जलालाबाद में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की यौमे पैदाइश पर शानदार इजलास, सांसद इकरा हसन और विधायक अशरफ अली खान की शिरकत बनी चर्चा का मौज़ू
जलालाबाद (शामली), 15 अक्टूबर 2026।
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की यौमे पैदाइश के मौक़े पर जलालाबाद स्थित जोया पैलेस में मिर्ज़ा/मुल्तानी बिरादरी का एक शानदार इजलास मुनअक़िद किया गया। इस इजलास में उत्तर प्रदेश समेत दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, गुजरात और पंजाब से बिरादरी के लोगों ने शिरकत की। प्रोग्राम में सियासी रहनुमाओं, समाजी शख़्सियात, उलेमा और बिरादरी के ज़िम्मेदारों की मौजूदगी ने इसे ख़ास बना दिया।
विधायक अशरफ अली खान ने फीता काटकर इजलास का इफ़्तिताह किया, जबकि कैराना की लोकप्रिय सांसद इकरा हसन साहिबा चीफ़ गेस्ट के तौर पर शरीक हुईं। ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय संयोजक शमीम अंसारी साहब, मौलाना रकीब साहब, शकील अंसारी साहब और दीगर मेहमानों की मौजूदगी भी प्रोग्राम की अहमियत को ज़ाहिर करती रही।
लेकिन इस पूरे इजलास के बाद एक सवाल चर्चा का मौज़ू बन सकता है—क्या यह महज़ बिरादरी के इत्तिहाद और समाजी बेदारी का प्रोग्राम था, या इसके ज़रिये बिरादरी की तादाद और उसके सियासी असर-ओ-रसूख़ का पैग़ाम भी दिया गया?
एक तीर से कई निशाने—इंजीनियर उस्मान की सियासी बिसात की चर्चा!
बिरादरी के इजलास में बड़ी तादाद में लोगों की शिरकत, सियासी रहनुमाओं की मौजूदगी और मुख़्तलिफ़ सूबों के ज़िम्मेदारों की भागीदारी को देखकर यह सवाल उठना लाज़िमी है कि ऐसे प्रोग्रामों से समाजी मक़सद के साथ-साथ सियासी पैग़ाम भी किस हद तक जुड़ जाते हैं।
प्रोग्राम के संचालन में इंजीनियर उस्मान और मास्टर यामीन का नाम सामने आया। इसी संदर्भ में एक तल्ख़ सियासी तजज़िया यह भी हो सकता है कि “एक ही तीर से कई शिकार”—क्या इंजीनियर उस्मान ने बिरादरी की भीड़ और इजलास के मंच के ज़रिये अपनी सियासी हैसियत का इज़हार करने की कोशिश की?
क्या इस प्रोग्राम के ज़रिये ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम समाज के रहनुमाओं, विधायक अशरफ अली खान और सांसद इकरा हसन साहिबा को यह पैग़ाम देने की कोशिश की गई कि मिर्ज़ा/मुल्तानी बिरादरी की एक बड़ी तादाद को एक मंच पर जमा किया जा सकता है?
ये सवाल सियासी और समाजी हल्क़ों में बहस का विषय बन सकते हैं। अलबत्ता, इंजीनियर उस्मान की नीयत, उनके सियासी इरादों या बिरादरी के वोटों पर उनके किसी ख़ास असर के बारे में कोई क़तई दावा करने के लिए उनके अपने मौक़िफ़ और दूसरे ठोस सबूत भी ज़रूरी हैं।
बिरादरी का इत्तिहाद या सियासी ताक़त का इज़हार?
मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की समाजी और तालीमी तरक़्क़ी के लिए ऐसे इजलास अहम किरदार अदा कर सकते हैं। इनका असल मक़सद तालीम, रोज़गार, क़ौमी इत्तिहाद, नौजवानों की रहनुमाई, क़ानूनी मदद और समाजी मसाइल के हल की राह हमवार करना होना चाहिए।
इसके साथ ही यह भी क़ाबिले-ग़ौर है कि जब किसी बिरादरी के प्रोग्राम में सांसद, विधायक और बड़े समाजी रहनुमा एक साथ शरीक होते हैं, तो उसकी समाजी अहमियत के साथ सियासी अहमियत पर भी चर्चा होने लगती है। मगर किसी प्रोग्राम में भीड़ की मौजूदगी को तमाम लोगों के एक ही सियासी ख़याल या किसी एक शख़्स के इशारे पर वोट देने का सबूत नहीं माना जा सकता।
बिरादरी के वोट किसी की निजी मिल्कियत नहीं, बल्कि हर वोटर का अपना जम्हूरी हक़ हैं। किसी भी समाजी रहनुमा की असल हैसियत का अंदाज़ा उसके काम, ख़िदमात, अवाम के मसाइल के हल और बिरादरी के मुस्तक़बिल के लिए उठाए गए क़दमों से होना चाहिए।
सदारत, मेहमाने ख़ुसूसी और निज़ामत
इजलास की सदारत डॉक्टर दाऊद साहब ने की, जबकि मौलाना हारून मुल्तानी मेहमाने ख़ुसूसी के तौर पर शरीक हुए। प्रोग्राम की निज़ामत इंजीनियर उस्मान और मास्टर यामीन ने की।
इजलास के प्रोग्राम संयोजक हाजी नज़ीर साहब रहे। मुख्य आयोजक मास्टर ख़लील अहमद साहब के साथ सलीम अहमद थानाभवन, मौलाना सलीम गढ़ी पुख़्ता, मेहरान अहमद और उनकी टीम ने आयोजन की ज़िम्मेदारियां निभाईं।
प्रोग्राम में ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय संयोजक शमीम अंसारी साहब, प्रभारी शमीम अंसारी साहब, उलेमा बोर्ड के संगठन मंत्री मौलाना रकीब साहब और मंत्री शकील अंसारी साहब की शिरकत भी दर्ज की गई।
मुख़्तलिफ़ सूबों के सदर और ज़िम्मेदारों की शिरकत
इजलास में उत्तर प्रदेश के सदर अब्दुल हमीद साहब, दिल्ली के सदर हाजी सगीर हसन साहब, हरियाणा के सदर हाजी ग़फ़्फ़ार साहब और उत्तराखंड के प्रभारी हनीफ़ साहब अपनी-अपनी टीमों के साथ मौजूद रहे। मुख़्तलिफ़ उप-कमेटियों के सदर और उनके साथी भी प्रोग्राम में शरीक हुए।
बिरादरी के कई सूबों से आए लोगों की भागीदारी ने आपसी राब्ते और इत्तिहाद की अहमियत को उजागर किया। इस तरह के इजलास से यह उम्मीद की जाती है कि बिरादरी के समाजी मसाइल को समझने और उनके हल के लिए मुश्तरका कोशिशों को आगे बढ़ाया जाएगा।
जकात फंड से लीगल सेल तक—कमेटियों की मौजूदगी
प्रोग्राम में समाजी ख़िदमात से जुड़ी मुख़्तलिफ़ कमेटियों के ज़िम्मेदार भी मौजूद रहे। इनमें जकात फंड के सदर एडवोकेट इरशाद साहब, लीगल सेल के सदर मिर्ज़ा आबिद अली एडवोकेट, तनाज़ा हल कमेटी के सदर मिर्ज़ा हाशिमुद्दीन हमदम साहब, एजुकेशन कमेटी के सदर मास्टर ख़लील साहब, स्पोर्ट्स कमेटी के सदर सनव्वर खान साहब और युवा कमेटी के सदर जुनैद मुल्तानी साहब अपनी-अपनी टीमों के साथ शरीक हुए।
इन कमेटियों की मौजूदगी से तालीम, क़ानूनी रहनुमाई, समाजी इख़्तिलाफ़ात के हल, खेलकूद और नौजवानों की भागीदारी जैसे अहम मौज़ूआत पर तवज्जोह देने की गुंजाइश सामने आती है।
मेहमानों का इस्तक़बाल, आबे ज़मज़म और खजूर की पेशकश
इजलास में आने वाले तमाम मेहमानों का गेट पर फूल-मालाओं से इस्तक़बाल किया गया। मेहमानों को आबे ज़मज़म और खजूर पेश किए गए। मुस्लिम तहज़ीब में मेहमाननवाज़ी और एहतराम की अपनी ख़ास अहमियत है, और इस आयोजन में भी इसका ख़ास एहतिमाम किया गया।
आयोजकों के मुताबिक़, प्रोग्राम को कामयाब बनाने में हाजी नज़ीर साहब, मुख्य आयोजक मास्टर ख़लील अहमद साहब, मौलाना सलीम साहब थानाभवन, सलीम अहमद गढ़ी पुख़्ता, समन्वयक मेहरान अहमद, सरपरस्तों, खान-पान कमेटी, इस्तक़बाल कमेटी और दीगर तआवुन करने वालों ने अहम किरदार अदा किया।
मिर्ज़ा/मुल्तानी वेलफेयर सोसाइटी ने अदा किया शुक्रिया
मिर्ज़ा/मुल्तानी वेलफेयर सोसाइटी ने इजलास में शिरकत करने वाले तमाम मेहमानों, बिरादरी के लोगों, समाजी रहनुमाओं और आयोजन में सहयोग देने वाले सभी अफ़राद का दिल से शुक्रिया अदा किया।
आख़िरी सवाल—बिरादरी को क्या हासिल हुआ?
जलालाबाद का यह इजलास अपनी बड़ी शिरकत और सियासी रहनुमाओं की मौजूदगी के कारण चर्चा का विषय बना। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस जमावड़े से बिरादरी को तालीम, रोज़गार, नौजवानों की तरक़्क़ी, क़ानूनी मदद और समाजी मसाइल के हल के मैदान में क्या ठोस फ़ायदा मिलता है।
क्योंकि बिरादरी की असल ताक़त सिर्फ़ भीड़ जमा करने में नहीं, बल्कि उस भीड़ के भरोसे को समाजी तरक़्क़ी, इत्तिहाद और अवामी ख़िदमत में बदलने में है।
विशेष रिपोर्ट: ज़मीर आलम, प्रधान संपादक
उत्तर प्रदेश डेस्क — मुल्तानी समाज
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