Tuesday, November 3, 2026

सऊदी अरब की सरज़मीन पर हमेशा के लिए सो गए सालिरी के उस्मान मिर्ज़ा... उमराह की पाकीज़ा तमन्ना लेकर गए थे, मगर वहीं से लौटा जनाज़ा, गांव में पसरा मातम और परिवार पर टूटा ग़मों का पहाड़

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद के चिलकाना क्षेत्र के गांव सालिरी से ताल्लुक़ रखने वाले उस्मान मिर्ज़ा के इंतिक़ाल की दर्दनाक ख़बर ने पूरे गांव और रिश्तेदारों में ग़म की लहर दौड़ा दी। जिस मुक़द्दस सफ़र पर वह अल्लाह के घर की ज़ियारत और उमराह की अदायगी के लिए रवाना हुए थे, वही सफ़र उनकी ज़िंदगी का आख़िरी सफ़र साबित हुआ। सऊदी अरब की पाकीज़ा सरज़मीन पर बीमारी के चलते उनका इंतिक़ाल हो गया। इस ख़बर के गांव पहुंचते ही उनके घर में कोहराम मच गया और हर आंख अश्कबार हो उठी।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक़, गांव सालिरी निवासी उस्मान मिर्ज़ा पुत्र मरहूम महबूब मिर्ज़ा 18 अक्टूबर को अपनी बेटी और कुछ अन्य साथियों के साथ उमराह की अदायगी के लिए सऊदी अरब गए थे। सभी के दिलों में हरम शरीफ़ की ज़ियारत और इबादत की ख़ुशी थी। उन्होंने मक्का मुकर्रमा पहुंचकर उमराह की धार्मिक रस्में भी अदा कीं।

बताया गया कि 26 अक्टूबर को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और वह बुख़ार की चपेट में आ गए। हालत में सुधार न होने पर उनके साथ मौजूद साथियों ने उन्हें मक्का मुकर्रमा के एक अस्पताल में भर्ती कराया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज जारी रहा। मगर अफ़सोस कि तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी ज़िंदगी की मोहलत पूरी हो गई और इलाज के दौरान उन्होंने आख़िरी सांस ली।

ख़बर पहुंचते ही गांव सालिरी में मचा कोहराम

उस्मान मिर्ज़ा के इंतिक़ाल की ख़बर जैसे ही उनके गांव सालिरी पहुंची, पूरे परिवार पर ग़म का पहाड़ टूट पड़ा। घर में मौजूद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। रिश्तेदारों, अज़ीज़ों और गांव के लोगों में भी गहरा रंज-ओ-ग़म देखने को मिला। हर कोई इस दर्दनाक ख़बर से सदमे में है।

एक तरफ़ उमराह की मुक़द्दस अदायगी की ख़ुशी थी, तो दूसरी तरफ़ अचानक पेश आए इस हादसे ने पूरे परिवार को उम्र भर न भूलने वाला सदमा दे दिया।

सऊदी अरब की सरज़मीन पर हुई तदफ़ीन

मिली जानकारी के अनुसार, उस्मान मिर्ज़ा के मय्यत को भारत लाने के बजाय सऊदी अरब में ही बरोज़ मंगल को स्थानीय क़ब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक कर दिया गया। इस तरह गांव सालिरी का एक और शख़्स सऊदी अरब की सरज़मीन में हमेशा के लिए दफ़्न हो गया।

क़ब्र में उतारे जाते वक़्त और मिट्टी देते समय उनके लिए मग़फ़िरत, रहमत और दरजात की बुलंदी की दुआएं की गईं। उनके चाहने वालों और अज़ीज़ों के लिए यह कल्पना करना भी बेहद तकलीफ़देह है कि जो शख़्स कुछ दिन पहले अपने घरवालों के साथ उमराह की नीयत से रवाना हुआ था, अब उसकी क़ब्र सऊदी अरब की मिट्टी में है।

पीछे छोड़ गए भरा-पूरा परिवार

मरहूम उस्मान मिर्ज़ा अपने पीछे तीन बेटे और चार बेटियों समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। बताया जाता है कि उनकी अधिकांश औलाद की शादियां हो चुकी हैं। उनके इंतिक़ाल से परिवार ने अपना एक अहम सहारा और अज़ीज़ रिश्तेदारों ने अपना प्यारा हमदर्द खो दिया है।

अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी तमाम ख़ताओं और कोताहियों को माफ़ फ़रमाए, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए। साथ ही तमाम अहल-ए-ख़ाना, बेटों, बेटियों, दामादों, रिश्तेदारों और अज़ीज़ों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।


मरहूम के लिए मग़फ़िरत की ख़ास दुआ

اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَارْحَمْهُ وَعَافِهِ وَاعْفُ عَنْهُ

अल्लाहुम्मग़फ़िर लहू वरहम्हु व आफ़िहि वअफ़ु अन्हु।

ऐ अल्लाह! मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमा, उन पर रहम फ़रमा, उन्हें आफ़ियत अता फ़रमा और उनकी तमाम ख़ताओं को माफ़ फ़रमा।

क़ब्र में उतारते वक़्त पढ़ी जाने वाली दुआ

بِسْمِ اللَّهِ وَعَلَى مِلَّةِ رَسُولِ اللَّهِ

बिस्मिल्लाहि व अला मिल्लति रसूलिल्लाह।

अल्लाह के नाम के साथ और रसूलुल्लाह ﷺ के दीन व तरीक़े पर।

मिट्टी देते समय पढ़ी जाने वाली आयत

مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ

मिन्हा ख़लक़नाकुम व फ़ीहा नुईदुकुम व मिन्हा नुख़रिजुकुम तारतन उख़रा।

तर्जुमा: इसी मिट्टी से हमने तुम्हें पैदा किया, इसी में तुम्हें वापस लौटाएंगे और इसी से तुम्हें दोबारा निकालेंगे।

ऐ अल्लाह! मरहूम उस्मान मिर्ज़ा की क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे। क़ब्र की तन्हाई को अपनी रहमत से दूर फ़रमा, हिसाब को आसान फ़रमा और रोज़-ए-क़यामत उन्हें अपने महबूब बंदों के साथ उठाना। आमीन सुम्मा आमीन।


ख़बर: ज़मीर आलम
प्रधान-संपादक, उत्तर प्रदेश डेस्क
"मुल्तानी समाज" राष्ट्रीय समाचार पत्रिका

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