मरहूम करीब 64 साल की उम्र में इस फ़ानी दुनिया को हमेशा-हमेशा के लिए अलविदा कह गए। वह तीन भाइयों में बड़े थे – हाजी जनाब अलीन साहब, जनाब अब्दुल कय्यूम साहब और मोहम्मद सलीम साहब।
मरहूम अपने पीछे एक अहलिया, दो बेटे (मोहम्मद अमीर और मोहम्मद इमरान) तथा एक बेटी (शाइस्ता) सहित पूरा कुनबा, खानदान और रिश्तेदारों को रोता-बिलखता छोड़कर रुख़्सत हुए।
हाजी मोहम्मद अलीन साहब मूलतः उत्तर प्रदेश के ज़िला बागपत की तहसील बड़ौत के गाँव जोनमाना के रहने वाले थे, लेकिन लंबे अरसे से उनका परिवार शीतला कॉलोनी, गुड़गांव में रह रहा था।
मरहूम का जनाज़ा कल जुमा सुबह 10 बजे गुड़गांव में ही उठाया जाएगा और वहीं सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।
लिहाज़ा तमाम अज़ीज़ो-अक़ारिब और बिरादरी के अहबाब से गुज़ारिश है कि जनाज़े में शरीक होकर सवाब-ए-दारेन हासिल करें।
👉 अल्लाह तआला मरहूम को जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए और घरवालों को सब्र-ए-जमील बख़्शे।
आमीन या रब्बुल आलमीन।
📌 नोट: मय्यत के बारे में और जानकारी के लिए मरहूम के बेटे से मोबाईल नंबर 9873441235 पर राब्ता किया जा सकता है।
✍️ “मुल्तानी समाज” न्यूज़ के लिए बड़ौत (जिला बागपत, उत्तर प्रदेश) से अलीहसन मुल्तानी की खास रिपोर्ट
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