Monday, September 14, 2026

मोहल्ला मेमरान, अंबेहटा पीर में जनाब इस्लाम साहब का इंतिक़ाल — आज नमाज़-ए-ज़ुहर के बाद दो बजे होगी नमाज़-ए-जनाज़ा व तदफ़ीन, इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

अंबेहटा पीर, ज़िला सहारनपुर।
निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिली अफ़सोस के साथ तमाम बिरादरान-ए-इस्लाम को इत्तिला दी जाती है कि आज दिन मंगल, तारीख़ 15 सितंबर 2026 को मोहल्ला मेमरान, क़स्बा अंबेहटा पीर, ज़िला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश निवासी जनाब इस्लाम साहब वल्द जनाब सुल्तान साहब का आज सुबह तक़रीबन 6 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल फ़रमा गए।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम के इंतिक़ाल की ख़बर से अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादरान में गहरा रंज-ओ-ग़म फैल गया है। हम दुआगो हैं कि अल्लाह तआला मरहूम की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमाए, क़ब्र के तमाम मराहिल आसान फ़रमाए और उन्हें जन्नतुल-फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन

मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा आज नमाज़-ए-ज़ुहर के बाद ठीक दो बजे अदा की जाएगी। इसके बाद मैय्यत को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम हज़रात से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और सवाब-ए-दारेन हासिल करें।


मैय्यत को क़ब्र में उतारते वक़्त

मैय्यत को क़ब्र में उतारते समय यह दुआ पढ़ी जाती है:

بِسْمِ اللّٰهِ وَعَلَىٰ مِلَّةِ رَسُولِ اللّٰهِ ﷺ

हिंदी उच्चारण:
बिस्मिल्लाहि व अला मिल्लति रसूलिल्लाह ﷺ

अर्थ:
“अल्लाह के नाम से और रसूलुल्लाह ﷺ के दीन व तरीक़े पर।”


पहली बार मिट्टी देते समय

मैय्यत को क़ब्र में उतारने के बाद पहली मुट्ठी मिट्टी डालते हुए पढ़ें:

مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ

हिंदी उच्चारण:
मिन्हा ख़लक़्नाकुम

अर्थ:
“इसी मिट्टी से हमने तुम्हें पैदा किया।”


दूसरी बार मिट्टी देते समय

दूसरी मुट्ठी मिट्टी डालते हुए पढ़ें:

وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ

हिंदी उच्चारण:
व फ़ीहा नुईदुकुम

अर्थ:
“और इसी में हम तुम्हें वापस लौटाएँगे।”


तीसरी बार मिट्टी देते समय

तीसरी मुट्ठी मिट्टी डालते हुए पढ़ें:

وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ

हिंदी उच्चारण:
व मिन्हा नुख़रिजुकुम तारतन उख़रा

अर्थ:
“और इसी से हम तुम्हें दोबारा निकालेंगे।”


दफ़्न के बाद मरहूम के लिए दुआ

दफ़्न के बाद मरहूम के लिए मग़फ़िरत और साबित-क़दमी की दुआ की जाए:

اللّٰهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَارْحَمْهُ وَعَافِهِ وَاعْفُ عَنْهُ

हिंदी उच्चारण:
अल्लाहुम्मग़फ़िर लहू वरहम्हू वआफ़िही वअफ़ु अन्हू।

अर्थ:
“ऐ अल्लाह! इसकी मग़फ़िरत फ़रमा, इस पर रहम फ़रमा, इसे आफ़ियत अता फ़रमा और इससे दरगुज़र फ़रमा।”

और यह दुआ भी की जाए:

اللّٰهُمَّ ثَبِّتْهُ عِنْدَ السُّؤَالِ

हिंदी उच्चारण:
अल्लाहुम्म सब्बित्हू इंदस्सुआल।

अर्थ:
“ऐ अल्लाह! सवाल के वक़्त इसे साबित-क़दम रखना।”

तमाम अहल-ए-ईमान से ख़ास दुआ की दरख़्वास्त

ऐ अल्लाह! मरहूम इस्लाम साहब की तमाम ख़ताएँ माफ़ फ़रमा, उनके दर्जात बुलंद फ़रमा, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे, क़ब्र की तंगी और अज़ाब से महफ़ूज़ फ़रमा, उन्हें नूर, सुकून और राहत अता फ़रमा और जन्नतुल-फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा।

ऐ अल्लाह! तमाम पसमान्दगान को सब्र-ए-जमील और अज्र-ए-अज़ीम अता फ़रमा।

आमीन सुम्मा आमीन।


ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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