करोड़ों की आबादी, हज़ारों के दावे और चंद हज़ार सक्रिय लोग! आख़िर कब बदलेगी हमारी क़ौम की तस्वीर?
ज़रा सोचिए! जिस बिरादरी की आबादी करोड़ों में होने का अनुमान लगाया जाता है, उस बिरादरी की तालीम, तरक़्क़ी, कारोबार, रोज़गार और डिजिटल पहचान के लिए मैदान में कितने लोग वास्तव में अमली तौर पर काम कर रहे हैं?
आज पूरे हिंदुस्तान में मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के नौजवानों, तालीमयाफ़्ता लोगों और कारोबार से जुड़े ज़िम्मेदार अफ़राद के दरमियान कई अहम सवालात पर गुफ़्तगू हो रही है। कहीं नए व्हाट्सऐप ग्रुप बनाए जा रहे हैं, कहीं नई तंजीम का ऐलान हो रहा है, कहीं नए ओहदेदार मुक़र्रर किए जा रहे हैं और कहीं नए सदर, चेयरमैन तथा सरपरस्त बनाए जा रहे हैं।
मगर अफ़सोस! इन तमाम सरगर्मियों के बीच एक बुनियादी सवाल पर बहुत कम लोग ग़ौर कर रहे हैं कि आख़िर हमारी बिरादरी की असल तरक़्क़ी के लिए अमली तौर पर किया क्या जा रहा है?
क्या सिर्फ़ नए ग्रुप बनाने, ओहदों के ऐलान करने और सोशल मीडिया पर तस्वीरें लगाने से हमारी आने वाली नस्लों का मुस्तक़बिल संवर जाएगा?
क्या बिरादरी की तरक़्क़ी का रास्ता सिर्फ़ सदर, चेयरमैन और राष्ट्रीय पदाधिकारी बनने से होकर गुज़रता है?
नहीं जनाब! अब वक़्त आ गया है कि हम इन सवालों का जवाब तलाशें।
मुझे बिरादरी का चौधरी नहीं बनना, मुझे बिरादरी को आगे बढ़ते देखना है!
मैं ज़मीर आलम, आज अपनी बिरादरी के तमाम नौजवानों, बुज़ुर्गों, कारोबारियों और सामाजिक ज़िम्मेदारों के सामने अपनी बात पूरी साफ़गोई के साथ रखना चाहता हूँ।
मुझे न बिरादरी का चौधरी बनना है, न किसी ओहदे की लालसा है और न ही किसी तंजीम के ओहदेदार से कोई मुक़ाबला करना है।
मेरा मक़सद सिर्फ़ इतना है कि हमारी बिरादरी को मुल्क की एक तालीमयाफ़्ता, बा-शऊर, तरक़्क़ीपसंद और डिजिटल तौर पर मज़बूत बिरादरी के रूप में पहचाना जाए।
अगर किसी तंजीम ने किसी शख़्स को चेयरमैन बनाया है तो यह उनका अपना फ़ैसला है। हम उनका एहतराम करते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ़ चेयरमैन बना देने से बिरादरी की तक़दीर बदल जाएगी?
अगर किसी ओहदेदार के पास बिरादरी की तालीम, रोज़गार, कारोबार, नौजवानों की रहनुमाई और सामाजिक बेदारी के लिए कोई अमली मंसूबा नहीं है, तो फिर सिर्फ़ ओहदे की अहमियत क्या रह जाती है?
मेरा यक़ीन है कि बिरादरी की ख़िदमत ओहदों से नहीं, बल्कि ख़ुलूस, मेहनत, क़ुर्बानी और लगातार अमल से होती है।
करोड़ों की बिरादरी और चंद हज़ार ख़िदमतगार! यह हमारी सबसे बड़ी फ़िक्र होनी चाहिए
आज हमारे सामने मौजूद सामाजिक तंजीमों और उनसे जुड़े लोगों की तादाद पर ग़ौर करने की ज़रूरत है।
मेरे तजुर्बे, सामाजिक सरगर्मियों और बिरादरी के अलग-अलग हल्क़ों से मिलने वाली मालूमात के मुताबिक़, पूरे मुल्क में बिरादरी की ख़िदमत का दावा करने वाली कई तंजीमें मौजूद हैं। इनमें से कुछ बाक़ायदा रजिस्टर्ड हैं और कुछ सामाजिक सतह पर काम कर रही हैं।
अगर इन तमाम तंजीमों के साथ वास्तव में जुड़े हुए लोगों, पदाधिकारियों और अमली तौर पर काम करने वाले अफ़राद की तादाद का जायज़ा लिया जाए तो यह तादाद बिरादरी की कुल आबादी के मुक़ाबले बेहद कम नज़र आती है।
एक शुरुआती अंदाज़े के मुताबिक़, तमाम तंजीमों के सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ताओं और उनसे जुड़े लोगों की कुल तादाद कुछ हज़ार तक ही सीमित हो सकती है। यह कोई सरकारी या प्रमाणित सर्वे नहीं, बल्कि एक सामाजिक जायज़े की ज़रूरत की तरफ़ इशारा है।
अब ज़रा सोचिए!
जिस बिरादरी की आबादी करोड़ों में होने का अनुमान लगाया जाता है, उसके लिए अगर चंद हज़ार लोग ही सरगर्म हों तो क्या इतने कम लोग अकेले पूरी बिरादरी की तस्वीर बदल सकते हैं?
आख़िर बाक़ी लोग कहाँ हैं? क्या बिरादरी की तरक़्क़ी सिर्फ़ कुछ लोगों की ज़िम्मेदारी है?
सोशल मीडिया के हज़ारों फ़ॉलोअर्स को तंजीम का मेंबर समझने की भूल मत कीजिए!
आजकल एक और दिलचस्प सूरतेहाल देखने को मिल रही है।
कई तंजीमें अपने साथ 10 हज़ार, 20 हज़ार या उससे भी ज़्यादा लोगों के जुड़े होने का दावा करती हैं। हम भी इन दावों को सुनते हैं और ख़ुशी होती है कि हमारी बिरादरी के लोग बड़ी तादाद में एक प्लेटफ़ॉर्म पर जमा हो रहे हैं।
लेकिन असल तस्वीर जानने के लिए कुछ बुनियादी सवाल पूछना ज़रूरी है।
- तंजीम के बाक़ायदा मेंबरशिप रजिस्टर में कितने लोगों के नाम दर्ज हैं?
- कितने लोगों ने बाक़ायदा सदस्यता हासिल की है?
- कितने लोग तंजीम के सामाजिक और तालीमी मिशन में हिस्सा लेते हैं?
- कितने नौजवान रोज़ाना बिरादरी की बेदारी के लिए वक़्त निकालते हैं?
- कितने लोग किसी ज़रूरतमंद की मदद के लिए आगे आते हैं?
सोशल मीडिया पर किसी फ़ेसबुक पेज को फ़ॉलो करने, इंस्टाग्राम अकाउंट से जुड़ने या व्हाट्सऐप ग्रुप में शामिल होने का मतलब यह नहीं कि वह शख़्स किसी तंजीम का बाक़ायदा मेंबर भी बन गया है।
हक़ीक़त यह है कि एक ही शख़्स बिरादरी की कई तंजीमों, दर्जनों सोशल मीडिया पेजों और सैकड़ों व्हाट्सऐप ग्रुपों से जुड़ा हुआ मिल सकता है।
इसलिए सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली तादाद और बाक़ायदा सदस्यता को एक जैसा समझना दुरुस्त नहीं।
हमें तादाद के दावों से ज़्यादा अमली कारगुज़ारी, पारदर्शिता और नतीजों पर तवज्जो देनी होगी।
100 से 150 व्हाट्सऐप ग्रुप, मगर कितने लोग हैं अमली तौर पर सरगर्म?
ज़रा किसी भी तंजीम के ज़िम्मेदार के मोबाइल पर मौजूद बिरादरी के व्हाट्सऐप ग्रुपों का जायज़ा लीजिए।
कई लोगों के मोबाइल में 100 से 150 तक ग्रुप मौजूद मिल सकते हैं। लेकिन सवाल यह है कि इन ग्रुपों में कितने लोग वाक़ई सरगर्मी से हिस्सा लेते हैं?
कितने लोग तालीम की जानकारी शेयर करते हैं?
कितने लोग सरकारी स्कीमों, रोज़गार, कारोबार और क़ानूनी रहनुमाई की मालूमात दूसरों तक पहुँचाते हैं?
कितने लोग किसी ज़रूरतमंद की मदद के लिए आगे आते हैं?
अक्सर देखा जाता है कि ग्रुप में सैकड़ों लोग शामिल होते हैं, लेकिन पैग़ाम भेजने और सामाजिक कामों में हिस्सा लेने वाले चंद ही लोग होते हैं।
अब वक़्त है कि हम सिर्फ़ ग्रुप में शामिल होने वाले नहीं, बल्कि बिरादरी के लिए काम करने वाले बनें।
ऐ नौजवानों! आपकी जेब में मौजूद मोबाइल हमारी बिरादरी का मुस्तक़बिल बदल सकता है!
मेरे प्यारे नौजवान भाइयों!
आप रोज़ाना सोशल मीडिया पर कितना वक़्त गुज़ारते हैं? फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हाट्सऐप पर कितनी देर सरगर्म रहते हैं?
क्या उसी वक़्त में से सिर्फ़ 10 से 15 मिनट अपनी बिरादरी की तरक़्क़ी के लिए नहीं निकाल सकते?
यक़ीन मानिए, अगर हमारी बिरादरी का हर नौजवान रोज़ाना सिर्फ़ 10 से 15 मिनट भी किसी मुनज़्ज़म और मुस्तनद सामाजिक प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए ख़िदमत के लिए दे दे तो एक ऐसी तहरीक खड़ी हो सकती है जिसका असर पूरे हिंदुस्तान में दिखाई देगा।
आपको न अपना कारोबार छोड़ना है, न नौकरी से छुट्टी लेनी है और न ही घर से बाहर निकलने की ज़रूरत है।
आप घर बैठे अपने मोबाइल से यह काम कर सकते हैं।
मसलन:
- बिरादरी के बच्चों को तालीम हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करना।
- सरकारी योजनाओं, स्कॉलरशिप और दाख़िलों की जानकारी शेयर करना।
- बेरोज़गार नौजवानों तक रोज़गार और नौकरी की जानकारी पहुँचाना।
- कारोबारियों के कारोबार को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर पहचान दिलाना।
- बिरादरी के होनहार बच्चों और कामयाब अफ़राद की हौसलाअफ़ज़ाई करना।
- ज़रूरतमंद परिवारों और तालीमी मदद के मुस्तहिक़ लोगों की जानकारी सही प्लेटफ़ॉर्म तक पहुँचाना।
- बिरादरी के बुज़ुर्गों, तंजीमों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अच्छे कामों को आम करना।
- बिरादरी में इत्तेहाद, भाईचारे और आपसी एहतराम को फ़रोग़ देना।
- ग़लत मालूमात और अफ़वाहों के बजाय सही और मुस्तनद जानकारी को बढ़ावा देना।
- मुल्क के हर शहर और क़स्बे में बिरादरी की डिजिटल पहचान को मज़बूत करना।
सोशल मीडिया की ताक़त को पहचानिए, दुनिया बदलने का ज़रिया बनाइए!
आज दुनिया में बड़े-बड़े सामाजिक और कारोबारी ब्रांड अपनी पहचान सोशल मीडिया के ज़रिए बना रहे हैं।एक छोटी-सी टीम अगर मुनज़्ज़म तरीक़े से काम करे तो उसकी आवाज़ मुल्क के कोने-कोने तक पहुँच सकती है।
जब दूसरी क़ौमें अपने नौजवानों को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, तालीम, कारोबार और नए मौक़ों से जोड़ रही हैं, तो फिर हमारी बिरादरी पीछे क्यों रहे?
हमारे नौजवान किसी से कम नहीं हैं। हमारे बच्चों में सलाहियत है, कारोबारियों में तजुर्बा है, बुज़ुर्गों के पास इल्म और तजुर्बे का ख़ज़ाना है और हमारे पास एक बड़ी सामाजिक ताक़त मौजूद है।
ज़रूरत सिर्फ़ इस ताक़त को एक मुनज़्ज़म सिम्त देने की है।
हमें एक-दूसरे की टाँग खींचने के बजाय एक-दूसरे का हाथ थामना होगा।
मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट की तरफ़ से बिरादरी के नौजवानों को पुरख़ुलूस दावत
आज इसी मक़सद के साथ मैं ज़मीर आलम, अपनी पूरी बिरादरी के नौजवानों, तालीमयाफ़्ता भाइयों, कारोबारियों और सामाजिक तौर पर सरगर्म अफ़राद को मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट के साथ जुड़ने की पुरख़ुलूस दावत देता हूँ।
हमारा मक़सद किसी दूसरी तंजीम को कमतर दिखाना या किसी के काम में रुकावट पैदा करना हरगिज़ नहीं है।
हम तमाम तंजीमों, उनके ज़िम्मेदारों और बिरादरी के लिए ख़िदमत अंजाम देने वाले हर शख़्स का एहतराम करते हैं।
हमारी कोशिश यह है कि बिरादरी की तालीम, डिजिटल बेदारी, सामाजिक इत्तेहाद, कारोबार, रोज़गार और नई नस्लों के मुस्तक़बिल के लिए एक ऐसा मुनज़्ज़म प्लेटफ़ॉर्म तैयार किया जाए जिसमें हर शहर, हर क़स्बे और हर इलाक़े के नौजवान को अपनी सलाहियत के मुताबिक़ ख़िदमत का मौक़ा मिले।
हम आपको कोई बड़ा ओहदा देने का वादा नहीं कर रहे।
हम आपको एक बड़ा मक़सद दे रहे हैं।
हम आपको किसी चौधराहट की दावत नहीं दे रहे।
हम आपको अपनी बिरादरी की ख़िदमत की दावत दे रहे हैं।
सिर्फ़ 6 महीने दीजिए, एक नई सामाजिक तहरीक की बुनियाद रखिए!
मेरी अपने नौजवान साथियों से पुरख़ुलूस गुज़ारिश है कि आप सिर्फ़ 6 महीने तक रोज़ाना 10 से 15 मिनट बिरादरी की डिजिटल बेदारी और तरक़्क़ी के लिए देने का इरादा कीजिए।
हमारी कोशिश होगी कि इस दौरान एक मुनज़्ज़म डिजिटल नेटवर्क तैयार किया जाए, शहरों और ज़िलों के नौजवानों को जोड़ा जाए, तालीम और रोज़गार की मालूमात पहुँचाई जाए और बिरादरी के अच्छे कामों को क़ौमी सतह पर पहचान दिलाई जाए।
छह महीने में कितना बदलाव आएगा, यह हमारे सबके इत्तेहाद, मेहनत और अमल पर निर्भर करेगा। लेकिन अगर हम आज से शुरुआत करें तो आने वाले वक़्त में एक मज़बूत बुनियाद ज़रूर रख सकते हैं।
याद रखिए, तारीख़ें ओहदे हासिल करने वालों को नहीं, बल्कि अपनी क़ौम और समाज के लिए अमली ख़िदमत करने वालों को याद रखती है।
आज ही आगे आइए, अपनी बिरादरी की तरक़्क़ी में हिस्सा लीजिए!
अगर आप मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी से ताल्लुक़ रखते हैं और अपनी बिरादरी के लिए कुछ करने का जज़्बा रखते हैं तो आज ही नीचे दिए गए नंबरों पर कॉल या व्हाट्सऐप पैग़ाम भेजकर अपना नाम और अपने शहर का नाम लिखकर भेजें।
हमारी टीम आपसे राब्ता क़ायम करेगी और आपको तफ़सील से समझाएगी कि आप घर बैठे अपने मोबाइल के ज़रिए इस सामाजिक मुहिम का हिस्सा कैसे बन सकते हैं।
हमें ऐसे नौजवान चाहिए जो सिर्फ़ बातें न करें, बल्कि अमल करके दिखाएँ।
हमें ऐसे कारोबारी चाहिए जो अपनी कामयाबी के साथ बिरादरी के दूसरे नौजवानों के लिए भी रास्ते खोलें।
हमें ऐसे तालीमयाफ़्ता अफ़राद चाहिए जो अपने इल्म और सलाहियत से दूसरों की रहनुमाई करें।
और हमें ऐसे ज़िम्मेदार बुज़ुर्ग चाहिए जो अपनी दुआओं, मशवरों और तजुर्बे से इस मुहिम को मज़बूत बनाएँ।
आइए! मिलकर अपनी बिरादरी को तालीमयाफ़्ता, बा-शऊर, ख़ुशहाल और डिजिटल तौर पर मज़बूत बनाने का अहद करें।
क्योंकि बिरादरी की तरक़्क़ी किसी एक शख़्स की ज़िम्मेदारी नहीं, बल्कि हम सबकी मुश्तरका ज़िम्मेदारी है।
हमारी पहचान, हमारा मिशन और हमारा पैग़ाम
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रकाशित एवं प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल — "मुल्तानी समाज"।
उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।
अपनी तहरीर, ख़बर और कारोबार को क़ौमी पहचान दिलाएँ
अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार (विज्ञापन) क़ौमी सतह पर शाया या प्रसारित करवाना चाहते हैं तो बराए मेहरबानी नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।
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📞 8010884848
आपका एतमाद ही हमारी सबसे बड़ी ताक़त है।
"मुल्तानी समाज"
अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।
आपका
ज़मीर आलम
प्रधान - संपादक
मुल्तानी समाज
राष्ट्रीय समाचार पत्रिका
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