानत है।

बुनियादी मूल:
मूल स्थान — मुल्तान
पहचान — मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई)
पारंपरिक पेशा — लोहे व लकड़ी की कारीगरी

सिलसिला-ए-अव्वल:

हाजी मुल्तानी साहब → शेख नूर मोहम्मद → हाजी करीमुद्दीन → हाजी सत्तार → मियां अब्दुल गफ्फार → मोहम्मद इस्माईल → हाजी रहमुद्दीन → हाजी सगीर अहमद → ज़मीर आलम → लारेब ज़मीर / रुशान ज़मीर

यह सिलसिला बताता है कि हम कहाँ से आए, कैसे फैले और किन-किन नामों ने इस पहचान को आगे बढ़ाया।


💻 “मुल्तानी घराना” — डिजिटल दौर की दीनी व सामाजिक ज़रूरत

ट्रस्ट ने वर्षों की मेहनत और संसाधनों से शिजरे को डिजिटल रूप दिया है, ताकि:

  • देश-विदेश में फैली बिरादरी अपने कुनबे को जोड़ सके
  • आने वाली नस्लों को सही जानकारी मिले
  • खानदान की मैपिंग आसान हो
  • विरासत हमेशा के लिए महफ़ूज़ रहे

दीनी ऐतबार से भी यह काम सवाब का ज़रिया है—
अपनी नस्ल, अपने बुजुर्गों और अपने सिलसिले को याद रखना और उसे सुरक्षित रखना एक अमानत की हिफ़ाज़त है। जब नई पीढ़ी अपने अस्ल से वाकिफ़ होगी, तो उसमें इत्तेहाद, जिम्मेदारी और खिदमत का जज़्बा और मजबूत होगा।


🤝 युवाओं के लिए सुनहरा मौका

इस प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए ऐसे पढ़े-लिखे युवक-युवतियों की ज़रूरत है जो अपने-अपने शहर से ही सॉफ्टवेयर पर काम करना चाहें।
यह सिर्फ टेक्निकल काम नहीं—यह बिरादरी की खिदमत है।


📰 बिरादरी की आवाज़

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत और दिल्ली से प्रकाशित बिरादरी की पत्रिका “मुल्तानी समाज” भी इस मुहिम को मजबूती दे रही है—ताकि हर घर तक सही जानकारी पहुंचे।


🌿 “मुल्तानी घराना” — पहली से सातवीं पीढ़ी तक नस्लों को जोड़ने वाला डिजिटल शिजरा

की जानिब से तैयार किया गया “मुल्तानी घराना” सिर्फ एक सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की नस्लों को जोड़ने वाली अमानत है। यह वह डिजिटल शिजरा है जो हमारे बुजुर्गों की याद, हमारी पहचान और आने वाली पीढ़ियों की राह को एक साथ सुरक्षित करता है।


🧭 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि — अस्ल से पहचान तक

“मुल्तानी” पहचान का रिश्ता ऐतिहासिक मुल्तान से माना जाता है। लोहे और लकड़ी की कारीगरी हमारी बुनियादी पहचान रही। वक्त के साथ रोज़गार और हालात के चलते बिरादरी भारत के अलग-अलग सूबों में फैलती चली गई—मगर अपनी तहज़ीब और दीनी जड़ों से जुड़ी रही।


🧬 पहली से सातवीं पीढ़ी तक पूरा सिलसिला

👴 पहली पीढ़ी (सिलसिला-ए-अव्वल)

हाजी मुल्तानी साहब
↳ “मुल्तानी” पहचान यहीं से मशहूर मानी जाती है।


👨‍🦳 दूसरी पीढ़ी

  1. हाजी करीमुद्दीन मुल्तानी
  2. शेख नूर मोहम्मद मुल्तानी

👨 तीसरी पीढ़ी (फैलाव की शुरुआत)

उत्तर भारत शाखा:

  • हाजी सत्तार मुल्तानी
  • मियां अब्दुल गफ्फार

पश्चिम भारत शाखा:

  • हाजी यूसुफ़ मुल्तानी
  • शेख अब्दुल वहीद

👨‍👦 चौथी पीढ़ी (राज्यवार पहचान)

  • उत्तर प्रदेश — उस्ताद इलाही बख्श, मियां रशीद अहमद
  • दिल्ली — हाजी कादिर बख्श, मियां हबीबुल्लाह
  • हरियाणा — मियां गुलाम हुसैन, शेख रज़ा मोहम्मद
  • पंजाब — हाजी फज़ल करीम, मियां खुदा बख्श
  • राजस्थान — उस्ताद नूर अहमद, मियां सलीमुद्दीन

👨‍👦‍👦 पांचवीं पीढ़ी (विस्तार काल)

  • मध्य प्रदेश — हाजी जमील अहमद, शेख बशीर अहमद
  • गुजरात — हाजी इस्माइल मुल्तानी, मियां अज़ीज़ अहमद
  • उत्तराखंड — हाजी रशीद अहमद, शेख नज़ीर अहमद

👨‍👧‍👦 छठी पीढ़ी (आधुनिक दौर)

  • महाराष्ट्र — हाजी अब्दुल मजीद, शेख अनीस अहमद
  • बिहार — हाजी लतीफ़ अहमद
  • झारखंड — मियां हामिद अली
  • छत्तीसगढ़ — हाजी वहीद अहमद
  • हिमाचल प्रदेश — मियां नूर मोहम्मद
  • जम्मू — हाजी अब्दुल रऊफ

🧑‍💼 सातवीं पीढ़ी (वर्तमान और भविष्य)

आज की पीढ़ी — जो शिक्षा, व्यापार, सरकारी-गैरसरकारी नौकरी, टेक्नोलॉजी और समाजसेवा में आगे बढ़ रही है — अपने-अपने शहरों में खानदान, कुनबा और घराना के नाम से पहचानी जाती है।

यही पीढ़ी “मुल्तानी घराना” डिजिटल शिजरे के जरिए अपनी जड़ों को आने वाली नस्लों तक पहुंचा रही है।


💻 “मुल्तानी घराना” — दीनी और सामाजिक फायदे

  • नस्ल और सिलसिले की सही जानकारी महफ़ूज़ रहती है
  • आने वाली पीढ़ियां अपने बुजुर्गों से जुड़ी रहती हैं
  • बिरादरी में इत्तेहाद और पहचान मजबूत होती है
  • गलतफहमियों और बिखराव से बचाव होता है
  • दीनी एतबार से अपने अस्ल और बुजुर्गों को याद रखना सवाब का ज़रिया है

यह प्रोजेक्ट वर्षों की मेहनत, समय और संसाधनों से तैयार किया गया ताकि देश-विदेश में फैली बिरादरी एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जुड़ सके।


🤝 युवाओं के लिए पैग़ाम

ट्रस्ट को ऐसे पढ़े-लिखे युवक-युवतियों की जरूरत है जो अपने शहर से ही इस सॉफ्टवेयर पर काम कर सकें। यह सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि अपनी कौम की खिदमत है।


✨ आख़िरी बात

“मुल्तानी घराना” सिर्फ नाम नहीं—
यह हमारी पहचान, हमारी तहज़ीब और हमारी नस्लों को जोड़ने वाली कड़ी है।

आइए, अपने शिजरे को अपडेट करें, अपनी जानकारी दर्ज कराएं और इस धरोहर को मजबूत बनाएं—ताकि आने वाली नस्लें फख्र से कह सकें कि हमने अपनी जड़ों को संभाल कर रखा।



✨ निष्कर्ष

“मुल्तानी घराना” सिर्फ एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नहीं—
यह हमारी पहचान, हमारी जड़ों और हमारी आने वाली नस्लों का पुल है।

आज वक्त है कि हम सब मिलकर इस धरोहर को मजबूत करें, अपने शिजरे को अपडेट करें और बिरादरी की इस टेक्नोलॉजी को हर घर तक पहुँचाएँ।
जब कौम अपने अस्ल को पहचान लेती है, तो तरक़्क़ी की राह खुद-ब-खुद आसान हो जाती है।


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Thursday, February 19, 2026

🕊️ इंतकाल की खबर: जनाब इस्लाम साहब फोरमैन का क़ज़ा-ए-इलाही से विसाल

निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराने इस्लाम को यह इत्तिला दी जाती है कि जनाब इस्लाम साहब फोरमैन (अस्ल साकिन: गंगेरू, कांधला, ज़िला शामली, उत्तर प्रदेश | हाल बाशिंदा: हिसार, हरियाणा) का आज दिन जुमेरात, 19 फ़रवरी 2026 को क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन।

यह खबर हमें सोशल मीडिया के ज़रिए मालूम हुई। “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका की टीम ने खबर की तस्दीक के लिए संबंधित जिम्मेदारान से राब्ता करने की कोशिश की, मगर किसी वजह से कॉल रिसीव न हो सकी।

जिन हजरात को मरहूम के बारे में मुकम्मल मालूमात हो, उनसे गुज़ारिश है कि दिए गए व्हाट्सएप नंबर पर राब्ता करके सही और तफ्सीली जानकारी मुहैया कराएं, ताकि बिरादरी तक सही इत्तिला पहुंचाई जा सके और कोई भी शख्स जनाज़े व ताज़ियत से महरूम न रहे।

📌 नोट: यह खबर मोहम्मद आबान खान साहब के जरिए मोबाईल नंबर 9992744983 से वायरल की गई है।


📢 एक ज़रूरी ऐलान – इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम् हिदायतें

अक्सर देखा गया है कि अधूरी जानकारी की वजह से लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते या सही वक्त का इल्म नहीं हो पाता। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से दरख्वास्त करती है कि जब भी किसी अज़ीज़ के इंतकाल की खबर भेजें, तो दरज-ए-ज़ैल बातों का ख़ास एहतिमाम फरमाएं:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ मुकम्मल पता – अस्ल वतन और मौजूदा रिहाइश।
3️⃣ दफ़ीने का सही वक्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार अफ़राद (एक या दो) के फोन नंबर।
5️⃣ अगर मरहूम मर्द हैं तो उनका फोटो शामिल करें।
6️⃣ इंतकाल की वजह (अगर बयान करना मुनासिब समझें)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम – जैसे भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वगैरह।

👉 इन तमाम मालूमात से खबर मुकम्मल और भरोसेमंद होगी, जिससे बिरादरी के अफराद तक सही और वक़्ती जानकारी पहुंच सके।


📰 डिस्क्लेमर

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प्रकाशित सामग्री की सत्यता, विश्वसनीयता या किसी भी दावे के लिए लेखक अथवा विज्ञापनदाता स्वयं उत्तरदायी होंगे। पत्रिका एवं प्रबंधन इस संबंध में किसी भी प्रकार की कानूनी, सामाजिक या वित्तीय जिम्मेदारी से पूर्णतः मुक्त रहेंगे।

किसी भी विवाद या न्यायिक प्रक्रिया की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।


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Wednesday, February 18, 2026

🕯️ सेहरी की रूहानी घड़ी में एक सदा-ए-ग़म — मरहूमा का इंतेकाल

इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन। बड़े ही रंजो-ग़म के साथ इत्तला दी जाती है कि मोहम्मद शमशाद साहब, साकिन इंचौली, जिला बागपत (उत्तर प्रदेश), हाल बाशिंदे छतरपुर, दिल्ली की अहलिया, उम्र तकरीबन 50 साल, आज सेहरी के वक्त लगभग साढ़े 4 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल फरमा गईं।

मरहूमा हाजी गफूर साहब (मथेडी) हाल निवासी छतरपुर, दिल्ली की साहबज़ादी थीं। यह खबर पूरे इलाके और बिरादरी में गहरे दुख का सबब बनी हुई है। सेहरी की पाक और रूहानी घड़ी में दुनिया-ए-फ़ानी से रुख़्सत होना, अपने आप में एक गहरी हिकमत समेटे हुए है।

अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फिरत फरमाए, उनकी कब्र को रौशन और वसीअ फरमाए, और जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फरमाए। आमीन।
घरवालों, अहल-ए-ख़ाना और तमाम अज़ीज़ो-अक़ारिब को सब्र-ए-जमील अता हो। आमीन सुम्मा आमीन।


📞 मय्यत से मुतअल्लिक मालूमात

मय्यत के सिलसिले में मुकम्मल जानकारी के लिए आप मरहूमा के भाई मोहम्मद अशरफ़ साहब के मोबाइल नंबर 8910833786 पर राब्ता कायम कर सकते हैं।


📢 एक ज़रूरी ऐलान — इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर ऐसा देखा गया है कि किसी अज़ीज़ के इंतेकाल की खबर बिरादरी तक देर से पहुँचती है या अधूरी जानकारी की वजह से लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से अदबाना गुज़ारिश करती है कि जब भी इंतेकाल की खबर भेजें, तो इन बातों का खास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और उनकी वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता — असल रहने का स्थान और फिलहाल का निवास।
3️⃣ दफीने का सही वक्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार शख्स (एक-दो) के फोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतेकाल हुआ हो तो मरहूम का फोटो भी शामिल करें।
6️⃣ इंतेकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ घर के बाकी अहल-ए-ख़ाना के नाम — जैसे भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वगैरह।

👉 इन तमाम मालूमात से खबर मुकम्मल होगी और बिरादरी के लोगों तक सही वक़्त पर सही जानकारी पहुंच सकेगी।


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इनसे पत्रिका के संपादक, प्रकाशक, प्रबंधन या संस्थान की सहमति या समर्थन आवश्यक रूप से अभिप्रेत नहीं है।

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किसी भी विवाद, शिकायत या न्यायिक कार्यवाही की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।


📰 सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए
ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट

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अल्लाह तआला मरहूमा की तमाम खता-ओ-लरज़िशों को माफ़ फरमाए और उनके दरजात बुलंद करे।
दुआ है कि यह सदमा घरवालों के लिए सब्र और आख़िरत में अज्र का ज़रिया बने। 🤲

😢 पहले रोज़े की सहर में बिछड़ गए मुहम्मद इलियास बिजरौल वाले — बिरादरी में शोक की लहर

अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को बड़े ही रंजो-ग़म के साथ यह इत्तला दी जाती है कि मिस्त्री इस्हाक के बेटे मुहम्मद इलियास (उम्र लगभग 37 वर्ष), निवासी बिजरौल, का आज दिन जुमेरात, 19 फ़रवरी 2026 को पहले रोज़े की सहरी के वक्त कज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया।

इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम इस वक्त बेगमपुर, दिल्ली में रह रहे थे। अल्लाह की यही मर्ज़ी थी। उनके पीछे दो मासूम बेटियां हैं, जिनकी परवरिश और सब्र के लिए पूरी बिरादरी दुआगो है।


🕌 जनाज़ा और दफीना

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूम का जनाज़ा मुहल्ला पठानकोट, बड़ौत (जिला बाग़पत) में गोल मस्जिद के पास उनके दूसरे घर लाया जाएगा।

दफीना आज दिन जुमेरात, 19 फ़रवरी 2026 को चाश्त की नमाज़ के वक्त सुबह साढ़े दस बजे, बड़का मार्ग स्थित वीर स्मारक इंटर कॉलेज के सामने वाले कब्रिस्तान में अमल में आएगा।

तमाम अहबाब से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत कर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फिरत करें और सवाबे दारेन हासिल करें।


🤲 दुआ

हम अल्लाह तआला से दुआ करते हैं कि अल्लाह मरहूम मुहम्मद इलियास की मग़फिरत फरमाए, उनकी तमाम ख़ताएं माफ़ करे, क़ब्र को रौशन और वसीअ फरमाए और जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए।

उनके अहले ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।

आमीन। सुम्मा आमीन।


📞 ज्यादा जानकारी के लिए राब्ता

  • मुहम्मद खालिद उद्यमी बावली वाले: 7984844498
  • गफूर नेता जी बावली वाले: 9412061270

📢 एक ज़रूरी ऐलान – इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर इंतकाल की खबर अधूरी या देर से पहुंचने की वजह से बिरादरी के लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि खबर भेजते वक्त इन बातों का खास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत/शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता (असली व मौजूदा निवास)।
3️⃣ दफीने का सही वक्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार शख्स के फोन नंबर।
5️⃣ मर्द के इंतकाल की सूरत में मरहूम का फोटो।
6️⃣ इंतकाल की वजह (अगर मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-खाना के नाम — भाई, बहन, वालिदैन, औलाद आदि।

👉 मुकम्मल जानकारी से खबर सही और वक़्त पर बिरादरी तक पहुंच सकेगी।


📰 डिस्क्लेमर

पत्रिका में प्रकाशित किसी भी लेख, समाचार, विचार, टिप्पणी, प्रेस विज्ञप्ति, विज्ञापन या अन्य सामग्री लेखक/संवाददाता/विज्ञापनदाता के स्वयं के विचार हैं। इनसे पत्रिका के संपादक, प्रकाशक या प्रबंधन की सहमति आवश्यक रूप से अभिप्रेत नहीं है।

प्रकाशित सामग्री की सत्यता या किसी दावे के लिए संबंधित लेखक या विज्ञापनदाता स्वयं उत्तरदायी होंगे। किसी भी विवाद की स्थिति में न्याय क्षेत्र केवल दिल्ली रहेगा।


📰 सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित
पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका

“मुल्तानी समाज”
खास रिपोर्ट: ज़मीर आलम

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रमजान और होली को लेकर प्रशासन से विशेष इंतज़ाम की मांग

तहसील ऊन, जिला शामली से शाकिर अली की खास रिपोर्ट

बिडौली/झिंझाना क्षेत्र में आने वाले पवित्र रमजान और होली के मद्देनज़र स्थानीय प्रशासन से साफ-सफाई, पेयजल और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराने की मांग की गई है।

(AIMIM) के पश्चिम प्रदेश संयुक्त सचिव हाफिज मोहम्मद इनाम ने उपजिलाधिकारी ऊन के नाम तहसीलदार को एक ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि त्योहारों के दौरान गांवों और कस्बों में मूलभूत सुविधाओं का बेहतर प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है।

साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं पर जोर

ज्ञापन में विशेष रूप से गलियों में जमा कीचड़ और कूड़े के ढेरों की तत्काल सफाई कराने की मांग उठाई गई। हाफिज मोहम्मद इनाम ने कहा कि रमजान के दौरान रोज़ेदारों को सेहरी और इफ्तार के समय पानी व बिजली की उपलब्धता बेहद जरूरी है, वहीं होली जैसे रंगों के त्योहार में भी स्वच्छ वातावरण और पर्याप्त जल आपूर्ति अनिवार्य है।

उन्होंने प्रशासन से अपील की कि त्योहारों से पहले ही व्यापक स्तर पर सफाई अभियान चलाया जाए, ताकि लोगों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

प्रशासन का आश्वासन

तहसील प्रशासन की ओर से ज्ञापन को संज्ञान में लेते हुए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि संबंधित विभागों को निर्देशित कर समस्याओं के समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

मौजूद रहे पदाधिकारी

इस अवसर पर असरफ ग्राम अध्यक्ष, शाहिद ग्राम अध्यक्ष, मुदस्सिर सहित अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे और उन्होंने भी क्षेत्र में व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की आवश्यकता पर बल दिया।


त्योहार सामाजिक सद्भाव और खुशियों का संदेश लेकर आते हैं। ऐसे में प्रशासनिक तैयारी और जनप्रतिनिधियों की सक्रियता ही यह सुनिश्चित कर सकती है कि हर घर में त्योहार की रौनक बिना किसी व्यवधान के पहुंच सके।

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🌹 12 नवंबर 2026: “मुल्तानी-डे” पर 12 ग़रीब बच्चियों के निकाह की ऐतिहासिक शुरुआत 🌹

بسم اللہ الرحمن الرحیم

पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की देश की अग्रणी और क्रांतिकारी तंजीम मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट (रजिस्टर्ड ऑल इंडिया) ने वर्षों पहले देश की राजधानी दिल्ली स्थित सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से अपनी बिरादरी की पत्रिका “मुल्तानी समाज” का पंजीकरण कराया। हर साल 12 नवंबर को पूरे देश में “मुल्तानी-डे” मनाया जाता है—खिदमत, इत्तेहाद और बिरादरी की तरक़्क़ी का दिन।

✨ नई प्रतिबद्धता

तंजीम ने संकल्प लिया है कि 12 नवंबर 2026 से हर साल “मुल्तानी-डे” के मुबारक मौके पर 12 ग़रीब बच्चियों के निकाह अपने खर्चे से कराए जाएंगे। बीते वर्षों में नोटबंदी और कोरोना महामारी के कारण यह पहल शुरू न हो सकी, लेकिन अब इसे अमली जामा पहनाने का बीड़ा उठाया गया है।

🤲 बिरादरी से अपील

यह नेक काम आप सबके सहयोग के बिना संभव नहीं। रमज़ान के बरकत भरे महीने से ही तैयारी शुरू कर दी जाए, ताकि नवंबर तक इस मुहिम को कामयाबी से अंजाम दिया जा सके। सभी जिम्मेदार, कारोबारी और खैरख्वाह साथी खुलकर हिस्सा लें।


🏦 ट्रस्ट के आधिकारिक बैंक विवरण

A/C Name: Multani Samaj Charitable Trust
A/C No.: 13332191075333
Bank: Punjab National Bank
Branch: Yamuna Vihar, Delhi
IFSC: PUNB0225600

आप सीधे ट्रस्ट के खाते में या UPI के माध्यम से सहयोग राशि भेज सकते हैं। कृपया ट्रांजेक्शन का विवरण साझा अवश्य करें।


📍 निकाह की प्रक्रिया

“मुल्तानी-डे” के मुबारक अवसर पर बिरादरी के जिम्मेदारों की सलाह से इस नेक काम की शुरुआत किसी भी शहर से की जा सकती है। जिन जरूरतमंद लड़कियों का निकाह तंजीम के माध्यम से कराना हो, रिश्ता तय होने के बाद नीचे दिए गए नंबर पर कॉल या मैसेज कर पूरी जानकारी दर्ज कराएँ:

📞 9410652990


अल्लाह तआला इस मुहिम को कबूलियत, बरकत और इस्तिक़ामत अता फरमाए; जिन घरों में ये निकाह होंगे वहाँ सुकून, मोहब्बत और खुशहाली कायम करे। आमीन।

खास रिपोर्ट: ज़मीर आलम
पत्रिका: मुल्तानी समाज

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🌹 बरकतों भरा ऐलान-ए-निकाह: जमील अहमद भट्टी (इन्दौर) व मोहसिना बानो (नागौर) 🌹

بسم اللہ الرحمن الرحیم

तमाम बिरादराने अहले मुल्तानी लोहारान को अदब के साथ इत्तिला दी जाती है कि अल्लाह तआला के फज़्ल-ओ-करम से एक मुबारक निकाह की तारीख आपसी रज़ामंदी से तय हो चुकी है।

मरहूम बाबू अब्दुल करीम साहब भट्टी (इन्दौर) के पोते और मोहम्मद शकील साहब भट्टी (इन्दौर, मध्य प्रदेश) के नेक फरज़ंद जमील अहमद का निकाह, अब्दुल मजीद साहब (सूई वाले, नागौर) की नूर-ए-नज़र मोहसिना बानो के साथ, बिरादरी के रस्म-ओ-रिवाज के मुताबिक अंजाम दिया जाएगा।

💐 तारीख व वक़्त

  • 7 ज़िल क़ादा 1447 हिजरी
  • 25 अप्रैल 2026, बरोज़ शनिचर
  • असर व मग़रिब के दरमियान

निकाह, सुन्नत-ए-नबवी ﷺ की बरकतों के साथ सादगी और तहज़ीब में अदा किया जाएगा।


🤲 दुआ की दरख्वास्त

हम सबकी दुआ है कि अल्लाह तआला इस नए रिश्ते को मोहब्बत, रहमत और बरकत से मालामाल फरमाए। दूल्हा-दुल्हन को आपसी उल्फत, सेहत, औलाद-ए-सालिहा और दुनिया-आख़िरत की कामयाबियाँ अता करे। आमीन।


👥 अद्दाईंयान

नूर मुहम्मद, अब्दुल समद, अब्दुल सलाम, मोहम्मद सलीम, अब्दुल रशीद

👥 अल-मुक्कल्लेफीन

मोहम्मद साबिर, ज़ाकिर हुसैन, आबिद हुसैन, अबुल हसन

🌸 नन्ही इल्तिज़ा

मोहम्मद शान, सकीना फातिमा


📍 पता: 41, चम्पा बाग, मुल्तानी लाइन, मस्जिद के पीछे, इन्दौर (म.प्र.)

📞 संपर्क:
अब्दुल समद – 7869040371
अब्दुल सलाम – 9617052610
मोहम्मद शकील – 9826044288


यह मुबारक खबर मुल्तानी बिरादरी की साझा खुशियों में एक और इज़ाफ़ा है। दुआ है कि यह रिश्ता आने वाली नस्लों के लिए भी रहमत और इत्तेहाद का सबब बने

खास रिपोर्ट: 

अब्दुल कादिर मुल्तानी 

पत्रिका – “मुल्तानी समाज”

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Tuesday, February 17, 2026

🌟 मुल्तानी समाजसेवी संगठन ने निभाया वादा, अफ़ज़ाल मिर्ज़ा कुशावली वाले के आवास पर हुआ अहम सामाजिक कार्यक्रम

मुल्तानी बिरादरी की सामाजिक एकजुटता और वादे की पाबंदी की एक खूबसूरत मिसाल उस वक्त देखने को मिली जब मुल्तानी समाजसेवी संगठन की टीम ने जनाब अफ़ज़ाल मिर्ज़ा (कुशावली वाले) के आवास पर पहुँचकर पूर्व में किए गए तमाम वादों को पूरा किया।

यह मुलाक़ात सिर्फ़ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आपसी भरोसे, इत्तेहाद और बिरादरी की बेहतरी के लिए उठाया गया एक मज़बूत क़दम साबित हुई।

👤 गरिमामयी मौजूदगी

इस अहम मौके पर संगठन के राष्ट्रीय सदर जनाब हाजी नसीम साहब, राष्ट्रीय अध्यक्ष (खतौली) जनाब यास्मीन जी, बुढ़ाना से नायब सदर जनाब जमरूद्दीन साहब, सिक्योरिटी प्रभारी जनाब मिर्ज़ा नौशाद साहब (खतौली), सदर जनाब अफ़ज़ाल मिर्ज़ा (कुशावली वाले), जनाब शाहनवाज़ मिर्ज़ा (सरधना वाले) और जनाब शाही़न मिर्ज़ा साहब विशेष रूप से मौजूद रहे।

सभी ज़िम्मेदारान ने मिलकर संगठन की प्रतिबद्धता को दोहराया और समाज की तरक़्क़ी, तालीम और आपसी सहयोग के मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की।

🤝 वादे निभाने की परंपरा

मुल्तानी समाजसेवी संगठन हमेशा से अपने उसूलों और वादों पर कायम रहा है। इस कार्यक्रम के माध्यम से यह साफ़ संदेश दिया गया कि बिरादरी की भलाई के लिए जो भी इरादे किए जाते हैं, उन्हें अमल में लाना ही असल सेवा है।

📚 बिरादरी के नाम पैग़ाम

मुल्तानी लोहार और बढ़ई बिरादरी के लिए समर्पित, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” लगातार समाज की आवाज़ को बुलंद कर रही है।

यह रिपोर्ट बिरादरी की एकता, भरोसे और खिदमत-ए-खल्क़ की जज़्बे को सलाम करती है।


✍️ ज़मीर आलम
प्रधान संपादक
पत्रिका — “मुल्तानी समाज”

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आपकी दुआओं और रहनुमाई का तलबगार।

🌙 रमजान 2026 का आग़ाज़: इबादत, रहमत और बरकत का मुक़द्दस सफ़र शुरू

मुस्लिम उम्मत के लिए इंतज़ार की घड़ियाँ ख़त्म हुईं। सऊदी अरब में रमज़ान का चांद नज़र आने की तस्दीक़ के साथ ही इबादतों के इस मुक़द्दस महीने का औपचारिक आग़ाज़ हो गया। आज से तरावीह की नमाज़ अदा की जा रही है और कल पहला रोज़ा रखा जाएगा।

भारत में भी चांद दिखाई देने की उम्मीद के साथ मस्जिदों और घरों में रूहानी तैयारी पूरी कर ली गई है। मेरठ समेत देश के कई शहरों में चांद की तस्दीक़ होते ही आज रात से तरावीह की नमाज़ शुरू होगी और गुरुवार को पहला रोज़ा रखा जाएगा।


🌙 चांद की तस्दीक़ और इबादतों की शुरुआत

रमज़ान का चांद महज़ एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि रूहानी एहसास है। जैसे ही चांद की खबर आई, मस्जिदों में रोशनी, सफ़ाई और इंतज़ामात मुकम्मल कर लिए गए। इमामों और इंतज़ामिया कमेटियों ने नमाज़ियों की सहूलियत के लिए खास व्यवस्थाएं की हैं।

तरावीह की नमाज़ से मस्जिदें आबाद होंगी और कुरआन-ए-पाक की तिलावत की सदा गूंजेगी। यह महीना सब्र, शुकर और इबादत का पैग़ाम देता है।


🕌 तैयारियों में जुटा मुस्लिम समाज

मेरठ सहित देशभर में मुस्लिम समुदाय ने रमज़ान की तैयारियाँ पूरी कर ली हैं। बाज़ारों में रौनक है, घरों में सेहरी और इफ्तार के इंतज़ाम किए जा रहे हैं। सामाजिक संगठनों द्वारा जरूरतमंदों के लिए राशन और सहायता की योजनाएँ भी बनाई गई हैं।

रमज़ान न सिर्फ़ रोज़ा रखने का नाम है, बल्कि यह खुद को सुधारने, गुनाहों से तौबा करने और इंसानियत की खिदमत करने का महीना है।


🤲 रहमतों और बरकतों का महीना

रमज़ान का हर दिन और हर रात इबादत और दुआओं से सजी होती है। इस महीने में अल्लाह तआला अपनी खास रहमतें नाज़िल फरमाते हैं। रोज़ा इंसान को सब्र, तक़वा और इंसानियत का पाठ पढ़ाता है।

आइए, इस मुक़द्दस महीने का इस्तक़बाल पूरे अदब और तहज़ीब के साथ करें और दुआ करें कि यह रमज़ान हम सबके लिए अमन, सेहत और कामयाबी का सबब बने।


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Monday, February 16, 2026

इंतिहाई रंजो-अलम की खबर: मासूम कली का कजा-ए-इलाही से इंतेकाल, बिरादरी ग़मगीन

अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को बड़े ही रंज-ओ-ग़म के साथ यह इत्तला दी जाती है कि जनाब हाजी हनीफ साहब (गांव बसी, तहसील खेकड़ा, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश) हाल बाशिंदे स्वरूप नगर, नई दिल्ली — के पोते और जनाब नदीम साहब के साहबज़ादे, तैमूर उम्र तक़रीबन डेढ़ साल, कल बरोज़ पीर बा-तारीख़ 16 फ़रवरी 2026 को एक दर्दनाक हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

आज बरोज़ मंगल बा-तारीख़ 17 फ़रवरी 2026 को सुबह 9:00 बजे उस मासूम तैमूर ने कज़ा-ए-इलाही से इंतक़ाल फरमा लिया।

यह खबर पूरे बिरादराने इस्लाम के लिए बेहद अफ़सोसनाक और दिल को झकझोर देने वाली है। इतनी कम उम्र में इस दुनिया से रुख़्सती हर दिल को नम और आंखों को अश्कबार कर गई।

नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन

मय्यत का वक़्त अभी मुक़र्रर नहीं हो सका है। जैसे ही तफ़सीलात हासिल होंगी, खबर अपडेट कर दी जाएगी।

दिल्ली-करनाल बाईपास, दिल्ली स्थित कब्रिस्तान में नमाज़-ए-जनाज़ा अदा की जाएगी और वहीं सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

अल्लाह तआला मरहूम मासूम को जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फरमाए, उसके सदमे में डूबे वालिदैन और तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।


मालूमात के लिए राब्ता

मय्यत के सिलसिले में ज्यादा जानकारी के लिए मरहूम के चाचा जनाब मोहम्मद नईम साहब से मोबाइल नंबर 9211770077 पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है।


एक ज़रूरी ऐलान – इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर देखा गया है कि किसी अज़ीज़ के इंतेकाल की खबर बिरादरी तक देर से पहुंचती है या अधूरी जानकारी के कारण लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि इंतेकाल की खबर भेजते वक्त इन बातों का खास एहतिमाम करें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ मुकम्मल पता (असली वतन और मौजूदा रिहाइश)।
3️⃣ दफीने का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार शख्स (एक-दो) के मोबाइल नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतकाल हुआ हो तो मरहूम की तस्वीर।
6️⃣ इंतेकाल की वजह (अगर बयान करना मुनासिब समझें)।
7️⃣ बाकी अहल-ए-ख़ाना के नाम – जैसे वालिदैन, भाई, बहन, औलाद वगैरह।

👉 मुकम्मल जानकारी से खबर सही और वक़्त पर पहुंचती है, जिससे बिरादरी को शामिल होने में आसानी रहती है।


📰 डिस्क्लेमर

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🤲 या अल्लाह, इस मासूम की मग़फ़िरत फरमा, उसे अपनी रहमत के साये में जगह अता कर और उसके ग़मज़दा घर वालों को हिम्मत और सब्र बख़्श दे। आमीन।

रियाज़ साहब का इंतेक़ाल — बिरादरी के लिए गहरा सदमा, दुआओं की दरख़्वास्त,

🕯️ इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन, निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादराने इस्लाम को यह इत्तला दी जाती है कि आज बरोज़ मंगल, 17 फ़रवरी 2026 को रुड़की, ज़िला हरिद्वार (उत्तराखंड) में जनाब हसीनुद्दीन मिर्ज़ा उर्फ़ मंजू भाई के बड़े भाई जनाब रियाज़ साहब वल्द जनाब का सुबह क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

यह खबर पूरे समाज के लिए बेहद अफसोसनाक और दिल को रंज देने वाली है। मरहूम की शख्सियत सादगी, ख़ुलूस और नेक-अख़लाक़ी का आईना थी। अल्लाह तआला से दुआ है कि मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उन्हें जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मक़ाम अता करे और तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील नसीब फ़रमाए। आमीन या रब्बल आलमीन।

🕌 नमाज़-ए-जनाज़ा

नमाज़-ए-जनाज़ा आज असर की नमाज़ के वक़्त अदा की जाएगी। तमाम अहबाब और बिरादरान से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर सवाबे दारेन हासिल करें और मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें।

📍 निवासी: मोहल्ला सत्ती, निकट मस्जिद लोहारान, रुड़की, ज़िला हरिद्वार, उत्तराखंड

📞 मज़ीद मालूमात के लिए:
मुल्तानी समाज के सदर जनाब मोहम्मद मुदस्सिर साहब
मोबाइल: 9917117593


📢 एक ज़रूरी ऐलान – इंतेक़ाल की खबर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर देखने में आता है कि इंतेक़ाल की खबर अधूरी या देर से पहुंचने की वजह से लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि जब भी किसी के इंतिक़ाल की खबर भेजें, तो इन बातों का खास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ मुकम्मल पता — पहले और मौजूदा निवास।
3️⃣ दफ़ीने का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार अफ़राद के संपर्क नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतिक़ाल हुआ हो तो मरहूम की तस्वीर शामिल करें।
6️⃣ इंतिक़ाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ घर के बाकी अहल-ए-ख़ाना के नाम।

👉 मुकम्मल जानकारी से खबर सही और वक़्त पर बिरादरी तक पहुंच सकेगी।


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देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित
पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका

“मुल्तानी समाज”

एडवोकेट मुदस्सिर साहब की खास रिपोर्ट

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🌙📚 रमज़ान और बोर्ड इम्तिहान: इबादत भी, कामयाबी भी

रमज़ान की बरकतें और बोर्ड इम्तिहान की अहमियत — इस बार दोनों साथ-साथ दस्तक दे रहे हैं। एक तरफ़ रोज़े, तरावीह और इबादत का महीना; दूसरी तरफ़ मेहनत, एकाग्रता और भविष्य तय करने वाले इम्तिहान। ऐसे में ज़रूरी है कि हमारे मुमतहन (परीक्षार्थी) समझदारी, एहतियात और बेहतर प्लानिंग के साथ आगे बढ़ें।

यह दौर सिर्फ़ इम्तिहान का नहीं, बल्कि सब्र, तवक्कुल और तवाज़ुन (संतुलन) का भी है।


🌅 सेहरी और सुबह की तैयारी: लापरवाही नहीं, एहतियात ज़रूरी

  • जिन बच्चों का पेपर सुबह की शिफ्ट में हो, वो सेहरी के बाद लेटने की कोशिश न करें। लेटकर पढ़ना भी ख़तरे से खाली नहीं — झपकी लग सकती है और पेपर छूटने तक की नौबत आ सकती है।
  • वालिदैन भी तब तक आराम न करें जब तक बच्चे इम्तिहान के लिए रवाना न हो जाएँ। यह छोटी सी निगरानी बड़े नुक़सान से बचा सकती है।
  • अपना मोबाइल साइलेंट न रखें, ताकि किसी ज़रूरी सूचना या साथी छात्रों से राब्ता आसानी से हो सके।

☕ सेहत का ख्याल: रोज़ा भी मुकम्मल, पेपर भी बेहतर

  • जो बच्चे चाय पीने के आदी हैं, वो सेहरी में चाय ज़रूर लें। अचानक परहेज़ से सरदर्द या सुस्ती हो सकती है, जिसका असर सीधे इम्तिहान पर पड़ेगा।
  • जो किसी भी तरह की दवा ले रहे हों, वह सेहरी में दवा लेना न भूलें। अगर किसी दवा से नींद आने की शिकायत हो, तो डॉक्टर से मशविरा कर उसके मुतबादिल (सब्सटिट्यूट) का इंतज़ाम पहले से कर लें।
  • सेहरी और इफ़्तार में हल्का और पौष्टिक खाना लें। फल, दूध, अंडा, बादाम और मुरब्बा शामिल करें।
  • बाज़ार के शरबत और ठंडे जूस से परहेज़ करें। अगर जूस लें तो घर का बना हुआ और सामान्य तापमान का हो।
  • ऐसी चीज़ें बिल्कुल न खाएँ जिनसे पेट या गले की तकलीफ़ का अंदेशा हो।

📝 पेपर के बाद का रवैया: सुकून रखिए, आगे बढ़िए

  • एग्ज़ाम से लौटकर सवालों को टैली करने का कोई फायदा नहीं। “कितना सही, कितना ग़लत” — यह सोच सिर्फ़ टेंशन बढ़ाती है।
  • जो पेपर हो चुका, उस पर डिस्कशन न करें। हाँ, अगले पेपर की तैयारी पर बातचीत ज़रूर करें।
  • घर लौटते ही किताबों पर न बैठ जाएँ। कुछ देर आराम करें, थोड़ी नींद लें, फिर तरोताज़ा होकर तैयारी शुरू करें।

🌤️ मौसम और एहतियात

रमज़ान का मतलब सिर्फ़ गर्मी नहीं। सुबह की ठंड अब भी बाकी है। घर में और इम्तिहान सेंटर जाते वक्त ठंड से बचाव ज़रूरी है।

ख़ास तौर से नौजवान लड़के — गिरेबान खोलकर और बाइक को “हवाई जहाज़” बनाकर सेंटर पहुँचने का जोश थोड़ा कम रखें। सेहत सलामत रहेगी तो इम्तिहान भी बेहतर होगा।


🌙 रातों का निज़ाम और पढ़ाई का रूटीन

  • रमज़ान में देर रात तक जागने की आदत से बचें, खासकर इम्तिहान के दिनों में।
  • जिस दिन पेपर न भी हो, उस दिन भी सेहरी के बाद सोने के बजाय पढ़ाई का रूटीन बनाएं। सुबह का वक़्त याददाश्त के लिए सबसे मुफीद होता है।

👨‍👩‍👧‍👦 वालिदैन की ज़िम्मेदारी

बच्चों के साथ-साथ पैरेंट्स भी अपनी ज़िम्मेदारी समझें। घर का माहौल इम्तिहान की तैयारी के अनुकूल हो।
रमज़ान की रौनक़ अपनी जगह, मगर पूरा ध्यान पकौड़ी और कचौरी पर ही रहे — यह अंदाज़ बच्चों की मेहनत पर भारी पड़ सकता है।


✨ दुआ और हौसला

रमज़ान सब्र और बरकत का महीना है। इम्तिहान मेहनत और कामयाबी का रास्ता। जब दोनों एक साथ हों तो यह यक़ीन रखिए कि अल्लाह तआला की रहमत भी साथ होती है।

मेहनत कीजिए, एहतियात बरतिए, और बेफ़िक्र होकर आगे बढ़िए।
अल्लाह तआला तमाम बच्चों को कामयाबी, सेहत और रोशन मुस्तक़बिल अता फ़रमाए। आमीन।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट

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Sunday, February 15, 2026

🕯️ इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊनपूर्वी महावीर, मेरठ से एक अफ़सोसनाक ख़बर – नौजवान का इंतक़ाल

निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराने इस्लाम को यह इत्तिला दी जाती है कि बरोज़ इतवार, 15 फ़रवरी 2026 की शाम तक़रीबन 6 बजे के आसपास के इलाक़ा पूर्वी महावीर के रहने वाले जनाब मोहम्मद जाहिद साहब वल्द जनाब खलीक साहब के साहबज़ादे, जनाब मोहम्मद जाहिद साहब का कज़ा-ए-इलाही से इंतक़ाल हो गया।

यह दर्दनाक ख़बर हमें सोशल मीडिया के ज़रिये हासिल हुई। खबर के मुताबिक़ मरहूम की मय्यत को आज बरोज़ पीर, 16 फ़रवरी 2026 को सुबह 11 बजे सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाना बताया गया है, लिहाज़ा आप हजरात भी जनाजे में शरीक होकर सवाबे दारेन हासिल करें।

इस दुखद मौके पर पूरा मुल्तानी समाज ग़मज़दा है। एक नौजवान का यूँ अचानक रुख़्सत हो जाना न सिर्फ़ अहल-ए-ख़ाना बल्कि पूरी बिरादरी के लिए सदमे से कम नहीं। अल्लाह तआला मरहूम की मग़फिरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को रौशन करे और तमाम लवाहितीन को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।


📢 बिरादरी से गुज़ारिश

जो भी हज़रत मरहूम के बारे में मुकम्मल और सही जानकारी रखते हों—ख़ास तौर पर दफीने के वक़्त और कब्रिस्तान के नाम के संबंध में—वो बराए करम “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के दिये गये नंबर या ईमेल के ज़रिये इत्तिला दें, ताकि सही और तस्दीक़शुदा जानकारी बिरादरी तक पहुंचाई जा सके।


📌 एक ज़रूरी ऐलान

इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर देखा गया है कि किसी अज़ीज़ के इंतक़ाल की खबर देर से या अधूरी जानकारी के साथ पहुंचती है, जिसकी वजह से कई लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से अदबाना गुज़ारिश करती है कि इंतेकाल की खबर भेजते वक़्त इन बातों का ख़ास एहतिमाम करें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ मुकम्मल पता – पहले कहाँ के रहने वाले थे और फिलहाल कहाँ रह रहे थे।
3️⃣ दफीने का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार अफ़राद (कम से कम एक-दो) के फ़ोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतक़ाल हुआ है तो मरहूम का फोटो।
6️⃣ इंतक़ाल की वजह (अगर बयान करना मुनासिब समझें)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम – जैसे वालिदैन, भाई-बहन, औलाद वगैरह।

👉 इन तमाम जानकारियों से खबर मुकम्मल और मुस्तनद बनेगी तथा बिरादरी को सही मालूमात हासिल होंगी।


📰 डिस्क्लेमर (Disclaimer)

पत्रिका में प्रकाशित किसी भी प्रकार का लेख, समाचार, संपादकीय, विचार, टिप्पणी, प्रेस विज्ञप्ति, विज्ञापन या अन्य सामग्री संबंधित लेखक, संवाददाता या विज्ञापनदाता के व्यक्तिगत विचार हैं।
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किसी भी विवाद की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।


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🤲 अल्लाह मरहूम की मग़फिरत फ़रमाए, अपने रहमत का साया अता फ़रमाए। आमीन।

बड़ौत की सरज़मीं पर अदब व एहतराम का नूर: मास्टर यामीन आज़ाद साहब के साहेबजादे का यादगार दावत-ए-वलीमा

बड़ौत (जनपद बागपत): खुशियों, दुआओं और मुहब्बत की रौशनी से जगमगाता एक ऐसा दिन, जिसने बड़ौत की फिज़ा को खास बना दिया। जनपद की प्रतिष्ठित शख्सियत, राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित, समाजसेवा के लिए समर्पित आदरणीय (सलाहकार – MMWS एवं खिदमत सोसाइटी) के सुपुत्र के दावत-ए-वलीमा का आयोजन बड़ौत स्थित में अत्यंत गरिमामयी वातावरण में संपन्न हुआ।

यह महज़ एक पारिवारिक समारोह नहीं था, बल्कि बड़ौत की गंगा-जमुनी तहज़ीब, भाईचारे और सामाजिक एकजुटता का जीवंत प्रतीक बनकर उभरा।


गरिमामयी उपस्थिति ने बढ़ाई रौनक

समारोह में क्षेत्र की राजनीति, शिक्षा और सामाजिक जगत की नामचीन हस्तियों ने शिरकत कर कार्यक्रम की शोभा में चार चाँद लगा दिए।

मुख्य अतिथियों में सम्मानित , जिला पंचायत अध्यक्ष , वरिष्ठ रालोद नेता , , , एडवोकेट , गायत्री देवी कॉलेज के चेयरमैन , बड़ौत चेयरमैन , वरिष्ठ रालोद नेता एडवोकेट तथा युवा नेता ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई और नव-विवाहित जोड़े को स्नेह व आशीर्वाद प्रदान किया।

मेहमानों की आत्मीय सहभागिता ने आयोजन को यादगार बना दिया।


संस्थाओं का समर्पित सहयोग

समारोह की व्यवस्थाओं और रौनक में (MMWS) का विशेष योगदान रहा।

  • सदर जनाब इंजीनियर उस्मान साहब व उनकी समर्पित टीम
  • तनाज़ा हल कमेटी से हमदम मिर्ज़ा जी
  • खेल कमेटी से सनव्वर साहब
  • लीगल सेल से एडवोकेट आबिद मिर्ज़ा जी
  • मैरिज ब्यूरो सेल के कन्वीनर अब्दुल खालिक
  • एजुकेशन कमेटी के सदर मास्टर खलील अहमद

इन सभी ने अपने-अपने दायित्वों को पूरी निष्ठा से निभाते हुए आयोजन को सुव्यवस्थित और सफल बनाया।


खिदमत का जज़्बा और मेहमाननवाज़ी की मिसाल

कार्यक्रम के दौरान अनुशासन और आतिथ्य-सत्कार की जिम्मेदारी के कंधों पर रही। डॉक्टर इरफ़ान मलिक और उनकी टीम ने बारीक से बारीक इंतज़ाम को इतनी खूबसूरती से संभाला कि हर मेहमान ने खुले दिल से प्रशंसा की।

यह आयोजन आपसी भाईचारे, दोस्ती निभाने के जज़्बे और सामाजिक सौहार्द की एक शानदार मिसाल बनकर सामने आया।


दुआओं के साए में नई ज़िंदगी की शुरुआत

मास्टर यामीन आज़ाद साहब और उनके समस्त परिवार को इस नई खुशी पर दिली मुबारकबाद। दुआ है कि नव-विवाहित जोड़े की ज़िंदगी खुशियों, कामयाबी और बरकतों से महकती रहे, और उनका दामन हमेशा सुकून व मोहब्बत से भरा रहे। 🤲🌹


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