Saturday, February 28, 2026

🕯️ बेहद अफसोसनाक दिन: 28 फ़रवरी 2026 को बिरादरी से चार इंतेकाल की ख़बरें

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजीऊन

आज दिन शनिचर, बा-तारीख़ 28 फ़रवरी 2026, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी के लिए बेहद गमगीन रहा। एक ही दिन में चार अलग-अलग मकामात से इंतेकाल की खबरें पहुंचीं। अल्लाह तआला तमाम मरहूमीन की मग़फिरत फरमाए और अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता करे। आमीन।


🕯️ इंतेकाल की पहली ख़बर

📍 (ज़िला ) / हाल मुकाम

मोहम्मद जाकिर (मुजफ्फरनगर वालो) का आज सुबह करीब 02:30 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया। मरहूम हाल मुकाम पठानकोट, बड़ी मस्जिद बड़ौत (ज़िला बागपत, उत्तर प्रदेश) के पास रह रहे थे।

अल्लाह तआला मरहूम को जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए और तमाम गुनाहों को माफ़ फरमाए। आमीन।


🕯️ इंतेकाल की दूसरी ख़बर

📍

मरहूम हाजी मोहम्मद इब्राहिम साहब बारी वालों के फरज़ंद जनाब मोहम्मद यूसुफ साहब बारी वालों का भी क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया।

दफ़न का वक़्त सुबह 10:30 बजे मुक़र्रर किया गया।
मरहूम का घर: इश्क़कबाद कॉलोनी, निंबाहेड़ा — हाजी मोहम्मद यूनुस बारी वालों के यहां।

अल्लाह मरहूम की मग़फिरत फरमाए और घर वालों को सब्र अता करे। आमीन।


🕯️ इंतेकाल की तीसरी ख़बर

📍 (स्वरूप नगर)

बड़े दुख के साथ इत्तिला दी जाती है कि हाजी जाबिर व हाजी जहीर साहिब (सिक्का, ज़िला बागपत) की वालिदा साहिबा का आज सुबह तकरीबन 8:30 बजे इंतेकाल हो गया।

नमाज़-ए-जनाज़ा व तदफ़ीन कल दिन इतवार, 01 मार्च 2026, सुबह 10 बजे में अदा की जाएगी, इंशाअल्लाह।

अल्लाह मरहूमा को जन्नत में आला मुकाम अता फरमाए और औलाद को सब्र-ए-जमील दे। आमीन।


🕯️ इंतेकाल की चौथी ख़बर

📍 (ज़िला )

जनाब जमील साहब वल्द जनाब हाजी अब्दुल रहमान साहब, निवासी मोहल्ला लुहारान, क़स्बा बेहट का आज शाम साढ़े 6 से 7 बजे के दरमियान इंतेकाल हो गया।

मरहूम अपने पीछे अहलिया और तीन लड़कों समेत पूरा कुनबा छोड़ गए। वे नेकदिल, मिलनसार शख्सियत के मालिक थे और अपने वार्ड के मेंबर भी रहे।

तदफ़ीन कल दिन इतवार, 01 मार्च 2026, बाद नमाज़-ए-जौहर (2 बजे) की जाएगी।

अल्लाह मरहूम की मग़फिरत फरमाए, उनकी कब्र को नूर से भर दे और अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता करे। आमीन।


📢 एक ज़रूरी ऐलान – इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर अधूरी जानकारी की वजह से बिरादरी के लोग जनाज़े तक नहीं पहुँच पाते। “मुल्तानी समाज” तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि खबर भेजते वक़्त इन बातों का खास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत/शौहर का नाम
2️⃣ पूरा पता (मूल निवास और हाल मुकाम)
3️⃣ दफ़न का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम
4️⃣ घर के जिम्मेदार शख्स के 1–2 फ़ोन नंबर
5️⃣ (मर्द के इंतकाल की सूरत में) मरहूम का फोटो
6️⃣ इंतकाल की वजह (अगर मुनासिब हो)
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम

👉 मुकम्मल जानकारी से खबर सही तरीके से प्रकाशित होगी और बिरादरी को सहूलत मिलेगी।


📰 डिस्क्लेमर

पत्रिका में प्रकाशित लेख, समाचार, विचार, प्रेस विज्ञप्ति, विज्ञापन आदि संबंधित लेखक/विज्ञापनदाता के निजी विचार हैं। इनसे संपादक, प्रकाशक या प्रबंधन की सहमति आवश्यक रूप से अभिप्रेत नहीं है।
सामग्री की सत्यता व दावों के लिए लेखक/विज्ञापनदाता स्वयं उत्तरदायी होंगे।
किसी भी विवाद की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।


📰 सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट।

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अल्लाह तमाम मरहूमीन को जन्नतुल फिरदौस अता फरमाए और उनके घर वालों को सब्र-ए-जमील बख्शे। आमीन। 🤲

Friday, February 27, 2026

“मोहब्बत, आज़ादी और माँ-बाप की ख़ामोश चीख” घर से भागकर शादी करने के फैसलों के पीछे छूटते रिश्तों की सच्चाई

कभी-कभी एक फैसला सिर्फ दो लोगों का नहीं होता — वह पूरे परिवार की ज़िंदगी की दिशा बदल देता है।

आज की यह बात उन बेटियों और बेटों के नाम है जो घर से भागकर शादी करने का फैसला कर लेते हैं… और उन माँ-बाप के नाम भी, जो बाहर से भले सख्त दिखाई दें, लेकिन अंदर से हर रोज़ टूटते रहते हैं।


जब एक बेटी घर छोड़ती है…

जब कोई बेटी घर की चौखट पार करती है, तो वह अकेली नहीं जाती। उसके साथ जाता है घर का सुकून, बरसों की परवरिश का भरोसा, समाज में बना सम्मान और रिश्तों की नाज़ुक डोर।

माँ की आँखें दरवाज़े पर टिक जाती हैं। हर आहट पर दिल धड़कता है —
“शायद मेरी बच्ची वापस आ जाए…”

पिता बाहर से चुप रहते हैं, मगर भीतर ही भीतर शर्म, गुस्से और दर्द की आग में जलते रहते हैं।
भाई-बहन स्कूल, कॉलेज और मोहल्ले में तानों का सामना करते हैं। समाज सवाल कम पूछता है, फैसले ज़्यादा सुनाता है। रिश्तेदार सहारा देने के बजाय दूरी बना लेते हैं। हर शादी-ब्याह, हर समारोह में परिवार खुद को झुका हुआ महसूस करता है।


प्यार गुनाह नहीं… तरीका मायने रखता है

मोहब्बत इंसानी फितरत है, इसमें कोई बुराई नहीं। लेकिन मोहब्बत का तरीका, उसका वक्त और उसका असर — ये सब बहुत अहम होते हैं।

जब फैसला घरवालों को बताए बिना, उनसे रिश्ता तोड़कर लिया जाता है, तो वह सिर्फ एक शादी नहीं होती — वह भरोसे के टूटने की आवाज़ भी होती है।

भविष्य के दुष्परिणामों पर भी सोचना जरूरी है। रिश्ते सिर्फ दो दिलों के नहीं होते, दो परिवारों के भी होते हैं।


कानून, अधिकार और माँ-बाप की बेबसी

आज के दौर में जैसे ही लड़का या लड़की बालिग होते हैं, कानून उन्हें अपने फैसले लेने का पूरा अधिकार देता है। पुलिस थाने में गर्दन झुकाए खड़े पिता को अक्सर यही जवाब मिलता है —
“दोनों बालिग हैं, अपनी मर्जी से गए हैं… हम कुछ नहीं कर सकते।”

कानून कहता है — व्यक्ति की स्वतंत्रता सर्वोपरि है।
यह बात सही भी है, क्योंकि अधिकारों की रक्षा जरूरी है।

लेकिन सवाल यह भी है कि क्या स्वतंत्रता का अर्थ यह है कि परिवार की प्रतिष्ठा, भावनाएं और वर्षों का विश्वास एक पल में तोड़ दिया जाए?

कानून आँसू नहीं देखता, वह माँ की टूटी रातें नहीं गिनता। वह केवल उम्र और सहमति देखता है।
मगर एक माँ-बाप के लिए यह घटना उम्र की नहीं, रिश्ते की होती है।


अधिकार के साथ कर्तव्य भी जरूरी

यह सच है कि हर इंसान को अपनी ज़िंदगी चुनने का अधिकार है। लेकिन अधिकार के साथ कर्तव्य भी आते हैं।

स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं कि घरवालों को अंधेरे में रखकर फैसला लिया जाए।
अगर बच्चे अपने माता-पिता से संवाद करें, समझाएँ, धैर्य रखें — तो कई बार रास्ते निकल आते हैं।

माँ-बाप भी यह समझें कि बदलते समय के साथ बच्चों की भावनाएँ बदलती हैं।
और बच्चों को यह समझना होगा कि माँ-बाप की इज़्ज़त और भावनाएँ भी उतनी ही अहम हैं जितनी उनकी अपनी पसंद।


समाधान संवाद में है, टकराव में नहीं

घर से भाग जाना आख़िरी रास्ता नहीं होना चाहिए।
अगर रिश्ते की नींव सच्ची है, तो उसे मजबूती संवाद से मिलती है, छुपकर लिए गए फैसलों से नहीं।

समाज को भी बदलना होगा — तानों की जगह समझ, और फैसलों की जगह सहानुभूति देनी होगी।
तभी परिवार टूटने से बचेंगे और रिश्ते बचेंगे।


आख़िर में बस इतना —
मोहब्बत कीजिए, मगर अपने माँ-बाप की इज़्ज़त और उनके दिल का ख्याल रखते हुए।
क्योंकि दुनिया में सबसे सच्चा प्यार वही होता है, जो आपकी हर गलती के बाद भी आपके लौट आने का इंतजार करता है।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित
मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका
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🕯️ एक ही दिन में तीन सदमात – अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी में ग़म की लहर


इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी के लिए आज का दिन बेहद अफ़सोसनाक और ग़मगीन रहा। एक ही दिन में तीन इंतेकाल की खबरों ने दिलों को झकझोर कर रख दिया। हम अल्लाह तआला की बारगाह में हाथ उठाकर दुआ करते हैं कि वह मरहूमीन के सगीरा-कबीरा गुनाहों को माफ़ फरमाए, उनकी मग़फिरत फरमाए और जन्नतुल फिरदौस में आला मक़ाम अता फरमाए। घर वालों को सब्र-ए-जमील अता हो। आमीन, सुम्मा आमीन।


🕊️ पहली खबर – गांव बिनोली, खतौली (जनपद , )

आज दिन जुमा, बा-तारीख़ 27 फ़रवरी 2026 को कस्बा खतौली, जिला मुजफ्फरनगर के गांव बिनोली निवासी जनाब असलम साहब की वाल्दा का कज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया है।

दफीने का वक़्त अभी मालूम नहीं हो सका है। जैसे ही जानकारी प्राप्त होगी, बिरादरी को इत्तिला दी जाएगी।

अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फिरत फरमाए और तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र अता करे।


🕊️ दूसरी खबर – बिज़रोल (ज़िला )

निहायत ही रंजो-ग़म के साथ यह इत्तिला दी जाती है कि आज दिन जुमा, 27 फ़रवरी 2026, तक़रीबन असर के वक़्त जनाब हाफिज रहीमुद्दीन साहब s/o हाजी नजीर साहब का इंतिक़ाल हो गया। मरहूम की उम्र तक़रीबन 65 वर्ष थी।

मरहूम की मय्यत को कल दिन शनिवार, 28 फ़रवरी 2026 को सुबह 10 बजे बिज़रोल (बागपत) के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम अहले-ईमान और अज़ीज़ो-अक़ारिब से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत कर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फिरत फरमाएं।

अल्लाह रब्बुल आलमीन मरहूम की मग़फिरत फरमाए और घर वालों को सब्र-ए-जमील अता करे। आमीन।


🕊️ तीसरी खबर – खतौली / दिल्ली

बड़े रंजो-ग़म के साथ यह खबर दी जाती है कि खतौली के मरहूम हाजी जलालुद्दीन के बेटे मरहूम शरीफ अहमद की अहलिया और मोहम्मद असलम की वाल्दा का इंतकाल दिल्ली के एक हॉस्पिटल में हो गया है।

जनाज़ा अभी खतौली नहीं पहुंचा है, इसलिए दफनाने का वक़्त मालूम नहीं हो सका है। जैसे ही जानकारी प्राप्त होगी, बिरादरी को अवगत कराया जाएगा।

मरहूमा की मग़फिरत के लिए खास दुआ की दरख्वास्त है।


📢 एक ज़रूरी ऐलान – इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर देखने में आता है कि किसी अज़ीज़ के इंतेकाल की खबर अधूरी जानकारी या देरी से पहुंचती है, जिसकी वजह से कई लोग जनाज़े में शिरकत नहीं कर पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि जब भी इंतेकाल की खबर भेजें तो इन बातों का खास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता (मूल निवासी और वर्तमान निवास)।
3️⃣ दफीने का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार शख्स के एक-दो फोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतकाल हुआ हो तो मरहूम का फोटो शामिल करें।
6️⃣ इंतकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब समझें)।
7️⃣ घर के बाकी अहल-ए-ख़ाना के नाम (भाई, बहन, औलाद आदि)।

👉 मुकम्मल जानकारी से खबर सही और भरोसेमंद बनती है, जिससे बिरादरी के लोगों को आसानी रहती है और वे वक्त पर जनाज़े में शिरकत कर पाते हैं।


🤲 दुआ के साथ

अल्लाह तआला इन तीनों मरहूमीन की मग़फिरत फरमाए, उनकी क़ब्र को रौशन करे, जन्नतुल फिरदौस में आला मुक़ाम अता करे और तमाम लवाहितीन को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।

आमीन या रब्बुल आलमीन।


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Thursday, February 26, 2026

🕯️ इंतकाल की ख़बर: जनाब सलीम साहब का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल — दफ़ीना जुमे की नमाज़ के बाद

निहायत ही अफसोस और रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराने इस्लाम को इत्तला दी जाती है कि बरोज़ जुमेरात, 26 फ़रवरी 2026 को क़स्बा , ज़िला (उत्तर प्रदेश) के रहनुमा शख्सियत जनाब सलीम साहब वल्द नामालूम का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम की जुदाई से घर-ख़ानदान और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब गहरे सदमे में हैं। अल्लाह तआला मरहूम की मग़फिरत फ़रमाए, उनकी कब्र को रौशन और वसीअ फ़रमाए, जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता करे और तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।

🕌 दफ़ीना

मरहूम का दफ़ीना जुमे की नमाज़ के बाद रखा गया है। तमाम हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत कर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फिरत फ़रमाएं।

📞 मालूमात के लिए राब्ता:
मिर्ज़ा शाहनवाज़ साहब — 9720378056


📢 एक ज़रूरी ऐलान – इंतेकाल की ख़बर भेजने के लिए अहम् हिदायतें

अक्सर ऐसा होता है कि इंतकाल की खबर देर से या अधूरी पहुंचती है, जिसकी वजह से कई लोग जनाज़े में शामिल नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि खबर भेजते वक्त इन बातों का ख़ास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता (मूल निवास और वर्तमान निवास)।
3️⃣ दफ़ीने का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार शख्स के 1–2 फ़ोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतकाल हुआ हो तो मरहूम की तस्वीर।
6️⃣ इंतकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम — भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वगैरह।

👉 मुकम्मल जानकारी से खबर सही और वक़्त पर पहुंचती है, जिससे बिरादरी को आसानी रहती है।


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अल्लाह मरहूम की मग़फिरत फ़रमाए और सबको सब्र अता करे। आमीन।

🌙 रमज़ान की रहमतों के साए में: खतौली में “रमजान मुबारक किट वितरण” का खिदमती कारवां

क़स्बा खतौली, जिला मुज़फ्फरनगर (उत्तर प्रदेश)।

पवित्र माह रमज़ान की बरकतों और रहमतों के दरमियान, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार बढ़ई बिरादरी की तंजीम “मुल्तानी समाजसेवी संगठन” की जानिब से कल दिन जुमाअ, बा-तारीख़ 27 फ़रवरी 2026 को “रमजान मुबारक किट वितरण (तक़सीम) प्रोग्राम” का आयोजन किया जा रहा है। यह पहल जरूरतमंद और हक़दार परिवारों तक राशन व जरूरी सामान पहुंचाकर उन्हें राहत देने की नेक नीयत से की जा रही है।

रमज़ान का महीना सब्र, शुकर और खिदमत-ए-खल्क़ का पैग़ाम देता है। ऐसे पाक मौके पर समाजसेवी संगठन द्वारा यह कदम भाईचारे और इंसानियत की मिसाल पेश करता है। आयोजन समिति के अनुसार, किट में रोज़मर्रा की आवश्यक सामग्री शामिल होगी, ताकि जरूरतमंद परिवार इफ्तार और सहरी के इंतज़ामात बेफिक्री से कर सकें।

इस खिदमती मुहिम में हाजी नसीम, जमीरुद्दीन साहब, नौशाद मिर्जा, शाहिन मिर्जा, यासीन मिर्जा, यासमीन मिर्जा (समाज सेविका), अफजाल मिर्जा, शाहनवाज मिर्जा और रेशमा ज़मीर समेत अनेक गणमान्य हस्तियां सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। सभी जिम्मेदारान ने इसे बिरादरी की सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए सक्षम लोगों से दिल खोलकर सहयोग की अपील की है।

संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि रमज़ान में एक जरूरतमंद की मदद करना दरअसल पूरे समाज को मजबूत बनाना है। यही जज़्बा इस कार्यक्रम की असली रूह है—जहां न सिर्फ राहत सामग्री बांटी जाएगी, बल्कि एक-दूसरे के लिए खड़े रहने का पैग़ाम भी दिया जाएगा।

खतौली में आयोजित यह कार्यक्रम सामाजिक एकता, मोहब्बत और तहज़ीब की खूबसूरत तस्वीर पेश कर रहा है। विभिन्न वर्गों के लोग इस मुहिम से जुड़कर यह साबित कर रहे हैं कि इंसानियत से बढ़कर कोई पहचान नहीं।


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Wednesday, February 25, 2026

📝💐 *इत्तिला तारीख-ए-निकाह* 💐📝

🌹*بسم اللہ الرحمٰن الرحیم*🌹 

  *الصلتوۃ والسلام علیک یا رسولاللہ ﷺ* 
 📝💐 *इत्तिला तारीख-ए-निकाह* 💐📝

तमाम बिरादराने अहले मुलतानी 📢📢
 अस्सलामु अलयकुम व रहमतुल्लाही व बरकातुहु* 

      🍁🌸🌸🌸🌸🌸🍁
अल्लाह के फ़ज़्लो करम से , हुजूर ए अकरम मुहम्मद मुस्तफाﷺ  के सदक़े तुफैल , गौस ओ ख़्वाजा ओर रज़ा के सदक़े इंतहाई खुशी के साथ यह तहरीर की जाती है हाजी अब्दुल शकुर साहब कि पोती  हाजी अब्दुल रहीम साहब कि नेक दुखतर की  शादी खाना आबादी हस्बे ज़ैल प्रोगाम मुताबिक तय होना पाई हे।                           *✨*इंशाल्लाह*✨* 

  ▫️▫️▫️▫️▫️▫️
 
लिहाजा आप सभी से  गुजारिश है कि इस तकरीबे निकाह में शिरकत फरमाकर जश्ने शादी की रौनक बढ़ाएं और दूल्हा व दुल्हन को अपनी नेक दुआओं से नवाजे।
💐💐💐💐💐💐💐                             
******************************

     ✨नेक दुख्तर✨
🌹  *हज्जन जीनत बानो* 🌹
बिन्ते जनाब *हाजी अब्दुल रहीम जी मोटियार कोटडी ( पारोली वाले)

     🌹 *हमराह* 🌹 

     ✨नेक फरजंद✨
**💐 *मोहम्मद फुरक़ान* 💐 *                    
इब्ने मरहूम काबिल हुसैन डडियाल पितास वाले भवानी नगर भीलवाड़ा

 🌹  *निकाह*🌹
 
29 शव्वाल 1448 हिजरी मुताबिक 18 अप्रेल 2026 बरोज शनिचर  बाद नमाजे  असर 

🌹*ईन्शाअल्लाह* 🌹

लिहाजा आप सभी से गुजारीश हे की इस तकरीबन निकाह मे शिरकत  फरमाकर जश्ने शादी की रौनक बढाऐ और   दूल्हा व दुल्हन को अपनी दुआओ से नवाजे 

🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴

*********************
🌹 *सरपरस्त* 🌹

*हाजी अब्दुल शकुर साहब * 

🎄🎄🎄🎄🎄🎄🎄🎄
 
🌹अल मुकल्ले फिन 🌹

अब्दुल गफूर जी, हाजी मोहम्मद हुसैन, अब्दुल हक़, मोहम्मद फारुख 

🌹अदद्दाईन🌹

हाजी अब्दुल रहीम ,
हाजी अब्दुल करीम ,
हाजी अब्दुल कादर , 
अब्दुल सत्तार ,अब्दुल मंजूर  ✨** 
🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴

🌹 *चश्मे बराह*🌹

*अब्दुल रहुफ, अब्दुल कादिर, मोहम्मद अली, अब्दुल कय्यूम, अहमद अली,सदाम हुसैन,मोहशीन अली, मोहम्मद शाहरुख़,शाकिर हुसैन, मोहम्मद हुसैन ✨ व अहले मोटियार खानदान पारोली *🌹।
🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴

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         🌹*लख्ते जिगर*🌹

       *🌹अहमद नूर, मोहम्मद आमीन, मोहम्मद ओवेज,मोहम्मद नूर, मोहम्मद इब्राहिम, मोहम्मद बिलाल, नियामत अली, शौकत अली, आजम अली, ओवैस रज़ा ,मोहम्मद हाशिम 
******************************
  🌹नन्ही इल्तिज़ा 🌹

🌹शहनाज बानो, सुल्ताना बानो, इरम फातिमा, नुरिन फातिमा, नाजिया नूर, अफसाना नूर, नूर फातिमा मेरी फुफ्फी कि छादी मे जलूल -जलूल आना 
  
🌹 *अहले मोटियार  खानदान* 🌹

  *पारोली वाले कोटडी  भीलवाड़ा*

      🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴

पता:* ईदगाह के सामने 
जहाजपुर - रोड कोटडी 
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
फर्म;   *गरीब नवाज वेल्डिंग वर्क्स कोटडी
📞9785391427
📞8058370436

😢 इंतकाल की खबर: जनाब अब्दुल लेहाद साहब का 90 वर्ष की उम्र में इंतकाल, नगीना में नम आंखों के साथ सुपुर्द-ए-ख़ाक आज

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन, निहायत ही रंज–ओ–ग़म के साथ बिरादराने हजरात को यह दुखद इत्तिला दी जाती है कि क़स्बा नगीना, जिला बिजनौर (उत्तर प्रदेश) के बुज़ुर्ग और नेक सीरत शख्सियत, शहजाद अनवर के वालिद मोहतरम जनाब अब्दुल लेहाद साहब (उम्र लगभग 90 वर्ष) का बा-तारीख़ 25 फ़रवरी 2026, बरोज़ बुध की रात तक़रीबन 8 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया।

मरहूम का इंतकाल उनके घराने, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और तमाम अहबाब के लिए गहरे सदमे का सबब बना। इलाक़े में उन्हें एक सादा मिज़ाज, नेक दिल और दीनदार बुज़ुर्ग के तौर पर जाना जाता था। उनकी ज़िंदगी का बड़ा हिस्सा इबादत, खिदमत-ए-ख़ल्क़ और अपनों की रहनुमाई में गुज़रा।

🕊️ नमाज़-ए-जनाज़ा व तदफीन

मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा आज बरोज़ जुमेरात, 26 फ़रवरी 2026 को सुबह 10 बजे अदा की जाएगी, जिसके बाद उन्हें सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम अहबाब से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत कर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

📞 मालूमात के लिए राब्ता

मरहूम के बारे में तफ्सीलात जानने के लिए मोहम्मद लईक साहब से मोबाइल नंबर 9412216561 पर राब्ता कायम किया जा सकता है।


🤲 दुआएँ

अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फरमाए, उनकी क़ब्र को रौशन और वसीअ फरमाए, जन्नत-उल-फिरदौस में आला मुक़ाम अता करे।
घर वालों को सब्र-ए-जमील और हिम्मत बख्शे।
आमीन या रब्बुल आलमीन।



📰 डिस्क्लेमर (Disclaimer)

पत्रिका में प्रकाशित किसी भी प्रकार का लेख, समाचार, संपादकीय, विचार, टिप्पणी, प्रेस विज्ञप्ति, विज्ञापन या अन्य सामग्री लेखक, संवाददाता या विज्ञापनदाता के स्वयं के विचार हैं।
इनसे पत्रिका के संपादक, प्रकाशक, प्रबंधन या संस्थान की सहमति या समर्थन आवश्यक रूप से अभिप्रेत नहीं है।

पत्रिका में प्रकाशित सामग्री की सत्यता, विश्वसनीयता या किसी प्रकार के दावे के लिए लेखक या विज्ञापनदाता स्वयं उत्तरदायी होंगे।
पत्रिका एवं प्रबंधन इस संबंध में किसी भी प्रकार की कानूनी, सामाजिक या वित्तीय जिम्मेदारी से पूर्णतः मुक्त रहेंगे।

किसी भी विवाद, शिकायत या न्यायिक कार्यवाही की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित,
पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका

“मुल्तानी समाज”

के लिए ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट

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Tuesday, February 24, 2026

🌙 खतौली से एक ग़मगीन खबर – हाफिज़ याकूब साहब का इंतकाल

🕯️ इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को बड़े ही रंज-ओ-ग़म के साथ यह इत्तला दी जाती है कि मोहल्ला बिद्दीवाड़ा बाजार, कस्बा खतौली, जिला मुजफ्फरनगर के बाशिंदे जनाब हाफिज़ याकूब साहब वल्द जनाब हाजी ज़िक्रिया (उम्र लगभग 75 वर्ष) का बीती रात तक़रीबन 11:30 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया।

मरहूम अपने पीछे एक भरा-पूरा परिवार, चाहने वाले रिश्तेदार, दोस्त-अहबाब और पूरी बिरादरी को ग़मगीन छोड़ गए हैं। उनकी सादगी, मिलनसार तबीयत और दीनी लगाव को हमेशा याद किया जाएगा।

अल्लाह तआला मरहूम की मग़फिरत फरमाए, उनकी क़ब्र को रौशन फरमाए और घर वालों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।


🕊️ दफीने से संबंधित जानकारी

खबर लिखे जाने तक जिम्मेदारान मरहूम के दफीने के सही वक़्त की पुष्टि नहीं कर पाए थे। जैसे ही मुकम्मल और सही जानकारी प्राप्त होगी, फौरन अपडेट कर दी जाएगी इंशाअल्लाह।

अल्बत्ता कयास लगाए जा रहे हैं कि आज बरोज़ बुधवार, 25 फ़रवरी को बाद नमाज जोहर मय्यत को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम अहले बिरादरी से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फिरत करें और सवाबे दारेन हासिल करें।


📢 एक ज़रूरी ऐलान

इंतेकाल की खबर भेजने के लिये अहम् हिदायतें

अक्सर देखा गया है कि किसी अज़ीज़ के इंतकाल की खबर देर से पहुंचती है या अधूरी जानकारी की वजह से लोग जनाज़े में शामिल नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि जब भी इंतेकाल की खबर भेजें तो इन बातों का ख़ास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और उनकी वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता – पहले कहाँ के रहने वाले थे और फिलहाल कहाँ मुक़ीम थे।
3️⃣ दफीने का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार एक-दो अफ़राद के फ़ोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतकाल हुआ है तो मरहूम की तस्वीर भी शामिल करें।
6️⃣ इंतकाल की वजह (अगर बयान करना मुनासिब हो)।
7️⃣ घर के अन्य अहल-ए-ख़ाना के नाम – जैसे भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वगैरह।

👉 मुकम्मल जानकारी से खबर सही और वक़्त पर बिरादरी तक पहुंचेगी और लोग आसानी से शरीक हो सकेंगे।


📰 डिस्क्लेमर (Disclaimer)

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अल्लाह तआला मरहूम को जन्नतुल फिरदौस में आला मुक़ाम अता फरमाए। आमीन। 🤲

दो घरों में मातम, बिरादरी में गहरा रंज-ओ-ग़म

🕊️ इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलैहि राजिऊन, दुनिया की ज़िंदगी फ़ानी है और हर जान को मौत का स्वाद चखना है। बड़े अफ़सोस और दिली दुख के साथ अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को दो अलग-अलग घरों से इंतिकाल की खबरें मिली हैं, जिनसे पूरा समाज ग़मगीन है।


पहली खबर: भीलवाड़ा, राजस्थान से

गुल अली नगरी, भीलवाड़ा (राजस्थान) से सूचना मिली कि
मरहूम मोहम्मद युसुफ साहब उस्ता के पोते, हाफिज मोहम्मद उमर साहब के छोटे भाई मोहम्मद शफी के बेटे मोहम्मद अरशद का 23 फ़रवरी 2026, बरोज़ पीर, क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिकाल हो गया।

यह खबर परिवार और बिरादरी के लिए बेहद सदमे की रही। कमसिनी में इस तरह रुख़्सत हो जाना हर दिल को नम कर गया।

दफ़न:
23-02-2026, बरोज़ पीर
बाद नमाज़-ए-ईशा, रात 11:00 बजे
सुफियान कब्रिस्तान, भीलवाड़ा (राजस्थान)

अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फरमाए, उनकी क़ब्र को रौशन करे और घरवालों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।


दूसरी खबर: नजीबाबाद, जिला बिजनौर (उ.प्र.)

नजीबाबाद से भी एक इंतिहाई अफ़सोसनाक खबर मिली।
जनाब मरहूम मिस्त्री मोहम्मद आज़म साहब (मछली बाज़ार) की अहलिया, और मोहम्मद हाशिम व मोहम्मद कौसर की वालिदा का 23-02-2026 को शाम 7:35 बजे इंतिकाल हो गया।

इस खबर से इलाके में गहरा मातम छा गया। मरहूमा ने अपनी जिंदगी में सादगी, खिदमत और नेक सीरत का मिसाल पेश किया।

नमाज़-ए-जनाज़ा:
24-02-2026, सुबह 10:00 बजे

दफ़ीना:
होज़े वाले क़ब्रिस्तान, नजीबाबाद
जिला बिजनौर, उत्तर प्रदेश

अल्लाह तआला मरहूमा को जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए और तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र और हिम्मत दे। आमीन।


बिरादरी के नाम जरूरी गुज़ारिश

अक्सर ऐसा देखा गया है कि इंतिकाल की खबर देर से या अधूरी जानकारी के साथ पहुंचती है, जिससे कई लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इसलिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से अदब के साथ गुज़ारिश करती है कि खबर भेजते वक्त इन बातों का खास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता (मूल निवास और वर्तमान निवास)।
3️⃣ दफीने का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ जिम्मेदार घर के एक-दो अफ़राद के फोन नंबर।
5️⃣ मर्द के इंतिकाल की सूरत में मरहूम का फोटो।
6️⃣ इंतिकाल की वजह (अगर मुनासिब समझें)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम — भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वगैरह।

इन जानकारियों से खबर मुकम्मल होगी और बिरादरी तक सही सूचना पहुंच सकेगी।


📜 डिस्क्लेमर

पत्रिका में प्रकाशित लेख, समाचार, विचार, टिप्पणी, प्रेस विज्ञप्ति या विज्ञापन संबंधित लेखक या विज्ञापनदाता के निजी विचार हैं।
पत्रिका के संपादक, प्रकाशक, प्रबंधन या संस्थान उनसे आवश्यक रूप से सहमत हों — यह आवश्यक नहीं।

सामग्री की सत्यता और दावों के लिए संबंधित लेखक/विज्ञापनदाता स्वयं उत्तरदायी होंगे।
किसी भी विवाद की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।


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अल्लाह तआला तमाम मरहूमीन की मग़फ़िरत फरमाए और हम सबको अपनी आख़िरत की फिक्र करने की तौफ़ीक़ अता करे। आमीन। 🕊️

Monday, February 23, 2026

नई बस्ती बड़ौत के घर में फिर गूंजा मातम — जवान पोते का दर्दनाक हादसे में इंतेकाल

💔 इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन, अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को इंतिहाई रंज-ओ-ग़म के साथ इत्तला दी जाती है कि तारीख़ 5 रमजान हिजरी 1447, बरोज़ पीर, 23 फरवरी की शाम रोज़ा इफ्तार के बाद एक बेहद दर्दनाक हादसे ने बड़ौत (जिला बागपत, उ.प्र.) की नई बस्ती में रहने वाले मरहूम हाजी अहमद हसन पावर हैमर ठेकेदार के खानदान को गहरे सदमे में डाल दिया।

बताया जाता है कि अतीक अहमद ठेकेदार के बेटे मुहम्मद अक़दस (मरहूम हाजी अहमद हसन के पोते), निवासी नई बस्ती, दिल्ली-सहारनपुर हाइवे, मस्जिद के पास — रोज़ा खोलने के बाद अपने ताऊज़ाद भाई (हाजी नफीस ठेकेदार के पोते) और कुछ दोस्तों के साथ किसी काम से निकले थे। रास्ते में जिवाना गांव के पास कार का भीषण एक्सीडेंट हो गया।

घायल अवस्था में सभी को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली स्थित

ले जाया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद मुहम्मद अक़दस पुत्र अतीक अहमद (बावली वाले) इस दुनिया से रुख़्सत कर गए।

कार में सवार अन्य साथियों के भी गंभीर रूप से घायल होने की खबर है। अल्लाह तआला तमाम जख्मियों को जल्द-ए-जल्द शिफ़ा-ए-कामिला अता फरमाए। आमीन।


एक के बाद एक सदमे…

गौरतलब है कि कुछ माह पूर्व ही इसी परिवार में अनीस पुत्र हाजी अहमद हसन (पट्टी चौधरान, बड़ौत) के जवान बेटे का कारखाने में काम करते हुए इंतकाल हो गया था।
इसके अलावा फहीम पुत्र हाजी शफीक के होटल निर्माण कार्य के दौरान हुए दो बड़े हादसों ने भी इस घराने को झकझोर दिया था।

एक ही परिवार में चंद महीनों के भीतर दो जवान बेटों की जुदाई ने पूरे इलाक़े को हैरत और गहरे दुख में डाल दिया है। हर आंख नम है और हर दिल दुआगो।


दफ़न का ऐलान


अपडेट / ताज़ा सूचना

अभी सूचना प्राप्त हुई है कि कार एक्सीडेंट में इंतिकाल करने वाले बच्चे का पोस्टमार्टम पूरा हो चुका है और जनाज़ा दिल्ली से रवाना हो चुका है।

नमाज़-ए-जनाज़ा आज असर की नमाज़ के बाद नई बस्ती में अदा की जाएगी।
इसके बाद मरहूम को छपरौली चुंगी, गोरे गरीबा कब्रिस्तान, बड़ौत में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फरमाए और घरवालों को सब्र-ए-जमील अता करे। आमीन।


अगर चाहें तो मैं इसे और ज्यादा भावुक, संक्षिप्त या औपचारिक अंदाज़ में भी तैयार कर दूँ।



राब्ता के लिए

अधिक जानकारी हेतु आप निम्न जिम्मेदार हज़रात से संपर्क कर सकते हैं:

  • गफूर नेता जी (बावली) – 8477894156
  • फहीम पुत्र हाजी शफीक (बावली) – 7017478539
  • नदीम ठेकेदार (बावली) – 9997411304

दुआ

अल्लाह तआला मरहूम मुहम्मद अक़दस की मग़फ़िरत फरमाए, जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मकाम अता फरमाए, जख्मियों को शिफ़ा दे और घरवालों को सब्र-ए-जमील अता करे। आमीन या रब्बुल आलमीन।


🔔 ज़रूरी ऐलान – इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम हिदायतें


अक्सर अधूरी जानकारी की वजह से बिरादरी के लोग जनाज़े तक नहीं पहुंच पाते। इसलिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि इंतेकाल की खबर भेजते समय निम्न जानकारियाँ अवश्य शामिल करें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम व वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता (मूल निवास व वर्तमान पता)।
3️⃣ दफ़न का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ जिम्मेदार परिजन (1-2) के फ़ोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतकाल हुआ है तो फोटो भी शामिल करें।
6️⃣ इंतकाल की वजह (यदि बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ घर के अन्य अहल-ए-ख़ाना के नाम।

👉 मुकम्मल जानकारी से खबर सही और समय पर बिरादरी तक पहुंचती है।


📰 डिस्क्लेमर

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✍️ अली हसन मुल्तानी की खास रिपोर्ट
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अल्लाह हम सबको ऐसे इम्तिहानों में सब्र और इस्तिक़ामत अता फरमाए। 🤲

Sunday, February 22, 2026

चौसाना के मोहम्मद शमीम साहब का इंतिकाल — बिरादरी ग़मगीन, दिल अश्कबार

🌙 इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन, अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ यह इत्तला दी जाती है कि ग्राम चौसाना, तहसील ऊन, जिला शामली (उत्तर प्रदेश) निवासी मोहम्मद शमीम साहब (उम्र लगभग 60 वर्ष), वल्द जनाब शेरमोहम्मद उर्फ शीरी साहब (मरहूम), आज बरोज़ इतवार 22 फ़रवरी 2026 को दोपहर लगभग साढ़े 12 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत हो गए।

मरहूम अपने पीछे अपनी अहलिया शकीला बी (मायका — बनत, शामली, यूपी), दो बेटे — मोहम्मद अशरफ़ और मोहम्मद अफसर, तथा एक बेटी अफसाना (अहलिया जुल्फिकार, पिंडौरा) समेत पूरा कुनबा, खानदान और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को रोता-बिलखता छोड़ गए। उनके इंतिकाल की खबर से इलाके में गहरा शोक व्याप्त है और घर में मातम का माहौल है।

मोहम्मद शमीम साहब सादा मिज़ाज, मिलनसार और नेक दिल इंसान थे। बिरादरी और मोहल्ले में उनका अच्छा नाम और एहतराम था। उनके जाने से जो खालीपन पैदा हुआ है, उसे अल्फ़ाज़ में बयान करना आसान नहीं।

🕋 सुपुर्द-ए-ख़ाक की जानकारी

मरहूम को बाद नमाज़ असर, गांव चौसाना, जिला शामली (उत्तर प्रदेश) में ही सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।
तमाम अहबाब और बिरादरी के लोगों से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर सवाब-ए-दारेन हासिल करें और मरहूम के लिए मग़फिरत की दुआ करें।

📞 मय्यत के सिलसिले में अधिक जानकारी हेतु:
मरहूम के बेटे मोहम्मद अशरफ़ से मोबाइल नंबर 9818989068 पर संपर्क किया जा सकता है।

📢 एक ज़रूरी ऐलान — इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर यह देखा गया है कि किसी अज़ीज़ के इंतिकाल की खबर बिरादरी तक देर से पहुँचती है या अधूरी जानकारी की वजह से लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से दरख़्वास्त करती है कि जब भी किसी के इंतिकाल की खबर भेजें, तो इन जरूरी बातों का खास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता — मूल निवास और वर्तमान निवास।
3️⃣ दफीने का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार शख्स (एक-दो) के मोबाइल नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतिकाल हुआ हो तो मरहूम का फोटो भी शामिल करें।
6️⃣ इंतिकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ घर के बाकी अहल-ए-ख़ाना — जैसे भाई, बहन, माँ-बाप, औलाद आदि के नाम।

👉 मुकम्मल जानकारी से खबर सही और वक़्त पर बिरादरी तक पहुंचेगी, जिससे लोग जनाज़े में आसानी से शरीक हो सकेंगे।

📰 डिस्क्लेमर (Disclaimer)

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किसी भी विवाद या न्यायिक कार्यवाही की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।

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✍️ ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट

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अल्लाह तआला मरहूम को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुकाम अता फरमाए और तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील नसीब करे। आमीन। 🤲

Friday, February 20, 2026

🕊️ ग़मगीन इत्तिला: मेरठ की मोहतरमा का इंतिक़ाल, बिरादरी में शोक की लहर

निहायत ही अफ़सोस और रंज-ओ-ग़म के साथ अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को यह इत्तिला दी जाती है कि बीती रात, दिन जुमेरात बा-तारीख़ 19 फ़रवरी 2026 को जनाब हाफिज़ फारूख साहब मशीन वाले (साकिन: पूर्वी फैय्याज अली, नज़दीक नगर निगम घंटाघर, मेरठ, उत्तर प्रदेश) की अहलिया मोहतरमा का इंतिक़ाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूमा का जनाज़ा नमाज़-ए-जुमा के वक़्त, मोहल्ला पूर्वी फैय्याज अली, मेरठ में ही अदा किया जाएगा। तमाम अहबाब से गुज़ारिश है कि ज़्यादा से ज़्यादा तादाद में शरीक होकर मरहूमा के हक़ में दुआ-ए-मग़फिरत फरमाएं और घर वालों को सब्र-ए-जमील की तसल्ली दें।

अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फिरत फरमाए, उनकी कब्र को रौशन करे और जन्नतुल फिरदौस में आला मुक़ाम अता फरमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।


📌 मुकम्मल मालूमात की दरख्वास्त

यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल इत्तिला के ज़रिए मालूम हुई। खबर की तस्दीक और तकमील के मक़सद से इसे प्रकाशित किया जा रहा है।
जो हजरात मरहूमा के बारे में मुकम्मल और सही मालूमात रखते हों, उनसे दरख्वास्त है कि फौरन “मुल्तानी समाज” न्यूज के मोबाईल नंबर 📞 9410652990 पर कॉल या मैसेज के ज़रिए तफसीली जानकारी मुहैया कराएं, ताकि बिरादरी तक सही और भरोसेमंद खबर पहुंच सके।


📢 एक ज़रूरी ऐलान – इंतेकाल की खबर भेजने के लिये अहम् हिदायतें

अक्सर अधूरी जानकारी की वजह से लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते या सही वक़्त का इल्म नहीं हो पाता। इस अहम मसले को मद्देनज़र रखते हुए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से इल्तिज़ा करती है कि जब भी किसी अज़ीज़ के इंतकाल की खबर भेजें, तो इन बातों का ख़ास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ मुकम्मल पता – अस्ल वतन और मौजूदा सुकूनत।
3️⃣ दफ़ीने का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार अफ़राद (एक-दो) के फोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतकाल हो तो मरहूम का फोटो शामिल करें।
6️⃣ इंतकाल की वजह (अगर बयान करना मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम – जैसे भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वगैरह।

👉 इन तमाम जानकारियों से खबर मुकम्मल और मुस्तनद बनेगी, जिससे बिरादरी के अफराद तक सही और वक़्ती इत्तिला पहुंच सके।


📰 डिस्क्लेमर (Disclaimer)

पत्रिका में प्रकाशित किसी भी प्रकार का लेख, समाचार, संपादकीय, विचार, टिप्पणी, प्रेस विज्ञप्ति, विज्ञापन या अन्य सामग्री संबंधित लेखक, संवाददाता या विज्ञापनदाता के व्यक्तिगत विचार हैं।

इनसे पत्रिका के संपादक, प्रकाशक, प्रबंधन या संस्थान की सहमति आवश्यक रूप से अभिप्रेत नहीं है। प्रकाशित सामग्री की सत्यता, विश्वसनीयता अथवा किसी दावे के लिए संबंधित लेखक या विज्ञापनदाता स्वयं उत्तरदायी होंगे।

पत्रिका एवं प्रबंधन इस संबंध में किसी भी प्रकार की कानूनी, सामाजिक या वित्तीय जिम्मेदारी से पूर्णतः मुक्त रहेंगे। किसी भी विवाद या न्यायिक कार्यवाही की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।


📚 सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित
पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका

🖋️ “मुल्तानी समाज”
ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट

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इंतिहाई अफ़सोसनाक इत्तिला: हज्जन शाहजहां बी का इंतिक़ाल, बिरादरी ग़मगीन

अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादराना हज़रात को बड़े ही रंजो-ग़म के साथ यह इत्तिला दी जाती है कि मरहूम जनाब तय्यब साहिब (जानसठ वाले) की अहलिया, हज्जन शाहजहां बी का आज दिन शनिवार, 21 फ़रवरी 2026 को अल सुबह लगभग 4 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया। इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूमा का इंतिक़ाल न सिर्फ़ उनके खानदान बल्कि पूरी बिरादरी के लिए गहरे सदमे का सबब बना है। वह रिश्ते में मिन्हाज मिर्ज़ा फलावदा वालों की अम्मी की चची थीं और ज़ैदी फ़ार्म, मेरठ निवासी हबीब अहमद पेशकार साहब के साहबज़ादे शकील अहमद साहब की सास थीं। मरहूमा अपने लख़्ते-जिगर जनाब आमिल साहब और जनाब आदिल साहब के साथ रह रही थीं।

हज्जन शाहजहां बी अपनी सादगी, शराफ़त, और दीनी मिज़ाज के लिए जानी जाती थीं। उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी ख़ामोशी से खिदमत, सब्र और शुक्र के साथ गुज़ारी। उनकी मौजूदगी घर के लिए रहमत और बरकत का सबब थी। आज उनके जाने से एक ऐसा खालीपन पैदा हुआ है जिसे अल्फ़ाज़ में बयान करना मुश्किल है।

मरहूमा के जनाज़े की नमाज़ आज दोपहर 1 बजे रूड़की रोड, मुहल्ला रामपुरी, मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश में अदा की जाएगी। तमाम अहबाब से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फिरत करें और सवाबे दारेन हासिल करें।

अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फिरत फरमाए, उनकी कब्र को रौशन और वसीअ फरमाए, और जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फरमाए। आमीन।
अल्लाह तआला अहले-खानदान को सब्र-ए-जमील अता फरमाए और इस सदमे को बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ दे।


🚨 ज़रूरी ऐलान

इंतेकाल की खबर भेजने के लिये अहम् हिदायतें

अक्सर देखा गया है कि किसी अज़ीज़ के इंतिक़ाल की खबर देर से या अधूरी जानकारी के साथ पहुंचती है, जिसकी वजह से कई लोग जनाज़े और दफ़ीने में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि इंतिक़ाल की खबर भेजते वक़्त नीचे दी गई बातों का खास एहतिमाम करें:

📌 भेजते समय इन बातों का ज़रूर ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम तथा वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता — अस्लन कहां के रहने वाले थे और फिलहाल कहां मुक़ीम थे।
3️⃣ जनाज़े/दफ़ीने का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार शख्स (एक या दो) के मोबाइल नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतिक़ाल हुआ हो तो मरहूम की साफ़ फोटो भी साथ भेजें।
6️⃣ इंतिक़ाल की वजह (अगर बयान करना मुनासिब समझें)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम — जैसे वालिदैन, भाई-बहन, औलाद वगैरह।

👉 मुकम्मल मालूमात से खबर वक़्त पर और सही अंदाज़ में शाया की जा सकेगी, जिससे बिरादरी के लोग आसानी से शरीक हो सकेंगे।


📰 डिस्क्लेमर (Disclaimer)

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प्रकाशित सामग्री की सत्यता, विश्वसनीयता या किसी भी प्रकार के दावे के लिए संबंधित लेखक या विज्ञापनदाता स्वयं जिम्मेदार होंगे।

पत्रिका एवं प्रबंधन इस संबंध में किसी भी प्रकार की कानूनी, सामाजिक या वित्तीय जिम्मेदारी से पूर्णतः मुक्त रहेंगे।

किसी भी विवाद, शिकायत या न्यायिक कार्यवाही की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।




सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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🌍 “मुल्तानी घराना” — नस्लों को जोड़ने वाला डिजिटल शिजरा, जो देश ही नहीं विदेशों तक बिरादरी का नाम रोशन कर रहा है

द्वारा शुरू किया गया “मुल्तानी घराना” प्रोजेक्ट आज मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के लिए सिर्फ एक सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि हमारी पहचान, विरासत और अमानत बन चुका है। यह वह डिजिटल शिजरा है जो हमारी जड़ों को संभालते हुए आने वाली नस्लों के लिए राह रोशन कर रहा है।


🧭 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि — “मुल्तानी” पहचान की जड़ें

“मुल्तानी” पहचान का संबंध ऐतिहासिक मुल्तान क्षेत्र से माना जाता है। लोहे और लकड़ी की कारीगरी—यानी लोहार और बढ़ई का हुनर—हमारी असल पहचान रही है। रोज़गार, व्यापार और सामाजिक परिस्थितियों के चलते अलग-अलग दौर में हिजरत हुई, और बिरादरी भारत के कई राज्यों में बसती चली गई।

आज भी यह हुनर हमारी रगों में है—बस औज़ार बदले हैं, इरादे नहीं।


🗺️ भारत में राज्यवार फैलाव — मेहनत की मिसाल

🔹 उत्तर भारत (मुख्य केंद्र)

  • उत्तर प्रदेश — पश्चिमी यूपी (शामली, मुज़फ्फरनगर, मेरठ, सहारनपुर), रोहिलखंड, अवध
  • दिल्ली (NCT) — पुरानी दिल्ली, उत्तर-पूर्वी व बाहरी दिल्ली
  • हरियाणा — यमुनानगर, करनाल, पानीपत
  • पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश (सीमावर्ती क्षेत्र)

🔹 पश्चिम व मध्य भारत

  • राजस्थान — जयपुर, अजमेर, अलवर
  • गुजरात — अहमदाबाद, सूरत
  • महाराष्ट्र — मुंबई, पुणे
  • मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़

🔹 पूर्व व अन्य क्षेत्र

  • बिहार, झारखंड
  • जम्मू क्षेत्र

यह फैलाव हमारी मेहनत, हुनर और हालात से तालमेल की गवाही देता है।


🧬 नस्लनामा — सिलसिला-ए-अव्वल से आज तक

शिजरा सिर्फ नामों की सूची नहीं, बल्कि रिश्तों की अमानत है।

बुनियादी मूल:
मूल स्थान — मुल्तान
पहचान — मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई)
पारंपरिक पेशा — लोहे व लकड़ी की कारीगरी

सिलसिला-ए-अव्वल:

हाजी मुल्तानी साहब → शेख नूर मोहम्मद → हाजी करीमुद्दीन → हाजी सत्तार → मियां अब्दुल गफ्फार → मोहम्मद इस्माईल → हाजी रहमुद्दीन → हाजी सगीर अहमद → ज़मीर आलम → लारेब ज़मीर / रुशान ज़मीर

यह सिलसिला बताता है कि हम कहाँ से आए, कैसे फैले और किन-किन नामों ने इस पहचान को आगे बढ़ाया।


💻 “मुल्तानी घराना” — डिजिटल दौर की दीनी व सामाजिक ज़रूरत

ट्रस्ट ने वर्षों की मेहनत और संसाधनों से शिजरे को डिजिटल रूप दिया है, ताकि:

  • देश-विदेश में फैली बिरादरी अपने कुनबे को जोड़ सके
  • आने वाली नस्लों को सही जानकारी मिले
  • खानदान की मैपिंग आसान हो
  • विरासत हमेशा के लिए महफ़ूज़ रहे

दीनी ऐतबार से भी यह काम सवाब का ज़रिया है—
अपनी नस्ल, अपने बुजुर्गों और अपने सिलसिले को याद रखना और उसे सुरक्षित रखना एक अमानत की हिफ़ाज़त है। जब नई पीढ़ी अपने अस्ल से वाकिफ़ होगी, तो उसमें इत्तेहाद, जिम्मेदारी और खिदमत का जज़्बा और मजबूत होगा।


🤝 युवाओं के लिए सुनहरा मौका

इस प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए ऐसे पढ़े-लिखे युवक-युवतियों की ज़रूरत है जो अपने-अपने शहर से ही सॉफ्टवेयर पर काम करना चाहें।
यह सिर्फ टेक्निकल काम नहीं—यह बिरादरी की खिदमत है।


📰 बिरादरी की आवाज़

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत और दिल्ली से प्रकाशित बिरादरी की पत्रिका “मुल्तानी समाज” भी इस मुहिम को मजबूती दे रही है—ताकि हर घर तक सही जानकारी पहुंचे।


🌿 “मुल्तानी घराना” — पहली से सातवीं पीढ़ी तक नस्लों को जोड़ने वाला डिजिटल शिजरा

की जानिब से तैयार किया गया “मुल्तानी घराना” सिर्फ एक सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की नस्लों को जोड़ने वाली अमानत है। यह वह डिजिटल शिजरा है जो हमारे बुजुर्गों की याद, हमारी पहचान और आने वाली पीढ़ियों की राह को एक साथ सुरक्षित करता है।


🧭 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि — अस्ल से पहचान तक

“मुल्तानी” पहचान का रिश्ता ऐतिहासिक मुल्तान से माना जाता है। लोहे और लकड़ी की कारीगरी हमारी बुनियादी पहचान रही। वक्त के साथ रोज़गार और हालात के चलते बिरादरी भारत के अलग-अलग सूबों में फैलती चली गई—मगर अपनी तहज़ीब और दीनी जड़ों से जुड़ी रही।


🧬 पहली से सातवीं पीढ़ी तक पूरा सिलसिला

👴 पहली पीढ़ी (सिलसिला-ए-अव्वल)

हाजी मुल्तानी साहब
↳ “मुल्तानी” पहचान यहीं से मशहूर मानी जाती है।


👨‍🦳 दूसरी पीढ़ी

  1. हाजी करीमुद्दीन मुल्तानी
  2. शेख नूर मोहम्मद मुल्तानी

👨 तीसरी पीढ़ी (फैलाव की शुरुआत)

उत्तर भारत शाखा:

  • हाजी सत्तार मुल्तानी
  • मियां अब्दुल गफ्फार

पश्चिम भारत शाखा:

  • हाजी यूसुफ़ मुल्तानी
  • शेख अब्दुल वहीद

👨‍👦 चौथी पीढ़ी (राज्यवार पहचान)

  • उत्तर प्रदेश — उस्ताद इलाही बख्श, मियां रशीद अहमद
  • दिल्ली — हाजी कादिर बख्श, मियां हबीबुल्लाह
  • हरियाणा — मियां गुलाम हुसैन, शेख रज़ा मोहम्मद
  • पंजाब — हाजी फज़ल करीम, मियां खुदा बख्श
  • राजस्थान — उस्ताद नूर अहमद, मियां सलीमुद्दीन

👨‍👦‍👦 पांचवीं पीढ़ी (विस्तार काल)

  • मध्य प्रदेश — हाजी जमील अहमद, शेख बशीर अहमद
  • गुजरात — हाजी इस्माइल मुल्तानी, मियां अज़ीज़ अहमद
  • उत्तराखंड — हाजी रशीद अहमद, शेख नज़ीर अहमद

👨‍👧‍👦 छठी पीढ़ी (आधुनिक दौर)

  • महाराष्ट्र — हाजी अब्दुल मजीद, शेख अनीस अहमद
  • बिहार — हाजी लतीफ़ अहमद
  • झारखंड — मियां हामिद अली
  • छत्तीसगढ़ — हाजी वहीद अहमद
  • हिमाचल प्रदेश — मियां नूर मोहम्मद
  • जम्मू — हाजी अब्दुल रऊफ

🧑‍💼 सातवीं पीढ़ी (वर्तमान और भविष्य)

आज की पीढ़ी — जो शिक्षा, व्यापार, सरकारी-गैरसरकारी नौकरी, टेक्नोलॉजी और समाजसेवा में आगे बढ़ रही है — अपने-अपने शहरों में खानदान, कुनबा और घराना के नाम से पहचानी जाती है।

यही पीढ़ी “मुल्तानी घराना” डिजिटल शिजरे के जरिए अपनी जड़ों को आने वाली नस्लों तक पहुंचा रही है।


💻 “मुल्तानी घराना” — दीनी और सामाजिक फायदे

  • नस्ल और सिलसिले की सही जानकारी महफ़ूज़ रहती है
  • आने वाली पीढ़ियां अपने बुजुर्गों से जुड़ी रहती हैं
  • बिरादरी में इत्तेहाद और पहचान मजबूत होती है
  • गलतफहमियों और बिखराव से बचाव होता है
  • दीनी एतबार से अपने अस्ल और बुजुर्गों को याद रखना सवाब का ज़रिया है

यह प्रोजेक्ट वर्षों की मेहनत, समय और संसाधनों से तैयार किया गया ताकि देश-विदेश में फैली बिरादरी एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जुड़ सके।


🤝 युवाओं के लिए पैग़ाम

ट्रस्ट को ऐसे पढ़े-लिखे युवक-युवतियों की जरूरत है जो अपने शहर से ही इस सॉफ्टवेयर पर काम कर सकें। यह सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि अपनी कौम की खिदमत है।


✨ आख़िरी बात

“मुल्तानी घराना” सिर्फ नाम नहीं—
यह हमारी पहचान, हमारी तहज़ीब और हमारी नस्लों को जोड़ने वाली कड़ी है।

आइए, अपने शिजरे को अपडेट करें, अपनी जानकारी दर्ज कराएं और इस धरोहर को मजबूत बनाएं—ताकि आने वाली नस्लें फख्र से कह सकें कि हमने अपनी जड़ों को संभाल कर रखा।



✨ निष्कर्ष

“मुल्तानी घराना” सिर्फ एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नहीं—
यह हमारी पहचान, हमारी जड़ों और हमारी आने वाली नस्लों का पुल है।

आज वक्त है कि हम सब मिलकर इस धरोहर को मजबूत करें, अपने शिजरे को अपडेट करें और बिरादरी की इस टेक्नोलॉजी को हर घर तक पहुँचाएँ।
जब कौम अपने अस्ल को पहचान लेती है, तो तरक़्क़ी की राह खुद-ब-खुद आसान हो जाती है।


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Thursday, February 19, 2026

🕊️ इंतकाल की खबर: जनाब इस्लाम साहब फोरमैन का क़ज़ा-ए-इलाही से विसाल

निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराने इस्लाम को यह इत्तिला दी जाती है कि जनाब इस्लाम साहब फोरमैन (अस्ल साकिन: गंगेरू, कांधला, ज़िला शामली, उत्तर प्रदेश | हाल बाशिंदा: हिसार, हरियाणा) का आज दिन जुमेरात, 19 फ़रवरी 2026 को क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन।

यह खबर हमें सोशल मीडिया के ज़रिए मालूम हुई। “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका की टीम ने खबर की तस्दीक के लिए संबंधित जिम्मेदारान से राब्ता करने की कोशिश की, मगर किसी वजह से कॉल रिसीव न हो सकी।

जिन हजरात को मरहूम के बारे में मुकम्मल मालूमात हो, उनसे गुज़ारिश है कि दिए गए व्हाट्सएप नंबर पर राब्ता करके सही और तफ्सीली जानकारी मुहैया कराएं, ताकि बिरादरी तक सही इत्तिला पहुंचाई जा सके और कोई भी शख्स जनाज़े व ताज़ियत से महरूम न रहे।

📌 नोट: यह खबर मोहम्मद आबान खान साहब के जरिए मोबाईल नंबर 9992744983 से वायरल की गई है।


📢 एक ज़रूरी ऐलान – इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम् हिदायतें

अक्सर देखा गया है कि अधूरी जानकारी की वजह से लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते या सही वक्त का इल्म नहीं हो पाता। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से दरख्वास्त करती है कि जब भी किसी अज़ीज़ के इंतकाल की खबर भेजें, तो दरज-ए-ज़ैल बातों का ख़ास एहतिमाम फरमाएं:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ मुकम्मल पता – अस्ल वतन और मौजूदा रिहाइश।
3️⃣ दफ़ीने का सही वक्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार अफ़राद (एक या दो) के फोन नंबर।
5️⃣ अगर मरहूम मर्द हैं तो उनका फोटो शामिल करें।
6️⃣ इंतकाल की वजह (अगर बयान करना मुनासिब समझें)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम – जैसे भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वगैरह।

👉 इन तमाम मालूमात से खबर मुकम्मल और भरोसेमंद होगी, जिससे बिरादरी के अफराद तक सही और वक़्ती जानकारी पहुंच सके।


📰 डिस्क्लेमर

पत्रिका में प्रकाशित किसी भी प्रकार का लेख, समाचार, संपादकीय, विचार, टिप्पणी, प्रेस विज्ञप्ति, विज्ञापन या अन्य सामग्री संबंधित लेखक, संवाददाता या विज्ञापनदाता के व्यक्तिगत विचार हैं।

इनसे पत्रिका के संपादक, प्रकाशक, प्रबंधन या संस्थान की सहमति या समर्थन अनिवार्य रूप से अभिप्रेत नहीं है।

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🖋️ “मुल्तानी समाज”
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Wednesday, February 18, 2026

🕯️ सेहरी की रूहानी घड़ी में एक सदा-ए-ग़म — मरहूमा का इंतेकाल

इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन। बड़े ही रंजो-ग़म के साथ इत्तला दी जाती है कि मोहम्मद शमशाद साहब, साकिन इंचौली, जिला बागपत (उत्तर प्रदेश), हाल बाशिंदे छतरपुर, दिल्ली की अहलिया, उम्र तकरीबन 50 साल, आज सेहरी के वक्त लगभग साढ़े 4 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल फरमा गईं।

मरहूमा हाजी गफूर साहब (मथेडी) हाल निवासी छतरपुर, दिल्ली की साहबज़ादी थीं। यह खबर पूरे इलाके और बिरादरी में गहरे दुख का सबब बनी हुई है। सेहरी की पाक और रूहानी घड़ी में दुनिया-ए-फ़ानी से रुख़्सत होना, अपने आप में एक गहरी हिकमत समेटे हुए है।

अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फिरत फरमाए, उनकी कब्र को रौशन और वसीअ फरमाए, और जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फरमाए। आमीन।
घरवालों, अहल-ए-ख़ाना और तमाम अज़ीज़ो-अक़ारिब को सब्र-ए-जमील अता हो। आमीन सुम्मा आमीन।


📞 मय्यत से मुतअल्लिक मालूमात

मय्यत के सिलसिले में मुकम्मल जानकारी के लिए आप मरहूमा के भाई मोहम्मद अशरफ़ साहब के मोबाइल नंबर 8910833786 पर राब्ता कायम कर सकते हैं।


📢 एक ज़रूरी ऐलान — इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर ऐसा देखा गया है कि किसी अज़ीज़ के इंतेकाल की खबर बिरादरी तक देर से पहुँचती है या अधूरी जानकारी की वजह से लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से अदबाना गुज़ारिश करती है कि जब भी इंतेकाल की खबर भेजें, तो इन बातों का खास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और उनकी वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता — असल रहने का स्थान और फिलहाल का निवास।
3️⃣ दफीने का सही वक्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार शख्स (एक-दो) के फोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतेकाल हुआ हो तो मरहूम का फोटो भी शामिल करें।
6️⃣ इंतेकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ घर के बाकी अहल-ए-ख़ाना के नाम — जैसे भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वगैरह।

👉 इन तमाम मालूमात से खबर मुकम्मल होगी और बिरादरी के लोगों तक सही वक़्त पर सही जानकारी पहुंच सकेगी।


📰 डिस्क्लेमर (Disclaimer)

पत्रिका में प्रकाशित किसी भी प्रकार का लेख, समाचार, संपादकीय, विचार, टिप्पणी, प्रेस विज्ञप्ति, विज्ञापन या अन्य सामग्री लेखक, संवाददाता या विज्ञापनदाता के स्वयं के विचार हैं।
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अल्लाह तआला मरहूमा की तमाम खता-ओ-लरज़िशों को माफ़ फरमाए और उनके दरजात बुलंद करे।
दुआ है कि यह सदमा घरवालों के लिए सब्र और आख़िरत में अज्र का ज़रिया बने। 🤲