“इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन”
अहले मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी को बड़े ही रंज व अफसोस के साथ यह इत़्तला दी जाती है कि मोहल्ला लुहारी सराय, क़स्बा नगीना, ज़िला बिजनौर (उत्तर प्रदेश) के मुक़ीम जनाब अशरफ मुल्तानी वल्द जनाब अरशद मुल्तानी (गंजी वाले) साहब का आज दिन जुमेरात, तारीख़ 06 नवंबर 2025 को कज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया है।
मरहूम अशरफ मुल्तानी साहब बिरादरी के एक सादगीपसंद, नेकदिल और मिलनसार इंसान थे। उनकी ज़िंदगी की हर झलक में खिदमत-ए-ख़ल्क़, मोहब्बत और इंसानियत की ख़ुशबू महसूस होती थी। उन्होंने अपने अमल और अख़लाक़ से न सिर्फ़ अपने घराने बल्कि पूरी बिरादरी का नाम रौशन किया।
अल्लाह तआला मरहूम को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए,
उनकी कब्र को नूर से मुनव्वर फरमाए,
और तमाम अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़रिबा को सब्रे-जमील अता फ़रमाए।
आमीन सुम्मा आमीन।
📞 मय्यत के सिलसिले में तफ़सीलात के लिए:
जनाब इरशाद अहमद मुल्तानी (एडवोकेट) साहब से मोबाइल नंबर 9412326745 पर राब्ता क़ायम करें।
🕋 एक ज़रूरी ऐलान – “मुल्तानी समाज” की तरफ़ से
अक्सर यह देखा गया है कि किसी अज़ीज़ के इंतकाल की खबर देर से या अधूरी जानकारी के साथ बिरादरी तक पहुंचती है, जिससे लोग जनाज़े या ताज़ियत में शरीक नहीं हो पाते।
इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से दरख़्वास्त करती है कि जब भी किसी मरहूम या मरहूमा के इंतकाल की खबर भेजें, तो नीचे दी गई बातें ज़रूर शामिल करें👇
1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता — कहां के रहने वाले थे और फिलहाल कहां रह रहे थे।
3️⃣ दफ़न का सही वक़्त और कब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार शख़्स (एक-दो) के फ़ोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतकाल हुआ है, तो मरहूम का साफ़-सुथरा फोटो शामिल करें।
6️⃣ इंतकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ घर के बाक़ी अहल-ए-ख़ाना के नाम — जैसे माँ-बाप, बीवी-बच्चे, भाई-बहन आदि।
इन तमाम मालूमात से खबर मुकम्मल बनती है और बिरादरी को सही और वक़्त पर जानकारी मिलती है।
🌹 खास पैग़ाम-ए-ताज़ियत 🌹
“मुल्तानी समाज” की तमाम टीम, संपादक मंडल और बिरादरी के जिम्मेदारान
जनाब अशरफ मुल्तानी साहब के इंतकाल पर गहरी रंज-ओ-ग़म का इज़हार करते हैं।
हम सब मरहूम के लिए दुआगो हैं कि —
अल्लाह तआला उनकी तमाम नेकियों को कबूल फरमाए,
उनकी मग़फ़िरत करे,
उनके दर्ज़ात बुलंद करे,
और जन्नतुल फ़िरदौस में उन्हें महरूम न रखे।
उनके पीछे रह जाने वालों को सब्र, हिम्मत और तसल्ली अता करे।
वो इस दुनिया से रुख़सत तो हो गए, मगर उनकी यादें, उनकी मोहब्बत और उनके नेक अमल बिरादरी के दिलों में हमेशा ज़िंदा रहेंगे।
“हर रूह को मौत का मज़ा चखना है, मगर नेक रूहें कभी मिटती नहीं।”
🤲 दुआनामा (روح کے ایصال ثواب کے لئے دعا)
“ऐ अल्लाह!
हमारे भाई अशरफ मुल्तानी को अपनी रहमतों में जगह दे,
उनकी कब्र को जन्नत का बाग बना दे,
उनके गुनाहों को माफ़ कर दे,
और क़ियामत के दिन उन्हें नबी ﷺ की शफ़ाअत नसीब फरमा।
या रब! उनके घरवालों को सब्र-ए-जमील और अज्र-ए-अज़ीम अता कर,
और हमें भी मौत की हक़ीक़त को समझने और नेक अमल की तौफ़ीक़ दे।”
आमीन या रब्बल आलमीन।
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