Wednesday, January 14, 2026

🕊️ निहायत ही अफ़सोस के साथ एक और ग़मगीन इत्तिला 🕊️

निहायत ही रंजो-ग़म के साथ आप तमाम हज़रात को यह दुखद सूचना दी जाती है कि

गंगोह, ज़िला सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) में आज बुधवार, तारीख़ 14 जनवरी 2026 को अभी कुछ ही देर पहले
मिस्त्री अकरम साहब का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेक़ाल हो गया है।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।
अल्लाह तआला मरहूम की मग़फिरत फरमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ीचों में से एक बाग़ीचा बनाए और अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।

मरहूम की तदफ़ीन कल
बरोज़ जुमेरात, तारीख़ 15 जनवरी 2026
बाद नमाज़-ए-जौहर, दोपहर 1 बजे
इंशा अल्लाह अदा की जाएगी।

लिहाज़ा तमाम हज़रात से गुज़ारिश है कि जहाँ तक मुमकिन हो, दोनों जनाज़ों में शिरकत फरमाकर सवाबे-दारेन हासिल करें।


⚠️ नोट (महत्वपूर्ण सूचना)

यह ख़बर सोशल मीडिया पर प्राप्त/वायरल सूचना के आधार पर साझा की जा रही है।
इनके बारे में जो हज़रात मुकम्मल व सही मालूमात रखते हों, वह नीचे दिए गए नंबर पर कॉल करके बिरादरी तक सही जानकारी पहुँचाने में हमारी मदद फरमाएँ।


📢 एक ज़रूरी ऐलान

इंतेक़ाल की ख़बर भेजने से संबंधित अहम हिदायतें

अक्सर यह देखने में आता है कि किसी अज़ीज़ के इंतेक़ाल की सूचना बिरादरी तक देर से पहुँचती है या अधूरी जानकारी होने की वजह से लोग जनाज़े में शिरकत नहीं कर पाते।
इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से पुरज़ोर गुज़ारिश करती है कि जब भी किसी के इंतेक़ाल की ख़बर भेजें, तो निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम तथा वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता (मूल निवास और वर्तमान निवास)।
3️⃣ तदफ़ीन का सही वक़्त और क़ब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के जिम्मेदार शख़्स (एक-दो) के संपर्क नंबर।
5️⃣ यदि मर्द का इंतेक़ाल हुआ हो तो मरहूम की तस्वीर।
6️⃣ इंतेक़ाल की वजह (यदि बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम – जैसे भाई, बहन, माँ-बाप, औलाद आदि।

👉 इन तमाम जानकारियों से ख़बर मुकम्मल होती है और बिरादरी के लोगों को सही वक़्त पर सही जानकारी मिल पाती है।


📰 डिस्क्लेमर (अस्वीकरण)

पत्रिका में प्रकाशित किसी भी प्रकार के लेख, समाचार, संपादकीय, विचार, टिप्पणी, प्रेस विज्ञप्ति, विज्ञापन अथवा अन्य सामग्री संबंधित लेखक, संवाददाता या विज्ञापनदाता के निजी विचार हैं।
इनसे पत्रिका के संपादक, प्रकाशक, प्रबंधन अथवा संस्थान की सहमति या समर्थन आवश्यक रूप से अभिप्रेत नहीं है।

प्रकाशित सामग्री की सत्यता, विश्वसनीयता अथवा किसी भी प्रकार के दावे के लिए लेखक या विज्ञापनदाता स्वयं उत्तरदायी होंगे।
पत्रिका एवं उसका प्रबंधन किसी भी प्रकार की कानूनी, सामाजिक या वित्तीय जिम्मेदारी से पूर्णतः मुक्त रहेगा।

किसी भी विवाद, शिकायत या न्यायिक कार्यवाही की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत
देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित
पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी को समर्पित
देश की एकमात्र पत्रिका “मुल्तानी समाज” के लिए
ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट

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ग़मगीन ख़बर-ए-इंतेक़ाल इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन

बड़े ही रंजो-ग़म के साथ यह दुखद ख़बर दी जाती है कि

हाजी अब्दुल सत्तार साहब
वल्द: मिस्त्री कालू साहब
उम्र: लगभग 70 वर्ष

का आज दिन बुध बा- तारीख़ 14 जनवरी 2026, को अभी शाम सवा पाँच बजे तकरीबन,
ग्राम बावली, जिला बागपत (उत्तर प्रदेश) में कजा- ए - ईलाही से इंतक़ाल हो गया।

अल्लाह तआला की यही मर्ज़ी थी।
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूम मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी से ताल्लुक रखते थे। हाजी अब्दुल सत्तार साहब बड़ौत में दिल्ली–सहारनपुर हाईवे पर, एल.आई.सी. ऑफिस के ठीक सामने अपने अहल-ए-ख़ाना के साथ सुकूनत फरमा रहे थे। ख़बर मिली है कि मरहूम का जनाज़ा बड़ौत से गांव बावली ले जाया जाएगा, इंशाअल्लाह।

हाजी अब्दुल सत्तार साहब तीन भाइयों में से एक थे। मरहूम अपने पीछे
पाँच बेटे —
अब्दुल वाजिद,
अब्दुल साजिद,
राशिद अली,
मुहम्मद आरिफ,
मुहम्मद सुहेल,

दो बेटियाँ, और भरा-पूरा अहल-ए-ख़ाना छोड़ गए हैं।
आज 14 जनवरी 2026 को मरहूम अपने तमाम अज़ीज़ों को रोता-बिलखता छोड़कर इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत हो गए।

हम तमाम अहल-ए-ईमान, अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की बारगाह में दुआगो हैं कि
अल्लाह तआला मरहूम हाजी अब्दुल सत्तार साहब की मग़फिरत फरमाए,
उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए,
और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फरमाए।

आमीन। सुम्मा आमीन।

दफ़ीन की जानकारी

ख़बर के मुताबिक मरहूम की मय्यत को ग्राम बावली के बड़े क़ब्रिस्तान,
बिजली घर के सामने दफ़न किया जाएगा।
चूँकि मरहूम के दो बेटे महाराष्ट्र में रोज़गार के सिलसिले में रहते हैं,
इस कारण दफ़ीना कल बा - तारीख़ 15 जनवरी 2026 दिन जुमेरात को जुहर की नमाज़ के बाद मय्यत को बिजली घर के सामने वाले बावली गांव के बड़े कब्रिस्तान में दफनाया जायेगा अल्लाह मरहूम  की मग़फिरत फरमाएं ।

ज़्यादा मालूमात के लिए

  • नौशाद अली — 7906409518
  • मिस्त्री पप्पू चौधरी (बावली) — 9756277494
  • नदीम ठेकेदार (बावली) — 9997411304

अहम् हिदायत

  • किसी की मय्यत पर जाकर खाना खाने का बोझ न बनें।
  • किसी के साथ हंसी-मज़ाक से परहेज़ करें।
  • अव्वल कलमा पढ़ते रहें।
  • कारोबार या रिश्ते-नातों की बातें फोन पर भी न करें।

एक ज़रूरी ऐलान

इंतेक़ाल की ख़बर भेजते वक़्त अहम् हिदायतें

अक्सर अधूरी जानकारी की वजह से बिरादरी के लोग जनाज़े तक नहीं पहुँच पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि इंतेक़ाल की ख़बर भेजते वक़्त इन बातों का ख़ास ख़याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत/शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता (स्थायी व वर्तमान निवास)।
3️⃣ दफ़ीन का सही वक़्त और क़ब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स के 1–2 फोन नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतेक़ाल हो तो मरहूम की फोटो (मुनासिब हो तो)।
6️⃣ इंतेक़ाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम — भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वगैरह।

👉 इन तमाम जानकारियों से ख़बर मुकम्मल होगी और बिरादरी तक सही वक़्त पर सही सूचना पहुँच सकेगी।


📰 डिस्क्लेमर (Disclaimer)

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सामग्री की सत्यता व दावों की ज़िम्मेदारी लेखक/विज्ञापनदाता की होगी।
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Tuesday, January 13, 2026

“मुल्तानी घराना” की ऐतिहासिक पहल: रमज़ान के मुक़द्दस महीने में पूरे भारत में बिरादरी की डिजिटल जनगणना और शिजरा तैयार करने का मिशन

मुस्लिम मुल्तानी लोहार और बढ़ई बिरादरी के इतिहास में एक नई और रोशन इबारत लिखने जा रहा है “मुल्तानी घराना”। पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादरी की देश की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी तंजीम “मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट (रजिस्टर्ड ऑल इंडिया)” ने बिरादरी की एकजुटता, पहचान और आने वाली नस्लों के बेहतर भविष्य के लिए एक अहम और ऐतिहासिक क़दम उठाया है।

इस मुबारक मुहिम के तहत दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत पूरे भारत के हर शहर और गांव में “जनगणना अधिकारियों” की नियुक्ति की जा रही है। यह अधिकारी रमज़ान के पाक महीने में घर-घर जाकर मुल्तानी बिरादरी के परिवारों का सर्वे करेंगे, ताकि बिरादरी से जुड़ी सही, मुकम्मल और भरोसेमंद जानकारी डिजिटल रूप में सुरक्षित की जा सके।

घर-घर सर्वे, हाथों-हाथ “मुल्तानी घराना” में शामिल

इस सर्वे अभियान की सबसे अहम ख़ासियत यह है कि जो भी परिवार इस जनगणना में शामिल होगा, उसे “मुल्तानी घराना” का हिस्सा बनाया जाएगा। इसके साथ-साथ पूरी बिरादरी का शिजरा (वंशावली) भी तैयार किया जा रहा है, जिससे आने वाली नस्लें अपनी जड़ों, रिश्तों और पारिवारिक इतिहास को आसानी से जान और समझ सकें।

रमज़ान में नेक काम का सुनहरा मौका

रमज़ान का महीना इबादत, सब्र और खिदमत का महीना होता है। ऐसे मुक़द्दस माह में “मुल्तानी घराना” पूरे भारत के हर शहर और गांव से उन खिदमतगुज़ार भाइयों को दावत दे रहा है, जो अपनी बिरादरी के लिए कुछ करना चाहते हैं। इन वालंटियर्स को इज़्ज़त और भरोसे के साथ “जनगणना अधिकारी” के ओहदे से नवाज़ा जाएगा।

चयनित जनगणना अधिकारियों को बाक़ायदा आई-कार्ड, ट्रेनिंग और सभी ज़रूरी दस्तावेज़ मुहैया कराए जाएंगे, ताकि यह जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी, पारदर्शिता और तहज़ीब के साथ निभाई जा सके।

कैसे करें संपर्क

जो भी भाई इस नेक, समाजी और ऐतिहासिक मिशन का हिस्सा बनना चाहते हैं, वे फौरन
📞 हेल्पलाइन नंबर: 9410652900
पर कॉल /व्हाट्सऐप मैसेज करके अपनी पूरी जानकारी साझा करें।


आपका
ज़मीर आलम
निदेशक
“मुल्तानी घराना”


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Monday, January 12, 2026

निहायत अफ़सोसनाक ख़बर — सलीम मुल्तानी (बड़ौत) की बहन का इंतकाल

निहायत ही अफ़सोस और रंज-ओ-ग़म के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को इत्तला दी जाती है कि आज बरोज़ पीर, बा-तारीख़ 12 जनवरी 2026 को सोशल मीडिया पर वायरल ख़बर के ज़रिये मिली सूचना के मुताबिक सलीम मुल्तानी, (मुस्कान मोबाईल वाले) निवासी क़स्बा व तहसील बड़ौत, ज़िला बागपत (उत्तर प्रदेश) की बहन नसीमा बी का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया है।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

मरहूमा का हाल मुक़ाम क़स्बा व तहसील बड़ौत में इदारा मदरसे के पास बताया गया है। यह ख़बर पूरे ख़ानदान और बिरादरी के लिए गहरे सदमे और दुख का सबब है। मिली जानकारी के मुताबिक मय्यत को बाद नमाज़ मगरिब किया जाएगा सपुर्दे ख़ाक, लिहाज़ा आप हजरात भी जनाजे में शरीक होकर सवाबे दारेन हासिल करें।

दुआ है कि अल्लाह तआला मरहूमा को अपनी बेपनाह रहमतों के साये में जगह अता फ़रमाए, उनकी मुकम्मल मग़फ़िरत करे, क़ब्र को नूर से भर दे और जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए।
अल्लाह तआला इस मुश्किल वक़्त में पूरे ख़ानदान को सब्र-ए-जमील और हिम्मत अता फ़रमाए। आमीन। 🤲

तमाम अहल-ए-ईमान से गुज़ारिश है कि मरहूमा के लिए ख़ुसूसी दुआएँ करें, मग़फ़िरत मांगें और शोक जदा परिवार को तसल्ली पहुँचाएँ।


एक ज़रूरी ऐलान — इंतेकाल की ख़बर भेजने के लिए अहम् हिदायतें

अक्सर देखा गया है कि किसी अज़ीज़ के इंतकाल की ख़बर बिरादरी तक देर से या अधूरी जानकारी के साथ पहुँचती है, जिसकी वजह से लोग जनाज़े तक शरीक नहीं हो पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से दरख़्वास्त करती है कि इंतेकाल की ख़बर भेजते वक़्त नीचे दी गई जानकारियों का ख़ास ख़याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम और वल्दियत या शौहर का नाम।
2️⃣ पूरा पता — स्थायी निवास और मौजूदा मुक़ाम।
3️⃣ दफ़्न का सही वक़्त और क़ब्रिस्तान का नाम।
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स (एक-दो) के मोबाइल नंबर।
5️⃣ अगर मर्द का इंतकाल हुआ हो तो मरहूम की फोटो।
6️⃣ इंतकाल की वजह (अगर बताना मुनासिब हो)।
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना के नाम — भाई, बहन, वालिदैन, औलाद वग़ैरह।

👉 इन तमाम मालूमात से ख़बर मुकम्मल होती है और बिरादरी तक सही-सही जानकारी वक़्त पर पहुँच पाती है।


डिस्क्लेमर (Disclaimer)

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अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फ़िरत फ़रमाए और हम सबको इबरत व सब्र अता करे। आमीन।

Saturday, January 10, 2026

ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ की रोशन मिसाल: मुल्तानी सोसाइटी का कंबल तक़सीम प्रोग्राम, खतौली में इंसानियत की गर्माहट

आज दिन शनिचर, 10 जनवरी 2026 को उत्तर प्रदेश के ज़िला मुज़फ्फरनगर के क़स्बा खतौली, जिसे मुल्तानी बिरादरी की राजधानी कहा जाता है, में मुल्तानी सोसाइटी की जानिब से ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ की एक बेहतरीन और क़ाबिले-तारीफ़ मिसाल पेश की गई। कड़ाके की ठंड के बीच ज़रूरतमंदों की राहत के लिए कंबल तक़सीम प्रोग्राम का आयोजन किया गया, जिसमें बिरादरी की कई अज़ीम और मोअज़्ज़ज़ शख़्सियतों ने शिरकत फरमाई।

इस इंसानी और समाजी मुहिम में बुढ़ाना से वरिष्ठ समाजसेविका मोहतरमा यास्मीन मिर्ज़ा, बुलंदशहर से सईद अहमद, सरधना से मोहतरमा आयशा परवीन और मिर्ज़ा नौशाद (फलावदा वाले), शाहनवाज़ मुल्तानी के साथ-साथ हाजी नसीम, ज़मीरउद्दीन मिर्ज़ा, अफ़ज़ाल मिर्ज़ा (कुशावली वाले), आशु मिर्ज़ा, इरफ़ान अली निज़ामी, मोहम्मद याक़ूब मिर्ज़ा, मोहम्मद मूसा मुल्तानी सहित कई जिम्मेदार और समाज-सेवी हज़रात मौजूद रहे।

मोहतरमा यास्मीन मिर्ज़ा ने अपने ख़िताब में कहा कि बिरादरी की ताक़त आपसी एकता, मोहब्बत और ख़िदमत में है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि जिस तरह कुनबा और ख़ानदान हमें जोड़कर रखते हैं, उसी तरह बिरादरी का आपस में जुड़े रहना भी समाज की तरक़्क़ी और भलाई के लिए बेहद ज़रूरी है।

यह प्रोग्राम न सिर्फ़ ठंड से राहत देने का ज़रिया बना, बल्कि समाज में इंसानियत, हमदर्दी और भाईचारे के पैग़ाम को भी मज़बूती से आगे बढ़ाने वाला साबित हुआ। मुल्तानी सोसाइटी की यह कोशिश क़ाबिले-सिताइश है और उम्मीद की जाती है कि आने वाले वक़्त में भी ऐसी समाजी और फ़लाही गतिविधियाँ जारी रहेंगी।


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🌙 मुल्तानी अहंगरान सेवा सोसाइटी भीलवाड़ा की नेक पहल: इज्तेमाई निकाह 10 मई 2026 को इंशाअल्लाह

तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार व बढ़ई बिरादरी के लिए यह खबर बेइंतहा खुशी और मसarrत का पैग़ाम लेकर आई है। बिरादरी की जिम्मेदार और समाजसेवी तंजीम मुल्तानी अहंगरान सेवा सोसाइटी, भीलवाड़ा की जानिब से एक नेक और काबिले-तारीफ क़दम उठाते हुए इज्तेमाई निकाह की तारीख मुकर्रर की गई है।

तंजीम की ओर से एलान किया गया है कि यह इज्तेमाई शादी 10 मई 2026, बरोज़ इतवार को अदा की जाएगी। इंशाअल्लाह, इस मुबारक मौके पर कई जोड़े सुन्नत के मुताबिक़ निकाह के पाक रिश्ते में बंधेंगे।

मुल्तानी अहंगरान सेवा सोसाइटी भीलवाड़ा तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार व बढ़ई बिरादरी के भाइयों से अदब के साथ गुज़ारिश करती है कि जिन घरों में शादी के लायक लड़का या लड़की के रिश्ते तय हो चुके हों, वे इस इज्तेमाई निकाह में ज़रूर शिरकत फरमाएं और इस नेक कार-ए-ख़ैर का हिस्सा बनें।

इज्तेमाई निकाह जैसी पहल न सिर्फ़ समाज में सादगी, भाईचारे और एकजुटता को बढ़ावा देती है, बल्कि फिज़ूलखर्ची और गैर-ज़रूरी रस्मों से बचने का पैग़ाम भी देती है। यह क़दम आने वाली नस्लों के लिए एक मिसाली नज़ीर साबित होगा।

इस मुबारक आयोजन को कामयाब बनाने के लिए समस्त पंच भीलवाड़ा, राजस्थान की जानिब से पूरी लगन और खिदमत का यक़ीन दिलाया गया है।


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किसी भी विवाद, शिकायत या न्यायिक कार्यवाही की स्थिति में न्याय क्षेत्र (Jurisdiction) केवल दिल्ली रहेगा।


✍️ हाजी मोहम्मद इक़बाल क़ाज़ी की खास रिपोर्ट
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नोट:- ख़बर में दिखाएं गए सभी फ़ोटो काल्पनिक है।



Friday, January 9, 2026

ग़मगीन ख़बर | इंतेकाल | इक़बाल साहब का इंतेकाल — बिरादरी के लिए एक दुखद घड़ी

निहायत ही अफ़सोस और रंजो-ग़म के साथ तमाम बिरादराना हज़रात को इत्तिला दी जाती है कि गांव भूड़, तहसील खतौली, जिला मुज़फ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) में आज दिन जुमा, तारीख़ 09 जनवरी 2026 को दोपहर जनाब इक़बाल साहब (मुजाहिदपुर वालों) का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतेकाल हो गया। मरहूम काफ़ी अरसे से बीमारी से जूझ रहे थे।

इस दुखद ख़बर से पूरे इलाक़े और बिरादरी में ग़म की लहर दौड़ गई है।

मरहूम की जनाज़े की नमाज़ आज ईशा की नमाज़ के बाद अदा की जाएगी, इंशाअल्लाह।
जनाज़े की नमाज़: भूड़ बड़ी मस्जिद के अहाते में
तदफ़ीन: चूना भट्टी, जानसठ रोड स्थित क़ब्रिस्तान में की जाएगी।

हम तमाम अहल-ए-ईमान से गुज़ारिश करते हैं कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएँ और उनके अहल-ए-ख़ाना के सब्र-ओ-हिम्मत के लिए ख़ुसूसी दुआ करें।
अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए और उनके लवाहिक़ीन को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।

नोट: मरहूम के बारे में अधिक जानकारी के लिए हाजी जाहिद साहब (मुज़फ्फरनगर) से संपर्क किया जा सकता है — मोबाइल: 9258491478


एक ज़रूरी ऐलान — इंतेकाल की ख़बर भेजने के लिए अहम हिदायतें

अक्सर देखा जाता है कि किसी अज़ीज़ के इंतेकाल की सूचना देर से या अधूरी पहुँचने के कारण लोग जनाज़े तक नहीं पहुँच पाते। इस कमी को दूर करने के लिए “मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका तमाम बिरादराने इस्लाम से गुज़ारिश करती है कि इंतेकाल की ख़बर भेजते वक़्त निम्नलिखित बातों का ख़ास ख़याल रखें:

1️⃣ मरहूम/मरहूमा का पूरा नाम तथा वल्दियत/शौहर का नाम
2️⃣ पूरा पता (मूल निवास एवं वर्तमान निवास)
3️⃣ तदफ़ीन का सही वक़्त और क़ब्रिस्तान का नाम
4️⃣ घर के ज़िम्मेदार शख़्स (एक-दो) के संपर्क नंबर
5️⃣ यदि मर्द का इंतेकाल हुआ हो तो मरहूम की तस्वीर (यदि मुनासिब हो)
6️⃣ इंतेकाल की वजह (यदि बताना मुनासिब हो)
7️⃣ अहल-ए-ख़ाना का संक्षिप्त विवरण (भाई, बहन, वालिदैन, औलाद आदि)

👉 इन तमाम जानकारियों से ख़बर मुकम्मल होती है और बिरादरी तक सही वक़्त पर सही जानकारी पहुँचती है।


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मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश से — हाजी जाहिद की ख़ास रिपोर्ट

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