इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन, शामली के मोहल्ला नौ-कुआँ में शोक की लहर, जनाब मोहम्मद इस्लाम साहब अपने रब से जा मिले
शामली, उत्तर प्रदेश। मौत एक ऐसी हकीकत है जिससे कोई इंकार नहीं कर सकता। हर जान को एक न एक दिन अपने पैदा करने वाले रब की बारगाह में हाजिर होना है। इसी हकीकत के साथ आज शामली जनपद से एक बेहद गमगीन खबर सामने आई है, जिसने परिवार, रिश्तेदारों, बिरादरी और जानने वालों की आंखों को नम कर दिया।
मिली जानकारी के अनुसार गांव हाथी करौदा, जिला शामली के मूल निवासी तथा वर्तमान में मोहल्ला नौ-कुआँ, शामली में रह रहे जनाब मोहम्मद इस्लाम साहब पुत्र जनाब मोहम्मद मजीद साहब का बुधवार, 10 जून 2026 को लगभग दोपहर 2 बजे क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया। मरहूम की उम्र लगभग 75 वर्ष बताई गई है।
जनाब मोहम्मद इस्लाम साहब अपने पीछे एक भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके परिवार में दो बेटे जनाब मोहम्मद इकराम एवं जनाब मोहम्मद इरफान सहित बेटियां और अन्य परिजन शामिल हैं। इसके अलावा पौते-पोतियां, नाती-नातिन तथा अज़ीज़-ओ-अकारिब की बड़ी तादाद है, जो आज इस दुखद पलों में गहरे सदमे और गम में डूबी हुई है।
मरहूम के इंतकाल की खबर फैलते ही मोहल्ले और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। ताज़ियत पेश करने वालों का सिलसिला लगातार जारी है। हर जुबान पर मरहूम के लिए दुआ और हर आंख में उनके बिछड़ने का गम दिखाई दे रहा है।
परिवार और परिचितों के अनुसार जनाब मोहम्मद इस्लाम साहब एक नेक, शरीफ, मिलनसार और खुशमिजाज इंसान थे। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी रिश्तों को निभाने, लोगों की इज्जत करने और परिवार को जोड़कर रखने में गुजारी। यही वजह है कि उनके इंतकाल की खबर ने अनेक लोगों को भावुक कर दिया।
मिली जानकारी के अनुसार मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा आज बाद नमाज़ ईशा अदा की जाएगी। इसके बाद मोहल्ला गुलशन नगर, शामली स्थित कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा। परिवार की ओर से तमाम बिरादरान, दोस्तों और अज़ीज़-ओ-अकारिब से जनाज़े में शिरकत कर मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फिरत करने की गुजारिश की गई है।
इस दुखद मौके पर "मुल्तानी समाज" परिवार मरहूम के परिजनों के साथ अपनी गहरी हमदर्दी रखता है और अल्लाह तआला से दुआ करता है कि वह मरहूम की तमाम खताओं को माफ फरमाए, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे, उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए तथा उनके पीछे रह जाने वाले परिवार को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।
दुआ-ए-मग़फिरत
"ऐ अल्लाह! मरहूम मोहम्मद इस्लाम साहब की मग़फिरत फरमा, उनकी क़ब्र को जन्नत के बागों में से एक बाग बना, उनके दर्जात बुलंद फरमा, उन्हें हिसाब-किताब में आसानी अता फरमा और जन्नतुल फिरदौस में आला से आला मुकाम नसीब फरमा। आमीन।"
दुआ-ए-दफ़्न
"ऐ अल्लाह! मरहूम की मंज़िल आसान फरमा, क़ब्र की तन्हाई को रहमत से भर दे, उसे नूर का घर बना दे और हश्र के दिन उन्हें अपने नेक बंदों के साथ उठाना। आमीन।"
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।
— ज़मीर आलम
प्रधान संपादक
"मुल्तानी समाज" राष्ट्रीय समाचार पत्रिका / न्यूज़ पोर्टल / यूट्यूब चैनल
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