Saturday, January 31, 2026

🕊️ रूह कंपा देने वाली जुदाई — जनाब मोहसिन साहब का इंतकाल, एक पूरा दौर ख़ामोशी से विदा हो गया

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और गहरे अफ़सोस के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तला दी जाती है कि आज दिन इतवार, बा-तारीख़ 01 फ़रवरी 2026 को गांव ताना, जिला शामली (उत्तर प्रदेश) के बुज़ुर्ग, शरीफ़ और नेकदिल इंसान जनाब मोहसिन साहब (उम्र 87 वर्ष) वल्द जनाब नसीबुद्दीन साहब (मरहूम) का बीती रात तक़रीबन 2 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया।

इस दुखद ख़बर ने न सिर्फ़ उनके ख़ानदान बल्कि पूरे इलाके और बिरादरी को ग़मगीन कर दिया है।

मरहूम मोहसिन साहब एक सादा-मिज़ाज, सब्र-ओ-शुक्र वाले और ख़ानदानी रिवायतों को निभाने वाले बुज़ुर्ग थे। अल्लाह ने उन्हें लंबी उम्र अता फ़रमाई, मगर ज़िंदगी के इस सफ़र में उन्होंने एक-एक कर अपने क़रीबी अज़ीज़ों को खोने का ग़म भी झेला।
मरहूम के तीन भाई और एक बहन थे —
शरीफ़ अहमद (मरहूम), डॉक्टर अशरफ़ (मरहूम) और बहन कनीज़ बी मरहूमा (नानौता)
उनकी अहलिया का भी काफ़ी अरसा पहले इंतेकाल हो चुका था।

दर्दनाक पहलू यह भी है कि मरहूम के दोनों बेटे
मोहम्मद साजिद (मरहूम) और मोहम्मद राशिद (मरहूम) — पहले ही इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत हो चुके थे।
आज मरहूम अपने पीछे पोते-पोतियाँ, नाते-नातिनें, और एक भरा-पूरा कुनबा, ख़ानदान और तमाम अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को ग़म और यादों के साए में छोड़कर हमेशा-हमेशा के लिए विदा हो गए।

📿 दुआ है कि अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनके दर्जात बुलंद करे, क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए और तमाम पसमांदा अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।

🕯️ तदफ़ीन की इत्तला:
मरहूम की मय्यत को गांव बुन्दुगढ़ (नानौता), जिला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश में सपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।
तमाम हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएँ और सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

📞 नोट:
मय्यत के सिलसिले में किसी भी तरह की और ज़्यादा मालूमात के लिए मरहूम के भतीजे जनाब आफ़ताब साहब से इस नंबर पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है:
📱 8954654370


🛑 एक ज़रूरी ऐलान — इंतेकाल की ख़बर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर देखने में आता है कि इंतेकाल की ख़बर या तो देर से पहुँचती है या अधूरी जानकारी की वजह से लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस अहम कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से दरख़्वास्त करती है कि इंतेकाल की ख़बर भेजते वक़्त इन बातों का ख़ास ख़याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता — स्थायी निवास और मौजूदा ठिकाना।
3️⃣ तदफ़ीन का सही वक़्त और क़ब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स (एक या दो) के मोबाइल नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतेकाल हुआ हो तो मरहूम की फोटो (मुमकिन हो तो)।
6️⃣ इंतेकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब समझें)।
7️⃣ घर के बाक़ी अहल-ए-ख़ाना — भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वग़ैरह।

👉 इन तमाम जानकारियों से ख़बर मुकम्मल होती है और बिरादरी तक सही, साफ़ और वक़्त पर इत्तला पहुँचती है।


📰 डिस्क्लेमर

पत्रिका में प्रकाशित सभी लेख, समाचार, संपादकीय, विचार, टिप्पणियाँ, प्रेस विज्ञप्तियाँ, विज्ञापन या अन्य सामग्री लेखक, संवाददाता या विज्ञापनदाता के निजी विचार हैं।
इनसे पत्रिका के संपादक, प्रकाशक, प्रबंधन या संस्थान की सहमति या समर्थन आवश्यक रूप से अभिप्रेत नहीं है।

प्रकाशित सामग्री की सत्यता, विश्वसनीयता अथवा किसी भी दावे के लिए संबंधित लेखक या विज्ञापनदाता स्वयं उत्तरदायी होंगे।
पत्रिका एवं उसका प्रबंधन किसी भी प्रकार की कानूनी, सामाजिक या वित्तीय ज़िम्मेदारी से पूर्णतः मुक्त रहेगा।

किसी भी विवाद, शिकायत या न्यायिक कार्यवाही की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।


📌 सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित
पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी को समर्पित
देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज”

✍️ ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट

📞 8010884848
🌐 www.multanisamaj.com
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🕊️ अल्लाह मरहूम को जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए। आमीन।

🌙 मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट, शामली जिला चेयरमैन की सास अम्मा का इंतिक़ाल झिंझाना से ग़मगीन ख़बर, बिरादरी में शोक की लहर

निहायत ही अफ़सोस और रंजो-ग़म के साथ आप सभी बिरादराना हज़रात को इत्तिला दी जाती है कि

आज दिन इतवार, बा-तारीख़ 01 फ़रवरी 2026 को क़स्बा झिंझाना, जिला शामली (उत्तर प्रदेश) में
हज्जन रईसा बी, अहलिया मरहूम हाजी यासीन साहब (ताने वाले), हाल बाशिंदा बस स्टैंड झिंझाना, का
बाद नमाज़-ए-फ़जर क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

मरहूमा के शौहर हाजी यासीन साहब का इंतिक़ाल कई वर्ष पूर्व हो चुका है।
मरहूमा एक नेकसीरत, सब्र-ओ-तहम्मुल और सादगी की मिसाल थीं।

👨‍👩‍👧‍👦 अहल-ए-ख़ाना

मरहूमा के तीन बेटे—

  • जनाब नूर मोहम्मद साहब (मरहूम)
  • जनाब अमीर अहमद साहब (मरहूम)
  • जनाब हुसैन अहमद साहब

तथा चार बेटियाँ—

  • परवीन बी, अहलिया हाजी शकील अहमद साहब (जिला चेयरमैन, मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट – शामली), नया गाँव
  • सितारा बी, अहलिया हाजी वकील अहमद साहब (नया गाँव)
  • सायना बी, अहलिया जनाब निसार साहब (थानाभवन)
  • रुक़साना बी, अहलिया जनाब अरशद अली (गढ़ी पुख़्ता)

मरहूमा अपने पीछे पोते-पोतियाँ, नाते-नातिनों सहित भरा-पूरा कुनबा, ख़ानदान, रिश्तेदार और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को छोड़कर इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत हो गईं।

🕋 जनाज़ा व दफन

मय्यत को ठीक 4 बजे शाम को घर से इमाम साहब वाली मस्जिद में ले जाया जाएगा बाद नमाज़-ए-असर इमाम साहब स्थित कब्रिस्तान में सपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। लिहाज़ा आप हजरात भी जनाजे में शरीक होकर सवाबे दारेन हासिल करें। 
तमाम अहबाब से दुआओं की ख़ास दरख़्वास्त है।

🤲 दुआ

अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फ़िरत फरमाए, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला से आला मुक़ाम अता फरमाए
और तमाम पसमांदगान, ख़ास तौर पर हाजी शकील अहमद साहब व उनके अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।


📌 ज़रूरी नोट

मरहूमा से मुतअल्लिक़ किसी भी क़िस्म की अतिरिक्त मालूमात के लिए
दामाद जनाब अरशद साहब से इस नंबर पर राब्ता किया जा सकता है:
📞 9719838341



दीन से जुड़ी पहचान, डिजिटल दौर की विरासत: ‘मुल्तानी घराना’ — हमारी नस्लों की ज़िंदा तारीख़

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम ! पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार–बढ़ई बिरादरी की पहचान, रिश्तों और नस्लों की हिफ़ाज़त के लिए देश की सबसे बड़ी और ऑल इंडिया काम करने वाली इकलौती तंजीम (रजिस्टर्ड ऑल इंडिया – MSCT) एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी क़दम के साथ सामने आई है—

“मुल्तानी घराना” फैमिली ट्री सॉफ्टवेयर

यह वज़ाहत बेहद ज़रूरी है कि हम किसी से कोई डेटा नहीं माँग रहे; बल्कि अपनी बिरादरी के तमाम बुज़ुर्गों, नौजवानों, माँओं, बहनों और बेटियों से मोहब्बत और एहतराम के साथ यह रिक्वेस्ट कर रहे हैं कि वे अपनी मर्ज़ी और सहमति से अपनी फैमिली की जानकारी “मुल्तानी घराना” पर अपलोड करें—ताकि हमारी बिरादरी का शजरा-ए-नसब एक मुकम्मल, सहेजा हुआ और ज़िंदा दस्तावेज़ बन सके।

क्यों ज़रूरी है ‘मुल्तानी घराना’—आज के नौजवानों के लिए, आने वाली नस्लों के लिए

डिजिटल दौर में पहचान वही टिकती है, जो सहेजी जाती है। फैमिली ट्री सिर्फ़ नामों की सूची नहीं, बल्कि हमारी विरासत, हुनर और रिश्तों की कहानी है—जो पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती है।

इसके बड़े फ़ायदे—जो भविष्य की दिशा तय करेंगे:

  • असल पहचान और नस्ल हमेशा के लिए महफूज़
  • बिछड़े रिश्तों की दोबारा पहचान और जोड़
  • बच्चों और नौजवानों को अपनी तारीख़, विरासत और हुनर से वाक़िफ़ी
  • देश–विदेश में फैली बिरादरी की मज़बूत डिजिटल मौजूदगी
  • तालीमी, समाजी और तरक़्क़ी योजनाओं के लिए ठोस आधार
  • आने वाली पीढ़ियों के लिए गौरव और आत्मसम्मान की सौग़ात

दीन की रोशनी में डिजिटल अमानत

दीन-ए-इस्लाम हमें रिश्ते जोड़ने, नसब की हिफ़ाज़त करने और अमानत निभाने की तालीम देता है। “मुल्तानी घराना” इसी सोच के साथ तैयार किया गया है। यह सॉफ्टवेयर अब पूरी तरह मुकम्मल हो चुका है और इस वक़्त ट्रायल मोड में चल रहा है। इंशाअल्लाह, बहुत जल्द इसे पूरी बिरादरी के लिए ओपन कर दिया जाएगा।

आज उठाया गया क़दम—कल हमारी पहचान बनेगा।
आज जो जानकारी सहेजी जाएगी—वही कल हमारी नस्लों का सहारा बनेगी।

आइए, मिलकर अपने रिश्तों को नाम दें,
अपने घरानों को पहचान दें,
और “मुल्तानी घराना” को सिर्फ़ एक सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि बिरादरी की ज़िंदा तारीख़ बना दें।

अल्लाह इस नेक मिशन को क़बूल फरमाए और पूरी बिरादरी को इससे फायदा पहुँचाए।
आमीन 🤲


ख़ास रिपोर्ट:
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत; देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार–बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका के लिए — ज़मीर आलम

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मुल्तानी घराना: डिजिटल क्रांति के ज़रिये नस्ल, पहचान और विरासत को सहेजने की ऐतिहासिक पहल

आज के इस तेज़ रफ्तार डिजिटल दौर में, जहाँ हमारी नई पीढ़ी मोबाइल और सोशल मीडिया की दुनिया तक सिमटती जा रही है, वहीं दूसरी ओर हमारे खानदान, नस्ल और रिश्तों की असली पहचान धीरे-धीरे धुंधली होती जा रही है।

ऐसे समय में पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी की देश की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी तंजीम
“मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट (रजिस्टर्ड ऑल इंडिया)” — जिसे शॉर्ट में MSCT भी कहा जाता है —
ने बिरादरी के लिए एक ऐतिहासिक डिजिटल क्रांति की शुरुआत की है।

इसी दूरदर्शी सोच का परिणाम है —

“मुल्तानी घराना” फैमिली ट्री वेबसाइट

जो नस्ल, पहचान और विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने की एक मजबूत और अनोखी पहल है।


फैमिली ट्री आखिर है क्या?

फैमिली ट्री महज़ नामों की एक सूची नहीं, बल्कि
👉 हमारे बुज़ुर्गों की पहचान,
👉 रिश्तों की सही और प्रामाणिक कड़ियाँ,
👉 और आने वाली नस्लों के लिए नसब का अमिट रिकॉर्ड होता है।

जिस तरह किसी पेड़ की जड़ मज़बूत हो तो उसकी डालियाँ और पत्तियाँ हरी-भरी रहती हैं,
उसी तरह जब हमें अपनी जड़ों की सही जानकारी होती है,
तो हमारी सामाजिक और पारिवारिक पहचान भी मज़बूत बनती है।


🏠 मुल्तानी घराना क्यों ज़रूरी है?

जब आप मुल्तानी घराना डॉट कॉम पर अपनी फैमिली की जानकारी दर्ज करते हैं, तो आप:

  • अपनी नसब और खानदान को हमेशा के लिए सुरक्षित करते हैं
  • बिछड़े और दूर के रिश्तेदारों को फिर से जोड़ने में मदद करते हैं
  • नई पीढ़ी को यह एहसास दिलाते हैं कि हम कौन हैं और कहाँ से आए हैं
  • पूरी मुल्तानी बिरादरी को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एकजुट करते हैं

यह वेबसाइट सिर्फ आज के लिए नहीं, बल्कि
👉 आने वाली नस्लों के लिए एक अमानत है।


📲 क्या-क्या जानकारी देनी होती है?

इस प्रक्रिया को बेहद आसान और सरल रखा गया है।
घबराने की कोई ज़रूरत नहीं।

आपको केवल यह जानकारी देनी होती है:

  • परिवार के बुज़ुर्गों का नाम
  • उनके बेटे-बेटियाँ
  • शादियाँ और आगे की पीढ़ियाँ
  • मौजूदा शहर या गांव (यदि चाहें तो)

इतनी-सी जानकारी से आपका पूरा खानदानी पेड़ तैयार हो जाता है।


🤝 आपकी एक एंट्री, पूरी बिरादरी की ताक़त

सोचिए, अगर बिरादरी के हर घर से सिर्फ एक व्यक्ति भी
अपनी फैमिली डिटेल दर्ज कर दे,
तो मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी का
कितना विशाल, मजबूत और ऐतिहासिक रिकॉर्ड तैयार हो सकता है।

यह काम किसी एक व्यक्ति या संस्था का नहीं,
👉 पूरी बिरादरी की सामूहिक ज़िम्मेदारी है।


🕌 दीन और तहज़ीब से जुड़ी सोच

इस्लाम में नसब को जानना, रिश्तों को जोड़ना और
सिलह-ए-रहमी को कायम रखना बेहद अहम माना गया है।
मुल्तानी घराना उसी पाक सोच को
डिजिटल दौर में आगे बढ़ाने की एक ईमानदार कोशिश है—

रिश्तों को जोड़ना, विरासत को बचाना।


✍️ आज ही जुड़िए, कल की नस्लों के लिए

अगर आप चाहते हैं कि:

  • आपकी पहचान वक्त के साथ खो न जाए
  • आपकी आने वाली नस्ल अपने बुज़ुर्गों और खानदान को जाने
  • और मुल्तानी बिरादरी एक मजबूत डिजिटल ताक़त बनकर उभरे

तो आज ही अपनी फैमिली की जानकारी
👉 मुल्तानी घराना डॉट कॉम पर दर्ज कराइए।

आज की गई छोटी-सी कोशिश,
कल की पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ा तोहफ़ा बन सकती है।


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🕯️ निहायत रंज-ओ-ग़म के साथ: अनीस अहमद साहब का इन्तेक़ाल — झिंझाना में शोक की लहर

निहायत ही अफ़सोस और गहरे रंज के साथ तमाम बिरादराना हजरात को यह दुःखद इत्तला दी जाती है कि आज बरोज़ शनिचर, बा-तारीख़ 31 जनवरी 2026, तक़रीबन सुबह 11 बजे मोहल्ला तलाही, झिंझाना, जनपद शामली (उत्तर प्रदेश) निवासी अनीस अहमद साहब (उम्र लगभग 65 वर्ष) वल्द जनाब अब्दुल ग़फूर साहब मरहूम का क़ज़ा-ए-ईलाही से इन्तेक़ाल हो गया। इस ख़बर से इलाके़ में ग़म और सन्नाटे की फ़िज़ा छा गई है।

मरहूम अनीस अहमद साहब नेक-दिल, सादा-मिज़ाज और मिलनसार शख़्सियत के मालिक थे। वे कुल छह भाइयों और तीन बहनों में थे। भाइयों में सबसे बड़े जनाब अमीर अहमद साहब (मरहूम) के अलावा मोहम्मद इरफ़ान, मोहम्मद फ़ुरक़ान, मोहम्मद शमशुद्दीन और मोहम्मद इंतज़ार शामिल हैं। बहनों में सबसे बड़ी फ़रज़ाना बी (मरहूमा) के साथ बेग़म बी और रिहाना बी हैं।

मरहूम अपने पीछे अपनी अहलिया (जिनका मायका देवबंद, जनपद सहारनपुर में है), दो बेटे — मोहम्मद सूफ़ियान और मोहम्मद आरिफ़, तथा एक बेटी — हीना (निवासी चंडीगढ़) सहित भरा-पूरा कुनबा, रिश्तेदार और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब छोड़ गए हैं। उनकी कमी परिवार और समाज के लिए एक ऐसा ख़ला है जिसे भर पाना आसान नहीं।

नमाज़-ए-जनाज़ा व तदफ़ीन:
मिली जानकारी के मुताबिक मरहूम की मय्यत को बाद नमाज़-ए-मग़रिब, इमाम साहब वाले क़ब्रिस्तान में सपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम अहबाब से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फ़रमाकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

इत्तिला के लिए संपर्क:
मय्यत के सिलसिले में ज़्यादा मालूमात के लिए मरहूम के भाई जनाब मोहम्मद हाशिम साहब से मोबाइल नंबर 7906309363 पर राब्ता किया जा सकता है।

अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।


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दुआ है कि अल्लाह तआला मरहूम को आला मक़ाम अता फ़रमाए और ग़मजदा परिवार को हिम्मत-ओ-हौसला बख़्शे।

Friday, January 30, 2026

निहायत ही गमगीन ख़बर | एक और चिराग़ बुझ गया

निहायत ही रंजो-ग़म के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इतल्ला दी जाती है कि बीती रात बरोज़ जुमाआं, बा-तारीख़ 30 जनवरी 2026, रात तक़रीबन 7 बजे,

जनाब मिस्त्री शमशाद वल्द जनाब इशाक साहब, साकिन गांव सिसाना, ज़िला बागपत (उत्तर प्रदेश), उम्र तक़रीबन 60 साल, क़ज़ा-ए-इलाही से इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत फ़रमा गए।

मरहूम लगभग एक माह पहले सिद्धपुर, गुजरात में साइड पर काम करते हुए हादसे का शिकार हो गए थे, जिसमें उनके सिर में गहरी चोट आई। हालात नाज़ुक होने पर दिमाग़ का ऑपरेशन कराना पड़ा। ऑपरेशन के बाद से वह पैरालाइज हो गए थे और लगातार कोमा में थे। तमाम कोशिशों, इलाज और दुआओं के बावजूद आख़िरकार अल्लाह की मर्ज़ी के आगे सर झुकाना पड़ा।


मरहूम की मय्यत को आज दिन शनिचर बा-तारीख़ 31 जनवरी 2026 को सुबह 11 बजे सपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। लिहाज़ा तमाम अहले-ईमान व अज़ीज़ो-अक़ारिब से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फिरत फ़रमाएँ और सवाबे-दारैन हासिल करें , यह ख़बर न सिर्फ़ उनके घर वालों बल्कि पूरी बिरादरी के लिए दिल को तोड़ देने वाली है। मिस्त्री शमशाद साहब एक मेहनती, शरीफ़ और नेक दिल इंसान थे, जिनकी कमी हमेशा महसूस की जाएगी।

अल्लाह रब्बुल आलमीन मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ीचों में से एक बाग़ बनाए, उनके दर्जात बुलंद फ़रमाए और तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए।
आमीन, सुम्मा आमीन।


📞 ज़रूरी सूचना

मैय्यत और दफीन से मुतल्लिक़ ज़्यादा मालूमात के लिए आप
जनाब इरफ़ान ख़ान साहब
मोबाइल नंबर: 8218611245
पर राब्ता क़ायम कर सकते हैं।


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अक्सर देखने में आता है कि किसी अज़ीज़ के इंतक़ाल की ख़बर या तो देर से पहुँचती है या अधूरी होती है, जिस वजह से लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि जब भी इंतेक़ाल की ख़बर भेजें तो इन बातों का ख़ास ख़्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता (स्थायी निवास और वर्तमान ठिकाना)।
3️⃣ दफीन का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स (एक-दो) के मोबाइल नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतक़ाल हुआ है तो मरहूम का फोटो भी भेजें।
6️⃣ इंतक़ाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम – जैसे भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वग़ैरह।

👉 इन तमाम जानकारियों से ख़बर मुकम्मल होती है और बिरादरी के लोगों तक सही व वक़्त पर जानकारी पहुँच पाती है।


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अल्लाह तआला मरहूम को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए। आमीन।

“मुल्तानी घराना” — मुल्तानी समाज की पहचान, विरासत और कारोबार को डिजिटल बुलंदी देने वाला क्रांतिकारी मंच

मुल्तानी समाज सदियों से हुनर, मेहनत और ईमानदारी की मिसाल रहा है। पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी ने हमेशा अपने हाथों की कारीगरी से न सिर्फ़ रोज़गार पैदा किया, बल्कि समाज को एक नई दिशा भी दी। इसी सोच, इसी जज़्बे और इसी दूरदर्शिता के साथ देश की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी तंजीम “मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट (रजिस्टर्ड ऑल इंडिया)” ने एक ऐतिहासिक पहल की है — “मुल्तानी घराना”

मुल्तानी घराना : एक डिजिटल शजरा, एक साझा पहचान

“मुल्तानी घराना” केवल एक वेबसाइट नहीं, बल्कि मुल्तानी बिरादरी का ऑनलाइन शजरा (फैमिली ट्री) है, जो हमारी नस्लों, परिवारों और विरासत को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सहेजने का काम करेगा। यह ऐसा मंच है, जहाँ मुल्तानी समाज का अतीत, वर्तमान और भविष्य एक साथ जुड़ता है।

इस प्लेटफॉर्म को तैयार करने के लिए लाखों रुपये खर्च किए गए हैं, ताकि यह वेबसाइट तकनीकी रूप से मजबूत, आकर्षक और विश्वसनीय बने। उद्देश्य साफ़ है — हजारों नहीं, बल्कि लाखों और करोड़ों लोगों तक मुल्तानी समाज की पहचान को पहुँचाना।

कारोबार को मिलेगी नई उड़ान

“मुल्तानी घराना” का एक अहम मक़सद मुल्तानी समाज के बिज़नेसमैन भाइयों और उद्योगपतियों को एक साझा डिजिटल मंच देना है। इस वेबसाइट के ज़रिए समाज के लोग अपने-अपने कारोबार का प्रचार-प्रसार कर सकेंगे।

आज के डिजिटल दौर में ऑनलाइन पहचान ही तरक्की की कुंजी है। ऐसे में “मुल्तानी घराना” पर विज्ञापन देना, अपने बिज़नेस को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का बेहतरीन अवसर है। चाहे छोटा कारोबार हो या बड़ा उद्योग — यह मंच हर उस शख़्स के लिए है, जो अपने काम को आगे बढ़ाना चाहता है।

जल्द होगा वेबसाइट का पब्लिक लॉन्च

“मुल्तानी घराना” वेबसाइट को बहुत ही जल्द पब्लिक किया जा रहा है। लॉन्च के साथ ही यह प्लेटफॉर्म समाज के भीतर आपसी जुड़ाव, पहचान और आर्थिक मजबूती का बड़ा माध्यम बनेगा।

यदि आप भी चाहते हैं कि आपका कारोबार ऊँची उड़ान भरे और लाखों लोगों तक पहुँचे, तो आज ही “मुल्तानी घराना” पर अपना विज्ञापन बुक कराएं।

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मुल्तानी समाज : एक समर्पित आवाज़

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” लगातार समाज की आवाज़ को बुलंद कर रही है।

यह विशेष रिपोर्ट समाज के जज़्बे, एकता और भविष्य की उम्मीदों को समर्पित है —
ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट

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मुल्तानी घराना — जहाँ पहचान भी है, विरासत भी और तरक्की का रास्ता भी।

Thursday, January 29, 2026

गमगीन ख़बर | बिरादरी के दो अज़ीज़ अफ़राद के इंतेकाल की दुखद इत्तिला

निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि बीती रात, दिन जुमेरात बा-तारीख़ 29 जनवरी 2026, मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी से ताल्लुक़ रखने वाले दो अज़ीज़ अफ़राद का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया। यह दुखद ख़बरें हमें सोशल मीडिया के ज़रिये हासिल हुईं, जिनसे पूरी बिरादरी शोक में डूब गई है।

पहली दुखद ख़बर
राजस्थान के नागौर शहर से ताल्लुक़ रखने वाले
जनाब शम्सुद्दीन उर्फ़ सम्मु साहब, वल्द मरहूम जनाब अब्दुल्लाह जी (पोल वाले) का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया।
मरहूम नागौर की किदवई कॉलोनी, लोहार पूरा के रहने वाले थे। उनके इंतेकाल से न सिर्फ़ उनके अहल-ए-ख़ाना बल्कि पूरी बिरादरी को गहरा सदमा पहुँचा है।

दूसरी दुखद ख़बर
सहारनपुर से यह रंज-ओ-ग़म भरी इत्तिला मिली कि
मरहूम शौकत अली साहब की अहलिया, ख़ैरुन्निसा बी, और आमिर मिर्ज़ा की अम्मीजान का भी बीती रात, दिन जुमेरात बा-तारीख़ 29 जनवरी 2026 को क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया।
मरहूमा का निवास 62 फूटा रोड, निकट जनता पैलेस, सहारनपुर, उत्तर प्रदेश में था।

अल्लाह तआला दोनों मरहूमीन की मग़फ़िरत फरमाए, उनकी क़ब्रों को जन्नत के बाग़ीचों में से एक बाग़ बनाए, और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।


🕊️ एक ज़रूरी ऐलान | इंतेकाल की ख़बर भेजने के लिए अहम् हिदायतें

अक्सर यह देखने में आता है कि किसी अज़ीज़ के इंतेकाल की ख़बर बिरादरी तक या तो देर से पहुँचती है या अधूरी रहती है, जिसकी वजह से कई लोग जनाज़े या ताज़ियत में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि जब भी इंतेकाल की कोई ख़बर भेजी जाए, तो इन बातों का ख़ास ख़याल रखा जाए:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता — मूल निवास और मौजूदा रहाइश।
3️⃣ दफ़्न का सही वक़्त और क़ब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स (एक-दो) के फ़ोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतेकाल हुआ हो तो मरहूम की साफ़ फोटो।
6️⃣ इंतेकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम — जैसे वालिदैन, भाई-बहन, औलाद वग़ैरह।

👉 इन तमाम जानकारियों से ख़बर मुकम्मल होती है और बिरादरी के लोगों तक सही व वक़्त पर मालूमात पहुँच पाती हैं।


📰 डिस्क्लेमर

पत्रिका में प्रकाशित किसी भी प्रकार का लेख, समाचार, संपादकीय, विचार, टिप्पणी, प्रेस विज्ञप्ति, विज्ञापन या अन्य सामग्री लेखक, संवाददाता या विज्ञापनदाता के निजी विचार होते हैं।
इनसे पत्रिका के संपादक, प्रकाशक या प्रबंधन की सहमति आवश्यक रूप से अभिप्रेत नहीं है।

प्रकाशित सामग्री की सत्यता, विश्वसनीयता अथवा किसी दावे की ज़िम्मेदारी संबंधित लेखक या विज्ञापनदाता की होगी। पत्रिका व प्रबंधन किसी भी प्रकार की कानूनी, सामाजिक या वित्तीय ज़िम्मेदारी से पूर्णतः मुक्त रहेंगे।

किसी भी विवाद, शिकायत या न्यायिक कार्यवाही की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित,
पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका
“मुल्तानी समाज” के लिए
ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट

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अल्लाह तआला हम सबको सब्र और समझ अता फरमाए। आमीन।

इंतकाल की दुखभरी सूचना: मुहम्मद इमरान साहब इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत हो गए

निहायत ही अफ़सोस और गहरे रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार व बढ़ई बिरादरी को यह इत्तला दी जाती है कि आज दिन जुमेरात, 29 जनवरी 2026 को

मुहम्मद इमरान वल्द हाजी जमील अहमद साहब (गोटके वालों) का तक़रीबन साढ़े 12 बजे दिन में अपने आवास मोहल्ला बूढ़ा बाबू, कस्बा सरधना, ज़िला मेरठ, उत्तर प्रदेश में क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया।

मरहूम के इंतकाल की खबर से पूरे इलाके और बिरादरी में शोक की लहर दौड़ गई। अल्लाह तआला ने उन्हें इस फ़ानी दुनिया से उठाकर अपने पास बुला लिया। मरहूम बेहद नेक, मिलनसार और सादगी पसंद इंसान थे, जिनकी कमी हमेशा महसूस की जाती रहेगी।

मरहूम दो भाइयों में थे, जिनमें उनके भाई मुहम्मद यूनुस साहब हैं। इसके अलावा उनकी चार बहनें हैं—
सईदा बी, फ़हमीदा बी, इमराना बी और रिहाना बी
मरहूम अपने पीछे अपनी अहलिया (पत्नी) और एक बेटी समेत भरा-पूरा कुनबा, खानदान, रिश्तेदार और तमाम अज़ीज़-ओ-अक़ारीब को ग़मज़दा छोड़कर इस दुनिया से रुख़्सत हो गए।

अल्लाह तआला मरहूम की मग़फिरत फ़रमाए, उनके दर्जात बुलंद करे और तमाम घर वालों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।

मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा बाद नमाज़ अदा की जाएगी, जिसके बाद उन्हें
बिनौली रोड, अलकरीम होटल के बराबर स्थित कब्रिस्तान में सपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।
तमाम हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फ़रमाकर सवाब-ए-दारैन हासिल करें।


ज़रूरी सूचना

मय्यत के सिलसिले में और ज़्यादा मालूमात के लिए मरहूम के भतीजे
जनाब मिर्ज़ा महताब
मोबाइल नंबर: 8534021401
पर राब्ता किया जा सकता है।


एक ज़रूरी ऐलान — इंतकाल की खबर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर देखने में आता है कि किसी अज़ीज़ के इंतकाल की खबर बिरादरी तक देर से या अधूरी जानकारी के साथ पहुँचती है, जिससे कई लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादरान-ए-इस्लाम से अदब के साथ गुज़ारिश करती है कि जब भी इंतकाल की खबर भेजें, तो निम्नलिखित बातों का ख़ास ख़याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता (मूल निवास व वर्तमान निवास)।
3️⃣ दफ़न का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार एक-दो अफ़राद के मोबाइल नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतकाल हुआ हो तो मरहूम की फोटो।
6️⃣ इंतकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के अन्य सदस्यों के नाम—भाई, बहन, वालिदैन, औलाद आदि।

👉 इन तमाम जानकारियों से खबर मुकम्मल होती है और बिरादरी के लोगों तक सही वक़्त पर सही सूचना पहुँच पाती है।


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देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित
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कस्बा सरधना, ज़िला मेरठ, उत्तर प्रदेश से
मिर्ज़ा महताब की खास रिपोर्ट

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Wednesday, January 28, 2026

✨ सुलह की रौशनी: बिरादरी के दो पुराने तनाज़े आपसी समझ से हल ✨

अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू, अल्हम्दुलिल्लाह! बिरादरी के लिए एक बेहद सुकून और इत्मीनान देने वाली खबर सामने आई है। आप सबकी दुआओं और नेक नीयत कोशिशों की बदौलत बीते कल दो ऐसे तनाज़े आपसी सुलह और समझदारी से हल हो गए, जो वर्षों से लंबित चले आ रहे थे। इन सुलहों के बाद चार परिवारों ने राहत की सांस ली और आपसी रिश्तों में फिर से भरोसा और अपनापन कायम हुआ।

हल होने वाले दोनों मामले इस प्रकार रहे—

  1. शाहपुर बनाम सरधना
  2. मुजफ्फरनगर बनाम मुजफ्फरनगर

इन संवेदनशील और पुराने मामलों को सुलझाने में मुजफ्फरनगर की टीम की मेहनत, सूझबूझ और खैरख्वाही काबिले-तारीफ रही। सुलह की इस पाक कोशिश में जिन जिम्मेदार और समझदार साथियों ने अहम भूमिका निभाई, उनमें—

मुजफ्फरनगर से
हाजी अलीमुद्दीन साहब, अनीस अहमद साहब, जुल्फ़कार साहब, सलाहुद्दीन साहब, इदरीस साहब, हाजी ज़ाहिद साहब

सरधना से
मिर्ज़ा मोहम्मद इस्माइल साहब, हाजी बशीर अहमद साहब, मोहम्मद महताब साहब

शाहपुर से
जब्बार साहब एवं उनके साथी

मुजफ्फरनगर से
इसरार साहब, अहसान साहब सहित अनेक खैरख्वाह साथी शामिल रहे।

ये दोनों मामले सालों से लंबित चले आ रहे थे, लेकिन अल्लाह तआला के फ़ज़्ल से आपसी बातचीत, सब्र और समझदारी के ज़रिये इन्हें सुलह की मंज़िल तक पहुँचाया गया। यह पहल न केवल संबंधित परिवारों के लिए राहत लेकर आई, बल्कि पूरी बिरादरी के लिए एक मिसाल बनकर सामने आई कि अमन, मोहब्बत और भाईचारे से हर विवाद का हल संभव है।

दुआ है कि
अल्लाह तआला इस सुलह को कायम रखे, इसे खैर और बरकत का ज़रिया बनाए और बिरादरी में इत्तेहाद व आपसी मोहब्बत हमेशा क़ायम रखे। आमीन।


✍️ नवेद मिर्ज़ा की खास रिपोर्ट
(सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत)
दिल्ली से प्रकाशित,
मुस्लिम मुल्तानी लोहार–बढ़ई बिरादरी को समर्पित
देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए

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Monday, January 26, 2026

राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस पर एमएससीटी की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं

मैं मोहम्मद आलम, पूर्व-राष्ट्रीय चेयरमैन, MSCT (पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी की देश की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी तंजीम ) की और से गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर देश के 145 करोड़ समस्त भारतवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई प्रेषित करता हूँ।

26 जनवरी 1950 का दिन भारत के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। इसी दिन भारत में संविधान को लागू किया गया था। संविधान की रक्षा करना न केवल सरकार का बल्कि प्रत्येक भारतवासी का प्रथम कर्तव्य है। संविधान हमें समानता, स्वतंत्रता और न्याय का अधिकार देता है। हमें बिना किसी राजनीतिक दबाव के संविधान के मूल्यों पर चलते हुए देश और समाज के हित में कार्य करना चाहिए।

डॉ. भीमराव अंबेडकर के आदर्शों पर आधारित भारतीय संविधान, लाखों भारतीयों के सपनों की बुनियाद है। हमें अपने संविधान की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए और इसके सिद्धांतों को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए, ताकि समाज में शांति, सौहार्द और समानता बनी रहे।

भारतीय संविधान का इतिहास भी अत्यंत गौरवशाली है। ब्रिटिश शासन के दौरान 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट से लेकर 1947 के स्वतंत्रता अधिनियम तक संवैधानिक विकास की लंबी प्रक्रिया चली। आज़ादी के बाद संविधान सभा का गठन हुआ और 31 दिसंबर 1947 को इसकी पहली बैठक आयोजित की गई। कुल 299 सदस्यों वाली संविधान सभा ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में भारत का संविधान तैयार किया, जिसे 26 जनवरी 1950 को पूर्ण रूप से लागू किया गया।

मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई समाज के नाम से यह भी उल्लेखनीय है कि हमारे समाज के अनेक साथी विभिन्न क्षेत्रों में अपनी योग्यता का प्रदर्शन कर रहे हैं। जिन लोगों ने Graduation और Post Graduation जैसी उच्च शिक्षा प्राप्त की है, वे समाज को संगठित और शिक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं।

मेरा समाज के सभी जागरूक साथियों से निवेदन है कि वे बिरादरी के नवजवानों पर विशेष ध्यान दें। सबसे पहले शिक्षा को प्राथमिकता दें और उसके बाद आर्थिक व सामाजिक आवश्यकताओं पर कार्य करें।

इसी उद्देश्य के साथ मोहम्मद आलम  ने भी समाज सेवा का बीड़ा उठाया है और वे विभिन्न क्षेत्रों में MSCT के बैनर तले लगातार प्रयासरत हैं। वर्ष 2011 से अब तक MSCT समाज के उत्थान, स्वरोज़गार और आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

आइए, इस गणतंत्र दिवस पर हम सभी यह संकल्प लें कि संविधान का सम्मान करेंगे, शिक्षा को बढ़ावा देंगे और एक सशक्त, संगठित एवं आत्मनिर्भर समाज के निर्माण में अपना योगदान देंगे।

जय हिंद 🇮🇳
जय संविधान

मोहम्मद आलम 
पूर्व-राष्ट्रीय चेयरमैन
MSCT मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट (रजि0 ) ऑल इंडिया 



Sunday, January 25, 2026

🇮🇳 मुस्लिम मुल्तानी लोहार बिरादरी ने मनाया गणतंत्र दिवस, ध्वजारोहण समारोह एवं समाजहित बैठक का गरिमामय आयोजन

मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश। 26 जनवरी के पावन और राष्ट्रीय महत्व के अवसर पर मुस्लिम मुल्तानी लोहार बिरादरी से जुड़ी मुल्तानी मिर्ज़ा वेलफेयर सोसायटी के ज़िलाध्यक्ष मिर्ज़ा हाजी इदरीश के आवास पर ध्वजारोहण समारोह एवं समाजहित बैठक का शालीन और गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः राष्ट्रध्वज फहराकर की गई, जहां उपस्थित सभी लोगों ने देश की एकता, अखंडता और संविधान के प्रति अपनी निष्ठा प्रकट की।

ध्वजारोहण के पश्चात बैठक में समाज के हित से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई। बताया गया कि SIR में किसी भी प्रकार के छूटे हुए अथवा गलत नामों को दुरुस्त कराने के उद्देश्य से शीघ्र ही एक विशेष कैंप का आयोजन किया जाएगा, जिससे समाज के जरूरतमंद लोगों को सीधा लाभ मिल सकेगा। इस पहल को उपस्थित जनसमूह ने अत्यंत सराहना के साथ स्वीकार किया।

बैठक की अध्यक्षता सोसायटी के अध्यक्ष हाजी अलीमुद्दीन साहब ने की, जबकि कार्यक्रम का सुचारु संचालन हाजी अनीस साहब ने किया। इस अवसर पर हाजी ज़ाहिद ज़ुल्फ़िकार, अहमद सलाहुद्दीन, अहमद नौशाद, अहमद शहज़ाद, अहमद परवेज़, नज्म शुऐब एवं डॉ. आक़िब आसिफ ने अपने विचार रखते हुए मुस्लिम मुल्तानी लोहार बिरादरी की सामाजिक एकता, जागरूकता और संगठनात्मक मजबूती पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में उपरोक्त सभी गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

यह आयोजन न केवल गणतंत्र दिवस के मूल्यों को सहेजने वाला रहा, बल्कि मुस्लिम मुल्तानी लोहार बिरादरी के सामाजिक हित में उठाए गए सकारात्मक कदमों के कारण भी विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा।


हाजी जाहिद की खास रिपोर्ट
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Saturday, January 24, 2026

मोहम्मद यामीन साहब का इंतेकाल ,ग़म की इस घड़ी में पूरा मुल्तानी समाज शरीक-ए-दुख़ है।

निहायत ही ग़म और रंज के साथ तमाम बिरादराने इस्लाम को यह इत्तला दी जाती है कि

मोहम्मद यामीन साहब (उम्र 63 वर्ष) वल्द मरहूम जनाब नज़ीर साहब,
बाशिंदा गांव बसी, ज़िला बागपत, उत्तर प्रदेश तथा हाल बाशिंदा ई-ब्लॉक, जहांगीरपुरी, दिल्ली का
इतवार, 25 जनवरी 2026 को अल-सुबह क़ज़ा-ए-ईलाही से इंतेकाल हो गया।

मरहूम मोहम्मद यामीन साहब कुल तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। उनके बड़े भाई मोहम्मद यूसुफ साहब और मोहम्मद यासीन साहब सहित वालिदैन का भी पहले ही इंतेकाल हो चुका है।

मरहूम अपने पीछे अपनी अहलिया, चार बेटियां
रुख़सार, इशरत, रुकैय्या, फरहीन
और एक बेटा मोहम्मद समीर समेत भरा-पूरा कुनबा, खानदान, रिश्तेदार और अज़ीज़-ओ-अकारिब को ग़मगीन छोड़कर इस फ़ानी दुनिया से हमेशा-हमेशा के लिए रुख़्सत हो गए।

अल्लाह तआला से दुआ है कि वह मरहूम की मग़फिरत फरमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए और तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।
आमीन।

नमाज़-ए-जनाज़ा बाद नमाज़-ए-ज़ोहर,
जहांगीरपुरी, दिल्ली में अदा की जाएगी और वहीं मय्यत को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फरमाकर सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

मय्यत के सिलसिले में किसी भी तरह की मालूमात के लिए
मरहूम के भांजे जनाब दिलशाद मुल्तानी जी
मोबाइल नंबर: 9760383915
पर राब्ता किया जा सकता है।


एक ज़रूरी ऐलान

(इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम हिदायतें)

अक्सर देखने में आता है कि किसी अज़ीज़ के इंतकाल की खबर देर से या अधूरी पहुंचती है, जिससे बिरादरी के लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि इंतेकाल की खबर भेजते वक़्त इन बातों का ख़ास ख़्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता (मूल निवास और वर्तमान निवास)।
3️⃣ दफीने का सही वक़्त और क़ब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार शख़्स के एक-दो मोबाइल नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतेकाल हुआ हो तो मरहूम की फोटो।
6️⃣ इंतेकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम – जैसे भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वगैरह।

👉 इन तमाम जानकारियों से खबर मुकम्मल होगी और बिरादरी तक सही वक़्त पर सही जानकारी पहुंचेगी।


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ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट

दुआओं की दरख़्वास्त के साथ

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Friday, January 23, 2026

नंदनवन कॉलोनी इंदौर से लापता मोहम्मद अहमद मुल्तानी की तलाश, परिजनों की अपील – सहयोग करें

ब्लॉग रिपोर्ट | मुल्तानी समाज नंदनवन कॉलोनी इंदौर , मध्यप्रदेश निवासी मोहम्मद अहमद मुल्तानी दिन जुमेरात बा - तारीख़ 22 जनवरी 2026 की रात से अपने घर से कहीं चले गए हैं। परिजनों और शुभचिंतकों के अनुसार अब तक उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है, जिससे परिवार गहरी चिंता में है।

परिवार की ओर से तमाम भाइयों, अकीदतमंदों और क्षेत्रवासियों से अदब के साथ गुज़ारिश की जाती है कि यदि किसी भाई को मोहम्मद अहमद मुल्तानी के बारे में कोई भी जानकारी प्राप्त हो, तो कृपया तत्काल मोबाइल नंबर: 7987164027 पर संपर्क कर सहयोग करें। आपकी एक छोटी-सी सूचना किसी परिवार की बड़ी चिंता को दूर कर सकती है।

यह सूचना सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार/बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए
अब्दुल कादिर मुल्तानी की ख़ास रिपोर्ट के रूप में प्रस्तुत की जा रही है।

हम दुआगो हैं कि मोहम्मद अहमद जल्द से जल्द सकुशल अपने घर लौटें। सभी से दरख़्वास्त है कि इस सूचना को अधिक से अधिक साझा करें, ताकि तलाश में तेज़ी आ सके।

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Wednesday, January 21, 2026

🖤 बेहद ग़मगीन इत्तिला: जीशान मिर्ज़ा साहब का इंतेकाल — दुआओं की दरख़्वास्त 🖤

बेइंतहा अफ़सोस और गहरे रंजो-ग़म के साथ यह दिल को झकझोर देने वाली ख़बर तमाम अहल-ए-बिरादरी तक पहुंचाई जाती है कि बीती रात, दिन बुध, बा-तारीख़ 21 जनवरी 2026, जीशान मिर्ज़ा (उम्र 55 वर्ष) वल्द जनाब सुलेमान साहब (मरहूम), साकिन मोहल्ला पक्का बाग, सहारनपुर, उत्तर प्रदेश का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया।

मरहूम जीशान मिर्ज़ा अपने पीछे चार बहनें, एक छोटा भाई सूफ़ियान, अपनी अहलिया, दो बेटे और एक बेटी सहित तमाम कुनबा, रिश्तेदार और अज़ीज़-ओ-अक़ारीब को ग़मज़दा छोड़कर इस फ़ानी दुनिया से हमेशा के लिए रुख़्सत हो गए। वह नेकदिल, कम-गो और अपनी बात को सोच-समझकर कहने वाले सादा-मिज़ाज इंसान थे। उनके वालिद, वालिदा और एक जवान बहन का इंतेकाल पहले ही हो चुका है।

मरहूम की मय्यत आज दिन जुमेरात, 22 जनवरी 2026, नमाज़-ए-ज़ोहर के बाद सुपुर्द-ए-ख़ाक की जाएगी। तमाम अहल-ए-बिरादरी से अदबन गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर सवाब-ए-दारैन हासिल करें और मग़फ़िरत की दुआओं में मरहूम को याद रखें।

जीशान साहब रुड़की की मशहूर व मारूफ़ शख़्सियत महबूब नाल-बंद वालों के दामाद, महमूद साहब के बहनोई तथा मंज़ूर अहमद (गढ़ी पुख़्ता वाले)—हाल बाशिंदा यमुना विहार, दिल्ली—के साले थे। उनकी अचानक जुदाई से तमाम घराने और बिरादरी में शोक की लहर दौड़ गई है।


🕊️ ज़रूरी ऐलान — इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर देखा गया है कि इंतेकाल की खबर देर से या अधूरी पहुंचने के कारण लोग जनाज़े तक नहीं पहुंच पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने-इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि खबर भेजते वक़्त इन बातों का ख़ास ख़याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता — स्थायी व वर्तमान निवास।
3️⃣ दफ़्न का सही वक़्त और क़ब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स (एक-दो) के फ़ोन नंबर।
5️⃣ मर्द के इंतेकाल की सूरत में मरहूम की फोटो।
6️⃣ इंतेकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम — भाई, बहन, माँ-बाप, औलाद वगैरह।

👉 इन तमाम जानकारियों से खबर मुकम्मल होती है और बिरादरी तक सही वक़्त पर सही जानकारी पहुंचती है।


📰 डिस्क्लेमर

पत्रिका में प्रकाशित लेख, समाचार, विचार, टिप्पणी, विज्ञापन या अन्य सामग्री लेखक/संवाददाता/विज्ञापनदाता के अपने विचार हैं। इनसे संपादक, प्रकाशक या प्रबंधन की सहमति आवश्यक नहीं मानी जाएगी।
प्रकाशित सामग्री की सत्यता व दावों की ज़िम्मेदारी संबंधित लेखक/विज्ञापनदाता की होगी। किसी भी विवाद की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।


दुआ है कि अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए, दर्जात बुलंद करे और अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।

“मुल्तानी समाज” — सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, दिल्ली से प्रकाशित
ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट

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हाजी रिज़वान साहब का इंतेकाल — मुल्तानी बिरादरी के लिए एक गहरा सदमा

निहायत ही अफ़सोस और गहरे रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि

हाजी रिज़वान साहब वल्द हाजी खलीक साहब मरहूम (उम्र लगभग 71 वर्ष)
का आज दिन जुमेरात, 22 जनवरी 2026 को बीती रात तक़रीबन 2 बजे
मोहल्ला इकरामपुरा, क़स्बा कैराना, ज़िला शामली (उत्तर प्रदेश) में क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

मरहूम पाँच भाइयों में सबसे बड़े थे। उनके छोटे भाई
हाजी सत्तार साहब, हाजी ग़फ़्फ़ार साहब, मोहम्मद अदनान साहब हैं, जबकि
मरहूम इस्लाम साहब पहले ही इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत हो चुके हैं।
तीन बहनों में सबसे बड़ी मरहूमा रुक़ैय्या बी थीं, जबकि आयशा बी और ज़ुबैदा बी अल्लाह के फ़ज़्ल से मौजूद हैं।

मरहूम हाजी रिज़वान साहब अपने अख़लाक़, सादगी और नेकदिल शख़्सियत के लिए जाने जाते थे। कम बोलना, सिर्फ़ ज़रूरी और मुद्दे की बात करना, अपनी बात को बेहद संजीदगी से पेश करना—यह उनकी पहचान थी। रोज़ा-नमाज़ के पाबंद, मेहमाननवाज़ और जिंदा-दिल इंसान के तौर पर उन्होंने हर दिल में अपनी जगह बनाई। पल भर में अपनों जैसा एहसास दिला देना उनकी खास ख़ूबी थी।

मरहूम अपने पीछे
एक बेटे मोहम्मद फ़ुरक़ान साहब,
एक बेटी शहनाज़ बी (अहलिया मोहम्मद अकरम साहब, क़स्बा थानाभवन, ज़िला शामली),
पौते-पोतियाँ, नाते-नातिन, अहल-ए-ख़ाना, रिश्तेदार और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को ग़मगीन छोड़कर इस दुनिया से हमेशा के लिए रुख़्सत हो गए।


सऊदी अरब से जनपद मुज़फ्फरनगर, सहारनपुर और बागपत तक अपनी मेहनत, हुनर और ईमानदारी की धाक जमाने वाले मरहूम रिज़वान साहब उस दौर की शख़्सियत थे, जब विदेश जाने की हिम्मत करना भी आसान नहीं था। उन्होंने अपनी ज़िंदगी का तक़रीबन 35 साल सऊदी अरब में खैराद के कारीगर के रूप में गुज़ारे। सऊदी अरब में रहते हुए मशीनरी पार्ट्स के काम के सिलसिले में उन्होंने दर्जनों मुल्कों की खाक छानी। पैदायशी इंजीनियर सिफ़त, मुस्लिम मुल्तानी लोहार बिरादरी का यह चमकता सितारा उस ज़माने में सऊदी अरब की अत्याधुनिक कंप्यूटरीकृत मशीनों पर काम करता रहा, जिस दौर में हम उन मशीनों के बारे में सोच भी नहीं सकते थे।
सबसे बड़ी बात यह रही कि बेरोज़गारी से जूझ रहे अनेकों नौजवानों को उन्होंने बिल्कुल मुफ़्त सऊदी अरब ले जाकर रोज़गार मुहैय्या कराया। ख़ुद भी पूरी जवानी उन्होंने सऊदी अरब में नौकरी करते हुए गुज़ारी और दूसरों के लिए रोज़गार का ज़रिया बनते रहे। उनका इंतेकाल मुल्तानी समाज ही नहीं, बल्कि पूरे इलाक़े के लिए एक बहुत बड़ी कमी है जिसकी भरपाई करना मुमकिन ही नहीं ।

अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए और तमाम घर वालों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।


🕌 जनाज़े की जानकारी

मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा
बाद नमाज़ ज़ोहर, ठीक डेढ़ बजे
सराय वाली मस्जिद में अदा की जाएगी।
इसके बाद मय्यत को सरकारी अस्पताल के पास, बाढ़ियो वाले क़ब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

📞 ज़्यादा मालूमात के लिए राब्ता:
मोहम्मद अकरम साहब (थानाभवन वाले)
मोबाइल: 7017481648


🔔 एक ज़रूरी ऐलान – इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम् हिदायतें

अक्सर देखा गया है कि इंतेकाल की खबर या तो देर से पहुँचती है या अधूरी होती है, जिससे बिरादरी के लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि इंतेकाल की खबर भेजते वक़्त नीचे दी गई जानकारी ज़रूर शामिल करें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत/शौहर का नाम
2️⃣ पूरा पता (स्थायी व वर्तमान)
3️⃣ दफ़न का सही वक़्त और क़ब्रिस्तान का नाम
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स (एक-दो) के मोबाइल नंबर
5️⃣ अगर मर्द का इंतेकाल हुआ हो तो मरहूम का फ़ोटो
6️⃣ इंतेकाल की वजह (अगर मुनासिब हो)
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम — भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वगैरह

👉 इन तमाम जानकारियों से खबर मुकम्मल होती है और बिरादरी तक सही वक़्त पर सही सूचना पहुँचती है।


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Saturday, January 17, 2026

बेहद अफ़सोसनाक इत्तिला: एक नौजवान माँ का पर्दा फ़रमा जाना

निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम अहल-ए-बिरादरी को यह दुखद ख़बर दी जाती है कि बीती रात बरोज़ बार, बा-तारीख़ 17 जनवरी 2026 को इरफ़ान साहब की अहलिया मरहूमा इरफ़ाना बी (उम्र 32 वर्ष), साकिन बागू वाले, हाल बाशिंदा चाँद बाग, दिल्ली का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेक़ाल हो गया।

मरहूमा का मायका तथा वालिद जनाब ग़ुलाम मोहम्मद साहब का ताल्लुक़ गाँव बूढ़पुर, ज़िला बागपत (उत्तर प्रदेश) से था।

मरहूमा अपने पीछे अपने शौहर और तीन मासूम बच्चों को इस फ़ानी दुनिया में छोड़कर अपने रब के पास चली गईं। यह सदमा न सिर्फ़ उनके घराने बल्कि तमाम जानने-वालों के लिए अत्यंत पीड़ादायक है। अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनके दर्ज़ात बुलंद फ़रमाए और शौहर व अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।

मिली जानकारी के मुताबिक़, मरहूमा की मय्यत को आज बरोज़ इतवार, बा-तारीख़ 18 जनवरी 2026, बाद नमाज़-ए-ज़ोहर, मुस्तफ़ाबाद, दिल्ली के क़ब्रिस्तान में सपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम अहल-ए-बिरादरी से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर सवाब-ए-दारैन हासिल करें और घराने के ग़म में शरीक हों।

ज़्यादा मालूमात के लिए राब्ता:
मरहूमा के ससुर जनाब मोहम्मद इस्लाम साहब
मोबाइल: 9818830622, 8178412398


एक ज़रूरी ऐलान: इंतेक़ाल की ख़बर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर देखा गया है कि अधूरी या देर से पहुंची जानकारी की वजह से बिरादरी के लोग जनाज़े तक नहीं पहुंच पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादरान-ए-इस्लाम से दरख़्वास्त करती है कि इंतेक़ाल की ख़बर भेजते वक़्त निम्न बिंदुओं का ख़ास ख़याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम
2️⃣ पूरा पता (मूल निवास और वर्तमान पता)
3️⃣ दफ़्न का सही वक़्त और क़ब्रिस्तान का नाम
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स (एक-दो) के फ़ोन नंबर
5️⃣ अगर मर्द का इंतेक़ाल हुआ हो तो मरहूम की फ़ोटो
6️⃣ इंतेक़ाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)
7️⃣ घर के बाक़ी अहल-ए-ख़ाना के नाम (भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वग़ैरह)

👉 इन जानकारियों से ख़बर मुकम्मल होगी और बिरादरी तक सही वक़्त पर सही सूचना पहुंचेगी।


डिस्क्लेमर:
पत्रिका में प्रकाशित लेख, समाचार, विचार, विज्ञापन आदि संबंधित लेखक/विज्ञापनदाता के निजी विचार हैं। इनसे संपादक, प्रकाशक या प्रबंधन की सहमति आवश्यक रूप से अभिप्रेत नहीं है। सामग्री की सत्यता की ज़िम्मेदारी लेखक/विज्ञापनदाता की होगी। किसी भी विवाद की स्थिति में न्याय क्षेत्र केवल दिल्ली रहेगा।

ख़ास रिपोर्ट: मोहम्मद इरशाद, दिल्ली
पत्रिका: “मुल्तानी समाज” — सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
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दुआ:
या अल्लाह! मरहूमा को जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमा, उनके बच्चों को अपनी हिफ़ाज़त में रख, और इस घराने को सब्र-ओ-सुकून नसीब फ़रमा। आमीन।

Friday, January 16, 2026

🕯️ इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजेऊन 🕯️🌙 एक दर्दनाक और रंजो-ग़म से भरी ख़बर

निहायत ही अफ़सोस और दिली रंज के साथ तमाम बिरादराने हज़रात को यह इत्तला दी जाती है कि

आज बरोज़ जुमा, बा-तारीख़ 16 जनवरी 2026, अभी कुछ ही देर पहले
मोहल्ला दरबार, कस्बा खतौली, ज़िला मुज़फ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) में
वहीदा बी, अहलिया जनाब रफ़ीक़ अहमद साहब (नांगल वालों) का
क़ज़ा-ए-ईलाही से इंतक़ाल हो गया है।

यह ख़बर न सिर्फ़ अहल-ए-ख़ाना बल्कि पूरी बिरादरी के लिए गहरे सदमे और दुख का कारण है।
अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनके दर्जात बुलंद फ़रमाए और
उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फरमाए। आमीन 🤲

ख़बर लिखे जाने तक मरहूमा के दफ़न का वक़्त मुक़र्रर नहीं हो पाया है,
जैसे ही तफ़सीलात हासिल होंगी, बिरादरी को इत्तला दी जाएगी, इंशाअल्लाह।


📢 एक ज़रूरी ऐलान

इंतेकाल की ख़बर भेजने से मुतअल्लिक़ अहम हिदायतें

अक्सर देखा गया है कि किसी अज़ीज़ के इंतक़ाल की ख़बर या तो देर से पहुँचती है
या फिर मुकम्मल जानकारी न होने की वजह से कई लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते।
इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका
तमाम बिरादराने इस्लाम से अदब के साथ गुज़ारिश करती है कि
जब भी इंतेकाल की कोई ख़बर भेजें तो इन बातों का ख़ास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम / मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता — पैदाइशी और मौजूदा निवास।
3️⃣ दफ़न का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स (एक या दो) के फ़ोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतक़ाल हुआ हो तो मरहूम की फोटो भी शामिल करें।
6️⃣ इंतक़ाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम — जैसे माँ-बाप, भाई-बहन, औलाद वग़ैरह।

👉 इन तमाम जानकारियों से ख़बर मुकम्मल होती है और बिरादरी के लोगों को
सही और वक़्त पर इत्तला मिल पाती है।


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🤲 अल्लाह तआला मरहूमा के अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए
और इस दुख की घड़ी में पूरी बिरादरी को हिम्मत व तसल्ली नसीब फरमाए।
आमीन या रब्बुल आलमीन।

Thursday, January 15, 2026

🕯️ इंतेकाल की गमगीन ख़बर | दुआओं के साथ 🕯️

निहायत ही अफ़सोस और गहरे रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराने इस्लाम को यह इत्तिला दी जाती है कि

आज बरोज़ जुमेरात, तारीख़ 15 जनवरी 2026 को
जनाब मोहम्मद शाहिद साहब
वल्द जनाब मोहम्मद लुक़मान साहब (बिराल वाले)
हाल मुक़ाम गांव गौरीपुर, ज़िला बागपत, उत्तर प्रदेश
का क़ज़ा-ए-ईलाही से इंतेकाल हो गया।

अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनके दर्जात बुलंद फरमाए और जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फरमाए। अल्लाह तआला अहले-ख़ाना को यह सदमा सहन करने की तौफ़ीक़ दे और उन्हें सब्र-ए-जमील अता फरमाए।
आमीन या रब्बुल आलमीन।

मरहूम की मय्यत को बाद नमाज़-ए-असर, आज ही
गांव गौरीपुर में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।
लिहाज़ा तमाम हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फ़रमाकर मरहूम के हक़ में दुआ-ए-मग़फ़िरत फरमाएं और सवाब-ए-दारैन हासिल करें।


🕊️ एक ज़रूरी ऐलान – इंतेकाल की ख़बर भेजने से पहले अहम हिदायतें

अक्सर देखने में आता है कि किसी अज़ीज़ के इंतेकाल की सूचना देर से या अधूरी जानकारी के साथ बिरादरी तक पहुँचती है, जिस वजह से कई लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से अदब के साथ दरख़्वास्त करती है कि इंतेकाल की ख़बर भेजते वक़्त इन बातों का ख़ास ख़याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता — स्थायी व वर्तमान निवास।
3️⃣ दफ़न का सही वक़्त और क़ब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स (एक-दो) के मोबाइल नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतेकाल हुआ हो तो मरहूम की तस्वीर।
6️⃣ इंतेकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ अहले-ख़ाना के नाम — वालिदैन, भाई-बहन, औलाद वग़ैरह।

👉 इन तमाम जानकारियों से ख़बर मुकम्मल होती है और बिरादरी के लोगों तक सही और वक़्त पर सूचना पहुँच पाती है।


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अल्लाह तआला मरहूम को जन्नत में आला मक़ाम अता फरमाए। आमीन।

Wednesday, January 14, 2026

निहायत ही अफ़सोसनाक खबर: मुल्तानी बिरादरी से तीन इंतेकाल, क़स्बा ऊन में कनीज़ा बी का इंतकाल


इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन निहायत ही अफ़सोस और रंज के साथ तमाम अहले-बिरादरी को यह इत्तिला दी जाती है कि बीते कल, बरोज़ बुधवार, 14 जनवरी 2025, मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी से ताल्लुक़ रखने वाले तीन अफ़राद के इंतेकाल की दुखद खबरें हमें हासिल हुईं। इनमें से दो इंतेकाल की सूचनाएं हम अपने न्यूज़ पोर्टल के ज़रिए पहले ही आप हज़रात तक पहुंचा चुके हैं।

इसी कड़ी में तीसरी अफ़सोसनाक खबर उत्तर प्रदेश के जिला शामली के क़स्बा ऊन से प्राप्त हुई, जहां कनीज़ा बी का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया। मरहूमा की मय्यत को बीते कल ही बाद नमाज़-ए-असर, क़स्बा ऊन के क़ब्रिस्तान में पूरे एहतराम और सुन्नत के मुताबिक सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया।

अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फिरत फरमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ीचों में से एक बाग़ बनाए और तमाम अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

इस इंतेकाल की सूचना हमें सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त हुई, जिसे बिरादरी की जानकारी और दुआओं की नियत से हमारे द्वारा खबर के रूप में पेश किया जा रहा है।


ज़रूरी ऐलान

इंतेकाल की खबर भेजने से पहले इन अहम हिदायतों पर ज़रूर अमल करें

अक्सर देखने में आता है कि किसी अज़ीज़ के इंतेकाल की खबर बिरादरी तक या तो देर से पहुंचती है या फिर अधूरी जानकारी की वजह से लोग जनाज़े या तदफ़ीन में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से अदब के साथ गुज़ारिश करती है कि इंतेकाल की खबर भेजते वक़्त नीचे दी गई जानकारियां ज़रूर शामिल करें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम, वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता (स्थायी व वर्तमान निवास)।
3️⃣ तदफ़ीन का सही वक़्त और क़ब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स (एक-दो) के संपर्क नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतेकाल हो तो मरहूम की फोटो।
6️⃣ इंतेकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ अहले-ख़ाना के नाम – जैसे वालिदैन, भाई-बहन, औलाद वग़ैरह।

👉 इन तमाम जानकारियों से खबर मुकम्मल होती है और बिरादरी के लोगों को सही व वक़्त पर जानकारी मिल पाती है।


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✍️ ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट

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