Monday, August 25, 2025

बड़ौत की सरज़मीं पर उठते सवाल: मरहूम डॉ. परवेज़ आलम साहब की संदिग्ध मौत का रहस्य

बागपत जनपद के क़स्बा बड़ौत में 23 अगस्त 2025 को घटित हुई मरहूम डॉ. परवेज़ आलम साहब (MBBS, MD) की संदिग्ध मौत ने पूरे क्षेत्र को गहरे सदमे में डाल दिया है।

डॉ. साहब का जाना सिर्फ़ एक घर का ग़म नहीं, बल्कि पूरे समाज का नुक़सान है।

इंसानियत के रहनुमा

मरहूम डॉ. परवेज़ आलम साहब न सिर्फ़ एक काबिल डॉक्टर थे बल्कि एक नेकदिल इंसान भी थे।
उन्होंने हमेशा अपने मरीज़ों को इंसानियत की नज़र से देखा। ग़रीब और मज़लूम मरीज़ों का मुफ़्त इलाज करना, तालीमी हलक़ों में नौजवानों की रहनुमाई करना, और समाजी कामों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना उनका शौक़ नहीं बल्कि मिशन था।
हर मरीज़ उनकी दुआओं और मुस्कुराहट को याद करता है।

इंसाफ़ की तलाश में समाज की पुकार

जब इस नेकदिल इंसान की संदिग्ध मौत की ख़बर फैली तो हर शख़्स का दिल दहल उठा। आज सैकड़ों लोग ग़म और ग़ुस्से से भरे हुए थाना प्रभारी बड़ौत से मिले।
थाना प्रभारी ने भरोसा दिलाया कि CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं, टीम लगी हुई है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी जल्द सामने आएगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सब डॉक्टर साहब की मौत का असली राज़ खोल पाएगा?

SP दफ़्तर तक पहुँची इंसाफ़ की सदा

बाद में यह कारवाँ-ए-ग़म और इंसाफ़ की तलब SP ऑफिस, बागपत तक जा पहुँचा।
परिजनों और समाज ने मांग रखी कि इस मामले की जांच सीबी, सीआईडी से हो, ताकि हर शक का दरवाज़ा बंद हो और सच्चाई बेनक़ाब हो।
परिजनों का यक़ीन है कि यह मौत महज़ हादसा नहीं बल्कि एक सोची-समझी साज़िश है।

SP बागपत ने सबको भरोसा दिलाया कि—
"इस केस की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होगी, और हक़ीक़त जल्द सामने लाकर इंसाफ़ किया जाएगा।"

समाज का कारवाँ

इस मौके पर समाज के कई गणमान्य लोग मौजूद थे, जिनमें इरफ़ान मालिक, एडवोकेट आकिब चौधरी, आज़ाद चौधरी, उस्मान मलिक, एडवोकेट सरफ़राज़ अहमद, इंजीनियर उज्जी समेत सैकड़ों लोग शामिल रहे।
हर शख़्स की आँखों में ग़म की नमी और इंसाफ़ की प्यास साफ़ झलक रही थी।

सवाल अब भी बाक़ी है…

मरहूम डॉ. परवेज़ आलम साहब की रहस्यमयी मौत आज पूरे समाज के लिए एक इम्तेहान बन चुकी है।
क्या उनकी शख़्सियत और इंसानियत की मेहनत को ये समाज कभी भूल पाएगा?
क्या इंसाफ़ वक़्त रहते मिलेगा?
या फिर सच्चाई एक बार फिर अंधेरों में दबकर रह जाएगी?

आज हर दिल यही दुआ कर रहा है कि इंसाफ़ की रौशनी इस ग़म के अंधेरे को चीरकर बाहर आए और डॉ. साहब की पाक रूह को चैन मिले।


✍️ ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट
मुल्तानी समाज राष्ट्रीय समाचार पत्रिका, बड़ौत (बागपत), उत्तर प्रदेश
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