Wednesday, September 30, 2026

हर खुशी का दिन बना ‘मुल्तानी-डे’: 12 नवंबर को सगाई, निकाह और अकीकाह की खुशियाँ मनाने का बढ़ता रुझान

मुल्तानी समाज में नई रिवायत ने पकड़ी रफ़्तार, बिरादरी के घरों में 12 नवंबर को जश्न की तैयारियाँ

नई दिल्ली/उत्तर प्रदेश।
पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी में अपनी सामूहिक पहचान, भाईचारे और खुशियों को एक-दूसरे से जोड़ने की एक खूबसूरत रिवायत लगातार मज़बूत होती जा रही है। बिरादरी के अनेक परिवार अब अपने घरों में होने वाली खुशियों—सगाई, निकाह, अकीकाह और दीगर खुशी के मौकों—को 12 नवंबर यानी “मुल्तानी-डे” के मुबारक दिन के साथ जोड़ने लगे हैं।

बिरादरी के लिए यह दिन महज़ एक तारीख़ नहीं, बल्कि अपनी कौमी पहचान, इत्तेहाद, भाईचारे और आपसी मोहब्बत के इज़हार का एक खास मौक़ा बनता जा रहा है।

12 नवंबर से जुड़ी है ‘मुल्तानी-डे’ की खास पहचान

पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी की देश की राजधानी नई दिल्ली से संचालित “मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट” के मुताबिक, राष्ट्रीय स्तर पर बिरादरी की आवाज़ को एक मंच देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय समाचार पत्रिका “मुल्तानी समाज” का पंजीकरण 12 नवंबर को हुआ था।

इसी सिलसिले में ट्रस्ट की ओर से यह ऐलान किया गया कि हर वर्ष पत्रिका के राष्ट्रीय अधिवेशन को “मुल्तानी-डे” के नाम से मनाया जाएगा। इसके बाद से बिरादरी के लोग अपने-अपने गाँव, कस्बों और शहरों में अपने घरों तथा सामाजिक स्तर पर इस दिन को खुशी और मिलन के अवसर के रूप में मनाते आ रहे हैं।

समय के साथ यह दिन बिरादरी के बीच एक सामूहिक पहचान और खुशी के प्रतीक के तौर पर अपनी जगह बनाता गया।

अब निकाह से लेकर अकीकाह तक, खुशियों को ‘मुल्तानी-डे’ से जोड़ने की पहल

इस रिवायत को अब एक नई दिशा मिलती दिखाई दे रही है। बिरादरी के कई परिवार अपने घर में आने वाली खुशियों को 12 नवंबर के मुबारक मौके से जोड़ने लगे हैं।

कहीं सगाई की तारीख़ 12 नवंबर रखी जा रही है तो कहीं निकाह और अकीकाह जैसे मुबारक मौकों को इसी दिन मनाने की तैयारियाँ की जा रही हैं। इस तरह व्यक्तिगत खुशी धीरे-धीरे सामूहिक खुशी में बदलती दिखाई दे रही है।

इस पहल की खूबसूरती यह है कि एक परिवार की खुशी को बिरादरी के दूसरे परिवार भी अपनी खुशी समझकर उसमें शरीक हो सकते हैं। यही जज़्बा किसी भी बिरादरी के सामाजिक रिश्तों को मज़बूत करने में अहम किरदार अदा करता है।

एक तारीख़, एक पहचान और हजारों खुशियाँ

12 नवंबर को लेकर बिरादरी में बढ़ता यह रुझान आने वाले समय में एक ऐसी सामाजिक रिवायत की शक्ल ले सकता है, जिसमें मुल्तानी परिवार अपने घर की खुशियों को एक साझा दिन के साथ जोड़कर पूरी बिरादरी को उस खुशी का हिस्सा बनाएं।

सगाई हो, निकाह हो, अकीकाह हो या किसी और खुशी का मौका—अगर इन खुशियों के साथ “मुल्तानी-डे” का नाम जुड़ता है तो यह दिन परिवार की खुशी के साथ-साथ बिरादरी की एकजुटता और आपसी मोहब्बत का भी प्रतीक बन सकता है।

बिरादरी की नई नस्ल के लिए भी बन सकता है पहचान का माध्यम

आज के दौर में जब नई पीढ़ी अपनी पारिवारिक और बिरादराना रवायतों से जुड़ने के लिए नए माध्यम तलाश रही है, ऐसे सामूहिक आयोजन उन्हें अपनी जड़ों, अपनी तारीख़ और अपनी सामाजिक पहचान से जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

“मुल्तानी-डे” को खुशियों से जोड़ने की यह पहल अगर मोहब्बत, भाईचारे और आपसी इत्तेहाद के साथ आगे बढ़ती है, तो यह आने वाली नस्लों के लिए भी एक यादगार सामाजिक रिवायत बन सकती है।

बिरादरी के लोगों का कहना है कि खुशी चाहे छोटी हो या बड़ी, अगर उसमें अपने लोगों की शिरकत और दुआएँ शामिल हो जाएँ तो उसकी खुशी कई गुना बढ़ जाती है। शायद यही वजह है कि अब कई परिवार अपनी खुशियों के लिए 12 नवंबर को एक खास दिन के तौर पर देखने लगे हैं।


‘मुल्तानी समाज’ की ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, देश की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की राष्ट्रीय समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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एक ही रात मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी के दो घरों में पसरा मातम

नजीबाबाद और बागपत से दो अफ़राद के इंतक़ाल की दर्दनाक इत्तिला, बिरादराना हज़रात से जनाज़े में शिरकत और मरहूमीन के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत की अपील

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिली अफ़सोस के साथ मुल्क भर में रहने वाले तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात को यह दर्दनाक इत्तिला दी जाती है कि बीती रात बुध बा-तारीख़ 30 सितंबर 2026 को बिरादरी के दो अलग-अलग जिलों से दो अफ़राद के क़ज़ा-ए-इलाही से इंतक़ाल की ख़बर सामने आई है। दोनों सदमों ने बिरादरी के लोगों को गहरे रंज-ओ-ग़म में मुब्तिला कर दिया है।

नजीबाबाद, जिला बिजनौर से पहली इंतक़ाल की इत्तिला

मोहल्ला मुग़लुशा, क़स्बा नजीबाबाद, जिला बिजनौर, उत्तर प्रदेश के रहने वाले जनाब फ़ख़रे आलम साहब वल्द मरहूम जनाब अख़्तर मुल्तानी साहब का बीती रात क़ज़ा-ए-इलाही से इंतक़ाल हो गया।

मरहूम के इंतक़ाल की ख़बर से खानदान, रिश्तेदारों, अहबाब और बिरादरी में गहरे सदमे और ग़म की लहर दौड़ गई। हर तरफ़ से मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत और अहले-ख़ाना के लिए सब्र-ए-जमील की दुआएँ की जा रही हैं।

मैय्यत को बाद नमाज़ जौहर तदफिन होगा।


1.30 बजे जनाज़ा उनकी रिहाइशगाह मोहल्ला मुग़लशा इस्लामी फंड के सामने से होज़ वाले कब्रिस्तान ले जाया जाएगा। बाद नमाज़-ए-ज़ुहर सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

मैय्यत के सिलसिले में मज़ीद मालूमात के लिए जनाब शेकुलरहमान साहब — 9719174812 पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है।

बागपत से दूसरी दर्दनाक इत्तिला

इसी के साथ गाँव बावली, तहसील बड़ौत, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश से भी इंतक़ाल की दूसरी बेहद अफ़सोसनाक इत्तिला मिली है।

गाँव बावली के जनाब अलीहसन साहब वल्द जनाब हाजी मुंसी जी के बड़े फ़रज़ंद का भी बीती रात बुध बा-तारीख़ 30 सितंबर 2026 को क़ज़ा-ए-इलाही से इंतक़ाल हो गया।

इस दर्दनाक ख़बर से अहले-ख़ाना, रिश्तेदारों, दोस्तों और बिरादरी के लोगों में ग़म की लहर दौड़ गई। मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा आज जुमेरात बा-तारीख़ 01 अक्टूबर 2026 को नमाज़-ए-ज़ुहर के बाद गाँव बावली में अदा की जाएगी, जिसके बाद मरहूम को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम बिरादराना हज़रात से पुरख़ुलूस गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और अहले-ख़ाना के ग़म में शरीक हों।

मैय्यत के सिलसिले में मज़ीद मालूमात के लिए जनाब ख़ालिद साहब — 7984844198 पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है।

दुआ-ए-मग़फ़िरत

ऐ अल्लाह! दोनों मरहूमीन की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमा, उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फ़रमा, उनकी क़ब्रों को नूर से मुनव्वर फ़रमा, क़ब्र को उनके लिए जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे और उसमें कुशादगी अता फ़रमा।

या अल्लाह! जब उन्हें क़ब्र में उतारा जाए और मिट्टी दी जाए तो अपनी रहमत के साये में उन्हें जगह अता फ़रमा। उनकी क़ब्र की तन्हाई को अपनी रहमत से दूर फ़रमा, सवालात-ए-क़ब्र में आसानी फ़रमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमा।

या रब्बुल आलमीन! मरहूमीन की मग़फ़िरत फ़रमा, उनकी नेकियों को क़ुबूल फ़रमा, उनकी लग़ज़िशों से दरगुज़र फ़रमा और उन्हें अपने प्यारे हबीब हज़रत मुहम्मद ﷺ की शफ़ाअत नसीब फ़रमा।

अल्लाह तआला दोनों मरहूमीन को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए और तमाम अहले-ख़ाना को इस सदमे को बर्दाश्त करने के लिए सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि इन दोनों ग़मज़दा ख़ानदानों के लिए ख़ुसूसी दुआ करें और जहाँ मुमकिन हो, जनाज़े में शरीक होकर बिरादराना हमदर्दी का इज़हार करें।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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Tuesday, September 29, 2026

🌹 दो घरानों में बजेगी निकाह की शहनाई, सजेंगे खुशियों के रंग

मोहम्मद जावेद व सानिया नूर तथा जियाउर्रहमान व अमरीन बानो के निकाह की तैयारियाँ मुकम्मल

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

अस्सलातु वस्सलामु अलैका या रसूलल्लाह ﷺ

🌹 “अन-निकाहु मिन सुन्नती” 🌹

उदयपुर। अल्लाह तआला के फ़ज़्लो-करम और सरवरे कायनात, रहमतुल्लिल-आलमीन हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ के सदक़े व तुफ़ैल दो खानदानों में निकाह की मुबारक खुशियाँ दस्तक देने जा रही हैं। इस मुबारक मौक़े पर अहले मुल्तानी बिरादरी के दो नौजवानों के निकाह की खुशखबरी ने रिश्तेदारों और अज़ीज़ो-अक़ारिब में ख़ुशी की लहर पैदा कर दी है।

मरहूम रहीम बख्श साहब के परपोते तथा मरहूम हाजी अब्दुल क़ादिर पटेल साहब के पोते जनाब मोहम्मद जावेद, इब्ने अब्दुल वहीद पटेल (पुंवार), आयड़, उदयपुर, का निकाह सानिया नूर, बिन्ते मोहम्मद शरीफ़ साहब, पुंवार (उदयपुर) के साथ दोनों खानदानों की बाहमी रज़ामंदी से तय पाया है।

💐 पहला निकाह — मोहम्मद जावेद एवं सानिया नूर

इस मुबारक निकाह की तक़रीब 6 जमादिउल अव्वल 1448 हिजरी, मुताबिक़ 17 अक्टूबर 2026, बरोज़ शनिवार, बाद नमाज़-ए-मग़रिब लोहार कॉलोनी, उदयपुर में आयोजित होगी।

अल्लाह तआला इस पाक रिश्ते को मोहब्बत, बरकत, सुकून और ख़ुशहाली से मालामाल फ़रमाए और दोनों को उम्र भर एक-दूसरे का ख़ैरख़्वाह और हमसफ़र बनाए। आमीन।


🌹 दूसरा निकाह — जियाउर्रहमान एवं अमरीन बानो

इसी ख़ुशनुमा सिलसिले में जनाब जियाउर्रहमान, इब्ने अब्दुल हमीद पटेल (पुंवार), आयड़, उदयपुर, का निकाह अमरीन बानो, बिन्ते अब्दुल अज़ीज़ साहब, मोटीयार (इंदौर) के साथ तय पाया है।

यह मुबारक निकाह 8 जमादिउल अव्वल 1448 हिजरी, मुताबिक़ 19 अक्टूबर 2026, बरोज़ सोमवार, बाद नमाज़-ए-मग़रिब इंदौर में, इंशाअल्लाह, अदा होगा।

दोनों परिवारों में निकाह की तैयारियाँ अपने पूरे जोश व ख़ुशी के साथ जारी हैं और रिश्तेदारों, दोस्तों तथा बिरादराने अहले मुल्तानी की आमद से इन मुबारक तक़रीबात की रौनक़ में और इज़ाफ़ा होगा।

🌺 दावते वलीमा

निकाह की इन मुबारक तक़रीबात के बाद 21 अक्टूबर 2026, बरोज़ बुधवार को तुलसी वाटिका, यूनिवर्सिटी रोड, उदयपुर में दावते वलीमा का एहतिमाम किया गया है।

इस मौक़े पर खानदान के अज़ीज़ो-अक़ारिब, दोस्तों और बिरादरी के लोगों से शिरकत फ़रमाकर नवविवाहित जोड़ों को अपनी दुआओं से नवाज़ने की दरख़्वास्त की गई है।

🌹 दुआ है...

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त दोनों नवविवाहित जोड़ों के निकाह को अपनी बारगाह में क़ुबूल फ़रमाए। उनके आने वाले सफ़र को ईमान, मोहब्बत, रहमत, बरकत और सुकून से भर दे। दोनों परिवारों के बीच मोहब्बत और भाईचारा हमेशा क़ायम रखे तथा घरों को ख़ुशियों, नेक औलाद और अपनी रहमतों से आबाद फ़रमाए।

आमीन या रब्बुल आलमीन। 🤲🌹

🌺 अदईय्यान

अब्दुल जलील पटेल साहब, अब्दुल अज़ीज़ पटेल, अब्दुल गफ़्फ़ार पटेल, मोहम्मद इब्राहीम पटेल, अब्दुल हमीद पटेल एवं अब्दुल वहीद पटेल।

🌺 अल-मुक़ल्लिफ़ीन

अब्दुल रशीद, अब्दुल मजीद, मोहम्मद सलीम, अब्दुल सलाम, मोहम्मद फ़ारूक़, मोहम्मद इरफ़ान, मोहम्मद शरीफ़, मोहम्मद हनीफ़, अब्दुल वहीद, मोहम्मद इमरान, अताउर्रहमान, मोहम्मद इदरीस, मोहम्मद आसिफ़, हबीबुर्रहमान, मोहम्मद इलियास, मोहम्मद फ़ैज़ल, मोहम्मद तौसीफ़, अब्दुल कलाम, मोहम्मद मुजाहिद, मोहम्मद शाहिद एवं मोहम्मद अल्तमश।

🌷 नन्ही इल्तिजा

मोहम्मद ताबिश एवं अक़लीमा फ़ातिमा

🌹 ननिहाल की तरफ़ से

मामा जी: हाजी मक़बूल अहमद साहब, मौलाना मोहम्मद अय्यूब, मोहम्मद शरीफ़, अहमद हुसैन, मोहम्मद सलीम, मोहम्मद सईद, मोहम्मद आरिफ़ एवं अब्दुल रशीद।

बहनोई: हाजी मोहम्मद फ़ारूक़ डड्डियाल।

भांजे: मोहम्मद तारिक़, मोहम्मद साजिद, मोहम्मद नूर, मोहम्मद सलीम, मोहम्मद फ़ुरक़ान एवं मोहम्मद फ़ैज़ान।

🌹 नियाज़मंद

अब्दुल गफ़्फ़ार पटेल — 7727019647
अब्दुल हमीद पटेल — 7737719595
अब्दुल वहीद पटेल — 9414474105

पता: 84, गली नंबर 3, लोहार कॉलोनी, उदयपुर (राजस्थान)


📰 मुल्तानी समाज — आपकी बिरादरी की अपनी आवाज़

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून, पैग़ाम-ए-मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना या अपने कारोबार का इश्तिहार क़ौमी सतह पर शाया व प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो राब्ता फ़रमाएँ।

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Monday, September 28, 2026

सिर्फ़ एक मौत नहीं, हमारे लिए एक बड़ा सवाल है — 38 साल की उम्र में मोहम्मद शहज़ाद का अचानक इंतक़ाल

रात 11 बजे तक दोस्तों के साथ हंसी-ख़ुशी मुलाक़ातें… और महज़ पौने दो घंटे बाद मौत की ख़बर — एक ख़ुशमिज़ाज नौजवान का यूँ अचानक चले जाना हर दिल को झकझोर गया

शामली।
कभी-कभी ज़िंदगी हमें ऐसे सदमे से रूबरू करा देती है, जिसके बाद इंसान देर तक यही सोचता रह जाता है कि आखिर कुछ ही लम्हों में सब कुछ कैसे बदल गया।

मोहम्मद शहज़ाद का अचानक इंतक़ाल भी ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला वाक़िया है। महज़ 38 साल की उम्र में उनका अचानक हार्ट फेल होने से इंतक़ाल हो जाना न सिर्फ़ उनके खानदान, रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए बल्कि पूरी मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के लिए गहरे रंज और सदमे का सबब है।

बताया जाता है कि 28 सितंबर 2026 की रात करीब 11 बजे तक मोहम्मद शहज़ाद अपने यार-दोस्तों के साथ हंसी-ख़ुशी घूमते, मिलते-जुलते और बातचीत करते रहे। उस वक़्त न किसी को किसी अनहोनी का अंदेशा था और न ही किसी ने यह सोचा होगा कि कुछ ही देर बाद हालात इतने बदल जाएंगे।

लेकिन रात आगे बढ़ी और करीब 12 बजकर 45 मिनट पर अचानक उनके इंतक़ाल की ख़बर सामने आई।

महज़ करीब पौने दो घंटे का यह फ़ासला ज़िंदगी और मौत के बीच ऐसा फ़ासला बन गया, जिसने हर सुनने वाले को अंदर तक हिला दिया।


मौत ने न डॉक्टर तक पहुंचने की मोहलत दी, न इलाज का मौक़ा

मोहम्मद शहज़ाद का परिवार मेडिकल सेक्टर से जुड़ा हुआ बताया जाता है। उनका अपना होलसेल और रिटेल मेडिकल स्टोर था। शामली की पॉश कॉलोनी में उनका आलीशान अस्पताल भी बताया जाता है। शहर के छोटे-बड़े मेडिकल स्टोर संचालकों से लेकर बड़े से बड़े डॉक्टरों तक उनके अच्छे ताल्लुक़ात थे।

लेकिन इंसान के पास चाहे कितने ही साधन क्यों न हों, मौत का वक़्त जब मुक़र्रर होता है तो तमाम इंतज़ामात बेबस हो जाते हैं।

जिस शख़्स के आसपास हर वक़्त दवाइयां, डॉक्टर और इलाज की सुविधाएं मौजूद थीं, उसे डॉक्टर को बुलाने या अस्पताल तक पहुंचाने तक की मोहलत भी न मिल सकी।

यही बात इस हादसे को और भी ज़्यादा झकझोर देने वाला बना देती है।


क्या 38 साल की उम्र में अचानक दिल का जवाब दे देना महज़ एक इत्तेफ़ाक़ है?

मोहम्मद शहज़ाद के इंतक़ाल को किसी एक वजह से जोड़ देना सही नहीं होगा। अचानक होने वाली हृदय संबंधी घटनाओं के पीछे कई अलग-अलग चिकित्सकीय कारण हो सकते हैं और किसी व्यक्ति की मौत का वास्तविक कारण डॉक्टरों की जांच तथा मेडिकल रिकॉर्ड के बिना तय नहीं किया जा सकता।

लेकिन यह हादसा हमें अपने आप से कुछ सवाल करने का मौक़ा ज़रूर देता है।

आज हमारी ज़िंदगी में भागदौड़ बढ़ रही है। खान-पान का अंदाज़ बदल रहा है। बाज़ार में मिलने वाली चीज़ों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहते हैं। नींद पूरी न होना, लगातार तनाव, शारीरिक गतिविधि की कमी, धूम्रपान या तंबाकू का इस्तेमाल और कई दूसरे जोखिम भी दिल की सेहत को प्रभावित कर सकते हैं।

इसीलिए मोहम्मद शहज़ाद का इंतक़ाल सिर्फ़ एक दर्दनाक ख़बर बनकर न रह जाए, बल्कि हमें अपनी ज़िंदगी और सेहत के बारे में सोचने पर भी मजबूर करे।


मिलावट और जहरीले माहौल का सवाल—लेकिन जवाब सबूत के साथ ही

आजकल अक्सर अचानक होने वाली मौतों के बाद लोग मिलावटी खाने, नकली खाद्य पदार्थों, प्रदूषण या जहरीले वातावरण को संभावित वजह मानने लगते हैं।

इन पहलुओं पर सवाल उठना अपनी जगह अहम है, लेकिन बिना चिकित्सकीय जांच और वैज्ञानिक प्रमाण के मोहम्मद शहज़ाद की मौत को इनमें से किसी एक वजह से जोड़ना उचित नहीं होगा।

हाँ, एक समाज के तौर पर हमें यह ज़रूर पूछना चाहिए कि—

हम जो खा रहे हैं, उसकी गुणवत्ता कैसी है?
हमारी रोज़मर्रा की जीवनशैली कितनी सेहतमंद है?
क्या हम नियमित स्वास्थ्य जांच को गंभीरता से लेते हैं?
क्या हम अपने दिल की सेहत, ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसी बुनियादी चीज़ों पर ध्यान देते हैं?
क्या हम अपनी नींद, खान-पान और रोज़ाना की शारीरिक गतिविधि को पर्याप्त महत्व देते हैं?

ये सवाल सिर्फ़ मोहम्मद शहज़ाद के परिवार के नहीं, बल्कि हम सबके हैं।


ज़िंदगी का भरोसा नहीं, मगर एहतियात हमारे हाथ में है

इस दुनिया की सबसे बड़ी हक़ीक़त यही है कि मौत का वक़्त किसी इंसान को मालूम नहीं।

क़ुरआन हमें मौत की हक़ीक़त की याद दिलाता है और इस्लामी तालीम इंसान को अपनी ज़िंदगी की हिफ़ाज़त और सेहत का भी ख़याल रखने की सीख देती है।

इसलिए मौत को याद करना हमें मायूस करने के लिए नहीं, बल्कि ज़िंदगी को बेहतर तरीके से जीने के लिए होना चाहिए।

मोहम्मद शहज़ाद की ज़िंदगी और उनका अचानक चला जाना हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हम अपनी सेहत को कल पर न टालें।

बीमारी का इंतज़ार करने के बजाय एहतियात करें।
लक्षणों को नज़रअंदाज़ करने के बजाय डॉक्टर से मशवरा करें।
खान-पान में लापरवाही के बजाय संतुलन अपनाएं।
और अपनी तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में अपने शरीर और दिल के लिए भी थोड़ा वक़्त निकालें।


एक ख़ुशमिज़ाज नौजवान की याद और हमारे लिए सबक

मोहम्मद शहज़ाद की आख़िरी रात शायद उनके दोस्तों के लिए हमेशा यादगार रहेगी।

रात 11 बजे तक साथ बैठना, मिलना-जुलना, हंसी-मज़ाक और बातचीत… और फिर कुछ ही देर बाद यह ख़बर कि शहज़ाद अब इस दुनिया में नहीं रहे।

ऐसे वाक़ियात इंसान को अंदर तक हिला देते हैं।

आज हम उनके लिए मग़फ़िरत की दुआ करें, उनके खानदान के ग़म में शरीक हों और साथ ही उनकी मौत को सनसनी नहीं बल्कि एक सामाजिक और सेहत संबंधी सबक बनाने की कोशिश करें।

क्योंकि सवाल सिर्फ़ यह नहीं कि मोहम्मद शहज़ाद के साथ क्या हुआ?

एक बड़ा सवाल यह भी है—

क्या हम अपनी ज़िंदगी, खान-पान और सेहत के बारे में आज से कुछ बेहतर करने का फ़ैसला करेंगे?

या फिर हम भी इस भरोसे में जीते रहेंगे कि हमारे साथ ऐसा कभी नहीं होगा?

अल्लाह तआला मरहूम मोहम्मद शहज़ाद की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनके दर्जात बुलंद फ़रमाए और तमाम अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।


"मुल्तानी समाज" की ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार (विज्ञापन) क़ौमी सतह पर शाया (प्रकाशित) या प्रसारित करवाना चाहते हैं तो बराए मेहरबानी नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।

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"मुल्तानी समाज" — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन,निशा बानू के इंतकाल से बिरादरी में पसरा रंज-ओ-ग़म, नमाज़-ए-जनाज़ा के बाद सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा

पारोली, जिला भीलवाड़ा (राजस्थान), 29 सितंबर 2026।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि आज दिन मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को पारोली, जिला भीलवाड़ा, राजस्थान में मोहम्मद इब्राहिम जी पुवार की बहू तथा अब्दुल हक़ पुवार की अहलिया, निशा बानू का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूमा के इंतकाल की ख़बर सुनकर खानदान, रिश्तेदारों, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादराने मुल्तानी में गहरे रंज-ओ-ग़म की लहर दौड़ गई। इस दुख की घड़ी में हर शख़्स मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फिरत और उनके अहले-ख़ाना के लिए सब्र-ए-जमील की दुआ कर रहा है।

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूमा की नमाज़-ए-जनाज़ा नमाज़-ए-ज़ुहर के बाद अदा की जाएगी, जिसके पश्चात उन्हें उनके आबाई/मुक़ामी कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि अपनी मसरूफ़ियत में से वक़्त निकालकर नमाज़-ए-जनाज़ा में शिरकत फ़रमाएँ और मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें।

मैय्यत को कब्र में उतारते वक़्त दुआ

जब मरहूमा को कब्र में उतारा जाए तो अल्लाह तआला उनके लिए कब्र के सफ़र को आसान फरमाए, कब्र को नूर से मुनव्वर फरमाए और उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे।

اللّٰهُمَّ اغْفِرْ لَهَا وَارْحَمْهَا، وَعَافِهَا وَاعْفُ عَنْهَا۔

ऐ अल्लाह! मरहूमा की मग़फ़िरत फरमा, उन पर रहम फरमा, उन्हें आफ़ियत अता फरमा और उनसे दरगुज़र फरमा।

اللّٰهُمَّ نَوِّرْ قَبْرَهَا وَوَسِّعْ مُدْخَلَهَا۔

ऐ अल्लाह! उनकी कब्र को नूर से भर दे और उनकी कब्र को कुशादा फरमा।

कब्र पर मिट्टी डालते वक़्त

मैय्यत को मिट्टी देते हुए यह दुआ की जाए कि:

اللّٰهُمَّ ثَبِّتْهَا عِنْدَ السُّؤَالِ، وَاجْعَلْ قَبْرَهَا رَوْضَةً مِنْ رِيَاضِ الْجَنَّةِ।

ऐ अल्लाह! सवाल के वक़्त उन्हें साबित-क़दम रख और उनकी कब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे।

तमाम हज़रात से गुज़ारिश है कि मरहूमा के लिए सूरह-ए-फ़ातिहा, सूरह-ए-इख़लास और दुआ-ए-मग़फ़िरत फरमाएँ। अल्लाह रब्बुल आलमीन मरहूमा के तमाम सग़ीरा-कबीरा गुनाहों को माफ़ फरमाए, उनकी कब्र को रोशन और कुशादा फरमाए, सवाल-ए-कब्र को आसान फरमाए, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला से आला मक़ाम अता फरमाए और अपने हबीब हज़रत मुहम्मद ﷺ की शफ़ाअत नसीब फरमाए।

अहले-ख़ाना के लिए दुआ

अल्लाह तआला मरहूमा के तमाम अहले-ख़ाना, रिश्तेदारों और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को इस सदमे को बर्दाश्त करने की ताक़त अता फरमाए, उन्हें सब्र-ए-जमील नसीब फरमाए और इस ग़म की घड़ी में अपना ख़ास करम फरमाए।

या अल्लाह! मरहूमा निशा बानू की मग़फ़िरत फरमा, उनकी कब्र को नूर से भर दे, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फरमा और उनके तमाम घरवालों को सब्र-ए-जमील अता फरमा।

आमीन या रब्बुल आलमीन।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार (विज्ञापन) क़ौमी सतह पर शाया (प्रकाशित) या प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो बराए मेहरबानी नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।

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"मुल्तानी समाज"

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इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन — मोहम्मद शहज़ाद के अचानक इंतिक़ाल से ग़म में डूबा शामली और गढ़ी पुख़्ता

महज़ 38 वर्ष की उम्र में दुनिया-ए-फ़ानी से रुख़्सत हुए शहज़ाद, अचानक मौत की ख़बर से बिरादरी में पसरा मातम

भूल सुधार एवं विस्तृत सूचना

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि मोहल्ला सलेक विहार, शामली, उत्तर प्रदेश निवासी मोहम्मद शहज़ाद वल्द जनाब हाजी इश्तियाक साहब, उम्र तक़रीबन 38 वर्ष, का बीती रात अचानक तबीयत ख़राब होने के बाद इंतिक़ाल हो गया।

मिली जानकारी के मुताबिक आज दिन मंगलवार, 29 सितंबर 2026 की बीती रात तक़रीबन पौने एक बजे अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन उन्हें इलाज के लिए शामली के मशहूर डॉक्टर खुर्शीद अनवर के नर्सिंग होम पर लेकर पहुंचे, जहां इलाज के दौरान हार्ट फेल होने से कुछ ही मिनटों में क़ज़ा-ए-इलाही से उनका इंतिक़ाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मोहम्मद शहज़ाद के अचानक इंतिक़ाल की दर्दनाक ख़बर धीरे-धीरे पूरे शहर में आग की तरह फैलती चली गई। जिस किसी को भी इस दुखद हादसे की इत्तिला मिली, वह ग़मज़दा परिवार से मिलने और ताज़ियत के लिए उनके घर की ओर दौड़ पड़ा। अचानक हुई इस मौत ने परिवार, रिश्तेदारों, दोस्तों और बिरादराना हज़रात को गहरे सदमे में डाल दिया।

बताया गया कि रात तक़रीबन 2 से 3 बजे के बीच मृतक शहज़ाद के परिजन भी शामली पहुंच गए। परिजनों की राय के मुताबिक मैय्यत को क़स्बा गढ़ी पुख़्ता ले जाकर दफ़न किया जाना था। इसके बाद मृतक के बड़े भाई डॉक्टर मुन्तियाज़ अली साहब के कहने पर मैय्यत को क़स्बा गढ़ी पुख़्ता में मिस्त्री सगीर के कारखाने के पीछे स्थित मृतक के छोटे भाई फुरकान के मकान पर ले जाया गया।

मिली जानकारी के मुताबिक आज बाद नमाज़-ए-ज़ुहर ठीक 2 बजे जनाज़े की नमाज़ अदा किए जाने के बाद मैय्यत को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए मग़फ़िरत की दुआ करें और परिवार को इस मुश्किल घड़ी में सब्र-ओ-तसल्ली दें।

मैय्यत को सुपुर्द-ए-ख़ाक करते वक़्त दुआ

अल्लाह तआला मरहूम मोहम्मद शहज़ाद साहब की मुकम्मल मग़फ़िरत फरमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और गुनाहों को माफ़ फरमाए, उनके दरजात को बुलंद फरमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फरमाए।

या अल्लाह! मरहूम की क़ब्र को नूर से मुनव्वर फरमा, उसे उनके लिए जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे, क़ब्र की तंगी और अंधेरे से महफ़ूज़ फरमा, उन्हें सवालात-ए-क़ब्र में कामयाबी अता फरमा और अपनी रहमत के साये में जगह अता फरमा।

या अल्लाह! जब मरहूम को क़ब्र में उतारा जाए तो उनके लिए आसानी फरमा, उनके कदमों को साबित रख, उनकी तन्हाई को अपनी रहमत से दूर फरमा और उन्हें अपनी रज़ा और मग़फ़िरत नसीब फरमा।

ऐ अल्लाह! जो मिट्टी उनके जिस्म को ढांपे, उसी मिट्टी को उनके लिए सुकून, रहमत और नूर का ज़रिया बना दे।

परिवार के तमाम अफ़राद, रिश्तेदारों और अहले-बिरादरी को सब्र-ए-जमील अता फरमाए और इस सदमे को बर्दाश्त करने की ताक़त दे।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

तमाम हज़रात मरहूम के लिए ज़्यादा से ज़्यादा दुआ-ए-मग़फ़िरत और ईसाल-ए-सवाब करें।


मालूमात के लिए राब्ता

मैय्यत के बारे में और ज़्यादा मालूमात के लिए उनके बड़े भाई डॉक्टर मुन्तियाज़ साहब से नीचे दिए गए मोबाइल नंबरों पर राब्ता किया जा सकता है:

📞 9368119416
📞 9719823744


"मुल्तानी समाज" की तरफ़ से ताज़ियत

मुल्तानी समाज राष्ट्रीय समाचार पत्रिका की पूरी टीम इस ग़म की घड़ी में मरहूम मोहम्मद शहज़ाद साहब के परिवार के साथ है।

हम दुआगो हैं कि रब्बे-करीम मरहूम की मग़फ़िरत फरमाए, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में जगह अता फरमाए और तमाम अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।

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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन मोहम्मद शहज़ाद के अचानक इंतिक़ाल से बिरादरी में पसरा रंज-ओ-ग़म — गढ़ी पुख्ता में सुपुर्द-ए-ख़ाक किए जाने की तैयारियाँ

शामली/गंगोह, 29 सितंबर 2026।
निहायत ही रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि क़स्बा गंगोह, ज़िला सहारनपुर के रहने वाले और फ़िलहाल मोहल्ला सलेक विहार, शामली, उत्तर प्रदेश में क़याम-पज़ीर मोहम्मद शहज़ाद साहब, जिन्हें लोग “अली मेडिकल स्टोर” के नाम से भी जानते थे, का आज मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को तक़रीबन 38 वर्ष की उम्र में अचानक इंतिक़ाल हो गया।

मिली जानकारी के मुताबिक़ आज लगभग 1 बजे अचानक तबीयत ख़राब होने पर उन्हें डॉक्टर खुर्शीद अनवर के हॉस्पिटल में इलाज के लिए ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा और क़ज़ा-ए-इलाही से उनका इंतिक़ाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मोहम्मद शहज़ाद के अचानक इंतिक़ाल की ख़बर से उनके अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, दोस्त-अहबाब और बिरादरी के लोगों में गहरा रंज-ओ-ग़म है। ख़बर लिखे जाने तक उनके घर वाले शामली पहुंच चुके थे और घर में मातम का माहौल है।

मैय्यत को दफनाने के बारे में 

परिवार और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब की ओर से मैय्यत को क़स्बा गढ़ी पुख़्ता जिला शामली ले जाकर वहीं सुपुर्द-ए-ख़ाक किए जाएंगे नमाज़-ए-जनाज़ा बाद नमाज़ जोहर अदा करके ठीक 2 बजे मैय्यत को किया जाएगा सपुर्द - ए - ख़ाक 

तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि मैय्यत के जनाज़े में शिरकत फ़रमाएं, नमाज़-ए-जनाज़ा अदा करें और मरहूम के हक़ में दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएं।

मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत

अल्लाह तआला मरहूम मोहम्मद शहज़ाद साहब की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और ग़लतियों को माफ़ फ़रमाए, उनकी नेकियों को क़ुबूल फ़रमाए और उन्हें अपनी रहमत-ओ-मग़फ़िरत के साए में जगह अता फ़रमाए।

या अल्लाह! उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा, उसे कुशादा फ़रमा और उन्हें रौज़ा-ए-जन्नत में से एक बाग़ बना दे। क़ब्र की तन्हाई में उनका हाफ़िज़-ओ-नासिर बन, उन्हें सवालात-ए-क़ब्र में कामयाबी अता फ़रमा और अपनी ख़ास रहमत से नवाज़।

दफ़्न के वक़्त की दुआ

जब मरहूम को क़ब्र में उतारा जाए तो या अल्लाह, उस आख़िरी मंज़िल को उनके लिए आसान फ़रमा। मिट्टी की इस आख़िरी आरामगाह को उनके लिए सुकून, रहमत और नूर का मक़ाम बना दे।

या अल्लाह! जो लोग अपने हाथों से मरहूम को क़ब्र में उतारें, उनके इस अमल को अपनी बारगाह में क़ुबूल फ़रमा और जो लोग मिट्टी दें, उनके हर मुट्ठी भर मिट्टी को मरहूम के लिए रहमत का सबब बना दे।

या रब्बुल आलमीन! मरहूम के तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा, उन्हें इस सदमे को बर्दाश्त करने की ताक़त दे और उनके दिलों को अपने ज़िक्र और अपनी रहमत से सुकून अता फ़रमा।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

तमाम हज़रात से गुज़ारिश है कि मरहूम के लिए सूरह-ए-फ़ातिहा, सूरह-ए-इख़लास और दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएं।

अल्लाह तआला मरहूम को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए।

आमीन सुम्मा आमीन।


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