Monday, September 28, 2026

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन मोहम्मद शहज़ाद के अचानक इंतिक़ाल से बिरादरी में पसरा रंज-ओ-ग़म — गढ़ी पुख्ता में सुपुर्द-ए-ख़ाक किए जाने की तैयारियाँ

शामली/गंगोह, 29 सितंबर 2026।
निहायत ही रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि क़स्बा गंगोह, ज़िला सहारनपुर के रहने वाले और फ़िलहाल मोहल्ला सलेक विहार, शामली, उत्तर प्रदेश में क़याम-पज़ीर मोहम्मद शहज़ाद साहब, जिन्हें लोग “अली मेडिकल स्टोर” के नाम से भी जानते थे, का आज मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को तक़रीबन 38 वर्ष की उम्र में अचानक इंतिक़ाल हो गया।

मिली जानकारी के मुताबिक़ आज लगभग 1 बजे अचानक तबीयत ख़राब होने पर उन्हें डॉक्टर खुर्शीद अनवर के हॉस्पिटल में इलाज के लिए ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा और क़ज़ा-ए-इलाही से उनका इंतिक़ाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मोहम्मद शहज़ाद के अचानक इंतिक़ाल की ख़बर से उनके अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, दोस्त-अहबाब और बिरादरी के लोगों में गहरा रंज-ओ-ग़म है। ख़बर लिखे जाने तक उनके घर वाले शामली पहुंच चुके थे और घर में मातम का माहौल है।

मैय्यत को दफनाने के बारे में 

परिवार और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब की ओर से मैय्यत को क़स्बा गढ़ी पुख़्ता जिला शामली ले जाकर वहीं सुपुर्द-ए-ख़ाक किए जाएंगे नमाज़-ए-जनाज़ा बाद नमाज़ जोहर अदा करके ठीक 2 बजे मैय्यत को किया जाएगा सपुर्द - ए - ख़ाक 

तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि मैय्यत के जनाज़े में शिरकत फ़रमाएं, नमाज़-ए-जनाज़ा अदा करें और मरहूम के हक़ में दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएं।

मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत

अल्लाह तआला मरहूम मोहम्मद शहज़ाद साहब की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और ग़लतियों को माफ़ फ़रमाए, उनकी नेकियों को क़ुबूल फ़रमाए और उन्हें अपनी रहमत-ओ-मग़फ़िरत के साए में जगह अता फ़रमाए।

या अल्लाह! उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा, उसे कुशादा फ़रमा और उन्हें रौज़ा-ए-जन्नत में से एक बाग़ बना दे। क़ब्र की तन्हाई में उनका हाफ़िज़-ओ-नासिर बन, उन्हें सवालात-ए-क़ब्र में कामयाबी अता फ़रमा और अपनी ख़ास रहमत से नवाज़।

दफ़्न के वक़्त की दुआ

जब मरहूम को क़ब्र में उतारा जाए तो या अल्लाह, उस आख़िरी मंज़िल को उनके लिए आसान फ़रमा। मिट्टी की इस आख़िरी आरामगाह को उनके लिए सुकून, रहमत और नूर का मक़ाम बना दे।

या अल्लाह! जो लोग अपने हाथों से मरहूम को क़ब्र में उतारें, उनके इस अमल को अपनी बारगाह में क़ुबूल फ़रमा और जो लोग मिट्टी दें, उनके हर मुट्ठी भर मिट्टी को मरहूम के लिए रहमत का सबब बना दे।

या रब्बुल आलमीन! मरहूम के तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा, उन्हें इस सदमे को बर्दाश्त करने की ताक़त दे और उनके दिलों को अपने ज़िक्र और अपनी रहमत से सुकून अता फ़रमा।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

तमाम हज़रात से गुज़ारिश है कि मरहूम के लिए सूरह-ए-फ़ातिहा, सूरह-ए-इख़लास और दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएं।

अल्लाह तआला मरहूम को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए।

आमीन सुम्मा आमीन।


मुल्तानी समाज की ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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