17 जून: मुल्तानी समाज स्थापना दिवस — एकता, सेवा और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश
भारत की विविध सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत में अनेक ऐसे समाज और बिरादरियां हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत, हुनर और सामाजिक सेवाओं के माध्यम से देश की तरक्की में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पैदायशी इंजीनियर कहे जाने वाले मुस्लिम मुल्तानी लोहार एवं बढ़ई समाज की पहचान भी इसी मेहनतकश परंपरा, कौशल और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ी हुई है।
देश की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी सामाजिक संस्था "मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट (रजि.)" का स्थापना दिवस प्रत्येक वर्ष 17 जून को पूरे देश में बड़े उत्साह और सम्मान के साथ मनाया जाता है। यह दिन केवल एक संगठन की स्थापना का प्रतीक नहीं है, बल्कि समाज की एकता, जागरूकता, सामाजिक सरोकार और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प का भी प्रतीक बन चुका है।वृक्षारोपण के माध्यम से समाज सेवा का संदेश
मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक जनाब ज़मीर आलम द्वारा वर्ष 2011 में शुरू की गई एक अनूठी पहल ने आज राष्ट्रीय स्तर पर एक जनआंदोलन का रूप ले लिया है। हर वर्ष 17 जून को "मुल्तानी समाज स्थापना दिवस" के अवसर पर देशभर में फैले मुस्लिम मुल्तानी लोहार एवं बढ़ई बिरादरी के लोग अपने-अपने क्षेत्रों में छायादार और पर्यावरण के लिए उपयोगी वृक्ष लगाकर प्रकृति संरक्षण में अपना योगदान देते हैं। इस मुहिम की सबसे विशेष बात यह है कि समाज के लोग वृक्षारोपण के बाद अपनी तस्वीरें और गतिविधियों को सोशल मीडिया एवं अन्य जनसंचार माध्यमों के जरिए साझा करते हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश दूर-दूर तक पहुंचता है। बीते वर्षों में यह अभियान राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र सहित देश के अनेक राज्यों में सफलतापूर्वक संचालित हुआ है।जिम्मेदारियों का वितरण और तैयारियां शुरू
इस वर्ष भी स्थापना दिवस को यादगार बनाने के लिए संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों को विभिन्न क्षेत्रों की जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। संस्था के पूर्व राष्ट्रीय चेयरमैन जनाब मोहम्मद आलम, वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जनाब हाजी मोहम्मद इक़बाल काजी (भीलवाड़ा, राजस्थान), अब्दुल सत्तार साहब (सत्तार बॉस, इंदौर) तथा उज्जैन से जनाब फारूख साहब , महबूब खान करनाल, हरियाणा से और मोहम्मद इरफ़ान चमोली, उत्तराखंड से और फारूख साहब बागपत, उत्तर प्रदेश को हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी कार्यक्रम के सफल संचालन की जिम्मेदारी दी गई है। समाज के जिम्मेदारों का मानना है कि वृक्षारोपण केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनकी देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी भी समाज के प्रत्येक सदस्य को निभानी चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण मिल सके।एकता और पहचान का प्रतीक बन चुका है स्थापना दिवस
आज 17 जून का दिन केवल एक समारोह नहीं बल्कि मुल्तानी समाज की पहचान, एकता और सामाजिक चेतना का प्रतीक बन चुका है। देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले समाज के लोग इस दिन को आपसी भाईचारे, सामाजिक सहयोग और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ मनाते हैं। समाज के बुजुर्गों और युवाओं का मानना है कि जिस प्रकार उनके पूर्वजों ने अपने हुनर और मेहनत से समाज में सम्मान अर्जित किया, उसी प्रकार वर्तमान पीढ़ी को भी सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए सकारात्मक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
निष्कर्ष
मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा शुरू किया गया वृक्षारोपण अभियान इस बात का प्रमाण है कि यदि किसी समाज की सोच सकारात्मक हो तो वह केवल अपने समुदाय तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे देश और मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत बन जाता है। 17 जून का स्थापना दिवस इसी प्रेरणा, सेवा भावना और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प का जीवंत उदाहरण है।आइए, इस स्थापना दिवस पर हम सभी एक पौधा लगाकर और उसकी देखभाल का संकल्प लेकर प्रकृति को सुरक्षित रखने में अपना योगदान दें।
विशेष संवाददाता: अज़हर मुल्तानी, नई दिल्ली
प्रकाशन: मुल्तानी समाज (राष्ट्रीय समाचार पत्रिका / न्यूज पोर्टल / यूट्यूब चैनल)
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