Thursday, June 4, 2026

!! नेक़ी का लिबास और अस्ल किरदार !!

♨️ आज का सबक़-आमोज़ वाक़िआ ♨️

एक दफ़ा एक फ़ाख़्ता और उसकी हमसफ़र फ़ाख़्ता एक दरख़्त की शाख़ पर बैठे हुए थे। दूर से उन्हें एक शख़्स अपनी तरफ़ आता दिखाई दिया।

मादा फ़ाख़्ता ने फ़िक्र के साथ कहा, "चलो यहाँ से उड़ चलते हैं, कहीं यह शख़्स हमें नुक़सान न पहुँचा दे।"

नर फ़ाख़्ता ने इत्मीनान से जवाब दिया, "घबराओ मत। उसके चेहरे पर बड़ी शराफ़त नज़र आ रही है, लिबास भी बहुत अच्छा है। ऐसा इंसान हमें क्यों नुक़सान पहुँचाएगा?"

मगर जब वह शख़्स क़रीब पहुँचा तो उसने अपने कपड़ों में छुपा हुआ तीर निकाला और फ़ौरन फ़ाख़्ते का शिकार कर लिया। देखते ही देखते उसकी जान निकल गई।

बेचारी फ़ाख़्ता किसी तरह अपनी जान बचाकर उड़ गई। अपने साथी की जुदाई का ग़म उसके लिए बहुत बड़ा सदमा था।

वह इंसाफ़ की तलाश में बादशाह के दरबार पहुँची और पूरा वाक़िआ बयान किया। बादशाह ने शिकारी को गिरफ़्तार करवाकर दरबार में पेश किया। शिकारी ने अपना जुर्म क़ुबूल कर लिया।

बादशाह ने फ़ाख़्ता से कहा, "तुम्हारे साथ बड़ा ज़ुल्म हुआ है। तुम जो सज़ा देना चाहो, वही दी जाएगी।"

फ़ाख़्ता ने कहा, "मेरे साथी को तो अब कोई वापस नहीं ला सकता। लेकिन मेरी गुज़ारिश है कि इस शिकारी को ऐसी सज़ा दी जाए जिससे लोग धोखे से बच सकें। अगर यह शिकारी है तो इसे शिकारी ही की पहचान के साथ रहना चाहिए। इसे नेक़ी और शराफ़त का लिबास पहनकर लोगों को धोखा देने का हक़ नहीं होना चाहिए।"

उसने आगे कहा, "जो लोग अच्छे इंसान बनने का दिखावा करते हैं मगर उनके आमाल बुरे होते हैं, वे समाज के लिए सबसे ज़्यादा नुक़सानदेह होते हैं।"

सबक़:

इस्लाम हमें सिखाता है कि इंसान की अस्ल पहचान उसके कपड़ों, बातों या दिखावे से नहीं, बल्कि उसके किरदार, अमानतदारी और अख़लाक़ से होती है।

अल्लाह तआला दिलों के हाल और इंसान के आमाल को देखता है। इसलिए हमें हर उस शख़्स से होशियार रहना चाहिए जो नेक़ी का लिबास ओढ़कर धोखे और फ़रेब का रास्ता अपनाता हो।

अल्लाह तआला हमें सच्चाई, अख़लास और अच्छे अख़लाक़ के साथ ज़िंदगी गुज़ारने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

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