Friday, August 7, 2020

मुलतानी बिरादरी की सबसे बड़ी तंज़ीम ने बिरादरी के सर्वे और लड़के लड़कियों के रिश्तों को आसान करने के लिये मुलतानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट की वेबसाइट लॉन्च की इससे क्या फ़ायदे होंगे अधिक जानकारी के लिये लिंक ओपन करें

 

मुलतानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट ( रजि0 ) संस्था काफी समय से बिरादरी के राज्यवार सर्वो को लेकर लड़के लड़कियों के रिश्तों व समाज के उत्थान को लेकर कार्य कर रही है। संस्था ने इसी श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए आज मुलतानी समाज चैरिटबल ट्रस्ट ( रजि0 ) की वेबसाइट लॉन्च की है। इस वेबसाइट पर आप देश के हर राज्यो के जिलेवार बिरादरी के परिवारों की सूची सहित हर जिले के बिरादरी भाइयों के मोबाइल नंबर व ईमेल आईडी आदि आसानी से प्राप्त कर सकते हो। 

कोई भी सामाजिक मिशन अकेले पूरा नही किया जा सकता इस मिशन में भी कदम कदम पर हमे आप सबकी जरूरत पड़ेगी हमें पूर्ण आशा है कि आप हमें लड़खड़ाने नही देंगे और यदि लड़खड़ा भी गए तो हमें संभालने में पूरा सहयोग देंगे। बिरादरी के लिये मुलतानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट ( रजि0) की पूरी योजनाएं आप संस्था की वेबसाइट www.multanisamaj.com पर क्लिक करके आसानी से प्राप्त कर सकते है। कुछ प्रोजेक्ट इस खबर के साथ भी लिखे गए है।


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रुशदा अमरीन को बीटेक में मिला गोल्ड मेडल 12 नवंबर " मुलतानी डे " पर संस्था गौरव अवार्ड से करेगी सम्मानित

नजीबाबाद। स्थानीय आजाद कॉलोनी निवास सर्व यूपी ग्रामीण बैंक बड़िया के प्रबंधक शाहिद मुल्तानी की पुत्री रूशदा अमरीन को शोभित यूनिवर्सिटी मेरठ के दीक्षांत समारोह में गोल्ड मेडल भेंट कर सम्मानित किया गया है। रूशदा अमरीन ने शोभित यूनिवर्सिटी मेरठ से  बीटेक बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में गोल्ड मैडल प्राप्त किया। 14 मार्च 2020 को यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि गोवा के राज्यपाल सतपाल मालिक व वाइस चांसलर कुंवर शेखर विजेंद्र ने रूशदा को डिग्री व गोल्ड मैडल प्रदान कर सम्मानित किया। रूशदा ने अपनी उपलब्धि का श्रेय अपने पिता शाहिद मुलतानी व माता शबाना को दिया है । नजीबाबाद के सेंटमैंरी इंटर कॉलेज से हाईस्कूल व अलीगढ़ से इंटर तक कि शिक्षा ग्रहण करने वाली रूशदा अमरीन शुरू से पढ़ाई में काफी आगे रहकर कई बार सम्मान प्राप्त कर चुकी है।

मुलतानी समाज की देश की सबसे बड़ी संस्था मुलतानी समाज चैरिटबल ट्रस्ट ( रजि0 )  ने रुशदा अमरीन को शिक्षा के क्षेत्र में गोल्ड मेडल मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए संस्था की और से दिए जाने वाले गौरव-सम्मान से सम्मानित किया है। संस्था के चैयरमेन मुलतानी ज़मीर आलम जी ने बताया कि दुनिया सहित देश में महामारी के चलते अभी इनको गौरव अवार्ड से सम्मानित नही किया जा रहा है। जल्द ही गौरव-सम्मान के

 उपरांत गौरव अवार्ड से सम्मानित होने वाली रुशदा अमरीन देश की पहली फीमेल सदस्य और यह अवार्ड पाने वाली दूसरी मेंबर होगी स्मरण रहे इनसे पहले शिक्षा के क्षेत्र में ही बिरादरी की और से प्रथम सम्मान और अवार्ड भी ज़नाब शाहिद मुलतानी के बेटे और रुशदा अमरीन के भाई को दिया गया है। मुलतानी समाज की और से प्रथम और द्वतीय गौरव अवार्ड एक ही परिवार से सगे भाई बहन को ही मिलने पर बिरादरी में खुशी की लहर है। और संस्था के दस्तावेजों में यह पहला अवार्ड हमेशा दर्ज़ रहेगा जिसको बिरादरी हमेशा याद करेगी समाज के चैयरमेन ज़नाब आलम ने बताया कि 12 नवम्बर " मुलतानी डे " पर देश के हालात सामान्य रहे तो दोनों अवार्ड दिए जा सकते है।

Tuesday, August 4, 2020

अनस मुल्तानी का राजपत्रित अधिकारी के लिए चयन बिरादरी में खुशी की लहर मुलतानी समाज चैरिटेबल करेगी गौरव अवार्ड से सम्मानित

नजीबाबाद (एम एस न्यूज़)। स्थानीय आजाद नगर कॉलोनी निवासी सर्व यूपी बैंक बढ़िया मै कार्यरत शाहिद मुल्तानी के होनहार पुत्र अनस शाहिद मुल्तानी ने लोक सवा आयोग के माध्यम से उत्तर प्रदेश की प्राविधिक शिक्षा विभाग के प्रवक्ता सिविल इंजीनियरिंग (ईपीसी विशिष्ठता के साथ) एक मात्र अनारक्षित पद पर चयनित होकर नगर का नाम रौशन किया है। उल्लेखनीय है कि अनस प्रारंभिक शिक्षा से ही पढ़ने में बहुत अग्रणी रहा है नगर के पब्लिक मांटेसरी स्कूल से प्राइमरी एवं मूर्ति देवी सरस्वती इंटर कॉलेज नजीबाबाद में भी इंटर का टॉपर विद्यार्थी रहा है। जिसके बाद अनस शाहिद ने आर आई एम टी यूनिवर्सिटी पंजाब से बीटेक टॉप किया। बी आई टी झांसी से एम टेक करने वाले अनस शाहिद लोक सेवा  आयोग द्वारा प्रवक्ता सिविल इंजीियरिंग प्रदेश के एक मात्र पद पर चयनित हुए। अनस ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता - पिता व गुरुजनों को दिया। अनस की इस उपलब्धि पर उनके परिजनों को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। अनस मुल्तानी नगर के वरिष्ठ पत्रकार इकबाल हिन्दुस्तानी व नौशाद मुल्तानी का चचेरा भाई है। मुलतानी समाज चैरिटबल ट्रस्ट ( रजि0 ) संस्था अनस शाहिद मुलतानी को गौरव अवार्ड से करेगी सम्मानित

Saturday, August 1, 2020

और समाज अपने आप सुधर गया है

*समाज  सुधारक  लोग-* 
सर पटक- पटक कर चले गए ,
गांव- गांव जाकर चप्पलें घिस डाली ,
*पर समाज के लोग सुधरे नही ।*
*अचानक एक चाइनीज वाइरस अवतरित हुआ -*

, *...* 

न सगाई का खर्च,
न बैंड, न बाराती
न शामियाने,
 न दिखावट,
 न सजावट 
न बड़े- बड़े विशाल भोज
 *न अन्न की बरबादी*
न *बाल-विवाह* 
 न शादी का खर्चा ,
न गोद भराई, 
न सूरज पूजा,
न मान न मन्नत,
न चर्तुमास प्रवेश का ताम-झाम
न भव्य अति भव्य जुलूस व न रथयात्राएं
न किसी के मरने पर जमघट 
*न मृत्यु भोज* 
*एक वाइरस ने अपने आप सुधार दिया हमारे समाज को..!!!*
 हे क्रांतिकारी कोरोनावायरस !
 तू तो *गजब का समाज सुधारक *😵😂

इंतिहाई अफसोस के साथ यह इत्तला दी जाती है कि जानसठ क्षेत्र की अज़ीम शख्सियत हज़रत मौलाना नज़ीर अहमद क़ासमी का आज सुबह इंतकाल हो गया है

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन*

*अल्लाह ताला मरहूम को जन्नतुल फिरदोस में आला मकाम अता फरमाए परिवार/रिश्तेदार/दोस्त अहबाब सभी को सब्र-ए जमील अता फरमाए*

बकरीद का इतिहास और क्‍या है कुर्बानी का अर्थ

 मुसलमानों के सबसे प्रमुख त्‍योहारों में से एक है बकरीद, जिसे मीठी ईद के ठीक 2 महीने के बाद मनाया जाता है। यह कुर्बानी को याद रखने और उसे सलामी देने का त्‍योहार है। इस्‍लामिक कैलेंडर में इसे ईद-उल-अजहा (Eid al-Adha) के नाम से जाना जाता है। जो कि इस्‍लामिक कैलेंडर के आखिरी महीने जु-अल-हिज्‍ज में मनाया जाता है ईद का तारीख चांद का दीदार करने के बाद तय होती है। इसके आधार पर कुछ स्‍थानों पर ईद मनाई जाती है  मगर इस बार अन्‍य त्‍योहारों की तरह ही कोरोनाकाल में ईद पड़ने से इस त्‍योहार का रंग भी फीका पड़ जाएगा। चलिए आपको बताते हैं क्‍या है बकरीद (Bakrid) का इतिहास और क्‍या है कुर्बानी का अर्थ ?

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2/6 सबसे प्‍यारी चीज को कुर्बान कर देने का पर्व



बकरीद को मीठी ईद यानी ईद-उल-फितर के 2 महीने बाद मनाया जाता है। इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग बकरे की कुर्बानी देकर यह पर्व मनाते हैं। मगर क्‍या आप जानते हैं इस दिन बकरे की कुर्बानी देना ही सबसे अहम क्‍यों माना जाता है। दरअसल यह त्‍योहार अपनी सबसे अजीज चीज को अल्‍लाह पर कुर्बान कर देने का पर्व है, लेकिन बकरे कीकी कुर्बानी के पीछे एक ऐतिहासिक घटना है, इसलिए मुसलमानों में इस दिन बकरे की कुर्बानी को सबसे अहम माना जाता है।

3/6 इसलिए दी जाती है बकरे की कुर्बानी



इस्लामिक मान्यताओं में हजरत इब्राहिम को अल्लाह का पैगंबर बताया जाता है। इब्राहिम ताउम्र दुनिया की भलाई के कार्यों में जुटे रहे। उनका जीवन जनसेवा और समाजसेवा में ही बीता। लेकिन करीब 90 साल की उम्र तक उनके कोई संतान नहीं हुई। तब उन्होंने खुदा की इबादत की और उन्हें चांद-सा बेटा इस्माइल मिला।

4/6 सपने में मिला यह आदेश



इब्राहिम के सपने में खुदा का आदेश आया कि अपनी सबसे प्‍यारी चीज को कुर्बान कर दो। तोतो उन्‍होंने अपने सभी प्रिय जानवरों को कुर्बान कर दिया। फिर से उन्‍हें य‍ह सपना आया तो उन्‍होंने अपने बेटे को कुर्बान करने का प्रण लिया। तब उन्‍होंने खुद की आंख पर पट्टी बांधकर बेटे की कुर्बानी दी और बाद में पट्टी हटाकर देखा तो उनका बेटा खेल रहा था और अल्‍लाह के करम सेस उसके स्‍थान पर उनके बकरी की कुर्बानी हो गई। तभी से मान्‍यता है कि बकरे की कुर्बानी देने की परंपरा चली आ रही है। यह त्‍योहार इंसानियत पर अपने सबसे अजीत चीज कुर्बान कर देने का संदेश देता है।

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5/6 ऐसे शुरू हो जाती है कुर्बानी की कवायद



कुछ मुस्लिम परिवारों में कुर्बानी के लिए बकरे को पालपोसकर बड़ा किया जाता है और फिरफिर बकरीद पर उसकी कुर्बानी दी जाती है। वहीं जो लोग बकरे को नहीं पालते हैं और फिर भी उन्‍हें कुर्बानी देनी होती है उन्हें कुछ दिन पहले बकरा खरीदकर लाना होता है ताकि उस बकरे से उन्हें लगाव हो जाए।

6/6 ऐसे दी जाती है कुर्बानी



इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग अल सुबह की नमाज अदा करते हैं। इसके बाद बकरे की कुर्बानी दी जाती है। कुर्बानी के बाद बकरे के मीट तीन भागों में बांट दिया जाता है। एक भाग गरीबों केके लिए, दूसरा भाग रिश्तेदारों में बांटने के लिए और तीसरा भाग अपने लिए रखा जाता है।
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जारी कर्ता
    *मोहम्मद शादाब शैख़ सगंतराश*