आसमान की बुलंदियों को छूती ख़ुशियों ने ज़मीन पर रचा इतिहास... सलीम मुल्तानी के फ़रज़ंद रिहान मुल्तानी हेलीकॉप्टर से पहुंचे अपनी शरीके हयात माहिन मुल्तानी को लेने | मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के लिए गौरव, ख़ुशी और यादगार लम्हों से भरा रहा यह ख़ास दिन।
गौरीपुर, बागपत (उत्तर प्रदेश)।
कुछ लम्हे महज़ किसी एक ख़ानदान की ख़ुशियों तक महदूद नहीं रहते, बल्कि अपनी ख़ास अहमियत और अनोखे अंदाज़ की वजह से पूरी बिरादरी के लिए यादगार बन जाते हैं। कुछ वाक़ियात ऐसे होते हैं, जिनका ज़िक्र आने वाली नस्लें भी बड़े फ़ख्र और ख़ुशी के साथ करती हैं। ऐसा ही एक ख़ुशनुमा और यादगार मौक़ा दिन इतवार, बा-तारीख़ 01 नवंबर 2026 को पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के सामने आया, जब बिरादरी के एक ख़ानदान की शादी ने अपनी अनोखी आमद के ज़रिए एक नया इतिहास रच दिया।
मौक़ा था जनाब सलीम मुल्तानी साहब (रेलवे ठेकेदार), वल्द जनाब मोहम्मद लतीफ़ मुल्तानी साहब (मरहूम), निवासी ग्राम बाजिदपुर, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश एवं हाल बाशिंदे स्वरूप नगर, दिल्ली के फ़रज़ंद रिहान मुल्तानी की शादी का। रिहान मुल्तानी का निकाह जनाब इख़लाक़ मुल्तानी वल्द हाजी इस्लाम मुल्तानी निवासी ग्राम बाघूवाला, जनपद बागपत, उत्तर प्रदेश की नेक दुख़्तर माहिन मुल्तानी के साथ तय हुआ। इस ख़ुशनसीब रिश्ते की ख़ुशी को यादगार बनाने के लिए दूल्हे रिहान मुल्तानी की बारात ने ऐसा अनोखा अंदाज़ इख़्तियार किया, जिसने शादी की रौनक़ को एक नई पहचान दे दी। दिल्ली से बागपत तक का सफ़र सड़क के बजाय आसमान के रास्ते तय करते हुए दूल्हा रिहान मुल्तानी हेलीकॉप्टर से अपनी बारात लेकर गौरीपुर, जनपद बागपत पहुंचा।आसमान से उतरी ख़ुशियों की बारात, बिरादरी ने देखा अनोखा नज़ारा!
हेलीकॉप्टर की आमद ने शादी समारोह को एक अलग ही रंग दे दिया। आसमान में उड़ते हेलीकॉप्टर की गूंज और उसके गौरीपुर पहुंचने का नज़ारा वहां मौजूद लोगों के लिए बेहद दिलचस्प और यादगार रहा।जहां आम तौर पर बारातें घोड़ियों, सजी-धजी गाड़ियों और गाजे-बाजे के साथ पहुंचती हैं, वहीं इस बार रिहान मुल्तानी की बारात ने हवाई सफ़र के ज़रिए अपनी आमद दर्ज कराई।
यह नज़ारा सिर्फ़ एक शादी की रौनक़ नहीं था, बल्कि बिरादरी के लोगों के लिए भी ख़ुशी और फ़ख्र का सबब बना। लोगों ने इस अनोखे आयोजन को देखा, तस्वीरों और यादों में महफ़ूज़ किया और नए जोड़े के लिए अपनी मुबारकबाद और नेक ख़्वाहिशात पेश कीं।
एक ख़ानदान की ख़ुशी, पूरी बिरादरी का फ़ख्र!
पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के लिए यह मौक़ा इसलिए भी ख़ास अहमियत रखता है कि बिरादरी के इतिहास में पहली बार हेलीकॉप्टर से बारात के गौरीपुर पहुंचने का यह यादगार वाक़िया सामने आया है।बिरादरी की पहचान सिर्फ़ उसके शानदार अतीत, मेहनत, हुनर और पेशेवर महारत से ही नहीं, बल्कि उसके लोगों की कामयाबी, तरक़्क़ी, ख़ुशहाली और आपसी मोहब्बत से भी बनती है।
जब बिरादरी का कोई परिवार अपनी ज़िंदगी के किसी ख़ास मौक़े को इस तरह यादगार बनाता है, तो उसकी ख़ुशी में शामिल होना और नए जोड़े को दुआओं से नवाज़ना पूरे समाज की तहज़ीब और आपसी रिश्तों की ख़ूबसूरती को बयान करता है।आज रिहान और माहिन की शादी का यह अनोखा अंदाज़ यक़ीनन बिरादरी के लोगों के लिए एक ऐसी याद बन गया है, जिसका ज़िक्र लंबे अरसे तक मोहब्बत और मुस्कुराहट के साथ किया जाएगा।
'मुल्तानी समाज' की जानिब से दूल्हा-दुल्हन को दिली मुबारकबाद और ख़ास दुआएं
इस पुरमसर्रत मौक़े पर 'मुल्तानी समाज' राष्ट्रीय समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल की पूरी टीम की जानिब से दूल्हा रिहान मुल्तानी और दुल्हन माहिन मुल्तानी को शादी की दिली मुबारकबाद पेश की जाती है।अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त से ख़ास दुआ है कि वह इस नए रिश्ते को हमेशा अपनी रहमतों के साये में रखे। दोनों के दरमियान मोहब्बत, वफ़ादारी, एहतराम और हमदर्दी को हमेशा क़ायम रखे। इनके घर को सुकून, ख़ुशियों, रिज़्क़ और बरकतों से आबाद फ़रमाए।
अल्लाह तआला दोनों को एक-दूसरे के लिए ज़िंदगी का बेहतरीन हमसफ़र बनाए। हर मुश्किल में एक-दूसरे का सहारा बनने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए और इनके वालिदैन व तमाम अहले ख़ानदान को इस रिश्ते की ख़ुशियां उम्रभर नसीब फ़रमाए।माशाअल्लाह! न किसी की नज़र लगे, न किसी की हसद का असर हो। यह जोड़ी हमेशा सलामत रहे, इनके आंगन में ख़ुशियों के फूल खिलते रहें और इनके दरमियान मोहब्बत का रिश्ता उम्रभर मज़बूत बना रहे।
आमीन या रब्बुल आलमीन!
बिरादरी की आवाज़, बिरादरी की पहचान — मुल्तानी समाज
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल 'मुल्तानी समाज' के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।
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