Sunday, October 4, 2026

World Students Day या “Multani Day”? डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की यौमे पैदाइश को बिरादरी के नाम से जोड़कर पेश किए जाने पर उठे गंभीर सवाल

मुज़फ्फरनगर/शामली, उत्तर प्रदेश।

मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के तमाम बिरादरान-ए-वतन की ख़िदमत में यह सवाल पेश करना ज़रूरी हो गया है कि क्या किसी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाने वाले दिवस को किसी बिरादरी विशेष के नाम से पेश किया जाना मुनासिब है?

मामला 15 अक्टूबर का है—वह तारीख़ जो महान वैज्ञानिक, मिसाइल मैन और भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की यौमे पैदाइश है और जिसे भारत सहित विभिन्न स्थानों पर World Students Day के रूप में याद किया जाता है।

बताया जा रहा है कि क़स्बा खतौली, ज़िला मुज़फ्फरनगर से संचालित बिरादरी की एक प्रदेश स्तरीय सोसाइटी द्वारा पिछले कुछ वर्षों से डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की यौमे पैदाइश के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मुज़फ्फरनगर शहर और फिर खतौली में कार्यक्रमों के बाद अब सोशल मीडिया के ज़रिए 15 अक्टूबर को “Multani Day” के नाम से प्रचारित किए जाने पर बिरादरी के भीतर कई सवाल उठ रहे हैं।

सवाल यह नहीं कि डॉ. कलाम को याद क्यों किया जा रहा है—सवाल यह है कि नाम क्या दिया जा रहा है?

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम किसी एक बिरादरी, मज़हब या क्षेत्र की शख्सियत नहीं थे। वह पूरे हिंदुस्तान के गौरव, नौजवानों के प्रेरणास्रोत और शिक्षा व विज्ञान के पैरोकार थे।

अगर कोई संस्था उनकी यौमे पैदाइश पर कार्यक्रम आयोजित करना चाहती है तो इसका स्वागत होना चाहिए। लेकिन सवाल यह है कि एक ऐसे दिवस को, जो विद्यार्थियों और युवाओं की प्रेरणा से जुड़ा हुआ है, क्या किसी एक बिरादरी की विशेष पहचान के साथ प्रचारित करना उचित है?

बिरादरी के लोगों के सामने यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि “Multani Day” नाम का अपना एक अलग सामाजिक और ऐतिहासिक संदर्भ बताया जाता रहा है। ऐसे में किसी दूसरी तारीख़ को उसी नाम से प्रचारित किए जाने पर स्वाभाविक रूप से यह भ्रम पैदा होता है कि आखिर बिरादरी के बीच “Multani Day” की पहचान क्या है और इसकी तारीख़ क्या मानी जाए?

इंजीनियर साहब से बिरादरी का सीधा सवाल

जिस सोसाइटी के सदर साहब अपने नाम के साथ “इंजीनियर” का लक़ब इस्तेमाल करते हैं, उनसे बिरादरी के पढ़े-लिखे नौजवानों और बुज़ुर्गों का अदब के साथ सवाल है—

अगर 15 अक्टूबर को डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की यौमे पैदाइश के तौर पर कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है तो उसे “World Students Day” अथवा डॉ. कलाम की यौमे पैदाइश के नाम से ही क्यों न आयोजित किया जाए?

अगर मक़सद बिरादरी के नौजवानों में शिक्षा, विज्ञान, तरक़्क़ी और देशप्रेम का जज़्बा पैदा करना है तो कार्यक्रम को पूरे समाज के लिए खुला रखा जाए और डॉ. कलाम के विचारों तथा उनकी ज़िंदगी से नई नस्ल को रोशनी हासिल करने का मौक़ा दिया जाए।

किसी महान राष्ट्रीय शख्सियत को किसी एक बिरादरी तक सीमित करना उनकी विरासत को छोटा करना होगा।

बिरादरी को भ्रम में रखने के बजाय साफ़-साफ़ तारीख़ और इतिहास बताया जाए

मुल्तानी बिरादरी के लोग सीधे-सादे, मोहब्बत करने वाले और अपनी बिरादरी की पहचान से बेपनाह मोहब्बत रखने वाले हैं। यही वजह है कि बिरादरी से जुड़े किसी भी आयोजन को लोग भरोसे के साथ स्वीकार कर लेते हैं।

लेकिन यही भरोसा हमारी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी भी है।

बिरादरी के ज़िम्मेदार लोगों से गुज़ारिश है कि तारीख़, नाम और इतिहास को लेकर कोई ऐसा प्रचार न किया जाए जिससे आने वाली नस्लें भ्रमित हों।

अगर “Multani Day” के लिए कोई पुरानी परंपरा, तारीख़ या दस्तावेज़ मौजूद है तो उसे बिरादरी के सामने सार्वजनिक किया जाए। अगर 15 अक्टूबर को डॉ. कलाम की यौमे पैदाइश पर कार्यक्रम है तो उसे उसी हवाले से आयोजित किया जाए।

दोनों को मिलाकर पेश करने से आख़िर हासिल क्या होगा?

बिरादरी के बुद्धिजीवी आगे आएँ

आज ज़रूरत इस बात की है कि बिरादरी के पढ़े-लिखे नौजवान, सामाजिक कार्यकर्ता, बुज़ुर्ग और बुद्धिजीवी इस मसले पर ख़ामोशी इख़्तियार करने के बजाय तथ्यों के साथ अपनी राय सामने रखें।

हम किसी शख्सियत या संस्था की मुख़ालफ़त नहीं कर रहे, बल्कि नाम, तारीख़, इतिहास और बिरादरी की पहचान को लेकर साफ़गोई की बात कर रहे हैं।

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का सम्मान कीजिए, उनकी तालीमी और वैज्ञानिक सोच को नई नस्ल तक पहुँचाइए, उनके सपनों का हिंदुस्तान बनाने की बात कीजिए—मगर किसी राष्ट्रीय शख्सियत की यौमे पैदाइश को बिरादरी की पहचान के साथ इस तरह न जोड़ा जाए कि आम लोगों के बीच असल तथ्य ही धुंधले पड़ जाएँ।

बिरादरी का सवाल सीधा है—
15 अक्टूबर को डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की यौमे पैदाइश मनानी है, World Students Day मनाना है या “Multani Day” के नाम से एक अलग पहचान कायम करनी है?

अगर मक़सद नेक है तो नाम और तारीख़ को लेकर इतनी साफ़गोई भी ज़रूरी है।

इसी का नाम बिरादरी की अमानत, इतिहास की हिफ़ाज़त और आने वाली नस्लों के प्रति हमारी ज़िम्मेदारी है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं YouTube चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

अपनी ख़बर हम तक पहुँचाइए

अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना या अपने कारोबार का इश्तिहार (विज्ञापन) क़ौमी सतह पर शाया या प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो बराए मेहरबानी नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।

📞 9410652990
📞 8010884848

आपका एतमाद ही हमारी सबसे बड़ी ताक़त है।

“मुल्तानी समाज”

अपनी बिरादरी की आवाज़ — अपनी पहचान

No comments:

Post a Comment