हल होने वाले दोनों मामले इस प्रकार रहे—
- शाहपुर बनाम सरधना
- मुजफ्फरनगर बनाम मुजफ्फरनगर
इन संवेदनशील और पुराने मामलों को सुलझाने में मुजफ्फरनगर की टीम की मेहनत, सूझबूझ और खैरख्वाही काबिले-तारीफ रही। सुलह की इस पाक कोशिश में जिन जिम्मेदार और समझदार साथियों ने अहम भूमिका निभाई, उनमें—
मुजफ्फरनगर से
हाजी अलीमुद्दीन साहब, अनीस अहमद साहब, जुल्फ़कार साहब, सलाहुद्दीन साहब, इदरीस साहब, हाजी ज़ाहिद साहब
सरधना से
मिर्ज़ा मोहम्मद इस्माइल साहब, हाजी बशीर अहमद साहब, मोहम्मद महताब साहब
शाहपुर से
जब्बार साहब एवं उनके साथी
मुजफ्फरनगर से
इसरार साहब, अहसान साहब सहित अनेक खैरख्वाह साथी शामिल रहे।
ये दोनों मामले सालों से लंबित चले आ रहे थे, लेकिन अल्लाह तआला के फ़ज़्ल से आपसी बातचीत, सब्र और समझदारी के ज़रिये इन्हें सुलह की मंज़िल तक पहुँचाया गया। यह पहल न केवल संबंधित परिवारों के लिए राहत लेकर आई, बल्कि पूरी बिरादरी के लिए एक मिसाल बनकर सामने आई कि अमन, मोहब्बत और भाईचारे से हर विवाद का हल संभव है।
दुआ है कि
अल्लाह तआला इस सुलह को कायम रखे, इसे खैर और बरकत का ज़रिया बनाए और बिरादरी में इत्तेहाद व आपसी मोहब्बत हमेशा क़ायम रखे। आमीन।
✍️ नवेद मिर्ज़ा की खास रिपोर्ट
(सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत)
दिल्ली से प्रकाशित,
मुस्लिम मुल्तानी लोहार–बढ़ई बिरादरी को समर्पित
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