अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादराना हज़रात को बड़े ही रंजो-ग़म के साथ यह इत्तिला दी जाती है कि मरहूम जनाब तय्यब साहिब (जानसठ वाले) की अहलिया, हज्जन शाहजहां बी का आज दिन शनिवार, 21 फ़रवरी 2026 को अल सुबह लगभग 4 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया। इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।
मरहूमा का इंतिक़ाल न सिर्फ़ उनके खानदान बल्कि पूरी बिरादरी के लिए गहरे सदमे का सबब बना है। वह रिश्ते में मिन्हाज मिर्ज़ा फलावदा वालों की अम्मी की चची थीं और ज़ैदी फ़ार्म, मेरठ निवासी हबीब अहमद पेशकार साहब के साहबज़ादे शकील अहमद साहब की सास थीं। मरहूमा अपने लख़्ते-जिगर जनाब आमिल साहब और जनाब आदिल साहब के साथ रह रही थीं।
हज्जन शाहजहां बी अपनी सादगी, शराफ़त, और दीनी मिज़ाज के लिए जानी जाती थीं। उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी ख़ामोशी से खिदमत, सब्र और शुक्र के साथ गुज़ारी। उनकी मौजूदगी घर के लिए रहमत और बरकत का सबब थी। आज उनके जाने से एक ऐसा खालीपन पैदा हुआ है जिसे अल्फ़ाज़ में बयान करना मुश्किल है।
मरहूमा के जनाज़े की नमाज़ आज दोपहर 1 बजे रूड़की रोड, मुहल्ला रामपुरी, मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश में अदा की जाएगी। तमाम अहबाब से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फिरत करें और सवाबे दारेन हासिल करें।
अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फिरत फरमाए, उनकी कब्र को रौशन और वसीअ फरमाए, और जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फरमाए। आमीन।
अल्लाह तआला अहले-खानदान को सब्र-ए-जमील अता फरमाए और इस सदमे को बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ दे।
🚨 ज़रूरी ऐलान
इंतेकाल की खबर भेजने के लिये अहम् हिदायतें
अक्सर देखा गया है कि किसी अज़ीज़ के इंतिक़ाल की खबर देर से या अधूरी जानकारी के साथ पहुंचती है, जिसकी वजह से कई लोग जनाज़े और दफ़ीने में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि इंतिक़ाल की खबर भेजते वक़्त नीचे दी गई बातों का खास एहतिमाम करें:
📌 भेजते समय इन बातों का ज़रूर ख्याल रखें:
1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम तथा वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता — अस्लन कहां के रहने वाले थे और फिलहाल कहां मुक़ीम थे।
3️⃣ जनाज़े/दफ़ीने का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार शख्स (एक या दो) के मोबाइल नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतिक़ाल हुआ हो तो मरहूम की साफ़ फोटो भी साथ भेजें।
6️⃣ इंतिक़ाल की वजह (अगर बयान करना मुनासिब समझें)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम — जैसे वालिदैन, भाई-बहन, औलाद वगैरह।
👉 मुकम्मल मालूमात से खबर वक़्त पर और सही अंदाज़ में शाया की जा सकेगी, जिससे बिरादरी के लोग आसानी से शरीक हो सकेंगे।
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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।
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