Sunday, April 5, 2026

💔 सहारनपुर के अदबी घराने पर टूटा ग़म का पहाड़: शऊर असलम का दर्दनाक इंतकाल

सहारनपुर से एक निहायत ही रंजो-ग़म भरी खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके और खासकर अदबी हलकों को सदमे में डाल दिया है। शहर के मशहूर व मारूफ शायर मरहूम साहिल फरीदी साहब के बड़े बेटे शऊर असलम का मसूरी–देहरादून में काम के दौरान एक हादसे में आज शाम लगभग 4 बजे कजा - ए - ईलाही से इंतकाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

बताया जा रहा है कि यह हादसा अचानक पेश आया, जिसने परिवार के साथ-साथ जानने वालों को भी गहरे दुख में डाल दिया है। मरहूम शऊर असलम की हालिया रिहाइश सहारनपुर में हबीबगढ़ से थोड़ा आगे, लड़कियों के मदरसे के पास सामने वाली गली में थी।

👉 नमाज़-ए-जनाज़ा
मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा मदरसा मारिफुल क़ुरान, राणा पैलेस के सामने अदा की जाएगी।

👉 तदफीन का वक़्त व मक़ाम
तदफीन का वक़्त मग़रिब तय किया गया है।
तदफीन गोटे शाह क़ब्रिस्तान में इंशाअल्लाह अमल में आएगी।

इस दुखद घड़ी में तमाम अहबाब, अज़ीज़ो-अक़ारिब और बिरादरी से दरख्वास्त है कि मरहूम के लिए दुआ-ए-मगफिरत करें और उनके घरवालों को सब्र-ए-जमील अता होने की दुआ करें।

📞 मय्यत के सिलसिले में अधिक जानकारी के लिए:
मोहम्मद नौशाद साहब – 8077249223


✍️ सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से संचालित, मुस्लिम मुल्तानी लोहार/बढ़ई बिरादरी की राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) से पत्रकार ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट

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🤲 दुआ है कि अल्लाह तआला मरहूम शऊर असलम साहब की मगफिरत फरमाए, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मकाम अता करे और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।

Friday, April 3, 2026

दिल दहला देने वाली खबर: असलम साहब का इंतकाल, इलाक़े में ग़म की लहर

निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ यह इत्तला दी जाती है कि क़स्बा जलालाबाद, जिला शामली (उत्तर प्रदेश) के मोहल्ला प्रतापनगर के निवासी जनाब असलम साहब (उम्र लगभग 60 वर्ष), वल्द जनाब हाजी महमूद साहब का बीती रात (जुमा, 03 अप्रैल 2026) अचानक दिल का दौरा पड़ने से इंतकाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम के इंतकाल की खबर से पूरे इलाके में गहरा दुख और शोक की लहर दौड़ गई है। वे अपने पीछे अपनी अहलिया और चार बेटियों सहित पूरा परिवार, रिश्तेदार और चाहने वालों को ग़मगीन छोड़ गए हैं। असलम साहब अपने अच्छे अख़लाक़, मिलनसार मिज़ाज और सादगी भरी ज़िंदगी के लिए जाने जाते थे, और उनके जाने से समाज को एक बड़ा नुकसान हुआ है।

अल्लाह तआला से दुआ है कि वह मरहूम को जन्नत-उल-फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए और उनके तमाम अहल-ए-खाना व अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को सब्र-ए-जमील अता करे।
आमीन सुम्मा आमीन।

जनाज़े की नमाज़ आज दिन शनिवार, 04 अप्रैल 2026 को बाद नमाज़ ज़ोहर लगभग डेढ़ बजे अदा की जाएगी, जिसके बाद मय्यत को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम अहबाब से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत कर मरहूम के लिए मग़फिरत की दुआ करें और सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

अधिक जानकारी के लिए जनाब महमूद साहब से उनके मोबाइल नंबर 9897023252 पर संपर्क किया जा सकता है।



(यह रिपोर्ट समाजिक सूचना के उद्देश्य से तैयार की गई है।)

रिपोर्टर: ज़मीर आलम
नई दिल्ली
“मुल्तानी समाज” न्यूज़ पोर्टल



🕊️ बेहद ग़मगीन ख़बर: परवीन बी का इंतकाल, पूरे इलाके में शोक की लहर

निहायत ही रंजो-ग़म के साथ यह इत्तला दी जाती है कि परवीन बी (उम्र 45 वर्ष), अहलिया जनाब अलीहसन साहब (मूल निवासी: गांव सरूरपुर, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश; हाल बाशिंदा: सुंदीनगरी, दिल्ली) का आज दिन जुमा, तारीख 03 अप्रैल 2026 को क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया।

मरहूमा अपने पीछे अपने शौहर, चार बेटों, पौते-पोतियों सहित तमाम अहल-ए-ख़ानदान, अज़ीज़-ओ-अक़रीबा को ग़मगीन छोड़कर इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत हो गईं। उनका मायका बुढ़ाना रोड, क़स्बा खतौली, जिला मुजफ्फरनगर (उ.प्र.) में था और वह जनाब मीर हसन साहब की साहिबज़ादी थीं।

इस दुखद घड़ी में पूरे बिरादराना हल्के में शोक की लहर दौड़ गई है। हर दिल ग़मगीन है और हर आँख अश्कबार।

🕌 नमाज़-ए-जनाज़ा व दफ़न:
मरहूमा को आज बाद नमाज़-ए-इशा, रात 8:30 बजे सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम अहबाब से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत कर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फिरत करें और सवाब हासिल करें।

📞 मज़ीद जानकारी के लिए:
मोहम्मद नईम साहब – 9312397269


🤲 दुआ-ए-मग़फिरत

अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फिरत फरमाए, उन्हें जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता करे और तमाम घरवालों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।
आमीन या रब्बुल आलमीन।


📰 ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी नई दिल्ली से संचालित मुस्लिम मुल्तानी लोहार/बढ़ई बिरादरी की राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए नई दिल्ली से पत्रकार ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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Wednesday, April 1, 2026

🌙 नागौर की होनहार बेटी ने रोशन किया नाम: मुस्लिम कम्युनिटी की छात्रा नाज़िरा नूर ने 90% अंकों के साथ हासिल की कामयाबी 🌙

राजस्थान के नागौर ज़िले से एक दिल को सुकून देने वाली और फख्र से भर देने वाली खबर सामने आई है। राशिद अली साहब की साहिबजादी नाज़िरा नूर, जो श्रीमती रतन बहन राजमल चौधरी राजकीय बालिका वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की मेधावी छात्रा हैं, ने 12वीं कक्षा की परीक्षा में 90 प्रतिशत अंक हासिल कर प्रथम श्रेणी (फर्स्ट डिवीजन) में शानदार सफलता हासिल की है।

इस कामयाबी की खबर मिलते ही पूरे घराने में खुशी की लहर दौड़ गई। रिश्तेदारों, दोस्तों और आस-पड़ोस के लोगों ने दिल से मुबारकबाद पेश की और बेटी के उज्ज्वल मुस्तकबिल के लिए दुआएँ कीं।

परिवार के मुताबिक, नाज़िरा नूर शुरू से ही पढ़ाई में मेहनती, लगनशील और मकसद के साथ आगे बढ़ने वाली छात्रा रही हैं। उनकी इस कामयाबी के पीछे उनकी लगातार मेहनत, वालिदैन का साथ और असातिज़ा (शिक्षकों) की रहनुमाई का अहम योगदान है।

यह शानदार कामयाबी न सिर्फ उनके फैमिली के लिए बल्कि पूरी "मुल्तानी समाज" और इलाके के लिए भी फख्र का सबब बन गई है। नाज़िरा नूर की यह सफलता समाज की दूसरी बेटियों के लिए भी एक बेहतरीन मिसाल है कि मेहनत और लगन से हर मुकाम हासिल किया जा सकता है।


🖋️ ख़ास रिपोर्ट:
अब्दुल कादिर मुल्तानी, नागौर (राजस्थान)

📌 प्रकाशन:
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Tuesday, March 31, 2026

🕊️ इंतकाल की खबर: जनाब मिस्त्री युसूफ साहब का इंतेकाल, इलाके में शोक की लहर

रिपोर्ट: ज़मीर आलम | बड़ौत, उत्तर प्रदेश

निहायत ही अफ़सोस के साथ सूचित किया जाता है कि जनाब मिस्त्री युसूफ साहब (मूल निवासी: गांव टयोड़ी, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश) जो वर्तमान में नज़दीक पॉलिटेक्निक स्कूल, बड़का रोड, कस्बा बड़ौत में निवासरत थे, का आज दिन मंगलवार, तारीख़ 31 मार्च 2026 को शाम लगभग 6:20 बजे इंतकाल हो गया।

उनके इस दुनिया से रुख़्सत हो जाने की खबर से परिवार, रिश्तेदारों और पूरे इलाके में गहरा शोक व्याप्त है। मरहूम अपने मिलनसार स्वभाव और नेक अख़लाक के लिए जाने जाते थे, और समाज में उनकी एक अलग पहचान थी।

मिली जानकारी के अनुसार, मरहूम का जनाज़ा कल दिन बुधवार, तारीख़ 01 अप्रैल 2026 को सुबह 9:00 बजे, गोल मस्जिद के पास स्थित कब्रिस्तान में अदा किया जाएगा, जिसके बाद दफन की प्रक्रिया संपन्न होगी।

तमाम अहबाब और बिरादराना हजरात से गुजारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मगफिरत करें और इस दुख की घड़ी में घरवालों का हौसला बढ़ाएं।

अल्लाह तआला मरहूम की मगफिरत फरमाए, उनकी कब्र को रौशन करे और जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए। साथ ही, उनके तमाम घरवालों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।


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Saturday, March 28, 2026

😢 कमसिनी में बिछड़ गया अपना — नकुड़ में मोहम्मद आदिल का इंतकाल, बिरादरी में ग़म की लहर

अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादराना हज़रात के लिए यह खबर बेहद रंज व ग़म के साथ पेश की जा रही है कि आज दिन शनिवार, तारीख़ 28 मार्च 2026 को क़स्बा नकुड़, ज़िला सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) निवासी

मोहम्मद आदिल वल्द जनाब मिस्त्री मोहम्मद सलीम साहब का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

यह खबर पूरे इलाके और बिरादरी के लिए एक गहरा सदमा बनकर आई है। मरहूम की कम उम्र और उनके अच्छे अख़लाक़ की वजह से हर आंख अश्कबार है। जानने वालों के दिलों में ग़म की लहर दौड़ गई है और घरवालों पर तो जैसे ग़म का पहाड़ टूट पड़ा है।

अल्लाह तआला से दुआ है कि
👉 मरहूम को जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फरमाए,
👉 उनकी मग़फिरत फरमाए,
👉 और तमाम अहले-ख़ाना को इस सदमे को बर्दाश्त करने के लिए सब्र-ए-जमील अता फरमाए।

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा के बाद आज रात 11 बजे उन्हें सपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत कर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फिरत करें और सवाबे दारेन हासिल करें।

यह वक्त सिर्फ तअज़ियत का ही नहीं, बल्कि एक-दूसरे का सहारा बनने का भी है। ऐसे मौकों पर बिरादरी की एकजुटता ही असल ताक़त होती है।


✍️ ख़ास रिपोर्ट: ज़मीर आलम, नई दिल्ली
(मुल्तानी समाज — राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल)

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🤲 अल्लाह मरहूम की मग़फिरत फरमाए और उन्हें जन्नत में आला दर्जा अता करे… आमीन।

Tuesday, March 24, 2026

🖤 एक ही घर से दो जनाज़े — बिरादरी ग़म में डूबी, दिलों को झकझोर देने वाली ख़बर

निहायत ही रंजो-ग़म के साथ यह दुखद इत्तला दी जाती है कि आज दिन मंगलवार, बा-तारीख़ 24 मार्च 2026 को मोहल्ला रेती, क़स्बा देवबंद, ज़िला सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) निवासी जनाब कलीम साहब वल्द जनाब हाजी नसीर साहब (उम्र लगभग 50 वर्ष) का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया।

यह हादसा उस वक्त और भी ज्यादा दिल को झकझोर देने वाला बन गया, जब यह मालूम हुआ कि महज़ 8–10 दिन पहले ही इसी घर में एक और इंतेकाल हो चुका था। एक ही परिवार में इतने कम समय में लगातार दो दुखद घटनाओं ने पूरे इलाके और बिरादरी को गहरे सदमे और मातम में डाल दिया है। हर आंख नम है और हर दिल ग़मगीन।

मरहूम कलीम साहब अपने पीछे अपनी अहलिया, बच्चों और तमाम अज़ीज़-ओ-अक़रीबा को छोड़कर इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत हो गए। उनके इंतकाल से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, जिसकी भरपाई मुमकिन नहीं।

अल्लाह तआला से दुआ है कि मरहूम की मग़फ़िरत फरमाए, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे और उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मकाम अता करे। साथ ही घरवालों और तमाम लवाहिकीन को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।

नोट: मय्यत के दफ़ीने की जानकारी शीघ्र ही अपडेट कर दी जाएगी।


✍️ यह रिपोर्ट नई दिल्ली से पत्रकार ज़मीर आलम द्वारा “मुल्तानी समाज” न्यूज़ पोर्टल के लिए तैयार की गई है — एक पंजीकृत राष्ट्रीय समाचार मंच, जो बिरादरी की आवाज़ को जिम्मेदारी और अदब के साथ आप तक पहुंचाता है।

Monday, March 23, 2026

🖤 इंतकाल की ख़बर: एक नेक दिल शख्सियत हमसे जुदा हो गई

निहायत ही रंजो-ग़म के साथ मुस्लिम मुल्तानी लोहार बढ़ई बिरादरी को यह दुखद इत्तिला दी जाती है कि बाग्घू वालों के परिवार से ताल्लुक रखने वाले, मरहूम हाजी इकरा मुल्ला साहब (पूर्व सदर अंजुमन) के छोटे भाई, जनाब ठेकेदार शब्बीर अहमद साहब वल्द हाजी अब्दुल रसीद (रसीदू) का आज दिन मंगल बा - तारीख़ 24 मार्च 2026, सुबह फज़्र के वक्त (करीब 5 बजे) इंतकाल हो गया।
इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम की उम्र तकरीबन 85 साल थी। वह बागपत (उत्तर प्रदेश) के पांडव मार्ग, मुहल्ला पुराना मुग़लपुरा, नवाब साहब की हवेली के पास के रहने वाले थे। उनका जाना ना सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरी बिरादरी के लिए एक बड़ा नुकसान है।

जनाब शब्बीर अहमद साहब अपने पीछे चार बेटे छोड़ गए हैं—
मुहम्मद अतीक अहमद मुल्तानी,
मुहम्मद सलीम अहमद मुल्तानी,
मुहम्मद नईम अहमद मुल्तानी,
मुहम्मद वसीम अहमद मुल्तानी—
और एक भरा-पूरा खानदान।

मरहूम का शुमार उन नेक, मिलनसार और जिम्मेदार शख्सियतों में होता था, जो हमेशा बिरादरी और समाज के लिए खड़े रहे। उनके अख़लाक, सादगी और खिदमत का जज़्बा हमेशा याद रखा जाएगा। उनका इस दुनिया से रुख्सत होना एक ऐसी कमी है, जिसकी भरपाई करना मुमकिन नहीं।

बड़े भाई के इंतकाल से हाजी कासिम साहब समेत पूरा परिवार गहरे सदमे में है। पूरे कुनबे और बिरादरी में ग़म का माहौल है और हर आंख नम है।

नमाज़-ए-जनाज़ा और सुपुर्द-ए-ख़ाक:
मिली जानकारी के मुताबिक, मरहूम को आज ही 24 मार्च 2026 को ज़ुहर की नमाज़ के बाद पांडव मार्ग स्थित तकिया वाली मस्जिद के पास कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

अल्लाह तआला से दुआ है कि मरहूम की मग़फिरत फरमाए, उनके दर्जात बुलंद करे और जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुकाम अता करे।
और तमाम घरवालों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।
आमीन। सुम्मा आमीन।

📞 ज्यादा मालूमात के लिए:
हाजी कासिम साहब – 8868012218 (बागपत)

🤝 आखिर में आप तमाम हज़रात से गुज़ारिश है कि बिरादरी के सुख-दुख की खबरें एक-दूसरे तक पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है, ताकि हर कोई इस ग़म में शरीक हो सके।

✍️ ख़ास रिपोर्ट:
अली हसन मुल्तानी 
मुल्तानी समाज (राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज़ पोर्टल)
बागपत/उत्तर प्रदेश 

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Sunday, March 22, 2026

🕊️ मासूम कली के इंतिक़ाल से भीलवाड़ा में मातम, ग़मगीन फिज़ा में दुआओं का सिलसिला

निहायत ही रंजो-ग़म के साथ यह दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है कि जनाब अब्दुल सईद भट्टी (नीमच वाले) की पोती और उनके साहिबजादे जनाब मोहम्मद अख़लाख की नन्ही बेटी का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया। इस दर्दनाक खबर ने पूरे इलाके, खासतौर पर मोहल्ला गुलजार नगर, भीलवाड़ा (राजस्थान) में ग़म की लहर दौड़ा दी है।

परिजनों पर टूटे इस ग़म के पहाड़ ने हर आंख को नम कर दिया है। एक मासूम की जुदाई का सदमा ऐसा होता है, जिसे अल्फाज़ में बयां करना बेहद मुश्किल है। अल्लाह तआला मरहूमा को अपनी रहमतों के साए में जगह अता फरमाए और उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम नसीब करे। आमीन।

जनाब के परिजनों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, मय्यत को आज दिन इतवार, 22 मार्च 2026 को दिन में 3 बजे सूफियान कब्रिस्तान, भीलवाड़ा में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम अहबाब से गुजारिश है कि जनाज़े में शिरकत फरमा कर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मगफिरत करें और ग़मजदा परिवार को सब्र-ए-जमील की तस्सली दें।

इस दुख की घड़ी में पूरा मुल्तानी समाज और बिरादरी शोक संतप्त परिवार के साथ खड़ा है। अल्लाह तआला से दुआ है कि वह इस नन्ही फरिश्ता सिफ़त बच्ची की मगफिरत फरमाए और उसके सदके में घरवालों के गुनाहों को भी माफ़ फरमा दे।

🤲 दुआ:
“इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन।
या अल्लाह, मरहूमा की मगफिरत फरमा, उसकी क़ब्र को जन्नत का बाग़ बना दे और उसके वालिदैन को सब्र-ए-जमील अता फरमा। आमीन।”

📍 ख़ास रिपोर्ट:
अब्दुल क़ादिर मुल्तानी, भीलवाड़ा (राजस्थान)
मुल्तानी समाज न्यूज़ पोर्टल



Saturday, March 21, 2026

🕊️ इंतकाल की खबर: हाजी गुलाम रसूल साहब का इंतेक़ाल, आज 4 बजे होगी नमाज़-ए-जनाज़ा

निहायत ही रंजो-ग़म और अफसोस के साथ अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादराना हज़रात की खिदमत में यह इत्तिला पेश की जाती है कि
हाजी गुलाम रसूल साहब वल्द जनाब मोहम्मद हाफिजुद्दीन साहब (मूल निवासी: गाँव सिलना, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश) हाल बाशिंदे मकान नं० P-4, मस्जिद के सामने, सुल्तानपुरी, दिल्ली का आज दिन इतवार, तारीख़ 22 मार्च 2026 को सुबह क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम अपने अख़लाक, सादगी और बिरादरी में अपनी नेक साख के लिए जाने जाते थे। उनके इंतकाल की खबर से पूरे इलाके और बिरादरी में गहरा ग़म और मायूसी का माहौल है।

अल्लाह तआला से दुआ है कि मरहूम की मगफिरत फरमाए, उनकी कब्र को नूर से भर दे, उसे जन्नत के बागों में से एक बाग बना दे और उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए।
साथ ही, उनके तमाम अहले-खाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन। 🤲

🕌 नमाज़-ए-जनाज़ा:
आज शाम 3 से 4 बजे के दरमियान (इंशाअल्लाह) अदा की जाएगी।
तमाम अहबाब और बिरादराना हज़रात से पुरख़लूस इल्तिज़ा है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मगफिरत करें और सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

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✍️ रिपोर्ट: ज़मीर आलम, नई दिल्ली
(मुल्तानी समाज न्यूज़ नेटवर्क)


Friday, March 20, 2026

🕊️ इंतिक़ाल की खबर: मरहूम मोहम्मद कय्यूम साहब के लिए दुआ-ए-मग़फिरत की अपील

निहायत ही रंजो-ग़म के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि आज बरोज़ शनिवार, तारीख़ 21 मार्च 2026 को तक़रीबन रात 12:30 बजे, बीमारी के चलते जनाब मोहम्मद कय्यूम साहब वल्द जनाब मोहम्मद रफ़ीक साहब (मूल निवासी: गाँव कुरड़ी, ज़िला बागपत, उत्तर प्रदेश | हाल मुकाम: मीर विहार, दिल्ली) का क़ज़ा-ए-इलाही इंतिक़ाल हो गया।

मरहूम की उम्र लगभग 62 वर्ष थी। उनके इंतिक़ाल की खबर से पूरे इलाके और बिरादरी में गहरा शोक व्याप्त है। वे अपने पीछे ग़मगीन परिवार, अज़ीज़ो-अक़ारिब और चाहने वालों की एक बड़ी तादाद छोड़ गए हैं।

फिलहाल मय्यत के दफ़नाने का वक़्त समाचार लिखे जाने तक तय नहीं हो पाया है। जैसे ही कोई जानकारी प्राप्त होगी, उसे बाद नमाज़ ईद-उल-फितर अपडेट कर दिया जाएगा।

👉 तमाम अहले-ईमान से गुज़ारिश है कि मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फिरत फरमाएँ।
अल्लाह रब्बुल आलमीन मरहूम की मग़फ़िरत फरमाए और उनके अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।
आमीन, सुम्मा आमीन।

📞 अधिक जानकारी हेतु संपर्क करें:

जनाब मोहम्मद अय्यूब (कुरड़ी) – 9917653216

जनाब मोहम्मद एहसान (कुरड़ी) – 9624969568

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Thursday, March 19, 2026

📰 देवबंद से अहम ऐलान: देश में नहीं दिखा शव्वाल का चांद, 21 मार्च को मनाई जाएगी ईद उल फितर

देवबंद से एक महत्वपूर्ण और विश्वसनीय खबर सामने आई है। देशभर में शव्वाल का चांद नजर नहीं आने की पुष्टि के बाद अब ईद उल फितर का त्योहार शनिवार, 21 मार्च 2026 को मनाया जाएगा।

दारुल उलूम देवबंद समेत विभिन्न इस्लामिक संगठनों ने शरई उसूलों के अनुसार चांद न दिखने का ऐलान किया है। इसके साथ ही यह भी बताया गया है कि शुक्रवार को अलविदा जुमा अदा किया जाएगा, जिसके बाद देशभर में ईद का त्योहार पूरे एहतराम और अकीदत के साथ मनाया जाएगा।

यह फैसला इस्लामी परंपराओं और चांद देखने की प्रक्रिया के तहत लिया गया है, ताकि मुस्लिम समाज में किसी प्रकार का भ्रम न रहे और सभी लोग एक ही दिन त्योहार मना सकें। हर साल की तरह इस बार भी चांद दिखने या न दिखने के आधार पर ईद की तारीख तय की गई है।

मुस्लिम समाज में ईद उल फितर का विशेष महत्व है। यह रमजान के मुकद्दस महीने के बाद खुशियों, भाईचारे और इंसानियत का पैगाम लेकर आती है। इस मौके पर लोग नमाज अदा करते हैं, जरूरतमंदों की मदद करते हैं और आपसी मोहब्बत को बढ़ावा देते हैं।

देशभर के उलेमा और जिम्मेदार लोग भी यही अपील कर रहे हैं कि ईद के मौके पर अमन, भाईचारा और अनुशासन बनाए रखें तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।


📍 रिपोर्ट: ज़मीर आलम (उत्तर प्रदेश / नई दिल्ली)
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⚠️ डिस्क्लेमर (Disclaimer):

यह लेख विश्वसनीय स्रोतों और संबंधित इस्लामिक संस्थाओं के आधिकारिक ऐलानों के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना है। किसी भी प्रकार की धार्मिक भावना को आहत करना या भ्रामक जानकारी देना हमारा उद्देश्य नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी निर्णय से पहले स्थानीय आधिकारिक घोषणा की पुष्टि अवश्य करें।



Wednesday, March 18, 2026

उज्जैन से दुखद खबर: बातुल बी का इंतकाल, बिरादरी में शोक की लहर

उज्जैन (मध्य प्रदेश) से एक बेहद दुखद और अफसोसनाक खबर सामने आई है। अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार व बढ़ई बिरादरी के लिए बड़े रंज और ग़म का मौका है। मरहूम जनाब अब्दुल रज़्ज़ाक़ भट्टी साहब (उज्जैन) की जोजा, मरहूमा बातुल बी का आज बरोज़ जुमेरात, 19 मार्च 2026 को क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया।

यह खबर सुनते ही पूरे इलाके और बिरादरी में ग़म की लहर दौड़ गई। मरहूमा अपने पीछे एक बड़ा कुनबा और चाहने वालों को छोड़कर रुख़्सत हो गईं। उनके इंतकाल से परिवार ही नहीं, बल्कि समाज में भी एक गहरा खालीपन महसूस किया जा रहा है।

अल्लाह तआला से दुआ है कि मरहूमा की मगफिरत फरमाए, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मक़ाम अता करे और तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।


📌 मय्यत से संबंधित जानकारी

मय्यत के सिलसिले में अधिक जानकारी के लिए आप
मोहम्मद साबिर मुल्तानी से मोबाइल नंबर 9827042292 पर संपर्क कर सकते हैं।


✍️ ख़ास रिपोर्ट

उज्जैन, मध्य प्रदेश से
पत्रकार: ज़मीर आलम


🌐 प्रकाशन

यह खबर “मुल्तानी समाज” — एक राष्ट्रीय स्तर की समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल — के लिए तैयार की गई है, जो देश की राजधानी दिल्ली से संचालित है और मुल्तानी लोहार व बढ़ई बिरादरी की आवाज़ को राष्ट्रीय स्तर पर मंच प्रदान करती है।

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Tuesday, March 17, 2026

नम आँखों से दी गई अंतिम विदाई: उद्योगपति व समाजसेवी अब्दुल कय्यूम का इंतकाल, शहर में शोक की लहर

मुजफ्फरनगर। शहर के जाने-माने उद्योगपति एवं वरिष्ठ समाजसेवी जनाब अब्दुल कय्यूम साहब के इंतकाल की खबर से पूरे क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त हो गया। उन्होंने 17 मार्च 2026, दिन मंगलवार को क़ज़ा-ए-इलाही से रुख़्सत फरमाया। जानकारी के अनुसार, पानीपत (हरियाणा) के एक निजी अस्पताल में उन्होंने शाम लगभग साढ़े 6 बजे आखिरी सांस ली।

मरहूम के पार्थिव शरीर को रात करीब 9 बजे मुजफ्फरनगर स्थित उनके आवास पर लाया गया। चूंकि रात अधिक हो चुकी थी और रमज़ान का पाक महीना भी चल रहा है, इसलिए परिजनों ने आपसी मशविरा कर सुपुर्द-ए-ख़ाक का समय अगले दिन, 18 मार्च 2026 (बुधवार) सुबह 10 बजे निर्धारित किया।

हालांकि रात गहरी होने के बावजूद, उनके चाहने वालों का हुजूम देर रात तक उनके आवास पर मौजूद रहा। बताया जाता है कि रात करीब 2 बजे तक लोग लगातार पहुंचकर मरहूम को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश करते रहे। सुबह फज्र की नमाज़ के बाद से ही रिश्तेदारों, मित्रों और शहर की जानी-मानी हस्तियों का तांता लगना शुरू हो गया।

सुपुर्द-ए-ख़ाक के समय का दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था। हजारों की संख्या में लोग—जिनमें महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल थे—कब्रिस्तान पहुंचे और नम आंखों से अब्दुल कय्यूम साहब को अंतिम विदाई दी। हर आंख नम थी और हर ज़ुबान उनकी नेकियों और सामाजिक सेवाओं को याद कर रही थी।

जनाब अब्दुल कय्यूम साहब न सिर्फ एक सफल उद्योगपति थे, बल्कि एक दरियादिल इंसान और समाज के लिए समर्पित व्यक्तित्व भी थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में अनेक सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और जरूरतमंदों की मदद को हमेशा प्राथमिकता दी। उनके इंतकाल से समाज ने एक ऐसी शख्सियत को खो दिया है, जिसकी भरपाई कर पाना आसान नहीं होगा।

अल्लाह तआला मरहूम को जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए और उनके परिजनों को सब्र-ए-जमील अता करे। आमीन।


(यह रिपोर्ट उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। समाचार का उद्देश्य केवल सूचनात्मक है और इसमें पूर्ण संवेदनशीलता व सम्मान बनाए रखा गया है।)

📍 रिपोर्ट: प्रधान संपादक ज़मीर आलम
📍 स्थान: मुजफ्फरनगर / नई दिल्ली

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🕊️ गहरे रंज-ओ-ग़म के साथ: मशहूर उद्योगपति जनाब अब्दुल कय्यूम साहब का इंतकाल, एक दौर का ख़ात्मा

मुजफ्फरनगर/उत्तर प्रदेश डेस्क से।

इंतिहाई अफ़सोस और दुख के साथ यह खबर दी जाती है कि प्रसिद्ध उद्योगपति, कई राष्ट्रीय स्तर के बिज़नेस अवॉर्ड से सम्मानित शख्सियत जनाब अब्दुल कय्यूम साहब (85 वर्ष) वल्द जनाब हाजी अमीर हसन साहब (मरहूम) का आज बरोज मंगल, बा - तारीख़ 17 मार्च 2026 को शाम तक़रीबन 6:30 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम अपने पीछे एक समृद्ध विरासत और मिसाल छोड़ गए हैं। वह अपने वालिद के घराने में पैदा हुए, जहां पाँच भाई और दो बहनों में सबसे बड़े थे। अपने जीवनकाल में उन्होंने मेहनत, दूरदर्शिता और सादगी के साथ उद्योग जगत में वह मुकाम हासिल किया, जिसे आज भी इज्जत और एहतराम के साथ याद किया जाता है।

कोल्हू और क्रेशर उद्योग से शुरुआत कर, सल्फर (मिनी शुगर मिल) के क्षेत्र में उन्होंने एक अलग पहचान बनाई और बाद में पेपर मिल उद्योग में भी कामयाबी हासिल की। एक समय ऐसा भी रहा जब देश के कई राज्यों में उनकी पहचान और कारोबार का डंका बजता था।

उनकी शख्सियत की सबसे खास बात उनकी सादगी और विनम्रता थी। कई बार राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होने और बड़े-बड़े उद्योगपतियों, नेताओं व मंत्रियों से करीबी संबंध होने के बावजूद, उन्होंने हमेशा खुद को दिखावे और प्रचार से दूर रखा। खबरों में आने से बचते हुए वे अक्सर मीडिया से भी विनम्रता के साथ दूरी बनाए रखते थे।

मरहूम अपने पीछे अपनी अहलिया, बेटियों—राबिया बी, सायरा बी, शारदा बी, हीना बी (मरहूमा ), शबाना बी, हुस्ना बी और नाज़िया बी—और बेटे साजिद समेत पौते-पोतियों, नाते-नातिनों और पूरे खानदान को ग़मगीन छोड़ गए हैं।

👉 जनाज़े की जानकारी:
मरहूम को अनुमानतः कल बरोज बुध, 18 मार्च 2026 को सुबह 10:00 बजे सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम अहबाब और जानने वालों से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

🤲 अल्लाह तआला से दुआ है कि मरहूम की मग़फिरत फरमाए, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता करे और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।


रिपोर्ट: ज़मीर आलम
प्रकाशन: मुल्तानी समाज (राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज़ पोर्टल व यूट्यूब चैनल)

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📌 नोट: मय्यत से संबंधित अधिक जानकारी के लिए संपादक ज़मीर आलम जी से दिए गए नंबर पर संपर्क किया जा सकता है।

🕊️ इंतिहाई रंज-ओ-ग़म के साथ: जनाब मोहम्मद इलयास साहब का इंतकाल, इलाके में शोक की लहर

बड़ौत/बागपत (उत्तर प्रदेश)।अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी के लिए आज का दिन गहरे दुख और अफ़सोस का पैग़ाम लेकर आया। बड़े ही अदब और रंज के साथ यह इत्तला दी जाती है कि जनाब मोहम्मद इलयास साहब वल्द जनाब अमीरुल्लाह साहब (मरहूम), असल निवासी गांव बुढपुर (जिला बागपत) तथा हाल मुकाम मोहल्ला पठानकोट, क़स्बा बड़ौत (गोल मस्जिद के सामने वाली गली), का आज मंगलवार, 17 मार्च 2026 को शाम लगभग 5:15 बजे इंतकाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम के इंतकाल की खबर से पूरे क्षेत्र और बिरादरी में शोक की लहर दौड़ गई है। लोग ग़मगीन दिल के साथ उनके घर पहुंचकर परिजनों को तसल्ली दे रहे हैं। मरहूम अपने नेक अख़लाक, मिलनसार स्वभाव और समाज के प्रति सकारात्मक योगदान के लिए जाने जाते थे। उनका इस तरह अचानक रुख़्सत हो जाना, परिवार और जानने वालों के लिए एक बड़ा सदमा है।

अल्लाह तआला से दुआ है कि मरहूम को जन्नतुल फिरदौस में आला मकाम अता फरमाए, उनकी मग़फिरत फरमाए और अहल-ए-ख़ाना को इस मुश्किल घड़ी में सब्र-ए-जमील अता करे। आमीन।

👉 नोट: मय्यत को सुपुर्द-ए-ख़ाक कल दिन बुध बा तारीख़ 18 मार्च 2026 को सुबह 10 बजे किया जाएगा सपुर्द - ए - ख़ाक, लिहाज़ा आप हज़रात भी जनाज़े में शरीक होकर सवाबे दारेन हासिल करें।

नोट:- मय्यत के सिलसिले में और ज्यादा मालूमात के लिए जनाब अली हसन साहब के मोबाईल नंबर - 9027475784 पर कॉल करके जानकारी हासिल कर सकते है।


रिपोर्ट: ज़मीर आलम
स्थान: नई दिल्ली

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मुल्तानी समाज (राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज़ पोर्टल व यूट्यूब चैनल)

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🤲 दुआ की दरख़्वास्त है कि अल्लाह मरहूम की मग़फिरत फरमाए और उन्हें जन्नत में ऊंचा मुकाम अता करे।

Monday, March 16, 2026

आने वाले हालात को देखते हुए सादगी अपनाने की अपील — फिजूल खर्च से बचें और भविष्य के लिए तैयार रहें

मौजूदा समय में दुनियाभर में आर्थिक हालात तेजी से बदल रहे हैं। कई देशों में महंगाई बढ़ने, व्यापारिक अस्थिरता और संघर्ष की परिस्थितियों ने लोगों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। ऐसे हालात में समाज के जिम्मेदार लोगों और कई बड़े आलिम-उलेमा ने आम लोगों से अपील की है कि आने वाले समय को ध्यान में रखते हुए अपनी जिंदगी में सादगी और एहतियात को अपनाया जाए।

जानकारों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती महंगाई, आर्थिक दबाव और विभिन्न क्षेत्रों में हो रही उथल-पुथल का असर धीरे-धीरे दूसरे देशों पर भी पड़ सकता है। मध्य-पूर्व समेत कई इलाकों में तनाव और नुकसान की खबरों के बीच यह आशंका जताई जा रही है कि आने वाले समय में आर्थिक चुनौतियाँ और बढ़ सकती हैं। ऐसे में आम लोगों को अभी से अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और अनावश्यक खर्च से बचने की सलाह दी जा रही है।

समाज के जिम्मेदार लोगों ने विशेष रूप से आगामी ईद के अवसर को लेकर यह अपील की है कि त्योहार को सादगी के साथ मनाया जाए। ईद खुशियों का त्योहार है, लेकिन इसका असली संदेश आपसी भाईचारा, जरूरतमंदों की मदद और संयमित जीवनशैली है। इसलिए कोशिश की जाए कि फिजूल खर्च से बचा जाए और अपनी क्षमता के अनुसार ही खर्च किया जाए।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर लोग अपनी आमदनी के हिसाब से खर्च करेंगे और थोड़ा बहुत बचत करने की आदत डालेंगे तो भविष्य में आने वाली आर्थिक मुश्किलों का सामना करना आसान होगा। कई बार लोग सामाजिक दिखावे या प्रतिस्पर्धा में आकर जरूरत से ज्यादा खर्च कर बैठते हैं, जो बाद में आर्थिक दबाव का कारण बन जाता है। इसलिए बेहतर यही है कि जिंदगी में सादगी को अपनाया जाए और बचत की आदत को मजबूत किया जाए।

साथ ही समाज में यह भी जागरूकता फैलाने की जरूरत बताई गई है कि लोग कर्ज और ब्याज के जाल में फंसने से बचें। धार्मिक शिक्षाओं में भी ब्याज लेने और देने दोनों से बचने की हिदायत दी गई है। इसलिए समझदारी इसी में है कि लोग अपनी जरूरतों को सीमित रखें और जितना संभव हो उतना सादगीपूर्ण जीवन जीने की कोशिश करें।

समाज के जिम्मेदार लोग यह भी कहते हैं कि मुश्किल समय में आपसी सहयोग और एकजुटता ही सबसे बड़ी ताकत होती है। अगर समाज के लोग मिल-जुलकर जरूरतमंदों की मदद करें और एक दूसरे का सहारा बनें तो किसी भी कठिन परिस्थिति से निकलना आसान हो सकता है।

अंत में सभी लोगों से यही अपील की जा रही है कि हालात को समझते हुए संयम, सादगी और समझदारी को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाएं। अनावश्यक खर्च से बचें, बचत की आदत डालें और अपने परिवार तथा समाज के साथ मिलकर एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य की तैयारी करें।

अल्लाह तआला से दुआ है कि वह हम सबकी हिफाजत फरमाए और दुनिया भर में अमन-ओ-सलामती कायम रखे।

— ज़मीर आलम
पत्रकार, नई दिल्ली
मुल्तानी समाज / मुल्तानी घराना नेटवर्क
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Saturday, March 14, 2026

🕊️ इंतिहाई अफ़सोसनाक ख़बर: जनाब रशीद साहब की अहलिया निशात बी का इंतक़ाल, इलाक़े में ग़म की लहर

देवबंद (ज़िला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश) से एक बेहद रंज-ओ-ग़म भरी ख़बर सामने आई है। अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को निहायत ही अफ़सोस के साथ यह इत्तला दी जाती है कि मोहल्ला पठानपुरा, रेती चौक, देवबंद निवासी जनाब रशीद साहब की अहलिया निशात बी का आज बरोज़ शनिवार, 14 मार्च 2026 की शाम क़ज़ा-ए-इलाही से इंतक़ाल हो गया।

इस ग़मगीन ख़बर के फैलते ही इलाके और बिरादरी में शोक की लहर दौड़ गई। मरहूमा निशात बी एक नेकदिल, सादा-मिज़ाज और मिलनसार ख़ातून के तौर पर जानी जाती थीं। उनके इंतक़ाल से परिवार के साथ-साथ जानने वालों में भी गहरा दुख और अफ़सोस पाया जा रहा है।

परिवार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार मय्यत को कल बरोज़ इतवार, 15 मार्च 2026 को सुबह 10 बजे सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम अहबाब, रिश्तेदारों और बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश की जाती है कि जनाज़े में शिरकत कर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और सवाब-ए-दारैन हासिल करें।

अल्लाह तआला से दुआ है कि मरहूमा की मग़फ़िरत फरमाए, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे और तमाम अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।

यह खबर केवल जानकारी और सामाजिक उद्देश्य से साझा की जा रही है, ताकि बिरादरी और जानने वाले लोग इस दुखद पलों में इस परिवार के साथ खड़े हो सकें और मरहूमा के लिए दुआ कर सकें।


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ख़ास रिपोर्ट: पत्रकार ज़मीर आलम, देवबंद, सहारनपुर, उत्तर प्रदेश 

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Friday, March 13, 2026

हाजी मोहम्मद इक़बाल क़ाज़ी बने राजस्थान कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के जनरल सेक्रेटरी, क्षेत्र में खुशी की लहर

भीलवाड़ा, 12 मार्च। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की ओर से आधिकारिक घोषणा करते हुए मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले समाजसेवी जनाब हाजी मोहम्मद इक़बाल क़ाज़ी को राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अल्पसंख्यक विभाग का जनरल सेक्रेटरी (महासचिव) नियुक्त किया गया है। पार्टी नेतृत्व द्वारा की गई यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू मानी जाएगी।

हाजी मोहम्मद इक़बाल क़ाज़ी लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। संगठन में उनकी सक्रियता और अनुभव को देखते हुए पार्टी ने उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। इस नियुक्ति के बाद क्षेत्र और समाज में खुशी और उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।

इस अवसर पर हाजी मोहम्मद इक़बाल क़ाज़ी ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकार्जुन खड़गे, वरिष्ठ नेता राहुल गांधी, सांसद इमरान प्रतापगढ़ी, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता सचिन पायलट, तथा एम0डी0 चोपडार व अन्य वरिष्ठ नेतृत्व का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पार्टी द्वारा उन पर जताए गए विश्वास के लिए वह नेतृत्व के आभारी हैं और संगठन को मजबूत करने तथा समाज के हित में कार्य करने के लिए पूरी निष्ठा और ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे।

ज्ञात हो कि हाजी मोहम्मद इक़बाल क़ाज़ी इससे पहले भी संगठन में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वह राजस्थान कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग के अजमेर संभाग अध्यक्ष तथा भीलवाड़ा पूर्व जिला अध्यक्ष के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी सक्रियता और लोगों की मदद के लिए सदैव तत्पर रहने की उनकी पहचान समाज में विशेष रूप से मानी जाती है।

समाज सेवा के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। वर्तमान में वह मुलतानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट में राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष के पद पर रहते हुए विभिन्न सामाजिक और जनहित के कार्यों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। बिरादरी और सर्व समाज के बीच उनकी सक्रिय भागीदारी और सहयोगात्मक स्वभाव के कारण उन्हें व्यापक सम्मान प्राप्त है।

राजस्थान कांग्रेस कमेटी के अल्पसंख्यक विभाग में जनरल सेक्रेटरी के रूप में उनकी नियुक्ति को संगठन के लिए एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि उनके अनुभव और कार्यशैली से पार्टी को राज्य और क्षेत्र में नई ऊर्जा तथा मजबूती मिलेगी।

उनकी नियुक्ति की खबर सामने आते ही क्षेत्र के लोगों, सामाजिक संगठनों और पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा उन्हें बधाइयाँ देने का सिलसिला जारी है। अनेक लोगों ने इसे समाज और संगठन दोनों के लिए गर्व और सम्मान का विषय बताया है।

— ख़ास रिपोर्ट:
अब्दुल क़ादिर मुल्तानी
पत्रकार, भीलवाड़ा (राजस्थान)

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मुल्तानी बिरादरी के बुज़ुर्ग मोहम्मद रियासत साहब का इंतकाल, इलाके में शोक की लहर

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार व बढ़ई बिरादरी के लिए बेहद अफसोस और रंज-ओ-ग़म की खबर सामने आई है। बिरादरी के बुज़ुर्ग और सम्मानित शख्सियत जनाब मोहम्मद रियासत साहब (लगभग 70 वर्ष) वल्द मरहूम जनाब महमूद साहब, निवासी गांव कच्ची गढ़ी उर्फ़ गढ़ी अब्दुल्ला खां, जिला शामली (उत्तर प्रदेश) तथा हाल बाशिंदे बड़ी नहर, सांसद इमरान मसूद निवास के नजदीक, अंबाला रोड, सहारनपुर का बरोज जुमे, 13 मार्च 2026 को क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया।

इस दुखद खबर से परिवार, रिश्तेदारों और पूरे मुल्तानी समाज में गहरा शोक व्याप्त है। मरहूम अपने पीछे अपनी अहलिया, एक बेटा और चार बेटियों समेत पूरे कुनबे, खानदान और अज़ीज-ओ-अक़ारिब को ग़मगीन छोड़कर इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत हो गए।

मिली जानकारी के अनुसार मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा आज बरोज शनिवार, 14 मार्च 2026 को नमाज़-ए-जुहर के बाद उनके पैतृक गांव गढ़ी अब्दुल्ला खां (कच्ची गढ़ी) स्थित कब्रिस्तान में अदा की जाएगी, जिसके बाद उन्हें वहीं सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

बिरादरी और इलाके के तमाम लोगों से गुज़ारिश की जाती है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और उनके घरवालों के ग़म में शरीक हों, ताकि सवाब-ए-दारैन हासिल हो सके।

अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फरमाए, उनकी कब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए और तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।

नोट: मरहूम के बारे में अधिक जानकारी के लिए जनाब महताब आलम साहब से मोबाइल नंबर 9069953216 पर संपर्क किया जा सकता है।

(ज़मीर आलम)
विशेष संवाददाता

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इंतकाल की खबर: जमील अहमद साहब की अहलिया का हुआ इंतेकाल, आज अस्र के बाद होगा जनाज़ा

क़स्बा खतौली (जिला मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश) से एक दुखद समाचार प्राप्त हुआ है। निहायत ही अफ़सोस और रंज-ओ-ग़म के साथ बिरादरी और इलाके के लोगों को यह इत्तला दी जाती है कि जनाब जमील अहमद साहब (गाँव छबड़िया वाले) की अहलिया का आज जुमे के दिन, 13 मार्च 2026 को सुबह लगभग 10:00 बजे इंतकाल हो गया। बताया गया है कि वह इन दिनों अपने दामाद जनाब रफीक अहमद साहब (कस्बा शाहपुर वाले) के यहाँ बुढ़ाना रोड, मस्जिद एक मिनारा के पास, खतौली में रह रही थीं।

मरहूमा के इंतकाल की खबर से परिजनों, रिश्तेदारों और परिचितों में गहरा शोक व्याप्त है। अल्लाह तआला से दुआ है कि वह मरहूमा की मगफिरत फरमाए, उनकी कब्र को रौशन करे और घरवालों को इस दुख की घड़ी में सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।

परिवार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार मरहूमा की नमाज़-ए-जनाज़ा आज अस्र की नमाज़ के बाद मस्जिद एक मिनारा, बुढ़ाना रोड, क़स्बा खतौली में अदा की जाएगी। तमाम अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादरी के लोगों से गुज़ारिश की गई है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मगफिरत करें और सवाब हासिल करें।

यह खबर सामाजिक और बिरादरी स्तर पर साझा की जा रही है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस गमजदा ख़बर से अवगत हो सकें और जनाज़े में शामिल होकर सवाबे दारेन हासिल कर सके और मगफिरत के लिए दुआ कर सकें।

रिपोर्ट : ज़मीर आलम, नई दिल्ली
(“मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका / न्यूज़ पोर्टल)

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Wednesday, March 11, 2026

बागपत के गाँव पुट्ठी के हाजी इशाक साहब का इंतकाल, नम आँखों से अदा की जाएगी अंतिम विदाई

निहायत ही अफसोस और गहरे दुख के साथ बिरादरी को यह इत्तिला दी जाती है कि बागपत जनपद के गाँव पुट्ठी निवासी जनाब हाजी इशाक साहब (उम्र लगभग 45 वर्ष) वल्द जनाब मुश्ताक हाजी साहब का आज बरोज़ जुमेरात, 12 मार्च 2026 को सुबह करीब 4 बजे कज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया। इस खबर से इलाके और बिरादरी में गहरा शोक व्याप्त है।

मरहूम हाजी इशाक साहब अपने अच्छे अख़लाक, मिलनसार स्वभाव और बिरादरी के लोगों के साथ नेक ताल्लुकात के लिए जाने जाते थे। उनके इंतकाल की खबर मिलते ही रिश्तेदारों, दोस्तों और जानने वालों में गम का माहौल छा गया।

अल्लाह तआला से दुआ है कि वह मरहूम को जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए और उनके तमाम अहल-ए-खाना को इस सदमे को बर्दाश्त करने के लिए सब्र-ए-जमील अता करे।

मरहूम अपने पीछे अपनी अहलिया और तीन मासूम बच्चों को छोड़ गए हैं, जिनमें दो बेटे और एक बेटी शामिल हैं। परिवार पर यह दुख का वक्त बेहद भारी है और बिरादरी के लोग उनके घर पहुंचकर ताज़ियत पेश कर रहे हैं।

मय्यत को आज नमाज़-ए-जुहर के बाद लगभग दोपहर 1 बजे सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम बिरादराना हजरात से गुजारिश है कि जनाज़े की नमाज़ में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मगफिरत करें और सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

मय्यत के बारे में अधिक जानकारी के लिए जनाब अली हसन साहब से मोबाइल नंबर 9027475784 पर संपर्क किया जा सकता है।


(ख़ास रिपोर्ट)
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नई दिल्ली से पत्रकार – ज़मीर आलम

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साहित्य की दुनिया में बढ़ा सरधना का मान: डॉ. फुरकान अहमद सरधनवी “मेरठ रत्न” सम्मान से नवाज़े गए

मेरठ। ऑल इंडिया कॉन्फ्रेंस ऑफ इंटेलेक्चुअल (AICOI) के तत्वावधान में रविवार को शांति निकेतन विद्यापीठ, मेरठ में एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में शिक्षा, साहित्य और समाज सेवा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रतिभाशाली व्यक्तियों को सम्मानित किया गया।

इसी अवसर पर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले सरधना (जिला मेरठ, उत्तर प्रदेश) के प्रसिद्ध लेखक, शायर एवं साहित्यकार डॉ. फुरकान अहमद सरधनवी को साहित्य और कविता के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए “मेरठ रत्न” अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता ऑल इंडिया कॉन्फ्रेंस ऑफ इंटेलेक्चुअल के महासचिव प्रकाश निधि शर्मा ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में लोक अदालत, नैनीताल हाईकोर्ट के जज जस्टिस राजेश टंडन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के संयोजक प्रकाश निधि शर्मा, सह संयोजक अनुश्री तथा शांति निकेतन विद्यापीठ के डायरेक्टर विशाल जैन ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लगभग दस प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह, मेडल, शॉल ओढ़ाकर तथा पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया।

डॉ. फुरकान अहमद सरधनवी को मिला यह सम्मान न केवल उनकी साहित्यिक साधना की पहचान है, बल्कि इससे सरधना और मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी का नाम भी पूरे प्रदेश में गौरवान्वित हुआ है। उनकी लेखनी लंबे समय से समाज, साहित्य और संस्कृति के विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती रही है, जिससे नई पीढ़ी को भी प्रेरणा मिलती है।

मुल्तानी समाज” न्यूज़ परिवार की ओर से डॉ. फुरकान अहमद सरधनवी को इस सम्मान के लिए दिली मुबारकबाद दी गई है। साथ ही अल्लाह तआला से दुआ की गई है कि वे इसी तरह अपनी काबिलियत और इल्मी खिदमत के जरिए अपने कस्बे, बिरादरी और पूरे देश का नाम रोशन करते रहें।


रिपोर्ट: ज़मीर आलम, पत्रकार
सरधना, जिला मेरठ (उत्तर प्रदेश)

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खतौली में शोक की लहर: हाजी मोबीन साहब की वालिदा का इंतकाल, बिरादरी में गहरा ग़म

क़स्बा खतौली, जिला मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) से एक निहायत ही अफ़सोसनाक और रंज-ओ-ग़म की ख़बर सामने आई है। मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले हाजी मोबीन साहब (गांव राडधने वालों) की मोहतरमा वालिदा का आज बुधवार, 11 मार्च 2026 को असर की नमाज़ के बाद तक़रीबन शाम 5:30 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतक़ाल हो गया।

इस दुखद खबर के बाद परिवार, रिश्तेदारों और पूरी बिरादरी में गहरा ग़म और शोक का माहौल है। मरहूमा के इंतक़ाल की खबर सुनते ही आसपास के इलाकों और बिरादरी के लोगों ने घर पहुंचकर परिजनों से ताज़ियत का इज़हार किया और मरहूमा के लिए मग़फिरत की दुआएँ कीं।

बताया गया है कि मरहूमा की नमाज़-ए-जनाज़ा आज रात लगभग 11 बजे अदा की जाएगी, इंशाअल्लाह। बिरादरी के तमाम अहबाब और इलाक़े के लोगों से गुज़ारिश की गई है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फिरत करें और इस मुश्किल घड़ी में परिवार के साथ हमदर्दी और ताज़ियत का इज़हार करें।

अल्लाह तआला से दुआ है कि वह मरहूमा की मग़फिरत फरमाए, उनकी क़ब्र को रौशन और वसीअ फरमाए, जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फरमाए और तमाम घरवालों को इस सदमे को बर्दाश्त करने के लिए सब्र-ए-जमील अता फरमाए।
आमीन।


रिपोर्ट: ज़मीर आलम, पत्रकार
खतौली, जिला मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश)

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Tuesday, March 10, 2026

कुरान खत्म शरीफ की मुकद्दस महफ़िल में दुआओं का सिलसिला, हाजी बाबा ने मिठाई और चाय से किया लोगों का इस्तकबाल


नई दिल्ली / विशेष रिपोर्ट:

हाल ही में आयोजित एक रूहानी और बरकत भरी महफ़िल में कुरान खत्म शरीफ के मुकद्दस मौके पर सामूहिक दुआ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मौजूद लोगों के चेहरों पर खुशी और सुकून साफ झलक रहा था। कार्यक्रम में लोगों ने मिलकर कुरान शरीफ की तिलावत के बाद अल्लाह की बारगाह में दुआएँ मांगीं।

इस मौके पर हाजी बाबा ने पूरे अदब और मेहमाननवाज़ी के साथ उपस्थित लोगों का स्वागत किया। कार्यक्रम के बाद उन्होंने सभी लोगों को मिठाई, चाय और मट्ठी पेश की और महफ़िल में शामिल होने वाले लोगों का सम्मान भी किया। इस दौरान माहौल में भाईचारे, मोहब्बत और आपसी एकजुटता की झलक देखने को मिली।

दुआ के दौरान अल्लाह तआला से उन तमाम लोगों के लिए मगफिरत की दुआ की गई जो इस दुनिया से रुखसत हो चुके हैं। साथ ही मौजूद लोगों के रोज़गार, कारोबार और खुशहाली के लिए भी दुआएँ की गईं।

इस रूहानी महफ़िल में मुल्क की अमन-ओ-सलामती और तरक्की के लिए भी खास तौर पर दुआ की गई। इसके अलावा मिर्जा मुल्तानी लोहार बिरादरी की भलाई, एकता और तरक्की के लिए भी अल्लाह की बारगाह में दुआ मांगी गई।

कार्यक्रम का माहौल बेहद सादगी, मोहब्बत और आध्यात्मिकता से भरपूर रहा, जहाँ लोगों ने मिलकर दुआओं के जरिए इंसानियत, भाईचारे और आपसी सहयोग का संदेश दिया।


(नई दिल्ली डेस्क से पत्रकार ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट)

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Sunday, March 8, 2026

नीमच में भट्टी खानदान की खुशियों भरी दस्तक — मंतशा नूर और मोहम्मद फैजान का निकाह 24 अप्रैल को

मध्यप्रदेश के नीमच शहर में भट्टी खानदान के घर खुशियों की रौनक सजने जा रही है। अल्लाह तआला के फज़्लो करम और सरकारे दो आलम हज़रत मोहम्मद मुस्तफा ﷺ के सदके-तुफैल भट्टी परिवार में एक मुबारक मौके का ऐलान किया गया है। खानदान और बिरादरी में खुशी और मुहब्बत के माहौल के साथ यह जानकारी साझा की गई है कि एक पवित्र रिश्ते का आगाज़ होने जा रहा है।

मिली जानकारी के अनुसार मरहूम मोहम्मद सुलेमान साहब भट्टी की सडपोती, मरहूम मोहम्मद हसन साहब भट्टी की परपोती, मरहूम हाजी मोहम्मद यूसुफ साहब की पोती तथा जनाब अहमद हुसैन साहब भट्टी की साहिबजादी मंतशा नूर का निकाह तय किया गया है। यह निकाह भट्टी खानदान की पारंपरिक रस्मों और बिरादरी की मौजूदगी में संपन्न होगा।

दूल्हा मोहम्मद फैजान, हाजी अब्दुल समद साहब भट्टी (हाट वाले, नीमच) के सुपुत्र हैं। दोनों परिवारों ने इस रिश्ते को खुशी-खुशी मंजूरी देते हुए इसे एक नेक और मुबारक बंधन बताया है।

निकाह की रस्म 6 शव्वाल 1447 हिजरी, मुताबिक 24 अप्रैल 2026 (बरोज़ जुम्मा) को असर और मगरिब की नमाज़ के दरमियान अदा की जाएगी। यह मुबारक कार्यक्रम फ्रेंड्स कॉलोनी, कब्रिस्तान के पास, नीमच (मध्यप्रदेश) में आयोजित होगा, जहां खानदान, रिश्तेदारों और बिरादरी के जिम्मेदार लोग मौजूद रहेंगे।

परिवार की ओर से सभी अज़ीज़ो-अक़ारिब, दोस्तों और बिरादराने मुल्तानी से दरख्वास्त की गई है कि इस खुशी के मौके पर अपनी तशरीफ-आवरी से नवदंपति को दुआओं से नवाजें और इस नेक मौके की रौनक में शामिल होकर अपने प्यार और मुहब्बत का इज़हार करें।

आमद के मुंतज़िर और कार्यक्रम के इंतज़ाम में लगे बुजुर्गों और जिम्मेदारों में हाजी अब्दुल रशीद, मोहम्मद सादिक, हाजी मोहम्मद उस्मान, हाजी मोहम्मद हनीफ, अब्दुल रऊफ, मोहम्मद उमर, अब्दुल सलाम, हाजी अब्दुल सत्तार, अब्दुल सईद, मोहम्मद फारूख, अब्दुल जब्बार और मोहम्मद सलीम समेत अन्य जिम्मेदार शामिल हैं।

वहीं कार्यक्रम के मुकल्लिफीन में हाजी अब्दुल गफूर, मोहम्मद रफीक, हाजी मेहमूद हसन, अहमद हुसैन, अनवर हुसैन, गुलाम हुसैन, अल्ताफ हुसैन, उबैदुर रहमान, जाकिर हुसैन, मकबूल हुसैन, वाहिद हुसैन, नासिर हुसैन, मुजफ्फर हुसैन, मोहम्मद शाकिर, मोहम्मद वसीम, आबिद हुसैन, साजिद हुसैन, शाहिद हुसैन, मोहम्मद सलमान, मोहम्मद शाहरुख, मोहम्मद शहजाद, मोहम्मद समीर, मोहम्मद अली, मोहम्मद सोहेल और मोहम्मद जुबेर सहित कई लोग शामिल हैं।

परिवार की ओर से यह भी कहा गया है कि यह पवित्र निकाह सुन्नते रसूल ﷺ के मुताबिक सादगी और अदब के साथ अंजाम दिया जाएगा, जिसमें शामिल होकर दूल्हा-दुल्हन के लिए दुआ करना सबसे बड़ी खुशी और नेकी होगी।

(रिपोर्ट: अब्दुल क़ादिर मुल्तानी, नीमच, मध्यप्रदेश)
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Monday, March 2, 2026

मुल्तानी बिरादरी की मोअज्ज़ज़ बुज़ुर्ग हस्ती नूरजहां बी का इंतेकाल, इलाक़े में ग़म की लहर

इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन, अहले बिरादरी मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई समाज के लिए यह खबर निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ पेश की जा रही है कि बरोज पीर, तारीख़ 02 मार्च की बीती रात तकरीबन साढ़े 11 बजे मरहूमा नूरजहां बी (68 साल) अहलिया जनाब अनीस अहमद साहब वल्द जनाब अज़ीमुल्ला साहब (मरहूम), निवासी गढ़ी पुख्ता, ज़िला शामली (उ.प्र.), हाल बाशिंदे क़स्बा किच्छा, ज़िला उधमसिंह नगर (उत्तराखंड) का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया।

इस दर्दनाक खबर ने न सिर्फ उनके घर बल्कि पूरी बिरादरी को ग़मगीन कर दिया है।


🏡 जिंदगी का सफर

मरहूमा का मायका गांव जसोई, ज़िला मुजफ्फरनगर (उ.प्र.) में था। वह मरहूम जनाब रसीद साहब की बेटी थीं। उनके कोई भाई नहीं थे। उनकी दो बहनें—जरीना (जसोई) और हसीना (पानीपत)—अपनी-अपनी जगह आबाद हैं।

काफी अरसा पहले उनका परिवार क़स्बा बाजपुर, ज़िला उधमसिंह नगर (उत्तराखंड) में आकर बसा और बाद में किच्छा में मुक़ीम हो गया। अपनी सादगी, नेक अख़लाक़ और बिरादरी से गहरा ताल्लुक रखने वाली नूरजहां बी ने पूरी ज़िंदगी खामोशी और इख़लास के साथ गुज़ारी।


👨‍👩‍👧‍👦 पीछे रह गए अहल-ए-ख़ाना

मरहूमा अपने पीछे अपने शौहर जनाब अनीस अहमद साहब समेत तीन बेटे—

  • जनाब शहज़ाद साहब
  • जनाब अशरफ़ साहब
  • जनाब अरशद साहब

और दो बेटियां—

  • बड़ी बेटी सन्नो (आजाद चौक, शामली, उ.प्र.)
  • दूसरी बेटी शबनम (नजीबाबाद, बिजनौर, उ.प्र.)

को ग़मगीन छोड़ गई हैं।

घर का हर कोना आज उनकी याद में नम है। माँ का साया उठ जाना वह खालीपन है जिसे कोई भर नहीं सकता।


🕌 नमाज़-ए-जनाज़ा और सुपुर्द-ए-ख़ाक

मरहूमा को आज दिन मंगल, तारीख़ 03 मार्च 2026 को सुबह 10 बजे क़स्बा किच्छा, ज़िला उधमसिंह नगर (उत्तराखंड) में ही सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर सवाब-ए-दारेन हासिल करें और मरहूमा के लिए मग़फिरत की दुआ फरमाएं।

📞 मय्यत के सिलसिले में ज्यादा मालूमात के लिए मोहम्मद एहसान से मोबाइल नंबर 9756156658 पर राब्ता किया जा सकता है।


🤲 दुआ-ए-मग़फिरत

अल्लाह तआला मरहूमा नूरजहां बी की मग़फिरत फरमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए और घरवालों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।
आमीन या रब्बुल आलमीन।


📢 एक ज़रूरी ऐलान – इंतेकाल की खबर भेजने के लिए हिदायतें

अक्सर अधूरी जानकारी की वजह से खबर देर से पहुंचती है। “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से दरख़्वास्त करती है कि इंतेकाल की खबर भेजते वक़्त इन बातों का खास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता – असल व मौजूदा।
3️⃣ दफीने का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ जिम्मेदार शख्स का फोन नंबर।
5️⃣ (अगर मर्द का इंतकाल हो) तो फोटो शामिल करें।
6️⃣ इंतकाल की वजह (अगर मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम।

👉 मुकम्मल जानकारी से खबर सही वक़्त पर और सही तरीके से बिरादरी तक पहुंचेगी।


📰 डिस्क्लेमर

पत्रिका में प्रकाशित लेख, समाचार, विचार, प्रेस विज्ञप्ति या विज्ञापन संबंधित लेखक/संवाददाता/विज्ञापनदाता के निजी विचार हैं। इनसे संपादक, प्रकाशक या प्रबंधन की सहमति आवश्यक नहीं है। सामग्री की सत्यता व दावों के लिए संबंधित लेखक/विज्ञापनदाता स्वयं जिम्मेदार होंगे। किसी भी विवाद की स्थिति में न्याय क्षेत्र केवल दिल्ली रहेगा।


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देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित, मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका

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नोट:- शिनाख्त के लिए ख़बर में मरहूमा के शौहर जनाब अनीस अहमद साहब के फ़ोटो लगाए गए है।