Thursday, October 22, 2026

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन 💔 भीलवाड़ा में मासूम शिफा मरियम के इंतकाल से पसरा ग़म का माहौल, नम आँखों से दी जाएगी आख़िरी विदाई

गरीब नवाज़ कॉलोनी, भवानी नगर (भीलवाड़ा, राजस्थान)।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिली अफ़सोस के साथ मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी को यह इत्तिला दी जाती है कि मोहम्मद इरफ़ान इब्ने मरहूम मोहम्मद यूसुफ़ मक्कड़, साकिन दांथल वाले की पोती एवं मोहम्मद फ़ैज़ान की प्यारी बेटी शिफा मरियम का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतकाल हो गया है।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

इस दर्दनाक ख़बर से अहले-ख़ानदान, अज़ीज़ो-अक़ारिब और जानने वालों के दरमियान ग़म की लहर दौड़ गई है। एक मासूम बच्ची का इस दुनिया से रुख़्सत हो जाना ऐसा सदमा है, जिसे अल्फ़ाज़ में बयान करना आसान नहीं। इस मुश्किल घड़ी में घर के हर फ़र्द पर ग़म का पहाड़ टूट पड़ा है। अल्लाह तआला तमाम घरवालों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए और इस अज़ीम सदमे को बर्दाश्त करने की हिम्मत बख़्शे। आमीन।

🕊️ नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन की इत्तिला

मिली हुई इत्तिला के मुताबिक़, मरहूमा शिफा मरियम की तदफ़ीन 22 अक्टूबर 2026, बरोज़ जुमेरात, नमाज़-ए-मग़रिब के बाद, सूफ़ियान क़ब्रिस्तान, भीलवाड़ा में की जाएगी।

तमाम अहबाब, अज़ीज़ो-अक़ारिब और बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि वक़्त पर पहुँचकर जनाज़े में शिरकत फ़रमाएँ, मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और ग़मज़दा ख़ानदान के साथ हमदर्दी का इज़हार फ़रमाएँ।

🤲 मरहूमा के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत

ऐ अल्लाह! तू रहमान भी है और रहीम भी। हम तेरी बारगाह में हाथ फैलाकर इस मासूम बच्ची शिफा मरियम के लिए रहमत और मग़फ़िरत की दुआ करते हैं।

या अल्लाह! मरहूमा पर अपनी ख़ास रहमत नाज़िल फ़रमा। उसकी मग़फ़िरत फ़रमा, उसे अपनी अमान और रहमत के साये में जगह अता फ़रमा। उसकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमा, उसे जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे और क़ब्र की तमाम वहशतों व तन्हाइयों को उसके लिए राहत और सुकून का ज़रिया बना दे।

या रब्बुल आलमीन! जब मरहूमा को क़ब्र में उतारा जाए, उस वक़्त अपनी रहमत से उसे ढाँप लेना। जब उसके ऊपर मिट्टी डाली जाए, तो उसकी क़ब्र को नूर, सुकून और रहमत से भर देना। उसे जन्नतुल-फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमा और अपने फ़ज़्ल-ओ-करम से जन्नती नेमतों से नवाज़ना।

ऐ अल्लाह! उसके वालिद मोहम्मद फ़ैज़ान, दादा मोहम्मद इरफ़ान, तमाम घरवालों और अहले-ख़ानदान को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा। उनके दिलों को सुकून दे, उनके आँसुओं को अपनी रहमत का सहारा अता फ़रमा और इस मुश्किल वक़्त में उन्हें अपने क़रीब कर ले।

ऐ अल्लाह! इस ग़मज़दा ख़ानदान को तनहा न छोड़ना। उन्हें हौसला, सब्र और अपने फ़ैसले पर रज़ामंदी अता फ़रमा। आमीन या रब्बुल आलमीन।

🤲 तदफ़ीन के वक़्त पढ़ी जाने वाली दुआ

क़ब्र में मैय्यत को उतारते वक़्त यह दुआ पढ़ना सुन्नत से साबित है:

بِسْمِ اللَّهِ وَعَلَى مِلَّةِ رَسُولِ اللَّهِ ﷺ

तर्जुमा: अल्लाह के नाम के साथ और रसूलुल्लाह ﷺ के दीन व तरीक़े पर।

मिट्टी देते वक़्त हर शख़्स को आख़िरत की याद, अल्लाह की तरफ़ वापसी और अपने आमाल की फ़िक्र करनी चाहिए। मैय्यत के लिए रहमत व मग़फ़िरत और पीछे रहने वालों के लिए सब्र की दुआ करनी चाहिए।

🖤 बिरादरी से पुरख़ुलूस गुज़ारिश

मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के तमाम अफ़राद से दरख़्वास्त है कि इस ग़म की घड़ी में मरहूमा के ख़ानदान के लिए दुआ करें। अल्लाह तआला मरहूमा को अपनी बेपनाह रहमत में जगह अता फ़रमाए और तमाम अहले-ख़ानदान को सब्र-ओ-सुकून नसीब फ़रमाए।

आमीन सुम्मा आमीन।


ख़बरनवीस: ज़मीर आलम
प्रधान संपादक — मुल्तानी समाज
राष्ट्रीय समाचार पत्रिका | न्यूज़ पोर्टल | यूट्यूब चैनल
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत पत्रिका के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से ख़ास रिपोर्ट।

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