Tuesday, September 15, 2026

दो ग़मगीन इंतिक़ाल से बिरादरी में पसरा मातम — मरहूमीन की मग़फ़िरत और दरजात की बुलंदी के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत, इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और अफ़सोस के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि आज बुध, 16 सितंबर 2026 को हमारी बिरादरी के दो घरानों में इंतिक़ाल की ख़बर से गहरा सदमा पहुंचा है। दोनों मरहूमीन के इंतिक़ाल पर अहल-ए-ख़ाना और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब गहरे सदमे और रंज में हैं।

गांव किशनपुर बराल, जिला बागपत के नौजवान का सड़क हादसे में इंतिक़ाल

गांव किशनपुर बराल, जिला बागपत, उत्तर प्रदेश निवासी जनाब अब्दुल रशीद साहब के पोते, जनाब ख़ुर्शीद साहब के साहबज़ादे और हाजी अब्दुल क़दीर साहब, अलीपुर के भतीजे का आज एक दर्दनाक सड़क हादसे में क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

मरहूम के अचानक इंतिक़ाल की ख़बर से परिवार, रिश्तेदारों और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब में गहरा ग़म और मातम छा गया है।

मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन (सुपुर्द-ए-ख़ाक) आज हाल मुक़ाम पलड़ा-पलड़ी, हरियाणा में ज़ोहर की नमाज़ के बाद, लगभग 2:00 बजे अदा की जाएगी।

तमाम बिरादराना हज़रात से पुरख़ुलूस गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत फरमाएं और अहल-ए-ख़ाना के ग़म में शरीक हों।

दुआ-ए-मग़फ़िरत:
या अल्लाह! मरहूम की मुकम्मल मग़फ़िरत फरमा, उनकी ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फरमा, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फरमा, क़ब्र को कुशादा और आरामगाह बना, उनके दरजात बुलंद फरमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फरमा। आमीन या रब्बुल आलमीन।

कब्र में उतारते वक़्त दुआ:
बिस्मिल्लाहि व अला मिल्लति रसूलिल्लाह।
अर्थात: अल्लाह के नाम से और अल्लाह के रसूल ﷺ के दीन व तरीक़े पर।

मिट्टी देते वक़्त दुआ:
मिन्हा ख़लक़्नाकुम् व फ़ीहा नुईदुकुम् व मिन्हा नुख़रिजुकुम् तारतन उख़रा।
अर्थात: हमने तुम्हें इसी मिट्टी से पैदा किया, इसी में तुम्हें वापस लौटाएंगे और इसी से दोबारा निकालेंगे।


भूड क़स्बा खतौली में जनाब सुबहान साहब का इंतिक़ाल

दूसरी ग़मगीन इत्तिला यह है कि भूड क़स्बा खतौली, जिला मुज़फ़्फ़रनगर, उत्तर प्रदेश निवासी जनाब सुबहान साहब वल्द जनाब हाजी अनवर साहब (मरहूम) का आज 16 सितंबर 2026, बुधवार को तड़के क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया।

मरहूम के इंतिक़ाल की ख़बर से अहल-ए-ख़ाना, रिश्तेदारों और अज़ीज़-ओ-अक़ारिब में गहरा रंज-ओ-ग़म पाया जा रहा है।

तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि मरहूम के लिए दिल से दुआ-ए-मग़फ़िरत फरमाएं और अल्लाह तआला से उनके दरजात की बुलंदी के लिए दुआ करें।

दुआ:
या अल्लाह! जनाब सुबहान साहब की मग़फ़िरत फरमा, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे, उन्हें सवालात-ए-क़ब्र में आसानी अता फरमा, क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे, उनके दरजात बुलंद फरमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में जगह अता फरमा। अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील और इस सदमे को बर्दाश्त करने की ताक़त अता फरमा। आमीन या रब्बुल आलमीन।

अहल-ए-ख़ाना के लिए दुआ

या रब्बुल आलमीन! दोनों मरहूमीन के घरवालों, रिश्तेदारों और तमाम पसमान्दगान को सब्र-ए-जमील अता फरमा। उनके दिलों को सुकून अता फरमा, इस मुश्किल वक़्त में उन्हें अपने फ़ज़्ल-ओ-करम से संभाल और मरहूमीन के सदक़े में तमाम अहल-ए-ख़ाना पर अपनी रहमत नाज़िल फरमा। आमीन।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

हर जानदार को मौत का मज़ा चखना है। अल्लाह तआला दोनों मरहूमीन की मग़फ़िरत फरमाए, उनकी क़ब्रों को नूर से मुनव्वर करे और तमाम पसमान्दगान को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन सुम्मा आमीन।


मुल्तानी समाज — बिरादरी की आवाज़, बिरादरी की पहचान

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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