जलालाबाद के वरिष्ठ समाजसेवी हाजी नज़ीर अहमद साहब की कोशिशों से मुक़दमेबाज़ी में उलझे दो ख़ानदानों के दरमियान हुआ आपसी सुलहनामा, बिरादरी में अमन, इत्तेहाद और भाईचारे का पैग़ाम
जलालाबाद, ज़िला शामली, उत्तर प्रदेश।
मियां-बीवी के दरमियान पैदा होने वाले इख़्तिलाफ़ात अगर वक़्त रहते समझदारी, सब्र और आपसी बातचीत के ज़रिए हल कर लिए जाएँ, तो न सिर्फ़ एक घर को बिखरने से बचाया जा सकता है, बल्कि दोनों ख़ानदानों को भी परेशानी, तनाव और लंबी मुक़दमेबाज़ी से निजात मिल सकती है। इस्लाम भी आपसी सुलह, मोहब्बत, रहमदिली और रिश्तों की हिफ़ाज़त का पैग़ाम देता है।
इसी नेक सोच और समाजी ख़िदमत की एक मिसाल बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को कस्बा जलालाबाद, ज़िला शामली, उत्तर प्रदेश में देखने को मिली। यहाँ के वरिष्ठ समाजसेवी हाजी नज़ीर अहमद साहब की कोशिशों से पिछले साढ़े चार साल से चले आ रहे एक मियां-बीवी के विवाद को आपसी बातचीत और समझाइश के ज़रिए सुलझाने में कामयाबी मिली। दोनों पक्षों के दरमियान आपसी सुलहनामा कराया गया और उनके बीच जारी विवाद को ख़त्म करने की दिशा में अहम क़दम उठाया गया।
साढ़े चार साल से परेशान थे दोनों ख़ानदान
मिली जानकारी के मुताबिक़, यह मामला पिछले तक़रीबन साढ़े चार साल से चला आ रहा था। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच कई मर्तबा अलग-अलग पंचायतें हुईं और मामले को आपसी तौर पर सुलझाने की कोशिशें भी की गईं, लेकिन कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आ सका। हालात ऐसे बने कि मामला अदालत और क़ानूनी मुक़दमेबाज़ी तक जा पहुँचा, जिससे दोनों पक्षों को लंबे अरसे तक परेशानी का सामना करना पड़ा।
बताया गया है कि मियां पक्ष का ताल्लुक़ कस्बा गंगोह, ज़िला सहारनपुर से है, जबकि बीवी पक्ष गाँव चिलकाना, ज़िला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। दोनों पक्ष अपने-अपने मामलों में मुक़दमेबाज़ी का सामना कर रहे थे।
हाजी नज़ीर अहमद साहब ने दोनों पक्षों को बुलाकर की समझाइश
इसी दौरान किसी शख़्स के ज़रिए दोनों पक्षों को कस्बा जलालाबाद के वरिष्ठ समाजसेवी हाजी नज़ीर अहमद साहब के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद दोनों पक्षों को उनके आवास पर बुलाया गया, जहाँ हाजी साहब ने दोनों की बात सुनी और उन्हें समझाया-बुझाया।
उन्होंने आपसी इख़्तिलाफ़ात को बातचीत, सब्र, समझदारी और आपसी रज़ामंदी से हल करने की कोशिश की। उनकी कोशिशों से दोनों पक्षों के दरमियान सुलह की राह निकली और आपसी सुलहनामा कराया गया। इस तरह लंबे समय से चले आ रहे विवाद को आपसी सहमति से निपटाने की दिशा में अहम कामयाबी हासिल हुई।
यह पहल इस बात की याद दिलाती है कि जब समाज के ज़िम्मेदार और समझदार लोग ख़ुलूस-ए-नियत के साथ आगे आते हैं, तो कई बार सालों से उलझे मसलों को भी बातचीत के ज़रिए हल करने का रास्ता निकल सकता है।
इससे पहले भी कई मियां-बीवी के मामले सुलझा चुके हैं हाजी साहब
बताया जाता है कि हाजी नज़ीर अहमद साहब इससे पहले भी कई मियां-बीवी के मामलों में आपसी सुलह कराने और पारिवारिक इख़्तिलाफ़ात को दूर करने की कोशिशें कर चुके हैं। उनकी यह समाजी ख़िदमत परिवारों के बीच बातचीत, आपसी समझ और भाईचारे को बढ़ावा देने की अहमियत को उजागर करती है।
समाज में ऐसे लोगों की कोशिशें क़ाबिल-ए-तारीफ़ हैं, जो लोगों को आपसी दुश्मनी और खींचतान से निकालकर सुलह, अमन और इत्तेहाद की तरफ़ लाने में अपना वक़्त लगाते हैं। घरेलू मामलों में समझदारी और ज़िम्मेदारी के साथ की गई मध्यस्थता कई परिवारों को मानसिक परेशानी और लंबे विवादों से राहत दिलाने में मददगार साबित हो सकती है।
अलबत्ता, पारिवारिक मामलों में सुलह हमेशा दोनों पक्षों की स्वतंत्र रज़ामंदी, इज़्ज़त और क़ानूनी हुक़ूक़ की हिफ़ाज़त के साथ होनी चाहिए। अदालत में चल रहे मुक़दमों की औपचारिक समाप्ति के लिए जहाँ ज़रूरी हो, वहाँ संबंधित अदालत की क़ानूनी प्रक्रिया पूरी करना भी अहम है।
दोनों ख़ानदानों के लिए ख़ास दुआ
इस मौक़े पर दुआ है कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त हाजी नज़ीर अहमद साहब को उनकी नेक कोशिशों का बेहतरीन अज्र अता फ़रमाए। अल्लाह तआला उन्हें सेहत-ओ-आफ़ियत, लंबी उम्र, रिज़्क़ में बरकत और ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ के लिए और ज़्यादा हौसला अता फ़रमाए।
अल्लाह पाक मियां-बीवी और दोनों ख़ानदानों के दरमियान मोहब्बत, सुकून, इज़्ज़त और भरोसा क़ायम फ़रमाए। दिलों से नाराज़गी और कड़वाहट दूर फ़रमाकर आपसी रिश्तों में ख़ैर-ओ-बरकत अता करे। अगर दोनों ने अपने रिश्ते को आगे बढ़ाने का फ़ैसला किया है, तो अल्लाह उनके घर को मोहब्बत, रहमत और सुकून का मरकज़ बनाए तथा उन्हें एक-दूसरे के हुक़ूक़ अदा करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।
आमीन या रब्बुल आलमीन।
विशेष रिपोर्ट: ज़मीर आलम, प्रधान संपादक
उत्तर प्रदेश डेस्क — मुल्तानी समाज
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, देश की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल एवं यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज”।
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