Sunday, October 25, 2026

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन💔 रूड़की के मोहम्मद युसुफ़ साहब उर्फ़ बबलू के भांजे का मुंबई में इंतिक़ाल, देहरादून में आज होगी सुपुर्द-ए-ख़ाक की रस्म

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर फ़रमाए और तमाम अहले-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

रूड़की/देहरादून, 25 अक्टूबर 2026।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिली अफ़सोस के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात को यह इत्तिला दी जाती है कि जनाब मोहम्मद युसुफ़ साहब उर्फ़ बबलू (बंदूक साज़), साकिन रूड़की, ज़िला हरिद्वार, उत्तराखंड के भांजे सुहैल मिर्ज़ा का आज दिन इतवार, 25 अक्टूबर 2026 को मुंबई में क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया है। मरहूम मुंबई में रोज़गार के सिलसिले में काम करते थे। अफ़सोस कि इस फ़ानी दुनिया में उनकी ज़िंदगी का सफ़र मुकम्मल हो गया और वह अपने ख़ालिक़-ए-हक़ीक़ी से जा मिले।

सुहैल मिर्ज़ा वालिद का नाम और उम्र की तफ़सील फ़िलहाल दरयाफ़्त नहीं हो सकी है। इस दुखद ख़बर से उनके रिश्तेदारों, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और तमाम जानने वालों में ग़म की लहर दौड़ गई है।

🕌 आज बाद नमाज़-ए-असर होगी सुपुर्द-ए-ख़ाक की रस्म

मिली हुई मालूमात के मुताबिक़, मरहूम की मैय्यत को आज बाद नमाज़-ए-असर, कब्रिस्तान इंदर रोड, देहरादून, उत्तराखंड में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात से गुज़ारिश है कि जो हज़रात जनाज़े में शरीक हो सकते हैं, वह जनाज़े की नमाज़ में शिरकत फ़रमाएँ, मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत करें और इस दुख की घड़ी में अहले-ख़ाना के ग़म में शरीक होकर इंसानियत, भाईचारे और बिरादराना हमदर्दी का सबूत दें।

🤲 मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत

या अल्लाह! मरहूम की मुकम्मल मग़फ़िरत फ़रमा। उनकी तमाम छोटी-बड़ी ख़ताओं और लग़ज़िशों को अपने फ़ज़्ल-ओ-करम से माफ़ फ़रमा। उनकी नेकियों को क़ुबूल फ़रमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमा। आमीन।

🤲 जनाज़े की नमाज़ में पढ़ी जाने वाली दुआ

अगर मरहूम बालिग़ मर्द हैं, तो जनाज़े की नमाज़ में पढ़ी जाने वाली मशहूर दुआ यह है:

اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِحَيِّنَا وَمَيِّتِنَا وَشَاهِدِنَا وَغَائِبِنَا وَصَغِيرِنَا وَكَبِيرِنَا وَذَكَرِنَا وَأُنْثَانَا

तर्जुमा: ऐ अल्लाह! हमारे ज़िंदा और मरहूम, मौजूद और ग़ैर-मौजूद, छोटे और बड़े, मर्द और औरत सबकी मग़फ़िरत फ़रमा।

नोट: जनाज़े की दुआ मरहूम की उम्र और हालत के मुताबिक़ पढ़ी जाती है। ऊपर दी गई दुआ का इस्तेमाल आम दुआ के तौर पर भी किया जा सकता है।

🤲 मैय्यत को क़ब्र में उतारते वक़्त की दुआ

मैय्यत को क़ब्र में उतारते वक़्त यह दुआ पढ़ना मशरूअ है:

بِسْمِ اللَّهِ وَعَلَى مِلَّةِ رَسُولِ اللَّهِ ﷺ

तर्जुमा: अल्लाह के नाम के साथ और रसूलुल्लाह ﷺ के दीन व तरीक़े पर।

🤲 मिट्टी देते वक़्त की याददिहानी और दुआ

क़ब्र पर मिट्टी डालते वक़्त अल्लाह तआला की तरफ़ रुजू करते हुए मौत और आख़िरत को याद किया जाए। क़ुरआन-ए-पाक की यह आयत पढ़ना मसनून है:

مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ

तर्जुमा: इसी मिट्टी से हमने तुम्हें पैदा किया, इसी में तुम्हें वापस लौटाएँगे और इसी से तुम्हें दोबारा निकालेंगे।

(सूरह ताहा, आयत 55)

क़ब्र पर मिट्टी देने के बाद मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत और साबित-क़दमी की दुआ करना भी मुस्तहब है।

🤲 दफ़्न के बाद मरहूम के लिए दुआ

اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَثَبِّتْهُ عِنْدَ السُّؤَالِ

तर्जुमा: ऐ अल्लाह! इनकी मग़फ़िरत फ़रमा और सवाल के वक़्त इन्हें साबित-क़दम रख।

ऐ अल्लाह! मरहूम की क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे। क़ब्र की तन्हाई को अपनी रहमत से दूर फ़रमा, उनकी क़ब्र को वसीअ और रौशन फ़रमा और उन्हें हश्र के दिन अपने महबूब बंदों के साथ उठाना। उनके घर वालों को इस सदमे को बर्दाश्त करने की हिम्मत, सब्र और सुकून अता फ़रमा।

आमीन सुम्मा आमीन, या रब्बुल आलमीन।

📞 मैय्यत के सिलसिले में राब्ते के लिए

मैय्यत, जनाज़े और सुपुर्द-ए-ख़ाक से मुताल्लिक़ मज़ीद मालूमात हासिल करने के लिए जनाब मोहम्मद हनीफ़ साहब (भगवानपुर वाले) से नीचे दिए गए मोबाइल नंबर पर राब्ता क़ायम किया जा सकता है:

मोबाइल नंबर: 9897563371


📰 मुल्तानी समाज — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

अगर आप भी अपनी ख़बर, मज़मून (आर्टिकल), पैग़ाम, मुबारकबाद, ताज़ियती इश्तिहार, दिलचस्प वाक़ियात, तहरीर, अफ़साना (कहानी) या अपने कारोबार का इश्तिहार क़ौमी सतह पर शाया या प्रसारित करवाना चाहते हैं, तो बराए मेहरबानी नीचे दिए गए नंबरों पर राब्ता फ़रमाएँ।

📞 9410652990

📞 8010884848

आपका एतमाद ही हमारी सबसे बड़ी ताक़त है।

"मुल्तानी समाज" — अपनी बिरादरी की आवाज़, अपनी पहचान।

No comments:

Post a Comment