लंबी बीमारी के बाद आज सुबह 7 बजे ली आख़िरी साँस, अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए — आमीन या रब्बुल आलमीन।
बड़ौत, ज़िला बागपत (उत्तर प्रदेश)।
निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिली अफ़सोस के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादराना हज़रात को इत्तिला दी जाती है कि आज बरोज़ बुध, बा-तारीख़ 21 अक्टूबर 2026 को गली नम्बर 6, गुराना रोड, क़स्बा बड़ौत, ज़िला बागपत, उत्तर प्रदेश के साकिन, जनाब गुलाब नबी साहब डूडूखेड़ा वालों के पोते और जनाब मोहम्मद मैनुद्दीन साहब के फ़रज़ंद, लगभग 19 वर्षीय मोहम्मद आरिश साहब का तवील बीमारी के चलते आज सुबह क़रीब 7 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया है।
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।
बेशक हम सब अल्लाह ही के हैं और उसी की तरफ़ हमें लौटकर जाना है। यह दुनिया फ़ानी है और मौत एक ऐसी हक़ीक़त है जिससे किसी को फ़रार नहीं। मगर कमसिनी में किसी नौजवान का दुनिया-ए-फ़ानी से रुख़्सत हो जाना वालिदैन, अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और तमाम चाहने वालों के लिए बेहद दर्दनाक सदमा होता है। मोहम्मद आरिश साहब के इंतिक़ाल की ख़बर से उनके घराने और बिरादरी के लोगों में ग़म और अफ़सोस की कैफ़ियत है।
इस मुश्किल घड़ी में दुआ है कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त अपने फ़ज़्ल-ओ-करम से मरहूम को अपनी बेपनाह रहमतों के साये में जगह अता फ़रमाए, उनकी तमाम ख़ताओं से दरगुज़र फ़रमाए और उनके घरवालों को इस सदमे को बर्दाश्त करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।
मरहूम की मग़फ़िरत के लिए ख़ुसूसी दुआ
ऐ अल्लाह! ऐ तमाम जहानों के परवरदिगार! तू बड़ा ग़फ़ूर-ओ-रहीम है। अपने महबूब हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ के सदक़े में मरहूम मोहम्मद आरिश साहब की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमा।
या अल्लाह! मरहूम पर अपनी ख़ास रहमत नाज़िल फ़रमा, उनकी लग़ज़िशों से दरगुज़र फ़रमा, उनकी नेकियों को क़ुबूल फ़रमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमा। उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा और उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे।
या अल्लाह! मरहूम के वालिदैन, दादा-दादी, तमाम घरवालों, रिश्तेदारों और अज़ीज़ों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा। उनके दिलों को सुकून दे, इस अज़ीम सदमे को बर्दाश्त करने की हिम्मत अता फ़रमा और उन्हें अपनी रहमत से मायूस न होने देना।
आमीन या रब्बुल आलमीन।
तदफ़ीन के वक़्त के मुताल्लिक़ अहम इत्तिला
ख़बर लिखे जाने तक मरहूम मोहम्मद आरिश साहब की नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन का वक़्त मालूम नहीं हो सका है। जैसे ही घरवालों या ज़िम्मेदार अफ़राद की तरफ़ से सही इत्तिला हासिल होगी, उसे ख़बर में अपडेट कर दिया जाएगा।
तमाम बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि तदफ़ीन के वक़्त की तस्दीक़शुदा इत्तिला हासिल होने पर जनाज़े में शरीक होकर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और ग़मज़दा ख़ानदान के साथ ताज़ियत व दिलजोई का इज़हार फ़रमाएँ।
दफ़्न और क़ब्र में उतारने के वक़्त की मस्नून दुआएँ
जब किसी मुसलमान को क़ब्र में उतारा जाए, तो यह दुआ पढ़ना मस्नून है:
بِسْمِ اللّٰهِ وَعَلَىٰ مِلَّةِ رَسُولِ اللّٰهِ ﷺ
तर्जुमा: अल्लाह के नाम के साथ और रसूलुल्लाह ﷺ के दीन व तरीक़े पर।
दफ़्न के बाद मरहूम के लिए मग़फ़िरत और साबित-क़दमी की दुआ करनी चाहिए। रसूलुल्लाह ﷺ से साबित है कि आप ﷺ दफ़्न से फ़ारिग़ होने के बाद फ़रमाते थे कि अपने भाई के लिए मग़फ़िरत माँगो और उसके लिए साबित-क़दमी की दुआ करो, क्योंकि अब उससे सवाल किया जा रहा है।
इस मौक़े पर तमाम हाज़िरीन अपने हाथ उठाकर या दिल ही दिल में मरहूम के लिए दुआ करें:
اللّٰهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَارْحَمْهُ وَثَبِّتْهُ عِنْدَ السُّؤَالِ
तर्जुमा: ऐ अल्लाह! उनकी मग़फ़िरत फ़रमा, उन पर रहम फ़रमा और सवाल के वक़्त उन्हें साबित-क़दम रख।
क़ब्र पर मिट्टी डालते वक़्त की दुआ
क़ब्र पर मिट्टी डालते वक़्त क़ुरआन-ए-करीम की यह आयत याद रखना मुनासिब है:
مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ
तर्जुमा: इसी ज़मीन से हमने तुम्हें पैदा किया, इसी में तुम्हें लौटाएँगे और इसी से तुम्हें दोबारा निकालेंगे।
(सूरह ताहा, आयत 55)
क़ब्र पर मिट्टी डालते वक़्त इस आयत को पढ़ना अहल-ए-इल्म के यहाँ मअरूफ़ अमल है। इसे हर मिट्टी डालने वाले के लिए लाज़िमी या फ़र्ज़ न समझा जाए।
ऐ अल्लाह! इस मिट्टी को मरहूम के हक़ में सुकून और रहमत का ज़रिया बना। उनकी क़ब्र को तंगियों से महफ़ूज़ फ़रमा, उसे नूर से भर दे और क़यामत के दिन उन्हें अपने नेक बंदों के साथ उठाना।
आमीन सुम्मा आमीन।
बिरादराना हज़रात से ख़ुसूसी गुज़ारिश
तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार, बढ़ई बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि इस ग़म की घड़ी में मरहूम के ख़ानदान को अपनी दुआओं में याद रखें। अल्लाह तआला हम सबको ईमान पर ज़िंदगी और ईमान पर ख़ातिमा नसीब फ़रमाए तथा हमारे तमाम मरहूमीन की मग़फ़िरत फ़रमाए।
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।
ख़ास रिपोर्ट — उत्तर प्रदेश डेस्क
ज़मीर आलम
प्रधान संपादक
“मुल्तानी समाज” राष्ट्रीय समाचार पत्रिका
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, देश की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल — “मुल्तानी समाज”
अपनी ख़बरें और तहरीरात क़ौमी सतह पर प्रकाशित कराएँ
अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का विज्ञापन क़ौमी सतह पर शाया या प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो बराए मेहरबानी नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।
📞 9410652990
📞 8010884848
आपका एतमाद ही हमारी सबसे बड़ी ताक़त है।
“मुल्तानी समाज” — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।
No comments:
Post a Comment