Sunday, February 22, 2026

चौसाना के मोहम्मद शमीम साहब का इंतिकाल — बिरादरी ग़मगीन, दिल अश्कबार

🌙 इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन, अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ यह इत्तला दी जाती है कि ग्राम चौसाना, तहसील ऊन, जिला शामली (उत्तर प्रदेश) निवासी मोहम्मद शमीम साहब (उम्र लगभग 60 वर्ष), वल्द जनाब शेरमोहम्मद उर्फ शीरी साहब (मरहूम), आज बरोज़ इतवार 22 फ़रवरी 2026 को दोपहर लगभग साढ़े 12 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत हो गए।

मरहूम अपने पीछे अपनी अहलिया शकीला बी (मायका — बनत, शामली, यूपी), दो बेटे — मोहम्मद अशरफ़ और मोहम्मद अफसर, तथा एक बेटी अफसाना (अहलिया जुल्फिकार, पिंडौरा) समेत पूरा कुनबा, खानदान और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को रोता-बिलखता छोड़ गए। उनके इंतिकाल की खबर से इलाके में गहरा शोक व्याप्त है और घर में मातम का माहौल है।

मोहम्मद शमीम साहब सादा मिज़ाज, मिलनसार और नेक दिल इंसान थे। बिरादरी और मोहल्ले में उनका अच्छा नाम और एहतराम था। उनके जाने से जो खालीपन पैदा हुआ है, उसे अल्फ़ाज़ में बयान करना आसान नहीं।

🕋 सुपुर्द-ए-ख़ाक की जानकारी

मरहूम को बाद नमाज़ असर, गांव चौसाना, जिला शामली (उत्तर प्रदेश) में ही सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।
तमाम अहबाब और बिरादरी के लोगों से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर सवाब-ए-दारेन हासिल करें और मरहूम के लिए मग़फिरत की दुआ करें।

📞 मय्यत के सिलसिले में अधिक जानकारी हेतु:
मरहूम के बेटे मोहम्मद अशरफ़ से मोबाइल नंबर 9818989068 पर संपर्क किया जा सकता है।

📢 एक ज़रूरी ऐलान — इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर यह देखा गया है कि किसी अज़ीज़ के इंतिकाल की खबर बिरादरी तक देर से पहुँचती है या अधूरी जानकारी की वजह से लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से दरख़्वास्त करती है कि जब भी किसी के इंतिकाल की खबर भेजें, तो इन जरूरी बातों का खास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता — मूल निवास और वर्तमान निवास।
3️⃣ दफीने का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार शख्स (एक-दो) के मोबाइल नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतिकाल हुआ हो तो मरहूम का फोटो भी शामिल करें।
6️⃣ इंतिकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ घर के बाकी अहल-ए-ख़ाना — जैसे भाई, बहन, माँ-बाप, औलाद आदि के नाम।

👉 मुकम्मल जानकारी से खबर सही और वक़्त पर बिरादरी तक पहुंचेगी, जिससे लोग जनाज़े में आसानी से शरीक हो सकेंगे।

📰 डिस्क्लेमर (Disclaimer)

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“मुल्तानी समाज” के लिए
✍️ ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट

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अल्लाह तआला मरहूम को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुकाम अता फरमाए और तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील नसीब करे। आमीन। 🤲

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