शामली, उत्तर प्रदेश।
निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिल को मलकूल कर देने वाले अंदाज़ में आप तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि आज बुध, 16 सितंबर 2026 को गांव गढ़ी अब्दुल्ला (कच्ची गढ़ी), जिला शामली, उत्तर प्रदेश के रहने वाले जनाब गय्यूर अहमद साहब वल्द जनाब जिंदा हसन साहब, उम्र तकरीबन 55 साल, का लंबे अरसे से बीमारी से जूझने के बाद पीजीआई हॉस्पिटल, चंडीगढ़ में क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।
मरहूम अपने पीछे अपनी अहलिया, भाइयों मर्ग़ूब, महबूब, शाहिद और साजिद समेत तमाम खानदान, कुनबे, रिश्तेदारों, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और अहबाब को गहरे रंज-ओ-ग़म में मुब्तिला छोड़कर इस आरज़ी और फ़ानी दुनिया से हमेशा के लिए रुख़्सत हो गए।
मरहूम के इंतिक़ाल की ख़बर से खानदान, बिरादरी और जानने वालों में ग़म की लहर दौड़ गई है। हर आंख अश्कबार और हर दिल ग़मज़दा है। अल्लाह तआला मरहूम की तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फ़रमाए और उन्हें अपनी रहमत के साये में जगह अता फ़रमाए।
नमाज़-ए-जनाज़ा व तदफ़ीन
मिली जानकारी के मुताबिक मैय्यत को बाद नमाज़-ए-असर सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। तमाम बिरादराना हज़रात, रिश्तेदारों और अहबाब से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शिरकत फ़रमाकर मरहूम के लिए मग़फ़िरत की दुआ करें और सवाब-ए-दारैन हासिल करें।
कब्र में उतारते और मिट्टी देते वक़्त दुआ
अल्लाह के बंदे को कब्र में उतारते वक़्त दिल में यह यक़ीन रहे कि हम सब उसी अल्लाह के हैं और उसी की तरफ़ लौटकर जाना है।
اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَارْحَمْهُ، وَعَافِهِ وَاعْفُ عَنْهُ، وَأَكْرِمْ نُزُلَهُ، وَوَسِّعْ مُدْخَلَهُ۔
तर्जुमा:
ऐ अल्लाह! इसकी मग़फ़िरत फ़रमा, इस पर रहम फ़रमा, इसे आफ़ियत अता फ़रमा, इससे दरगुज़र फ़रमा, इसकी मेहमाननवाज़ी इज़्ज़त वाली फ़रमा और इसकी कब्र को कुशादा फ़रमा।
कब्र में मिट्टी देते वक़्त पढ़ें:
مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ
तर्जुमा:
हमने तुम्हें इसी मिट्टी से पैदा किया, इसी में तुम्हें वापस लौटाएंगे और इसी से दोबारा तुम्हें निकालेंगे।
मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत
या अल्लाह! जनाब गय्यूर अहमद साहब की मग़फ़िरत फ़रमा। उनकी तमाम ख़ताओं, कोताहियों और गुनाहों को माफ़ फ़रमा। उनकी कब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा, उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे। कब्र की तंगी और वहशत को दूर फ़रमा।
या रब्बुल आलमीन! मरहूम को सवाल-ए-कब्र में आसानी अता फ़रमा, उन्हें अपने हबीब हज़रत मुहम्मद ﷺ की शफ़ाअत नसीब फ़रमा और जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा।
या अल्लाह! तमाम अहल-ए-ख़ाना, भाइयों, रिश्तेदारों और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब को इस सदमे पर सब्र-ए-जमील अता फ़रमा और उन्हें इस ग़म को सहने का हौसला अता फ़रमा।
आमीन या रब्बुल आलमीन।
राब्ता बराए मज़ीद मालूमात
मैय्यत, नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन के सिलसिले में मज़ीद मालूमात के लिए:
📞 शहाने आलम साहब: 9149163224
📞 8699765480
📞 7830669296
पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है।
ख़ास रिपोर्ट
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।
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