Saturday, October 31, 2026

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट की क़ौमी तंजीम के विस्तार का बड़ा मंसूबा! 5 जिलों की 20 तहसीलों से गांव-गांव तक पहुंचेगा संगठन

सहारनपुर से बिजनौर तक जिला और तहसील स्तर पर कायम होंगी नई कार्यकारिणियां, चेयरमैन बनने के ख़्वाहिशमंद हज़रात से प्रोग्राम तय करने की अपील; नगर, ब्लॉक, तहसील, जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय पदाधिकारियों की तस्वीरें वेबसाइट पर होंगी प्रकाशित।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश। पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी क़ौमी तंजीम के तौर पर अपनी अलग पहचान रखने वाली मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट (रजिस्टर्ड ऑल इंडिया तंजीम) ने बिरादरी के इत्तेहाद, तरक़्क़ी, तालीम, समाजी बेदारी और बाहमी इमदाद के पैग़ाम को शहरों से लेकर गांवों तक पहुंचाने के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संगठन के बड़े पैमाने पर विस्तार की तैयारी शुरू कर दी है।

इस तंजीमी मंसूबे के पहले मरहले में सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ और बिजनौर समेत पांच अहम जिलों की 20 तहसीलों को शामिल किया गया है। इन सभी जिलों में जिला और तहसील स्तर पर नई कार्यकारिणियां कायम करने की योजना है। इसके साथ ही संगठन का दायरा नगर, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर तक पहुंचाने की भी तैयारी है।

तंजीम की कोशिश है कि बिरादरी के बा-सलाहियत, तालीमयाफ्ता, संजीदा, मेहनती और समाजी ख़िदमत का जज़्बा रखने वाले अफ़राद को आगे लाकर एक ऐसा मज़बूत तंजीमी ढांचा तैयार किया जाए, जो आने वाली नस्लों के लिए भी एक मिसाली प्लेटफॉर्म साबित हो।

पांच जिलों की 20 तहसीलों में होगा संगठन का विस्तार

तंजीम की तजवीज़ के मुताबिक पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इन पांच जिलों की निम्नलिखित तहसीलों में संगठनात्मक विस्तार किया जाएगा।

1. जिला सहारनपुर — 5 तहसीलें

  • सहारनपुर
  • बेहट
  • देवबंद
  • रामपुर मनिहारान
  • नकुड़

2. जिला मुजफ्फरनगर — 4 तहसीलें

  • मुजफ्फरनगर सदर
  • जानसठ
  • खतौली
  • बुढ़ाना

3. जिला बागपत — 3 तहसीलें

  • बागपत
  • बड़ौत
  • खेकड़ा

4. जिला मेरठ — 3 तहसीलें

  • मेरठ
  • मवाना
  • सरधना

5. जिला बिजनौर — 5 तहसीलें

  • बिजनौर
  • चांदपुर
  • धामपुर
  • नगीना
  • नजीबाबाद

इस तरह पहले मरहले में पांच जिलों और 20 तहसीलों तक संगठन का दायरा पहुंचाने की तैयारी है। हर जिले में जिला कार्यकारिणी और हर तहसील में अलग तहसील कार्यकारिणी गठित की जाएगी।

ओहदे के तलबगार नहीं, समाज की ख़िदमत का जज़्बा रखने वालों को मिलेगी तरजीह

तंजीम की नई रणनीति में इस बात पर ख़ास ज़ोर दिया जा रहा है कि कार्यकारिणियों में केवल नाम के लिए ओहदे हासिल करने वालों के बजाय ऐसे अफ़राद को शामिल किया जाए, जो अपने इलाके में बिरादरी के दरमियान अच्छी पहचान रखते हों और समाजी कामों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का जज़्बा रखते हों।

तंजीम चाहती है कि हर जिले और हर तहसील में ऐसी मज़बूत टीम तैयार हो, जो समय-समय पर समाजी इजलास, तालीमी बेदारी के प्रोग्राम, नौजवानों की हौसलाअफ़ज़ाई, ज़रूरतमंद परिवारों की मदद, आपसी इत्तेहाद और बिरादरी की बेहतरी के लिए मुनज़्ज़म तौर पर काम कर सके।

संगठन में शामिल हर पदाधिकारी की ज़िम्मेदारी तय करने और उसकी तंजीमी कारगुज़ारी का जायज़ा लेने पर भी तवज्जो दी जाएगी, ताकि संगठन केवल काग़ज़ों तक महदूद न रहे, बल्कि ज़मीनी सतह पर भी अपनी कारगुज़ारी दिखाए।

अब वेबसाइट पर दिखेगी तंजीम के तमाम ओहदेदारों की तस्वीर और पहचान

मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट की एक अहम डिजिटल पहल के तहत संगठन के नगर, ब्लॉक, तहसील, जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के सभी पदाधिकारियों की तस्वीरें वेबसाइट पर प्रकाशित करने की व्यवस्था की जाएगी।

इस पहल के ज़रिये बिरादरी के लोग अपने शहर, ब्लॉक, तहसील, जिले और प्रदेश के जिम्मेदार पदाधिकारियों की पहचान कर सकेंगे। साथ ही राष्ट्रीय कार्यकारिणी के पदाधिकारियों की तस्वीरें और संगठनात्मक पहचान भी वेबसाइट पर उपलब्ध कराने का मंसूबा है।

इसका मक़सद संगठनात्मक पहचान को मजबूत करना, पदाधिकारियों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना और बिरादरी के लोगों को अपने जिम्मेदार नुमाइंदों तक पहुंचने में आसानी पैदा करना है।

मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइटें:

🌐 www.multanisamaj.com

🌐 www.msctindia.com

🌐 www.multanigharana.com

इन वेबसाइटों को संगठन की डिजिटल पहचान और बिरादरी से जुड़े लोगों के लिए अहम जानकारी का प्लेटफॉर्म बनाने की दिशा में विकसित किया जाएगा।

जिला और तहसील चेयरमैन बनने के ख़्वाहिशमंद हज़रात से ख़ास अपील

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिला सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ और बिजनौर की तमाम तहसीलों में रहने वाले मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी के ऐसे हज़रात, जो अपने जिले या तहसील में मुल्तानी समाज चैरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन की ज़िम्मेदारी संभालने के ख़्वाहिशमंद हैं और समाज की ख़िदमत का जज़्बा रखते हैं, उनसे ख़ास तौर पर अपील की जाती है कि वह नीचे दिए गए संपर्क नंबरों पर कॉल या व्हाट्सऐप मैसेज के ज़रिये राब्ता कायम करें।

इच्छुक हज़रात अपने जिले या तहसील में संगठनात्मक प्रोग्राम, परिचय बैठक या तंजीमी इजलास रखने के लिए अपना पैग़ाम भेजें, ताकि आपसी मशविरे और मुनासिब तंजीमी कार्रवाई के बाद संगठन के विस्तार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।

ख़ास हिदायत: तंजीम में ओहदा हासिल करना असल मक़सद नहीं, बल्कि उस ओहदे के ज़रिये बिरादरी की ख़िदमत करना ही सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी है। लिहाज़ा ऐसे ही संजीदा, बा-अख़लाक़, ज़िम्मेदार और अमली तौर पर सक्रिय हज़रात आगे आएं, जो तंजीम के उसूलों के मुताबिक अपनी ज़िम्मेदारियां निभाने की सलाहियत रखते हों।

गांव-गांव तक पहुंचेगा इत्तेहाद, तालीम और तरक़्क़ी का पैग़ाम

इस तौसीई मंसूबे का मक़सद सिर्फ़ जिला और तहसील स्तर पर ओहदेदार मुक़र्रर करना नहीं, बल्कि एक ऐसा मुनज़्ज़म और मज़बूत तंजीमी नेटवर्क तैयार करना है, जिसकी पहुंच बिरादरी के हर शहर, नगर, ब्लॉक, कस्बे और गांव तक हो।

आने वाले मरहलों में ग्राम पंचायत स्तर पर भी समाज के बा-अमल नुमाइंदों को जोड़ने की तजवीज़ है, ताकि बिरादरी के मसाइल को मुनासिब प्लेटफॉर्म पर उठाया जा सके और तालीम, रोज़गार, समाजी इस्लाह, बाहमी इमदाद तथा नौजवानों की रहनुमाई जैसे अहम मौज़ूआत पर कारगर काम किया जा सके।

तंजीम का पैग़ाम बिल्कुल साफ़ है कि बिरादरी की तरक़्क़ी के लिए इत्तेहाद, तालीम, तंजीम और अमली जद्दोजहद बेहद ज़रूरी है। जब समाज के संजीदा और सलाहियत रखने वाले अफ़राद एक प्लेटफॉर्म पर जमा होंगे, तभी आने वाली नस्लों के लिए एक बेहतर और मज़बूत रास्ता हमवार किया जा सकेगा।

पांच जिलों की 20 तहसीलों से शुरू होने वाली यह पहल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी को एक मज़बूत क़ौमी प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में अहम पेशरफ़्त साबित हो सकती है।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से पंजीकृत क़ौमी समाचार माध्यम की ख़ास रिपोर्ट

मुल्क की राजधानी नई दिल्ली से प्रसारित, पैदायशी इंजीनियर मुस्लिम मुल्तानी लोहार (बढ़ई) बिरादरी की मुल्क की इकलौती क़ौमी समाचार पत्रिका, न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल "मुल्तानी समाज" के लिए उत्तर प्रदेश डेस्क से प्रधान संपादक ज़मीर आलम की ख़ास रिपोर्ट।

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