मौलाना अब्दुल शकूर साहब (मरहूम) गाँव बस्सी वालों की अहलिया मोहतरमा शहर बानो साहिबा का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल, मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी में ग़म की लहर।
निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिली अफ़सोस के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात को इत्तिला दी जाती है कि आज दिनांक 03 नवंबर 2026, मंगलवार को राजस्थान के नागौर शहर में स्थित लोहार पूरा, लजवानों की गली, बस्सी वालों का मोहल्ला में मौलाना अब्दुल शकूर साहब (मरहूम), गाँव बस्सी वालों की अहलिया मोहतरमा शहर बानो साहिबा उम्र तकरीबन 60 बरस का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया है।
इस दुखद ख़बर से खानदान, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, रिश्तेदारों और मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी में गहरे रंज-ओ-ग़म की लहर दौड़ गई है। मरहूमा का इस दुनिया-ए-फ़ानी से रुख़्सत हो जाना उनके परिजनों के लिए एक ऐसा सदमा है, जिसकी भरपाई मुमकिन नहीं। इस मुश्किल घड़ी में तमाम बिरादराना हज़रात की हमदर्दियाँ और दुआएँ ग़मज़दा खानदान के साथ हैं।
मरहूमा की मग़फ़िरत के लिए ख़ास दुआ
अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त से ख़ास दुआ है कि वह मरहूमा शहर बानो साहिबा की कामिल मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फ़रमाकर उन्हें अपनी रहमत के साये में जगह अता फ़रमाए। उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमाए, उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे और क़ब्र की तन्हाई को अपनी रहमत से आसान फ़रमाए।
या अल्लाह! मरहूमा को सवालात-ए-क़ब्र के वक़्त साबित-क़दमी अता फ़रमा, उनकी क़ब्र को वसीअ और रोशन फ़रमा, हिसाब-ओ-किताब आसान फ़रमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा। उन्हें हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ की शफ़ाअत नसीब फ़रमा।
दफ़्न और मिट्टी देते वक़्त पढ़ी जाने वाली दुआ
जब मरहूमा को क़ब्र में उतारा जाए तो यह दुआ पढ़ी जाए:
بِسْمِ اللّٰهِ وَعَلٰى مِلَّةِ رَسُوْلِ اللّٰهِ ﷺ
बिस्मिल्लाहि व अला मिल्लति रसूलिल्लाह ﷺ
तर्जुमा: अल्लाह के नाम के साथ और रसूलुल्लाह ﷺ के दीन व तरीक़े पर।
मिट्टी देते वक़्त क़ुरआन-ए-पाक की यह आयत पढ़ना मुस्तहब है:
مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ
मिन्हा ख़लक़नाकुम व फ़ीहा नुईदुकुम व मिन्हा नुख़रिजुकुम तारतन उख़रा।
तर्जुमा: इसी ज़मीन से हमने तुम्हें पैदा किया, इसी में तुम्हें लौटाएँगे और इसी से तुम्हें दोबारा निकालेंगे।
दफ़्न के बाद दुआ:
अल्लाह तआला से गुज़ारिश है कि मरहूमा को क़ब्र में साबित-क़दम रखे, उनकी मग़फ़िरत फ़रमाए और तमाम ग़मज़दा घर वालों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।
मय्यत के सिलसिले में मालूमात
मरहूमा की नमाज़-ए-जनाज़ा, दफ़्न और अन्य संबंधित जानकारी हासिल करने के लिए जनाब नासिर लाजवान साहब से नीचे दिए गए मोबाइल नंबर पर राब्ता क़ायम फ़रमाएँ।
📞 9352920555, 9414216540
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन
निहायत ही अफ़सोस और रंज-ओ-ग़म के साथ इंतिक़ाल की दर्दनाक ख़बर
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राजस्थान डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।
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