Friday, October 2, 2026

2 अक्टूबर: गांधी जयंती, शास्त्री जयंती और 1187 में बैतुल मुक़द्दस की फ़तह—एक तारीख़, इतिहास के कई अहम पड़ाव

2 अक्टूबर भारतीय इतिहास और मुस्लिम इतिहास—दोनों के लिहाज़ से एक महत्वपूर्ण तारीख़ है। सोशल मीडिया पर प्रसारित दो पोस्टरों में इस दिन से जुड़े अलग-अलग ऐतिहासिक प्रसंगों की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है।

पहले पोस्टर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई है। महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर में हुआ था। गांधी हेरिटेज पोर्टल में भी पोरबंदर स्थित उनके जन्मस्थान को 2 अक्टूबर 1869 से जोड़ा गया है। 

इसी दिन लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को मुगलसराय में हुआ था। भारत सरकार के प्रधानमंत्री कार्यालय के आधिकारिक अभिलेख में उनके जन्म की यही तारीख दर्ज है। 

आज के दिन देशभर में गांधी जयंती मनाई जाती है, जबकि शास्त्री जयंती के अवसर पर भी उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। 2 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से भी दोनों महान व्यक्तित्वों को श्रद्धांजलि दिए जाने की जानकारी प्रकाशित की गई है। 

2 अक्टूबर 1187 और बैतुल मुक़द्दस

दूसरे पोस्टर में 2 अक्टूबर 1187 को सुल्तान सलाहुद्दीन अय्यूबी द्वारा बैतुल मुक़द्दस (यरूशलम) पर विजय का उल्लेख किया गया है। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, 1187 में हत्तीन की लड़ाई में क्रूसेडर सेना की पराजय के बाद सलाहुद्दीन अय्यूबी की सेनाओं ने यरूशलम की ओर बढ़त बनाई और 2 अक्टूबर 1187 को यरूशलम ने आत्मसमर्पण किया। 

यह घटना लगभग 88 वर्षों तक क्रूसेडर नियंत्रण में रहने के बाद यरूशलम के दोबारा मुस्लिम शासन में आने का महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पड़ाव थी। 

एक तारीख़, अलग-अलग ऐतिहासिक स्मृतियाँ

इस प्रकार 2 अक्टूबर एक ओर भारत के स्वतंत्रता आंदोलन, सत्य, अहिंसा और राष्ट्रीय जीवन से जुड़े महात्मा गांधी तथा लाल बहादुर शास्त्री की जयंती का दिन है, तो दूसरी ओर मुस्लिम इतिहास में सलाहुद्दीन अय्यूबी और यरूशलम की 1187 की घटना से भी जुड़ी हुई तारीख़ है।

मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट के पूर्व राष्ट्रीय सदर जनाब मोहम्मद आलम साहब बिरादरी से अपील करते है कि ऐतिहासिक घटनाओं को भावनाओं के साथ-साथ प्रमाणित स्रोतों और सही संदर्भ के साथ समझना और नई पीढ़ी तक पहुँचाना भी हमारी जिम्मेदारी है।

— मुल्तानी समाज राष्ट्रीय समाचार पत्रिका

Thursday, October 1, 2026

रिश्तों की तलाश अब अपनी बिरादरी में होगी आसान — मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी के लिए महफ़ूज़ ऑनलाइन मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म फिर शुरू करने की तैयारी

तालीमयाफ़्ता, मुलाज़मतपेशा और कारोबारी नौजवानों के लिए मुनासिब रिश्तों की तलाश आसान बनाने की पहल — “मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट” की नई कोशिश

ज़मीर आलम, प्रधान संपादक की ख़ास रिपोर्ट | उत्तर प्रदेश डेस्क

नई दिल्ली/उत्तर प्रदेश। मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी के शादी के क़ाबिल नौजवानों और बच्चियों के लिए मुनासिब रिश्तों की तलाश को आसान, महफ़ूज़ और भरोसेमंद बनाने की दिशा में “मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट” रजिस्टर्ड ऑल इंडिया की जानिब से एक बार फिर ऑनलाइन रिश्तों का एक मज़बूत और महफ़ूज़ प्लेटफॉर्म शुरू करने की तैयारी की जा रही है।

बिरादरी के फ़िक्रमंद और बेदार अफ़राद की तरफ़ से लगातार यह बात सामने आ रही है कि आज हमारी बिरादरी में बड़ी तादाद ऐसे नौजवानों और बच्चियों की है जो आला तालीम हासिल कर चुके हैं, सरकारी व निजी मुलाज़मत से जुड़े हैं, अपने कारोबार में कामयाब हैं और अपनी ज़िंदगी के मुस्तकबिल को लेकर संजीदा हैं, लेकिन उनके लिए अपनी ही बिरादरी में मुनासिब रिश्तों की जानकारी एक जगह आसानी से दस्तयाब नहीं है।

इसी वजह से कई घरानों को अपनी औलाद के लिए मुनासिब रिश्ता तलाश करने में दुश्वारी पेश आती है और मजबूरन उन्हें दूसरे मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म का सहारा लेना पड़ता है।


पहले भी रिश्तों को जोड़ने की कोशिश कर चुका है ट्रस्ट

यह पहली बार नहीं है कि “मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट” की तरफ़ से बिरादरी के रिश्तों को आसान बनाने की कोशिश की जा रही है।

ट्रस्ट की जानिब से पहले भी ऑनलाइन रिश्तों के लिए व्हाट्सऐप ग्रुप, टेलीग्राम ग्रुप और “रिश्तों की दुनिया” के नाम से वेबसाइट शुरू कराई गई थी, ताकि मुल्क के मुख़्तलिफ़ शहरों और ज़िलों में रहने वाले मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई खानदान एक-दूसरे तक पहुँच सकें।

लेकिन उस वक़्त बिरादरी का उतना बड़ा तबक़ा एक साथ इन प्लेटफॉर्म से नहीं जुड़ सका था, जितना बड़ा तबक़ा आज सोशल मीडिया और डिजिटल ज़राए के ज़रिये “मुल्तानी समाज” से जुड़ा हुआ है।

इसी बदलते हुए माहौल को देखते हुए अब बिरादरी के लिए एक नए, मुनज़्ज़म, महफ़ूज़ और भरोसेमंद डिजिटल रिश्तों के प्लेटफॉर्म की ज़रूरत महसूस की जा रही है।


तालीमयाफ़्ता और मुलाज़मतपेशा बच्चों के रिश्तों को लेकर बढ़ी फ़िक्र

“मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट” के फाउंडर ज़मीर आलम को बिरादरी के कई बेदार और फ़िक्रमंद अफ़राद ने इस अहम मसले की तरफ़ तवज्जो दिलाई है।

उनका कहना है कि आज बिरादरी में ऐसे बहुत से नौजवान और बच्चियाँ हैं जो डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, शिक्षक, बैंक कर्मचारी, सरकारी मुलाज़िम, आईटी प्रोफेशनल, कारोबारी और दूसरे मुख़्तलिफ़ शोबों से जुड़े हुए हैं।

लेकिन अफ़सोस की बात यह है कि उनकी तालीम, काबिलियत और पेशे के मुताबिक़ बिरादरी के अंदर मुनासिब रिश्तों की जानकारी एक जगह मौजूद नहीं है।

नतीजा यह निकल रहा है कि कई घराने रिश्ते तलाश करने के लिए आम मैट्रिमोनियल वेबसाइटों और ऐप्स का रुख़ कर रहे हैं।


दूसरी मैट्रिमोनियल वेबसाइटों से रिश्ते तलाश करने की सुविधा के साथ कुछ फ़िक्रें भी

आज इंटरनेट पर सैकड़ों मैट्रिमोनियल वेबसाइट और मोबाइल ऐप मौजूद हैं। इन प्लेटफॉर्म की मदद से युवक-युवतियों और उनके घरवालों को बड़ी तादाद में रिश्तों की जानकारी हासिल हो सकती है।

लेकिन बिरादरी के फ़िक्रमंद अफ़राद का कहना है कि जब अपनी बिरादरी का कोई मजबूत और मुनासिब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म मौजूद नहीं होता, तो नौजवान आम मैट्रिमोनियल वेबसाइटों का इस्तेमाल करने लगते हैं।

इन वेबसाइटों पर मुख़्तलिफ़ बिरादरियों, मज़ाहिब, ज़बानों, इलाक़ों और सामाजिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक़ रखने वाले लोगों की प्रोफाइल मौजूद होती हैं।

ऐसे में नौजवान अपनी पसंद के मुताबिक़ किसी भी प्रोफाइल से संपर्क कर सकते हैं, बातचीत आगे बढ़ा सकते हैं और कई बार परिवार वालों को बाद में इसकी जानकारी होती है।

बिरादरी के लोगों की फ़िक्र यह है कि अगर हमारी अपनी बिरादरी के मुनासिब रिश्ते एक जगह आसानी से दस्तयाब हों, तो हमारे घरानों को अपनी औलाद के लिए रिश्ते तलाश करने में अधिक सहूलत मिल सकती है।

यहाँ यह बात भी साफ़ है कि हर गैर-बिरादरी शादी को किसी एक वेबसाइट या ऐप का नतीजा नहीं कहा जा सकता। शादी का फैसला कई व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक असबाब की बुनियाद पर होता है।

लेकिन बिरादरी के फ़िक्रमंद अफ़राद का मानना है कि अपनी बिरादरी के अंदर मुनासिब रिश्तों की जानकारी आसानी से दस्तयाब कराना इस सिलसिले में एक सकारात्मक क़दम हो सकता है।


अपनी बिरादरी की मैट्रिमोनियल वेबसाइट के क्या फ़ायदे होंगे?

अगर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी के लिए अपना महफ़ूज़ ऑनलाइन मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म तैयार किया जाता है तो उसका मक़सद सिर्फ़ लड़के और लड़की की प्रोफाइल दिखाना नहीं, बल्कि दो खानदानों को एक-दूसरे तक पहुँचाना होना चाहिए।

इस प्लेटफॉर्म में कई अहम सहूलियतें शामिल की जा सकती हैं—

◆ सिर्फ़ बिरादरी के रिश्तों पर तवज्जो

प्लेटफॉर्म का बुनियादी मक़सद मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी के खानदानों के बीच मुनासिब रिश्तों की तलाश को आसान बनाना हो।

◆ तालीम और पेशे की पूरी जानकारी

लड़के या लड़की की तालीम, मुलाज़मत, कारोबार, पेशा और शहर आदि की बुनियादी जानकारी उपलब्ध हो, ताकि घराने अपनी ज़रूरत के मुताबिक़ रिश्ता तलाश कर सकें।

◆ घरवालों की निगरानी में बातचीत

रिश्ते की शुरुआती बातचीत घरवालों या अधिकृत सरपरस्त के ज़रिये शुरू कराने की व्यवस्था हो, ताकि अनजान अफ़राद के बीच सीधे और बे-लगाम संपर्क की गुंजाइश कम हो।

◆ मोबाइल नंबर और निजी जानकारी की हिफ़ाज़त

किसी भी लड़के या लड़की का मोबाइल नंबर, ईमेल, पूरा पता या दूसरी निजी जानकारी खुले तौर पर न दिखाई जाए।

ज़रूरत के मुताबिक़ अधिकृत परिवारों को ही जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

◆ प्रोफाइल की तस्दीक़

फर्जी प्रोफाइल और गलत जानकारी से बचने के लिए मोबाइल नंबर, पहचान और ज़रूरी दस्तावेज़ों की तस्दीक़ का इंतज़ाम किया जा सकता है।

◆ शहर और स्टेट व ज़िले के हिसाब से रिश्ते

दिल्ली , उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात और मुल्क के दूसरे शहरों में रहने वाले खानदान अपनी ज़रूरत के मुताबिक़ रिश्ते तलाश कर सकें।

◆ तालीमयाफ़्ता और प्रोफेशनल नौजवानों के लिए अलग कैटेगरी

डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, शिक्षक, सरकारी मुलाज़िम, बैंक कर्मचारी, आईटी प्रोफेशनल, कारोबारी और दूसरे पेशों से जुड़े नौजवानों की प्रोफाइल आसानी से तलाश की जा सके।

◆ रिश्ता पसंद आने पर परिवार से संपर्क

लड़के या लड़की को सीधे संपर्क में लाने के बजाय पहले दोनों खानदानों के बीच बातचीत का रास्ता बनाया जा सके।

◆ रिश्ता तय होते ही प्रोफाइल बंद

जिस लड़के या लड़की का रिश्ता तय हो जाए, उसकी प्रोफाइल को तुरंत बंद या निष्क्रिय किया जा सके, ताकि बाद में अनावश्यक संपर्क न हो।


बिरादरी की नई नस्ल के लिए नई ज़रूरत

आज का ज़माना डिजिटल है। कारोबार से लेकर तालीम, मुलाज़मत, बैंकिंग और सामाजिक रिश्तों तक बहुत कुछ ऑनलाइन हो चुका है।

ऐसे में यह ज़रूरी है कि हमारी बिरादरी भी अपनी नई नस्ल की ज़रूरतों को समझे और बिरादरी की रवायत और खानदानी उसूलों के साथ आधुनिक तकनीक का ऐसा इस्तेमाल करे जिससे रिश्ते तलाश करने का काम आसान भी हो और महफ़ूज़ भी।

अपनी बिरादरी का मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म इसी सोच के साथ तैयार किया जा सकता है।

इसका मक़सद नौजवानों की ज़िंदगी के फैसले अपने हाथ में लेना नहीं, बल्कि उन्हें अपनी ही बिरादरी के अंदर मौजूद मुनासिब रिश्तों की जानकारी और बेहतर विकल्प उपलब्ध कराना होना चाहिए।


नई नस्ल की पसंद और घरवालों की रज़ामंदी—दोनों का एहतराम

बिरादरी के बुज़ुर्गों और ज़िम्मेदार अफ़राद के सामने आज एक अहम सवाल यह भी है कि नई नस्ल की पसंद और घरवालों की रज़ामंदी के बीच बेहतर तालमेल किस तरह पैदा किया जाए।

आज का नौजवान अपनी तालीम, नौकरी और कारोबार के साथ-साथ अपने मुस्तकबिल के जीवनसाथी को लेकर भी अपनी राय रखता है।

अगर उसे अपनी ही बिरादरी में तालीमयाफ़्ता, समझदार और हममिज़ाज रिश्ते आसानी से देखने और समझने का मौक़ा मिले, तो घरवालों और बच्चों के बीच बातचीत का रास्ता भी आसान हो सकता है।

हर निकाह की बुनियाद रज़ामंदी, आपसी इज़्ज़त, भरोसे, अच्छे अख़लाक़ और खानदानी समझ पर होनी चाहिए।

इसलिए प्रस्तावित प्लेटफॉर्म का मक़सद किसी पर रिश्ता या निकाह थोपना नहीं, बल्कि मुनासिब रिश्तों तक पहुँच आसान बनाना होना चाहिए।


बिरादरी की आबादी और मुस्तकबिल को लेकर फ़िक्रमंदी

बिरादरी के कई फ़िक्रमंद अफ़राद का कहना है कि अगर शादी के क़ाबिल बच्चों के लिए बिरादरी के अंदर मुनासिब रिश्तों की तलाश का कोई आसान ज़रिया मौजूद नहीं होगा, तो आने वाले वक़्त में इसका असर बिरादरी के सामाजिक ताने-बाने पर पड़ सकता है।

बिरादरी के बीच यह बात भी कही जाती रही है कि अगर एक बेटी बिरादरी से बाहर निकाह करती है तो उसका असर आने वाली नस्लों के बिरादरी से सामाजिक जुड़ाव पर भी पड़ सकता है।

इसी सिलसिले में कुछ लोग यह अनुमान पेश करते हैं कि एक लड़की के गैर-बिरादरी निकाह का असर लंबे अरसे में बिरादरी की आबादी और सामाजिक ताक़त पर बहुत बड़ा पड़ सकता है।

हालाँकि “एक लड़की के गैर-बिरादरी निकाह से एक लाख की आबादी कम हो जाती है” जैसी बात को किसी सरकारी या प्रमाणित जनगणना के आँकड़े के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता। यह बिरादरी के बीच व्यक्त की जाने वाली एक सामाजिक फ़िक्र और अनुमान है।

असल ज़रूरत यह है कि हमारी बिरादरी के बच्चों को अपनी बिरादरी में ही मुनासिब, तालीमयाफ़्ता और अच्छे खानदानों के रिश्ते तलाश करने का पर्याप्त मौक़ा मिले।


रिश्ते जोड़ना सिर्फ़ दो अफ़राद को जोड़ना नहीं

एक अच्छा रिश्ता सिर्फ़ लड़के और लड़की का रिश्ता नहीं होता, बल्कि दो खानदानों, दो घरों और आने वाली नस्लों के बीच एक नया रिश्ता कायम करता है।

इसी सोच के तहत “मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट” की तरफ़ से बिरादरी के लिए एक ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म की ज़रूरत महसूस की जा रही है जो महफ़ूज़ भी हो, भरोसेमंद भी हो और बिरादरी के हर तबक़े के लिए आसानी से इस्तेमाल करने लायक़ भी हो।

ख़ास तौर पर ऐसे नौजवान जो आज तालीम हासिल करके डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, शिक्षक, सरकारी मुलाज़िम, प्राइवेट सेक्टर के प्रोफेशनल या कारोबारी बन चुके हैं, उनके लिए बिरादरी के अंदर मुनासिब रिश्तों की तलाश का दायरा बढ़ाना इस प्लेटफॉर्म का अहम मक़सद हो सकता है।


बिरादरी के चौधरियों और जागरूक अफ़राद से तवज्जो की अपील

आज ज़रूरत है कि बिरादरी के चौधरी, बुज़ुर्ग, समाजी रहनुमा, तालीमयाफ़्ता नौजवान, कारोबारी और हर फ़िक्रमंद घराना इस अहम मसले पर संजीदगी से ग़ौर करे।

हमारी कोशिश किसी युवक या युवती की निजी ज़िंदगी और पसंद में दख़ल देना नहीं है।

हमारा मक़सद सिर्फ़ इतना है कि—

अगर हमारी अपनी बिरादरी में अच्छे, तालीमयाफ़्ता, शरीफ़ और मुनासिब रिश्ते मौजूद हैं तो उनकी जानकारी हमारी नई नस्ल तक भी आसानी से पहुँचे।

ताकि किसी घराने को सिर्फ़ इसलिए दूसरे प्लेटफॉर्म का सहारा न लेना पड़े कि उसे अपनी बिरादरी में मुनासिब रिश्ता तलाश करने का कोई आसान ज़रिया उपलब्ध नहीं था।

मुल्तानी बिरादरी की एकजुटता, हमारी नई नस्ल की बेहतरी और आने वाली नस्लों का मुस्तकबिल—हम सबकी साझा ज़िम्मेदारी है।


मुल्तानी समाज — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान

वज़ारत-ए-इत्तेलाआत व नशरियात, हुकूमत-ए-हिंद से पंजीकृत, मुल्क की दारुल-हुकूमत नई दिल्ली से शाया होने वाली, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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🌙 जश्ने “मुल्तानी-डे” के मौक़े पर बिरादरी के लिए ख़ुशख़बरी

अपना नाम, शहर और तस्वीर भेजिए और पाइए बिल्कुल मुफ़्त ख़ूबसूरत पोस्टर

पैदाइशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादराना हज़रात के लिए ख़ास पैग़ाम

12 नवंबर को मनाए जाने वाले जश्ने “मुल्तानी-डे” के मुबारक मौक़े पर मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट और “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका की जानिब से गुज़िश्ता वर्षों की तरह इस साल भी एक ख़ास और ख़ूबसूरत मुहिम का आग़ाज़ किया गया है।

इस मुहिम का मक़सद सिर्फ़ पोस्टर बनाना नहीं, बल्कि मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी के इस ख़ास दिन की जानकारी को मुल्क और दुनिया के कोने-कोने तक पहुँचाना, बिरादरी की यकजहती, पहचान और भाईचारे को मज़बूत करना है।

📢 आप भी इस ख़ूबसूरत मुहिम का हिस्सा बनिए

अगर आप भी जश्ने “मुल्तानी-डे” के मौक़े पर अपने नाम और अपने शहर के नाम के साथ एक ख़ूबसूरत पोस्टर बनवाना चाहते हैं, तो आपको इसके लिए कोई फ़ीस अदा नहीं करनी होगी।

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इसके बाद “मुल्तानी समाज” की टीम आपके नाम, शहर और तस्वीर के साथ जश्ने “मुल्तानी-डे” का पोस्टर बिल्कुल मुफ़्त तैयार करके आपको व्हाट्सऐप पर भेजेगी।

🌍 आपकी तस्वीर, आपकी पहचान और पूरी दुनिया तक बिरादरी का पैग़ाम

आपके लिए तैयार किया गया पोस्टर “मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट” तथा “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर भी प्रकाशित किया जाएगा, ताकि जश्ने “मुल्तानी-डे” का पैग़ाम ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँच सके।

यह मुहिम बिरादरी के हर उस फ़र्द को जोड़ने की एक कोशिश है जो अपनी मुल्तानी पहचान, अपनी बिरादराना रवायत और अपनी आने वाली नस्लों के लिए इस विरसे को महफ़ूज़ रखने का जज़्बा रखता है।

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आज के दौर में सोशल मीडिया किसी भी पैग़ाम को दूर-दराज़ तक पहुँचाने का एक अहम ज़रिया बन चुका है। ऐसे में आपका एक पोस्टर भी आपकी पहचान के साथ जश्ने “मुल्तानी-डे” का पैग़ाम सैकड़ों और हज़ारों लोगों तक पहुँचा सकता है।

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🕌 जश्ने “मुल्तानी-डे” — अपनी पहचान, अपनी बिरादरी, अपना जश्न

यह सिर्फ़ एक दिन नहीं, बल्कि मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की पहचान, आपसी मोहब्बत, भाईचारे और बिरादराना यकजहती को याद करने और उसे अगली नस्ल तक पहुँचाने का एक ज़रिया है।

आइए, इस मुबारक मौक़े पर हम सब मिलकर अपनी बिरादरी की आवाज़ को मज़बूत करें और दुनिया को अपनी पहचान से रूबरू कराएँ।


📰 “मुल्तानी समाज” की ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदाइशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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