डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की यौम-ए-पैदाइश पर आयोजित प्रोग्राम में डॉक्टरों की दस्तारबंदी व सम्मान, मुल्तानी बिरादरी को क़ब्रिस्तान के लिए ज़मीन देने का ऐलान
बागपत, उत्तर प्रदेश।
मुल्तानी समाज राष्ट्रीय समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।
बिरादरी के सरपरस्तों की मौजूदगी ने बढ़ाई प्रोग्राम की शान
आशीर्वाद गार्डन में आयोजित इस प्रोग्राम की सदारत हाज़िरन के बताए गए विवरण के मुताबिक़ हाजी यूसुफ़ साहब और हाजी दिलशाद साहब ने की। प्रोग्राम में मुल्तानी बिरादरी के सरपरस्तों और समाजी तौर पर सरगर्म शख़्सियात ने हिस्सा लेकर बिरादरी की तरक़्क़ी, इत्तिहाद और बेहतरी के हवाले से अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।ऐसे इज्तिमाआत की अहमियत महज़ लोगों के एक जगह जमा होने तक महदूद नहीं होती, बल्कि ये बिरादरी के अफ़राद को एक-दूसरे के क़रीब लाने, नई नस्ल को अपनी रवायतों से वाक़िफ़ कराने और समाजी मसाइल के हल के लिए मिल-जुलकर कोशिश करने का मौक़ा भी फ़राहम करते हैं।
मुल्तानी बिरादरी को क़ब्रिस्तान के लिए ज़मीन देने का ऐलान
इस प्रोग्राम की एक अहम और तवज्जोह-तलब बात उस वक़्त सामने आई, जब प्रोग्राम के मुख्य अतिथि जनाब नवाब अहमद हमीद साहब, बागपत ने मुल्तानी बिरादरी के लिए बागपत में क़ब्रिस्तान की ज़मीन उपलब्ध कराने के संबंध में ऐलान किया।क़ब्रिस्तान किसी भी बिरादरी की बुनियादी समाजी ज़रूरतों में शामिल होता है। इस सिलसिले में किया गया ऐलान स्थानीय बिरादरी के लिए अहमियत रखता है। अब इस ऐलान को अमली जामा पहनाने के लिए ज़रूरी इंतिज़ामी और क़ानूनी कार्रवाई की तकमील भी अहम होगी, ताकि बिरादरी को मुस्तक़बिल में इसका फ़ायदा हासिल हो सके।
मुख्य अतिथि के इस ऐलान को प्रोग्राम में मौजूद लोगों ने बिरादरी की ज़रूरतों से जुड़ा एक अहम पहलू माना। उम्मीद की जाती है कि आपसी मशवरे और मुत्तहिद कोशिशों के ज़रिये इस सिलसिले में आगे की कार्रवाई को अंजाम दिया जाएगा।
डॉक्टरों की हौसला-अफ़ज़ाई, तालीम की अहमियत पर ज़ोर
प्रोग्राम के दौरान तालीमी और पेशेवर मैदान में अपनी पहचान बनाने वाली शख़्सियात की हौसला-अफ़ज़ाई भी की गई। इस मौक़े पर । इस मौक़े पर डॉ. रिज़वान साहब, डॉ. सज्जाद साहब (दिल्ली), डॉ. इरफ़ान साहब (बड़ौत) और डॉ. फ़रहान ज़ाहिद (बागपत) को सम्मानित किया गया।डॉक्टर किसी भी समाज में सेहत की हिफ़ाज़त और इंसानी ख़िदमत का अहम किरदार अदा करते हैं। बिरादरी के नौजवानों के लिए ऐसे कामयाब अफ़राद की कामयाबी इस बात का पैग़ाम है कि मेहनत, लगन, तालीम और पुख़्ता इरादे के ज़रिये ज़िंदगी के मुख़्तलिफ़ शोबों में कामयाबी हासिल की जा सकती है।
समाज की तरक़्क़ी के लिए ज़रूरी है कि बच्चों को बेहतर तालीम के मौक़े दिए जाएँ, बेटों और बेटियों दोनों की हौसला-अफ़ज़ाई की जाए और हुनरमंद तथा पेशेवर अफ़राद की कामयाबियों को नई नस्ल के सामने मिसाल के तौर पर पेश किया जाए।
तीन बेटियों के निकाह कराकर निभाई समाजी ज़िम्मेदारी
इस इज्तिमा का सबसे ख़ुशगवार और इंसानियत से भरपूर पहलू बिरादरी की तीन बेटियों के निकाह का इंतिज़ाम रहा। प्रोग्राम के दौरान तीन बेटियों के निकाह कराए गए और उन्हें जहेज़ का सामान भी दिया गया।बेटियों के निकाह में मदद करना और ज़रूरतमंद घरानों का सहारा बनना एक अहम समाजी ख़िदमत है। ऐसे काम न सिर्फ़ ख़ुशियों को बढ़ावा देते हैं, बल्कि आपसी हमदर्दी, भाईचारे और सामूहिक ज़िम्मेदारी के जज़्बे को भी मज़बूत करते हैं।
इस मौक़े का पैग़ाम यही है कि समाज के साहिब-ए-हैसियत अफ़राद और समाजी तंज़ीमों को चाहिए कि वे ज़रूरतमंद घरानों की मदद के लिए आगे आएँ, ताकि किसी बेटी के निकाह में माली परेशानी रुकावट न बने। साथ ही, निकाह को सादगी, आपसी रज़ामंदी और इस्लामी तालीमात के मुताबिक़ आसान बनाने की कोशिश भी की जानी चाहिए।
समाजी रहनुमाओं और ज़िम्मेदार हज़रात की शिरकत
कमेटी और बिरादरी से जुड़े जिन हज़रात के नाम दर्ज हैं, उनमें ज़ाहिद अली, ज़ियाउर रहमान, हाजी इलियास, हारून, साजिद, इज़हार, हाजी मन्नू, आरिफ़ गौरीपुरी, नौशाद, शमशाद और हाजी तौक़ीर सहारनपुरी। सहित अन्य नाम शामिल हैं। इन शख़्सियात की मौजूदगी ने प्रोग्राम को बिरादराना रंग और समाजी अहमियत प्रदान की।बिरादरी की बेहतरी के लिए ज़रूरी है कि समाजी रहनुमा आपसी इख़्तिलाफ़ात को पीछे छोड़कर तालीम, रोज़गार, सेहत, बेटियों की मदद और बुनियादी ज़रूरतों जैसे अहम मसलों पर मिल-जुलकर काम करें। जब समाज के मुख़्तलिफ़ तबक़ात एक मक़सद के लिए मुत्तहिद होते हैं, तो तरक़्क़ी की राहें आसान होती हैं।
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की ज़िंदगी से प्रेरणा लेने का मौक़ा
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का नाम मुल्क की वैज्ञानिक तरक़्क़ी, तालीम और नौजवानों में उम्मीद जगाने के हवाले से हमेशा याद किया जाता है। उनकी ज़िंदगी इस बात की मिसाल है कि इल्म, मेहनत, सादगी और मुल्क की ख़िदमत का जज़्बा इंसान को बुलंद मुक़ाम तक पहुँचा सकता है।
उनकी यौम-ए-पैदाइश के मौक़े पर ऐसे प्रोग्राम का आयोजन इस बात की याददिहानी भी है कि बिरादरी के बच्चों और नौजवानों को तालीम, साइंस, टेक्नोलॉजी, मेडिकल, कारोबार और दूसरे पेशेवर मैदानों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाए।
इत्तिहाद, तालीम और ख़िदमत ही तरक़्क़ी का रास्ता
बागपत में आयोजित इस प्रोग्राम के मुख़्तलिफ़ पहलुओं से यह पैग़ाम उभरकर सामने आता है कि किसी भी बिरादरी की असल ताक़त उसके अफ़राद का इत्तिहाद, उसकी नई नस्ल की तालीम और समाज के कमज़ोर तबक़े के लिए की जाने वाली ख़िदमत में होती है।
क़ब्रिस्तान जैसी बुनियादी ज़रूरत के लिए पहल, डॉक्टरों की हौसला-अफ़ज़ाई और तीन बेटियों के निकाह में मदद—ये तमाम पहलू समाजी ज़िम्मेदारी के मुख़्तलिफ़ रूपों को सामने लाते हैं। अगर ऐसे काम मुसलसल और मंसूबाबंद अंदाज़ में जारी रहें, तो बिरादरी के लिए बेहतर मुस्तक़बिल की राह हमवार हो सकती है।
दुआ है कि अल्लाह तआला इस नेक कोशिश में हिस्सा लेने वाले तमाम हज़रात की ख़िदमात को क़ुबूल फ़रमाए, निकाह के बंधन में बंधने वाली तीनों बेटियों की ज़िंदगी में ख़ुशियाँ, सुकून और बरकत अता फ़रमाए और पूरी मुस्लिम मुल्तानी लोहार-बढ़ई बिरादरी में इत्तिहाद, मोहब्बत और तरक़्क़ी का जज़्बा पैदा फ़रमाए। आमीन।
कार्यक्रम के दौरान बिरादरी के सम्मानित नौजवानों और बुज़ुर्गों को पारंपरिक पगड़ी पहनाकर ख़ुसूसी तौर पर सम्मानित किया गया। इस मौक़े पर उनकी समाजी ख़िदमात, तजुर्बे और बिरादरी के लिए उनकी क़ाबिल-ए-तारीफ़ कोशिशों को सराहा गया।
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मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।
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