Sunday, March 14, 2021

धामपुर ( बिजनोंर ) के वक़ार मुलतानी केरम टूर्नानेंट में बने विजेता


मिली जानकारी के अनुसार धामपुर जिला बिजनोंर ( उत्तरप्रदेश ) में आयोजित यू0पी0 केरम प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। 

       इस प्रतियोगिता के फाइनल राउंड में हमारी ही बिरादरी के मोहल्ला बन्दूकचियान के होनहार युवक वक़ार मुलतानी ने अपनी कला और अच्छे प्रदर्शन से फाइनल राउंड में जीत दर्ज़ कर विजेता का तमग़ा हासिल किया ।


मुलतानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट के सभी पदाधिकारी और सदस्य वक़ार मुलतानी के अच्छे मुस्तकबिल की दुआ करते है। और उम्मीद करते है। कि वक़ार मुलतानी ऐसे ही बिरादरी का नाम हर क्षेत्र में रोशन करते रहेंगे ।

Saturday, March 13, 2021

बेटी की शादी के लिए 51000 रुपये शासन की ओर से दिया जाता है जो सीधे बेटी के वालिद के बैंक खाते में जमा होते हैं योजना से लाभान्वित होने के लिए शादी से एक महीने पहले आवेदन करना होता है


मध्यप्रदेश अल्पसंख्यक विकास कमेटी के सभी साथियों से खास गुजारिश है कि अभी अगले तीन महीने शादियों का सीजन रहने वाला है अपने वार्ड मोहल्ले बस्तियों में आप पता कर लें किन परिवारों में बेटी की शादी होने वाली है उन सभी परिवारों के कर्मकार मंडल पंजीयन को चेक कर लें पंजीयन है या नहीं यदि हां तो वैधता को जांच लें और यदि नहीं है तो उनके नवीन पंजीयन की कार्यवाही बिना समय गवाए तुरंत करे पंजीकृत परिवार को बेटी की शादी के लिए 51000 रुपये शासन की ओर से दिया जाता है जो सीधे बेटी के वालिद के बैंक खाते में जमा होते हैं योजना से लाभान्वित होने के लिए शादी से एक महीने पहले आवेदन करना होता है 

1 *पंजीयन की फोटो कॉपी* 

2 *वालिद का आधार कार्ड* 

3 *बैंक पासबुक की फोटो कॉपी* 

4 *लड़के व लड़की दोनों के आधार कार्ड व फोटो* 

5 *उम्र 18 वर्ष से अधिक होना* 

6 *शादी का कार्ड* 

7 *शादी के एक महीने पहले आवेदन करना*

यह आवेदन शहरों में नगरपालिका नगर परिषद् व ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत जनपद पंचायत में जमा करवाए या लोक सेवा केन्द्र में जमा करवाए सभी साथी मिलकर एक साथ इस काम को अंजाम देना है यदि हम अपने अपने जिलों में 100 परिवारों को इसमें शामिल कर लेते हैं तो अवाम तक 51 लाख रुपये पहुंच जाएगे उम्मीद है सभी भाई इस लक्ष्य को पुरी जिम्मेदारी मेहनत मशक्कत और लगन से पुरा कर अपनी अवाम को फायदा पहुंचाने के लिए काम कर करेंगे अल्लाह हम सभी को इस नेक खिदमत में कामयाबी अता फरमाये आमिन या रब्बूल आलमिन 

           

          

Friday, March 12, 2021

ताजमहल में शाहजहां का तीन दिनी उर्स शुरू


अप्रैल से महंगा हो सकता है ताजमहल का दीदार, जानें- अभी कितने रुपये करने पड़ते हैं खर्च

आगरा: आने वाले दिनों में ताजमहल का दीदार करना महंगा हो सकता है. आगरा विकास प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में बुधवार को ताजमहल के टिकट मूल्य के लंबित प्रस्ताव पर चर्चा हुई. एडीए सचिव राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी के अनुसार, प्राधिकरण ने ताजमहल की पथकर निधि बढ़ाने को लेकर शासन को प्रस्ताव भेजा है, जिससे शासन द्वारा प्रस्ताव पास होने पर आगामी एक अप्रैल से ताजमहल की टिकट दर बढ़ सकती है.


मालूम हो कि ताजमहल में अभी भारतीय पर्यटकों के लिए प्रवेश शुल्क 50 रुपये और विदेशी पर्यटकों के लिए 1100 रुपये है. वहीं, शाहजहां-मुमताज की कब्र देखने के लिए पर्यटकों को मुख्य गुंबद में जाने के लिए 200 रुपये का अतिरिक्त टिकट खरीदना होता है. एडीए के प्रस्ताव पर मुहर के बाद ताजमहल का प्रवेश शुल्क भारतीयों के लिए 30 रुपये बढ़कर 80 रुपये जबकि विदेशियों के लिए 100 रुपये बढ़कर 1200 हो जाएगा. यही नहीं अब मुख्य गुबंद पर जाने के लिए देशी-विदेशी पर्यटकों को 400 रुपये खर्च करने होंगे. शासन से प्रस्ताव पास होने के बाद ही ये दरें बढ़ाई जाएंगी.

ताजमहल में शाहजहां का तीन दिनी उर्स शुरू


मुगल बादशाह शाहजहां का 366 वां उर्स ताजमहल में बुधवार सुबह से शुरू हो गया है. दोपहर में गुस्ल की रस्म हुई. तीन दिवसीय उर्स में पर्यटकों को तहखाने में स्थित शाहजहां और मुमताज की असली कब्रें देखने का अवसर मिलेगा. उर्स के तीसरे दिन शुक्रवार को ताजमहल खुला रहेगा. इस्लामिक कैलेंडर के तहत होने वाले उर्स का आयोजन दस से 12 मार्च तक किया जा रहा है.


इस संबंध में खुद्दाम ए रोजा कमेटी के अध्यक्ष ताहिरउद्दीन ताहिर ने बताया कि उर्स के दूसरे दिन गुरुवार को शाहजहां की कब्र पर संदल चढ़ाया जाएगा और तीसरे दिन शुक्रवार को सुबह से शाम तक हाथ के पंखे और चादरपोशी की जाएगी. उन्होंने बताया कि कमेटी द्वारा 1331 मीटर सतरंगी चादर चढ़ाई जाएगी. इनके अलावा अन्य छोटी-बड़ी चादर कब्र पर चढ़ाई जाएंगी. इस संबंध में ताजमहल प्रभारी अमरनाथ गुप्ता ने बताया कि उर्स के पहले और दूसरे दिन दोपहर दो बजे से ताजमहल में सभी को निशुल्क प्रवेश दिया जायेगा. उर्स के तीसरे दिन शुक्रवार को ताजमहल खुला रहेगा और उस दिन पूरे दिन प्रवेश निशुल्क रहेगा.

बस स्टैंड , रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, सरकारी ऑफिसो पर बनी ....


बहुत  जरूरी एलान। 

 एयरपोर्ट अथॉरिटी तमाम मुसलमान भाई और बहनों से  गुजारिश करती हैं कि वह किसी भी एयरपोर्ट मैं बनी नमाज पढ़ने की जगह पर कुछ वक़्त गुजारे यह जगा खाली पड़ी है और इस्तेमाल नहीं की जाती हैं क्योंकि यहां कोई नमाज पढ़ने नहीं आता एयरपोर्ट अथॉरिटी का कहना है अगर ऐसा ही रहा तो वह इन नमाज पढ़ने की जगह को दूसरी चीजों के लिए इस्तेमाल करेंगे और दूसरे इबादत खाने बना देंगे इसलिए  मेहरबानी करके अपने रिश्तेदारों और दोस्तों से कहें इन नमाज पढ़ने की जगह हो में 5 से 10 मिनट के लिए नमाज की अदायगी कर ले जिस की वजह से आपका सफर  पुर सकून और पुर अमन हो। बराय मेहरबानी इस मैसेज को अपने दूसरे भाई बहनों और व्हाट्सएप ग्रुप पर जरूर शेयर करें

अल्लाह  आपको इसका अजर देगा।

मुलतानी ज़मीर आलम   💐💐🤲🤲

कुरआन के बारे में दुष्प्रचार फैलाने का यह तरीक़ा बहुत ही पुराना है कि कुरआन की जिन आयतों में जंग के मैदान में अत्याचारियों के प्रति युध्द का जिक़्र (उल्लेख) है उन आयतों को अलग-अलग सूरतों (अध्यायों / पाठों) में से और अलग-अलग जगह से सन्दर्भ के बाहर (Out of context) निकाल कर ऐसा दिखाने का कुप्रयास किया जाता है कि क़ुरान हिंसा के लिए प्रेरित करता है।


सवाल :- क्या क़ुरान की 24 आयतें दूसरे धर्म वालो से झगड़ा करने एवं हिंसा के लिए प्रेरीत करती हैं ?




जबकि जब आप इन आयतों को इनके सन्दर्भो के साथ पढ़ेंगे या आगे पीछे की आयत ही पढ़ लेंगे तो आप जान लेंगे की यह दावा कितना झूठा है।


जैसे उदाहरण के तौर पर कुरआन 9:5 का हवाला देकर यह कहा जाता है कि कुरआन गैर मुस्लिमों को मारने का हुक्म देता है। जबकि इसकी अगली और पिछली आयात यानी 9: 4 और 9: 6 ही पढ़ लेने से इसका सन्दर्भ पता चल जाता है कि यह युद्ध के मैदान की आयत है और उसमें भी अल्लाह का हुक्म यह है अगर इस (युद्ध के) दौरान भी अगर कोई मुस्लिमो से पनाह (शरण) मांगे तो उसे पनाह दी जाए।


दरअसल सिर्फ़ कुरआन ही नहीं बल्कि विश्व के हर प्रमुख धर्म ग्रन्थ में इस तरह की बाते, यानी की युद्ध के मैदान, अत्याचार और अत्याचारियों के विरुद्ध मौजूद हैं। लेकिन अगर इसी तरह इन ग्रन्थों से इन *श्लोकों / आयतों / वर्सेज* को सन्दर्भ के विपरीत (Out of context) अलग-अलग निकाल कर एक जगह इकट्ठा कर दिखाया जाए। तो *विश्व का हर धर्म ग्रन्थ हिंसा को बढ़ावा देता दिखाई देगा।*


और ऐसे ही कुरआन की इन 24 आयतों के बारे में किया जाता रहा है। हालाँकि यह स्वाभाविक है कि इस तरह तो प्रथम दृष्टया (Prima facie) कोई भी इन्हें पढ़कर ग़लतफ़हमी का शिकार हो जाएगा। लेकिन अगर वह कुरआन और मुहम्मद (स.अ.व.) की जीवनी का अध्ययन करेगा तो वह ज़रूर सच जान लेगा। 


उदाहरण के तौर पर: ऐसे ही 1950 के दौरान फैलाए जा रहे इसी कुप्रचार का शिकार होकर *स्वामी लक्ष्मी शंकराचार्य* ने इस्लाम को हिंसा और आतंकवाद से जोड़ते हुए इस्लाम के खिलाफ एक किताब लिखी जिसका आधार यही 24 आयतों के प्रति कुप्रचार रहा । लेकिन जब उन्हें बाद में सत्य का ज्ञान हुआ तो उन्होंने ख़ुद अपनी लिखी किताब पर खेद व्यक्त करते हुए उसे *शून्य घोषित* किया और ईश्वर एवं मुस्लिम से माफी मांगते हुए किताब लिखी *"इस्लाम आतंक या आदर्श?"* जिसमें उन्होंने खुद के अध्ययन और अनुभव के आधार पर बताया कि किस तरह कुप्रचार के उलट इस्लाम एक आदर्श धर्म है जो किसी भी तरह की हिंसा या आतंकवाद को बढ़ावा नही देता है।


उसकी प्रस्तावना में वे लिखते हैं कि (उन्हीं के शब्दों में) :-


*_मैंने कई साल पहले दैनिक जागरण में श्री बलराज मधोक का लेख “दंगे क्यों होते हैं?’’ पढ़ा था। इस लेख में हिन्दू-मुस्लिम दंगा होने का कारण कुरआन मजीद में काफिरों से लड़ने के लिए अल्लाह के फरमान बताए गए थे। लेख में कुरआन मजीद की वे आयते भी दी गई थी।_*


*_इसके बाद दिल्ली से प्रकाशित एक पैम्फलेट (पर्चा) ‘कुरआन की चौबीस आयतें, जो अन्य धर्मावलंबियों से झगड़ा करने का आदेश देती हैं’ किसी व्यक्ति ने मुझे दिया। इसे पढ़ने के बाद मेरे मन में जिज्ञासा हुई कि मैं कुरआन पढूं। इस्लामी पुस्तकों की दुकान से कुरआन का हिन्दी अनुवाद मुझे मिला।_*


*_कुरआन मजीद के इस हिन्दी अनुवाद में वे सभी आयतें मिली, जो पैम्फलेट (पर्चे) में लिखी थी। इससे मेरे मन में यह ग़लत धारणा बनी कि इतिहास में हिन्दू राजाओं व मुस्लिम बादशाहों के बीच जंग में हुर्इ मार-काट तथा आज के दंगों और आतंकवाद का कारण इस्लाम हैं। दिमाग़ भ्रमित हो चुका था, इसलिए हर आतंकवादी घटना मुझे इस्लाम से जुड़ती दिखाई देने लगी।_*


*_इस्लाम, इतिहास और आज की घटनाओं को जोड़ते हुए मैने एक पुस्तक लिख डाली ‘इस्लामिक आतंकवाद का इतिहास’ जिसका अंग्रेज़ी अनुवाद “The History Of Islamic Terrorism” के नाम से सुदर्शन प्रकाशन, सीता कुंज, लिबर्टी गार्डेन, रोड नम्बर-3, मलाड (पश्चिम), मुंबई -400064 से प्रकाशित हुआ।_*


*_हाल ही में मैने इस्लाम धर्म के विद्वानों (उलेमा) के बयानों को पढ़ा कि इस्लाम का आतंकवाद से कोई सम्बन्ध नहीं है। इस्लाम प्रेम,_* 


*_सद्भावना व भाईचारे का धर्म है। किसी बेगुनाह को मारना इस्लाम धर्म के विरूद्ध हैं। आतंकवाद के खिलाफ फतवा (धर्मादेश) भी जारी हुआ।_*


*_इसके बाद मैंने कुरआन मजीद में जिहाद के लिए आई आयतों के बारे में जानने के लिए मुस्लिम विद्वानों से सम्पर्क किया, जिन्होने मुझे बताया कि कुरआन मजीद की आयत भिन्न-भिन्न तत्कालीन परिस्थितियों में उतरी।_*


*_इसलिए कुरआन मजीद का केवल अनुवाद ही न देखकर यह भी देखा जाना ज़रूरी हैं कि कौन-सी आयत किस परिस्थिति में उतरी, तभी उसका सही मतलब और मकसद पता चल पाएगा।_*


*_साथ ही ध्यान देने योग्य हैं कि कुरआन इस्लाम के पैगम्बर मुहम्मद (स.अ.व.) पर उतारा गया था। अत: कुरआन को सही मायने में जानने के लिए पैगम्बर मुहम्मद (स.अ.व.) की जीवनी से परिचित होना भी ज़रूरी हैं। विद्वानों ने मुझसे कहा, ‘‘आपने कुरआन मजीद की जिन आयतों का हिन्दी अनुवाद अपनी किताब से लिया हैं, वे आयतें उन अत्याचारी काफ़िर और मुशरिक लोगों के लिए उतारी गई जो अल्लाह के रसूल (स.अ.व.) से लड़ाई करते और मुल्क में फसाद करने के लिए दौड़ते फिरते थे। सत्य धर्म की राह में रोड़ा डालनेवाले ऐसे लोगों के विरूद्ध ही कुरआन में जिहाद का फरमान हैं।’’_*


*_उन्होने मुझसे कहा कि इस्लाम की सही जानकारी न होने के कारण लोग कुरआन मजीद की पवित्र आयतों का मतलब समझ नहीं पाते। यदि आपने पूरे कुरआन मजीद के साथ हजरत मुहम्मद (स.अ.व.) की जीवनी भी पढ़ी होती, तो आप भ्रमित न होते।_*


*_मुस्लिम विद्वानों के सुझाव के अनुसार मैने सबसे पहले पैगम्बर हजरत मुहम्मद (स.अ.व.) की जीवनी पढ़ी। जीवनी पढ़ने के बाद इसी नजरिए से जब मन की शुद्धता के साथ कुरआन मजीद शुरू से अन्त तक पढ़ा, तो मुझे कुरआन मजीद की आयतों का सही मतलब और मकसद समझ में आने लगा।_*


*_सत्य सामने आने के बाद मुझे अपनी भूल का एहसास हुआ कि मैं अनजाने में भ्रमित था और इसी कारण ही मैंने अपनी उक्त किताब ‘इस्लामिक आतंकवाद का इतिहास’ में आतंकवाद को इस्लाम से जोड़ा हैं जिसका मुझे हार्दिक खेद (दुःख) हैं और इसलिये मैं अपने भुल एवं दुःख व्यक्त करते हुए फिर से एक नयी पुस्तक लिखी जिसका नाम है "इस्लाम आतंक या आदर्श?" इस पुस्तक में मैंने इस्लाम के अपने अध्ययन को बखूबी पेश किया है।_*


*_और साथ ही मैं अल्लाह से, पैगम्बर मुहम्मद (स.अ.व.) से और सभी मुस्लिम भाइयों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगता हूँ तथा अज्ञानता में लिखे व बोले शब्दों को वापस लेता हूँ। जनता से मेरी अपील हैं कि मेरी पहली पुस्तक ‘इस्लामिक आतंकवाद का इतिहास पुस्तक में जो लिखा हैं उसे शून्य समझें और मेरी नयी पुस्तक "इस्लाम आतंक या आदर्श?" का अध्ययन करें और साथ ही अन्य लोगों तक पहुँचाएँ, धन्यवाद ।। (स्वामी लक्ष्मी शंकराचार्य)_*


वैसे तो हर व्यक्ति को ख़ुद कुरआन और मुहम्मद (स.अ.व.) की जीवनी का स्वयं अध्ययन करना चाहिए।  लेकिन जो इतना समय न निकाल सके और इन 24 आयतों को लेकर भ्रम की स्थिति में है उसे कम से कम स्वामी लक्ष्मी शंकराचार्य की लिखी इस किताब का ज़रूर अध्ययन करना चाहिए जो कि बहुत ही आसानी से हर जगह उपलब्ध है ।

  •┈┈┈┈••✦✿✦••┈┈┈┈•

वसीम रिज़वी इस्लाम से निष्कासित व्यक्ति है और उसे इस्लाम से जुड़े किसी भी मुद्दे पर बात करने का कोई अधिकार नहीं है।

 


क्या क़ुरआन में संशोधन किसी कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है?


उत्तर प्रदेश के एक *ख़ारजी* व्यक्ति *वसीम रिज़वी* ने सुप्रीम कोर्ट में एक रिट दायर की है। *उसने क़ुरआन मजीद से 26 आयतों को बाद में जोड़ी हुई बताकर हटाने की माँग की है।* पूरे देश के मुस्लिम समुदाय में इसको लेकर नाराज़गी और ग़ुस्सा देखा जा रहा है।


यह आदमी *मुस्लिम विरोधी ताक़तों का एजेंट* है। 2019 के *लोकसभा चुनाव* के दौरान इसने *राम की जन्मभूमि* नाम से एक फ़िल्म बनाई थी *जिसमें बताया था कि एक मुस्लिम धर्मगुरु अपने ही बेटे की तलाक़शुदा बीवी से हलाला करता है।* उस वक़्त भी मुसलमानों ने उसका विरोध किया था, तब सेंसर बोर्ड ने फ़िल्म को पास करने से इंकार कर दिया था। *बाद में उसने यह फ़िल्म यूट्यूब पर रिलीज़ की जो अब भी मौजूद है।* हाल ही में इसने *उम्मुल मोमिनीन सय्यिदा आइशा (रज़ि.)* पर भी एक फ़िल्म बनाने का ऐलान किया है जिस पर मुसलमानों ने ऐतराज़ जताया है।


*टाइमिंग देखिये,* मार्च-अप्रैल 2021 में बंगाल में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं जहाँ मुस्लिम वोटर्स 30% हैं। बीजेपी यहाँ सत्ता पाने के लिये चिरपरिचित हिंदू कार्ड खेल रही है। *एक बात याद रखिये, हिंदुत्ववादी राजनीति उस वक़्त ही नाकाम होती है जब मुसलमान उसकी कोई उग्र प्रतिक्रिया नहीं देते।* लेकिन बदक़िस्मती से ऐसा होता नहीं है।


अब आइये हम वापस लौटते हैं, इस ब्लॉग के टाइटल पर, *क्या क़ुरआन में संशोधन किसी कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है?* इसका जवाब है, *नहीं! क़ुरआन तो क्या किसी भी धार्मिक किताब में संशोधन करना सुप्रीम कोर्ट का विषय ही नहीं है।* 


हम आपकी जानकारी के लिये बता दें कि *हिन्दू धर्मग्रंथ "मनुस्मृति"* में *शूद्रों के बारे में जो-कुछ लिखा है, उस पर दलित समुदाय को आपत्ति है।* संविधान निर्माता *डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने "मनुस्मृति" की प्रतियां जलाई थी, लेकिन वे भी मनुस्मृति में क़ानून का सहारा लेकर संशोधन नहीं करवा पाए और मनुस्मृति आज भी ज्यों की त्यों मौजूद है।*


इसलिये हमारी आपसे अपील है, बेवजह जज़्बात में आकर मुस्लिम-विरोधी ताक़तों का काम आसान मत कीजिये। *यक़ीन जानिये, यह रिट सुप्रीम कोर्ट में ख़ारिज होगी। सुप्रीम कोर्ट इसमें हस्तक्षेप इसलिये नहीं कर सकता क्योंकि क़ुरआन का नुस्ख़ा सर्वसम्मत है, दुनिया का हर मुसलमान, चाहे वो किसी भी मसलक का हो, यह मानता है कि यह किताब हूबहू वही है, जो अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम)* पर नाज़िल हुई।


सबसे बेहतर काम यह है कि *वसीम रिज़वी* नामक इस *ख़ारजी* पर देश के *हर शहर में मुसलमानों की धार्मिक भावनाएं आहत करने का मुक़द्दमा किया जाए।* जब दर्जनों शहरों से इसके ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वारण्ट निकलेंगे तब यक़ीन जानिये ये उसकी मदद करने वो लोग भी नहीं आएंगे, जिनका यह आदमी मोहरा है। वसीम रिज़वी, पिछले कई बरसों से ऐसी हरकतें कर रहा है। उसका पूरे देश में सोशल बायकॉट किया जाए। *सभी मसलकों के उलमा इस बात का ऐलान करें कि वसीम रिज़वी इस्लाम से निष्कासित व्यक्ति है और उसे इस्लाम से जुड़े किसी भी मुद्दे पर बात करने का कोई अधिकार नहीं है।*


याद रखिये, *जब दुश्मन का लोहा गरम हो तो अपना हथौड़ा ठंडा रखना चाहिये क्योंकि ठंडा हथौड़ा, गरम लोहे की "शेप" बिगाड़ देता है।* इसके साथ ही आपसे यह भी अपील है कि इस ब्लॉग को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करके नफ़रत की राजनीति को नाकाम करने में हमारी मदद करें।

Saturday, March 6, 2021

मुलतानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट (रजि0) व मुलतानी अहंग्रान सेवा सोसायटी द्वारा भीलवाड़ा (राजस्थान ) में बिरादरी के खिलाड़ियों और युवाओँ में खेलों के प्रति जोश और रुझान बढ़ाने के मकसद से दो दिवसीय क्रिकेट टूर्नामेंट

पैदायशी इंजीनियर मुलतानी लुहार की देश की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी तंजीम मुलतानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट (रजि0) व मुलतानी अहंग्रान सेवा सोसायटी द्वारा भीलवाड़ा  (राजस्थान ) में बिरादरी के खिलाड़ियों और युवाओँ में खेलों के प्रति जोश और रुझान बढ़ाने और खिलाड़ियों की हौसला अफज़ाई करने के मकसद से दो दिवसीय क्रिकेट टूर्नामेंट की आज शुरुआत की जिसमें ट्रस्ट के चैयरमेन ज़मीर आलम मुलतानी ने सिक्का उछाल कर मैच की शुरुआत की और ट्रस्ट के रास्ट्रीय उपाध्यक्ष हाजी मो0 इक़बाल काज़ी व मध्यप्रदेश प्रमुख सत्तार बोस, ने एक एक बॉल खेलकर खिलाड़ियों को मैदान में उतारा ।





























 टॉस जीतकर सबसे पहले बल्लेबाजी की शुरुआत नीमबाड़ा की टीम ने की और यह मैच इंदौर ने जीता दूसरा मैच नीमच से भीलवाड़ा के साथ हुआ जिसको भीलवाड़ा ने जीता तीसरा मैच दांतल से पारोली ने जीता और समाचार लिखें जाने तक चौथा मैच जावद से इंदौर तक खेला जा रहा था। आज के इस क्रिकेट टूर्नामेंट को ऑनलाइन देखने वालों में अजीबोगरीब माहौल देखा गया क्योंकि इस मैच का सीधा प्रसारण किया जाना था । लेकिन स्टेडियम में किसी भी तरह का नेटवर्क सही से काम न कर पाने की वजह से अपने घरों पर रहकर ही मैच का मजा लेने वालों के अरमान अधूरे ही रह गए। आज के इस कार्यक्रम में हाजी मो0 फारुख संरक्षक मुलतानी अहंग्रान सेवा समिति , हाजी मोहम्मद हुसैन रास्ट्रीय सचिव, अब्दुल सत्तार बोस ( चैयरमेन ) मध्य प्रदेश, जिला अध्यक्ष भीलवाड़ा अब्दुल रऊफ, जिला महासचिव मोहम्मद आरिफ़, जिला खजांची मोहम्मद वसीम, टेनिस बॉल जिला अध्यक्ष मोहम्मद इमरान, गफ्फार ठेकेदार, हाजी उस्मान गनी, सहित पूरा स्टेडियम दर्शकों से भरा पड़ा था। कल दिनांक 07 मार्च 2021 को इस टूर्नामेंट का समापन होगा जिसमें हिन्दू-मुस्लिम एकता को बरकरार रखते हुए चारों धर्मो से एक एक धर्मगुरु को इस कार्यक्रम के समापन पर आमंत्रित किया गया है।

मोइनुद्दीन मुलतानी (भीलवाड़ा राजस्थान )