Wednesday, October 28, 2026

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन निहायत ही रंज-ओ-ग़म के साथ इंतिक़ाल की दर्दनाक इत्तिला

हाजी अय्यूब साहब मरहूम की अहलिया जीजन बी का इंतिक़ाल, कल सुबह 9:30 बजे दिल्ली में होगी तदफ़ीन — तमाम बिरादराना हज़रात से जनाज़े में शिरकत की पुरख़ुलूस दरख़्वास्त

अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को नूर से मुनव्वर करे और तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।

निहायत ही रंज-ओ-ग़म और दिली अफ़सोस के साथ तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात को इत्तिला दी जाती है कि आज दिन बुध, बा-तारीख़ 28 अक्टूबर 2026 को गाँव कुशावली, तहसील खतौली, ज़िला मुज़फ़्फ़रनगर, उत्तर प्रदेश की मूल निवासी और फ़िलहाल एल ब्लॉक 1601, 28 शनि बाजार, ऑटो स्टैंड, संगम विहार दिल्ली - 110080 में रिहाइश-पज़ीर, हाजी अय्यूब साहब मरहूम की अहलिया मोहतरमा जीजन बी, उम्र तक़रीबन 76 साल, जिनका मायका गाँव काकड़ा, ज़िला मुज़फ़्फ़रनगर, उत्तर प्रदेश में है, का क़ज़ा-ए-इलाही से इंतिक़ाल हो गया है।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

बेशक हम सब अल्लाह ही के हैं और उसी की तरफ़ लौटकर जाने वाले हैं।

मरहूमा के इंतिक़ाल की ख़बर से अहल-ए-ख़ाना, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और बिरादराना हज़रात में ग़म की लहर दौड़ गई है। इस दुख की घड़ी में हम तमाम ग़मज़दा ख़ानदान के साथ दिली हमदर्दी और ताज़ियत का इज़हार करते हैं। अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त मरहूमा की तमाम ख़ताकारियों से दरगुज़र फ़रमाए, उनकी मग़फ़िरत फ़रमाए और उन्हें अपनी रहमत के साये में जगह अता फ़रमाए।

🕌 नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन की इत्तिला

मिली हुई जानकारी के मुताबिक़ मरहूमा को कल दिन जुमेरात, बा-तारीख़ 29 अक्टूबर 2026 को सुबह 9:30 बजे, संगम विहार, दिल्ली में वाक़े कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।

तमाम मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादराना हज़रात, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब, दोस्त-अहबाब और तमाम अहल-ए-ईमान से पुरख़ुलूस दरख़्वास्त है कि जनाज़े में शरीक होकर मरहूमा के हक़ में दुआ-ए-मग़फ़िरत फ़रमाएँ और ग़मज़दा ख़ानदान के साथ इस दुख की घड़ी में शरीक होकर इंसानी हमदर्दी, बिरादराना इत्तिहाद और इस्लामी भाईचारे का सबूत दें।

अल्लाह तआला आप तमाम हज़रात को इस नेक अमल का अज्र-ए-अज़ीम अता फ़रमाए। आमीन।

🤲 मरहूमा की मग़फ़िरत के लिए दुआ

ऐ अल्लाह! तू ग़फ़ूर-ओ-रहीम है, तू रहम करने वालों में सबसे बेहतर रहम करने वाला है। हम तेरे हुज़ूर दस्त-ए-दुआ हैं कि मरहूमा जीजन बी की मग़फ़िरत फ़रमा, उनकी ख़ताओं और लग़ज़िशों से दरगुज़र फ़रमा और उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बना दे।

ऐ अल्लाह! उनकी क़ब्र को कुशादा फ़रमा, उसमें नूर ही नूर अता फ़रमा, उसे तंगियों और अज़ाब से महफ़ूज़ फ़रमा और अपनी रहमत के दरवाज़े उनके लिए खोल दे।

ऐ परवरदिगार! मरहूमा को सवालात-ए-क़ब्र के वक़्त साबित-क़दम रख, उन्हें अपने फ़ज़्ल-ओ-करम से सुकून अता फ़रमा और उनकी मंज़िलें आसान फ़रमा।

ऐ अल्लाह! उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमा, हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ की शफ़ाअत नसीब फ़रमा और उन्हें अपने नेक बंदों के ज़ुमरे में शामिल फ़रमा।

आमीन या रब्बल आलमीन।

🤲 मैय्यत को क़ब्र में उतारते वक़्त की दुआ

जब मैय्यत को क़ब्र में उतारा जाए, तो यह दुआ पढ़ना मस्नून है:

بِسْمِ اللّٰهِ وَعَلَىٰ مِلَّةِ رَسُولِ اللّٰهِ ﷺ

तर्जुमा: अल्लाह के नाम से और अल्लाह के रसूल ﷺ के दीन व तरीक़े पर।

क़ब्र में मैय्यत को उतारते वक़्त अदब, एहतराम और नर्मी का ख़ास ख़याल रखा जाए। इस मौक़े पर मरहूमा के लिए रहमत, मग़फ़िरत और साबित-क़दमी की दुआ की जाए।

🤲 मिट्टी देते वक़्त और दफ़्न के बाद की दुआ

मिट्टी देते वक़्त इंसान को अपनी आख़िरत और अल्लाह की तरफ़ वापसी को याद करना चाहिए। क़ुरआन-ए-करीम में इरशाद है:

مِنْهَا خَلَقْنَاكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ

तर्जुमा: इसी मिट्टी से हमने तुम्हें पैदा किया, इसी में तुम्हें वापस लौटाएँगे और इसी से तुम्हें दोबारा निकालेंगे।
(सूरह ताहा, आयत 55)

दफ़्न के बाद मरहूमा के लिए यह दुआ की जा सकती है:

اللّٰهُمَّ اغْفِرْ لَهَا وَارْحَمْهَا وَعَافِهَا وَاعْفُ عَنْهَا

तर्जुमा: ऐ अल्लाह! उनकी मग़फ़िरत फ़रमा, उन पर रहम फ़रमा, उन्हें आफ़ियत अता फ़रमा और उनसे दरगुज़र फ़रमा।

दफ़्न के बाद अल्लाह तआला से दुआ की जाए कि वह मरहूमा को सवालात-ए-क़ब्र में साबित-क़दम रखे, उनकी क़ब्र को रौशन करे और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में जगह अता फ़रमाए।

🤲 ग़मज़दा ख़ानदान के लिए दुआ

ऐ अल्लाह! हाजी अय्यूब साहब मरहूम के अहल-ए-ख़ाना, बच्चों, अज़ीज़-ओ-अक़ारिब और तमाम ग़मज़दा रिश्तेदारों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमा। उनके दिलों को सुकून दे, इस सदमे को बर्दाश्त करने की हिम्मत अता फ़रमा और उन्हें अपने फ़ज़्ल-ओ-करम से अज्र-ए-अज़ीम नसीब फ़रमा।

ऐ अल्लाह! इस दुख की घड़ी में तमाम घरवालों का हामि-ओ-नासिर बन, उन्हें हौसला अता फ़रमा और मरहूमा की नेकियों को उनके लिए सदक़ा-ए-जारीया और नजात का ज़रिया बना दे।

आमीन सुम्मा आमीन या रब्बल आलमीन।

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  • 7065000666
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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत, मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल “मुल्तानी समाज” के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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दुआ की दरख़्वास्त: तमाम अहल-ए-ईमान से गुज़ारिश है कि मरहूमा जीजन बी की मग़फ़िरत, बुलंदी-ए-दरजात और जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम के लिए ख़ुसूसी दुआ फ़रमाएँ।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

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