“मुल्तानी घराना” के ज़रिए हर घर, हर कुनबे और हर खानदान को डिजिटल शिजरे में जोड़ने की पहल — अपने घराने की एंट्री खुद करें या अपने कस्बे-शहर में जनगणना अधिकारी बनने के लिए अपनी जानकारी भेजें
नई दिल्ली/उत्तर प्रदेश डेस्क।
मुस्लिम मुल्तानी लोहार एवं बढ़ई बिरादरी की सामाजिक एकजुटता, डिजिटल पहचान और आने वाली नस्लों के लिए बिरादरी का मुकम्मल रिकॉर्ड महफूज़ करने की दिशा में एक अहम और दूरअंदेशाना पहल सामने आई है। बिरादरी की राष्ट्रीय संस्था “मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट” ने डिजिटल दौर की जरूरतों को समझते हुए बिरादरी की डिजिटल जनगणना के लिए एक बड़े सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म “मुल्तानी घराना” को बिरादरी के सामने पेश किया है।
इस डिजिटल प्लेटफॉर्म का मकसद सिर्फ नाम और मोबाइल नंबर इकट्ठा करना नहीं, बल्कि हर परिवार, कुनबे, खानदान और रिश्तेदारी के सिलसिले को एक मुकम्मल डिजिटल शिजरे की शक्ल में सुरक्षित करना है, ताकि आज का तैयार किया गया रिकॉर्ड आने वाली नस्लों के लिए भी एक अहम सामाजिक दस्तावेज़ साबित हो सके।
सोशल मीडिया के शुरुआती दौर से डिजिटल सफर की कहानी
आज जब सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं, उस दौर को भी याद करना जरूरी है जब इन तकनीकों का इस्तेमाल भारत में अभी शुरुआती मरहले में था।
मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट ने बिरादरी को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एकजुट करने की कोशिश उस समय शुरू की, जब व्हाट्सऐप का इस्तेमाल भारत में तेजी से शुरू ही हुआ था। वर्ष 2011 के आसपास बिरादरी के लोगों को व्हाट्सऐप ग्रुपों के माध्यम से जिला और राज्यवार जोड़ने की कोशिश की गई। उस दौर में एक व्हाट्सऐप ग्रुप में सदस्यों की संख्या बेहद सीमित हुआ करती थी, जिसकी वजह से बड़ी तादाद में बिरादरी के अफराद को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ना अपने आप में एक चुनौती था।
इसके बाद टेलीग्राम के सामने आने पर बिरादरी के लिए टेलीग्राम ग्रुप और चैनल तैयार किए गए, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को एक साथ जोड़ा जा सके। इसके साथ-साथ फेसबुक पर बिरादरी के लोगों को तलाश कर विभिन्न ग्रुपों और पेजों से जोड़ा गया तथा दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर भी बिरादरी की मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश की गई।
बिरादरी के लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने और सामाजिक संपर्क को मजबूत करने के लिए ऑनलाइन डायरेक्टरी प्लेटफॉर्म पर भी संस्था की मौजूदगी दर्ज कराई गई।
खबरों से लेकर रिश्तों तक — डिजिटल पहचान बनाने की कोशिश
इसी डिजिटल सफर को आगे बढ़ाते हुए बिरादरी की राष्ट्रीय समाचार पत्रिका “मुल्तानी समाज” का न्यूज़ पोर्टल, डिजिटल प्लेटफॉर्म और यूट्यूब चैनल तैयार किया गया, ताकि बिरादरी के लोगों की खुशियों, ग़मों, सामाजिक गतिविधियों, कामयाबियों और अहम खबरों को मुल्क के कोने-कोने तक पहुंचाया जा सके।
बिरादरी की डिजिटल पहचान को और मजबूत करने के लिए “मुल्तानी समाज” नाम से वेबसाइट तैयार की गई। वहीं बिरादरी में निकाह के लिए मुनासिब रिश्तों की तलाश को आसान बनाने के उद्देश्य से “रिश्तों की दुनिया” जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म की शुरुआत की गई।
इन तमाम कोशिशों के पीछे बुनियादी सोच यही रही कि बिरादरी का कोई भी अफ़राद एक-दूसरे से बेखबर न रहे और दूर-दराज़ इलाकों में रहने वाले मुल्तानी परिवार भी आपसी राब्ते और इत्तेहाद के एक मजबूत सिलसिले से जुड़े रहें।
अब जनगणना की तरफ बड़ा कदम — “मुल्तानी घराना”
इसी लंबे डिजिटल सफर का अगला और अहम मरहला अब बिरादरी की डिजिटल जनगणना है।
मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा तैयार किया गया “मुल्तानी घराना” सॉफ्टवेयर बिरादरी के हर परिवार को अपनी जानकारी खुद दर्ज करने का मौका देता है। इसके माध्यम से कोई भी परिवार अपने घर के अफराद के साथ-साथ अपने कुनबे, खानदान और रिश्तेदारों की जानकारी दर्ज कर अपने परिवार का डिजिटल शिजरा तैयार कर सकता है।
यानी एक परिवार से शुरू होकर जानकारी आगे बढ़ते हुए पूरे कुनबे और खानदान को एक डिजिटल सामाजिक नक्शे में जोड़ा जा सकता है।
यह पहल आने वाले समय में बिरादरी की सामाजिक ताकत, परिवारों की संख्या, अलग-अलग शहरों और कस्बों में आबादी की मौजूदगी तथा आपसी रिश्तेदारी के सिलसिले को समझने में बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।
हर घर बने डिजिटल जनगणना का हिस्सा
ट्रस्ट की अपील है कि बिरादरी का हर परिवार इस मुहिम को सिर्फ एक संस्था की मुहिम समझकर न देखे, बल्कि इसे अपनी बिरादरी और अपनी आने वाली नस्लों के लिए एक सामाजिक जिम्मेदारी समझे।
हर परिवार अपने घराने की जानकारी दर्ज करे, अपने माता-पिता, भाई-बहन, औलाद, खानदान और रिश्तेदारों को इस डिजिटल शिजरे से जोड़े और कोशिश करे कि उसका पूरा कुनबा इस जनगणना का हिस्सा बने।
“मुल्तानी घराना” को देखने और अपनी डिजिटल एंट्री की प्रक्रिया शुरू करने के लिए आज ही वेबसाइट पर जाएँ:
मुल्तानी घराना डॉट कॉम
सॉफ्टवेयर को इस्तेमाल करने के दौरान किसी तरह की परेशानी या रहनुमाई की जरूरत हो तो हेल्पलाइन नंबर की जानकारी भी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई गई है।
क्या आप अपने शहर या कस्बे के “जनगणना अधिकारी” बनना चाहते हैं?
बिरादरी की डिजिटल जनगणना को ज्यादा व्यापक बनाने के लिए ऐसे जिम्मेदार, सक्रिय और समाजी खिदमत का जज़्बा रखने वाले अफराद की भी जरूरत है, जो अपने कस्बे, शहर, ब्लॉक, तहसील या इलाके में बिरादरी के परिवारों को इस डिजिटल जनगणना से जोड़ने में अपना किरदार अदा कर सकें।
अगर आप अपने इलाके में “मुल्तानी बिरादरी डिजिटल जनगणना अधिकारी” के तौर पर काम करने के इच्छुक हैं तो अपनी पूरी जानकारी ट्रस्ट/सम्बंधित टीम तक भेज सकते हैं।
आपका नाम, शहर/कस्बा, जिला, मोबाइल नंबर और बिरादरी के लिए किए जाने वाले काम का संक्षिप्त विवरण भेजकर इस मुहिम से जुड़ा जा सकता है।
एक-एक घर जुड़ेगा, तभी पूरी बिरादरी का मुकम्मल डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा।
आने वाले दौर में रिश्तों के लिए भी नया डिजिटल प्लेटफॉर्म
मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि बिरादरी के बीच रिश्ते-नाते आसान बनाने के लिए एक और डिजिटल सॉफ्टवेयर जल्द पेश किया जाएगा।
इसका मकसद बिरादरी के परिवारों को मुनासिब रिश्तों की तलाश में आधुनिक तकनीक का फायदा पहुंचाना और खास तौर पर हमारी बहन-बेटियों और नौजवानों के लिए रिश्तों की तलाश के सिलसिले को ज्यादा व्यवस्थित और आसान बनाना होगा।
“बड़े अल्फाज़” नहीं, काम का इतिहास देखिए
बिरादरी के कुछ अफराद कभी-कभी संस्था के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अल्फाज़ जैसे “पैदायशी इंजीनियर”, “क्रांतिकारी तंजीम”, “राष्ट्रीय स्तर की संस्था” आदि पर सवाल या नापसंदगी का इज़हार करते हैं।
लेकिन किसी भी संस्था की पहचान सिर्फ उसके अल्फाज़ से नहीं, बल्कि उसके काम, उसके सफर और उसकी लगातार मेहनत से होती है।
अगर किसी तंजीम ने उस दौर में बिरादरी को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ने की कोशिश की, जब सोशल मीडिया भारत में अपनी शुरुआती मंजिलें तय कर रहा था; अगर उसने बिरादरी की खबरों को डिजिटल माध्यम से घर-घर पहुंचाने की कोशिश की; अगर उसने वेबसाइट, न्यूज़ पोर्टल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और रिश्तों के डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किए; और आज बिरादरी की डिजिटल जनगणना तथा डिजिटल शिजरे की तरफ कदम बढ़ाया है, तो इन तमाम कामों का जायज़ा लेकर ही उसके सफर की अहमियत को समझा जाना चाहिए।
अल्फाज़ पर बहस अपनी जगह, मगर काम का हिसाब भी अपनी जगह।
मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट का कहना है कि यह सफर अभी खत्म नहीं हुआ, बल्कि असल में एक नए डिजिटल दौर की शुरुआत है।
बिरादरी की जनगणना, डिजिटल शिजरा, रिश्तों का डिजिटल प्लेटफॉर्म, बिरादरी की खबरों का राष्ट्रीय नेटवर्क और आने वाली नस्लों के लिए सामाजिक रिकॉर्ड — यह सब मिलकर मुल्तानी बिरादरी को एक मजबूत डिजिटल सामाजिक नेटवर्क की शक्ल दे सकता है।
आज जो जानकारी हम महफूज़ करेंगे, वही कल हमारी आने वाली नस्लों के लिए हमारी पहचान और हमारे खानदानों की कहानी बनेगी।
इसलिए तमाम अहले बिरादरी से गुज़ारिश है कि इस मुहिम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और अपने घराने को “मुल्तानी घराना” से जरूर जोड़ें।
अपने घराने की एंट्री खुद करें — या अपने इलाके में डिजिटल जनगणना अधिकारी बनकर बिरादरी की खिदमत का हिस्सा बनें।
इंशाअल्लाह, अगली कड़ी में मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से बिरादरी के लिए किए गए दूसरे अहम कामों और आने वाले डिजिटल प्रोजेक्ट्स की तफसील भी बिरादरी के सामने रखी जाएगी।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।
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