डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती के मौक़े पर सामाजिक जागरूकता, तालीम, प्रतिभा सम्मान और बिरादरी के इत्तिहाद का पैग़ाम; दोनों आयोजनों में अलग-अलग कार्यक्रमों की तैयारी।
बागपत/क़स्बा जलालाबाद, ज़िला शामली, उत्तर प्रदेश। मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी से जुड़ी मिली जानकारी के मुताबिक़, 15 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश के जनपद बागपत और क़स्बा जलालाबाद, ज़िला शामली में दो अलग-अलग सामाजिक एवं संगठनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की घोषणा की गई है। दोनों आयोजनों में बिरादरी की सामाजिक सरगर्मियों, तालीमी बेदारी, प्रतिभाओं की हौसला-अफ़ज़ाई और आपसी राब्ते को मज़बूत करने से जुड़े विषयों को अहमियत दी गई है।
एक तरफ़ जनपद बागपत में मुल्तानी वेलफेयर सोसायटी की जानिब से बिरादरी सम्मेलन और प्रतिभा सम्मान समारोह की तैयारी की गई है, वहीं दूसरी तरफ़ क़स्बा जलालाबाद, ज़िला शामली में ‘मिर्ज़ा मुल्तानी मिलन समारोह’ के ज़रिये तालीमी, समाजी, मआशी और पर्यावरणीय बेदारी का पैग़ाम आम करने की घोषणा की गई है।
बागपत में मुल्तानी वेलफेयर सोसायटी का बिरादरी सम्मेलन
मिली जानकारी के मुताबिक़, मुल्तानी वेलफेयर सोसायटी, जनपद बागपत की जानिब से जुमेरात, 15 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजे आशीर्वाद गार्डन, दिल्ली रोड, बागपत में एक सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की घोषणा की गई है।इस कार्यक्रम में भारत के पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के यौम-ए-पैदाइश, बेटियों के निकाह, छात्र-छात्राओं के प्रतिभा सम्मान समारोह और मुल्तानी बिरादरी सम्मेलन जैसे अहम विषयों को शामिल किया गया है।
इस आयोजन के ज़रिये बिरादरी के लोगों को एक मंच पर लाने, आपसी ताल्लुक़ात को बेहतर बनाने, समाज की प्रतिभाओं की हौसला-अफ़ज़ाई करने और सामाजिक ज़िम्मेदारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का पैग़ाम दिया गया है।
मुस्लिम समाज में तालीम, अख़लाक़, आपसी इत्तिहाद और ज़रूरतमंदों की मदद को हमेशा अहमियत दी जाती रही है। ऐसे कार्यक्रम नई नस्ल को अपनी सामाजिक ज़िम्मेदारियों से जोड़ने और समाज की बेहतरी के लिए मिल-जुलकर काम करने की प्रेरणा दे सकते हैं।
क़स्बा जलालाबाद, ज़िला शामली में होगा ‘मिर्ज़ा मुल्तानी मिलन समारोह’
इसी सिलसिले में मिली जानकारी के मुताबिक़, क़स्बा जलालाबाद, ज़िला शामली में जुमेरात, 15 अक्टूबर 2026 को सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक ‘मिर्ज़ा मुल्तानी मिलन समारोह’ आयोजित किए जाने की घोषणा की गई है। कार्यक्रम का निर्धारित स्थल जोया मैरिज होम, दिल्ली-सहारनपुर रोड, क़स्बा जलालाबाद, ज़िला शामली, उत्तर प्रदेश बताया गया है।इस समारोह को भारत रत्न, मिसाइल मैन और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती के मौक़े से जोड़ते हुए तालीमी, मआशी, सियासी, समाजी और पर्यावरणीय क्षेत्रों में बेदारी और तरक़्क़ी का पैग़ाम दिया गया है।
मिली जानकारी के मुताबिक़, कार्यक्रम के संयोजक एवं आयोजकों में हाजी नज़ीर अहमद (जलालाबाद), खलील अहमद (बनत), सलीम अहमद (गढ़ी पुख़्ता) और सलीम अहमद (थाना भवन) सहित संबंधित संगठन के पदाधिकारियों का उल्लेख किया गया है।
तिलावत-ए-क़ुरआन से लेकर प्रतिभा सम्मान तक के कार्यक्रम
मिली जानकारी के मुताबिक़, जलालाबाद में प्रस्तावित समारोह की कार्यक्रम-सारणी में क़ुरआन-ए-पाक की तिलावत, तिलावत का तर्जुमा, नात-ए-रसूल ﷺ और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की ज़िंदगी तथा उनकी ख़िदमात से परिचय जैसे कार्यक्रम शामिल किए गए हैं।
इसके अलावा इस्तक़बालिया बयान, सोसायटी की गतिविधियों का तआरुफ़, सदर और अन्य ज़िम्मेदारों की ओर से संगठनात्मक कार्यों की जानकारी, विभिन्न उपसमितियों की पिछली कारगुज़ारियों और आइंदा के मंसूबों पर गुफ़्तगू तथा मेहमानों और वक्ताओं के ख़िताबात के लिए भी वक़्त निर्धारित किया गया है।
कार्यक्रम में नमाज़ और लंच के लिए भी समय रखा गया है। इसके साथ ही ‘मिर्ज़ा मुल्तानी सुपर आइकॉन प्रतिभा सम्मान समारोह’ आयोजित करने की घोषणा की गई है, जिसके ज़रिये विभिन्न क्षेत्रों में क़ाबिलियत का मुज़ाहिरा करने वाली प्रतिभाओं की हौसला-अफ़ज़ाई का उद्देश्य सामने रखा गया है।
कार्यक्रम-सारणी में आगामी साल के लिए कार्ययोजना तैयार करने, ज़िम्मेदारियों के निर्धारण और अगले आयोजन के स्थान की घोषणा जैसे विषयों का भी उल्लेख किया गया है।
डॉ. कलाम की जयंती और नई नस्ल की तरबियत का पैग़ाम
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की ज़िंदगी तालीम, मेहनत, ख़ुद-एतमादी और मुल्क की ख़िदमत की मिसाल के तौर पर याद की जाती है। उनका सफ़र इस बात की प्रेरणा देता है कि इंसान इल्म, लगन और लगातार कोशिश के ज़रिये अपनी मंज़िल हासिल कर सकता है।
ऐसे मौक़ों पर तालीमी बेदारी, बच्चों की हौसला-अफ़ज़ाई, नौजवानों की रहनुमाई और समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना ख़ास अहमियत रखता है। बिरादरी के सामाजिक कार्यक्रमों में इन विषयों को शामिल करना नई नस्ल को बेहतर मुस्तक़बिल की तरफ़ बढ़ने का हौसला दे सकता है।
दो आयोजन, अलग-अलग मंच और सामाजिक बेहतरी की उम्मीद
15 अक्टूबर 2026 को बागपत और क़स्बा जलालाबाद, ज़िला शामली में प्रस्तावित दोनों कार्यक्रमों का अपना अलग आयोजन, स्थान और कार्यक्रम-सारणी है। एक तरफ़ बिरादरी सम्मेलन और प्रतिभा सम्मान से जुड़ी गतिविधियों की घोषणा की गई है, तो दूसरी तरफ़ मिलन समारोह के माध्यम से संगठनात्मक चर्चा, तालीमी जागरूकता और प्रतिभाओं के सम्मान की योजना सामने आई है।मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के लिए तालीम, आपसी इत्तिहाद, सामाजिक ख़िदमत और नई नस्ल की तरक़्क़ी जैसे विषय हमेशा अहम रहे हैं। उम्मीद की जाती है कि ऐसे आयोजन समाज के लोगों के बीच सकारात्मक संवाद को बढ़ावा देंगे और सामाजिक बेहतरी के लिए मिल-जुलकर काम करने की राह हमवार करेंगे।
यह रिपोर्ट दोनों आयोजनों के संबंध में मिली जानकारी पर आधारित है। कार्यक्रमों में वास्तविक भागीदारी, संपन्न हुई गतिविधियों और आयोजकों की ओर से लिए गए निर्णयों की तस्दीक़ आयोजन के बाद उपलब्ध जानकारी के आधार पर की जा सकेगी।
‘मुल्तानी समाज’ की ख़ास रिपोर्ट
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल ‘मुल्तानी समाज’ के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।
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