एक ऐसी मुहिम, जो सिर्फ़ तस्वीरें प्रकाशित करने की नहीं, बल्कि अपनी नस्लों को अपनी पहचान, अपने बुज़ुर्गों की कुर्बानियों और अपने असल इतिहास से रूबरू कराने की है।
नई दिल्ली/उत्तर प्रदेश।
किसी भी क़ौम और बिरादरी की असल दौलत उसके महल, ज़मीन-जायदाद या कारोबार नहीं होते, बल्कि उसकी असल दौलत वे लोग होते हैं जिन्होंने अपनी मेहनत, क़ाबिलियत, इल्म, हुनर, ईमानदारी और समाज के प्रति अपनी बेपनाह मुहब्बत से उस बिरादरी को एक नई पहचान दिलाई हो। अफ़सोस की बात है कि हमारी बिरादरी में ऐसी अनगिनत शख़्सियतें गुज़री हैं और आज भी मौजूद हैं, जिन्होंने अपनी ज़िंदगी के बेहतरीन साल बिरादरी की तरक़्क़ी, ख़िदमत और भलाई के लिए वक़्फ़ कर दिए, मगर उनमें से बहुत-से नाम आज भी गुमनामी के अंधेरों में खोए हुए हैं।
किसी ने तालीम के मैदान में अपनी मेहनत से कामयाबी की नई मिसाल क़ायम की, किसी ने तकनीकी हुनर से अपनी पहचान बनाई, किसी ने सरकारी मुलाज़मत में अपनी क़ाबिलियत का लोहा मनवाया, तो किसी ने पब्लिक सेक्टर, तिजारत, कारोबार, ठेकेदारी, समाजी ख़िदमत और दीगर शोबों में कामयाबी हासिल करके मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी का नाम रोशन किया। लेकिन सवाल यह है कि क्या उनकी ये कामयाबियाँ सिर्फ़ उनके अपने परिवार तक महदूद रह जाएँगी? क्या आने वाली नस्लें कभी जान पाएँगी कि हमारे दरमियान कितने क़ाबिल, मेहनती, बा-हुनर और ख़िदमतगार लोग मौजूद रहे हैं?
इन्हीं अहम सवालों को मद्देनज़र रखते हुए मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट (रजिस्टर्ड ऑल इंडिया) ने बिरादरी की तारीख़ को महफ़ूज़ करने और अपनी क़ाबिल शख़्सियतों को मंज़रे-आम पर लाने के लिए एक अहम और तारीख़ी मुहिम शुरू करने का ऐलान किया है।
ट्रस्ट के राष्ट्रीय चेयरमैन मोहम्मद आलम साहब ने पूरे मुल्क में आबाद पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के तमाम हज़रात से पुरज़ोर अपील की है कि वे अपने आसपास, अपने ख़ानदान, कुनबे, रिश्तेदारी और शहरों में मौजूद ऐसी तमाम शख़्सियतों की तलाश करें जिन्होंने किसी भी शोबे में अपनी मेहनत और क़ाबिलियत से बिरादरी का नाम रोशन किया हो।
### अब बिरादरी के हर क़ाबिल और हुनरमंद शख़्स की तस्वीर होगी वेबसाइट पर!
मोहम्मद आलम साहब ने कहा कि हमारी कोशिश है कि मुल्क के किसी भी कोने में रहने वाला ऐसा कोई भी शख़्स गुमनामी का शिकार न रहे, जिसने अपनी मेहनत, इल्म, हुनर और ख़िदमत से बिरादरी की इज़्ज़त और वक़ार में इज़ाफ़ा किया हो।
चाहे वह कोई तालीमयाफ़्ता बच्चा हो, आला तालीम हासिल करने वाला नौजवान हो, इंजीनियर, डॉक्टर, वकील, टीचर, प्रोफ़ेसर, सरकारी अफ़सर, मुलाज़िम, कारोबारी, ताजिर, ठेकेदार, तकनीकी माहिर, समाजी ख़िदमतगार या कोई ऐसा बुज़ुर्ग हो जिसने अपनी पूरी ज़िंदगी बिरादरी की भलाई और तरक़्क़ी के लिए गुज़ार दी हो।
ऐसी हर शख़्सियत हमारी बिरादरी का सरमाया है और उसका तआरुफ़ हमारी आने वाली नस्लों तक पहुँचना चाहिए।
अब ऐसी तमाम शख़्सियतों की तस्वीरें, उनके नाम और उनकी कामयाबियों का तफ़सीली तआरुफ़ बिरादरी की वेबसाइट www.multanisamaj.com पर प्रकाशित किया जाएगा।
### सिर्फ़ ज़िंदा शख़्सियतें ही नहीं, मरहूम बुज़ुर्गों की ख़िदमात भी होंगी महफ़ूज़
इस मुहिम का सबसे अहम और दिल को छू लेने वाला पहलू यह है कि इसमें उन मरहूम बुज़ुर्गों और समाजी ख़िदमतगारों को भी शामिल किया जाएगा, जिन्होंने अपनी ज़िंदगी बिरादरी की ख़िदमत में गुज़ार दी और आज इस दुनिया से रुख़्सत हो चुके हैं।
हमारे दरमियान ऐसे कितने ही बुज़ुर्ग मौजूद रहे होंगे जिन्होंने अपनी जेब से पैसा ख़र्च करके, लोगों की मदद करके, बच्चों की तालीम का बंदोबस्त करके, ग़रीब और ज़रूरतमंद परिवारों का सहारा बनकर, बिरादरी के इत्तिहाद के लिए कोशिशें करके और समाजी बेहतरी के लिए अपनी ज़िंदगी वक़्फ़ करके ऐसी मिसालें क़ायम कीं जिन्हें कभी भुलाया नहीं जाना चाहिए।
मगर अफ़सोस! उनकी तस्वीरें, उनकी ज़िंदगी के वाक़ियात, उनकी मेहनत और उनकी क़ुर्बानियों का कोई मुकम्मल रिकॉर्ड हमारे पास मौजूद नहीं है।
आज ज़रूरत है कि उनके बेटे, पोते, रिश्तेदार, अहबाब और उन्हें जानने वाले लोग आगे आएँ और उनकी तस्वीरों के साथ उनकी ज़िंदगी की तफ़सीलात हमें भेजें, ताकि उनकी ख़िदमात को भी बिरादरी की वेबसाइट पर हमेशा के लिए महफ़ूज़ किया जा सके।
क्योंकि जो बुज़ुर्ग अपनी पूरी ज़िंदगी बिरादरी के लिए लगा गए, क्या उनका नाम आने वाली नस्लों तक पहुँचाना हमारी ज़िम्मेदारी नहीं है?
### अपनी बिरादरी का इतिहास दूसरों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता!
हक़ीक़त यह है कि हमारे बुज़ुर्गों के दौर में तालीम और मआशी वसाइल की कमी थी। न आज जैसी टेक्नोलॉजी थी, न सोशल मीडिया था और न ही अपनी बात को पूरी दुनिया तक पहुँचाने के इतने आसान ज़रिये मौजूद थे। इसी वजह से हमारे बुज़ुर्ग अपनी क़ौमी और समाजी तारीख़ को उस अंदाज़ में महफ़ूज़ नहीं कर सके, जिसकी आज ज़रूरत महसूस की जा रही है।
लेकिन आज हमारे पास मोबाइल है, इंटरनेट है, वेबसाइट है, सोशल मीडिया है और अपनी बात दुनिया तक पहुँचाने के तमाम ज़रिये मौजूद हैं।
इसके बावजूद अगर हम अपनी बिरादरी के क़ाबिल लोगों की पहचान, उनके कारनामों और अपने बुज़ुर्गों की क़ुर्बानियों को महफ़ूज़ नहीं कर सके, तो आने वाली नस्लों के सामने हम क्या जवाब देंगे?
ज़रा सोचिए! आज से 50 या 100 साल बाद हमारी औलादें जब अपनी बिरादरी का इतिहास तलाशेंगी, तो उन्हें क्या मिलेगा? क्या उन्हें अपने बुज़ुर्गों के नाम, उनकी तस्वीरें, उनके कारनामे और उनकी समाजी ख़िदमात मिलेंगी या फिर सिर्फ़ अधूरी बातें और भूली-बिसरी यादें?
हमारी आज की छोटी-सी कोशिश आने वाली नस्लों के लिए एक बहुत बड़ा ख़ज़ाना साबित हो सकती है।
### घमंड, अकड़ और आपसी मतभेद छोड़कर बिरादरी के लिए आगे आइए!
इस मुहिम को कामयाब बनाने के लिए हर शख़्स को अपना किरदार अदा करना होगा। यह किसी एक परिवार, किसी एक ख़ानदान, किसी एक शहर या किसी एक संगठन की मुहिम नहीं है, बल्कि पूरी मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की साझा ज़िम्मेदारी है।
हमें अपने आपसी मतभेद, छोटी-छोटी नाराज़गियाँ, घमंड और अकड़ को किनारे रखकर उन लोगों की तलाश करनी होगी जिन्होंने बिरादरी के लिए कुछ अच्छा किया है।
यह नहीं देखना चाहिए कि वह शख़्स किस परिवार से ताल्लुक़ रखता है, किस शहर में रहता है, किस संगठन से जुड़ा है या हमारी उससे कितनी जान-पहचान है। देखना सिर्फ़ यह चाहिए कि उसने बिरादरी और इंसानियत के लिए क्या अच्छा काम किया है।
याद रखिए, किसी की क़ाबिलियत को तस्लीम करने से हमारा क़द छोटा नहीं होता, बल्कि हमारी बिरादरी का वक़ार बुलंद होता है।
हमारा मक़सद किसी की तारीफ़ में क़सीदे पढ़ना नहीं, बल्कि अपनी बिरादरी की उन हक़ीक़ी कामयाबियों और ख़िदमात को तारीख़ का हिस्सा बनाना है, जिन्हें वक़्त के साथ भुला दिया जाता है।
### आप भी इस मुहिम का हिस्सा बनें, इन आसान तरीक़ों से भेजें जानकारी
अगर आप किसी ऐसे शख़्स को जानते हैं जिसने किसी भी शोबे में बिरादरी का नाम रोशन किया है या जिसने समाज की ख़िदमत में अपनी ज़िंदगी गुज़ार दी है, तो उसकी जानकारी हमें व्हाट्सऐप के ज़रिये भेज सकते हैं।
जानकारी भेजते वक़्त इन बातों का ख़ास ख़याल रखें:
* संबंधित शख़्स का पूरा नाम और वालिद का नाम।
* उनका शहर, ज़िला और मौजूदा पता।
* उन्होंने किस शोबे में कामयाबी हासिल की या बिरादरी की क्या ख़िदमत की?
* उनकी ज़िंदगी की अहम कामयाबियों और ख़िदमात की तफ़सील।
* उनकी साफ़ और अच्छी क्वालिटी की तस्वीर।
* अगर वह मरहूम हैं तो उनकी तस्वीर के साथ उनके जीवन और समाजी ख़िदमात की जानकारी।
अपनी तरफ़ से भेजी गई जानकारी की सही होने की तस्दीक़ भी ज़रूर कर लें, ताकि वेबसाइट पर प्रकाशित होने वाला हर तआरुफ़ सही, भरोसेमंद और आने वाली नस्लों के लिए फ़ायदेमंद साबित हो।
प्राप्त जानकारी और तस्वीरों को मुनासिब तर्तीब देकर संबंधित शख़्सियत के तआरुफ़ के साथ बिरादरी की वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाएगा।
### आज शुरुआत नहीं की तो कल बहुत देर हो जाएगी!
यह सिर्फ़ एक वेबसाइट पर तस्वीर लगाने की मुहिम नहीं है। यह अपनी पहचान बचाने, अपने बुज़ुर्गों को याद रखने, अपने हुनरमंद नौजवानों की हौसला-अफ़ज़ाई करने और अपनी आने वाली नस्लों को एक मज़बूत तारीख़ सौंपने की कोशिश है।
हमें यह बात अच्छी तरह समझनी होगी कि कोई भी बिरादरी उस वक़्त तक मज़बूत नहीं बन सकती, जब तक वह अपने माज़ी को नहीं पहचानती, अपने हाल को नहीं सँवारती और अपने मुस्तक़बिल की फ़िक्र नहीं करती।
हमारे बुज़ुर्गों ने मुफ़लिसी, जहालत और सहूलतों की कमी के बावजूद अपनी ज़िंदगी में जो कुछ हासिल किया, वह हमारी तारीख़ का हिस्सा है। अब हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम उनकी मेहनत को गुमनामी में दफ़्न न होने दें।
अगर आज हमने अपनी औलादों को अपने बुज़ुर्गों की मेहनत और क़ुर्बानियों से रूबरू नहीं कराया, तो कल हमारी नस्लें अपनी ही पहचान तलाशती फिरेंगी।
याद रखिए, तारीख़ सिर्फ़ किताबों में नहीं बनती, तारीख़ उन लोगों के नाम और कारनामों से बनती है जिन्हें उनकी क़ौम और बिरादरी याद रखती है।
आइए! आज ही अपने घर, ख़ानदान, कुनबे और रिश्तेदारी में उन लोगों की तलाश शुरू कीजिए जिन्होंने बिरादरी के लिए कुछ अच्छा किया है। उनकी तस्वीरें और उनकी ज़िंदगी की दास्तानें जमा कीजिए और उन्हें मुल्तानी समाज तक पहुँचाइए।
क्योंकि आने वाली नस्लों को सिर्फ़ हमारी दौलत और जायदाद की विरासत नहीं चाहिए, उन्हें अपनी पहचान, अपने बुज़ुर्गों की तारीख़ और अपने लोगों के कारनामों की विरासत भी चाहिए।
अगर हम आज अपनी तारीख़ नहीं सँभालेंगे, तो कल हमारी आने वाली नस्लें हमें कभी माफ़ नहीं करेंगी!
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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।
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### सोशल मीडिया के लिए असरदार नारा
"अपने बुज़ुर्गों को गुमनामी से निकालिए, अपनी नस्लों को अपनी तारीख़ से मिलवाइए। आज उनकी तस्वीर भेजिए, कल यही तस्वीरें हमारी बिरादरी की पहचान बनेंगी!"
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