Wednesday, September 16, 2026

अपनी जनगणना खुद कीजिए — अपने मोबाइल से! “मुल्तानी घराना” बना बिरादरी की पहचान, शिजरा-ए-खानदान और डिजिटल जनगणना को महफ़ूज़ करने का नया ज़रिया

पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के हर फ़र्द से ख़ास अपील — आज ही अपना और अपने ख़ानदान का डेटा दर्ज कराइए

नई दिल्ली/उत्तर प्रदेश डेस्क।
पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के लिए यह ख़बर यक़ीनन ख़ुशी और फ़ख़्र का सबब है कि हमारी बिरादरी की तारीख़, नस्ल, ख़ानदान, कुनबे और आने वाली नस्लों की मालूमात को डिजिटल तौर पर महफ़ूज़ रखने की दिशा में एक अहम क़दम उठाया गया है।

मुल्तानी बिरादरी मुल्क के मुख़्तलिफ़ राज्यों, शहरों, कस्बों और गांवों में आबाद है। सदियों से बिखरे हुए इन ख़ानदानों को एक-दूसरे से जोड़ने, अपने पुरखों की यादों को महफ़ूज़ रखने और बिरादरी की सही तस्वीर सामने लाने के लिए एक मुकम्मल और भरोसेमंद डिजिटल जनगणना की ज़रूरत लंबे अरसे से महसूस की जाती रही है।

बिरादरी के जागरूक अफ़राद की हमेशा यह ख़्वाहिश रही कि पूरे हिंदुस्तान में मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की असली, सटीक और ख़ुद बिरादरी के अफ़राद द्वारा तैयार की गई जनगणना सामने आए, ताकि हमारी आबादी, ख़ानदानों, शहरों और नई नस्ल की सही जानकारी एक जगह महफ़ूज़ हो सके।

मैनुअल जनगणना की कोशिश हुई, मगर मुकम्मल आंकड़े सामने नहीं आ सके

लगभग चार-पांच वर्ष पूर्व मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट (रजि.) ऑल इंडिया की ओर से बिरादरी की मैनुअल जनगणना कराने की कोशिश की गई। इसके लिए देश के अलग-अलग शहरों में जनगणना अधिकारियों की नियुक्ति की गई, ताकि वह अपने-अपने शहरों और इलाक़ों में रहने वाले बिरादरी के अफ़राद की जानकारी एकत्र कर ट्रस्ट को उपलब्ध करा सकें।

मगर मैनुअल तरीके से जमा किए गए आंकड़े एक समान प्रारूप और मुकम्मल डिजिटल व्यवस्था के तहत दर्ज नहीं हो सके। नतीजा यह निकला कि बिरादरी की सटीक और भरोसेमंद कुल आबादी तथा ख़ानदानी आंकड़ों की वह तस्वीर सामने नहीं आ सकी जिसकी उम्मीद की जा रही थी।

यही वह मौक़ा था जब ट्रस्ट के फाउंडर ज़मीर आलम मुल्तानी ने इस मसले को नए अंदाज़ में हल करने का इरादा किया।

“क्यों न बिरादरी अपनी जनगणना खुद करे?”

ट्रस्ट के फाउंडर ज़मीर आलम मुल्तानी ने इस सवाल पर गंभीरता से काम शुरू किया कि अगर बिरादरी के हर फ़र्द को अपनी और अपने परिवार की जानकारी ख़ुद दर्ज करने का मौक़ा दिया जाए, तो न सिर्फ़ डेटा अधिक व्यवस्थित होगा बल्कि आने वाली नस्लों के लिए भी एक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा सकता है।

इसके बाद ऐसे सॉफ्टवेयर की तलाश और तैयारी का सिलसिला शुरू हुआ जिसमें बिरादरी के ख़ानदानों से जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित तरीके से दर्ज और सुरक्षित रखा जा सके।

लंबी मेहनत और लगातार कोशिशों के बाद एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म तैयार कराया गया, जिसे बिरादरी के लिए एक ख़ास पहचान देते हुए नाम दिया गया—

“मुल्तानी घराना”

अब हर फ़र्द खुद दर्ज करेगा अपने ख़ानदान की दास्तान

“मुल्तानी घराना” के ज़रिए बिरादरी का हर शख़्स अपने मोबाइल, टैबलेट, लैपटॉप या कंप्यूटर से अपना अकाउंट बनाकर अपनी और अपने परिवार की ज़रूरी जानकारी दर्ज कर सकता है।

यानी अब किसी दूसरे शख़्स के घर-घर जाकर जानकारी इकट्ठा करने का इंतज़ार नहीं—हर घर खुद अपनी जानकारी दर्ज करेगा और हर ख़ानदान अपनी पहचान खुद सुरक्षित करेगा।

इस डिजिटल व्यवस्था के ज़रिए अपने:

  • अपने नाम और व्यक्तिगत विवरण
  • वालिदैन की जानकारी
  • बच्चों और परिवार के अफ़राद
  • कुनबे और रिश्तेदारों की जानकारी
  • ख़ानदानी सिलसिले और शिजरा
  • पुरखों से जुड़ी जानकारी
  • रहने वाले शहर/इलाके की जानकारी

को व्यवस्थित रूप से दर्ज करने की गुंजाइश रखी गई है।

शिजरा-ए-ख़ानदान — आने वाली नस्लों के लिए एक अमानत

हमारी बिरादरी के बुज़ुर्गों के पास अपने पुरखों, दादा-परदादा और खानदान के बारे में बहुत-सी ऐसी मालूमात रही हैं जो ज़बानी तौर पर एक नस्ल से दूसरी नस्ल तक पहुंचती रही हैं।

लेकिन वक़्त के साथ बहुत-सी जानकारी लोगों की यादों के साथ ही ख़त्म हो जाती है।

“मुल्तानी घराना” का मक़सद इसी ख़ानदानी विरासत को डिजिटल तौर पर महफ़ूज़ रखने की दिशा में एक कोशिश है, ताकि आज का दर्ज किया गया रिकॉर्ड आने वाली नस्लों के लिए उनके पुरखों की पहचान और ख़ानदानी सिलसिले का ज़रिया बन सके।

आज हम अपने पुरखों का शिजरा सुरक्षित करेंगे, तो कल हमारी औलाद हमें याद रखने के लिए एक मुकम्मल रिकॉर्ड अपने पास पाएगी।

सिर्फ़ शिजरा ही नहीं, बिरादरी की डिजिटल जनगणना भी

इस प्रोजेक्ट की सबसे अहम ख़ासियत यह है कि अगर बिरादरी के ज़्यादा से ज़्यादा ख़ानदान इसमें अपनी सही जानकारी दर्ज करते हैं, तो इससे बिरादरी के सामाजिक और ख़ानदानी आंकड़ों को समझने में मदद मिल सकती है।

आज हमें अक्सर यह सवाल परेशान करता है कि—

“पूरे हिंदुस्तान में मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की कुल आबादी कितनी है?”

हमारे कितने ख़ानदान किस राज्य में रहते हैं?

किस शहर और कस्बे में बिरादरी की कितनी आबादी है?

हमारी नई नस्ल की तालीमी और पेशेवर स्थिति क्या है?

हमारे कितने ख़ानदान देश के अलग-अलग हिस्सों में आबाद हैं?

इन सवालों के जवाब के लिए सबसे पहला क़दम है—अपनी जानकारी खुद दर्ज करना।

जितने ज़्यादा ख़ानदान अपनी सही जानकारी दर्ज करेंगे, उतना ही बेहतर डिजिटल डेटा तैयार होगा।

अब ज़िम्मेदारी सिर्फ़ एक तंजीम की नहीं — हर घर की है

बिरादरी की तरक़्क़ी सिर्फ़ एक शख़्स, एक कमेटी या एक तंजीम की ज़िम्मेदारी नहीं होती। यह हम सबकी सामूहिक ज़िम्मेदारी है।

इसलिए “मुल्तानी घराना” के इस अभियान को कामयाब बनाने के लिए बिरादरी के हर जागरूक फ़र्द से अपील है कि वह पहले अपना अकाउंट बनाए, फिर अपने परिवार की जानकारी दर्ज करे और उसके बाद अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और बिरादरी के दूसरे ख़ानदानों तक भी इस पैग़ाम को पहुंचाए।

एक घर की जानकारी एक रिकॉर्ड है, लेकिन लाखों घरों की जानकारी हमारी पूरी बिरादरी की तस्वीर बन सकती है।

आज ही शुरुआत करें

अगर आप मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी से ताल्लुक़ रखते हैं तो देर न करें।

आज ही अपने मोबाइल या कंप्यूटर से:

www.multanigharana.com

पर लॉगिन करें, अपना अकाउंट बनाएं और अपनी, अपने परिवार, कुनबे, ख़ानदान तथा रिश्तेदारों की सही जानकारी दर्ज करें।

याद रखिए—

अपना डेटा खुद दर्ज कीजिए,
अपना शिजरा खुद सुरक्षित कीजिए,
और अपनी बिरादरी की सही तस्वीर बनाने में अपना किरदार अदा कीजिए।

यह सिर्फ़ एक वेबसाइट पर जानकारी भरने का काम नहीं, बल्कि अपनी नस्ली पहचान, ख़ानदानी विरासत और आने वाली नस्लों के लिए एक डिजिटल अमानत छोड़ने की कोशिश है।


“मुल्तानी घराना” — आज की जानकारी, कल की विरासत

आइए, हम सब मिलकर अपनी बिरादरी की वह डिजिटल तस्वीर तैयार करें जो आने वाली नस्लों को बताए कि हम कौन थे, हमारे पुरखे कौन थे, हमारे ख़ानदान कहां-कहां आबाद रहे और हमारी बिरादरी ने हिंदुस्तान की सामाजिक ज़िंदगी में किस तरह अपना किरदार अदा किया।

आपका एक अकाउंट, आपके पूरे ख़ानदान की पहचान को महफ़ूज़ करने की शुरुआत हो सकता है।

आज ही जुड़िए —
www.multanigharana.com


ख़ास रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रकाशित/प्रसारित पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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