Saturday, October 3, 2026

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन सलीमन बी का इंतिक़ाल, मुल्तानी बिरादरी में पसरा ग़म — आज ईशा की नमाज़ के बाद होगी तदफ़ीन

अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फिरत फ़रमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए। आमीन।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ तमाम मुस्लिम, मुल्तानी लोहार एवं बढ़ई बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि आज दिन इतवार, बा-तारीख़ 04 अक्टूबर 2026 को क़स्बा अंबेहटा पीर, ज़िला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश में जनाब रिजवान साहब वल्द जनाब सुल्तान साहब की अहलिया सलीमन बी, जिनका मायका गाँव पुरमाफ़ी, ज़िला शामली, उत्तर प्रदेश में है, आज सुबह तक़रीबन 09 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से वफ़ात पा गईं।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूमा के इंतिक़ाल की ख़बर से अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादराने-मिल्लत में गहरा रंज और सदमा है। यह दुनिया फ़ानी है और हर ज़ी-रूह को एक दिन अपने रब की तरफ़ लौटकर जाना है। अल्लाह तआला मरहूमा की तमाम ख़ताओं और कोताहियों से दरगुज़र फ़रमाते हुए उनकी मग़फिरत फ़रमाए, क़ब्र को नूर से मुनव्वर करे और उन्हें अपनी रहमत के साए में जगह अता फ़रमाए।

नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन

मिली हुई जानकारी के मुताबिक़ मरहूमा की नमाज़-ए-जनाज़ा आज बाद नमाज़-ए-ईशा अदा की जाएगी, जिसके बाद उन्हें सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि अगर मुमकिन हो तो नमाज़-ए-जनाज़ा में शिरकत फ़रमाएँ, मरहूमा के लिए मग़फिरत की दुआ करें और अहल-ए-ख़ाना के ग़म में शरीक होकर उन्हें तसल्ली दें।

मय्यत को क़ब्र में उतारते वक़्त

जब मय्यत को क़ब्र में उतारा जाए तो दुआ की जाए:

اللّٰهُمَّ اغْفِرْ لَهَا وَارْحَمْهَا، وَعَافِهَا وَاعْفُ عَنْهَا۔

तर्जुमा:
ऐ अल्लाह! इसकी मग़फिरत फ़रमा, इस पर रहम फ़रमा, इसे आफ़ियत अता फ़रमा और इससे दरगुज़र फ़रमा।

क़ब्र में मय्यत को रखते वक़्त यह पढ़ना भी मसनून है:

بِسْمِ اللّٰهِ وَعَلَىٰ مِلَّةِ رَسُولِ اللّٰهِ ﷺ

तर्जुमा:
अल्लाह के नाम के साथ और अल्लाह के रसूल ﷺ के दीन व तरीक़े पर।

मिट्टी देते वक़्त

मय्यत पर मिट्टी डालते वक़्त यह आयत पढ़ी जा सकती है:

مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ

तर्जुमा:
हमने तुम्हें इसी मिट्टी से पैदा किया, इसी में तुम्हें वापस लौटाएँगे और इसी से दोबारा तुम्हें निकालेंगे।

क़ब्र पर मिट्टी देने के बाद मरहूमा के लिए दिल से दुआ-ए-मग़फिरत की जाए:

ऐ अल्लाह! मरहूमा सलीमन बी की मग़फिरत फ़रमा। उनकी तमाम ख़ताओं और गुनाहों को माफ़ फ़रमा। उनकी क़ब्र को कुशादा और नूरानी फ़रमा। क़ब्र की तंगी और अज़ाब से महफ़ूज़ फ़रमा। उन्हें सवालात-ए-क़ब्र में कामयाबी अता फ़रमा। उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे। उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा और अपने प्यारे हबीब हज़रत मुहम्मद ﷺ की शफ़ाअत नसीब फ़रमा।

या अल्लाह! अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा, इस सदमे को बर्दाश्त करने की ताक़त दे और मरहूमा के लिए किए गए तमाम नेक अमल और दुआओं को उनके हक़ में क़बूल फ़रमा। आमीन या रब्बुल आलमीन।

राब्ता

मय्यत के सिलसिले में मज़ीद मालूमात के लिए मरहूमा के फ़रज़ंद जनाब परवेज़ साहब से इस मोबाइल नंबर पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है:

📞 9719929191

तमाम हज़रात से ख़ुसूसन गुज़ारिश है कि मरहूमा के लिए फ़ातिहा-ख़्वानी और दुआ-ए-मग़फिरत फ़रमाएँ।

अल्लाह तआला मरहूमा को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए और तमाम पसमान्दगान को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए।
आमीन सुम्मा आमीन।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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