Wednesday, December 31, 2025

यातायात के नियम: डर से नहीं, ज़िम्मेदारी और इंसानियत से

क्या यातायात के नियमों का पालन सिर्फ़ चालान या कार्रवाई के डर से ही होना चाहिए?

या फिर हमें यह समझना चाहिए कि ये नियम हमारी और हमारे अपनों की हिफ़ाज़त के लिए बनाए गए हैं?

हक़ीक़त यह है कि ट्रैफिक पुलिस कोहरा हो या सर्दी, गर्मी हो या बरसात—हर हाल में सड़कों पर खड़ी रहती है। उनका मक़सद हमें रोकना नहीं, बल्कि यह यक़ीन दिलाना होता है कि हम सलामत अपने घर, अपने बीवी-बच्चों और अपने बुज़ुर्गों तक पहुंच सकें। अफ़सोस की बात यह है कि हम में से बहुत-से लोग उनकी मौजूदगी को नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

आज शहरों में यह एक आम मंज़र बन गया है कि कुछ नौजवान अपनी बुलेट मोटरसाइकिलों पर मोडिफ़ाइड साइलेंसर लगाकर गोली-नुमा आवाज़ें निकालते हुए ख़ुद को हीरो समझते हैं। मगर क्या उन्होंने कभी यह सोचा है कि सड़क पर चल रहा कोई बुज़ुर्ग, कोई बच्चा या कोई दिल का मरीज़ उस आवाज़ से घबरा कर अपनी जान तक गंवा सकता है?
हीरोगिरी शोर मचाने में नहीं, बल्कि दूसरों की जान की क़द्र करने में है।

इस्लाम हमें सिखाता है कि किसी एक इंसान की जान बचाना पूरी इंसानियत को बचाने के बराबर है। फिर हम कैसे यह सोच सकते हैं कि तेज़ रफ्तार, लापरवाही या नियमों की अनदेखी कोई मामूली बात है?

अक्सर जल्दबाज़ी में लोग ट्रैफिक नियमों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं—रेड सिग्नल तोड़ देते हैं, सीट बेल्ट नहीं लगाते, हेलमेट पहनने में कोताही करते हैं। नतीजा यह होता है कि एक छोटी-सी ग़लती ज़िंदगी भर का पछतावा बन जाती है।
आंकड़े साफ़ बताते हैं कि ज़्यादातर सड़क हादसे तेज़ रफ्तार और ग़ैर-ज़िम्मेदार ड्राइविंग की वजह से होते हैं।

अगर हम चार पहिया वाहन चला रहे हैं तो सीट बेल्ट लगाना हमारी ज़िम्मेदारी है।
अगर बाइक चला रहे हैं तो हेलमेट पहनना सिर्फ़ क़ानून नहीं, बल्कि हमारी हिफ़ाज़त का ज़रिया है।
स्पीड ब्रेकर हो या मोड़—रफ्तार कम करना, हॉर्न देकर गाड़ी मोड़ना और सही लेन में चलना—ये सब बातें हमें और दूसरों को हादसों से बचाती हैं।

याद रखिए, यातायात के नियम सरकार या ट्रैफिक पुलिस के फायदे के लिए नहीं बने हैं। ये नियम हमारी सेफ्टी, हमारे घर वालों की ख़ुशी और हमारी ज़िंदगी की सलामती के लिए हैं।
ज़िंदगी बहुत छोटी है—यह कब, कहां और कैसे ख़त्म हो जाए, कोई नहीं जानता। इसलिए अक़्लमंदी इसी में है कि हम खुद भी महफूज़ रहें और दूसरों को भी महफूज़ रखें।

आइए, आज यह अहद करें कि हम यातायात नियमों का पालन डर से नहीं, बल्कि
ज़िम्मेदारी, इंसानियत और दीन की तालीम के तहत करेंगे।

क्योंकि असली समझदारी वही है जो
हमें भी बचाए और दूसरों की जान भी सलामत रखे।


✍️ ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत
देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित
पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी को समर्पित
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#MultaniSamaj #TrafficAwareness #Insaniyat #ZindagiAmanatHai #YatayatNiyam

Monday, December 29, 2025

🕯️ इंतेकाल की दर्दनाक खबर ख़तौली के सदर जनाब नसीम साहब के छोटे भाई जनाब शमीम साहब उर्फ़ जज साहब का इंतेकाल

निहायत ही रंजो-ग़म के साथ तमाम बिरादराने इस्लाम को यह इत्तला दी जाती है कि आज दिन पीर, बा-तारीख़ 29 दिसंबर 2025 को ख़तौली के सदर जनाब नसीम साहब के छोटे भाई जनाब शमीम साहब उर्फ़ जज साहब वल्द जनाब मोहम्मद हसन (उम्र तक़रीबन 50 साल) बाशिंदे महलकी वाले, हाल निवासी बुढ़ाना रोड, ख़तौली, जिला मुज़फ़्फ़रनगर (उ.प्र.) का क़ज़ा-ए-ईलाही से इंतेकाल हो गया।

मरहूम काफ़ी अरसे से बड़ी बीमारी में मुब्तिला थे और आख़िरकार अल्लाह तआला की मर्ज़ी के आगे सर-ए-तस्लीम ख़म करते हुए इस फ़ानी दुनिया से हमेशा-हमेशा के लिए रुख़्सत हो गए।
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम अपने पीछे अपनी अहलिया, एक बेटे और दो बेटियों समेत भरा-पूरा परिवार, खानदान, रिश्तेदार और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को ग़मज़दा छोड़ गए हैं। इस दुख की घड़ी में पूरा इलाका और बिरादरी शोकाकुल है।

🕊️ जनाज़े की जानकारी

मरहूम की मय्यत को कल दिन मंगल, बा-तारीख़ 30 दिसंबर 2025 को सुबह 11 बजे सपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम अहबाब से गुज़ारिश है कि ज़्यादा से ज़्यादा तादाद में शरीक होकर सवाब-ए-दारैन हासिल करें और मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत फरमाएँ।

☎️ राब्ते की जानकारी

मय्यत के सिलसिले में किसी भी किस्म की मालूमात के लिए मरहूम के बड़े भाई एवं सदर ख़तौली
जनाब नसीम साहब
📞 मोबाइल: 9897206187
पर राब्ता कायम किया जा सकता है।

🤲 दुआ

अल्लाह तआला मरहूम जनाब शमीम साहब की मग़फ़िरत फरमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए, और घरवालों को इस अज़ीम सदमे को बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए।
आमीन या रब्बुल आलमीन।


📢 एक ज़रूरी ऐलान – इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर देखने में आता है कि किसी अज़ीज़ के इंतेकाल की खबर बिरादरी तक देर से या अधूरी जानकारी के साथ पहुँचती है, जिसकी वजह से लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से अदब के साथ गुज़ारिश करती है कि जब भी इंतेकाल की खबर भेजें, तो इन बातों का ख़ास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता (स्थायी और वर्तमान निवास)।
3️⃣ दफ़न का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार एक-दो अफ़राद के फ़ोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतेकाल हुआ हो तो मरहूम की साफ़ फोटो।
6️⃣ इंतेकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम — जैसे माँ-बाप, भाई-बहन, औलाद वग़ैरह।

👉 इन तमाम मालूमात से खबर मुकम्मल होगी और बिरादरी तक सही व वक़्त पर जानकारी पहुँच सकेगी।


📰 डिस्क्लेमर

पत्रिका में प्रकाशित किसी भी प्रकार का लेख, समाचार, संपादकीय, विचार, टिप्पणी, प्रेस विज्ञप्ति, विज्ञापन या अन्य सामग्री लेखक, संवाददाता अथवा विज्ञापनदाता के निजी विचार हैं।
इनसे पत्रिका के संपादक, प्रकाशक, प्रबंधन या संस्थान की सहमति या समर्थन आवश्यक रूप से अभिप्रेत नहीं है।

प्रकाशित सामग्री की सत्यता एवं किसी भी प्रकार के दावे के लिए संबंधित लेखक या विज्ञापनदाता स्वयं उत्तरदायी होंगे।
पत्रिका एवं प्रबंधन किसी भी प्रकार की कानूनी, सामाजिक या वित्तीय जिम्मेदारी से पूर्णतः मुक्त रहेंगे।

किसी भी विवाद या न्यायिक कार्यवाही की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित
पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को समर्पित
देश की एकमात्र राष्ट्रीय समाचार पत्रिका
“मुल्तानी समाज”

✍️ ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट

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Sunday, December 28, 2025

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन हाजी सलीमुद्दीन साहब का इंतेकाल — बिरादरी में ग़म की लहर, मग़फिरत व सब्र की दुआ

निहायत ही अफ़सोस और रंजो-ग़म के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि आज दिन इतवार, 28 दिसंबर 2025 की शाम तक़रीबन 6–6:30 बजे के दरमियान हाजी सलीमुद्दीन साहब (उम्र लगभग 80 वर्ष), निवासी सारंग रोड, का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया।

अल्लाह तआला की यही मर्ज़ी थी।

मरहूम, गुलाब ठेकेदार (गुहाना), पानीपत वालों के बड़े भाई थे और मूल रूप से (जनपद बागपत, उ.प्र.) के निवासी थे। अपने पीछे एक पुत्र, दो पुत्रियाँ, अहल-ए-ख़ाना, ख़ानदान, कुनबा और तमाम रिश्तेदारों को रोता-बिलखता छोड़कर यह फ़ानी दुनिया हमेशा-हमेशा के लिए छोड़ गए।
हम दुआगो हैं कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त मरहूम की मग़फिरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए और तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।

तदफ़ीन (दफ़न) की जानकारी

मरहूम को कल दिन पीर, 29 दिसंबर 2025 को दोपहर 12 बजे सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर सवाब-ए-दारेन हासिल करें।

नोट: मरहूम के बारे में और अधिक मालूमात के लिए उनके भतीजे बिलाल ख़ान (वल्द जनाब गुलाब ठेकेदार साहब) से मोबाईल नंबर 92554-26000 पर संपर्क किया जा सकता है।


एक ज़रूरी ऐलान — इंतेकाल की खबर भेजने से पहले अहम् हिदायतें

अक्सर देखने में आता है कि इंतेकाल की खबर देर से या अधूरी पहुँचने के कारण बिरादरी के लोग जनाज़े तक नहीं पहुँच पाते। इस कमी को दूर करने के लिए तमाम बिरादराने इस्लाम से अदब के साथ गुज़ारिश करती है कि जब भी किसी अज़ीज़ के इंतेकाल की खबर भेजें, तो निम्नलिखित बातों का ख़ास ख़याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता (मूल निवास और वर्तमान निवास)।
3️⃣ दफ़न का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स (एक-दो) के फ़ोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतेकाल हो, तो मरहूम की फोटो (अगर मुनासिब हो)।
6️⃣ इंतेकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम — जैसे भाई-बहन, वालिदैन, औलाद वग़ैरह।

👉 इन तमाम जानकारियों से खबर मुकम्मल होती है और बिरादरी तक सही-सही मालूमात वक़्त पर पहुँचती है।


डिस्क्लेमर

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Saturday, December 27, 2025

🌙 सरधना से ग़मगीन ख़बर: मरहूमा अमीना का इंतेकाल, बिरादरी में शोक की लहर

मुस्लिम मुल्तानी लोहार बढ़ई बिरादरी के लिए से एक बेहद दुखद और रंज-ओ-ग़म से भरी ख़बर सामने आई है। मंढीयाई चौराहे के पास रहने वाले जनाब मुहम्मद मोबीन की अहेलिया, मरहूमा अमीना (उम्र लगभग 65 वर्ष) का आज 28 दिसंबर 2025, इतवार को सुबह सवेरे इंतेकाल हो गया।

इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलैहि राजिऊन।
अल्लाह की यही मर्ज़ी थी कि मरहूमा इस फानी दुनिया से रुख़्सत हो गईं।

मरहूमा अमीना अपने पीछे चार बेटे, एक बेटी, शौहर और एक बड़ा कुनबा व परिवार को ग़मगीन हालत में छोड़ गई हैं। उनके इंतेकाल की ख़बर मिलते ही इलाके में शोक की लहर दौड़ गई और ताज़ियत के लिए लोगों का आना-जाना शुरू हो गया।

परिवार से मिली जानकारी के अनुसार, आज ही ज़ुहर की नमाज़ के बाद मरहूमा की मय्यत को सरधना के कब्रिस्तान में पूरे एहतराम के साथ सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

हम तमाम अहले-बिरादरी और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब की ओर से अल्लाह तआला से दुआ करते हैं कि वह मरहूमा अमीना की मग़फिरत फरमाए, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे और उन्हें जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फरमाए। साथ ही, उनके परिजनों को इस अज़ीम सदमे को सहन करने की सब्र-ए-जमील अता हो।


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अल्लाह तआला मरहूमा को जन्नत में जगह अता फरमाए। आमीन।

Thursday, December 25, 2025

ग़मगीन ख़बर: गांव बरवाला (बागपत) में जनाब जाकिर साहब का इंतेकाल, बिरादरी में शोक की लहर

अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार बढ़ई बिरादरी को बड़े ही रंज-ओ-ग़म के साथ यह इत्तिला दी जाती है कि गांव बरवाला, जिला बागपत (उत्तर प्रदेश) निवासी मिस्त्री इलियास साहब के बड़े बेटे जनाब जाकिर साहब (उम्र तक़रीबन 50 वर्ष) का आज दिन जुमा, 26 दिसंबर 2025 को क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया है।

अल्लाह की यही मर्ज़ी थी।
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम जनाब जाकिर साहब अपने पीछे तीन बेटे — नाजिम, समीर और सुहेल — को छोड़ गए हैं। परिवार, रिश्तेदारों और पूरी बिरादरी में इस अचानक हुए इंतेकाल से गहरा शोक व्याप्त है।

मिली जानकारी के मुताबिक आज ही जुमा की नमाज़ के बाद, गांव बरवाला के कब्रिस्तान में मरहूम को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

हम तमाम अहले-बिरादरी अल्लाह तआला की बारगाह में हाथ उठाकर दुआ करते हैं कि
अल्लाह तआला मरहूम की मग़फिरत फरमाए, उनके दर्जात बुलंद करे और जन्नत-उल-फिरदौस में आला मुक़ाम अता फरमाए।
आमीन। सुम्मा आमीन।

📞 ज़्यादा मालूमात के लिए संपर्क:

  • मुहम्मद इलियास (वालिद) – 9837826728, बरवाला
  • कल्लू – 9837289866, बरवाला/बड़ौत
  • जमील – 9896753786, बरवाला/सोनीपत
  • मास्टर जी इक़बाल – 9784606290, बरवाला/दिल्ली

मय्यत के बारे में और जानकारी के लिए ऊपर दिए गए नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है।


🛑 एक ज़रूरी ऐलान

इंतेकाल की खबर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर देखने में आता है कि किसी अज़ीज़ के इंतेकाल की सूचना देर से या अधूरी पहुंचने के कारण बिरादरी के लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से अदब के साथ गुज़ारिश करती है कि इंतेकाल की खबर भेजते वक्त निम्न बातों का ख़ास ख़याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता (स्थायी व वर्तमान निवास)।
3️⃣ दफ़्न का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स (एक-दो) के मोबाइल नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतेकाल हुआ हो तो मरहूम की फोटो (अगर मुनासिब हो)।
6️⃣ इंतेकाल की वजह (अगर बताना उचित समझें)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम — जैसे वालिदैन, भाई-बहन, औलाद वग़ैरह।

👉 इन तमाम जानकारियों से खबर मुकम्मल होगी और बिरादरी तक सही वक़्त पर सही सूचना पहुंचेगी।


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पत्रिका में प्रकाशित किसी भी प्रकार का लेख, समाचार, विचार, टिप्पणी, विज्ञापन या अन्य सामग्री संबंधित लेखक, संवाददाता या विज्ञापनदाता के व्यक्तिगत विचार हैं।
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प्रकाशित सामग्री की सत्यता, विश्वसनीयता या दावों की ज़िम्मेदारी संबंधित लेखक/विज्ञापनदाता की होगी।
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अल्लाह तआला मरहूम को रहमतों से नवाज़े और अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।

मुल्तानी लजवान खानदान में निकाह की मुबारक इत्तिला, दुआओं और अदब के साथ आम दावत

भीलवाड़ा / उदयपुर (राजस्थान)। तमाम अहले-मुल्तानी बिरादरान को अदब और तहज़ीब के साथ यह मुबारक इत्तिला दी जाती है कि अल्लाह तआला के फ़ज़्ल-ओ-करम, हुज़ूर पाक हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ के सद्क़े-तुफ़ैल और पीर-ओ-मुर्शिद की नज़र-ए-करम से मरहूम अलाबक्स लजवान के पड़पोते, मरहूम हाजी अब्दुल रशीद साहब लजवान के पोते तथा हमारे अज़ीज़ भाई हाजी मोहम्मद रफीक लजवान के फरज़ंद मोहम्मद अली का निकाह तय पाया है। यह मुबारक रिश्ता जनाब अब्दुल सत्तार साहब भुट्टो की नेक दुख्तर सना कौसर के साथ तय हुआ है, जो मरहूम हाजी अब्दुल रहीम साहब भुट्टो की पोती हैं।

यह खुशख़बरी न सिर्फ़ दो घरानों का मेल है, बल्कि खानदानी रिवायत, आपसी मोहब्बत और सामाजिक भाईचारे की मज़बूती का पैग़ाम भी है। अहले-ख़ानदान ने दुआ की अपील करते हुए कहा कि अल्लाह तआला इस रिश्ते को सकून, बरकत और दायमी ख़ुशियों से मालामाल फ़रमाए। आमीन।


💫 प्रोग्राम (इंशाअल्लाह)

  • हल्दी रस्म: 1 अप्रैल 2026, बुधवार
  • दाल-बाटी, हार-फूल, निकासी व बारात रवानगी: 2 अप्रैल 2026, गुरुवार
  • निकाह: 14 शव्वाल 1447 हिजरी, मुताबिक 3 अप्रैल 2026 (जुम्मा)
    दरमियान असर-मगरिब,
  • दावत-ए-वलीमा: 5 अप्रैल 2026, इतवार, बाद नमाज़-ए-मगरिब

🤲 अहले-ख़ानदान की मौजूदगी और दुआओं का एहतमाम

इस मुबारक मौके पर लजवान खानदान के अलमुकल्लिफ़ीन, चश्म-ए-बराह और अलमुन्तज़िरीन की शिरकत से महफ़िल रौनक़ अफ़रोज़ होगी। बुज़ुर्गों की दुआ, नौजवानों का जोश और बच्चों की मासूम इल्तिज़ा इस निकाह को यादगार बनाएगी।

मासूम इल्तिज़ा:
“मेरे चाचू-मामू-भैय्या की शादी में ज़रूर-ज़रूर आना।”


📍 पता

मस्जिद वाली गली, ग़रीब नवाज़ कॉलोनी, भवानी नगर, , राजस्थान


📲 रابطा (नाम व मोबाइल नंबर)

  • अब्दुल गनी लजवान: 9928777786, 9509777786
  • हाजी मोहम्मद रफीक लजवान: 9887057045
  • मोहम्मद इमरान लजवान: 9829047786
  • मोहम्मद इरफान: 9928454000
  • मोहम्मद अली: 7240231895
  • मोहम्मद रजा: 9887057046
  • मोहम्मद सूफियान: 9829170499

अहले-लजवान खानदान तमाम अहले-मुल्तानी बिरादरान, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और दोस्तों से गुज़ारिश करता है कि इस मुबारक मौके पर अपनी मौजूदगी से महफ़िल को रौनक़ बख़्शें और नवविवाहित जोड़े को दुआओं से नवाज़ें।


पत्रकारिता नोट:
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मुल्तानी लजवान खानदान में निकाह की खुशखबरी, इमान-अफरोज माहौल में होगा विवाह आयोजन

भीलवाड़ा/उदयपुर। अल्लाह तआला के फ़ज़्ल-ओ-करम और हुज़ूर पाक हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ के सद्क़े-तुफ़ैल से मुल्तानी लजवान खानदान में एक मुबारक और खुशी से भरा अवसर आने जा रहा है। मरहूम अलाबक्स लजवान के पड़पोते, मरहूम हाजी अब्दुल रशीद साहब लजवान के पोते तथा हाजी मोहम्मद रफीक लजवान के फरज़ंद मोहम्मद अली का निकाह नेक दुख्तर सना कौसर के साथ तय पाया है। यह मुबारक रिश्ता पूरे खानदान और बिरादरी के लिए खुशियों का पैग़ाम लेकर आया है।

परिवार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, निकाह से जुड़े कार्यक्रम इंशाअल्लाह तयशुदा तारीख़ों के अनुसार आयोजित किए जाएंगे। 1 अप्रैल 2026, बुधवार को हल्दी रस्म होगी, जबकि 2 अप्रैल 2026, गुरुवार को दाल-बाटी, हार-फूल, निकासी और बारात की रवानगी संपन्न होगी।
मुख्य निकाह कार्यक्रम 3 अप्रैल 2026, जुम्मा, 14 शव्वाल 1447 हिजरी को असर-मगरिब के दरमियान में अदा किया जाएगा। इसके बाद 5 अप्रैल 2026, इतवार को नमाज़-ए-मगरिब के बाद दावत-ए-वलीमा का आयोजन किया जाएगा।

इस खुशी के मौके पर लजवान खानदान के तमाम बुज़ुर्गों, अलमुकल्लिफ़ीन, चश्म-ए-बराह और अलमुन्तज़िरीन की मौजूदगी से कार्यक्रम और भी रौनक़ पाएगा। परिवार के सदस्यों ने बताया कि यह निकाह न सिर्फ़ दो परिवारों के बीच रिश्ता जोड़ेगा, बल्कि आपसी भाईचारे, मोहब्बत और सामाजिक एकता को भी मज़बूत करेगा।

खास बात यह है कि इस खुशी के मौके पर मासूम बच्चों की दिल से निकली इल्तिज़ा भी सबके दिलों को छू रही है—“मेरे चाचू-मामू-भैय्या की शादी में ज़रूर-ज़रूर आना।” यह मासूम अपील इस आयोजन को और भी यादगार बना देती है।

अहले लजवान खानदान ने तमाम अहले-मुल्तानी बिरादरान, रिश्तेदारों और दोस्तों से इस मुबारक मौके पर शरीक होकर दुआओं से नवविवाहित जोड़े को नवाज़ने की गुज़ारिश की है। आयोजन स्थल भीलवाड़ा, राजस्थान में तय किया गया है, जहां मेहमानों के स्वागत की मुकम्मल तैयारियां की जा रही हैं।

पत्रकारिता नोट:
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार में पंजीकृत, देश की राजधानी से प्रकाशित, मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी को समर्पित एकमात्र पत्रिका के लिए ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट।

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Wednesday, December 24, 2025

🕯️ इंना लिल्लाही व इन्ना इलैहि राजिऊनमुल्तानी लोहार बढ़ई बिरादरी में ग़म की लहर, सुबरा बी का इंतक़ाल

अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार बढ़ई बिरादरी को यह बेहद रंज-ओ-ग़म के साथ इत्तला दी जाती है कि

आज दिन जुमेरात, 25 दिसंबर 2025 को मरहूम जनाब सादिक साहब (क़ुतुबगढ़ वाले) हाल बाशिंदा मेन रोड, कस्बा थानाभवन, ज़िला शामली (उत्तर प्रदेश) की अहलिया और मरहूम खालिद की वालिदा सुबरा बी का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतक़ाल हो गया है।

मरहूमा का दफ़ीना ज़ोहर की नमाज़ के वक़्त अदा किया जाएगा।
इस दुखद घड़ी में पूरी बिरादरी की हमदर्दियां और तअज़ियत घरवालों के साथ हैं।
अल्लाह तआला से दुआ है कि वह मरहूमा की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ीचों में से एक बाग़ बनाए और घरवालों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।


📌 एक ज़रूरी ऐलान — इंतक़ाल की ख़बर भेजने से पहले इन बातों का रखें ख़ास ख़्याल

अक्सर देखने में आता है कि किसी अज़ीज़ के इंतक़ाल की ख़बर या तो देर से पहुँचती है या अधूरी होती है, जिसकी वजह से कई लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि जब भी इंतक़ाल की ख़बर भेजें, तो निम्न जानकारी ज़रूर शामिल करें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम, वल्दियत या शौहर का नाम
2️⃣ पूरा पता (स्थायी व वर्तमान निवास)
3️⃣ दफ़ीने का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स के 1–2 संपर्क नंबर
5️⃣ अगर मर्द का इंतक़ाल हुआ हो तो मरहूम की फोटो
6️⃣ इंतक़ाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम — माँ-बाप, भाई-बहन, औलाद आदि

👉 इन तमाम जानकारियों से ख़बर मुकम्मल होती है और बिरादरी तक सही वक़्त पर सही सूचना पहुँचती है।


📰 डिस्क्लेमर

पत्रिका में प्रकाशित सभी लेख, समाचार, विचार, टिप्पणियां, प्रेस विज्ञप्तियां व विज्ञापन संबंधित लेखक, संवाददाता या विज्ञापनदाता के निजी विचार हैं।
इनसे पत्रिका के संपादक, प्रकाशक या प्रबंधन की सहमति आवश्यक रूप से अभिप्रेत नहीं है।

प्रकाशित सामग्री की सत्यता व दावों की पूरी ज़िम्मेदारी लेखक या विज्ञापनदाता की होगी।
किसी भी विवाद या न्यायिक कार्यवाही की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित
पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार बढ़ई बिरादरी को समर्पित
देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए

✍️ ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट
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अल्लाह तआला मरहूमा को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए। आमीन सुम्मा आमीन।

Thursday, December 18, 2025

🕊️ इंतेकाल की दुखद ख़बर स्वरूप नगर दिल्ली में मरहूमा मोमीना का इंतकाल, 19 दिसंबर को सुपुर्द-ए-ख़ाक

स्वरूप नगर, दिल्ली। मुस्लिम मुल्तानी लोहार एवं बढ़ई बिरादरी के लिए अत्यंत दुःख और अफसोस के साथ यह खबर दी जा रही है कि जनाब मंजूर हसन कुर्डी वाले (हाल बाशिंदा लोनी, जनपद गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश), जो दिल्ली पुलिस में सेवारत हैं, की अहेलिया तथा मीर हसन बावली वाले की बहन मरहूमा मोमीना का स्वरूप नगर, दिल्ली में इंतकाल हो गया है।

इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलैहि राजिऊन।
अल्लाह तआला की यही मर्ज़ी थी।

मिली जानकारी के मुताबिक मरहूमा को कल ( आज ) दिनांक 19 दिसंबर 2025, दिन जुमा को सुबह 10:00 बजे स्वरूप नगर, दिल्ली स्थित कब्रिस्तान में मय्यत को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

इस गमगीन मौके पर तमाम बिरादराने इस्लाम मरहूमा के लिए दुआगो हैं कि अल्लाह तआला उनकी मग़फिरत फरमाए, उनके दरजात बुलंद करे और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुकाम अता फरमाए। साथ ही अल्लाह तआला अहल-ए-ख़ाना को इस भारी सदमे को सहन करने की ताक़त और सब्र-ए-जमील अता फरमाए।
आमीन सुम्मा आमीन।

📞 अधिक जानकारी हेतु संपर्क करें:

  • जहूर हसन कुर्डी: 9350576755
  • मीर हसन बावली: 9760425055 / 9412505529

🕯️ बिरादरी से अहम गुज़ारिश

तमाम अहबाब से गुज़ारिश है कि दुःख की इस घड़ी में मय्यत वालों के घर जाकर इस्लामी तहज़ीब और शरई आदाब का पूरा ख्याल रखें—

  • दुनियावी बातचीत और हंसी-मज़ाक से परहेज़ करें
  • खाने-पीने का बोझ न बनें
  • गले मिलने, लंबा मुसाफ़ा करने से बचें
  • पान, बीड़ी, सिगरेट, गुटखा या किसी भी नशे का प्रयोग न करें
  • गमगीन माहौल, सादा लिबास और संजीदा रवैया अख़्तियार करें
  • धीमी आवाज़ में कलमा-ए-तैय्यबा पढ़ते हुए चलें
  • तफ़रीह या दिखावे से पूरी तरह परहेज़ करें

यह सब बातें न सिर्फ इंसानी बल्कि इस्लामी तालीम का भी अहम हिस्सा हैं।


📢 ज़रूरी ऐलान: इंतेकाल की खबर भेजने से जुड़ी हिदायतें

अक्सर देखा गया है कि इंतेकाल की खबर अधूरी या देर से पहुंचने के कारण बिरादरी के लोग जनाज़े तक नहीं पहुंच पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि इंतेकाल की खबर भेजते समय निम्न जानकारियां अवश्य दें—

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम, वल्दियत या शौहर का नाम
2️⃣ स्थायी व वर्तमान पता
3️⃣ दफन का सही समय व कब्रिस्तान का नाम
4️⃣ घर के जिम्मेदार व्यक्तियों के संपर्क नंबर
5️⃣ (यदि मर्द हों) मरहूम की फोटो
6️⃣ इंतकाल की वजह (यदि मुनासिब हो)
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम (भाई, बहन, औलाद आदि)

👉 इससे खबर मुकम्मल होगी और बिरादरी को सही व समय पर जानकारी मिल सकेगी।


पत्रिका में प्रकाशित समस्त समाचार, लेख, विचार, प्रेस विज्ञप्ति एवं विज्ञापन संबंधित लेखक/संवाददाता/विज्ञापनदाता के निजी विचार हैं। इनसे पत्रिका, संपादक, प्रकाशक या प्रबंधन की सहमति आवश्यक नहीं मानी जाएगी।

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अली मुल्तानी की खास रिपोर्ट

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🌙 कम उम्र में हिफ़्ज़-ए-क़ुरआन की अज़ीम सआदत

✨ हाफ़िज़ मोहम्मद ज़ियान भट्टी बने क़ुरआन के अमीन, इंदौर में दावत-ए-दस्तारबंदी का ऐलान

इंदौर (मध्य प्रदेश) में कम उम्र में क़ुरआन-ए-पाक हिफ़्ज़ करने की अज़ीम नेअमत हासिल करने वाले हाफ़िज़ मोहम्मद ज़ियान भट्टी की दस्तारबंदी 18 दिसंबर 2025 को मदरसा मुख़्तारुल उलूम में आयोजित की जाएगी। यह मौक़ा इल्म, तक़वा और रूहानियत का पैग़ाम लेकर आया है।

इंदौर (म.प्र.)

तमाम अहले-ईमान के लिए यह खबर दिली मसर्रत और रूहानी सुकून का सबब है कि अल्लाह तआला के फ़ज़्ल-ओ-करम और उसके हबीब हज़रत मुहम्मद ﷺ के सदक़े-तुफ़ैल, मरहूम अब्दुल वहाब साहब भट्टी के पोते और परिवार के चश्म-ओ-चराग़ हाफ़िज़ मोहम्मद ज़ियान भट्टी ने कम उम्र में क़ुरआन-ए-पाक हिफ़्ज़ करने की अज़ीम सआदत हासिल कर ली है।

क़ुरआन-ए-पाक का हाफ़िज़ बनना महज़ इल्मी मुक़ाम नहीं, बल्कि यह अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की वह खास अमानत है जो सब्र, तक़वा, परहेज़गारी और आला अख़लाक़ की बड़ी ज़िम्मेदारी अपने साथ लेकर आती है। अल्लाह तआला बहुत कम लोगों को अपने पाक कलाम का हामिल बनने का शरफ़ अता फरमाता है, और हाफ़िज़ मोहम्मद ज़ियान इस नेअमत से सरफ़राज़ हुए हैं।

इस मुबारक मौके पर दुआ है कि अल्लाह तआला हाफ़िज़ मोहम्मद ज़ियान को क़ुरआन पर अमल करने वाला बनाए, दीन व दुनिया दोनों में कामयाबी अता फरमाए, और उन्हें अपने वालिदैन व असातिज़ा के लिए सदा की ठंडक-ए-आँख बनाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

🌹 दावत-ए-दस्तारबंदी 🌹

तारीख़: 18 दिसंबर 2025 (जुमेरात)
वक़्त: सुबह 10:00 बजे
मक़ाम: मदरसा मुख़्तारुल उलूम, धार रोड, बांक, इंदौर

तमाम अहबाब से अदब के साथ गुज़ारिश है कि इस मुबारक और यादगार मौके पर तशरीफ़ लाकर अपनी मौजूदगी और दुआओं से इस रूहानी महफ़िल को रौनक़ बख़्शें।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत,
देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित,
मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी को समर्पित
देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए
अब्दुल कादिर मुल्तानी की खास रिपोर्ट

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Monday, December 15, 2025

रिश्तों को जोड़ने और ज़रूरतमंदों की मदद की पाक मुहिम — खामोशी से, ख़ुलूस के साथ

मोहतरम हज़रात, समाज में टूटते रिश्तों को जोड़ने और ज़रूरतमंद परिवारों की मदद के लिए एक खामोश लेकिन असरदार मुहिम शुरू की गई है। इस मुहिम का मक़सद सिर्फ नए रिश्ते जोड़ना ही नहीं, बल्कि उन पुराने रिश्तों की दरारों को भी भरना है जिनमें वक्त या हालात की वजह से दूरी आ गई थी।

अलहम्दुलिल्लाह, इस नेक काम में हाजी तौकीर साहब, हाजी क़ासिम साहब, मिर्ज़ा नसीम साहब और अफ़ज़ाल मुगल साहब पूरी टीम के साथ तन, मन और धन से आगे बढ़कर रहबरी कर रहे हैं। आपसी मसलों को सुलझाना, भरोसे को फिर से कायम करना और समाज में मोहब्बत की फिज़ा बनाना — यही इस मुहिम की असल पहचान है।

बीते कुछ दिनों में टीम ने कई बच्चियों की शादियों में मदद की, जिससे समाज में उम्मीद की एक नई किरण जगी है। इसके बाद कई और ज़रूरतमंद लोगों ने संपर्क किया है। ज़िम्मेदारियां बढ़ रही हैं, और आगे भी बढ़ेंगी। इसी वजह से अब और ऐसे साथियों की ज़रूरत है जो इस कार-ए-ख़ैर में बिना नाम और शोहरत के शामिल होना चाहते हों।

यहां किसी नाम की नुमाइश नहीं, बल्कि ऊपर आसमान में देखने वाले रब पर यक़ीन है, जिसने नेक अमल पर इनाम का वादा किया है। मदद करने वालों के लिए एक अलग “इलीट पैनल / क्लब” बनाया जा रहा है, ताकि ज़रूरतमंदों की इमदाद पूरे एहतियात और इज़्ज़त के साथ की जा सके। इस पैनल में शामिल लोग आपसी मशवरे से मदद करेंगे, जबकि आम ग्रुप में सिर्फ सूचना दी जाएगी।

खास बात यह है कि इस मुहिम में कोई फंड, कोई कमीशन और कोई कटौती नहीं है। हम टारगेट तय करते हैं और 100 प्रतिशत इमदाद मुस्तहक तक पहुंचाई जाती है। छोटी-छोटी रक़में मिलकर बड़े मसले हल करती हैं — क्योंकि बूंद-बूंद से ही सागर बनता है।

जो लोग इस नेक काम में हिस्सा लेना चाहते हैं, वे फोन या व्हाट्सएप के ज़रिये संपर्क कर सकते हैं:
हाजी तौकीर साहब – सहारनपुर
हाजी क़ासिम साहब – सहारनपुर
अफ़ज़ाल मुगल – सहारनपुर
मुहम्मद वसीम – देवबंद
जनाब ताहिर – मुज़फ्फरनगर
हाजी नसीम – खतौली
रईस आज़म – खतौली
जनाब मोबीन साहब – दिल्ली

यह अपील किसी व्यक्तिगत मक़सद के लिए नहीं, बल्कि खुदा के बंदों की मदद के लिए है। किसी का नाम ज़बरदस्ती शामिल नहीं किया जा रहा — हर शख़्स खुद सोच-समझकर इस मुहिम का हिस्सा बने।

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जिला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश से
पत्रकार मोहम्मद वसीम की खास रिपोर्ट।

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Saturday, December 13, 2025

मुल्तानी नौजवानी का जोश, खेल का जुनून और बिरादरी की शान — भीलवाड़ा में आज “चैम्पियंस ट्रॉफी 2025” का महा मुकाबला

तमाम 22 खेड़े की मुल्तानी बिरादरी के बुज़ुर्गों, नौजवानों और खेल प्रेमियों को पूरे अदब और मोहब्बत के साथ इस शानदार खेली जलसे में शरीक होने की दावत दी जाती है। आज का यह आयोजन न सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता है, बल्कि मुल्तानी नौजवानी की एकता, हुनर और हौसले का इज़हार भी है।

आज, दिन इतवार 14 दिसंबर को भीलवाड़ा शहर में एक ज़बरदस्त और रोमांच से भरा महा मुकाबला होने जा रहा है, जिसमें मुल्तानी बिरादरी के नौजवान खिलाड़ी पूरे जोश, जज़्बे और जुनून के साथ मैदान में उतरेंगे। इस टूर्नामेंट की खास बात यह है कि इसमें न सिर्फ स्थानीय, बल्कि बाहर के शहरों से भी मजबूत टीमें हिस्सा ले रही हैं।

टूर्नामेंट में शामिल टीमें

इस ऐतिहासिक मुकाबले में कुल 8 टीमें आमने-सामने होंगी—

  • भीलवाड़ा शहर से — 3 टीमें
  • उदयपुर शहर से — 2 टीमें
  • निम्बाहेड़ा से — 1 टीम
  • अजमेर से — 1 टीम
  • पारोली से — 1 टीम

अब देखना यह है कि कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच “चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 🏆” किस टीम के सर पर सजेगी और कौन मुल्तानी खेल प्रतिभा का परचम बुलंद करेगा।

नारा जो जोश भर दे

“खेलेगा मुल्तानी — जीतेगा मुल्तानी”

यह नारा आज हर खिलाड़ी के हौसले और हर दर्शक की तालियों में गूंजेगा।

आयोजन स्थल

📍 पता: Big Hit, चित्तौड़ रोड, भीलवाड़ा (राजस्थान)

बिरादरी के तमाम लोगों से गुज़ारिश है कि ज़्यादा से ज़्यादा तादाद में पहुंचकर अपने नौजवान खिलाड़ियों की हौसला अफ़ज़ाई करें, ताकि उनका मनोबल और बुलंद हो और खेल के मैदान में मुल्तानी शान निखर कर सामने आए।


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भीलवाड़ा, राजस्थान से पत्रकार अब्दुल क़ादिर मुल्तानी की ख़ास रिपोर्ट

भीलवाड़ा में आयोजित टूर्नामेंट कैंसिल हुई ऐन मौके पर एक दुखद खबर ने सभी को हैरत में डाल दिया। हमारे प्यारे अब्दुल कय्यूम (पितास वाले) अब इस दुनिया में नहीं रहे।

हम उनकी की रूह को सकून के लिए दुआ करते हैं और उनके परिवार को सब्र और मगफिरत देने की दुआ करते हैं। अल्लाह उन्हें जन्नत में आला मकाम दे। आमीन।

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नौजवानी में बुझ गया एक चिराग़ — मोहतरम वसीम साहब का इंतकाल

बेइंतहा अफ़सोस, गहरे दुख और रंजो-ग़म के साथ यह दिल दहला देने वाली इत्तिला तमाम अहले-इस्लाम और बिरादराने मुल्तानी तक पहुंचाई जाती है कि

मोहतरम जनाब महबूब साहब (नगला वाले) के फरज़ंद, जनाब वसीम साहब (उम्र लगभग 26–27 वर्ष) का कल दिन शनिवार, 13 दिसंबर 2025 को ईशा की नमाज़ के दरमियान क़ज़ा-ए-ईलाही से इंतकाल हो गया।

नौजवानी की दहलीज़ पर खड़ा यह होनहार नौजवान यूँ अचानक हम सबको छोड़कर अपने रब के हुज़ूर हाज़िर हो गया। मरहूम के कुछ भाई गुजरात स्टेट में राइस मिल के कारोबार से जुड़े हुए हैं। इस अचानक सदमे से पूरा खानदान, रिश्तेदार और बिरादरी ग़म में डूबी हुई है।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।
अल्लाह रब्बुल करीम की यही मर्ज़ी थी, और उसी पर सब्र करना हमारा ईमान है।

तदफ़ीन की जानकारी

मरहूम की तदफ़ीन आज दिन इतवार, 14 दिसंबर 2025 को
सुबह 11:30 बजे अदा की जाएगी,
सपुर्द-ए-ख़ाक इंशाअल्लाह

मजीद मालूमात के लिए

अब्दुल हमीद साहब (ट्रोनिका सिटी) से राब्ता क़ायम करें
📞 98181-54086


एक ज़रूरी ऐलान व अहम हिदायत

अक्सर देखा गया है कि इंतकाल की खबर या तो देर से पहुंचती है या अधूरी होती है, जिसकी वजह से बहुत से लोग जनाज़े और तदफ़ीन में शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से अदब के साथ गुज़ारिश करती है कि जब भी इंतकाल की खबर भेजें, तो इन बातों का ख़ास ख्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वालिद/शौहर का नाम
2️⃣ पूरा पता (स्थायी व वर्तमान निवास)
3️⃣ तदफ़ीन का सही वक़्त और क़ब्रिस्तान का नाम
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स का संपर्क नंबर
5️⃣ अगर मर्द का इंतकाल हो तो मरहूम की फोटो
6️⃣ इंतकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम (भाई, बहन, वालिदैन, औलाद आदि)

👉 इन तमाम जानकारियों से खबर मुकम्मल होती है और बिरादरी को सही वक़्त पर सही मालूमात मिल पाती है।


📰 डिस्क्लेमर (Disclaimer):
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अल्लाह तआला मरहूम को जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फरमाए, पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता करे। आमीन। 🤲

बिरादरी की अमानत और अंजुमन की जवाबदेही

सोचने का वक्त अब भी बिरादरी की अमानत और अंजुमन की जवाबदेही

 है… वरना पछतावे के सिवा कुछ नहीं बचेगा

बिरादरी और अंजुमन किसी एक व्यक्ति की जागीर नहीं होती, बल्कि यह आने वाली नस्लों की अमानत होती है। अगर कोई शख्स अपने घर या दफ्तर में बैठकर भी सिर्फ 10 मिनट निकालकर बिरादरी और अंजुमन के मसलों पर सोचने को तैयार नहीं है, तो उसे आत्ममंथन करना चाहिए कि वह वाकई बिरादरी का हमदर्द है भी या नहीं।

आज अंजुमन मुल्तानी मुग़ल आह्नग्रान, बड़का मार्ग बड़ौत (जनपद बागपत, उत्तर प्रदेश) से जुड़े जिन गंभीर सवालों ने सिर उठाया है, वे किसी व्यक्तिगत टकराव का नतीजा नहीं, बल्कि वर्षों की लापरवाही, गलत फैसलों और जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति का परिणाम हैं।

गलतियां कमेटियों की, आरोप एक व्यक्ति पर

सबसे अफसोसनाक पहलू यह है कि अंजुमन की कमेटियों और समितियों द्वारा की गई लगभग हर बड़ी चूक का ठीकरा एक व्यक्ति—अलीहसन मुल्तानी—के सिर फोड़ा जा रहा है।
नक्शा पास न कराना हो, बायलॉज के मुताबिक काम न होना हो, रोज़नामचा रजिस्टर न बनाना हो, 33 वर्षों का हिसाब न देना हो, गलत वोटर लिस्ट छपवाना हो, बिना चुनाव सदर बनाना हो, या फिर आरटीआर, बैलेंस शीट, ऑडिट और बजट जैसे अनिवार्य दस्तावेज़ न तैयार करना—इन तमाम मामलों में जिम्मेदारी कमेटियों की थी, लेकिन आरोप किसी और पर लगाए जा रहे हैं।

अंजुमन की संपत्ति और पारदर्शिता पर सवाल

आरोप यह भी हैं कि अंजुमन का गलत ढंग से बना भवन—जिसमें हवा, रोशनी और गैलरी तक का सही इंतज़ाम नहीं—बिना वैध नक्शे के खड़ा कर दिया गया।
अंजुमन का सामान बिना बिरादरी से पूछे बेचा गया, फर्जी लोगों से मेंबरशिप रसीदें कटवाई गईं, लाखों-करोड़ों रुपये के कथित फर्जी चंदे के जरिए धन का दुरुपयोग हुआ, यहां तक कि अंजुमन की दुकानों को कुछ ओहदेदारों ने अपने नाम नगर पालिका में दर्ज करा लिया।

इन सबके बीच सवाल यह भी है कि जब बिरादरी इतना बड़ा भवन बनवा सकती है, तो नक्शा पास कराने की फीस, आर्किटेक्ट और इंजीनियर की फीस क्यों नहीं दे सकती थी? क्या बिरादरी ने कभी कमेटी को नक्शा पास न कराने के लिए मना किया था?

सरकारी जांच और बढ़ता खतरा

आज के दौर में, जब केंद्र और राज्य सरकारें मुस्लिम समाज की संपत्तियों की गहन जांच कर रही हैं, ऐसे में दस्तावेज़ी तौर पर कमजोर अंजुमन किसी भी समय बड़े संकट में फंस सकती है।
नगर पालिका परिषद बड़ौत, विकास प्राधिकरण बागपत और जिला प्रशासन को कथित तौर पर चकमा देकर किया गया अवैध निर्माण अब सिर्फ सरकार, संविधान, न्यायालय और प्रशासन की रहमदिली पर टिका हुआ है।

आखिर जिम्मेदार कौन?

यह सवाल बार-बार सामने आता है कि इतनी बड़ी-बड़ी गलतियों का जिम्मेदार कौन है?
अलीहसन मुल्तानी का कहना है कि वर्षों पहले बिरादरी ने अयोग्य, बेईमान और गैर-जिम्मेदार लोगों के हाथ में अंजुमन की चाबी सौंपकर भारी भूल की। अगर हालात ऐसे ही रहे और अंजुमन कोर्ट-कचहरी के चक्कर में फंस गई, तो भविष्य में नई अंजुमन बनाना सिर्फ मुश्किल ही नहीं, बल्कि नामुमकिन भी हो सकता है।

सोचिए… और जरूर सोचिए

यह वक्त आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर ईमानदार आत्ममंथन का है। अंजुमन किसी एक व्यक्ति के खिलाफ या पक्ष में नहीं, बल्कि पूरी बिरादरी के भविष्य का सवाल है।
अगर आज भी जवाबदेही तय नहीं हुई, पारदर्शिता नहीं आई और सही दिशा में कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी।


प्रेषक:
अलीहसन मुल्तानी
(आपका खादिम, आपका बेटा, आपका भाई)
पूर्व विधायक प्रत्याशी, क्षेत्र 51 बड़ौत, उत्तर प्रदेश

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Friday, December 12, 2025

बेइंतिहा अफ़सोस और रंज–ओ–ग़म के साथ एक दुखद इत्तला

बेहद अफ़सोस और दिली रंज–ओ–ग़म के साथ तमाम अहल-ए-इमान और बिरादराने इस्लाम को यह दुखद इत्तिला दी जाती है कि

आज दिन शनिवार, 13 दिसंबर 2025 को रहमानी चौक, सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) की एक मारूफ़ शख्सियत, मशहूर शायर जनाब साहिल फ़रीदी साहब (मरहूम) के भाई इमाम साहब का आज सुबह क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।
हम सब अल्लाह तआला के हैं और उसी की तरफ़ लौटकर जाना है।

मरहूम इमाम साहब की शादी ख़तौली में हुई थी। उनका इंतकाल उनके अहल-ए-ख़ाना, रिश्तेदारों और चाहने वालों के लिए एक न भरने वाला सदमा है। अल्लाह तआला मरहूम को मग़फ़िरत अता फ़रमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए और पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता करे। आमीन।

नमाज़-ए-जनाज़ा व तदफ़ीन की जानकारी:
🕑 नमाज़-ए-जनाज़ा: आज दोपहर 2:00 बजे
📍 स्थान: मारूफुल कुरआन, राणा पैलेस के पास
⚰️ तदफ़ीन: क़ब्रिस्तान घोटटे शाह, सहारनपुर, उत्तर प्रदेश

तमाम अज़ीज़ों, दोस्तों और बिरादरी के लोगों से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फ़रमाकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और अहल-ए-ख़ाना के ग़म में शरीक हों।


एक ज़रूरी ऐलान

इंतकाल की खबर भेजते समय अहम हिदायतें

अक्सर देखने में आता है कि इंतकाल की खबर देर से या अधूरी जानकारी के साथ पहुंचती है, जिसकी वजह से बहुत से लोग जनाज़े या तदफ़ीन में शामिल नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से अदब के साथ गुज़ारिश करती है कि जब भी किसी के इंतकाल की सूचना भेजें, तो निम्न बातों का ख़ास ख़्याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और उनकी वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता (स्थायी निवास व वर्तमान पता)।
3️⃣ दफ़न का सही वक़्त और क़ब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स (एक-दो) के फ़ोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतकाल हुआ हो तो मरहूम की तस्वीर (अगर मुनासिब हो)।
6️⃣ इंतकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब समझा जाए)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम – जैसे भाई, बहन, वालिदैन, औलाद आदि।

👉 इन तमाम जानकारियों से खबर मुकम्मल होती है और बिरादरी के लोगों तक सही और वक़्त पर सूचना पहुंच पाती है।


📰 डिस्क्लेमर (Disclaimer)

पत्रिका में प्रकाशित किसी भी प्रकार का लेख, समाचार, संपादकीय, विचार, टिप्पणी, प्रेस विज्ञप्ति, विज्ञापन या अन्य सामग्री लेखक, संवाददाता या विज्ञापनदाता के निजी विचार हैं।
इनसे पत्रिका के संपादक, प्रकाशक, प्रबंधन या संस्थान की सहमति या समर्थन आवश्यक रूप से अभिप्रेत नहीं है।

प्रकाशित सामग्री की सत्यता, विश्वसनीयता अथवा किसी भी दावे की ज़िम्मेदारी लेखक या विज्ञापनदाता की स्वयं की होगी। पत्रिका एवं प्रबंधन किसी भी प्रकार की कानूनी, सामाजिक या वित्तीय ज़िम्मेदारी से पूर्णतः मुक्त रहेंगे।

किसी भी विवाद या न्यायिक कार्यवाही की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित,
पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार/बढ़ई बिरादरी को समर्पित
देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए

✍️ ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट

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अल्लाह तआला मरहूम इमाम साहब को जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता करे। आमीन।

Thursday, December 11, 2025

🕌 “कागज़ात से खौफ़, संविधान से परहेज़ — फिर भी अंजुमन को डर किस बात का?”

— अली हसन मुल्तानी की रिपोर्ट, मुल्तानी समाज पत्रिका

कभी सोचा है…
एक रजिस्टर्ड सोसायटी बिना एनुअल रिपोर्ट, बिना ऑडिट, बिना बजट, बिना बैलेंस शीट, बिना नक्शा पास, बिना NOC, बिना समाजी प्रस्ताव, बिना रोजनामचा, बिना RTR और बिना चुनाव के—सालों-साल कैसे “सुरक्षित” रहने का वहम पाल लेती है?

कभी-कभी लगता है जैसे कुछ लोग समझते हों कि कानून उनके दरवाज़े पर दस्तक नहीं देता…
और संविधान तो बस किताबों में लिखा एक नर्म-सा किस्सा है।

लेकिन सवाल बड़ा सीधा है—
किस आधार पर कोई संस्था खुद को पाक-साफ़ और सुरक्षित समझ लेती है, जब उसके पास सफ़ाई के नाम पर एक कागज़ तक नहीं?


📌 जब रिपोर्ट शून्य, हिसाब गायब और रिकॉर्ड हवा—तो भरोसा कैसे ज़िंदा रहेगा?

सालों से समाज की कमाई, दान और मेहनत कोरोना से भी तेज़ी से गायब होती रही…
मगर उसकी रसीदें, हिसाब, फाइलें—इनके तो शायद दर्शन भी दुर्लभ हैं।

कुछ लोगों ने तो व्यवस्था के नाम पर ऐसा वातावरण खड़ा कर रखा है जैसे अंजुमन उनकी पैतृक वसीयत हो।
और समाज?
समाज तो बस खामोशी से तमाशा देखता रहे…?


📌 “बिना चुनाव निर्विरोध अध्यक्ष”—जनाब, यह अंजुमन है या जागीर?

हर पंचवर्षीय योजना में चुनाव के बिना नए सिरे से “निर्विरोध अध्यक्ष” बना देना…
अरे भई, समाज क्या सिर्फ़ सिर हिलाने के लिए है?
या फिर कुछ लोग समझ बैठे हैं कि अंजुमन उनकी निजी दुकान है?

चुनाव—जो संस्था की रूह होते हैं—उन्हें सालों-साल तक कब्र में सुला दिया गया।
और जनता को बताया गया:
"सब ठीक है, हम देख लेंगे…"


📌 जब सरकारें SIR मांग रही हैं—तो रजिस्टर्ड सोसायटी को छूट कैसे?

आज देश की सरकारें आम आदमी तक का सिजरा (SIR) मांग रही हैं।
धार्मिक स्थलों के रिकॉर्ड मांगे जा रहे हैं।
वक़्फ़ संपत्तियों की डिटेल मांगी जा रही है।

ऐसे में क्या रजिस्टर्ड सोसायटी कोई “नूरानी जंतु” है जिसे कानून छू नहीं सकता?

अगर सरकार देश के हर नागरिक के दस्तावेज़ देख सकती है
तो फिर अंजुमनें क्यों इस भ्रम में हैं कि उनका हिसाब मांगना गुनाह है?


📌 “अवैध तहखाना”—क्या पारदर्शिता भी भूमिगत कर दी गई?

बिना जरूरत, बिना अनुमति, बिना नियम…
किसलिए?
किसके लिए?
किस उद्देश्य से?

जब हिसाब जमीन के ऊपर दिखाने की हिम्मत न हो
तो तहखाने जमीन के नीचे बनाने में क्या देर लगती है!


📌 असली ज़िम्मेदार कौन?

उदाहरण सामने है—
रजिस्टर्ड सोसायटी अंजुमन मुल्तानी मुग़ल आह्नग्रान, बड़का मार्ग, बड़ौत।

कागज़ गायब, रिपोर्ट गायब, हिसाब गायब…
और जो लोग अंजुमन के निर्माण से लेकर आज तक हर फाइल पर ताला डालकर बैठे हैं
यही इसकी आज की बदहाली के असली जिम्मेदार हैं।

किसी भी संस्था की जान उसके कागज़ात होते हैं।
और जब कागज़ात पर धूल जम जाती है—
तो संस्थाएं दम तोड़ती नहीं,
धीरे-धीरे मार दी जाती हैं।


📌 समाज और संविधान साथ चलें—तभी अंजुमनें बचेंगी

संस्थाएं सिर्फ़ बोर्ड, ताले और दफ्तरों के नाम से नहीं बचतीं।
वे बचती हैं—
ईमानदारी से, पारदर्शिता से, कागज़ात से, और संविधान के सहारे।

कुछ गूंगे, कुछ बहरे, कुछ अंधे, कुछ नाअहल लोग
समाज की तकदीर तय नहीं कर सकते।
क्योंकि जब अयोग्यता काबिलियत पर भारी पड़ने लगे,
तो संस्थाएं खड़ी नहीं होतीं—
ढह जाती हैं।

सच्चाई साफ़ है—
समाज की उन्नति उन्हीं के हाथ में है
जो हिसाब देने का साहस रखते हैं
और संविधान को अपना रास्ता मानते हैं।


✍️ रिपोर्टर:

अली हसन मुल्तानी
वरिष्ठ समाजसेवी एवं राजनीतिज्ञ, बड़ौत—बागपत, उत्तर प्रदेश

प्रकाशन:
मुल्तानी समाज – सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
दिल्ली से प्रकाशित, मुल्तानी लोहार–बढ़ई बिरादरी की एकमात्र राष्ट्रीय पत्रिका

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जनाब अब्दुल सत्तार साहब के इंतकाल की दुखभरी खबर — मुल्तानी समाज की ओर से गहरी संवेदनाएँ

ज़मीर आलम | मुल्तानी समाज राष्ट्रीय समाचार पत्रिका

गहरे अफसोस और रंजो-गम के साथ यह इत्तिला दी जाती है कि गांव सूप, जिला बागपत (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले और फिलहाल सुल्तानपुरी, दिल्ली (P-4 ईदगाह के पास) में रह रहे जनाब अब्दुल सत्तार साहब का आज दिन जुमेरात, 11 दिसंबर 2025 को कज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया।
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैकहि राजिऊन।

मरहूम एक सादगी पसंद, मिलनसार और नेक-नियत इंसान माने जाते थे, जो अपनी मेहनत-मशक्कत और सीधी सादी ज़िंदग़ी के लिए पहचान रखते थे। बिरादरी में उन्हें “सूप वाले अब्दुल सत्तार” के नाम से जाना जाता था। उनकी रुख़सत ने पूरे परिवार और जान-पहचान वालों को गहरे सदमे में डाल दिया है।

दफनाने का वक़्त फ़िलहाल तय नहीं

खबर लिखे जाने तक जनाज़े और दफन का वक़्त व तफ़सील सामने नहीं आ सकी है।
बिरादरी से गुज़ारिश है कि मरहूम के लिए सदक़ा-ए-जारीया की नीयत से दुआएँ फ़ातेहा करें और अल्लाह तआला से उनकी मग़फिरत की दुआ करें।


मरहूम की यादें और बिरादरी में उनकी पहचान

अब्दुल सत्तार साहब का स्वभाव बेहद नरम, औरों की मदद करने वाला और दोस्ताना था। उनका गुजर जाना परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी बिरादरी के लिए एक बड़ी कमी है, जिसे भरना आसान नहीं।
उनसे जुड़ी छोटी-छोटी यादें आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं — यही उनका असली विरसा है।


एक ज़रूरी ऐलान — इंतेकाल की खबर भेजने वालों के लिए अहम् हिदायतें

अक्सर यह देखा गया है कि किसी अज़ीज़ के इंतकाल की खबर देर से पहुँचती है या अधूरी रहती है, जिससे लोग जनाज़ेदफ्न में शरीक नहीं हो पाते।
इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुजारिश करती है कि जब भी किसी मरहूम/मरहूमा के इंतकाल की सूचना भेजें, इन बातों का खास खयाल रखें:

खबर को मुकम्मल बनाने के लिए ज़रूरी बिंदु—

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम व वल्दियत/शौहर का नाम
2️⃣ पूरा पता—कहाँ के रहने वाले थे और इस वक़्त कहाँ रह रहे थे
3️⃣ जनाज़े और दफनाने का सही वक़्त, तारीख़ और कब्रिस्तान का नाम
4️⃣ घर के जिम्मेदार शख्स का नाम व फ़ोन नंबर
5️⃣ अगर मर्द का इंतकाल हुआ है तो मरहूम का फोटो
6️⃣ इंतकाल की वजह (अगर परिवार बताना मुनासिब समझे)
7️⃣ घर के बाकी अहल-ए-ख़ाना के नाम—भाई, बहन, माँ-बाप, औलाद वगैरह

इन तमाम जानकारियों से न सिर्फ खबर मुकम्मल होती है, बल्कि बिरादरी के लोगों तक सही वक़्त पर सूचना पहुँचती है।


📰 डिस्क्लेमर (Disclaimer)

पत्रिका में प्रकाशित किसी भी प्रकार का लेख, समाचार, संपादकीय, विचार, टिप्पणी, प्रेस विज्ञप्ति, विज्ञापन या अन्य सामग्री लेखक, संवाददाता या विज्ञापनदाता के व्यक्तिगत विचार होते हैं।
इनसे पत्रिका के संपादक, प्रकाशक, प्रबंधन या संस्थान की सहमति अथवा समर्थन आवश्यक रूप से अभिप्रेत नहीं है।

सत्यता, विश्वसनीयता या दावों की जिम्मेदारी लेखक या विज्ञापनदाता की खुद की होगी।
पत्रिका एवं प्रबंधन किसी भी कानूनी, सामाजिक या वित्तीय जिम्मेदारी से पूर्णतः मुक्त रहेगा।

किसी भी विवाद की स्थिति में न्याय क्षेत्र केवल दिल्ली माना जाएगा।


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Wednesday, December 10, 2025

**🌙 मरहूम शफ़ी मोहम्मद साहब के इंतक़ाल पर मुल्तानी समाज की गहरी रंज व मलाल भरी पेशकश

“दिलों को सोग में डुबो गया एक जाने-वाला…”आज निहायत ही अफसोस और रंजो-ग़म के साथ यह इत्तिला दी जाती है कि आज दिन जुमेरात, 11 दिसंबर 2025 को क़ज़ा-ए-इलाही से मरहूम शफ़ी मोहम्मद साहब (मोटियार कोटड़ी वाले) इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत होकर अपने रब के हज़ूर लौट गए।

إِنَّا لِلَّهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ

मरहूम का नमाज़-ए-जनाज़ा नमाज़-ए-ज़ोहर के बाद अदा किया जाएगा और दफ़न सूफियान कब्रिस्तान में अमल में आएगी।

मरहूम का पता:
गुल नगरी, गली नंबर 7, भीलवाड़ा, राजस्थान

मय्यत से मुताल्लिक किसी भी तफ़सीली जानकारी के लिए घर के जिम्मेदार शख़्स
जनाब अब्दुल गनी लजवान साहब – 9928777786
से राब्ता किया जा सकता है।


💠 मरहूम की शख़्सियत

शफ़ी मोहम्मद साहब उन लोगों में से थे जिनके जाने के बाद मोहल्ले की फिज़ा तक सूनी नज़र आने लगती है।
सादा-दिल, खामोश तबियत, और रिश्तों को निभाने में हमेशा आगे रहने वाले—मरहूम की जिंदगी इंसानियत और खिदमत का एक खूबसूरत आइना थी।
बिरादरी में उनकी शख़्सियत को इज़्ज़त, प्यार और दुआओं के साथ याद किया जाता रहेगा।


💠 मुल्तानी समाज की गुज़ारिश — इंतक़ाल की खबर भेजने का सही तरीका

अक्सर देखा गया है कि किसी अज़ीज़ के इंतक़ाल की खबर या तो देर से पहुंचती है या फिर अधूरी होती है। इस वजह से लोग जनाज़े में शरीक नहीं हो पाते और घर वाले मायूस रह जाते हैं।
इसी कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादरानों से गुज़ारिश करती है कि इंतक़ाल की खबर देते समय यह बातें ज़रूर शामिल करें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत/शौहर का नाम
2️⃣ मुकम्मल पता
3️⃣ दफन का वक़्त और कब्रिस्तान का नाम
4️⃣ घर के जिम्मेदार शख़्स का फ़ोन नंबर
5️⃣ अगर मर्द का इंतक़ाल हो तो मरहूम की तस्वीर
6️⃣ इंतक़ाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना—औलाद, भाई-बहन, वालिदैन आदि का ज़िक्र

इन तमाम बातें खबर को मुकम्मल बनाती हैं और बिरादरी के लोगों तक सही वक़्त पर सही मालूमात पहुंचती हैं।


💠 डिस्क्लेमर (Disclaimer)

मुल्तानी समाज में प्रकाशित किसी भी लेख, समाचार, विचार, टिप्पणी, विज्ञापन या सामग्री लेखक एवं विज्ञापनदाता की व्यक्तिगत राय होती है।
प्रबंधन, संपादक या संस्थान इनके लिए ज़िम्मेदार नहीं होंगे।
किसी भी प्रकार के दावे, सत्यता या विश्वसनीयता की पूरी जिम्मेदारी लेखक/विज्ञापनदाता की होगी।
कानूनी विवाद की सूरत में न्याय क्षेत्र केवल दिल्ली होगा।


💠 दुआ-ए-मग़फ़िरत

या अल्लाह…
मरहूम शफ़ी मोहम्मद साहब की कब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे।
उनकी तन्हाई को रोशन कर दे।
उनकी मग़फ़िरत फ़रमा, उनके दरजात बुलंद कर, और उनके घर-वालों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा।
आमीन या रब्बुल आलमीन।


🖋 रिपोर्ट:

अब्दुल गनी लजवान, भीलवाड़ा (राजस्थान)
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युवा मतदाताओं के लिए सुनहरा मौका — 18 वर्ष पूर्ण कर चुके नागरिक अब करा सकते हैं अपना वोटर पंजीकरण

ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट — मुल्तानी समाज

लोकतांत्रिक भारत में प्रत्येक नागरिक का मत सिर्फ अधिकार नहीं, बल्कि उसकी आवाज़ और अस्तित्व की पहचान है। ऐसे में युवा साथियों के लिए एक अहम सूचना जनहित में जारी की जा रही है। यदि आपकी आयु 9 दिसम्बर से 01 जनवरी 2026 के बीच 18 वर्ष पूर्ण हो चुकी है, तो आपके लिए यह सर्वोत्तम अवसर है कि आप अपना नाम आधिकारिक मतदाता सूची (Voter List) में दर्ज कराएँ।

फॉर्म-6 भरकर आसानी से करा सकते हैं पंजीकरण

जो युवा अब वयस्क हो चुके हैं, वे फॉर्म-6 भरकर ऑनलाइन पंजीकरण के माध्यम से अपनी एंट्री वोटर लिस्ट में जोड़ सकते हैं। यह प्रक्रिया बेहद सरल और सुविधाजनक है तथा इसे कोई भी व्यक्ति अपने मोबाइल से भी पूरा कर सकता है।

पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज़

वोटर आईडी के लिए आवेदन करते समय निम्न में से कोई भी दस्तावेज़ उपयोग किया जा सकता है—

पहचान प्रमाण (Identity Proof)

  • आधार कार्ड
  • पैन कार्ड
  • पासपोर्ट
  • हाई स्कूल सर्टिफिकेट
  • जन्म प्रमाणपत्र

परिवार की पुष्टि हेतु (Optional)

  • वर्ष 2003 की सूची में माता, पिता, दादा, दादी, नाना, नानी का नाम

अन्य आवश्यक विवरण

  • मोबाइल नंबर
  • पासपोर्ट साइज फोटो

कहाँ करें आवेदन?

नागरिक निम्न माध्यमों से अपना पंजीकरण करा सकते हैं—

  • लोकवाणी केंद्र
  • जनसेवा केंद्र
  • या स्वयं ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से

यह सुविधा उन सभी युवाओं के लिए बेहद लाभदायक है जो पहली बार मतदान करेंगे और अपने लोकतांत्रिक अधिकार का शुरुआती उपयोग करने जा रहे हैं।


मुल्तानी समाज: इंजीनियर, मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत “मुल्तानी समाज” दिल्ली से प्रकाशित होने वाली एक विशिष्ट मासिक पत्रिका है जो मुल्तानी समाज की सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक तथा शैक्षिक उन्नति के लिए समर्पित है।

यह पत्रिका मुल्तानी लोहार व बढ़ई बिरादरी की आवाज़ को राष्ट्रीय मंच प्रदान करती है और समाज के युवाओं, बुज़ुर्गों, महिला शक्ति और उद्यमियों तक हर ज़रूरी जानकारी को सम्मान के साथ पहुँचाने का कार्य करती है।


संपर्क सूत्र

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Tuesday, December 9, 2025

खतौली के जनाब कमरुद्दीन साहब का इंतकाल—बिरादरी में ग़म की लहर, आज असर के बाद होगा दफ़न


मुज़फ्फरनगर/खतौली —बेइंतहा अफ़सोस और रंजो-ग़म के साथ यह दुख भरी ख़बर तमाम बिरादराना हज़रात तक पहुंचाई जाती है कि जनाब दीन मोहम्मद साहब (ओखला, दिल्ली वालों) के वालिदे मोहतरम जनाब कमरुद्दीन साहब का आज दिन बुध, 10 दिसंबर 2025 को, क़स्बा खतौली, बुढ़ाना रोड (जिला: मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश) में फ़जर की नमाज़ से पहले इंतकाल हो गया।

इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम अपने बेहद नर्म-ख़ुलूस और मिलनसार स्वभाव के लिए जाने जाते थे। इलाक़े और बिरादरी में उनका गहरा सम्मान था। उनके इंतकाल की खबर मिलते ही अहबाब, रिश्तेदार और जानने वालों में गम और अफ़सोस की लहर दौड़ गई।


दफ़न का वक्त और अरेंजमेंट

मरहूम की तदफीन असर की नमाज़ के बाद की जाएगी।
बिरादरी के तमाम हज़ारात से गुज़ारिश है कि जनाजे में शिरकत करके सवाबे दारेन हासिल करें।


मरहूम के लिए दुआएँ

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त,

  • मरहूम जनाब कमरुद्दीन साहब की मग़फिरत फ़रमाए,
  • उनकी क़ब्र को रोशन और पुरसकून बनाए,
  • उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अत़ा फ़रमाए,
  • और अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील और हिम्मत बख्शे।
    आमीन–सुम्मा–आमीन।

एक ज़रूरी ऐलान

इंतेकाल की ख़बर भेजते वक़्त क्या–क्या ज़रूरी शामिल करें?

अक्सर ऐसा देखा गया है कि जानकारी अधूरी होने या देर से पहुंचने की वजह से रिश्तेदार और बिरादरी के लोग जनाज़े या तदफीन तक नहीं पहुँच पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि इंतकाल की खबर भेजते समय इन बिंदुओं का विशेष ख़याल रखें—

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम + वल्दियत/शौहर का नाम
2️⃣ पूरा पता — मूल निवासी कहाँ, और फ़िलहाल कहाँ रहते थे
3️⃣ दफ़न का वक़्त और कब्रिस्तान का नाम
4️⃣ घर के जिम्मेदार 1–2 लोगों के मोबाइल नंबर
5️⃣ (अगर मर्द का इंतकाल हो) तो मरहूम की फोटो
6️⃣ इंतकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना का विवरण — भाई, बहन, औलाद, वालिदैन आदि

इन जानकारियों से खबर पूर्ण होगी और बिरादरी को सही वक़्त पर सही जानकारी मिलेगी।


डिस्क्लेमर (Disclaimer)

पत्रिका में प्रकाशित किसी भी लेख, विचार, समाचार, संपादकीय, टिप्पणी या विज्ञापन की ज़िम्मेदारी लेखक/विज्ञापनदाता की स्वयं की होगी। इसका पत्रिका प्रबंधन, संपादक या संस्था से सहमत होना आवश्यक नहीं है।
किसी भी विवाद की स्थिति में न्याय क्षेत्र केवल दिल्ली रहेगा।


विशेष रिपोर्ट

ज़मीर आलम
“मुल्तानी समाज” — सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार से पंजीकृत, दिल्ली से प्रकाशित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार–बढ़ई बिरादरी को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका।

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Saturday, December 6, 2025

वक़्फ़ की अमानत का एहतराम: ‘उम्मीद पोर्टल’ पर दर्ज़ हुई बेहट की वक़्फ़ संपत्तियाँ

—अब्दुल मालिक मिर्ज़ा, अब्दुल बासित मिर्ज़ा और सभासद नूरजहां बी की काबिले–तारीफ़ कोशिशें**

रिपोर्ट: ज़मीर आलम
(सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पंजीकृत, दिल्ली से प्रकाशित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार–बढ़ई बिरादरी को समर्पित एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए खास रिपोर्ट)


वक़्फ़ की अमानत हमेशा से हमारी मिल्ली विरासत का हिस्सा रही है—मसाजिद, मदरसों, क़ब्रिस्तानों और समाजी भलाई के उन तमाम इदारों की नींव, जिन्हें हमारे बुज़ुर्गों ने अल्लाह की राह में वक़्फ़ किया था।
समय के साथ इन अमानतों की हिफ़ाज़त और दस्तावेज़ीकरण एक बड़ी जिम्मेदारी बन चुकी थी। ऐसे में भारत सरकार के अल्संख्यक कार्य मंत्रालय ने जब वक़्फ़ संपत्तियों को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म “उम्मीद पोर्टल” पर दर्ज़ करने का अहम क़दम उठाया, तो यह पूरी क़ौम के लिए राहत और भरोसे की एक नई किरण साबित हुआ।

बेहट (जिला सहारनपुर) की वक़्फ़ संपत्तियाँ: तीन शख्सियतों की खामोश लेकिन ऐतिहासिक सेवा

कस्बा बेहट, वार्ड नंबर 11 में मौजूद वक़्फ़ संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार करना आसान काम न था।
इस मिशन में तीन नाम सबसे आगे नज़र आते हैं:

1. अब्दुल मालिक मिर्ज़ा

वक़्फ़ दस्तावेज़ों की तहक़ीक़, पुराने रिकॉर्ड की तलाश और उसकी तस्दीक़ में इनकी लगन काबिले–तारीफ़ रही। हर कदम पर इमानदारी और सब्र के साथ इन्होंने जिम्मेदारी निभाई।

2. अब्दुल बासित मिर्ज़ा

तकनीकी प्रक्रिया, डिजिटाइजेशन और पोर्टल पर अपलोडिंग जैसे कामों में बासित मिर्ज़ा की मेहनत किसी नींव के पत्थर से कम नहीं। वक़्फ़ की एक-एक जानकारी को दुरुस्त ढंग से दर्ज़ कराने में इन्होंने अपनी पूरी काबिलियत झोंक दी।

3. नूरजहां बी (सभासद, वार्ड–11)

एक ख़ातून होने के बावजूद नूरजहां बी का जज़्बा और समाजी सेवा की भावना खुलकर सामने आई।
वक़्फ़ से जुड़ी जमीनों की सही पहचान, दस्तावेज़ी पुष्टि और पोर्टल तक पहुंचाने में इन्होंने बेहद अहम भूमिका अदा की।

इन तीनों ने मिलकर वह काम कर दिखाया, जो न सिर्फ़ क़ौम की सेवा है बल्कि आने वाली नस्लों के लिए दीया भी।


उम्मीद पोर्टल: एक नई राह, एक नई ज़िम्मेदारी

“उम्मीद पोर्टल” का मकसद सिर्फ़ डेटा अपलोड करना नहीं—
बल्कि वक़्फ़ की अमानत को
सुरक्षित,
पारदर्शी,
और कानूनी हिफ़ाज़त के दायरे में लाना है।

बेहट की वक़्फ़ संपत्तियों का इस पोर्टल पर दर्ज़ होना, यह साबित करता है कि क़ौम के भीतर जागरूक लोग आज भी मौजूद हैं जो अपनी मिल्ली विरासत को भरोसे के साथ आगे बढ़ाना चाहते हैं।


क़ौम के लिए एक पैग़ाम

ऐसी कोशिशें तभी कामयाब होती हैं जब समाज अपने वक़्फ़ की अहमियत को समझे।
आज बेहट की यह कोशिश बाकी इलाक़ों के लिए मिसाल बन सकती है।
क्योंकि वक़्फ़ सिर्फ़ ज़मीन या इमारत नहीं—
बल्कि हमारी पहचान, हमारी तहज़ीब और हमारी दीनी विरासत का हिस्सा है।


अख़्तर–ए–अंदाज़ (नतीजा)

अब्दुल मालिक मिर्ज़ा, अब्दुल बासित मिर्ज़ा और नूरजहां बी ने बेहट की वक़्फ़ संपत्तियों को “उम्मीद पोर्टल” पर दर्ज़ कराके जो खिदमत अंजाम दी है, वह क़ौम में एक नई उम्मीद जगाती है।
ऐसी कोशिशें आने वाले वक़्त में वक़्फ़ की हिफ़ाज़त को मज़बूती देंगी और समाजी तरक्की की नई राहें खोलेंगी।


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Thursday, December 4, 2025

🌸 वार्ड-25 में 100% SIR कार्य पूरा—बीएलओ टीम का शानदार सम्मान, दानिश मुल्तानी ने की सराहना 🌸

खतौली। वार्ड नंबर 25 आज गर्व और खुशी के माहौल से महक उठा, जब SIR कार्य को शत-प्रतिशत पूर्ण करने पर वार्ड सभासद दानिश मुल्तानी की अगुवाई में वार्ड के समर्पित बीएलओ अनिल और प्रियंका को सम्मानित किया गया।

मेहनत, लगन और जिम्मेदारी—इन तीनों का बेहतरीन उदाहरण पेश करते हुए दोनों बीएलओ ने पूरे वार्ड का काम समय पर पूरा किया, जिसकी खुशी चेहरे-दर-चेहरे झलकती रही।

कार्य पूर्ण होने पर दानिश मुल्तानी ने दोनों बीएलओ को फूल-मालाओं से नवाज़कर उनका स्वागत किया और कहा—
“इन्होंने अपने फर्ज़ को ईमानदारी से निभाकर न सिर्फ वार्ड का नाम रौशन किया है बल्कि सेवा की मिसाल भी कायम की है।”

सम्मान समारोह में वार्ड के कई सम्मानित लोग मौजूद रहे, जिनमें
नासिर सिद्दीकी, हाजी नौशाद मोनी, सरफराज, नसीम, मुस्तकीम, साजिद, फकरु, हाजी नईम फरीदी, अशरफ कुरैशी सहित अन्य गणमान्य लोग शामिल रहे।

समारोह का माहौल पूरी तरह मिल्लत, मोहब्बत और आपसी एहतिराम की खूशबू से भरा रहा।


✍️ मुल्तानी बिरादरी को समर्पित एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए ज़मीर आलम की खास रिपोर्ट

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Tuesday, December 2, 2025

🌙 हाजी शब्बीर (कबाड़ी) साहब के इंतकाल की गमगीन ख़बर — “मुल्तानी समाज” की खास रिपोर्ट

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

आज बुध — 03 दिसंबर 2025 को मुल्तानी बिरादरी के लिए बेहद अफ़सोस की खबर सामने आई है।
हाजी शब्बीर (कबाड़ी), निवासी नदीम कॉलोनी, सहारनपुर (उ.प्र.), जो भाई अब्दुल मलिक, मोहल्ला लोहारन (बेहट) के ससुर थे — आज इस दुनिया-ए-फ़ानी से रुख़्सत कर गए।

आप अपनी नेकदिली, मिलनसार तबीयत और खुश-खुलूस मिज़ाज की वजह से बिरादरी में खास पहचान रखते थे। आपके इंतकाल ने पूरी कौम को ग़मज़दा कर दिया है।


🕌 नमाज़-ए-जनाज़ा

मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा ज़ोहर की नमाज़ के बाद, ठीक 1:00 बजे अदा की जाएगी।
तमाम अहले-ईमान से दरख़्वास्त है कि अधिक से अधिक तादाद में शरीक होकर दुआ-ए-मग़फ़िरत करें।


📞 राब्ता व मालूमात

मय्यत के बारे में तफ़सीलात जानने के लिए संपर्क करें:
मिर्ज़ा अबरार साहब (नेता जी)
📞 9719831623


📌 एक ज़रूरी ऐलान — इंतकाल की खबर भेजते समय इन बातों का ख़ास ख्याल रखें

अक्सर ऐसा देखा गया है कि अधूरी या देर से पहुंचने वाली खबर की वजह से लोग जनाज़े में शामिल नहीं हो पाते। इस समस्या को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करता है कि खबर भेजते वक़्त ये बातें ज़रूर शामिल हों:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम व वल्दियत/शौहर का नाम

2️⃣ पूरा पता — मूल निवास और वर्तमान पता

3️⃣ दफन का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम

4️⃣ घर के जिम्मेदार 1–2 शख्स के मोबाइल नंबर

5️⃣ अगर मरहूम मर्द हैं → फोटो ज़रूर भेजें

6️⃣ इंतकाल की वजह — (अगर बताना मुनासिब हो)

7️⃣ अहल-ए-ख़ाना — भाई, बहन, माँ-बाप, औलाद वगैरह

इन बातों के शामिल होने से खबर मुकम्मल बनती है और बिरादरी तक सही-सही जानकारी पहुँचती है।


📰 डिस्क्लेमर (Disclaimer)

पत्रिका में प्रकाशित किसी भी लेख, खबर, संपादकीय, टिप्पणी, प्रेस विज्ञप्ति या विज्ञापन की पूरी ज़िम्मेदारी लेखक/संवाददाता/विज्ञापनदाता की होगी।
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प्रकाशित सामग्री की सत्यता व दावों की ज़िम्मेदारी लेखक की होगी।
पत्रिका व प्रबंधन किसी भी कानूनी, सामाजिक या वित्तीय दायित्व से पूर्णतः मुक्त रहेंगे।

किसी विवाद की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) — केवल दिल्ली रहेगा।


📰 “मुल्तानी समाज” — बिरादरी की एकमात्र राष्ट्रीय पत्रिका

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पंजीकृत,
दिल्ली से प्रकाशित,
मुल्तानी लोहार एवं बढ़ई बिरादरी की एकमात्र राष्ट्रीय पत्रिका —

“मुल्तानी समाज”

✍️ खास रिपोर्ट

ज़मीर आलम

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