Sunday, May 31, 2026

सिलाना से सोनीपत तक मातम की लहर: हारून साहब का इंतिकाल, बिरादरी में गहरा शोक

सोनीपत/बागपत। इंसान इस दुनिया में एक मुसाफिर की तरह आता है और एक दिन अपने रब के हुक्म से वापस लौट जाता है। इसी हकीकत को फिर एक बार याद दिलाते हुए आज बिरादरी को एक बेहद दुखद खबर मिली। बड़े ही रंज-ओ-ग़म के साथ यह सूचना प्राप्त हुई कि गांव सिलाना, जनपद बागपत (उत्तर प्रदेश) के मूल निवासी तथा वर्तमान में मोहल्ला नंदवानी (मामू-भांजा), सोनीपत (हरियाणा) में रह रहे जनाब हारून साहब वल्द हाजी मोहम्मद मुन्तियाज साहब का आज रविवार, 31 मई 2026 को लगभग 55 वर्ष की आयु में कज़ा-ए-इलाही से इंतिकाल हो गया।

मरहूम के इंतिकाल की खबर सुनते ही परिजनों, रिश्तेदारों, दोस्तों और बिरादरी के लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। बताया जाता है कि हारून साहब अपने अच्छे अख़लाक, मिलनसार स्वभाव और समाज के प्रति सकारात्मक सोच के लिए जाने जाते थे। उनके अचानक इस दुनिया से रुख़्सत हो जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

मिली जानकारी के अनुसार मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा के बाद उन्हें ईदगाह कॉलोनी, सोनीपत (हरियाणा) में बाद नमाज़-ए-ईशा सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। बिरादरी और तमाम अहबाब से गुजारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मगफिरत करें तथा ग़मज़दा परिवार को ढांढस बंधाएं।

दुनिया की जिंदगी फानी है और हर जान को मौत का स्वाद चखना है। ऐसे मुश्किल वक्त में हम सबकी जिम्मेदारी है कि मरहूम के लिए ज्यादा से ज्यादा दुआ करें और उनके परिवार के साथ हमदर्दी का इज़हार करें।

दुआ-ए-मगफिरत:
अल्लाह तआला मरहूम हारून साहब की तमाम खताओं को माफ फरमाए, उनकी मगफिरत फरमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बागों में से एक बाग बनाए, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए और तमाम लवाहिकीन को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।


ख़ास रिपोर्ट: ज़मीर आलम, प्रधान संपादक
मुल्तानी समाज
(सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पंजीकृत राष्ट्रीय समाचार पत्रिका/न्यूज़ पोर्टल/यूट्यूब चैनल)

संपर्क:
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